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Friday, July 31, 2020

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बिहार सरकार के मंत्री ने कहा- अभिनेता का परिवार चाहेगा तो मुख्यमंत्री सीबीआई जांच के लिए कहेंगे

Posted: 31 Jul 2020 11:22 PM PDT

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की जांच सीबीआई से कराई जाए, इसकी मांग उठ रही है। इस संबंध में शनिवार को बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री संजय झा ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर सुशांत का परिवार चाहेगा तो निश्चित रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीबीआई जांच के लिए कहेंगे, लेकिन परिवार चाहेगा तभी।

झा ने कहा कि सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई है। बिहार पुलिस मुंबई में है। मामले की जांच कर रही है। जो बात एफआईआर में है जांच उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। अगर सुशांत के पिता कहते हैं कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए तो मुख्यमंत्री जरूर इसके लिए पहल करेंगे।

रामविलास पासवान ने सीबीआई जांच की मांग की
सुशांत केस में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि इस केस को लेकर दो राज्यों- बिहार और महाराष्ट्र के बीच टकराव हो रहा है। उधर, बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने भी कहा भाजपा को ऐसा लगता है कि मामले की जांच सीबीआई को करनी चाहिए। क्योंकि मुंबई पुलिस बिहार पुलिस की जांच में रोड़े अटका रही है।



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जल संसाधन मंत्री संजय झा।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/sushant-singh-rajput-cbi-inquiry-news-updates-bihar-cm-nitish-kumar-will-ask-for-investigation-if-actor-family-wants-says-sanjay-jha-127573615.html

सौ से बढ़ाकर 150 बेड का होगा एसकेएमसीएच में कोविड अस्पताल

Posted: 31 Jul 2020 11:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में सौ बेड की जगह अब 150 बेड का कोविड अस्पताल होगा। इसके अलावा अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो एईएस मरीजों के लिए बनाए गए पीकू को भी कोविड अस्पताल बना दिया जाएगा। इधर, सदर अस्पताल में सौ बेड के बने एमसीएच वार्ड को भी कोविड मरीजों के लिए खोल दिए जाएंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले मे कोविड अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। सीएम ने डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह, एसकेएमसीएच अधीक्षक डाॅ. सुनील कुमार शाही व प्राचार्य विकास कुमार से इस बाबत जानकारी ली।

समीक्षा के दौरान उन्होंने जानकारी ली कि अभी कितने मरीज भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए कितने डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति की गई है। दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड की क्या स्थिति है। सीएम ने जिले में कोविड जांच का भी दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा- अगर किट या ट्रू नेट मशीन की जरूरत हो तो वह प्रधान सचिव को मांग भेज सकते हैं। जिले के हर एक व्यक्ति की कोरोना जांच करें, ताकि जो पॉजिटिव मरीज है, उनका इलाज कर उन्हें ठीक किया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार, आईजी गणेश कुमार, एसएसपी जयंतकांत भी उपस्थित थे।

डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के बारे में दी जानकारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के लिए सदर अस्पताल कंट्रोल रूम और एसकेएमसीएच में व्यवस्था की गई थी। डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अब तक किए गए कार्यों तथा आगे की तैयारियों की अद्यतन स्थिति की बिंदुवार जानकारी मुख्यमंत्री को दी।एसकेएमसीएच के साथ ग्लोकल अस्पताल एवं कोविड केयर सेंटर जिसे डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के रूप में आवश्यक संसाधनों के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसकी जानकारी सीएम को दी। पताही एयरपोर्ट पर डीआरडीओ द्वारा 500 बेड का कोविड हॉस्पिटल बनाए जाने की तैयारियों के बारे में भी बताया।

इधर, नर्सिंग होम संचालकों ने कोरोना मरीजों के इलाज से किया मना, अब प्रशासन 25% बेड उपलब्ध कराने काे देगा नोटिस

जिले के निजी नर्सिंग होम संचालक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं देंगे। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में निजी नर्सिंग होम संचालकों ने दाे टूक कहा कि कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए वे स्वेच्छा से अस्पताल नहीं दे सकते हैं। अगर सरकार आदेश जारी कर कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए नर्सिंग होम लेना चाहती है, तो ले सकती है। सदर अस्पताल के एसीएमओ डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार निजी नर्सिंग होम को जिला प्रशासन चिह्नित कर ले। सरकार के आदेश के अनुसार नर्सिंग होम में उपलब्ध बेड का 25% कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करना है। इसे लेकर बैठक हुई, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं रहा।

स्वेच्छा से इलाज की देनी थी सहमति

डीएम की अध्यक्षता में बीते सप्ताह निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू करने को लेकर नर्सिंग होम संचालकों और आईएमए के बीच बैठक हुई थी। इसमें डीएम ने संचालकों से स्वेच्छा से निजी नर्सिंग होम में कोरोना के इलाज की सहमति देने को कहा था। इस पर संचालकों और आईएमए ने एक सप्ताह का समय मांगा था। इसी के बाद शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी।

अब शनिवार व रविवार काे जिला पूरी तरह रहेगा लाॅक

राज्य में 16 अगस्त तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दाैरान जिले में शनिवार अाैर रविवार काे जरूरी सेवाओं काे छाेड़ सभी व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। मालवाहक वाहनों काे छाेड़ अन्य काेई सार्वजनिक वाहन नहीं चलेंगे। साेमवार से शुक्रवार तक बाजार ताे खुलेंगे, लेकिन शॉपिंग माॅल्स अब भी बंद रहेंगे। साथ ही हाेटल, रेस्टोरेंट्स अाैर ढाबों से सिर्फ बना-बनाया भाेजन हाेम डिलिवरी किया जा सकेगा। एेसी जगहों पर बैठ कर खाना अादि खाने-पराेसने की मनाही रहेगी।

डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार काे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक के बाद लॉकडाउन में सख्ती बरतने के आदेश दिया। शनिवार और रविवार को आकस्मिक सेवाओं में केवल स्वास्थ्य सेवाएं, दूध, सब्जी और किराना की दुकानें ही खुलेंगी। अन्य सभी प्रकार की दुकानें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और रिक्शा समेत अन्य प्रकार के व्यावसायिक वाहनों का परिचालन नहीं होगा। हालांकि, इस दौरान मालवाहक वाहनों का परिचालन जारी रहेगा।

डीएम के इस निर्णय के अनुसार अब जिले में सीधे साेमवार काे रक्षाबंधन के दिन सामान्य व्यापारिक गतिविधियां शुरू हाे सकेंगी। लॉकडाउन की इस अवधि में निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मियों की उपस्थिति का साथ काम करने की छूट दी गई है। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़ हर प्रकार की गतिविधि बंद रहेगी।

सिर्फ जरूरी सामान मिलेंगे, शैक्षणिक संस्थान व धार्मिक स्थल आम लाेगाें के लिए रहेंगे बंद

सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ पूजा, अरदास, इबादत और प्रार्थना स्थल पहले की ही तरह आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक आम लोगों के लिए आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। सभी प्रकार की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सोमवार से शुक्रवार तक ही खुलेंगे।



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Kovid Hospital will be increased from 100 to 150 beds in SKMCH


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/kovid-hospital-will-be-increased-from-100-to-150-beds-in-skmch-127572639.html

नर्साें ने खुद बनाया काढ़ा, कोरोना मरीज को किया ठीक

Posted: 31 Jul 2020 10:22 PM PDT

मेडिकल काॅलेज अस्पताल में लगातार काेराेना से हाेनेवाली माैताें के बीच शुक्रवार काे एक सुखद खबर भी आयी। पहली बार किसी एमडीआर टीबी से ग्रसित काेराेना मरीज किशाेरी
का इलाज हुआ और वह स्वस्थ्य भी हुई। नाथनगर की किशाेरी काे पहले से टीबी था, लेकिन उसकी काेराेना जांच भी पाॅजिटिव आयी। लेकिन उसका इलाज डाॅक्टराें ने काेराेना वार्ड में न कर एमडीआर वार्ड में ही शुरू किया। वहां की नर्साें ने भी जज्बा दिखाया। वार्ड की नर्सें उसके लिए अपने घर से तुलसी का काढ़ा और गर्म पानी लाती थी। इस मरीज का विशेष ख्याल रखती थी। यहां की नर्साें के लिए भी यह नया अनुभव था, इसलिए पीपीई किट पहनकर उसके पास इलाज करने जाती रही। शुक्रवार काे जब उसे छुट्टी दी गयी ताे नर्साें ने उसे तुलसी का पाैधा गिफ्ट में दिया।

ऑक्सीजन तक का किया इंतजाम
नाै जुलाई काे किशाेरी मायागंज अस्पताल पहुंची ताे वहां एमडीअार वार्ड में डाॅक्टराें ने इलाज शुरू किया। आशंका पर काेराेना जांच करायी गयी ताे 13 जुलाई काे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आयी। इसके बाद उसके इलाज की चुनाैती सामने थी, क्याेंकि काेराेना के साथ एमडीआर हाेने से काेविड वार्ड में भर्ती नहीं हाे सकती थी और एमडीआर में काेविड का इलाज मुश्किल था। इसके बाद तय हुआ कि एमडीआर वार्ड में ही उसका इलाज किया जाए। इलाज के दाैरान ऑक्सीजन प्वाइंट समेत हर जीवनरक्षक उपकरण काे तैयार रखा गया, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज काे दिया जा सके। 14 दिन तक लगातार काेराेना के साथ एमडीआर की भी दवा दी गयी। इसके बाद 31 जुलाई काे उसे छुट्टी दी गयी।

वाॅरियराें ने कहा, मिला है काफी सुकून
उसे छुट्टी देने के दाैरान काेराेना वाॅरियराें ने कहा कि एमडीआर के मरीज काे काेराेना से मुक्ति दिलाने से सुकून अनुभव हाे रहा है। अब दाे वर्ष तक दवा लेने से टीबी भी ठीक हाे जाएगी।



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एमडीआर वार्ड से मरीज को घर भेजते डॉक्टर व नर्स।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/nurses-made-the-decoction-themselves-corona-patient-was-cured-127572798.html

आज शनिवार है, शानिमहाराज जी का दिन है। आज हम आपको शनिदेव की पौराणिक कथा और रहस्यबतायेगे|

Posted: 31 Jul 2020 09:37 PM PDT



आज शनिवार है, शानिमहाराज जी का दिन है। आज हम आपको शनिदेव की पौराणिक कथा और रहस्यबतायेगे|

पंडित श्रीकृष्ण दत्त शर्मा,
अवकाश प्राप्त अध्यापक, सी 5/10 यमुनाविहार दिल्ली
प्रत्येक इंसान के जीवन मे उतार चढ़ाव लगे ही रहते है इनका मुख्य कारण पुर्व जन्म कृत कर्म ही होते है। ज्योतिषी मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्मो के अनुसार ही ग्रह फल देते है। पौराणिक ग्रंथो में शनि देव को न्यायाधीध के रूप में दर्शाया गया है। शनि देव सदैव से जिज्ञासा का केंद्र रहे हैं।

पौपौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव कश्यप वंश की परंपरा में भगवान सूर्य की पत्नी छाया के पुत्र हैं। शनिदेव को सूर्य पुत्र के साथ साथ पितृ शत्रु भी कहा जाता है। शनिदेव के भाई-बहन मृत्यु देव यमराज, पवित्र नदी यमुना व क्रूर स्वभाव की भद्रा हैं।

शनिदेव का विवाह चित्ररथ की बड़ी पुत्री से हुआ था। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शनिदेव का जन्म उत्सव मनाया जाता है। शनिदेव का जन्म स्थान सौराष्ट्र में शिंगणापुर माना गया है। हनुमान, भैरव, बुध व राहू को वे अपना मित्र मानते हैं। शनिदेव का वाहन गिद्ध है और उनका रथ लोहे का बना हुआ है।

शनि देव के दस नाम: - यम, बभ्रु, पिप्पलाश्रय, कोणस्थ, सौरि, शनैश्चर, कृष्ण, रोद्रान्तक, मंद, पिंगल।

शनिदेव अपना शुभ प्रभाव विशेषतः कानून, राजनीति व अध्यात्म के विषयों में देते हैं। शनि के बुरे प्रभाव से गुर्दा रोग, डायबिटीज, मानसिक रोग, त्वचा रोग, वात रोग व कैंसर हो सकते है जिनसे राहत के लिये शनि की वस्तुओं का दान करना चाहिये।

शनिदेव का रंग काला क्यों है?

जब शनिदेव अपनी माता छाया के गर्भ में थे, तब शिव भक्तिनी माता ने तेजस्वी पुत्र की कामना हेतु भगवान शिव की घोर तपस्या की जिस कारण धूप व गर्मी की तपन में शनि का रंग गर्भ में ही काला हो गया लेकिन मां के इसी तप ने शनिदेव को अपार शक्ति भी दी।

शनि की गति अन्य ग्रहों से मंद क्यों है?

शनि एक धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। पुराणों में यह कहा गया है कि शनिदेव लंगड़ाकर चलते हैं जिस कारण उनकी गति धीमी है। उन्हें एक राशि को पार करने में लगभग ढा़ई वर्ष का समय लगता है।


शनिदेव लंगड़ाकर क्यों चलते हैं?
इस विषय पर शास्त्रों में दो कथाएं प्रचलित हैं - -



एक बार सूर्य देव का तेज सहन न कर पाने की वजह से उनकी पत्नी संज्ञा देवी ने अपने शरीर से अपने जैसी ही एक प्रतिमूर्ति तैयार की और उसका नाम स्वर्णा रखा। उसे आज्ञा दी कि तुम मेरी अनुपस्थिति में मेरी सारी संतानों की देखरेख करते हुये सूर्यदेव की सेवा करो और पत्नी सुख भोगो। ये आदेश देकर वह अपने पिता के घर चली गयी।

स्वर्णा ने भी अपने आप को इस तरह ढाला कि सूर्यदेव भी यह रहस्य न जान सके। इस बीच सूर्यदेव से स्वर्णा को पांच पुत्र व दो पुत्रियां हुई। स्वर्णा अपने बच्चों पर अधिक और संज्ञा की संतानों पर कम ध्यान देने लगी। एक दिन संज्ञा के पुत्र शनि को तेज भूख लगी, तो उसने स्वर्णा से भोजन मांगा। तब स्वर्णा ने कहा कि अभी ठहरो, पहले मैं भगवान का भोग लगा लूं और तुम्हारे छोटे भाई बहनों को खाना खिला दूं, फिर तुम्हें भोजन दूंगी।

यह सुन शनि को क्रोध आ गया और उसने माता को मारने के लिये अपना पैर उठाया तो स्वर्णा ने शनि को श्राप दे दिया कि तेरा पांव अभी टूट जाये।

माता का श्राप सुनकर शनिदेव डरकर अपने पिता के पास गये और सारा किस्सा कह दिया। सूर्यदेव समझ गये कि कोई भी माता अपने बच्चे को इस तरह का श्राप नहीं दे सकती। तब सूर्यदेव ने क्रोध में आकर पूछा कि बताओ तुम कौन हो?

सूर्य का तेज देखकर स्वर्णा घबरा गयी और सारी सच्चाई बता दी। तब सूर्य देव ने शनि को समझाया कि स्वर्णा तुम्हारी माता तो नहीं है परंतु मां के समान है। इसलिए उसका श्राप व्यर्थ तो नहीं होगा, परंतु यह उतना कठोर नहीं होगा कि टांग पूरी तरह से अलग हो जाये। हां, तुम आजीवन एक पांव से लंगड़ाकर चलते रहोगे।

- रावण की पत्नी मंदोदरी जब गर्भवती हुई तो रावण ने अपराजय व दीर्घायु पुत्र की कामना से सभी ग्रहों को अपनी इच्छानुसार स्थापित कर लिया। सभी ग्रह भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर चिंतित थे लेकिन रावण के भय से वहीं ठहरे रहे।

जब रावण पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था तो उसी समय शनिदेव ने स्थान परिवर्तन कर लिया जिसके कारण मेघनाद की दीर्घायु, अल्पायु में परिवर्तित हो गई।

शनि की बदली हुई स्थिति को देखकर रावण अत्यन्त क्रोधित हुआ और उसने शनि के पैर में अपनी गदा से प्रहार किया जिसके कारण शनिदेव लंगडे़ हो गये।

शनिदेव पर तेल क्यों चढ़ाया जाता है?

आनन्द रामायण में लिखा है कि जब भगवान राम की सेना ने सागर सेतु बांध लिया था, तब राक्षस उन्हें हानि न पंहुचा सकें, उसके लिये पवनसुत हनुमान को उसकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। जब हनुमान जी शाम के समय राम के ध्यान में मग्न थे, तभी सूर्य पुत्र शनि ने अपना काला कुरुप चेहरा बनाकर क्रोधपूर्ण कहा- हे वानर, मैं देवताओं में शक्तिशाली शनि हूं। सुना है तुम बहुत बलशाली हो। आंखें खोलो और मेरे साथ युद्ध करो।

इस पर हनुमान जी ने विनम्रता से कहा - इस समय मैं अपने प्रभु को याद कर रहा हूं। आप मेरी पूजा में विध्न मत डालिये। जब शनि देव लड़ने पर उतर ही आये तो हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ में लपेटना शुरु कर दिया। शनि देव उस बंधन से मुक्त न होकर पीड़ा से व्याकुल होने लगे। शनि के घमंड को तोड़ने के लिये हनुमान ने पत्थरों पर पूंछ को पटकना शुरु कर दिया जिससे शनिदेव लहुलुहान हो गये।

तब शनिदेव ने दया की प्रार्थना की जिस पर हनुमान जी ने कहा - मैं तुम्हें तभी छोडू़गा जब तुम मुझे वचन दोगे कि श्री राम के भक्त को कभी परेशान नहीं करोगे। शनि ने गिड़गिड़ाकर कहा - मैं वचन देता हूं कि कभी भूलकर भी आपके और श्रीराम के भक्तों की राशि पर नहीं आऊंगा।

तब हनुमान जी ने शनि को छोड़ दिया और उसके घावों पर लगाने के लिये जो तेल दिया तो उससे शनिदेव की सारी पीड़ा मिट गई। उसी दिन से शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है जिससे उनकी पीड़ा शांत होती है और वे प्रसन्न हो जाते हैं।

शनिदेव की दृष्टि में क्रूरता क्यों है?

ब्रह्मपुराण में कहा गया है - बचपन से ही शनिदेव भगवान कृष्ण के परम भक्त थे। वयस्क होने पर उनके पिता ने चित्ररथ की कन्या से उनका विवाह कर दिया। एक रात उनकी पत्नी ऋतु स्नान करके पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उनके पास पंहुची तो शनिदेव भगवान कृष्ण के ध्यान में मग्न थे। पत्नी प्रतीक्षा करके थक गई। उसका ऋतुकाल निष्फल हो गया। तब उसने क्रुद्ध होकर शनिदेव को श्राप दे दिया कि आज से जिसे तुम देख लोगे, वह नष्ट हो जायेगा।

ध्यान टूटने पर शनिदेव ने अपनी पत्नी को मनाया लेकिन श्राप के प्रतिकार की शक्ति उसमें न थी। तभी से शनिदेव की दृष्टि को क्रूर माना जाने लगा और वे अपना सिर नीचा करके रहने लगे क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी दृष्टि के द्वारा किसी का अनावश्यक अनिष्ट हो।

शनि को न्यायाधीश क्यांे कहते हैं?

कहा गया है कि शनिदेव क्रूर ग्रह नहीं हैं, वे न्यायकर्ता हैं। व्यक्ति जब पाप करता है, वह लोभ, हवस, गुस्सा, मोह से प्रभावित होकर अन्याय, अत्याचार, दुराचार, अनाचार, पापाचार, व्याभिचार का सहारा लेता है तो शनिदेव उस व्यक्ति के जीवन में साढे़साती लाकर उसके पापों का हिसाब स्वयं कर देते हैं।

लेकिन यदि साढे़साती के दौरान भी व्यक्ति सत्य को नहीं छोड़ते, दया और सुकर्म का सहारा लेते हैं, तब समय शुभता से व्यतीत करवा देते हैं। अतः शनिदेव अच्छे कर्मो के फलदाता है व बुरे कर्मों का दंड भी देते हैं जिस कारण से उन्हे न्यायधीश कहा जाता है।

देवी लक्ष्मी के पूछने पर शनिदेव ने उन्हें बताया था कि परमपिता परमात्मा ने ही मुझे तीनो लोकों का न्यायाधीश नियुक्त किया हुआ है।

शनिदेव काजल की डिबिया से क्यों प्रसन्न होते हैं?

ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि शनि को काला रंग व लोहे की धातु अत्याधिक प्रिय है और वह जमीन, भूगर्भ, वीरान स्थल आदि का कारक ग्रह है। इसलिये किसी भी शनिवार को किसी सुनसान जगह पर काजल की लोहे की छोटी सी डिबिया को जमीन में गाड़ दें और बिना पीछे देखे घर लौट आयंे तो यह शनिदेव की अशुभता से बचने का सटीक व सरल उपाय है।

दशरथ स्त्रोत से शनि प्रसन्न क्यों होते हैं?

शास्त्रों में यह आख्यान मिलता है कि शनि के प्रकोप से अपने राज्य को घोर दुर्भिक्ष से बचाने के लिये राजा दशरथ उनसे मुकाबला करने पंहुचे तो उनका पुरुषार्थ देखकर शनिदेव ने उनसे वरदान मांगने को कहा। राजा दशरथ ने विधिवत स्तुति कर स्वरचित स्त्रोत से उन्हें प्रसन्न किया तो शनिदेव ने उन्हें वरदान दिया कि चतुर्थ व अष्टम ढैया होने पर 'दशरथ स्त्रोत' पढ़कर मेरे द्वारा दिये जाने वाले कष्टों से रक्षा की जा सकती है।

कोकिला वन का शनिदेव मंदिर सिद्ध क्यों कहलाता है?

द्वापरयुग में बंसी बजाते हुये एक पैर पर खडे़ हुये भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव की पूजा-अर्चना से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिये और कहा कि नंदगांव से सटा 'कोकिला वन' उनका वन है। जो इस वन की परिक्रमा करेगा और शनिदेव की पूजा करेगा, वह मेरी व शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करेगा। इस कारण से कोकिलावन के शनिदेव मंदिर को सिद्ध मंदिर का दर्जा प्राप्त है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का शनिदेव से क्या संबंध है?

स्कन्द पुराण में वृतांत है कि एक बार शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से कहा कि मैं ऐसा पद प्राप्त करना चाहता हूं जो आज तक किसी ने प्राप्त न किया हो, मेरी शक्ति आप से सात गुणा अधिक हो, मेरे वेग का सामना कोई देव-दानव-साधक आदि न कर पायें और मुझे मेरे आराध्य श्रीकृष्ण के दर्शन हों।

शनिदेव की यह अभिलाषा सुन सूर्यदेव गदगद हुये और कहा कि मैं भी यही चाहता हूं कि मेरा पुत्र मुझसे भी अधिक महान हो, परंतु इसके लिये तुम्हें तप करना पडे़गा और तप करने के लिये तुम काशी चले जाओ, वहां भगवान शंकर का घनघोर तप करो और शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शंकर से अपने मनवांछित फलों का आशीर्वाद लो।

शनिदेव ने अपनी पिता की आज्ञानुसार वैसा ही किया और तप करने के बाद वर्तमान में भी मौजूद शिवलिंग की स्थापना की। इस प्रकार काशी विश्वनाथ मंदिर के स्थल पर शनिदेव को भगवान शंकर से आशीर्वाद के रुप में सर्वोपरि पद मिला।


जीवन के अच्छे समय में भी शनिदेव का गुणगान करो। आपातकाल में शनिदेव के दर्शन व दान करो। पीड़ादायक समय में शनिदेव की पूजा करो। दुखद प्रसंग में भी शनिदेव पर विश्वास रखो।


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सौ से बढ़ाकर 150 बेड का होगा एसकेएमसीएच में कोविड अस्पताल

Posted: 31 Jul 2020 09:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में सौ बेड की जगह अब 150 बेड का कोविड अस्पताल होगा। इसके अलावा अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो एईएस मरीजों के लिए बनाए गए पीकू को भी कोविड अस्पताल बना दिया जाएगा। इधर, सदर अस्पताल में सौ बेड के बने एमसीएच वार्ड को भी कोविड मरीजों के लिए खोल दिए जाएंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले मे कोविड अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। सीएम ने डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह, एसकेएमसीएच अधीक्षक डाॅ. सुनील कुमार शाही व प्राचार्य विकास कुमार से इस बाबत जानकारी ली।

समीक्षा के दौरान उन्होंने जानकारी ली कि अभी कितने मरीज भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए कितने डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति की गई है। दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड की क्या स्थिति है। सीएम ने जिले में कोविड जांच का भी दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा- अगर किट या ट्रू नेट मशीन की जरूरत हो तो वह प्रधान सचिव को मांग भेज सकते हैं। जिले के हर एक व्यक्ति की कोरोना जांच करें, ताकि जो पॉजिटिव मरीज है, उनका इलाज कर उन्हें ठीक किया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार, आईजी गणेश कुमार, एसएसपी जयंतकांत भी उपस्थित थे।

डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के बारे में दी जानकारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के लिए सदर अस्पताल कंट्रोल रूम और एसकेएमसीएच में व्यवस्था की गई थी। डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अब तक किए गए कार्यों तथा आगे की तैयारियों की अद्यतन स्थिति की बिंदुवार जानकारी मुख्यमंत्री को दी।एसकेएमसीएच के साथ ग्लोकल अस्पताल एवं कोविड केयर सेंटर जिसे डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के रूप में आवश्यक संसाधनों के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसकी जानकारी सीएम को दी। पताही एयरपोर्ट पर डीआरडीओ द्वारा 500 बेड का कोविड हॉस्पिटल बनाए जाने की तैयारियों के बारे में भी बताया।

इधर, नर्सिंग होम संचालकों ने कोरोना मरीजों के इलाज से किया मना, अब प्रशासन 25% बेड उपलब्ध कराने काे देगा नोटिस

जिले के निजी नर्सिंग होम संचालक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं देंगे। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में निजी नर्सिंग होम संचालकों ने दाे टूक कहा कि कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए वे स्वेच्छा से अस्पताल नहीं दे सकते हैं। अगर सरकार आदेश जारी कर कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए नर्सिंग होम लेना चाहती है, तो ले सकती है। सदर अस्पताल के एसीएमओ डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार निजी नर्सिंग होम को जिला प्रशासन चिह्नित कर ले। सरकार के आदेश के अनुसार नर्सिंग होम में उपलब्ध बेड का 25% कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करना है। इसे लेकर बैठक हुई, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं रहा।

स्वेच्छा से इलाज की देनी थी सहमति

डीएम की अध्यक्षता में बीते सप्ताह निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू करने को लेकर नर्सिंग होम संचालकों और आईएमए के बीच बैठक हुई थी। इसमें डीएम ने संचालकों से स्वेच्छा से निजी नर्सिंग होम में कोरोना के इलाज की सहमति देने को कहा था। इस पर संचालकों और आईएमए ने एक सप्ताह का समय मांगा था। इसी के बाद शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी।

अब शनिवार व रविवार काे जिला पूरी तरह रहेगा लाॅक

राज्य में 16 अगस्त तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दाैरान जिले में शनिवार अाैर रविवार काे जरूरी सेवाओं काे छाेड़ सभी व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। मालवाहक वाहनों काे छाेड़ अन्य काेई सार्वजनिक वाहन नहीं चलेंगे। साेमवार से शुक्रवार तक बाजार ताे खुलेंगे, लेकिन शॉपिंग माॅल्स अब भी बंद रहेंगे। साथ ही हाेटल, रेस्टोरेंट्स अाैर ढाबों से सिर्फ बना-बनाया भाेजन हाेम डिलिवरी किया जा सकेगा। एेसी जगहों पर बैठ कर खाना अादि खाने-पराेसने की मनाही रहेगी।

डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार काे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक के बाद लॉकडाउन में सख्ती बरतने के आदेश दिया। शनिवार और रविवार को आकस्मिक सेवाओं में केवल स्वास्थ्य सेवाएं, दूध, सब्जी और किराना की दुकानें ही खुलेंगी। अन्य सभी प्रकार की दुकानें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और रिक्शा समेत अन्य प्रकार के व्यावसायिक वाहनों का परिचालन नहीं होगा। हालांकि, इस दौरान मालवाहक वाहनों का परिचालन जारी रहेगा।

डीएम के इस निर्णय के अनुसार अब जिले में सीधे साेमवार काे रक्षाबंधन के दिन सामान्य व्यापारिक गतिविधियां शुरू हाे सकेंगी। लॉकडाउन की इस अवधि में निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मियों की उपस्थिति का साथ काम करने की छूट दी गई है। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़ हर प्रकार की गतिविधि बंद रहेगी।

सिर्फ जरूरी सामान मिलेंगे, शैक्षणिक संस्थान व धार्मिक स्थल आम लाेगाें के लिए रहेंगे बंद

सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ पूजा, अरदास, इबादत और प्रार्थना स्थल पहले की ही तरह आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक आम लोगों के लिए आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। सभी प्रकार की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सोमवार से शुक्रवार तक ही खुलेंगे।



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Kovid Hospital will be increased from 100 to 150 beds in SKMCH


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/kovid-hospital-will-be-increased-from-100-to-150-beds-in-skmch-127572639.html

हिंदी में "क्या जर्मन अंतिम संरक्षक होंगे संस्कृत के और इसके कीमती विरासत व संस्कृति के??"

Posted: 31 Jul 2020 08:45 PM PDT

एक लेख पढ़ रहा था जिसकी शुरुआत कुछ इस तरह होती है .. "Will Germans be the eventual custodians of Sanskrit, its rich heritage and culture?"

हिंदी में "क्या जर्मन अंतिम संरक्षक होंगे संस्कृत के और इसके कीमती विरासत व संस्कृति के??"

संकलन अश्विनी कुमार तिवारी
मतलब क्या है कि जर्मनी जिस तरह से संस्कृत को लेकर गम्भीर है वैसा और कहीं नहीं है और इस आधार पे ही बोला जा रहा कि क्या जर्मनी ही इसका अंतिम संरक्षक होगा ?? 
जर्मनी के 14 टॉप यूनिवर्सिटियों में संस्कृत की पढ़ाई हो रही है व रिसर्च भी।
साउथ एशिया इंस्टीट्यूट और हैडलबर्ग यूनिवर्सिटी समर (summer) में स्पोकन कोर्स ऑर्गेनाइज करती है जिसमें एडमिशन लेने के लिए दुनिया भर से होड़ लगा हुआ होता है.. एप्लिकेशन की बाढ़ आ जाती है विश्व भर से जिसमें कि छंटाई करने की नौबत आ जाती है और छंटाई करना भी पड़ता है।
ये यूनिवर्सिटी केवल जर्मनी में ही नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड, इटली और आप यकीन नहीं मानोगे भारत में भी संस्कृत स्पोकन का समर स्कूल ऑर्गेनाइज करती है। बताइये कि भारत की चीज भारत को ही बेचा जाता है। किस कारण ??

Professor Dr. Axel Michaels, head of classical Indology (University of Heidelberg)  कहते है कि " आज से 15 साल पहले जब हम इसका शुरुआत किये थे तो शुरुआती के दो साल में ही बंद करने की स्थिति में थे लेकिन हमने ऐसा नहीं किया बल्कि इसको और मजबूत बनाने पे ध्यान दिया और अन्य युरोपियन कंट्री के लिए भी कोर्स के लिए ओपन किया!" 
आज जर्मनी में 14 यूनिवर्सिटी हैं जहां संस्कृत की पढ़ाई चल रही और ब्रिटेन के 4 यूनिवर्सिटी में। प्रत्येक वर्ष हम समर में एक महीने के लिए समर स्कूल रन करते हैं जिसमें दुनिया भर के एप्लिकेशन आते हैं।.. अब तक 254 स्टूडेंट इसमें पार्टिशिपेट हो चुके हैं 34 अलग-अलग देशों से.. और प्रत्येक साल इसमें गज्जब का इज़ाफ़ा हो रहा है जिसमें कि हमें एप्लिकेशन को रिजेक्ट भी करना पड़ रहा है।

जर्मनी के बाद अमेरिका से सबसे ज्यादा स्टूडेंट होते हैं उसके बाद ब्रिटेन इटली और अन्य यूरोपीय देश।
आगे प्रोफेसर कहते है कि "किसी पोलिटिकल आइडियोलोजी के तहत संस्कृत को धर्म के साथ जोड़ना सबसे स्टुपिड और विघातक बात है.. जो इनके महान विरासत को दाग लगाते है! .. यहां तक कि बुद्धीज्म का जो मूल विचार है वो संस्कृत में है..अगर हम शुरुआती दर्शन,इतिहास,भाषा,विज्ञान व संस्कृति के उत्पत्ति को बेहतर ढंग से जानना व समझना चाहते है तो हमें ओरिजिनल संस्कृत टेक्स्ट पढ़ने पड़ेंगे जो कि सबसे पुराने विचार व अनुसंधान का नतीजा है!"

Francesca Lunari एक मेडिकल की छात्रा है जो हैडलबर्ग यूनिवर्सिटी में संस्कृत का अध्ययन कर रही है.. वो कहती है कि "मैं साइको एनालिसिस में ज्यादा इंटरेस्टेड हूँ और इसके लिए ये जानना जरूरी है कि कैसे मानवीय विचार ग्रंथ,संस्कृति और समाज से होते हुए निकला .. और इसको समझने के लिए जो सबसे शुरुआती स्टेप है वो है संस्कृत है।.. मुझे बांग्ला के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक गिरीन्द्र बॉस के मनोविज्ञान को पढ़ना है जो कि बांग्ला में है और भारत में भी लोग इनको नहीं पढ़ते जिन्होंने बहुत कमाल का कार्य किया है इस क्षेत्र में.. मुझे उनके कार्य को डेसिफर करना है और उसके लिए संस्कृत ही शुरुआती स्टेप है।"
ये आगे कहती है कि "हम एक महान वैश्विक संस्कृति व विरासत को पूर्णतः विलुप्त होते हुए देखेंगे यदि हिंदी बांग्ला जैसे मेजर लैंग्वेज को यूं ही इंडियन इंग्लिश के सामने घुटने टेकते हुए पाते है तो .. जो कि दिनों दिन कमजोर ही होता जा रहा है.. यही आज संस्कृत के साथ हुआ है .. और ये चिंता का विषय है क्योंकि इंडियन परिवार अपने बच्चों को अपने लैंग्वेज में न पढ़ा के इंग्लिश पे ज्यादा जोर देते हैं और दे रहे हैं।"

डॉ. माइकल कहते है कि "पॉलिटिक्स व इकोनॉमिक्स के क्रमिक विकास को वह बेहतर समझ सकता है जो चाणक्य के अर्थशास्त्र का अध्ययन करता हो"
आने वाले सेमेस्टर में  'human physiology and psychology in the early Upanishads' भी पढ़ाया जाएगा।
आईआईटी के मैथेमेटिसियन आनंद मिश्रा कहते है कि "जब हमने पाणिनि के संस्कृत व्याकरण का स्टडी किया तो पाया कि ये कम्प्यूटिंग लैंग्वेज के हिसाब से सबसे सूटेबल लैंग्वेज है।" .. और इसके ऊपर काम भी शुरू है।
जर्मनी हमेशा से संस्कृत विद्वानों के लिए संरक्षक व भंडार रहा है.. जितने भी हार्वर्ड,कैलिफोर्निया व ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी में संस्कृत विद्वान हैं वे सभी के सभी जर्मन हैं .. ऐसा क्यों है तो इसके जवाब में डॉ माइकल कहते है कि " ऐसा इसलिए है कि हमने कभी इंडिया को उपनिवेश नहीं बनाया जैसा कि ब्रिटेन ने किया और हमने हमेशा इनके ऊपर रोमांटिक व्यू ही रखा है!"

लेकिन यहाँ जब लंबे समय तक मुगलों व अंग्रेजों के अधीन सबकुछ रहा तो संस्कृत आज सेकुलरिज्म का दुश्मन घोषित हो गया है।
नरेंद्र मोदी जब जर्मनी यात्रा पे जाते है तो यही बात कहते है कि "आज देश में कोई संस्कृत न्यूज बुलेटिन नहीं है क्योंकि ऐसा लगता है कि इससे सेकुलरिज्म खतरे में पड़ जाएगा!"

ये बातें 2015 की है ... आज त्रिभाषा की बात हो रही .. नई शिक्षा नीति की बात हो रही है तो सबसे ज्यादा मरोड़ या परेशानी किससे हो रही है तो वो है संस्कृत .. पता नहीं क्यों इन्हें संस्कृत के नाम से जुलाब होने लगता है.. दस्त रुकते नहीं रुकते हैं.. हिचकोले मार-मार के उबाल मारता है.. रह-रह के उबाल मारता है.. जबकि साफ कह दिया है कि संस्कृत विकल्प में है.. अगर आपको पढ़ना है तो पढ़े नहीं तो विकल्प के रूप में अन्य भारतीय भाषा भी है.. लेकिन नहीं सारा मुड़फुटौवल इसी पे करना है.. पिछले दो दिन से गली-गली से महान भाषाविद के नाना सब उफिया के माफिक बाहर निकल रहे हैं.. जो हिंदी भी ढंग से टाइप नहीं कर पाते वे संस्कृत के एक्सपर्ट बन के बैठे हुए हैं। .. इन्हें विरोध करना ही करना है क्योंकि सेकुलरिज्म की बात जो आ जाती है न।

तुम्हें नहीं पढ़ना है तो मत पढ़ न .. लेकिन जहां संस्कृत का ओरिजिन है वहां गर देश-विदेश से स्कॉलर आ के ज्ञान अर्जित करेंगे तो किनका फायदा है ??? तुम्हें पैसे कमाने है तो तुम पढ़ो न जर्मन,फ्रेंच,पुर्तगाली,रूसी,इटालियन .. तुम्हें कौन मना किया है .. सरकार ने व्यवस्था भी किया हुआ है.. लेकिन जो स्कॉलर लोग हैं उन्हें क्यों तुम अपनी बचकानी सेकुलरिज्म की आड़ में उपहास उड़ा रहे हो ??? क्या ये नहीं होना चाहिए कि जहां विश्व के टॉप यूनिवर्सिटीज में जर्मन स्कॉलर विराजमान हैं वहाँ कोई भारतीय हो ?? क्या ये नहीं हो सकता ?? क्यों नहीं हो सकता.. जब यहां एक्सपर्ट तैयार होंगे तभी तो वो विश्व भर में जाएंगे न .. नहीं तो ऐसा न हो कि हमें संस्कृत पढ़ाने वाले जर्मन लोग ही आगे होंगे। मने हमारी चीज हमें ही पढ़ाएँगे।

कुछ ऐसा ही विरोध रहा तो हिंदी भी हिन्दू के साथ जुड़ जायेगा और सेकुलरिज्म का दुश्मन घोषित हो जाएगा तब भी कोई फॉरेनर ही हमें हिंदी सीखा रहा होगा।
कुछ तो शर्म करो रे।

जो एक आम भारतीय को बोलना चाहिए वो एक जर्मन प्रोफेसर बोल रहा है.. जो कि मैं ऊपर ही कोट किया हूँ और पुनः इधर भी कर रहा हूँ जो इन शेखुलरों को समर्पित है..
"किसी पोलिटिकल आइडियोलोजी के तहत संस्कृत को धर्म के साथ जोड़ना सबसे स्टुपिड और विघातक बात है.. जो इनके महान विरासत को दाग लगाते है!"
(इसको आप अपने तरीके से भी बोल सकते है.. मने कि सभ्य तरीके से।)😊
गंगवा
खोपोली से।
✍🏻गंगा महतो 

मेरी ये पोस्ट उन पढ़े लिखे मानसिक विकलांगो को समर्पित है जो आज भी सोचते है कि, भारत एक पिछड़ा हुआ देश था, है और हम ऐसे ही वैदिक वैदिक की रट लगाते रहे तो आगे भी रहेगा ।।

पिछले दिनों एक मित्र से कुछ किताबे पढ़ने को मिली इस मामले में मैं थोड़ा लालची हूँ और आप कह सकते है कि मैं और किताबे बिल्कुल चुम्बक की तरह ,इसमें से एक किताब को पढ़ने के बाद मुझे आप सच मानिए भारतीय मानसिकता पे रोना आया ये किताब थी -- 

भूतपूर्व राष्ट्रपति आदरणीय डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम  द्वारा लिखित(स्व. इसलिए नही लिखा क्योंकि मैं उन्हें अभी भी जीवित मानता हूँ) --
#इण्डिया2020 - #एविजनफॉरन्यू_मिलेनियम 

डॉ कलाम लिखते है -- मेरे घर की दीवार पर एक कैलेंडर टँगा है, इस कलरफुल कैलेंडर में सैटेलाइट  द्वारा यूरोप, अफ्रीका महाद्वीपों के लिए गए बहोत से चित्र छपे हैं। ये कैलेंडर जर्मनी में पब्लिश किया गया था। जब भी कोई व्यक्ति मेरे घर में आता था तो दीवार पर लगे कैलेंडर को देखता था, तो वाहवाही जरूर करता था और प्रथम दृष्टि में उसके मुंह से निकलता था वाह! बहुत सुन्दर कैलेंडर है तब मैं कहता था कि यह जर्मनी में छपा है। यह सुनते ही उसके मन में आनन्द के भाव जग जाते थे। वह बड़े ही उत्साह से कहता था कि सही बात है, जर्मनी की बात ही कुछ और है उसकी टेक्नालॉजी बहुत आगे है।
सेम टाइम जब मैं उससे यह कहता कि कैलेंडर  जरुर जर्मनी में पब्लिश किया गया है किन्तु जो चित्र छपे हैं उसे भारतीय सैटेलाइट नें खींचे हैं, तो दुर्भाग्य से कोई भी ऐसा आदमी नही मिला जिसके चेहरे पर वही पहले जैसे आनन्द के भाव आये हों। आनन्द के स्थान पर आश्चर्य के भाव आते थे, वह बोलता था कि अच्छा! ऐसा कैसे हो सकता है? और जब मै उसका हाथ पकड़कर कैलेंडर के पास ले जाता था और जिस कम्पनी ने उस कैलेंडर को छापा था, उसने नीचे अपना कृतज्ञता ज्ञापन छापा था ''जो चित्र हमने छापा है वो भारतीय सैटेलाइट नें खींचे हैं, उनके सौजन्य से हमें प्राप्त हुए हैं।'' जब व्यक्ति उस पंक्ति को पढ़ता था तो बोलता था कि अच्छा! शायद, हो सकता है।

डॉ कलाम इस भारतीय मानसिकता को लिखते हुए वाकई दुखी थे क्योंकि इस पूरे लेखन में इस पेज पर उनका दुःख आप सपष्ट महसूस कर सकते है ।।

#डॉकलामलिखतेहैकि --
 दुनिया के कुछ वैज्ञानिक रात्रिभोज पर आये हुए थे(तब डॉ कलाम सिर्फ वैज्ञानिक थे), उसमें भारत और दुनिया के कुछ वैज्ञानिक और भारतीय नौकरशाह थे। उस भोज में विज्ञान की बात चली तो राकेट के बारे में चर्चा चल पड़ी। डॉ. कलाम नें उस चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कुछ समय पूर्व मैं इंलैण्ड गया था वहाँ उन्हें बुलिच नाम की जगह पे रोटुण्डा नामक म्युजियम घूमने का सौभाग्य मिला। जिसमे पुराने समय के युध्दों में जिन हथियारों का प्रयोग किया गया था, उसकी प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी। वहाँ उन्होंने देखा कि एक रॉकेट का खोल रखा गया था और जब उन्होंने उसका डिस्क्रिप्शन पढ़ा तो उनको बड़ा आश्चर्य हुआ उसपे लिखा था पर आधुनिक युग में छोड़े गये प्रथम राकेट का खोल । और आपको जानकर आश्चर्य होगा इसका प्रयोग भारतीय सेना ने श्रीरंगपट्टनम के युद्ध मे टीपू सुल्तान और अंग्रेजों की लड़ाई में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इस्तेमाल किया था । 
इसप्रकारआधुनिकयुगमेंप्रथमराकेटकाप्रक्षेपणभारतनेंकियाथा।।

डॉ. कलाम लिखते हैं कि, जैसे ही मैने यह बात कही एक भारतीय नौकरशाह बोला मि. कलाम! आप गलत कहते हैं, वास्तव में तो फ्रेंच लोगों ने वह टेक्नोलॉजी टीपू सुल्तान को दी थी। डॉ. कलाम नें कहा ऐसा नही है, आप गलत कहते हैं! मैं आपको प्रमाण दूंगा। और सौभाग्य से वह प्रमाण किसी भारतीय का नही था, नही तो कहते कि तुम लोगों ने अपने मन से बना लिया है(भारतीय मानसिकता)। एक ब्रिटिश वैज्ञानिक सर बर्नाड लावेल ने एक पुस्तक लिखी थी --
 ''#दओरिजनएण्डइंटरनेशनलइकोनॉमिक्सऑफस्पेसएक्सप्लोरेशन'' 

उस पुस्तक में वह लिखते हैं कि ' भारतीय शासक टीपू सुल्तान और अंग्रेजी हुकूमत के बीच हुए युध्द में जब भारतीय सेना नें राकेट का उपयोग किया तो एक ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम कांग्रेह्वा ने राकेट का खोल लेकर अध्ययन किया और उसकी नकल करके एक राकेट बनाया। उसने उस राकेट को 1805 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट के सामनें प्रस्तुत किया और उन्होने इसे सेना में प्रयुक्त करनें की अनुमति दी।' जब नैपोलियन के खिलाफ ब्रिटेन का युध्द हुआ तब ब्रिटिश सेना नें राकेट का प्रयोग किया।अगर फ्रेंचो के पास वह टेक्नोलॉजी होती तो वे भी सामने से राकेट छोड़ते, लेकिन उन्होने नही छोड़ा। जब यह पंक्तियाँ डॉ. कलामनें उस नौकरशाह को पढ़ाई तो उसको पढ़कर  भारतीय नौकरशाह बोला, बड़ा दिलचस्प मामला है। डॉ. कलाम नें कहा यह पढ़करउसे गौरव का बोध नही हुआ बल्कि उसको दिलचस्पी का मामला लगा।।

ये दो उदाहरण आपको मैंने भारतीय मानसिकता समझने के लिए दिये , भारत आज भी विश्वगुरु बन सकता है लेकिन उसके लिए हमे अपनी मानसिकता में बदलाव लाना होगा ।।

विशेष --

बात मानसिकता की करते है - यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि जिस ब्रिटिश वैज्ञानिक नें नकल कर के राकेट बनाया उसे इंलैण्ड का बच्चा-बच्चा जानता है,किन्तु जिन भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत के लिए  पहला राकेट बनाया उन्हे कोई भारतीय नही जानता। यह पूरी तरह से प्रदर्शित करता है कि हम क्या पढ़ रहे हैं? और हमे क्या पढ़ना चाहिए? जबतक प्रत्येक भारतीय पश्चिम की श्रेष्ठता और अपनी हीनता के बोध की प्रवृत्ति को नही त्यागता तब तक भारत विश्व के सर्वोच्च शिखर पर नही पहुँच सकता। ऐसे में हमे आवश्यकता है यह जानने की कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत नें इस विश्व को क्या दिया। इसके बारे में बताने के लिए सर्वप्रथम भारत की प्राचीन स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि प्राचीन भारत के प्रतिमानों के नकारने के कारण हम वर्तमान में पश्चिम की नकल करने पर मजबूर हैं। जबकि हमारे प्राचीन ज्ञानों का नकल एवं शोध करके पश्चिम, विज्ञान के क्षेत्र में उन्नति के शिखर पर विराजमान है।
✍🏻अजेष्ठ त्रिपाठी
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com

आधुनिक हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के महाकवि थे श्री महेश नारायण:- डा अनिल सुलभ

Posted: 31 Jul 2020 08:37 PM PDT

स्मृति-दिवस (१ अगस्त) पर विशेष

आधुनिक हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के महाकवि थे श्री महेश नारायण:- डा अनिल सुलभ 

सारस्वत प्रतिभा के अतुल बलधाम और बिहार की अस्मिता के महान संरक्षक श्री महेश नारायण, 'बिहार' नाम से एक अलग राज्य की स्थापना के लिए गर्जना करने वाले एक महान और संघर्षशील राजनेता ही नही, खड़ी बोली हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के 'भारतेंदु यगीन' महाकवि भी थे। इनकी काव्य-प्रतिभा की विशाल-भूमि में न केवल आधुनिक हिन्दी के विशाल वट-वृक्ष के ही, अपितु छायावाद और प्रयोगवाद के बीज भी दिखाई पड़ते हैं। बिहारी स्वाभिमान के प्रश्न पर अनेक वलिदान देने वाले महेश बाबू राजनीति के जटिल और निरंतर क्षुब्ध करने वाले जंजाल में नही पड़े होते, तो हिन्दी काव्य का सागर उनके अवदानों से और अधिक परिपूर्ण हुआ होता। संघर्षमय सामाजिक और राजनैतिक जीवन ने उनके समक्ष इतने काँटे बोए और इतने कम अवकाश दिए कि वे इच्छा भर लिख नही पाए। उनकी लेखनी का जादू अंग्रेज़ों पर ख़ूब चला, बिहार की पुण्य-उर्वरा भूमि और भारत माता अपने ऐसे सपूत को पाकर तो आनंद से गदगद अवश्य हुई, पर माँ भारती (हिन्दी) का मन नही भर सका। महेश बाबू ने भारतेंदु बाबू की उस धारणा को ग़लत सिद्ध कर दिया था कि, खड़ी बोली में गद्य तो रचे जा सकते हैं, पर पद्य नही। वे हिन्दी काव्य-साहित्य में 'मुक्त छंद' के जनक थे। हिन्दी मासिक पत्र 'बिहार-बंधु' में १३ अक्टूबर १८८१ के अंक में, 'स्वप्न-भंग' शीर्षक से प्रकाशित उनकी लम्बी कविता, मुक्त-छंद की प्रथम कविता है, जो निराला की 'जूही की कली' से लगभग ३६ वर्ष पूर्व और 'भारत मित्र' के १ सितम्बर १८८१ के अंक में प्रकाशित भारतेंदु की खड़ी बोली में प्रकाशित कविता के एक माह बाद प्रकाशित हुई थी। तब उनकी उम्र मात्र २३ वर्ष की थी। हिन्दी और अंग्रेज़ी में समान अधिकार रखने वाले महेश बाबू अंग्रेज़ी पत्र 'बिहार' तथा 'बिहार टाइम्स' के संस्थापक-सम्पादक थे। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष का पर्याय था। वे निस्संदेह सभी उत्तमगुणों से युक्त एक महान सांस्कृतिक-योद्धा और महान कवि थे। 
महेश बाबू का जन्म राजमहल अनुमंडल (अब झारखंड) के बभनगामा ग्राम में, एक कुलीन सारस्वत परिवार में वर्ष १८५८ में हुआ था। उनके पिताश्री मुंशी भगवती चरण संस्कृत और फ़ारसी के सुप्रसिद्ध विद्वान थे। पिता की प्रेरणा से उनके हृदय और मानस में अनेक नूतन संकल्प पोषित हुए, जिसने उन्हें अपने समय के विस्तृत व्योम का चमकता नक्षत्र बना दिया। साहित्य, समाज और शिक्षा के लिए उनकी चेतना शैशव-काल में ही स्पंदित और झंकृत हो चुकी थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजमहल में ही हुई। प्रवेशिका (इंट्रेंस) की परीक्षा में पटना विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण होकर वे स्नातक की शिक्षा के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) गए। वहाँ उन्होंने कलकत्ता विश्व विद्यालय में स्नातक-कला (बी.ए.)में नामांकन कराया, किंतु बिहारी छात्रों के साथ वहाँ हो रहे दुर्व्यवहार और भेदभाव ने उन्हें इतना व्यथित किया कि वे अध्ययन छोड़ कर अपने बड़े भ्राता श्री गोविंद चरण जी के पास पटना लौट आए और तभी से 'बंग-भंग' का ध्वज और हूंकार के साथ राजनैतिक समरांगण में उतर आए। सबसे पहले महेश बाबू ने ही 'बिहार' के लिए अलग राज्य की माँग की, जिसके समर्थन और सहयोग में बाबू सच्चिदानंद सिन्हा आदि प्रबुद्ध समाजसेवी और राजनेता आगे आए और एक बड़े तथा लम्बे संघर्ष के पश्चात १९१२ में बंगाल को विभाजित कर, 'बिहार' को एक अलग राज्य बनाया गया। महेश बाबू अपनी प्रथम कविता 'स्वप्न-भंग' की भाँति, अपने स्वप्न को साकार होते हुए नही देख पाए। पाँच वर्ष पूर्व ही १९०७ में उनका निधन हो चुका था। 
महेश बाबू की वह प्रथम कविता 'स्वप्न-भंग' एक मर्म-स्पर्शी काव्य-कल्पना पर आधारित है, जिसमें एक युवक और युवती की अधूरी प्रेम कथा है। युवती की विमाता, संपत्ति की लालच में, काव्य-नायिका का विवाह एक वृद्ध पुरुष से कर देती है तथा उस वृद्ध के निधन के पश्चात उसकी सारी सम्पत्ति पर अधिकार कर लेती है। विमाता की उपेक्षा और तिरस्कार से आहत वह विधवा अपने पूर्व प्रेमी की खोज में निकल पड़ती है। और ज्यों ही वह उसे प्राप्त करती है, त्यों ही उसका क्रूर पिता अपनी द्वितीया (पत्नी) द्वारा प्रेरित होकर, उसे घुमा कर फेंक देता है। नायिका का स्वप्न टूट जाता है और इस प्रकार कथा-रूप इस लम्बी कविता का नाटकीय अंत होता है। मुक्त छंद की इस प्रयोगवादी कविता ने, जिसमें तत्सम और फ़ारसी के शब्दों का प्रचुर प्रयोग हुआ है, काव्य-साहित्य में हलचल पैदा कर दी थी, जिसे बड़ी चतुराई से तत्कालीन दिग्गजों ने शांत किया था। 'स्वप्न-भंग' की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत हैं, जो कवि के काव्य-सामर्थ्य, रंजना और व्यंजना शक्ति तथा सामाजिक कुरीतियों पर उनके प्रहार की शैली को अभिव्यक्त करती है;-
"बिजली की चमक से रौशन हुआ चेहरा/ देखा तो परी है, ताजों से भरी है।
घुंघराले बाल , मख़मल से दो गाल/ तथा नाज़ुक उसका कुछ था मलाल।
इस लम्बी कविता को 'बिहार बंधु' के १३ अक्टूबर,१८८१ से १५ दिसम्बर १८८१ के अंकों तक धारावाहिक प्रकाशित किया गया था। उनकी अन्य कविताएँ;- 'थी अंधेरी रात', 'पहाड़ी ऊँची एक दक्षिण दिशा में', 'और एक झरना बहुत शफ़्फ़ाक था', 'ठनके की ठनक से', 'वह राक्षसी उजाला', रात अंधेरी में पहाड़ी की डरावनी मूर्ति', 'एक कुंज', 'उस कोलाहल में ध्वनि उसकी', 'बिजली की चमक में', मुख मलीन मृग लोचन सुख', 'पानी पड़ने लगा वह मूसल धार', 'सब्जे का बना था शामियाना', 'पहाड़ी पर पत्थर के चट्टान बड़े', 'रोने की आवाज़ आती है कहाँ से?', 'कभी मुँह ग़ुस्से से होता लाल', 'दिल में उसके थी एक अजब हलचल', 'थी वह अबला अकेली उस वन में', 'क्या है यह अहा हिंद की ज़मीन', 'अवश्य नयन स्वप्न ही में थी टेढ़ी', 'दरख़्तों को फिर वह सुनाने लगी है', 'यां तो बेवजह लड़ाई नही होतों होगी?' 'ज़िंदा मुर्दा की तरह पड़ी थी' आदि उनकी कविताएँ अपनी प्रभावोत्पादकता के कारण पर्याप्त चर्चा में रहीं और हृदय से पढ़ी-सुनी गईं। उनकी कविताएँ और आलेख भी 'बिहार बंधु' में ससम्मान स्थान पाते रहे। 'बंग-विच्छेद' नामक उनका गद्य, जो बिहार के स्वतंत्र विकास के लिए बंगाल के विभाजन को अनिवार्य सिद्ध करता था, बिहार के पक्ष में खड़े संपूर्ण प्रबुद्ध समाज और नौजवानों के लिए प्रेरणा का आलोक-स्तम्भ सिद्ध हुआ।
महेश बाबू की काव्य-भाषा तत्सम और फ़ारसी से युक्त मनोहर शब्दावली और भाव-लालित्य से परिपूर्ण थी। उनकी पद्य रचनाएँ प्रायः ही कथात्मक और चित्रात्मक हैं। उनमे अद्भुत सौंदर्य-बोध भी है और मार्मिक-वेदना की प्रांजल व्यंजना भी। इसीलिए उनमें काव्य-लालित्य से भरी कथा का आनंद मिलता है। 'थी अंधेरी रात' नामक उनकी कविता की निम्न पंक्तियों से अवगत होता है कि वे किस सामर्थ्य के शब्द चित्रकार थे;
"थी अंधेरी रात और सुनसान था / और फैला दूर तक मैदान था,
जंगल भी वहाँ था, जानवर का गुमां था/बादल था गरजता, बिजली थी चमकती, 
वो बिजली की चमक से रौशनी होती भयंकर सी, 
ईश्वर के जमाल का नमूना वाँ था/ ईश्वर के कमाल का ख़ज़ाना वाँ था!
महेश बाबू की काव्य-प्रतिभा, शब्द सामर्थ्य एवं अनुभूतिप्रवणता के प्रमाण उनकी अनेक रचनाओं में मिलते हैं, किंतु उनमे ध्वनि की कितनी गहन समझ और सूक्ष्म बोध भी था, इसका उदाहरण निम्न पंक्तियाँ हैं;-
"ठनके की ठनक से, बिजली की चमक से/ वायु की लपक से, फूलों की महक से,
वह वन में दिख पड़ता था अजाएब सा भयानक हुस्न!
झरने की बड़बड़ाहट, पत्तों की सनसनाहट / कड़के की कड़कड़ाहट, करती थी हड़हड़ाहट
लड़तीं थी आपुस में ईश्वर की कीर्तियाँ सब !" 
ध्वनि-बोध के साथ उनका सौंदर्य-बोध भी अप्रतिम है। अपनी कविता 'वह राक्षसी उजाला' में वे प्रकृति का चित्रण करते हुए अपने अंतर का सौंदर्य मनोहारी ध्वनि में प्रकट करते हैं;
जुग़नूँ थे चमकते डालों पर/ जस मोती काले बालों पर।
जस चंदन बिंदु दीख पड़े, श्यामा अबला के गालों पर !
महेश बाबू बिहार में पत्रकारिता के भी आदि-पुरुषों में से एक थे। उन्होंने वर्ष १८८४ में 'बिहार' नाम से अंग्रेज़ी का पत्र आरंभ किया। किंतु यह अल्पायु रहा। १८९४ में उन्होंने, अंग्रेज़ी में ही, 'बिहार टाइम्स' नामक दूसरा पत्र आरंभ किया, जो उनके जीवन-पर्यन्त (१९०७ तक ) प्रकाशित होता रहा। यह पत्र राष्ट्रीयता और बिहारी-अस्मिता का शंखनाद था। इसमें महेश बाबू ने अपने तर्क-सम्मत और उत्तेजक लेखों से अंग्रेज़ी हुक्मरानों को इस निर्णय पर आने के लिए विवश किया कि 'बिहार' को स्वतंत्र अस्तित्व दिया जाना चाहिए। इस पत्र के माध्यम से वे स्वतंत्रता-आंदोलन और बिहारी अस्मिता के लिए जागरण का कार्य करते रहे। । यह पत्र नए पत्रकारों के लिए एक कार्यशाला भी सिद्ध हुआ। वे व्याख्यानों और संगोष्ठियों के भी आयोजन किया करते थे। उन्होंने अनेक वैचारिक संस्थाओं की भी स्थापना की। एक बड़े प्रबुद्ध संगठन-कर्ता के रूप में भी वे समाज में आदरणीय रहे। १ अगस्त १९०७ को जब उन्होंने अपना नश्वर देह छोड़ा, उस समय उनके लिए तड़पने वाले हज़ारों दिल थे और आँसू बहाने वाली लाखों आँखें। उनके साहित्यिक और सामाजिक अवदान ऐतिहासिक हैं! खड़ी बोली हिन्दी में मुक्तछंद के प्रथम कवि, निर्भीक और स्वाभिमानी पत्रकार तथा बिहार के निर्माताओं में से एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में महेश बाबू सदा जीवित रहेंगे। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों का सदा मार्ग-दर्शन करता रहेगा।
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पिता के सामने बेटी का अपहरण, आरोपी बोला- पाकिस्तान होता तो घर से उठा लेता

Posted: 31 Jul 2020 08:22 PM PDT

बेगूसराय में अपहरण की एक अजीब वारदात थाना मेंं दर्ज कराई गई है। बंदूकधारी अपहरणकर्ताओं ने अपहरण के दौरान नाबालिग पुत्री के पिता को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान होता तो तुम्हारी बेटी को घर से अगवा कर लेते। अपनी बेटी को अगर बिकने से बचाना है तो दो लाख रुपया मेरे पास जमा करा दो। इसके बाद अगवा लड़की के पिता अपनी पत्नी के साथ मेन आरोपी इजमुल खां उर्फ नजबुल उर्फ आर्यन के घर पर पहुंचे तो उसकी मां हसीना खातून ने धमकी दी की तुम्हारी बेटी को वेश्या बना कर बांग्लादेश में बेच देंगे। अब इस संबंध में पीड़ित पिता ने 30 जुलाई को बछवाड़ा थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। सेवा न्यास उत्थान फाउंडेशन की शिकायत पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने एसपी अवकाश कुमार से 3 दिनों के अंदर अब तक की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
अपने पिता के साथ बाजार से घरेलू सामान खरीद कर लौट रही 15 साल की नाबालिग लड़की को बिना नम्बर की बोलेरो पर सवार बदमाशों ने अगवा कर लिया। अपहृता के पिता ने बताया कि वे 26 जुलाई की शाम अपने बेटी के साथ बाजार से पैदल घर लौट रही थे। तभी सुनसान जगह पर पीछे से आकर बोलेरो सवार बदमाशों ने हम दोनों को रोक लिया। हाथ में पिस्तौल लिए मो इजामुल खां ने मेरी बेटी को पकड़ लिया। जब मैं हल्ला करने लगा तो मो नुरूल अंसारी और अन्य 3 बदमाश ने मुझे पिस्तौल सटा दिया व बोला कि साले जान से मार दुुंगा। पाकिस्तान होता तो घर से उठा लेता। किसी को बताओगे तो पूरे परिवार को जान से मार देंगे। इसके बाद आरोपी मेरी पुत्री को अपहरण कर के भाग गए। प्रभारी बछवाड़ा थानाध्यक्ष शशिभूषण सिंह ने बताया कि एफआइआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।



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Kidnapped daughter in front of father, accused said- If Pakistan had taken place, would have picked up from home


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/begusarai/news/kidnapped-daughter-in-front-of-father-accused-said-if-pakistan-had-taken-place-would-have-picked-up-from-home-127570810.html

एसकेएमसीएच में रिटायर्ड नेवी के अफसर समेत 2 पॉजिटिव की मौत

Posted: 31 Jul 2020 07:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में शुक्रवार को एक रिटायर्ड नेवी अफसर समेत दो कोरोना पॉजिटिव की मौत हो गई। दोनों मरीजों को अस्पताल प्रबंधन द्वारा बैग में शव को लपेटकर सौंप दिया गया। एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि ब्रह्मपुरा का एक व्यक्ति 4 दिनों से वार्ड में भर्ती था। पुरानी बाजार के एक पॉजिटिव मरीज को सदर अस्पताल के एंबुलेंस से लाया गया था, जिसकी भर्ती के साथ ही उसकी मौत हो गई। दोनों की उम्र 80 साल से अधिक बताई जाती है। इसके साथ ही जिले में अब तक 20 मरीजों की मौत हो गई है। वहीं, शुक्रवार को मुजफ्फरपुर में 170 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले।

सूबे में रिकॉर्ड 2986 नए मरीज मिले, 50 हजार के पार

पटना|बिहार में शुक्रवार को रिकॉर्ड 2986 नए संक्रमित मरीजों की पहचान की गई। एक दिन के हिसाब से यह संख्या अबतक की सर्वाधिक है। पिछले चार दिनों से कम संक्रमित मिलने का सिलसिला टूट गया और मरीजों का आंकड़ा 50 हजार पार कर 50987 हो गया। इस बीच, राज्य में 13 लोगों ने कोरोना से दम तोड़ दिया।



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/2-positive-dead-including-retired-navy-officer-in-skmch-127572776.html

सौ से बढ़ाकर 150 बेड का होगा एसकेएमसीएच में कोविड अस्पताल

Posted: 31 Jul 2020 07:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में सौ बेड की जगह अब 150 बेड का कोविड अस्पताल होगा। इसके अलावा अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो एईएस मरीजों के लिए बनाए गए पीकू को भी कोविड अस्पताल बना दिया जाएगा। इधर, सदर अस्पताल में सौ बेड के बने एमसीएच वार्ड को भी कोविड मरीजों के लिए खोल दिए जाएंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले मे कोविड अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। सीएम ने डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह, एसकेएमसीएच अधीक्षक डाॅ. सुनील कुमार शाही व प्राचार्य विकास कुमार से इस बाबत जानकारी ली।

समीक्षा के दौरान उन्होंने जानकारी ली कि अभी कितने मरीज भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए कितने डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति की गई है। दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड की क्या स्थिति है। सीएम ने जिले में कोविड जांच का भी दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा- अगर किट या ट्रू नेट मशीन की जरूरत हो तो वह प्रधान सचिव को मांग भेज सकते हैं। जिले के हर एक व्यक्ति की कोरोना जांच करें, ताकि जो पॉजिटिव मरीज है, उनका इलाज कर उन्हें ठीक किया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार, आईजी गणेश कुमार, एसएसपी जयंतकांत भी उपस्थित थे।

डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के बारे में दी जानकारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के लिए सदर अस्पताल कंट्रोल रूम और एसकेएमसीएच में व्यवस्था की गई थी। डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अब तक किए गए कार्यों तथा आगे की तैयारियों की अद्यतन स्थिति की बिंदुवार जानकारी मुख्यमंत्री को दी।एसकेएमसीएच के साथ ग्लोकल अस्पताल एवं कोविड केयर सेंटर जिसे डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के रूप में आवश्यक संसाधनों के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसकी जानकारी सीएम को दी। पताही एयरपोर्ट पर डीआरडीओ द्वारा 500 बेड का कोविड हॉस्पिटल बनाए जाने की तैयारियों के बारे में भी बताया।

इधर, नर्सिंग होम संचालकों ने कोरोना मरीजों के इलाज से किया मना, अब प्रशासन 25% बेड उपलब्ध कराने काे देगा नोटिस

जिले के निजी नर्सिंग होम संचालक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं देंगे। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में निजी नर्सिंग होम संचालकों ने दाे टूक कहा कि कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए वे स्वेच्छा से अस्पताल नहीं दे सकते हैं। अगर सरकार आदेश जारी कर कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए नर्सिंग होम लेना चाहती है, तो ले सकती है। सदर अस्पताल के एसीएमओ डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार निजी नर्सिंग होम को जिला प्रशासन चिह्नित कर ले। सरकार के आदेश के अनुसार नर्सिंग होम में उपलब्ध बेड का 25% कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करना है। इसे लेकर बैठक हुई, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं रहा।

स्वेच्छा से इलाज की देनी थी सहमति

डीएम की अध्यक्षता में बीते सप्ताह निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू करने को लेकर नर्सिंग होम संचालकों और आईएमए के बीच बैठक हुई थी। इसमें डीएम ने संचालकों से स्वेच्छा से निजी नर्सिंग होम में कोरोना के इलाज की सहमति देने को कहा था। इस पर संचालकों और आईएमए ने एक सप्ताह का समय मांगा था। इसी के बाद शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी।

अब शनिवार व रविवार काे जिला पूरी तरह रहेगा लाॅक

राज्य में 16 अगस्त तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दाैरान जिले में शनिवार अाैर रविवार काे जरूरी सेवाओं काे छाेड़ सभी व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। मालवाहक वाहनों काे छाेड़ अन्य काेई सार्वजनिक वाहन नहीं चलेंगे। साेमवार से शुक्रवार तक बाजार ताे खुलेंगे, लेकिन शॉपिंग माॅल्स अब भी बंद रहेंगे। साथ ही हाेटल, रेस्टोरेंट्स अाैर ढाबों से सिर्फ बना-बनाया भाेजन हाेम डिलिवरी किया जा सकेगा। एेसी जगहों पर बैठ कर खाना अादि खाने-पराेसने की मनाही रहेगी।

डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार काे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक के बाद लॉकडाउन में सख्ती बरतने के आदेश दिया। शनिवार और रविवार को आकस्मिक सेवाओं में केवल स्वास्थ्य सेवाएं, दूध, सब्जी और किराना की दुकानें ही खुलेंगी। अन्य सभी प्रकार की दुकानें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और रिक्शा समेत अन्य प्रकार के व्यावसायिक वाहनों का परिचालन नहीं होगा। हालांकि, इस दौरान मालवाहक वाहनों का परिचालन जारी रहेगा।

डीएम के इस निर्णय के अनुसार अब जिले में सीधे साेमवार काे रक्षाबंधन के दिन सामान्य व्यापारिक गतिविधियां शुरू हाे सकेंगी। लॉकडाउन की इस अवधि में निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मियों की उपस्थिति का साथ काम करने की छूट दी गई है। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़ हर प्रकार की गतिविधि बंद रहेगी।

सिर्फ जरूरी सामान मिलेंगे, शैक्षणिक संस्थान व धार्मिक स्थल आम लाेगाें के लिए रहेंगे बंद

सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ पूजा, अरदास, इबादत और प्रार्थना स्थल पहले की ही तरह आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक आम लोगों के लिए आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। सभी प्रकार की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सोमवार से शुक्रवार तक ही खुलेंगे।



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Kovid Hospital will be increased from 100 to 150 beds in SKMCH


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/kovid-hospital-will-be-increased-from-100-to-150-beds-in-skmch-127572639.html

पं. प्रेम सागर पाण्डेय से जाने आज का राशिफल एवं दैनिक पंचांग 01 - अगस्त – 2020

Posted: 31 Jul 2020 05:25 PM PDT

श्री गणेशाय नम:

पं. प्रेम सागर पाण्डेय से जाने आज का राशिफल एवं दैनिक पंचांग
 01 - अगस्त – 2020

पंचांग

तिथि  त्रयोदशी  रात्रि  09:20:54

नक्षत्र  मूल  दिन  07:37:15

 करण :         कौलव  10:17:27

                   तैतिल  21:56:19

पक्ष              शुक्ल 

योग             वैधृति  09:22:37

 वार             शनिवार 

 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ     

चन्द्रोदय        17:34:59           चन्द्र राशि         धनु              चन्द्रास्त        28:04:59 

ऋतु  वर्षा 

हिन्दू मास एवं वर्ष     शक सम्वत  1942  शार्वरी कलि सम्वत  5122 

दिन काल  13:29:00   विक्रम सम्वत  2077   मास अमांत  श्रावण   मास पूर्णिमांत  श्रावण 

शुभ और अशुभ समय   

शुभ समय      अभिजित  12:00:12 - 12:54:08

अशुभ समय   दुष्टमुहूर्त :  05:42:40 - 06:36:36    06:36:36 - 07:30:32

                    कंटक  12:00:12 - 12:54:08    यमघण्ट  15:35:56 - 16:29:52

                   राहु काल  09:04:55 - 10:46:02          कुलिक  06:36:36 - 07:30:32

                    कालवेला या अर्द्धयाम  13:48:04 - 14:42:00 

                    यमगण्ड  14:08:18 - 15:49:25 गुलिक काल  05:42:40 - 07:23:47

दिशा शूल      दिशा शूल  पूर्व 

चन्द्रबल और ताराबल   

ताराबल        अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती 

चन्द्रबल        मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन 

विशेष      शनि प्रदोष व्रत, आखेट त्रयोदशी (उड़ीसा), लोकमान्यतिलक जयन्ती, 1 अगस्त (स्मृति दिवस)।

पं. प्रेम सागर पाण्डेय से जाने आज का राशिफल 1 अगस्त 2020, शनिवार

मेष (Aries) :      उगाही एवं प्रवास के लिए आज का दिन अच्छा है। व्यापार से सम्बंधित कार्यों के लिए लाभदायी दिवस है। घर में शुभ प्रसंग का आयोजन होगा। शेयर-सट्टे में आर्थिक लाभ होगा। पत्नी के आरोग्य को लेकर चिंता रहेगी। इस सप्ताह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें।        शुभ रंग  =   पींक          शुभ अंक  :  1

वृषभ (Taurus) :आज का दिन अनुकूलता और प्रतिकूलता से मिला-जुला रहेगा। व्यावसायिक रूप से आप नई विचारधारा अमल में लाएंगे। आलस्य और व्यग्रता बने रहेंगे, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति ध्यान दीजिएगा। प्रतिस्पर्द्धियों के साथ वाद-विवाद में न उतरिएगा। अग्नि, जल और अकस्मात से सावधानी बरतिएगा। इस सप्ताह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। शुभ रंग  =  क्रीम          शुभ अंक  :  2

मिथुन (Gemini) :कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। नकारात्मक विचारों को मन से दूर करने की सलाह देते हैं। खान-पान में ध्यान रखिएगा। वाहन चलाते समय अनिष्ट घटना न हो इसका ध्यान रखिएगा। आकस्मिक धन का खर्च होगा। किसी कारणवश बाहर जाने का प्रसंग उपस्थित होगा। मध्याह्न के बाद बौद्धिक अथवा साहित्यिक प्रवृत्तियों में रचे-पचे रहेंगे। मानसिक रूप से अस्वस्थ होंगे। संतानों के प्रश्नों से मानसिक व्यग्रता बढ़ेगी। धन का खर्च अधिक न हो इसका ध्यान रखिएगा।      शुभ रंग  =  हरा       शुभ रंग  :  3

कर्क (Cancer) :कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। स्वादिष्ट एवं उत्तम भोजन, सुंदर वस्त्रों और विपरीत लिंगीय व्यक्तियों का साथ पाकर आप प्रसन्न रहेंगे। आपका आर्थिक पहेलु सुदृढ़ बनेगा, ऐसे प्रबल योग हैं। विचारों में अनिर्णायक्ता रहेगी, मुसाफरी होगी। अचानक धन खर्च होगा। भागीदारों के साथ आंतरिक मतभेद बढ़ेगा। नौकरी-धंधे में परिस्थिति अनुकूल रहेगी। गुस्से को काबू में रखना। शुभ रंग  =  उजला शुभ अंक  :  4

सिंह (Leo) :कोरोना संक्रमित लोगों से इस सप्ताह दूर रहें। आप के व्यापार का विस्तारण होगा। व्यवसाय में धन सम्बंधित आयोजन भी कर सकेंगे। उचित कारणों पर धन का खर्च होगा। विदेश स्थित व्यवसायीजनों से लाभ होने की संभावना है। आपकी ग्रोथ होने से धन के मामलों में हाथ खुला रहेगा। प्रबल लाभ के भी योग हैं, फिर भी विचारों में अनिर्णायकता रहेगी, प्रवास होगा। धन का आकस्मिक खर्च होगा। भागीदारों के साथ आंतरिक मतभेद रहेंगे, फिर भी परिस्थिति अनुकूल रहेगी। क्रोध पर संयम रखिएगा, नए कार्य का प्रारंभ आज न करिएगा।          शुभ रंग  =  पीला      शुभ अंक  :  9

कन्या (Virgo) :आपका आज का दिन सुख-शांतिपूर्वक बना रहेगा। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहे। आभूषणों की खरीदी करेंगे और साथ-साथ कला के प्रति भी अभिरुचि रहेगी। व्यापार के लिए आज का दिन बहुत अच्छा दिन है। धन सम्बंधित विषयों में सरलता रहेगी। घर में शांति और आनंद बने रहेंगे। आरोग्य अच्छा रहेगा। व्यवसाय में वातावरण अच्छा रहेगा और सहकार्यकरों का सहकार मिलेगा।    शुभ रंग  =  श्याम     शुभ अंक  :  6

तुला (Libra) :आजका आपका दिन मध्यम फलदायी रहेगा। शारीरिक स्फूर्ति और मानसिक प्रसन्नता का अभाव रहेगा। परिवार में उग्र वातावरण रहेगा। व्यावहारिक जीवन में मानहानि का प्रसंग न बने इसका ध्यान रखिएगा। परंतु मध्याह्न के बाद आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार होगा। आप सृजनात्मक और कलात्मक प्रवृत्तियों में प्रवृत्त रहेंगे। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें।           शुभ रंग  =  नीला     शुभ अंक  :  7

वृश्चिक (Scorpio) :आज संपत्ति सम्बंधित कार्यों एवं गृहस्थ जीवन के प्रश्नों का निराकरण आ जाएगा। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। व्यवसायीजनों के लिए आज का दिन अनुकूल है। भाई-बंधुओं का व्यवहार सहकारपूर्ण रहेगा। प्रतिस्पर्द्धी परास्त होंगे। परंतु मध्याह्न के बाद शारीरिक और मानसिक प्रतिकूलताएं रहेंगी। व्यावहारिक जीवन में अपयश मिलने की संभावना है। कौटुंबिकजनों के साथ मन को दुखी करने वाला प्रसंग बनने की संभावना है। खान-पान की व्यवस्था समयानुसार नहीं रहेगी। नींद भी इच्छित समय पर नहीं आएगी। धन हानि का योग है।      शुभ रंग  =  लाल      शुभ अंक  :  8

धनु (Sagittarius) :इस सप्ताह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। निजी सम्बंधियों के साथ मनदुःख न हो इसका ध्यान रखने के लिए सलाह देते हैं। आरोग्य अच्छा रहेगा। आज का दिन आध्यात्मिक प्रवृत्तियों के लिए बहुत अच्छा है। आर्थिक लाभ भी होगा। विद्यार्थियों को विद्या अभ्यास में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। मध्याह्न के बाद की स्थिति अनुकूल है ऐसा आपको लगेगा। मन में जो दुविधा है उसका निराकरण मिल जाएगा। शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहेंगे। हितशत्रु सफल नहीं हो पाएंगे।       शुभ रंग  =  पीला     शुभ अंक  :  9

मकर (Capricorn) :आपकी धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों में आज वृद्धि हो जाएगी। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। व्यवसाय और व्यापार में भी वातावरण अनुकूल रहेगा। आपके सभी काम सरलता से पूर्ण होंगे। जीवन में भी आनंद की मात्रा बढ़ जाएगी। फिर भी मध्याह्न के बाद आपके विचारों में नकारात्मक भावों में वृद्धि होगी। इससे हताशा भी बढ़ सकती है। शेयर-सट्टे में पूंजी-निवेश करेंगे। शुभ रंग  =  हरा       शुभ अंक  :  3

कुंभ (Aquarius) :धार्मिक और सामाजिक कार्यों के पीछे धन का खर्च अधिक होगा। सम्बंधियों और मित्रों के साथ तूतू-मैंमैं होगी। आज कुछ अधिक ही आध्यात्मिकता आपके व्यवहार में देखने को मिलेगी। दुर्घटना एवं शल्य चिकित्सा से संभलिएगा। मध्याह्न के बाद आज का प्रत्येक कार्य सरलतापूर्वक संपन्न होता दिखेगा। दफ्तर में आपका प्रभाव बढ़ता हुआ दिखेगा। ऊपरी अधिकारियों की कृपादृष्टि आप पर रहेगी। मानसिक शांति आपके मन पर छाई रहेगी। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें।    शुभ रंग  =  श्याम शुभ अंक  :  6

मीन (Pisces) :व्यावसायिक तथा अन्य क्षेत्रों में आज का दिन आपके लिए लाभप्रद हैं। विवाहोत्सुकों के विवाह के प्रश्न का निराकरण आ जाएगा। प्रवास- पर्यटन होगा तथा मित्रों से उपहार आदि मिलेगा। मध्याह्न के बाद हर कार्य में कुछ सावधानी बरतनी आवश्यक है। व्यावसायिक कार्यो में सरकारी प्रभाव आप पर बढ सकता है। अधिक श्रम करने पर भी कम प्राप्ति होगी। आध्यात्मिकता की ओर झोंक अधिक रहेगा। इस माह कोरोना संक्रमित लोगों से दूर रहें। शुभ रंग  =  लाल   शुभ अंक  :  8

पं. प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र

नि:शुल्क परामर्श -  रविवार दूरभाष  9122608219 / 9835654844
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एसकेएमसीएच में रिटायर्ड नेवी के अफसर समेत 2 पॉजिटिव की मौत

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में शुक्रवार को एक रिटायर्ड नेवी अफसर समेत दो कोरोना पॉजिटिव की मौत हो गई। दोनों मरीजों को अस्पताल प्रबंधन द्वारा बैग में शव को लपेटकर सौंप दिया गया। एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि ब्रह्मपुरा का एक व्यक्ति 4 दिनों से वार्ड में भर्ती था। पुरानी बाजार के एक पॉजिटिव मरीज को सदर अस्पताल के एंबुलेंस से लाया गया था, जिसकी भर्ती के साथ ही उसकी मौत हो गई। दोनों की उम्र 80 साल से अधिक बताई जाती है। इसके साथ ही जिले में अब तक 20 मरीजों की मौत हो गई है। वहीं, शुक्रवार को मुजफ्फरपुर में 170 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले।

सूबे में रिकॉर्ड 2986 नए मरीज मिले, 50 हजार के पार

पटना|बिहार में शुक्रवार को रिकॉर्ड 2986 नए संक्रमित मरीजों की पहचान की गई। एक दिन के हिसाब से यह संख्या अबतक की सर्वाधिक है। पिछले चार दिनों से कम संक्रमित मिलने का सिलसिला टूट गया और मरीजों का आंकड़ा 50 हजार पार कर 50987 हो गया। इस बीच, राज्य में 13 लोगों ने कोरोना से दम तोड़ दिया।



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सौ से बढ़ाकर 150 बेड का होगा एसकेएमसीएच में कोविड अस्पताल

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

एसकेएमसीएच में सौ बेड की जगह अब 150 बेड का कोविड अस्पताल होगा। इसके अलावा अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है तो एईएस मरीजों के लिए बनाए गए पीकू को भी कोविड अस्पताल बना दिया जाएगा। इधर, सदर अस्पताल में सौ बेड के बने एमसीएच वार्ड को भी कोविड मरीजों के लिए खोल दिए जाएंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले मे कोविड अस्पताल में मरीजों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। सीएम ने डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह, एसकेएमसीएच अधीक्षक डाॅ. सुनील कुमार शाही व प्राचार्य विकास कुमार से इस बाबत जानकारी ली।

समीक्षा के दौरान उन्होंने जानकारी ली कि अभी कितने मरीज भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए कितने डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति की गई है। दवा, ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड की क्या स्थिति है। सीएम ने जिले में कोविड जांच का भी दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा- अगर किट या ट्रू नेट मशीन की जरूरत हो तो वह प्रधान सचिव को मांग भेज सकते हैं। जिले के हर एक व्यक्ति की कोरोना जांच करें, ताकि जो पॉजिटिव मरीज है, उनका इलाज कर उन्हें ठीक किया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार, आईजी गणेश कुमार, एसएसपी जयंतकांत भी उपस्थित थे।

डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के बारे में दी जानकारी

वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के लिए सदर अस्पताल कंट्रोल रूम और एसकेएमसीएच में व्यवस्था की गई थी। डीएम ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अब तक किए गए कार्यों तथा आगे की तैयारियों की अद्यतन स्थिति की बिंदुवार जानकारी मुख्यमंत्री को दी।एसकेएमसीएच के साथ ग्लोकल अस्पताल एवं कोविड केयर सेंटर जिसे डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के रूप में आवश्यक संसाधनों के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसकी जानकारी सीएम को दी। पताही एयरपोर्ट पर डीआरडीओ द्वारा 500 बेड का कोविड हॉस्पिटल बनाए जाने की तैयारियों के बारे में भी बताया।

इधर, नर्सिंग होम संचालकों ने कोरोना मरीजों के इलाज से किया मना, अब प्रशासन 25% बेड उपलब्ध कराने काे देगा नोटिस

जिले के निजी नर्सिंग होम संचालक कोरोना मरीजों के इलाज के लिए स्वेच्छा से अस्पताल नहीं देंगे। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में हुई बैठक में निजी नर्सिंग होम संचालकों ने दाे टूक कहा कि कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए वे स्वेच्छा से अस्पताल नहीं दे सकते हैं। अगर सरकार आदेश जारी कर कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए नर्सिंग होम लेना चाहती है, तो ले सकती है। सदर अस्पताल के एसीएमओ डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों ने कहा कि सरकार के आदेश के अनुसार निजी नर्सिंग होम को जिला प्रशासन चिह्नित कर ले। सरकार के आदेश के अनुसार नर्सिंग होम में उपलब्ध बेड का 25% कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करना है। इसे लेकर बैठक हुई, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं रहा।

स्वेच्छा से इलाज की देनी थी सहमति

डीएम की अध्यक्षता में बीते सप्ताह निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू करने को लेकर नर्सिंग होम संचालकों और आईएमए के बीच बैठक हुई थी। इसमें डीएम ने संचालकों से स्वेच्छा से निजी नर्सिंग होम में कोरोना के इलाज की सहमति देने को कहा था। इस पर संचालकों और आईएमए ने एक सप्ताह का समय मांगा था। इसी के बाद शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी।

अब शनिवार व रविवार काे जिला पूरी तरह रहेगा लाॅक

राज्य में 16 अगस्त तक बढ़ाए गए लॉकडाउन के दाैरान जिले में शनिवार अाैर रविवार काे जरूरी सेवाओं काे छाेड़ सभी व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। मालवाहक वाहनों काे छाेड़ अन्य काेई सार्वजनिक वाहन नहीं चलेंगे। साेमवार से शुक्रवार तक बाजार ताे खुलेंगे, लेकिन शॉपिंग माॅल्स अब भी बंद रहेंगे। साथ ही हाेटल, रेस्टोरेंट्स अाैर ढाबों से सिर्फ बना-बनाया भाेजन हाेम डिलिवरी किया जा सकेगा। एेसी जगहों पर बैठ कर खाना अादि खाने-पराेसने की मनाही रहेगी।

डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने शुक्रवार काे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक के बाद लॉकडाउन में सख्ती बरतने के आदेश दिया। शनिवार और रविवार को आकस्मिक सेवाओं में केवल स्वास्थ्य सेवाएं, दूध, सब्जी और किराना की दुकानें ही खुलेंगी। अन्य सभी प्रकार की दुकानें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और रिक्शा समेत अन्य प्रकार के व्यावसायिक वाहनों का परिचालन नहीं होगा। हालांकि, इस दौरान मालवाहक वाहनों का परिचालन जारी रहेगा।

डीएम के इस निर्णय के अनुसार अब जिले में सीधे साेमवार काे रक्षाबंधन के दिन सामान्य व्यापारिक गतिविधियां शुरू हाे सकेंगी। लॉकडाउन की इस अवधि में निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मियों की उपस्थिति का साथ काम करने की छूट दी गई है। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़ हर प्रकार की गतिविधि बंद रहेगी।

सिर्फ जरूरी सामान मिलेंगे, शैक्षणिक संस्थान व धार्मिक स्थल आम लाेगाें के लिए रहेंगे बंद

सभी शैक्षणिक संस्थानों के साथ पूजा, अरदास, इबादत और प्रार्थना स्थल पहले की ही तरह आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक आम लोगों के लिए आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। सभी प्रकार की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सोमवार से शुक्रवार तक ही खुलेंगे।



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Kovid Hospital will be increased from 100 to 150 beds in SKMCH


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/kovid-hospital-will-be-increased-from-100-to-150-beds-in-skmch-127572639.html

मुजफ्फरपुर में डूबने से तीन बच्चे समेत सात लोगों की मौत, मोतीपुर में मुआवजे काे सड़क जाम

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

जिले में डूबने से तीन बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई। देवरिया कोठी की धरफरी पंचायत अंतर्गत धूमनगर गांव निवासी ऑटाे चालक भोला महतो का 12 वर्षीय पुत्र अनिष कुमार की मौत शुक्रवार काे गंडक नदी के तेज धारा में बहने के कारण डूबने से हो गई। ग्रामीणों ने शव को बाहर निकाला। ग्रामीण रोहित कुमार साव ने बताया कि अनिष गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद मां रिन्कू देवी का हाथ पकड़कर ऊंचे स्थान पर आ रहा था, जहां हाथ छूटने के बाद मां के सामने ही अनिष तेज धार मे बह गया।

शव को ट्रैक्टर पर रखकर ग्रामीण थाने पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पूर्व कृषि मंत्री रामविचार राय ने सीओ से मृतक के परिजनों को मुअावजा देने की बात कही। साहेबगंज की जगदीशपुर पंचायत में मधुरापुर गांव में जमा बाया नदी के पानी में डूबने से शिवलाल महतो के 5 वर्षीय पुत्र अभिराज कुमार की मौत हो गई। बंदरा के गोबिंदपुर छपड़ा में बागमती नदी के बाढ़ के पानी में डूबने से मो. हैदर के पुत्र मो. आहिल की मौत हो गई। हथौड़ी की सहिलाबल्ली पंचायत के कोठिया गांव में बागमती नदी की उपधारा में डूबने से कोठीया निवासी पिंकू सहनी के 17 वर्षीय पुत्री पूजा कुमारी की मौत हो गई। मोतीपुर के कथैया थाना के सिरसिया जगदीश निवासी दिनेश पासवान के पुत्र राजू कुमार की डूबने से मौत के बाद मुआवजे के लिए लोगों ने मोतीपुर-देवरिया पथ को 2 घंटे जाम कर दिया। सीआई ने परिजनों को चार लाख रूपए का चेक सौंपा।

अहियापुर के नेउरी चौर में युवक डूबा एसकेएमसीएच आने से पहले दम तोड़ा

इसके बाद सड़क जाम हटा। विदित हो कि राजू के डूबने के बाद परिजन एसकेएमसीएच ले गए थे, जहां पर इमरजेंसी में तैनात डाॅक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस बाबत मृतक के भाई सोनू कुमार ने मेडिकल पुलिस को बयान दर्ज कराया है। इधर, अहियापुर के नेउरी चौर में शौच के लिए गया युवक बाढ़ के पानी में डूब गया। इमरजेंसी में तैनात डाॅक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। वह गांव के विंदेश्वर राम के 20 वर्षीय पुत्र होरिल राम था। पिता ने अहियापुर पुलिस को बयान दर्ज कराया है।

मुरौल के महमदपुर में शुक्रवार की शाम संबंधी के यहां आए सकरा के रेपुरा गांव के लालू राय का 35 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार की बूढी गंडक नदी में डूबकर मौत हो गई। मीनापुर की मुकसूदपुर पंचायत के शाहपुर गांव में शौच के लिए गई महिला की डूबने से माैत हाे गई। मृतका की पहचान सोनेलाल राय की 46 वर्षीय पत्नी हीरामुनी देवी के रूप में हुई । वह रेलवे लाइन के किनारे शौच करने गई थी।



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Seven people, including three children, died due to drowning in the district, road jam for compensation in Motipur


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/seven-people-including-three-children-died-due-to-drowning-in-the-district-road-jam-for-compensation-in-motipur-127572688.html

नर्साें ने खुद बनाया काढ़ा, कोरोना मरीज को किया ठीक

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

मेडिकल काॅलेज अस्पताल में लगातार काेराेना से हाेनेवाली माैताें के बीच शुक्रवार काे एक सुखद खबर भी आयी। पहली बार किसी एमडीआर टीबी से ग्रसित काेराेना मरीज किशाेरी
का इलाज हुआ और वह स्वस्थ्य भी हुई। नाथनगर की किशाेरी काे पहले से टीबी था, लेकिन उसकी काेराेना जांच भी पाॅजिटिव आयी। लेकिन उसका इलाज डाॅक्टराें ने काेराेना वार्ड में न कर एमडीआर वार्ड में ही शुरू किया। वहां की नर्साें ने भी जज्बा दिखाया। वार्ड की नर्सें उसके लिए अपने घर से तुलसी का काढ़ा और गर्म पानी लाती थी। इस मरीज का विशेष ख्याल रखती थी। यहां की नर्साें के लिए भी यह नया अनुभव था, इसलिए पीपीई किट पहनकर उसके पास इलाज करने जाती रही। शुक्रवार काे जब उसे छुट्टी दी गयी ताे नर्साें ने उसे तुलसी का पाैधा गिफ्ट में दिया।

ऑक्सीजन तक का किया इंतजाम
नाै जुलाई काे किशाेरी मायागंज अस्पताल पहुंची ताे वहां एमडीअार वार्ड में डाॅक्टराें ने इलाज शुरू किया। आशंका पर काेराेना जांच करायी गयी ताे 13 जुलाई काे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आयी। इसके बाद उसके इलाज की चुनाैती सामने थी, क्याेंकि काेराेना के साथ एमडीआर हाेने से काेविड वार्ड में भर्ती नहीं हाे सकती थी और एमडीआर में काेविड का इलाज मुश्किल था। इसके बाद तय हुआ कि एमडीआर वार्ड में ही उसका इलाज किया जाए। इलाज के दाैरान ऑक्सीजन प्वाइंट समेत हर जीवनरक्षक उपकरण काे तैयार रखा गया, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज काे दिया जा सके। 14 दिन तक लगातार काेराेना के साथ एमडीआर की भी दवा दी गयी। इसके बाद 31 जुलाई काे उसे छुट्टी दी गयी।

वाॅरियराें ने कहा, मिला है काफी सुकून
उसे छुट्टी देने के दाैरान काेराेना वाॅरियराें ने कहा कि एमडीआर के मरीज काे काेराेना से मुक्ति दिलाने से सुकून अनुभव हाे रहा है। अब दाे वर्ष तक दवा लेने से टीबी भी ठीक हाे जाएगी।



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एमडीआर वार्ड से मरीज को घर भेजते डॉक्टर व नर्स।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/nurses-made-the-decoction-themselves-corona-patient-was-cured-127572798.html

मायागंज अस्पताल के डॉक्टर और केनरा बैंक के मैनेजर को कोरोना

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

जिले में शुक्रवार काे भी काेराेना के 63 नए मरीज मिले। मेडिकल अस्पताल के सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्राेफेसर, पथ परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक, मायागंज अस्पताल की नर्स व एक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं। कहलगांव में केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक भी संक्रमित हुए हैं। सेंट्रल जेल परिसर के दाे लाेग संक्रमित हुए हैं। स्पेशल सेंट्रल जेल परिसर के छह साल का बच्चे व तीन साल की बच्ची काे भी काेराेना हाे गया है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने अपनी जांच गया में करायी थी। नवगछिया उपकारा के चार बंदी भी संक्रमित हुए हैं। इसके साथ ही जिले में मरीजाें का अांकड़ा 2671 पर पहुंच गया है। 21 मरीजाें काे छुट्टी भी मिली है। अब तक अस्पताल आए 957 मरीज घर जा चुके हैं।

लालूचक अंगारी में एक ही परिवार की दाे महिलाओं काे काेराेना

लालूचक अंगारी में एक ही परिवार की दाे बुजुर्ग महिलाओं में काेराेना हाे गया है। आदमपुर में छह मरीज मिले हैं। भीखनपुर, आनंदबाग कॉलोनी, माणिक सरकार, नया बाजार, मारूफचक, भीखनपुर, लालूचक, श्रीकृष्ण नगर कॉलोनी व सराय में भी मरीज मिले हैं।

नवगछिया में संक्रमित कर्मचारी के तीन परिजन भी पाॅजिटिव
नवगछिया प्रखंड में कोरोना के 11 नए मरीज मिले। अनुमंडल अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इनमें उपकारा के चार बंदी, शहीद टोला के तीन व्यक्ति, बीएमपी का जवान और पूर्व में संक्रमित अनुमंडल कार्यालय के कर्मचारी के तीन परिजन शामिल हैं। चारों बंदियों को उपकारा स्थित अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया है। कहलगांव प्रखंड में तीन लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. विवेकानंद दास ने बताया कि इनमें केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक, ओगरी गांव का एक व्यक्ति और एनटीपीसी का ठेका मजदूर शामिल है।

3 महिला पुलिसकर्मी समेत सुल्तानगंज में 7 संक्रमित
सुल्तानगंज में 7 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अस्पताल प्रभारी डाॅ. उषा कुमारी ने बताया कि संक्रमितों में सुल्तानगंज थाना की तीन महिला पुलिसकर्मी, आदर्श नगर मोहल्ले के दंपति, कोलगामा की महिला और दीनदयालपुर गांव का एक युवक शामिल है। शाहकुंड थाना का एक और चौकीदार पॉजिटिव पाया गया। खरीक में आठ मरीज मिले हैं। पीरपैंती में दो लोग संक्रमित हुए हैं।



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शहर में काेराेना के मरीज बढ़ने लगे ताे कई जगहाें पर लाेगाें ने एहितियात बरतनी शुरू कर दी है। शुक्रवार दाेपहर एक बजकर 45 मिनट पर खलीफाबाग चाैक से काेतवाली जाने वाली सड़क पर सन्नाटा रहा।


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राेज दाे बार मेडिकल बुलेटिन, जरूरत हुई ताे मायागंज के सभी बेड पर काेराेना का इलाज

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

भागलपुर में काेराेना जांच की संख्या बढ़ाई जाएगी। शनिवार से राेज दाे बार मेडिकल बुलेटिन जारी हाेगा, जिससे परिजन यह जान सकेंगे कि उनके मरीज की हालत कैसी है। अगर जरूरत हुई ताे मेडिकल काॅलेज अस्पताल के सभी 900 बेड पर काेराेना मरीजाें का इलाज हाेगा। यहां डाॅक्टराें की संख्या बढ़ेगी। दाे दिन में व्यवस्था में सुधार नजर आने लगेगा।
भागलपुर में कोरोना से होनेवाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ती संख्या के बाद प्रत्यय अमृत विशेष विमान से भागलपुर पहुंचे। एक बजे वह मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंचे और आईसीयू में काेराेना मरीज से जाकर बात भी की और उनका हालचाल भी पूछा। मरीजाें ने उनसे शिकायत की कि रात में डाॅक्टर नहीं रहते हैं। नर्स भी वार्ड में नहीं आती हैं। बाथरूम बहुत गंदा रहता है, लेकिन आपके आने की सूचना पर शुक्रवार की सुबह अच्छे से सफाई की गई। हालांकि इन शिकायताें के बाद भी जब प्रधान सचिव बाहर अाए ताे उन्हाेंने डाॅक्टराें काे क्लीन चिट दी। उनके कामकाज की तारीफ करते हुए कहा कि यहां की व्यवस्था कम मैनपावर में भी अच्छी है। दाे दिनाें में व्यवस्था में और बदलाव नजर आएगा।

395 बेड पर ऑक्सीजन की है व्यवस्था, 140 बेड का अब तक हुआ है उपयाेग
निरीक्षण के दाैरान प्रधान सचिव ने पूछा कि यहां कितने बेड पर ऑक्सीजन है ताे डीएम प्रणव कुमार ने बताया कि 395 बेड पर सेंटरलाइज्ड ऑक्सीजन है। जिनमें 140 बेड का अब तक उपयाेग हुआ है। इस पर सचिव ने कहा कि अस्पताल के सभी 900 बेड पर ऑक्सीजन लगाएं। अगर मरीजाें की संख्या बढ़ी ताे सर्जरी, हड्डी, गायनी, शिशु, आई व ईएनटी वार्ड में भी मरीजाें काे भर्ती कराएं। वहां मरीजाें का इलाज संबंधित वार्ड के डाॅक्टर करेंगे। जरूरत के अनुसार मेडिसिन के डाॅक्टर भी उन मरीजाें काे देखने जाएंगे। प्रधान सचिव ने कहा कि आईसीयू में सिर्फ 42 बेड रखने से काम नहीं चलेगा। इसकी संख्या बढ़ानी हाेगी। हर बेड पर एक वेंटिलेटर भी जरूरी है। उन्हाेंने कहा कि काेविड बेड के पास सीसीटीवी कैमरा भी लगवाएं। प्रधान सचिव ने पूछा कि काेराेना के मरीजाें की लगातार माैत क्याें हाे रही है ताे डाॅक्टराें ने कहा कि मरनेवाले काे कई और भी गंभीर बीमारियां थीं। निरीक्षण के दाैरान संयुक्त सचिव लाेकेश कुमार सिंह, एडिशनल सेक्रेटरी संजीव, डीएम प्रणव कुमार, सीएस डाॅ. विजय कुमार सिंह, प्रिंसिपल डाॅ. हेमंत कुमार सिन्हा, प्रभारी अधीक्षक डाॅ. कुमार गाैरव, नाेडल पदाधिकारी डाॅ. हेमशंकर शर्मा व अन्य माैजूद थे।

सजग हाेने की है जरूरत
प्रधान सचिव ने काेविड केयर सेंटर का भी जायजा लिया। यहां 40 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था का जायजा लिया। पत्रकाराें से बातचीत में उन्हाेंने कहा कि सब लाेग मिलकर बेहतर काम कर रहे हैं। भागलपुर के लाेगाें काे डरने की जरूरत नहीं है। सजग हाेने की आवश्यकता है। मास्क पहनिए और साेशल डिस्टेंसिंग का पालन कीजिए। वह इस सवाल काे टाल गए कि जिले में लगातार माैत क्याें हाे रही है। इस सवाल पर डीएम ने कहा कि यहां 10 जिलाें के मरीज आते हैं। कुछ बाहर के भी हैं। इसलिए सिर्फ भागलपुर में माैतें हाे रही हैं, ऐसी बात नहीं है।

आज से वार्ड के बाहर सटेगा बुलेटिन, मरीज के बारे में पूछ सकेंगे
आइसाेलेशन वार्ड के नाेडल प्रभारी डाॅ. हेमशंकर शर्मा ने बताया कि मेडिकल बुलेटिन में मरीजाें के ऑक्सीजन लेवल, पल्स रेट, बीपी एवं काेराेना के लक्षण में कितना सुधार हाेगा है, इसकी जानकारी दी जाएगी। हर दिन वार्ड के बाहर नाेटिस लगाया जाएगा। जिन परिजनाें काे कुछ पूछना हाेगा, वह साेशल डिस्टेंसिंग बनाकर जानकारी ले सकते हैं।

प्रधान सचिव ने ये निर्देश भी दिए

आईसीयू व जहां भी काेराेना पाॅजिटिव मरीज रहेंगे, सीसीटीवी कैमरा लगाएं

अस्पताल के सभी 900 बेड पर सेंट्रल पाइप लाइन से अाॅक्सीजन लगेगा

काेविड वार्ड में डाॅक्टर हमेशा न रहें पर नियमित राउंड हाेगी

दिन में दो बार राउंड की यूनिट इंचार्ज करेंगे ऑब्जर्वेशन व माॅनटरिं

ऑक्सीजन की जरूरत व हल्के लक्षण वाले मरीजों का काेविड सेंटर में हाेगा इलाज



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स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने काेविड सेंटर में निरीक्षण के दाैरान लाेगाें से हाथ जाेड़कर अपील की कि साेशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करें। साथ में हैं डीएम प्रणव कुमार व अन्य।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/medical-bulletin-for-the-first-time-needing-treatment-of-kareena-on-all-beds-of-mayaganj-127572737.html

सुशांत के फ्लैट पर पहुंची पुलिस; साेसाइटी मैनेजर, गार्ड, नाैकर का लिया बयान, कुछ सामान भी ले गई

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

जिस फ्लैट में 14 जून काे अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई थी, शुक्रवार काे पटना पुलिस वहां भी पहुंची। सुशांत के नाैकर नीरज, अपार्टमेंट के गार्ड, साेसाइटी मैनेजर और जमीन मालिक से पूछताछ की। सुशांत और रिया के रिलेशन के साथ ही यह जानकारी ली कि यहां काैन-काैन लाेग कब-कब आते थे। वहां रहने वाले और आसपास के लाेगाें से भी पूछताछ की। सूत्राें के अनुसार, सुशांत के फ्लेट से कुछ चीजें पुलिस अपने साथ ले गई हैं जिसकी जांच करेगी।
सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह द्वारा दर्ज कराए गए केस में सुशांत के दाेस्त महेश शेट्टी का भी नाम है। इस बात का जिक्र है कि सुशांत फिल्मी दुनिया काे छाेड़कर केरल के कुर्ग में ऑर्गेनिक खेती करने के लिए जमीन देखने के लिए महेश के साथ जाने वाले थे, पर रिया ने मना कर दिया। सूत्राें के अनुसार पटना पुलिस महेश को प्राइम विटनेस बना सकती है। महेश ने पूछताछ में पटना पुलिस काे बताया है कि सुशांत के नहीं चाहने के बावजूद रिया और उसकी मां संध्या चक्रवर्ती ने कई स्टाफ बदल दिए।

इसमें वो बॉडीगार्ड भी शामिल था जो सुशांत के साथ हमेशा रहता था। यूपी का रहने वाले इस बाॅडीगार्ड काे रिया ने 22 मार्च काे हटा दिया। सुशांत कही हालत यह हाे गई थी कि परिवार वालाें से बात करने के बाद रिया के खाैफ से वे माेबाइल काे रिसेट कर देते थे। ऐसा इसलिए कि रिया और उनकी मां काे सुशांत के परिवार वाले या किसी दाेस्त से बात करना गवारा नहीं था।
दर्ज किया डॉक्टर का बयान
बिहार पुलिस ने शुक्रवार को सुशांत सिंह राजपूत का इलाज करने वाले एक और डॉक्टर केसरी चावड़ा का बयान दर्ज किया है। सूत्राें की मानें ताे पुलिस काे इस डाॅक्टर ने बताया कि नवंबर 2019 से सुशांत सिंह का इलाज कर रहे थे। फरवरी के आखिरी सप्ताह से सुशांत दवा को रेगुलर तरीके से नहीं खा रहे थे। बाद में मेरे एडवाइज काे भी अनसुना करने लगे थे।
पटना के अफसरों को मीडिया से बचाने को धक्का देकर ले गई मुंबई पुलिस

पटना पुलिस के दाे अधिकारी मनाेरंजन भारती और दुर्गेश गहलाैत स्थानीय पुलिस की मदद लेने के लिए क्राइम ब्रांच पहुंचे थे। दाेनाें अधिकारी वहां से निकले ताे मीडियाकर्मियाें ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान मुंबई पुलिस भी वहां पहुंच गई। बिहार पुलिस के अधिकारियों को कथित तौर पर धक्का देकर मुंबई पुलिस वैन में ले गई।

इधर, टीम में माैजूद एक अधिकारी ने बताया कि जांच से मुंबई पुलिस नहीं राेक रही है। मीडिया से निकालकर वहां से ले गई। बाद में मुंबई पुलिस की ओर से यह कहा गया कि बिहार पुलिस की मदद करने वहां गए थे। हालांकि, जो वीडियो सामने आए हैं उसमें मुंबई पुलिस के लोग बिहार पुलिस के अधिकारियों की कमर में हाथ लगाकर अपने साथ ले जाते दिखे।

बिना सिक्योरिटी वाले इलाके में चुना था फ्लैट
बांद्रा के काफेरी हाइट्स के जिस फ्लैट में सुशांत थे, रिया ने उस में भूत-प्रेत की बात कहकर दूसरे फ्लैट में शिफ्ट कर दिया था। नया फ्लैट माउंटब्लैक इलाके में था। महेश की वजह से पटना पुलिस उस बिजनेसमैन तक पहुंच गई है जिससे रिया ने संपर्क कर फ्लैट दिलाने के लिए बातचीत की थी। सूत्रों की मानें तो रिया को फ्लैट दिखाने वाले ने पुलिस को बताया कि जाे पहले फ्लैट दिखाया गया था।

उसमें हाई सिक्योरिटी और स्वीमिंग पूल समेत कई सुविधाएं थीं। जब रिया से फ्लैट के बारे में बात की गई तब रिया ने कहा कि माउंटब्लैक में फ्लैट में मिल गया है। वह एक बाॅलीवुड स्टार की सिक्योरिटी के नजिरए से ठीक नहीं था। पुलिस जांच का दायर बढ़ाते हुए अब यह सुराग लगाने में जुटी है कि क्या साेची-समझी साजिश के तहत ताे नहीं किया गया।

एक दिन में होटल, क्लब, फ्लाइट पर 5.56 लाख खर्च, 2.58 करोड़ का टर्म डिपोजिट

मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बंड्रा स्थित कोटक बैंक की डिटेल चौंकाने वाली है। ट्रांजक्शन के डिटेल देख पुलिस भी चौंक गई। एक ही दिन में कई कई लाख के खर्चे देखे गए हैं। छानबीन में पता चल रहा है कि ये खर्च सुशांत ने अकाउंट से उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार वालों पर किया है। 29.11.2019 के ट्रांजक्शन के डिटेल देख पुलिस को भी आश्चर्य हुआ। पहले फ्लाइट के नाम पर 1.50 लाख रुपए का ट्रांस्फर है। फिर उसी दिन दिल्ली की फ्लाइट के नाम पर 91.91 हजार का ट्रांजक्शन है।

इसी दिन मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थित एक होटल में तीन लाख रुपए खर्च हुआ है। फिर इसी दिन लोनावाला में एक क्लब में 23 हजार का खर्च दिख रहा है। 29 नवंबर को ही इसी अकाउंट से 2.58 करोड़ का टर्म डिपोजिट किया गया है। अब पुलिस इस टर्म डिपोजिट का डिटेल पता कर रही है। इस संबंध में शुक्रवार को भी बैंक से जानकारी मांगी गई है। पुलिस इसके अलावा सुशांत के अन्य खातों की जानकारी जुटाई है, जिसकी पड़ताल चल रही है।

सुशांत के पूर्व रूम पार्टनर और स्टाफ से पूछताछ
सुशांत के रूम पार्टनर रहे सिद्धार्थ पटौदी से भी पुलिस पूछताछ की। सिद्धार्थ सुशांत के अच्छे मित्रों में गिने जाते हैं। सिद्धार्थ ने सुशांत से जुड़ी कई जानकारी पुलिस को दी। उन्होंने यह भी कहा कि सुशांत अपने रिलेशनशिप में खुश नहीं थे। सूत्रों की माने तो इसके अलावा सुशांत के स्टाफ दिनेश सावंत से भी पुलिस पूछताछ की है। दिनेश सावंत को रिया ने ही पुराने स्टाफ को हटाकर रखवाया था।

एसएसपी ने डीसीपी क्राइम को लिखी चिट्ठी

बिहार पुलिस को सहयोग करने के लिए पटना के एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने मुंबई के डीसीपी क्राइम को चिट्ठी लिखी है। ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं कि मुंबई पुलिस पटना पुलिस को तफ्तीश में सहयोग नहीं कर रही है। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने शुक्रवार की देर रात कहा कि जांच में सहयोग के लिए पटना के एसएसपी ने मुम्बई के डीसीपी क्राइम को चिट्ठी लिखी है।



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Police reached Sushant's flat; Statement taken by the security manager, the guard, the nacker, also took some goods


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/police-reached-sushants-flat-statement-taken-by-the-security-manager-the-guard-the-nacker-also-took-some-goods-127572989.html

राज्य में जून-जुलाई में सामान्य से 45 फीसदी अधिक हुई बारिश, अगस्त में सामान्य बरसात के आसार

Posted: 31 Jul 2020 05:22 PM PDT

जून-जुलाई में राज्य में मानसून पूरी तरह से मेहरबान रहा। 1 जून से 31 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 45 फीसदी तक अधिक बारिश हो चुकी है। 11 से 30 जून तक सामान्य से 82 फीसदी अधिक बारिश हुई थी। मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की मानें, तो इस बार मानसून लगातार राज्य के ऊपर मेहरबान रहा है।

1 जून से 31 जुलाई तक राज्य में 516.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 749.4 मिलीमीटर 1हुई। सबसे अच्छी बारिश दरभंगा में सामान्य से 121 फीसदी अधिक हुई। शेखपुरा जिले में अभी भी सामान्य से 32 फीसदी कम बारिश हुई है। पटना की स्थिति देखें, तो यहां अभी तक सामान्य से 34 फीसदी अधिक बारिश हुई है, जबकि जून में यहां सामान्य से 109 फीसदी अधिक बारिश हुई थी।
अगस्त में सामान्य बारिश के आसार
वरीय मौसम वैज्ञानिक एसके पटेल बताते हैं कि लगातार जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अगस्त में भी राज्य में सामान्य बारिश होगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मानसून की अक्षीय रेखा राज्य के गया और झारखंड के दुमका होते हुए मणिपुर तक जा रही है। इसके प्रभाव से राज्य के अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। राज्य के कुछ जगहों पर वज्रपात की भी आशंका है।



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The state received 45 percent more rainfall than normal in June-July, normal rain in August expected.


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/the-state-received-45-percent-more-rainfall-than-normal-in-june-july-normal-rain-in-august-expected-127572986.html

क्रांति जज्बात की

Posted: 31 Jul 2020 06:54 AM PDT

क्रांति जज्बात की

 लेखिका मंदाकिनी मिश्रा

आइए मैं आपको नारी जगत में ले चलूं , जहां आपको कुछ दर्द मिलेंगे , कुछ बिखरे हुए सपने , तो कुछ अनकही बातें|  हमारे समाज में स्त्री जाति की जो पीड़ा है, जो  दयनीय स्थिति है इसमें शायद हम सब अच्छी तरह से अवगत होंगे | चाहे वह 50 साल पहले की बात हो या अब कि हमारा आज आधुनिक समाज भी अपनी कुछ गंदी मानसिकता के कारण समाज के इस आधे हिस्से को प्रताड़ित कर ने से बाज नहीं आ रहें है | महिलाएँ कहने को आधुनिक हो चुकी है परन्तु आज भी उन्हें संस्कार और समाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर सताया जाता रहा है | क्या किसी को सताना या उसका शोषण करना कहां तक जायज  है?  क्या स्त्रियों को गुलामी के जीवन से मुक्ति देने वाला कोई कृष्ण इस युग में भी आ पायेगे? या उसके लिए कोई आवाज़ मात्र भी बन सके जो इस समाज के कानों तक महिलाओं के दर्द को पहुंचा सकें| आज भी  स्त्रियां अपनी मर्जी की शिक्षा पाने से वंचित है , शिक्षा तो दूर की बात है उन्हें तो चैन से जीने की आजादी नहीं दिया जाती है | स्त्रियों को उनके घर में भी उनके जज्बात की कद्र तो दूर उन्हें तीखे-तीखे शब्दों के वाणों से रोज घायल होना पड़ता है | तीखे तीखे बाणों से किसी को भेद  रहे हैं|  सिर्फ अपने क्षणिक सुख के लिए  लोग महिलाओ के जज्वातों से खेलते है पर इस व्यवहार से क्या किसी पर बीत रही है इसका तनिक भी एहसास नहीं होता है |  अगर उसके पास कोई सुनने वाला नहीं है तो वो पागल हो जाएगी  या आत्महत्या करने पर विवस हो जाएगी |  नारियो की व्यथा कहें,  नारी जीवन जो नारियो के बस में कुछ नहीं| स्त्रियों की जिन्दगी पिता, पति और पुत्र के इर्दगिर्द घुमती रहती है , परन्तु पिता के घर से जब पति के घर वो आती है और अगर ससुराल वाले उसके पास आकर उसका भूत भविष्य और वर्तमान को निगलने लगता है तो वो कभी सोचता है कि उसे इस कार्य को करने के लिए उन ससुराल वालों को किस अदालत ने यह जिम्मा दीया  है?  जब किसी स्त्री के  मां-बाप, भाई-बहन  को कोई बुरा भला बोलें तो सोचिये क्या गुजरती होगी उस स्त्री के उपर जिसने अपना सबकुछ छोड़ कर किसी के साथ जीवन विताने चली आती है और जिस घर को अपना समझ उसमे रहने आती है उस में रहनेवाले लोग अगर उस स्त्री के साथ आदमीयत का भाव नहीं कर उसे अपमानित करें तो क्या यह हमारे समाज के बदन पर लगे कोई भयंकर रोग नहीं तो और क्या है | यह सवाल अक्सर मुझे परेशान किया करती है न जाने कौन इसका जवाब हमें देगा?  ऐसा नहीं है कि केवल शरीर की मृत्यु ही मृत्यु कहलाती है , बल्कि जब  किसी की आशा और इच्छाओं को मार दिया जाता है तो यह भी एक प्रकार से मृत्यु ही कहा जा सकता है | जब किसी स्त्री की इक्षा और आकांक्षाओं का गला घोटा जाता है तो वो एक जिंदा लाश बन कर रह जाती है| कभी पिता के लिए अपनी परीक्षाओं को मारना , तो कभी पति कभी भाई कभी पुत्र इस तरह स्त्री अपना पूरा जीवन अपनी इच्छाओं को मारते हुए चली जाती है और अपने ही कंधों पर अपनी लाश को अकेले पूरा जीवन ढोते और मुस्कुराते हुए अपने जीवन को घुटते हुए अपने जीवन को समाप्त कर देती है | अगर किसी ने हिम्मत किया और समाज की रूढ़िवादिता का विरोध किया तो उसे कुलटा और न जाने क्या-क्या नाम देकर धमकाकर उसकी इक्षाओ को दबा  दिया जाता है | अगर कोई स्त्री इन सब से बच जाती है तो उसके लिए कही न कही कोई भगवान श्री कृष्ण खड़ें होते है  या कोई मोरोपंत होते हैं वह भाग्यशाली होती है ऐसा किसी-किसी के साथ ही हो पता है | क्योंकि सबके लिए मोरोपंत जीवित नहीं रहते समाज के इस कुव्यवस्था को मिटाने के लिए क्या फिर कोई कृष्णा आयेंगे?

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घूम रहे मुह बाये

Posted: 31 Jul 2020 05:14 AM PDT

प्रेमचंद जयंती है यह नवगीत अवश्य पढ़ें 

घूम रहे मुह बाये

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प्रेमचन्द के पात्र अभी तक 
घूम रहे मुह बाये

परिवर्तन का ढोल पीटते 
थके नहीं अभिनेता
कलयुग को भी बात-चीत में 
बता रहे हैं त्रेता
झूठ बोल करके ही सबका
मन कब से बहलाये

कहते तो हैं गाँव-गाँव में
प्रगति हुई है भारी
फिर क्यों 'होरी' का झोपड़िया में
रहना है जारी
रात-रात भर नींद न आये
पटवारी हड़काये

बोझ कर्ज का लदा पीठ पर
आँख दिखाये बनिया
मज़बूरी में मज़दूरी सँग
बेच रही तन 'धनिया'
आँसू पी-पीकर जीवन का
दर्द स्वयं सहलाये

कागज़ पर ही दौड़ रही है
खूब योजना उजला
'घूरू' के घर कई दिनों से 
चूल्हा नहीं जला
कैसे पाले पेट सभी का 
कहाँ जाय मर जाये

प्रेमचन्द के पात्र अभी तक 
घूम रहे मुह बाये     
         ००
~जयराम जय 
'पर्णिका'बी-11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,कल्याणपुर कानपुर -208017 (उ०प्र०)
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सरकारी कर्मचारीयों को मानसिक यातनाएं देना बंद करे सरकार:- नन्दकिशोर ओझा

Posted: 31 Jul 2020 04:45 AM PDT

सरकारी कर्मचारीयों को मानसिक यातनाएं देना बंद करे सरकार:- नन्दकिशोर ओझा

गोपालगंज से हमारे संवाददाता वरूण कुमार पाण्डेय वजरंगी की रिपोर्ट 
 
       उक्त आशय की  सूचना बिहार राज्य शिक्षक महासंघ 34540 पटना के प्रवक्ता सुरेश चन्द्र पाण्डेय त्यागी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों के विरुद्ध जारी तुगलकी फरमान वापस नही लिया तो कर्मचारी सरकार का चक्का जाम करने पर मजवूर हो जाएंगे जिसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व सरकार की मानी जाएगी ।      बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नन्दकिशोर ओझा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी सेवकों के 50 वर्ष पर सेवानिवृत्त करने का फैसला न्यायोचित नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग बिहार सरकार के ज्ञापांक-6832 दिनांक -23-07-2020 द्वारा निर्गत पत्र में सरकारी सेवकों जिनकी सेवानिवृत्त 60 वर्ष है। उनके 50 वर्ष उम्र होने पर कार्य क्षमता या आचार- विचार की समीक्षा के आधार पर सेवानिवृत्त करने का प्रावधान कर दिया गया है। जब॒कि बिहार सेवा संहिता के नियम 74(ख) (॥) में प्रावधान यह है कि कोई सरकारी सेवक इच्छा अनुसार प्रथम नियुक्ति के 21वर्ष और कुल सेवा के 25 वर्ष पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त ले सकते हैं। स्पष्ट तौर पर जब सरकारी सेवक चाहे तब, परन्तु नये आदेश के मुताबिक उच्च स्तरीय कमेटी कर्मी का कार्य क्षमता या  कार्य मुल्यांकन, चारित्रिक को केंद्रित किया गया है।
           सरकार के इस फैसले से सेवा कर्मी में नाराजगी व विश्वास घटेगा। जिसका सीधा असर उसके कार्यो पर पड़ेगा।यहाँ तक समीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर कर्मीयों का आर्थिक, मानसिक व शारीरिक शोषण होगा। 
             राज्य सरकार कर्मीयों की छँटनी नीति पर रोक लगाये, साथ ही अनुचित निर्णय को वापस ले।अन्यथा राज्य भर के सभी सरकारी सेवक चाहे किसी भी सेवा संवर्ग का हो एकजुट होकर राज्यव्यापी आंदोलन के लिये बाध्य होंगे! 
उन्होंने मुख्यमंत्री, मंत्री एवं विधायकों को भी 50वर्ष के बाद चुनाव नहीं लड़ने या अन्य किसी पद पर बने रहने के अधिकार से वंचित करने की मांग सरकार से किया है!
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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी सीबीआई जांच की मांग की, कहा-अब तक महाराष्ट्र में दर्ज नहीं हुई एफआईआर

Posted: 31 Jul 2020 04:22 AM PDT

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। पासवान ने कहा कि अब तक इस मामले में महाराष्ट्र में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस केस को लेकर दो राज्यों के बीच टकराव हो रहा है। चिराग ने सीएम उद्धव ठाकरे से इस बारे में बात की है और सीबीआई जांच की मांग भी की है। सभी नेता चाहते हैं कि इस मामले की सीबीआई जांच हो। महाराष्ट्र सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दे।

इससे पहले बुधवार को लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने उद्धव ठाकरे से बात की थी। ठाकरे ने कहा था कि सुशांत के सुसाइड मामले में मुंबई पुलिस बढ़िया काम कर रही है। जरूरत पड़ी तो सीबीआई जांच के भी आदेश दे सकते हैं। इस मामले में जितने भी नामों की चर्चा हो रही है, मुंबई पुलिस उन्हें बुलाकर पूछताछ कर रही है। दोषी पाए जाने पर किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। अभी तक तो मुंबई पुलिस का काम संतोषजनक है। जब लगेगा कि इस मामले की सीबीआई जांच जरूरी है तो इसका आदेश दे देंगे। हम इस मामले में बेहद गंभीर हैं।

14 जून को की थी सुशांत ने खुदकुशी

14 जून को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सुशांत के परिवार वालों ने 28 जुलाई को पटना के राजीव नगर थाने में रिया और उसके परिवार वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। चार अधिकारी जांच के लिए मुंबई गए हुए हैं। परिजनों का कहना है कि सुशांत से रोज बात होती थी। हाव-भाव से ऐसा नहीं लगता था कि वे डिप्रेशन में हैं। सुशांत की मौत के बाद से लगातार सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।



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रामविलास पासवान ने कहा कि सभी नेता चाहते हैं कि सुशांत के सुसाइड की सीबीआई जांच हो।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/sushant-singh-rajput-news-ram-vilas-paswan-demands-cbi-inquiry-in-actor-death-case-127570168.html

गायनी सोसाइटी की उपाध्यक्ष, मायागंज की 2 नर्स पॉजिटिव, रेल अस्पताल बंद

Posted: 31 Jul 2020 04:22 AM PDT

जिले में गुरुवार को एक साथ कोरोना के 96 नए संक्रमित मिले। इसमें भागलपुर ऑब्स गायनी साेसाइटी की उपाध्यक्ष महिला डॉक्टर, मायागंज अस्पताल की दाे नर्सें, एक ट्राॅलीमैन और एक फाेर्थ ग्रेड स्टाफ पॉजिटिव मिले। शहरी क्षेत्र में 19 और 8 ब्लॉक तक संक्रमण फैला। रेलवे हॉस्पिटल भागलपुर के एक कर्मचारी के संक्रमित होने के बाद चार दिन तक हॉस्पिटल बंद कर दिया है। मंडल रेल चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मालदा डिवीजन के आदेश पर हॉस्पिटल बंद किया गया है। इस दौरान हॉस्पिटल सैनिटाइज होगा। इस बीच नवगछिया कोर्ट की सुरक्षा में तैनात दो बीएमपी जवान सहित राजेन्द्र कॉलोनी के 1 और शहीद टोला की 1 वृद्धा पॉजिटिव मिली।

सुल्तानगंज थाने के दो स्टाफ और आदर्श नगर मोहल्ले के एक युवक सहित तीन लोग भी पॉजिटिव मिले हैं। अब जिले में मरीजों की संख्या 2608 हो गई है, जबकि गुरुवार को 23 लोगों ने कोरोना को हराया और उन्हें कोविड केयर व मायागंज अस्पताल से छुट्‌टी दे दी गई। इधर, टीएमबीयू कैंपस को कंटेनमेंट जोन से मुक्त कर दिया गया। 16 अफसरों-कर्मचारियों के संक्रमित होने के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस और लालबाग परिसर को कंटेनमेंट जोन बनाया गया था। तिलकामांझी की महिला डॉक्टर के पति के संक्रमित पति पहली रिपाेर्ट निगेटिव आने के बाद दूसरी रिपोर्ट पाॅजिटिव आई है।

नवगछिया कोर्ट की सुरक्षा में जुटे बीएमपी के दो जवान संक्रमित

इन्होंने कोरोना को हराया
बूढ़ानाथ से आकृति कश्यप, जैना, जाेगसर से शुभम कश्यप, जगदीशपुर थाना से अजय कुमार, अब्बास, लखन प्रसाद, मुकेश तांती, उमाकांत पासवान, अनिल कुमार सिंह, राजेश कुमार महताे, सत्यनारायण पासवान, बिंदेश्वरी यादव, ब्रहमदेव झा, शुभम कुमार, शंभु कुमार पासवान, अखिलेश कुमार वर्मा, नवगछिया से प्रकाश कुमार महताे, लक्षमण लाल, लाेकनाथ, सबाैर से गाैतम कुमार, पुलिस लाइन से पंकज कुमार।

सन्हौला में वार्ड-1 कंटेंनमेंट जोन
भुड़िया में 10-10 साल के दो बच्चे, दो-दो युवक पॉजिटिव हुए हैं। एसडीएम के निर्देश पर भुड़िया में मिले संक्रमित के घर जाने वाले रास्ते को सील किया है। बीडीओ मो. मुर्शीद अंसारी ने बताया, वार्ड-1 कंटेनमेंट जाेन बना है। यहां सभी संस्थान अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

गोपालपुर में 4 और कहलगांव में 10 संक्रमित
गोपालपुर के चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया, सैदपुर से 2, कमलाकुंड, गोढ़ियारी गांव से 1-1 मरीज मिले। कहलगांव में एनटीपीसी के 4, कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में 6 मरीज हैं। शाहकुंड में बेलथू की एक महिला, सजौर, डरहा की वृद्धा और एक युवक संक्रमित हुआ है।

खरीक में बरारी का बच्चा पॉजिटिव
पीरपैंती में 25 वर्षीय युवक और खरीक में भागलपुर बरारी का एक 8 साल बच्चा व 11 साल की किशोरी पॉजिटिव मिली। सबौर में 3 महिला व 4 पुरुष संक्रमित हुए। 3 बहादुर, 3 गोपालपुर और 1 सबौर के रहने वाले हैं।



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Vice Chairman of Gayani Society, 2 nurse positive of Mayaganj, Rail Hospital closed


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/vice-chairman-of-gayani-society-2-nurse-positive-of-mayaganj-rail-hospital-closed-127568714.html

प्रदर्शन

Posted: 31 Jul 2020 03:54 AM PDT

प्रदर्शन

लेखक कमलेश पुण्यार्क ' गुरूजी'

प्रदर्शन—सहज मानव स्वभाव है। शौर्य,सौन्दर्य,ऐश्वर्य,वैभव, विलास...यहाँ तक कि तथाकथित ज्ञान भी इस सूची से अछूता नहीं रह सका है। जबकि असली ज्ञान बहुत उच्च कोटि की स्थिति है— मानव-मन की। हाँ, ये बात अलग है कि व्यक्ति, समय और स्थान के अनुसार इनका वरीयता-क्रम थोड़ा आगे-पीछे सरकता रहता है। किन्तु मूल 'मनोग्रन्थि ' वहीं की वहीं बनी रहती है। महर्षि पतंजलि की शैली में कहना चाहूँ तो कह सकता हूँ कि वृत्तियाँ सहज ही नष्ट नहीं होती। इसके लिए सतत कठोर अभ्यास की आवश्यकता होती है। बड़े-बड़े योगाभ्यासियों को भी बड़ा ही जतन करना पड़ता है विविध वृत्तियों के निरोध के लिए। जन्म-जन्मान्तर की यात्रा करनी पड़ जाती है—वृत्तियों के समायोजन और विलयन हेतु।

रावण जैसे ज्ञानी पुरुष को भी शौर्य-प्रदर्शन की मनोव्याधि थी। इस व्याधि के कारण ही वह उच्चकुल जात होकर भी राक्षसों की श्रेणी में माना गया। ऐसे शूरवीर ज्ञानी रावण को छः माह तक अपनी काँख में दबाये रहने वाले मर्कटकुल जात सुग्रीवाग्रज वालि ने तो कभी शौर्य प्रदर्शन नहीं किया। हालांकि वो कामव्याधि पीड़ित होने के कारण लांछित हुआ। ये कामव्याधि भी बड़ी विचित्र है। इसके मनोरोगी भरे पड़े हैं हमारे पौराणिक गाथाओं में। भले ही अन्तः शत्रुओं में काम का प्रथम स्थान है और अन्तिम विन्दु पर है अहंकार। यानी अहंकार सर्वाधिक वलिष्ठ शत्रु है मानव का। क्रोध,लोभ,मोह,मद इन दोनों के बीच की चीजें हैं। किन्तु व्यावहारिक रुप में तो यही पाया जाता है कि प्रथम शत्रु से जूझते-जूझते ही जीवन चुक जाता है। सम्भवतः ये सौन्दर्य-बोध का दुष्परिणाम है।

क्योंकि शौर्य के पश्चात् सौन्दर्य की ही बारी आती है। सौन्दर्य हो और उसका मूल्यांकन-अवलोकन करने वाला कोई न हो, तो बड़े कष्ट की बात हो जाती है। गर्दभी को भी सुन्दरी कहकर प्रफुल्लित किया जा सकता है। अपनी ओर आकर्षित कराया जा सकता है, क्यों कि दूसरे के मुंह से सुन्दर कहलाना सहज दुर्बलता है मानव की, विशेष कर नारी की। नारी सौन्दर्य-प्रदर्शन करती है, पुरुष सौन्दर्य-भोग करता है। भले ही ये रसपान उसके विनाश का कारण क्यों न बन जाए।

सौन्दर्य-प्रदर्शन के अमोघ अस्त्र से ही देवराज इन्द्र ने अपने अनेक सम्भावित प्रतिद्वन्दियों को परास्त किया है। हालांकि इन्द्र को भयज व्याधि थी। विश्वामित्र जैसा गायत्री-साधक भी उन्हें अपना प्रतिद्वन्दी ही प्रतीत हुआ, फलतः मेनका को भेजना पड़ा। मेनका के सौन्दर्य-प्रदर्शन के परिणाम स्वरुप ही शकुन्तला का आविर्भाव हुआ। ये वही शकुन्तला है, जो हमारे भारतवर्ष के नामकरण की भूमिका बनी।

षडैश्वर्य तो महेश्वर या कहें त्रिलोकीनाथ के अतिरिक्त कहीं और होता ही है, हो भी नहीं सकता; किन्तु उसका ही तुच्छ रुप धन-वैभव के रुप में मानव को हस्तगस्त हो जाता है। शास्त्र-पुराण कहते हैं कि शौर्य, सौन्दर्य, ऐश्वर्य, वैभव, विलास...आदि की अल्पांश प्रतिच्छाया ही दृष्टिगत है सृष्टि में। और इस तुच्छ को ही सम्भाल नहीं पाता है दुर्बल मानव, फिर उस महाविराट को भला कैसे सम्भाल पायेगा !
यही कारण है कि ये सबके सब प्रदर्शन के वस्तु बन कर रहे गए हैं मानव के लिए। थोड़ा भी अर्जन हुआ कि असह्य हो जाता है। काबू से बाहर होने लगता है। प्रदर्शन किये बिना रह ही नहीं सकता मानव। और प्रदर्शन भी सामान्य नहीं, अति विद्रूप-वीभत्स रुप में।

नारियों के सौन्दर्य-प्रदर्शन की सहज उद्दाम लालसा ने ही आज लगभग अर्द्धनग्नता की स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। इस मूर्खतापूर्ण प्रदर्शन के लिए हम सिर्फ पश्चिम को ही जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते । क्यों कि हम उससे भी कहीं आगे निकलते जा रहे हैं इस होड़ में। फिल्मों ने इस पतन की सिर्फ पटकथा ही नहीं लिखी, बल्कि आग में घी ही नहीं, पेट्रोल का काम किया। स्थिति ये है कि आज की तथाकथित सभ्य नारी यहाँ तक कह जाती है कि मेरा शरीर है, मेरी जिन्दगी है, मेरी पसन्द है...। अंकुश लगाना या टिप्पणी करना विकृत पुरुष वर्चश्व का प्रदर्शन है...। और ऐसा आरोप लगाते हुए नारी ये भूल जाती है कि अवगुण्ठित सौन्दर्य ही सौन्दर्यवान होता है। आवरण में ही आकर्षण है। आवरण तिरोहित हुआ, आकर्षण को भी साथ लेता गया । आकर्षण तभी तक है, जब तक अवगुण्ठन है। भूमिका में ही पूरी पुस्तक लिख डालना किसी प्रबुद्ध लेखक की पहचान नहीं हो सकती । उसे तो मूर्ख कहना पड़ेगा। भूमिका को संक्षित और सारगर्भित ही होना चाहिए। उतना ही दिखलाओ कि देखने की ललक बनी रहे।

इस सौन्दर्य-प्रदर्शन ने भारतीय संस्कृति का भारी नुकसान किया है। बहुत सी नयी-नयी विकृतियाँ पनपी हैं समाज में। तथाकथित तकनीकि विकास ने भी भरपूर आहुतियाँ डाली हैं।

प्रदर्शन की कतार में धन-वैभव भला पीछे कैसे रह सकता है ! हालांकि बहुत सारे अनर्थों का जड़ धन ही है। वस्तुतः उलूकवाहिनी लक्ष्मी के आराधक हैं लोग। पद्मासना लक्ष्मी के बारे तो कुछ अता-पता भी नहीं है। प्रकाश की चमक में उल्लू की आँखें काम नहीं करती। धन-वैभव की चकाचौंध में मनुष्य की आँखें दुर्बल पड़ जाती हैं। और सच कहें तो धन मदकारी भी तो है। धन से वह सबकुछ खरीद लेना चाहता है—सुख, शान्ति यहाँ तक कि आनन्द भी। किन्तु मूर्ख मानव को पता ही नहीं कि सिर्फ सुख को ही खरीदा जा सकता है धन से, क्यों कि ये सिर्फ कायिकतल की बात है। इससे बहुत दूर— मानसिक तल की बात है— शान्ति और इससे भी बहुत विलक्षण— आत्मिक तल की बात है आनन्द और ये दोनों धन की लम्बी बाहों में समाने-सिमटने से बहुत-बहुत दूर हैं।

अब जरा ज्ञान की बात कर लें। ज्ञान बहुत दूर की कौड़ी है। बहुत दुर्लभ भी है। हम प्रायः जानकारी को ही ज्ञान कहने-समझने की मूर्खता करते रहते हैं। सुनी-सुनायी, पढ़ी-पढ़ाई बातों के स्मरण को ही ज्ञान मान बैठते हैं। यदि जानकारियों का संग्रह ही ज्ञान हो जाए, तो फिर गूगलबाबा सबसे बड़े ज्ञानी हैं आज के युग में। विडम्बना ये है कि क्षुद्र जानकारियों को ही ज्ञान मान-समझ कर, अपने ज्ञान को दूसरे पर थोपने की धृष्टता भी खूब करते हैं। मिथ्या ज्ञान का ये प्रदर्शन भी कम घातक नहीं है मानवता के लिए, बल्कि ये कहें कि सर्वाधिक घातक यही है।
हमने जाना नहीं, हमने अनुभव किया नहीं और चल दिए उपदेश देने, प्रवचन करने, ज्ञान बांटने । मजे की बात ये है कि अब तो बाकायदा अनेकानेक ज्ञानस्थलियाँ चल रही है। वस्तुतः ये ज्ञान की सजी-धजी दुकानें हैं, जहाँ ज्ञान की प्रदर्शनी लगी है। और हम उस चमक-दमक में औंधे मुंह धराशायी हैं। तथाकथित बाबाओं की दाढ़ी की सफेदी और लम्बाई देख कर हम आकर्षित हो जाते हैं। ललाट के पेन्ट-पोचारे को देख कर आकर्षित हो जाते हैं। मठ-आश्रम की भीड़ और सजावट को देख कर खिंचे चले आते हैं । और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अपनी विविध कामनाओं के चंगुल में फंसे हुए हैं। हमें धन चाहिए। हमें पद-प्रतिष्ठा चाहिए। हमें पुत्र चाहिए। हमें शत्रु की पराजय चाहिए। इस चाहिए की भीड़ में बुद्धि कुंठित हो गयी है।

यदि सच में ज्ञान चाहिए तो इसके लिए कहीं जाने की जरुरत ही नहीं है। जहाँ हैं, जिस अवस्था, जिस स्थिति में हैं, वहीं ठहर जाइये। और श्वांसों की डोर थामें, धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा कीजिये। ज्ञान आपके द्वार खटखटाने स्वयं आ जायेगा।

मुख्य बात ये है कि प्रदर्शन की प्रवृत्ति ने मानवता का बहुत बड़ा नुकसान किया है। अतः समझदार व्यक्ति को इससे हरसम्भव बचने का प्रयत्न करना चाहिए। अस्तु।।
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