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- SCHOOL : 5वीं तक निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम बंद एवं पहली व दूसरी क्लास में बच्चों को खेल
- APPOINTMENT, TEACHER, POLICY, SHIKSHA NEETI : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : अब कैसे बनेंगे टीचर? TET पर क्या होगा पॉलिसी का असर? जानें
- ANGANBADI : आंगनबाड़ी कर्मियों को करना होगा डिप्लोमा, नई शिक्षा नीति में प्री प्राइमरी शिक्षक कैडर तैयार करने पर दिया गया है जोर
| SCHOOL : 5वीं तक निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम बंद एवं पहली व दूसरी क्लास में बच्चों को खेल Posted: 03 Aug 2020 11:22 PM PDT SCHOOL : 5वीं तक निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम बंद एवं पहली व दूसरी क्लास में बच्चों को खेल नई शिक्षा नीति 5वीं तक निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम बंद नई दिल्ली. केंद्रीय मानव संसाधन सचिव अमित खरे ने स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति में पांचवीं तक अंग्रेजी मीडियम बंद करने का फैसला प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू होगा। पत्रकार' के साथ विशेष बातचीत में खरे ने इस नीति से संबंधित उलझनों को) दूर किया। नई शिक्षा नीति का आम छात्रों और अभिभावक पर क्या प्रभाव होगा? जवाब : पहली क्लास से पहले स्कूल-पूर्व शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। अभी जो व्यवस्था है कि साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स की व्यवस्था है, वह खत्म हो जाएगी। अभी अगर 3 साल की डिग्री है और किसी कारणवश पौने तीन साल में पढ़ाई छोड़नी पड़ी तो कुछ नहीं मिलता। लेकिन अब मल्टीपल एंट्री-एक्जिट की व्यवस्था होगी। क्या अब स्कूल की पढ़ाई पूरी करने में 15 साल लगेंगे? जवाब : नई नीति के निर्धारण के लिए बनाई गई समिति की अध्यक्षता कस्तूरीरंगन कर रहे थे। देश और विदेश के कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। सभी का कहना है कि बच्चों की सीखने की शक्ति का विकास शुरुआती 5 से 8 साल में सबसे ज्यादा होता है, इसलिए अब पहली क्लास से भी पहले तीन वर्ष की प्री स्कूल की पढ़ाई शामिल की गई है। इस दौरान और पहली व दूसरी क्लास में बच्चों को खेल-खेल में ही सब कुछ सिखाया जाएगा। |
| Posted: 03 Aug 2020 11:18 PM PDT APPOINTMENT, TEACHER, POLICY, SHIKSHA NEETI : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : अब कैसे बनेंगे टीचर? TET पर क्या होगा पॉलिसी का असर? जानें नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की गुणवत्ता का स्तर और ऊपर उठाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। नई स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के स्वरूप में भी बदलाव होंगे। अभी तक टीईटी परीक्षा दो हिस्सों में बंटी हुई थी- पार्ट 1 और पार्ट 2। लेकिन अब स्कूली शिक्षा व्यवस्था का स्ट्रक्चर चार हिस्सों में बंटा होगा - फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडल और सेकेंडरी। इसी के मुताबिक टीईटी का पैटर्न भी सेट किया जाएगा। विषय शिक्षकों की भर्ती के समय टीईटी या संबंधित सब्जेक्ट में एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक किया जा सकता है। सभी विषयों की परीक्षाएं और एक कॉमन एप्टीट्यूट टेस्ट का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करेगा। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, जो उम्मीदवार टीईटी पास करेंगे, उन्हें एक डेमोस्ट्रेशन या इंटरव्यू देकर स्थानीय भाषा में अपना ज्ञान दिखाना होगा। नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब इंटरव्यू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होगा। इंटरव्यू में देखा जाएगा कि शिक्षक क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को आसानी और सहजता के साथ पढ़ाने के काबिल है या नहीं। टीईटी पास करने के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी यह शिक्षकों की भर्ती के लिए अनिवार्य होगा। स्कलों में शिक्षकों की भर्ती और वैकेंसी का ब्योरा डिजिटली मैनेज होगा। शिक्षकों की भर्ती को लेकर एक विस्तृत योजना बनेगी। बीएड में बदलाव नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय बीएड डिग्री साल 2030 से न्यूनतम क्वालिफिकेशन होगी। निम्न स्तर के शिक्षण शिक्षा संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नई शिक्षा नीति के दस्तावेज के अनुसार साल 2022 तक राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) शिक्षकों के लिए एक साझा राष्ट्रीय पेशेवर मानक तैयार करेगी। इसके लिए एनसीईआरटी, एससीईआरटी, शिक्षकों और सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञ संगठनों के साथ परामर्श किया जाएगा। शिक्षकों का प्रमोशन पेशेवर मानकों की समीक्षा एवं संशोधन 2030 में होगा और इसके बाद प्रत्येक 10 वर्ष में होगा। दस्तावेज में कहा गया है कि शिक्षकों को पारदर्शी प्रक्रिया के जरिये भर्ती किया जाएगा। पदोन्नति योग्यता आधारित होगी। समय-समय पर कार्य-प्रदर्शन का आकलन के आधार पर शैक्षणिक प्रशासक बनने की व्यवस्था होगी। |
| Posted: 03 Aug 2020 11:16 PM PDT ANGANBADI : आंगनबाड़ी कर्मियों को करना होगा डिप्लोमा, नई शिक्षा नीति में प्री प्राइमरी शिक्षक कैडर तैयार करने पर दिया गया है जोर ● इंटर व अधिक शिक्षित के लिए होगा छह माह का कोर्स सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होने के साथ बेसिक स्तर के शिक्षक और आंगनबाड़ी कर्मियों को भी छह महीने और एक साल की विशेष प्रशिक्षण लेने होंगे। 12 वीं और इससे उच्च स्तर पर शिक्षकों को केवल छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स करना होगा। जबकि इससे कम शिक्षा वाली आंगनबाड़ी कर्मियों को एक साल डिप्लोमा कोर्स कराया जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसका प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्री प्राइमरी शिक्षकों को शुरूआती कैडर तैयार हो सकेगा। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्रस्तावित तीन भाषा के प्रावधान को खारिज कर दिया है।मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने सोमवार को कहा कि राज्य में केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार अपनी दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) की नीति पर कायम रहेगी। |
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