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Monday, August 3, 2020

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*हर कलाकार पहुंचे शिखर पर, हर एक के हो सपने साकार, हर एक की तमन्ना हो पूरी यही उद्देश्य व लक्ष्य है बारंबार - आदित्य सक्सेना*

Posted: 03 Aug 2020 06:17 AM PDT

**हर कलाकार पहुंचे शिखर पर, हर एक के हो सपने साकार, हर एक की तमन्ना हो पूरी यही उद्देश्य व लक्ष्य है बारंबार - आदित्य सक्सेना*



भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरु सिंह राठौड़)! आज के संघर्षरत कलाकारों के बारे में ऊंची एवं सकारात्मक सोच रखने वाले व उन्हें हर कदम पर उनके सपनों को साकार करने का माद्दा रखने वाले मध्यप्रदेश के मुरैना शहर की आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना कहते हैं कि हौसलों में उड़ान होती है उन्हें पंखों की जरूरत नहीं होती हैं! इस बात साकार कर दिखाया है, आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना ने उन्होंने अपनी कंपनी के द्वारा कोरोना वायरस के समय लॉकडाउन में कई महीने लगातार ऑनलाइन प्रतियोगिताएं' कराई है, और यह बता दिया है कि अगर कलाकारों के अंदर यदि कला है, तो वह सोशल मीडिया पर भी जा सकता है! कोरोना महामारी के कारण सभी प्रतियोगिताएं बंद है! वही आदित्य क्रिएशन कंपनी द्वारा बच्चों और बड़ों को ऑनलाइन प्रतियोगिताओ में आमंत्रित किया जा रहा है, सभी बच्चों को सर्टिफिकेट और ट्रॉफी दिए गए है, और एक नया प्लेटफार्म दिया है! फ्लिपकार्ट अमेजॉन में काम करने का भी मौका मिलेगा लॉकडाउन के बाद हौसला अफजाई खुद कंपनी के  डायरेक्टर" आदित्य सक्सेना " कर रहे हैं! आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना ने इस संवाददाता भैरु सिंह राठौड़ को बातचीत के दौरान बताया कि कलाकारों की कला को निखारना ही उनका  प्रथम लक्ष्य और उद्देश्य है! उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के अंदर छुपी हुई कला को सही प्रोत्साहन मिले तो उसे बाहर लाया जा सकता है, जिससे वह देश विदेश में अपना नाम रोशन कर सकता हैं। मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में निवास करने वाले आदित्य सक्सेना अपनी मातृभूमि चंबल से बहुत प्रभावित है, और चंबल और दूसरी जगह  के कलाकारों को आगे लाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं! जिससे मुरैना का नाम रोशन हो रहा है, मुरैना में कलाकारों की कमी नहीं है बस उन्हें सही मार्ग दर्शन की जरुरत है, और यह कार्य "आदित्य क्रिएशन" कंपनी द्वारा बखूबी किया जा रहा है! कंपनी में लॉकडाउन में फैशन रनवे (किंग/ क्वीन), सुपर मॉम, सुपर डैड, सुपर किड्स एवं सुपर फैशन डिजाइनर, एक शाम मोहम्मद रफी के नाम आदि प्रतियोगिताएं आयोजित कराई गई है। आदित्य सक्सेना ने आगे बताया कि आगामी दिनों में कंपनी के द्वारा ऐसे ही ऑनलाइन प्रतियोगिता करा कर धौलपुर व आसपास के जिलों में छुपी प्रतिभाओं को खोज निकाला जाएगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग प्रतियोगिता में हिस्सा लें व उसे सफल बनाएं और नई प्रतियोगिता "एक शाम मोहम्मद रफी के नाम" कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना द्वारा 31 जुलाई की जा रही है हां अन्य कंपनियां प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वालों से शुल्क वसूल रही हैं! जबकि आदित्य क्रिएशन कंपनी  द्वारा कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है! इसीलिए यह कंपनी सभी को खूब भा रही है। आदित्य सक्सेना समाज सेवा का भी बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं, और उनकी कंपनी के द्वारा जो लोग करोना कॉल में अच्छा कार्य कर रहे हैं उनको कंपनी द्वारा सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है! यह काम कंपनी पूरी तरह निशुल्क काम कर रही है यह कंपनी कलाकारों के साथ खड़ी रहती है जब उनको जरूरत पड़ती है तब आदित्य क्रिएशन कंपनी द्वारा उनकी हमदर्द बनकर साथ खड़ी रहती हैl.            

*रिपोर्ट - भैरु सिंह राठौड़, भीलवाड़ा (राजस्थान) 09799988158*


भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरु सिंह राठौड़)! आज के संघर्षरत कलाकारों के बारे में ऊंची एवं सकारात्मक सोच रखने वाले व उन्हें हर कदम पर उनके सपनों को साकार करने का माद्दा रखने वाले मध्यप्रदेश के मुरैना शहर की आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना कहते हैं कि हौसलों में उड़ान होती है उन्हें पंखों की जरूरत नहीं होती हैं! इस बात साकार कर दिखाया है, आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना ने उन्होंने अपनी कंपनी के द्वारा कोरोना वायरस के समय लॉकडाउन में कई महीने लगातार ऑनलाइन प्रतियोगिताएं' कराई है, और यह बता दिया है कि अगर कलाकारों के अंदर यदि कला है, तो वह सोशल मीडिया पर भी जा सकता है! कोरोना महामारी के कारण सभी प्रतियोगिताएं बंद है! वही आदित्य क्रिएशन कंपनी द्वारा बच्चों और बड़ों को ऑनलाइन प्रतियोगिताओ में आमंत्रित किया जा रहा है, सभी बच्चों को सर्टिफिकेट और ट्रॉफी दिए गए है, और एक नया प्लेटफार्म दिया है! फ्लिपकार्ट अमेजॉन में काम करने का भी मौका मिलेगा लॉकडाउन के बाद हौसला अफजाई खुद कंपनी के  डायरेक्टर" आदित्य सक्सेना " कर रहे हैं! आदित्य क्रिएशन कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना ने इस संवाददाता भैरु सिंह राठौड़ को बातचीत के दौरान बताया कि कलाकारों की कला को निखारना ही उनका  प्रथम लक्ष्य और उद्देश्य है! उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के अंदर छुपी हुई कला को सही प्रोत्साहन मिले तो उसे बाहर लाया जा सकता है, जिससे वह देश विदेश में अपना नाम रोशन कर सकता हैं। मध्यप्रदेश के मुरैना शहर में निवास करने वाले आदित्य सक्सेना अपनी मातृभूमि चंबल से बहुत प्रभावित है, और चंबल और दूसरी जगह  के कलाकारों को आगे लाने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं! जिससे मुरैना का नाम रोशन हो रहा है, मुरैना में कलाकारों की कमी नहीं है बस उन्हें सही मार्ग दर्शन की जरुरत है, और यह कार्य "आदित्य क्रिएशन" कंपनी द्वारा बखूबी किया जा रहा है! कंपनी में लॉकडाउन में फैशन रनवे (किंग/ क्वीन), सुपर मॉम, सुपर डैड, सुपर किड्स एवं सुपर फैशन डिजाइनर, एक शाम मोहम्मद रफी के नाम आदि प्रतियोगिताएं आयोजित कराई गई है। आदित्य सक्सेना ने आगे बताया कि आगामी दिनों में कंपनी के द्वारा ऐसे ही ऑनलाइन प्रतियोगिता करा कर धौलपुर व आसपास के जिलों में छुपी प्रतिभाओं को खोज निकाला जाएगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग प्रतियोगिता में हिस्सा लें व उसे सफल बनाएं और नई प्रतियोगिता "एक शाम मोहम्मद रफी के नाम" कंपनी के डायरेक्टर आदित्य सक्सेना द्वारा 31 जुलाई की जा रही है हां अन्य कंपनियां प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वालों से शुल्क वसूल रही हैं! जबकि आदित्य क्रिएशन कंपनी  द्वारा कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है! इसीलिए यह कंपनी सभी को खूब भा रही है। आदित्य सक्सेना समाज सेवा का भी बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं, और उनकी कंपनी के द्वारा जो लोग करोना कॉल में अच्छा कार्य कर रहे हैं उनको कंपनी द्वारा सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है! यह काम कंपनी पूरी तरह निशुल्क काम कर रही है यह कंपनी कलाकारों के साथ खड़ी रहती है जब उनको जरूरत पड़ती है तब आदित्य क्रिएशन कंपनी द्वारा उनकी हमदर्द बनकर साथ खड़ी रहती हैl.            

*रिपोर्ट - भैरु सिंह राठौड़, भीलवाड़ा (राजस्थान) 09799988158*

*कमलनाथ का अपना राम*

Posted: 02 Aug 2020 07:53 PM PDT



मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दिन प्रदेश में हनुमान चालीसा का पाठ करने का आव्हान कांग्रेस कार्यकर्ताओं से किया है .कमलनाथ के इस फिसले से कांग्रेसी भ्रमित और बाक़ी जनता चकित है .लेकिन जो कमलनाथ को जानते हैं उन्हें पता है कि कमलनाथ का फैसला चौंकाने वाला नहीं है .वे अपनी रामभक्ति का इस्तेमाल पहली बार सियासी लाभ के लिए कर रहे हैं .
कमलनाथ संजय गांधी की पीढ़ी के नेता हैं और अब बुढ़ा चुके हैं,फिर भी वे अपने कन्धों से कोई जिम्मेदारी कम करने को तैयार नहीं हैं .वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं,प्रतिपक्ष के नेता हैं ,वे कांग्रेस के सब कुछ हैं.जब कांग्रेस की प्रदेश में सत्ता थी तब भी वे ही सब कुछ थे.उनके सब कुछ होने के कारण ही कांग्रेस के पास अब कुछ भी नहीं है और हनुमान चालीसा का पाठ करवा कर भी वे कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे .
जानने वाले जानते हैं कि कमलनाथ के लिए किसी भी पार्टी की सत्ता हो परेशानी का सबब नहीं है. वे जितने कांग्रेस की सत्ता में प्रभावी थे उतने ही भाजपा की सत्ता में आज हैं और आज से पहले भी थे .वे सौजन्य में दक्ष हैं,व्यावहारिक हैं और निडर व्यापारी हैं .उन्हें भाजपा ने अपने जाल में उलझाने की कोशिश की थी लेकिन उनके साले साहब ही उलझ पाए,वे नहीं भले ही इसके एवज में उन्हें अपनी सरकार गंवाना पड़ी .उनके ताजा निर्णय से कांग्रेस में भ्रम की स्थिति है लेकिन कमलनाथ को कोई भ्रम नहीं है और जहां तक मुमकिन होगा वे अपने निर्णय पर अमल भी करा लेंगे .
राम मंदिर के भूमि पूजन में प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति को लेकर कांग्रेस का जो भी रुख रहा हो लेकिन कमलनाथ का रुख साफ़ है .वे न इसके खिलाफ हैं और न प्रदेश में अपनी पार्टी को इस निर्णय की खिलाफत करना देना चाहते हैं ,ये पार्टी के फ़ायदे के लिए है या उनके अपने फ़ायदे के लिए ये केवल कमलनाथ और उनकी पार्टी का हाईकमान जानता है .भाजपा का हाईकमान भी जानता होगा किन्तु इस बारे में मै अधिकारपूर्वक कुछ नहीं कह सकता .मै सिर्फ इतना कह सकता हूँ कि कमलनाथ ने फैसला लेने में देर कर दी .उनकी इस शतुर्मुर्गी मुद्रा का कांग्रेस को होने वाले विधानसभा चुनावों में कोई लाभ मिलने वाला नहीं है .
राम को लेकर भाजपा और कांग्रेस में बुनियादी भेद है. भाजपा ने शुरू से राम और उनके मंदिर को अपने सियासी एजेंडे में शामिल करके रखा जबकि कांग्रेस इस मुद्दे पर कभी मुखर नहीं हुई जबकि कांग्रेस की भूमिका इस मंदिर के निर्माण में रेखांकित की जाने वाली है .कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री रहे पीव्ही नरसिम्हाराव हों या राजीव गांधी सबने राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करने में अहम भूमिका निभाई लेकिन कभी इसका ढिंढोरा नहीं पीटा .कांग्रेस की यही गलती कांग्रेस को ले डूबी और अब गलती सुधरने का समय शेष नहीं है .कांग्रेस का जो नुक्सान होना था वो तो हो चुका .
देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ हो ,लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस मंदिर निर्माण के मुद्दे को राजनीतिक बनाकर उसका लाभ लेने के खिलाफ हैं .ऐसी खिलाफत करने वाले भी राम के ही भक्त हैं ,उन्हें रावण का भक्त नहीं कहा जा सकता .भाजपा ने राम मंदर के मुद्दे को अपनाया,ज़िंदा रखा और आज उसके साकार होने पर उसका सारा श्रेय भी अपनी झोली में डाल लिया .आज राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट भी भाजपा की झोली में हैं और राम भी लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में और जहाँ राम मंदिर बनाया जाना है उस प्रदेश में भी राम राज का कोई चिन्ह नहीं है .राम आज भी अपने राज की स्थापना के लिए बैचैन होंगे,मंदिर बनने से उन्हें शायद उतनी खुशी नहीं होगी जितना की राम राज की स्थापना न होने का दुःख होगा .
बात कमलनाथ की राम भक्ति की है. कमलनाथ की राम भक्ति को कांग्रेस की राम भक्ति समझने की गलती किसी को नहीं करना चाहिए. कमलनाथ केवल अपनी सुविधा,संतोष और सुरक्षा केलिए राम भक्त बने हुए हैं .राम भक्ति हो या अंधभक्ति चूंकि निजी आस्था का विषय है इसलिए मै इस मुद्दे पर कम ही बोलता/लिखता हूँ.मै किसी की धार्मिक भावना को आहत करने से हमेशा बचता हूँ .मै बिना सर्टीफिकेट वाला पक्का और असली राम भक्त हूँ लेकिन मै कभी भी इस मुद्दे को प्राथमिकता में रखने के खिलाफ रहा हूँ.मेरी आज भी मान्यता है कि ये सारे काम सरकार के नहीं है. सरकारों को ऐसे सभी धार्मिक कार्यों से दूर रहना चाहिए .
राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के क्या संकेत देश में जायेंगे इसकी परवाह न भाजपा को है और न खुद प्रधानमंत्री को .वे तो इस घटना से अभिभूत हैं .उनका मन सुख अकल्पनीय है लेकिन मै मानता हूँ कि इसके पीछे केवल और केवल राजनीतिक दूरदृष्टि है.रामभक्ति नहीं. उनके और पूरी भाजपा के राम भक्त होने में मुझे कोई संदेह नहीं है और न मै इसे गलत मानता हूँ किन्तु जिस तरह से भाजपा ने बीते चार दशक में राम के नाम का दोहन किया है वो दुर्भाग्यपूर्ण है .
देश में एक नहीं अनेक राम मंदिर हैं.दुसरे बड़े-बड़े मंदिर हैं जिनकी प्रतिष्ठा और आमदनी किसी दुसरे मंदिर के मुकाबले कहीं ज्यादा है लेकिन गनीमत ये है कि इनमें से कसी की भी राजनीति में कोई भागीदारी नहीं है .अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद देश की लंगड़ी अर्थव्यवस्था,लचर विदेश नीति और असुरक्षित सीमाएं यदि सुरक्षित होती हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यदि सूरते हाल में कोई तब्दीली नहीं आती तो जैसा दिखावा कमलनाथ कर रहे हैं वैसा ही दिखावा भाजपा का भी प्रमाणित हो जाएगा .कोरोनाकाल में प्रधानमंत्री जी जिस तरिके से अपना दाढ़ी बढ़ा रहे हैं उसे देखकर लगता है कि वे अब अवतारों में शामिल होकर ही मानेंगे और राम मंदिर इस दिशा में उनका पहला पड़ाव होगा .
@ राकेश अचल वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर

*संपादकीय /छंटते प्रश्न और बढ़ता राम रथ*

Posted: 02 Aug 2020 07:36 PM PDT


*०प्रतिदिन* -राकेश दुबे जी वरिष्ठ पत्रकार भोपाल
०३ ०८ २०२०
*छंटते प्रश्न और बढ़ता राम रथ*
श्री राम जन्मभूमि पर राम का मन्दिर बनाने की सदियों चली यात्रा "साकार" हो रही है | इस यात्रा के मार्ग में बहुत से सवाल और बवाल आये | १५२६ से २०२० तक की यात्रा के कई पड़ाव हैं | भारत की न्यायपालिका ने इस यात्रा को साकार में बदलने कीर्ति पत्र पिछले वर्ष २०१९ में जिस उद्देश्य से जारी किया था लगभग सब वैसा ही होता नजर आ रहा है | प्रश्न पूछना और उत्तर देना आज के जनतान्त्रिक भारत का तकाजा है | बहुत से उचित–अनुचित प्रश्नों के सवाल -जवाब से पहले सम्पूर्ण यात्रा पर एक दृष्टि :-
१५२६ : इतिहासकारों के मुताबिक, बाबर इब्राहिम लोदी से जंग लड़ने १५२६ में भारत आया था। बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने १५२८ में अयोध्या में मस्जिद बनवाई। बाबर के सम्मान में इसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया। १८५३ : अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की। हिंदू समुदाय ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई।
१९४९ : विवादित स्थल पर सेंट्रल डोम के नीचे रामलला की मूर्ति स्थापित की गई।१९५० : हिंदू महासभा के वकील गोपाल विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग की।१९५९ : निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताया।१९६१ : सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने मूर्ति स्थापित किए जाने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई और मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया।१९८१ : उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जमीन के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।१९८५ : फैजाबाद की जिला अदालत ने राम चबूतरे पर छतरी लगाने की महंत रघुबीर दास की अर्जी ठुकराई।१९८९ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।१९९२ : अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया।
२००२ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।२०१० : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने २:१ से फैसला दिया और विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बराबर बांट दिया।२०११ : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।२०१६ : सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत मांगी।२०१८ : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।६ अगस्त२०१९ : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हिंदू और मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई शुरू की।१६ अक्टूबर २०१९ : सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई।
तीस साल पहले १९९० में "सोमनाथ से अयोध्या जी" की रथयात्रा पर निकले लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था - "यह जो रथ है,लोकरथ है..जनता का रथ है, जो सोमनाथ से चला है और जिसके मन में संकल्प है कि 30 अक्टूबर को अयोध्या जी पहुंच कर कारसेवा करेंगे और मंदिर वहीं बनाएंगे..इसको कौन रोकेगा..?" उनका रथ रुक गया | इस कालावधि में ग्रह-नक्षत्र और विज्ञान ने अपनी गवेषणा की, पुरातत्व ने खुदाई की, कानून से कायदे खोजे, मेल- मुलाकतें हुई और अंत में ९ नवम्बर २०१९ को देश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद चला "राम रथ" अब ५ अगस्त २०२० को अयोध्या में साकार दिखेगा |
यात्रा के बीते पड़ावों में बहुत से सवाल उठे, बने –बिगड़े, समाज को हिलाया भी, समाज में कभी रार तो कभी प्यार दिखा |आज भी सवालों की कमी नहीं है, उठ रहे हैं, इनके जवाब में अगले भारत की तस्वीर होगी | पत्रकारिता का धर्म महाभारत काल से अब तक हकीकत बयान करने का है| आज के उठते –गिरते सवालों पर निरंतर दृष्टि रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार द्वय *श्री महेश श्रीवास्तव* और *श्री विजय दत्त श्रीधर* को उत्तर और समाधान के साथ आपसे रूबरु करने की कोशिश भी होगी | [निरंतर अगला प्रतिदिन ]

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