| CIRCULAR, ONLINE, TRANSFERS : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान एवं अध्यापकों के ऑनलाईन स्थानान्तरण हेतु सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में । Posted: 01 Aug 2020 11:39 PM PDT CIRCULAR, ONLINE, TRANSFERS : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान एवं अध्यापकों के ऑनलाईन स्थानान्तरण हेतु सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में ।
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| MAN KI BAAT : शिक्षा नीति 2020 पांचवीं तक मातृभाषा में पढ़ाई, पांचवीं के बाद कौन सी भाषा माध्यम बनेगी इसकी जानकारी....... दैनिक दिशेरा सम्पादकीय Posted: 01 Aug 2020 10:20 PM PDT MAN KI BAAT : शिक्षा नीति 2020 पांचवीं तक मातृभाषा में पढ़ाई, पांचवीं के बाद कौन सी भाषा माध्यम बनेगी इसकी जानकारी....... दैनिक दिशेरा सम्पादकीय
शिक्षा नीति 2020 : पांचवीं तक मातृभाषा में पढ़ाई
केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है । 34 वर्ष पुरानी नीति में काफी बड़े बदलाव किए गए हैं । परिवर्तन प्राकृति का नियम है और बदलते समय के अनुसार परिवर्तन होने जरूरी भी हैं । किसी भी नीति की सार्थकता उसकी उपयोगिता के साथ जुड़ी होती है । जो नीति समय की आवश्यकताओं को पूरी नहीं करती उसमें बदलाव जरूरी है । जहां तक शिक्षा नीति में नए बदलाव करने का संबंध है इसमें पांचवी तक की शिक्षा मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में देने का प्रस्ताव है , मातृ भाषा का मामला बेहद पेचीदा है । भले ही सरकार ने मातृ भाषा की महत्वता को स्वीकार किया है लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का एक हिस्सा मातृ भाषा को ग्रेजुएट स्तर तक माध्यम बनाने का समर्थन करता है । कई राज्यों में ग्रैजुएट स्तर तक राज्य की क्षेत्रीय भाषा को माध्यम बनाया गया है । दूसरी तरफ इस तथ्य पर भी विचार करना होगा कि पांचवीं के बाद किसी अन्य भाषा को माध्याम बनाना कितना उपयुक्त रहेगा ? पांचवीं के बाद कौन सी भाषा माध्यम बनेगी इसकी जानकारी भी अभी सामने आनी है । देश के बंटवारे के समय से ही भाषा के मामले को लेकर विवाद चलता आया है । भाषा के मामले को भाषा वैज्ञानिक नजरिए से निपटाने की आवश्यकता है । भाषा के मामले में अवैज्ञानिक धारणाओं से बचना होगा । नई शिक्षा नीति में सरकार ने पेपरों के मूल्यांकन के दायरे को बढ़ाया है । विद्यार्थियों और उसके साथियों को भी शामिल किया है । यह भी देखना होगा कि इस तरह की प्रक्रिया कितनी लम्बी होती है । सरकार ने शिक्षा को रोजगार प्रमुख बनाने पर बल दिया है जो समय की आवश्यकता है । छठी कक्षा से वोकेशनल शिक्षा शुरू की जाएगी । मौजूदा समय में वोकेशनल शिक्षा के लिए आई . टी.आई. में दसवीं के बाद दाखिला लेना पड़ता है ।
निरूसंदेह शिक्षा को पेशेवर बनाना जरूरी है , ताकि दसवीं के बाद स्कूल छोड़ने पर विद्यार्थी कोई न कोई कौशल प्राप्त कर रोटी कमाने के योग्य बन सके । उच्च शिक्षा के मामले में एमफिल की डिग्री खत्म करना भी सही निर्णय है । एमए और पीएचडी के बीच अध्ययन के लिए किसी अलग डिग्री का कोई आधार नहीं रह जाता । जहां तक विज्ञान और कला वर्ग में अंतर खत्म करना है यह विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए विषय चयन की आजादी देता है । शिक्षा नीति में बड़े परिवर्तन किए गए , लेकिन इसे लागू करने के लिए इसकी व्यवहारिकता को समझना जरूरी है । कम से कम भाषा के मामले में क्षेत्रीय भाषाओं का मामला महत्वपूर्ण है ।  |
| MDM : मिड-डे मील में अब नाश्ता भी शामिल, 11 करोड़ बच्चों को मिलेगा गरम पौष्टिक भोजन या फिर मूंगफली, गुड़ व चना Posted: 01 Aug 2020 07:48 PM PDT MDM : मिड-डे मील में अब नाश्ता भी शामिल, 11 करोड़ बच्चों को मिलेगा गरम पौष्टिक भोजन या फिर मूंगफली, गुड़ व चना
इसी सत्र से स्कूल खुलने पर 11.59 करोड़ छात्रों को मिलेगा मिड-डे मील में नाश्ता
नई दिल्ली। देश के 11.59 करोड़ छात्रों को मिड-डे मील में अब नाश्ता भी मिलेगा। स्कूल खुलने पर इसी सत्र से नाश्ते में पका हुआ गरम पौष्टिक भोजन या फिर मूंगफली, गुड़ व चना मिल सकता है। इसके अलावा बच्चों को अब स्थानीय मौसमी फल भी दिया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए दोपहर के भोजन के साथ-साथ अब नाश्ता भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है। मोदी सरकार 2016 से इस दिशा में काम कर रही थी। एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया था कि 30 से 40 फीसदी से अधिक बच्चे इसलिए स्कूल जाते हैं, ताकि उन्हें दोपहर का भोजन मिल सके। इसी के चलते नाश्ता शामिल करने की योजना तैयार हुई। क्योंकि इसी रिपोर्ट में सामने आया था कि यह बच्चे पौष्टिक आहार न मिलने से कुपोषण के शिकार होते हैं। इसलिए नाश्ते में पौष्टिक आहार को शामिल किया जा रहा है।
नाश्ते के इस मैन्यू में राज्य सरकार चाहें तो बदलाव कर सकती हैं। इस बदलाव में ओर अधिक आइटम जुड़ सकते हैं। राज्य चाहें तो उन्हें दूध, अंडा या कुछ औरर भी शामिल करने का अधिकार होगा। इससे पहले 2016 में शिक्षा मंत्रालय ने एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने भी सरकार को सुझाव दिया गया था कि नाश्ता शामिल होना चाहिए। इसमें दूध या अंडा जरूरी है।  |
| ANGANBADI : प्रदेश सरकार ने 62 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त करने का फैसला किया Posted: 01 Aug 2020 06:19 PM PDT ANGANBADI : प्रदेश सरकार ने 62 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त करने का फैसला किया
लखनऊ । प्रदेश सरकार ने 62 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त करने का फैसला किया है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के क्रियाकलापों की जांच भी कराई जाएगी। शासन को लगातार यह शिकायत मिल रही है कि सरकार के दिशा-निर्देश के विपरीत अब भी 62 वर्ष से अधिक आयु की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सेवा ली जा रही है और उनको मानदेय दिया जा रहा है।
जिसे शासन ने वित्तीय अनियमितता माना है। दरअसल, प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) विभाग द्वारा बच्चों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन सभी कार्यक्रमों को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन भी उपलब्ध कराया गया है। लेकिन, विभागीय समीक्षा में यह पाया गया है कि बहुत से आंगनबाड़ी केंद्रों का न तो संचालन किया जा रहा है और न ही पोषाहार वितरण से संबंधित नियमित रिपोर्ट ही उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए स्मार्ट फोन का भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया के संबंध में 4 सितंबर-2012 में जारी शासनादेश का भी उल्लंघन किया जा रहा है। शासनादेश में पहले से है रोक की बात शासनादेश के जरिये 62 साल से अधिक आयु वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ड्यूटी दिए जाने पर रोक है। इसके बावजूद प्रदेश में 1.88 लाख 259 में से करीब 25 प्रतिशत ड्यूटी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसी है जिनकी आयु 62 वर्ष से अधिक है। शासन ने 62 वर्ष से अधिक आयु वाली कार्यकर्ताओं से ड्यूटी कराने और उन्हें मानदेय दिए जाने को वित्त्तीय अनियमितता माना है। इसी कड़ी में बाल विकास सेवा एवं पोषाहार विभाग की विशेष सचिव गरिमा यादव ने निदेशक आईसीडीएस को 62 साल से अधिक आयु वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त करने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के क्रियाकलापों की जांच के निर्देश दिए हैं।  |
| SHIKSHAK BHARTI : 68500 भर्ती मामले में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी तलब, 13 अगस्त को कोर्ट में हाजिरी का फरमान Posted: 01 Aug 2020 06:18 PM PDT SHIKSHAK BHARTI : 68500 भर्ती मामले में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी तलब, 13 अगस्त को कोर्ट में हाजिरी का फरमान
68500 सहायक अध्यापक भर्ती में पांच सौ उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का परिणाम घोषित न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिल भूषण चतुर्वेदी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज को अवमानना का नोटिस जारी कर 13 अगस्त को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने राम प्रवेश यादव की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा ने बहस की। कोर्ट ने 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में 500 कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन कर तीन माह में परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया था। अक्तूबर 19 में दिए गए आदेश के नौ महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया तो यह अवमानना याचिका दाखिल की गई है।  |
| ANGANBADI : नई शिक्षा नीति में नर्सरी से दूसरी कक्षा में बच्चों को फिर से पंचतंत्र की कहानियां सुनने को मिलेंगी देखें Posted: 01 Aug 2020 06:14 PM PDT ANGANBADI : नई शिक्षा नीति में नर्सरी से दूसरी कक्षा में बच्चों को फिर से पंचतंत्र की कहानियां सुनने को मिलेंगी देखें
नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में नर्सरी से दूसरी कक्षा में बच्चों को फिर से पंचतंत्र की कहानियां सुनने को मिलेंगी। फाउंडेशन वर्ग में बच्चों को दादी, नानी की वो सब किस्से कहानियां और सीख नए ढंग से पाठ्यक्रम में मिलेंगी। इसमें बच्चों को खेल खेल में बुजुर्गों व बड़ों का सम्मान करना, छोटों से प्रेम, पर्यावरण को बचाना, देशभक्ति, धैर्य, क्षमा, करुणा, लैंगिक संवेदनशीलता, स्वतंत्रता आदि के बारे में सिखाया जाएगा।  हालांकि तीसरी से आठवीं कक्षा तक इन विषयों को किताबी पाठ्यक्रम में विस्तार से समझाया जाएगा। इसमें मानसिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, शराब व तंबाकू या मादक पदार्थों का नुकसान, विपरीत प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय संविधान के कुछ अंश शामिल होंगे, जिसकी पढ़ाई अनिवार्य रहेगी।
अभिभावक बनेंगे बच्चों के शिक्षक :- फाउंडेशन वर्ग में नर्सरी, केजी, अपर केजी, पहली और दूसरी कक्षा में बच्चों को सीखाने की जिम्मेदारी सिर्फ शिक्षक की ही नहीं होगी। इसमें अभिभावकों को भी जोड़ा जाएगा। पहली बार अभिभावकों की भी जिम्मेदारी तय होगी। इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए किताबी पाठ्यक्रम की बजाय खेल खेल में सीखाने पर फोकस होगा। एनसीईआरटी प्री-स्कूल के लिए फाउंडेशन वर्ग का विशेष पाठ्यक्रम जब बनाएगा तो उसमें अभिभावकों के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा।  |