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Tuesday, August 4, 2020

जनवादी पत्रकार संघ

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Posted: 04 Aug 2020 08:08 AM PDT

म.प्र.मेंं सुखशांति व राममंदिर भूमि पूजन हेतु सबलगढ़ कांग्रेसियों ने किया सुन्दरकाण्ड व हनुमान चालीसा पाठ।

सबलगढ़/ कांग्रेश प्रदेशाध्यक्ष के आह्वान पर राममंदिर भूमि पूजन हेतु व मध्य्प्रदेश में सुखशांति के लिए सबलगड़ में सुन्दरकाण्ड व हनुमान चालीसा का पाठ किया गया जिसमें ब्लॉक अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जादोन एडवोकेट के द्वारा बताया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी द्वारा  1 फरवरी 1986 को राम मंदिर का ताला खोला गया था जो कि कांग्रेस पार्टी से थे,भगवान राम हम सभी के आराध्य हैं कांग्रेश पार्टी भी हिन्दू धर्म को मानती है इसलिए मध्यप्रेदश की सुखशांति व राम मंदिर के भूमिपूजन(नीव रखने )हेतु हमारी सुभकामनाएँ हैं उक्त पाठ सबलगढ़ राम मंदिर में किया गया जिसमें ब्लॉक अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जादोन एडवोकेट ,गोपालदास गुप्ता एडवोकेट,रघुनाथ सिंह,सोबरन सिंह जादोन,कमल रावत जिला पंचायत सदस्य,अशोक रामपुरी,सी.पी.शर्मा,श्रीपति प्रजापति,वासुदेव त्यागी,अजयप्रताप सिंह,शिवकुमार जादोन,डॉ विजय सिंह रावत,पप्पू बंसल आदि उपस्थित रहे।

Posted: 04 Aug 2020 08:05 AM PDT

सुनवाई न होने पर सामाजिक कार्यकर्ता का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह।

सबलगढ़/ज्ञात हो कि आर.टी.आई एवं सामाजिक कार्यकर्ता  जीतेन्द्र जाटव तहसील प्रांगड़ में धरने पर बैठे हुए हैं उनके  द्वारा बताया गया कि मेरे द्वारा प्रधानमंत्री उज्वला योजना में घोटाला,जाति भेदभाव,रिश्वत एवं धोखाधड़ी हेतु ज्ञापन दिए गए थे व आरटीआई फाइल की गई थी जिसमें कलेक्टर मोरेना द्वारा अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ़ को पत्र भेजा गया जो कि प्र. क्र.2020/111/5764 दिनांक 26/06/2020 को भेजे गए पत्र में प्रधानमंत्री उज्वला योजना में घोटाला जाति भेदभाव,रिश्वत एवं धोखाधड़ी,सीएम हेल्प लाइन में लापरवाही वावत, आवेदक जीतेन्द्र जाटव s/o लालपति जाटव निवासी रामपुरकला तहसील सबलगढ द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी चाही गई है इस संदर्भ में आवेदक द्वारा प्रस्तुत पेन ड्राइव सहित मुलतः संलग्न कर भेजी जा रही है उक्त शिकायत के निराकरण से आवेदक को अवगत कराने का कष्ट करें ।
जीतेंद्र जाटव का कहना है कि एक माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी मुझे अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ द्वारा जानकारी प्रदान नहीं की गई है कई बार  जनसुनवाई में व कार्यालयीन समय में मेरे द्वारा एस डीएम ऑफिस के चक्कर काट चुका हूं लेकिन आज दिनांक तक मुझे कोई जानकारी प्रदान नहीं की गई है ऐसे में कलेक्टर के पत्र की भी अवहेलना की गई है मेरे द्वारा थक हार कर अनुविभागीय अधिकारी से अनुमति लेकर आज दिनांक 04/08/2020 से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर सत्याग्रह किया जा रहा है जो कि कार्यालयीन समय मे किया जावेगा जब तक मेरे द्वारा चाही गई जानकारी प्राप्त नहीं होती है मेरा धरना चालू रहेगा।

बाईट--आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी जिस संस्था की है  वंही से दी जाएगी अगर संस्था के द्वारा जानकारी नहीं दी गई है तो वह सम्बंधित संस्था विभाग में अपील कर सकते हैं।

अंकिता धाकरे (आई ए एस)
अनुविभागीय अधिकारी सबलगढ।

*देश की रक्षा में सरहदों पर तैनात सैनिकों की कलाइयों में सजेगी मेरी राखी - रिध्दि श्रीवास्तव*

Posted: 04 Aug 2020 08:03 AM PDT


*देश की रक्षा में सरहदों पर तैनात सैनिकों की कलाइयों में सजेगी मेरी राखी - रिध्दि श्रीवास्तव*

*(प्रयागराज की नन्हीं रिध्दि ने दिया है स्वदेशी अपनाने का संदेश, अपने हाथों से बनाई हैं देश के रक्षकों के लिए राखियाँ)*


भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरु सिंह राठौड़)! आज देश में युवाओं के साथ साथ नन्हें बच्चों में देश भक्ति की भावनाओं की कोई कमी नहीं है! जहाँ बच्चों को स्वदेशी अपनाने का बखूबी ज्ञान है, वही देश की सीमा पर देश के लोगों के जीवन की सुरक्षा में दिन रात डटे हुए फौजियों के प्रति भी उनका गहरा लगाव है! ऐसा ही प्रयागराज के रहने वाले अतुल श्रीवास्तव व मोनिका श्रीवास्तव की 9 साल की पुत्री एवं प्रयागराज सेंट मैरी कान्वेंट स्कूल की कक्षा 3 की छात्रा नन्ही रिध्दि कुमारी है! जिसने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने देश के वीर जवानों के लिए अपने हाथों से पिछले कई दिनों से राखी बनाकर उन्हें देश के वीर जवानों सैनिकों को भेजने का फैसला किया है! उसने सभी राखियां अपने हाथों से बनाई और पूरी तरह से स्वदेशी सामग्रियों से निर्मित किया है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को आगे बढ़ाने में वह अपना योगदान दे रही हैं! नन्ही रिध्दि ने सबसे निवेदन है किया कि सभी इस राखी *लोकल को वोकल* करें! उसने सभी से अनुरोध है किया कि आइये आज इस रक्षा बंधन के शुभ अवसर पर हम लोग यह प्रतिज्ञा लें कि हम ना ही चाइनीस सामानों को खरीदेंगे और ना ही उनका उपयोग करेंगे और अपने लोकल सामानों को ही प्राथमिकता देकर उनको खरीदेंगे और लोकल को वोकल करके अपने देश के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के सपनों को साकार करेंगे! 
*रिद्धि श्रीवास्तव*
 पुत्री श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव w/o श्री अतुल श्रीवास्तव 
Class 3
सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल
प्रयागराज
वाकई नन्ही रिध्दि कुमारी के हौसले और उसके देश भक्ति के जज़्बे को सौ सौ सलाम है, और नमन है उन माता पिताओं को जिन्होंने इस बच्ची को जन्म दिया है, और सलाम है उस स्कूल के शिक्षकों को जिन्होंने इस बच्ची को ऐसे देश भक्त संस्कार दिए हैं! इस नन्ही बच्ची रिध्दि की देश भक्त बातें देश में रहने वाले उन तमाम देशद्रोहियों व गद्दारों के लिए कड़वा सबक है जो खाते देश का है और गुणगान दुश्मन देश का करते हैं!

*रिपोर्ट - भैरु सिंह राठौड़, भीलवाड़ा (राजस्थान) 09799988158*

सतयुग की सबरी को राम मिले थे,कलियुग की सबरी को राक्षस क्यों- मोहम्मद जावेद खान

Posted: 04 Aug 2020 07:58 AM PDT


*सतयुग की सबरी को राम मिले थे, कलियुग की सबरी को राक्षस क्यों - मोहम्मद जावेद खान*

*राम ही तो करूणा में हैं,*
*शांति में हैं राम ।*
*राम ही हैं एकता में,*
*प्रगति में हैं राम ।*
भीलवाड़ा, राजस्थान (भैरु सिंह राठौड़) आगरा में दबंगों द्वारा दलित सबरी के साथ किए गए अत्याचार की घटना को (मध्यप्रदेश) भोपाल मेट्रो न्यूज़ समाचार पत्र के संपादक मोहम्मद जावेद खान ने बड़े ही मार्मिक अंदाज में पेश किया है! जावेद खान का कहना है कि राम के देश में ,राम की धरती पर, ऊंची जाति के दबंगों ने एक दलित महिला का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। उसके शव को चिता से उठाकर दूर रखवा दिया उस दलित महिला के परिवार से गलती यह हुई की वह श्मशान ऊंची जाति के लोगों का था,जहां पर दलित महिला को अंतिम संस्कार के लिए ले गए थे । उस दलित महिला का नाम शबरी था, भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खा कर एक संदेश दिया था, अयोध्या के राजकुमार एवं भगवान होने के बावजूद भील जाति की महिला के झूठे बेर बड़े चाव से खाए । शबरी की कहानी सबको मालूम है,फिर भी मैं आपको याद दिलाता हूं ।
एक शबरी वह थी,जिस के झूठे बेर भगवान राम ने खाए थे, और एक बदनसीब शबरी यह है, जिसका अंतिम संस्कार ऊंची जाति के दबंगों ने नहीं करने दिया! वनवास के समय भगवान राम जंगल से गुजर रहे थे, उनकी नजर शबरी की कुटिया पर पड़ी भगवान राम को देखकर शबरी खुशी से झूम उठी और जंगल से जंगली कंद-मूल और बेर लेकर आईं, बेर कहीं खट्टे न हों, इसलिए शबरी ने बेरों को चख-चखकर श्रीराम व लक्ष्मण को भेंट करने शुरू कर दिए। श्रीराम शबरी की श्रद्धा व भक्ति को देखकर बड़े प्रेम और सहज भाव के साथ झूठे बेर खाते रहे ।
इस युग की शबरी जिसने दलित परिवार में जन्म लिया जिंदगी भर उच्च जाति के दबंगों का अत्याचार सेहती रही, मौत के बाद भी अत्याचार का सिलसिला नहीं थमा! यह घटना आगरा के अछनेरा तहसील के रायभा गांव की है! उच्च जाति के दबंगों ने चिता से शव उतरवा दिया क्योंकि महिला दलित थी! शबरी का छह साल का बेटा अपनी मां की चिता को आग देने जा रहा था, तभी गांव के ऊंची जाति के दबंगों ने आकर उसे रोक दिया और शव चिता से उतरवा दिया ।
यह मामला आगरा पुलिस के भी सामने पहुंचा । सर्किल अफ़सर और स्टेशन अफ़सर मौके पर भी पहुंचे लेकिन उसी श्मशान घाट पर दलित महिला का अंतिम संस्कार नहीं करवा सके ।
एक दलित महिला का शव वहां जातिवादी मानसिकता रखने वाले उच्च वर्गों के लोगों ने इसलिए चिता से हटा दिया, क्योंकि वह श्मशान-घाट उच्च वर्गों का था, जो यह अति-शर्मनाक व अति-निंदनीय है ।
अभी तक हम लोग भगवान राम को नहीं समझ पाए, राम क्या है?
मर्यादा,शौर्य,सुरक्षा और गरिमा हैं राम, इन चार शब्दों का अर्थ है राम । राम का अर्थ है 'प्रकाश'। किरण एवं आभा जैसे शब्दों के मूल में राम है। 'रा' का अर्थ है आभा और 'म' का अर्थ है मैं, मेरा और मैं स्वयं। राम का अर्थ यह है। मेरे भीतर प्रकाश, मेरे ह्रदय में प्रकाश, और प्रकाश का मतलब ईमानदारी ,धर्मनिरपेक्षता, करुणा प्रेम भाव और ऊंच-नीच से दूरी ।
मर्यादा,शौर्य,सुरक्षा और गरिमा इस दौर में इन चारों शब्दों को दबंग और हमारे पूजनीय नेता जेबों में रखते हैं ।
*एक पल में ही*
*क्यों ठुकरा दिया ,*
*कुसूर मेरा क्या था*
*आपने बतला दिया,*
*गर्व था, मुझे आप पर,*
*पर आज ।*
*आपने ऊंच-नीच*
*समझा दिया ।।*

*रिपोर्ट - भैरु सिंह राठौड़, भीलवाड़ा (राजस्थान) 09799988158*

खत लिख दे सांवरिया के नाम बाबू.......@ हितेंद्र सिंह भदोरिया

Posted: 04 Aug 2020 05:16 AM PDT





डाकिया की राह में बेसब्री से चिट्ठी के इंतजार में खड़े अपने नवविवाहित साथियों की बेकरारी को मैंने नजदीक से महसूस किया है। डाकिया शायद ही कभी 11 बजे से पहले आया हो पर भाई लोग सुबह 9 बजे से ही मोर्चे पर डट जाते शायद आज वो जल्दी आ जाए । जिनकी प्रियतमा की चिट्ठी आ जाती, उनकी खुशी देखते ही बनती और जिनकी नहीं आती उनको ढाढ़स बंधाने देने के लिए हम जैसे साथी तो थे ही। जो अलौकिक आनंद प्रेम में पगी नीली स्याही से लिखी चिठिया को पढ़ने में आता था, वो वाट्सएप पर भेजे गए मैसेज में कहाँ। फिर इंतजार का मजा ही कुछ और था। आजकल तो वाट्सएप , इंस्टाग्राम,फेसबुक व ट्विटर का जमाना है। इधर से कुछ लिखा और पलक झपकते ही जवाब हाज़िर। जवाब तो जल्द मिल जाता है पर इस त्वरित संवाद में वैसी भावनात्मक मिठास नहीं मिलती जो चिट्ठी पढ़कर मिलती थी। खत का जवाब आने में एक पखवाड़ा तो लग ही जाता था, कभी-कभी महीना भर भी। इतने लंबे अरसे तक विरह वेदना सहने के बाद जब प्रिये की चिट्ठी आती तो वंदे उसे पहले बाँचने के बजाय दिल से चिपका लेते। यही हाल गाँव की नव विवाहिताओं का होता। कम पढ़ी-लिखीं यौवनाएँ अपनी सहेलियों की मदद से जब पाती लिखवातीं दिखतीं तो हिंदी फिल्म का गीत " खत लिख दे सांवरिया के नाम बाबू, कोरे कागज पे लिख दे सलाम बाबू, वो मान जाएंगे पहचान जाएंगे...." सहज ही याद आ जाता।
सावन मास में जब डाकिया फूला हुआ लिफाफा देकर जाता तो देखकर ही अंदाजा लग जाता कि बहिन द्वारा भेजी गईं राखियाँ आ गईं। साथ में आई चिट्ठी में लिखा होता दुकान से मिठाई ले आना और किसी कन्या से मेरे नाम की राखी बंधवा लेना। मिठाई के पैसे मैं आकर दे दूँगी।
लंबी भूमिका के बाद विषय पर लौटते हैं। आज अंतर्राष्ट्रीय-पत्र दिवस है। इसलिए आप सबसे विनम्र आग्रह है अपने प्रियजन या मित्र को कम से कम एक चिट्ठी जरूर लिखिएगा। सच में आत्मिक शांति मिलेगी।
खुशी की बात है न्यूज-18 भोपाल में कार्यरत मेरे मित्र शरद श्रीवास्तव जी और वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली जी ने विलुप्त होती पत्र-लेखन विधा को जीवित बनाए रखने के उद्देश्य को लेकर ग्वालियर में पिछले तीन साल से 31 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय पत्र दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। इस साल वैश्विक महामारी कोरोना के कारण यह कार्यक्रम आयोजित नहीं हो रहा है। आओ हम सब एक चिट्ठी लिखकर उनकी पहल को आगे बढ़ाएं...
(पोस्टकार्ड के फोटोग्राफ गूगल से साभार)

कोरोना ने निगला एक शानदार पत्रकार......

Posted: 04 Aug 2020 05:04 AM PDT




वीरेंद्र वशिष्ठ नही रहे ।
ग्वालियर - चंबल/ सोशल मीडिया पर उनके निधन की सूचना थी । भरोसा नही हो पा रहा था । मैं सच जानने के लिए फोन करने की सोच ही रहा था कि तभी मोबाइल बजा । स्क्रीन पर पीआरओ श्री भारती जी का नाम था । बगैर रिसीव किये समझ गए दुखद ख़बर सच है । वही हुआ । सचमुच - वीरेंद्र वशिष्ठ नही रहे । वे वर्षो तक स्वदेश और भास्कर से जुड़े रहे।
वीरेंद्र जी को पूरे प्रदेश में लोग जानते थे जबकि वे शिवपुरी में रहकर पत्रकारिता करते थे । बजह उनकी सहजता ,मिलनसारिता और बेबाक तथा निष्पक्ष पत्रकारिता । वे ग्रामीण अंचल में सक्रिय पत्रकारों के लिए पॉजिटिव प्रोटोन की तरह थे जो उस आम धारणा को खंडित करते थे कि बड़ा पत्रकार गाँव, कस्बे में काम करने वाला पत्रकार नही बन सकता ।
वशिष्ठ जी से मेरा संपर्क अस्सी के दशक में हुआ । मैं आचरण में था और देश की सभी हिंदी पत्रिकाओं में खूब छपता था । वे स्वदेश के शिवपुरी में संवाददाता थे । हम लोग एक दूसरे को नही पहचानते थे । शाम के समय वे हमारे संपादक श्री राम विद्रोही जी से मिलने पहुंचे । उन्होंने बताया कि वे अखबार की बैठक में आये थे और बैठक के बाद हमेशा तीन बजे की बस से लौट जाते थे लेकिन आज रुक गया कि आप लोग शाम को ही मिल पाओगे । विद्रोही जी ने विस्मय से पूछा - सेवा बताएं ।
वे बोले - भाई साहब आपके यहाँ देव श्रीमाली काम करते है । मैंने उनका लिखा रोज पढ़ता हूँ । तय करके आज मिलके ही जाऊंगा । क्या वे है यहां ?
मैं सामने ही बैठा था । पहले मुझे लगा कोई फिर मेरी शिकायत करने आ गया । थोड़ा सटपटा गया । विद्रोही जी ने मेरी तरफ देखा फिर मुस्कराए । उन्होंने कहाकि - आप पहले चाय पियें । फिर देव से भी मिलवाऊंगा। थोड़ी देर बाद संपादक जी ने मेरा उनसे परिचय कराया । उन्होंने मेरी खूब प्रशंसा की और शिवपुरी आने का आमंत्रण भी दिया । इससे आप जान सकते है वे न केवल कितने सहज थे बल्कि प्रतिभाओ को प्रोत्साहित करने का जो माद्दा था वह आजकल तो विरला हो गया है ।
मेरी उनसे आखिरी मुलाकात पिछली साल ही हुई थी । पीआरओ श्री भारती जी के सौजन्य से । एक सेमिनार था । उसमें उनके साथ मुझे मंच साझा करने का सौभाग्य मिला था । वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव और शिवपुरी के उदीयमान लेखक ,पत्रकार डॉ अजय खेमरिया भी कार्यक्रम में थे । हमने श्री वशिष्ठ का सम्मान किया तो वे भाव विह्वल हो गए थे ।
उनका जाना उस रोशनी का जाना है जो कस्बाई पत्रकारों को आगे बढ़ने की राह पर रोशनी दिखाती थी ।
विनम्र श्रद्धांजलि💐💐💐

साभार देव श्रीमाली
संपादक- इंडिया शाम तक
अध्यक्ष- ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान

संपादकीय/ ★राम से बड़ा राम का काज★

Posted: 03 Aug 2020 07:51 PM PDT


*० प्रतिदिन* -राकेश दुबे
०४ ०८ २०२०
*'राम' से बड़ा 'राम का काज'*
राम की नगरी में राम का काज चल रहा है | "श्रेय" की लूट भी मची है तो आलोचना के कटु वचन भी थम नहीं रहे हैं |आलोचना के बिंदु संविधान की मर्यादा, धर्मनिरपेक्षता और मुहूर्त है | "श्रेय जिसे लूटना हो लूटे, राम का काज होना चाहिए |" इस पक्ष में देश के करोड़ों लोग हैं, इस अवसर पर स्व. राजीव गाँधी , स्व.पी वी नरसिंह राव और कल्याण सिंह के साथ तत्समय राम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन और आन्दोलन से इतर मुक्ति की के लिए सदाशयी व्यक्तियों की लम्बी कतार याद आती है, जो कोरोना के या किसी [?] के कारण कल अयोध्या में नहीं होगी | आज की भांति त्रेता में भी राम के काम में हनुमान, नल, नील जामवंत से लेकर गिलहरी तक सब ही तो लगे थे | देश, काल और परिस्थिति के वशीभूत कोई पहले दिन से जुटा है तो किसी ने आज मन में राम से बड़ा राम का काज माना है |
आम धारणा के अनुसार २० बरस का एक युग होता है | आलोचना के कारण को और समझने के लिए मैंने दो युग दृष्टाजन का परामर्श लिया | श्री महेश श्रीवास्तव और पद्म श्री विजय दत्त श्रीधर देश के बौद्धिक वर्ग के शीर्ष पर हैं | दोनों से हुई बातचीत से निकला विचार नवनीत देश के लिए निसंदेह प्रकाश पुंज का काम करेगा | दोनों इस बात पर सहमत है कि भारत में न्यायपालिका सर्वोच्च है और उसके निर्णय का स्वागत करने के बाद अब ऐसी आलोचनाओं का कोई अर्थ नहीं है | दोनों की सहमति विधिक आदेश के अनुरूप बनने वाले मन्दिर से है |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम में जाने को लेकर महेश जी का साफ कहना है कि यह राजनीति है जो 'रार' पैदा कर रही है, संविधान में धर्म निरपेक्ष शब्द १९७६ में ४२ वें संविधान संशोधन के द्वारा संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया है। राजनीतिक विरोध तो डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद का भी सोमनाथ मन्दिर जाने पर भी हुआ था | संविधान की मूल प्रति में मौजूद चित्र श्री राम के जनमानस में बसे होने का उदहारण है, आज राम को कल्पना कहना ठीक नहीं है | प्रधान मंत्री देश के होते हैं, उन्हें जो भी बुलाएगा वे जायेंगे | यह आयोजन वैसे भी ट्रस्ट का है | उनका मानना है कि जो वामपंथी आलोचक इसमें धार्मिक तुष्टिकरण की बात कह रहे हैं |उन्हें अपनी दृष्टि सब तरफ घुमाना चाहिए, अब तो पश्चिम बंगाल के दुर्गा पंडालों को भी सहायता दी जाती है | अन्य वर्गों के धार्मिक ओहदों पर काबिज व्यक्ति और संस्थान सहायता पा ही रहे हैं | कार्यक्रम के मुहूर्त को लेकर उनका साफ़ कहना है शंकराचार्य पूज्य हैं और दर्शन विषय के अधिकारिक संस्थान है | ज्योतिष एक विषय है और उसके अनेक श्रेष्ठ ज्ञाता देश में हैं |
श्री विजय दत्त श्रीधर तो धर्म निरपेक्षता के पक्ष में और आगे बढ़कर बात कहते हैं |उनका कहना है देश को सभी धार्मिक संस्थानों को आर्थिक मदद देना बंद करना चाहिए | धर्मनिरपेक्ष का अर्थ वोट बैंक का प्रबन्धन नहीं होना चाहिए | धर्म निरपेक्षता के नाम पर समुदाय विशेष के धार्मिक और गैर धार्मिक संस्थान को प्रश्रय देने को वे गलत मानते हैं | उनके मत में सही धर्मनिरपेक्षता समाज के आश्रय से आती है, सरकारों के आश्रय से नहीं | वे गाँधी के राम और रामराज्य को श्रेयस्कर मानते है | वे राम के उस सर्व समावेशी समाज के पक्षधर है जिसमे सारी प्रजा सुखी हो | वे तुलसीदास जी की ये पंक्तियाँ भी उद्घृत करते हैं |" जासु राज प्रजा दुखारी सो नृप अवस नरक अधिकारी |
भारत में गाँधी और नेहरु के बगैर सब अधूरा है | प्रशंगवश यह बात इस दौर में मौंजू है |महात्मा गांधी अपने निजी और सार्वजनिक दोनों जीवन में एक धार्मिक व्यक्ति थे और वे राजनीति और धर्म के मध्य नज़दीकी संबंध के हिमायती थे। गांधी राजनीति को नैतिकता के मूल्यों पर आधारित करना चाहते थे और उनके नैतिकता के मूल्य धार्मिक रंग में रंगे हुए थे।पंडित नेहरू नेहरू गांधी के उलट राजनीति व धर्म के बीच किसी भी प्रकार का कोई भी संबंध रखने के खिलाफ थे। वे धर्मनिरपेक्षता को भारतीय स्वभाव में समायोजित करना चाहते थे।
आजकल श्रेय लेने और आलोचना करने का फैशन चल रहा है | इस वर्तमान प्रसंग में याद आते हैं, राम जन्मभूमि आन्दोलन की धुरी रहे गोविन्द जी, वे ही कौडिपक्कम नीलामेघाचार्य गोविन्दाचार्य | वे अब भी कहते हैं "कोई जरूरी नहीं इस खेल में सारे गोल आप ही करें, परिस्थिति के हिसाब से दूसरे खिलाडी को पास देकर गोल करने का अवसर दें | महत्वपूर्ण गोल होना है, गोल कौन करता है यह बात कम महत्वपूर्ण है |

ईश्वरा महादेव मंदिर जहां हर रोज कोई अदृश्य शक्ति करती है पूजा- अभी तक अनसुलझा बना हुआ है पूजा का रहस्य

Posted: 03 Aug 2020 11:20 AM PDT


त्रेता और द्वापर युग से जुड़ा है ईश्वरा महादेव का रहस्य।
ईश्वरा महादेव मंदिर जो कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के विशाल घने जंगलों में स्थित है। उसके बारे में मान्यता है कि कोई अदृश्य शक्ति हर रात को इस प्राचीन शिवलिंग की पूजा करने हजारों वर्षों से आती है।
यह बात आज तक रहस्य ही बनी हुई है क्योंकि जिसने भी यह पता करने की कोशिश की, वह उसी क्षण दैवीय शक्ति के कारण या तो अपनी सुध—बुध भूल जाता है या फिर अचानक कोई आंधी या तूफ़ान उसी दौरान दस्तक दे जाता है।
विभीषण और पांडवों से जुड़ा है मंदिर के रहस्य का नाता ऐसा माना जाता है कि पुराणों के अनुसार विभीषण को अमरता का वरदान भगवान रामचंद्र जी से मिला था विभीषण एक शिव भक्त थे जिन्होंने मध्य प्रदेश के जंगलों में भगवान भोलेनाथ की उपासना की और इस मंदिर की पूजा का रहस्य भी कई ग्रामीणों के मतानुसार विभीषण से जुड़ा हुआ है ग्रामीणों का मानना है के यहां विभीषण भी पूजा करने आते हैं और शायद वही हर रोज शिवलिंग पर पूजा करते हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ ग्रामीणों का मानना है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वनवास काटा था उस दौरान द्रोपति के द्वारा इस शिवलिंग पर पूजा अर्चना की जाती रही है और आज भी शायद वही अदृश्य शक्ति शिवलिंग पर बेलपत्र पुष्प और चावल अर्पण कर पूजा अर्चना करती है।
महान सिद्धपुरुष की आत्मा से सम्बन्ध

पौराणिक कहानी के अनुसार, मान्यता है कि कोई महापुरुष अथवा सिद्धपुरुष की आत्मा ही मंदिर में चार बजे के आस—पास स्वयं पूजा-अर्चना करने आती है। कहा जाता है कि यहां संत रामदास महाराज जी तपस्या करते थे और
भगवान शिव
की पूजा तड़के करते थे। जब वे ब्रह्मलीन हुए तो उसके बाद भी पूजा-अर्चना नियमित रूप से होती रही। पहले तो लोग यही समझते रहे कि कोई भक्त पूजा-अर्चना कर जाता होगा। लेकिन वह भक्त कभी भी किसी को नहीं दिखा तो सबने उस रहस्य को जानने की कोशिश की। लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया।

शिवलिंग पर मिलते हैं बेलपत्र और पुष्प

संतों के अनुसार, शिवलिंग से कई बार सर्प लिपटे देखे गए हैं और फिर अदृश्य हो जाते हैं। पहले तो वर्ष के प्रत्येक रात्रि को पूजा करने की बात बताई जाती है किन्तु अब केवल वह आदर्श शक्ति सावन मास की ही प्रत्येक रात्रि को भगवान भोलेनाथ की आराधना करने को आती है और प्रमाण के तौर पर प्रत्येक सुबह शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प चढ़े हुए मिलते हैं।

प्राकृतिक रूप से होता है जलाभिषेक

मुरैना जिले के कैलारस तहसील मुख्यालय से 25 किमी दूर घने जंगल की प्राकृतिक कंदरा में स्थित शिवलिंग पर साल के 365 दिन कुदरती तौर पर पानी की बूंदें टपकती रहती हैं। कुछ वर्ष पहले तक तो इस मंदिर पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं था। लेकिन इसके बावजूद मनोकामना पूरी होने की उम्मीद में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अलावा यहां सावन महीने और खासतौर से सोमवार को लोग पूजा करने पहुंचते हैं।
राजा ने किया था रहस्य जानने का असफल प्रयास

एक बार पहाड़गढ़ की रियासत के राजा को जब यह बात पता लगी तो कोतुहलवश उन्होंने इस रहस्य से परदा उठाने की ठानी और ईश्वरा महादेव मंदिर पर गुप्त पूजा-अर्चना के रहस्य को जानने के लिए उन्होंने रात में अपनी सेना को मंदिर के इर्द-गिर्द कड़ी चौकसी में लगा दिया और सुबह हुई तो हालात देखकर सारी सेना के होश उड़ गए क्योंकि चौकसी में लगी सेना सुबह चार बजे से पहले ही अचेतन अवस्था में चली गई थी। जब आंख खुली तो वहां पूजा- अर्चना संपन्न हो चुकी थी इसको लेकर सेना सहित राजा भी अचंभित हुए तब से लेकर आज तक काफी सारे प्रयास कईयों के द्वारा दिए गए लेकिन अभी तक इस रहस्य को सुलझाने में कोई भी सफल ना हो सका।।                      @ नरेंद्र सिकरवार

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