दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई कोविड-19 से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लिए गये कई महत्वपूर्ण निर्णय |
- मीटिंग-सीटिंग-इटिंग
- दमकल बाबा की प्रेत साधना
- आज 27- अप्रैल - 2021, मंगलवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ?
- मद्रास उच्च न्यायालय ने कोरोना दिशा निर्देश का पालन नहीं करवाने के लिए सीधे-सीधे चुनाव आयोग को दोषी ठहराया
| Posted: 26 Apr 2021 08:13 AM PDT मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई कोविड-19 से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लिए गये कई महत्वपूर्ण निर्णय |मुख्य बिंदु:- · आई0जी0आई0एम0एस0 सहित सभी सरकारी अस्पतालों में कोविड बेड की संख्या बढ़ायी जाय। इसके साथ-साथ सभी निजी अस्पतालों में भी कोविड बेड की संख्या को बढ़ायें। · हर हाल में ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी है, दवा के साथ-साथ ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता रखें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो। · सरकारी या निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की जो जरुरत है उसको पूर्ण करने के लिए हर जरुरी कदम उठाएं। · कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर हरेक पहलू पर गंभीरतापूर्वक विचार करें और परिस्थिति के अनुसार हर जरुरी कदम उठाएं। · कोरोना जांच की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जांच की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। · संचार के अन्य माध्यमों के साथ-साथ माइकिंग के द्वारा गांव-गांव तक कोरोना संक्रमण के प्रति लोगों को सतर्क और सजग करने के लिए निरंतर अभियान चलायें। · अगल-बगल के गांव और मुहल्लों में जो कोरोना का फैलाव हो रहा है उसके बारे में लोगों को बताएं कि आप अगर सतर्क और सजग रहेंगे तो संक्रमण का खतरा कम से कम होगा। · लोग मास्क का जरूर प्रयोग करें, आपस में दूरी बनाकर रहें, हमेशा साबुन से हाथ धोते रहें, बेवजह घर से बाहर न निकलें। पटना, 26 अप्रैल 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 से संबंधित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में कोविड-19 की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने डेली टेस्ट पॉजिटिविटी रेट, एक्टिव केसेज, कुल जांच, आर0टी0पी0सी0आर0 जांच एवं टीकाकरण के संबंध में जानकारी दी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उठाये जा रहे कदमों के संबंध में भी प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने विस्तृत जानकारी दी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अभी और बढ़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने निर्देष देते हुये कहा कि आई0जी0आई0एम0एस0 सहित सभी सरकारी अस्पतालों में कोविड बेड की संख्या बढ़ायी जाय। इसके साथ-साथ सभी निजी अस्पतालों में भी कोविड बेड की संख्या को बढ़ायें। कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर हरेक पहलू पर गंभीरतापूर्वक विचार करें और परिस्थिति के अनुसार हर जरुरी कदम उठाएं। कोरोना जांच की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जांच की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, इससे संक्रमितों का समय पर इलाज किया जा सकेगा। अन्य राज्यों में चुनाव के लिए जो भी पुलिस बल बाहर गई है, वापस लौटने पर उनका जांच करवाएं। पुलिस बलों की भी नियमित जांच करवाते रहें। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सकों, यूनानी चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों, सेवानिवृत चिकित्सकों का भी इस महामारी से निबटने में सहयोग लें। इसके साथ-साथ अन्य प्रकार के चिकित्सा कार्य से भी जुड़े लोगों की ट्रेनिंग कराकर उनका सहयोग लिया जाय। कोरोना जांच में कुछ लोगों की आर0टी0पी0सी0आर0 रिपोर्ट निगेटिव आ रही है लेकिन उनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जा रहे हैं, ऐसे मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था अस्पतालों में सुनिश्चित करायें। उन्होंने कहा कि टीकाकरण कार्य में भी और तेजी लायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी या निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की जो जरुरत है उसको पूर्ण करने के लिए हर जरुरी कदम उठाएं। हर हाल में ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी है। जितने ऑक्सीजन आपूर्ति का अलॉटमेंट केन्द्र सरकार के द्वारा किया गया है उसके अलावा अगर और आॅक्सीजन की आवष्यकता है तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर उपलब्ध करायेगी। ऑक्सीजन सिलिंडर की बर्बादी एवं बेवजह भंडारण न हो इसका भी ध्यान रखें। दवा के साथ-साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त रखें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो। सभी नगर निकायों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मास्क का वितरण सुनिश्चित कराएं और लोगों को मास्क के प्रयोग के बारे में जानकारी दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि संचार के अन्य माध्यमों के साथ-साथ माइकिंग के द्वारा गांव-गांव तक कोरोना संक्रमण के प्रति लोगों को सतर्क और सजग करने के लिए निरंतर अभियान चलायें। सभी को यह समझाने की जरुरत है कि वे मास्क का जरूर प्रयोग करें, आपस में दूरी बनाकर रहें, हमेशा साबुन से हाथ धोते रहें, बेवजह घर से बाहर न निकलें। अगल-बगल के गांव और मुहल्लों में जो कोरोना का फैलाव हो रहा है उसके बारे में लोगों को बताएं कि आप अगर सतर्क और सजग रहेंगे तो संक्रमण का खतरा कम से कम होगा। दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com |
| Posted: 26 Apr 2021 07:25 AM PDT मीटिंग-सीटिंग-इटिंग" मीटिंग-सीटिंग-इटिंग—ये सब अनवरत-अबाध चलते रहने वाली चीजें हैं। इसके आगे-पीछे उल्टे-सीधे बयानवाजी का तड़का लग जाया करे तो अरहर की दाल में घी और जीरे के छौंक जैसा मज़ेदार हो जाया करता है। किन्तु आए दिन ये समस्या खड़ी हो जाती है कि प्राथमिकता-सूची में कौन पहले हो इन तीनों में और कौन बाद में। लोकतन्त्र के जमाने में ज्यादा लोगों की राय यही बनती है कि 'वुभुक्षितं किं न करोति पापं'- भूखा कोई भी पाप कर सकता है—के सिद्धान्त के अनुसार इटिंग को ही आगे आना चाहिए। इटिंग का तगड़ा इन्तज़ाम रहेगा, तो सीटिंग होना अपरिहार्य है और सीटिंग हो जायेगा, तो इसे मीटिंग कहने-मानने में क्या आपत्ति हो सकती है किसी को ! विरोधीदल वाले भी सहज ही स्वीकार कर लेंगे, यदि उनका पेट पूरा-पूरा भर जायेगा। "— वटेसरकाका के इन विचारों का स्वागत करुँ या विरोध जताऊँ—कुछ कहने-सोचने की मनःस्थिति में बिलकुल नहीं हूँ, क्योंकि चारों ओर संकट के काले बादल मड़रा रहे हैं। रोज अपनों का विछुड़न हो रहा है। समाचार सुनने-देखने के लिए भी हिम्मत जुटानी पड़ रही है। अपनों का क्षेत्र जिसका जितना बड़ा है, वो उतना सशंकित और उद्विग्न है इस माहौल में। मेरे मौन ने काका को कुछ और कहने की हिम्मत दी। कहने लगे— " किसान आन्दोलन का मीटिंग हो या कोरोना संकट का, किसी भी मीटिंग का बेनतीजा समाप्त हो जाना और अदालती तारीखों की तरह अगली तारीख तक टाल देना, ऐसी ही बात का संकेत है। सब अपनी-अपनी सफाई दे रहे है। चावल, दाल, सब्जी, मसाला, चूल्हा, ईंधन, वरतन सबकुछ यदि मौजूद है, खाने वाला और बनाने वाला भी तत्पर है, तो फिर भूख-भूख की चिल्लाहट क्यों—क्या ये बात गले से उतर रही है?" काका के सवाल का अब कुछ ना कुछ जवाब तो देना ही पड़ेगा। मैं भी यही सोच रहा हूँ—सारे ईन्फ्रास्क्चर यदि दुरुस्त हैं, तो फिर दिक्कत किस बात की है, क्यों हम गेंद एक-दूसरे की पाली में फेंकने को उतारु हैं? जो जहाँ है, जिस क्षेत्र में है, जितना बन पड़े लूटने में लगा है। लाशों की भी सौदेबाजी चल रही है। मौत के सौदागर चारों ओर खेमे गाड़े बैठे हैं समय के इन्तजार में। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को भी भुनाने में लगे हैं लोग—कहीं वैक्सिन पर बहस करके, तो कहीं ऑक्सीजन की स्कैर्सीटी पैदा करके। वो ज्यादा चीख-चिल्ला रहा है, जिसे लूटने का मौका नहीं मिल रहा है। क्या हमारे यहाँ योग्य डॉक्टरों की कमी है, लोहे की कमी है या अन्य मेटेरियल की कमी है या पढ़े-लिखे योग्य युवावों की कमी है या जमीन की कमी है या धन की कमी है? शायद इनमें किसी चीज की कमी नहीं है। कमी है तो सिर्फ कर्मठ-ईमानदार व्यक्ति की। कमी है तो सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति की। हम दिल से चाहते ही नहीं है कुछ होने देना। हम सिर्फ वयानबाजी में बेदम हैं। हम सिर्फ आरोप-पत्यारोप में मशगूल हैं। मरने वाला मर रहा है अपने कर्म से और जीने वाला जिन्दा है अपने भाग्य से। नेताओं और अन्य हुक्मरानों को मीटिंग-सींटिग-इटिंग से फुरसत नहीं है। मजे की बात ये है कि ऐसे संगीन वातावरण में भी मफ़्लर और दाढ़ी में नोक-झोंक चल रहा है। टोपी और टीका का नोंक-झोंक तो पुराना हो चला। दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com |
| Posted: 26 Apr 2021 07:14 AM PDT दमकल बाबा की प्रेत साधनादमकल बाबा की प्रेत साधना पता नहीं किन परिस्थितियों में उनका ये नामकरण हुआ था और किन लोगों ने उन्हें इस गरिमामय नाम से महिमा-मंडित किया था—कह नहीं सकता। नाम की सार्थकता भी कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आती—उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के इर्द-गिर्द। फिर भी उनका ये बहुचर्चित नाम स्मृतिपटल पर कभी-कभी आ ही जाता है। उनकी हरकतें ही कुछ ऐसी हुआ करती हैं कि आए दिन चर्चा में बने रहते हैं। विरोधीदल के नेताओं की तरह सुर्खियों में बने रहने लायक कुछ न कुछ हरकत वे करते ही रहते या कहें उनसे ऐसा हो जाया करता । दमकल तो आग बुझाने वाले वाहन को कहा जाता है, जिससे बेग वाली जलधारा निकलती है और हर जरुरतमन्द के पास निर्विकार भाव से सेवा के लिए तत्क्षण पहुँच जाना इसकी विशेषता है। दमकल बाबा जाति, धर्म, उम्र, नाते, रिस्ते सबसे बिलकुल ऊपर उठकर सदा मौके की तलाश में रहते और जहाँ कहीं गँजेड़ियों का गोल दिखता, चट दाखिल हो जाते। एक 'भरी' गाँजा एक ही खींच में सुड़ककर, गीदड़ की तरह ऊपर मुँह उठाकर घनघोर धुँआँ छोड़ते तो अच्छे-अच्छे गँजेड़ियों की आँखें फटी रह जाती—बाप रे बाप ! हद तो दमकल बाबा । पानी के बजाय धुँआधार धुँआँ उगलने की अद्भुत कला ही शायद इस अपभ्रंशित नाम से नवाज़ा होगा उन्हें। दरअसल दो बीघे जमीन के लोभ में ससुराल में जा बसे थे और आप जानते ही हैं कि ससुराल में असालतन रुप से आ बसना 'स्वसुरपुर निवासी स्वर्गतुल्या नराणाम्' की महनीयता वाला होता है। गांव भर की बहू-बेटियों को साली-सरहज मानियेगा, तो गांव वाले का भी हक बनता है पहुनाजी कहने का और फिर अपनी माँ, बहन, फूआ, मौसी, चाची, दादी तक जिसे जो-जो रिस्ता बनाने का मन होगा, बनायेगा ही। उसे तो उसके अधिकारों से बंचित करने का अधिकार आपको मिला नहीं होता। इसीलिए बुद्धिमान लोग ससुराल में जा बसना बहुत ही बुरा मानते हैं। किन्तु हमारे दमकल पंडित उन बुद्धिमानों में नहीं आते, इसलिए उन्हें भली-चंगी जोरु के साथ दो बीघा जमीन का लोभ खींच लाया—चलो निर्वंश ससुरे की कमाई से कुछ दिन का तो हुक्का-पानी चल ही जायेगा। दमकल पंडित कोई खास पढ़े-लिखे तो थे नहीं, बामुश्किल हनुमान चालीसा पढ़ लिया करते थे । कुछ श्लोक भी तोतारट कर लिए थे। किन्तु क्या मजाल कि एक भी नवरात्र छूटे दुर्गापाठ करने से । कभी-कभी तो श्रीमद्भागवत सप्ताह पर भी हाथ साफ कर लेते ग्रामीण यजमानों के बीच। कई गांवों में जजमनिका चलती थी स्वसुर जी की। पाँच साल के अन्दर ही दो बीघा जमीन तो 'परियानी' पर तौला गया पनसारी की दुकान में, किन्तु जजमनिका की गाड़ी खिंचाती रही। उस गाड़ी में रफ़्तार लाने के विचार से, विचार आया कि किसी तरह कुछ तन्तर-मन्तर सीख लिया जाए तो फिर चाँदी ही चाँदी रहेगी। इसी ख्याल से साल में दोनों बार विन्ध्याचल की यात्रा करने लगे। ग्रामीणों का पाठ अब विन्ध्याचल माई के दरबार में होने लगा। माई के नाम पर ज्यादा दक्षिणा और गाड़ी-भाड़ा भी मिल ही जाता, साथ ही फाँकी मारने का अच्छा-खासा मौका भी। आप जानते ही हैं कि तन्तर-मन्तर के नाम पर कामरुप-कामाख्या और विन्ध्याचल की कैसी प्रसिद्धि है समाज में। चोला रंग लो, जटाजूट बढ़ालो, बात-बात में कामरुप के सिद्ध के रुप में परिचय दो—वस हो गए तान्त्रिक। पढ़े-लिखे समाज में भी ज़ाहिलों की कमी थोड़े जो है। और उनके बदौलत दौलत, शोहरत, इज्जत सबकुछ पैरों तले लोटने लगेगा थोड़े ही दिनों में। ऊपर और नीचे वाली एक-एक इन्द्रियों को जरा काबू में रख लो, तो लम्बे समय तक समाज में टिके भी रह जाओगे—इस गुरुमन्त्र का पूरा-पूरा पालन करते थे दमकल पंडित। अगली पीढ़ी भले ही लम्पटाधिराज हो गयी,किन्तु मज़ाल है कि दमकल पंडित के चरित्र पर किसी ने उँगुली उठायी हो आज तक। लोगों की भद्दी-भद्दी गालियों और मजाकों का जवाब भी महज मधुर मुस्कान से दे दिया करते दमकल पंडित। उस बार विन्ध्याचल से बड़ी प्रसन्न मुद्रा में लौटे—मानों अल्लादीन का चिराग़ ही हाथ लग गया हो। लोगों के पूछने पर दमकल पंडित ने बतलाया कि गुरु महाराज ने 'घटिकासिद्धि' का मन्त्र दे दिया है। थोड़े ही दिनों में इसे नदी किनारे वाले श्मशान में जाकर सिद्ध कर लेना है। गुरुमन्त्र तो कहने-बताने की चीज नहीं है, पर ग्रामिणों की उत्सुकता जगाने के लिए विधि की विधिवत व्याख्या कर दी दमकल जी ने। विधि बस इतनी ही है— मृत्यु के दूसरे दिन पीपल वृक्ष में मृतक प्राणी की तुष्टी हेतु जलपूर्ण घटिका टांगी जाती है। अमावस्या की अर्द्धरात्रि में उस स्थान पर जाकर, वृक्ष को प्रणाम करे और अपना उद्देश्य बतलाते हुए, शरीर पर से सारे वस्त्र उतार दे, यहाँ तक की जनेऊ भी न रहे । अब गुरुमन्त्र का वाचिक उच्चारण जोरों से करते हुए, बायें हाथ की मुट्ठी से घटिका पर प्रहार करे। शर्त ये है कि भग्न घटिका का कोई एक टुकड़ा जमीन पर गिरने से पहले ही सम्भाल लेना है और साथ ही अपने वस्त्र को भी। इन दोनों पर एक साथ ही काबू पाना है, अन्यथा सबकुछ बेकाबू हो जायेगा। घटिका का टुकड़ा यदि जमीन पर गिर गया तो सिद्धि नहीं मिलेगी और यदि अपने कपड़े पर नियन्त्रण नहीं कर पाये, तो प्रेत साक्षात उपस्थित होकर फुटबॉल बना देगा साधक की खोपड़ी का। सौभाग्य से यदि दोनों कार्य में सफल हो गए, तो प्रेत का दर्शन सौम्य रुप में होगा और आजीवन दास बन जायेगा। उससे जो-जो कर्म-कुकर्म कराना हो, कराते रहिए । अगले ही दिन दमकल पंडित ने थोक भाव से मटकी खरीदी और अमावस्या की सिद्धि निष्फल न जाए, इस विचार से रात्रि-अभ्यास शुरु कर दिए। निविड़ अन्धकार में श्मशान का सन्नाटा बड़े-बड़े हिम्मतवरों का कलेजा कंपा देता है। दमकल बाबा कितने हिम्मतवर हैं, कौतूहल पूर्ण जिज्ञासा कई लोगों को सताने लगी। कुछ-कुछ योजनाएं भी बनने लगी। बाबा जी रात्रि भोजन के बाद कुछ देर विश्राम करते और फिर हिम्मत जुटाकर श्मशान की ओर चल देते एक मटकी लेकर। ये सिलसिला सप्ताह भर तक चला। शनैः-शनैः हिम्मत बुलन्द होता गया। रात का अनुभव सुनाने की शेखी भी बढ़ती गयी। आठवाँ दिन भी सही सलामत गुजर गया, किन्तु नौवें दिन जो कुछ घटित हुआ वो आजीवन यादगार बन गया। रोज की भाँति सहज रुप से कपड़े उतारे और वृक्ष से लटकती मटकी पर मन्त्रोच्चारण करते हुए घुस्सा मारे। टुकड़े को सहर्ष हाथों में लेकर जैसे ही कपड़े की ओर दूसरा हाथ बढ़ाए,तभी भयंकर आवाज आयी और वृक्ष के ऊपर के कोई धब्ब से नीचे कूदा। अन्धेरी रात में भी एक विशेष प्रकार की चमक होती है। दमकल पंडित ने देखा—एक विकराल मानवाकृति, जो आपादमस्तक एकदम धुनी हुयी रुई के समान थी। उसकी वलिष्ठ भुजाएं इनके गले की ओर बढ़ रही थी। पंडितजी के मुँह से जोरों की चीख निकली—अरे बाप रे ! और चारोखाने चित हो गए। दमकल बाबा को होश तब आया, जब सबेरा हो चुका था और गांववाले चारो ओर से उन्हें घेरकर, टीन पीटते हुए चिल्ला रहे थे— 'दमकल बाबा सिद्ध हो गए…दमकल बाबा सिद्ध हो गए...। ' उतारे गए कपड़े पास में थे नहीं। निर्वस्त्र गोपियों का चीरहरण प्रियतम कृष्ण ने किया था, विवस्त्र दमकल बाबा का चीरहरण भी किसी प्रिय ने ही किया होगा। लाचार होकर नदी की ओर भागे ताकि जलमग्न होकर लाज़ बचायी जा सके। किन्तु वहाँ भी पहले से ही सुनियोजित भीड़ इकट्ठी थी। फलतः गांव की ओर, अपने घर की ओर पलायन करना ही उचित लगा; परन्तु वहाँ भी जीवन भर का अरमान लिए सालियों की तालियाँ स्वागत में तत्पर थी। सालियाँ तो ऐसे मौके की तलाश में सदा रहती ही हैं। नंग-धड़ंग दमकल पंडित को पूरे गांव का चक्कर लगवाकर कर ही दम लीं। जय हो दमकलबाबा की। दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com |
| Posted: 26 Apr 2021 06:39 AM PDT आज 27- अप्रैल - 2021, मंगलवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |श्री गणेशाय नम: !! दैनिक पंचांग ☀ 27 - Apr – 2021 मंगलवार तिथि : पूर्णिमा दिन 09:31:22 · नक्षत्र स्वाति रात्रि 09:26:23 करण : बव 09:03:15 बालव 19:09:46 · पक्ष शुक्ल · योग सिद्धि 20:02:07 · वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ · सूर्योदय 05:34:18 · चन्द्रोदय 19:17:00 · चन्द्र राशि तुला · सूर्यास्त 18:26:13 · चन्द्रास्त 05:50:59 · ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष · शक सम्वत 1943 प्लव · कलि सम्वत 5123 · दिन काल 13:09:16 · विक्रम सम्वत 2078 · मास अमांत चैत्र · मास पूर्णिमांत चैत्र
☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय · अभिजित 11:52:43 - 12:45:20 ☀ अशुभ समय · दुष्टमुहूर्त 08:22:15 - 09:14:52 · कंटक 06:37:01 - 07:29:38 · यमघण्ट 10:07:29 - 11:00:06 · राहु काल 15:36:21 - 17:15:00 · कुलिक 13:37:57 - 14:30:34 · कालवेला या अर्द्धयाम 08:22:15 - 09:14:52 · यमगण्ड 09:01:43 - 10:40:22 · गुलिक काल 12:19:02 - 13:57:41 ☀ दिशा शूल · दिशा शूल उत्तर ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल · अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद ☀ चन्द्रबल · मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर · विशेष ~ स्नान-दान की पूर्णिमा, चैत्री पूर्णिमा, श्रीहनुमञ्जयन्ती, भरणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश रात्रि 02:32:11 से। 🌹 आज का दैनिक राशिफल 27 - अप्रैल - 2021, मंगलवार · मेष (Aries): घर परिवार में सुख सौख्य बना रहेगा। भव्य भवन एवं वाहन की अभिलाषा को बल मिलेगा। कामकाज सहज रहेगा। अहम् भाव से दूर रहेंं। दिन शुभकारक। शुभ रंग = लाल शुभ अंक : 5 · वृषभ (Tauras): शुभ सूचनाओं का आदान प्रदान बना रहेगा। बंधुजनों के साथ और समर्थन मिलेगा। भाग्य पक्ष की प्रबलता बनी रहेगी। आलस्य से बचे रहें। अनुशासन पर जोर देंगे। शुभ रंग = फीरोजा शुभ अंक : 6 · मिथुन (Gemini): श्रेष्ठ कार्याें में प्रमुखता से शामिल होंगे। विवाह योग्य अच्छे प्रस्ताव प्राप्त करेंगे। परिजनों के साथ सुख सौख्य से समय बीतेगा। मेहमानों की आवक बनी रह सकती है। शुभ रंग = क्रीम शुभ अंक : 2 · कर्क (Cancer): मान प्रतिष्ठा बढ़त पर रहेगी। निजी जीवन में शुभता का संचार रहेगा। साथी उपलब्धि अर्जित कर सकता है। दिन उत्तम फलकारक। निसंकोच आगे बढ़ें। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 · सिंह (Leo): मूल्यवान वस्तु क्रय कर सकते हैं। कला प्रियता बढ़ेगी। रिश्तों की मधुरता बनाए रखेंगे। खर्च पर अंकुश रखें। दिन सामान्य से शुभफलकारक। सुनी सुनाई पर यकीन न करें। शुभ रंग = पींक शुभ अंक = 8 · कन्या (Virgo): आर्थिक अवसरों की अधिकता बनी रहेगी। करियर कारोबार में उछाल के संकेत हैं। शिक्षा प्रेम और संतान पक्ष में शुभता बनी रहेगी। तेजी बनाए रखें। दिन उत्तम। शुभ रंग = आसमानी शुभ अंक : 7 · तुला (Libra): प्रभावशीलता और कार्यशीलता बढ़त पर रहेंगे। मान सम्मान में वृद्धि होगी। सुअवसरों को भुनाने का प्रयास करेें। सभी सहयोगी होंगे। दिन उत्तम फलकारक। शुभ रंग = फीरोजा शुभ अंक : 6 · वृश्चिक (Scorpio): भाग्य की प्रबलता बनी रहेगी। धार्मिक कार्याें में रुचि लेंगे। मनोबल ऊंचा रहेगा। तेजी बनाए रखें। संपर्क और संबंध बेहतर होंगे। सराहना मिलेगी। दिन हितकर। शुभ रंग = लाल शुभ अंक : 5 · धनु (Sagittarius): आकस्मिक सफलता संभव है। परिजनों के सहयोग से उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते रहेंगे। अनुशासन और निरंतरता बनाए रखें। दिन अप्रत्याशित है। कम बोलें। शुभ रंग = पीला शुभ अंक : 9 · मकर (Capricorn): सहकारिता और साझेदारी को बल मिलेगा। निजी जीवन में शुभता का संचार रहेगा। साथी उपलब्धि अर्जित कर सकता है। तेजी बनाए रखें। दिन उत्तम फलकारक। शुभ रंग = फीरोजा शुभ अंक : 6 · कुंभ (Aquarius): मेहनत पर भरोसा बढ़ेगा। स्वयं को काम में जुटाए रखें। नौकरीपेशा अच्छा करेंगे। अफवाहों पर ध्यान न दें। खर्च बढ़ा हुआ रहेगा। दिन सामान्य से शुभ। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 · मीन (Pisces): हर्ष आनंद से समय बीतेगा। जीत का प्रतिशत बेहतर बना रहेगा। शिक्षा संतान और प्रेम पक्ष हितकर रहेंगे। तेजी बनाए रखें। दिन मित्रता को बल देने वाला। शुभ रंग = पीला शुभ अंक : 9 दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com |
| Posted: 26 Apr 2021 06:20 AM PDT मद्रास उच्च न्यायालय ने कोरोना दिशा निर्देश का पालन नहीं करवाने के लिए सीधे-सीधे चुनाव आयोग को दोषी ठहरायापटना महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के पूर्व उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता राकेश कपूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पहली बार उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के आलोचना की शिकार होकर दबाव में आई है। कार्यपालिका व संसदीय पद्धति के पंगु होने के बाद न्यायपालिका का देशहित में जनता के अधिकारों पर संज्ञान लेते हुए स्वस्थ लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाया गया यह कदम वाकई सराहनीय है। राकेश कपूर ने बताया कि पिछले दिनों में कुछ न्यायाधीशों ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए न्याय और देशहित की अवहेलना भी की है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने भी स्वर्गीय टी एन शेषण जी द्वारा स्थापित आयोग की प्रतिष्ठा और गरिमा गवाई है। इस बीच बड़ी खबर है कि मद्रास उच्च न्यायालय ने कोरोना दिशा निर्देश का पालन नहीं करवाने के लिए सीधे-सीधे चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है और उनके अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की बात तक कह डाली है। इन उच्च न्यायालयों की टिप्पणियों के बाद उच्चतम न्यायालय को भी स्वतः संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय सरकार व चुनाव आयोग के खिलाफ उचित कदम उठाना चाहिए। महानगर जिला कांग्रेस कमिटी के पूर्व उपाध्यक्ष ने अपने व्यान में कहा कि देश के वर्तमान विस्फोटक स्थिति पर विदेशों में भी मोदी सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना से देश की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। राकेश कपूर ने कहा कि मोदी सरकार कोरोना से देश की दुर्गति पर घिरती नजर आ रही है। अपनी छवि बचाने के लिए आपातकाल का विरोध करने वाली यह केन्द्रीय सरकार इसी का सहारा लेकर विरोधियों का मुँह बन्द कर सकती है। देश की जनता को सभी परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए तैयार होने की जरूरत है। दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com |
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