प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नहीं, डीआईओएस कराएंगे अब सत्यापन
- आज से भरे जा सकेंगे छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन, कोरोना के चलते इस बार की परिस्थितियां अलग
- नई शिक्षा नीति में 5वीं तक मातृभाषा में शुरुआती पढ़ाई से उपजेगी समझ : शिक्षा मंत्री निशंक से इंटरव्यू
- कंपार्टमेंट परीक्षा पर सात दिन में फैसला ले सीबीएसई - सुप्रीम कोर्ट
- अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार
- उच्च शिक्षा के 27 शिक्षक जांच में मिले संदिग्ध, निदेशालय ने शासन को भेजी रिपोर्ट, संदिग्ध की विस्तृत जांच की मांगी इजाजत
- हाथरस : स्वयं सहायता समूह द्वारा यूनिफार्म सिलाई हेतु चयनित विद्यालयों को तत्काल कपड़ा क्रय कर सहायक विकास अधिकारी को उपलब्ध कराने सम्बन्धी आदेश जारी
- कोविड 19 के कार्य में लगे परिषदीय शिक्षकों को कोरोना योद्धा की श्रेणी की तरह सुविधाएं दिए जाने के सम्बंध में PSPSA द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया मांगपत्र
- प्राथमिक शिक्षक संघ, उ0प्र0जू0हा0 शिक्षक संघ एवं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से इतर संगठन की सदस्यता लेने वाले अध्यापकों को नियमावली के उल्लंघन का दोषी माने जाने सम्बन्धी बीएसए हाथरस का आदेश जारी
| Posted: 31 Jul 2020 08:21 PM PDT अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है। शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे। इन मदो में दी गई राहत : ' फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ' पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ' स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी। ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी। |
| माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नहीं, डीआईओएस कराएंगे अब सत्यापन Posted: 31 Jul 2020 07:46 PM PDT माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नहीं, डीआईओएस कराएंगे अब सत्यापन अब माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर सीधे स्कूलों में भेजेगा। उसे अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं करवाना होगा। सत्यापन अब जिला विद्यालय निरीक्षक करवाएंगे। अभी तक चयन बोर्ड सत्यापन के नाम पर अनावश्यक रूप से विलम्ब करता है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी कर दिया है। |
| आज से भरे जा सकेंगे छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन, कोरोना के चलते इस बार की परिस्थितियां अलग Posted: 31 Jul 2020 07:38 PM PDT आज से भरे जा सकेंगे छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन, कोरोना के चलते इस बार की परिस्थितियां अलग लखनऊ : दशमोत्तर छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन पत्र एक अगस्त से भरे जाएंगे। यह पहला मौका है कि जब स्कूल कॉलेज बगैर खुले छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने शुरू हो जाएंगे। समाज कल्याण विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आवेदन फार्म पांच नवंबर तक वेबसाइट पर जाकर भरे जा सकते हैं। समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति के लिए हर साल 57-58 हजार छात्र-छात्रएं आवेदन करते हैं। इस बार की परिस्थितियां अलग हैं। |
| Posted: 31 Jul 2020 07:34 PM PDT नई शिक्षा नीति में 5वीं तक मातृभाषा में शुरुआती पढ़ाई से उपजेगी समझ : शिक्षा मंत्री निशंक से इंटरव्यू अरसे से अटकी नई शिक्षा नीति जमीन पर कितनी सरलता से उतरेगी यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का मानना है कि यह पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था के सकारात्मक बदलाव के लिए जरूरी है। शिक्षा मंत्री निशंक से बातचीत के प्रमुख अंश नई शिक्षा नीति में 5वीं तक मातृभाषा में पढ़ाई की बात की गई है, इसे कैसे लागू किया जाएगा? खासकर जब अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की संख्या बड़ी है? छोटे बच्चे मातृभाषा में चीजों को जल्दी सीखते और समझते हैं। इसीलिए नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि कम से कम कक्षा पांच तक और अगर संभव हो तो कक्षा आठ व उसके बाद भी शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी। अगर संभव हो तो कक्षा आठ के बाद भी स्थानीय भाषा की एक अन्य भाषा के रूप में पढ़ाई जारी रखी जाएगी। ऐसा सरकारी व निजी दोनों प्रकार के स्कूलों द्वारा किया जाएगा। विज्ञान सहित अन्य उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्य पुस्तकें मातृभाषा या स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाएंगी। शुरुआती शिक्षा में भी बच्चों को अलग-अलग भाषाएं पढ़ाई जाएंगी, लेकिन विशेष जोर मातृभाषा पर होगा। कक्षा तीन तक लिखना और पढ़ना मातृभाषा में सिखाया जाएगा। इसके बाद से दूसरी भाषाओं में लिखना और पढ़ना सिखाकर कौशल विकास किया जाएगा। 5वीं के बाद क्या इंग्लिश मीडियम होगा? क्या एकबारगी बदलाव से परेशानी नहीं बढ़ेगी? हम प्रयास करेंगे कि उच्च गुणवत्ता यानी बेहतर पाठ्य सामग्री वाली किताबें तथा विज्ञान व गणित की पठन-पाठन सामग्री दो भाषाओं में हो, ताकि सभी छात्र उन विषयों को अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी पढ़ और समझ सकें। त्रिभाषा को लेकर पहले विवाद रहा। शायद इसीलिए अब उसे नरम कर दिया गया है, लेकिन राष्ट्रभाषा हंिदूी की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता का क्या होगा? संवैधानिक प्रावधानों, लोगों व क्षेत्रों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तीन भाषा वाला फॉर्मूला लागू किया जाएगा। इस फॉर्मूले में अधिक लचीलापन होगा। किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाएं राज्य, क्षेत्र व स्वाभाविक रूप से स्वयं बच्चे ही तय करेंगे, लेकिन उनमें से दो भारतीय होनी चाहिए। शिक्षा नीति में संस्कृति की बात की गई है। पाठ्यक्रम में किस तरह का बदलाव होगा? क्या हमें वैसी सामग्री ज्यादा मिलेंगी, जिनमें भारत की महानता का वर्णन हो? हम अभी-अभी नीति लेकर आए हैं। अब यह नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क कमेटी को तय करना है कि कौन-कौन से विषय पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली का हिस्सा होंगे। हां, इतना जरूर है कि जनजातीय ज्ञान तथा सीखने के देसी व पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को देश में कैंपस खोलने की इजाजत से भारतीय संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की कोशिश प्रभावित तो नहीं होगी? नीति में कहा गया है भारत को ऐसे वैश्विक स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कम पैसों में उपलब्ध कराई जा सके। भारतीय संस्थानों को उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी संस्थानों के साथ अनुसंधान व शिक्षण सहयोग तथा शिक्षक व छात्र आदान-प्रदान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उनके साथ प्रासंगिक समझौते किए जाएंगे। नीति में फीस को लेकर कैपिंग की बात कही गई है। यह कब तक और किस तरह होगी? इसके दायरे में क्या उच्च शिक्षण संस्थान और स्कूल दोनों आएंगे? स्कूली व उच्च शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के तंत्र स्थापित किए जाएंगे। विभिन्न संस्थानों की अधिकतम फीस तय करने के लिए पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि निजी संस्थानों पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। किसी भी छात्र के आवेदन के दौरान फीस व अन्य शुल्कों में मनमानी वृद्धि नहीं करनी दी जाएगी। शुल्क निर्धारण तंत्र लागत की उचित वसूली सुनिश्चित करने के साथ यह भी तय करेगा कि उच्च शिक्षण संस्थान अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते रहें। |
| कंपार्टमेंट परीक्षा पर सात दिन में फैसला ले सीबीएसई - सुप्रीम कोर्ट Posted: 31 Jul 2020 07:02 PM PDT कंपार्टमेंट परीक्षा पर सात दिन में फैसला ले सीबीएसई - सुप्रीम कोर्ट सीबीएसई को 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर सात दिन के अंदर जवाब देना होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के आरएसपुरम निवासी अधिवक्ता शक्ति पांडय की जनहित याचिका पर सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि रिप्रेजंटशन के माध्यम से अभिभावक अपनी समस्याएं विस्तार से बताएं, जिन पर सीबीएसई सात दिन के अंदर निर्णय ले। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शक्ति पांडेय ने बताया कि इस साल सीबीएसई बोर्ड में दो लाख 10 हजार परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है। चार हजार परीक्षार्थियों ने अपना समूह बनाकर इसका विरोध करने के साथ उनसे संपर्क किया। उन्होंने 28 जुलाई को जनहित याचिका दायर करके कोर्ट से यह निवेदन किया था कि जिन परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है, उन्हें अगली कक्षा में प्रोविजनल प्रवेश दे दिया जाए। |
| अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार Posted: 31 Jul 2020 06:51 PM PDT अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार कोरोना के बीच सितंबर में होने वाली अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाओं पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है। परीक्षाएं रद करने की मांग वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश देने से इन्कार करते हुए केंद्र से इस मुद्दे पर गृह मंत्रलय का रुख स्पष्ट करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यूजीसी ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर विचार कर रहा है, इसलिए अंतिम वर्ष/सेमेस्टर परीक्षा पर रोक रहेगी। जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई आदेश नहीं दे रही है। अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। इस पीठ में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और एम.आर. शाह भी शामिल थे। केंद्र और यूजीसी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे गृह मंत्रलय के रुख के बारे में कोर्ट को अवगत कराएंगे। |
| Posted: 31 Jul 2020 06:45 PM PDT उच्च शिक्षा के 27 शिक्षक जांच में मिले संदिग्ध, निदेशालय ने शासन को भेजी रिपोर्ट, संदिग्ध की विस्तृत जांच की मांगी इजाजत। प्रयागराज : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों तथा राजकीय और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के अभिलेखों की जांच पूरी कर ली गई है। प्रदेश के 11412 शिक्षकों की जांच के दौरान 27 शिक्षकों के अभिलेख संदिग्ध मिले हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन की जांच रिपोर्ट भेजने के साथ ही संदिग्ध मिले 27 शिक्षकों के बारे में जानकारी देते हुए इनकी विस्तृत जांच कराने की इजाजत मांगी है। शासन के निर्देश पर हुई इस जांच के लिए टीमें गठित की गई थीं। टीमों ने राज्य विश्वविद्यालयों तथा राज्य और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कार्यरत 11412 शिक्षकों के अभिलेखों की जांच की। संदिग्ध मिले कुछ शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों में गड़बड़ी मिली है तो कुछ के जाति आदि प्रमाण पत्र तो कुछ के नियुक्ति पत्र में गड़बड़ी मिली है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ.वंदना शर्मा ने बताया कि दो तरह से जांच हो रही है। एक तो अभिलेखों की जांच हुई है और दूसरा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करवाया जा रहा है। बकौल निदेशक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड विवरण में गड़बड़ी एनआईसी से पकड़ी जाएगी, जिसमें अभी समय है। अभिलेखों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है, जिसमें 27 संदिग्ध मामले मिले हैं। शासन से इजाजत मिलने के बाद जांच कमेटी गठित कर विस्तृत जांच कराई जाएगी। इस जांच में संबंधित शिक्षक के अभिलेख जहां-जहां से जारी हुए हैं, वहां अभिलेखों को भेजकर विस्तृत जांच कराई जाएगी। संबंधित शिक्षक का भी बयान लिया जाएगा। इसमें जो निष्कर्ष निकलेगा उसके मुताबिक आगे कार्यवाही की जाएगी। ![]() |
| Posted: 31 Jul 2020 10:01 AM PDT |
| Posted: 31 Jul 2020 06:48 AM PDT |
| Posted: 31 Jul 2020 04:07 AM PDT |
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