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Thursday, August 27, 2020

न्यूज़ हिमाचली News Himachali | हिमाचल की No. 1 हिंदी वेबसाइट

न्यूज़ हिमाचली News Himachali | हिमाचल की No. 1 हिंदी वेबसाइट


खूबसूरती की खान सेब/शहनाज हुसैन

Posted: 27 Aug 2020 03:46 AM PDT



सेब की गिनती दुनिया में पैदा होने बाले तीन महत्वपूर्ण फलों में की जाती हैं 
बाजार में सेब की फसल ने दस्तक दे दी है / देश के मुख्य पहाड़ी राज्यों में सेब की फसल जुलाई के अंत तक पक जाती है तथा सेब का सीजन अगस्त के पहले माह में शुरू हो जाता है तथा अक्टूबर के अंत तक चलता है / हालाँकि बाजार में सेब की बिक्री साल भर चलती है लेकिन अक्टूबर के बाद सेब बगीचों की बजाय कोल्ड स्टोर से आना शुरू होते हैं या फिर महंगे बिदेशी ब्रांड के सेब उपलब्ध होते हैं जोकि काफी महंगे होते हैं और आम आदमी की पकड़ से बाहर होते है/ इसलिए अगर आप सेब का आनन्द उठाना चाहते है तो यह सबसे सही सीजन है जहाँ बगीचों से सीधे उचित दाम पर सेब आपकी रसोई में पहुँच रहे हैं

इस सेब सीजन में बिभिन्न प्रजातियों के रसीले , रंग बिरंगे , स्वास्थ्य बर्धक और खूबसूरत सेबों का हम सभी आनन्द लेते हैं / लेकिन क्या आप जानते हैं की सेब आपके स्वास्थ्य के इलाबा आपकी खूबसूरती निखारने के भी काम आ सकते हैं / सेब अपनी बिभिन्न गुणों की बजह से जहाँ स्वास्थ्य के लिए संजीदा लोगों की पहली पसंद माने जाते हैं तो दूसरी हर्बल के माध्यम से सौन्दर्य निखारने बाले ब्यूटी सैलून और सौंदर्य बिशेष्ज्ञों की भी पहली पसन्द माने जाते हैं

सेब पौष्टिक आहार में सबसे सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक फल माना जाता है / ताजे सेब फाईबर, विटामिन-सी, काॅपर,मिनरल तथा विटामिन 'ए' जैसे पौषक तत्वों से भरपूर होते है जिसकी बजह से इनके नियमित सेबन से दिल , हडियों , आँखों और पुराने मानसिक

रोगों को नियन्त्रित करने में मदद मिलती है/सेब को विश्वभर में स्वास्थ्यवधर््क तथा ताजे पफलों के लिए जाना जाता है।

सेब को पीस कर इसमें एक चमच शहद , गुलाब जल और जई का ऑटा मिलाकर पेस्ट बना लें तथा इस पेस्ट को चेहरे तथा खुले भाग पर लगा कर आधे घण्टे बाद ताजे साफ पानी से धो डालें / इससे त्वचा की बाहरी मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलेगी जिससे आपकी त्वचा साफ और निखरी निखरी नज़र आएगी


सेब के जूस को चेहरे पर 20 मिनट तक लगाकर सादे पानी से धेने से त्वचा में चमक तथा निखार आता है। सेब का जूस त्वचा पर लगाने से त्वचा के प्रकृतिक पी एच सन्तुलन को बनाये रखने में मदद मिलती है / अगर आप जूस लगाने से परहेज़ करते हैं तो आप सेब का स्लाइस भी चेहरे पर रगड़ सकते हैं /

सेब में आद्रता की मात्रा बहुत ज्यादा होती है /सेब खाने से आप शरीर को हाई ड्रेट कर सकते हैं जिससे आपकी त्वचा प्रकृतिक तौर पर निखरी नज़र आएगी /आप ताजे सेब की स्लाइस काट कऱ अपने चेहरे पर लगा लीजिये तथा जब यह स्लाइस सुख जाएँ तो आधे घण्टे बाद इन स्लाइस को हटा कर चेहरे को ताजे पानी से धो डालिये /सेब में बिद्यमान विटामिन ई से आपके चेहरे की त्वचा मुलायम और हाई ड्रेट रहेगी / सेब को आप अपने फेस पैक में नियमित रूप से शामिल करके इस फल के प्रकृतिक गुणों का लाभ उठा सकती हैं /

सेब के रस में बादाम तेल तथा दूध् या दही मिलाकर स्क्रब के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। सेब के कदूकश को दही में मिलाकर चेहरे पर लगाने से दाग ध्ब्बे दूर होते है। सेब के असब के सिरके को अनेक सौंदर्य समस्याओं का समाधन माना जाता है। इससे त्वचा तथा खोपडी के एसिड एलकाईन संतुलन बना रहता है तथा यह कील-मुहासों में कापफी मददगार साबित होती है। सेब के असब के सिरके को बाहरी रूप में त्वचा तथा बालों की सौंदर्य समास्याओं के लिए प्रयोग किया जाता रहा है, इससे बाल धोने से अनेक पफायदे होते है। शैम्पू के बाद दोे चम्मच सेब के सत के सिरके को पानी के मग में डालकर सिर को धेने में बालों की सौंदर्य समस्याऐं खत्म होती है तथा बालों में चमक आती है।

यदि आप बालों की रूसी की समस्या से जूझ रहे है तो बालों को शैम्पू करने से आध घण्टा पहले दो चम्मच सेब के सत के सिरके को खोपड़ी पर अहिस्ता-2 मलिए। इसके बाद बालों को शैम्पू से धेने से बालों की रूसी खत्म हो जाती है। अगर आप गम्भीर रूसी की समस्या का सामना कर रहे है तो सेब के सत के सिरके को रूई/काटन में डूबो कर पूरी खोपड़ी पर अहिस्ता-2 लगाऐं तथा इसे बालों में सोखनें दें। इसके आध घंटा बाद बालों को शैम्पू से धे डाले तथा रूसी की समस्या खत्म हो जाएगी।
सेब के सत के सिरके को पानी में मिलाकर काॅटन की मदद से चेहरे पर लगाने से चेहरे का एसिड-एलकालीन संतुलन बना रहता है तथा त्वचा की सौन्दर्य समस्याओं से निजात मिलती है। सेब के सत के सिरके से त्वचा की खारिश/खुजली में भी मदद मिलती है। अपने नहाने के पानी में सेब के सत के सिरके को डालकर पानी के नहाने में त्वचा की खाज-खुजली में राहत मिलती है। सेब के सत के सिरके से शरीर की गांठ तथा मस्सों से भी मुक्ति मिलती है। शरीर के मस्सों पर सेब के सत का सिरके के रोजाना लगाने से मस्से खत्म होेेे जाते है। सेब के लगातार सेवन से आप लम्बे , चमकीले बाल पा सकते हैं /सेब में परोसायना ईडन बी ---2 मौजूद होते हैं जोकि बालों के स्वास्थ्य के लिए अति महत्वपूर्ण माने जाते है
ताजे सेब पफाईबर, विटामिन-सी, काॅपर तथा विटामिन 'ए' जैसे पौषक तत्वों से भरपूर होते है तथा सेब में विद्यमान ''रैटीनायइस'' शरीर में निरोगी त्वचा के विकास तथा त्वचा केंसर के खतरे को कम करती है। सेब मात्रा एक स्वादिष्ट पफल ही नहीं है बल्कि सुन्दरता के गुणों की खान भी है। सेब में विद्यमान मल्टी विटामिन पौषक तथा प्राकृतिक प्रूफट एसिड से त्वचा की रंगत में निखार आता है तथा टैनिंग से प्रतिरक्षा मिलती है। सेब के निरन्तर प्रयोग से शरीर में चिकनाई तथा रोगाणुओं से छुटकारा मिलता है जिससे शरीर में ताजगी स्वास्थ्यवधर््क तथा त्वचा में लालिमा आती है। सेब के निरन्तर प्रयोग से त्वचा पर काले दाग तथा कील-मुंहासे के उपचार में मदद मिलती है। सेब में मिनरल तथा विटामिन के अलावा पैकटिन तथा टैनिन विद्यमान होते है जिससे त्वचा की रंगत में गोरापन आता है। अत्यन्त संवेदनशील त्वचा पर पैक्टिन का अत्यन्त आरामदेह प्रभाव देखने में मिलता है। सेब को बेहतरीन स्किन टोनर पफेशियल टोनर मााना जाता है तथा सेब त्वचा को शान्त करता है, सिर की त्वचा सापफ करता है तथा चेहरे से झुर्रियों को मिटाता है जिससे ध्मनियों में रक्त संचार बढ़ता है तथा त्वचा में खिंचाव आता है। सेब में एंटी आॅक्सीडैंट गुण विद्यमान होते है जिससे त्वचा में यौवनता बरकरार रहती है तथा बुढापे को रोकती है। नवीनतम अनुसन्धन में यह पाया गया है कि हरे सेबों में पाॅली पफीनाइलन तत्व विद्यमान होते है जिससे बालों के झड़ने को रोकने में अहम मदद मिलती है। सेब में प्रफूट एसिड विद्यमान होते है जोकि त्वचा को सापफ करने में अहम भूमिका अदा करते है तथा त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाती है जिससे त्वचा में चमक आती है तथा काले ध्ब्बों से मुक्ति मिलती है,


प्रूफट एसिड से त्वचा में तैलीयपन कम होता है जिससे कील-मुंहासों को रोकने में मदद मिलती है।






- लेखिका अन्र्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौन्दर्य विशेषज्ञ है तथा हर्बल क्वीन के नाम से लोकप्रिय है।

चंबा: अभी अभी HRTC बस व पिकअप के बीच जोरदार टक्कर, और फिर...

Posted: 27 Aug 2020 03:37 AM PDT


चंबा: चम्बा-तीसा मार्ग पर कंदला के पास हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस व पिकअप में जोरदार टक्कर हो जाने का मामला संज्ञान में आया है। हालांकि गनीमत यह रही कि हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एचआरटीसी बस और पिकअप में कंदला के पास जोरदार भिड़ंत हो गई।

हालांकि बस में सवार सभी यात्री और पिकअप में सवार लोग सुरक्षित हैं। उन्हें किसी प्रकार की कोई चोटें नहीं आई है परंतु इस घटना में दोनों वाहनों को काफी नुकसान हुआ है। वही टक्कर के बाद बस में सवार यात्री अपनी सीटों पर खड़े हो गए और बुरी तरह डर गए, लेकिन हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है।

अब सिर्फ 2 मिनट में पता लगाएं कि आपका मोबाइल नंबर किसके किसके मोबाइल में सेव है, जानिए आसान सी ट्रिक

Posted: 27 Aug 2020 03:33 AM PDT


मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी (एम॰एन॰पी) या मोबाइल अंक सुवाह्यता वह सेवा है जिसके द्वारा उपभोक्ताओं को अपना मोबाइल नम्बर बदले बिना सेवा प्रदाता कम्पनी बदलने की सुविधा मिलती है। भारत में यह सेवा 20 जनवरी, 2011 को लागू की गई थी। इससे पूर्व छोटे स्तर पर भारत में यह सेवा सबसे पहले हरियाणा राज्य से आरम्भ हुई।
यह जानना कि आपका मोबाइल नंबर किन-किन के मोबाइल में सेव है पूरी तरह तो संभव नहीं है, किंतु आंशिक रूप से यह आप पता कर सकते हैं। इसके लिए आपके मोबाइल की फोन बुक में जो नंबर आपने सेव किए हुए हैं उन नंबरों की व्हाट्सएप में जाकर एक ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाएं।

उस ब्रॉडकास्ट लिस्ट में कोई संदेश भेजें और उसको भेजने के कुछ देर बाद चेक करें कि वह संदेश किस किसको डिलीवर हुआ है।

इस ब्रॉडकास्ट लिस्ट की यह विशेषता है कि आपका संदेश केवल उन्हीं नंबरों को डिलीवर होगा जिनके पास आपका फोन नंबर सेव है।

जिनके फोन में आपका नंबर सेव नहीं है उन्हें वह संदेश प्राप्त नहीं होगा इससे आपको पता चल जाएगा कि किन किन के मोबाइल में आपका नंबर सेव है और किनके में नहीं।

इस प्रयोग की सीमा यही है कि यह केवल व्हाट्सएप नंबर वाले फोन पर ही किया जा सकता है। दूसरे फोन नंबर जिन पर व्हाट्सएप नहीं है उनको इससे चैक नहीं किया जा सकता।

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हिमाचल: जमीन विवाद को लेकर खूनी संघर्ष , दराट के हमले से दादा-पोती हुए लहूलुहान

Posted: 27 Aug 2020 03:28 AM PDT


ऊना: बनगढ़ के वार्ड चार में जमीन विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हुआ। इसमें एक व्यक्ति ने दराट से हमलाकर दादा और पोती को बुरी तरह से लहूलुहान कर दिया। लोगों की मदद से घायल दादा-पोती को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचा गया। यहां वृद्ध व्यक्ति को उपचार जारी है, लेकिन पोती को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी है। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार सुबह बनगढ़ गांव के वार्ड चार में जमीन विवाद को लेकर पारिवारिक सदस्यों में बहस हो गई। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। मारपीट में वरिंद्र सिंह उर्फ दारा ने वृद्ध सुरजीत सिंह पर दराट से हमला कर दिया। उसे बचाने के लिए पोती रजनी ने बीच-बचाव किया। आरोपी ने युवती पर भी दराट से हमला कर दिया। मारपीट में जहां सुरजीत सिंह के सिर और हाथ लहूलुहान हो गया, वहीं युवती के हाथों की अंगुलियां भी खून से लथपथ हो गईं।

दोनों घायलों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना लाया गया। थाना प्रभारी ऊना गौरव भारद्वाज ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अनलॉक-4 : स्कूल खुलेंगे या नहीं, राज्यों ने केंद्र को भेजी राय, जानें किस राज्य ने क्या कहा?

Posted: 27 Aug 2020 03:22 AM PDT


कोरोना के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन के पहले दिन से ही स्कूल, काॅलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान पूरी तरह बंद हैं। अब तक केंद्र सरकार तीन अनलाॅक कर चुकी है। इनके तहत देशभर में फिर से विभिन्न संस्थानों को खोला जा रहा है। माना जा रहा है कि इस आखिरी अनलाॅक-4 में स्कूलों को गाइडलाइन जारी कर कुछ शर्तों के साथ बड़ी कक्षाओं को खोला जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय इसके लिए रणनीति बनाने में जुटा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन भी तैयार कर ली है।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने अनलॉक-4 में कई प्रतिबंधों के साथ 1 सितंबर से 14 नवंबर के बीच स्कूल खोलने लिए गाइडलाइंस लगभग बना चुकी है। आंध्रप्रदेश अपने यहां स्कूलों को खोलने के लिए रणनीति बना रहा है। लेकिन, वहां पैरंट्स सरकार के इस फैसले से खुश नहीं दिख रहे हैं। केंद्र की बैठक में यह राय बनी थी कि जिन राज्यों में कोरोना के केस कम हैं। वहां, सीनियर बच्चों के स्कूल खोले जा सकते हैं। वहीं, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में स्कूल खोलने को लेकर सरकार की तरफ से अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और हेल्थ मिनिस्टरी की प्रस्तावित गाइडलाइंस के अनुसार स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने को लेकर सहमति बनी है। पहले 15 दिन 10वीं और 12वीं के छात्र को स्कूल आने के लिए कहा जाएगा। इसी प्रकार से अलग-अलग सेक्शन के छात्रों अलग-अलग दिन आने को कहा जाएगा। सभी स्कूल सुबह 8 से 11 बजे और दोपहर के 12 बजे से 3 बजे के बीच ही खुलेंगे। इसके बीच एक घंटे का ब्रेक होगा, जिसमें स्कूल को सेनेटाइज किया जाएगा। सरकार अनलॉक-4 में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्कूल नहीं खोलेगी। यहां पहले की तरह ही ऑनलाइन क्लासेज चलती रहेंगी।

विराट कोहली जल्द पिता बनने वाले हैं, जनवरी 2021 हम तीन हो गए: कोहली

Posted: 27 Aug 2020 03:19 AM PDT


विराट कोहली जल्द पिता बनने वाले हैं। अनुष्का शर्मा के प्रेगनेंट होने की खबर विराट कोहली ने खुद सोशल मीडिया पर दी है। अनुष्का शर्मा ने भी यही पोस्ट शेयर करते हुए खुशी जाहिर की है. दोनों ने बताया है कि जनवरी 2021 में उनके घर नन्हा मेहमान आ सकता/सकती है‌।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया सेम फोटो और सेम कैप्शन लिखा है। फोटो में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा दोनों दिख रहे हैं। कैप्शन में दोनों ने लिखा, 'और फिर हम तीन हो गए. जनवरी 2021.

इस फोटो में अनुष्का शर्मा ने एक ब्लैक ड्रेस पहनी हैं, जिसमें उनका बेबी बंप साफ नजर आ रहा है। इसे देखकर ये कहना तो तय है कि अब हार्दिक पांड्या के बाद विराट कोहली के घर पर भी बच्चे की किलकारी गूंजने वाली है।

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में 25 सितंबर से बंटना शुरू होगी स्मार्ट वर्दी

Posted: 27 Aug 2020 03:16 AM PDT



हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 7.90 लाख विद्यार्थियों को 25 सितंबर से स्मार्ट वर्दी मिलना शुरू हो जाएगी। इस दौरान तक अगर स्कूल बंद ही रहे तो मिड डे मील की तर्ज पर अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर वर्दी का आवंटन किया जाएगा। सितंबर के पहले सप्ताह से प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई पहुंचना शुरू हो जाएगी। स्कूल स्तर पर वर्दी के सैंपलों की जांच करवाने के बाद ही वितरण किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को सभी जिला अधिकारियों को इस बाबत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक शुभकरण सिंह की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि बीते साल चुनी गई कंपनी को दो साल के लिए टेंडर दिया गया था। कंपनी ने सितंबर के पहले सप्ताह से वर्दी की सप्लाई शुरू करने की बात कही है। ऐसे में वर्दी को एकत्र करने के लिए चिन्हित किए गए स्थानों पर सप्लाई को पहुंचाया जाएगा। हर स्कूल प्रभारी को वर्दी की रेंडम सैंपलिंग करवानी होगी। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही वर्दी बांटी जाएगी। किसी भी स्कूल ने बिना सही सैंपल रिपोर्ट के वर्दी बांटी तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि वर्दी की ढुलाई के कार्य में विद्यार्थियों को ना लगाया जाए। विद्यार्थियों से ट्रांसपोर्टेशन का शुल्क भी ना लिया जाए। अगर इस तरह की शिकायत प्राप्त हुई संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हर साल विद्यार्थियों को मिलती है वर्दी

अटल स्कूल वर्दी योजना में सरकार हर साल बच्चों को वर्दी उपलब्ध करवाती है। बीते साल ही सरकार ने दो साल के लिए स्मार्ट वर्दी का टेंडर अवार्ड कर दिया था। पहली से जमा दो कक्षा के बच्चों को सरकार ने बीते साल से निजी स्कूलों की तर्ज पर स्मार्ट वर्दी देने की योजना शुरू की है। छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग रंग की वर्दी तय की गई है। उधर, पहली, तीसरी, छठी और नवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क स्कूल बैग देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसको लेकर जल्द ही टेंडर आवंटित किए जाएंगे।

बड़ी खबर: हमीरपुर के कमांडर एसआई ने भारत-नेपाल के बॉर्डर पर किया सुसाइड

Posted: 27 Aug 2020 03:11 AM PDT


हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के नादौन के एसआई ने उत्तर प्रदेश में खुदकुशी कर ली. एसएसबी कमांडर एसआई खुद को गन से शूट कर लिया. घटना बुधवार की है.

जानकारी के अनुसार, हमीरपुर के नादौन के रहने वाले कमांडर एसआई विश्वजीत शर्मा (50) एसएसबी 66वीं वाहिनी में भारत-नेपाल की बॉर्डर आउट पोस्ट बैरिया में तैनात थे. उन्होंने बुधवार सुबह अपनी राइफल को गले से सटाकर गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

साथी जवान गोली की आवाज सुन दौड़कर पास गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. कंपनी के कार्यवाहक कमांडेंट ने घटनाक्रम की पुलिस का जानकारी दी. आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. हालांकि, बताया जा रहा है कि वह मानसिक रूप से परेशान थे.

एक माह पहले ही घर आए थे बताया जा रहा है कि विश्वजीत एक माह पूर्व ही घर पर छुट्टी काटकर गए थे. विश्वजीत की बुधवार सुबह पत्नी से फोन पर बात भी हुई थी. मृतक अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी और दो बेटे छोड़ गए हैं. घटना के बाद से इलाके में शोक की लहर है.

पिता बचपन में छोड़कर चले गए थे, मां ने सब्जियां बेचकर बड़ा किया, बेटा खेल रत्न से सम्मानित होगा

Posted: 27 Aug 2020 03:06 AM PDT


गोल्ड मेडलिस्ट मरियप्पन. भारतीय एथलेटिक्स जगत का एक ऐसा नाम, जिसने दिव्यांग होने के बावजूद जिस तरह से 21 साल की उम्र में भारत को रियो पैरालिम्पिक्स खेलों में ऐतिहासिक मेडल जिताया था, वो साबित करता है कि इंसान अगर चाह ले तो बड़ी से बड़ी रुकावट को हटना ही पड़ता है. पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थांगवेलु को 29 अगस्त को वर्चुअल सम्मेलन में खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा.

तमिलनाडु के सालेम शहर के पास मौजूद पेरियावादमगाती नामक गांव में पैदा हुए मरियप्पन का बचपन अभाव में बीता. वह बहुत छोटे थे, जब उनके पिता परिवार छोड़कर चले गए थे. ऐसे में मां ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और घर से निकलकर काम करना शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने ईंट ढोने जैसे काम किए. आगे सीने में दर्द होने के कारण उन्होंने 500 रुपए का कर्ज लेकर सब्जियां बेचना शुरू किया. जैसे-तैसे मरियप्पन का घर चल रहा था.

इस बीच मरियप्पन महज़ पांच साल के रहे होंगे, जब एक बस दुर्घटना में उनका सीधा पैर चोटिल हो गया था. चोट इतनी अधिक गंभीर थी कि मरियप्पन हमेशा के लिए दिव्यांग हो गए. मां के लिए अपने बेटे का इलाज करा पाना संभव नहीं था. ऐसे में उन्होंने करीब तीन लाख रुपए का कर्ज लिया. साथ ही मुआवजे के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया. करीब 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें मरियप्पन के पैर का मुआवजा मिल पाया था.

इस सबके बीच अच्छी बात यह रही कि मरियप्पन की मां ने अपने बेटे का स्कूल जारी रखा. खेल के प्रति यह मरियप्पन का जूनून ही था कि वो दिव्यांग होने के बावजूद स्कूल में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेते रहे.

मरियप्पन के स्पोर्ट्स टीचर ने उनका हुनर पहचाना और खेलने का मौका दिया. फलस्वरूप 14-15 साल की उम्र में मरियप्पन ने जीवन की पहली प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सिल्वर जीत कर सबको चौंका दिया. मरियप्पन वॉलीबॉल के खिलाड़ी थे. मगर कोच सत्यनारायण की सलाह पर उन्होंने हाई जम्प को अपना करियर बनाया. मरियप्पन ने सबका ध्यान तब खींचा, जब उन्होंने ट्यूनेशिया ग्रैं प्री में 1.78 मीटर की जम्प लगाई थी.

Kreeedon

इस प्रदर्शन के बाद रियो ओलम्पिक के लिए उनका टिकट पक्का हो गया था. रियो पैरालंपिक फाइल में 1.89 मीटर की जम्प के साथ गोल्ड मेडल जीतकर मरियप्पन ने देश का नाम रौशन कर दिया. पैरालंपिक खेलों के इतिहास में भारत के लिए ये तीसरा गोल्ड था. इससे पहले 1972 में तैराक मुरलीकांत पेटकर और जेवलिन थ्रोअर देवेंद्र झाझारिया ने 2004 में गोल्ड जीता था. अब मरियप्पन को आगामी 29 अगस्त को खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा.

ये हैं सचिन के क्रिकेट करियर की 5 सबसे तूफानी पारियां

Posted: 26 Aug 2020 07:28 PM PDT


मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट की दुनिया से संन्यास लिए हुए आधे दशक से भी ज्यादा वक्त बीत चुका है. लेकिन आज भी लोग क्रिकेट के इस भगवान की बल्लेबाजी को भुलाने के लिए तैयार नहीं हैं. आज भी सचिन के किसी पुराने मैच की हाईलाइट्स खेल चैनलों पर पहले जैसी ही टीआरपी भी बटोरती है. साथ ही आज भी विशेषज्ञों के बीच इस बात पर बहस चलती रहती है कि मास्टर ब्लास्टर की बेस्ट पारियां कौन सी थीं. आइए आज आपको हम सचिन की 5 सबसे तूफानी बल्लेबाजी वाली पारियों के बारे में बता रहे हैं.

कादिर के एक ओवर में 28 रन, 18 गेंद में 53 रन
सचिन तेंदुलकर की सबसे कातिलाना पारी पाकिस्तान की धरती पर उनके पहले इंटरनेशनल टूर में सामने आई थी, जब महज 16 साल की उम्र में सचिन ने पाकिस्तान के सबसे लीजेंड लेग स्पिनर अब्दुल कादिर (Abdul Qadir) के एक ओवर में 28 रन ठोक दिए थे. हालांकि यह 20-20 ओवर का प्रदर्शनी मैच था, जो ऑफिशियल वनडे मैच को खराब रोशनी के कारण रद्द कर दिए जाने के चलते दर्शकों के मनोरंजन के लिए खेला गया था. इसके बावजूद सचिन की इस पारी को सारी दुनिया याद रखती है. पाकिस्तान ने 20 ओवर में 157 रन बनाए थे.

जब सचिन तेंदुलकर विकेट पर आए तो भारतीय टीम 3 विकेट 88 रन पर खो चुकी थी और महज 5 ओवर बाकी थे. टीम को जीत के लिए 70 रन की जरूरत थी. सचिन ने लेग स्पिनर मुश्ताक अहमद (Mushtaq Ahmed) की गेंद पर 2 छक्के लगा दिए. इस पर कादिर ने सचिन के पास आकर कमेंट करते हुए कहा, 'बच्चों को क्यों मार रहे हो? हमें भी मारकर दिखाओ.' इसके बाद अगला ओवर सचिन का ही था. इस ओवर में सचिन ने कादिर की छह गेंद पर लगातार 6,0,4,6,6 और 6 रन के स्कोर ठोककर तहलका मचा दिया. सचिन ने 18 गेंद में 53 रन बनाए, लेकिन टीम इंडिया महज 4 रन से यह मुकाबला हार गई. इसके बावजूद पूरे स्टेडियम में महज सचिन की ही चर्चा थी.

न्यूजीलैंड के खिलाफ 49 गेंद में 82 रन
सचिन तेंदुलकर की न्यूजीलैंड के खिलाफ 1994 में क्राइस्टचर्च के मैदान पर खेली गई 49 गेंद में 82 रन की पारी शायद ही कभी कोई भुला पाएगा. दरअसल इस पारी में ही सचिन अपने इंटरनेशनल करियर में पहली बार टीम इंडिया के लिए ओपनिंग करने के लिए उतरे थे, जिसके बाद वर्ल्ड क्रिकेट का नजारा ही बदल गया था. इस मैच में न्यूजीलैंड की टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी थी और भारतीय गेंदबाजों ने उसे 49.4 ओवर में महज 142 रन पर ही ऑलआउट कर दिया था. छोटे से टारगेट के सामने ओपनिंग में उतरे सचिन तेंदुलकर कुछ अलग ही मूड में थे और उन्होंने 15 चौके व 2 छक्के लगाते हुए महज 49 गेंद में 82 रन ठोक दिए. उनके विस्फोटक रुख का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि उन्होंने अपनी पारी में महज 10 रन ही भागकर लिए. भारतीय टीम महज 24 ओवर में 7 विकेट से यह मैच जीत गई थी.

न्यूजीलैंड के ही खिलाफ ठोके 27 गेंद में 72 रन
सचिन तेंदुलकर की दूसरी सबसे विस्फोटक पारी भी न्यूजीलैंड के ही खिलाफ आई थी. मजे की बात है कि महज 27 गेंद में 72 रन की यह जबरदस्त पारी भी क्राइस्टचर्च के मैदान पर ही दिसंबर 2002 में खेली गई थी. दरअसल यह मैच आईसीसी की तरफ से किए गए एक अनोखे प्रयोग का हिस्सा था, जिसे 'सुपर मैक्स इंटरनेशनल' का नाम दिया गया था. इस मैच में दोनों टीमों को 10-10 ओवर की दो पारियां खेलनी थीं.

बल्लेबाज के लिए साइट स्क्रीन के सामने एक 'मैक्स जोन' बनाया गया था, जिसमें सीधे हिट मारने पर बल्लेबाज को दोगुने रन मिलने थे यानी चौका मारने पर 4 के बजाय 8 और छक्का मारने पर 6 के बजाय 12 रन. इस मैच में भारतीय टीम की पहली पारी के दौरान सचिन ने महज 27 गेंद में 72 रन ठोक दिए. उन्होंने मैक्स जोन की बदौलत लगातार तीन गेंद पर बिना किसी नो बॉल के ही 24 रन बनाने का कारनामा भी किया था. दरअसल उन्होंने मैक्स जोन में इन 3 गेंद पर एक चौका, एक छक्का और 2 रन का स्कोर बनाया, लेकिन उनके स्कोर में जोड़े गए थे 8, 12 और 4 रन.

आईपीएल में बनाए थे 32 गेंद में 63 रन
सचिन तेंदुलकर के नाम पर इंटरनेशनल टी20 क्रिकेट में भले ही महज एक मैच दर्ज है, लेकिन उन्होंने क्रिकेट के इस छोटे से संस्करण में अपना जलवा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL)में खूब दिखाया था. उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए कई सीजन में शानदार बल्लेबाजी की. इसी दौरान आईपीएल-2010 में सचिन ने दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ महज 32 गेंद में 63 रन ठोक दिए थे. इस पारी में सचिन ने परवेज महरुफ के एक ओवर में चार चौके भी लगाए थे.

2007 वर्ल्ड कप में 29 गेंद में 57 रन
सचिन तेंदुलकर को 2007 के आईसीसी वर्ल्ड कप में कोच रहे ग्रेग चैपल की साजिश के चलते ओपनिंग से हटा दिए जाने के बारे में सभी जानते हैं. उस समय सचिन कई तरह की चोट से उबरने के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में दोबारा अपनी सत्ता हासिल कर रहे थे. इसी दौरान बरमूडा के खिलाफ मैच में उन्हें छठे नंबर पर उतारा गया.

इस मैच में सचिन तेंदुलकर ने आते ही आतिशी बल्लेबाजी करना चालू कर दिया और महज 29 गेंद में नॉटआउट 57 रन ठोक दिए. उनकी 2 चौके और 5 छक्कों वाली इस पारी की बदौलत ही टीम इंडिया ने 50 ओवर में 5 विकेट पर 413 रन बनाए थे और बरमूडा को 257 रन से हराकर वनडे की सबसे ज्यादा अंतर वाली जीत में से एक हासिल की थी.

हिमाचल: सौतेली मां ने घर से निकाल दिया बेटे को, 2 साल की बच्ची के साथ जंगल में रहने को विवश

Posted: 26 Aug 2020 07:25 PM PDT


हिमाचल: सौतेली मां ने घर से निकाल दिया बेटे को, 2 साल की बच्ची के साथ जंगल में रहने को विवश: आपने सौतेली मां के किस्से अक्सर कहानियों में सुने व फिल्मों में देखे होंगे। प्रदेश के सरकाघाट में ऐसी ही एक घटना सामने आई है। यहां एक मां ने सौतेले बेटे को परिवार सहित घर से बाहर निकाल दिया है। जिसके बाद बेटा अपनी 2 वर्षीय बच्ची सहित जंगल में झोपंडी में रहने को मजबूर है।

जानकारी अनुसार सरकाघाट उपमंडल की पिंगला पंचायत में यह घटना सामने आई है। सुरेंद्र कुमार अपनी 2 वर्षीय बेटी और पत्नी के साथ वर्तमान में रिस्सा पंचायत के गांव छिंबा बल्ह में धरयाला नामक स्थान पर निवास कर रहा है। इस परिवार की विडंबना यह है कि सुरेंद्र कुमार के पिता ने 2 शादियां की हैं और सुरेंद्र कुमार उसकी पहली पत्नी की संतान है। पिता की भी मृत्यु हो गई है और सौतेली मां ने उसे घर से निकाल दिया है, जिसके चलते वह अपनी 2 वर्ष की बेटी और पत्नी रीना देवी के साथ जंगल में झोंपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हो गया है।

पिंगला पंचायत की प्रधान अनीता शर्मा ने बताया कि सुरेंद्र कुमार अपनी नशे की आदतों के कारण कभी-कभी घर भी नहीं आता है और उसकी पत्नी को अकेले ही अपनी 2 वर्षीय बेटी को लेकर जंगल में रात गुजारनी पड़ती है।

पंचायत प्रधान ने बताया कि सुरेंद्र कुमार ने अपना आधार कार्ड बनाया है और न ही उसका कोई बैंक अकाऊंट है। झोंपड़ी में न तो बिजली है और न ही पानी है। इस परिवार को वर्ष 2019 के नवम्बर महीने में बीपीएल परिवारों की सूची में शामिल किया गया है और उसके घर के लिए भी पंचायत द्वारा राजीव गांधी आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए अनुशंसा कर दी गई है। इस परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड और बैंक खाते खुलवाने का बीड़ा समाजसेवी सुनील कुमार शर्मा ने उठाया है और उसने क्षेत्र के लोगों से परिवार की आर्थिक सहायता करने का भी अनुरोध किया है।

खंड विकास अधिकारी गोपालपुर त्रिवेंद्र चनौरिया ने बताया कि सुरेंद्र कुमार को घर बनाने के लिए सरकार से राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। जैसे ही राशि उपलब्ध होगी सुरेंद्र कुमार को दे दी जाएगी।

हिमाचल में एक और शर्मशार करने वाला मामला , मायके आयी हुई महिला से दुराचार

Posted: 26 Aug 2020 07:17 PM PDT


हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला से एक शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है । प्रदेश में अब दरिंदों का कहर इस तरह बढ़ गया है कि महिलाओं और लड़कियों का घर से बाहर घूमना दुर्लभ हो गया है। पता नहीं कि यह भेड़िये किस रूप में आकर आप को अगवा कर ले। अपनी हवस मिटाने के लिए यह किसी भी अंजाम तक जा सकते हैं । हाल ही में एक लड़की और औरत के साथ दुराचार का मामला कांगड़ा जिला से आया था ।

मानो अब ऐसा लगता है कि हिमाचल प्रदेश महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं रहा । अगर भेड़ियों और दरिंदों पर सरकार ने नकेल नहीं कसी तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश की तुलना अन्य राज्यों से की जाएगी ।

हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें अपने मायके आई महिला का अपहरण करके उसके साथ दुराचार किया गया। जानकारी के अनुसार महिला बिलासपुर जिला में स्थित अपने मायके आई हुई थी तथा 22 अगस्त की रात करीब 12:00 बजे ससुराल के गांव में रहने वाले एक व्यक्ति ने उसे फोन कर यह बताया कि उसकी बेटी बीमार है और उसके पति ने उसे लेने के लिए भेजा है । बेटी की बीमार होने की बात सुनकर महिला तुरंत सड़क पर आ गई । वहां एक गाड़ी खड़ी थी जिसमें 3 व्यक्ति सवार थे। उसी कार में वह व्यक्ति था जिसने उस महिला को फोन किया था। जब उस महिला ने उस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी के पास गई तो उन तीनों ने उसे बाजू से खींचकर जबरदस्ती कार में बैठा लिया

महिला के विरोध करने के बावजूद वह उसे पंजाब सीमा के पास गरमोडा ले गए । वहां उसे एक व्यक्ति के घर में छोड़ दिया गया जिसके बाद कार में सवार दो अन्य व्यक्ति वहां से चले गए। उसके ससुराल के गांव में रहने वाले व्यक्ति के साथ कमरे में बंद कर दिया जहां उस व्यक्ति ने उस महिला के साथ दुराचार किया। उस व्यक्ति ने महिला को जान से मारने की धमकी दी । अगले दिन महिला जैसे तैसे करके वहां फरार होने में कामयाब रही तथा वह एक व्यक्ति की सहायता लेकर टिप्पर में बैठकर स्वारघाट जाकर उतरी। 

जहां उसने आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई । डीएसपी संजय शर्मा ने बताया कि पुलिस विभाग में महिला की शिकायत दर्ज कर ली है तथा विभिन्न धाराओं के तहत वह अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवागे ।

अंतरजातीय विवाह करने पर राजेश कुमार व बीना देवी को सरकार ने दिये 50 हजार

Posted: 26 Aug 2020 07:13 PM PDT

हमारे समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में सरकार न केवल अनेक योजनाएं कार्यान्वित कर रही है बल्कि प्रोत्साहन स्वरूप आर्थिक मदद भी दी जा रही है। जोगिन्दर नगर उप-मंडल में गत तीन वर्षों के दौरान 58 परिवारों को अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना का लाभ प्राप्त हुआ है जिनमें से जोगिन्दर नगर तहसील के अंतर्गत 36 जबकि लडभड़ोल तहसील के तहत 22 परिवार शामिल हैं।

अंतरजातीय विवाह योजना के तहत जोगिन्दर नगर के आरठी गांव निवासी राजेश कुमार व बीना देवी को सरकार ने 50 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। जब इस बारे लाभार्थी राजेश कुमार व बीना देवी से बातचीत की तो उनका कहना है कि सरकार द्वारा समाज में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में शुरू की गई अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना न केवल आर्थिक तौर पर लाभकारी है बल्कि जाति प्रथा को खत्म करने में भी कारगर सिद्ध हो रही है। 

आरठी निवासी राजेश कुमार का कहना है कि उनकी शादी धमच्याण (थल्टूखोड़) निवासी बीना देवी से वर्ष 2016 में हुई है जो दोनों अलग-अलग जाति से संबंध रखते हैं। लेकिन जब उन्हे प्रदेश सरकार की अंतर जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना बारे जानकारी मिली तो आर्थिक प्रोत्साहन के लिए अपना आवेदन संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया तथा कुछ समय के बाद उन्हे 50 हजार रूपये की राशि सरकार की ओर से प्राप्त हुई है। इसी तरह जोगिन्दर नगर के वार्ड नम्बर-दो निवासी हेम सिंह की शादी मियोट (बरोट) की गुडडी देवी से वर्ष 2013 में हुई है जो दोनों भी अलग-अलग जाती से संबंध रखते हैं। 

इन्हे भी सरकार की ओर से 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।
इस योजना के तहत लाभान्वित इन दोनों परिवारों ने प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं निश्चित तौर पर हमारे समाज से जातिगत भेदभाव को समाप्त करने में समाज के लिए हितकारी सिद्ध होगी। उनका कहना है कि अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हे न केवल परिवार बल्कि समाज से भी पीड़ा को सहन करना पड़ा है। लेकिन बदलते वक्त के साथ परिवार व समाज की दी हुई यह पीड़ा खत्म हो गई है तथा सरकार की अंतरजातीय प्रोत्साहन योजना की इसमें बड़ी भूमिका रही है।

इसी तरह आरठी गांव के शेष राम व मीना कुमारी, टिकरू के गदयाड़ा निवासी विजय कुमार व नेहा, त्रामट के सिहारल निवासी सीमा देवी व अनुपम, भराडू के गडूही निवासी नरेश कुमार व अन्जुु वाला, चौंतड़ा के धनैतर गांव वासी अमर सिंह व रेखा देवी, गंगोटी की रितु देवी व मंगत राम, ऊटपुर के अमरनाथ व सुनीता देवी, गांव बाग के अजय कुमार व मती देवी, पंडोल गांव के सुरजीत व पवन कुमार इत्यादि ऐसे कई परिवार हैं जिन्हे भी सरकार की अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना का लाभ मिला है।

किन्हे मिलती है सहायता
अंतरजातीय विवाह योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों का हिमाचली बोनाफाईड होना लाजिमी है। साथ ही दोनों लाभार्थियों में से एक का अनुसूचित जाति के साथ-साथ सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी से होना भी अनिवार्य है। साथ ही पंचायत द्वारा जारी विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र के साथ-साथ पंचायत प्रधान द्वारा जारी पति-पत्नि के बीच मधुर संबंध रिपोर्ट प्रस्तुत करना भी जरूरी है। साथ ही पात्र लाभार्थियों की आयु हेतु मैट्रिक प्रमाणपत्र के साथ-साथ शादी के लिए लडक़े की आयु 21 जबकि लडक़ी की आयु 18 वर्ष होना भी आवश्यक है।

कैसे करें आवेदन
योजना का लाभ हासिल करने के लिए पात्र परिवार सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित अपने नजदीकी तहसील कल्याण अधिकारी के कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र पर अपना प्रामणपत्र प्रस्तुत कर सकते हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में तहसील कल्याण अधिकारी, जोगिन्दर नगर व लड भड़ोल चंदन वीर सिंह का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र में कुल 29 पात्र लाभार्थी परिवारों को अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। जिनमें लड भड़ोल तहसील के अंतर्गत 12 तथा जोगिन्दर नगर तहसील के तहत 17 पात्र परिवार शामिल हैं। 

गत तीन वर्षों के दौरान अब तक कुल 58 परिवार इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। उनका कहना है कि इस योजना के अंतर्गत सरकार पहले 25 हजार जबकि वर्तमान में 50 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। जिसमें से 30 हजार रूपये विवाह करने वाले लडक़ा-लडक़ी के नाम पांच वर्ष के लिए बतौर सावधी जमा राशि तथा 20 हजार रूपये दोनों के संयुक्त बचत खाते में जमा किये जाते हैं।

3 दिन से लापता पूर्व प्रधान मिली अपने प्रेमी के घर, कहा- पति को छोड़ लिव-इन में रहूंगी

Posted: 26 Aug 2020 07:07 PM PDT


राजस्थान के बाड़मेर जिले के समदड़ी कस्बे की लापता पूर्व प्रधान पिंकी चौधरी मामले को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। लापता होने के तीन दिन बाद कस्बे की प्रधान रही पिंकी को पुलिस ने ढूंढ लिया है। रविवार को पिंकी अपने प्रेमी अशोक कुमार के साथ गोलिया चौधरियान गांव में उसके घर पर मिलीं। पिंकी ने पुलिस को दो टूक कहा कि, वह पति से तलाक होने तक अपने प्रेमी के साथ लिव इन रिलेशन में रहेंगी। वहीं उन्होने अपने ससुराल पक्ष पर कई आरोप भी लगाए हैं।

समदड़ी थानाधिकारी मिठाराम चौहान के अनुसार, तीन दिन पहले समदड़ी की पूर्व प्रधान के पिता वेलाराम ने बेटी पिंकी चौधरी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इस बीच रविवार को सूचना मिली कि पिंकी गोलिया चौधरियान निवासी अशोक कुमार के साथ उसके घर पर है।

पिंकी ने पूछताछ के दौरान बताया कि, वह अपनी मर्जी से घर से निकली थीं और अब अशोक के साथ वह लिव इन में रहना चाहती हैं। साथ ही एसपी कार्यालय में भेजे गए ई-मेल के बारे में उनका कहना था कि वह ई-मेल उन्होंने खुद ही भेजे थे। उसमें जो आरोप लगाए गए थे उस मामले में वह अपने पति और ससुर पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं चाहती है और अपने बच्चे के साथ अशोक के साथ लिव इन में रहेंगी। इस पर पुलिस ने उनके बयान दर्ज कर वहां से वापस चली आई।

पिंकी ने बताया कि, उनके पिताजी के ऊपर ससुराल पक्ष की ओर से दबाव बनाकर उनकी गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया गया था। इसके बाद मीडिया में यह बात सामने आई कि वह लापता हो गई है। पिंकी ने बताया कि उनके ससुराल पक्ष के लोग उन्हें समाज से बहिष्कृत करने की धमकी भी दे रहे हैं। अब ससुराल पक्ष को जो भी बताना वह कोर्ट में ही बताऊंगी।

गुरुवार से अगले 50 साल तक बुलंदियों को छू रहा है इन 6 राशियों का भाग्य

Posted: 26 Aug 2020 07:04 PM PDT


इन राशि वाले लोग अपना जीवन बेहतर तरीके से व्यतीत करेंगे, खानपान में अधिक रूचि रहेगी, भगवान कुबेर देव की कृपा से आपकी कोई अधूरी मनोकामना पूरी हो सकती है, इनके ऊपर कुबेर देव धन दौलत बरसने वाले हैं, आपका फसा हुआ पैसा वापस प्राप्त होगा, मित्रों के साथ कहीं घूमने फिरने की योजना बना सकते हैं, प्रॉपर्टी से संबंधित मामलों में आपको अच्छा फायदा मिल सकता है, लेन-देन और निवेश से जुड़े मामलों में संभलकर रहना होगा।

घर परिवार में सुख शांति बना बनी रहेगी, आप किसी सुखद यात्रा पर जा सकते हैं, इन राशि वाले लोगों का आने वाला समय धन लाभ देने वाला है, कार्यस्थल में उच्च अधिकारियों की कृपा दृष्टि आपके ऊपर बनी रहेगी, बच्चों के साथ आप आनंददायक समय व्यतीत करेंगे, इनको रोजगार की प्राप्ति होगी, प्रॉपर्टी के लिये आपको कोई अच्छी डील मिलने की संभावना है, बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आपका रास्ता स्वयं छोड़ देगी, समाज में आपको बड़ा काम करने का मौका मिल सकता है, ये लोग अपने जीवन में अधिक प्रगति करते हुए दिखाई देने वाले हैं।

दोस्तों वे 6 भाग्यशाली राशि तुला, मेष, कुंभ, मीन, मिथुन और सिंह है

यह फूल किसी चमत्कार से कम नहीं इसके ये 3 फायदे आपके होश उड़ा देंगे

Posted: 26 Aug 2020 07:01 PM PDT


पलास भारतवर्ष के सभी प्रदेशों और सभी स्थानों में पाया जाता है। पलास का वृक्ष मैदानों और जंगलों ही में नहीं, 4000 फुट ऊँची पहाड़ियों की चोटियों तक पर किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है। यह तीन रूपों में पाया जाता है-वृक्ष रूप में, क्षुप रूप में और लता रूप में। बगीचों में यह वृक्ष रूप में और जंगलों और पहाड़ों में अधिकतर क्षुप रूप में पाया जाता है। लता रूप में यह कम मिलता है। पत्ते, फूल और फल तीनों भेदों के समान ही होते हैं। वृक्ष बहुत ऊँचा नहीं होता, मझोले आकार का होता है। 

पलाश की फलियां कृमिनाशक का काम तो करती ही है इसके उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है। पलाश फूल से स्नान करने से ताजगी महसूस होती है। पलाश फूल के पानी से स्नान करने से लू नहीं लगती तथा गर्मी का अहसास नहीं होता।.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इससे प्राप्त लकड़ी से दण्ड बनाकर द्विजों का यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है। आइये जानते है पलास के चौंकाने वाले 3 फायदे।1.आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फायदे मोतियाबिंद के उपचार को दर्शाता है। 

इस उद्देश्‍य के लिए के लिए आपको पलाश के फूलों के रस की आवश्‍यकता होती है या फिर आप पलाश के बीजों को पानी में भिगों कर छोड़ दें और 48 घंटों के बाद पानी से निकालकर इसका लेप बनाएं। इस पेस्‍ट को आप अपनी आंखों में काजल की तरह लगाएं। इस तरह आप इस पेस्‍ट का नियमित रूप से उपयोग कर धीरे-धीरे मोतियाबिंद के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

2.य‍दि आप किसी चोट की सूजन से परेशान हैं तो आप इसके लिए पलाश के फूल का उपयोग कर सकते हैं। यह एक आयुर्वेदिक वृक्ष है जो कि आपकी बहुत सी परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है। सूजन को दूर करने के लिए पलाश के फूल बहुत ही प्रभाव कारी होते हैं। आप पानी की भाप में या हल्‍की आंच में पलाश के फूलों को गर्म करें और सूती कपड़े की सहायता से इन गर्म फूलों को प्रभावित क्षेत्र में बांधें। ऐसा करने से आप गठिया, चोट, मस्तिष्‍क आदि की सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं। पलाश के फायदे ऐसी समस्‍याओं के प्रभावकारी निदान के लिए जाने जाते हैं।

3.विभिन्‍न त्‍वचा संक्रमणों को दूर करने के लिए ढाक के बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है क्‍योंकि इसके बीजों में बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट और संक्रमण विरोधी गुण होते हैं। पलाश के बीजों का उपयोग कर आप त्‍वचा संबंधि समस्‍याएं जैसे कि दाद , फोड़े, फुंसीयां, अल्‍सर या इनसे होने वाली सूजन को कम कर सकते हैं। पलाश के बीजों को अच्‍छी तरह पीसकर आप इसका पेस्‍ट बना सकते हैं और प्रभावित भाग में इस मिश्रण को लगाकर इन समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं। आप इस पेस्‍ट का तब तक उपयोग करें जब तक की आपकी समस्‍या हल नही हो जाती है।

दुनिया की ऐसी गुफा जहां सोने से खतरनाक बीमारियां हो जाती है जड़ से खत्म, डॉक्टर भी हुए हैरान

Posted: 26 Aug 2020 06:59 PM PDT


आज हम आपको एक ऐसी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी कई तरह की बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखती है. इस गुफा के बारे में जानकर आपको काफी हैरानी होगी.जैसा की हम सभी जानते हैं, कि जब हम बीमारियों शिकार होते हैं, तो सबसे पहले हम डॉक्टर के पास जाते हैं, पर आप लोगो को बता दें कि कुछ लोग ऐसे हैं, जो अगर बीमार होते हैं, वो डॉक्टर के पास नही बल्की एक ऐसी जगह जाते हैं, जहां जाते ही उनकी सारी बीमारियां अपने आप खत्म हो जाती है, आप सभी ये सोच रहे होंगे कि भला ऐसी कौनसी जगह है, जहां जाते ही शरीर की सभी बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती है।
आप सभी को बता दें कि जिस जगह की हम बात कर रहे हैं, वो जगह कोइ और नही बल्की एक गुफा है, आप सभी को ये जानकर हैरानी होगी कि इस गुफा में लोग सोने के लिए और अपनी बीमारियों का इलाज कराने के लिए जाते हैं, बता दें कि इस गुफा में सोने से हमारे शरीर की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

आप सभी को बता दें कि ये गुफा ऑस्ट्रिया के गास्तिन में है, बता दें कि सबसे पहले लोग इस गुफा मे सोने की खोज के लिए आए थे, जिसके बाद उन लोगो को ये पता लगा कि इस गुफा मे एक गैस है, जिसकी मदद से बड़े से बड़ा रोग भी ठीक हो सकता है।

आप सभी को बता दें कि इस गुफा मे रेडियोएक्टिव नाम की एक गैस पाई जाती है, जो कि अर्थराइटिस (गठिया) और पसोरिएसिस (त्वचा संबंधी रोग) जैसी बीमारियों को ठीक करने मे हमारी मदद करती है, आप सभी को बता दें कि यहां हर साल लाखों लोग अपना इलाज कराने इस गुफा मे आते हैं।

एक ऐसा बल्ब जो लाइट जाने के बाद जलता रहता है 5 घंटे मार्केट में मचा रहा है तहलका, कीमत है बेहद कम

Posted: 26 Aug 2020 06:57 PM PDT


देश के कई इलाको में आज भी 24 घंटे की बिजली सप्लाई नहीं होती ऐसे में डीजी सेट और इन्वर्टर का सहारा लेना पड़ता है। डीजी सेट प्रदूषण करता है और इन्वर्टर महंगा होने की वजह से इसे हर कोई लगवा नहीं सकता इन परिस्थितियों से निपटने के लिए इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे एलईडी प्रदर्शनी में ऐसा बल्ब लॉन्च किया गया है जो बिजली के जाने के छह घंटे के बाद भी जलता रहेगा।पावर बेकअप के लिए इसके अंदर बैटरी लगायी गयी है इसमें बैटरी प्रोटेक्शन भी दिया गया है जिससे ये ओवर चार्ज और डिस्चार्ज भी नहीं होता वही बल्ब बनाने वाली कंपनी के निदेशक अंजू जेन ने बताया की आज भी देहात क्षेत्र में बिजली 24 घंटे नहीं मिल पाती है आम आदमी की आर्थिक स्थति अच्छी नहीं है।
इस वजह से वो घर में इन्वर्टर का उपयोग नहीं कर सकते ऐसे में इस बल्ब को बनाने का विचार आया इसे तैयार करने में तीन महीने का समय लगा इसे आमतौर पर लगाए जाने वाले होल्डर में फ़ीट किया जा सकता है बिजली होने पर यह एसी मोड़ पर चलता है और बिजली जाने के बाद ये बल्ब ऑटोमेटिक मोड़ पर चला जाता है यह बल्ब छह घंटे तक रोशनी दे सकता है।

ये बल्ब चार केवी तक के झटके आराम से झेल सकता है और फ्यूज भी नहीं होता ऊर्जा खपत की बात करे तो चार्ज होने के समय ये नो वैट तक बिजली की खपत कर सकता है जबकि पुरे दिन जलने पर केवल चार वाट की बिजली की खपत करता है इस एक बल्ब की कीमत 200 रूपये है।

इस मंदिर में अनंत काल से निकल रही है ज्वाला यहां जो भी दर्शन करने जाता है पूरी होती है हर मनोकामना

Posted: 26 Aug 2020 06:56 PM PDT


इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला निकल रही है इसी कारण इसे ज्वालादेवी का मंदिर कहते हैं। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा हुआ है। देवी के शक्‍ति पीठों में से एक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। इसलिए यहां पर ज्‍वाला निकलती रहती है। 

इसके अलावा यहां पर एक और चमत्कार देखने को मिलता है। मंदिर परिसर के पास ही एक जगह है 'गोरख डिब्बी' जो कि एक जल कुंड है। इस कुंड में गर्म खौलता हुआ पानी है, जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है।किसी को यह ज्ञात नहीं है कि ये ज्वालाएं कहां से प्रकट हो रही हैं? ये रंग परिवर्तन कैसे हो रहा है? आज भी लोगों को यह पता नहीं चल पाया है यह प्रज्वलित कैसे होती है और यह कब तक जलती रहेगी? कहते हैं, कुछ मुस्लिम शासकों ने ज्वाला को बुझाने के प्रयास किए थे, लेकिन वे विफल रहे।

हजारों वर्षों से यहां स्थित देवी के मुख से अग्नि निकल रही है। कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी।इस जगह का एक अन्य आकर्षण ताम्बे का पाइप भी है जिसमें से प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है। इस मंदिर में अलग अग्नि की अलग-अलग 9 लपटें हैं, जो अलग-अलग देवियों को समर्पित हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मृत ज्वालामुखी की अग्नि हो सकती है।

कहते हैं कि सतयुग में महाकाली के परम भक्त राजा भूमिचंद ने स्वप्न से प्रेरित होकर यह भव्य मंदिर बनवाया था। जो भी सच्चे मन से इस रहस्यमयी मंदिर के दर्शन के लिए आया है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

मार्केट में धमाल मचा रहा है 20 एलईडी लाइट वाला बल्ब, अब बिजली की जरूरत नहीं कीमत है बेहद कम

Posted: 26 Aug 2020 06:51 PM PDT


एक एलईडी लैंप या एलईडी लाइट बल्ब प्रकाश जुड़नार में उपयोग के लिए एक विद्युत प्रकाश है जो एक या अधिक प्रकाश उत्सर्जक डायोड का उपयोग करके प्रकाश पैदा करता है।आज हम आपको एक 20 एलईडी लाइट वाला सेंसर के बारे में बताने जा रहे हैं इस एलईडी लाइट का नाम है सोलर मोशन सेंसर लाइट। इसे आप अमेजॉन से खरीद सकते हैं इस सोलर सिस्टम की कीमत ₹219 है।
इसमें सोलर पैनल लगा हुआ है जिसमें आपको बिजली की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ेगी। इसे आप आउटडोर इस्तेमाल कर सकते हैं सिक्युरिटी के लिए भी ये बढ़िया है क्योंकि इसमे मोशन सेंसर लगा है जिससे ये किसी हरकत के साथ जल जाएगी। वाटर प्रूफ भी है आप इसे बिना फ़िक्र के बाहर लगा सकते हैं और ये no.1 बेस्ट सेलर भी है amazon साइट पर। एलईडी लाइट का इस्तेमाल बिजली के चले जाने के बाद इस्तेमाल कर सकते हैं।

कभी ना लें ये गोलियां ! इनकी सच्चाई आपको सोचने पर मजबूर कर देगी

Posted: 26 Aug 2020 06:46 PM PDT


कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं ! (Contraceptive) कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं ! जैसे Norplant, depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !

और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है ! ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन भारत मे लाकर बेच रही हैं ! जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधन के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं

ये injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है !

कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और depo provera का injection लगा दिया ! जिससे उनको cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई !

इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है ! steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है!

इसकी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है ! फिर एक यू क ले फ नाम की एक है फिर एक norplant है ! फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं !

उससे uterus की मांस पेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है ! और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई मताए बहने बिहोश हो जाती है ! लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये contraceptive दिया गया जिसके कारण से ये हुआ है ! और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !

इसके इलवा अभी 3 -4 साल मे कंडोम का व्यपार विदेशी कंपनियो दावरा बहुत बढ़ गया है !! और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है !AIDS का बहाना लेकर TV मे अखबारो मे मैगजीनो मे एक ही बात क विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो ! ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो ! ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ !!

वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ , बहन बेटी के साथ करो ,बस कंडोम का इस्तेमाल करो !! और इसका परिणाम पात क्या हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं ! 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी ! और इन कंपनियो का target ये है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए !!

एड्स का हल्ला मचा कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (साथ ही साथ देशी कम्पनियों ने भी) कण्डोम का बाजार खड़ा किया है और कई सौ करोड़ रूपये का सालाना मुनाफा पीट रही हैं। हालांकि एड्स खतरनाक बीमारी है और यौन संसर्ग के अलावा कई अन्य तरीकों से भी इसका प्रसार होता हे। जैसे इन्जेक्शन की सुई द्वारा, रक्त लेने से एवं पसीने के सम्पर्क द्वारा।

परन्तु बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की शह पर एड्स को रोकने के जिन तरीकों को ज्यादा प्रचारित किया जा रहा है उनमें हैं सुरक्षित सम्भोग और कण्डोम का प्रयोग। डाक्टर लार्ड ओ कलिंग्स के अनुसार एक बार के यौन सम्पर्क से 0.1-1 प्रतिशत ! सुई से 0.5-1 प्रतिशत, ! रक्त चढाए जाने से 0.9 प्रतिशत एड्स होने की सम्भावना रहती है।

इस तरह संक्रमित व्यक्ति के साथ सम्भोग या सुई के इस्तेमाल और रक्त चढाने से एड्स होने की बराबर सम्भावनाएं रहती हैं। देश में यौन सम्बन्धों के लायक सिर्फ 30 % लोग ही हैं जो अधिकतर अपने जीवन साथी के अलावा किसी अन्य से यौन सम्पर्क नहीं बनाते। दूसरी तरफ बच्चे से लेकर बूढे तक इन्जेक्शन की सुई का प्रयोग करते हैं अतः इस रास्ते एड्स फैलने की सम्भावनाएं बहुत अधिक हैं। इसके अलावा रक्तदान द्वारा इस बीमारी का होना लगभग तय है।

और अभी भी हमारे देश में 50 प्रतिशत मामलों में रक्त बिना जांच के ही चढा दिये जाते हैं। भारत में विशेष स्थितियोें में उपर्युक्त दोनों तरीकों से एड्स प्रसार की ज्यादा सम्भावनाओं को नजर अंदाज कर यौन सम्पर्को को ही मुख्य जिम्मेदार मानना पश्चिम का प्रभाव और कण्डोम निर्माता कम्पनियों की पहुंच का ही परिणाम है। विलासी उपभोक्तावादी संस्कृति के इस दौर में कण्डोम संस्कृति और उस का प्रचार विवाहोतर यौन सम्बन्धों को बढ़ाकर इस बीमारी की जड को हरा ही बनायेंगे।

हमारे देश में लगभग 40 करोड़ रूपये का कण्डोम देशी कम्पनियाँ और इतना ही कण्डोम विदेशी कम्पनियाँ बेच रही हैं। विदेशी कण्डोमों के बारे में यह बात खास तौर से उल्लेखनीय है कि 1982 से ही सरकार ने इनके आयात पर से सीमा शुल्क समाप्त कर दिया था और उस फैसले के बाद ही देश का बाजार विदेशी कण्डोमों से भर गया। करीब 25-30 एजेन्सियाँ जापान, कोरिया, ताइवान, हांगकांग, थाइलैण्ड वगैरा से कण्डोम थोक के भाव मंगाती और बेचती हैं। करीब 20 देशी व 80 विदेशी ब्रांडो अर्थात 100 से ज्यादा ब्रांडो में 100 करोड़ से ज्यादा कण्डोम सालाना बिक रहे हैं।

"मुक्त यौन" की संस्कृति और उसे कण्डोम द्वारा सुरक्षा कवच पहना कर प्रचारित करने से युवाओं की उर्जा का प्रवाह किस दिशा में मोड दिया गया है यह अलग से एक बहुत ही गम्भीर सवाल है।

अंत सरकार और ये विदेशी कंपनिया AIDS रोकने से ज्यादा कंडोम की बिक्री बढ़ाना चाहती है ! इसके लिए देश के युवाओ को बहलाया-फुसलाया जा रहा है ! ताकि विवाह से पहले ही किसी भी लड़की के साथ संब्ध स्थापित करे ! और एक पत्नी से अधिक औरतों से संबंध बनाए !! जिससे समाज और परिवार खत्म हो जाये ! ताकि देश की सनातन संस्कृति को खत्म कर देश को जल्दी ही अमेरिका की कुत्ता संस्कृति मे मिलाया जाये ! कुत्ता संस्कृति से अभिप्राय सुबह किसी के साथ, दोपहर किसी के साथ, अगले दिन किसी के साथ !!

दुश्मन की भी हथेली पर ना हो ये निशान, भयानक होते हैं इसके परिणाम

Posted: 26 Aug 2020 06:44 PM PDT


हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हमारी हथेली पर ऐसे कई निशान होते हैं जो छोटी-छोटी रेखाओं के मिलने या टकराने से बनते हैं। इनमें कुछ निशान हमें शुभ फल प्रदान करते हैं, किंतु कुछ बेहद अशुभ होते हैं।

'एम' अक्षर का निशान या 'स्टार' और कुछ खास स्थितियों में 'चक्र' का निशान जहां हथेली के कुछ शुभ निशानों में माने जाते हैं, वहीं कुछ ऐसे निशान भी हैं जो हर परिस्थिति में बेहद अशुभ स्थितियां लाते हैं। आज हम आपको हथेली के एक ऐसे अशुभ निशान 'क्रॉस' के बारे में बताने जा रहे हैं।

कई बार दो रेखाएं जब आकर एक-दूजे के साथ कटती हैं, तब यह निशान बनता है। यूं तो हमारे हाथ में अनगिनत रेखाएं होती हैं जो क्रॉस का निशान बनाती हैं, लेकिन असल में अशुभ क्रॉस निशान कौन सा है और किस स्थान पर बनता है, आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे।

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर बना क्रॉस का निशान मुसीबत, निराशा, खतरा और कभी-कभी जीवन में संकट का संकेत देता है। क्रॉस के लक्षण विभिन्न पर्वतों और रेखाओं की स्थिति पर निर्भर करते हैं। विभिन्न पर्वतों और रेखाओं पर अपनी स्थिति के आधार पर क्रॉस के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं।

यह दुर्घटना के द्वारा एक हिंसक मृत्यु के संकट की चेतावनी देता है। लेकिन जब यह पर्वत के केंद्र पर स्थित हो, तो व्यक्ति के जीवन में भाग्यवादी की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।

सूर्य ग्रह हमें समाज में यश, सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाता है, और इसी पर्वत पर अशुभ चिह्न का होना मुसीबतें खड़ी कर देता है। सूर्य पर्वत पर स्थित क्रॉस संकट को दर्शाता है। यह व्यक्ति को प्रसिद्धि, कला या धन की खोज में निराशाजनक संकेत देता है।

इस पर्वत पर क्रॉस व्यक्ति की बेईमान प्रकृति को दर्शाता है। व्यक्ति अच्छे मस्तिष्क होने के बावजूद दोहरी प्रकृति का होता है। यह निशान व्यक्ति की बुद्धि को नष्ट करने का काम भी करता है। सब कुछ जानते हुए भी वह बुरे कर्म करने लगता है।

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