दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- भारतीय संस्कृति का पुरोधा अटल बिहारी बाजपेयी
- कायस्थ समाज के लोगों को एकजुट होने की जरूरत : दीपक कुमार अभिषेक
- अभिमन्यु का शौर्य अमर है
- मैंने तुम्हें देखा था
- अमृत महोत्सव का जनजातीय अध्याय
- सिद्धू की यह कैसी वफादारी!
- जगन मोहन भी बैकफुट पर
- दक्षिण अफ्रीका की महिला पुजारी ने भगवान विष्णु पर लिखी पुस्तक
- पाकिस्तानी मदरसे में तालिबानी ले रहे प्रशिक्षण
- बिपिन रावत के बयान से चीन को लगी मिर्ची
- पेगासस मामले के चलते इजरायल बदलेगा साइवर नीति
- राजभवन में ‘संविधान दिवस’ पर कार्यक्रम आयोजित
- हिन्दू जनजागृति समिति की रत्नागिरी के जिलाधिकारी से निवेदन द्वार मांग !
- लोकतंत्र की बुनियाद है भारतीय संविधान
- ‘हलाल प्रमाणपत्र’ के विषय में कानून मंत्री बृजेश पाठक जी को हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ज्ञापन !
- सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों ने ‘नशा मुक्ति दिवस’ पर शराब-सेवन नहीं करने की शपथ ली
- जेएसडी के संविधान का हुआ विमोचन
- नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नशा मुक्ति को लेकर लोगों को दिलायी शपथ
- भारतीय संविधान भारत की आत्मा
- 27 नवम्बर 2021, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- लोग कहते हैं उसकी खता ही नहीं
- संविधान दिवस पर
- मेरी गुड़िया
- भारतीय इतिहास का कालक्रम -
- हर पल तजुर्बा ज़िन्दगी
| भारतीय संस्कृति का पुरोधा अटल बिहारी बाजपेयी Posted: 26 Nov 2021 07:04 AM PST भारतीय संस्कृति का पुरोधा अटल बिहारी बाजपेयीसत्येन्द्र कुमार पाठक भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 ई. को मध्यप्रदेश का ग्वालियर और निधन 16 अगस्त 2018 को दिल्ली का एम्स में संध्या 05: बजे हुआ था । अतलविहारी बाजपेयी 16 मई से 1 जून 1996 तक, 1998 मे और 19 मार्च 1999 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे । वे हिंदी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष रहे। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया था । वे चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य थे, लोकसभा में सांसद दस बार, और दो बार राज्य सभा में चुने गए थे। 2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के प्रथम प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 वर्ष बिना किसी समस्या के पूरे किए। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण बाजपेयी जी को भीष्मपितामह कहा जाता है । 16 अगस्त 2018 को एक लंबी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे।उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। वहीं शिन्दे की छावनी में 25 दिसंबर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त में कृष्णबिहारी बाजपेयी की पत्नी कृष्णा वाजपेयी की कोख से अटल जी का जन्म हुआ था। महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति "विजय पताका" पढ़कर अटल जी के जीवन की दिशा बदल गयी। अटल जी की बी॰ए॰ की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एम॰ए॰ की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होनेके बाद अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में एल॰एल॰बी॰ की पढ़ाई प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ पढ़ा , साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कुशलता पूर्वक करते रहे है । सर्वतोमुखी विकास के लिये किये गये योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2015 में बाजपेयी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है ।बाजपेयी जी भारतीय जनसंघ का सन् १९६८ से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष और सन् 1952 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं प्राप्त हुई थी । सन् १९५७ में उत्तरप्रदेश के गोण्डा जिले के बलरामपुर से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी थी । १९८० में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। ६ अप्रैल १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व वाजपेयी को सौंपा गया।दो बार राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् १९९६ में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। १९ अप्रैल १९९८ को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए। सन् २००४ में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भा॰ज॰पा॰ के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन॰डी॰ए॰) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय , इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा॰ज॰पा॰ विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में ६-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे। अटल सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीक से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊँचाईयों को छुआ। था । 19 फरवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की थी । भारत रत्न , "अजातशत्रु" उपनाम से मशहूर बाजपेयी का विराट व्यक्तित्व युगपरिवर्तक , राजनेता होने के साथ-साथ बाजपेई एक अच्छे कवि पत्रकार और लेखक रहे हैं। शब्दों को नापतोल के बोलना बाजपेयी के व्यक्तित्व की बड़ी खूबी रही है ।अपनी वाकपटुता के कारण बाजपेयी को भारत का सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री माना जाता है।1999 में हुए कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन करने की अंतरराष्ट्रीय सलाहकार सम्मान करते हुए धैर्य पूर्वक ठोस कार्यवाही करते हुए भारतीय क्षेत्र को मुक्त करवाया था ।दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई भारत के चारों कोनों को जोड़ने की लिए "स्वर्णिम चतुर्भुज" परियोजना की शुरुआत की।कावेरी जल विवाद, प्रौद्योगिकी उन्नति, राजमार्गों, हवाई मार्ग, सुरक्षा, व्यापार, उद्योग, आवास निर्माण आदि बहुआयामी कार्यों को करने में वाजपेयी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । बाजपेई जी कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ कवि और लेखक रहे हैं। इनकी प्रथम कविता "ताजमहल" थी जिसमें उन्होंने ताजमहल के कारीगरों के शोषण के भाव को उजागर किया है। वाजपेई को देशहित से अथाह प्रेम था "हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग -रग हिंदू मेरा परिचय" कविता के माध्यम से उन्होंने इस बात की पुष्टि की है।रग रग हिंदू मेरा परिचय, मृत्यु या हत्या, अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुंडलियां, संसद में तीन दशक, अमर आग है, कुछ लेख :कुछ भाषण, सेक्युलर वाद, राजनीति की रपटीली राहें, बिंदु- बिंदु विचार इत्यादि पर बाजपेई ने इक्यावन बहुचर्चित काव्य संग्रह 1995 में प्रकाशित हुई ।अपने बहुआयामी व्यक्तित्व ,सर्वोतमुखी विकास और असाधारण कार्यों के लिए बाजपेई को पुरस्कार प्रदान किये गये। वर्ष 1952 में उन्हें "पदम विभूषण", 1993 में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर कानपुर विश्वविद्यालय ,1994 में "लोकमान्य तिलक पुरस्कार", "श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार", "भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत" पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2014 में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय , 2015 में "फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवार्ड" और 2015 को "भारत रत्न" से सम्मानित किया गया है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| कायस्थ समाज के लोगों को एकजुट होने की जरूरत : दीपक कुमार अभिषेक Posted: 26 Nov 2021 06:57 AM PST कायस्थ समाज के लोगों को एकजुट होने की जरूरत : दीपक कुमार अभिषेकजितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 26 नवम्बर :: जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) के सौजन्य से नयी दिल्ली में विश्व कायस्थ महासम्मेलन 'उम्मीदों का कारवां' कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जीकेसी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-सह- बिहार एवं झारखंड के दीपक कुमार अभिषेक ने बताया कि विश्व कायस्थ महासम्मेलन में बिहार की तैयारी को लेकर समीक्षात्मक चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि कायस्थ राजाओ, साम्राज्योँ और उनके साहसिक शासनकाल का अविश्वसनीय योगदान रहा है, जिसे कायस्थ समाज एक बार फिर दोहराएगा। हम सभी को फिर से एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कायस्थ समाज को संगठित होने का आव्हान किया तथा 19 दिसंबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सभी कायस्थ संगठनों को एकजुट होने की अपील भी किया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 06:44 AM PST अभिमन्यु का शौर्य अमर हैएक असाधारण योद्धा अर्जुन नंदन कहलाता वो सुभद्रा दुलारा शूरवीर जा तूफ़ानों से टकराता जो चक्रव्यूह तोड़ा रण में डगमगा जाता महासमर है महाभारत वीर योद्धा अभिमन्यु का शौर्य अमर है युद्धवीर रणधीर वो महारथी कांपने लगते सारे दुर्योधन शकुनि दुशासन द्रोणाचार्य भय के मारे चाल चली कौरव दल ने रचा चक्रव्यूह महासमर है रणभूमि पाई वीरगति अभिमन्यु का शौर्य अमर है माता गर्भ में जान लिया शस्त्रकला कौशल सारा अल्पायु में लड़ा महासमर वीर पुत्र कुल का तारा अर्जुन सम श्रेष्ठ धनुर्धर कीर्ति पताका अजर है श्रीकृष्ण शिष्य प्रिय अभिमन्यु का शौर्य अमर है प्रचंड बाण वर्षा से व्याकुल अरि दल होते सारे अकेले प्रलय बन टूट पड़े दिखा दिये दिन में तारे पराक्रमी वीर योद्धा लड़ रहा महारथी महासमर है वीरगति चला योद्धा अभिमन्यु का शौर्य अमर है रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 06:40 AM PST लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार स्व शंकर दयाल सिंह की स्मृति को समर्पित यह कविता-
|
| अमृत महोत्सव का जनजातीय अध्याय Posted: 26 Nov 2021 06:37 AM PST अमृत महोत्सव का जनजातीय अध्याय(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) आजादी के अमृत महोत्सव में अनेक उपेक्षित तथ्य उजागर हो रहे है। अनेक राष्ट्र नायक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहे है। अमृत महोत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय प्रेरणा का एक नया दिन भी घोषित किया गया। अब देश प्रतिवर्ष जनजातीय गौरव दिवस भी मनाएगा। इस दिवस का प्रथम आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर उत्साह पूर्ण रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखण्ड़ में बिरसा मुंडा की मूर्ति का वर्चुअल लोकार्पण किया। भोपाल में विश्व स्तरीय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन राष्ट्र को समर्पित किया। बिरसा मुंडा और रानी कमलापति के महान योगदान से देश की नई पीढ़ी परिचित हुई। बिरसा मुंडा की झारखंड बिहार उड़ीसा आदि प्रदेशो में प्रतिष्ठा रही है। जनजातीय समुदाय में उनका बड़ा सम्मान है लेकिन वह राष्ट्र नायक के रूप में पूरे देश के लिए सम्मान की विभूति है। रानी कमलापति को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के स्मरण किया गया। बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गाँव में हुआ था। उनमें बाल्यकाल से ही समाजसेवा का भाव था। उन्होंने जनजातीय समुदाय को ब्रिटिश दासता से मुक्त कराने का संकल्प लिया था। अकाल के समय उन्होंने लोगों की सेवा सहायता की। इसके साथ ही अंग्रेजों की लगान वसूली का जम कर विरोध किया। उन्होंने स्थानीय लोगों को एकत्र किया। अंग्रेजों की लगान वसूली के विरुद्ध आन्दोलन किया। मुंडा विद्रोह को उलगुलान नाम से भी जाना जाता है।1895 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन्हें लोग सम्मान से धरती आबा कहते थे। अंग्रेजों के विरुद्ध उनका संघर्ष चला। खूँटी थाने पर हमला कर अंग्रेजों को चुनौती दी गई। तांगा नदी के किनारे ब्रिटिश सेना पराजित भी हुई थी। डोम्बरी पहाड़ पर संघर्ष हुआ था। चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल से अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रिटिश जेल में ही उनका निधन हुआ था। मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशन हबीबगंज का भोपाल के अंतिम गोंड शासक रानी कमलापति नामकरण किया गया। नरेंद्र मोदी ने इस स्टेशन का लोकार्पण किया। इस प्रकार रानी कमलापति की राष्ट्र सेवा को सम्मान दिया गया। वह अठारहवीं शताब्दी की गोंड रानी थीं। यह पहली बार है जब जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। अब तक स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक रहे हैं। जनजातीय समुदाय ने प्राचीन काल से ही जम्मू-कश्मीर,मणिपुर, नागालैंड सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास किया है और देश की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। जनजातीय कार्य मंत्रालय आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। रानी कमलापति का नाम रेलवे स्टेशन से जोड़ने से गोंड समाज सहित सम्पूर्ण जनजाति वर्ग का गौरव बढ़ा है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन देश का पहला आईएसओ सर्टिफाइड एवं पीपीपी मॉडल पर विकसित रेलवे स्टेशन है। एयरपोर्ट पर मिलने वाली सुविधाएँ इस रेलवे स्टेशन पर मिल रही हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ रहा है। यह मास्टर प्लान देश के विकास को अभूतपूर्व गति दे रहा है। देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। यह प्लान सामान्य भारतीय के लिये ईज ऑफ लिविंग सुनिश्चित कर रहा है। रेलवे में कई नये प्रोजेक्ट इस प्लान के तहत तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। दो सौ से अधिक रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बाबजूद जन जातीय समुदाय ने अपनी सभ्यता संस्कृति को कायम रखा है। इन्होंने सदैव विदेशी आक्रांताओं से मोर्चा लिया। स्वतन्त्रता संग्राम में जन जातीय समुदाय का योगदान भी किसी से कम नहीं था लेकिन इनको इतिहास में उचित व पर्याप्त स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस ओर ध्यान दिया। उन्होंने आजादी का अमृत महोत्सव शुरू किया। इसके अंतर्गत अनेक उपेक्षित तथ्य उजागर हो रहे है। अनेक राष्ट्र नायकों से देश की वर्तमान पीढ़ी परिचित हो रही है। कुछ दिन पहले तक रानी कमलापति का के नाम से लोग अनजान थे। नरेंद्र मोदी की पहल से यह नाम आज राष्ट्रीय चर्चा में है। भोपाल को नबाबों का शहर कहा जाता है। रानी कमलापति यहां की अंतिम हिन्दू रानी थी। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारत सही मायने में अपना प्रथम जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। जनजातीय समाज के योगदान को जन जन तक पहुँचाया जाएगा। जनजातीय नृत्य,गीत, जीवन शैली,परंपराओं में कोई न कोई तत्व ज्ञान होता है। इसमें जीवन का सत्य समाहित है। मानव जीवन नश्वर है। धरती, खेत, खलिहान किसी के नहीं रहते। धन दौलत यहीं छोड़कर जानी होती है। इसलिए अहंकार से दूर रहना चाहिए। यह भारतीय समाज का चिंतन है। सब इस धरातल पर एक साथ है। जनजातीय समाज ने कोरोना के दोनों टीके लगवाकर पढ़े-लिखे समाज के सामने उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है। देश को बचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। जनजातीय समाज का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान है। भगवान श्री राम को वनवास के दौरान जनजातीय समाज द्वारा दिये गये सहयोग ने ही मर्यादा पुरूषोत्तम बनाया। जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, जीवन-शैली से प्रेरणा मिलती है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में भी शिक्षा, आवास,बिजली,गैस, इलाज आदि सभी सुविधाएँ पहुँचाई गई हैं। देश में जल-जीवन मिशन प्रारंभ कर हर घर में नल से जल पहुँचाया जा रहा है। जनजातीय कलाकृतियों एवं उत्पादों को सरकार द्वारा अब उचित बाजार प्रदान किया जा रहा है। इन्हें आत्म-निर्भर बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। ट्राइफेड पोर्टल के माध्यम से जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार निरंतर जनजातीय कल्याण के कार्य कर रही हैं। सरकार द्वारा बीस लाख जनजातीय व्यक्तियों को वनभूमि के पट्टे प्रदान किये गये हैं। जनजातीय युवाओं के शिक्षा एवं कौशल विकास के लिये देशभर में साढ़े सात सौ एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालय खोले जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा तीस लाख विद्यार्थियों को हर वर्ष छात्रवृत्ति दी जा रही है। सरकार द्वारा नब्बे वनउपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। भारत सरकार ने जो डेढ़ सौ से अधिक मेडिकल कॉलेज मंजूर किए हैं,उनमें जनजातीय बहुल जिलों को प्राथमिकता दी गई है। इसी तरह जल जीवन मिशन के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने की योजना संचालित हो रही है। सरकार ने खनिज नीति में ऐसे परिवर्तन किए जिनसे जनजातीय वर्ग को वन क्षेत्रों में खनिजों के उत्खनन से लाभ मिलने लगा है। जिला खनिज निधि से पचास हजार करोड़ के लाभ में जनजातीय वर्ग हिस्सेदार है। जनजातीय समाज को यह सम्पदा काम आ रही है। खनन क्षेत्र में रोजगार संभावनाओं को बढ़ाया गया है। बाँस की खेती जैसे सरल कार्य को पूर्व सरकारों ने कानूनों में जकड़ दिया था। जिन्हें संशोधित कर अब जनजातीय वर्ग की छोटी छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति का मार्ग प्रारंभ किया गया है। मोटा अनाज जो कभी उपेक्षित था। वह भारत का ब्राण्ड बन रहा है। जनजातीय बहनों को काम और रोजगार के अवसर दिलवाने का कार्य हो रहा है। नई शिक्षा नीति में जनजातीय वर्ग के बच्चों को मातृ भाषा की शिक्षा का लाभ भी मिलेगा। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 06:34 AM PST सिद्धू की यह कैसी वफादारी!(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) अभी चार दिन पहले की बात है कि जब पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने कहा था कि मैं मरते दम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के प्रति वफादार रहूंगा। नवजोत सिद्धू की यह कैसी वफादारी है जो पंजाब में अच्छी भली कांग्रेस को बरबाद कर रहे हैं। अभी हाल मंे उन्हांेने अपने ही मुख्यमंत्री के प्रति फिर से मोर्चा खोल दिया है। नवजोत सिद्धू के चलते ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी और वे भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ही 2017 मंे कांग्रेस की लाज बचाई थी जब उत्तराखण्ड कांग्रेस से छीन लिया गया और उत्तर प्रदेश मंे भी अमेठी से राहुल गांधी हार गये थे। कैप्टन अमरिंदर ने पंजाब मंे कांग्रेस की सरकार बनायी। इतना ही नहीं 2019 मंे भी सबसे ज्यादा सांसद पंजाब ने दिये। अब कैप्टन कांग्रेस के साथ नहीं हैं तो दलित नेता चरण जीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने अच्छी संभावनाएं पैदा की थीं लेकिन नवजोत सिद्धू ने सीएम चन्नी के खिलाफ मोर्चा खोले हैं। सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम तो कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। पंजाब मंे कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा है। कैप्टन के खिलाफ बगावत दिखाने के बाद अब सिद्धू ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि यदि उनकी सरकार ने ड्रग्स और गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, 'नशे की वजह से लाखों नौजवान बर्बाद हो गए हैं। लाखों लोग राज्य छोड़कर चले गए हैं। ऐसे में नशे की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना अहम है।' सिद्धू ने कहा कि जब राज्य के खजाने में पैसा है नहीं तो कहां से बड़ा अस्पताल और लड़कियों के लिए कॉलेज बनेगा। मैं सिर्फ पार्टी प्रधान हूं प्रशासनिक ताकत मेरे पास नहीं है, मैंने सीएम चन्नी से भी कह दिया है कि अगर जल्द बेअदबी जांच की रिपोर्ट सार्वजानिक न हुई तो इस्तीफा दे दूंगा। इतना ही नहीं सिद्धू अपने संबोधन में सीएम चन्नी को अलग ही तरह से धमकी देते हुए नजर आए। उन्होंने कहा, 'पंजाब में अभी भी रेत महंगी मिल रही है। वह इसे सस्ता करवाकर दम लेंगे और ऐसा न हुआ तो इस्तीफा दे देंगे।' नवजोत सिंह सिद्धू का अपनी ही पार्टी की सरकार से उलझना नया नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से लंबे समय तक उनकी तनातनी चली और अंत में अमरिंदर ने पार्टी छोड़ दी। अमरिंदर के बाद सीएम बनाए गए चन्नी से भी सिद्धू की नहीं बन रही है। सबसे बड़ी मुसीबत तो सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने इमरान को 'बड़ा भाई' कहकर एक बार फिर पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि उनके इस बयान से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने सलाह दी है कि सिद्धू को सोच समझकर बोलना चाहिए। गत 19 नवम्बर को करतारपुर कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा पहुंचे सिद्धू ने पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को कथित रूप से 'बड़ा भाई' बताया था। इमरान खान को बड़ा भाई बताने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है। सिद्धू के इस तरह के बयानों से देश को भी नुकसान होगा। सवाल विपक्ष का नहीं है इमरान खान ना हमारा भाई है और ना ही हमारा दोस्त है। और जो लोग दोस्त और दुश्मन में तमीज नहीं कर सकते हैं उनके भविष्य पर हमेशा सवालिया निशान लगा रहता है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी वफादारी साबित की है। लुधियाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिद्धू ने कहा, "3 महीने में जो काम हुआ है, वह पिछले 4.5 साल में नहीं हुआ था। मैं मरते दम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के प्रति वफादार रहूंगा। यूपी में, प्रियंका गांधी ने 2022 के चुनावों में महिलाओं के लिए 40 फीसद आरक्षण की घोषणा की है। मैं कहूंगा कि हमारे पंजाब मॉडल में 50 फीसद कोटा दिया जाना चाहिए।" किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर सिद्धू ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "हम किसानों को 8000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रहे हैं। बताओ कौन सा राज्य इतनी सब्सिडी दे रहा है। हालांकि आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की जन कल्याण के मुद्दे उठाने के लिए तारीफ की, लेकिन दावा किया कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने उन पर दबाव बनाया है। केजरीवाल ने पंजाब की दो दिन की यात्रा के दौरान यह दावा भी किया कि कांग्रेस के करीब 25 विधायक और राज्य के दो-तिहाई सांसद उनकी पार्टी से संपर्क में हैं और उसमें शामिल होना चाह रहे हैं। लेकिन उन्होंने कहा, 'हम दूसरे दलों के कचरे को नहीं लेते।' सिद्धू की तारीफ का कोई मतलब ही नहीं रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं सिद्धू के साहस के लिए उनकी प्रशंसा करता हूं।' उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री चन्नी ने दावा किया था कि जनता को पांच रुपये प्रति घन फुट पर रेत बेची जा रही है तो सिद्धू ने उनकी बात को 'सुधारा' था। केजरीवाल ने कहा, 'सिद्धू ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह अब भी 20 रुपये प्रति घन फुट पर बेची जा रही है।' उन्होंने कहा कि सिद्धू हमेशा जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन पहले उन्हें अमरिंदर सिंह ने दबाया और अब चन्नी उन्हें दबा रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धू की सभी बातें मानीं। वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस पटवालिया अब पंजाब के नए एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) हैं। पटवालिया वही शख्स हैं, जिनकी नियुक्ति के लिए पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू लगातार जोर दे रहे थे। पंजाब कैबिनेट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता ए पी एस देओल के इस्तीफे को स्वीकार किए जाने के कुछ दिनों बाद पटवालिया को राज्य के शीर्ष कानून अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। देओल ने 1 नवंबर को उस वक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जब सिद्धू ने सार्वजनिक रूप से उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाया था और नए राज्य मंत्रिमंडल में विभागों के वितरण पर सीएम के साथ बहस की थी। एडवोकेट जनरल के रूप में देओल की नियुक्ति के खिलाफ सिद्धू की यह आपत्ति थी कि वह पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के वकील रहे हैं और विभिन्न मामलों में उनके लिए जमानत हासिल कर चुके हैं। सैनी कोटकपूरा पुलिस फायरिंग के मामलों में भी जांच के घेरे में हैं, जो 2015 में बेअदबी के मामलों के बाद हुई थी। ए पी एस देओल के साथ ही सिद्धू कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में इकबाल प्रीत सिंह सहोता की नियुक्ति का भी विरोध कर रहे हैं। सहोता और देओल दोनों ही मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की पसंद माने जाते हैं। इसके बावजूद सिद्धू पाकिस्तान की तरफदारी करते हैं। पाकिस्तान को लेकर पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बयान पर हंगामा खड़ा हो गया था। नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि अगर आप पंजाब की भलाई चाहते हैं तो हमें क्रॉस बॉर्डर ट्रेड के लिए भारत-पाकिस्तान सीमा खोलनी चाहिए। दरअसल कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब पहुंचे थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 06:31 AM PST जगन मोहन भी बैकफुट पर(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) प्रजातंत्र मंे प्रजा अर्थात् जनता ही सबसे बड़ी है और उसके सामने सरकारों को झुकना पड़ता है। यह बात एक बार फिर आंध्र प्रदेश में साबित हुई है। आंध्र प्रदेश मंे जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने इसी साल सम्पन्न हुए जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र (जेडपीटीसीएस) और मंडल परिषद निर्वाचन क्षेत्रों (एमपीटीसीएस) के चुनाव मंे क्रमशः 99 और 90 प्रतिशत सफलता प्राप्त की थी, फिर भी सरकार को तीन राजधानियों वाला बिल वापस लेना पड़ा है। इस बिल का पहले विपक्षी दल ही विरोध कर रहे थे लेकिन बाद मंे जनता भी विरोध करने लगी थी। जगन मोहन रेड्डी ने राज्य मंे तीन राजधानियां बनाने का विधेयक पारित करा लिया था। आंध्र प्रदेश का विभाजन होने के बाद राजधानी हैदराबाद नये राज्य तेलंगाना के हिस्से मंे आ गयी। इसलिए आंध्र प्रदेश को नयी राजधानी तलाश करनी पड़ रही है। जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने विशाखापट्टनम, अमरावती और कर्नूल को राजधानी घोषित किया था। आंध्र प्रदेश सरकार ने भारी विरोध के बाद विवादित तीन राजधानी विधेयक वापस लेने का फैसला किया है। इस बिल में विजाग यानी विशाखापट्टनम को कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायिका राजधानी और करनूल को न्यायिक राजधानी बनाने का प्रस्ताव किया गया था। एडवोकेट जनरल एस सुब्रमण्यम ने गत 22 नवम्बर को हाईकोर्ट में बताया कि राज्य के सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी इस बारे में जल्द ही विधानसभा में बड़ा ऐलान करेंगे। गौरतलब है कि इस बिल को हाईकोर्ट में कई याचिकाओं में चुनौती दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल पारित किए गए इस बिल को वापस लेने का फैसला एक इमरजेंसी मीटिंग में लिया गया। जानकारी के अनुसार, बदलाव के साथ इस बिल को फिर लाया जा सकता है। किसान और जमीन मालिक इस प्रस्तावित बिल से काफी खफा थे। पिछले कुछ समय से इसके विरोध में कई प्रदर्शन भी हो रहे थे।किसानों द्वारा 1 नवंबर से अमरावती से तिरुपति तक 45 दिन की पैदल मार्च निकाला गया था। प्रदर्शनकारी नेल्लोर तक पहुंचे थे। सरकार लोकप्रिय है। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। घोषित नतीजों में अंतिम रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने मंडल परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की करीब 90 प्रतिशत और जिला परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की 99 प्रतिशत सीटों पर क्लीन स्वीप जीत हासिल की है। जेडपीटीसीएस की 515 और एमपीटीसीएस की 7,220 सीटों के लिए 8 अप्रैल को चुनाव हुए थे। इसके नतीजे पहले 10 अप्रैल को घोषित होने वाले थे लेकिन आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने तेलुगु देशम पार्टी और बीजेपी द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर मतगणना पर रोक लगा दी थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की तारीख से अनिवार्य आदर्श आचार संहिता का पालन नहीं किया गया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मतगणना के लिए आखिरकार हरी झंडी दे दी थी। नतीजे सामने आये। वाईएसआर कांग्रेस ने कुल 553 में से 547 जेडपीटीसीएस सीटें जीत ली थीं। एमपीटीसीएस के नतीजे और भी आश्चर्यजनक रहे हैं। वाईएसआर कांग्रेस ने 8083 सीटों में से 7284 सीटें जीती। बीजेपी और उसके गठबंधन सहयोगी जन सेना जिला परिषद में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि मंडल परिषद चुनावों में क्रमशः 23 और 85 सीटें जीती हैं। केवल एक दशक पहले स्थापित वाईएसआर कांग्रेस ने हाल ही में हुए चुनावों में राज्य की 75 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में से 74 में जीत हासिल की और सभी 12 नगर निगमों को अपनी झोली में डाल लिया है। 2019 में, पार्टी ने आम चुनावों में 175 विधानसभा सीटों में से 151 और 25 लोकसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थीं। पार्टी अपने सपने को पूरा करने का श्रेय जगनमोहन रेड्डी की सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं को दे रही है। जगन सरकार ने महिलाओं, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए भी कई योजनाएं लागू की हैं। यही कारण रहा कि गत दिनों उप चुनावों में आंध्र प्रदेश के तिरुपति लोकसभा सीट पर वाईएसआर कांग्रेस के एम गुरुमूर्ति ने तेलुगू देशम की पनाबाका लक्ष्मी को 2,71,592 वोटों के भारी अंतर से हराया। इतना सब होते हुए भी जनता को तीन राजधानियों की बात अच्छी नहीं लग रही थी। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष चंद्रबाबू नायडू सदन मंे रोने लगे तो जनता की नाराजगी बढ़ गयी। तेलुगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश विधानसभा से वाकआउट करने के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में लाइव टेलीविजन पर चंद्रबाबू फूट-फूटकर रोने लगे। नायडू ने कहा कि सदस्यों द्वारा उन्हें और पत्नी को अपमानित किए जाने के विरोध में उन्होंने ये फैसला लिया है। नायडू ने कहा, पिछले ढाई साल से मैं अपमान सह रहा हूं लेकिन शांत रहा। आज उन्होंने मेरी पत्नी को भी निशाना बनाया है, मैं हमेशा सम्मान के लिए और सम्मान के साथ रहा हूं। मैं इसे और नहीं सह सकता। नायडू ने कहा कि उन्हें अपनी पत्नी का बचाव करने के लिए बोलने तक का मौका नहीं दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम ने नायडू का माइक काट दिया था। वहीं सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी को नाटक करार दिया। उन्होंने कहा, मुझे की गई टिप्पणियों पर बयान देने का भी मौका नहीं दिया गया है। इसलिए, मैंने विधानसभा से वॉक करता हूं। सदन ने मेरा अपमान किया है। मैं मुख्यमंत्री बनने तक यहां वापस नहीं लौटूंगा। विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम ने जब उनका माइक संपर्क काट दिया, तब भी नायडू ने बोलना जारी रखा। कृषि क्षेत्र पर एक संक्षिप्त चर्चा के दौरान सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने निराशा व्यक्त की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी पलटवार करते हुए कहा कि यह उनके प्रतिद्वंद्वी थे जिन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी की थी और उनकी पार्टी के नेताओं ने केवल कुछ टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी थी। न केवल मुझे बल्कि राज्य में भी हर कोई जानता है कि लोगों ने उन्हें नकार दिया है। यहां तक कि उन्हें अपने कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र में भी हार का सामना करना पड़ा। आंध्र प्रदेश में कुछ मंदिरों में मूर्तियों को अपवित्र करने की घटना से भी राज्य में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है। कुछ विपक्षी दलों ने वाई एस जगनमोहन रेड्डी सरकार पर बरसते हुए उसे इन हमलों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। इस पर पलटवार करते हुए सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू पर सरकार के खिलाफ द्वेष फैलाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। विजयनगरम जिले के प्रसिद्ध रामतीर्थम पहाड़ी मंदिर में गत वर्ष 28 दिसंबर की रात भगवान राम की मूर्ति को विरूपित किया गया। इसके दो दिनों बाद राजामहेंद्रवरम में एक मंदिर में सुब्रह्मणेश्वर स्वामी की मूर्ति के हाथ और पैर टूटे हुए पाए गए। इन दो घटनाओं से राज्य में विवाद पैदा हो गया और विपक्षी दलों ने मंदिरों की रक्षा करने में विफल रहने के लिए सरकार पर प्रहार किया। चन्द्रबाबू इन सभी मुद्दों को उठा रहे थे। इसलिए सरकार ने राजधानी बिल वापस लिया है।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| दक्षिण अफ्रीका की महिला पुजारी ने भगवान विष्णु पर लिखी पुस्तक Posted: 26 Nov 2021 06:28 AM PST दक्षिण अफ्रीका की महिला पुजारी ने भगवान विष्णु पर लिखी पुस्तकजोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका की एक पंडित लुसी सिगबान ने हिंदू देवता विष्णु के बारे में अहम किताब लिखी है। यह किताब न केवल हिंदुओं, बल्कि अन्य धार्मिक समुदायों के बीच भी पसंद की जा रही है। इस किताब में विष्णु के 1,000 नामों का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है, ताकि इसे दक्षिण अफ्रीकी लोगों और विशेष रूप से उन हिंदू युवाओं के लिए सुलभ बनाया जा सके, जो हिंदी या संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं। सिगबान ने अपने जीवन की एक घटना से प्रेरित होकर 'विष्णु-1,000 नेम्स' नामक किताब लिखी है। उन्होंने 'विष्णु सहस्त्रनाम' का सात साल तक अध्ययन किया और फिर दूसरों के साथ अपने विचार साझा करने का फैसला किया। सिगबान ने कहा, '2005 में मेरी स्थिति बहुत खराब थी। उस समय मैं एक साल से ज्यादा समय से बिना नौकरी के थी। मेरी कार को बैंक ने वापस ले लिया था। मेरे बेटे निताई और गौरा छोटे थे। यह बहुत कठिन समय था। जैसा कि बुद्धिमान लोगों ने कहा है कि कठिन समय में किसी को ऊपर वाले पर भरोसा रखना चाहिए। सत्यनारायण व्रत कथा से जीवन की चुनौतियों को कम किया जा सकता है।' भारत में प्रशिक्षित सिगबान जोहानिसबर्ग में हिंदुओं, विशेष रूप से निम्न सामाजिक-आर्थिक समूह के लोगों की काफी सहायता करती हैं। वह विभिन्न पूजाओं से लेकर हिंदू रीति रिवाज से शादियां और अंत्येष्टि भी कराती हैं।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पाकिस्तानी मदरसे में तालिबानी ले रहे प्रशिक्षण Posted: 26 Nov 2021 06:26 AM PST पाकिस्तानी मदरसे में तालिबानी ले रहे प्रशिक्षणइस्लामाबाद। अफगनिस्तान की नई तालिबान सरकार के भावी मंत्री बॉर्डर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित हक्कानी नेटवर्क के मदरसे से इन दिनों सियासी तालीम ले रहे हैं। दुनिया की सबसे बड़ी हक्कानिया यूनिवर्सिटी के रूप में चर्चित इस मदरसे में अभी 4 हजार छात्र हैं। पाकिस्तान के सबसे पुराने और सबसे बड़े इस मदरसे से तालीम लेकर निकले कुछ 'छात्र' वर्तमान अफगान सरकार में मत्री हैं। इन्हें हक्कानी नेटवर्क का नुमाइंदे कहा जाता है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान के अन्य 3 हजार मदरसों को अपने कंट्रोल में लाने की कोशिशों में है। इस मदरसे में फिलहाल 1500 छात्र अपने अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार इस हक्कानी मदरसे को वित्तीय मदद भी देती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मदरसे से पाक के आतंकी संगठन टीटीपी को भी मदद प्रदान की जाती है। बीबीसी उर्दू के मुताबिक, तालिबान सरकार के पांच नेताओं ने मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर (जल और ऊर्जा मंत्री), मौलाना अब्दुल बाकी (उच्च शिक्षा मंत्री), नजीबुल्लाह हक्कानी (सूचना प्रसारण मंत्री), मौलाना नूर मोहम्मद साकिब (हज मंत्री), अब्दुल हकीम सहराई (न्याय मंत्री) ने इसी मदरसे मंे शिक्षा प्राप्त की।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| बिपिन रावत के बयान से चीन को लगी मिर्ची Posted: 26 Nov 2021 06:23 AM PST बिपिन रावत के बयान से चीन को लगी मिर्चीबीजिंग। पूर्वी लद्दाख पर जारी सीमा विवाद के बीच चीन ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के बयान पर भारत के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीनियर कर्नल वू कियान ने बीजिंग में एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि भारतीय अधिकारी बिना किसी कारण तथाकथित चीनी सैन्य खतरे पर अटकलें लगाते हैं, जो दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे बयान भू-राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देते हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक है। सीमा क्षेत्र में चीन अमन-चैन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, सीनियर कर्नल वू जनरल रावत द्वारा हाल ही में की गई कथित टिप्पणियों पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। इसमें कहा गया था कि भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा चीन है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने में विश्वास की कमी है और संदेह बढ़ता जा रहा है। इस पर चीन का क्या कहना है? सीनियर कर्नल वू ने कहा कि हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और हमने भारतीय पक्ष को बात रखने का पूरा मौका दिया है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट और जाहिर है। चीनी सीमा रक्षक बल राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। तनाव घटाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक टकराव के बाद तनाव काफी बढ़ गया। तब से तनाव घटाने और विवादित क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर की कई वार्ता हो चुकी है।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पेगासस मामले के चलते इजरायल बदलेगा साइवर नीति Posted: 26 Nov 2021 06:20 AM PST पेगासस मामले के चलते इजरायल बदलेगा साइवर नीतितेल अवीव। एनएसओ कंपनी के हैकिंग टूल को लेकर हुए विवाद के बाद इजरायल ने अपनी साइबर निर्यात नीति में बदलाव का फैसला किया है। अब इजरायल ने साइबर तकनीक खरीदने की अनुमति प्राप्त देशों की सूची में कटौती की है। इस बात की जानकारी इजरायली अखबार ने गुरुवार को दी है। एनएसओ के खिलाफ एप्पल समेत बड़ी टेक कंपनियों ने मुकदमा दायर किया है। साथ ही उनके ग्राहकों का डेटा भी जोखिम में डालने के आरोप लगाए हैं। बताया गया है कि इजरायली साइबर टेक आयात करने वाले देशों की संख्या 102 से कम कर केवल 37 हो गई है। खबर है कि मैक्सिको, मोरक्को, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात पर तकनीक खरीदने पर रोक लगाई गई है। इस मामले पर इजरायल के रक्षा मंत्रालय का कहना है जुलाई में कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने पेगासस टूल से जुड़ी खबरें दिखाई थीं। कहा गया था कि इसका इस्तेमाल पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन को हैक करने में किया जा रहा है। इसके बाद से ही इजरायल पर इस टूल के नियंत्रण को लेकर काफी दबाव था। इन रिपोर्ट्स के चलते इजरायल को अपनी साइबर एक्सपोर्ट नीति की समीक्षा करनी पड़ी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| राजभवन में ‘संविधान दिवस’ पर कार्यक्रम आयोजित Posted: 26 Nov 2021 06:18 AM PST राजभवन में 'संविधान दिवस' पर कार्यक्रम आयोजितपटना, 26 नवम्बर 2021 को राजभवन के दरबार हाॅल में 'संविधान दिवस' के अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री राॅबर्ट एल॰ चोंग्थू द्वारा भारतीय संविधान की 'उद्देशिका' पढ़कर उसके माध्यम से राजभवन के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को संविधान के प्रति दृढ़संकल्पित कराया गया। राजभवन में आज 'नशामुक्ति दिवस' पर राजभवन के कर्मियों द्वारा आजीवन शराब सेवन नही करने का भी शपथ लिया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल सचिवालय के संयुक्त सचिव श्री आर॰के॰ सिन्हा एवं श्री प्रवीण कुमार गुप्ता सहित राजभवन के सभी वरीय अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम सोशल-डिस्टेन्सिंग के प्रोटोकाल का पालन करते हुए आयोजित किया |
| हिन्दू जनजागृति समिति की रत्नागिरी के जिलाधिकारी से निवेदन द्वार मांग ! Posted: 26 Nov 2021 06:12 AM PST हिन्दू जनजागृति समिति की रत्नागिरी के जिलाधिकारी से निवेदन द्वार मांग !ऐतिहासिक महत्त्ववाले लोकमान्य टिळक के जन्मघर की तत्काल देखभाल की जाए !'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और वह मैं प्राप्त करूंगा' ऐसी सिंहगर्जना कर भारतीयों में स्वराज्य प्राप्ति की चेतना जागृत करनेवाले लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक का आदर्श सरकार को युवा पीढी के समक्ष रखना चाहिए । इस हेतु उनकी स्मृतियों का जतन और संवर्धन करना चाहिए; परंतु दुर्भाग्य यह है कि महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग के अधिकारक्षेत्र में आनेवाले लोकमान्य टिळक के रत्नागिरी स्थित जन्मस्थान की अत्यधिक दुर्दशा हुई है । इस अमूल्य धरोहर का ऐतिहासिक महत्त्व ध्यान में रखकर सरकार लोकमान्य टिळक के जन्मघर की तत्काल देखभाल करें, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से रत्नागिरी के जिलाधिकारी डॉ. बी. एन्. पाटील से की गई । 26 नवंंबर को समिति के शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी डॉ. बी. एन्. पाटील से भेंट कर इस विषय में विस्तृत निवेदन प्रस्तुत किया । इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. संजय जोशी के साथ श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्थान के श्री. देवेंद्र झापडेकर, टिळकप्रेमी श्री. शरदचंद्र रानडे, श्री शिवचरित्र कथाकार श्री. बारस्कर और सनातन संस्था के श्री. रमण पाध्ये उपस्थित थे । लोकमान्य टिळक के जन्मस्थान की छत्त के कवेलू टूट गए हैं, साथ ही दीवारों पर काई जम गई है । कुछ स्थानों पर दीवार टूट गई है । पुरातत्व विभाग द्वारा जन्मस्थान के प्रवेशद्वार के बाहर लगाए गए फलक को जंग लगी है । वह पढने योग्य नहीं है । लोकमान्य टिळक की प्रतिमा और परछत्ती की दुर्दशा हुई है तथा प्रतिमा का रंग कुछ स्थानों से उड गया है । स्मारक की छत्तों के कवेलू पर घास उग आई हैं । इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो वर्षा में पानी टपकने से यह ऐतिहासिक वास्तु और इस वास्तु में जतन किया गया अनमोल संग्रह खराब होने का भय है । लोकमान्य की प्रतिमा पर लगाई परछत्ती के खंबों में लगाई गई फर्शियों में दरारें आ गई है । परछत्ती के अर्धगोलाकार छत का रंग उड गया है । परछत्ती के उद्घाटन का फलक खराब हो गया है तथा वह पढने योग्य नहीं रहा । परछत्ती के पीछे लोकमान्य टिळक की शिल्पाकृति टुटी हुई स्थिति में है । इस जन्मस्थान को देखने के लिए पूरे देश से हजारों पर्यटक तथा शाला के विद्यार्थी दौरे पर आते हैं । वे जन्मस्थान की जानकारी पुस्तिका मांगते हैं; परंतु जन्मस्थान पर साधारण जानकारी पुस्तिका भी उपलब्ध नहीं है । पर्यटकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, 'सीसीटीवी' नहीं, वाहनतल (पार्किंग) की व्यवस्था नहीं, ऐसी अनेक सुविधाओं का अभाव है । पर्यटकों को टूटा-फूटा ध्वस्त और भग्न स्थितिवाला जन्मस्थान देखना पडता है । स्वतंत्रता संग्राम के इस महान नेता के जन्मस्थान की सरकार तत्काल देखभाल करें, ऐसी समस्त राष्ट्रप्रेमियों की मांग है । 'सूचना के अधिकार' अंतर्गत 'क्या वर्तमान स्मारक का राज्य अथवा केंद्र शासन के पुरातत्व विभाग ने निरीक्षण किया है ?' ऐसा पूछने पर 'निरीक्षण नहीं किया है', ऐसा उत्तर दिया गया । इससे सरकार की इस स्मारक के प्रति उदासीनता दिखाई देती है । लोकमान्य टिळक के जन्मस्थान की तत्काल सुरक्षा और संवर्धन किया जाए । साथ ही इसे 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित किया जाए । यहां लोकमान्य टिळक का जीवनपट दिखाने की व्यवस्था करें । जन्मस्थान की जानकारी पुस्तिका और लोकमान्य द्वारा लिखे गए ग्रंथों की प्रति, लोकमान्य टिळक के दुर्लभ छायाचित्र इत्यादि साहित्य यहां रखे जाएं, ऐसी मांग इस निवेदन में की गई है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| लोकतंत्र की बुनियाद है भारतीय संविधान Posted: 26 Nov 2021 06:08 AM PST लोकतंत्र की बुनियाद है भारतीय संविधान- ओम बिरला, लोक सभा अध्यक्ष भारत विश्व का महानतम कार्यशील लोकतंत्र है। ऐसा न केवल इसके विशाल आकार अपितु इसके बहुलतावादी स्वरूप और समय की कसौटी पर खरे उतरने के कारण है। लोकतांत्रिक परंपराएं और सिद्धांत भारतीय सभ्यता की विरासत के अभिन्न अंग रहे हैं। हमारे समाज में समता, सहिष्णुता, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित जीवन शैली जैसे गुण सदियों से विद्यमान रहे हैं। वास्तव में लोकतंत्र की जड़ें हमारी राजनीतिक चेतना में बहुत गहराई तक समाई हुई हैं। इसलिए हमारे देश में विभिन्न कालखंडों में चाहे कोई भी शासन व्यवस्था रही हो, लेकिन आत्मा लोकतंत्र की ही रही। विदेशी दासता से हमारी मुक्ति का संघर्ष सत्य, अहिंसा और व्यापक जन भागीदारी पर आधारित था। अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने आजाद और समृद्ध भारत का सपना देखा था; सामाजिक, आर्थिक न्याय पर आधारित समतामूलक समाज के निर्माण का सपना देखा था। इसके लिए कष्ट सहे और बलिदान दिया। एक लंबे संघर्ष के बाद हमें आजादी मिली। दुनिया के अनेक देशों ने आजादी पाई, परंतु भारत की आजादी दुनिया भर में मिसाल बनी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब देश की आजादी के नायकों और हमारे मनीषियों ने देश के लिए संविधान की रचना की, तब हमारे संविधान में स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और न्याय के आधारभूत मूल्यों को सहज ही शामिल कर लिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत जैसे विशाल एवं विविधतापूर्ण देश के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कायम रखते हुए किस प्रकार अपने देशवासियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में समृद्धि लाई जा सके। संविधान निर्माण के समय हमारे संविधान निर्माताओं के समक्ष तीन मुख्य उद्देश्य थे – राष्ट्र की एकता और स्थिरता को सुरक्षित रखना, व्यक्तियों की निजी स्वतंत्रता और कानून के शासन को सुनिश्चित करना तथा ऐसी संस्थाओं के विकास के लिए जमीन तैयार करना जो आर्थिक और सामाजिक समानता के दायरे को व्यापकतर बनाए। हमारे संविधान निर्माताओं ने अपने अनुभव, ज्ञान, अपनी सोच तथा देश की जनता से जुड़ाव के चलते न केवल इन लक्ष्यों को सिद्ध किया बल्कि हमें एक ऐसा संविधान दिया जो अपने समय का सबसे प्रगतिशील एवं विकास उन्मुखी संविधान है। हमारा देश विशाल एवं विविधतापूर्ण देश है। यह तेजी से संक्रमणकाल से गुजर रहा है। देश के समक्ष नई-नई चुनौतियां हैं। परंतु हमारा संविधान हमें इन चुनौतियों से निपटने की शक्ति देता है। साथ ही, इसमें देश की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने का भी पर्याप्त सामर्थ्य है। यही कारण है कि यह संविधान आज भी हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। यह देश में न सिर्फ कानून का शासन स्थापित करता है बल्कि यह केंद्र और राज्य सहित देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रदत्त शक्तियों का स्रोत भी है। भारत के संसदीय लोकतंत्र की सफलता भारत के संविधान की सुदृढ़ संरचना और इसके द्वारा विहित संस्थागत ढांचे पर आधारित है। 26 नवम्बर का दिन हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि वर्ष 1949 में इसी दिन हमारे देश की संविधान सभा ने 90 हजार शब्दों से तैयार किए गए संविधान को अपनाया था। संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर वर्ष 2015 में केन्द्र सरकार ने घोषणा की थी कि 26 नवम्बर का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाए। भारत के संविधान की सर्वाधिक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसका विचारदर्शन चिरस्थायी है, लेकिन इसका खाका लचीला है। हमारा संविधान केवल अमूर्त आदर्श नहीं है, बल्कि यह एक सजीव दस्तावेज है। भारतीय संविधान के बल पर हम राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना कर पाए हैं। भारतीय संविधान सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में सबसे मजबूत साधन सिद्ध हुआ है। हमारा संविधान समय के साथ-साथ नई आशाओं, आकांक्षाओं और परिस्थितियों पर खरा उतरता रहा है और वस्तुत: यह निरंतर विकसित हो रहा है । पिछले 72 वर्षों में हमारा लोकतांत्रिक अनुभव सकारात्मक रहा है। सात दशकों की अपनी यात्रा में हमें अत्यंत गौरव के साथ पीछे मुड़ कर देखना चाहिए कि हमारे देश ने, न केवल अपने लोकतांत्रिक संविधान का पालन किया है, बल्कि इस दस्तावेज में नए प्राण फूंकने और लोकतांत्रिक चरित्र को मजबूत करने में भी अत्यधिक प्रगति की है। हमने 'जन' को अपने 'जनतंत्र' के केंद्र में रखा है और हमारा देश न केवल सबसे बड़े जनतंत्र के रूप में, बल्कि एक ऐसे देश के रूप में उभर कर सामने आया है, जो निरंतर पल्लवित होने वाली संसदीय प्रणाली के साथ जीवंत और बहुलतावादी संस्कृति का उज्ज्वल प्रतीक है। हमने संविधान की प्रस्तावना के अनुरूप एक समावेशी और विकसित भारत के निर्माण के लिए न केवल अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों को साकार करने पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि हम शासन-प्रणाली में भी रूपांतरण कर रहे हैं। यह वास्तव में एक आदर्श परिवर्तन है, जिसमें लोग अब निष्क्रिय और मूकदर्शक या 'लाभार्थी' नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवर्तन लाने वाले सक्रिय अभिकर्ता हैं। भारतीय लोकतंत्र की विकास-यात्रा में अब तक सत्रह आम चुनावों और राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी कई सफल चुनावों का आयोजन किया जा चुका है। प्रत्येक चुनाव से भारतीय लोकतंत्र समृद्ध हुआ है। एक राजनीतिक दल से दूसरे राजनीतिक दल को सत्ता का निर्बाध हस्तातंरण हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है । हमारा संविधान हमारे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को दिशा प्रदान करता है। परंतु विकास के स्वरूप और उसकी गति को निर्धारित करना हमारा काम है। हमारी प्रमुख निष्ठा हमारे संविधान के मूल्यों तथा हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के फायदों को समाज के निचले पायदान पर ले जाने की होनी चाहिए। इसके लिए हमें संविधान प्रदत्त अधिकारों के साथ-साथ अपने दायित्वों के निर्वहन के महत्व को भी समझना होगा। हमारे संविधान में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का अद्भुत संतुलन है। आजादी के 75 वर्षों में अब वह समय आ गया है कि राष्ट्रहित में नागरिक कर्तव्यों को समान महत्व दिया जाए। यदि हम राष्ट्रीय उद्देश्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ करेंगे तो हमारा देश विकास पथ पर तीव्र गति से अग्रसर होगा तथा हमारा लोकतंत्र और अधिक समृद्ध एवं परिपक्व बनेगा। आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हम एक प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्था के रूप में निरंतर विकास कर रहे हैं। परंतु हमारे विकास की धारा एकध्रुवीय न होकर सर्वसमावेशी और समतावादी है। ऐसा इसलिए संभव हो सका है कि क्योंकि हमारा संविधान हमें ऐसी राह दिखाता है और यह सुनिश्चित करता है कि विकास यात्रा में समाज का कोई भी हिस्सा पीछे न रह जाए। हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली स्थानीय स्वशासन तथा पंचायती राज जैसी संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं तथा समाज के कमजोर वर्गों की सामाजिक आर्थिक प्रगति में भागीदारी पर बल देती है। संविधान वह मूलभूत विधि है जिस पर उस देश के अन्य सभी कानून आधारित होते हैं। यह एक पवित्र दस्तावेज है और सभी को इसके आदर्शों के प्रति पूरी तरह निष्ठावान होना चाहिए। संविधान के अंतर्गत राष्ट्र के सभी अंगों को उन लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील होने का अधिदेश सौंपा गया है जिनके हितों की रक्षा के लिए वे बनाए गए हैं। हमारी संसदीय प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए लोकतंत्र की तीनों शाखाओं न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका को अपनी स्वतंत्रता के प्रति जागरूक रहते हुए आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए।आज संविधान दिवस के इस पावन अवसर पर हम सभी स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों और अपने संविधान निर्माताओं की आशाओं और अपेक्षाओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और उन्हें पूरा करने का संकल्प लें। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ‘हलाल प्रमाणपत्र’ के विषय में कानून मंत्री बृजेश पाठक जी को हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ज्ञापन ! Posted: 26 Nov 2021 06:00 AM PST 'हलाल प्रमाणपत्र' के विषय में कानून मंत्री बृजेश पाठक जी को हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ज्ञापन ! |
| Posted: 26 Nov 2021 05:55 AM PST सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों ने 'नशा मुक्ति दिवस' पर शराब-सेवन नहीं करने की शपथ लीपटना, 26 नवम्बर 2021 को सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग में निदेषक श्री कँवल तनुज सहित विभागीय सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने बिहार सरकार के निदेषालोक में 'नशा मुक्ति दिवस' के अवसर पर आजीवन शराब का सेवन नहीं करने और दूसरों को भी शराब सेवन के लिए पे्ररित नहीं करने से संबंधित शपथ ली।शपथ लेने के बाद उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने शपथ-पत्र को हस्ताक्षरित कर अपने कार्यालय में समर्पित कर दिया। |
| जेएसडी के संविधान का हुआ विमोचन Posted: 26 Nov 2021 06:09 AM PST जेएसडी के संविधान का हुआ विमोचनदिनांक 26 नवम्बर 2021शुक्रवार को समय-3 बजे पटना के गांधी मैदान स्थित ए. एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट ( सोशल स्टडीज) के सेमिनार हॉल नम्बर-3 में एडवोकेट ऑफ जेएसडी कॉउंसिल द्वारा संविधान दिवस के शुभ अवसर पर संविधान का जन-जन में चेतना का प्रसार सेमिनार एंव जेएसडी का संविधान का विमोचन किया गया ह। इस कार्यक्रम में आए सभी जन-शिक्षा न्याय परिषद के ने संयुक रूप से दीप प्रज्वलन किया। सभी मुख्य अतिथि को गुलदस्ता, मोमेंटो और अंगवस्त्रम टीम जेएसडी द्वारा प्रदान किया गया । सेमिनार में अर्थशास्त्री प्रो. डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा की लोकतंत्र की आत्मा को सुदृढ़ करने के लिए सार्वजनिक नियंत्रण, राजनीति तथा राजनीतिक क्षमता के सिद्धांतों को संस्थागत रूप से प्रभावकारी बनाने के लिए अरसे से स्थापित लोकतंत्र के नवीकरण का सर्वसाधारण को लोकतंत्र से लाभ दिखाना होगा, क्योंकि यदि उनके दैनिक जीवन तथा जीवन की परिस्थितियों के साथ कोई प्रासंगिकता नहीं रही तो वे इसकी सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं करेंगे। लोकतंत्र खाली ढोल या निर्जीव ढांचा बनकर रह जाएगा। चुनाव के समय जो विकल्प उनके सामने प्रस्तुत होते हैं उनमें कोई अंतर दिखाई नहीं देता, क्योंकि राजनीतिक लोग या तो जनता की इच्छा व आवश्यकता के अनुसार सुधार करने के लिए सक्षम नहीं है या फिर ऐसा करने की उनमें इच्छा ही नहीं है । इसी बुनियादी नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों के लिए निर्भीक होकर सार्वजनिक समस्याओं के समाधान एवं जनकल्याण के लिए, यदि लोग एकदम स्थानीय स्तर पर अपने कार्यस्थल तथा पड़ोस की हालत बदलने के लिए सक्षम नहीं है तो लोकतंत्र व्यर्थ है । एडवोकेट ऑफ जेएसडी कॉउंसिल के निदेशक सह प्रवक्ता डॉ. सुमन्त राव ने कहा कि जेएसडी समाज में व्यापक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है। हकीकत यह है कि देश की एक बड़ी आबादी ने संविधान का शब्द ही नहीं सुना है। संविधान की मूलभूत बातों का ज्ञान जन-जन तक पहुंचाने के लिये ठोस उपाय करने की जरूरत है । न्याय परिषद की मजबूत कड़ी लीगल कम्युनिकेशन रिसर्च से नागरिकों को जगाया जाएगा। एडवोकेट सूर्यमणि सिंह ने कहा कि संविधान की मूलभूत बातों की जानकारी नागरिकों में पुनरुत्थान लाने का अवसर हो सकती है। संविधान का जितना प्रचार होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा और सपनों का भ्रष्टाचार मुक्त भारत बन सकता है । लोकतंत्र के विशिष्ट प्रशिक्षण से बच्चों को अपने देश के संविधान तथा उसके विकास का ज्ञान प्राप्त होता है। नागरिक अधिकारों की समझ पैदा होती है तथा मानवाधिकारों और उनका महत्व समझ में आता है, किंतु लोकतंत्रीय शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं है। यह प्रशिक्षण समसामयिक मुद्दों पर बहस, अपने तर्क प्रस्तुत करने तथा दूसरे के विचार सुनने, विद्यालय तथा समाज से संबंधित अन्य मामलों में राय देने की प्रक्रिया द्वारा होता है। इस कार्यक्रम में बिहार स्टेट बार कॉउंसिल सदस्य शहनाज फातिमा,आयोजन सचिव एडवोकेट संतोष कुमार, जेएसडी के प्रदेश अध्यक्ष चन्दन ठाकुर, डॉ मीनाक्षी स्वराज, प्रणव रंजन, सौरभ सुमन, नीतीश कुमार, आलोक गुप्ता, डॉ.अब्दुल्ला अंसारी, ई.अर्जुन कुमार, राजीव कुमार, एडवोकेट सुधीर कुमार, अमित कुमार, विक्रम कुमार उर्फ राज दयाल, संजीव सिंह, सुशील कुमार समेत दर्जनों वक्ता ने अपना विचार रखा एवं अभिषेक कुमार, विक्रांत राय , किशोर कुमार, विकास कुमार और धीरज भी शामिल थे ।। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 05:41 AM PST नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नशा मुक्ति को लेकर लोगों को दिलायी शपथमुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज सम्राट अशोक कंवेन्शन केंद्र के ज्ञान भवन में नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के शुरुआत के पूर्व सम्राट अशोक कंवेन्शन केंद्र परिसर में मुख्यमंत्री ने मद्य निषेध प्रचार-प्रसार अभियान हेतु मद्य निषेध रथ एवं प्रचार बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने ज्ञान भवन के निचले तल्ले में नशा मुक्ति पर पेंटिंग, कोलॉर्ज एवं टेराकोटा प्रदर्शनी का उद्घाटन तथा अवलोकन किया। अवलोकन के पश्चात मुख्यमंत्री के समक्ष 'नशा मुक्त परिवार खुशहाल परिवार' पर आधारित शैडो डांस लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने मुख्यमंत्री का स्वागत पौधा एवं स्मृति चिन्ह् भेंट कर किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति को लेकर खुद शपथ लेते हुए वहां उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई कि सत्य निष्ठा के साथ यह शपथ लेता हूं कि मैं आजीवन शराब का सेवन नहीं करुंगा। मैं कर्तव्य पर उपस्थित रहूं या न रहूं, अपने दैनिक जीवन में भी शराब से संबंधित गतिविधियों में किसी प्रकार से शामिल नहीं होऊंगा। शराबबंदी को लागू करने के लिए जो भी विधि सम्मत कार्रवाई अपेक्षित है उसे करुंगा। यदि शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि में शामिल पाया जाऊंगा तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई का भागीदार बनूंगा। कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति पर आधारित गीत की प्रस्तुति की गई। साथ ही नशा मुक्ति के प्रचार-प्रसार हेतु जिंगल्स, वीडियो, ऑडियो संदेश का प्रदर्शन तथा जीविका द्वारा नशा मुक्ति पर तैयार की गई लघु फिल्म, जहरीली शराब के नुकसान पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर जनता के नाम संदेश का लोकार्पण किया तथा नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर सभी नगर निकाय प्रतिनिधियों को भेजे जानेवाले संदेश का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मद्य निषेध को लेकर उत्कृष्ट कार्य करने वाले किशनगंज के पुलिस अधीक्षक श्री कुमार आशीष सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों, उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर मैं सभी का अभिनंदन और स्वागत करता हूं। पूर्व के वक्ताओं ने सभी बातों की चर्चा विस्तार से कर दी है। 9 जुलाई 2015 को पटना के एक कार्यक्रम में मैं जब संबोधन समाप्त करके वापस गया तो वहां बैठी महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की। मैंने उस वक्त ही वापस लौटकर कह दिया था कि अगर लोगों ने मुझे अगली बार फिर से काम करने का मौका दिया तो हम बिहार में शराबबंदी लागू कर देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार में आने के बाद 1 अप्रैल 2016 को हमने नगर निगम और नगर परिषद को छोड़कर सभी जगहों पर शराबबंदी लागू कर दी। नगर निगम और नगर परिषद में विदेशी शराब बिक्री करने की अनुमति थी। उस समय शहरों में विदेशी शराब की दुकान को खोलने का लोगों ने भारी विरोध करना शुरू किया तो हमलोगों ने 5 अप्रैल से पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्ष 2011 से हमने 26 नवम्बर को मद्य निषेध दिवस मनाना शुरू किया और शराबबंदी के बाद वर्ष 2017 में इसका नाम नशा मुक्ति दिवस कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी काम कीजियेगा तो चंद लोग गड़बड़ करने वाले हमेशा रहते हैं, शत प्रतिशत लोग किसी भी चीज को स्वीकार नहीं करते हैं। शराबबंदी को लेकर हमने 9 बार समीक्षा बैठक की है। हाल ही में शराबबंदी को लेकर 7 घंटे लगातार समीक्षा बैठक की गयी थी और उसमें एक-एक बिंदुओं पर चर्चा हुयी थी। इस बैठक में सभी चीजों की समीक्षा की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में जहरीली शराब से हुई मौत के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई भी की गई। हाल ही में जहरीली शराब पीने से हुई मौत के दोषियों पर भी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीने से होने वाली हानि को लेकर डब्लू0एच0ओ0 ने वर्ष 2016 में दुनिया भर में एक सर्वे कराया था जिसकी रिपोर्ट वर्ष 2018 में प्रकाशित की गयी। दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में 5.3 प्रतिशत मृत्यु यानि करीब 30 लाख लोगों की मौत शराब पीने से हुई। 20 से 39 आयु वर्ग के युवक/युवतियों में होने वाली मृत्यु का 13.5 प्रतिशत शराब पीने से होती है। 18 प्रतिशत लोग शराब पीने के कारण आत्महत्या करते हैं। आपसी झगड़े का 18 प्रतिशत कारण शराब पीना होता है। विश्व में जितनी सड़क दुर्घटनायें होती हैं उसमें 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनायें शराब पीने की वजह से होती है। शराब पीने की वजह से होने वाली गंभीर बीमारियों में से लीवर की गंभीर बीमारी 48 प्रतिशत, मुंह के कैंसर का 26 प्रतिशत, पैनक्रियाज की गंभीर बीमारी 26 प्रतिशत तथा टी0बी0 की गंभीर बीमारी 20 प्रतिशत के आस-पास शराब पीने के कारण होती है। यह रिपोर्ट बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद आयी है। डब्लू0एच0ओ0 की इस रिपोर्ट में शराब के सेवन के दुष्परिणामों को लेकर व्यापक चर्चा की गई है। हमें खुषी है कि जिस कारण से हमलोगों ने राज्य में शराबबंदी लागू किया डब्लू0एच0ओ0 की यह रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। इस रिपोर्ट में शराब से होने वाली हानियों के बारे में लोगों को सचेत करने के लिए पर्याप्त आंकड़ें दिये गये हैं। लोगों को हमेशा सचेत करने के लिए हम इस रिपोर्ट के बारे में बताते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का लोगों के बीच में और प्रचार-प्रसार करायें ताकि वे शराब सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जागरुक रहें। इसका प्रचार प्रसार करना जरूरी है ताकि लोग समझ सकें कि शराब कितनी बुरी चीज है। लोगों के हित में बिहार में शराबबंदी लागू की गयी है। बापू ने भी कहा था कि शराब बुरी चीज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधान सभा और विधान परिषद् में सर्व सम्मति से शराबबंदी का प्रस्ताव पास किया गया। उस समय सरकार में जो थे और जो विपक्ष में थे, सभी ने शराबबंदी का समर्थन किया। शराबबंदी के खिलाफ बोलने वाले कुछ लोग भूल जाते हैं कि शराबबंदी लागू करने के वक्त मद्य निषेध विभाग के मंत्री किस पार्टी के थे। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी का अध्ययन करने कई राज्यों के लोग आये हैं। कई राज्यों ने इसको लेकर मुझे अपने राज्यों में बुलाया भी था। केरल के लोग पिछले 22 साल से शराबबंदी के लिये अभियान चला रहे हैं। शराबबंदी लागू होने से पर्यटकों की संख्या घट जाती है, यह एक भ्रम है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद पर्यटकों की संख्या और बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी कानून को मजबूती से लागू करने के लिये एक बार फिर से शपथ दिलायी जा रही है। शपथ लेने से मन फिर से मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि बाएं-दाएं करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई करें। सरकारी तंत्र में भी जो गड़बड़ करने वाले हैं उन पर भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि पटना शहर पर विशेष नजर रखें। पटना के कंट्रोल होने से पूरा बिहार कंट्रोल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि शराब की सूचना मिलने पर पुलिस का छापेमारी करने जाना कोई गुनाह नहीं है। शादी समारोह हो या और कोई समारोह जब भी सूचना मिलेगी तो पुलिस जायेगी। नियमानुसार कार्रवाई हो, इसका ख्याल रखना जरूरी है। कुछ लोग ऐसे बयान दे रहे हैं कि बाहर से आने वालों को शराब पीने की छूट देनी चाहिये। ऐसे बयान देने वालों के मन में जरूर कोई गड़बड़ करने वाली बात है। पहले लोग कहते थे कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार की आमदनी घट गयी है लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है। पहले वर्ष 5000 करोड़ रूपये के राजस्व का घाटा हुआ था। उसके अगले वर्ष 1200 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हुआ लेकिन अगले साल से शराबबंदी से कोई राजस्व की हानि नहीं होने लगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में फल, सब्जी और दूध की खपत बढ़ गयी है। फल, सब्जी और दूध का उत्पादन भी बढ़ा है और बिक्री भी बढ़ी है। शराबबंदी के बाद शराब का सेवन नहीं करने के कारण बचे पैसे से लोग फल, सब्जी और दूध खरीद रहे हैं। शहरों में वातावरण बेहतर हुआ है। शराबबंदी के बाद एक महिला ने आप बीती सुनाते हुए कहा था कि शराबबंदी के पहले पति शराब पीकर रोज झगड़ा करते थे। घर में बच्चे एवं बच्चियां परेशान रहती थी, खाने के लिए पैसे नहीं रहते थे लेकिन शराबबंदी के बाद अब वे शाम में घर आते हैं तो बाजार से सब्जी लेकर आते हैं, मुस्कुराते हैं और अब देखने में भी अच्छे लगते हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से समाज में बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी को पूरी मजबूती से लागू करना होगा। सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, उत्पाद अधीक्षक और लोक अभियोजक के साथ 15 दिनों में एक बार शराबबंदी को लेकर जरुर समीक्षा बैठक करें। मुख्यालय स्तर पर वरीय अधिकारी हर दूसरे दिन बैठक कर पूरे राज्य के शराबबंदी की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि शराब की सूचना देने को लेकर केंद्रीय आसूचना केंद्र बनाया गया है। बिजली के खंभों पर नंबर अंकित किया गया है जिससे लोग आसानी से सूचना दे सकें। सूचना देने वालों का नाम गुप्त रखा जाता है। अधिकारियों ने बताया है कि अब काफी तादाद में लोग शिकायत कर रहे हैं। बीच में लोगों का भरोसा घट गया था, लोगों को लग रहा था कि शिकायत करने पर भी उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है लेकिन कार्रवाई तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा कि शराब पीना अच्छी बात नहीं है। शराब बुरी चीज है। जहरीली शराब पियोगे तो मरोगे, इसे प्रचारित करने की जरूरत है। छात्र जीवन से ही हम शराब के खिलाफ रहे हैं। उस समय से ही मेरी इच्छा थी कि जब हमें काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू करेंगे। बिहार में स्व0 कर्पूरी ठाकुर जी ने शराबबंदी लागू किया था लेकिन बाद में उसे खत्म कर दिया गया। जब महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की तो मेरा मन शराबबंदी को लेकर दृढ़ हुआ और राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की। शराबबंदी के प्रति हम सबों को जागृत रहना है और शराब के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरुक करते रहना है। शराबबंदी लोगों के हित में है। इससे राज्य और देश का भला होगा। बिहार में शराबबंदी के सफल होने से दूसरे राज्य भी इसे लागू करने को लेकर प्रेरित होंगे। वर्ष 2017 में 21 जनवरी को शराबबंदी को लेकर मानव श्रृंखला बनायी गयी थी। इसमें अन्य लोगों के साथ-साथ पत्रकारों ने भी शराबबंदी की शपथ ली थी। शराबबंदी को लेकर सभी लोगों ने अपना सहयोग और समर्थन दिया है। हमें भरोसा है कि आगे भी सभी लोग इस अभियान को अपना समर्थन देंगे। आज सभी लोगों ने शपथ ली है। मुख्य सचिव और डी0जी0पी0 सभी सरकारी तंत्र के लोगों की शपथ लेने की पुष्टि कर लें। कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी, शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, खाद्य एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, वरीय पुलिस अधिकारीगण, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य अधिकारीगण, जीविका की दीदियां, किलकारी के बच्चे उपस्थित थे जबकि अन्य जगहों से वेबकास्टिंग के माध्यम से अन्य जनप्रतिनिधिगण, पदाधिकारीगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति जुड़े हुए थे। नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के बाद पारिवारिक पार्टियों पर उठे सवाल पर पत्रकारों द्वारा पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पारिवारिक पार्टियां देश को नुकसान पहुंचा रही हैं ये बिल्कुल सही है। हमलोग तो शुरू से ये मानकर चल रहे हैं कि पारिवारिक पार्टियों का कोई मतलब नहीं है। आजकल लोग खुद को, अपने परिवार को, बाल बच्चे को राजनीति में जगह देना चाहते हैं। राजनीति में परिवारवाद का कोई मतलब नहीं होना चहिये लेकिन आजकल कई दल इसी राह पर चल रहे हैं। कुछ दिनों के लिये भले ही परिवारवाद चल जाये लेकिन कुछ समय के बाद उनका सर्वाइवल संभव नहीं होगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 26 Nov 2021 05:34 AM PST
|
| Posted: 26 Nov 2021 05:30 AM PST
|
| Posted: 25 Nov 2021 11:54 PM PST बोलता झूठ कहता छला ही नहीं लोग कहते हैं उसकी खता ही नहीं लूट ली सब कमाई धरी गांठ की क्या बताएं तुम्हें कुछ बचा ही नहीं वो लड़ाने भिड़ाने में माहिर बड़ा काम उसका किसी को ज़चा ही नहीं धर्म की जाति की बात करता सदा और कुछ पास उसके बचा ही नहीं झूठ को सच हमेशा बताता रहा राह सच की कभी भी चला ही नहीं कत्ल होते यहाँ हैं खुलेआम पर है जो कातिल उसे दी सजा ही नहीं साफ-सुथरी बना ली है छबि आपने भृष्ट अधिकारी कोई हटा ही नहीं रोज़ शोषण गरीबों का होता यहॉ प्रश्न उनके किसी ने सुना ही नहीं दौड़ता-भागता फिर रहा किस लिए धन इकट्ठा किया पर छका ही नहीं क्या समर्पण तुम्हारा यही देश को देश का भक्त देता दगा ही नहीं गर्व किसपे करें 'जय' बताओ भला देश को तो कहीं का रखा ही नहीं * ~जयराम जय 'पर्णिका',बी -11/1,कृष्ण विहार,आ.वि. कल्याणपुर,कानपुर-208017 (उ०प्र०)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 25 Nov 2021 11:47 PM PST संविधान दिवस परमैं हूँ भारत का संविधान ,दुनिया में जाना पहचाना । अपने जख्मों पर रोता हूँ ,मेरे दुख का यह पैमाना ।। कोई दल आया हिला गया ,कोई दल आया झुला गया । आतंकी कुत्तों का टोला ,अंतस तक शोणित पिला गया । सारे दल मेरे शोषक हैं ,सब मुझ पर दांव लगाए है , भूखे बच्चों के कृन्दन को ,मैं देख देख तिलमिला गया । अधिकारों के सब सौदागर , कर्तव्यों का अहसास नहीं , पचपन सालों तक झेला है ,घोटालों का ताना बाना ।। मैं हूँ भारत का संविधान, दुनिया में जाना पहचाना ।।1 संसोधन होते बार बार, जिनकी सीमा का अंत नहीं । हर मौसम ही वीराना है ,मेरे घर खिला वसंत नहीं । सौ से भी अधिक घाव देखो ,मेरी इस जर्जर काया में , लगता है अब तो न्यायालय ,संसद भी मेरे कंत नहीं । मुझ पर ही धूल उड़ाते हैं ,कुछ जाति धर्म के गठबंधन , रोजाना घेर रहा मुझको ,तूफान मजहबी दीवाना ।। मैं भारत का संविधान ,दुनिया में जाना पहचाना ।।2 मुझको धर्म हीन बतलाकर ,तुमने ही निरपेक्ष बनाया । बिना आत्मा के क्या कोई ,जीवित रह सकती है काया । मेरी नीव खोदने वालो , सभी दलों के जीजा सालो , भूल गए नेता सुभाष को , जिसने कुछ सम्मान दिलाया । सब सोच समझ मतदान करो ,सच्चे नेता का मान करो , भारत फिर से होगा महान , मेरा बस ये ही परवाना ।। मैं हूँ भारत का संविधान ,दुनिया में जाना पहचाना ।।3 मेरी चाहत है इतनी हम ,दुनिया में अपना नाम करें । झगड़ें ना एक दूसरे से ,सब अपना अपना काम करें । मेरा तन बेसक घायल है ,पर मन सरहद पर रहता है , आरोप मढ़ें ना सेना पर , ना बिना बात बदनाम करें । "हलधर" सीमा पर घूम रही है लाल दुसाले में डायन , बासठ जैसी गलती ना हो , दोबारा ना हो पछताना ।। मैं हूँ भारत का संविधान ,दुनियां में जाना पहचाना ।।4 हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 25 Nov 2021 11:43 PM PST
|
| Posted: 25 Nov 2021 11:40 PM PST भारतीय इतिहास का कालक्रम -संकलन अश्विनीकुमार तिवारीतथाकथित स्वीकृत कालक्रम का वैज्ञानिक या साहित्यिक आधार नहीं है। यह केवल अंग्रेजों की जालसाजी है, जो उन्होंने जानबूझ कर की थी। पर बिना कोई भारतीय साहित्य पढ़े उनकी नकल करने वाले भारतीयों को यह पता भी नहीं है कि उनके द्वारा लिखित कालक्रम कहां से आया। किसी भी सामान्य साक्षर बच्चे के लिये यह जालसाजी स्पष्ट है जिसने एक भी भारतीय पुस्तक पढ़ी हो। इसके निम्नलिखित प्रमाण हैं- (१) मैं ६ वर्ष की आयु में भारतीय पञ्चाङ्ग देखना जानता था। पर अभी तक किसी भी भारतीय इतिहासकार ने विक्रम संवत् या शालिवाहन शक का नाम नहीं सुना है। कालक्रम को नष्ट करना था अतः जितने लोगों ने अंग्रेजों की इच्छा के विरुद्ध शक या संवत् आरम्भ किया उनको काल्पनिक कह दिया। (२) भगवान् राम और कृष्ण के बाद सबसे अधिक साहित्य संवत् प्रवर्त्तक विक्रमादित्य (५७ ई.पू.) के विषय में है। वे उज्जैन के परमार वंशीय राजा थे जिनके राज्य में १८० जनपद थे। उनके पौत्र शालिवाहन ने अपना शक आरम्भ किया। उसके पूर्व विक्रमादित्य के समय ६१२ ई.पू. का चाहमान शक चल रहा था जिसका प्रयोग वराहमिहिर (बृहत् संहिता, १३/३) तथ उनके समकालीन जिष्णुगुप्त के पुत्र ब्रह्मगुप्त ने किया है। किन्तु ७८ ई. के शालिवाहन शक को १२९२ ई.पू. के कश्मीर के गोनन्द वंशीय राजा कनिष्क (राजतरङ्गिणी, तरङ्ग, १) का बना दिया तथा उसको भारतीय राजा के बदले शक राजा घोषित कर दिया। अल बरूनि ने प्राचीन देशों के कैलेण्डर नामक पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी शक राजा ने अपना कोई कैलेण्डर नहीं चलाया था, वे ईरान या सुमेरिया का कैलेण्डर व्यवहार करते थे। यदि मध्य एशिया के शकों ने कुछ समय पश्चिमोत्तर भारत में अपना शक चलाया होता तो उसका उसी क्षेत्र में १०० या २०० वर्षों के लिये प्रयोग होता। पर उनका प्रयोग कम्बोडिया तथा फिलीपीन के लुगुना लेख में भी है तथा सभी ज्योतिष पुस्तकों में गणना के लिए उसी शक का प्रयोग होता है। शक तथा संवत् के विषय में अज्ञान के कारण वर्त्तमान भारतीय शासन द्वारा चलाया गया तथाकथित राष्ट्रीय शक संवत् अभी तक नहीं चल पाया है किन्तु जिन राजाओं को काल्पनिक कहते हैं, उनका शक तथा संवत् अभी तक चल रहा है और उसी के अनुसार भारत में सभी पर्व होते हैं। (३) एक और प्रचार है कि भारतीय लोग तिथि नहीं देते थे। अल बरूनि ने इसके विषय में भी लिखा है कि भारत के अतिरिक्त अन्य कहीं भी क्रमागत तिथि का कैलेण्डर नहीं था। सुमेरिया, मिस्र, ईरान, यूनान में केवल राजाओं के वर्ष की गणना करते थे जिसमें १०० वर्ष में ३-४ वर्ष तक की भूल होती थी। जहां वर्ष-मास-दिन की क्रमागत गणना थी ही नहीं, वहां के लोग तिथि कैसे दे सकते थे? ग्रीस के मेगास्थनीज, एरियन, सोलिनस, प्लिनी आदि ने लिखा है कि भारत की गणना के अनुसार सिकन्दर के आक्रमण से भारतीय राजाओं की १५४ पीढ़ी पूर्व या ६४५१ वर्ष ३ मास पूर्व बाक्कस का आक्रमण हुआ था। इतना पुराना कैलेण्डर भारत के अतिरिक्त अन्य कहीं नहीं था अतः उस समय उपलब्ध भारतीय साहित्य के अनुसार यह कालक्रम दिया गया। उसके अतिरिक्त यह भी लिखा था कि भारत सभी चीजों में स्वावलम्बी था, अतः पिछले १५,००० वर्ष से भारत ने किसी अन्य देश पर आक्रमण नहीं किया। यह समय भी महाभारत, उद्योग पर्व (२०३/८-१०) में दिया है कि कार्त्तिकेय ने नया कैलेण्डर तब आरम्भ किया जब उत्तरी ध्रुव अभिजित से दूर हट रहा था तथा धनिष्ठा से वर्षा आरम्भ होती थी (१५८०० ई.पू.)। कार्त्तिकेय ने ही क्रौञ्च द्वीप पर आक्रमण किया था जो सिकन्दर आक्रमण से १५,४०० वर्ष पूर्व है। इसे ग्रीक लेखकों ने १५,००० वर्ष लिखा है। इसमें से एक शून्य हटा कर मैक्समूलर ने १५०० ई.पू. में वैदिक सभ्यता का आरम्भ कर दिया और ऋग्वेद से सामवेद तक हर वेद को २-२०० वर्ष का कोटा दे दिया। उसके बाद मैकक्रिण्डल ने १९२७ में मेगास्थनीज की इण्डिका का नया संस्करण लिखा जिसमें १५००० वर्ष पूर्व उल्लेख को हटाया गया। उसके अनुसार ८२४ ई.पू. में असीरिया के राजा नबोनासर के आक्रमण के बाद ७५६ ई. में रानी सेमीरामी ने उत्तर अफ्रीका तथा मध्य एशिया के सभी राजाओं की ३५ लाख की संयुक्तसेना के साथ आक्रमण किया, जिसे रोकने के लिये मालव गण बना था तथा इनमें एक भी जीवित नहीं लौट पाया था। पर लिखा गया कि इसके १५० वर्ष बाद भारत में १६ महाजनपद हुए। बिना राजा या राज्य के ३५ लाख की सेना को किसने मारा? १७७६ में विलियम जोन्स तथा पार्जिटर ने विक्रम संवत् तथा अन्य संवतों की गणना की थी तथा राबर्ट सीवेल ने भारतीय कालक्रम पर विशाल पुस्तक भी शंकर बालकृष्ण दीक्षित की सहायता से लिखी। पर भारत का वैदिक इतिहास १५०० .पू. के बाद का करने के लिये ३२६ ई.पू. में गुप्त काल का आरम्भ होने के बदले मौर्य काल को १३०० वर्ष पीछे हटा कर उसे सिकन्दर के आक्रमण के समय कर दिया। इसके लिये मालव गण का पूरा इतिहास ही उड़ा दिया जिसके राजाओं ने विक्रमादित्य से पृथ्वीराज चौहान तथा परमार भोज तक शासन किया था। मालव गण का स्पष्ट उल्लेख मेगास्थनीज आदि ने किया है कि बाक्कस तथा सिकन्दर के बीच में दो बार भारत में गणराज्य थे-पहले १२० वर्ष का, बाद में ३०० वर्ष का। १२० वर्ष का गणराज्य परशुराम के समय के २१ गणतन्त्र थे जो ६१७७ ई.पू. में उनकी मृत्यु तक थे। उस समय से अब तक केरल में कलम्ब (कोल्लम) संवत् चल रहा है। दूसरा मालव गण था जो शूद्रक शक (७५६ ई.पू.) से श्रीहर्ष शक (४५६ ई.पू.) तक था। मूढ़ता की पराकाष्ठा यह है कि भारतीय विद्वत् परिषद् के अध्यक्षों में एक एन पी जोशी ने पुणे के भण्डारकर प्राच्य संस्थान से शूद्रक पर पीएचडी किया तथा कनाडा-अमेरिका में ३५ वर्ष तक शूद्रक का मृच्छकटिकम् पढ़ाते रहे, पर उनको भारतीय साहित्य में शूद्रक का उल्लेख नहीं मिला। रमेश चन्द्र मजूमदार ने भी भारतीय इतिहास की जो प्रथम पुस्तक लिखी थी उसमें प्लिनी के अनुसार आन्ध्रवंशी राजाओं की सेना का वर्णन किया था, जो मेगास्थनीज पर आधारित था। इससे स्पष्ट है कि आन्ध्र वंश के अन्त में सिकन्दर आया था जब गुप्त वंश का आरम्भ हुआ था। गुप्त वंश के प्रथम राजा चन्द्रगुप्त के पिता घटोत्कच गुप्त आन्ध्र राजाओं के सेनापति थे जिनको ग्रीक लेखकों ने नाई लिखा है। घटोत्कच का शाब्दिक अर्थ है जिसके घट या सिर पर बाल नहीं हो, इसका अर्थ लगाया कि वह बाल काटने वाला था। उसके बाद के भी ३ राजाओं का नाम भी लिखा है-घटोत्कच (नाई-barber), Agramasa (Xandramasa) = चन्द्रबीज (चन्द्रश्री, आन्ध्रवंश का ३१ वां राजा, जिसका घटोत्कच सेनापति था। बाद के २ बच्चों को नाम के लिये राजा बनाया था।, Sandrocottus = चन्द्रगुप्त-१, Sandrocryptus = समुद्रगुप्त, Amitrochades = अमित्रोच्छेदस (चन्द्रगुप्त द्वितीय ने दिग्विजय किया था, अतः उसे अमित्रों का उच्छेद करने वाला कहते थे)| मजूमदार को मेगास्थनीज के अनुसार आन्ध्रवंश का वर्णन करने के लिये डांट पड़ी (प्राचीन भारत का इतिहास, पृष्ठ, १३५), तो उनकी सहायता के लिए कालीकिंकर दत्त तथा हेमचन्द्र रायचौधरी ने उनके साथ एक नयी पुस्तक लिखी जिसमें आन्ध्र वंश का मेगास्थनीज द्वारा उल्लेख हटाया गया। तब इस किताब को सिलेबस में लगाया गया। इसी प्रकार भण्डारकर प्राच्य संस्था की पत्रिका के सम्पादक देवसहाय त्रिवेद ने पत्रिका में भारतीय इतिहास का सही कालक्रम पुराणों के अनुसार लिखा तो उनको नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने अपने ही मत के खण्डन के लिये एक पुस्तक लिखी प्राङ्मौर्य बिहार जिसे भण्डारकर संस्था ने नहीं छापा, अतः बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् से छपी। किन्तु उनकी सहायता के लिए कालीकिंकर दत्त या रायचौधरी जैसे अंग्रेज भक्त नहीं मिले, अतः पुनः उनको नौकरी नहीं मिल पायी। उस्मानिया विश्वविद्यालय के प्राध्यापक ने इतिहास के लिये लिखा कि सिकन्दर आक्रमण के समय मौर्य वंश था, पर वही लेखक आन्ध्र गौरव के वर्णन के लिए मेगास्थनीज द्वारा आन्ध्र राजाओं का वर्णन लिखे थे। तिरुपति में मेरे व्याख्यान में उन्होंने भारतीय कालक्रम का विरोध किया तो नेट पर खोजने पर उन्हीं के २ प्रकार के विरोधी वर्णन मिले। पर नौकरी बचाने के लिए झूठा लिखना बहुत जरूरी है। (४) पुराणों ही भारतीय कालक्रम का एकमात्र आधार है। जो लोग समझते हैं कि केवल शिलालेख से राजाओं का काल पता चला तो वे अपनी मृत्यु तथा अपने वंशजों की मृत्यु का कालक्रम लिख कर दिखा दें। मौर्य अशोक के २४ शिलालेख हैं, किन्तु वह कैसे लिख सकता था कि मैं ३६ वर्ष राज्य करने के बाद मर गया तथा उसके बाद १० वंशजों ने इतने वर्ष राज्य किया? (५) पुराणों में मुख्य राजाओं का ही वर्णन है, जिनका संस्करण उज्जैन में विक्रमादित्य के काल में हुआ, अतः उनके समय तक के ही राजाओं का वर्णन है। उसके आधार पर कलियुग राजवृत्तान्त नामक पुस्तक में सभी राजाओं का विस्तार से वर्णन हुआ। इसे भविष्योत्तर पुराण भी कहते हैं। (६) भारतीय कालक्रम के अनुसार पण्डित भगवद्दत्त ने १९४५ में लाहौर से भारत वर्ष का बृहत् इतिहास २ खण्ड में लिखा तथा भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास १ खण्ड में लिखा। विभाजन के समय शान्तिदूतों ने उनका पूरा पूरा संग्रह जला दिया जैसा आरम्भ से नालन्दा विश्वविद्यालय आदि जला कर करते रहे हैं। बाद में उनके वंशजों ने दिल्ली के पंजाबी बाग के प्रणव प्रकाशन से उनको पुनः प्रकाशित किया। उसके बाद विजयवाड़ा के पण्डित कोटा वेंकटाचलम ने कई पुस्तकें लिखी-Chronology of Ancient Hindu History (2 volumes), The Plot in Indian Chronology, Chronology of Nepal, Chronology of Kashmir-Reconstructed, Age of Mahabharata War, Age of Buddha, Milinda, Antiyok-Yugapurana, Historicity of Vikramaditya and Shalivahana| उसके बाद १९८५-९३ तक पुणे के श्रीपाद कुलकर्णी ने थाणे के पंचपखाड़ी के अपने घर में Shri Bhagavan Vedavyasa Itihasa Samsodhana Mandira (Bhishma) संस्था स्थापित कर १८ खण्डों में भारतीय इतिहास का सम्पादन किया जिसमें उनके कई सहायक भी थे-आन्ध्र प्रदेश के पूर्व आईएएस (स्व.) ई. वेदव्यास (हैदराबाद में वेदव्यास भारती के संस्थापक), इंजीनियर आर. पी. कुलकर्णी। भारत वर्णन के घोर अपराध के कारण इसे भारत के किसी भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में नहीँ रखा गया है, किन्तु Google Books द्वारा खरीदने के लिये उपलब्ध हैं। मैंने कुलकर्णी जी को शंकराचार्य काल के विषय में मन्तव्य के लिये पत्र लिखा था जो उनके देहान्त के २ दिन बाद मिला। उनके पौत्र ने श्राद्ध के बाद सभी १८ खण्ड मुझे भेज दिये तथा कहा कि यदि मेरी इच्छा हो तो उनको ६५०० रुपये लागत खर्च दे दूं, जो मैंने बाद में भेजा। भारत के अन्य इतिहास संशोधन करने वाले भी इन पुस्तकों का नाम लेना नहीं चाहते। इन्होंने बिना कोई भारतीय इतिहास पढ़े केवल अंग्रेज जालसाजी की नकल की है। सेवानिवृत्ति के बाद शासन का रूख देख कर अचानक राष्ट्रवादी बन गये हैं तथा केवल अपने नाम से शोध करना चाहते हैं, भगवद्दत्त या कुलकर्णी का कोई नाम भी इनके सामने नहीं ले सकता। २०१० में कृपालु जी महाराज के शिष्य स्वामी प्रकाशानन्द (भौतिक विज्ञान के छात्र) ने True-History-and-Religion-of-India नामक पुस्तक लिखी जो मैकमिलन से प्रकाशित हुयी। यह वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इस अपराध के लिये ८४ वर्ष की आयु में उनके विरुद्ध बहुत से बलात्कार के केस हुए, पुस्तक लिखने तक वे सच्चरित्र थे। सौभाग्य से कुछ समय बाद उनकी स्वाभाविक मृत्यु हो गयी नहीं तो सभी मानवाधिकार नेता तथा न्यायालय उनको जेल में ही रखते।✍🏻अरुण उपाध्याय हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 25 Nov 2021 11:37 PM PST
|
| You are subscribed to email updates from दिव्य रश्मि समाचार. To stop receiving these emails, you may unsubscribe now. | Email delivery powered by Google |
| Google, 1600 Amphitheatre Parkway, Mountain View, CA 94043, United States | |
