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Thursday, November 18, 2021

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पुलिस पदाधिकारी के द्वारा जज के साथ गली गलौज

Posted: 18 Nov 2021 05:19 AM PST

पुलिस पदाधिकारी के द्वारा जज के साथ गली गलौज 

हमारे संवाददाता लक्ष्मण पाण्डेय की खबर 
मधुबनी जिला के झंझारपुर अनुमंडल कोर्ट मे पदस्थापित ए डी जे श्री अविनाश कुमार के साथ आज 2 बजे अपराहन दो पुलिस पदाधिकारी जज के चैंबर मे घुस के जज के साथ गली गलौज किया तथा जज के साथ मारपीट भी किया। हो हल्ला पर जब वकील लोग चैंबर मे गए तब जाकर जज साहेब को बचाया गया। यही है शुशाशन बाबू का शासन।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

आज 19 नवम्बर 2021, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 18 Nov 2021 05:15 AM PST

आज 19 नवम्बर 2021, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

श्री गणेशाय नम: !!
19 नवम्बर 2021, शुक्रवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि पूर्णिमा दिन 01:20:25

🔅 नक्षत्र कृत्तिका रात्रि 04:02:15

🔅 करण :

                बव 14:29:33

                बालव 27:47:25

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग परिघ 27:50:01

🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:38:27

🔅 चन्द्रोदय 17:27:59

🔅 चन्द्र राशि मेष - 08:13:48 तक

🔅 सूर्यास्त 17:22:22

🔅 चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं

🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 10:39:36

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत कार्तिक

🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:44:57 - 12:27:35

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त :

                    08:54:23 - 09:37:01

                    12:27:35 - 13:10:14

🔅 कंटक 13:10:14 - 13:52:52

🔅 यमघण्ट 16:00:48 - 16:43:26

🔅 राहु काल 10:46:19 - 12:06:16

🔅 कुलिक 08:54:23 - 09:37:01

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 14:35:31 - 15:18:09

🔅 यमगण्ड 14:46:10 - 16:06:07

🔅 गुलिक काल 08:06:25 - 09:26:22

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

🌹विशेष ~ स्नान-दान की पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, गुरू नानक जयन्ती, काशी देव दीपावली महोत्सव, सायं मत्स्यावतार, हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला पुष्कर स्नान महोत्सव, भीष्म पंचक समाप्ति, कार्तिकेय दर्शन, श्रीमहाबीर रथोत्सव (जैन)। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय्

19 नवम्बर 2021, शुक्रवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries):जो भी करें सुनियोजित तरीके से करें। निम्न सोच के लोगों से स्वयं को दूर रखें। अप्रत्याशित घटनाक्रम बना रह सकता है। विपक्ष सक्रियता बढ़ाएगा। दिन सामान्य।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 2

वृषभ (Tauras):उत्साह बढ़ा हुआ रहेगा। उतावलेपन में कोई कार्य न करें। अच्छे मित्र की पहचान करना सीखें। दिन शुभकारक। बौद्धिकता बढ़त पर रहेगी। एकाग्रता पर ध्यान दें।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

मिथुन (Gemini):घरेलु मामलों में जल्द प्रतिक्रिया देने से बचें। बड़ों के सम्मान और सहजता का ध्यान रखें। दूर देश जाना पड़ सकता है। दिन सामान्य फलकारक। हर हाल खुश रहें।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer):महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हो सकती है। जन संचार के क्षेत्र से जुड़े लोग बेहतर करेंगे। बंधुत्व भाव बढ़ेगा। मेहनत पर भरोसा रखें। अनुशासन पर जोर दें। दिन शुभ।

शुभ रंग = फीरोजा़

शुभ अंक : 6

सिंह (Leo):घर परिवार में शुभता का संचार रहेगा। वाणी व्यवहार पर नियंत्रण रखें। औरों से अधिक अपेक्षा न रखें। पूर्वाग्रह से बचें। दिन धन संग्रह में सहायक।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 1

कन्या (Virgo):समझ और संवेदनशीलता बढ़त पर रहेगी। निम्न स्तर के लोगों के सहयोग बड़ी सफलता अर्जित कर सकते हैं। दाम्पत्य में सहजता पर जोर दें। दिन हितकर।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra):योजन बनाकर खर्च करें। अप्रत्याशित घटनाक्रम बजट बिगाड़ सकता है। रिश्तों में अति से बचें। निम्न श्रेणी के लोगों से दूरी रखें। दिन सामान्य फलकारक।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

वृश्चिक (Scorpio):समाज में कम महत्व के माने जाने कार्यों में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। प्रेम संबंध बेहतर रहेंगे। करियर कारोबार में अधिकाधिक समय दें। दिन हितकर।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

धनु(Sagittarius):अधिकनस्थों और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। कामकाज में अति उत्साह से बचें। सम्मान बढ़त पर रहेगा। गोपनीयता का ध्यान रखें। दिन शुभ फलकारक।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn):धर्म- मनोरंजन में रुचि रहेगी। यात्रा पर जा सकते हैं। पुरातात्विक व ऐतिहासिक क्षेत्र से जुड़े लोग अच्छा करेंगे। पूर्व के श्रेष्ठ प्रयासों का लाभ मिलेगा। दिन भाग्यकारक।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

कुंभ (Aquarius):धीरज से काम लें। अनुशासन और निरंतरता बनाए। कोई गोपनीय बात उजागर होने की आशंका है। भेंट के लिए समय लेकर निकलें। दिन सामान्य फलकारक।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

मीन (Pisces):पारिवारिक मामलों में जल्दबाजी से बचें। किसी से कोई वादा करें तो निभाने का प्रयास करें। साझीदारी में ध्यान देने की जरूरत है। दिन स्थायित्व को बल देने वाला।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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पोलैण्ड व बेलारूस के बीच तनाव तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक!

Posted: 18 Nov 2021 05:04 AM PST

पोलैण्ड व बेलारूस के बीच तनाव तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक!

नई दिल्ली। पोलैंड और बेलारूस के बीच का तनाव क्या तीसरे विश्वयुद्ध के आरंभ की वजह बन सकता है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि पोलैंड और बेलारूस के बॉर्डर पर शरणार्थियों को लेकर विवाद इतना बढ़ चुका है कि टैंक और मिसाइलें तक तैनात कर दी गई हैं और परमाणु हमले की धमकी दी जा रही है। आज हम आपको आसान भाषा में समझाएंगे कि क्या यूरोप में युद्ध होने वाला है? क्या ये तनाव विश्व युद्ध में बदलने वाला है? और इस वक्त दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर क्या हालात हैं?
अब क्योंकि इस विवाद में पोलैंड का नाम भी है तो लोगों के जेहन में दूसरे विश्व युद्ध की यादें ताजा हो सकती हैं। आपने पढ़ा होगा कि दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत पोलैंड से ही हुई थी। 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया। इस हमले के दो दिन बाद फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और वो युद्ध विश्व युद्ध में बदल गया था। इस बार पोलैंड के सामने बेलारूस है, जो रूस का दोस्त है। पोलैंड और बेलारूस के बीच बॉर्डर पर घमासान मचा है। बॉर्डर पर शरणार्थियों की भीड़ है और ये इलाका बेलारूस में पड़ता है। बीच में लंबी फेंसिंग है, जिसकी दूसरी तरफ पोलैंड है। बॉर्डर पर पोलैंड के सुरक्षाकर्मी घेरा बनाकर तैनात हैं और हथियार सामने खड़ी भीड़ पर तने हैं। इसके अलावा शरणार्थियों के खिलाफ वॉटरकैनन का इस्तेमाल किया जा रहा है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इन्हें बॉर्डर क्रॉस करने से रोकने के लिए वाटर अटैक हो रहा। बॉर्डर पर शरणार्थियों की भीड़ में बच्चे भी हैं और महिलाएं भी।

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दक्षिण कोरिया में कोरोना के रिकार्ड मामले

Posted: 18 Nov 2021 05:01 AM PST

दक्षिण कोरिया में कोरोना के रिकार्ड मामले

सियोल। दक्षिण कोरिया में बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 3,292 नए मामले सामने आए जो कि महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक सामने आए दैनिक मामलों की सर्वाधिक संख्या है। कोरिया रोग नियंत्रण और रोकथाम एजेंसी ने यह जानकारी दी। वायरस के डेल्टा प्रकार के संक्रमण के खतरे के बीच, कॉलेज में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के वास्ते हजारों की संख्या में छात्र मास्क लगाकर स्कूल पहुंचे। दक्षिण कोरिया में लगातार दूसरे दिन संक्रमण के 3,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही यहां कोविड-19 महामारी के कुल मामले बढ़कर 4,06,065 हो गए।
एजेंसी ने कहा कि पिछले 24 घंटे में कोविड-19 से 29 मरीजों की मौत हो गई, इसके बाद मृतकों की कुल संख्या 3,187 पर पहुंच गई। देश में 506 उपचाराधीन मरीजों की हालत गंभीर या नाजुक बताई गई है। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि देशभर में 1,395 परीक्षा स्थलों पर 5,09,000 छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। स्कूलों में कक्षा में प्रवेश से पहले छात्रों का तापमान मापा जा रहा है और जिन छात्रों को बुखार है उन्हें अलग परीक्षा केंद्रों पर भेजा जा रहा है।

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बीस महीने बाद खुला करतारपुर गलियारा

Posted: 18 Nov 2021 04:58 AM PST

बीस महीने बाद खुला करतारपुर गलियारा

गुरदासपुर। करतारपुर गलियारा 20 महीने के अंतराल के बाद फिर से खुलने पर कई श्रद्धालुओं ने इससे होकर यात्रा की और अन्य ने भी पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारा में मत्था टेकने की योजना बनाई है। गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक निवासी कंवलजीत सोढ़ी ने कहा, ''हमारी खुशी का उस वक्त कोई ठिकाना नहीं रहा, जब हमें करतारपुर गलियारा के फिर से खुलने का पता चला और यह खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहने कहा था कि सरकार ने करतारपुर साहिब गलियारा 17 नवम्बर से फिर से खोलने का फैसला किया है। करतारपुर गलियारा पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है। दरबार साहिब में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताये थे। गुरुनानक जयंती पर गुरु पर्व 19 नवंबर को मनाया जाएगा।
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भूटानी क्षेत्र में चीन ने बसाए गांव

Posted: 18 Nov 2021 04:55 AM PST

भूटानी क्षेत्र में चीन ने बसाए गांव

नई दिल्ली। चीनी सैन्य विकास पर एक वैश्विक शोधकर्ता द्वारा ट्वीट की गई नई सैटेलाइट तस्वीरों में भूटानी क्षेत्र में चीनी गांवों का निर्माण दिखाई दे रहा है। यह क्षेत्र डोकलाम के पास भूटान और चीन के बीच विवादित भूमि पर स्थित है, जिसमें 2020 और 2021 के बीच की अवधि में निर्माण गतिविधि दिखाई गई थीं। अब, लगभग 100 वर्ग किमी के क्षेत्र में कई नए गांव फैले हुए दिखाई दे रहे हैं। चीन द्वारा उठाया गया यह कदम भारत के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि भूटान की सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत वहां एक सीमित सशस्त्र बल रखता है। इसका पड़ोस पर व्यापक भू-रणनीतिक प्रभाव भी पड़ेगा। चीन-भारत सीमा पर चीनी सैन्य विकास पर मुख्य वैश्विक शोधकर्ताओं में से एक ने अपने ट्वीट में लिखा, डोकलाम के पास भूटान और चीन के बीच विवादित भूमि 2020-21 के बीच निर्माण गतिविधि को दर्शाता है। लगभग 100 किमी. के क्षेत्र में कई नए गांव फैल गए हैं। क्या यह एक नए समझौते या चीन के क्षेत्रीय दावों को लागू करने का हिस्सा है? गांवों का निर्माण मई 2020 और नवंबर 2021 के बीच किया गया था और यह भूटान और चीन के बीच एक सीमा समझौते के दौरान हुआ।
थ्री-स्टेप रोडमैप पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा, हमने आज भूटान और चीन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। आप जानते हैं कि 1984 से भूटान और चीन सीमा वार्ता कर रहे हैं। भारत इसी तरह चीन के साथ सीमा वार्ता कर रहा है।

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देवता भी मनाते हैं दीपावली

Posted: 18 Nov 2021 04:50 AM PST

देवता भी मनाते हैं दीपावली

(पं. आर.एस. द्विवेदी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
अंधकार पर प्रकाश की विजय पर्व इंसान ही नहीं देवता भी मनाते हैं। भारतीय परम्परा में अज्ञान के अंधेरे को ज्ञान का प्रकाश ही दूर कर सकता है। हमारी संस्कृति में प्रकृति को देवता मानने की परम्परा रही है। कार्तिक मास की अमावस्या को हम दीपावली मनाते हैं और इसमें 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को देवता दीपावली मनाते हैं। इस दिन नदियों, नालों को दीप से सजाया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रकृति के संरक्षण का पर्व देव दीपावली हैं। हालांकि इस पर्व से भी कई कहानियां जुड़ी हैं। देव दीपावली का संबंध त्रिपुरापुर के वध से जुड़ा है। त्रिपुरा सुर के वध से देवता खुश हुए और दीप जलाए गए। देव दीपावली के मूल में भगवान शंकर हैं। उन्होंने ही देवताओं और मनुष्यों के साथ-साथ प्रकृति के विनाश को आतुर राक्षस त्रिपुरासुर का वध कार्तिका पूर्णिमा के ही दिन किया था। इसी उत्साह में देवताओं ने दीपावली मनाई थी, जिसे हम आज देव दीपावली के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि देवलोक से गंधर्व, किन्नर, देव आदि इस दिन गंगा और अन्य नदियों के किनारे उपस्थित होकर देव दीपावली मनाते हैं। इसी कारण हम नदियों में दीपदान कर व दीपों से घाटों को सजाकर हम देवताओं के संग दीपावली मनाते हैं। एक अन्य कथा है कि राजा त्रिशंकु को जब विश्वामित्र ने अपने तपोबल से स्वर्ग पहुंचा दिया, तो देवताओं ने उन्हें स्वर्ग से नीचे गिरा दिया। अधर में लटकते त्रिशंकु की पीड़ा विश्वामित्र से देखी नहीं गई। यह उनका भी अपमान था। इससे क्षुब्ध होकर एक नए संसार की रचना करनी शुरू कर दी। माना जाता है कि कुश, मिट्टी, ऊंट, बकरी-भेड़, नारियल, कद्दू, सिंघाड़ा जैसी चीजें उन्होंने ने ही बनाई थी। यहां तक कि उन्होंने त्रिदेवों की प्रतिमाएं बनाकर उसमें प्राण फूंक दिए थे। नतीजा यह हुआ कि प्रकृति में असंतुलन पैदा हो गया। सारा चराचर जगत अकुला उठा। बाद में जब देवताओं ने इस प्राकृतिक असंतुलन की ओर विश्वामित्र का ध्यान आकृष्ट कराया, तो उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। इन दोनों कथाओं, ऐतिहासिक आख्यानों का निहितार्थ अगर खोजें, तो यही है कि हमें प्रकृति को असंतुलित होने से बचाना होगा। देव दीपावली एक अवसर के समान है कि हम पर्यावरण के यज्ञ में अपनी भी आहुति देने का संकल्प लें। करोड़ों लोगों को जीवन देने वाली अधिकांश नदियों का पानी आज प्रदूषण के कारण उपयोग योग्य नहीं रह गया है। आक्सीजन की मात्रा कम होने से जलीय जीव विलुप्त हो रहे हैं। ऐसे में देव दीपावली जैसा पावन पर्व संदेश देता है कि नदियों में दीपदान कर हमें उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और जीवनदायिनी बनाने में योगदान देना चाहिए। हम अपनी नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का संकल्प लेकर देवताओं के साथ उनकी दीपावली मना सकते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था. उसके तीन पुत्र थे- तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली. भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिक ने तारकासुर का वध किया। अपने पिता की हत्या की खबर सुन तीनों पुत्र बहुत दुखी हुए. तीनों ने मिलकर ब्रह्माजी से वरदान मांगने के लिए घोर तपस्या की ब्रह्माजी तीनों की तपस्या से प्रसन्न हुए और बोले कि मांगों क्या वरदान मांगना चाहते हो. तीनों ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने को कहा। इसके बाद तीनों ने किसी दूसरे वरदान के बारे में सोचा और इस बार ब्रह्माजी से तीन अलग नगरों का निर्माण करवाने के लिए कहा- जिसमें सभी बैठकर सारी पृथ्वी और आकाश में घूमा जा सके। एक हजार साल बाद जब हम मिलें और हम तीनों के नगर मिलकर एक हो जाएं और जो देवता तीनों नगरों को एक ही बाण से नष्ट करने की क्षमता रखता हो, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया। तीनों वरदान पाकर बहुत खुश हुए. ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया. तारकक्ष के लिए सोने का, कमला के लिए चांदी का और विद्युन्माली के लिए लोहे का नगर बनाया गया। तीनों ने मिलकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया. इंद्र देवता इन तीनों राक्षसों से भयभीत हुए और भगवान शंकर की शरण में गए. इंद्र की बात सुन भगवान शिव ने इन दानवों का नाश करने के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया।
इस दिव्य रथ की हर एक चीज देवताओं से बनीं. चंद्रमा और सूर्य से पहिए बने. इंद्र, वरुण, यम और कुबेर रथ के चार घोड़े बनें. हिमालय धनुष बने और शेषनाग प्रत्यंचा बनें। भगवान शिव खुद बाण बनें और बाण की नोंक बने अग्निदेव. इस दिव्य रथ पर सवार हुए खुद भगवान शिव. भगवानों से बनें इस रथ और तीनों भाइयों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जैसे ही ये तीनों रथ एक सीध में आए, भगवान शिव ने बाण छोड़ तीनों का नाश कर दिया. इसी वध के बाद भगवान शिव को त्रिपुरारी कहा जाने लगा। यह वध कार्तिक मास की पूर्णिमा को हुआ, इसीलिए इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाने लगा।
भगवान विष्णु और भगवान शिव के भक्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन उपवास करते हैं, और सुबह जल्दी स्नान करके और कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा पढ़कर अपने दिन को प्रारम्भ करते हैं। यह कथा राक्षस त्रिपुरासुर के अंत की कहानी बताती है। प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि एक बार त्रिपुरासुर नामक एक दानव देवताओं को परास्त करने में सफल रहा और अंततः उसने पूरे विश्व पर विजय प्राप्त कर ली। ऐसा माना जाता है कि उसने अंतरिक्ष में तीन शहर बनाए और उनका नाम त्रिपुरा रखा। इस समय, भगवान शिव देवताओं को बचाने के लिए आए और इस राक्षस का अपने धनुष बाण से वध कर दिया और घोषणा की कि इस दिन को रोशनी एवं प्रकाश के त्योहार के रूप में मनाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा को वृंदा की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिसे तुलसी के पौधे का मानवीय रूप माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मछली के रूप वाले अवतार मत्स्य के जन्मदिन का भी प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म भी इसी दिन हुआ था। कार्तिक माह के अंतिम पांच दिनों को सबसे पवित्र दिन माना जाता है और भक्त दिन में केवल एक बार दोपहर में भोजन करते हैं, जिसे हबीशा के नाम से जाना जाता है।
हिंदू धर्म ग्रंथों में यह सही कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा व्रत और पूजा अर्चना, धर्म, कर्म और मोक्ष का मार्ग प्रदान करती है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

सिडनी संवाद की सार्थकता

Posted: 18 Nov 2021 04:47 AM PST

सिडनी संवाद की सार्थकता

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
दुनिया भर मंे क्षेत्रीय सहयोग और संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम मंे आस्ट्रेलिया ने भारत और जापान के साथ मिलकर एक संवाद का आयोजन किया है। यह संवाद सिडनी संवाद के नाम से जाना जाता है। जापान और आस्ट्रेलिया भी भारत की तरह उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट माॅरिसन ने इसीलिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन को सम्मान की बात बताया। कोरोना संक्रमण के चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था तो पूरी तरह चैपट हो गयी है लेकिन भारत ने कोरोना संक्रमण से निपटते हुए अर्थव्यवस्था को भी गिरने नहीं दिया। देश मंे सौ करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकारण किया जा चुका है और हम दूसरे देशों की मदद भी कर रहे हैं। श्री मोदी ने बताया कि भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाया गया है। भारत में पांच महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। इसमंे युवाओं को भूमिका सौंपी जाती है और देश के 6 लाख गांवों को जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल करंसी-क्रिस्टो करंसी को लेकर सावधान भी किया है। उन्होंने कहा कि सभी देश मिलकर इस दिशा मंे काम करें ताकि यह मुद्रा गलत हाथों में न पड़े। सिडनी संवाद राजनेताओं, उद्योग ़क्षेत्र की हस्तियों और सरकारी प्रमुखों को व्यापक चर्चा के लिए बेहतर मंच दे रहा है। इस तरह के संवाद अन्य देशों मंे भी होने चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 नवम्बर को 'सिडनी संवाद' में 'भारत में प्रौद्योगिकी विकास तथा क्रांति' विषय पर मुख्य संबोधन दिया। 'सिडनी संवाद' 17 से 19 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है। यह ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक पहल है। पीएम मोदी की तरफ से सिडनी संवाद को संबोधित करने को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सम्मान की बात बताया है। मॉरिसन ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया और भारत की दोस्ती बहुत गहरी है और समय के साथ हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे। हम अंतरिक्ष, विज्ञान, डिजिटल टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में काफी प्रगति कर रहे हैं। यह ऑस्ट्रेलिया के लिए सम्मान की बात है कि पीएम मोदी सिडनी संवाद को संबोधित कर रहे हैं।'
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में 'प्रौद्योगिकी विकास और क्रांति' थीम पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके संबोधन से पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने उद्घाटन भाषण दिया। 'सिडनी संवाद' दरअसल राजनेताओं, उद्योग क्षेत्र की हस्तियों और सरकारी प्रमुखों को व्यापक चर्चाएं करने, नए विचार सृजित करने और उभरती एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न अवसरों एवं चुनौतियों की सामान्य समझ विकसित करने की दिशा में काम करने के लिए एक मंच पर लाने का प्रयास है।
पीएम मोदी ने कहा, 'भारत में पांच अहम बदलाव हो रहे हैं। हम सबसे व्यापक पब्लिक इंफर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं। हम 60 हजार गांवों को जोड़ने की राह पर है।' उन्होंने कहा, 'हमने कोविन और आरोग्य सेतु का उपयोग कर तकनीक के इस्तेमाल से भारत में वैक्सीन के 110 करोड़ डोज पहुंचाए हैं।' इस दौरान पीएम मोदी ने अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र और डिजिटल अगुआ के रूप में भारत साझा समृद्धि और सुरक्षा के लिए साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है। भारत की डिजिटल क्रांति की जड़ें हमारे लोकतंत्र, हमारी जनसांख्यिकी और हमारी अर्थव्यवस्था के पैमाने से जुड़ी हुई हैं। इसे हमारे युवाओं के नवाचार और उद्यम ने ताकत दी है।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सिडनी संवाद' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की तकनीकी क्षमता को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए भी एक सम्मान है।
पीएम मोदी ने देश में वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से सम्मेलन में भी विचार रखा। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने निर्बाध ऋण प्रवाह और आर्थिक विकास के लिए तालमेल बनाना' विषय पर चर्चा की। उन्होंने कहा है कि सरकार के प्रयासों से आज भारत का बैंकिंग क्षेत्र बहुत मजबूत स्थिति में है। साथ ही उन्होंने जनधन समेत सरकार की तरफ से लिए गए नए फैसलों पर भी बात की।
पीएम मोदी ने कहा, 'सरकार ने बीते 6-7 वर्षों में बैंकिंग सेक्टर में जो सुधार किए, बैंकिंग सेक्टर का हर तरह से सपोर्ट किया, उस वजह से आज देश का बैंकिंग सेक्टर बहुत मजबूत स्थिति में है। आप भी ये महसूस करते हैं कि बैंकों का आर्थिक स्वास्थ्य अब काफी सुधरी हुई स्थिति में है।' उन्होंने कहा, '2014 के पहले की जितनी भी परेशानियां थीं, चुनौतियां थीं हमने एक-एक करके उनके समाधान के रास्ते तलाशे हैं। हमने एनपीए की समस्या को एड्रेस किया, बैंकों को रिकैपिटलाइज किया, उनकी ताकत को बढ़ाया।' पीएम मोदी ने कहा, '2014 में बैंकों की शक्ति को पहचान कर मैंने उनको आहृवान किया की मुझे जन-धन अकाउंट का बड़ा मूवमेंट खड़ा करना है, मुझे गरीब की झोपड़ी तक जाकर बैंक खाते
खुलवाने हैं।' उन्होंने कहा, 'जब देश के सामने एक लक्ष्य रखा कि हमें जन-धन खाते खोलना है, तो मैं आज गर्व के साथ सभी बैंकों का उल्लेख करना चाहूंगा, सभी बैंक कर्मचारियों का उल्लेख करना चाहूंगा, जिन्होंने इस सपने को साकार किया।'
पीएम का कहना है कि जनधन खातों के चलते क्राइम रेट कम हुआ है। उन्होंने बताया, 'आज जब देश वित्तीय समावेश पर इतनी मेहनत कर रहा है तब नागरिकों की उत्पादक क्षमता को अनलॉक करना बहुत जरूरी है। जैसे अभी बैंकिंग सेक्टर की ही एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन राज्यों में जन-धन खाते जितने ज्यादा खुले हैं, वहां क्राइम रेट उतना ही कम हुआ है।' पीएम मोदी ने इस दौरान पिछली सरकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमने पिछली सरकार की तरफ से तैयार किए गए 5 लाख करोड़ रुपयों के कर्ज की भी वसूली की। हमने हमारे बैंकिंग सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल दिया।' उन्होंने कहा, 'हम आईबीसी जैसे सुधार लाए, अनेक कानूनों में सुधार किए, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्युनल को सशक्त किया। कोरोना काल में देश में एक समर्पित स्ट्रेस्ट एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल का गठन भी किया गया।' इस प्रकार की नीतियां ही अन्य देशों को लुभा रही हैं। (हिफी)

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झांसी की रानी की स्मृति में समारोह

Posted: 18 Nov 2021 04:44 AM PST

झांसी की रानी की स्मृति में  समारोह

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि झांसी की रानी के एक सौ तिरानवें जन्मदिन को आजादी के अमृत महोत्सव से जोड़कर मनाना एक सुंदर प्रयास है। इस कार्यक्रम में सैन्य सुदृढ़ीकरण के कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया जाएगा। हमारे पूर्वजों द्वारा किए गए बलिदान को आज हमारी रक्षा सेनाओं के ओज एवं तेज के माध्यम से देखा जा सकता है।तीन दिवसीय यह कार्यक्रम राष्ट्र रक्षा के प्रति समर्पण के भाव को आह्लादित कर रहा है। लोक कथाओं व काव्यों में झांसी के ओज और तेज को वीर रस के साथ प्रस्तुत किया गया है।
देश के गौरव की रक्षा मंे प्राण देने वालों का सम्मान करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार उत्तर प्रदेश यात्रा पर आ रहे हैं। वह रानी लक्ष्मीबाई की जयंती के अवसर पर झांसी की यात्रा पर आ रहे है। इसके पहले कुशीनगर और सुल्तानपुर की उनकी यात्रा विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई। कुशीनगर यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एयर पोर्ट का लोकार्पण किया था। इसमें बीस देशों के विशिष्ट प्रतिनिधि शामिल हुए थे। सुल्तानपुर में उन्होंने देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया था। यहां शानदार एयर शो भी हुआ था। जिसमें वायुसेना के ग्यारह अति महत्वपूर्ण फाइटर प्लेन शामिल थे। यह भारतीय वायु सेना का शौर्य प्रदर्शन भी था। विगत छह वर्षों में भारतीय वायु सेना की क्षमता व शक्ति में भारी बढोत्तरी हुई है। विशेषज्ञ व कमांडर जिन फाइटर प्लेन व हथियारों को लंबे समय से आवश्यक बता रहे थे, उन्हें वर्तमान केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराया है। इसी प्रकार नरेंद्र मोदी की झांसी यात्रा भी स्वाधीनता की रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि देने के साथ विकास व जनकल्याण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित भ्रमण के दृष्टिगत झांसी किले का स्थलीय निरीक्षण किया। स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। झांसी किले का स्थलीय निरीक्षण किया। कार्यक्रम के सम्बन्ध में की जा रही तैयारियों का जायजा लिया। सभी कार्यों को तत्काल पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के झांसी नोड के पहले प्रोजेक्ट का शिलान्यास करेंगे। वर्तमान में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सिंचाई की विभिन्न परियोजनाएं तेजी के साथ क्रियान्वित की जा रही हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल योजना अगले कुछ माह में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के प्रत्येक घर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। दस हजार पांच सौ करोड़ रुपये की यह परियोजना बुन्देलखण्ड के विकास में सहायक होगी। इसके अलावा महोबा मे प्रधानमंत्री अर्जुन सहायक परियोजना का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तहसील चरखारी के अन्तर्गत अर्जुन बाँध तथा कबरई फीडर का स्थलीय निरीक्षण किया।
इसके अलावा झांसी में योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमृत महोत्सव समारोह का उद्घाटन किया। झांसी में राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व झांसी जलसा कार्यक्रम के माध्यम से शौर्य का सन्देश दिया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश रक्षा में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। आजादी के बाद देश सामरिक आजादी की ओर कदम बढ़ा रहा है और हम मेक इन इंडिया से आगे बढ़कर मेक फॉर द वर्ल्ड की ओर बढ़ रहे हैं। डिफेंस कॉरिडोर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगा।
उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सहित विभिन्न विकास कार्यों प्रदेश सरकार तेजी से आगे बढ़ा रही है। लक्ष्मीबाई की वीरता ने नारी शक्ति को नया नाम दिया और महिला होने को अपनी बाधा नहीं बनने दिया। उन्हीं की प्रेरणा से आज देश के हर क्षेत्र में महिलाओं को स्थान मिला है।महिलाओं को सेना में भी स्थाई कमीशन दिया जा रहा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी द्वारा महिलाओं के प्रवेश दिए जा रहे है। इस साल एनडीए में प्रवेश के लिए दो लाख से अधिक बालिकाओं ने परीक्षा दी है। महात्मा गांधी के स्वदेशी का तात्पर्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। रक्षा क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर बन रहा है। देश की सीमाओं सहित साइबर हमले एवं अंतरिक्ष से होने वाले खतरे के दृष्टिगत सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाया जा रहा है। आज लगभग दो सौ से अधिक हथियार भारत में बनने लगे हैं। उनको अन्य देशों को भी निर्यात किया जा रहा है। कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु एचएएल को पचास हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आर्डर दिया गया है।
पिछले सात वर्षों में अड़तीस हजार करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण निर्यात किए गये हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे बुन्देलखण्ड की जीवन रेखा साबित होगा। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्यों को तेजी से पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा रहा है। ललितपुर में एक नया मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा विगत वर्ष जनपद झांसी में ़रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों का उद्घाटन किया गया था।
राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व झांसी जलसा कार्यक्रम तीन दिन चलेगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि झांसी की रानी के एक सौ तिरानवें जन्मदिन को आजादी के अमृत महोत्सव से जोड़कर मनाना एक सुंदर प्रयास है। इस कार्यक्रम में सैन्य सुदृढ़ीकरण के कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया जाएगा। हमारे पूर्वजों द्वारा किए गए बलिदान को आज हमारी रक्षा सेनाओं के ओज एवं तेज के माध्यम से देखा जा सकता है।तीन दिवसीय यह कार्यक्रम राष्ट्र रक्षा के प्रति समर्पण के भाव को आह्लादित कर रहा है। लोक कथाओं व काव्यों में झांसी के ओज और तेज को वीर रस के साथ प्रस्तुत किया गया है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

कठोर फैसले लेने वाली इंदिरा गांधी

Posted: 18 Nov 2021 04:41 AM PST

कठोर फैसले लेने वाली इंदिरा गांधी

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चेतावनी को धता बताने वाली श्रीमती इंदिरा गांधी को कठोर फैसले लेने वाली नेता के रूप में  याद किया जाता है। मोरार जी देसाई उन्हें गूंगी गुड़िया कहा करते थे लेकिन उसी गूंगी गुड़िया ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिये। इतना ही नहीं आपरेशन वुद्धा के माध्यम से भारत को परमाणु राष्ट्र होने का गौरव भी दिलाया था। अपने पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू के विपरीत इंदिरा गांधी ने कभी भी किसी मजबूत नेता को पनपने नहीं दिया, चाहे वह विपक्ष का हो अथवा उनकी पार्टी का। हालांकि इसी से राजनीति मंे चाटुकारिता की शुरुआत भी हुई थी।
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेहरू परिवार में हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और इनकी माता कमला नेहरू थीं। इन्दिरा को उनका गांधी उपनाम फिरोज गाँधी से विवाह के पश्चात मिला था। इनका मोहनदास करमचंद गाँधी से न तो खून का और न ही शादी के द्वारा कोई रिश्ता था। इनके पितामह मोतीलाल नेहरू एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री रहे। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात, इन्दिरा ने शान्तिनिकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा निर्मित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही इन्हें प्रियदर्शिनी नाम दिया था। इसके पश्चात यह इंग्लैंड चली गईं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में बैठीं, परन्तु यह उसमंे विफल रहीं और ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल में कुछ महीने बिताने के पश्चात, 1937 में परीक्षा में सफल होने के बाद इन्होंने सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया। इस समय के दौरान इनकी अक्सर फिरोज गाँधी से मुलाकात होती थी, जिन्हें यह इलाहाबाद से जानती थीं और जो लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अध्ययन कर रहे थे। अंततः 16 मार्च 1942 को आनंद भवन, इलाहाबाद में एक निजी आदि धर्म ब्रह्म-वैदिक समारोह में इनका विवाह फिरोज से हुआ।
ऑक्सफोर्ड से वर्ष 1941 में भारत वापस आने के बाद वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शामिल हो गयीं। 1950 के दशक में वे अपने पिता के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान गैरसरकारी तौर पर एक निजी सहायक के रूप में उनकी सेवा में रहीं। अपने पिता की मृत्यु के बाद सन् 1964 में उनकी नियुक्ति एक राज्यसभा सदस्य के रूप में हुई। इसके बाद वे लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मंत्री बनीं।
लालबहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद तत्कालीन काँग्रेस पार्टी अध्यक्ष के. कामराज इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक रहे। गाँधी ने शीघ्र ही चुनाव जीतने के साथ-साथ जनप्रियता के माध्यम से विरोधियों के ऊपर हावी होने की योग्यता दर्शायी। वह अधिक बामपंथी आर्थिक नीतियाँ लायीं और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा दिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में एक निर्णायक जीत के बाद की अवधि में अस्थिरता की स्थिति में उन्होंने सन् 1975 में आपातकाल लागू किया। उन्होंने एवं काँग्रेस पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार हार का सामना किया। सन् 1980 में सत्ता में लौटने के बाद वह अधिकतर पंजाब के अलगाववादियों के साथ बढ़ते हुए द्वंद्व में उलझी रहीं जिसमे आगे चलकर सन् 1984 में अपने ही अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनैतिक हत्या हुई।
नेहरू का देहांत 27 मई, 1964 को हुआ और इंदिरा नए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा पर चुनाव लड़ीं और तत्काल सूचना और प्रसारण मंत्री के लिए नियुक्त हो, सरकार में शामिल हुईं। हिन्दी के राष्ट्रभाषा बनने के मुद्दे पर दक्षिण के गैर हिन्दीभाषी राज्यों में दंगा छिड़ने पर वह चेन्नई गईं। वहाँ उन्होंने सरकारी अधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया, समुदाय के नेताओं के गुस्से को शांत किया और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण प्रयासों की देखरेख की। शास्त्री एवं वरिष्ठ मंत्रीगण उनके इस तरह के प्रयासों से प्रसन्न नहीं थे। इन्दिरा गांधी के हस्तक्षेप सम्भवतः सीधे शास्त्री के या अपने खुद के राजनैतिक ऊंचाई पाने के उद्देश्य से नहीं थे। कथित रूप से उनका मंत्रालय के दैनिक कामकाज में उत्साह का अभाव था लेकिन वो संवादमाध्यमोन्मुख तथा राजनीति और छबि तैयार करने के कला में दक्ष थीं।
इसीलिए 1965 के बाद उत्तराधिकार के लिए श्रीमती गांधी और उनके प्रतिद्वंद्वियों, केंद्रीय कांग्रेस पार्टी, नेतृत्व के बीच संघर्ष के दौरान, बहुत से राज्य, प्रदेश कांग्रेस पार्टी, संगठनों से उच्च जाति के नेताओं को पदच्युत कर पिछड़ी जाति के व्यक्तियों को प्रतिस्थापित करते हुए उन जातिओं के वोट इकट्ठा करने में जुट गये ताकि राज्य कांग्रेस पार्टी, में अपने विपक्ष तथा विरोधिओं को मात दी जा सके। इन हस्तक्षेपों के परिणामों, जिनमें से कुछेक को उचित सामाजिक प्रगतिशील उपलब्धि माने जा सकते हैं।
जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध चल रहा था, इंदिरा श्रीनगर सीमा क्षेत्र में उपस्थित थी। हालांकि सेना ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तानी अनुप्रवेशकारी शहर के बहुत ही करीब तीब्र गति से पहुँच चुके हैं, उन्होंने अपने को जम्मू या दिल्ली में पुनःस्थापन का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया और उल्टे स्थानीय सरकार का चक्कर लगाती रहीं और संवाद माध्यमों के ध्यानाकर्षण का स्वागत किया। ताशकंद में सोवियत मध्यस्थता में पाकिस्तान के अयूब खान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद ही लालबहादुर शास्त्री का निधन हो गया। तब कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के. कामराज ने शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सन् 1966 में जब श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री बनीं, कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो चुकी थी। श्रीमती गांधी के नेतृत्व में समाजवादी और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में रूढ़िवादी। मोरारजी देसाई उन्हें 'गूंगी गुड़िया' कहा करते थे। 1967 के चुनाव में आंतरिक समस्याएँ उभरी जहां कांग्रेस लगभग 60 सीटें खोकर 545 सीटोंवाली लोक सभा में 297 सांसद प्राप्त किए। उन्हें देसाई को उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में लेना पड़ा। 1969 में देसाई के साथ अनेक मुददों पर असहमति के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विभाजित हो गयी। इंदिरा गांधी ने समाजवादियों एवं साम्यवादी दलों से समर्थन पाकर अगले दो वर्षों तक शासन चलाई। उसी वर्ष जुलाई 1969 को उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थी समस्या हल करने के लिए उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान की ओर से, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, पाकिस्तान पर युद्ध घोषित कर दिया। 1971 के युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के अधीन अमेरिका अपने सातवें बेड़े को भारत को पूर्वी पाकिस्तान से दूर रहने के लिए यह वजह दिखाते हुए कि पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ एक व्यापक हमला विशेष रूप से कश्मीर के सीमाक्षेत्र के मुद्दे को लेकर हो सका है, चेतावनी के रूप में बंगाल की खाड़ी में भेजा।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक मुखर अल्पसंख्यक वर्ग का बड़ा छलावा

Posted: 18 Nov 2021 04:34 AM PST

एक मुखर अल्पसंख्यक वर्ग का बड़ा छलावा

महत्वपूर्ण सुधारों से लाभान्वित होने वाले बहुसंख्यकों की आवाज अनसुनी रह जाने से अल्पसंख्यक वर्ग को यथास्थिति का बचाव करने का मौका :-डॉ. केवी सुब्रमण्यम, मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारत सरकार

याद कीजिए वो वक्त, जब आपको रेलगाड़ी के अनारक्षित डिब्बे में सफर करना पड़ता था। अगर आपको याद हो, तो अनारक्षित डिब्बा ट्रेन खुलने के स्टेशन पर ही पूरी तरह से भर जाता था। अन्य लाखों लोग आरक्षण न होने के बावजूद अपने गंतव्य तक की यात्रा करना चाहते थे। जो लोग ट्रेन खुलने के स्टेशन पर ट्रेन के अनारक्षित डिब्बे में प्रवेश करने में सफल रहते थे, उनका प्रयास होता था कि कोई और अपने गंतव्य तक पहुंचने के इस "विशेषाधिकार" का आनंद न ले पाए। अनारक्षित डिब्बे में यात्रा करने वाले निश्चित रूप से आम लोग हैं, जो उन्हें "विशेषाधिकार प्राप्त" कहे जाने पर सवाल उठा सकते हैं। वे इस बात पर जोर देंगे कि उनकी हालत आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने वालों से खराब है। हालांकि, आरक्षित डिब्बे में यात्रा करने वालों से तुलना करना वास्तविक मुद्दे को थोड़ा उलझाने जैसा है। सीधे तौर पर तुलना उन लोगों में होनी चाहिए जिन्हें आरक्षण नहीं मिला, यानी बहुसंख्यक, जो यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं सकते बनाम अल्पसंख्यक, जिन्हें गंतव्य तक पहुंचने को लेकर भाग्यशाली कहा जा सकता है।

हमारे जैसे लोकतंत्र में सुधारों की राजनीतिक अर्थव्यवस्था को समझने के लिए यह उपमा महत्वपूर्ण है। कोई भी संरचनात्मक सुधार हितधारकों के दो समूहों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करता है-मुखर अल्पसंख्यक, जो सुधार का विरोध करते हैं बनाम एक मौन बहुसंख्यक, जिन्हें सुधार से लाभ मिलेगा। यथास्थिति से लाभान्वित होने की वजह से, मुखर अल्पसंख्यक अधिक समृद्ध हैं और इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि सत्ता के गलियारों में अपनी आवाज कैसे पहुंचाई जाए। इसके विपरीत, मौन बहुसंख्यक, जो यथास्थिति के कारण अभाव में अपना जीवन यापन करता है, अपनी आवाज पहुँचाने में असमर्थ रहता है। मुखर अल्पसंख्यक के विपरीत, मौन बहुसंख्यक अपनी आवाज दर्ज कराने के लिए अपनी एक दिन की आय छोड़ने की स्थिति में भी नहीं होता है। मुखर अल्पसंख्यक सुधार के परिणामों को स्पष्ट तौर पर समझता है। इसके विपरीत, मौन बहुसंख्यक तब तक इन लाभों के बारे में अनिश्चित रहता है, जब तक ऐसे लाभ वास्तव में उनके सामने प्रकट नहीं हो जाते। सूचना और आवाज उठाने की यह विषमता मुखर अल्पसंख्यक के पक्ष में बाधाओं को कम करती है और इस प्रकार, लोकलुभावन तरीकों को बढ़ावा देती है, जबकि सुधारों में इससे गतिरोध पैदा हो सकता है। इसलिए हम नागरिकों को सुधार की इस राजनीतिक अर्थव्यवस्था को समझने का प्रयास करना चाहिए।

इस राजनीतिक अर्थव्यवस्था में, 1991 में किए गए उत्पाद आधारित बाजार सुधार की तुलना में, अब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार द्वारा किए गए कारक आधारित बाजार सुधार अधिक कठिन हैं। उत्पाद आधारित बाजार सुधार में घरेलू पूंजीपतियों और विदेशी पूंजीपतियों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। पूंजीवादी, लोकतंत्र में शायद ही कभी भावनात्मक रूप में प्रभावित होते हैं, जबकि सामुदायिक नेताओं के लिए इस तरह के सुधार के खिलाफ "आम आदमी" की बात को रखना मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत, पंजाब के अमीर किसान के लिए "आम आदमी" से सम्बन्धित बातों को आसानी से सामने रखा जा सकता है, हालांकि ये किसान शेष 28 राज्यों के करोड़ों किसानों की तुलना में काफी समृद्ध हैं।

रेलगाड़ी के अनारक्षित डिब्बे की उपमा का उपयोग करते हुए अगर कहा जाए, तो पंजाब का अमीर किसान एक ऐसे अधिक विशेषाधिकार प्राप्त यात्री का प्रतिनिधित्व करता है जोकि यात्रा की शुरुआत वाले स्टेशन से ही अनारक्षित डिब्बे में चढ़ गया है और लाखों अन्य लोगों को अपने बाद डिब्बे के भीतर आने से रोककर उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने से वंचित करता है। इस प्रकार, पंजाब का अमीर किसान 28 अन्य राज्यों के अपने कम विशेषाधिकार प्राप्त भाइयों को मिलने वाले संभावित लाभों की राह में अवरोध पैदा करता है। इस तरह, कृषि विधेयकों के आम आदमी के खिलाफ होने से संबंधित बयानबाजी निहायत ही बेतुकी है।

निजीकरण और परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के खिलाफ भी इसी किस्म की बयानबाजी– जोकि हकीकत से कोसों दूर है – घृणा फैलाने की हदतक बार-बार दोहरायी जाती है। संगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की तुलना में बेहतर वेतन, काम के घंटे और कामकाज की परिस्थिति का लाभ मिलता है। इस प्रकार, संगठित क्षेत्र के श्रमिक अधिक विशेषाधिकार प्राप्त श्रमिकों की श्रेणी में आते हैं। जैसा कि 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण में दिखाया गया है, अत्यधिक कड़े श्रम कानूनों ने सिर्फ विशेषाधिकार प्राप्त श्रमिकों के हितों का ही समर्थन किया है जिसकी वजह से रोजगार सृजन के मामले में असंतुलन पैदा हुआ है। इस तरह, इसने हमारे युवाओं से संगठित क्षेत्र में नौकरी पाने के विशेषाधिकार को छीना है। "खानदानी चांदी" बेचने की घिसी-पिटी हल्लेबाजी बौद्धिक रूप से खोखली है। एक ऐसी अर्थव्यवस्था में, जहां सकल घरेलू उत्पाद में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है, सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र को ही खानदान के तौर पर देखना खानदान के लिए सबसे अधिक कमाने वाले व्यक्ति को अनाथ मानने जैसा है। इसके अलावा, जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में दिखाया गया है, सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकांश परिसंपत्तियां मूल्यांकन करने पर मूल्य के मामले में और चाहे जो कुछ भी हों, पर चांदी जैसी कतई प्रतीत नहीं होती हैं। इस प्रकार, इन दोनों शब्दों -खानदान या चांदी - में से किसी का भी प्रयोग उपयुक्त नहीं है। परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए "खानदानी चांदी की बिक्री" जैसे मुहावरे का इस्तेमाल करना समझ की कमी को दर्शाता है क्योंकि किसी अर्थव्यवस्था में परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया में सार्वजनिक क्षेत्र की परिसंपत्तियों को उत्पादक उपयोग के लिए पट्टे पर देना- बेचना नहीं – शामिल होता है।

एक नागरिक के तौर पर हम सभी को सुधारों के विरोधियों द्वारा फैलाए जाने वाले धोखे को समझना चाहिए क्योंकि वे अपना राजनीतिक आधार उन विशेषाधिकार प्राप्त मुखर लोगों में तलाशते हैं जिनकी संख्या कम हैं और जिन्हें यथास्थिति से लाभ मिलता है। वे जिस "आम आदमी" का पक्ष लेते हैं, वह दरअसल विशेषाधिकारों से लैस है और सत्ता के गलियारों में उसकी आवाज पर्याप्त तरीके से पहुंचती है। इसके उलट, सुधारों के समर्थक उन करोड़ों वंचितों को आकर्षित करते हैं जो बहुमत में होते हुए भी मौन हैं – "असली आम आदमी।" एक नागरिक के तौर पर हम सभी को इस छल को पहचानना चाहिए तथा सुधार विरोधी एवं विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के हितों के मसीहा और वास्तव में सुधारों के समर्थक एवं वंचितों के लिए लड़ने वाले लोगों के बीच के अंतर को समझना चाहिए। अंत में, एक नागरिक के तौर पर हम सभी को यह भी समझना चाहिए कि सुधारों के समर्थक जोखिम लेने के अपने दृढ़ विश्वास से प्रेरित होते हैं। चूंकि सुधारों के समर्थक उन वंचितों के हितों का पोषण करते हैं जिनकी आवाज सुधारों की घोषणा के समय नहीं सुनाई देती, वे एक राजनीतिक जोखिम उठाते हैं। इसलिए हमारे जैसे लोकतंत्र में हमें सुधारों के समर्थकों को उद्यमियों के बराबर महत्व देना चाहिए। तभी भारतीय अर्थव्यवस्था सभी को लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से प्रगति कर सकती है।
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जमशेदपुर के सांसद ने टाटा कटिहार स्पेशल ट्रेन को दिखाई हरी झंडी ,

Posted: 18 Nov 2021 04:27 AM PST

जमशेदपुर के सांसद ने टाटा कटिहार स्पेशल ट्रेन को दिखाई हरी झंडी ,

जमशेदपुर से हमारे संवाददाता मुकेश कुमार की खास खबर |
जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन से एक बार फिर कटिहार के लिए ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है . बुधवार को सांसद विद्युत वरण महतो ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया . ट्रेन रात 9.30 बजे कटिहार के लिए रवाना हो गई यात्रियों के लिए इस ट्रेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले हो दिन ट्रेन में खचा खच यात्री भरे हुए थे . इस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड बिहार से ही अलग होकर बना है इसलिए यहां बिहार के लोग ज्यादा संख्या में बसे हुए है . काफी समय से इस ट्रेन की मांग चल रही थी . उनके लगातार प्रयासों का यह परिणाम है की आज उस ट्रेन का शुभारंभ होने जा रहा है . इससे पूर्व कटिहार के लिए एक लिंक ट्रेन टाटा छपरा के साथ जाती थी . इस लिंक में कम डब्बा रहने के कारण बड़ी संख्या में कटिहार के रास्ते उत्तर बिहार जाने वाले लोग वंचित रह जाते थे . साथ ही इस लिंक ट्रेन के कारण बरौनी में अक्सर विलंब हो जाया करता था . उन्होंने कहा कि अब बक्सर के लिए डायरेक्ट ट्रेन चलाने की उनकी पहल होगी . सांसद ने इस ट्रेन के शुभारंभ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक एवं चक्रधरपुर डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक सहित सभी पदाधिकारियों के प्रति अपनी ओर से आभार व्यक्त किया है . "
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आयरन लेडीज इन्दिरा गांधी प्रथम महिला प्रधानमंत्री

Posted: 18 Nov 2021 04:22 AM PST

आयरन लेडीज इन्दिरा गांधी प्रथम महिला प्रधानमंत्री

सत्येन्द्र कुमार पाठक
भारतीय राष्ट्रवादी नेता पंडित मोतीलाल नेहरू की पौत्री भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू की पुत्री आयरन लेडी भारत का महिला प्रधानमंत्री इंदिरा प्रियदर्शनी गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 निधन 31 अक्टूबर 1984 है ।1942 में इंदिरा गांधी का विवाह फिरोज गांधी से हुआ था । 1966 से 1977 एवं 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। इंदिरा जी ने 1934–35 में स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात शान्तिनिकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा निर्मित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने प्रियदर्शिनी" नामकरण किया था। इसके पश्चात यह इंग्लैंड चली गईं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में बैठीं, परन्तु यह उसमे विफल रहीं और ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल मे बिताने के पश्चात, 1937 में परीक्षा में सफल होने के बाद इन्होने सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया। इस समय के दौरान इनकी अक्सर फिरोज़ गाँधी से मुलाकात होती थी, जिन्हे यह इलाहाबाद से जानती थीं और जो लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अध्ययन कर रहे थे। अंततः 16 मार्च 1942 को आनंद भवन, इलाहाबाद मे धर्म ब्रह्म-वैदिक समारोह में इनका विवाह फिरोज़ से हुआ। ऑक्सफोर्ड से वर्ष 1941 में भारत वापस आने के बाद भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शामिल हो गयीं। 1950 के दशक में वे पिता के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान गैरसरकारी तौर पर एक निजी सहायक के रूप में उनके सेवा में रहीं। अपने पिता की मृत्यु के बाद सन् 1964 में उनकी नियुक्ति एक राज्यसभा सदस्य के रूप में हुई। इसके बाद वे लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मत्री बनीं। लालबहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद तत्कालीन काँग्रेस पार्टी अध्यक्ष के. कामराज इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक रहे। गाँधी ने शीघ्र ही चुनाव जीतने के साथ-साथ जनप्रियता के माध्यम से विरोधियों के ऊपर हावी होने की योग्यता दर्शायी। वह अधिक बामवर्गी आर्थिक नीतियाँ लायीं और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा दिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में एक निर्णायक जीत के बाद की अवधि में अस्थिरता की स्थिती में उन्होंने सन् 1975 में आपातकाल लागू किया। उन्होंने एवं काँग्रेस पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार हार का सामना किया। सन् 1980 में सत्ता में लौटने के बाद वह अधिकतर पंजाब के अलगाववादियों के साथ बढ़ते हुए द्वंद्व में उलझी रहीं जिसमे आगे चलकर सन् 1984 में अपने ही अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनैतिक हत्या हुई थी ।
इन्दिरा ने युवा लड़के-लड़कियों के लिए वानर सेना बनाई, जिसने विरोध प्रदर्शन और झंडा जुलूस के साथ साथ कांगेस के नेताओं की मदद में संवेदनशील प्रकाशनों तथा प्रतिबंधित सामग्रीओं का परिसंचरण कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में छोटी लेकिन उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी। प्रायः दोहराए जानेवाली कहानी है कि उन्होंने पुलिस की नजरदारी में रहे अपने पिता के घर से बचाकर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज, जिसमे 1930 दशक के शुरुआत की एक प्रमुख क्रांतिकारी पहल की योजना थी, को अपने स्कूलबैग के माध्यम से बहार उड़ा लिया था।सन् 1936 में उनकी माँ कमला नेहरू तपेदिक से एक लंबे संघर्ष के बाद अंततः स्वर्गवासी हो गईं। इंदिरा तब 18 वर्ष की थीं और इस प्रकार अपने बचपन में उन्हें कभी भी एक स्थिर पारिवारिक जीवन का अनुभव नहीं मिल पाया था। उन्होंने प्रमुख भारतीय, यूरोपीय तथा ब्रिटिश स्कूलों में अध्यन किया, जैसेशान्तिनिकेतन, बैडमिंटन स्कूल औरऑक्सफोर्ड। 1930 दशक के अन्तिम चरण में ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय, इंग्लैंड के सोमरविल्ले कॉलेज में अपनी पढ़ाई के दौरान वे लन्दन में आधारित स्वतंत्रता के प्रति कट्टर समर्थक भारतीय लीग की सदस्य बनीं। महाद्वीप यूरोप और ब्रिटेन में रहते समय उनकी मुलाक़ात पारसी कांग्रेस कार्यकर्ता, फिरोज़ गाँधी से हुई और १६ मार्च १९४२ को आनंद भवन इलाहाबाद में एक निजी आदि धर्मं ब्रह्म-वैदिक समारोह में उनसे विवाह किया ठीक भारत छोडो आन्दोलन की शुरुआत से पहले जब महात्मा गांधी और कांग्रेस पार्टी द्वारा चरम एवं पुरजोर राष्ट्रीय विद्रोह शुरू की गई। सितम्बर 1942 में वे ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार की गयीं और बिना कोई आरोप के हिरासत में डाल दिये गये थे। अंततः 243 दिनों से अधिक जेल में बिताने के बाद उन्हें १३ मई 1943 को रिहा किया गया।[7] 1944 में उन्होंने फिरोज गांधी के साथ राजीव गांधीऔर संजय गाँधी को जन्म दिया।सन् 1947 के भारत विभाजन अराजकता के दौरान उन्होंने शरणार्थी शिविरों को संगठित करने तथा पाकिस्तान से आये लाखों शरणार्थियों के लिए चिकित्सा सम्बन्धी देखभाल प्रदान करने में मदद की। उनके लिए प्रमुख सार्वजनिक सेवा का यह पहला मौका था।गांधीगण बाद में इलाहाबाद में बस गये, जहाँ फिरोज ने एक कांग्रेस पार्टी समाचारपत्र और एक बीमा कंपनी के साथ काम किया। उनका वैवाहिक जीवन प्रारम्भ में ठीक रहा, लेकिन बाद में जब इंदिरा अपने पिता के पास नई दिल्ली चली गयीं, उनके प्रधानमंत्रित्व काल में जो अकेले तीन मूर्ति भवन में एक उच्च मानसिक दबाव के माहौल में रहे थे, वे उनकी विश्वस्त, सचिव और नर्स बनीं। उनके बेटे उसके साथ रहते थे, लेकिन वो अंततः फिरोज से स्थायी रूप से अलग हो गयीं, यद्यपि विवाहित का तगमा जुटा रहा।जब भारत का पहला आम चुनाव 1951 में समीपवर्ती हुआ, इंदिरा अपने पिता एवं अपने पपति फिरोज गांधी रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे, दोनों के प्रचार प्रबंध में लगी रही। फिरोज अपने प्रतिद्वंदिता चयन के बारे में नेहरू से सलाह मशविरा नहीं किया था और यद्दपि वह निर्वाचित हुए, दिल्ली में अपना अलग निवास का विकल्प चुना। फिरोज ने बहुत ही जल्द एक राष्ट्रीयकृत बीमा उद्योग में घटे प्रमुख घोटाले को उजागर कर अपने राजनैतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाकू होने की छबि को विकसित किया, जिसके परिणामस्वरूप नेहरू के सहयोगी, वित्त मंत्री, को इस्तीफा देना पड़ा।
तनाव की चरम सीमा की स्थिति में इंदिरा फिरोज गांधी से अलग हुईं। सन् 1958 में उप-निर्वाचन के थोड़े समय के बाद फिरोज़ को दिल का दौरा पड़ा, जो नाटकीय ढ़ंग से उनके टूटे हुए वैवाहिक वन्धन को चंगा किया। कश्मीर में उन्हें स्वास्थोद्धार में साथ देते हुए उनकी परिवार निकटवर्ती हुई। परन्तु 8 सितम्बर,1960 को जब इंदिरा अपने पिता के साथ एक विदेश दौरे पर गयीं थीं, फिरोज़ की मृत्यु हुई।
1959 और 1960 के दौरान इंदिरा चुनाव लड़ने के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं। उनका कार्यकाल घटनाविहीन था। पंडित जवाहरलाल नेहरू नेहरू का देहांत 27 मई, 1964 को हुआ और इंदिरा प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरणा पर चुनाव लड़ीं और तत्काल सूचना और प्रसारण मंत्री के लिए नियुक्त हुईं। हिन्दी के राष्ट्रभाषा बनने के मुद्दे पर दक्षिण के गैर हिन्दीभाषी राज्यों में दंगा छिड़ने पर वह चेन्नई गईं। वहाँ उन्होंने सरकारी अधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया, समुदाय के नेताओं के गुस्से को प्रशमित किया और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण प्रयासों की देखरेख की। मंत्री इंदिरा गांधी गांधी के पदक्षेप सम्भवत सीधे शास्त्री के राजनैतिक ऊंचाई पाने के उद्देश्य से नहीं थे। कथित रूप से उनका मंत्रालय के दैनिक कामकाज में उत्साह का अभाव था लेकिन वो संवादमाध्यमोन्मुख तथा राजनीति और छबि तैयार करने के कला में दक्ष थीं।"1965 के बाद उत्तराधिकार के लिए श्रीमती गांधी और उनके प्रतिद्वंद्वियों, केंद्रीय कांग्रेस नेतृत्व के बीच संघर्ष के दौरान, बहुत से राज्य, प्रदेश कांग्रेस[पार्टी] संगठनों से उच्च जाति के नेताओं को पदच्युत कर पिछड़ी जाति के व्यक्तियों को प्रतिस्थापित करतेहुए उन जातिओं के वोट इकठ्ठा करने में जुटगये ताकि राज्य कांग्रेस [पार्टी]में अपने विपक्ष तथा विरोधिओं को मात दिया जा सके । 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध चल रहा था, इंदिरा श्रीनगर सीमा क्षेत्र में उपस्थित थी। हालांकि सेना ने चेतावनी कि पाकिस्तानी अनुप्रवेशकारी शहर के बहुत ही करीब तीब्र गति से पहुँच चुके हैं, उन्होंने अपने को जम्मू या दिल्ली में पुनःस्थापन का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया और उल्टे स्थानीय सरकार का चक्कर लगाती रहीं और संवाद माध्यमों के ध्यानाकर्षण को स्वागत किया। ताशकंद में सोवियत मध्यस्थता में पाकिस्तान के अयूब खान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद ही लालबहादुर शास्त्री का निधन हो गया। तब कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के. कामराज ने शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।
सन् 1966 में जब श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री बनीं, कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो चुकी थी, श्रीमती गांधी के नेतृत्व में समाजवादी और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में रूढीवादी। मोरारजी देसाई ने इंदिरा गांधी को "गूंगी गुड़िया" कहा करते थे। 1967 के चुनाव में आंतरिक समस्याएँ उभरी जहां कांग्रेस लगभग 60 सीटें खोकर 545 सीटोंवाली लोक सभा में 297 आसन प्राप्त किए। उन्हें देसाई को भारत के भारत के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में लेना पड़ा। 1969 में देसाई के साथ अनेक मुददों पर असहमति के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विभाजित हो गयी। वे समाजवादियों एवं साम्यवादी दलों से समर्थन पाकर अगले दो वर्षों तक शासन चलाई। उसी वर्ष जुलाई 1969 को इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। 1971 में बांग्लादेशी शरणार्थी समस्या हल करने के लिए उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान की ओर से अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, पाकिस्तान पर युद्ध घोषित कर दिया। 1971 के युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के अधीन अमेरिका अपने सातवें बेड़े को भारत को पूर्वी पाकिस्तान से दूर रहने के लिए यह वजह दिखाते हुए कि पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ एक व्यापक हमला विशेष रूप सेकश्मीर के सीमाक्षेत्र के मुद्दे को लेकर हो सकती है, चेतावनी के रूप में बंगाल की खाड़ीमें भेजा। यह कदम प्रथम विश्व से भारत को विमुख कर दिया था और प्रधानमंत्री गांधी ने अब तेजी के साथ एक पूर्व सतर्कतापूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को नई दिशा दी। भारत और सोवियत संघ पहले ही मित्रता और आपसी सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके परिणामस्वरूप 1971 के युद्ध में भारत की जीत में राजनैतिक और सैन्य समर्थन का पर्याप्त योगदान रहा था । जनवादी चीन गणराज्य से परमाणु खतरे तथा दो प्रमुख महाशक्तियों की दखलंदाजी में रूचि भारत की स्थिरता और सुरक्षा के लिए अनुकूल नहीं महसूस किए जाने के मद्दे नजर, गांधी का अब एक राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रम था। उन्होंने नये पाकिस्तानी राष्ट्रपति ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को एक सप्ताह तक चलनेवाली शिमला शिखर वार्ता में आमंत्रित किया था। वार्ता के विफलता के करीब पहुँच दोनों राज्य प्रमुख ने अंततः शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत कश्मीर विवाद को वार्ता और शांतिपूर्ण ढंग से मिटाने के लिए दोनों देश अनुबंधित हुए।
स्माइलिंग बुद्धा के अनौपचारिक छाया नाम से 1974 में भारत ने सफलतापूर्वक एक भूमिगत परमाणु परीक्षण राजस्थान के रेगिस्तान में बसे गाँव पोखरण के करीब किया। शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परीक्षण का वर्णन करते हुए भारत दुनिया की सबसे नवीनतम परमाणु शक्तिधर बन गया।1971 में रिचर्ड निक्सन और इंदिरा गाँधी। उनके बीच गहरा ब्याक्तिगत विद्वेष था जिसका रंग द्विपक्षीय संबंधों में झलका। 1960 के दशक में विशेषीकृत अभिनव कृषि कार्यक्रम और सरकार प्रदत्त अतिरिक्त समर्थन लागु होने पर अंततः भारत में हमेशा से चले आ रहे खाद्द्यान्न की कमी को, मूलतः गेहूं, चावल, कपास और दूध के सन्दर्भ में, अतिरिक्त उत्पादन में बदल दिया। बजाय संयुक्त राज्य से खाद्य सहायता पर निर्भर रहने के - जहाँ के एक राष्ट्रपति जिन्हें श्रीमती गांधी काफी नापसंद करती थीं (यह भावना आपसी था: निक्सन को इंदिरा "चुड़ैल बुढ़िया" लगती थीं । देश एक खाद्य निर्यातक बन गया। उस उपलब्धि को अपने वाणिज्यिक फसल उत्पादन के विविधीकरण के साथ हरित क्रांति के नाम से जाना जाता है। इसी समय दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से आयी श्वेत क्रांति से खासकर बढ़ते हुए बच्चों के बीच कुपोषण से निबटने में मदद मिली। 1975 के वर्षों तक श्रीमती गांधी के लिए समर्थन की एक और स्रोत रही थी ।
1960 के प्रारंभिक काल में संगठित हरित क्रांति गहन कृषि जिला कार्यक्रम (आईऐडिपि) का अनौपचारिक नाम था।
गाँधी की सरकार को उनकी 1971 के जबरदस्त जनादेश के बाद प्रमुख कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस पार्टी की आंतरिक संरचना इसके असंख्य विभाजन के फलस्वरूप कमजोर पड़ने से चुनाव में भाग्य निर्धारण के लिए पूरी तरह से उनके नेतृत्व पर निर्भरशील हो गई थी। गांधी का सन् 1971 की तैयारी में नारे का विषय था गरीबी हटाओ। यह नारा और प्रस्तावित गरीबी हटाओ कार्यक्रम का खाका, जो इसके साथ आया, गांधी को ग्रामीण और शहरी गरीबों पर आधारित एक स्वतंत्र राष्ट्रीय समर्थन देने के लिए तैयार किए गए थे। इस तरह उन्हें प्रमुख ग्रामीण जातियों के दबदबे में रहे राज्य और स्थानीय सरकारों एवं शहरी व्यापारी वर्ग को अनदेखा करने की अनुमति रही थी।
गरीबी हटाओ के तहत कार्यक्रम, हालाँकि स्थानीय रूपसे चलाये गये, परन्तु उनका वित्तपोषण, विकास, पर्यवेक्षण एवं कर्मिकरण नई दिल्ली तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल द्वारा किया गया। मजबूत संसदीय बहुमत का व्यवहार कर, उनकी सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संविधान में संशोधन कर केन्द्र और राज्यों के बीच के सत्ता संतुलन को बदल दिया था। उन्होंने दो बार विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों को "कानून विहीन तथा अराजक" घोषित कर संविधान के धारा 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लागु कर इनके नियंत्रण पर कब्जा किया था। संजय गाँधी, निर्वाचित अधिकारियों की जगह पर गांधी के करीबी राजनैतिक सलाहकार बने थे, के बढ़ते प्रभाव पर, पि.एन.हक्सर, उनकी क्षमता की ऊंचाई पर उठते समय, गाँधी के पूर्व सलाहाकार थे । इंदिरा गांधी के सत्तावाद शक्ति के उपयोग की ओर नये झुकाव को देखते हुए, लोक नायाक जयप्रकाश नारायण और आचार्य जीवतराम कृपालानी व्यक्तिओं और पूर्व-स्वतंत्रता सेनानियों ने इंदिरा सरकार के विरुद्ध सक्रिय प्रचार करते हुए भारतभर का दौरा किया। राज नारायण द्वारा दायर एक चुनाव याचिका में कथित तौर पर भ्रष्टाचार आरोपों के आधार पर 12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इन्दिरा गांधी के लोक सभा चुनाव को रद्द घोषित कर दिया। अदालत ने इंदिरा गांधी के विरुद्ध संसद का आसन छोड़ने तथा छह वर्षों के लिए चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबन्ध का आदेश दिया। प्रधानमन्त्रीत्व के लिए लोक सभा या राज्य सभा (संसद के उच्च सदन) का सदस्य होना अनिवार्य है। इस प्रकार, यह निर्णय उन्हें प्रभावी रूप से कार्यालय से पदमुक्त कर दिया।


गांधी ने फैसले पर अपील की, राजनैतिक पूंजी हासिल करने को उत्सुक विपक्षी दलों और उनके समर्थक, उनके इस्तीफे के लिए अधिक संख्या में यूनियनों और विरोधकारियों द्वारा किये गये हड़ताल से कई राज्यों में जनजीवन ठप्प पड़ गया। इस आन्दोलन को मजबूत करने के लिए, जयप्रकाश नारायण ने पुलिस को निहत्थे भीड़ पर सम्भब्य गोली चलाने के आदेश का उलंघन करने के लिये आह्वान किया। कठिन आर्थिक दौर के साथ साथ जनता की उनके सरकार से मोहभंग होने से विरोधकारिओं के विशाल भीड़ ने संसद भवन तथा दिल्ली में उनके निवास को घेर लिया और उनके इस्तीफे की मांग करने लगे। गाँधी ने व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने के पदक्षेप स्वरुप, अशांति मचानेवाले ज्यादातर विरोधियों के गिरफ्तारी का आदेश दे दिया। तदोपरांत उनके मंत्रिमंडल और सरकार द्वारा इस बात की सिफारिश की गई की राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद फैले अव्यवस्था और अराजकता को देखते हुए आपातकालीन स्थिति की घोषणा करें। तदनुसार, अहमद ने आतंरिक अव्यवस्था के मद्देनजर 26 जून 1975 को संविधान की धारा- 352 के प्रावधानानुसार आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर दी।
विपक्षीदल शासित राज्यों गुजरात और तमिल नाडु पर राष्ट्रपति शासन थोप दिया गया जिसके फलस्वरूप पूरे देश को प्रत्यक्ष केन्द्रीय शासन के अधीन ले लिया गया पुलिस को कर्फ़्यू लागू करने तथा नागरिकों को अनिश्चितकालीन रोक रखने की क्षमता सौंपी गयी एवं सभी प्रकाशनों को सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय के पर्याप्त सेंसर व्यवस्था के अधीन कर दिया गया। इन्द्र कुमार गुजराल, एक भावी प्रधानमंत्री, ने खुद अपने काम में संजय गांधी की दखलंदाजी के विरोध में सूचना और प्रसारण मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया। अंततः आसन्न विधानसभा चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए तथा सम्बंधित राज्य के राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य सरकार की बर्खास्तगी के संवैधानिक प्रावधान के अलोक में सभी विपक्षी शासित राज्य सरकारों को हटा दिया गया। अपने विधायी दलों और राज्य पार्टी संगठनों के नियंत्रण में मजबूत मुख्यमंत्रियों से निपटना पसंद करते थे, श्रीमती गांधी प्रत्येक कांग्रेसी मुख्यमंत्री को, जिनका एक स्वतंत्र आधार होता, हटाने तथा उन मंत्रिओं को जो उनके प्रति व्यक्तिगत रूप से वफादार होते, उनके स्थालाभिसिक्त करने में लग गईं थी ।मतदाताओं को उस शासन को मंज़ूरी देने का एक और मौका देने के लिए गाँधी ने 1977 में चुनाव बुलाए। सेंसर लगी प्रेस उनके बारे में लिखती थी, शायद उससे गांधी अपनी लोकप्रियता का हिसाब निहायत ग़लत लगायी होंगी। वजह जो भी रही हो, वह जनता दल से बुरी तरह से हार गयीं। लंबे समय से उनके प्रतिद्वंद्वी रहे देसाई के नेतृत्व तथा जय प्रकाश नारायण के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में जनता दल ने भारत के पास "लोकतंत्र और तानाशाही" के बीच चुनाव का आखरी मौका दर्शाते हुए चुनाव जीत लिए। इंदिरा और संजय गांधी दोनों ने अपनी सीट खो दीं और कांग्रेस घटकर 153 सीटों में सिमट गई । देसाई प्रधानमंत्री बने और 1969 के सरकारी पसंद नीलम संजीव रेड्डी गणतंत्र के राष्ट्रपति बनाये गए। गाँधी को जबतक 1978 के उप -चुनाव में जीत नहीं हासिल हुई, उन्होंने अपने आप को कर्महीन, आयहीन और गृहहीन पाया। १९७७ के चुनाव अभियान में कांग्रेस पार्टी का विभाजन हो गया: जगजीवन राम समर्थकों ने उनका साथ छोड़ दिया। कांग्रेस (गांधी) दल अब संसद में आधिकारिक तौर पर विपक्ष होते हुए एक बहुत छोटा समूह रह गया था।गठबंधन के विभिन्न पक्षों में आपसी लडाई में लिप्तता के चलते शासन में असमर्थ जनता सरकार के गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह कई आरोपों में इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी को गिरफ्तार करने के आदेश दिए, जिनमे से कोई एक भी भारतीय अदालत में साबित करना आसन नहीं था। इस गिरफ्तारी का मतलब था इंदिरा स्वतः संसद से निष्कासित हो गई। परन्तु यह रणनीति उल्टे अपदापूर्ण बन गई। उनकी गिरफ्तारी और लंबे समय तक चल रहे मुकदमे से उन्हें बहुत से वैसे लोगों से सहानुभूति मिली सिर्फ दो वर्ष पहले उन्हें तानाशाह समझ डर गये थे। जनता गठबंधन सिर्फ़ श्रीमती गांधी की नफरत से एकजुट हुआ था। छोटे छोटे साधारण मुद्दों पर आपसी कलहों में सरकार फंसकर रह गयी थी और गांधी इस स्थिति का उपयोग अपने पक्ष में करने में सक्षम थीं। उन्होंने फिर से, आपातकाल के दौरान हुई "गलतियों" के लिए कौशलपूर्ण ढंग से क्षमाप्रार्थी होकर भाषण देना प्रारम्भ कर दिया। जून 1979 में देसाई ने इस्तीफा दिया और श्रीमती गांधी द्वारा वादा किये जाने पर कि कांग्रेस बाहर से उनके सरकार का समर्थन करेगी, रेड्डी के द्वारा चरण सिंह प्रधान मंत्री नियुक्त किए गये। अंतराल के बाद, उन्होंने अपना प्रारंभिक समर्थन वापस ले लिया और राष्ट्रपति रेड्डीने 1979 की सर्दियों में संसद को भंग कर दिया। अगले जनवरी में आयोजित चुनावों में कांग्रेस पुनः सत्ता में वापस आ गया था ।
इंदिरा गाँधी को 1983 - 198 4 )लेनिन शान्ति पुरस्कार से पुरस्कृत तथा 1984सोवियत संघ स्मारक डाक टिकट जारी किया था । सितम्बर 1981 में जरनैल सिंह भिंडरावाले का अलगाववादी सिख आतंकवादी समूह सिख धर्म के पवित्रतम तीर्थ, हरिमन्दिर साहिब परिसर के भीतर तैनात हो गया। स्वर्ण मंदिर परिसर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति के बावजूद गांधी ने आतंकवादियों का सफया करने के एक प्रयास में सेना को धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया। सैन्य और नागरिक हताहतों की संख्या के हिसाब में भिन्नता है। सरकारी अनुमान है चार अधिकारियों सहित उनासी सैनिक और 492 आतंकवादी; अन्य हिसाब के अनुसार, संभवत 500 या अधिक सैनिक एवं अनेक तीर्थयात्रियों सहित 3000 अन्य लोग गोलीबारी में फंसे । जबकि सटीक नागरिक हताहतों की संख्या से संबंधित आंकडे विवादित रहे हैं, इस हमले के लिए समय एवं तरीके का निर्वाचन भी विवादास्पद हैं। इन्दिरा गांधी के बहुसंख्यक अंगरक्षकों में से दो थे सतवंत सिंह और बेअन्त सिंह द्वारा ३१ अक्टूबर 1984 को वे अपनी सेवा हथियारों के द्वारा 1, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली में स्थित प्रधानमंत्री निवास के बगीचे में इंदिरा गांधी की राजनैतिक हत्या की। वो ब्रिटिश अभिनेता पीटर उस्तीनोव को आयरिश टेलीविजन के लिए एक वृत्तचित्र फिल्माने के दौरान साक्षात्कार देने के लिए सतवंत और बेअन्त द्वारा प्रहरारत एक छोटा गेट पार करते हुए आगे बढ़ी थीं। इस घटना के तत्काल बाद, उपलब्ध सूचना के अनुसार, बेअंत सिंह ने अपने बगलवाले शस्त्र का उपयोग कर उनपर तीन बार गोली चलाई और सतवंत सिंह एक स्टेन कारबाईन का उपयोग कर उनपर बाईस चक्कर गोली दागे थे । उनके अन्य अंगरक्षकों द्वारा बेअंत सिंह को गोली मार दी गई और सतवंत सिंह को गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया गया।गांधी को उनके सरकारी कार में अस्पताल पहुंचाते पहुँचाते रास्ते में ही दम तोड़ दीं थी, लेकिन घंटों तक उनकी मृत्यु घोषित नहीं की गई। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया। सरकारी हिसाब 29 प्रवेश और निकास घावों को दर्शाती है, तथा कुछ बयाने 31 बुलेटों के उनके शरीर से निकाला जाना बताती है। उनका अंतिम संस्कार 3 नवंबर को राज घाट के समीप हुआ और यह जगह शक्ति स्थल के रूप में जानी गई। उनके मौत के बाद, नई दिल्ली के साथ साथ भारत के अनेकों अन्य शहरों, जिनमे कानपुर, आसनसोल और इंदौर शामिल हैं, में सांप्रदायिक अशांति घिर गई और हजारों सिखों के मौत दर्ज किये गये। गांधी के मित्र और जीवनीकार पुपुल जयकर, ऑपरेशन ब्लू स्टार लागू करने से क्या घटित हो सकती है इस सबध में इंदिरा के तनाव एवं पूर्व-धारणा पर आगे प्रकाश डालीं हैं।इन्दिरा ने फिरोज़ गाँधी से विवाह किया।[18] शुरू में संजय उनका वारिस चुना गया था, लेकिन एक उड़ान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद, उनकी माँ ने अनिच्छुक राजीव गांधी को पायलट की नौकरी परित्याग कर फरवरी 1981 में राजनीति में प्रवेश के लिए प्रेरित किया।इन्दिरा मृत्यु के बाद राजिव गांधी प्रधानमंत्री बनें। मई 1991 में उनकी राजनैतिक हत्या, इसबार लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम के आतंकवादियों के हाथों हुई। राजीव की विधवा, सोनिया गांधी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को 2004 के लोक सभा निर्वाचन में एक आश्चर्य चुनावी जीत का नेतृत्व दिया। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री कार्यालय अवसर को अस्वीकार कर दिया लेकिन कांग्रेस की राजनैतिक उपकरणों पर उनका लगाम है; प्रधानमंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह, पूर्व में वित्त मंत्री रहे । इंदिरा गांधी के पौत्र एवं राजीव गांधी की पत्नी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमिटि अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी कांग्रेस राजनीति में और संजय गांधी की विधवा, मेनका गांधी के पुत्र,वरुण गांधी भारतीय जनता पार्टी दल में सक्रिय हैं।
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बहुत हो गये अपने देश में गद्दार

Posted: 18 Nov 2021 04:20 AM PST

बहुत हो गये अपने देश में गद्दार 

बहुत हो गये अपने देश में गद्दार,
कर रहे देश की इज्जत तार-तार,
रहते,खाते वे अपने देश में,
गाते वे दुश्मन के गुण हजार।
    बहुत हो गये...।

कोई हमपर सांस्कृतिक चोट पहुँचाते,
कोई करते हमारे देवता पर प्रहार,
कोई मेरे देश के दुश्मन से मिलकर ,
दिलवाते हमें करारी हार। 
     बहुत हो गये...।

हमारे यहाँ कई सफेदपोश हैं ऐसे,
जिनके हैं देश-विरोधी विचार,
मिलते ये आतंकी संगठनों से,
पर कभी नहीं कहलाते ये गुनाहगार। 
      बहुत हो गये...।

कुछ गद्दार हिन्दु को आतंकी कहते,
खुद को बताते देश का वफादार,
अब तो जागो मेरे देश के नौजवानों,
जागो मेरे देश के पहरेदार।
     बहुत हो गये...।

ऐसे लोगों को पहचानो जनता,
जो कर रहे देश पर जुल्म,अत्याचार ,
दे दो इनको वोट से चोट,
या कर दो इनका समूल संहार।
       -----000----
       अरविन्द अकेला
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दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति के आह्वान पर ब्राह्मण समाज द्वारा किया गया निर्धन परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग

Posted: 18 Nov 2021 04:15 AM PST

दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति के आह्वान पर ब्राह्मण समाज द्वारा किया गया निर्धन परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग

दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति, गोरखपुर के आह्वान पर समाज के उदारमना सहयोगी स्वजनों ने मानवता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर समाज के एक अत्यंत निर्धन परिवार के कन्या के विवाह में हरसंभव सहयोग करने का बीड़ा उठाया। देश प्रदेश के सुहृद बंधुओं ने इस आह्वान पर धनधान्य, गृहस्थी के उपयोगी उपहार आदि प्रदान कर विवाह सकुशल संपन्न कराने में भरपूर सहयोग प्रेषित कर कन्या के विवाहोपरांत सुखद दाम्पत्य जीवन की मंगल कामनाएं की। समिति के अध्यक्ष महोदय श्री शरद चन्द्र पाण्डेय जी के अशोक नगर, बशारतपुर स्थित आवास पर समस्त देय सामग्री एकत्रित कर उक्त कन्या के परिजनों को समिति के पदाधिकारियों व सहयोगी बंधुओं के उपस्थिति में सौंपा गया। महामंत्री अमरनाथ मिश्र, संगठन मंत्री अनन्त मिश्र, संयुक्त मंत्री रजनीश मिश्र के साथ ही समाजसेविका श्रीमती आशा मिश्रा, श्रीमती अनिता तिवारी व समाजबंधु श्री अवधेश पाण्डेय, श्री विजय प्रकाश मिश्र, डा० मार्कण्डेय मिश्र, महेश पाण्डेय, राजेश त्रिपाठी आदि ने भी अपनी सशक्त सहभागिता व गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई
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चलो वृद्धाश्रम

Posted: 17 Nov 2021 11:31 PM PST

चलो वृद्धाश्रम 

देखो हमनें जी ली जिंदगी
अब बच्चों का जमाना है
रहने दो बच्चों को संग 
कहां वृद्धों का अब जमाना है।।

महंगाई की दुहाई दे बस जतलाना है।।
मात पिता बोझ समझ वृद्धाश्रम 
का रास्ता बस सता दिखाना है।।

चलो दुख अधिक नहीं मुझे आज
ये तो भविष्य में बच्चों को समझ आना है
तुम हो ना मेरे संग सनम मेरे
तुम्हारे संग ही मिल मुझे मरते 
दम़ तक जी कर मुस्कुराना है।।

समझाती हूं तुम्हें हमसफर मैं
वृद्धाश्रम चलो हमें जाना है।।2।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
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लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर विशेष -

Posted: 17 Nov 2021 08:59 PM PST

लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर विशेष -

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायकों में से एक और लाल, बाल, पाल की तिकड़ी के मशहूर नेता लाला लाजपत राय का जीवन आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है. उन्होंने न सिर्फ आजादी की लड़ाई के दौरान नेतृत्व किया बल्कि अपने जीवन उदाहरणों से उस आदर्श को स्थापित करने में सफलता पाई, जिसकी कल्पना एक आदर्श राजनेता में की जाती है.
लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को पंजाब के मोगा में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता लाला राधाकृष्ण एक अध्यापक रहे. इसका प्रभाव लाजपत राय पर भी पड़ा. शुरूआती दिनों से ही वे एक मेधावी छात्र रहे और अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वकालत की ओर रुख कर लिया. वे एक बेहतरीन वकील बने और कुछ समय तक वकालत भी की, लेकिन जल्दी ही उनका मन इस काम से उचट गया. अंग्रेजों की न्याय व्यवस्था के प्रति उनके मन में रोष पैदा हो गया. उन्होंने उस व्यवस्था को छोड़कर बैंकिंग का रूख किया
उन्होंने अपनी आजीविका चलाने के लिए बैंकिंग का नवाचार किया. उस समय तक भारत में बैंक कोई बहुत अधिक लोकप्रिय नहीं थे, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती की तरह लिया और पंजाब नेशनल बैंक तथा लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की. दूसरी तरफ वे लगातार कांग्रेस के माध्यम से अंग्रेजों की खिलाफत करते रहे. अपनी निर्भिकता और गरम स्वभाव के कारण इन्हें पंजाब केसरी के उपाधी से नवाजा गया. बाल गंगाधर तिलक के बाद वे उन शुरूआती नेताओं में से थे, जिन्होंने पूर्ण स्वराज की मांग की. पंजाब में वे सबसे लोकप्रिय नेता बन कर उभरे.
आजादी के प्रखर सेनानी होने के साथ ही लाला जी का झुकाव भारत में तेजी से फैल रहे आर्य समाज आंदोलन की तरफ भी था. इसका परिणाम हुआ कि उन्होंने जल्दी ही महर्षि दयानंद सरस्वती के साथ मिलकर इस आंदोलन का आगे बढ़ाने का काम ​हाथ में ले लिया. आर्य समाज भारतीय हिंदू समाज में फैली कूरीतियों और धार्मिक अंधविश्वासों पर प्रहार करता था और वेदों की ओर लौटने का आवाहन करता था. लाला जी ने उस वक्त लोकप्रिय जनमानस के विरूद्ध खड़े होने का साहस किया. ये उस दौर की बात है जब आर्य समाजियों को धर्मविरोधी समझा जाता ​था, लेकिन लाला जी ने इसकी कतई परवाह नहीं की. जल्दी ही उनके प्रयासों से आर्य समाज पंजाब में लोकप्रिय हो गया.
उन्होंने दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में कि​या. अभी तक भारत में पारम्परिक शिक्षा का ही बोलबाला था​. जिसमें शिक्षा का माध्यम संस्कृत और उर्दू ​थे. ज्यादातर लोग उस शिक्षा से वंचित थे जो यूरोपीय शैली या अंग्रेजी व्यवस्था पर आधारित थी. आर्य समाज ने इस दिशा में दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालयों को प्रारंभ किया, जिसके प्रसार और प्रचार के लिए लाला जी ने हरसंभव प्रयास किए. आगे चलकर पंजाब अपने बेहतरीन डीएवी स्कूल्स के लिए जाना गया. इसमें लाला लाजपत राय का योगदान अविस्मरणीय रहा.
शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूसरी महत्वपूर्ण उपलब्धि लाहौर का डीएवी कॉलेज रहा. उन्होंने इस कॉलेज के तब के भारत के बेहतरीन शिक्षा के केन्‍द्र में तब्दील कर दिया. यह कॉलेज उन युवाओं के लिए तो वरदान साबित हुआ, जिन्होंने असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेजों द्वारा संचालित कॉलेजों को धता बता दिया था. डीएवी कॉलेज ने उनमें से अधिकांश की शिक्षा की व्यवस्था की.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ना लाला जी के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी. 1888 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन इलाहाबाद में हुआ और यह पहला अवसर था जब लाला लाजपत राय को इस संगठन से जुड़ने का अवसर मिला. अपने शुरूआती दिनों में ही उन्होंने एक उत्साही कार्यकर्ता के तौर पर कांग्रेस में पहचान बनानी शुरू कर दी. धीरे—धीरे वे कांग्रेस के पंजाब प्रांत के सर्वमान्य प्रतिनिधि मान लिए गए. 1906 में उनको कांग्रेस ने गोपालकृष्ण के साथ गए शिष्टमंडल का सदस्य बनाया. संगठन में उनके बढ़ते कद का यह परिचायक बनी. कांग्रेस में उनके विचारों के कारण उठापटक प्रारंभ हुई. वे बाल गंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल के अलावा तीसरे नेता थे, जो कांग्रेस को अंग्रेजों की पिछलग्गू संस्था की भूमिका से ऊपर उठाना चाहते थे.
कांग्रेस में अंग्रेज सरकार की खिलाफत की वजह से वे ब्रिटिश सरकार की नजरों में अखरने लग गए. ब्रिटिशर्स चाहते थे कि उन्हें कांग्रेस से अलग कर दिया जाए, लेकिन उनका कद और लोकप्रियता देखते हुए, यह करना आसान नहीं था. 1907 में लाला लाजपत राय के नेतृत्व में किसानों ने अंग्रेज ​सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया. अंग्रेज सरकार ऐसे ही मौके के तलाश में थी और उन्होंने लालाजी को न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि उन्हें देश निकाला देते हुए बर्मा के मांडले जेल में कैद कर दिया गया, लेकिन सरकार का यह दांव उल्टा पड़ गया और लोग सड़कों पर उतर आए. दबाव में अंग्रेज सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा और लाला जी एक बार फिर अपने लोगों के बीच वापस आए.
1907 आते—आते लाला जी के विचारों से कांग्रेस का एक धड़ा पूरी तरह असहमत दिखने लगा था. लाला जी को उस गरम दल का हिस्सा माना जाने लगा था, जो अंग्रेज सरकार से लड़कर पूर्ण स्वराज लेना चाहती थी. इस पूर्ण स्वराज को अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम और प्रथम विश्व युद्ध से बल मिला और लाला जी भारत में एनीबेसेंट के साथ होमरूल के मुख्य वक्ता बन कर सामने आए. जलिया वाला बाग कांड ने उनमें अंग्रेज सरकार के खिलाफ और ज्यादा असंतोष भर दिया. इसी बीच कांग्रेस में महात्मा गांधी का प्रादुर्भाव हो चुका था और अंतरराष्ट्रीय पटल पर गांधी स्थापित हो चुके थे. 1920 में गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में उन्होंने बढ़—चढ़ कर हिस्सा लिया. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन तबियत बिगड़ जाने पर उन्हें रिहा कर दिया गया. इसी बीच उनके संबंध लगातार कांग्रेस से बिगड़ते रहे और 1924 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर स्वराज पार्टी में शामिल हुए और केन्द्रिय असेम्बली के सदस्य चुने गये. यहां भी जल्दी ही उनका मन उचट गया और उन्होंने नेशलिस्ट पार्टी का गठन किया और एक बार फिर असेम्बली का हिस्सा बने.
भारत की आजादी की लड़ाई एक बड़ा वाकया उस वक्त घटित हुआ, जब भारतीयों से बात करने आए साइमन कमीशन का विरोध का फैसला गांधी द्वारा लिया गया. साइमन कमीशन जहां भी गया, वहां साइमन गो बैक के नारे बुलंद हुए. 30 अक्टूबर 1928 को जब कमीशन लाहौर पहुंचा, तो लाला लाजपत राय के नेतृत्व में एक दल शांतिपूर्वक साइमन गो बैक के नारे लगाता हुआ अपना विरोध दर्ज करवा रहा था. तभी अंग्रेज पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया और एक युवा अंग्रेज अफसर ने लालाजी के सर पर जोरदार प्रहार किया. लाला जी का कथन था— मेरे शरीर पर पड़ी एक—एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में कील का काम करेगी.सिर पर लगी हुई चोट ने लाला लाजपत राय का प्राणान्त कर दिया. उनकी मृत्यु से पूरा देश भड़क उठा. इसी क्रोध के परिणामस्वरूप भगतसिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव ने अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या की और फांसी के फंदे से झूल गए. लाला लाजपत राय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन सेनानियों में से एक रहे जिन्होंने अपना सबकुछ देश को दे दिया. उनका जीवन ढेर सारे कष्टों और संघर्ष की महागाथा ​है, जिसे आने वाली पीढ़ीया युगों तक कहती—सुनती रहेंगी.
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मेरे गीत मुझे लौटा दो

Posted: 17 Nov 2021 08:54 PM PST

मेरे गीत मुझे लौटा दो .......

तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

गाये थे जो संग तुम्हारे 
मधुर क्षणों में 
गीत,मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

चन्दा की वह मधुर चाँदनी 
छत पर जा जब बातें की थी,
चाँदनी, मुझको लौटा दो 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

अमुवा की वह छाँव घनी 
पवन संग झुला झूले थे,
छाँव, मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

तन्हाई में तिल -तिल मरना 
और मिलन की इच्छा करना,
तनहा पल मुझको लौटा दो 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

रखा था जब हाथ लबों पे,
आँखों के दर्पण में चेहरा 
दर्पण, मुझको लौटा दो 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

छुप कर मिलना, जग से डरना,
आकर मेरी बाहँ पकड़ना,
डरने का वह भाव लौटा दो,
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

सावन की रिमझिम 
पावों की छपछप,
छपछप का संगीत लौटा दो,
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भुलूं 
मैं भुलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

यादें- वादें, कसमे- रस्मे 
झूठे- सच्चे सारे सपने 
सब ले जाओ 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भूलूं 
मैं भूलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

गीतों को सपने सा सजाकर 
फिर से गा लूंगा 
तन्हां मैं आंसू पी लूंगा 
मैं जी लूंगा।
तुम चाहती हो तुमको भुलूं 
मैं भुलूंगा 
मेरे गीत मुझे लौटा दो 
मैं जी लूंगा।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम और बिहार म्युजियम का किया भ्रमण, नये प्रस्तावित बस अड्डा के निर्माण को लेकर विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण

Posted: 17 Nov 2021 08:50 PM PST

मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम और बिहार म्युजियम का किया भ्रमण, नये प्रस्तावित बस अड्डा के निर्माण को लेकर विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण

पटना, 17 नवम्बर 2021 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पटना म्युजियम का भ्रमण कर वहां चलाए जा रहे अपग्रेडेशन एवं एक्सटेंशन कार्यों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पटना म्युजियम के ग्राउंड प्लान, पटना म्यूजियम सब-वे लेबल प्लान तथा पटना म्यूजियम एवं बिहार म्युजियम की अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी को लेकर प्रस्तावित सब-वे की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम को जोड़ने वाले अंडरग्राउंड टनल (पाथ) बनाने की योजना की विस्तृत जानकारी ली और निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देष देते हुये कहा बड़ी संख्या में लोग पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम आते हैं और आगे भी आयेंगे। इसे ध्यान में रखते हुये यहां पार्किंग की समुचित व्यवस्था करें ताकि यहां आने वाले लोगांे को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पाटलिपुत्र एक ऐतिहासिक स्थल है। पुरातात्विक दृष्टिकोण से पटना म्युजियम का यह स्थल काफी महत्वपूर्ण है। इस दृष्टिकोण से पटना म्युजियम के एक हिस्से में खुदाई कराना आवष्यक है। ताकि पुरातात्विक अवषेषों की प्राप्ति से यहां के इतिहास के बारे में और विशेष जानकारी मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम भ्रमण के उपरांत बिहार म्युजियम का भी निरीक्षण किया और पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम को जोड़ने वाले अंडरग्राउंड पाथ के निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम के भ्रमण के पश्चात् नये प्रस्तावित बस अड्डे के निर्माण हेतु फुलवारीशरीफ के मुरादपुर, बिहटा के नेउरा तथा कन्हौली में स्थल निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव पथ निर्माण श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री आनंद किशोर, प्रमंडलीय आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी, भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री कुमार रवि, अपर सचिव कला संस्कृति एवं युवा विभाग श्री दीपक आनंद, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री उपेंद्र शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews
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आज 18 नवम्बर 2021, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 17 Nov 2021 06:12 AM PST

आज 18 नवम्बर 2021, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |


श्री गणेशाय नम: !!

 18 नवम्बर 2021, गुरूवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि चतुर्दशी दिन 11:34:12

🔅 नक्षत्र भरणी रात्रि 01:38:10

🔅 करण :

                वणिज 12:02:50

                विष्टि 25:14:27

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग वरियान 26:57:22

🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:38:51

🔅 चन्द्रोदय 16:53:59

🔅 चन्द्र राशि मेष

🔅 सूर्यास्त 17:22:46

🔅 चन्द्रास्त 30:32:00

🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 10:40:46

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत कार्तिक

🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:44:42 - 12:27:25

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त :

                    10:19:16 - 11:01:59

                    14:35:34 - 15:18:17

🔅 कंटक 14:35:34 - 15:18:17

🔅 यमघण्ट 07:28:24 - 08:11:07

🔅 राहु काल 13:26:09 - 14:46:15

🔅 कुलिक 10:19:16 - 11:01:59

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 16:01:00 - 16:43:43

🔅 यमगण्ड 06:45:41 - 08:05:46

🔅 गुलिक काल 09:25:52 - 10:45:58

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल दक्षिण
☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

🌹विशेष ~ व्रत का पूर्णिमा, श्रीकाशी विश्वनाथ प्रतिष्ठा दिवस, चौमासी चौदस (जैन)। 🌹

पं. प्रेम सागर पाण्डेय्

 18 नवम्बर 2021, गुरूवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज दिनभर प्रतिकूलता का सामना करना पड़ेगा। शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ रहेंगे। खर्च की मात्रा बढ़ेगी। पूंजी-निवेश के लिए ध्यान रखें। परोपकार करने में गंवाने की नौबत आएगी। संभलकर लेन-देन करें। आध्यात्मिकता के प्रति रुचि अधिक रहेगी। आप लाभ की लालच में न फंसे। निर्णय शक्ति का अभाव द्विधा में डाल देगा।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras): आज का दिन आनंद से भरा दिन है। व्यापार में और आय वृद्धि होने में लक्ष्मीजी की कृपा रहेगी। परिवारजनों और मित्रों के साथ आनंद-प्रमोद का वातावरण आनंदमय रहेगा। नए संपर्क और परिचय व्यापार के क्षेत्र में लाभप्रद रहेंगे। छोटा प्रवास आनंददायी रहेगा। आज पूरे दिन मन में उल्लास और प्रसन्नता रहेगी।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4
मिथुन (Gemini): शारीरिक और मानसिक रूप से आज दिनभर प्रसन्नता छाई रहेगी। व्यवसायिक क्षेत्र में कार्य की प्रशंसा होने से कार्य के प्रति उत्साह भी बढ़ेगा। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। मान-सम्मान प्राप्त होगा। परिवारजनों के साथ समय आनंदपूर्वक बिता पाएंगे। व्यवसाय में पदोन्नति की संभावना है। सरकारी क्षेत्र के कार्य भी सरलतापूर्वक संपन्न होंगे।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

कर्क (Cancer): भाग्य में वृद्धि होने का दिन है। विदेश से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। छोटा प्रवास या किसी धार्मिक यात्रा से मन प्रसन्न रहेगा। शारीरिक और मानसिक रूप से प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। मित्रों और परिवारजनों के साथ दिन आनंद में बीतेगा। व्यवसायिक क्षेत्र में भी लाभ होगा। आकस्मिक धन प्राप्ति के योग प्रबल हैं। धार्मिक कार्यो में सफलता प्राप्त होगी।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 5

सिंह (Leo): स्वास्थ्य के प्रति आज अधिक ध्यान रखें। स्वास्थ्य के पीछे धन का खर्च भी हो सकता है। आज खान-पान घर का ही करें तो लाभदायी होगा। वैचारिक स्तर पर नकारात्मकता छाई रहेगी। उसे दूर करने की सलाह है। आध्यात्मिकता के प्रति रुचि, ध्यान और जप आपको उचित मार्ग पर ले जाएंगे। जिससे मानसिक अस्वस्थता बहुत कम हो जाएगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

कन्या (Virgo): आज का दिन आपके लिए शुभ है। यश कीर्ति प्राप्त होने में सरलता रहेगी। व्यापार के क्षेत्र में भागीदारों के साथ सम्बंधो में सकारात्मकता बढेगी। वस्त्राभूषणों की खरीदी से मन आनंदित होगा। मित्रों के साथ प्रवास का आनंद लूट सकेंगे।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

तुला (Libra): आप का स्वास्थ्य आज अच्छा रहेगा। व्यवसायिक क्षेत्र में लाभ होगा। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। परिवारजनों के साथ आप समय आनंदपू्र्वक बिता सकेंगे। वाणी पर संयम बरतिएगा। खर्च की मात्रा आज बढ़ न जाए इसका भी ध्यान रखें। कार्य में सफलता भी प्राप्त होगी और यश भी प्राप्त होगा।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 1

वृश्चिक (Scorpio): वाद-विवाद में न फंसें। संतान के विषय में चिंता रहेगी। विद्यार्थियों को अभ्यास में सफलता प्राप्त होने से उनके उत्साह में वृद्धि होगी। शेयर-सट्टे में पूंजी-निवेश न करने की सलाह है। संभव हो तो यात्रा या प्रवास को टाल दें। भविष्य के लिए आर्थिक योजनाएं बनाने के लिए समय अनुकूल है। परिश्रम के अनुसार सफलता भी प्राप्त होगी।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): मानसिक रूप से आज आपमें उत्साह का अभाव रहेगा, जिससे मन में अशांति बनी रहेगी। पारिवारिक वातावरण क्लेशपूर्ण रहेगा, क्योंकि परिवारजनों के साथ अनबन हो सकती है। स्थावर संपत्ति के दस्तावेज करते समय विशेष ध्यान रखें। हानि का योग है। मानहानि न हो इसका ध्यान रखें। माता के स्वास्थ्य के विषय में चिंता रहेगी। छाती में दर्द हो सकता है।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मकर (Capricorn): मित्रों और परिवारजनों के साथ आज का दिन आनंदपूर्वक बीतेगा। किसी पर्यटन स्थल पर प्रवास भी हो सकता है। संपत्ति विषयक कार्य आज पूरे होंगे। व्यवसायियों के लिए समय अनुकूल है। विद्यार्थियों को समय की अनुकूलता रहेगी। प्रतिस्पर्धी परास्त होंगे। आर्थिक लाभ होने के संकेत हैं। नए कार्यों का आयोजन करेंगे।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

कुंभ (Aquarius): मानसिक रूप से द्विधा का अनुभव होने से किसी निश्चित निर्णय लेने में कष्ट होगा। निरर्थक खर्च से बचें। वाणी पर संयम न रखने से परिवारजनों के साथ अनबन होने की संभावना है। विद्यार्थियों को अभ्यास में समय मन की एकाग्रता पर अधिक जोर देना पडेगा। कार्य सफलता प्राप्त होने में विलंब हो सकता है।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मीन (Pisces): शारीरिक और मानसिक रुप से आपका स्वास्थ्य प्रसन्नता से भरा रहेगा। उत्साहपूर्ण वातावरण होने से नए कार्य का प्रारंभ करने की प्रेरणा मिलेगी। पारिवारिक वातावरण में सुख-शांति बनी रहेगी। मित्रों और परिवारजनों के साथ प्रवास पर जाना हो सकता है। धन प्राप्ति के योग हैं। धार्मिक यात्रा या धार्मिक कार्य के आज योग हैं।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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एडवोकेट ऑफ जेएसडी कॉउंसिल द्वारा राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस एंव विश्व विद्यार्थी दिवस के शुभ अवसर पर एक परिषद प्रतिनिधि संगोष्ठी आयोजित किया गया

Posted: 17 Nov 2021 05:23 AM PST

एडवोकेट ऑफ जेएसडी कॉउंसिल द्वारा राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस एंव विश्व विद्यार्थी दिवस के शुभ अवसर पर एक परिषद प्रतिनिधि संगोष्ठी आयोजित किया गया

दिनांक 17 नवंबर 2021 रोज-बुधवार समय-1बजे पटना के गांधी मैदान स्थित ए. एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट ( सोशल स्टडीज) में एडवोकेट ऑफ जेएसडी कॉउंसिल द्वारा राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस एंव विश्व विद्यार्थी दिवस के शुभ अवसर पर एक परिषद प्रतिनिधि संगोष्ठी आयोजित किया गया है । जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री श्याम रजक एंव संचालन डॉ. सुमन्त राव ने किया। इस संगोष्ठी में अर्थशास्त्री प्रो डॉ. नवल किशोर चौधरी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि झंडा, बैनर जिंदाबाद मुर्दाबाद की राजनीति से छात्र-युवा को दूर रहना चाहिए। वर्तमान समय के छात्र नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर आंदोलन करते है । पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि छात्र -युवा को विचार धारा की राजनीति करना चाहिए बिना विचारधारा की राजनीति से देश का लोकतंत्र मजबूत नही हो सकता है । हर माह संगोष्ठी के माध्यम से ही नैतिक क्षमता विकसित हो सकता है । छात्र युवा को राजनीति जैसे मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आज के इस संगोष्ठी में निदेशक सह प्रवक्ता डॉ. सुमंत राव, निदेशक नेहा यादव, प्रदेश अध्यक्ष चंदन ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता अरविंद तिवारी पटना प्रमंडल परिषद से विक्रांत जायसवाल, एडवोकेट संतोष कुमार, सचिव नीतीश कुमार, सुधीर कुमार, तिरहुत प्रमंडल परिषद के आलोक कुमार , सुंदरम सिंह, अभिषेक यादव, अजय यादव, कोशी प्रमंडल परिषद से संतोष कुमार सेठी, संजीव सिंह, मगध प्रमंडल परिषद से राज दयाल झारखंड राज्य परिषद के शशिकांत चौधरी समेत कई अधिवक्ता, प्रोफेसर, डॉक्टर, पत्रकार, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता ने भाग लिया ।
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विविधता से भरी दुनिया

Posted: 17 Nov 2021 05:17 AM PST

विविधता से भरी दुनिया

(अचिता-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
यह दुनिया अजब-गजब परंपराओं और रीति-रिवाजों से भरी है। इन रीति-रिवाजों में कहीं आस्था जुड़ी है तो कहीं अज्ञानता भी है। आस्था को बनाये रखने के साथ अज्ञान को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। चीन के एक प्रांत में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी हंसिए से बाल काटते हैं, तो उत्तरी थाइलैण्ड में महिलाएं अपनी गर्दन में धातु के छल्ले इस तरह पहनती हैं जिससे उनकी गर्दन लम्बी दिखने लगती है। मानते हैं कि यहां बाघ हमला करते हैं और वे गर्दन ही पकड़ते हैं। इसलिए गर्दन में छल्ले पहने जाते हैं।

हंसिया से काटे जाते बाल

दुनिया में ऐसे कई आदिवासी समुदाय हैं जिनकी परंपराएं विश्व प्रसिद्ध हैं। लोग इनके बारे में जानकर दंग हो जाते हैं मगर ये आदिवासी जनजातियां आज भी अपनी मान्यताओं और परंपराओं को कायम रखे हुए हैं। चीन की एक जनजाति जो अपनी बरसों पुरानी परंपराओं का पालन करती है। इस समुदाय में मर्दों को बंदूक रखने की छूट है और उनके बाल हंसिया से काटे जाते हैं! बेशक ये हैरान करने वाली परंपरा है जो गुइजो प्रांत के कुछ लोगों के जीवन का हिस्सा है। हम बात कर रहे हैं मियाओ अल्पसंख्यक जनजाति की जो बाशा गांव के निवासी हैं। ये गांव चीन के अन्य गांवों से काफी अलग है। वो इसलिए कि ये चीन की एक मात्र ऐसी जगह हैं जहां के निवासियों को बंदूक रखने की इजाजत है। एक बार चीन की सरकार ने यहां के लोगों की बंदूकों को जब्त करने का निर्णय लिया था मगर गांव के लोगों से उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सरकार ने यहां के लोगों को इजाजत दी कि वो बंदूक रख सकते हैं। गांव में 400 से ज्यादा परिवार हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां की कुल आबादी 1 हजार से ज्यादा है। गांव के लोग आत्मनिर्भर हैं इसलिए इन्होंने खुद को बाहरी दुनिया से काट लिया है। इस गांव के लोगों में बंदूकों का प्रदर्शन करने का रिवाज है। जो कोई भी इस गांव में जाता है उनका स्वागत यहां के मर्द बंदूक चलाकर करते हैं। हालांकि उनका मकसद हिंसा फैलाने या डर पैदा करने का नहीं होता है। इस गांव के पूर्वज वीर सैनिक थे जो गांव की रक्षा घुसपैठियों और जंगली जानवरों से करते थे। इसलिए वो अपने साथ बंदूक रखा करते थे। यही वजह है कि आज भी यहां के लोग राइफल लिए रहते हैं। 15 साल की उम्र में हर मर्द को बंदूक दे दी जाती है। मियाओ लोगों से जुड़ी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि यहां के मर्दों के बाल हंसिया से काटे जाते हैं। ना ही कैंची का इस्तेमाल होता है और ना ही पानी या किसी अन्य चीज का उपयोग किया जाता है। 7 से 15 साल की उम्र के बीच युवक को दो विकल्प दिए जाते हैं या तो वो अपने बाल कटवा ले और सर के बीच में एक लंबी चोटी छोड़े जिसे जूड़े की तरह बांधा जाता है, या फिर वो बाल ना कटवाए और जूड़ा बांध ले। हालांकि अधिकतर मर्द हंसिया से बाल कटवा लेते हैं। उनकी चोटी उनकी बहादुरी और पौरुष का प्रतीक होता है।

महिलाएं गर्दन भर पहनती धातु के छल्ले

दुनिया में सदियों से कई रीति-रिवाज चले आ रहे हैं जिनके बारे में जानकर हर कोई दंग हो जाता है। लोगों की आस्था से जुड़े ये रिवाज आज भी प्रचलित हैं। बहुत सी जनजातियां और समुदाय अपनी परंपराओं को बचाकर रखना चाहते हैं इसलिए गुजरे वक्त की अनोखी परंपराओं को वो आज भी साथ लिए चल रहे हैं। ऐसी ही एक प्रथा म्यांमार की एक जनजाति में सालों से चली आ रही है। इस खास जनजाति की महिलाएं अपनी गर्दन में धातु के छल्ले पहनती हैं जिससे उनकी गर्दन काफी विचित्र ढंग से लंबी लगने लगती है।
उत्तरी थाइलैंड और म्यांमार के बॉर्डर पर करेनेनी जनजाति रहती है जिसे कयान लहवी कहते हैं। कयान लोग अपनी औरतों की बेहद अनोखी वेशभूषा के कारण जाने जाते हैं। औरतें अपनी गर्दन में रिंग यानी छल्ले पहनती हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है कि उनकी गर्दन खिंची हुई है और उनका सर गोल्ड के एक प्लेटफॉर्म के ऊपर रखा हुआ है। ये रिवाज सदियों पुराने हैं और अब के लोगों को ठीक से पता भी नहीं है कि इन रिवाजों का पालन क्यों किया जाता है। आपको बता दें कि करीब 2 दशक पहले करेनेनी जनजाति और म्यांमार की सरकार के बीच हिंसक गृह युद्ध छिड़ गया जिसके बाद कयान लोगों को म्यांमार से भागकर थाइलैंड के उत्तरी पहाड़ी इलाके में जाकर बसना पड़ा। ऐसा माना जाता है कि गांव के इलाकों में सदियों से बाघ पाए जाते हैं जो इंसानों पर हमला कर देते हैं। हमले के दौरान वो सबसे पहले इंसान की गर्दन पर प्रहार करते हैं। इसलिए यहां की महिलाओं ने सालों से गले को धातु के छल्लों से ढकना शुरू कर दिया। एक मान्यता ये भी है कि पुराने वक्त में दूसरी जनजाति के लोग जब हमला करते थे तो महिलाओं को अगवा करके ले जाते थे। इस अत्याचार से बचने के लिए महिलाओं ने गले में छल्ले पहनने की शुरुआत कर दी क्योंकि उनका मानना था कि इससे वो कम सुंदर लगेंगी और पुरुष उन्हें अगवा नहीं करेंगे। हालांकि, इस अद्भुत रिवाज ने इन महिलाओं की खूबसूरती को और भी निखार दिया है। मगर इन छल्लों से महिलाओं को काफी मुश्किल भी होती है। बचपन से पहनाए गए इन छल्लों के कारण गला खिंचता जाता है और कॉलर बोन को ये रिंग नीचे ढकेलती जाती हैं। इस वजह से गले की हड्डी में गंभीर चोटें भी लग जाती हैं। कयान लोग थाइलैंड में शरणार्थियों की तरह रहते हैं। इसलिए सरकार ने उनको कई सुविधाओं से वंचित कर रखा है। उनके सरकारी आईडी कार्ड्स नहीं बने हैं जिसके कारण उनके बच्चे छठी क्लास से आगे नहीं पढ़ पाते। यही नहीं, उन्हें आईडी न होने के कारण मेडिकल इंश्योरेंस भी नहीं मिल पाता जिस वजह से उनके लिए अस्पतालों में इलाज करवाना काफी महंगा साबित होता है। यहां इन लोगों के लिए गांव बनाए गए हैं जिनसे बाहर निकलने की उन्हें इजाजत नहीं है। हालांकि, दुनियाभर से पर्यटक इन अद्भुत रिवाजों वाले लोगों को देखने आते हैं और ये लोग अपनी खास शिल्पकारी उन्हें बेचकर पैसे कमाते हैं। (हिफी)

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एयर शो में सुदृढ़ वायु सेना का मनोबल

Posted: 17 Nov 2021 05:13 AM PST

एयर शो में सुदृढ़ वायु सेना का मनोबल

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
किसी एक्सप्रेस वे पर फाइटर प्लेन का उतरना रोचक होता है लेकिन इसका महत्व वायु सेना की सुदृढ़ स्थिति से बढ़ता है। नरेंद्र मोदी सरकार ने वायु सेना को मजबूत बनाने के अनेक प्रभावी कदम उठाए है। इनसे सेना का मनोबल बढ़ा है। दुश्मन को चुनौती का जज्बा पहले के मुकाबले बुलंद हुआ है। इसलिए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का एयर शो विशिष्ट हो गया।
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लोकार्पण का अंदाज अभूतपूर्व था। इसमें विकास के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सन्देश भी समाहित था। एक्सप्रेस वे पहले भी बने है, उन पर फाइटर प्लेन भी उतरे है किंतु नरेंद्र मोदी सरकार ने विगत छह वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नया आयाम दिया है। इस अवधि में अनेक आवश्यक रक्षा सौदों को अंजाम तक पहुंचाया गया। राफेल सहित अनेक आधुनिक विमान भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए। स्वदेशी रक्षा उत्पाद में पैतीस प्रतिशत की वृद्धि हुई। सत्तर से अधिक देशों को भारत द्वारा हथियारों का निर्यात किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर का निर्मांण भी प्रगति पर है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर का लोकार्पण किया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में हथियार निर्मांण करने वाली निजी सेक्टर की फैक्ट्री का शुभारंभ किया था। इस बार पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर फाइटर प्लेन उतरने के दृश्य में वायु सेना की मजबूती परिलक्षित थी। क्योंकि इसके पीछे रक्षा क्षेत्र में विगत छह वर्षों में किये गए प्रयासों का उत्साह व मनोबल समाहित था। यह यूपीए सरकार का समय नहीं था,जब अनेक कारणों से अति आवश्यक रक्षा डील भी अधर में थी। भारत को आत्मनिर्भर व हथियार निर्यातक बनाने का तो कोई मंसूबा ही नहीं था। अब माहौल बदल चुका है। यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है। इसलिए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के एयर शो पर दुनिया की नजर थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के उपरान्त भारतीय वायुसेना द्वारा एक एयर शो भी किया गया। इसमें सुखोई, मिराज,जगुआर, हरक्यूलिस सहित ग्यारह विमान सम्मिलित हुए।
भारत को अमेरिका से तीस सशस्त्र प्रीडेटर ड्रोन निकट भविष्य में मिलेंगे। हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस एमक्यू नाइन बी ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव को रक्षा खरीद परिषद द्वारा मंजूरी दिए जाने की संभावना है। प्रीडेटर ड्रोन को लंबे समय तक हवा में रहने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की निगरानी के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है। भारतीय वायुसेना के एलसीए तेजस लड़ाकू विमान फ्रांसीसी मिसाइल हैमर से लैस होंगे। वायुसेना ने फ्रेंच हैमर मिसाइलों के साथ तेजस की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आपातकालीन खरीद के तहत फ्रांस को ऑर्डर दिया है। इस घातक मिसाइल से फिलहाल लड़ाकू राफेल को लैस किया जाना है। इसकी वजह से पड़ोसी चीन और पाकिस्तान बेचैन हैं। हैमर हवा से जमीन पर मार करने वाली तेज गति से उड़ने वाली मिसाइल है। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ उभरते संघर्ष के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने अब एलसीए तेजस लड़ाकू विमानों को भी खतरनाक हैमर मिसाइल से लैस करने का फैसला लिया है। तेजस की मारक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए वायुसेना ने आपातकालीन खरीद के तहत फ्रांस को ऑर्डर दिया है। इन मिसाइलों की वजह से तेजस फाइटर जेट को हाई एल्टीट्यूड वाले इलाके यानी हिमालय के पर्वतों में छिपे चीनी दुश्मनों को मार गिराने में आसानी होगी। यह पूर्वी लद्दाख के इलाके में चीन की सेना के बंकरों और पोस्ट को उड़ा सकती है।
भारत सरकार ने एलसीए तेजस फाइटर की दो स्क्वाड्रन को संचालित कर दिया है। इसके अलावा चार और स्क्वाड्रन को एक्टीवेट करने की तैयारी चल रही है। भारतीय वायुसेना को मिलने वाले एलसीए तेजस लड़ाकू विमान पैंसठ प्रतिशत स्वदेशी होंगे। स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए देशी उत्तम रडार लगाए जाएंगे। स्वदेशी रक्षा उद्योग में भारतीय वायुसेना और आत्मनिर्भर भारत के लिए इसी साल की शुरुआत में एयरो इंडिया के दौरान हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल के साथ तिरासी तेजस मार्क वन ए फाइटर जेट के सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे। एट थ्री एलसीए एमके वन ए में से तिरसठ विमानों में इलेक्ट्रॉनिक एईएस रडार लगेंगे। इसके लिए डीआरडीओ और एचएएल में करार हुआ है। वायुसेना के पहले वाले ऑर्डर के चालीस एमके वन विमानों में मैकेनिकल इजराइली रडार लगाए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी महीने राष्ट्रीय रक्षा समर्पण पर्व के मौके पर स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर एलसीएच वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चैधरी को सौंपेंगे। रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के झांसी में होने वाले कार्यक्रम में आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को ड्रोन यूएवी और नौसेना के युद्धपोतों के लिए विकसित किये गए उन्नत ईडब्ल्यू सूट भी सौंपे जाएंगे।
भारत ने रूस के साथ भी करीब पांच अरब डॉलर का रक्षा सौदा किया है। भारत इस महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली की खरीद को लेकर किसी बाहरी दबाव में आने से इन्कार कर चुका है। पिछले वर्ष मास्को दौरे पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस से एस-400 की आपूर्ति जल्द करने का आग्रह किया था। एस-400 की खरीद व अधिग्रहण पर भारत और रूस के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। इस वर्ष की शुरुआत में भारत के सैन्य अधिकारियों का एक बड़ा दल इसके संचालन की ट्रेनिंग लेने रूस भी जा चुका है। कुछ समय बाद भारत को एस-400 प्रणाली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। नरेंद्र मोदी ने कहा कि इमरजेंसी की स्थिति में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे देश की वायुसेना के लिए एक और ताकत बन गया है। कुछ हफ्ते पूर्व ही कुशीनगर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का लोकार्पण हुआ था। इससे लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुलतानपुर,अयोध्या, अम्बेडकरनगर, मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर को जोड़ने के साथ उन शहरों को भी लखनऊ से जोड़ा गया है। जिनमें विकास की असीम आकांक्षा और बड़ी सम्भावना है। प्रदेश में निर्माणाधीन लगभग तीन किमी का बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरेया, इटावा शहरों को जोड़ेगा। नब्बे किमी लम्बे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे से गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, संतकबीरनगर और आजमगढ़ जुड़ेंगे। छह सौ किमी लम्बा गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ, हापुड़, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ेगा। यह सभी शहर छोटे हैं। पहली बार उत्तर प्रदेश की आकंक्षाओं के प्रतीक इन शहरों में आधुनिक कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गयी है। पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रंट कॉरिडोर से उत्तर प्रदेश को पूर्वी समुद्री तट और पश्चिमी समुद्री तट से जोड़ रहे है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दावेदारी

Posted: 17 Nov 2021 05:10 AM PST

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दावेदारी

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर चक्रव्यूह भी रचे जा रहे हैं। गत 16 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरक्यूलस विमान से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण करने पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकार्पण से पहले ही समाजवादी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता इस हाईवे का लोकार्पण कर देते हैं। समाजवादी पार्टी का दावा है कि इस एक्सप्रेस वे के निर्माण का श्रेय अखिलेश यादव की सरकार को मिलना चाहिए। सपा कार्यकर्ताओं ने एक्सप्रेस-वे पर साइकिल चलाते हुए कहा अखिलेश सरकार का काम बोल रहा है। ये पूर्वांचल की प्रगति को गति देगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया- फीता आया लखनऊ से और नई दिल्ली से कैंची आयी, सपा के काम का श्रेय लेने के लिए मची है खिचम खिंचाई। इसी ट्वीट मंे उन्होंने यह भी कहा है- आशा है अब तक अकेले में बैठकर लखनऊ वालों ने समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की लम्बाई का आंकड़ा रट लिया होगा। सपा का काम जनता के नाम। इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने सपा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा 'यदि वह (अखिलेश) सत्ता में होते तो 2 लेन एक्सप्रेस-वे बनाते और बाकी 4 लेन का पैसा अपनी तिजोरी मे भर लेते। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तंज किया- अखिलेश प्रदेश के विकास से खुश होने की जगह दुखी हो गये हैं। बहरहाल, प्रदेश के पूर्वांचल की जनता को एक नायाब तोहफा मिला है। पहले लखनऊ से गाजीपुर जाने में 6 घंटे लगते थे लेकिन अब तीन घंटे मंे ही गाजीपुर से लोग लखनऊ पहुंच जाएंगे। उद्यम और रोजगार भी इस एक्सप्रेस-वे के जरिए मिलेगा। गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, अयोध्या, बाराबंकी तक रोजगार के दरवाजे इससे खुलेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुल्तानपुर जिले के करवाल खीरी इलाके में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद बाद पीएम ने एक्सप्रेसवे पर बनी 3.2 किलोमीटर की हवाई पट्टी पर भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक एयर शो देखेंगे। उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सी-130 हरक्यूलिस विमान में हवाई पट्टी पर लैंड किया था। करीब 340 किमी. से अधिक लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लखनऊ से गाजीपुर के बीच यात्रा के समय को 6 घंटे से घटाकर 3.5 घंटे कर देगा। एक्सप्रेसवे लखनऊ के चंदसराय गांव से शुरू होता है और गाजीपुर (यूपी-बिहार सीमा से 18 किमी) में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर स्थित हैदरिया गांव में खत्म हो रहा है। इसमें सात बड़े पुल, सात रेलवे ओवरब्रिज, 114 छोटे पुल और 271 अंडरपास है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि छह लेन वाले एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। सुल्तानपुर जिले के करवाल खीरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे राज्य के पूर्वी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होगा। उन्होंने कहा कि इसकी नींव 2018 में रखी गई थी और कोविड महामारी के बावजूद मुश्किल से 19 महीनों में पूरी हुई थी। उन्होंने कहा, इस एक्सप्रेस-वे पर आठ जगहों पर औद्योगिक हब भी स्थापित किए जाएंगे और इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे 340 किमी से अधिक लंबा है। लगभग 22,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों, विशेष रूप से लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, आजमगढ़,मऊ और गाजीपुर जिलों को जोड़ेगा। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार का फोकस पांच प्रमुख परियोजनाओं पर है। ये सड़क और हवाई परिवहन से जुडीं परियोजनाएं हैं। चुनाव से पहले कुछ परियोजनाओं को पूरा करने की तैयारी है, तो कुछ का निर्माण बाद तक होता रहेगा। कुल चार एक्सप्रेसवे पर सरकार का खास ध्यान है। तीन हाईवे पर निर्माण चल रहा है तो एक का निर्माण अभी शुरू होना है। ये हाईवे उत्तर प्रदेश के हर हिस्से को कनेक्ट करेंगे। इन परियोजनाओं को मुकाम मिलने से विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए विकास को चुनावी मुद्दा बनाने में आसानी होगी। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि इन विकास कार्यों से चुनाव जीतने में मदद मिलेगी। चित्रकूट से इटावा तक बनने कुल 296 किमी के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य योगी सरकार करा रही है। अगले साल अप्रैल तक निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है। एक्सप्रेसव परियोजना का अब तक 67।29 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यमुना, बेतवा और केन नदी पर पुलों का निर्माण भी चल रहा है। चार लेन चैड़े इस एक्सप्रेसवे को भविष्य में छह लेन का भी किया जा सकता है। साल के आखिर या जनवरी-फरवरी के बीच इस एक्सप्रेसवे का एक साइड यातायात के लिए खोलने की तैयारी है।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार गंगा एक्सप्रेसवे का भी निर्माण हो रहा है। यह एक्सप्रेसवे कुल 594 किमी लंबा होगा। मेरठ से प्रयागराज को सीधे जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे से उत्तर प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। 80 से 90 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण उत्तर प्रदेश सरकार ने कर लिया है। निर्माण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना का शिलान्यास कर सकते हैं। गोरखपुर-आजमगढ़ लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। मार्च 2022 तक इस लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस परियोजना का लोकार्पण सरकार कर सकती है।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने का दावा किया है। समाजवादी पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं। इन तस्वीरों में सपा कार्यकर्ता साइकिल लेकर एक्सप्रेस-वे पर चढ़ते नजर आ रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में सपा कार्यकर्ताओं को एक्सप्रेस-वे पर साइकिल चलाते देखा जा सकता है। समाजवादी पार्टी की तरफ से इन तस्वीरों को जारी करने के साथ लिखा गया है, सपा का काम जनता के नाम, समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर साइकिल चलाकर एवं पुष्प चढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया इसको जनता को समर्पित। ये पूर्वांचल की प्रगति को गति देगा। सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं! समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर एक्सप्रेस-वे की लागत कम करने के लिए गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने कहा जिस गुणवत्ता के साथ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनना चाहिए था, उससे समझौता किया गया है। इसे उस गुणवत्ता के साथ नहीं बनाया गया है। अभी बरसात हुई थी, उसमें इसकी गुणवत्ता की कलई खुल गई है।
इस तरह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण का श्रेय लेने मंे भी राजनीति हो रही है जबकि प्रदेश की जनता को इसकी उपयोगिता से मतलब है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

विपक्ष के साझा मुद्दे उठाएंगी ममता

Posted: 17 Nov 2021 05:08 AM PST

विपक्ष के साझा मुद्दे उठाएंगी ममता

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष की सर्व सहमत नेता बनना चाहती हैं। इस प्रकार का प्रयास वह बहुत पहले से कर रही थीं जैसे नोटबंदी और जीएसटी का विरोध। इन मुद्दों पर ममता ने देश भर में भ्रमण किया लेकर विपक्ष को एक करके कोई बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा कर सकीं। अब राज्य के विधानसभा चुनाव मंे भाजपा को पटकनी देकर और इसी महीने (2 नवम्बर 2021) उपचुनाव मंे चारों सीटें जीतकर यह साबित कर दिया कि भाजपा का विजय अभियान वहीं रोक सकती है। ममता की पार्टी ने उपचुनावों मंे भाजपा से दो सीटें भी छीनी हैं। इसीलिए वह तेल की बढ़ी कीमतों से कमाई मंे राज्य का हिस्सा मांग रही हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में बीएसएफ को ज्यादा अधिकार देने का भी वह विरोध कर रही हैं। इन मुद्दों पर विपक्षी दल उनका साथ दे सकते हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष की सर्वसम्मत नेता कैसे बनें इसके लिए अगले हफ्ते नयी दिल्ली के दौरे पर जाने की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की उनकी योजना है। उच्च स्तर के एक सूत्र ने बताया कि इस मुलाकात में वह राज्य के बकाये और बीएसएफ के बढ़ाए गए अधिकार क्षेत्र जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगी। उन्होंने बताया कि बनर्जी 22 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी का दौरा कर सकती हैं और 25 नवंबर को कोलकाता लौटेंगी। सूत्र ने बताया, नयी दिल्ली में अपने तीन दिन के दौरे पर वह प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगी। बनर्जी अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ भी बैठक कर सकती हैं। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जीत का सिलसिला उपचुनावों में भी जारी है। इस कड़ी में अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी द्वारा जीती गई दो सीटों पर भी टीएमसी ने कब्जा कर लिया है। इसी के साथ चारों सीटों पर हुए उपचुनाव में टीएमसी ने जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीतने वाले उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा कि परिणाम दिखाते हैं कि बंगाल हमेशा प्रचार और नफरत की राजनीति पर विकास और एकता का चयन करेगा। उनका इशारा भाजपा की तरफ है।
दिनहाटा और शांतिपुर के उपचुनाव को बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा गया। कारण, इन दोनों सीटों पर विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इन सीटों पर बीजेपी नेताओं ने इस्तीफा दे दिया था। बीजेपी का गढ़ कहे जाने वाले उत्तर बंगाल के कूच बिहार के अंतर्गत आने वाली दिनहाटा सीट से केंद्र में कनिष्ठ गृह मंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद बीजेपी के निसिथ प्रमाणिक ने इस्तीफा दे दिया था। वहीं शांतिपुर सीट बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हो गई थी। खरदह वह सीट थी जहां से कोलकाता के पूर्व मेयर सोवनदेब चट्टोपाध्याय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के लिए कोलकाता में भवानीपुर सीट छोड़ दी थी, जिन्हें नंदीग्राम से अपनी हार के बाद राज्य चुनाव के छह महीने के भीतर विधानसभा में निर्वाचित होना पड़ा था। इन चारों सीटों पर टीएमसी की जीत के साथ ही राज्य में तृणमूल की 213 सीटों की रिकॉर्ड संख्या और बढ़ जाएगी। वहीं, यह बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका है।
ममता बनर्जी इसीलिए गर्म लोहे पर चोट मारना चाहती हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तेल की बढ़ी हुई कीमतों से केंद्र सरकार को हाल में चार लाख करोड़ रुपये की आमदनी होने का दावा करते हुए मांग की कि यह रकम राज्यों में बराबर बांटी जानी चाहिए। ममता ने विधानसभा सत्र के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में आगामी विधासभा चुनाव के मद्देनजर हाल में पेट्रोल और डीजल में दामों पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है। मुख्यमंत्री ने कहा, "केंद्र सरकार ने रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल पर लगे कर से चार लाख करोड़ रुपये की आमदनी की। अब वे (भाजपा) राज्यों से वैट की दरें कम करने को कह रहे हैं। राज्यों को पैसा कहां से मिलेगा?" उन्होंने कहा, "केंद्र को चार लाख करोड़ रुपये राज्यों में बराबर बांट देना चाहिए।" बनर्जी ने कहा कि तमाम वित्तीय संकट के बावजूद राज्य सरकार विभिन्न प्रकार की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "जब चुनाव नजदीक आते हैं, तब वे (केंद्र) कीमतें घटाने लगते हैं। चुनाव हो जाने के बाद वे दाम फिर बढ़ा देते हैं। जो हमें तेल की कीमतों पर प्रवचन दे रहे हैं उन्हें पहले इसका जवाब देना चाहिए कि राज्य सरकारों को पैसा कहां से मिलेगा।" जाहिर है यह ऐसा मामला है जिस पर सभी राज्य सरकारें उनका साथ दे सकती हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने वाली अभिनेत्री श्राबंती चटर्जी ने गुरुवार को पार्टी छोड़ दी। वह राज्य विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवार पार्थ चटर्जी के खिलाफ मैदान में उतरी थीं, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अभिनेत्री ने पश्चिम बंगाल के लिए काम करने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गंभीर नहीं होने का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की। जोरदार प्रचार के बाद भी राज्य में ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने में उनकी विफलता के बाद से ही चटर्जी भाजपा से दूरी बना कर रह रही थीं। चटर्जी ने ट्वीट किया, '' पिछला चुनाव मैंने जिस पार्टी के टिकट पर लड़ा था, उससे मैं अपना संबंध खत्म कर रही हूं। पश्चिम बंगाल के मुद्दे को आगे बढ़ाने में पार्टी की पहल की कमी मेरे इस फैसले की वजह है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने अभिनेत्री के पार्टी छोड़ने के निर्णय को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए दावा किया कि 'इससे पार्टी पर बमुश्किल कोई फर्क पड़ेगा। भाजपा प्रदेश प्रमुख सुकांत मजूमदार ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि वह चुनाव के बाद पार्टी के साथ थीं भी या नहीं। इसका पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मजूमदार के ही बयान को दोहराते हुए भाजपा नेता तथागत रॉय ने कहा कि यह अच्छा ही हुआ। भाजपा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के लिए रॉय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते रहे हैं। रॉय ने वैसे लोगों को पार्टी में शामिल करने की आलोचना की थी, जिनका कोई राजनीतिक आधार नहीं है और खास तौर पर वे मनोरंजन की दुनिया से आते हैं। उन्होंने पार्टी के विश्वसनीय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने की भी निंदा की थी। मेघालय और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल ने कहा, 'अच्छा ही हुआ कि मुक्ति मिली। मुझे याद नहीं है कि उन्होंने पार्टी में कुछ योगदान भी दिया हो। कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की करीबी रहीं चटर्जी इस साल मार्च में भाजपा में शामिल हो गई थीं। वह पार्थ चटर्जी से 50,000 से ज्यादा मतों से हारी थीं। भाजपा नेता भले ही कहते हैं कि इाससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन गैरभाजपा दलों मे ममता का कद बढ़ रहा है। (हिफी)

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