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Friday, August 28, 2020

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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हाथरस : 37 शिक्षक/शिक्षिकाओं का चयन वेतनमान स्वीकृति आदेश जारी, देखें

Posted: 27 Aug 2020 07:37 PM PDT

हाथरस : 37 शिक्षक/शिक्षिकाओं का चयन वेतनमान स्वीकृति आदेश जारी, देखें



हाथरस : निलम्बित अध्यापकों द्वारा संबद्धीकरण आदेश का अनुपालन किये बिना जीवन निर्वाह भत्ता/अर्द्धवेतन लेने पर बीएसए ने लगाई रोक, आदेश देखें

Posted: 27 Aug 2020 07:32 PM PDT

हाथरस : निलम्बित अध्यापकों द्वारा संबद्धीकरण आदेश का अनुपालन किये बिना जीवन निर्वाह भत्ता/अर्द्धवेतन लेने पर बीएसए ने लगाई रोक, आदेश देखें

हाथरस : 16 अगस्त 2019 के समायोजन आदेश पर कार्यभार ग्रहण न करने वाले अध्यापकों का वेतन बाधित करे जाने सम्बन्धी आदेश जारी, देखें

Posted: 27 Aug 2020 07:28 PM PDT

हाथरस : 16 अगस्त 2019 के समायोजन आदेश पर कार्यभार ग्रहण न करने वाले अध्यापकों का वेतन बाधित करे जाने सम्बन्धी आदेश जारी, देखें

माध्यमिक शिक्षा : फिर मांगी गई ऑनलाइन स्थानांतरण की सूचना

Posted: 27 Aug 2020 07:10 PM PDT

माध्यमिक शिक्षा : फिर मांगी गई ऑनलाइन स्थानांतरण की सूचना



प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों के ऑनलाइन स्थानांतरण के लिए अब तक साफ्टवेयर नहीं तैयार हो सका है। इसके लिए 27 जनवरी 2020 को ही दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं। 


गुरुवार को फिर शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों तथा जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखा गया। इसमें निर्देशित किया गया कि शीघ्र ऑनलाइन स्थानांतरण संबंधी सूचना उपलब्ध कराई जाए। कई जिला विद्यालय निरीक्षकों ने उसे संज्ञान में नहीं लिया। पांचवी बार लिखे पत्र में कहा गया है कि 31 अगस्त तक सूचना उपलब्ध करा दी जाए।

उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होगा ‘स्टार्टअप’

Posted: 27 Aug 2020 06:08 PM PDT

उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होगा 'स्टार्टअप'।

स्टार्टअप के लिए स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति।

-उच्च शिक्षा निदेशालय ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों से मांगी 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020' के बिंदुओं पर अनुपालन आख्या।


प्रयागराज :  प्रदेश में उद्यमिता की संभावनाओं को देखते हुए राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में 'स्टार्टअप' को भी शामिल किया जाएगा। 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020' के तहत इसका क्रियान्वयन किया जाएगा। इस बारे में उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक डा. हिरेंद्र प्रताप सिंह की ओर से सभी राज्य विवि के कुलसचिवों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि इस संबंध में विवि और महाविद्यालय शासन एवं निदेशालय को यह अवगत कराएं कि इस पर क्या कर रहे हैं।




इस नीति के तहत विवि द्वारा प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति की सुदृढ़ता के लिए नोडल संस्था के परामर्श से नवचार और उद्यमिता पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएंगे। इन्हें संघटक महाविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। महाविद्यालय स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय/महाविद्यालय फैकल्टी विकास कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। जो छात्र उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रसर होना चाहते हैं, उन्हें स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति दी जाएगी। पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए आवश्यक अधिकतम अविधि में एक वर्ष के अंतराल की गणना नहीं की जाएगी। पाठ्यक्रम की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए 'अंतराल वर्ष' सुविधा को पाठ्यक्रम में पुन: शामिल होते समय दिया जा सकता है।


किसी स्टार्ट अप अवधारणा पर काम करने वाले छात्र उद्यमी को डिग्री की पूर्णता के लिए अपनी स्टार्टअप परियोजना को अपने अंतिम वर्ष की परियोजना के रूप में बदलने की अनुमति दी जाएगी। विद्यालय स्तर के छात्रों को अपना उद्यम प्रारंभ करने एवं प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में ई-प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी। विभाग द्वारा संपूर्ण प्रदेश में इंक्यूबेटर्स की स्थापना किए जाने की आवश्यकता होगी, जो कुल नीतिगत लक्ष्य का कम से कम 50 फीसदी होगा।


स्टार्टअप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा हैकाथॉन, बूट कैंपस, स्टार्टअप इवेंटस का आयोजन किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पत्र जारी करनी 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020' के बिंदुओं की अनुपालन आख्या मांगी है।

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फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों के 33 बिंदुओं पर आधारित होगी जांच

Posted: 27 Aug 2020 05:55 PM PDT



बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सभी परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई और वहां की मूलभूत सुविधाओं को लेकर अब नियमित जांच होगी। इसके लिए हर महीने जिला स्तरीय टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक कराए जाने की अनिवार्यता की गई है। इन स्कूलों में निरीक्षण के दौरान कुल 33 बिंदुओं पर फोकस होगा। जिसमें सबसे अहम कक्षा शिक्षण में तीन हस्त पुस्तिकाओं (आधार शिला, शिक्षण संग्रह व ध्यानाकर्षण) में वर्णित तकनीक को प्रयोग में लाया जा रहा है या नहीं। इसके लिए विभाग ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। आधार शिला से पढ़ाई न कराने पर सम्बंधित शिक्षक कार्यवाही के दायरे में लाया जाएगा।

बच्चों में भाषा और गणित की मूलभूत समझ विकसित करने वाली पुस्तिका आधार शिला से शिक्षा देना जरूरी है। अगर आधारशिला पुस्तिका से पढ़ाई न हुई तो शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान स्कूल यूनीफार्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा, स्वेटर, किताबें आदि को भी परखा जाएगा। पड़ताल की जाएगी कि एआरपी व एसआरपी से शिक्षक ने उपयुक्त सहयोग लिया या नहीं। 33 बिंदुओं की पड़ताल से पहले विद्यालय में निरीक्षण के लिए कुल 18 बिंदु तय थे। अब निरीक्षण के लिए 33 बिंदुओं का पालन किया जाएगा। निरीक्षण करने वाले टॉस्कफोर्स के सदस्य अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन प्रेरणा पोर्टल पर भरेंगे। पुस्तकालय, शुद्ध पानी, क्रियाशील शौचालय, शौचालय में पानी आपूर्ति, टाइल्स, दिव्यांग सुलभ शौचालय, हैंड वाशिंग यूनिट, मिड-डे मील के लिए रसोई, श्यामपट, रंग-रोगन आदि की स्थिति देखी जाएगी। विभाग द्वारा तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

पेपरलेस होंगे निरीक्षण :  
विभाग के द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया कि निरीक्षण के तय बिंदुओं को स्थलीय निरीक्षण के समय ऑनलाइन प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। वहीं शिक्षकों को भी अब स्कूल परिसर में निर्माण कार्य कराए जाने से पहले व बाद की फोटो एक वर्ष तक संरक्षित करके रखनी होगी। निरीक्षण में कागज का प्रयोग नहीं होने से हेर-फेर की गुंजाइश नहीं रहेगी। विभाग ने साफ किया कि निरीक्षण के दौरान यह प्रक्रिया अभी से लागू की जा रही है।

नई शिक्षा नीति से पूरा होगा 'स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया' का लक्ष्य

Posted: 27 Aug 2020 06:58 PM PDT

लखनऊ : 

नई शिक्षा नीति से पूरा होगा 'स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया' का लक्ष्य

लखनऊ। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक बृहस्पतिवार को सचिवालय में हुई। इस दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा-नई शिक्षा नीति से स्टडी

इन इंडिया, सटे इन इंडिया' का लक्ष्य पूरा होगा। इसके लिए टास्क फोर्स प्रारूप तैयार करेगा। जिससे देश-प्रदेश के बच्चे पढ़ने के लिए विदेश न जाएं और बिदेशों से बच्चें शिक्षा के लिए भारत आएं। शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के बच्चों को प्राथमिक स्कूल से ही रोजगारपरक शिक्षा दी जाएगी। जिससे जे आत्मनिर्भ बन सकें। इसके लिए प्रदेश में ऐसी व्यवस्था लागू की जाएगी कि शतप्रतिशत बच्चों का नामांकन हो और स्कूली शिक्षा में यूपी एक बार फिर अव्वल बने। 


उन्होंने नई शिक्षा नीति के क्रियानकवयन के लिए बेसिक,माध्यमिक, प्रावधिक. और व्यावसायिक शिक्षा विभाग को एक स्टीयरिंग कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। टास्क फोर्स की अगली बैठक 28 सितंबर को होगी। बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा एवं व्यवसायिक शिक्षा एस राधा चौहान, एकेटीयू के कुलपति डॉ. विनय पाठक, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अशोक गांगुली सहित टास्क फोर्स के अन्य सदस्य मौजूद थे।


प्रदेश में आंगनबाड़ियों में प्रशिक्षण देने के बाद प्री प्राइमरी कक्षाओं की देखरेख कैसे हो। ऐसे शैक्षिक संस्थानों के समूह हो जहां लड़की कक्षा एक में प्रवेश ले और बारहवीं कर निकले। ये और ऐसे ही कुछ सुझाव नई शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के लिए बनी टॉस्क फोर्स के सामने रखे गए। उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन पर विचार हुआ। 



उपमुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के लिए निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभागों की स्टीयरिंग कमेटी बना लें। कमेटी की अगली बैठक 28 सितम्बर को होगी। टास्क फोर्स सभी पहलुओं पर निर्णय लेगी और अंतर विभागीय समन्वय स्थापित करेगी। डा. शर्मा ने कहा कि इस नीति के पूरी तरह से लागू होने के बाद लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति का प्रभाव खत्म हो जाएगा। नई नीति के तहत भारत के विश्वविद्यालय विदेशों में अपने कैंपस खोल सकते हैं और विदेशी विश्वविद्यालयों के कैम्पस भारत में खुल सकते हैं। इस नीति के तहत सभी श्रेणी और वर्गों के छात्र-छात्राओं को समान शिक्षा मिलेगी। 34 वर्षों के बाद ऐसी नीति आई है, जिसमें बुनियादी से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर पर ध्यान दिया गया है। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति का व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। 


डॉ शर्मा ने कहा कि रोजगारपरक शिक्षा प्रारंभिक कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को दी जाए। शिक्षा के दौरान ही रोजगार की संभावनाओं को हासिल किया जा सके। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा सतीश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि ऐसी शिक्षा हो जिससे छात्रों को परीक्षा का तनाव नहीं रहे। अपनी रुचि के अनुसार छात्र विषय का चयन कर सके। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में नीति की कई बातों को लागू किया जा चुका है। प्री प्राइमरी कक्षाएं, लर्निंग आउटकम, त्रैमासिक परीक्षा, ग्रेडेड लर्निंग आदि कार्यक्रम लागू किए जा चुके हैं। वर्ष 2022 तक प्राइमरी स्कूलों के सभी छात्रों द्वारा बुनियादी साक्षरता और अंकगणितीय कौशल प्राप्त किए जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बैठक में कमेटी के सदस्य डॉ गिरीश चंद्र त्रिपाठी, रेणुका कुमार, एस.राधा. चौहान, मोनिका एस. गर्ग, आराधना शुक्ला, डा. विनय पाठक, अशोक गांगुली, वाचस्पति मिश्र, डा. निशा पांडे, डा. अब्बास नैयर और विजय किरण आनंद उपस्थित थे। जूम एप के माध्यम से कृष्ण मोहन त्रिपाठी व वी.पी. खंडेलवाल, अरविंद मोहन भी बैठक में शामिल हुए।

ऑनलाइन पढ़ाई : गरीब मजदूर के बेटे ने कॉपी पर लिखी बेबसी, पापा मोबाइल लेना चाहते हैं, पर पैसे नहीं

Posted: 27 Aug 2020 05:43 PM PDT

ऑनलाइन पढ़ाई : गरीब मजदूर के बेटे ने कॉपी पर लिखी बेबसी, पापा मोबाइल लेना चाहते हैं, पर पैसे नहीं।

प्राथमिक विद्यालय बड़ी नैनी में कक्षा तीन के छात्र की कॉपी पर लिखी ये लाइनें सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा की हकीकत उजागर करने के लिए पर्याप्त हैं। एक तरफ अफसर शिक्षकों पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर बच्चों को पढ़ाने के आदेश पर आदेश दिए जा रहे हैं, दूसरी तरफ हकीकत यह है कि अधिकांश बच्चों के पास स्मार्टफोन ही नहीं है। ऐसे में एक आठ साल के इस बच्चे रोहन ने अपनी कॉपी पर जो कुछ लिखा, उसे पढ़कर किसी का भी दिल रो पड़ेगा।

बच्चे ने अपनी जो बेबसी बयां की है, उसके अंश कुछ यूं हैं- मेरी अध्यापिका ऑनलाइन से वर्क भेजती हैं लेकिन मेरा जियो वाले मोबाइल का बटन खराब है। इसी वजह से मैं और मेरी दीदी वर्क नहीं कर पाते। मेरे पापा मोबाइल खरीदना चाहते हैं लेकिन पापा के पास पैसे नहीं है। इसी वजह से मेरे पापा रोज लेबर के काम में जाते हैं लेकिन कभी-कभी कभी मेरे पापा को काम नहीं मिलता तो दूसरे से उधार लेकर शाम का खाना बनता है और मेरे पापा को काम मिलता है तो किश्त में उधार दे देते हैं। 

दर्द और बेबसी
- आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे ने स्कूल की कॉपी पर लिखी अपनी बेबसी
- वायरल हो रहा दो पन्ने का लेटर, प्राथमिक विद्यालय बड़ी नैनी का है छात्र
- पुराने फोन का बटन खराब, छात्र और उसकी बहन नहीं कर पाते पढ़ाई
- स्वाभिमानी पिता शिक्षिका से मदद लेने से कई बार कर चुका है इनकार


स्कूल की शिक्षिका मनप्रीत सोढ़ी ने बताया कि बच्चा और उसकी बहन पढ़ने में बहुत तेज हैं। कई बार उनके अभिभावकों को आर्थिक मदद देने की भी कोशिश की लेकिन स्वाभिमानी पिता ने मदद लेने से इनकार कर दिया। कई बार चुपके से मनप्रीत सोढ़ी ने बच्चों के फोन को रिचार्ज कराया ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।


सीआईएससीई ने कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर नहीं दी कोई जानकारी, गत वर्ष ही लागू की थी योजना, एक साल बाद ही कंपार्टमेंट परीक्षा पर लग रहा है ग्रहण

Posted: 27 Aug 2020 05:03 PM PDT

एक साल बाद ही कंपार्टमेंट परीक्षा पर लग रहा है ग्रहण, सीआईएससीई ने कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर नहीं दी कोई जानकारी, गत वर्ष ही लागू की थी योजना।


काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीइ) के हाईस्कूल और इंटर कंपार्टमेंट परीक्षा का अभी कुछ अता पता नहीं है। परिषद ने इस संबंध में स्कूलों को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। एक तरफ सीबीएसई और यूपी बोर्ड में कंपार्टमेंट के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है, वहीं सीआईएससीई ने किसी प्रकार की सूचना जारी नहीं की है। संबद्ध स्कूलों की माने तो इस बार परिषद के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा कराना संभव नहीं लग रहा है।




परिषद ने गत वर्ष से अपने छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा की सुविधा लागू की थी। योजना के तहत 10वीं और 12वीं में फेल दो विषयों में छात्र परीक्षा दे सकते हैं। गत वर्ष जुलाई में परीक्षा आयोजित कर अगस्त के प्रथम सप्ताह में परिणाम भी जारी कर दिया गया था, लेकिन इस बार कंपार्टमेंट परीक्षा के संबंध में कोई सूचना जारी नहीं की है। जबकि 10 जुलाई को हाईस्कूल और इंटर बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है। डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है परिषद ने अभी तक कंपार्टमेंट परीक्षा की बाबत दिशा निर्देश नहीं दिए हैं। स्कूलों की माने तो परिषद के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा कराना आसान नहीं लग रहा है। अभी आवेदन प्रक्रिया तक शुरू नहीं हुई। पहले आवेदन होगा फिर एडमिट कार्ड जारी कर परीक्षा कराई जाएगी। फिर परिणाम जारी किया जाएगा। ऐसे में नवंबर माह तक प्रक्रिया समाप्त होगी जो काफी लेट हो जाएगी। इन्हीं सब स्थितियों को देखकर स्कूल प्रशासन को इस बार कंपार्टमेंट की उम्मीद नहीं लग रही है।


कंपार्टमेंट परीक्षा ना कराने का यह भी हो सकता है कारण
स्कूल प्रशासन कंपार्टमेंट ना होने का एक कारण और मान रहा है। परिषद के नियम के अनुसार कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए पांच विषयों में परीक्षा देना अनिवार्य है जबकि इस बार कोरोना वायरस की वजह से परीक्षाएं बीच में स्थगित कर दी गई थी। बहुत कम छात्र है जो सभी पांच विषयों की परीक्षा दे पाए थे। ऐसे में जो छात्र पांच विषयों की परीक्षा नहीं दे पाए होंगे कंपार्टमेंट परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे और ऐसे छात्रों की संख्या ज्यादा होगी। इसलिए माना जा रहा है कि इस नियम के चलते भी परिषद कंपार्टमेंट परीक्षा नहीं करा पाएगा। सेंट जोसेफ कॉलेज के निदेशक अनिल अग्रवाल ने बताया कि अभी तक परिषद की तरफ से कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर कोई सूचना जारी नहीं की गई है।

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महराजगंज : एस०आर०जी० और ए०आर०पी० के कार्यों का आबंटन करते हुए उन्हें खाद्यान्न वितरण, बी०एल०ओ० ड्यूटी जैसे कार्यों में नियोजित न करने के सम्बन्ध में बीएसए का निर्देश जारी

Posted: 27 Aug 2020 11:04 AM PDT

महराजगंज : एस०आर०जी० और ए०आर०पी० के कार्यों का आबंटन करते हुए उन्हें खाद्यान्न वितरण, बी०एल०ओ० ड्यूटी जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में नियोजित न करने के सम्बन्ध में बीएसए का निर्देश जारी।

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