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Saturday, July 25, 2020

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नागपंचमी (श्रावणपंचमी) विशेष।

Posted: 24 Jul 2020 09:57 PM PDT




श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर प्रमुख नाग मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त नागदेवता के दर्शन व पूजा करते हैं। सिर्फ मंदिरों में ही नहीं बल्कि घर-घर में इस दिन नागदेवता की पूजा करने का विधान है।

ऐसी मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नागदेवता का पूजन करता है उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता।
इस दिन नागदेवता की पूजा किस प्रकार करें, इसकी विधि इस प्रकार है।

पूजन विधि

नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें नागों की पूजा शिव के अंश के रूप में और शिव के आभूषण के रूप में ही की जाती है। क्योंकि नागों का कोई अपना अस्तित्व नहीं है। अगर वो शिव के गले में नहीं होते तो उनका क्या होता। इसलिए पहले भगवान शिव का पूजन करेंगे।  शिव का अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र और जल चढ़ाएं।

इसके बाद शिवजी के गले में विराजमान नागों की पूजा करे। नागों को हल्दी, रोली, चावल और फूल अर्पित करें। इसके बाद चने, खील बताशे और जरा सा कच्चा दूध प्रतिकात्मक रूप से अर्पित करेंगे।

घर के मुख्य द्वार पर गोबर, गेरू या मिट्टी से सर्प की आकृति बनाएं और इसकी पूजा करें।

घर के मुख्य द्वार पर सर्प की आकृति बनाने से जहां आर्थिक लाभ होता है, वहीं घर पर आने वाली विपत्तियां भी टल जाती हैं।

इसके बाद 'ऊं कुरु कुल्ले फट् स्वाहा' का जाप करते हुए घर में जल छिड़कें। अगर आप नागपंचमी के दिन आप सामान्य रूप से भी इस मंत्र का उच्चारण करते हैं तो आपको नागों का तो आर्शीवाद मिलेगा ही साथ ही आपको भगवान शंकर का भी आशीष मिलेगा बिना शिव जी की पूजा के कभी भी नागों की पूजा ना करें। क्योंकि शिव की पूजा करके नागों की पूजा करेंगे तो वो कभी अनियंत्रित नहीं होंगे नागों की स्वतंत्र पूजा ना करें, उनकी पूजा शिव जी के आभूषण के रूप में ही करें।

नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा (सोने, चांदी या तांबे से निर्मित) के सामने यह मंत्र बोलें।

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।

तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

इसके बाद पूजा व उपवास का संकल्प लें। नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, फूल, धूप, दीप से पूजा करें व सफेद मिठाई का भोग लगाएं। यह प्रार्थना करें।

सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।

प्रार्थना के बाद नाग गायत्री मंत्र का जाप करें-

ऊँ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।

इसके बाद सर्प सूक्त का पाठ करें

ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।

नागदेवता की आरती करें और प्रसाद बांट दें। इस प्रकार पूजा करने से नागदेवता प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं।
        
नागपंचमी

महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। इनमें शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि प्रमुख हैं। नागपंचमी के अवसर पर हम आपको ग्रंथों में वर्णित प्रमुख नागों के बारे में बता रहे हैं।

तक्षक नाग

धर्म ग्रंथों के अनुसार, तक्षक पातालवासी आठ नागों में से एक है। तक्षक के संदर्भ में महाभारत में वर्णन मिलता है। उसके अनुसार, श्रृंगी ऋषि के शाप के कारण तक्षक ने राजा परीक्षित को डसा था, जिससे उनकी मृत्यु हो गयी थी। तक्षक से बदला लेने के उद्देश्य से राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सर्प यज्ञ किया था। इस यज्ञ में अनेक सर्प आ-आकर गिरने लगे। यह देखकर तक्षक देवराज इंद्र की शरण में गया।

जैसे ही ऋत्विजों (यज्ञ करने वाले ब्राह्मण) ने तक्षक का नाम लेकर यज्ञ में आहुति डाली, तक्षक देवलोक से यज्ञ कुंड में गिरने लगा। तभी आस्तिक ऋषि ने अपने मंत्रों से उन्हें आकाश में ही स्थिर कर दिया। उसी समय आस्तिक मुनि के कहने पर जनमेजय ने सर्प यज्ञ रोक दिया और तक्षक के प्राण बच गए।

कर्कोटक नाग

कर्कोटक शिव के एक गण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्पों की मां कद्रू ने जब नागों को सर्प यज्ञ में भस्म होने का श्राप दिया तब भयभीत होकर कंबल नाग ब्रह्माजी के लोक में, शंखचूड़ मणिपुर राज्य में, कालिया नाग यमुना में, धृतराष्ट्र नाग प्रयाग में, एलापत्र ब्रह्मलोक में और अन्य कुरुक्षेत्र में तप करने चले गए।

ब्रह्माजी के कहने पर कर्कोटक नाग ने महाकाल वन में महामाया के सामने स्थित लिंग की स्तुति की। शिव ने प्रसन्न होकर कहा- जो नाग धर्म का आचरण करते हैं, उनका विनाश नहीं होगा। इसके बाद कर्कोटक नाग उसी शिवलिंग में प्रवेश कर गया। तब से उस लिंग को कर्कोटेश्वर कहते हैं। मान्यता है कि जो लोग पंचमी, चतुर्दशी और रविवार के दिन कर्कोटेश्वर शिवलिंग की पूजा करते हैं उन्हें सर्प पीड़ा नहीं होती।

कालिया नाग

श्रीमद्भागवत के अनुसार, कालिया नाग यमुना नदी में अपनी पत्नियों के साथ निवास करता था। उसके जहर से यमुना नदी का पानी भी जहरीला हो गया था। श्रीकृष्ण ने जब यह देखा तो वे लीलावश यमुना नदी में कूद गए। यहां कालिया नाग व भगवान श्रीकृष्ण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को पराजित कर दिया। तब कालिया नाग की पत्नियों ने श्रीकृष्ण से कालिया नाग को छोडऩे के लिए प्रार्थना की। तब श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि तुम सब यमुना नदी को छोड़कर कहीं और निवास करो। श्रीकृष्ण के कहने पर कालिया नाग परिवार सहित यमुना नदी छोड़कर कहीं और चला गया।

इनके अलावा कंबल, शंखपाल, पद्म व महापद्म आदि नाग भी धर्म ग्रंथों में पूज्यनीय बताए गए हैं।

नागपंचमी पर नागों की पूजा कर आध्यात्मिक शक्ति और धन मिलता है। लेकिन पूजा के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।
हिंदू परंपरा में नागों की पूजा क्यों की जाती है और ज्योतिष में नाग पंचमी का क्या महत्व है।

अगर कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक ना हो तो इस दिन विशेष पूजा का लाभ पाया जा सकता है।

जिनकी कुंडली में विषकन्या या अश्वगंधा योग हो, ऐसे लोगों को भी इस दिन पूजा-उपासना करनी चाहिए. जिनको सांप के सपने आते हों या सर्प से डर लगता हो तो ऐसे लोगों को इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए।

भूलकर भी ये ना करें

1. जो लोग भी नागों की कृपा पाना चाहते हैं उन्हें नागपंचमी के दिन ना तो भूमि खोदनी चाहिए और ना ही साग काटना चाहिए.।

2. उपवास करने वाला मनुष्य सांयकाल को भूमि की खुदाई कभी न करे।

3. नागपंचमी के दिन धरती पर हल न चलाएं।

4. देश के कई भागों में तो इस दिन सुई धागे से किसी तरह की सिलाई आदि भी नहीं की जाती।

5. न ही आग पर तवा और लोहे की कड़ाही आदि में भोजन पकाया जाता है।

6. किसान लोग अपनी नई फसल का तब तक प्रयोग नहीं करते जब तक वह नए अनाज से बाबे को रोट न चढ़ाएं।

राहु-केतु से परेशान हों तो क्या करें

एक बड़ी सी रस्सी में सात गांठें लगाकर प्रतिकात्मक रूप से उसे सर्प बना लें इसे एक आसन पर स्थापित करें। अब इस पर कच्चा दूध, बताशा और फूल अर्पित करें। साथ ही गुग्गल की धूप भी जलाएं.

इसके पहले राहु के मंत्र 'ऊं रां राहवे नम:' का जाप करना है और फिर केतु के मंत्र 'ऊं कें केतवे नम:' का जाप करें।

जितनी बार राहु का मंत्र जपेंगे उतनी ही बार केतु का मंत्र भी जपना है।

मंत्र का जाप करने के बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए एक-एक करके रस्सी की गांठ खोलते जाएं. फिर रस्सी को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. राहु और केतु से संबंधित जीवन में कोई समस्या है तो वह समस्या दूर हो जाएगी।

सांप से डर लगता है या सपने आते हैं।

अगर आपको सर्प से डर लगता है या सांप के सपने आते हैं तो चांदी के दो सर्प बनवाएं साथ में एक स्वास्तिक भी बनवाएं। अगर चांदी का नहीं बनवा सकते तो जस्ते का बनवा लीजिए।
अब थाल में रखकर इन दोनों सांपों की पूजा कीजिए और एक दूसरे थाल में स्वास्तिक को रखकर उसकी अलग पूजा कीजिए।।           साभार मंत्र साधना

नागों को कच्चा दूध जरा-जरा सा दीजिए और स्वास्तिक पर एक बेलपत्र अर्पित करें. फिर दोनों थाल को सामने रखकर 'ऊं नागेंद्रहाराय नम:' का जाप करें।

इसके बाद नागों को ले जाकर शिवलिंग पर अर्पित करें और स्वास्तिक को गले में धारण करें।

ऐसा करने के बाद आपके सांपों का डर दूर हो जाएगा और सपने में सांप आना बंद हो जाएंगे।

संपादकीय/ *दुष्काल: सिकुड़ती अर्थव्यवस्था और महंगाई के झटके*

Posted: 24 Jul 2020 08:01 PM PDT


*० प्रतिदिन* -राकेश दुबे
२५ ०७ २०२०
*दुष्काल : सिकुड़ती अर्थव्यवस्था और महंगाई के झटके*
इस वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था छह प्रतिशत तक सिकुड़ जायेगी| त्यौहार –विवाह जिनसे बाज़ार को गति मिलती थी और अर्थव्यवस्था मजबूत होती थी कोरोना के कारण मंद रहेगी |राष्ट्रीय आय पिछले वर्ष की तुलना में कम रहेगी और औसतन प्रत्येक परिवार के पास खर्च करने के लिए कम धन होगा| मंदी से मांग में गिरावट आयेगी और फैक्ट्रियों में सुस्ती होगी| बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता अप्रयुक्त होगी| यह विभिन्न क्षेत्रों में देखा जा सकता है, जिसमें प्राथमिक क्षेत्र के इस्पात व सीमेंट या द्वितीयक क्षेत्र के ऑटोमोबाइल व वाशिंग मशीन आदि शामिल होंगे| बिक्री को बढ़ाने के लिए उत्पादकों पर कीमतों में कटौती का दबाव होगा| उपभोक्ता वस्तुओं पर बड़ी रियायत पेश की जा सकती है| मांग में गिरावट से कीमतों में भी बड़ी कमी आ सकती है|
कुछ सामानों जैसे कार और स्कूटर या टेलीविजन और फर्नीचर पर बड़ी छूट मिलना शुरू हो गई है जिसके जारी रहने की सम्भावना है, यह कीमतों में गिरावट स्वेच्छा व्यय वाले उत्पादों पर है| इसके बावजूद मांग में सुस्ती बरकरार है| टिकाऊ और गैर-टिकाऊ दोनों ही प्रकार के उपभोक्ता सामानों के विक्रेता दिवाली और बाद के त्योहारों पर खरीद के दौरान अच्छा व्यापार करते हैं|कुछ व्यापारी तो दशहरा से क्रिसमस के दौरान अपने सालाना लाभ का ६० से ७० प्रतिशत अर्जित कर लेते हैं|इस वर्ष यह संभावना कम है| शादियों से अर्थव्यवस्था को गति मिलती है, वह भी मंद है. यह अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक दूरी की अनिवार्यता की वजह भी है|अगर छूट और कीमतों में गिरावट के आधार पर महंगाई में कमी का अनुमान लगा रहे हैं, तो आप गलत हैं|आमजन को महंगाई का अनुभव उत्पादों की खरीद के दौरान होता है|
मार्च के लॉकडाउन के बाद से व्यय के तरीकों में बदलाव आया है|वस्तु एवं सेवाओं के उपभोग के सरकारी अनुमान में हो सकता है यह पूर्ण रूप से दिखाई न दे और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई के आधिकारिक आंकड़ों में इसे कम महत्व दिया जाये| अनुमानतः जून की आधिकारिक महंगाई छह प्रतिशत से ऊपर रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा से अधिक है| लोगों का खरीदारी पैटर्न बदल चुका है| बाहर खाने, कपड़े खरीदने, मनोरंजन या पर्यटन के बजाय लोग घर में ही खाने की वस्तुओं पर जोर दे रहे हैं|
हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अल्बेर्टो केवैलो ने 'कोविड महंगाई' दर की गणना में ट्रांजेक्शन के वास्तविक आंकड़ों का इस्तेमाल किया है| उन्होंने जिन १६ देशों का अध्ययन किया, उसमें से १० देशों में आधिकारिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में कोविड उपभोक्ता मूल्य सूचकांक महंगाई को कम करके आंका गया है| उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और कोविड- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के बीच यह अंतराल लगातार बढ़ रहा है|उनके आंकड़ों में भारत शामिल नहीं है|
भारतीय स्टेट बैंक के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर केवैलो की विधा से भारत का अध्ययन किया, जिसमें वही परिणाम सामने आये अर्थात सरकार द्वारा प्रकाशित आधिकारिक आंकड़ों में इसे कम करके आकलित किया गया है| एसबीआइ के अनुसार, जून की वास्तविक महंगाई ७ प्रतिशत हो सकती है. अप्रैल-मई महीने के संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान इसे दो प्रतिशत से भी अधिक नजरअंदाज किया गया.
अगर हम वास्तविक उपभोग को देखें, तो महंगाई और भी चिंताजनक है| जून में खाद्य महंगाई ७.३ प्रतिशत रही| जून में दालें १६.७ प्रतिशत, मछली व मांस १६.२ प्रतिशत और दूध की कीमतें ८.४ प्रतिशत की दर से बढ़ी थीं |महाराष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, दूध की मांग में कमी आयी है. राज्य में दूध उत्पादकों का कहना है कि दूध की कीमतों में १० से १५ रुपये प्रति लीटर की गिरावट आयी है|
इधर जून में डीजल की कीमतें बढ़ गयीं| इसका इस्तेमाल खाद्यों पदार्थों के परिवहन में किया जाता है| केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सड़क उपकर आदि वजहों से कीमतों में १० रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई| यह भी महंगाई का एक कारण बना, न केवल खाद्य उत्पादों के लिए, बल्कि सकल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के लिए. इस्पात कंपनियों ने लागत मूल्य बढ़ने का हवाला देते हुए कमजोर मांग के बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की| चीनी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क कुल उपभोक्ता महंगाई पर असर डालेगी|
आय का स्रोत छिनने और जीवनयापन की बढ़ती दुश्वारियों से कई लोग गरीबी और खाद्य असुरक्षा में फंस सकते हैं| कोविड या कोई अन्य बीमारी है, तो यह अतिरिक्त झटका होगा|

*कानून के हौज में केचुआ*

Posted: 24 Jul 2020 07:37 PM PDT


कानून के हौज में केंचुआ
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केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी कोरोना को ढाल बनाकर देश में होने वाले तमाम लोकसभा और विधानसभा सीटों के उप चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिए हैं .चुनाव आयोग ने ये निर्णय किस बिना पर लिया है ये या तो आयोग जानता है या केंद्र सरकार .मुमकिन है कि राज्य सरकारें भी इस बारे में थोड़ा-बहुत जानतीं हों लेकिन जनता बिलकुल नहीं जानती .उपचुनावों का स्थगन सीधे-सीधे जनता के सर्वोच्च अधिकार से जुड़ा है इसलिए kenchua के फैसले पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है .
कोरोनाकाल में देश की सरकार ने सियासत को छोड़ अधिकाँश जरूरी गतिविधियां स्थगित कर रखीं हैं ,इनमें न्याय भी शामिल है .कोरोनाकाल में देश की न्यायप्रणाली सीमित रूप से काम कर रही है .आप कहीं आ-जा नहीं सकते,मनोरंजन नहीं कर सकते,खा-पी नहीं सकते यानि अपनी मरजी से जी नहीं सकते .महामारी के इस काल में आप सरकार के रहमोकरम पर हैं और ये सब इसलिए है कि सरकार आपको किसी भी कीमत पर मरने नहीं देना चाहती .अगर आप मर गए तो फिर सियासत और सत्ता का क्या होगा ?
सत्ता हथियाने के लिए दलबदल के जरिये राज्य सरकारों को अस्थिर करने और उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ने के लिए सरकार कोरोनाकाल में जो कुछ सम्भव है सो कर रही है ,और जहां उसे कामयाबी नहीं मिल रही वहां उसने संवैधानिक संस्थाओं का प्रत्यक्ष या परोक्ष इस्तेमाल शुरू कर दिया है .दुर्भाग्य ये है कि अब कोई संस्था निर्विवाद या संदेहों से परे नहीं रह गयी है .सब सरकार के सुर में सुर मिलाने के लिए या तो आतुर हैं या उन्हें इसके लिए विवश किया जा रहा है .इन संस्थाओं के बारे में आप अपना मुंह खोलकर आपने लिए जेल का दरवाजा खुलवा सकते हैं ,लेकिन पब्लिक सब जानती है .
भारतीय चुनाव आयोग [केंचुआ] ने कुछ राज्यों में कोविड-19 महामारी और बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर सात सितंबर तक होने वाले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के उप-चुनाव स्थगित कर दिए हैं। जैसे ही स्थिति अनुकूल होगी वैसे ही चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि आयोग ने कहा है कि केवल आठ सीटों पर होने वाले उपचुनाव को स्थगित किया गया है।आयोग ने यकायक ये निर्णय क्यों लिया कोई नहीं जानता .कौन सी रिपोर्ट इस निर्णय का आधार बनी ये भी किसी ने आयोग से पूछा नहीं आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 का एक हौज है जिसमें उतरकर वो मनमानी करना चाहता है .चूंकि इस समय कोरोना के अलावा देश की सीमाओं पर तनाव है,अर्थव्यवस्था,क़ानून और व्यवस्था बेपटरी है इसलिए सत्तारूढ़ दल नहीं चाहता कि देश में कोई भी उप चुनाव हो क्योंकि इस समय जनता का गुस्सा सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है .
मध्यप्रदेश में तो उपचुनावों के बहरोसे ही भाजपा ने कांग्रेस में व्यापक पैमाने पर दलबदल कराया और अपनी सरकार बना ली.ये देश कि पहली ऐसी सरकार है जिसके 14 मंत्री विधानसभा के सदस्य ही नहीं हैं ,सितंबर तक यदि ये न चुने गए तो इन्हें अपने पदों से इस्तीफा देना पद सकता है .किसी वर्ग विशेष को प्रतिनिधित्व देने के लिए विधानसभा के बाहर के व्यक्ति को मंत्री बनाने के उदाहरण तो हैं लेकिन पूरी फ़ौज सदन के बाहर की हो ये मध्यप्रदेश में ही हुआ है .प्रदेश सरकार ने पहले कुल 22 कांग्रेसी विधायक तोड़े थे,आज ये सनकःया बढ़कर २६ हो गयी है और मुमकिन है कि जबतक विधानसभा के उपचुनाव हों ये संख्या और बढ़ जाये .
मुझे लगता है कि भाजपा ने चाल तो चल दी लेकिन अब उसे खतरा महसूस हो रहा है और शायद इसीलिए उसने परदे के पीछे से चुनाव आयोग को उपचुनाव आगे टालने के लिए तैयार कर लिया है .अब यदि समय पर चुनाव न हुए तो मंत्रिमंडल में बेमन से शामिल किये गए कांग्रेस मंत्री अपने आप बाहर हो जायेंगे ,यानि सांप भी मर जायेंगे और लाठी भी नहीं टूटेगी .यही स्थिति देश के 8 लोकसभा उपचुनावों को लेकर है .भाजपा भीतर से भयभीत है और फिलहाल किसी चुनाव में नहीं उतरना चाहती .मुमकिन है कि केंचुआ 24 जुलाई को अपनी बैठक के बाद विपरीत परिस्थितियों का हवाला देकर राज्य सरकारों से बातचीत की औपचारिकता भी करे ,लेकिन उसकी मंशा में खोट दिखाई दे रही है .केंचुआ यदि सत्ता के मनोरथ को पूरा करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 का सहारा लेता है तो साफ़ हो जाएगा कि 'दाल में काला' नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है .
कोरोना के फैलाव को देखते हुए चुनाव स्थगित करने के अनेक पैरोकार सामने आएंगे ,उन्हें मेरी बातें अनुचित भी लगेंगी लेकिन मुझे जो कहना है मैंने कह दिया.आप क्या सोचते हैं ये आपका विवेक है .गनीमत ये है कि केंचुआ के बारे में लिखते समय वैसे खतरे नहीं हैं जैसे औरों के बारे में लिखते समय होते हैं .इस मुद्दे पर सड़क से विधानसभा तक बहस होना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य विधानसभा स्थगित है और सड़क पर कोरोना का गश्त .           साभार
@ राकेश अचल जी वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर 

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