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Tuesday, August 4, 2020

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती

Posted: 03 Aug 2020 09:07 PM PDT

फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती


फतेहपुर : एक अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए तमाम शिक्षकों की सेवा का करीब एक दशक बीत रहा है लेकिन फंड के नाम पर उनके खाते में टका नहीं है। एक वक्त अपने फंड सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जानी जाने वाली सरकारी नौकरी परिषदीय शिक्षकों के लिए सिर्फ वेतन मिलने वाली नौकरी ही साबित हो रही है। परिषदीय स्कूलों में अप्रैल 2005 के बाद सेवा में आए शिक्षकों के वेतन से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती करने का फैसला जिले में अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।

सैकड़ों बेसिक शिक्षकों की कई साल की नौकरी के बाद भी एक पाई फंड नहीं जमा हो सका है। आईपीएस के समाप्त होने के बाद शासन ने एनपीएस की व्यवस्था दी तो वह भी कई सालों तक व्यवस्था की सरकार रही। पिछले वर्ष एओ ने एनपीएस कटौती के लिए रूचि दिखाई लेकिन दायरे में आने वाले शिक्षकों के वेतन से एनपीएस के अंश की कटौती नहीं हो सकी। विभाग का तर्क था कि अब भी सैकड़ों शिक्षकों को प्रान आवंटित नहीं किया जा सका जिस कारण समस्या आ रही है लेकिन विभाग के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि जिन शिक्षकों को प्रान आवंटित किया जा चुका है उनके वेतन से कटौती क्यों नहीं की जा रही है। इस समय काफी कम संख्या में शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती की जा रही है। जिसके चलते शिक्षकों के पास एक पैसे का फंड नहीं है।





दुश्वारी : विभाग मनमानी से कर रहा है एनपीएस कटौती, शासन व वित्त नियंत्रक दे चुके है कटौती के निर्देश।

अब तक कटौती नही : जिले में ऐसे तमाम शिक्षक हैं जिन्हें प्रान आवंटन किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद कटौती नहीं की जा रही है। पिछले वर्ष विभाग ने ब्लॉकों से प्रान आवंटन व गैर प्रान आवंटित शिक्षकों की सूची मंगाई थी। कहा गया था कि जिनके प्रान आवंटन हो चुके हैं उनकी कटौती शुरू होगी एवं जिन्हें आवंटन नहीं हुआ है उन्हें फार्म भराकर आवंटन कराया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन से अब तक कटौती नहीं हो सकी है।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

HRD मंत्री ने कक्षा छठी से 8वीं तक का नया NCERT वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर किया जारी, करें डाउनलोड

Posted: 03 Aug 2020 04:58 PM PDT

HRD मंत्री ने कक्षा छठी से 8वीं तक का नया NCERT वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर किया जारी
 

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अगले 8 सप्ताह के लिए उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की कक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया है। इससे पहले यह चार सप्ताह का जारी किया गया था। एचआरडी मंत्री निशंक ने सोमवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'कक्षा छठी से आठवीं तक का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्कूल प्रिंसिपल और अभिभावकों को कोरोना काल में ऑनलाइन टीचिंग के लिए और सशक्त बनाना है।'


केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'इस कैलेंडर में शिक्षकों के लिए तकनीक और सोशल मीडिया टूल्स के उपयोग के विस्तृत दिशानिर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वो बच्चों को बेहतर तरीके से ऑनलाइन शिक्षा दे सकें।'

● कैलेंडर में तनाव और चिंता को दूर करने के तरीके भी सुझाये गए हैं। 

● वैकल्पिक कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर अध्यायवार उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है। 

जिन बच्चों के पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं, उनको शिक्षक मोबाइल पर एसएमएस भेज कर या फोन कर के शिक्षा प्रदान कराने के दिशानिर्देश भी इस कैलेंडर में दिए गए हैं।


कैलेंडर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।


Alternative Academic Calendar
In this period of Covid-19, which is declared as a global pandemic, our teachers, parents, and students have to remain at homes to prevent its spread in the community. In this situation, it is our responsibility to provide them with multiple alternative ways of learning at home through interesting activities. It is necessary because in the present environment of stress we have to not only keep our children busy but also to maintain continuity of their learning in their new classes. In this context, NCERT has developed an Alternative Academic Calendar for all the stages of school education.


यूपी बोर्ड के 700 कालेजों को मान्यता का इंतजार, कोरोना के चलते गड़बड़ाया टाइम टेबल

Posted: 03 Aug 2020 04:31 PM PDT

यूपी बोर्ड के 700 कालेजों को मान्यता का इंतजार, कोरोना के चलते गड़बड़ाया टाइम टेबल

 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड इन दिनों हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म भरवा रहा है और कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण करा रहा है। नए शैक्षिक सत्र में मान्यता पाने के लिए माध्यमिक कालेजों ने आवेदन किया है लेकिन, उन्हें अब तक मान्यता निर्गत नहीं हुई है। प्रदेशभर के करीब 700 से अधिक कालेजों को हाईस्कूल, इंटर की 2020-21 शैक्षिक सत्र की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, उसकी पत्रवली तैयार करके शासन को भेजी जा चुकी है।


यूपी बोर्ड हर साल शैक्षिक सत्र शुरू करने से पहले आवेदक कालेजों को कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक व संकाय आदि की मान्यता निर्गत करता रहा है। पहले ऑफलाइन आवेदन लिए जाते थे लेकिन, इधर ऑनलाइन आवेदन हो रहे हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस बार भी बोर्ड ने क्षेत्रीय कार्यालयों के परिक्षेत्र में आने वाले कालेजों की फाइलों पर बैठक की और पत्रवली फरवरी में ही शासन को स्वीकृति के लिए भेजी। तब से अब तक मान्यता निर्गत होने की राह देखी जा रही है। 


कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की वजह से मान्यता का टाइम टेबिल गड़बड़ा गया है। बोर्ड ने मान्यता निर्गत किए बिना ही छह जुलाई को प्रवेश शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म भी भरवाए जा रहे हैं। आवेदन करने वाले कालेज प्रबंधक परेशान हैं, जो अभिभावक बच्चों का दाखिला करा चुके हैं उन्हें भी रास्ता नहीं सूझ रहा है। उधर, बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि इस मामले में शासन में मंथन चल रहा है, जल्द ही मान्यता निर्गत की जाएगी।

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

Posted: 03 Aug 2020 04:15 PM PDT

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

 
आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


केस वन
माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


केस टू
दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

Posted: 03 Aug 2020 04:15 PM PDT

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

 
आगरा : राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन करने की मंगलवार को अंतिम तिथि है, लिहाजा आवेदन के इच्छुक शिक्षक चार अगस्त को रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि इसकी अंतिम तिथि पहले 30 जुलाई तय की गई थी, लेकिन आवेदन बेहद कम रहने पर शासन ने इसे बढ़ा दिया था।


डीआइओएस रवींद्र सिंह ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकों के पास अब भी आखिरी मौका है, वह मंगलवार रात 12 बजे तक सभी प्रपत्रों और औपचारिकताएं पूरी कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल की बात की जाए, तो जिले में अब तक राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 30 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 18 शिक्षकों ने आवेदन किए हैं।

यह होगी प्रक्रिया

अंतिम तिथि पूरी होने के बाद पांच अगस्त को जिला समिति आवेदनों का परीक्षण व स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और मंडलीय समिति को प्रस्ताव भेजेगी। मंडलीय समिति अध्यापक पुरस्कार के लिए 14 से 20 अगस्त के बीच, जबकि मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए पांच से 17 अगस्त के बीच पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और राज्य चयन समिति के सदस्य सचिव व शिक्षा निदेशक को प्रस्ताव उपलब्ध कराएगी। इसके बाद शासन स्तर से उनकी घोषणा की जाएगी।

यूपी बोर्ड : जानिए क्यों नहीं घोषित हो रही कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख?

Posted: 03 Aug 2020 04:07 PM PDT

यूपी बोर्ड : जानिए क्यों नहीं घोषित हो रही कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख?

 
यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा का परिणाम घोषित हुए एक महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख घोषित नहीं हो सकी है। बोर्ड से जुड़े लोगों का मानना है कि कोरोना के कारण तारीख तय नहीं हो पा रही है। इसका प्रस्ताव तो सवा महीने पहले ही शासन को भेज दिया गया था लेकिन आवेदन इसलिए नहीं लिए जा रहे क्योंकि उसके बाद परीक्षा कराना मुश्किल हो जाएगा।


वैसे भी ऐसे समय में जब 9 व 16 अगस्त को प्रस्तावित क्रमश: बीएड प्रवेश परीक्षा व खंड शिक्षाधिकारी परीक्षा का विरोध हो रहा है और लोक सेवा आयोग को पीसीएस जैसी परीक्षा की तिथि टालनी पड़ रही है तो ऐसे में बड़ा सवाल है कि हाईस्कूल और इंटर के बच्चों की परीक्षा कैसे होगी। यही कारण है कि इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट के लिए आवेदन शुरू नहीं हो पा रहे हैं।


इस साल से एक विषय में फेल इंटर के छात्र-छात्राओं को पहली बार कम्पार्टमेंट परीक्षा की सुविधा दी जा रही है। 27 जून को घोषित परिणाम में 12वीं में 35017 छात्र-छात्राएं एक विषय में असफल हैं। हाईस्कूल में एक विषय में फेल अभ्यर्थियों को इम्प्रूवमेंट और दो विषय में फेल छात्र-छात्राओं को कम्पार्टमेंट की सुविधा दी जाती है। इस साल हाईस्कूल में एक विषय में 327663 परीक्षार्थी फेल हैं। 771 बच्चे दो विषयों में फेल है। ये छात्र दो में से एक विषय में कम्पार्टमेंट देकर पास होंगे तभी पास का प्रमाणपत्र जारी होगा।

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

Posted: 03 Aug 2020 04:04 PM PDT

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

 
गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


क्या है किस माड्यूल की खासियत

आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए

कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस, छात्रों की राय जानेगा CBSE बोर्ड

Posted: 03 Aug 2020 03:54 PM PDT


कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस, छात्रों की राय जानेगा CBSE बोर्ड 
 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कंपार्टमेंट परीक्षा से पहले छात्रों की राय जानेगा। कोरोना के चलते मुख्य परीक्षा की तरह कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। ऐसी स्थिति में बोर्ड छात्रों की राय जानकर उन्हें ग्रेस मार्क के जरिए पास कर सकता है। बोर्ड की ओर से छात्र-छात्राओं को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा।


कुछ छात्रों ने कोरोना के चलते कंपाटमेंट परीक्षा न करवा कर छात्रों को ग्रेस मार्क देकर रिजल्ट जारी करने की मांगी की है।इसको लेकर छात्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है। सीबीएसई की ओर से कंपार्टमेंट परीक्षा नहीं होने की स्थिति में छात्रों को ग्रेस मार्क देकर पास करने की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू हो जाएगी।


कोरोना के चलते देश भर में अक्तूबर से पहले कंपाटमेंट परीक्षा के हालात नहीं बन रहे हैं, ऐसे में दसवीं और बारहवीं के छात्रों का एक साल खराब हो जाएगा। दसवीं में कंपाटमेंट आने वाले बच्चे ग्यारहवीं में नामांकन नहीं करवा पा रहे हैं जबकि बारहवीं के छात्र उच्च् शिक्षा में कहीं प्रवेश नहीं ले पाएंगे। सीबीएसई की ओर से इस समय दसवीं और बारहवीं में अंकों के वेरीफिकेसन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के नंबर की जांच चल रही है। अंकों के वेरिफिकेशन के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में आवेदन मांगे गए थे।  


अंकों के वेरिफिकेशन के बाद जो छात्र कॉपी की पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किए हैं, उनकी कॉपी की दोबारा जांच होगी। बारहवीं में पुनर्मूल्यांकन के लिए एक व दो अगस्त थी, यह बीत चुकी है जबकि दसवीं में छह और सात अगस्त तक आवेदन पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किए जाएंगे।

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