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Sunday, August 2, 2020

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तक्षशिला, शल्यचिकित्सक जीवक और आधुनिक शिक्षा

Posted: 01 Aug 2020 11:53 PM PDT

तक्षशिला, शल्यचिकित्सक जीवक और आधुनिक शिक्षा

[हमारी शिक्षा और व्यवस्था] 
संकलन अश्विनी कुमार तिवारी

विचारधाराओं के मकडजाल ने हालात यह कर दिये हैं कि आप पुरातन उपलब्धियों की बात करेंगे तो हँसी के पात्र बना दिये जायेंगे। विचार के ठेकेदारों के पास अपने अपने कटाक्ष हैं किंतु उनसे विवेचना की उम्मीद मत रखिये। एक समय का गौरवशाली तक्षशिला विश्वविद्यालय इस समय पाकिस्तान में है। अतीत पर आधारित एक उपन्यास लिख रहा हूँ अत: तक्षशिला पर केंद्रित अनेक जानकारियों से दो-चार हुआ। प्राचीन शास्त्रों, बौद्ध तथा जैन ग्रंथों में इस विश्वविद्यालय तथा उसके गौरव की जानकारी प्राप्त होती ही है साथ ही अनेक विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके कार्यों को हम मिथक मान कर भुलाने लगे हैं। तक्षशिला के ऐसे ही एक विद्यार्थी जीवक की चर्चा आवश्यक है जिसने कालांतर में भगवान बुद्ध के बौद्ध संघ में चिकित्सा का दायित्व उठाया एवं तथागत का उपचार करने का गौरव भी उन्हें प्राप्त हुआ था। कतिपय ग्रंथ जीवक को वैशाली की चर्चित नगरवधु आम्रपाली का तो कुछ मगध की जनपदकल्याणी शालवती का परित्यक्त पुत्र मानते हैं जिसका जीवन मगध के युवराज अजातशत्रु  ने बचाया तथा कालांतर में अध्ययन के प्रति उनकी ललक से प्रभावित हो कर सम्राट बिम्बिसार से तक्षशिला अध्ययन के लिये भेजा था। 

उस समय, भारतवरर्ष के पश्चिमीछोर पर अवस्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय में दस हजार से अधिक विद्यार्थी, विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में विद्याध्ययन करते थे। किशोरवय के विध्यार्थी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित होने वाले विभिन्न गुरुकुलों में प्रवेश करते और अध्ययन समाप्त करने के पश्चात ली जाने वाली परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने अपने जनपदों में लौट जाया करते थे। विश्वविध्यालय में विशिष्ठ एवं उच्चस्तरीय अध्ययन की व्यवस्था थी, प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी प्राथमिक शिक्षा अपने जनपद के गुरुकुलों अथवा आचार्य से प्राप्त कर यहाँ पहुँचते थे। प्रत्येक विद्यार्थी जिसे विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त हुआ, वह राजा और रंक के विभेद से अवमुक्त था। धर्मशास्त्रों के अतिरिक्त आयुर्वेद, धनुर्वेद, हस्तिविद्या, त्रयी, व्याकरण, दर्शनशास्त्र, गणित, ज्योतिष, गणना, संख्यानक, वाणिज्य, सर्पविद्या, तंत्रशास्त्र, संगीत, नृत्य, चित्रकला, विधिशास्त्र आदि विषयों के अध्येता तक्षशिला में समुपस्थित थे। जीवक ने चिकित्साशास्त्र के चर्चित आचार्य आत्रेय का शिष्यत्व ग्रहण किया। अध्ययन का समापन हुआ तब आचार्य ने जीवक से कहा कि तक्षशिला में सर्वत्र भ्रमण करो और मेरे पास ऐसी वनस्पतियों को ले कर आओ जिनका उपयोग किसी भी औषधि के रूप में नहीं हो सकता है। जीवक कई दिनो भटकता रहा और निराश होकर अपने गुरु के पास लौट आया। उसे ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली थी। जीवक अपने अध्ययन के प्रति चिंतित हुआ चूंकि उसके साथी विद्यार्थी थैलियाँ भर भर कर वनस्पति ले कर गुरु के सम्मुख पहुँचे थे। एक विद्यार्थी तो बैलगाडी भर कर ऐसी वनस्पतियों को लाया था जिनका प्रयोग किसी औषधि के रूप में नहीं होता। आत्रेय ने अन्य विद्यार्थियों को छोड कर जीवक को कण्ठ से लगा लिया और कहा कि जाओ तुम्हारी शिक्षा पूरी हुई, अब जगत का कल्याण करो। जगत का कल्याण करना कभी शिक्षा का उद्देश्य और शिक्षितों का कर्तव्य हुआ करता था।   

तक्षशिला से मगध की ओर लौटते हुए जीवक अपने अर्जित ज्ञान का प्रयोग किसी रोगी पर करना चाहता था। साकेत नगरी में उसे एक धनी श्रेष्ठी की पत्नी के विषय में ज्ञात हुआ कि सिरोरोग से बहुत लम्बे समय से पीडित है। जीवक स्वयं श्रेष्ठी से मिला और नि:शुल्क उपचार करने का उसे प्रस्ताव दिया। घृत में उसने अनेक ऐसी जडीबूटियों को सम्मिश्रित कर पकाया, जिसकी जानकारी अपने शोध से ज्ञात हुई थी। जीवक ने स्त्री को उतान लेटने के लिये कहा तथा नासाछिद्रों से औषधि डालने लगे। औषधियुक्त घृत कुछ देर में मुख से बाहर आने लगा। कुछ ही देर में स्त्री को अपने कठिन रोग से मुक्ति मिला गयी। वैद्य के रूप में जीवक की ख्याति यहाँ से ही आरम्भ हुई। ग्रंथों में जीवक के द्वारा सम्राट बिम्बिसार के भगंदर रोग, अवंति के राजा प्रद्योत के पाण्डु रोग आदि का उपचार करने  का उल्लेख भी मिलता है। जीवक एक कुशल शल्य चिकित्सक बने। अनेक ऐसे कारण हैं जिसके लिये शल्य चिकिता के क्षेत्र में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा गया। उन्होंने वाराणसी जा कर मोख्चिका से पीडित एक रोगी की शल्य चिकित्सा की थी। वह ठीक से न तो भोजन कर पाता था न ही मल-मूत्र का निष्कासन सहजता से हो रहा था। जीवक ने उदर भाग में शल्य कर रोगी की उलझी हुई अंतडियों को खोल दिया था।

जीवक की चिकित्सा का तरीका उनकी बुद्धिमत्ता तथा प्रयोग दक्षता की ओर इशारा करता है। एक चर्चित उदाहरण है जब राजगृह का एक श्रेष्ठि उनके पास उपचार के लिये आया। वह  भयावह सिरदर्द से पीडित था। एक वैद्य के पास गया तो उसने कहा कि परिजनों को बुला लें छ: दिन बाद मृत्यु हो जायेगी। वह दूसरे वैद्य के पास गया तो जांच के पश्चात उसने चार दिनों में मृत्यु हो जाने की बात कही। भयभीत श्रेष्ठि को जीवक के विषय में जानकारी हुई। जीवक ने परीक्षण किया और कहा कि ठीक हो जाओगे लेकिन शल्यचिकित्सा करनी होगी। इसके उपरांत फिर सात मास तक दाहिने करवट अलगे सात माह तक बायें करवट तथा फिर सात माह उतान लेटे रहना होगा। श्रेष्ठि जीवन बचाने के लिये तैयार हो गया। जीवक ने उसे औषधि युक्त मदिरा पिलाई फिर चिकित्सा-शैया पर बांध दिया। अब उसने सिर की त्वचा को काट कर कपाल में कुछ औजार डाले और दो कीडे जीवित अवस्था में बाहर निकले। उसने बताया कि यदि मष्तिष्क में ये कीडे काट लेते तो मृत्यु निश्चित थी। अब बारी श्रेष्ठि को विभिन्न अवस्थाओं में विश्राम प्रदान करने की थी। परंतु वह सात दिवस में ही बेचैन हो उठा और अलगी करवट की जिद करने लगा। जीवक ने उसके अगले सात दिनो बाद उतान अवस्था में ला दिया और इक्कीसवे दिवस कहा कि अब आप पूरी तरह स्वस्थ हो।....लेकिन इक्कीस माह के स्थान पर केवल इक्कीस दिन? यही उस श्रेष्ठि का भी प्रश्न था। इसपर जीवक ने कहा कि विश्राम के लिये विभिन्न अवस्थाओं में इक्कीस दिवस की अवधि ही चाहिये थी। यदि वह पहले ही इक्कीस दिवस पता देता तो संभव है श्रेष्ठी को चार दिनों में ही बेचैनी होने लगती। यही किसी भी मरीज का सामान्य मनोविज्ञान है। 

जीवक का यह उदाहरण इसलिये कि आधुनिक चिकित्सा शास्त्र, इतिहास के इन पन्नों से किनारा कर आगे निकल गया है। मॉडर्न साईंस को यह बताते हुए शर्म आती है कि प्लास्टिक सर्जरी का तौर-तरीका ऐसे ही किसी जीवक के माध्यम से कथित सभ्य समाज के हाथो लगा था। हम मानसिक गुलाम लोगों के लिये प्राचीन ज्ञान, प्राचीन शिक्षापद्यति, प्राचीन अंवेषण, प्राचीन चिकित्सा पद्यति अदि मिथक हैं, हास्यास्पद हैं। हम साईंस के आगे मॉडर्न लगा कर, शिक्षा प्रणाली के आगे आधुनिक लगा कर और सोच के प्रत्यय में प्रगतिशील जोड कर इतिश्री कर लेते हैं। जीवक का उदाहरण हमारे आगे प्रश्नचिन्ह है कि शल्यचिकिता के जनक देश में क्यों चिकित्सा का विज्ञान अब आयातित करना पड रहा है? हमारी शिक्षाप्रणाली में ही कोई चूक रही होगी न? [अगली कड़ी में जारी........]

सुश्रुत, शक्यक्रिया और  विमर्श
[हमारी शिक्षा और व्यवस्था, आलेख –  6] 
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छठी सदी ईसापूर्व से पहले का वह व्यक्ति शरीर की एक-एक सूक्षमता को समझने और समझाने के लिये  इस तरह प्रतिबद्ध था कि अपने अनुसंधान के लिये लावारिस शवों की तलाश में रहता था। उसके छात्र मृत शरीर की प्रप्ति होने के पश्चात पहले उसका निरीक्षण करते तथा फिर बहते हुए पानी में घास-फूस उपर से डाल कर रख दिया करते जिससे कुछ समय बाद बाह्य-चर्म निकालने में सुविधा हो और भीतरी अंग-प्रत्यंग का अन्वेषण-परीक्षण किया जा सके। परम्परावादी समाज क्या ऐसे शोधकर्ताओं को सजता से स्वीकार कर सकता था? बहुत कम लोग सुश्रुत को जानते हैं जिन्हें वैश्विक दृष्टिकोण से चिकित्सा विज्ञान का जनक कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं है। अन्वेषक और शिक्षक ही तो था सुश्रुत, धनवंतरी की परम्परा का यह काशी निवासी वैद्य चाहता तो परिपाटी पर चलता हुआ अब तक अर्जित पादप-बूटियों के ज्ञान से सम्पन्नता पूर्वक जीवन जी सकता था। तत्कालीन समाज में शव की चीरफाड करना कोई सम्मानजनक कार्य तो हर्गिज नहीं कहलाता होगा। विश्वामित्र का वंशज कहे जाने वाले सुश्रुत के लिये क्या तब सामाजिक बहिष्कार अथवा अस्पृष्य माने जाने की चुनौती नहीं रही होगी? विवरण मिलता है कि अपने छात्रों को पहले फलों पर शल्य करने का अभ्यास कराने के पश्चात सुश्रुत उन्हें शवों पर प्रयोग करने के लिये प्रेरित करते थे। 

सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा के अपने सम्पूर्ण ज्ञान को स-विस्तार संस्कृत भाषा में पुस्तकाकार दिया जिसे आज हम सुश्रुत संहिता के नाम से जानते हैं। पाँच खण्डों में विभक्त इस कृति में एकसौबीस अध्याय हैं साथ ही उत्तरतंत्र नाम से इसमें परिशिष्ठ सम्मिलित किया गया है जिसके अंतर्गत काय चिकित्सा के सढसठ पृथक अध्याय हैं। सुश्रुत संहिता में वर्णित कुछ शल्य चिकित्सा में प्रयोग आने वाले औजारों का विवरण महत्वपूर्ण है। इस श्रेणी में चौबीस प्रकार के स्वास्तिक यंत्र (पक्षियों की मुखाकृति के क्रोस प्रवृत्ति/आकार के औजार) प्राथमिकता से आते हैं जो शल्य प्रक्रिया के दौरान पकड हासिल करने तथा टूटी हड्डियों को निकालने, अंग-भागों को पृथक करने के कार्य में लिये जाते थे। कौवे की चोच जैसा स्वास्तिक यंत्र काकमुख इसी तरह सिंहमुख, व्याघ्रमुख, मार्जा मुख, गृद्धमुख श्रेणी के औजार निर्मित किये जाते थे। दो प्रकार के संदंश यंत्रों का विवरण है जिनसे शल्य प्रक्रिया के दौरान शरीर की त्वचा अथवा मा6स आदि को निकाला जाता था। दो प्रकार के तालयंत्र निर्मित किये गये थे जिनका प्रयोग नाक तथा कान की शल्यक्रिया के लिये किया जाता था। इसी कडी में बीस प्रकार के नलीयुक्त नाडीयंत्र, अट्ठाईस प्रकार के शलाकायंत्र (सलाई की तरह के औजार जो मांस आदि को कुरेदने/छेदन करने के कार्य में आते थे), पच्चीस प्रकार के उपयंत्रों का भी विवरण मिलता है जिनका शल्य क्रिया के दौरान विविध प्रयोग किया जाता था। हड्डी अथवा मांस को काटने के लिये सुश्रुत ने बीस प्रकार के धारदार शस्त्रों का उल्लेख अपने शास्त्र में किया है। शल्य चिकित्सा ज्ञान को प्राचीन भारत में जो ऊँचाई प्राप्त हुई थी इसका अनुमान इस बात से ही लग जाता है कि सूक्ष्म चिकित्सा के लिये बांस, बाल, पशुओं के नाखून आदि से अनेक अनुशस्त्र भी उस दौर में निर्मित किये जाते थे। भारतीय होने के कारण आज आप गर्व कर सकते हैं कि दुनिया के किसी भी बडे से बडे अस्पताल के ऑपरेशन टेबल पर पड़े औजार सुश्रुत के बताये और डिजाईन किये गये औजारों की ही नकल हैं। 

औजार ही नहीं अपितु शल्य चिकित्सा के प्रकारों का भी जितना सूक्ष्म वर्णन सुश्रुत संहिता में प्राप्त होता है वह आधुनिक मेडीकल साईंस की पुस्तकों के समक्ष भी आईना रखने में सक्षम है। सुश्रुत आठ प्रकार की शल्य चिकित्सा के विषय में बताते हैं अर्थात छेद्य (छिद्र करने के लिये), भेद्य (भेदन करने के लिये), लेख्य (पृथक करने के लिये), वेध्य (शरीर से हानिकारक द्रव्य बाहर निकालने के लिए), ऐष्य (घाव ढूंढने के लिए), अहार्य (शरीर की हानिकारक उत्पत्तियों को निकालने के लिए), विश्रव्य (द्रव बाहर निकालने के लिए) तथा  सीव्य (घाव/चीरा आदि सिलने के लिए)। इतना ही नहीं उन्होंने सूत, सन, रेशम, बाल आदि का प्रयोग कर घाव/चीरा आदि को न केवल सिलने की सलाह दी है अपितु पट्टी बाँधने के लिए सन, ऊन, रेशम, कपास, पेड़ों की छाल आदि का प्रयोग बताया है। सुश्रुत संक्रमण के जानकारी भी रखते थे अत: चिकित्सा के दौरान एवं रोगी की साफ-सफाई पर वे विस्तार से अपने ग्रंथ में बात करते हैं। वे कृति में चिकित्सक की आवश्यकता क्यों है का राजा को बोध भी कराते हैं तथा अधिकाधिक व्रणितागार (अस्पताल के लिये संहिता में प्रयुक्त शब्द) निर्माण का सुझाव भी प्रदान करते हैं। सुश्रुत आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी के जनक माने जाते हैं। सुश्रुत संहिता में अनेक ऐसे विवरण प्राप्त होते हैं जिनमें नाक, कान, होंठ के साथ साथ शरीर के विभिन्न अंगों का प्रत्यावर्तन अथवा प्ला स्टिक सर्जरी किये जाने का उल्लेख मिलता है। उस दौर में शल्य चिकित्सा करते हुए रोगी को एनेस्थीसिया देने (प्राय: औषधियुक्त मदिरा) का भी प्रावधान था। 

बहुत ध्यान से विश्लेषित कीजिये सुश्रुत को, क्योंकि जब आप कहेंगे कि विश्व को आधुनिक चिकित्सा भारत वर्ष की देन है तो अनेक भांति के तर्क ऐसे ही सामने आ जायेंगे जैसे कि महाभारतकाल और रामायण  काल के कतिपय संदर्भों का उल्लेख करने पर मखौल उभरते हैं। सुश्रुत जैसे अतीत के कतिपय उदाहरणों से क्या यह सिद्ध नहीं होता कि उस दौर में मौलिकता अधिक थी, समर्पण अधिक था, विमर्श अधिक था, दिशा सही थी और शिक्षा का तौर-तरीका अनुकरनीय था? क्या यह दु:खद नहीं कि वर्तमान पीढी को सुश्रुत इसलिये अल्पज्ञात हैं चूंकि हमारी पाठ्यपुस्तकें मैकाले से आगे नही सोचती? [अगली कड़ी में जारी........]

अगस्त्य की बिजली, विप्लवदेव का इंटरनेट और अनर्थशास्त्र
[हमारी शिक्षा और व्यवस्था, आलेख – 7] 
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भारत में चुटकुले पैदा करने वालों की नयी जमात खड़ी हो गयी है। इन लोगों को कथित प्रगतिशीलता पर गर्व है, उन सभी तर्कों के थोथेचनों को वे जेब में लिये फिरते हैं, जो घना बजते हैं। आप कहेंगे कि हमारे प्राचीन शास्त्र, शोध और पुनर्व्याख्या की आवश्यकता रखते हैं तो वे खीं खीं कहते हुए खडे हो जायेंगे कि आपके परिधान मंत्री ने गणेश से प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत कही थी या बिप्लव देव को सुना नहीं कि महाभारत के समय इंटरनेट था। इसके बाद आप विचारकों की इस जमात से गाय और गोबर भर भी उनके दृष्टिकोण का व्याख्यान सुन सकते हैं। मैं शिक्षा व्यवस्था पर खामियों की बात कर रहा था और यही सिद्ध करना चाहता हूँ कि आधुनिक पाठ्यपुस्तकों से हमने अनावश्यक तर्क करने वालों की पूरी जमात खडी कर ली है और रेखांकित कीजिये कि ये आपको वैज्ञानिक सोच देने की क्षमता हर्गिज नहीं रखते (पाठ्यपुस्तकों पर मैं आगामी आलेखों में चर्चा करूंगा)। आपकी बात ठीक है कि जॉन डालटन ने एटम की थ्योरी दी, कैपलर ने ग्रहों की गति के विषय में बताया, लेमार्क ने जीव विज्ञान की आधारशिला रखी, फैराडे ने बिजली खोजी, यूक्लिड गणित के परमपिता थे या कि राईट्स बंधुओं ने पहला हवाई जहाज उडाया। हमारे देश में कणाद से ले कर आर्यभट्ट तक विश्व के पहले-पहले निर्मित गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में लौकी छीलने का प्रशिक्षण ले रहे थे?

पहले अगस्त्य संहिता की बात करते हैं। वही महर्षि अगस्त्य जिनका उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है कि उन्होंने राम को दिव्यास्त्र प्रदान किये थे। अब मिथक करार देने से पहले, गणेश और महाभारत करने से पूर्व यह भी जाने कि वही अगस्त्य जिन्हें तमिल भाषा के व्याकरण ग्रंथ अगस्त्यम का रचयिता माना जाता है। इसे भी छोडिये फैराडे की बात करते हैं। मुझे एक विमर्श में जानकारी प्राप्त हुई कि अगस्त्य संहिता में विद्युत उप्तादन का तरीका उल्लेखित है तो भीतर से वैसे ही हँसने की इच्छा हुई जैसे हमारे महान बुद्धीजीवी अट्टाहास करते हैं कि संजय ने धृतराष्ट्र को महाभारत सुनाई थी। मुझे इंजीनियर राव साहब कृष्णाजी वझे से जुडा एक विवरण मिला जिसके अनुसार उन्हें उज्जैन में किन्हीं दामोदर त्र्यम्बक जोशी के पास अगस्त्य संहिता के कुछ पृष्ठ प्राप्त हुए थे। श्री वझे जिन्होंने कि पूना से वर्ष 1891 में अपनी इंजीनियरिंग पूरी की थी, उन्हें एक श्लोक को पढ कर लगा, यह बिजली कैसे पैदा की जाती है इस ओर इशारा है। तत्क्षण उन्होंने नागपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापक श्री पी पी होले से संपर्क किया और इस तरह उस अगस्त्य संहिता के उस एक श्लोक पर अनुसंथान प्रारम्भ हुआ जोकि था –
 
संस्थाप्य मृण्मये पात्रे, ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्। 
छादयेच्छिखिग्रीवेन, चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥ 
दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:। 
संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्॥ 

इसका अर्थ है कि पहले एक मिट्टी का पात्र (मृण्मये पात्रे) ले कर उसमें ताम्बे/ कॉपर की पट्टियाँ (ताम्रपत्रं) तथा शिखिग्रीवा डालें, फिर बीच में गीली काष्ट पांसु (काष्ठापांसुभि:) लगायें, ऊपर पारा/मर्क्यूरी (पारदाच्छादितस्तत:) तथा दस्ट लोष्ट (दस्तालोष्टो) डालें, अब  जोडे हुए तारों को मिलाएंगे तो  उससे बिजली (मित्रावरुणशक्ति) उत्पन्न होगी। विवरण पढने पर ज्ञात होता है कि श्लोक पर नागपुर में शोध कर रहे प्राध्यापक श्री होले ने सारी तैयारी कर ली लेकिन उन्हें  शिखिग्रीवा शब्द का अर्थ समझ नहीं आया। इसका  संस्कृत अर्थ है मोर की गर्दन और अगर इसी अर्थ में प्रयोग किया जाये तो क्या परिणाम निकलेंगे सोचा जा सकता है। शोधार्थी मोर की गर्दन प्राप्त करने की जुगाड़ में लगे हुए थे कि एक आयुर्वेद के आचार्य ने उनकी समस्या का समाधान किया और बताया कि शिखिग्रीवा का अर्थ मोर की गरदन नहीं अपितु उसकी गरदन के रंग जैसा पदार्थ अर्थात नीलाथोथा (कॉपरसल्फेट) है। अब इस श्लोक के आधार पर एक सेल बनाया गया। मल्टीमीटर से अनुमापन करने पर पाया गया कि इस सेल से 1.138 वोल्ट तथा 23 mA विद्युत धारा उत्पन्न हुई। आपको यह जान कर आश्चर्य अवश्य होगा कि अगस्त्य संहिता में विद्युत उत्पादन का तरीका ही नहीं, प्रकार व इसके संवर्धन की विधियाँ भी लिखी गयी हैं। यह संहिता कंडक्टर और इंसुलेटर का विभेद भी स्पष्ट करती है। 

प्रश्न उठ सकता है कि इस उदाहरण की प्रासंगिकता क्यों है? इसके उत्तर से पहले हमारी सांस्कृतिक गुलामी पर चर्चा आवश्यक है। एक प्रयोग इस तरह कर के देखें और इसके लिये आपको महाभारत युग तक पीछे नहीं बल्कि समय से बहुत आगे चलने के लिये कह रहा हूँ। आधुनिक कविता के सशक्त हस्ताक्षर माने जाने वाले कवि मंगलेश डबराल ने एक कविता भीमसेन जोशी द्वारा गाये राग दुर्गा को सुनने के बाद लिखी थी, इस कविता की आरम्भिक कुछ पंक्तिया देखें -  

एक रास्ता उस सभ्यता तक जाता था
जगह-जगह चमकते दिखते थे उसके पत्थर
जंगल में घास काटती स्त्रियों के गीत पानी की तरह
बहकर आ रहे थे
किसी चट्टान के नीचे बैठी चिड़िया
अचानक अपनी आवाज़ से चौंका जाती थी
दूर कोई लड़का बांसुरी पर बजाता था वैसे ही स्वर
एक पेड़ कोने में सिहरता खड़ा था
कमरे में थे मेरे पिता
अपनी युवावस्था में गाते सखि मोरी रूम-झूम
कहते इसे गाने से जल्दी बढ़ती है घास

अब इस कविता का विश्लेषण करने के लिये वर्ष 2050 के किसी दिन में चलते हैं। समाज बडी तरक्की कर गया है और यथार्थवादी है। वह इस कविता के बिम्बों, कल्पनाओं और निहितार्थों से इत्तेफाक नहीं रखता। वह कविता का अपने समय के अनुसार पुनर्पाठ करता है और अपने ही अर्थ गढता है। एक शोधार्थी तो रास्ता तक ढूंढ निकालता है जो जवाहरलाल विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली के बगल से निकलता था और उसे कोने में मुगल काल के कुछ पत्थर भी मिल गये थे। तराशे गये पत्थरों की पॉलिश नहीं निकली थी इसलिये वे चमकते थे। छात्र समझ नहीं पा रहा है कि नदी के किनारे किस तरह का म्यूजिक सिस्टम लगाया गया था जिससे कि किसी किनारे में घास काटने वाली औरते जब गाती थीं तो उनकी आवाज एम्प्लिफाई हो जाती थी और अभी यह सिद्ध किया जाना है कि आवाज पानी में बह कर किस तरह आ सकते हैं। साउंड पानी में ट्रेवेल करते हुए किस तरह विजिबल हुआ होगा इस टेक्लॉलोजी का पता अभी वैज्ञानिक नहीं लगा पाये हैं। यह सब कुछ एक साजिश का हिस्सा है क्योंकि गाने जब बह कर आते थे तो उसे सुन कर चिडिया डर जाती थी वह जिस तरह चिल्लाती थी उसे सुन कर एक लड़का वैसी ही आवाज बांसुरी में निकालता था। यह पक्षियों पर अत्याचार करने जैसा है और उस समय घांस काटने वाले, बांसुरी बजाने वाले लोगों ने मिल कर बायोडाईवर्सिटी का सत्यानाश कर दिया है। कविता में स्वर का सिहरना और गाने से घाँस का बढना जैसी नॉनसाईंटिफिक बाते लिखी गयी हैं जो बताती हैं कि उस युग में लोग पिछडी सोच वाले, दकियानूस और गये गुजरे थे। 

2050 का यह सम्भावित विश्लेषण कोई काल्पनिकता मान कर हँस कर मत टाल दीजियेगा क्योंकि हमने यही किया है अपनी सदियों पुरानी कविताओं के साथ। यह हमारी कमी है कि हम निहितार्थों का सही विश्लेषण नहीं कर पाते तो अकड़ कर शब्दार्थों के साथ खड़े हो जाते हैं। हम बिम्बों की विवेचना नहीं करते बल्कि स्वर का सिहरना और गाने से घाँस का बढना अमान्य करार दे कर अपनी बुद्द्धिजीविता का ढिंढोरा पीटने में लग जाते हैं। [अगली कड़ी में जारी........]
✍🏻राजीव रंजन प्रसाद, 
सम्पादक, साहित्य शिल्पी ई पत्रिका
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पूर्वाग्रह का परिणाम

Posted: 01 Aug 2020 11:50 PM PDT

पूर्वाग्रह का परिणाम 


श्रीमती उषा श्रीवास्तव 
नहीं-नहीं  सुशान्त  
तुम इतने  निर्वल 
इतने  कमजोर 
कभी  नहीं  हो सकते  ?

बिहार की आन-वाण-शान 
जिन्दगी  से  नहीं हार सकते
हारना तुम्हारी प्रवृत्ति नहीं है 
तुम ऐसा कैसे कर सकते हो  ?

तुमने अपने आत्मबल से 
कला की ऊंचाइयों  को 
छूने का संकल्प लिया था 
ऐसा नहीं  हो सकता है  ?

तुम्हारे  कृति से  हमारा 
बिहार गौरवान्वित हो रहा था 
तुम  हमारी  आशाओं  को 
धूल में कैसे  मिला सकते  ?

तुम्हारे अंदर  बिहारी मिट्टी 
की  सुगंध  धैर्यशीलता 
रग-रग में  कर्मठता 
यह किसी पूर्वाग्रह का परिणाम है  ?

मेरा सुशान्त  अपने हीं 
हाथों से अपनी  जीवन-लीला !
नहीं - नहीं  कभी नहीं 
ऐसा नहीं कर सकता  मेरे  गुदड़ी  का  लाल  ?
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जय-जय-जय संस्कृत भाषा

Posted: 01 Aug 2020 11:47 PM PDT

जय-जय-जय संस्कृत भाषा


आदि ग्रथों को देनेवाली,
भाषाओं की तुम जननी;
एक सूत्र में पिरोनेवाली-
तुम केवल ही इस अवनी!

वेद वाङ्मय पाल अंक में-
दी तुमने ऋचा को वाणी;
देवमुख से नि:सृत हो तुम-
विद्वत् जन की अभिज्ञानी!

तुमको भला विस्मृत करके-
बन सकता है कौन ज्ञानी;
आज भले तुम अप्रचलित हो-
तुमसे भाषाओं की रवानी!

समता का जो पाठ पढ़ाती -
वह कैसे विशेष की  वाणी;
समकृत जिसका रूप ही है-
उस हित ऊँच-नीच बेमानी!

उस सुसंस्कृत-भाषा की-
धुन अलख आज हम जगायें;
देश को एक में जो जोड़ती-
उसको सब मिल शीश नवायें!

पावस के इस पावन दिन में-
रक्षाबंधन माल्य एक बनायें;
मनका जिसका हो सर्वभाष्य-
संस्कृत-सूत्र में उसे पिरोयें!

तभी ग्रंथ से बाहर निकल-
होगी यह जन-जन की भाषा;
तभी कहना होगा सार्थक-
जय-जय-जय संस्कृत भाषा!

- योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे. पी. मिश्र)
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डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय बोले- मुंबई पुलिस ने सहयोग नहीं किया, उन्होंने न तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बताई, न ही सीसीटीवी फुटेज और बुनियादी सूचनाएं साझा कीं

Posted: 01 Aug 2020 11:22 PM PDT

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले को लेकर बिहार और मुंबई पुलिस के बीच खींचतान नहीं थम रही है। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि मुंबई पुलिस इस मामले में सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने न तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट हमें सौंपी, न सीसीटीवी फुटेज और न ही कोई सूचनाएं, जो अब तक जांच के दौरान सामने आईं।

डीजीपी ने कहा कि सुशांत केस बड़ी मिस्ट्री हो गई है। इससे पर्दा उठना चाहिए। इस मामले की सच्चाई जल्द सामने आनी चाहिए। बिहार पुलिस जांच के लिए सक्षम है। परिवार के लोग चाहते हैं तो सीबीआई जांच के लिए आवेदन दें। इस मामले में जिन्हें अभियुक्त बनाया गया है वे भागे-भागे फिर रहे हैं। बिहार पुलिस इतनी आसानी से इस केस को नहीं जाने देगी। हम सच्चाई सामने लाकर रहेंगे।

नीतीश ने भी कहा- पिता मांग करें तो सीबीआई जांच की सिफारिश संभव
इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा था कि सुशांत के पिता केके सिंह अगर मांग करेंगे तो सीबीआई जांच की सिफारिश संभव है। एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार पुलिस मुंबई जाकर जांच कर रही है। मुंबई पुलिस को इसमें सहयोग भी करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस जांच में दो राज्यों के बीच झगड़े जैसे कोई बात नहीं है। नीतीश के बयान पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस किसी के पास कोई भी सबूत हो या जानकारी हो, उसे लेकर आएं। आरोपी को फांसी पर जरूर लटकाएंगे।

14 जून को सुशांत ने मुंबई में सुसाइड की, कथित गर्लफ्रेंड और उसके परिवार पर पटना में केस
14 जून को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सुशांत के परिवार वालों ने 28 जुलाई को पटना के राजीव नगर थाने में कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। चार अधिकारी जांच के लिए मुंबई गए हैं और वहां की लोकल पुलिस के साथ मिलकर मामले की जांच कर रहे हैं। हालांकि, यह आरोप लग रहे हैं कि मुंबई पुलिस बिहार पुलिस के साथ कोऑपरेट नहीं कर रही है। बिहार पुलिस को न तो गाड़ी उपलब्ध कराई गई और न ही अब तक हुए जांच के कोई दस्तावेज दिए गए। सुशांत की मौत के बाद से लगातार सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।

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14 जून को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।- फाइल फोटो।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/there-is-a-problem-as-we-havent-yet-received-even-the-basic-documents-related-to-sushant-singh-rajput-death-case-bihar-dgp-gupteshwar-pandey-127576997.html

1 दिन में रिकॉर्ड 1000 जांच, सुल्तानगंज में 6 महिला पुलिस समेत 73 पॉजिटिव

Posted: 01 Aug 2020 11:22 PM PDT

जिले में शनिवार को काेराेना जांच की सैंपलिंग में तेजी आई। रिकॉर्ड 1000 लोगों के सैंपल लिए गए। मेडिकल कॉलेज, नौलखा में आरटीपीसीआर मशीन से जांच शुरू होने से सैंपल जांच में तेजी आई है। मायागंज, सदर, हुसैनाबाद, रिकाबगंज, मोहद्दीनगर समेत सभी रेफरल अस्पताल और पीएचसी में जांच शुरू हो गई है। इस बीच 73 नए मरीज मिले।
इनमें 13 शहरी क्षेत्र के हैं। तिलकामांझी, हवाई अड्‌डा समेत 7 ब्लॉक तक संक्रमण फैला। सुल्तानगंज थाने की 6 महिला पुलिस, शाहकुंड चौकीदार के परिवार के 5 सदस्य संक्रमित हुए हैं। शुक्रवार रात 1 बजे से शनिवार सुबह 11 बजे तक 4 मौतें भी हुईं। मायागंज अस्पताल में सियाराम नगर के रामप्रवेश कुमार और मुंगेर के आरके पासवान की मौत के बाद परिजन शव ले गए, जबकि पवन का पता अस्पताल के पास नहीं है। इसलिए उसका शव अस्पताल में रखा है। सुल्तानगंज में कमरगंज के रिटायर्ड रेलकर्मी छेदी मंडल की मौत के बाद उनके परिजनों के सैंपल लिए जाएंगे। इस बीच कोविड केयर से 6 मरीज ठीक होकर घर लौटे। सीएस डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया, हवाई अड्डा की महिला, तिलकामांझी में अधेड़, 1 महिला, जीरोमाइल में 1 बुजुर्ग समेत अन्य मोहल्लों में युवक, महिला, 2 साल की बच्ची, किशोरी भी पॉजिटिव हुई हैं।

सुल्तानगंज में 9 संक्रमित, एक बुजुर्ग की मौत
सुल्तानगंज में 9 संक्रमित मिले। अस्पताल प्रभारी डाॅ. उषा कुमारी ने बताया, सुल्तानगंज थाने की 6 महिला पुलिस, असियाचक व गंगापुर के 2 युवक संक्रमित हुए। कमरगंज के बुजुर्ग की रिपोर्ट मौत के बाद पॉजिटिव आई है।

शाहकुंड में 5, सन्हौला में एक पॉजिटिव
शाहकुंड में चौकीदार के पांच परिजन संक्रमित हो गए। शुक्रवार को चौकीदार के संक्रमित होने के बाद उसकी पत्नी, बेटा समेत परिवार के पांच सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इधर, सन्हौला में भुड़िया गांव के वार्ड-6 का एक युवक संक्रमित हुआ है। वह कुछ पहले ही कश्मीर से आया है।

कहलगांव में 6 लोग हुए पॉजिटिव
कहलगांव में 6 मरीज मिले। एनटीपीसी के जीवन ज्योति अस्पताल में 32 लोगों की जांच हुई। इनमें एनटीपीसी के स्टोर प्रभारी व एक ठेका कर्मी पॉजिटिव मिला। अनुमंडल अस्पताल में हुई जांच में बस स्टैंड का 1, खुटहरी के पिता-पुत्री व काजीपुरा का युवक संक्रमित मिला।

नवगछिया में बनी चेन
नवगछिया में 9 लोग पॉजिटिव हुए। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने बताया, ये पहले मिले मरीजों की चेन से जुड़े हैं। दो मरीज कोर्ट की सुरक्षा में लगे संक्रमित बीएमपी जवान की चेन से जुड़े हैं। अन्य शहर के विभिन्न वार्डों के हैं। दो बुजुर्गों को मायागंज रेफर किया है।

गोपालपुर व खरीक में 7 संक्रमित
गोपालपुर के पचगछिया गांव में एक महिला और खरीक में तेलघी के 5 और तुलसीपुर के एक युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

छह हुए स्वस्थ, दो करेंगे अपना प्लाज़्मा डोनेट, दी सहमति
कोविड केयर से सबौर की पूनम, मोहन, जलधर मंडल, जगदीशपुर की सविता, नारायणपुर की गीता व कहलगांव के प्रेमचन्द चौधरी को घर भेजा। मोहन व प्रेमचन्द ने प्लाज़्मा डोनेट करने में सहमति भी दी।
10 मरीजों को दी रेमडेसिवीर दवा, सात हुए रिकवर
मायागंज में भर्ती कोरोना मरीजों को रेमडेसिवीर दवा देना शुरू किया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. हेमशंकर शर्मा ने बताया, 10 मरीजों को दवा दी गई। इनमें 7 पर असर दिखा। तीन पर असर नहीं दिखा है। परिजनों ने यह दवा खरीदी है। अस्पताल में यह सप्लाई नहीं है।



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लाॅकडाउन के बाद खुला बाजार तो डीएन सिंह रोड पर लगी भीड़।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/record-1000-investigations-in-1-day-73-positive-including-6-women-police-in-sultanganj-127575950.html

नई शिक्षा नीति एक अनुपम पहल

Posted: 01 Aug 2020 11:17 PM PDT

नई शिक्षा नीति एक अनुपम पहल

 
                                डाॅ एस के प्रेमी 
 स्वतंत्र भारत की अपनी शिक्षा नीति बनी ही नहीं। सच पूछा जाए तो भारतीय चिंतकों की चिंता ने शिक्षा को बचाए रखा है ,अन्यथा three  R ,रीडिंग, राइटिंग अर्थमैटिक के पाठ्यक्रम से मात्र सहायक ही उत्पन्न होते रहे ,प्रधान बनने का शिक्षाक्रम बना ही नहीं ।यद्यपि कि यह चिंतनीय विषय सभी सरकारों की चिंता बनाए रखा। शिक्षा में आमूल चूल परिवर्तन की बात तो सभी ने बढ़ चढ़कर की परंतु चूल का मूल भी नहीं  हिला। माननीय राजीव गांधी जी ने प्रयास किया परंतु उससे आमूल परिवर्तन नहीं हो सका ।नवोदय विद्यालय की कल्पना प्राइवेट स्कूलों के समानांतर व्यवस्था की थी, परंतु वह एक ढाढर बन कर रह गई ।बुनियादी शिक्षा आरंभ हुई, आचार्य विनोबा भावे के दूर दृष्टि एवं सूक्ष्म चेतन प्रयास से नई तालीम समिति बनी, परंतु अंग्रेज एवं अंग्रेजिअत के प्रभाव एवं चकाचौंध में धरी रह गई। सच पूछा जाए तो कोठारी कमीशन के बाद शिक्षा का नवल प्रयोग यही  डॉ कस्तूरीरंगन कमीशन से ही हुआ है। अगर इसे राष्ट्र के निर्माण में सही कदम मानकर राष्ट्र निर्माता धरती पर उतार सकेंगे तो असली भारत यानी  समर्थ भारत ,सार्थक भारत, समृद्ध भारत एवं श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो सकेगा।

             ऐसा क्या है नई शिक्षा नीति में?

1- यह शिक्षा नीति जन -शक्ति, विद्वत जन शक्ति, संत जन शक्ति ,महाजन शक्ति, सामान्य जन शक्ति ,राजनीति जनशक्ति की मनोवृति ,अध्येताओं, अध्यापकों, अधिकारियों ,अभिभावकों ,आचार्यों के विचार के आधार पर निर्मित है जिसमें ढाई लाख ग्राम पंचायतों ,66600 प्रखंडों (विकास खंडों )और 676 जिलों से प्राप्त 207882 सुझावों पर मंथन कर जन आकांक्षाओं की सहमति संयुक्त है।
2- कुल 27 अध्यायों में विभक्त इस शिक्षा नीति में 10 स्कूली शिक्षा के एवं 10 उच्च शिक्षा के हैं ,7 अध्याय उभयनिष्ठ हैं।
3-पूर्व में मातृभाषाओं (क्षेत्रीय भाषाओं ,मां के आंचल की भाषाएं ) की उपेक्षा हो रही थी।  अब 5वें  वर्ग तक छात्र माता के आचल (अंचल )की मातृभाषा में पढेंगे ।इससे  उनकी समझ दॄढ एवं स्थाई होगी ।उसके आगे के 3 वर्षों तक छात्र हिंदी में पढ़ेंगे, अन्यथा वे अपनी मातृभाषा में भी पढ़ सकते हैं ।इसमें उनका 5 प्लस 3 प्लस 3 यानी 8 वर्ग निकल जाएगा ।
4-प्राथमिक विद्यालय में आंगनबाड़ी समाहित की जाएगी। कक्षा एक एवं दो आंगनबाड़ी के माध्यम से ही चलेंगे ।
5-गैर शैक्षणिक विषय अब नहीं होंगे ।पाठ्यक्रम के सभी विषय तथा पाठ्य सहगामी विषय ( co- curricular) व्यवसायिक शिक्षा आदि अलग विषय नहीं होंगे ।सभी शैक्षणिक विषय ही विषय समूह में रखे जाएंगे ।
6-प्लस टू एवं माध्यमिक के शिक्षकों के बीच की दीवार समाप्त हो जाएगी ।सभी शिक्षक सेकेंडरी के ही माने जाएंगे ।
7-सभी विद्यार्थियों का एक क्रेडिट अकाउंट होगा ।जहां वे  पढ़ना छोड़ेंगे ,कुछ दिन बाद भी वहीं से आरंभ कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकेंगे ।
8-विज्ञान समूह के विद्यार्थी मानविकी की  भी पढ़ाई कर सकेंगे ।विषय चयन की स्वतंत्रता उन्हें मिलेगी। 
 9-व्यवसायिक शिक्षा छठे वर्ग से ही आरंभ हो जाएगी जिसमें पढ़ाई के अतिरिक्त किसी व्यवसाय में 10 दिनों का इंटरशिप करना होगा ।जैसे कुम्हारगिरी सीखने के लिए कुम्हार के पास ,बढ़ई के काम के लिए बढ़ाई फर्म में, लॉन्ड्री में धुलाई के कार्य के लिए लॉन्ड्री में ,इसी तरह लुहारी ,स्वर्णकारी आदि। 
10-कस्तूरबा विद्यालय को समृद्ध कर 12वीं कक्षा तक कर दिया जाएगा ।
11-10वीं की बोर्ड परीक्षा का प्रावधान अभी तो नहीं है, परंतु जो छात्र दशमी करके ही किसी व्यवसाय में जाना चाहेंगे उन्हें एक परीक्षा देनी होगी ।उनके अंकपत्र में उनकी सारी जानकारी प्रविष्ट की जाएगी ।यानी हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड बनेगा ।इसमें स्व मूल्यांकन सामाजिक मूल्यांकन एवं शिक्षकों द्वारा किया गया मूल्यांकन सम्मिलित होगा ।
12-उच्च  शिक्षा में स्नातक तीन एवं चार बरसों का होगा।  1 वर्ष पढ़कर छोड़ने वाले को सर्टिफिकेट,2 वर्ष पढ़ने वाले को डिप्लोमा एवं तीन बस पढ़ने वाले को डिग्री दी जाएगी। जिन्हें किसी नौकरी ,कंपटीशन आदि में जाना होगा वे इसी डिग्री पर जा सकेंगे ।4 वर्षों का डिग्री वही करेंगे जिन्हें शोध कार्य करना होगा ।
13-B.Ed वही करेंगे जिन्हें शिक्षक बनना होगा ।उन्हें इंटर के बाद 4 वर्षों का कोर्स करना होगा जो शिक्षा स्नातक होगा ।स्नातक करने के बाद भी एक-दो वर्षों का B.Ed कोर्स होगा एवं एम ए करने के बाद बी एड 1 वर्ष का होगा ।
14-सभी वर्तमान शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिया जाएगा, फिर उनका मूल्यांकन किया जाएगा ।यह कार्य 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। 
15-यह नई शिक्षा नीति 2021 से लागू हो जाएगी । 2021 में 9,2022 में 10,2023 में एकादश वर्ग एवं 2024 में द्वादश वर्ग पूरा हो जाएगा हो ।
16- पाठ्यक्रम के निर्धारण के लिए एनसीएफ( नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क )का गठन किया जाएगा जिसमें शेष और स्पष्ट बातें समझी जाएंगी ।
17-एनसीएफएसई के बाद पुस्तक लेखन का कार्य आरंभ हो जाएगा ।पुस्तकों के अतिरिक्त विद्यार्थी को  Digital library का उपयोग भी करना होगा ।
18-विद्यालयों को  बार-बार निरीक्षण  से मुक्ति मिलेगी।
19-विद्यालय का संचालन संकुल व्यवस्था के अंतर्गत होगा ।
20-शिक्षकों को  चुनावी कार्य के अतिरिक्त किसी भी तरह के अन्य गैर शैक्षिक कार्य में नहीं लगाया जाएगा।
21-बच्चों को विद्यालय में भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक नास्ते  की भी व्यवस्था होगी,,परंतु शिक्षक इस कार्य में नहीं लगेंगे ।
          सारी योजनाओं का लाभ तभी सुनिश्चित किया जा सकेगा जब अध्येता, अ्यापक,अभिभावक और अधिकारी इसे ईमानदारी के साथ लागू करेंगे ।अभी तो भारत उत्कर्ष फाउंडेशन के तहत किए गए सर्वे के अनुसार 83% शिक्षक अभिरुचि से कोई नई पुस्तक का अध्ययन नहीं करते ।54% शिक्षक कोई उत्तरदायित्व का कार्य नहीं लेते हैं ।(यहां ऑकड़ा बिहार सरकार के सरकारी विद्यालयों का है जो 2018 में लिया गया था।) इस तरह नई शिक्षा नीति के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन सुनिश्चित हो जाएगा। इसमें हमारे राष्ट्र निर्माताओं के राष्ट्र के प्रति समर्पण का राष्ट्रव्यापी मूल्यांकन निहित है। 
                   लेखक राष्ट्रीय आचार्यकुल के राष्ट्रीय शिक्षा संयोजक हैं।
आनंद विहार कुंज मारनपुर गया- 823001
 चल भाष  91-7903392859,9430837615
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डीसी को पत्र भेज सड़क निर्माण में गड़बड़ी को दूर करने की मांग

Posted: 01 Aug 2020 07:22 PM PDT

आरटीआई एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने डीसी जमशेदपुर को पत्र भेजकर सड़क निर्माण में हो रही अनियमितता दूर कराने की मांग की है। डीसी को लिखे गए पत्र में सिर्मा देवगम ने कहा कि डुमरिया प्रखंड अंतर्गत कुमड़ाशाेल से खैरबनी तक 280.30 लाख की लागत से कार्यकारी एजेंसी ग्रामीण विकास विभाग की देखरेख में पीएमजीएसवाई के तहत 7.300 किमी सड़क का निर्माण चंदेल कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है।

कई जगहों पर कल्वर्ट निर्माण कराया जा रहा है जो प्राक्कलन के अनुसार नहीं हो रहा है। कल्वर्ट की ऊंचाई आवश्यकता से बहुत कम है। कई जगह डायवर्सन बनाकर मिट्टी भर दी गई है, जो बारिश में परेशानी का सबब बन गई है। बारिश में डायवर्सन कीचड़मय हो जाने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। डायवर्सन पर पत्थर व मुरूम डालवाने की मांग की है, ताकि आवागमन में लोगों को कोई परेशानी न हो।



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Send a letter to DC demanding to rectify the problem in road construction


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/dumria/news/send-a-letter-to-dc-demanding-to-rectify-the-problem-in-road-construction-127576787.html

मधुबन में 5 अगस्त को दीपोत्सव मनाने की तैयारी

Posted: 01 Aug 2020 06:22 PM PDT

मधुबन स्थित पौराणिक हनुमान मंदिर में महावीर मंदिर सेवा समिति की एक बैठक शनिवार को की गई। बैठक की अध्यक्षता मंजु गुप्ता महिला मंडल अध्यक्ष ने की। बैठक मे उपस्थित सदस्यों ने अगामी 05 अगस्त को अयोध्या में भगवान राम का मंदिर के भूमि पूजन पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। बैठक में अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर निर्माण के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने का निर्णय लिया गया। वहीं आगामी 05 अगस्त को पौराणिक हनुमान मंदिर के ऊपर बने राम मंदिर को भव्य तरीके से सजाने, मंदिर में घी का दीपक जलाकर दीपावली मनाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में उपस्थित समिति के सदस्य भरत कुमार साहु ने बताया की राम मंदिर का सजावट के साथ-साथ सभी लोग अपने-अपने घरों में भी दीपक जलाने का निर्णय लिए हैं। विहिप के प्रखंड सह सचिव प्रकाश गुप्ता ने बताया की 05 अगस्त को पूरे मधुबन मे दीपावली की तरह सभी लोगों के घरों एवम छतों में दीपक जलाकर दीपावली मनाएंगे। बैठक में मुख्य रूप से भरत साहु, तेजनारायण महतो, कुंदन दुब्बे, शैलेन्द्र सिंह, प्रकाश गुप्ता, अतुल जैन, कैलाश प्रसाद अग्रवाल, अरूण रजक, उमेश रजक, नंदकिशोर सिंह, रीतेश मंदिलवार, संजय आदि थे।



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/madhuban/news/preparations-to-celebrate-deepotsav-on-5-august-in-madhuban-127576621.html

खजाने में पड़े हैं 48 करोड़ फिर भी शहर को नहीं मिल रहा शुद्ध पानी!

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

एक तरफ जहां शहर के ज्यादातर इलाके जलजमाव झेल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर, शहर में 40 साल पुरानी पाइपलाइन से पानी आपूर्ति की वजह से तिनकाेठिया समेत कई इलाके में गंदा पानी लोगों के घर में सप्लाई की जा रही है। शहर में पेयजल की ऐसी स्थिति तब है, जब नगर निगम के खजाने में 48 करोड़ रुपए पड़े हैं। हर घर नल-जल योजना के तहत शहर के सभी 49 वार्डाें में नई पाइपलाइन बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करनी है। एक साल में तीन बार टेंडर हुआ, हर बार कैंसिल करना पड़ा।

हर घर जल-नल योजना से शहरी क्षेत्र में 98 बोरिंग होनी है। 10-10 हजार लीटर क्षमता के 172 नए वाटर टावर खड़े करने हैं। 30 हजार घरों तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए 225 किमी पाइपलाइन बिछाना है। यह सब काम 6 माह में ही पूरा कर लेना था। लेकिन, अब तक टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। जबकि, बेगूसराय निगम क्षेत्र में 128 करोड़ लागत से जनवरी 2019 में ही पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है।

इन इलाकों में पहली बार निगम करेगा पानी की सप्लाई
शहर के 12 वार्डाें में अब तक नगर निगम का पाइप नहीं पहुंच सका है। कुछ वैसे वार्ड भी हैं, जहां महज 20 फीसदी इलाके में पानी की सप्लाई हो रही है। वार्ड-11, 12, 13, 14 सिकंदरपुर बांध से जुड़े सिकंदरपुर स्लम बस्ती, मुक्तिनाथ धाम, रामेश्वर कॉलेज इलाके में पाइप बिछाना है। वार्ड-31 में आरडीएस कॉलेज से आगे आज तक पाइप नहीं पहुंचा। वार्ड-7 में बीबीगंज आनंदपुरी, गोविंदपुरी, चित्रकूट नगर इलाके में भी इसी तरह की स्थिति है। वार्ड-49 में बेला, मिठनपुरा इलाके के साथ पीएनटी चौक इलाका, रामबाग, जयप्रकाश नगर, खादी भंडार इन सभी इलाकों में परेशानी हो रही है।

निगम बोर्ड की पहली बैठक से पेयजल की समस्या उठ रही है। पैसा रहने के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही से लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। नगर विकास मंत्री व प्रधान सचिव को भी स्थिति से अवगत कराया गया। फिर भी शहर में शुद्ध पेयजल की समस्या है। तीन बार टेंडर क्यों कैंसिल हुआ। इसके लिए जवाबदेही तय कर अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। - मानमर्दन शुक्ला, डिप्टी मेयर

तकनीकी वजह से हेड क्वार्टर ने टेंडर को स्वीकृति नहीं दी थी। फिर से टेंडर प्रक्रिया चल रही है। लॉकडाउन की वजह से कुछ समय लग रहा है‌। अगले सप्ताह में 24 ग्रुप के फिर टेंडर की डेट निर्धारित की गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में जल्द ही हर घर नल-जल योजना का काम शुरू किया जाएगा। - मनेष कुमार मीणा, नगर आयुक्त



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/48-crore-is-lying-in-the-treasury-yet-the-city-is-not-getting-pure-water-127575635.html

बढ़ाई सख्ती; आज से 16 तक शनिवार व रविवार को किराना दुकानें भी रहेंगी बंद, दूध-दवा बिक्री की छूट

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

16 अगस्त तक शनिवार व रविवार काे दुकान खाेलने पर जुर्माना वसूली के साथ दुकानदार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने एसएसपी व अन्य वरीय अधिकारियाें के साथ कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक कर लाॅकडाउन का सख्ती से अनुपालन कराने काे कहा। शनिवार को हुई उक्त बैठक में डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने जिले में लॉकडाउन की स्थिति की समीक्षा की। कहा कि लॉकडाउन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बरतने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं/प्रतिष्ठानों के विरुद्ध पूर्ण सख्ती बरतें।

उन्होंने कहा कि जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस माैके पर वरीय पुलिस अधीक्षक जयंतकांत ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को लॉकडाउन का अनुपालन सुनिश्चित कराने कहा। कहा कि कि सभी थाना प्रभारी अपने-अपने इलाकाें में सघन अभियान चलाएं। अभी सप्ताह में दाे दिन बंद रखने के साथ ही अन्य 5 दिन भी लॉकडाउन के नियमाें का अनुपालन कराने के लिए पूरी तत्परता बरतें। बैठक में डीडीसी, अपर समाहर्ता, अपर समाहर्ता आपदा, दोनों एसडीओ, दोनों अनुमंडल पुलिस अधिकारी आदि उपस्थित थे।

डीएम ने कहा कि शनिवार-रविवार काे दूध, दवा व अति आवश्यक सेवाओं को छोड़ सभी दुकानें बंद रहेंगी। किराना दुकान भी बंद रहेंगे। इमरजेंसी सेवाओं काे छोड़ टेंपो, ऑटो-ई रिक्शा व अन्य वाहनों का परिचालन भी बंद रहेगा। अनावश्यक रूप से चलनेवाले वाहन सीज किए जाएंगे। कंटेनमेंट जोन में अति आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़कर सभी प्रकार की गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी। इसके साथ ही लॉकडाउन का सख्ती से अनुपालन कराने को लेकर शहर को 10 सेक्टराें में बांट कर अलग-अलग अधिकारियाें काे जिम्मा दिया गया। कंटेनमेंट जोन पर मुख्य रूप से फोकस करने के लिए कहा गया।

कोरोना का संक्रमण रोकना चुनौती : शहर को 10 सेक्टराें में बांट कर अधिकारियाें काे दिया गया जिम्मा

बाल गृह के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा

कोरोना संक्रमण को लेकर बालगृह में रहने वाले बच्चे की पढ़ाई ऑनलाइन की जा रही है। बाल संरक्षण इकाई की ओर से यह बच्चे सामान्य बच्चों से पढ़ाई में पीछे नहीं हों, इसे लेकर इन्हें पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बाल गृह में कोरोना संक्रमण के कारण शिक्षकों के प्रवेश पर रोक होने के कारण प्रबंधन ने यह व्यवस्था शुरू की है। बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक उदय कुमार झा इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने बताया, बाल गृह में रहने वाले करीब 60 बच्चों को प्रतिदिन योग के अलावे सिलेबस से संबंधित अन्य विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। सामान्य बच्चों से भी पीछे नहीं रह सकें, इसे लेकर ध्यान दिया जा रहा है। पढ़ाई के दौरान सफाई और संक्रमण न फैले इसे लेकर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया जा रहा है।

बैठक में लिए गए निर्णय

  • शनिवार-रविवार काे किराना दुकानें भी नहीं खुलेंगी
  • दूध-दवा व जरूरी सेवा छोड़ सभी दुकानें बंद रहेंगी
  • इमरजेंसी काे छोड़ टेंपो, ऑटो-ई रिक्शा भी नहीं चलेंगे
  • अनावश्यक रूप से चलनेवाले वाहन सीज किए जाएंगे
  • मास्क पहने बिना बाहर निकलने पर जुर्माना देना हाेगा
  • अन्य 5 दिन भी नियमाें के अनुपालन काे सख्ती हाेगी
  • कंटेनमेंट जोन में दुकान खाेलने पर सील किया जाएगा
  • विक्रेता-खरीदार सबके लिए मास्क पहनना अनिवार्य है
  • सोशल डिस्टेंसिंग का भी हर हाल में अनुपालन करना है।

पुलिस का फ्लैग मार्च, बेवजह निकले लोगों को लगी फटकार

शहरी क्षेत्र में शनिवार की शाम सिटी एसपी नीरज कुमार सिंह के नेतृत्व में फ्लैग मार्च किया गया। सरैयागंज, मोतीझील, कंपनीबाग, सूतापट्टी और गोला रोड में टीम ने फ्लैग मार्च किया। देर शाम तक दुकानें खुली रखने वालों को डांट-फटकार लगाई। सिटी एसपी के साथ नगर डीएसपी रामनरेश पासवान, क्यूआरटी समेत सभी थानेदार मौजूद थे। कहा गया कि अनलॉक-3 का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करना है। किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिटी एसपी ने कहा कि शनिवार और रविवार को दुकानें बंद रहेंगी।

डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी समेत जिले में 60 कोरोना पॉजिटिव मिले

जिले में शनिवार को 60 कोरोना पॉजिटिव मिले। इनमें कई डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, टेक्नीशियन और शहर के लोग शामिल हैं। एसकेएमसीएच व सदर अस्पताल में हुई जांच में कई लोग दोबारा पॉजिटिव पाए गए। जिला प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को जिले में 436 संदिग्धों के सैंपल की जांच हुई, इसमें 60 पॉजिटिव मरीज मिले। वहीं, 70 मरीज स्वास्थ्य होकर अस्पताल से घर गए। जिले में कोरोना के 884 एक्टिव मामले हैं। एसकेएमसीएच प्राचार्य डॉ. विकास कुमार के अनुसार, शनिवार को एसकेएमसीएच लैब में 120 सैंपल की जांच की गई, जिसमें 16 पॉजिटिव मिले हैं। वहीं, सदर व अन्य पीएचसी में हुई जांच में 44 पॉजिटिव मरीज मिले हैं।
इधर, रेल पुलिस के 45 जवानों की होगी जांच

रेल पुलिस के दो अधिकारियाें के कोरोना पॉजिटिव हाेने के बाद जीआरपी में हड़कंप है। इसके बाद रेल एसपी अशोक सिंह ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर रेल पुलिस के 45 जवानों को कैंप लगाकर जांच करने की मांग की है।



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Increased Strictly; Grocery shops will also be closed from today to 16 on Saturday and Sunday, discount on sale of milk and medicines


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/increased-strictly-grocery-shops-will-also-be-closed-from-today-to-16-on-saturday-and-sunday-discount-on-sale-of-milk-and-medicines-127575589.html

1 दिन में रिकॉर्ड 1000 जांच, सुल्तानगंज में 6 महिला पुलिस समेत 73 पॉजिटिव

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

जिले में शनिवार को काेराेना जांच की सैंपलिंग में तेजी आई। रिकॉर्ड 1000 लोगों के सैंपल लिए गए। मेडिकल कॉलेज, नौलखा में आरटीपीसीआर मशीन से जांच शुरू होने से सैंपल जांच में तेजी आई है। मायागंज, सदर, हुसैनाबाद, रिकाबगंज, मोहद्दीनगर समेत सभी रेफरल अस्पताल और पीएचसी में जांच शुरू हो गई है। इस बीच 73 नए मरीज मिले।
इनमें 13 शहरी क्षेत्र के हैं। तिलकामांझी, हवाई अड्‌डा समेत 7 ब्लॉक तक संक्रमण फैला। सुल्तानगंज थाने की 6 महिला पुलिस, शाहकुंड चौकीदार के परिवार के 5 सदस्य संक्रमित हुए हैं। शुक्रवार रात 1 बजे से शनिवार सुबह 11 बजे तक 4 मौतें भी हुईं। मायागंज अस्पताल में सियाराम नगर के रामप्रवेश कुमार और मुंगेर के आरके पासवान की मौत के बाद परिजन शव ले गए, जबकि पवन का पता अस्पताल के पास नहीं है। इसलिए उसका शव अस्पताल में रखा है। सुल्तानगंज में कमरगंज के रिटायर्ड रेलकर्मी छेदी मंडल की मौत के बाद उनके परिजनों के सैंपल लिए जाएंगे। इस बीच कोविड केयर से 6 मरीज ठीक होकर घर लौटे। सीएस डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया, हवाई अड्डा की महिला, तिलकामांझी में अधेड़, 1 महिला, जीरोमाइल में 1 बुजुर्ग समेत अन्य मोहल्लों में युवक, महिला, 2 साल की बच्ची, किशोरी भी पॉजिटिव हुई हैं।

सुल्तानगंज में 9 संक्रमित, एक बुजुर्ग की मौत
सुल्तानगंज में 9 संक्रमित मिले। अस्पताल प्रभारी डाॅ. उषा कुमारी ने बताया, सुल्तानगंज थाने की 6 महिला पुलिस, असियाचक व गंगापुर के 2 युवक संक्रमित हुए। कमरगंज के बुजुर्ग की रिपोर्ट मौत के बाद पॉजिटिव आई है।

शाहकुंड में 5, सन्हौला में एक पॉजिटिव
शाहकुंड में चौकीदार के पांच परिजन संक्रमित हो गए। शुक्रवार को चौकीदार के संक्रमित होने के बाद उसकी पत्नी, बेटा समेत परिवार के पांच सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इधर, सन्हौला में भुड़िया गांव के वार्ड-6 का एक युवक संक्रमित हुआ है। वह कुछ पहले ही कश्मीर से आया है।

कहलगांव में 6 लोग हुए पॉजिटिव
कहलगांव में 6 मरीज मिले। एनटीपीसी के जीवन ज्योति अस्पताल में 32 लोगों की जांच हुई। इनमें एनटीपीसी के स्टोर प्रभारी व एक ठेका कर्मी पॉजिटिव मिला। अनुमंडल अस्पताल में हुई जांच में बस स्टैंड का 1, खुटहरी के पिता-पुत्री व काजीपुरा का युवक संक्रमित मिला।

नवगछिया में बनी चेन
नवगछिया में 9 लोग पॉजिटिव हुए। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने बताया, ये पहले मिले मरीजों की चेन से जुड़े हैं। दो मरीज कोर्ट की सुरक्षा में लगे संक्रमित बीएमपी जवान की चेन से जुड़े हैं। अन्य शहर के विभिन्न वार्डों के हैं। दो बुजुर्गों को मायागंज रेफर किया है।

गोपालपुर व खरीक में 7 संक्रमित
गोपालपुर के पचगछिया गांव में एक महिला और खरीक में तेलघी के 5 और तुलसीपुर के एक युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

छह हुए स्वस्थ, दो करेंगे अपना प्लाज़्मा डोनेट, दी सहमति
कोविड केयर से सबौर की पूनम, मोहन, जलधर मंडल, जगदीशपुर की सविता, नारायणपुर की गीता व कहलगांव के प्रेमचन्द चौधरी को घर भेजा। मोहन व प्रेमचन्द ने प्लाज़्मा डोनेट करने में सहमति भी दी।
10 मरीजों को दी रेमडेसिवीर दवा, सात हुए रिकवर
मायागंज में भर्ती कोरोना मरीजों को रेमडेसिवीर दवा देना शुरू किया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. हेमशंकर शर्मा ने बताया, 10 मरीजों को दवा दी गई। इनमें 7 पर असर दिखा। तीन पर असर नहीं दिखा है। परिजनों ने यह दवा खरीदी है। अस्पताल में यह सप्लाई नहीं है।



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लाॅकडाउन के बाद खुला बाजार तो डीएन सिंह रोड पर लगी भीड़।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/record-1000-investigations-in-1-day-73-positive-including-6-women-police-in-sultanganj-127575950.html

मजदूरों के क्वारेंटाइन में खर्च हुए 10 करोड़ की होगी जांच

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

कोरोनाकाल में प्रवासियों को जिले के अंचल और ब्लॉक ठहराने के लिए बने 120 से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर पर खर्च 10 करोड़ के बिल की जिला प्रशासन जांच कराएगा। मई के पहले सप्ताह से 15 जून तक 50 हजार मजदूर-प्रवासियों को ठहराने पर करीब 10 करोड़ खर्च होने का बिल आपदा प्रबंधन शाखा को मिला है। डीएम प्रणव कुमार ने सभी खर्च के बिलों की जांच के लिए कहलगांव, सदर, नवगछिया अनुमंडल में तीन जांच टीम बनाई है। हर टीम में चार-चार अफसर भी तैनात किए हैं। आपदा प्रबंधन शाखा के प्रभारी सीनियर डिप्टी कलेक्टर विकास कुमार कर्ण ने बताया, बिल में कोई गड़बड़ी तो नहीं है, इसलिए उसकी जांच कराई जा रही है। इसलिए जांच टीम में वित्त व लेखा से जुड़े अफसराें काे रखा गया है।

तीनाें अनुमंडल में जांच टीम में एसडीएम भी
तीनों अनुमंडल की जांच टीम में एसडीएम भी हैं। कहलगांव टीम में एसडीएम डीएओ, डीसीएलआर और अपर अनुमंडल पदाधिकारी हैं। भागलपुर में एसडीएम, वरीय काेषागार पदाधिकारी, डीसीएलआर भागलपुर, अपर अनुमंडल पदाधिकारी और नवगछिया की जांच टीम में एसडीएम, काेषागार पदाधिकारी, डीसीएलआर और अनुमंडलीय लाेक शिकायत निवारण पदाधिकारी हैं।



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/10-crores-spent-in-quarantine-of-workers-will-be-investigated-127575973.html

अयोध्या में श्रीराममंदिर के भूमिपूजन पर बंटेगा पटना के महावीर मंदिर का नैवेद्यम, सवा लाख लड्डू की सामग्री भेजी

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

अयोध्या में 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के मौके पर पटना के महावीर मंदिर की ओर से नैवेद्यम लड्डू का प्रसाद बांटा जाएगा। यहां से सवा लाख लड्डू बनाने की सामग्री अयोध्या भेजी गई है। इसके लिए गाय के दूध का शुद्ध घी बेंगलुरु और राजा ब्रांड का बेसन आस्ट्रेलिया से आया है। केसर कश्मीर के पुलवामा, इलायची, काजू और किसमिस केरल और चीनी उत्तरप्रदेश की मिल का है। लड्डू के डिब्बे पटना से भेजे गए हैं। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि अयोध्या में नैवेद्यम रघुपति लड्डू के नाम से वितरित होगा।
दो पिकअप वैन से रवाना की गई सामग्री

नैवेद्यम बनाने वाले सभी कारीगर तिरुपति के हैं, जो पटना के महावीर मंदिर के लिए नैवेद्यम लड्डू बनाते हैं। उन कुशल कारीगरों में से 20 कारीगर शेषाद्रि की अगुआई में अयोध्या गए हैं। वे लोग 51 हजार लड्डू बनाकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेंगे और आवश्यकता होने पर और अधिक लड्डू बनाकर दिए जाएंगे।

उसके बाद बिहार में सीतामढ़ी स्थित जानकी जी के जन्म स्थान मंदिर, पुनौरा धाम और जहां-जहां भगवान श्रीराम के चरण पड़े, वहां के मंदिरों में प्रसाद भेजा जाएगा। बिहार में ऐसे स्थल हैं सरयू-गंगा का संगम तट, बक्सर का सिद्धाश्रम, गंगा-सोन का संगम तट, वैशाली (हाजीपुर) का रामचौरा मंदिर ओर दरभंगा के पास अहिल्या स्थान।



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Naivedyam of Mahavir temple in Patna to be distributed on Bhoomipujan of Shri Ram temple in Ayodhya, sent material of 1.25 lakh laddus


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/naivedyam-of-mahavir-temple-in-patna-to-be-distributed-on-bhoomipujan-of-shri-ram-temple-in-ayodhya-sent-material-of-125-lakh-laddus-127576520.html

मुंबई पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दे बिहार पुलिस को सुशांत मामले के कागजात अभी देने से किया इनकार

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के अनुसार सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस कई कागजात उपलब्ध नहीं करा रही है। उनका कहना है कि अभियुक्त पक्ष (रिया चक्रवर्ती) इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ही अब कोई कार्रवाई होगी। लेकिन, हम अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमारे पुलिस अधिकारियों ने मुंबई में बैंक में भी जाकर सुशांत के खाते से पैसे के ट्रांजैक्शन के संबंध में सारे डॉक्यूमेंट की जानकारी ली है।

हम इंवेस्टीगेशन कर रहे हैं। डीजीपी ने कहा कि सबूत जुटाने और सुशांत के करीबी लोगों से पूछताछ करने मुंबई भेजी गई टीम को वहां की पुलिस से अब तक अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है। मुंबई पुलिस को हमारी टीम को सुरक्षा और वाहन उपलब्ध कराना चाहिए। और, सबूत इकट्ठा करने में सहयोग करना चाहिए। अगर जरूरत पड़ी तो बिहार से किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और महिला पुलिस अधिकारी को भी मुंबई भेजा जा सकता है।
31 की घटना के बाद उम्मीद है, मुंबई पुलिस करेगी पूरा सहयोग: हालांकि, डीजीपी ने मुंबई में डीसीपी क्राइम के ऑफिस में बिहार के पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि जब बिहार के अधिकारी डीसीपी से मिलकर लौट रहे थे तो वहां मीडियाकर्मियों की भीड़ लग गई थी। और, मुंबई पुलिस यह कतई नहीं चाहती थी कि कि बिहार के पुलिस अधिकारियों की मीडिया से कोई बातचीत हो सके।

वैसे हमें उम्मीद है कल (31 जुलाई) की घटना के बाद मुंबई पुलिस जरूर सहयोग करेगी। बिहार पुलिस घटना के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए मुंबई में सुशांत सिंह राजपूत के फ्लैट और आसपास का सीसीटीवी फुटेज देखना चाहती है, मुंबई पुलिस को इसमें सहयोग करना चाहिए। बिहार की टीम को सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुंबई पुलिस द्वारा कराई गई वीडियोग्राफी दिखाया जाना चाहिए। वैसे बिहार से भेजी गई टीम ने काफी जानकारी जुटाई है।
सुशांत की बहन ने पीएम को किया ट्वीट: श्वेता सिंह सुशांत सिंह की बहन हैं। उन्होंने शनिवार को एक भावुक ट्वीट लिखा। अपने ट्विटर हैंडल पर श्वेता ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का ओपन लेटर शेयर किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा- मैं सुशांत सिंह राजपूत की बहन हूं और पूरे मामले में जांच का अनुरोध करती हूं। हमें भारत की न्याय व्यवस्था में भरोसा है। अपने ओपन लेटर में श्वेता ने लिखा- सर मेरे दिल ने कहा कि आप सच के साथ खड़े होते हैं। हम बहुत साधारण परिवार से हैं। मेरे भाई का कोई गॉडफादर नहीं था, जब वह बॉलीवुड में आया। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि तुरंत इस मामले को देखें ताकि निष्पक्ष रूप से इसकी जांच हो सके।

मुंबई पुलिस के विरोध में पटना में प्रदर्शन

बोरिंग रोड में जस्टिस फॉर सुशांत के बैनर तले शहर के युवाओं ने प्रदर्शन किया। पटना पुलिस की टीम के साथ मुंबई पुलिस के रवैये को लेकर भी युवाओं में आक्रोश दिखा। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि मुंबई पुलिस जांच में पटना पुलिस को सहयोग नहीं कर रही है। युवाओं ने कहा कि सुशांत सिंह आत्महत्या नहीं कर सकता है। उसकी हत्या हुई और मुंबई पुलिस उसे दबा रही है।

महाराष्ट्र सरकार पर भी युवाओं का गुस्सा फूटा लोगों ने वहां के सीएम का पुतला भी फूंका। साथ ही महाराष्ट्र सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की। जस्टिस फॉर सुशांत मुहीम के संचालक और सुशांत के बचपन के मित्र विशाल सिंह ने कहा कि हमलोगों की मांग है कि मामले में सीबीआईर जांच हो। तभी निष्पक्ष जांच हो सकती है। प्रदर्शन में अभिषेक कुमार सिंह, संजय प्रताप सिंह, मनीष सिंह, अनमोल सिंह, जितेश कश्यप, अंकित आनंद, संदीप सिंह आदि शामिल थे।

दिशा सुसाइड केस को भी खंगाल रही पटना पुलिस

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच कर रही पटना पुलिस अब उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के सुसाइड केस की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस को जो साक्ष्य मिले हैं, उसके बाद पुलिस दिशा सालयान के केस की जानकारी भी जुटाने लगी। डायरेक्टर रूमी जाफरी का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस देर रात मलवानी पुलिस स्टेशन गई।

वहां पटना पुलिस की टीम ने मुंबई पुलिस से दिशा सालियान की मौत से जुड़े कागजात की मांग की। पटना पुलिस जानना चाहती है कि क्या दिशा सालयान के मौत से सुशांत सिंह की मौत का कोई संबंध है या नहीं। मालूम हो कि सुशांत की मौत से कुछ दिन पहले दिशा ने बिल्डिंग से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि दिशा की मौत से सुशांत को सदमा-सा लगा था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द मिलेगी

शनिवार की रात पटना पुलिस की जांच टीम के सदस्य ने कहा कि हमे जल्द ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल जाएगी। टीम में शामिल इंस्पेक्टर कैसर आलम ने कहा कि हमें अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। लेकिन अस्पताल से हमने संपर्क किया है। इधर सोशल मीडिया पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का एक पेज वायरल हो गया। वायरल पेज सुशांत सिंह राजपूत का ही है। पटना के एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट का ही एक पेज है। इसमें लिखा हुआ है कि सुशांत की मौत दम घुटने से हुई है। विसरा को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।

सुशांत के नाम पर नहीं था सिम, कॉल डिटेल मिला

जांच में पटना पुलिस को हर दिन नए तथ्य मिल रहे हैं। शनिवार को छानबीन में यह खुलासा हुआ कि सुशांत जिस दो सिम का इस्तेमाल अपने अंतिम दिनों में कर रहे थे उनमें से एक भी उनके नाम पर नहीं था। एक सिम सैमियल मिरांडा के नाम पर है और दूसरा सिम सिद्धार्थ पैठानी के नाम पर है। पटना पुलिस की टीम को दोनों सिम का कॉल डिटेल हाथ लग गया है। पुलिस दोनों सिम का सीडीआर खंगाल रही है।

14 जून से पहले सुशांत की किन किन लोगों से बात हुई थी पुलिस यह भी निकालेगी। इधर मामले में पटना पुलिस की टेक्निकल सेल भी अनुसंधान में जुट गई है। पटना पुलिस के समक्ष बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन परिस्थतियों में सुशांत दो सिम का इस्तेमाल कर रहे थे। और क्यों दोनों सिम उनके नाम पर नहीं था। सिम के संबंध में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने सिद्धार्थ पैठानी से फोन पर बातचीत की।



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Mumbai Police refuses to give documents of Sushant case to Bihar Police, citing Supreme Court


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/mumbai-police-refuses-to-give-documents-of-sushant-case-to-bihar-police-citing-supreme-court-127576508.html

बिहार में 31 तक बंद रहेंगे शिक्षण संस्थान, पीयू व पीपीयू में नामांकन फंसा

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

कोरोना महामारी के बीच अनलॉक-3 की शुरुआत शनिवार से हो गई। बाजार और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित कई दूसरे सेक्टर के खोलने में छूट दी गई है। लेकिन शैक्षणिक संस्थानों को 31 अगस्त तक बंद ही रखना है। ऐसे में इस नई गाइडलाइन के मुताबिक कई शैक्षणिक संस्थानों की नामांकन प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है। पाटलिपुत्र और पटना विश्वविद्यालय, दोनों में नामांकन प्रक्रिया जारी है और दोनों में स्नातक स्तर के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 14 अगस्त निर्धारित की गई है। लेकिन आगे की प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अब तक स्पष्ट नहीं है।

पटना विश्वविद्यालय में 19 तारीख से शुरू होनी हैं प्रवेश परीक्षाएं

पटना विश्वविद्यालय में आवेदन प्रक्रिया एक बार बढ़ाई जा चुकी है और अब 14 अगस्त तक आवेदन की तिथि तय है। नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद प्रवेश परीक्षाओं का दौर शुरू होना है। पटना विवि में स्नातकोत्तर स्तर पर सामान्य पाठ्यक्रमों में चार और सेल्फ फाइनेंसिंग मोड के 11 पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षाएं होनी है।

जबकि पीजी डिप्लोमा स्तर के छह, यूजी रेगुलर के पांच और यूजी सेल्फ फाइनेंसिंग के 12 पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के जरिए नामांकन होगा। पटना विवि प्रशासन ने जो प्रवेश परीक्षाओं की तिथि निर्धारित की थी, उसमें 19 अगस्त से परीक्षाएं होनी है। 19 से 31 अगस्त के बीच 38 पाठ्यक्रमों में से 18 की प्रवेश परीक्षाएं होनी हैं। लेकिन अनलॉक 3 की गाइडलाइंस के मुताबिक शेड्यूल बदल सकता है।

पीपीयू : 31 तक पहली सूची से होना है दाखिला
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में 19 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई। यहां भी 14 अगस्त तक नामांकन के लिए आवेदन होना है। हालांकि पाटलिपुत्र विवि प्रशासन ने अभी सिर्फ स्नातक स्तर पर नामांकन प्रक्रिया शुरू की है। शेड्यूल के मुताबिक 31 अगस्त तक पहली मेधा सूची के आधार पर यूजी के कोर्सेज में नामांकन हो जाना है। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए सीट लॉकिंग और फीस पेमेंट तक की प्रक्रिया तो संभव है लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में समस्या हो सकती है। ऐसे में पाटलिपुत्र विवि की नामांकन प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
कॉलेज खुलने पर होगा निर्णय: विभिन्न त्योहारों के कारण संस्थानों के कार्यालय चार अगस्त से खुलेंगे। उसमें भी सिर्फ 50 फीसदी कर्मियों को ही कार्यालय जाना है। ऐसे में नामांकन शेड्यूल में क्या बदलाव होगा, इस पर अंतिम निर्णय चार अगस्त के बाद ही होगा।



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Enrollment in educational institutions, PU and PPU will remain closed till 31 in Bihar


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/enrollment-in-educational-institutions-pu-and-ppu-will-remain-closed-till-31-in-bihar-127576506.html

क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई के लिए शिक्षकों को देना होगा प्रशिक्षण

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

शिक्षा व्यवस्था में जरूरत के अनुसार बदलाव होते रहना समय की मांग है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के शिक्षा नीति में किए जाने वाले बदलाव को प्रशंसनीय कदम कहा जा सकता है। लेकिन इस तरह के सकारात्मक बदलाव के बाद सरकार के सामने अब नई चुनौतियां भी आकर खड़ी हो गई हैं। नई नीतियों को धरातल पर उतरना आसान नहीं है। यह कहना है सुपर-30 के संचालक आनंद कुमार का।

आनंद कुमार ने कहा कि पढ़ाई का माध्यम चाहे ऑफलाइन रहा हो या फिर इस काेराेना काल में ऑनलाइन, अच्छे शिक्षक की जरूरत हमेशा बनी रहती है। अब पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। इससे ग्रामीण विद्यार्थियों को फायदा होगा, उन्हें आसानी से विषय समझ में आएगा। लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाने का अनुभव बहुत ही कम शिक्षकों को है। इसके लिए शिक्षकाें के बड़े समूह काे प्रशिक्षित करना होगा। क्षेत्रीय भाषाओं में पुस्तकाें का प्रकाशन भी चुनाैती है।
उन्हाेंने कहा कि सरकार को ऐसे शिक्षक तैयार करने हाेंगे जो सभी विषयों के इंटर रिलेशन को अच्छे से समझ और फिर बच्चों को समझा सकें। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सरकार को नए शिक्षकों की बहाली के साथ-साथ पुराने शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करते रहना होगा। कंप्यूटर तथा मल्टीमीडिया की ट्रेनिंग भी शिक्षकों के लिए अनिवार्य करनी होगी। यह भी बहुत अच्छी बात है कि अब जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा के मद पर खर्च किया जाएगा।

मेरा मानना है कि शिक्षकों के वेतन में इजाफा होना चाहिए, जिससे नौजवान शिक्षण को बतौर पेशा अपनाने के लिए उत्साहित हो सकें। समय-समय पर बच्चों के फीडबैक के आधार पर शिक्षकों को सम्मानित करते रहने से उनका मनोबल बढ़ेगा। जरूरत इस बात की है कि नई शिक्षा नीति के साथ-साथ शिक्षकों की गुणवत्ता तथा पाठ्य-पुस्तक के नवीकरण पर ध्यान दिया जाए।



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Teachers will have to be trained to study in regional languages


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/teachers-will-have-to-be-trained-to-study-in-regional-languages-127576481.html

बरौली में बाढ़ के पानी में चार युवक डूबे तीन के मिले शव, एक की खोजबीन जारी

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

गोपालगंज के बरौली में बाढ़ के पानी में डूबने से तीन लोगों की मौत हो गई।जबकि एक की खोज हो रही है। स्थानीय लोगों की मदद से तीन लोगों का शव निकला गया। दो दिनों में आठ लोगों की मौत हो चुकी है। जिला प्रशासन ने बाढ़ के पानी में नहीं निकलने की अपील की है। माधोपुर ओपी थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर नीलामी के रहने वाले बच्चे बाढ़ की पानी में होकर अपने घर जा रहे थे।

इसी दौरान पानी की तेज धार में तीनों युवक डूबने लगे। एक एक कर सुमित कुमार, प्रिंस कुमार तथा मंटू कुमार लापता हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस बल के जवान घटना स्थल पर पहुंचे। जहां ग्रामीणों की मदद से शव दो शव को निकाला गया। वही मंटू कुमार की अभी भी खोजबीन जारी है।
पचरुखिया में शौच करने गया युवक पानी में डूबा: बरौली प्रखंड के पचरुखिया गांव शौच करने के दौरान पैर फिसल जाने के कारण गहरे और तेज धार वाली पानी में चला गया जिसके कारण वह डूब गया और उसकी मौत हो गई। युवक बरौली थाना के पचरुखिया गांव के 17 वर्षीय रमन कुमार तिवारी पिता स्वर्गीय बाबू नंद तिवारी का पुत्र है।
गांव में पसरा मातम
एक साथ एक ही मोहल्ले के 3 बच्चे की मौत से गांव में मातम पर हुआ है।परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया है।



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Four bodies of three youths drowned in flood waters in Barauli, one continues to be searched


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/bruli/news/four-bodies-of-three-youths-drowned-in-flood-waters-in-barauli-one-continues-to-be-searched-127574217.html

बूढ़ी गंडक लगातार 12 दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही, अब दबाव बांध पर भी पड़ रहा

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहर में लगातार 12 दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। धीरे-धीरे इसके पानी का दबाव नदी के बांध पर भी पड़ने लगा है। जिससे शहर पर बाढ़ का खतरा बरकरार है। बताया जाता है कि पानी के बढ़ने की दर घट गई है। अब इसके स्थिर होने की संभावना है। बावजूद नदी का जलस्तर खतरे के निशान 45.73 से 2.84 मीटर उपर बढ़कर 48.57 मीटर हो गया है। जो नदी के उच्चतम जलस्तर 48.83 से महज 26 सेंटीमीटर नीचे है।

बताया जाता है कि नदी का जलस्तर अपने उच्चतम जलस्तर को पार करेगा तो शहर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाएगा। खासकर मगरदही घाट व धरमपुर रेलवे लाइन के निकट पानी बाइपास के करीब पहुंच गया है। नदी के आधा मीटर तक और बढ़ने की स्थिति में पानी बाइपास को क्रॉस सकता है। वहीं रेलवे पुल के गाटर में पानी सटने के बाद से लगातार उपर की ओर चढ़ रहा है। अब नए रेल पुल का पाया भी डूबने के कगार पर है। बूढ़ी गंडक की पेटी में बसे लोगों के घरों में पानी घुस गया है।

लगातार बढ़ रही है करेह नदी, तटबंध को खतरा

करेह नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से पूर्वी तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बढ़ती जा रही है। जर्जर तटबंध पर पानी के दबाव से बांध में रिसाव होना स्थानीय प्रशासन के साथ वहां बसे ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में स्थिरता आ रही है। वर्तमान में नदी का जलस्तर अपने उच्चतम जलस्तर 48.83 से महज 26 सेंटीमीटर ही नीचे रह गया है। -जय प्रकाश, ईई, फ्लड कंट्रोल

गोपालगंज: 400 गांव का बाजार व मुख्यालय से संपर्क टूटा

भले ही गंडक के जलस्तर में दूसरे दिन भी नरमी देखने को मिली, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नदी का जलस्तर अपनी मुख्य धारा में 8 सेमी नीचे गया है। मांझा व बरौली के कुछ इलाके में बाढ़ का पानी 3 से 4 सेमी कम हुआ है। लेकिन सिधवलिया और बैकुंठपुर कई ऐसे इलाके हैं जहां बाढ़ का पानी अभी भी बढ़ रहा है। मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर के 400 गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह से सड़क, बाजार और मुख्यालय से कट गए हैं।

सीवान: दाहा-सरयू के बाद धमई नदी मचा रही तबाही

गोरेयाकोठी प्रखंड क्षेत्र से गुजर रही धमई नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच एक सप्ताह से करीब 10 पंचायतों के गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। इसके कारण लोग पलायन काे मजबूर हैं। बाढ़ का पानी नए इलाकों में भी प्रवेश कर रहा है। लगातार अंचल व प्रखंड प्रशासन द्वारा हर बिंदुओं पर विशेष नजर रखी जा रही है। बाढ़ का पानी गोरेयाकोठी स्थित प्रखंड सह अंचल कार्यालय थाना परिसर सहित अन्य कार्यालय तक पहुंच गया है।

इसके अलावा बाढ़ की इस समस्या से भिट्ठी, सठावार, शेरपुर, घुसुकपुर सहित अन्य नए गांव प्रभावित हो चुके हैं। करीब 1 सप्ताह से ग्रामीण नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच सड़क किनारे घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। गहरे पानी के कारण कई लोग कम्युनिटी किचन में नहीं पहुंच पा रहे हैं। गोरेयाकोठी थाने की बात की जाए तो वहां पूरे परिसर में पानी ही पानी है। थाने के अंदर तक पानी घुस गया है। इसके अंदर रखे गए कागजात भी नष्ट हो रहे हैं। पुलिस स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है।



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मगरदही स्थित रेलवे के पुराने पुल के गाटर में सटा बूढ़ी गंडक नदी का पानी।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/old-gandak-has-been-flowing-above-the-danger-mark-for-12-consecutive-days-now-the-pressure-is-also-falling-on-the-dam-127576459.html

स्वराेजगार के लिए जीविका समूह से जुड़े 83 हजार प्रवासी श्रमिकों के परिवार

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

कोरोना संक्रमित दौरान राज्य में दूसरे प्रदेशों से लौटकर आए श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने और उनके परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का अभियान तेज हो गया है। मनरेगा और जीविका के जरिए ग्रामीण विकास विभाग ऐसे परिवारों को आजीविका का साधन उपलब्ध करा रहा है। अबतक लगभग 83000 प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को जीविका के स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया है। इससे परिवार की महिलाओं को ग्रामस्तर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध हो सकेगा। इस बीच मनरेगा योजना में प्रवासी श्रमिकों के लिए 2 लाख 22 हजार 939 जॉब कार्ड बनाए गए हैं।
आजीविका के लिए इच्छुक परिवारों को जीविका के माध्यम से कर्ज भी उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल 1,000 से अधिक प्रवासी श्रमिक के परिवार मास्क बनाने के कारोबार में जुटे हुए हैं। इसके अलावा प्रवासी श्रमिकों के परिवार से जुड़ी महिलाओं को अन्य जीविका दीदियों के साथ मनरेगा योजना से संचालित कार्यों में मजदूरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और सेनेटाइजेशन कराने के लिए मेट के रूप में तैनात किया जा रहा है। इन्हें अकुशल श्रमिक के समान पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। इस समय 10671 जीविका दीदियां मनरेगा योजना में मेट के रूप में कार्यरत हैं। वहीं 20 अप्रैल से लेकर अब तक 9 करोड़ से अधिक मानव श्रम दिवस का सृजन हुआ है।
39 हजार परिवारों को दिए गए 2-2 हजार रुपए: जीविका के माध्यम से संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र के 40 हजार अत्यंत गरीब परिवारों में से लगभग 39 हजार परिवारों को खाद्य सुरक्षा के लिए 2-2 हजार रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा निर्धन परिवारों के लिए जीविका के माध्यम से 16 हजार ग्राम संगठनों को खाद्य सुरक्षा निधि और स्वास्थ्य सुरक्षा निधि उपलब्ध कराई गई है ।
रोजगार से वंचित लोगों को दी जा रही सहायता
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कोरोना काल में बडी़ संख्या में रोजगार से वंचित लोगों को विभाग की योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया गया है। प्रवासी श्रमिकों और जीविका दीदियों द्वारा मास्क का निर्माण सुरक्षात्मक उपाय के साथ-साथ रोजगार का साधन बन गया है। बड़ी तादाद में प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को जीविका से जोड़कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।



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Families of 83 thousand migrant workers associated with livelihood groups for self-employment


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/families-of-83-thousand-migrant-workers-associated-with-livelihood-groups-for-self-employment-127576458.html

आपदा कोष की राशि का अनुपात 75:25 के बदले 90:10 करे केंद्र, 15वें वित्त आयोग को पूरक ज्ञापन भेज बिहार ने रखी मांग

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

बिहार सरकार ने 15वें वित्त आयोग को एक पूरक ज्ञापन भेजकर केंद्र द्वारा दी जाने वाली आपदा कोष की राशि का अनुपात 75:25 से बदल कर उत्तर-पूर्व के राज्यों की तरह 90:10 करने की मांग की है। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सालोंभर बाढ़, सूखा व अन्य आपदाओं से जूझते रहने के कारण बिहार को हर साल अपने खजाने से काफी बड़ी राशि राहत एवं बचाव पर खर्च करनी पड़ती है। इसके साथ ही आपदा राहत कोष की राशि के मदवार वर्गीकरण को भी समाप्त करने की मांग की गई है, ताकि राज्य अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर उसे खर्च कर सके।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 में आपदा राहत कोष में 1,888 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें केद्रांश 1,416 करोड़ और बिहार का अंशदान 472 करोड़ है। अगर केंद्र इस अनुपात को 75:25 से बदल कर 90:10 कर देता है तो बिहार को राज्यांश मद में केवल 188 करोड़ ही देना होगा।

राज्य सरकार को वर्ष 2019-20 में आपदा राहत पर 3,528 करोड़ तथा वर्ष 2017-18 में 3,469 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ा था्र जबकि इसकी तुलना में वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र से बिहार को काफी कम राशि मिली थी। इससे राज्य सरकार को अपने बजट से बहुत बड़ी राशि खर्च करनी पड़ी थी।

आपदा राहत राशि का वर्गीकरण समाप्त हो
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूरक ज्ञापन में आपदा राहत कोष की राशि के विभिन्न मदों में वर्गीकरण किए जाने को समाप्त करने भी मांग की गई है। मसलन, कुल राशि का राहत मद में मात्र 40% और आधारभूत संरचना के पुनर्निमाण आदि पर 30% खर्च करने की बाध्यता हटाने से राज्य अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर राशि खर्च कर पाएगा।

उन्होंने बताया कि ज्ञापन में अनुग्रह अनुदान के तौर पर पीड़ितों को दिए जाने वाले 6-6 हजार रुपए में राहत कोष से मात्र 25% तथा राहत शिविरों में रहने वालों को ही अनुदान की राशि देने की बाध्यता हटाने, मछली उत्पादकों को हुए नुकसान की भरपाई का प्रावधान करने, क्षतिग्रस्त कच्चे-पक्के मकानों के ध्वस्त होने पर प्रतिपूर्ति मद में 95,100 तथा क्षतिग्रस्त होने पर महज 5,200 रुपए के प्रावधान को भी बढ़ाने की मांग की गई है।



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Bihar to put supplementary memorandum to Center, 15th Finance Commission, to make ratio of amount of disaster fund to 90:10 instead of 75:25


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/bihar-to-put-supplementary-memorandum-to-center-15th-finance-commission-to-make-ratio-of-amount-of-disaster-fund-to-9010-instead-of-7525-127576457.html

पटना में पीएमसीएच और आईजीआईएमएस के 26 कर्मी संक्रमित, सिटी में 39 मरीज मिले

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

पटना जिले में शनिवार को 442 कोरोना मरीज मिले हैं। जिले में अबतक संक्रमितों की संख्या 9104 हो गई है। शनिवार को 2310 सैंपल की जांच हुई है। पीएमसीएच के 21 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं। पीएमसीएच में रोहतास के चिकित्सक की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। आईजीआईएमएस के पांच स्वास्थ्यकर्मी और तीन भर्ती मरीज संक्रमित हुए हैं।

गायघाट स्थित निशांत गृह में एक दर्जन से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें बच्चे व कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि इस मामले में निशांत गृह के लोग खुल कर नहीं बोल रहे हैं। सिटी क्षेत्र में 39 पॉजिटिव मरीज मिले हैं। पश्चिम दरवाजा मोहल्ले में एक ही परिवार के तीन लोग संक्रमित हैं। एनएमसीएच के तीन कर्मी भी संक्रमित हुए हैं।

जिला प्रशासन के 20 अफसर हो चुके संक्रमित

अबतक जिला प्रशासन के 20 अधिकारी समेत दो दर्जन से अधिक कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें जिला उद्योग महाप्रबंधक, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला उप निबंधन पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी, जिला उपसमाहर्ता स्थापना, जिला उपसमाहर्ता विभागीय जांच, सीनियर डिप्टी कलक्टर राजस्व, जिला कृषि पदाधिकारी, निदेशक डीआरडीए, जिला श्रम अधीक्षक, जिला आईटी मैनेजर, दानापुर डीसीएलआर, दानापुर एएसडीएम, दानापुर अंचल राजस्व पदाधिकारी, डीसीएलआर बाढ़, एनआईसी एडीआईओ, सिविल सर्जन, डीपीएम, डीडीसी कार्यालय के स्टोनो शामिल हैं। प्रमंडल कार्यालय के भी दो अधिकारी संक्रमित हुए हैं।

बाढ़ में 16 पॉजिटिव मिले
नौबत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 20 लोगों की जांच की गई, जिनमें दो पॉजिटिव पाए गए। इनमें एक नौबतपुर स्थित एक नर्सिंग होम की नर्स अाैर दूसरा चैनपुरा दरियापुर का युवक शामिल है। बाढ़ अनुमंडल अस्पताल से 30 जुलाई को भेजे गए 41 लोगों के सैंपल की जांच रिपोर्ट शनिवार शाम आई। बीडीओ अमरेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि उनमें 16 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पुनपुन पीएचसी में 50 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। उनमें 8 लोग पाॅजिटिव पाए गए। इनमें पोठही के 3, तारणपुर के 2 और लखना, लहलादपुर, चिहूत के 1-1 व्यक्ति हैं।

बिक्रम में एक ही घर के आठ लोग संक्रमित

बिक्रम में एक ही घर के आठ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मसौढ़ी में दो पॉजिटिव मिले। धनरुआ में 5 व बाढ़ पीएचसी में 34 लोगों की जांच में चार लोग पॉजिटिव पाए गए। बेलछी पीएससी में 12 लोगों की जांच में एक पॉजिटिव मिला। रेफरल अस्पताल बिहटा में 46 लोगों की जांच हुई। इनमें तीन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मनेर में 22 लोगों की जांच की गई जिसमें 2 लोग पॉजिटिव निकले। फतुहा में पांच पॉजिटिव मिले। बख्तियारपुर में चार लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। दनियावां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 34 लोगों की जांच हुई जिनमें एक पॉजिटिव मिला।



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26 workers of PMCH and IGIMS infected in Patna, 39 patients found in the city


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/26-workers-of-pmch-and-igims-infected-in-patna-39-patients-found-in-the-city-127576432.html

संविदा पर बहाल कर्मियों की भी विधानसभा चुनाव में लगेगी ड्यूटी, विभाग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से मांगा ब्योरा

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

बिहार विधानसभा के चुनाव में राज्य के विभिन्न विभागों में संविदा पर नियुक्त कर्मियों की भी ड्यूटी लगाने की तैयारी है। निर्वाचन विभाग ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से संविदा पर नियुक्त कर्मियों का ब्योरा उपलब्ध कराने के लिए कहा है। सभी डीएम को 5 अगस्त तक ब्योरा उपलब्ध करा देना है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए चुनाव आयोग ने बिहार में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ा दी है। करीब 34 हजार अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

इसके बाद बिहार में मतदान केंद्रों की संख्या करीब 1 लाख 6 हजार हो गयी है। इसके लिए अतिरिक्त 1 लाख 80 हजार मतदान कर्मियों की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखकर यह तैयारी शुरू की गई है। निर्वाचन विभाग संविदा कर्मियों की उपलब्धता के आधार पर आकलन करेगा।

निर्वाचन विभाग ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को कहा है कि संविदा पर नियुक्त कर्मियों के विभाग का नाम, संविदा नियोजित कर्मी की श्रेणी, पद नाम, पे स्केल या फिक्स्ड पे के साथ कितने पुरुष व महिलाकर्मी हैं, उनका ब्यौरा उपलब्ध कराएं। बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा का चुनाव प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

सुरक्षा बलों के लिए वोटिंग से पहले जिलों में बनाए जाएंगे स्पेशल क्वारेंटाइन सेंटर
कोरोना संक्रमण को देखते हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों के लिए स्पेशल क्वारेंटाइन की व्यवस्था होगी। कोरोना से संक्रमित होने पर उन्हें स्पेशल क्वारेंटाइन में ही रखा जाएगा। इसे देखते हुए सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है। आयोग ने कहा है कि चुनाव के दौरान प्रतिनियुक्त किए जाने वाले केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल और राज्य पुलिस फोर्स के कर्मियों के लिए स्पेशल क्वारेंटाइन की व्यवस्था होगी।

जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही इसकी व्यवस्था कर लेनी है। इसके लिए उन्हें जिलों में अस्पतालों से टाईअप करना है या अलग से व्यवस्था करनी है। आयोग ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को इस बाबत पत्र लिखा है।



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Contract reinstated personnel will also be engaged in the assembly elections, the department asked for details from all district election officials


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/contract-reinstated-personnel-will-also-be-engaged-in-the-assembly-elections-the-department-asked-for-details-from-all-district-election-officials-127576431.html

बाढ़ के कारण घटी 700 मेगावाट बिजली की मांग, दरभंगा, गोपालगंज व चंपारण में सप्लाई प्रभावित

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

बाढ़ के कारण राज्य के बड़े हिस्से में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। जहां दरभंगा सुपरग्रिड में पानी घुस जाने से बिजली आपूर्ति बाधित है, वहीं गोपालगंज व चंपारण के इलाके में डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को क्षति पहुंचने से उस इलाके में भी बिजली की समस्या उत्पन्न हो गयी है। इसकी वजह से बिहार में इस समय 600 से 700 मेगावाट बिजली की डिमांड कम हो गयी है।
सबसे बड़ी परेशानी दरभंगा ग्रिड को लेकर है। यहां पानी घुस जाने के कारण बड़े इलाके में बिजली आपूर्ति ठप है। हालांकि, आपात स्थिति में वैकल्पिक मार्ग से बिजली की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वह जरूरत से काफी कम है। इस ग्रिड से लगभग 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती है। यहां से मोतिहारी तक बिजली जाती है।

वैकल्पिक मार्ग से हो रही बिजली की सप्लाई
दरभंगा के अलावा मधुबनी, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी के कई हिस्साें में बिजली संकट उत्पन्न हो गयी है। इन इलाकों को वैकल्पिक मार्ग से लगभग 100 मेगावाट बिजली दी जा रही है। सभी इलाकों में रोटेशन से बिजली की आपूर्ति हो रही है। उधर, गोपालगंज और चंपारण के इलाके में डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को बाढ़ से क्षति पहुंची है। 35 व 11 केवी लाइन को अधिक क्षति पहुंची है। इसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।



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700 MW power demand reduced due to floods, supplies affected in Darbhanga, Gopalganj and Champaran


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/700-mw-power-demand-reduced-due-to-floods-supplies-affected-in-darbhanga-gopalganj-and-champaran-127576430.html

27 कंटेनमेंट जोन को मिला कर बनाए गए 10 बफर जोन, आवश्यक सामग्री को छोड़कर अन्य दुकानों को खोलने पर रोक जारी

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

जिले के चार अनुमंडल के 27 कंटेनमेंट जोन को मिलाकर 10 बफर जोन बनाए गए हैं। यहां आवश्यक सामग्री को छोड़कर अन्य दुकानों को खोलने पर रोक जारी है। सदर एसडीअाे तनय सुल्तानिया ने कहा कि कंटेनमेंट जोन में दुकान खाेलने सहित सभी गतिविधियाें पर रोक है। वहीं, बफर जोन में आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को छोड़ अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों को खोलने पर रोक लगा दी गई है। जिले में 103 जगहों पर कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।

सदर अनुमंडल: पटना सदर अनुमंडल क्षेत्र के राजीवनगर रोड नंबर 1 से 24 तक की छोटी-बड़ी गली को बैरिकेड कर बफर जोन बनाया गया है। यहां 4 कंटेनमेंट जोन हैं। वहीं, कंकड़बाग स्थित शिवाजी पार्क से पोस्टल पार्क तक बफर जोन बनाया गया है। यहां 8 कंटेनमेंट जोन हैं।
दानापुर अनुमंडल: दानापुर अनुमंडल क्षेत्र के गोला रोड में एक बफर जोन बनाया गया है। यहां 6 कंटेनमेंट जोन हैं।
पटना सिटी अनुमंडल: पटना सिटी अनुमंडल क्षेत्र के सुल्तानगंज इलाके में एक बफर जोन बनाया गया है। यहां 3 कंटेनमेंट जोन हैं। वहीं, ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में एक बफर जोन बनाया गया है। यहां 4 कंटेनमेंट जोन हैं। खाजेकलां इलाके में एक बफर जोन बनाया गया है। यहां 2 कंटेनमेंट जोन हैं।
बाढ़ अनुमंडल: बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र के मोकामा इलाके में 2 और बख्तियारपुर इलाके में 2 बफर जोन हैं।



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Prohibition on opening of shops other than required material, 10 buffer zones created by merging 27 container zones


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/prohibition-on-opening-of-shops-other-than-required-material-10-buffer-zones-created-by-merging-27-container-zones-127576429.html

25 लाख की सांसद निधि से बनने वाले मंगल भवन का कार्य शुरू

Posted: 01 Aug 2020 05:22 PM PDT

नगर में 25 लाख की सांसद निधि से 2018-19 में नगर में स्वीकृत मंगल भवन का कार्य अब दो साल बाद शुरु हुआ है। इस भवन के बनने से नगर सहित क्षेत्र के लोगों को सामूहिक आयोजनों की दृष्टि से सुविधा मिलेगी। यह भवन नगर में छात्रावास के पास बन रहा है जिसका निर्माण पी डब्लू डी विभाग की देखरेख में हो रहा है। नगर सहित आसपास की बढ़ी आबादी के लिए सुल्तानगंज केंद्र जहां व्यक्तिगत और सामूहिक आयोजन के लिए अभी तक कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।

इसी परेशानी को देखते हुए तत्कालीन सांसद और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जनप्रतिनिधियों और जनता की मांग पर यह सौगात दी थी। इस भवन के बनने से लोगों को स्थाई व्यवस्था के साथ कम खर्च में अपने आयोजन करने की सुविधा मिलेगी। ग्रामीण धर्मेंद्र सिंह, वीरेंद्र सोलंकी, राहुल जैन आदि ने बताया कि भवन बनने के बाद ग्रामीणों को बड़ी सौगात होगी।

मंडल अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह यादव ने बताया कि लोगों की एक ही मांग पर सुल्तानगंज के लिए तत्कालीन सांसद ने अपनी संसद निधि से 40 लाख की सौगात दी थी। जिसमें 15 लाख सुलभ सुविधा केंद्र के लिए और 25 लाख मंगल भवन के लिए था। सुलभ केंद्र तो बन गया है मंगल भवन भी जल्दी ही बनकर लोगों की सुविधा के लिए तैयार हो जाएगा।



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Work on Mangal Bhawan to be made with MP fund of 25 lakhs started


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/sultanganj/news/work-on-mangal-bhawan-to-be-made-with-mp-fund-of-25-lakhs-started-127576414.html

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