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Monday, July 20, 2020

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मध्य प्रदेश के सरकारी ऑफिसों में 33-50% का फार्मूला, प्राइवेट ऑफिस 7 दिन बंद होंगे / MP CORONA NEWS

Posted: 20 Jul 2020 08:32 AM PDT

भोपाल। मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोरोनावायरस के संक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी शासकीय कार्यालयों में 33-50% कर्मचारियों का फार्मूला लागू कर दिया है। यानी किसी भी कार्यालय में 50% से अधिक कर्मचारियों की उपस्थिति नहीं हो सकती। 

प्राइवेट ऑफिस का कर्मचारी पॉजिटिव मिला तो 7 दिन बंद

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संक्रमणमुक्त जिलों को छोड़कर अन्य सभी जिलों में राज्य एवं केन्द्र सरकार के सभी कार्यालय 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित किए जाएंगे, अधिकारी शत-प्रतिशत आएंगे। निजी कार्यालय एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान भी 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत क्षमता में संचालित होंगे। निजी दफ्तर तथा व्यापारिक संस्थानो में कोई कोरोना पॉजीटिव मिलने पर उसे 7 दिन के लिए बंद कर दिया जाएगा। बताते चलें कि आज की तारीख में मध्य प्रदेश के सभी 52 जिलों में कोरोनावायरस का संक्रमण पाया गया है।

जबलपुर में एडिशनल कमिश्नर की शादी में शामिल सभी अधिकारी/ कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही होगी 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी मास्क नहीं लगाता है, फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करता है अथवा अन्य तरीके से कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करता है तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। जबलपुर में एक शादी समारोह में कुछ शासकीय अधिकारियों द्वारा गाइड लाइन का उल्लंघन किए जाने को मुख्यमंत्री ने अंत्यत गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए कि उनकी सूची उपलब्ध कराई जाए, उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

कम से कम 15 जिलों में होगा 2 दिन का लॉक डाउन 

मध्य प्रदेश के कम से कम 15 जिलों में 2 दिन का लॉक डाउन होगा। भोपाल-इंदौर के अलावा ग्वालियर, मुरैना, उज्जैन, जबलपुर, सागर, खंडवा, खरगोन, देवास, मंदसौर, धार, शिवपुरी, शाजापुर, टीकमगढ़ और राजगढ़ में 2 दिन का साप्ताहिक लॉकडाउन सुनिश्चित है। इनके अलावा भिंड, बड़वानी और दतिया तीन ऐसे जिले हैं, जहां स्थिति तत्काल नियंत्रित नहीं की गई तो 2 दिन का लॉक डाउन सुनिश्चित है।

'बुरहानपुर मॉडल' को अपनाएं बाहर से आने वालों पर पैनी नजर रखें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बॉर्डर जिला होने के बावजूद बुरहानपुर ने कोरोना संक्रमण रोकने में जो कार्य किया है वह सराहनीय है। अन्य सभी जिले, विशेष रूप से अन्य राज्यों के सीमावर्ती जिले, बुरहानपुर मॉडल को अपनाएं। बुरहानपुर ने दूसरे राज्य से तथा संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले व्यक्तियों की मॉनीटरिंग का अच्छा सिस्टम बनाया और उन्हें उनके घरों में 14 दिन तक क्वारेंटाइन किया। इससे संक्रमण रोकने में काफी मदद मिली।

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मध्य प्रदेश के 15 से ज्यादा जिलों में 2 दिन का लॉकडाउन / MP CORONA UPDATE NEWS

Posted: 20 Jul 2020 08:24 AM PDT

भोपाल। मध्य प्रदेश के 15 से ज्यादा जिलों में अब दो दिन का साप्ताहिक लॉकडाउन होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अधिक संक्रमण वाले जिलों में अब सप्ताह में 2 दिन लॉकडाउन रहेगा। फिलहाल मध्य प्रदेश के 15 जिलों में अधिक संक्रमण है। सीएम श्री चौहान ने डिस्ट्रिक्ट क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप को यह डिसीजन लेने की आजादी दी है कि लॉकडाउन के दो धुन कौन से हो, वह डिसाइड कर सकते हैं। इनमें संडे कॉमन रहेगा। लोकल ग्रुप डिसाइड करे कि यह सेटरडे-संडे होगा या फिर संडे-मंडे। 

कम से कम 15 जिलों में होगा 2 दिन का लॉक डाउन 

मध्य प्रदेश के कम से कम 15 जिलों में 2 दिन का लॉक डाउन होगा। भोपाल-इंदौर के अलावा ग्वालियर, मुरैना, उज्जैन, जबलपुर, सागर, खंडवा, खरगोन, देवास, मंदसौर, धार, शिवपुरी, शाजापुर, टीकमगढ़ और राजगढ़ में 2 दिन का साप्ताहिक लॉकडाउन सुनिश्चित है। इनके अलावा भिंड, बड़वानी और दतिया तीन ऐसे जिले हैं, जहां स्थिति तत्काल नियंत्रित नहीं की गई तो 2 दिन का लॉक डाउन सुनिश्चित है।

सभी सरकारी ऑफिसों में 30%- 50% कर्मचारी की अनुमति

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संक्रमणमुक्त जिलों को छोड़कर अन्य सभी जिलों में राज्य एवं केन्द्र सरकार के सभी कार्यालय 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित किए जाएंगे, अधिकारी शत-प्रतिशत आएंगे। निजी कार्यालय एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान भी 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत क्षमता में संचालित होंगे। निजी दफ्तर तथा व्यापारिक संस्थानो में कोई कोरोना पॉजीटिव मिलने पर उसे 7 दिन के लिए बंद कर दिया जाएगा।

जबलपुर में एडिशनल कमिश्नर की शादी में शामिल सभी अधिकारी/ कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही होगी 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी मास्क नहीं लगाता है, फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करता है अथवा अन्य तरीके से कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करता है तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। जबलपुर में एक शादी समारोह में कुछ शासकीय अधिकारियों द्वारा गाइड लाइन का उल्लंघन किए जाने को मुख्यमंत्री ने अंत्यत गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए कि उनकी सूची उपलब्ध कराई जाए, उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

'बुरहानपुर मॉडल' को अपनाएं बाहर से आने वालों पर पैनी नजर रखें

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बॉर्डर जिला होने के बावजूद बुरहानपुर ने कोरोना संक्रमण रोकने में जो कार्य किया है वह सराहनीय है। अन्य सभी जिले, विशेष रूप से अन्य राज्यों के सीमावर्ती जिले, बुरहानपुर मॉडल को अपनाएं। बुरहानपुर ने दूसरे राज्य से तथा संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले व्यक्तियों की मॉनीटरिंग का अच्छा सिस्टम बनाया और उन्हें उनके घरों में 14 दिन तक क्वारेंटाइन किया। इससे संक्रमण रोकने में काफी मदद मिली।

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मध्यप्रदेश में रात 8:00 बजे से कर्फ्यू, कोरोना कंट्रोल के लिए सख्त कदम शुरू / MP CORONA UPDATE

Posted: 20 Jul 2020 08:01 AM PDT

भोपाल। पिछले 1 महीने से कोरोनावायरस की डाटा शीट में केवल पॉजिटिव कॉर्नर देख रहे सीएम शिवराज सिंह चौहान को स्थिति की गंभीरता समझ में आ गई है। उन्होंने महामारी को नियंत्रण में करने के लिए सख्त कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। मध्यप्रदेश में रात 8:00 बजे से कर्फ्यू लगा दिया गया है जो सुबह 5:00 बजे खुलेगा।

मध्‍य प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने रात्रिकालीन कर्फ्यू की अवधि बढ़ा दी है। अब प्रदेशभर में रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू रहेगा। अधिक संक्रमण वाले जिलों में हफ्ते में दो दिन पूर्ण लॉकडाउन रहेगा उसमें रविवार का दिन तय है। 

घर पर ही रहकर मनाएं आगामी सभी त्यौहार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से अपील की कि आगामी रक्षाबंधन, ईद आदि सभी त्यौहार घर पर रहकर ही मनाएं। सार्वजनिक रूप से कोई भी त्यौहार मनाने की अनुमति नहीं होगी।

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मध्य प्रदेश कोरोना: 15 जिलों में महामारी, 52 जिले संक्रमित / MP CORONA UPDATE NEWS

Posted: 20 Jul 2020 07:16 AM PDT

भोपाल। मध्यप्रदेश में बेकाबू हुआ कोरोनावायरस का संक्रमण सभी 52 जिलों में फैल चुका है। आज की तारीख में मध्यप्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं जिसे कोरोनामुक्त कहा जाए। मृत्यु की संख्या बढ़ने लगी है पिछले 24 घंटे में 17 मरीजों की मौत हो गई। 710 नागरिक पॉजिटिव पाए गए हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की स्थिति बेहद गंभीर बन गई है। 

MADHYA PRADESH CORONA BULLETIN 20 JULY 2020 

संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, मध्य प्रदेश द्वारा जारी कोरोनावायरस मीडिया बुलेटिन दिनांक 20 जुलाई 2020 (शाम 6:00 बजे तक) के अनुसार पिछले 24 घंटे में:- 
16222 सैंपल की जांच की गई।
150 सैंपल रिजेक्ट हो गए। 
15512 सैंपल नेगेटिव निकले। 
710 पॉजिटिव निकले। 
17 मरीजों की मौत हो गई। 
373 नागरिक स्वस्थ हुए, डिस्चार्ज किए गए।
संक्रमित नागरिकों की कुल संख्या 23310 
मृत नागरिकों की कुल संख्या 738 
स्वस्थ हुए नागरिकों की कुल संख्या 15684 
आज की तारीख में कोरोनावायरस से पीड़ित नागरिकों की संख्या 6888 

MP COVID-19 LATEST REPORT की खास बातें 

भोपाल में 142 पॉजिटिव 4 मरीजों की मौत और 1212 एक्टिव केस, इंदौर के बराबर गंभीर स्थिति बन चुकी है। 
इंदौर में 120 पॉजिटिव 3 मरीजों की मौत 1568 एक्टिव केस, हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। 
ग्वालियर में 68 पॉजिटिव एक मरीज की मौत 752 एक्टिव केस, स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। 
100 से ज्यादा एक्टिव केस वाले जिलों की संख्या 15 हो गई, कल तक 12 थी। 
मध्य प्रदेश के 52 में से 49 जिलों में 10 से ज्यादा एक्टिव केस हैं।




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सांची दूध पार्लर अपात्र लोगों से वापस लिए जाएं: पशुपालन मंत्री / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 06:51 AM PDT

भोपाल। पशुपालन मंत्री श्री प्रेम सिंह पटेल ने कहा है कि दुग्ध महासंघ के दुग्ध पार्लर विभिन्न स्थानों पर संचालित हैं। इनकी समीक्षा की जाकर अपात्र व्यक्तियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाये। श्री पटेल मंत्रालय में म.प्र. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) की समीक्षा कर रहे थे।

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि किसानों को दुग्ध उत्पादन में फेडरेशन द्वारा आर्थिक रूप से समृद्ध किया जा रहा है, यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि टैंकरों द्वारा परिवहन में दूध चोरी की घटनाओं पर सख्ती से कार्यवाही की जाना चाहिये।

फेडरेशन के प्रबंध संचालक श्री समीरुद्दीन ने फेडरेशन द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेयरी फेडरेशन के 31 उत्पाद हैं, जिनमें से दूध की विभिन्न 8-9वेरायटी हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुपालन श्री जे.एन. कंसोटिया और विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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अब भगवान भी कांग्रेस को डूबने से नहीं बचा सकते: शिवराज सिंह चौहान / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 06:45 AM PDT

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है और उसका कप्तान अपने ही जहाज में छेद करने में लगा है। अब तो भगवान भी कांग्रेस को डूबने से नहीं बचा सकते। 

Project RG Relaunch failed: JP Nadda

दरअसल, सीएम शिवराज सिंह चौहान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा के एक बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। श्री नड्डा ने अपने बयान में लिखा कि 'We saw yet another (failed) edition of 'Project RG Relaunch' today. Rahul Gandhi Ji was, as usual, weak on facts and strong on mudslinging. Attempts to politicise defence and foreign policy matters shows one dynasty's desperation to wash their past sins of 1962 and weaken India.

उसे लगता है कि वह बिल्कुल ठीक कर रहा है: सीएम शिवराज सिंह चौहान

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा की बात को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि 'कांग्रेस पार्टी एक डूबता हुआ जहाज़ है। कप्तान की ज़िम्मेदारी है जहाज़ और उसमें सवार लोगों को बचाना। बदकिस्मती यह है कि कप्तान ही अपने जहाज़ में छेद करने में लगा हुआ है और उसे लगता है कि वह जो कर रहा है, बिल्कुल ठीक कर रहा है! अब भगवान भी उस जहाज़ को डूबने से नहीं बचा सकते!

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कहीं मध्य प्रदेश का विकास दुबे ना बन जाए गब्बू पारदी / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 06:23 AM PDT

भोपाल। गुना जिले में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करके उन्हें खेती के लिए बटाई पर देने वाला गब्बू पारदी वैसे तो एक पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी से ज्यादा का काम नहीं है लेकिन थानों में सेटिंग और पॉलिटिकल अप्रोच के कारण गब्बू पारदी माफिया में तब्दील होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश की हाई लेवल पॉलिटिक्स में गब्बू पारदी का नाम कई बार दिया गया है। स्थिति गंभीर हो रही है। कहीं यह गब्बू पारदी, मध्य प्रदेश का विकास दुबे ना बन जाए। 

हर साल कार्रवाई होती थी, हर साल तमाशा भी होता था, इस बार मुद्दा बन गया 

गुना के सूत्र और सरकारी कागजों में दर्ज कार्रवाई के रिकॉर्ड बताते हैं कि गब्बू पारदी एक आदतन अतिक्रमणकारी है। वह सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करता है और खेती के लिए मजदूरों को बटाई पर दे देता है। जब भी सरकारी टीम कार्यवाही करने आती है, महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया जाता है। कभी सरकारी टीम वापस लौट जाती है तो कभी बल प्रयोग करके खेती बाजार देती थी। ऐसा कई बार हो चुका है लेकिन इस बार यह कार्रवाई प्रदेश स्तरीय मुद्दा बन गई है। कांग्रेस पार्टी ने इसे जातिवाद से जोड़ दिया। 

अब गब्बू पारदी खतरनाक हो गया है 

मध्य प्रदेश की राजनीति में गब्बू पारदी का नाम पिछले कुछ दिनों में कई बार आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं गुना के नेता श्री दिग्विजय सिंह के संरक्षण का आरोप भी लगा। गब्बू पारदी ने मीडिया के माध्यम से दिग्विजय सिंह के संरक्षण वाली खबर का खंडन किया। कुल मिलाकर गब्बू पारदी का गुना इलाके में महिमामंडन हो गया है। समाचार लिखे जाने तक गब्बू पारदी की साजिश के कारण आईजी, कलेक्टर और एसपी हटाए जा चुके हैं। 6 पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। आसपास के इलाके में दबदबा कायम रखने के लिए यह सब कुछ काफी है। यहीं से किसी भी व्यक्ति के भीतर से कानून का डर खत्म होता है और वह हमलावर हो जाता है।

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भाजपा सांसद का बॉडी गार्ड फांसी पर झूलता मिला / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 06:04 AM PDT

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा सांसद जनार्दन मिश्र के घर पर बतौर बॉडीगार्ड तैनात हुए 9 वीं बटालियन के एसएएफ के जवान अनिल प्रताप सिंह(32) का शव फांसी में लटकता हुआ उनके गांव लोही गांव पुलिस को मिला है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा दर्ज कर पीएम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेजा। 

वहीं आरक्षक के पिता सत्यवान सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र ने आत्महत्या नहीं की उसकी हत्या की गई है। गांव के ही रजनीश सिंह एवं उनकी पत्नी अर्चना सिंह पर हत्या का आरोप लगाया है। पिता सत्यभान सिंह ने कहा कि बीती रात रिश्ते के भाई एवं भाभी अर्चना ने अनिल को निमंत्रण पर अपने घर बुलाया था। रात बीत जाने के बाद सुबह अनिल का शव फांसी पर लटकता मिला है उन्होंने कहा कि गांव वाले लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि अनिल प्रताप सिंह एवं अर्चना सिंह के बीच अवैध संबंध रहा है। बार-बार यह आगाही ग्रामीण करते रहे हैं कि अगर तुम्हारा लड़का नहीं सुधरा तो उसकी हत्या भी हो सकती है, पुलिस हालांकि मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया है।
 
इस संबंध में जब सांसद जनार्दन मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आज सुबह उन्हें तब पता चला जब उन्होंने अंगरक्षक के घर न पहुंचने पर फोन कर जानकारी ली उन्होंने बताया कि 1 माह पूर्व ही अनिल प्रताप सिंह की पदस्थापना उनके बंगले पर बतौर अंगरक्षक की गई थी जिसके बाद से अनिल समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहता था।

अनिल प्रताप सिंह की 28 वर्षीय पत्नी गुड़िया ने भी आरोप लगाया है कि उसके पति का संबंध गांव की है रजनीश की पत्नी अर्चना के साथ रहा है। अर्चना अक्सर घर आया करती थी जिसका वह विरोध लगातार पति से करती थी, लेकिन पति विरोध करने पर उसके साथ मारपीट करने पर उतारू हो जाता था कई बार चाह कर भी वह खुलकर विरोध नहीं कर पाई थी।

एसएएफ के जवान अनिल प्रताप सिंह का शव फांसी में लटकता हुआ मिला है मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया गया हैं पत्नी व पिता ने अवैध संबंध के चलते हत्या का आरोप लगाया है पूरे मामले की जांच की जा रही है। - शिवेंद्र सिंह बघेल, सिटी एसपी रीवा

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मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में प्राचीन मानव सभ्यता का नगर मिला / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 05:59 AM PDT

भोपाल। भारतवर्ष में जब मानव सभ्यता विकसित हो रही थी, उस समय के चिन्ह और शैलचित्र मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में पूर्व में पाए जा चुके हैं। ताजा खबर यह है कि जबलपुर शहर के नजदीक स्थित नरसिंहपुर जिले में कुछ प्राचीन शैलचित्र मिले हैं जो बताते हैं कि करेली वन परिक्षेत्र के दुर्गम विनैकी ग्राम में जहां अब कोई नहीं जाता, एक बस्ती हुआ करती थी। यहां कुछ मानव रहते थे जिन्होंने सभ्यता के विकास के चिन्ह पत्थरों पर उकेरे हैं।

मध्यप्रदेश शासन की ओर से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर हजारों साल पुराने शैलचित्र मौजूद हैं। हाल ही में नरसिंहपुर जिले के करेली वन परिक्षेत्र के दुर्गम विनैकी ग्राम के पास शक्कर नदी की गुफाओं में प्राचीन शैलचित्र मिले हैं। विनैकी में बमुश्किल 20-25 मकान हैं। खड़ी चढ़ाई वाली पहाड़ी पर स्थित विनैकी गाँव में बाहरी व्यक्ति बिरले ही पहुँच पाते हैं। करेली वन परिक्षेत्र की टीम ने प्राकृतिक रूप से अतिरमणीय स्थान पर स्थित इन शैलचित्रों का मुआयना किया। शैलचित्रों की वास्तविक आयु पुरातत्व विभाग के विश्लेषण के बाद ही निर्धारित की जा सकेगी।

मानव हथियारों से शिकार करना सीख चुका था

शैलचित्रों में मानव; हाथी, घोड़े और पैदल लोगों के साथ शिकार खेलते हुए चित्रित है। चित्रों में भाला, तीर-कमान, फरसा आदि स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि यह चित्र तब बनाए गए जब मानव हथियार बनाना और उनसे शिकार करना सीख चुका था। कुछ चित्र भीमबेटिका में मिले चित्रों के समान स्पष्ट लाल रंग के हैं वहीं कुछ चित्र धूसर हो चुके हैं। चित्रों के बारे में किसी लिपि में वर्णन भी किया गया है, जिसे प्राचीन लिपि को कोई जानकार ही पढ़ सकेगा।

विनैकी शैलचित्र तक कैसे पहुंचे

शैलचित्र तक पहुँचने के लिए ग्राम हर्रई से चिखला तक 32 किमी की पक्की सड़क है। चिखला से बिनैकी तक 4 किमी की कच्ची सड़क है। वहीं विनैकी गुफा तक पहुँचने के लिए 2 किमी का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। संपूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक सौन्दर्य से सराबोर है।

मध्य प्रदेश में कहां-कहां मानव सभ्यता के विकास के चिन्ह

मध्यप्रदेश में भोपाल के पास स्थित भीमबेटिका शैलचित्र यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित है। भीमबेटिका से 5 किमी दूर पेंगावन क्षेत्र में भी हजारों साल पुराने 35 शैलचित्र मिले हैं। राजगढ़ जिले के सिंघनपुर, होशंगाबाद के पास आदमगढ़, छतरपुर जिले के बीजावर, रायसेन जिले के पाटनी गाँव में मृगेन्द्रनाथ की गुफा आदि में भी प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र मिल चुके हैं।

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ग्वालियर के 3 युवक सिंध नदी में बह गए, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी / GWALIOR NEWS

Posted: 20 Jul 2020 05:46 AM PDT

अनिल दुबे/ग्वालियर। ग्वालियर शहर के तीन लड़के सोमवती अमावस्या के अवसर पर सिंध नदी में नहाने के लिए उतरे थे लेकिन अचानक हादसे का शिकार हो गए। समाचार लिखे जाने तक तीनों लड़के लापता थे। स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो चुका था और ग्वालियर से रेस्क्यू सपोर्ट रवाना हो गया था। 

बताया जा रहा है कि तीनों लड़के नाका चंद्रबदनी क्षेत्र के रहने वाले थे। इनके नाम दीपक प्रजापति, विशाल चौरसिया एवं हैप्पी शर्मा बताए गए हैं। घटना भितरवार में स्थित प्राचीन धूमेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र की है। सोमवती अमावस्या के अवसर पर यहां स्नान करने के लिए कई लोग आए हुए थे। हादसे का पता तब चला जब नदी किनारे मौजूद लोगों ने देखा कि पत्थर पर 3 जोड़ी कपड़े काफी देर से रखे हुए हैं। कपड़ों में मौजूद डॉक्यूमेंट के आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है। 

स्थानीय ग्रामीण एवं गोताखोरों की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है परंतु घटना को काफी समय बीत जाने के कारण कोई अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा कि युवक कहां तक पहुंच गए होंगे। रेस्क्यू सपोर्ट के लिए ग्वालियर से NDRF की टीम रवाना हो गई है। बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर लगातार बारिश हो रही है।

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CBSE रीइवैल्युएशन और मार्क्स वेरीफिकेशन: फिर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना, ₹2 की जगह ₹700

Posted: 20 Jul 2020 05:29 AM PDT

ग्वालियर। Central Board of Secondary Education ने इस साल फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर दी। 2011 में फैसले के बाद 2016 और 2018 में आदेश की अवहेलना के लिए याचिका लगाई जा चुकी है। हर बार सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को आदेशित करता है और हर साल CBSE द्वारा आदेश की अवहेलना की जाती है। सवाल यह है कि क्या हर परीक्षा के बाद एक याचिका दाखिल करना पड़ेगी। मामला हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल की रीइवैल्युएशन और मार्क्स वेरीफिकेशन फीस का है। 

CBSE रीइवैल्युएशन और मार्क्स वेरीफिकेशन की तारीख

सीबीएसई 12वीं कक्षा के स्टूडेंट मार्क्स वेरीफिकेशन के लिए 17 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वहीं 10 वीं कक्षा के लिए स्टूडेंट 20 जुलाई से आवेदन कर सकते हैं। 10वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स 1 से 5 अगस्त के बीच आंसर बुक की फोटोकॉपी हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

आंसर बुक की फोटो कॉपी ₹700, मार्क्स वेरीफिकेशन ₹500 प्रति सब्जेक्ट

आंसर बुक की फोटोकॉपी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ 700 रुपये प्रति आंसर बुक शुल्क चुकाना होगा। वहीं मार्क्स वेरीफिकेशन के लिए हर सब्जेक्ट के हिसाब से स्टूडेंट 500 रुपये शुल्क देना होगा। आंसर बुक मिलने के बाद किसी प्रश्न का री-इवैल्युएशन कराना है तो फिर 100 रुपये प्रति सवाल शुल्क देना होगा। 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है: आंसर बुक की फोटो कॉपी RTI के तहत ₹2 में दी जाए

CBSE द्वारा तय की गई राशि नियमों से अधिक है। बोर्ड द्वारा आंसर बुक की स्कैन कॉपी के लिए 700 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि यह राइट टू इंफॉर्मेशन के दायरे में आता है। इसके लिए 2 रुपये प्रति पेज से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में 2 कंटेम्प्ट पिटीशन लगाई जा चुकी है

सीबीएसई द्वारा आंसर बुक की कॉपी के लिए लगाए जाने वाले शुल्क पर 2011 में पिटीशन दायर की गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि बोर्ड स्टूडेंट्स से 1000 या इतने से अधिक रुपये नहीं ले सकता। इसके बाद 2016 में फिर से कंटेम्प्ट पिटीशन दायर हुई। इसकी सेकंड कंटेम्प्ट पिटीशन 2018 में दायर हुई थी। इसमें भी ऑर्डर हुए कि स्टूडेंट का कॉपी हासिल करना राइट टू इंफॉर्मेशन के दायरे में आता है। यदि सीबीएसई या कोई और इससे अधिक शुल्क लेता है तो इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। 

वकील कहते हैं अन्याय के खिलाफ लड़ना है तो फिर से कंटेम्प्ट पिटीशन दाखिल करो

हाई कोर्ट एडवोकेट रोहित गुप्ता बताते हैं कि सीबीएसई की तरफ से तय की गई शुल्क एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहना करना है। इसे लेकर पैरेंट्स या स्टूडेंट्स चाहें तो कंटेम्प्ट पिटीशन दायर कर सकते हैं। विश्वविद्यालय में भी जब स्टूडेंट्स अपनी आंसर बुक की कॉपी प्राप्त करते हैं तो वह आरटीआइ के दायरे में आती है और उसी के आधार पर शुल्क लिया जाता है। यहां पर पैरेंट्स को जागरूक होकर निर्णय लेना चाहिए।

₹1000 बचाने के लिए कोई सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन क्यों लगाएगा

एक निजी स्कूल संचालक का कहना है कि सीबीएसई का अपना सिस्टम है। वैसे देखा जाए तो यह शुल्क लेना गलत है, लेकिन कभी स्टूडेंट्स या उनके पैरेंट्स इस तरह के फैसले को लेकर अपत्ती नहीं उठाते हैं। मार्क्स वेरीफिकेशन और री-इवैल्युएशन के लिए वही स्टूडेंट आवेदन करते हैं, जो या तो फेल हो गए हैं या फिर अपने मार्क्स को लेकर बहुत पर्टिकुलर हैं। ऐसे में उनके सामने फीस अहम मुद्दा नहीं होती है इसलिए इसके बारे में वे ध्यान ही नहीं देते हैं। वैसे भी कोई ₹1000 बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाने क्यों जाएगा।

RTI की प्रोसेस लंबी है, आंसर बुक जल्दी चाहिए तो फीस देनी होगी

तीन स्टेज का प्रोसेस है। पहले वेरीफिकेशन ऑफ मार्क्स के लिए आवेदन करते हैं। जिन स्टूडेंट्स ने वेरीफिकेशन के लिए आवेदन किया है वे ही स्कैन कॉपी हासिल करने के लिए प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यदि कॉपी देखने के बाद स्टूडेंट को लगता है कि उसके नंबर बढ़ने हैं तो वह री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन करता है। स्टूडेंट आंसर बुक खुद की तसल्ली के लिए लेता है। सीबीएसई इसे आरटीआइ की तरह ट्रीट नहीं करता। आरटीआइ का अलग फॉर्म होता है और यदि उसके जरिए आवेदन किया जाएगा तो फिर शुल्क भी आरटीआइ का ही देना होगा। स्टूडेंट्स आरटीआइ का सहारा इसलिए नहीं लेते हैं, क्योंकि इसकी प्रोसेस लंबी है। उन्हें 15 दिनों के अंदर पूरी प्रोसेस कर कॉलेज में एडमिशन लेना होता है।
- राजेश्वरी सावंत, अध्यक्ष, ग्वालियर सहोदय कॉम्प्लेक्स

CBSE 12वीं कक्षा के लिए फीस

मार्क्स वेरीफिकेशन 17 से 21 जुलाई 500 रुपये प्रति सब्जेक्ट
आंसर बुक की फोटोकॉपी 1 से 2 अगस्त 700 रुपये प्रति आंसर बुक
री-इवैल्युएशन 6 से 7 अगस्त 100 रुपये प्रति सवाल

CBSE 10वीं कक्षा के लिए फीस

मार्क्स वेरीफिकेशन 20 से 24 जुलाई 500 रुपये/ प्रति सब्जेक्ट
आंसर बुक की फोटोकॉपी 4 से 5 अगस्त 500 रुपये/ आंसर बुक
री-इवैल्युएशन 10 से 11 अगस्त 100 रुपये प्रति सवाल

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ग्वालियर में SBI महाराज बाड़ा ब्रांच के ऑफिसर सहित 6 गार्ड कोरोना पॉजिटिव / GWALIOR NEWS

Posted: 20 Jul 2020 05:25 AM PDT

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में कोरोना का प्रकाेप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रोज 50 से ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं। पूर्व में एक दिन में 200 संक्रमित मरीज तक मिले हैं।  

रविवार को जीआरएमसी ( GRMC) की वायरोलॉजीकल लैब की जांच में 63, जिला अस्पताल की ट्रूनेट मशीन की जांच 2 तथा मरीज प्राइवेट लैब पैथकाइंड की जांच में 5 लोगों को कोरोना होने की पुष्टि हुई है। तीन दिन पहले महाराज बाड़ा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की करेंसी स्कैब के कर्मचारी के पॉजिटिव निकलने के बाद स्कैब के 70 अधिकारी और कर्मचारियों ने सैंपल दिए थे।  

70 अधिकारी और कर्मचारियों के सैंपल में से यहां कार्यरत कैश ऑफिसर और 6 गार्ड को कोरोना होने की पुष्टि हुई है। इनके अलावा 6 पुलिसकर्मी तथा सीआरपीएफ के जवान भी संक्रमित पाए गए हैं।

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बीमार महिला शिक्षक से सर्वे कराती रही तहसीलदार, शिक्षिका कोरोना पॉजिटिव निकली / EMPLOYEE NEWS

Posted: 20 Jul 2020 04:58 AM PDT

इंदौर। किल कोरोना अभियान के तहत टीम नंबर 8/538 के साथ काम कर रहीं महिला शिक्षक उमा विश्वकर्मा गंभीर रूप से बीमार है। उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। महिला शिक्षक ने अपनी टीम लीडर तहसीलदार देखा सचदेवा पर आरोप लगाया है कि 4 दिन से लगातार बुखार होने के बावजूद तहसीलदार ने उन्हें छुट्टी नहीं दी। जब उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। 

महिला शिक्षक को 4 दिन से बुखार था फिर भी तहसीलदार सर्वे करवाती रही

महिला शिक्षक उमा विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें चार दिन पहले तेज बुखार आया। उन्होंने टीम लीडर तहसीलदार रेखा सचदेवा से निवेदन किया कि छुट्टी दी जाए। तहसीलदार ने साफ कह दिया कि छुट्टी देंगे तो सर्वे कौन करेगा? ऐसे में शिक्षिका सर्वे करती रहीं। जब शिक्षिका की हालत नाजुक हो गई तो उनकी बेटी बड़ी ग्वालटोली स्थित सरकारी अस्पताल लेकर पहंची। वहां से उन्हें एमटीएमच अस्पताल रैफर कर दिया। शिक्षिका के रिश्तेदार ने बताया कि उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि वे दो चम्मच पानी भी पी रही थी तो उल्टी हो जाती थी। शनिवार को जब स्थिति बिगड़ी तो उन्हें ऑक्सीजन चढाई गई। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। जांच में उन्हें कोरोना निकल गया।

तहसीलदार मैडम नौकरी से निकालने की धमकी देती हैं: कर्मचारियों का आरोप

सर्वे कार्य से जुड़ी शिक्षिका शोभा वर्मा, कुसुमलता वर्मा, शोभा भटनागर, चंद्रकला कैथवास, रीमा सोनी, रोहिणी तिवारी और अन्य ने एसडीएम को तहसीलदार रेखा सचदेवा के खिलाफ लिखित शिकायत की है। शिकायत के मुताबिक सचदेवा पर आरोप है कि वे शिक्षिकाओं के साथ अभद्र व्यवहार और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करती हैं। इसके चलते वे सभी मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हैं। शिक्षिकाओं ने लिखा है कि वे ईमानदारी से काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें तहसीलदार द्वारा बार-बार धमकी दी जाती है कि तुम्हें नौकरी से हटाकर घर बैठा दिया जाएगा। अतः उन्हें बदला जाए।

तहसीलदार रेखा सचदेवा और डीबी स्टार के पत्रकार के बीच सीधी बात

पत्रकार- सर्वे कार्य में तैनात महिला शिक्षक को बीमार होने के बाद भी आपने अवकाश नहीं दिया। ऐसा क्यों? 
तहसीलदार- शिक्षकों को काम करने में बहुत कष्ट होता है। वे चाहते हैं कि उनसे कोई कुछ कहे नहीं, कुछ पूछे नहीं। जब वे भर्ती हुई तो छुट्टी दी है उन्हें दो-तीन दिन की। 
पत्रकार- लेकिन उमा विश्वकर्मा की तबीयत ज्यादा खराब है। फिर? 
तहसीलदार-उमा को मुक्ति चाहिए तो कलेक्टर से अपनी ड्यूटी रद्द करवाएं। 
पत्रकार- कुछ शिक्षिकाओं को शोकॉज नोटिस दिए हैं। क्यों? 
तहसीलदार- शिक्षकों को काम पर आना नहीं होता है तो नाटक करते हैं। बहाने बनाकर घर पर रहते हैं। इन्हें नोटिस देंगे ही सही। 
पत्रकार- शिक्षकों ने लिखित शिकायत की है कि आप उनके साथ अभद्रता करती हैं। घर बैठाने की धमकी देते हैं। सही है क्या? 
तहसीलदार- बहुत कम काम है सर्वे का, फिर भी इनका रोना-गाना चलता रहता है। दो घंटे भी काम नहीं करना चाहते। ये सब ऐसे ही हैं। शिक्षा विभाग के काम करने का नाटक करते हैं, जबकि डीईओ का कहना है कि वे कोई काम नहीं दे रहे हैं। 
पत्रकार- सर्वे से पहले उन्हें साइन करने बुलाते हैं। ऐसा क्यों? 
तहसीलदार- ये लोग ठीक से सर्वे नहीं करते हैं। किसी एक जगह खड़े होकर लोकेशन दे देते हैं और हो गया बस। बगीचे में बैठकर खाना खाते हुए जानकारी भर देते हैं। सुपरवाइजर ने इन्हें पकड़ा है। 
पत्रकार- आरोप है कि आप उन्हें कहती हैं कि साइन करने आओ और चेहरा दिखाकर जाओ। सच है क्या? 
तहसीलदार- गलत आरोप है। मैं वहां नहीं रहती हूं वहां हमारे पटवारी, सुपरवाइजर और सेक्टर इंचार्ज होते हैं। यदि सही से सर्वे करते हैं तो फिर मरीज क्यों निकल रहे हैं? कुछ शिक्षक घर से ही रामराज्य चला रहे हैं। 

तहसीलदार रेखा सचदेवा की शिकायतें पहले भी हो चुकी है 

म.प्र. लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा देवास नैन के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था जिन्होंने अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर्मचारी रोहित आर्य से अभद्र व्यवहार किया। सबके सामने है उसे जलील किया। देवास में कुछ अन्य कर्मचारियों ने भी रेखा सचदेवा की शिकायत की थी। 
2018 में इंदौर कलेक्टोरेट में काम करने वाली महिला रीडर सहायक ग्रेड-3 रीना कुशवाह ने अपनी ही उच्च अधिकारी व नायब तहसीलदार मल्हारगंज रेखा सचदेवा के खिलाफ कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत की। 

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जबलपुर से कांग्रेस विधायक को एयर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया, स्थिति गंभीर / JABALPUR NEWS

Posted: 20 Jul 2020 06:46 AM PDT

जबलपुर। कांग्रेस नेता, विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री लखन घनघोरिया का स्वास्थ्य लगातार बढ़ता जा रहा है। बीती रात उन्हें जबलपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था परंतु जब जबलपुर के डॉक्टर असफल होते देखे तो उन्हें एयर एम्बुलेंस से मेदांता हॉस्पिटल, गुड़गांव ले जाया गया है। श्री घनघोरिया की कोरोना वायरस रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

विधायक लखन घनघोरिया पिछले 1 माह से बीमार हैं

श्री लखन घनघोरिया ने शारीरिक कमजोरी की शिकायत की थी। जबलपुर में डॉक्टरों ने बताया कि उनके फेफड़ों में निमोनिया हो गया है। उन्हें क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष के मुताबिक, घनघोरिया पिछले करीब 1 माह से अस्वस्थ हैं। उन्हें सर्दी और खांसी हुई थी। साथ ही फेंफड़ों में परेशानी हो रही थी। 

मेदांता अस्पताल ने अभी तक कोई अपडेट नहीं दिया

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घनघोरिया के स्वास्थ्य के बारे में कुशलक्षेम जानी। इसके साथ प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी घनघोरिया के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मेदांता अस्पताल में समाचार लिखे जाने तक कोई अपडेट नहीं दिया था।

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उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमचंद गुड्डू कोरोना पॉजिटिव, BOMBAY HOSPITAL में भर्ती / INDORE CORONA NEWS

Posted: 20 Jul 2020 04:01 AM PDT

इंदौर। मध्यप्रदेश में तेजी से फैल रहे कोरोनावायरस के संक्रमण ने कांग्रेस के नेता, पूर्व सांसद एवं उपचुनाव में सांवेर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी श्री प्रेमचंद गुड्डू कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्हें मुंबई हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। 

तुलसी सिलावट के खिलाफ चुनाव लड़ने कांग्रेस में लौटे हैं प्रेमचंद गुड्डू 

कांग्रेश मूल के नेता श्री प्रेमचंद गुड्डू 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे परंतु अब श्री तुलसी सिलावट कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गए इसलिए उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए प्रेमचंद गुड्डू वापस कांग्रेस में लौट आए थे। 

प्रेमचंद गुड्डू की कांटेक्ट हिस्ट्री में हजारों लोग 

कांग्रेस पार्टी ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है परंतु श्री प्रेमचंद गुड्डू को सांवेर विधानसभा सीट से कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी मान लिया गया है। प्रेमचंद गुड्डू लगातार विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं। उनकी कांटेक्ट हिस्ट्री में हजारों लोग हो सकते हैं। प्रशासन ने लगातार संपर्क में रहने वाले लोगों को सैंपल देने के लिए कहा है।

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मध्यप्रदेश में कोरोना बढ़े या घटे, उपचुनाव सितंबर लास्ट तक हो जाएंगे: चुनाव आयोग / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 03:47 AM PDT

भोपाल। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुनील अरोड़ा ने कहा है कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव सितंबर महीने के अंत तक हो जाएंगे। उन्होंने संकेत दिए कि रक्षाबंधन से पहले चुनाव की तारीखों की घोषणा की जा सकती है। श्री अरोड़ा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए हैं। 

पोलिंग बूथ पर सोशल डिस्टेंसिंग लेकिन चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी कौन लेगा 

मध्यप्रदेश में इन दिनों कोरोनावायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हर आने वाले दिन में पॉजिटिव की संख्या प्रत्येक गुजर गए दिन से ज्यादा आ रही है और कोई भी व्यक्ति प्रिया कहने की स्थिति में नहीं है कि अगस्त या सितंबर में हालात क्या होंगे। चुनाव आयोग ने पोलिंग बूथ पर सोशल डिस्टेंसिंग के इंतजाम कर लिए हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव प्रचार में कोरोना गाइडलाइन के पालन की जिम्मेदारी कौन लेगा। सरकार ने सभी प्रकार के सामूहिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। क्या चुनाव आयोग स्पष्ट करेगा कि किसी भी प्रकार की चुनावी सभा इसी प्रतिबंध के दायरे में आएगी। 

मध्य प्रदेश की 26 सीटों पर उपचुनाव होना है 

मध्य प्रदेश की 26 सीटों पर उपचुनाव होना है। निर्धारित नियम के अनुसार सितंबर माह के अंत तक चुनाव संपन्न हो जाना चाहिए परंतु सभी नियम सामान्य परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे। आपातकाल की स्थिति में जबकि महामारी फैली हो, मौत का खतरा मंडरा रहा हो, नियमों को शिथिल कर दिया जाता है। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र स्थगित कर दिया गया फिर उप चुनाव स्थगित करने में क्या समस्या है।

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कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह, डॉ नरोत्तम मिश्रा से मिले: कमलनाथ के किले में बड़ी दरार / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 03:47 AM PDT

भोपाल। मध्यप्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे कमलनाथ ने संडे को किलेबंदी की थी (विधायक दल की बैठक बुलाकर सबसे वचन लिया था कि कोई भी विधायक कांग्रेस पार्टी छोड़कर नहीं जाएगा) परंतु सोमवार सुबह कमलनाथ के किले की दीवार में बड़ी दरार नजर आई। कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ विधायक कृष्ण पाल सिंह सोमवार सुबह मध्य प्रदेश के गृहमंत्री एवं भाजपा के ऑपरेशन लोटस के कमांडर डॉ नरोत्तम मिश्रा से मिले। 

नए विधायकों को मंत्री बनाने से नाराज थे, लेकिन अनुशासन में रहे

कमलनाथ ने अपनी सरकार में कई खतरनाक प्रयोग किए। उनमें सबसे खतरनाक प्रयोग था अनुभवहीन और नए विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाना। पिछोर विधायक केपी सिंह जैसे कांग्रेस के कई पुराने सिपाही इस बात से नाराज थे। मीडिया में हमेशा खबरें आई कि केपी सिंह मंत्री पद ना मिलने से नाराज हैं जबकि केपी सिंह का गुस्सा उनसे जूनियर और अनुभवहीन विधायकों को नेट मंत्री बनाने पर था। इसके बावजूद उन्होंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की। कभी अनुपस्थित रहकर तो कभी चुप रह कर अनुशासन के दायरे में अपनी नाराजगी प्रकट की। 

केपी सिंह संगठन के सिपाही लेकिन संगठन अब बचा ही नहीं 

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से विधायक केपी सिंह कांग्रेस संगठन के सिपाही हैं। जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे तो उनके मंत्रिमंडल में मंत्री होने के नाते सभी जिम्मेदारियां निभाई। पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लोकसभा का टिकट दिया तो अपनी विधानसभा से उन्हें जिताने की जिम्मेदारी उठाई। पार्टी ने जो भी आदेश दिया पिछोर विधानसभा में उसका पालन किया गया लेकिन समस्या यह है कि जब पार्टी के प्रति निष्ठा का प्रतिफल मिलने की बारी आई तो पार्टी दिखाई ही नहीं दी। 3 गुट थे और केपी सिंह किसी भी गुट के नेता नहीं थे। 

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Posted: 20 Jul 2020 03:47 AM PDT

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी, पर्वू मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री सचिन यादव, विधायक दिलीप सिंह गुर्जर, सिद्धार्थ कुशवाहा, राहुल लोधी एवं प्रवक्ता श्रीमती विभा पटेल ने एक संयुक्त प्रेसवाता में मध्यप्रदेश सरकार पर 27 प्रतिशत आरक्षण को, जिसे कमलनाथ सरकार ने दिया था, तत्काल लागू करवाने की मांग की। कांग्रेस ने यह भी घोषणा की है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकार पर बहस करने के लिए अदालत में वह पार्टी की ओर से वरिष्ठ वकीलों को खड़ा करेगी।

आबादी ज्यादा इसलिए आरक्षण भी ज्यादा होना चाहिए: कांग्रेस का तर्क

मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसँख्या प्रदेश की कुल जनसँख्या का लगभग 86 प्रतिशत है एवं अकेले अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसँख्या लगभग 54 प्रतिशत है। कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश लोकसेवा अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम मे वर्ष 2019 में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग के लिए शासकीय सेवाओं में आरक्षण का प्रतिशत 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। साथ ही साक्षात्कार एवं पदोन्नति समितियों में भी अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि को रखना आवश्यक किया था।

संविधान में आरक्षण की कोई लिमिट फिक्स नहीं है: कांग्रेस का तर्क

मध्यप्रदेश लोक सेवा संसोधन अधिनियम 2019 में प्रदत्त आरक्षण के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में विभिन्न याचिकाएं दायर की गई जो कि विचाराधीन हैं एवं निकट भविष्य में इनकी सुनवाई होना संभावित है। इन याचिकाओं में मुख्यतः आरक्षण के कुल प्रतिशत को आधार बनाया गया है। जबकि भारत के संविधान के किसी भी अनुच्छेद में आरक्षण की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है।

27 प्रतिशत आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस अपनी ओर से अन्य पिछड़ा वर्गों का पक्ष रखने हेतु एक वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रबंध करेगी किन्तु वर्तमान सरकार का यह दायित्व है कि अन्य पिछड़ा वर्गों की अधिकारिता पर विद्धेष का ग्रहण न लगने दे। कुछ निर्णय सामाजिक अधिकारिता प्रदान करने हेतु आवश्यक होते हैं और इन्हे राजनैतिक विद्धेष की बलि नहीं चढ़ना चाहिए।

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मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की लिस्ट दिल्ली पहुंची, अप्रूवल का इंतजार / MP NEWS

Posted: 20 Jul 2020 12:09 AM PDT

भोपाल। लंबे समय के बाद मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन होने जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा ने प्रस्तावित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की लिस्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा के पास भेज दी है। दिल्ली से अप्रूवल मिलते ही कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। 

बताया जाता है कि विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए जातिगत और भौगोलिक संतुलन के साथ-साथ गुटीय संतुलन को भी साधने की कोशिश की जा रही है। इसलिए कार्यकरिणी में सिंधिया समर्थकों के अलावा क्षेत्रीय नेताओं को भी जगह दी जाएगी।

आपको बता दें कि 2015 के बाद से अब तक प्रदेश में बीजेपी की कार्यकरिणी टीम का गठन नहीं किया गया है। इसलिए कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि युवाओं को टीम में जगह दी जाएगी. वीडी शर्मा की नई टीम जंबो हो सकती है। इसमें 50 से अधिक लोगों को शामिल किया जाएगा।

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Posted: 20 Jul 2020 03:46 AM PDT

भोपाल। मध्यप्रदेश में एक के बाद एक 24 विधायक कमलनाथ को अपना नेता मानने से इनकार करते हुए कांग्रेस पार्टी और विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। बिकाऊ-टिकाऊ बयानों के बावजूद यह हालात किसी भी नेता के अस्तित्व के लिए संकट का विषय बन जाते हैं। स्वभाविक है कमलनाथ की 40 साल की राजनीति दांव पर लग गई है। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शेष बचे सभी कांग्रेस विधायकों को बुलाकर शपथ दिलवाई कि कोई भी विधायक किसी भी स्थिति में कांग्रेस पार्टी छोड़कर नहीं जाएगा। 

विधायकों से पहले कहा था यदि कुछ मिल रहा है तो ले लो अब वन-टू-वन चर्चा

दरअसल, कमलनाथ ने 15 महीने में इतनी गलतियां की कि 40 साल का अनुभव और गांधी परिवार से नजदीकी का जादू काम नहीं कर पाया। मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन से पहले विधायकों ने कमलनाथ से कहा था कि उनके पास कुछ प्रस्ताव आ रहे हैं। तब कमलनाथ ने वन-टू-वन चर्चा करने के बजाए मीडिया के सामने आकर बयान दिया था कि यदि विधायकों को कहीं से कुछ मिल रहा है तो ले ले। इस तरह उन्होंने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया था कि इस मुद्दे पर वह कोई बात करना नहीं चाहते और अब प्रद्युम्न लोधी और सुमित्रा कासेडकर के जाने के बाद कमलनाथ ने शेष बचे सभी विधायकों से वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान यह भी जानने की कोशिश की कि किस विधायक के पास किस तरह का ऑफर आ रहा है। 

यदि 5 विधायक और चले गए कमलनाथ से राजनीति रुठ जाएगी 

कांग्रेस पार्टी में कमलनाथ के लिए यह संकट का समय चल रहा है। मुख्यमंत्री के पद पर सुशोभित होने के बाद कमलनाथ ने सोशल मीडिया अभियान के दौरान जिस तरह से खुद को मध्य प्रदेश का सबसे सफल राजनेता घोषित किया था, एक-एक करके सारी परतें खुलती जा रही है। चुनाव के दौरान बसपा ने गठबंधन करने से इंकार कर दिया, लोकसभा का चुनाव हार चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया को हर कदम पर जलील करने (राजधानी भोपाल में एक सरकारी बंगला तक नहीं दिया) के बावजूद उनके साथ ही विधायकों को आकर्षित नहीं कर पाए, विधायकों को एवं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े लोगों के आत्म सम्मान को चोट पहुंचाने वाले बयान दिए। सत्ता परिवर्तन के बाद दो विधायक इस्तीफा देकर चले गए। पब्लिक में भले ही बिकाऊ-टिकाऊ के बयान और बंद कमरे में दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए परंतु सच सिर्फ एक ही है और वह यह कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कमलनाथ थे। वह अपनी कुर्सी बचा नहीं पाए। और अब प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी खतरे में है। यदि इंदिरा गांधी के तीसरे पुत्र ना होते, तो शायद हाईकमान की किचन केबिनेट के शिकार हो चुके होते हैं।

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जब मोबाइल 100% चार्ज हो जाता है तो चार्जर ऑटोमेटिक ऑफ क्यों नहीं होता / GK IN HINDI

Posted: 20 Jul 2020 01:40 AM PDT

इसमें कोई दो राय नहीं कि SMARTPHONE वाकई स्मार्ट है। उसकी स्मार्टनेस कई मामलों में प्रमाणित होती है परंतु चार्जिंग के मामले में स्मार्टफोन में पुरानी परंपरा का उपयोग क्यों किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब स्मार्टफोन 100% चार्ज हो जाता है तो फिर उसका CHARGER ऑटोमेटिक ऑफ क्यों नहीं होता, जबकि ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। हां यह पता लगाते हैं स्मार्टफोन बनाने वाले ENGINEERS ने इतनी बड़ी गलती क्यों की:-

क्या सचमुच स्मार्ट फोन की BATTERY 100% चार्ज होती है 

प्रश्न का उत्तर बेहद चौंकाने वाला है। स्मार्टफोन बनाने वाली इंजीनियर ने कोई गलती नहीं की बल्कि हमने उसे समझने में गलती की है। स्मार्टफोन का चार्जर उसके अंदर ही होता है, जिसे हम चार्जर कहते हैं असल में वह एडाप्टर होता है। दूसरी खास बात है कि स्मार्ट फोन का चार्जर बैटरी के 95% पर ही चार्जिंग बंद कर देता है। हालांकि यह स्टैंडर्ड नहीं है, अलग-अलग कंपनियों ने अलग-अलग हाई लेवल फिक्स किया हुआ है।

SMARTPHONE का CHARGER AUTOMATIC OFF हो जाता है

उदाहरण के लिए, iOS 13 में, iPhone में चार्जिंग 80% पर आकर ऑटोमेटिकली ऑफ हो जाती है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बैटरी की उम्र ज्यादा से ज्यादा रहे। दूसरी मजेदार बात यह है कि मोबाइल चार्जर जब ऑटोमेटिक स्विच ऑफ हो जाता है तो आपकी बिजली भी खर्च नहीं होती। केवल पावर डोंगल का इंडिकेटर जलता रहता है और सिर्फ उतनी ही बिजली खर्च करता है।

हां और एक बात और, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वह ज्ञानवीर जो बार-बार बताते हैं कि मोबाइल कभी 100% चार्ज नहीं करना चाहिए, कृपया उन्हें बताइएगा कि स्मार्टफोन बनाने वाले इंजीनियर भी बदाम खाते हैं। 
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संपत्ति अधिग्रहण का शारीरिक विरोध आईपीसी में अपराध माना गया है / ABOUT IPC

Posted: 20 Jul 2020 01:39 AM PDT

सरकार यदि किसी संपत्ति का अधिग्रहण कर रही है और इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है तब ऐसी स्थिति में अधिग्रहण की कार्यवाही का शारीरिक विरोध (चाहे वह शांतिपूर्वक ही क्यों ना हो) भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत अपराध माना गया है। यानी ऐसी कार्रवाई के विरोध में आप केवल न्यायालय से स्थगन आदेश हिला सकते हैं। लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते। ब्रिटेन की सरकार ने आईपीसी की धारा 183 इसलिए बनाई थी ताकि संपत्ति अधिग्रहण की कार्यवाही में कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का दखल ना दे पाए और यदि वह ऐसा करता है तो उसे गिरफ्तार किया जा सके।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 183 की परिभाषा:-

अगर किसी सरकारी अधिकारी द्वारा विधिपूर्ण अधिकारित अधिकार से कोई संपत्ति लिए जाने का आदेश जारी है तब कोई व्यक्ति इस कार्य मे प्रतिरोध (बाधा, रुकावट, या प्रतिबंध) करेगा। वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा।
नोट:- 1. प्रतिरोध का आशय यहाँ पर शारिरिक सक्रिय बाधा उत्पन्न करने से है। संपत्ति देने से मना करना या बाधा पंहुचाने की धमकी देना इस धारा में प्रतिरोध का अपराध नहीं है।
2.पुलिस के कार्य या कर्तव्य का अनुपालन में नुकसान पहुंचने की धमकी देना इस धारा के अंतर्गत अपराध नहीं है, यह धारा 186 के अंतर्गत अपराध होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 183 में दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं होते हैं। यह असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई कोई भी मजिस्ट्रेट कर सकते हैं। सजा- 6 माह की कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।
बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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कर्मचारियों को OPS- पुरानी पेंशन के लिए भारत सरकार के नियम / EMPLOYEE NEWS

Posted: 20 Jul 2020 01:03 AM PDT

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह काम की खबर है। विभिन्‍न केंद्रीय विभागों एवं मंत्रालयों में पदस्‍थ कर्मचारी अब चाहें तो न्‍यू पेंशन स्‍कीम New Pension Scheme (NPS) को छोड़कर ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम Old Pension Scheme (OPS) में शामिल हो सकते हैं। इस साल फरवरी में सरकार ने यह स्‍पष्‍ट करते हुए कर्मचारियों से आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए बकायदा 31 मई तक का समय भी दिया गया था। इस दौरान कई मंत्रालयों, विभागों के कर्मचारियों ने आवेदन भेजे लेकिन कई प्रकार के सवाल सरकार के सामने आए। इनमें अलग-अलग प्रकरणों एवं परिस्थितियों का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उनके आवेदनों पर विचार होगा या नहीं। अब सरकार ने सभी पर स्‍पष्‍टीकरण दिया है। जानिये किस प्रकार के सवाल सामने आए।

कर्मचारियों ने सवाल पूछे थे कि जिन लोगों ने 1 जनवरी, 2004 के बाद ज्‍वाइनिंग दी लेकिन उनकी भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया इस तिथि से पहले ही संपन्‍न हो चुकी थी। इसके बाद उन्‍होंने नौकरी ज्‍वाइन करते हुए नियमानुसार अन्‍य विभाग में ज्‍वाइनिंग दी। यानी कर्मचारियों ने अपने पहले विभाग की अनुमति से दूसरी ज्‍वाइनिंग दी। ऐसे में क्‍या उनके ओपीएस में शामिल होने के आवेदन को मान्‍य किया जाएगा। इस पर DOPT यानी कार्मिक प्रशिक्षण विभाग ने कहा है कि यदि कर्मचारियों ने शासन के नियमों के अनुसार विभाग बदला है तो ऐसे में उनका आवेदन स्‍वीकृत किया जाएगा।

विभाग इस पर फैसला करेगा कि उनका आवेदन आगे भेजा जाएगा अथवा नहीं, क्‍योंकि यहां यह देखा जाएगा कि आवेदन करते समय सारे मापदंडों का पूरा किया गया है या नहीं। इन मामलों में पुराने विभाग की पेंशन एवं ग्रेच्‍युटी आदि के बारे में क्‍या तय किया जाएगा और संबंधित विभाग की समिति की इस बारे में क्‍या गाइडलाइन है। ऐसा भी सवाल सामने आया कि मृत कर्मचारी के परिजन आवेदन करते हैं तो क्‍या उस पर विचार होगा। इस पर भी विभागीय समिति का फैसला मान्‍य होगा।

इसी प्रकार सहानुभूति या अनुकंपा आधार पर प्राप्‍त नौकरी पर कर्मचारी आवेदन करता है तो उस आवेदन का क्‍या होगा। हालांकि विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में आधारभूत मापदंड ही माने जाएंगे, भले ही कर्मचारी ने 1 जनवरी 2004 के बाद ज्‍वाइनिंग दी हो लेकिन उसके सिलेक्‍शन से संबंधित तमाम कार्यवाही 31 दिसंबर, 2003 से अथवा इससे पहले संपूर्ण हो गई हो। इन मामलों पर स्‍क्रीनिंग अथवा सिलेक्‍शन कमेटी सिफारिश कर सकती है।

इस संबंध में विभागों, मंत्रालयों से कहा गया है कि वे इस प्रकार के प्रकरणों से अवगत कराएं ताकि उनका निराकरण किया जा सके। जिन कर्मचारियों के कागजात पूरे पाए जाएंगे, उनके मामलों को सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) नियम, 1972 के अंतर्गत लाया जाएगा। इसे लेकर आगामी 30 सितंबर, 2020 को केंद्र सरकार अंतिम आदेश जारी करेगी। इसके बाद जो भी कर्मचारी एनपीएस से ओपीएस में शामिल हो जाएंगे, उनका एनपीएस अकाउंट 1 नवंबर, 2020 से हमेशा के लिए निष्क्रिय कर दिया जाएगा।

यह है बेसिक नियम
पुरानी पेंशन योजना का लाभ केवल वे ही कर्मचारी ले सकते हैं जिनकी भर्ती संबंधी प्रक्रिया 1 जनवरी, 2004 से पहले संपूर्ण हो चुकी थी लेकिन वे किन्‍हीं कारणों से ज्‍वाइनिंग नहीं दे सके। इनमें से अधिकांश कर्मचारियों की मांग है कि उन्‍हें पुरानी पेंशन व्‍यवस्‍था में जोड़ा जाए। हालांकि केंद्र सरकार ने भी इनकी मांगों को मानते हुए अब इन्‍हें NPS के दायरे से निकालकर OPS में शामिल होने का मौका दिया है। इस मांग को लेकर कर्मचारी संगठन अक्‍सर आंदोलनरत रहते हैं और सरकार को ज्ञापन देते रहते हैं। कुछ कर्मचारियों ने तो इस मामले में कोर्ट का भी रूख अपनाया था। केंद्र सरकार ने गत फरवरी में यह तय किया था कि कर्मचारीगण पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल होने के लिए बकायदा आवेदन दे सकते हैं। केंद्रीय कर्मचारियों ने गत 31 मई, 2020 तक अपनी तरफ से आवेदन दे दिया था।
आधिकारिक पीडीएफ फाइल के लिए कृपया यहां क्लिक करें

किचन में कोई खाने की चीज जल जाए तो उसकी गंध तेजी से दूर दूर तक कैसे पहुंच जाती जाती है / #सरलSCIENCE

Posted: 19 Jul 2020 02:38 PM PDT

किचन में तो ऐसा अक्सर होता ही रहता है कोई चीज या खाने की वस्तु गैस पर रख दी और भूल गए। जब घर में नई बहू आती है तो उसके साथ ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती है परंतु इनको छुपाना काफी मुश्किल होता है। लिविंग रूम में बैठे लोगों तक इसकी गंध किसी ना किसी तरह पहुंच ही जाती है बल्कि कई बार तो पड़ोसियों को भी पता चल जाता है कि उनके घर में कुछ जल गया है। सवाल यह है कि किसी चीज के जलने की गंध इतनी तेजी से क्यों फैलती है जबकि उसी चीज के पकने की खुशबू इतनी ज्यादा तेजी से नहीं फैलती। आइए पता लगाने की कोशिश करते हैं: 

इसके पीछे है विज्ञान की एक महत्वपूर्ण घटना जिसका नाम है~  विसरण या diffusion परंतु विसरण को समझने से पहले सांद्रता या (concentration) को समझना होगा। रसायन विज्ञान में किसी विलयन की सांद्रता (concentration) उस विलयन के इकाई आयतन में उपस्थित पदार्थ की मात्रा के रूप में परिभाषित किया गया है। साधारण शब्दों में कहें तो जहां कोई वस्तु ज्यादा मात्रा में उपस्थित है तो वहां अधिक सांद्रता होती है तथा जहां कोई वस्तु कम मात्रा में उपस्थित है वहां कम सांद्रता होती है।

विसरण क्या है? / कोई भी गंध यानी खुशबू या बदबू चारों तरफ क्यों फैलती है

विसरण एक ऐसी ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी भी पदार्थ के कण (particles) अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर जाते हैं। यानी वो भीड़ में नहीं रहते बल्कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हैं और संख्या बढ़ जाने पर नए रिक्त स्थान की तरफ जाकर उपस्थित हो जाते हैं। किचन में सांद्रता अधिक होने से होने से जलने वाली वस्तु की गंध कम सांद्रता वाले स्थान (living room या पड़ौसी के घर) तक पहुंच जाती है। 
😃😃और फिर एक जोर से आवाज आती है कि आज क्या जला दिया🤪🤪

लेखक श्रीमती शैली शर्मा मध्यप्रदेश के विदिशा में साइंस की टीचर हैं। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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एक वीडियो और भ्रष्टाचार की अनंत कथा / EDITORIAL by Rakesh Dubey

Posted: 19 Jul 2020 02:37 PM PDT

सरकार कुछ मामलों में चुप्पी साध लेती है, और इस चुप्पी के पीछे सरकार का समूचा चरित्र होता है। 19 जुलाई को मध्यप्रदेश सरकार के परिवहन आयुक्त का एकाएक बदला जाना ऐसा ही मामला है, इस मामले में जो वीडियो जारी हुआ है वो उन सारी कहानियों की पुष्टि करता है कि भारत में भ्रष्टाचार के गंदे नाले निरापद कैसे बहते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के कुछ विभागों के शीर्ष पर क्यों जाना चाहते हैं ? हर सरकार की भ्रष्टाचार रोकने या [?] की नीति समान क्यों है ? सबसे आखिरी और जरूरी सवाल क्या यह व्यवस्था बदलेगी ?

देश के एक मुख्य सूचना आयुक्त ने अपने निर्णय में सारे राजनीतिक दलों के वित्तीय लेखे जोखे पारदर्शी करने की बात अपने एक निर्णय में कही थी। उनके इस निर्णय के खिलाफ देश के बड़े राजनीतिक दल एक हो गये थे और सर्वोच्च न्यायालय में चले गये थे। उस निर्णय को चुनौती देकर इन दलों ने अपनी अकूत घोषित और अघोषित सम्पत्ति के सार्वजनिक विवरण को छिपा लिया था। राजनीतिक दलों की काली–सफेद सम्पत्ति का निर्माण और रोजमर्रा के खर्चे ऐसे ही कारनामो से चलते हैं,जैसा 18 जुलाई को जारी वीडियो में दिखाया गया है।

मध्यप्रदेश में यह बात आम तौर पर कही जाती है कि दो विभागों के पास सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के खर्चे वहन करने की जिम्मेदारी है। सत्ता में कोई भी रहे उसका योगक्षेम परिवहन विभाग देखेगा और प्रतिपक्ष के हाल-चाल दुरुस्त रखने का काम आबकारी विभाग देखेगा। बाकी विभाग की तुलना में इन दोनों विभागों से बजट बनाये बिना वारे-न्यारे के करने की ज्यादा सहूलियत है। जैसे शराब की बोतल मुद्रित मूल्य से ज्यादा बिकती है वैसे ही परिवहन विभाग के बैरियर नीलाम होते हैं। कम्प्यूटर से गणना के नाम पर कम्प्यूटर को चकमा देने में महारत जैसे कारनामे आम बात है।

परिवहन विभाग की यह कहानी वैसे जग जाहिर है। अब इसका तोड़ निकल आया है, कोई भी एजेंसी इस वीडियो को सत्य साबित नहीं कर पायेगी। इसकी पेंच बंदी हो गई है, यह वीडियो 2016 का बताया जाने लगा है। शाजापुर के सरकारी विश्राम भवन का। वीडियों में दिखने वाले अधिकारी तब उस संभाग में पदस्थ थे। अपराध छिपाने के प्रयास में सब शामिल है, सरकार तबादला कर सकती थी, कर दिया। कुछ दिन बाद यह मामला भी उसी तरह दफन हो जायेगा, जैसे पहले एक परिवहन निरीक्षक लाखों रूपये के साथ भोपाल में गिरफ्तार हुए थे। उस मामले में उस नकदी को न्यायलय में छिपाने में कलाबाजी हुई और सब पाक साफ।

अब यहाँ सवाल नैतिकता का है। राजनीतिक दल अपनी आय के स्रोत उजागर क्यों नहीं करते ? क्या सिर्फ आम नागरिकों से ही कर वसूलने के लिए विभाग बने हैं। कोई इस बात का जवाब देगा कि भारी भरकम सत्तारूढ़ दल और उसके मुकाबले थोड़े कम हल्के प्रतिपक्ष का रोजमर्रा के खर्च कैसे  चलता है। सारी आती- जाती और मौजूदा सरकारें भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर इन हरकतों से कब तक आँखे मूंदे रहेगी। व्यवस्था बदलने की बात किससे करे और और कौन करें, कीचड़ के कुछ छींटे कभी-कभी मीडिया के मैदान में आ गिरते हैं।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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