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Thursday, September 10, 2020

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


GWALIOR कलेक्ट्रेट पहाड़ी के पीछे मजदूर महिला का गैंगरेप, ठेकेदारों के खिलाफ FIR

Posted: 10 Sep 2020 08:54 AM PDT

ग्वालियर।
मप्र के ग्वालियर शहर में एक महिला के साथ ज्यादती का मामला सामने आया है। महिला बहोड़ापुर तिराहे पर बस से अपने बेटे के साथ उतरी थी। यहीं से उसे कंस्ट्रक्शन साइट दिखाने का झांसा देकर एक ठेकेदार व उसका दोस्त उसे अपने साथ ले गए। कलेक्टोरेट पहाड़ी के पीछे ले जाकर उसके बेटे को मारने की धमकी देकर ज्यादती की। महिला ने यूनिवर्सिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। 

यूनिवर्सिटी थाने के टीआई रामनरेश यादव ने बताया कि मुरैना के जौरा की रहने वाली 34 वर्षीय महिला काम की तलाश में ग्वालियर आई थी। उसके साथ उसका 10 साल का बेटा भी था। महिला का मायका घाटीगांव में है। घाटीगांव के पास ही उसका पति मजदूरी कर रहा है। वह बस से मंगलवार दोपहर में उतरी। इसके बाद उसे यहां ठेकेदार नरेश प्रजापति और श्याम प्रजापति मिल गए। इनके यहां पहले भी महिला व उसका पति मजदूरी कर चुके हैं।  

महिला को इन दोनों ने कहा कि कलेक्टोरेट पहाड़ी के पीछे एक बिल्डिंग बनाने का ठेका लिया है। वहां मजदूरों की जरूरत है। दोनों महिला व उसके बेटे को लेकर पहाड़ी के पीछे एक निर्माणाधीन भवन में पहुंचे। उन्होंने उसके बेटे को पकड़ा और गला घोंटकर उसकी हत्या करने की धमकी देकर बारी-बारी से दोनों ने गलत काम किया। इसके बाद उसे जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। आरोपियों के भागने के बाद महिला किसी तरह बाहर आई। अपने बेटे के साथ वह रोती हुई जा रही थी। यहां दो युवक मिले। महिला से पूछताछ करने पर जब उन्हें पता लगा तो उसे यूनिवर्सिटी थाने लेकर पहुंचे। महिला की शिकायत पर एफआईआर लिखी गई।

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'मेरा घर मेरा विद्यालय' से संक्रमित हुए शिक्षक की असमय मौत - EMPLOYEE NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:46 AM PDT

भोपाल
। महामारी के समय जबकि घर के बाहर एक-एक कदम जानलेवा हो सकता है, कमिश्नर राज्य शिक्षा केंद्र श्री लोकेश कुमार जाटव ने कुछ इनोवेटिव कर दिखाने के लिए 'मेरा घर मेरा विद्यालय' कार्यक्रम ना केवल शुरू किया बल्कि सुनिश्चित किया कि शिक्षक गांव-गांव जाकर बच्चों को पढ़ाएं। नतीजा सरकारी स्कूल (बरखेड़ा नाथू) में पदस्थ प्रधानाध्यापक श्री प्रशांत सिंह चंदेल ना केवल संक्रमित हुए बल्कि उन की दर्दनाक मौत हो गई।

शिक्षक प्रशांत सिंह चंदेल 2 महीने से घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ा रहे थे 

शिक्षक प्रशांत सिंह चंदेल पिछले सप्ताह ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और हमीदिया अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जहां पर आज सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शिक्षक प्रशांत सिंह चंदेल दो महीने से चल रहे शिक्षा विभाग के कार्यक्रम 'हमारा घर हमारा विद्यालय' के तहत घर-घर संपर्क और घर-घर पढ़ाई के साथ ही मोहल्ला क्लास संचालित करके बच्चों को पढ़ा रहे थे।

कमिश्नर के आदेश का पालन करते-करते कब संक्रमित हो गए पता ही नहीं चला

श्री प्रशांत सिंह चंदेल शासन के आदेशों का पालन करते हुए कब कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इन्हें इसकी जानकारी खुद नहीं हो पाई। जब 4 सितंबर को जब उन्होंने अपना कोविड टेस्ट कराया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली और उन्हें हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

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REWA में FIR दर्ज करवाने के लिए पुलिस को पैसे देने पड़ते हैं, हेड कांस्टेबल ₹15000 लेते गिरफ्तार - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:22 AM PDT


भोपाल
। मध्य प्रदेश के रीवा में पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। लोकायुक्त पुलिस ने जनेह थाने के हेड कांस्टेबल राजीव लोचन पांडे को ₹15000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तब की गई जब एक व्यक्ति ने लोकायुक्त पुलिस से इसकी शिकायत की। स्वभाविक है जिन मामलों में शिकायत नहीं की गई और मामलों में कार्रवाई भी नहीं हुई परंतु रिश्वतखोरी हुई। 

हेड कांस्टेबल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए डीएसपी लोकायुक्त पुलिस श्री प्रवीण सिंह परिहार सहित 16 लोगों की टीम तैनात की गई थी। डीएसपी परिहार ने बताया कि शिकायतकर्ता पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करवाने के लिए गया था। हेड कांस्टेबल राजीव लोचन पांडे ने उससे ₹15000 की मांग की। लोकायुक्त पुलिस ने प्रारंभिक जांच में शिकायत को सही पाया। इसके बाद हेड कांस्टेबल को ट्रैप करने के लिए प्लानिंग की गई और रिश्वत की रकम का लेन देन होते हैं हेड कांस्टेबल का अरेस्ट कर लिया गया।

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GWALIOR में पिता-पुत्र ने व्यापारियों को POST OFFICE के नाम पर 51लाख का चूना लगाया - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:22 AM PDT

ग्वालियर।
 मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में डाकघर की रैकरिंग स्कीम में पैसा जमा करने के नाम पर पिता-पुत्र ने काराेबारियाें से 51.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर दी। पिता-पुत्र हर महीने रैकरिंग स्कीम के नाम पर पैसा लेते गए, लेकिन जब समय पूरा हो गया तो इकठ्ठा पैसा देने की जगह भाग गए। मुरार पुलिस ने पिता पुत्र पर एफआईआर दर्ज कर एक को बीती रात गिरफ्तार भी कर लिया। 

टीआई मुरार अजय सिंह पवार ने बताया कि राजेश गुप्ता निवासी मालरोड मुरार अपने बेटे समर गुप्ता के साथ डाकघर में रैकरिंग खाता खुलवाता था। उसने मुरार क्षेत्र के कई व्यापारियों को पांच साल की स्कीम में पैसा जमा करने के लिए कहा। हर महीने रैकरिंग स्कीम के नाम पर व्यापारियों से रुपए लेते गए। जब पांच साल पूरे हो गए तो लोगों ने रुपए मांगना शुरू किया। कुछ दिनों तक तो टरकाते रहे और एक दिन पिता-पुत्र घर पर ताला लगाकर गायब हाे गए। व्यापारियों ने थाने पहुंचकर शिकायत की। इस बीच लोगों को सूचना मिली कि समर गुप्ता मुरार इलाके में ही देखा गया है ताे उन्हाेंने यह जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर समर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी समर को कोर्ट में पेश कर एक दिन की रिमांड पर लिया है।

पिता-पुत्र की ठगी का शिकार कई लोग हुए हैं। पिछले दाे दिन में मुरार थाने में 17 लाेग शिकायत करने पहुंचे। इनमें योगेश जैन, मोहन गर्ग, आकाश गर्ग, प्रह्लाद गोयल, राहुल गोयल, आनन्द सचदेवा, प्रेमचंद्र सचदेवा, महावीर जैन, मनीष राठौर, ब्रजेश अग्रवाल, सुरेंद्र गोयल, मुन्ना खान, दिनेश अग्रवाल,धर्मेद्र राठौर और बिट्टू अग्रवाल शामिल हैं। लाेगाें के मुताबिक कई लोग अभी थाने तक नहीं पहुंचे हैं। आरोपी के पकड़े जाने की सूचना जैसे-जैसे लाेगाें तक पहुंचेगी, ठगी के शिकार हुए लाेग सामने आ सकते हैं। बुधवार को दो लोग और थाने पहुंचे।

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BHOPAL का हमीदिया अस्पताल फुल, चिरायु में वेटिंग, AIIMS वीआईपी के लिए आरक्षित - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 07:57 AM PDT

भोपाल
। भोपाल शहर में कोरोनावायरस संक्रमित हो रहे आम नागरिकों के लिए अस्पतालों में कोई जगह नहीं बची है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एडमिट कराने के लिए परिजनों को पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हमीदिया हॉस्पिटल का आईसीयू फुल हो चुका है। चिरायु हॉस्पिटल के आईसीयू में लगभग 12 घंटे की वेटिंग चल रही है। एम्स हॉस्पिटल मध्य प्रदेश भर के वीआईपी मरीजों के लिए आरक्षित है। भोपाल शहर के सामान्य नागरिकों को इमरजेंसी में एडमिट नहीं किया जा रहा। 

आज दिनांक तक हमीदिया अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए आईसीयू में 40 बेड ही उपलब्ध हैं, जो सितंबर की शुरुआत से लगातार फुल चल रहे हैं। यदि किसी मरीज की स्थिति बहुत खराब है तब भी उसे वापस लौटा दिया जाता है। यही हाल है एम्स हॉस्पिटल का है। मध्य प्रदेश भर के द्वितीय श्रेणी के अधिकारी एवं नेता यहां इलाज के लिए भर्ती हो रहे हैं। आम आदमी जिसके पास कोई पॉलिटिकल बैकअप नहीं है, एम्स में भर्ती नहीं किया जा रहा। चिरायु अस्पताल में मरीजों को इनकार नहीं किया जा रहा है परंतु लगभग 12 घंटे की बैटिंग का आग्रह किया जाता है जबकि डॉक्टरों का कहना है कि कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज की यदि स्थिति ठीक नहीं है तो उसे तत्काल हाईफ्लो ऑक्सीजन की जरूरत है। ऐसे मरीज मात्र 2 घंटे में मृत्यु की स्थिति तक पहुंच जाते हैं।

हमीदिया अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए 320 बेड का वार्ड बनाया गया है, जहां पर ब्लॉक A और B में 100 फीसदी ऑक्यूपेंसी है, वहीं ब्लॉक C में 100 बेड में महज 34 बेड खाली हैं (केवल पॉलिटिकल एप्रोच वालों को आवंटित किया जाता है)। हमीदिया अस्पताल में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए नया आईसीयू वार्ड बनाया जा रहा है। कमिश्नर कविंद्र कियावत ने अस्पताल में तैयार हो रहे आईसीयू वार्ड का जायजा लिया। वहीं दूसरी ओर टीवी अस्पताल के 100 बिस्तर कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।

हमीदिया हॉस्पिटल: ऑक्सीजन तो है परंतु इमरजेंसी के बंदोबस्त नहीं है

हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर आईडी चौरसिया ने बताया कि अस्पताल के कोविड वार्ड में 6 बेड बढ़ाए गए हैं और तीन अतिरिक्त कक्षों को भी कोविड वार्ड में तब्दील करने की योजना है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हमारे 320 बेड के कोविड वार्ड में अब हमारे पास इमर्जेंसी मरीजों को रखने की जगह नहीं है, ऐसे में यहां के सामान्य मरीजों को टीबी अस्पताल शिफ्ट करेंगे।

डी ब्लॉक में 100 बिस्तर का वार्ड बनवा रहे हैं

गांधी मेडिकल कॉलेज के नए भवन के डी-ब्लाक में भी 100 बिस्तर के अतिरिक्त वार्ड को तैयार करने के लिए कहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसी से कहा है कि कोरोना संकटकाल को देखते हुए काम को कोऑर्डिनेशन के साथ पूरा करें। यह कब तक बनकर तैयार हो जाएगा फिलहाल प्रेस को नहीं बताया गया।

संक्रमित हुए डॉक्टरों को गर्ल्स हॉस्टल में आइसोलेट करेंगे

कमिश्नर कविंद्र कियावत ने डॉक्टरों की मांग पर गांधी मेडिकल कॉलेज में नव-निर्मित गर्ल्स हॉस्टल को एक सप्ताह में व्यवस्थित कर पुराने हॉस्टल से छात्राओं को यहां पर शिफ्ट किया जा सके, जिससे अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान बीमार होने वाले डॉक्टरों को आईसोलेट करने के लिए जगह उपलब्ध हो सके। उन्होंने नवीन नर्सिंग हॉस्टल और लाइब्रेरी भी शिफ्ट कर हफ्तेभर में शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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INDORE में स्वास्थ्य कर्मियों ने 10 दिन की बच्ची का 1.20 लाख में सौदा किया - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:02 AM PDT

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में महिला थाना पुलिस ने बच्चा बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मौके से एक महिला और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आराेपी 10 दिन की बच्ची को एक लाख 20 हजार रुपए में बेचने की तैयारी में थे। पुलिस ने सूचना के बाद योजना बनाकर आराेपियाें काे पकड़ा और बच्ची काे बरामद कर लिया।

सीएमएचओ डॉ. राम नरेश कुशवाह ने बताया कि महिला पुलिसकर्मी स्वाती पाठक बच्ची को लेकर अस्पताल आई थीं। बच्ची को किसी तरह की बाहरी चोट नहीं है। इन्होंने बताया कि समाजसेवी संस्था ईवा वेलफेयर सोसायटी ने महिला थाना पुलिस को शिकायत की थी कि एक महिला और पुरुष एक बच्चे को बेचने की फिराक में हैं। वे उसका लाखों में सौदा कर रहे हैं। इस पर पुलिस ने बताए गए स्थान रानी सती गेट पर घेराबंदी की। जैसे ही गिरोह बच्चे का सौदा करने पहुंचा, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। इनके पास से पुलिस ने 10 दिन की एक बच्ची को बरामद किया। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने भिजवाया, जबकि बच्ची को बाल कल्याण समिति के हवाले कर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम बबलू उर्फ तेजकरण पिता हेमराज ठक्कर और शिल्पा पति मनीष तेलंग निवासी नंदा नगर बताया। दोनों ही आरोपी पेशे से मेडिकल स्टाफ से जुड़े हुए हैं। पुलिस आरोपियों से बच्ची से जुड़ी जानकारी जुटा रही है कि आखिर बच्ची इनके पास कैसे आई। इसके अलावा वह बच्ची को किसी और क्यों बचने वाले थे। शुरुआती जांच में यह पता चला है कि आरोपियों ने इसके पहले भी कुछ बच्चों को लाखों रुपए में बेचने का काम किया है। एएसएपी मनीषा साेनी पाठक ने बताया कि सूचना के बाद दाे लाेगाें काे रानी सती गेट के पास से पकड़ा है। बच्ची किसकी है और कहां से लेकर आए थे, मामले में जांच कर रहे हैं।


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JABALPUR में युवक की कुल्हाड़ी से काट कर हत्या - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:00 AM PDT

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बेलखेड़ा थाना क्षेत्र के माला गाँव में जमीनी विवाद को लेकर एक 42 वर्षीय व्यक्ति पर कुल्हाड़ी व हँसिया से हमला कर उसकी हत्या कर दी गयी। वहीं एक युवक गंभीर रूप से घायल है जिसे इलाज के लिए मेडिकल रेफर किया गया है। 

यह घटना जमीन की नपाई के दौरान हुई और जमीन मालिक के पुत्र व समधी पर उसके ही सगे भाइयों ने हमला कर दिया था।  हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। इस संबंध में उपनिरीक्षक लक्ष्मी तिवारी ने बताया कि मालागाँव निवासी छोटे लाल लडिय़ा की घर के सामने ही दो एकड़ जमीन है। उस जमीन को लेकर उसका अपने भाई गुलाब सिंह लडिय़ा से विवाद चल रहा था। विवाद को सुलझाने के लिए छोटे लाल द्वारा निजी तौर पर जमीन की नपाई कराने के लिए एक टीम को बुलाया गया था। 

दोपहर 2 बजे के करीब जमीन की नपाई हो रही थी। इसी दौरान गुलाब लडिय़ा के पुत्र जगत व चन्नू एवं उनके पुत्र रामजी व हल्कू लडिय़ा वहाँ पहुँचे और विवाद करते हुए कुल्हाड़ी, हँसिया व तलवार से हमला कर छोटे लाल के पुत्र प्रकाश व समधी उजियार सिंह को गंभीर रूप से घायल कर दिया। दोनों घायलों को पाटन अस्पताल ले जाया गया जहाँ उजियार सिंह उम्र 42 वर्ष की मौत हो गयी। वहीं प्रकाश को मेडिकल रेफर किया गया है।

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RDVV NEWS: फीस के कारण एडमिशन रद्द नहीं होगा, किस्तों में जमा कर सकते हैं - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 06:20 AM PDT

जबलपुर
। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने इस साल एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को एक खास किस्म की राहत दी है। कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने डिसीजन लिया है कि यदि स्टूडेंट एडमिशन के समय पूरी फीस जमा नहीं कर सकता तब भी उसे एडमिशन दिया जाएगा। स्टूडेंट किस्तों में पूरी फीस जमा कर सकता है।

कुलसचिव दीपेश मिश्रा ने बताया कि विद्यार्थी युनिवर्सिटी के विभागों में प्रवेश के दौरान 50 फीसद शुल्क देकर प्रवेश सुनिश्चित करवा सकते हैं। शेष राशि दो किश्तों में विद्यार्थियों को जमा करनी होगी। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बीच आर्थिक तंगी से कई परिवार जूझ रहे हैं ऐसे में उन्हें इससे राहत देने का प्रयास युनिवर्सिटी ने किया है।

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JABALPUR: कोरोना के डर से कलेक्टर फाइलों को हाथ तक नहीं लगा रहे, 2 अपर कलेक्टर पॉजिटिव - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 05:51 AM PDT

जबलपुर
। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी में इन दिनों वह सब कुछ हो रहा है जो जबलपुर के 2000 साल के इतिहास में कभी नहीं हुआ। जनता को महामारी से बचाने के लिए जिम्मेदार कलेक्टर खुद कोरोनावायरस के संक्रमण से इतने अधिक डरे हुए हैं कि उन्होंने सरकारी फाइलों को हाथ लगाना तक बंद कर दिया है। कलेक्टर कार्यालय में दो अपर कलेक्टर पॉजिटिव पाए गए हैं। उनके ऑफिस के सभी कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। दोनों के कोर्ट रूम में ताला लगा दिया गया है।

डरे हुए अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों को खतरे में डाल रहे हैं

हालात यह है कि कलेक्टर कार्यालय में अब अधिकारी-कर्मचारी किसी भी प्रकार की सरकारी फाइल को हाथ लगाने या जनता की शिकायतों वाले कागजों को टच करने से कतराने लगे हैं। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा पहले ही अपने दफ्तर में आने वाली फाइलों को अधीक्षक के पास भेजने का सिस्टम बना चुके थे। इसी तरह का सिस्टम अब दूसरे अधिकारी भी बनाने की तैयारी में है।

राजस्व निरीक्षक की मौत के बाद कोरोना के दहशत में कलेक्ट्रेट

दो दिन पहले अपर कलेक्टर ग्रामीण कोरोना पॉजिटिव मिले और वह उपचार करा रहे हैं। वहीं बुधवार को अपर कलेक्टर शहरी भी पॉजिटिव मिले। इनके स्टाफ ने एक दिन पहले ही कोरोना सैंपल विक्टोरिया अस्पताल में दिया था। रिपोर्ट आने का इंतजार सभी कर्मचारियों को है। हाल फिलहाल कर्मचारी सुरक्षा की दृष्टि से घरों में कैद हो चुके हैं। दोनों अपर कलेक्टर कार्यालय के कमरों में ताला लगाया जा चुका है। इससे पहले अपर कलेक्टर संदीप जीआर के स्टाफ को भी कोरोना संक्रमण हो चुका है। उन्हीं में से एक कर्मचारी के संपर्क में आए राजस्व निरीक्षक मनोज राय की मृत्यु भी हो गई। इन हालातों में कलेक्ट्रेट के कर्मचारी-अधिकारी दहशत में काम कर रहे हैं।

जबलपुर कलेक्टर ज्ञापन और शिकायतों को हाथ तक नहीं लगाते

कलेक्टर कार्यालय में रोजाना शिकायत करने वाले, ज्ञापन देने वाले और सैकड़ों विभागीय फाइलों की आवाजाही बनी हुई है। लोग भी अपनी शिकायत सीधे कलेक्टर से करना चाहते हैं। यही वजह है कि कब कौन सा व्यक्ति संक्रमण देकर चला जाए, यह कहना मुश्किल है। इसलिए कलेक्टर ने अपने दफ्तर में आने वाली सभी फाइल को अधीक्षक कार्यालय भेजना शुरू कर दिया है। इसी तरह सभी SDM और तहसीलदार, अपर कलेक्टर भी सावधानी बरतने लगे हैं।

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DAVV OPEN BOOK EXAM में शामिल 44000 छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सूचना - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 08:23 AM PDT

इंदौर।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की ओपन बुक परीक्षा की शुरुआत सोमवार से हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वेबसाइट पर 153 विषयों के प्रश्नों को अपलोड कर दिया है। इसमें बीए, बीकॉम, बीएससी, बीएसडब्ल्यू सहित कई कोर्स शामिल हैं। विद्यार्थियों को वेबसाइट पर दिए गए अपने कोर्स के पेपर को डाउनलोड करने होंगे। 12 सितंबर तक विद्यार्थियों को A4 साइज पेपर में प्रश्नों के जवाब लिखकर यूनिवर्सिटी को पहुंचाने होंगे। हर विषय के लिए पेजों की संख्या भी तय की गई है। विद्यार्थी को हर प्रश्न का जवाब 250 शब्दों में देना है और इसके लिए 16 पेज का ही उपयोग किया जा सकता है। परीक्षा में आठ जिलों के स्नातक कोर्स के करीब 44 हजार विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।

विद्यार्थी लीड कॉलेजों में या स्पीड पोस्ट से कॉपी भेज सकेंगे। यूनिवर्सिटी ने पेपर इस तरह बनाए हैं कि कॉपियों का मूल्यांकन करने में आसानी हो। इसके लिए हर विषय में केवल पांच-पांच प्रश्न ही शामिल किए गए हैं। परीक्षा यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर कराई जा रही है। कॉलेजों में यूजी और पीजी की पढ़ाई एक नवंबर से शुरू होनी है। यूनिवर्सिटी को ओपन बुक परीक्षा के परिणाम अक्टूबर में किसी भी स्थिति में जारी करने होंगे। 

प्रोफेशनल कोर्स की परीक्षा 16 सितंबर से

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. अशेष तिवारी ने कहा कि ट्रेडिशनल कोर्सेस के पेपर सोमवार सुबह वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। क्षेत्र के हिसाब से विद्यार्थी लीड कॉलेज या स्पीड पोस्ट से कॉपी विश्वविद्यालय तक पहुंचाएंगे। हमने प्रोफेशनल कोर्स का टाइम-टेबल भी जारी कर दिया है। बीबीए, बीसीए, लॉ और एमबीए की फाइनल परीक्षा 16 सितंबर से शुरू होगी। 22 सितंबर तक कॉपी जमा करनी होगी। इसके लिए भी शब्द संख्या और पेजों की संख्या तय की जा रही है।

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INDORE के बॉम्बे हॉस्पिटल, अरविंदो अस्पताल और मध्यप्रदेश शासन को हाईकोर्ट का नोटिस - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 05:33 AM PDT

इंदौर
। मरीजों को इमरजेंसी में भी इलाज देने से मना करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एडवोकेट अचला जोशी मामले में इलाज करने से इनकार करने वाले बॉम्बे हॉस्पिटल, अरविंदो अस्पताल और मध्यप्रदेश शासन को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। याचिका में इंदौर के सभी प्राइवेट अस्पतालों को अधिग्रहित करने की मांग की गई है।
 मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शासन, अरबिंदो अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल को नोटिस जारी कर पूछा है कि अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। मौतें हो रही हैं। आखिर सरकार और निजी अस्पताल मिलकर भी व्यवस्था क्यों नहीं संभाल पा रहे हैं? इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार बताए कि आखिर ऐसे हालात बने ही क्यों? कोरोना का संक्रमण पांच महीने से है। सरकार ने अब तक क्या किया और निजी अस्पताल इसमें क्या कर रहे हैं?

बॉम्बे अस्पताल ने इमरजेंसी में भी एडवोकेट अचला जोशी का इलाज नहीं किया था

उच्च न्यायालय ने यह नोटिस उस जनहित याचिका को स्वीकार करने के बाद जारी किया है जिसमें निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिलने से होने वाली मौतों का मामला उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि निजी अस्पताल कोरोना के नाम पर जमकर चांदी काट रहे हैं। खास लोगों को इलाज मिल रहा है, आम आदमी परेशान हो रहा है। उच्च न्यायालय की वरिष्ठ वकील अचला जोशी को हृदयाघात के दौरान न बॉम्बे अस्पताल में इलाज मिला, न ही अरबिंदो अस्पताल में। दोनों ही अस्पतालों में बिस्तर नहीं होने की बात कहकर इलाज से इन्कार कर दिया गया था। समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई।

प्राइवेट अस्पतालों को अधिग्रहित करने की मांग

उच्च न्यायालय में यह जनहित याचिका बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल ओझा ने दायर की है। याचिकाकर्ता की तरफ से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक रावल पैरवी कर रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि जिला प्रशासन निजी अस्पतालों को पूरी तरह से अपने आधिपत्य में ले जिससे कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों के कारण जरूरी होने पर अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा मिल सके और इलाज के अभाव में किसी की मौत न हो। मरीजों के इलाज से इन्कार करने वाले निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं। गुरुवार को याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने शासन और उक्त दोनों निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी। 

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BHOPAL में सिगरेट लूटने इनोवा से ट्रक का पीछा किया, ड्राइवर को बंधक बनाया - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 04:30 AM PDT

भोपाल
। एक अजीब किस्म की घटना सामने आई है। भोपाल-इंदौर हाईवे पर जा रहे एक ट्रक को इनोवा में सवार चार युवकों ने पीछा करके रोका, ड्राइवर के साथ मारपीट की, उसे बंधक बनाया और 10 किलोमीटर दूर ले जाकर खेत में फेंक दिया। पुलिस ने जब जांच की तो ट्रक में भरा हुआ लाखों का माल जैसा का तैसा था, केवल सिगरेट गायब थी।

जानकारी के अनुसार 31 साल के विष्णु गौर नाम का ड्राइवर बुधवार रात भोपाल के मंडीदीप से किराना सामान और एक कंपनी की महंगी सिगरेट लोड कर सेंधवा और बढ़वानी में डिलेवरी देने के लिए निकला था। उसने पुलिस को बताया कि रात करीब सवार 11 बजे भोपाल-इंदौर हाईवे पर स्थित एक ढाबे के पास एक इनोवा कार ओवरटेक करते हुए उसके सामने रुक गई। उसमें से चार युवक उतरे और एक्सीडेंट करने की बात कहते हुए मारपीट करने लगे।

उन्होंने हाथ पैर बांधकर कार में बैठा लिया। वहां से करीब 10 किमी दूर परवलिया इलाके में एक खेत में फेंक दिया। किसी तरह छूटकर पुलिस स्टेशन पहुंचा। विष्णु की शिकायत पर खजूरी सड़क पुलिस उसके साथ घटना स्थल पहुंची। पुलिस को ट्रक सही-सलात पाम कोर्ट गार्डन के पास मिल गया। हालांकि, उसमें से सिगरेट के करीब सात बॉक्स गायब थे। एक बॉक्स की कीमत 90 हजार रुपए बताई जाती है।

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जनता के साथ विश्वासघात करने वाली सरकार को बेदखल करना मेरा पहला दायित्व: ज्योतिरादित्य सिंधिया - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 05:11 AM PDT

भोपाल
। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी जनता के साथ जो भी विश्वासघात करेगा या उनके हक़ को मारेगा तो मेरा पहला दायित्व बनता है कि ऐसी सरकार को सत्ता से बेदख़ल करुं। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जोड़ा ' कमलनाथ ने जनता के साथ धोखा किया, ऐसी भ्रष्ट सरकार जाना ज़रुरी था।' श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पोरसा (अम्बाह) जिला मुरैना में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण समारोह में उपस्थित जनता को संबोधित कर रहे थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बार क्या भाजपा को धमकी दे रहे हैं 

ग्वालियर चंबल के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का धमकी देने का अंदाज कुछ इसी तरह का है। कमलनाथ सरकार के समय उन्होंने अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की बात की थी और इसी घटनाक्रम के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। एक बार फिर उन्होंने 'विश्वासघात' शब्द का उपयोग किया है। क्या इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक चेतावनी देने की कोशिश कर रहे हैं। 

क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया का मंत्री पद अटक गया 

ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुप्पी और बयान अक्सर कयासों और अफवाहों को जन्म देते हैं। आज के बयान में उन्होंने 'विश्वासघात' शब्द का उपयोग किया है। क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या भाजपा में शामिल होने से पहले जो बातचीत हुई थी, उसमें कोई गड़बड़ी हो रही है। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव हार चुके हो ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा के माध्यम से सांसद का दर्जा देकर सरकारी मान्यता तो दे दी है परंतु क्या केंद्रीय मंत्री पद कहीं अटक गया है।

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MPTET-3 EXAM 2020 स्थगित, पढ़िए परीक्षाओं का आयोजन कब होगा - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 04:49 AM PDT

भोपाल
। सरकारी नौकरियों में नेताओं की दखलअंदाजी बंद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संचालित प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड, भोपाल सरकार के हाथ की कठपुतली बन चुका है। मध्य प्रदेश प्राइमरी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट स्थगित कर दिया गया। 

MPTET-3 EXAM 2020: स्थगन आदेश जारी नहीं किया

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षाएं 26 सितंबर से शुरू होने वाली थी। चौंकाने वाली बात यह है कि तमाम हंगामे के बावजूद प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के अफसरों ने अब तक ऑफिशल नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। किसी पॉलिटिकल पार्टी के विभाग की तरह केवल वेबसाइट पर (Will Be Declared Soon) लिख दिया गया है। MPPEB मैनेजमेंट कोरोनावायरस का बहाना नहीं ले सकता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी प्रकार की महत्वपूर्ण परीक्षाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। 

MPTET-3 ऑनलाइन एग्जाम करा सकते हैं कोई परेशानी नहीं है 

यहां बताना जरूरी है कि मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करने में कोई परेशानी नहीं है। ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है क्योंकि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड सामान्यीकरण (normalization) की प्रक्रिया का उपयोग करता है। उपचुनाव और मतदान के दौरान भी परीक्षाएं आयोजित की जा सकती हैं क्योंकि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा अनुबंधित किए गए परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि संचालित नहीं होती।

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SHIVSENA ने मध्य प्रदेश की ऑक्सीजन रोकी, हजारों मरीजों की जिंदगी खतरे में - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 04:49 AM PDT

भोपाल।
महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार ने मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. प्रदीप व्यास ने आदेश जारी कर कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई केवल महाराष्ट्र में ही होगी। उद्धव ठाकरे सरकार के इस फैसले से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है क्योंकि मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली आईनॉक्स कंपनी के प्लांट महाराष्ट्र में ही लगे हैं। वहीं से लगभग 15 जिलों में सीधे और दूसरे वेंडर के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। इंदौर, भोपाल सहित लगभग 15 जिलों में आईनॉक्स कंपनी 130 मीट्रिक टन रोजाना ऑक्सीजन सप्लाई करती है। कोरोनावायरस महामारी के चलते ऑक्सीजन मरीजों की जिंदगी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। यदि ऑक्सीजन नहीं मिली तो मध्यप्रदेश में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने लगेगी।

महाराष्ट्र सरकार का फैसला मानवता और संविधान के विरुद्ध

महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑक्सीजन की सप्लाई पर रोक लगाने के फैसले पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भड़क उठे हैं। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे में ऐसा नहीं चलता है। संघीय ढांचे में राज्यों को परस्पर एक दूसरे का सहयोग करना होता है अगर राज्य ऐसा व्यवहार करेंगे तो काम कैसे चलेगा। कोरोना में ऑक्सीजन सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से इस विषय में चर्चा करेंगे। 

मध्य प्रदेश सरकार, महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएगी

मंगलवार को सीएम शिवराज की अध्यक्षता में वर्चुअल कैबिनेट बैठक हुई थी। जिसमें फैसला लिया गया था कि प्रदेश में ऑक्सीजन बेड की संख्या को बढ़ाकर 3700 किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश में ऑक्सीजन बेड की संख्या 11700 हो जाएगी। साथ ही सरकार ने ऑक्सीजन के इंतजाम के लिए विकल्प तलाशने के निर्देश भी दिए थे। मीटिंग में कहा गया कि महाराष्ट्र से ऑक्सीजन नहीं मिलने पर वहां की सरकार से बात की जाएगी। इतना ही नहीं सरकार ने कोर्ट जाने की भी बात कही थी।

ऑक्सीजन नहीं मिली तो मध्यप्रदेश में हजारों लोग मर जाएंगे

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ जिले में ऑक्सीजन की खपत 10 गुना तक बढ़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण मरीज के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है। कई मरीज ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं जिनके रक्त में ऑक्सीजन का प्रतिशत 80 से भी कम रहता है। ज्यादातर को हाइफ्लो पर रखना पड़ता है। ऐसे मरीज जिनके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार गिरती जाती है यदि ऑक्सीजन मिलने में दो मिनट का भी विलंब हो जाए तो स्थिति जानलेवा बन जाती है। 

क्या महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है 

ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने के फैसले के कारण महाराष्ट्र सरकार संकट में आ सकती है। विशेषज्ञ इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि क्या भारत के अन्य राज्यों में रहने वाले नागरिकों की जान खतरे में डालने का फैसला करने वाली महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त किया जा सकता है। यदि मध्यप्रदेश में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत हुई तो इसकी जिम्मेदार महाराष्ट्र कि शिवसेना सरकार होगी।

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BHOPAL: कॉलोनी में आने वाली अज्ञात महिलाओं पर नजर रखना, 15 थानों में 22 वारदातें हो चुकी हैं - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 03:45 AM PDT

भोपाल
। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जिसने भोपाल शहर की 15 थानों में 22 वारदातें की है। यह गिरोह सूने मकानों को टारगेट करता है। इस गैंग में दो महिलाएं शामिल हैं जो शहर भर में घूम-घूम कर सूने मकानों की रेकी करती थी। इस कार्रवाई के लिए भोपाल पुलिस निश्चित रूप से बधाई की पात्र है परंतु यह भी सच है कि इस गिरोह को जिंदगी भर के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। जब भी यह लोग बाहर आएंगे पूरी संभावना है कि फिर से वारदात शुरू कर देंगे। सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह भी नहीं पता कि केवल एक ही गिरोह एक्टिव था या और भी कई गैंग हैं। या फिर इसी गैंग में और भी सदस्य हैं जो स्वतंत्र घूम रहे हैं।

सीहोर से चोरी करने के लिए भोपाल आते थे

भोपाल पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक विश्वसनीय मुखबिर की ओर से सूचना प्राप्त हुई कि सीहोर रोड बैरागढ स्थित पान की दुकान के पास दो व्यक्ति एक कमल सिंह और बंटी टकला है, जो चोरी का माल कम कीमत में बेचने के लिये खड़े हैं और ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। इस सूचना पर थाना क्राइम ब्रांच की विशेष टीम गठित ने मुखबिर की सूचना पर संदिग्ध लोगों को घेराबंदी कर पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम कमल सोनी उम्र 56 निवासी शास्त्री कालोनी आष्टा और बंटी सोनी उम्र 33 साल बताया। दोनों शास्त्री कालोनी आष्टा जिला सीहोर के रहने वाले थे।

सीहोर गैंग के 10 सदस्य गिरफ्तार

आरोपी कमल की निशानदेही पर दीपक सोनी, उम्र 27 साल निवासी शास्त्री कालोनी आष्टा और करण सोनी उम्र 24 साल निवास शास्त्री कालोनी आष्टा को पकड़ा गया। जब क्राइम ब्रांच ने कमल, बंटी, दीपक और करण सोनी से रिमांड लेकर पूछताछ की तो चोरी की कई वारदातों का खुलासा हुआ। इन चारों आरोपी की निशानदेही पर गैंग से जुड़े बाकी के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिनके नाम राहुल सोनी, राजेश परमार, राजा अनवर, निरकालिस पवार, निरंजना परमार और लैहरिया बाई है।

महिलाएं सुने घर का पता लगाती थी, चोरी के बाद सीहोर लौट जाते थे

सूने मकानों की रैकी गिरोह की महिला सदस्य निरंजना औऱ लहेरिया बाई द्वारा की जाती थी। इसके बाद सूने मकानों में रात के समय कार में सवार होकर घरों में लगे दरवाजों और खिड़कियों के लॉक तोड़कर वारदात को अंजाम दिया जाता था। शहर में हुई लूट की वारदातों के बारे में भी इन आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। आरोपी शहर में वारदात करने के बाद वापस आष्टा भाग जाते थे।

भोपाल के 15 थानों में वारदात की, कचरा बीनने के बहाने महिलाएं आती थी

इस पारदी गैंग ने 22 चोरी की वारदातों को कुबूला है। यह वारदात शहर के 15 से ज्यादा थानों में की हैं।आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ उनके पास से लाखों का चोरी का माल बरामद किया गया है। गिरोह की महिला सदस्य कचरा बीनने के बहाने सूनसान मकानों की रैकी कर गिरोह को सूचना देती थी। गिरोह से चोरी का माल खरीदने वाले 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

भोपाल के इन इलाकों में चोरी की वारदात की गई

गिरोह ने थाना बागसेवनिया, मिसरोद, कटारहिल्स, गांधीनगर, खजूरीसडक, निशातपुरा, चूना भट्टी, कोलार, गौतम नगर, बैरसिया, ईंटखेडी थाना समेत 15 से ज्यादा क्षेत्रों में चोरी की वारदात करना कबूली है। आरोपियों से लगभग 165 ग्राम सोने के जेवर, 03 किलो 200 ग्राम चांदी के आभूषण 01 लाख 42 हजार नगदी और 05 लाख रूपये का वाहन बरामद किया है।

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MADHYA PRADESH में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर टैक्स कम नहीं हुआ सिर्फ घोषणा हुई है - MP NEWS

Posted: 10 Sep 2020 02:55 AM PDT

भोपाल। पिछले दिनों मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने पर 2% सेस (कमलनाथ सरकार द्वारा लगाया गया अतिरिक्त टैक्स) खत्म करने की घोषणा की थी परंतु सरकार की ओर से अब तक इसका गजट नोटिफिकेशन नहीं किया गया है। नतीजा व्यवहारिक तौर पर टैक्स कम नहीं हुआ। लोगों को प्रत्येक ₹100000 पर ₹2000 (यानी 3000000 के मकान पर ₹60000) अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। सामान्यतः इस तरह की घोषणाओं से पहले गजट नोटिफिकेशन की तैयारी हो जाती है और घोषणा के साथ ही नोटिफिकेशन कर दिया जाता है।

मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर 1 सप्ताह बाद टैक्स कम होगा

पंजीयन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कैबिनेट में हुए निर्णय के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद इसे सिस्टम पर अपडेट किया जाएगा। इस काम में करीब एक सप्ताह लग सकता है। इसके बाद ही घटी हुई स्टांप ड्यूटी पर रजिस्ट्री हो पाएगी। बता दें कि हर दिन करीब 150 से 200 लोग रजिस्ट्री कार्यालय पहुंच रहे हैं। मंगलवार को जहां 190 रजिस्ट्रियां हुईं थीं, वहीं बुधवार को 120 रजिस्ट्रियां ही हुईं। स्टांप ड्यूटी में छूट का लाभ नहीं मिलने से बुधवार को आधे से ज्यादा लोग मायूस होकर बिना रजिस्ट्री कराए चले गए। 

10 साल में 5% से 12.5% हो गए प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर सरकारी टैक्स

2010 में मप्र में स्टांप ड्यूटी 5 फीसद के करीब थी। इस पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता था, लेकिन बीते 10 साल में स्टांप ड्यूटी में बेहिसाब बढोतरी छूट देने के नाम पर हुई। इधर, रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि स्टांप ड्यूटी में दो फीसद की कमी करने का यह निर्णय आम जनता को राहत देने वाला है और इससे रजिस्ट्रियों की संख्या में भी वृद्घि होगी। बता दें कि राज्य सरकार ने महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर नगरीय निकाय शुल्क दो फीसद घटा दिया है। पहले तीन फीसद नगरीय निकाय शुल्क लगता था, जो दो फीसद कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद जनता को अब 10.5 फीसद ही स्टांप ड्यूटी रजिस्ट्री कराने में लगेगी। जो पहले 12.5 फीसद लगती थी। बता दें कि अधिकतर राज्यों में अब स्टॉप ड्यूटी 7 से 12 फीसद तक है। रियल एस्टेट मार्केट में बूम आने से रोजगार के अन्य अवसर भी खुलेंगे।

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E GOPALA APP DOWNLOAD करें, किसानों के लिए सूचना पोर्टल है

Posted: 10 Sep 2020 03:09 AM PDT

ई-गोपाला ऐप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाज़ार और सूचना पोर्टल है। ईगोपाला मोबाइल एप्लीकेशन पर किसानों को वह सारी जानकारी मिलेगी जो किसी भी दूसरे ऑनलाइन सोर्स पर उपलब्ध नहीं है।

वर्तमान में देश में पशुधन का प्रबंधन करने वाले किसानों के लिए ऐसा कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं है, जहां सभी रूपों (वीर्य, भ्रूण, आदि) में रोग मुक्त जीवाणु (जर्मप्लाज्म) खरीदना और बेचना, गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाओं की उपलब्धता (कृत्रिम गर्भाधान, पशु प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि) और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन करना, उचित आयुर्वेदिक दवा/एथनो पशु चिकित्सा दवा का उपयोग करते हुए जानवरों का उपचार आदि की जानकारी मिलती हो। 

पशु किसानों को अलर्ट भेजने (टीकाकरण, गर्भावस्था निदान आदि के लिए नियत तारीख पर) या उन्हें क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों के बारे में सूचित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ई-गोपाला ऐप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा।
E GOPALA APP DOWNLOAD करने के लिए यहां क्लिक करें

PMMSY: प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना क्या है, पूरी जानकारी यहां पढ़िए

Posted: 09 Sep 2020 10:09 PM PDT

All About pradhaanamantree matsy sampada yojana

PMMSY- प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना मत्स्य क्षेत्र पर केन्द्रित और सतत विकास योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक पांच साल की अवधि के दौरान सभी राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जाना है और इस पर अनुमानित रूप से 20,050 करोड़ रुपये का निवेश होना है। 

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का बजट कितना है

PMMSY के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपये का निवेश मत्स्य क्षेत्र में होने वाला सबसे ज्यादा निवेश है। इसमें से लगभग 12,340 करोड़ रुपये का निवेश समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केन्द्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रुपये का निवेश फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रस्तावित है।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का उद्देश्य क्या है

पीएमएमएसवाई के उद्देश्यों में 2024-25 तक मछली उत्पादन अतिरिक्त 70 लाख टन बढ़ाना, 2024-25 तक मछली निर्यात से आय 1,00,000 करोड़ रुपये तक करना, मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय दोगुनी करना, पैदावार के बाद नुकसान 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना तथा मत्स्य पालन क्षेत्र और सहायक गतिविधियों में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना शामिल हैं।

पीएमएमएसवाई को मछली उत्पादन और उत्पादकता, गुणवत्ता प्रौद्योगिकी, उपज के बाद के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और प्रबंधन, मूल्य निर्धारण श्रृंखला के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण, मजबूत मत्स्य प्रबंधन ढांचे और मछुआरों के कल्याण के रास्ते में आने वाली कमियों को दूर करने के उद्देश्य से बनाया गया है। 

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत क्या-क्या किया जाएगा

नीली क्रांति योजना की उपलब्धियों को मजबूत करने के उद्देश्य से, पीएमएमएसवाई के जरिए कई नए हस्तक्षेपों की परिकल्पना की गई है जिसमें मछली पकड़ने के जहाजों का बीमा, मछली पकड़ने के जहाजों/नावों के  उन्नयन के लिए मदद, बायो-टॉयलेट्स,  लवण/क्षारीय क्षेत्रों में जलीय कृषि, सागर मित्र, एफएफपीओ/सीएस, न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर,  मत्स्य पालन और जलीय कृषि स्टार्ट-अप्स, इन्क्यूबेटर्स, इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, इंटीग्रेटेड कोस्टल फिशिंग विलेज डेवलपमेंट, एक्वाटिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क और उनकी सुविधाओं का विस्तार, पहचान सुविधा, प्रमाणन और मान्यता, आरएएस, बायोफ्लोक एंड केज कल्चर, ई-ट्रेडिंग/विपणन, मत्स्य प्रबंधन योजना आदि शामिल है।

यह योजना मुख्य रूप से परियोजना में आवश्यकतानुरूप निवेश करते हुए मत्स्य समूहों और क्षेत्रों के निमार्ण पर केन्द्रित है। इसमें मुख्य रूप से रोजगार सृजन गतिविधियों जैसे समुद्री शैवाल और सजावटी मछली की खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह मछलियों की गुणवत्ता वाली प्रजातियों की नस्ल तैयार करने तथा उनकी विभिन्न प्रजातियां विकसित करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास और विपणन नेटवर्क आदि पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।

अब तक इस योजना के तहत मत्स्य विभाग ने पहले चरण में 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 1723 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके तहत आय सृजन गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के लिए बिहार को कितना बजट मिला

बिहार में पीएमएमएसवाई योजना के लिए 535 करोड़ रुपये की केन्द्र की हिस्सेदारी के साथ 1390 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी है। इसके तहत राज्य में 3 लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। चालू वित्त वर्ष (2020-21) के दौरान, भारत सरकार ने पुनःसंचरित एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायोफ्लोक तालाबों के निर्माण और फिन फिश जैसी प्रजातियों के प्रजनन की सुविधा, सजावटी मछली की खेत, जलाशयों/वेटलैंड्स, प्रशीतन केन्द्रों और प्रशीतन वाहनों, आइस बॉक्स के साथ मोटर साइकिल, आइस बॉक्स के साथ तीन पहिया, आइस बॉक्स के साथ चक्र में पिंजरों की स्थापना, मछली फ़ीड संयंत्र तथा मत्स्य केन्द्रों और उनसे संबंधित सेवाओं के विस्तार और ब्रूड बैंक आदि के लिए बिहार सरकार के लिए कुल 107.00 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है।

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इलेक्ट्रिक करंट कब झटके मारता है और कब चिपका लेता है, ध्यान से पढ़िए - GK IN HINDI

Posted: 10 Sep 2020 01:16 AM PDT

बिजली के करंट के बारे में तो आप जानते ही होंगे। आपने अक्सर देखा या सुना होगा किसी व्यक्ति को इलेक्ट्रिक वायर के संपर्क में आने के कारण करंट का झटका लगा और आपने यह भी सुना होगा कि कोई व्यक्ति करंट के कारण इलेक्ट्रिक वायर से चिपक गया। प्रश्न यही है कि जब विद्युत धारा (बिजली) एक ही होती है तो फिर कभी करंट लगता है और कभी चिपक जाते हैं! ऐसा क्यों होता है।

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमें बिजली के करंट के प्रकार समझने होंगे। बिजली का करंट दो प्रकार का होता है। पहला AC- अल्टरनेटिंग करंट और दूसरा DC- डायरेक्ट करंट। यदि आप AC और DC में अंतर समझ जाएंगे तो आप यह भी समझ जाएंगे कि कौन से वायर में किस प्रकार का करंट हो सकता है और वह झटका देगा या चिपका लेगा। 

AC- अल्टरनेटिंग करंट क्या है

AC- यानी वह करंट जो आपके घर में सप्लाई किया जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है। अल्टरनेटिंग करंट दोनों वायर (पॉजिटिव एवं नेगेटिव) एक साथ प्रवाहित होता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि एक वायर में अधिक और दूसरे वायर में कम मात्रा में प्रवाहित होता है। जिस वायर में ज्यादा करंट होता है उसे आप फेस कहते हैं और जिसमें कम उसे न्यूट्रल। (यहां ध्यान देना जरूरी है कि अर्थिंग यानी वह तीसरा वायर जो आगे जाकर जमीन के नीचे दबा दिया जाता है।) अल्टरनेटिंग करंट के संपर्क में आने से मनुष्य को कंपन महसूस होता है या फिर झटके लगते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे मृत्यु की संभावना काफी कम होती है। (हां फ्रैक्चर जरूर हो सकता है)

DC- डायरेक्ट करंट क्या है 

डायरेक्ट करंट यानी ऐसा करंट जो पॉजिटिव में प्रवाहित होता है और जिसके लिए नेगेटिव की जरूरत नहीं होती है। यानी अर्थिंग के साथ मिलकर या करंट अपना काम पूरा कर लेता है। आपने अक्सर देखा होगा रेल की पटरियों के ऊपर जो वायर लगे होते हैं वह डायरेक्ट करंट के होते हैं। ऐसे तारों में लगातार विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है। यदि कोई मनुष्य इनके संपर्क में आता है तो चिपक जाता है। डायरेक्ट करंट का पतला सा वायर भी यदि आपकी उंगली से चिपक जाए तो कम से कम इतना हिस्सा तो नष्ट कर ही देगा जितने हिस्से में वायर टच हुआ है। यानी डायरेक्ट करंट जानलेवा है। आपको चिपका लेता है और आपके अंदर की प्राण शक्ति समाप्त हो जाती है।  Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article (current affairs in hindi, gk question in hindi, current affairs 2019 in hindi, current affairs 2018 in hindi, today current affairs in hindi, general knowledge in hindi, gk ke question, gktoday in hindi, gk question answer in hindi,)

विदेशी लडकी का भारत में बलात्कार या वेश्यावृत्ति किस धारा के अंतर्गत अपराध दर्ज होगा, जानिए - ASK IPC

Posted: 09 Sep 2020 01:12 PM PDT

कल की धारा 366- क, में हमने आपको बताया था कि भारत की नाबालिग महिला का आयत-निर्यात वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से करना कितना गंभीर अपराध होता है। अगर किसी विदेशी महिला का भारत में वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से आयात (खरीदना) किया जाए तो वह किस धारा के अंतर्गत अपराध होगा जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 366 - ख, की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति किसी विदेशी महिला का भारत में आयात करता है एवं उसका जबरदस्ती बलात्कार करता है या विदेशी महिला को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करता है। ऐसा व्यक्ति धारा 366- ख, के अंतर्गत दोषी होता है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा- 366-ख, के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं है।यह अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते है, इनकी सुनवाई का अधिकार सेशन न्यायालय को होता है। सजा- इस अपराध में 10 वर्ष की कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

कानूनी जानकारी से संबंधित 10 सबसे लोकप्रिय लेख

कोर्ट में गीता पर हाथ रखकर कसम क्यों खिलाते थे, रामायण पर क्यों नहीं है
सरकारी अधिकारी निर्दोष नागरिक को जबरन रोककर रखे तो IPC की किस धारा के तहत मामला दर्ज होगा
अधिकारी, कोर्ट में गलत जानकारी पेश कर दे तो विभागीय कार्रवाई होगी या FIR दर्ज होगी
क्या जमानत की शर्तों का उल्लंघन अपराध है, नई FIR दर्ज हो सकती है
एक व्यक्ति अपराध करे और दूसरा सिर्फ साथ रहे तो दूसरा अपराधी माना जाएगा या नहीं
रात के समय किसी के घर में चोरी छुपे घुसना किस धारा के तहत अपराध है
यदि कोई मर्जी के बिना घर में घुस आए तो क्या FIR दर्ज करवाई जा सकती है
धूम्रपान करने वालों के खिलाफ IPC की किस धारा के तहत FIR दर्ज होगी
आम रास्ते में रुकावट पैदा करने वाले के खिलाफ किस धारा के तहत FIR दर्ज होती है
गर्भपात के दौरान यदि महिला की मृत्यु हो गई तो जेल कौन जाएगा डॉक्टर या पति
यदि जबरदस्ती नशे की हालत में अपराध हो जाए तो क्या सजा से माफी मिलेगी

20-50 फार्मूला पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति: सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर आधारित स्थापित सिद्धांत - EMPLOYEE and LAW

Posted: 10 Sep 2020 01:16 AM PDT

अमित चतुर्वेदी। अनिवार्य सेवा निवृत्ति या समय पूर्व सेवा रिटायरमेंट (20 वर्ष की सेवा या 50 साल की आयु पर) पर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर कुछ स्थापित सिद्धांत निम्न प्रकार से देखे जा सकते हैं:-

1) जब किसी कर्मचारी की सेवाएं, सामान्य प्रशासन हेतु उपयोगी नही रह जाती है या कर्मचारी डेड वुड (अनुपयोगी) हो जाता है तब संबंधित सरकार कर्मचारी को लोकहित में समयपूर्व रिटायर कर सकती है।

2) सामान्यतः अनिवार्य या समय पूर्व रिटायर किया जाना, संविधान के अनुच्छेद 311 के आधीन दंड नही माना जाता है।

3) बेहतर प्रशासन हेतु, अनुपयोगी कर्मचारियों (डेड वुड) को रिटायर किया जा सकता है परंतु,  अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश, कर्मचारी के संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड /अभिलेख को विचार करने के बाद ही करना चाहिए।

4)  गोपनीय चरित्रावली में की गई विपरीत टिप्पणियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जारी करते हुए विचार में लिया जाना चाहिए। सर्विस अभिलेख में जिन टिप्पणियों को किया गया है एवं उनकी सूचना कर्मचारी को नही है उन्हें भी कंपल्सरी सेवानिवृत्ति आदेश जारी करते समय विचार में लिया जाना चाहिए।

5) जब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश जारी करने के पूर्व विभागीय जांच की जरूरत हो तब जांच टालने के उद्देश्य से अनिवार्य सेवानिवृत्ति को शार्ट कट विधि के रूप में नही अपनाया जाना चाहिये, जब जांच जरूरी हो।

6) कर्मचारी को विपरीत टिप्पणी के पश्चात भी, दिया प्रमोशन, विचार में लिया जाता है।यह कर्मचारी के लिए लाभकारी स्थिति होती है कि विपरीत टिप्पणी के बाद भी पद्दोन्नति प्राप्त हुई।

6) दंड के उपाय के रूप में, अनिवार्य सेवानिवृत्ति अधिरोपित नही की जानी चाहिये।
लेखक श्री अमित चतुर्वेदी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में एडवोकेट हैं। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

कर्मचारियों से संबंधित कानूनी जानकारी: सबसे लोकप्रिय लेख

SBI VACANCY - 30000 कर्मचारियों को VGS देने के बाद 14000 नई भर्तियां करेगा स्टेट बैंक

Posted: 09 Sep 2020 10:37 PM PDT


नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने नया बयान जारी करके बताया है कि आने वाले 1 साल में वह 14000 पदों पर नौकरी हेतु वैकेंसी ओपन करेगा। इससे पहले समाचार मिला था कि भारतीय स्टेट बैंक अपने 30,000 कर्मचारियों को समय से पहले रिटायरमेंट देने जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि SBI COST COTTING  के लिए कर्मचारियों के लिए VRS लेकर आ रही है। इस पर SBI ने कहा है कि वो अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही है और इसके लिए वर्कफोर्स की जरूरत होगी। यही कारण है कि बैंक 14000 नई भर्तियां करने वाला है।

SBI ने बयान जारी कर कहा, 'हमारी मौजूदा वर्कफोर्स करीब 2.50 लाख कर्मचारियों की है। हम अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा आगे आये हैं। हम अपने कर्मचारियों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हम देश के युवाओं की स्किलिंग प्रक्रिया में भागीदार बनना चाहते हैं। हम देश के इकलौ​ता बैंक है जो भारत सरकार की नेशनल आपरेंटिसशिप स्कीम के युवाओं को काम दे रहे हैं। 

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कुल कितने कर्मचारी कार्यरत हैं

कुल 11,565 अधिकारी और 18,625 स्टाफ SBI VRS स्कीम के लिए आवेदन कर सकेंगे। SBI का अनुमान है कि अगर कुल योग्य कर्मचारियों में से 30 फीसदी भी VRS के लिए आवेदन करेंगे तो उसे करीब 2,170.85 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेग। मार्च 2020 तक स्टेट बैंक में कुल 2.49 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। एक साल पहले यह संख्या 2.57 लाख कर्मचारियों की थी।

10 सितम्बर को सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे समाचार

KVPY FELLOWSHIP - ‘किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना’ के लिए आवेदन आमंत्रित

Posted: 09 Sep 2020 10:09 PM PDT

Kishore Vaigyanik Protsahan Yojana (KVPY) Notification for Application 2020

नई दिल्ली। विज्ञान से संबंधित विषयों के बढ़ते महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में करियर की संभावनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, देश के प्रतिष्ठित विज्ञान शोध संस्थानों में प्रवेश की राह आसान नहीं है। युवाओं की इस मुश्किल को आसान करने और उन्हें वैज्ञानिक बनने के लिए मजबूत आधार उपलब्ध करानेके लिए 'किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना' (केवीपीवाई) फेलोशिप की शुरुआत की गई है। पिछले दो दशकों के दौरान केवीपीवाई ने छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना के तहत कौन आवेदन कर सकता है

इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2020 के लिए छात्रों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विज्ञान विषयों में ग्यारहवीं, बारहवीं और स्नातक कर रहे छात्र, जो वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक हैं, आगामी 05 अक्तूबर तक इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। 

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की विस्तृत जानकारी कहां मिलेगी

केवीपीवाई फेलोशिप कार्यक्रम के तहत पाँच हजार रुपये और सात हजार रुपये प्रतिमाह की दो अलग-अलग फेलोशिप प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, छात्रों को वार्षिक आकस्मिक अनुदान भी दिया जाता है। इस फेलोशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया और योजना के बारे में अधिक जानकारी केवीपीवाई की वेबसाइट पर मिल सकती है। 

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना क्यों चलाई जाती है

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने इस योजना के बारे में अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि "किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना मूलभूत विज्ञान के छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए है, ताकि वे वैज्ञानिक शोध को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।"

KVPY मूलभूत विज्ञान के क्षेत्र में फेलोशिप प्रदान करने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत वर्ष 1999 मेंविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागद्वारा की गई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्यदेश में अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिए उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास सुनिश्चित करना है।

KVPY: छात्रों की वैज्ञानिक अभिरुचि परखने हेतु

केवीपीवाई के ऑनलाइन एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन 31 जनवरी 2021 को देश के चुनिंदा शहरों में किया जाएगा। इस कम्प्यूटर आधारित एप्टिट्यूट टेस्ट को हिंदी में भी दिया जा सकता है।KVPY-2020 की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना से संबंधित नोटिफिकेशन हाल में जारी किया गया है। नोटिफिकेशन के अनुसार केवीपीवाई फेलोशिप की चयन प्रक्रिया में कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के चलते आवश्यकबदलाव किये गए हैं।

KVPY FELLOWSHIP के लिए चयन प्रक्रिया क्या होगी

इस योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के चयन के लिए उच्च-स्तरीय प्रवेश परीक्षा आमतौर पर दो-चरणों में आयोजित की जाती थी। प्रथम चरण एक ऑनलाइन एप्टिट्यूड टेस्ट होता था। प्रथम चरण में सफल छात्रों को द्वितीय चरण में साक्षात्कार से गुजरना पड़ता था। पर, वर्ष 2020 के अद्यतन नोटिफिकेशन के अनुसार इस बार फेलोशिप के लिए छात्रों का चयन एप्टिट्यूड टेस्ट के अंकों के आधार पर ही कर लिया जाएगा। यानी, इस बार चयन में साक्षात्कार की भूमिका समाप्त कर दी गई है। 

KVPY FELLOWSHIP की एस-ए एवं एस-एक्स स्ट्रीम के अंतर्गतएप्टिट्यूड टेस्ट-2020 में भाग लेने के लिए छात्रों के दसवीं में विज्ञान एवं गणित विषयों में 75% अंक होना आवश्यक है। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए पात्रता में 10 प्रतिशत अंकों की छूट दी गई है। इन वर्गों के लिए पात्रता 65 प्रतिशत अंकों की रखी गई है।

वे विद्यार्थी जो दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत अध्ययन कर रहे हैं, अथवा करने के इच्छुक हैं, इसके लिए पात्र नहीं हैं। जबकि, शैक्षणिक वर्ष 2020-2021 के दौरान बीएससी, बीएस, बी.स्टेट, बी.मैथ्स, इंटिग्रेटिड एमएससी/एमएस के प्रथम वर्ष में नामांकित छात्र, जिन्हें बारहवीं कक्षा की परीक्षा में न्यूनतम 60 % (अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 50 %) अंक प्राप्त हुए हैं, वे केवीपीवाई के एसबी वर्ग के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं। 

एप्टिट्यूड टेस्ट के लिए पात्र छात्रकेवीपीवाई की आधिकारिकवेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन फीस 1250 रुपये तथा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों लिए ऑनलाइन आवेदन फीस 650 रुपये रखी गई है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गतचयनित छात्रों को पूर्व-पीएचडी स्तर तक छात्रवृति एवं आकस्मिक अनुदान प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, केवीपीवाई अध्येताओं के लिए देश के प्रतिष्ठित शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों में शिविरों का आयोजन किया जाता है। अध्येताओं को इस कार्यक्रम के तहत देश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध प्रयोगशालाओं में जाने का अवसर भी मिलता है। 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर सेइस कार्यक्रम के आयोजन एवं कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थानको प्रदान की गई है। इस योजना के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए एक प्रबंधन समिति एवं एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है। जबकि, केवीपीवाई कार्यक्रम के दैनिक एवं शैक्षणिक पहलुओं को एक अन्य समिति संचालित करती है। (इंडिया साइंस वायर

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MP CORONA: 31 लोगों की दर्दनाक मौत के साथ 1869 लोग महामारी के शिकार - UPDATE NEWS

Posted: 09 Sep 2020 09:34 PM PDT


भोपाल। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मध्य प्रदेश द्वारा जारी मीडिया पर्यटन दिनांक 9 सितंबर 2020 (शाम 6:00 बजे तक) के अनुसार पिछले 24 घंटे में मध्यप्रदेश में 31 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है और 1869 लोग माहवारी का शिकार हो गए। हालात इतने गंभीर हैं कि शाम 6:30 बजे जारी होने वाला बुलेटिन रात 9:00 बजे के पास जारी किया जा सका। मध्यप्रदेश के अस्पतालों में 17702 लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। जबकि आज दिनांक तक 1640 लोग कोविड-19 महामारी के कारण अपनी जान गवा चुके हैं। 

MADHYA PRADESH CORONA BULLETIN 09 SEPTEMBER 2020

संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, मध्य प्रदेश द्वारा जारी कोरोनावाAयरस मीडिया बुलेटिन दिनांक 09 सितंबर 2020 (शाम 6:00 बजे तक) के अनुसार पिछले 24 घंटे में:- 
23992 सैंपल की जांच की गई।
101 सैंपल रिजेक्ट हो गए।
22123 सैंपल नेगेटिव पाए गए।
1869 सैंपल पॉजिटिव पाए गए।
31 मरीजों की मौत हो गई।
1341 मरीज डिस्चार्ज किए गए।
मध्यप्रदेश में संक्रमित नागरिकों की कुल संख्या 79192
मध्यप्रदेश में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 1640 
मध्यप्रदेश में कोरोनावायरस से स्वस्थ हुए नागरिकों की संख्या 59850
09 सितंबर 2020 को संक्रमित नागरिकों की संख्या 17702 
09 सितंबर 2020 को मध्यप्रदेश में संक्रमित इलाकों की संख्या 6388 

mp corona status today and update 

मध्यप्रदेश में स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। 
इंदौर की कलश यात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन की शिकायत करने वाली कांग्रेस पार्टी ने मुरैना में खुद सोशल डिस्टेंसिंग का खुला उल्लंघन किया। 
राजनीतिक कार्यक्रमों में कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन आम जनता के हौसले बढ़ा रहा है। लोगों को विश्वास होता जा रहा है कि सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े किसी सुनियोजित भ्रष्टाचार का हिस्सा है। 
मध्य प्रदेश में पहली बार एक साथ तीन जिलों (इंदौर, भोपाल और ग्वालियर) में संक्रमित नागरिकों की संख्या 200 से अधिक है। यानी तीनों जिलों में मिलाकर 700 से अधिक। 
ग्वालियर की पॉजिटिविटी रेट ज्यादा है परंतु जबलपुर की मृत्यु दर ग्वालियर से ज्यादा है। 
इंदौर की मृत्यु दर एक रहस्य बन कर रह गई है। सरकारी आंकड़ों पर न केवल सवाल उठे बल्कि कई बार प्रमाणित हुआ कि आंकड़ों को बदला गया।




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