दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- ईरान मंे शरण लेने जा रहे अफगानी
- भारत पर भ्रण्टाचार की कालिख
- विविधता मंे एकता
- धरातल पर आ रही है अधर में अटकी योजनाएं
- क्रिप्टो करेंसी पर मोदी का नजरिया
- 12 दिसम्बर 2021, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- दहेज प्रथा
- तुम्हारे कान बहरे हैं
- काली अंधियारी रात गई
- 11 दिसम्बर 2021, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- किसान आंदोलन का सुखद अंत
- सरयू परियोजना के चालीस बनाम चार साल
- प्रियंका का महिला ट्रम्प कार्ड
- 110 अफगान नागरिकों को भारत लाया गया
- इस्लामाबाद कान्क्लेव मंे इमरान ने संघ की आलोचना की
- जो बाइडेन ने अपने भाषण मंे लिया महात्मा गांधी का नाम
- बोरिस जानसन सातवें बच्चे के बने पिता
- गरिमा और सम्मान का द्योतक मानवाधिकार
| ईरान मंे शरण लेने जा रहे अफगानी Posted: 11 Dec 2021 07:26 AM PST ईरान मंे शरण लेने जा रहे अफगानीकाबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के बर्ताव से आजिज हजारों नागरिक हर दिन पश्चिम में हेरात प्रांत से ईरान सीमा तक पहुंच रहे हैं। यहां वे अपने लोगों से मिलते हैं और फिर कई दिनों तक पैदल यात्रा करके सीमा पार कर रहे हैं। यहां इनका पाला मानव तस्करों से भी पड़ता है जो उन्हें सीमा पार कराने में कुछ पैसे लेकर मदद कर रहे हैं। ये अफगानिस्तानी नागरिक कई बार ट्रकों में फंसे लोगों के साथ यात्रा करते हैं और कभी-कभी वे चोरों और सीमा प्रहरियों से बचते हुए अंधेरे में एक पर्वत शृंखला पर चलते हैं। ईरान पहुंचने पर वे नौकरी पाने की कोशिश करते हैं और कुछ यूरोप जाने की योजना बनाते हैं. ईरान तक का सफर बहुत कठिन होता है, उनके पास खाने के लिए कुछ ही रोटी और पीने का पानी होता है। वे ज्यादा देर तक पैदल चल सके, इसके लिए वे भारी बैग नहीं साथ रखते। इन नागरिकों का एक ही जुनून है कि मर जाएंगे, लेकिन देश छोड़ देंगे। ईरानी सीमा पर जाने वाली बस में सवार 20 साल के हारून ने कहा वह अपने दोस्त के साथ यूरोप जाना चाहता है। बता दें कि अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के चलते न तो रोजगार है और न ही कोई काम, ऊपर से तालिबान का खौफ अलग से है। ऐसे में देश छोड़कर जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। ईरान में पहले से ही 30 लाख अफगानिस्तानी शरणार्थी हैं। वह अब हर सप्ताह 20,000 से 30,000 अफगानिस्तानी लोगों को वापस भेज रहा है। प्रवासन के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन के मुताबिक, ईरान ने अकेले इस वर्ष 11 लाख अफगानिस्तानियों को लौटा दिया है। यह पिछले साल के निर्वासन की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 11 Dec 2021 07:23 AM PST भारत पर भ्रण्टाचार की कालिख(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भ्रष्टाचार का इतिहास भी बहुत पुराना है और दुनिया भर में इसने अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा है। विशेष रूप से दूसरे विश्व युद्ध के समय को देखें तो सभी जरूरी वस्तुओं का अकाल सा हो गया था और उन आपदा के क्षणों में कुछ लोग कमाई कर रहे थे। बाजारवाद और भोगवाद ने इसे चरम पर पहुंचा दिया। दुनिया भर में 9 दिसंबर को भ्रष्टाचार उन्मूलन दिवस मनाया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे हम प्रत्येक वर्ष विजय दशमी (दशहरे) के दिन रावण को जलाते हैं। अफसोस कि न तो अबतक अहंकार रूपी रावण को जला सके और न भ्रष्टाचार को ही दूर कर पाये। करप्शन परसेप्शन इन्डेक्स (सीपीआई) के नाम से अभी हाल में जो रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, उसके अनुसार पिछले 15 वर्ष में किसी भी देश में भ्रष्टाचार के मामले मंे कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ। यह रिपोर्ट प्रतिवर्ष प्रकाशित होती है। करप्शन इंडेक्स-2021 के अनुसार भारत विश्व रैंकिंग में 82वें स्थान पर है। दुनिया भर में 194 देश हैं। भ्रष्टाचार का इतिहास भी बहुत पुराना है और दुनिया भर में इसने अपना साम्राज्य स्थापित कर रखा है। विशेष रूप से दूसरे विश्व युद्ध के समय को देखें तो सभी जरूरी वस्तुओं का अकाल सा हो गया था और उन आपदा के क्षणों में कुछ लोग कमाई कर रहे थे। बाजारवाद और भोगवाद ने इसे चरम पर पहुंचा दिया। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर, 2003 को भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन बुलाया था। अंतराष्ट्रीय कमेटी ने माना कि भ्रष्टाचार एक जघन्य कृत्य है किसी लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। हर साल करप्शन परसेप्शन इंडेक्स के नाम से एक रिपोर्ट प्रकाशित होती है। यह रिपोर्ट बताती है कि कौन से देशों में कितना भ्रष्टाचार है और इसे नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस रिपोर्ट की मानें तो पिछले 15 वर्षों में किसी भी देश में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं देखी जा सकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2021 अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस यह देखने के लिए मनाया जा रहा है कि सरकारें, सिविल सेवक सहित अंतर्राष्ट्रीय हस्तियां अपने देशों में बढ़ रहे भ्रष्टाचार से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही हैं। इससे पहले नवंबर में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा छह सप्ताह का अभियान शुरू किया गया था जिसमें प्रत्येक सप्ताह प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था। यह अभियान भ्रष्टाचार का मुकाबला करने, अधिकारियों को अवैध रूप से धन लेने से रोकने के लिए चलाया गया था। इसका थीम आपका अधिकार, आपकी भूमिका भ्रष्टाचार को ना कहें निर्धारित किया गया था। अभियान का उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ रुख अपनाने के लिए राष्ट्रों के बीच संबंधों को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए समाधान विकसित करना, भ्रष्ट धन की वसूली आदि करना था। बता दें कि 2021 के करप्शन इंडेक्स में, भारत विश्व रैंकिंग में 194 देशों में से 82वें स्थान पर है। यूएन द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार, 2021 में, उत्तर कोरिया और तुर्कमेनिस्तान में भ्रष्टाचार का सबसे अधिक जोखिम था, जबकि डेनमार्क, नॉर्वे और फिनलैंड जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों में सबसे कम भ्रष्टाचार है। 2020 में, भारत इस लिस्ट में 77 वें स्थान पर था, लेकिन 44 के स्कोर के साथ अपनी रैंक से 5 पायदान नीचे खिसक गया है। हालांकि, भारत ने चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों से बेहतर प्रदर्शन किया। केवल भूटान ने 62वां स्थान प्राप्त किया है, जो सीमावर्ती देशों में भारत से अधिक है। भारत में भ्रष्टाचार का इतिहास बहुत पुराना है। भारत की आजादी के पूर्व अंग्रंजों ने सुविधाएं प्राप्त करने के लिए भारत के सम्पन्न लोगों को सुविधास्वरूप धन देना प्रारंभ किया। राजे-रजवाड़े और साहूकारों को धन देकर उनसे वे सब प्राप्त कर लेते थे जो उन्हे चाहिए था। अंग्रेज भारत के रईसों को धन देकर अपने ही देश के साथ गद्दारी करने के लिए कहा करते थे और ये रईस ऐसा ही करते थे। यह भ्रष्टाचार वहीं से प्रारम्भ हुआ और तब से आज तक लगातार चलते हुए फल फूल रहा है। बाबरनामा में उल्लेख है कि कैसे मुट्ठी भर बाहरी हमलावर भारत की सड़कों से गुजरते थे। सड़क के दोनों ओर लाखों की संख्या में खड़े लोग मूकदर्शक बन कर तमाशा देखते थे। बाहरी आक्रमणकारियों ने कहा है कि यह मूकदर्शक बनी भीड़, अगर हमलावरों पर टूट पड़ती, तो भारत के हालात भिन्न होते। इसी तरह पलासी की लड़ाई में एक तरफ लाखों की सेना, दूसरी तरफ अंगरेजों के साथ मुट्ठी भर सिपाही, पर भारतीय हार गये। एक तरफ 50,000 भारतीयों की फौज, दूसरी ओर अंगरेजों के 3000 सिपाही। पर अंगरेज जीते। भारत फिर गुलाम हआ। जब बख्तियार खिलजी ने नालंदा पर ग्यारहवीं शताब्दी में आक्रमण किया, तो क्या हालात थे? खिलजी की सौ से भी कम सिपाहियों की फौज ने नालंदा के दस हजार से अधिक भिक्षुओं को भागने पर मजबूर कर दिया। नालंदा का विश्वप्रसिद्ध पुस्तकालय वषों तक सुलगता रहा। आजादी के बाद 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण एवं वैश्वीकरण की विश्वव्यापी राजनीति-अर्थशास्त्र से जोड़ा गया। पहले भ्रष्टाचार के लिए परमिट-लाइसेंस राज को दोष दिया जाता था, पर जब से देश में वैश्वीकरण, निजीकरण, उदारीकरण, विदेशीकरण, बाजारीकरण एवं विनियमन की नीतियां आई हैं, तब से घोटालों की बाढ़ आ गई है। इन्हीं के साथ बाजारवाद, भोगवाद, विलासिता तथा उपभोक्ता संस्कृति का भी जबर्दस्त हमला शुरू हुआ है। आजादी से अब तक देश में काफी बड़े घोटालों का इतिहास रहा है। आजादी के बाद 1948 भारत सरकार ने एक लंदन की कंपनी से 2000 जीपों को सौदा किया। सौदा 80 लाख रुपये का था लेकिन केवल 155 जीप ही मिल पाई। घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी।के। कृष्ण मेनन का हाथ होने की बात सामने आई लेकिन 1955 में केस बंद कर दिया गया। जल्द ही मेनन नेहरु केबिनेट में शामिल हो गए। इसके बाद 1951 तत्कालीन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सेकरेटरी एस.ए. वेंकटरमन ने एक कंपनी को साइकिल आयात कोटा दिए जाने के बदले में रिश्वत ली। इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा। इसी तरह 1958 हरिदास मुंध्रा द्वारा स्थापित छह कंपनियों में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 1.2 करोड़ रुपये से संबंधित मामला उजागर हुआ। इसमें तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी, वित्त सचिव एचत्र.एम. पटेल, एलआईसी चेयरमैन एल एस वैद्ययानाथन का नाम आया। कृष्णामचारी को इस्तीफा देना पड़ा और मुंध्रा को जेल जाना पड़ा। भ्रष्टाचार की 1960 में एक बिजनेसमैन धर्म तेजा ने एक शिपिंग कंपनी शुरू करने केलिए सरकार से 22 करोड़ रुपये का लोन लिया। लेकिन बाद में धनराशि को देश से बाहर भेज दिया। उन्हें यूरोप में गिरफ्तार किया गया और छह साल की कैद हुई। इसी तरह पटनायक मामला 1961 में उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को इस्तीफा देने केलिए मजबूर किया गया। उन पर अपनी निजी स्वामित्व कंपनी कलिंग ट्यूब्स को एक सरकारी कांट्रेक्ट दिलाने केलिए मदद करने का आरोप था। मारुति कंपनी बनने से पहले यहां एक घोटाला हुआ जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम आया। मामले में पेसेंजर कार बनाने का लाइसेंस देने के लिए संजय गांधी की मदद की गई थी। इसके बाद 1976 में तेल के गिरते दामों के मददेनजर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने हांग कांग की एक फर्जी कंपनी से ऑयल डील की। इसमें भारत सरकार को 13 करोड़ का चूना लगा। माना गया इस घपले में इंदिरा और संजय गांधी का भी हाथ है। अंतुले ट्रस्ट ने 1981 में महाराष्ट्र में सीमेंट घोटाला किया। तत्कालीन महाराष्ट्र मुख्यमंत्री एआर अंतुले पर आरोप लगा कि वह लोगों के कल्याण के लिए प्रयोग किए जाने वाला सीमेंट, प्राइवेट बिल्डर्स को दे रहे हैं। हम मानते हैं कि भ्रष्टाचार की नदी भी ऊपर से नीचे की तरफ ही बहती है। इसलिए पेशकार फरियादियों से और सिपाही ठेले वाले से पैसे वसूलना अपना नैतिक कर्तव्य समझने लगा है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 11 Dec 2021 07:21 AM PST विविधता मंे एकता(हृदयनारायण दीक्षित-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) विविधता प्रकृति का नियम है। वैसे तो समूचा ब्रह्मण्ड एक इकाई है। कार्ल सागन जैसे विद्वान ने इसे 'कासमोस' कहा है। भारतीय चिंतन दर्शन में सम्पूर्ण प्रकृति को ब्रह्म कहा गया है। यह एक ब्रह्मण्ड ही भिन्न-भिन्न रूपों में हम सबकों दिखाई पड़ता है। नदियाँ, पर्वत, वनस्पतियाँ, वन-उपवन और सभी जीव उसी एक के अलग-अलग रूप हैं। इन्द्र वैदिक काल के प्रतिष्ठित देवता हैं। ऋग्वेद में स्तुति है कि यह इन्द्र ही सभी रूपों में रूप प्रतिरूप प्रकट हो रहा है। विविधता रूपों में है और अनेकता में प्रकट होती है। प्रकृति विविध आयामों में एक है। विविधता रूप के स्तर पर है और एकता आंतरिक स्तर पर है। इसी तरह लोकतंत्र का विस्तार है। यहां सारी विविधताएँ एक साथ प्रेमपूर्ण ढंग से सक्रिय रहती हैं। आधुनिक विश्व में लोकतंत्र सर्वोत्तम शासन प्रणाली के रूप में जाना जाता है। विश्व के अधिकांश देशों में लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्थाएं विद्यमान है। लोकतंत्र जनता का शासन है। लोकतंत्र एक सारवान जीवन पद्धति भी है। यह भारत के लोगों की जीवनशैली है। अपने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बहुधा 'सबका साथ-सबका विकास' का नारा दिया है। सबको साथ लेकर चलना भारत के राष्ट्र जीवन की प्रकृति है। विश्व लोकमंगल इसका ध्येय है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह देश अनेक विविधताओं से भरा-पूरा है। इंद्रधनुष प्रकाश की किरणों के विभाजित होने से बनता है। इसमें सात रंग हैं। लेकिन प्रकाश एक है। प्रकृति में भी करोड़ों जीव हैं लेकिन सब मिलाकर एक प्रकृति है। इसमें विराट विविधता है। यह विविधिता ऊपरी है लेकिन आंतरिक एकता गहरी है। लोकतंत्र का व्यापक अर्थ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक लोकतंत्र भी है। कोई देश वास्तविक रूप में तभी लोकतांत्रिक है जब उसके नागरिकों को समान सामाजिक अवसर और प्रतिष्ठा उपलब्ध होती है। सबको अवसर लोकतंत्र का प्राण है। समान आर्थिक अवसर और राजनीति में भी समान भागीदारी लोकतंत्र का मुख्य भाग है। लोकतंत्र में सभी सामाजिक विभिन्नताओं, असमानताओं के बीच सामंजस्य होता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह विविधताओं से परिपूर्ण देश है। यहाँ विभिन्न आर्थिक वर्ग हैं। इनमें समानता जरूरी है। सामाजिक समानता भी आवश्यक है। भारत विविधतापूर्ण राष्ट्र है। विविधता में एकता भारत की विशेषता है। यह भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। विविधता जीवंत लोकतंत्र का अच्छा उदाहरण है। लोकतंत्र पूर्ण जीवन पद्धति है। इसमें विविधता में एकता रहती है। डा॰ अम्बेडकर ने भारत की विविधता के बारे में लिखा है, ''यह सही है कि भारत में लोग आपस में लड़ते-झगड़ते हैं, लेकिन यहाँ अलगाव के साथ एक सांस्कृतिक एकता, सबको एक-सूत्र में बांधे रखती है।'' यह वक्तव्य महत्व पूर्ण है। यहां के लोकतंत्र में सांस्कृतिक एकता है। भारत को ध्यान से देखते हैं तो चारों दिशाओं में अनेक भाषाएंँ बोली जाती हैं। जलवायु भी सतरंगी है। उत्तर-दक्षिण-पूर्व-पश्चिम अनेक तरह के पर्व-त्यौहार व मान्यताएं भी हैं। यहाँ अनेक विचार हैं और अनेक दर्शन। यहाँ कपिल ऋषि का संाख्य दर्शन है तो बादरायण का अद्वैत ब्रह्म भी है। कर्मयोग है। परमाणुवाद है। यहाँ ईश्वरवाद है तो अनीश्वरवाद भी है और बहुदेव उपासना भी। सहमति और असहमति से भरा-पूरा है भारत का लोकतंत्र। यहाँ सभी स्तर पर विविधता है। विविधता के सूत्र सहमति और असहमति के बावजूद सर्व समावेशी लोेकतंत्र का ताना-बाना बुनते हैं। भारत के राष्ट्र जीवन में लोकतंत्र की उपस्थिति बड़ी गहरी है। ऋग्वेद दुनिया का प्राचीनतम ज्ञान कोष है। इसमें भौतिक लोकतंत्र के साथ आध्यात्मिक लोकतंत्र भी है। सबकी अपनी आस्तिकता है। ऋग्वेद के रचना काल से ही यहाँ वैचारिक विविधता दिखाई पड़ती है। यहाँ अनेक पंथिक समुदाय हैं। तमाम भाषाएँ और तमाम रीति-रिवाज हैं। विविधता में एकता भारतीय लोकतंत्र का आधार है। ऋग्वेद में सभा और समितियों का स्पष्ट उल्लेख है। सभा और समितियाँ प्राचीन लोकतंत्रीय संस्थाएँ हैं। वैदिक साहित्य में मोटे तौर पर पाँच बड़े जन-समूह हैं। ऋग्वेद में सरस्वती को ''पंच जाता वर्धयन्ती'' कहा गया है। इन जन समूहों को पाँचजन्य भी कहा गया है। पाँच बड़े जनमूह मिलकर भारत का लोकतंत्री समाज गढ़ते हैं। सहमति और असहमति मिलती है। प्रश्न और तर्क चला करते हैं। विविध समूह अपनी पहचान रखते हैं और अपने-अपने समूहों की ओर से जन प्र्रतिनिधित्व करते हैं। एकता बनाए रखते हैं। राज व्यवस्था के स्तर पर भी सब अपने-अपने पक्ष का विचार रखते हैं। वे विचार के आधार पर राजनैतिक समूह भी बनाते हैं। स्वाधीनता आन्दोलन में भी सभी जन व्रिटिश सत्ता से लड़े थे। व्रिटिश सत्ता की विदाई व स्वाधीनता प्राप्ति के समय अपना संविधान गढ़ने की चुनौती थी। संविधान सभा की रचना भी विविधता पूर्ण प्रतिनिधित्व के आाधर पर हुई थी। संविधान निर्माताओं के सामने इस विशाल विविधतापूर्ण देश के लिए आदर्श शासन प्रणाली गढ़ने की चुनौती थी। संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली अपनाई। संसदीय प्रणाली में सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व का आदर्श सिद्धांत अपनाया गया है। सरकार को जनप्रतिनिधियों के समक्ष जवाबदेह भी बनाया गया। संविधान के मसौदे पर सभा में लंबी बहस हुई थी। सरकार के स्थायित्व का भी प्रश्न उठा। डा॰ अम्बेडकर ने कहा कि ''हमने 'स्थायित्व-स्टेबिलिटी' के सापेक्ष 'जवाबदेही-रिस्पांसबिलिटी' को महत्व दिया है। यहाँ आदर्श जन प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए वंचित जन समूहों को राजनैतिक आरक्षण की व्यवस्था है। संसद और विधान मण्डलों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार दिया गया था। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से विधायिका बनी। विधायिका का बहुमत समूह सरकार को जवाबदेह बनाता है और सरकार भी चुनता है। जनप्रतिनिधि यहाँ जनता के हितों के लिए अपना पक्ष रखते हैं। जनप्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण धारणा है। वे अपने-अपने जन समूह और राजनैतिक विचार का पक्ष रखते हैं। विधायिका में बहुदलीय प्रतिनिधि होते हैं। वाद-विवाद, संवाद होते हैं। जनप्रतिनिधि संस्थाओं में विरोधी विचार भी प्रकट होते हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच मतभेद भी होते हैं। ऐसे मतभेदों से लोकतंत्र मजबूत होते हैं। असली शक्ति जनता के पास होती है। सविधान निर्माताओं ने उद्देशिका में ''हम भारत के लोग'' की शक्ति का उल्लेख है। जनप्रतिनिधित्व एक कठोर साधना है। इसमें वाक संयम महत्वपूर्ण है। बीते बीस वर्ष से वाक् संयम टूटा है। शब्द अराजकता बढ़ी है। जनप्रतिनिधत्व का सौंदर्य घटा है। आम जन अपने प्रतिनिधि से तमाम अपेक्षाएँ रखते हैं। आम जन ही किसी दल समूह को सत्ता चलाने का जनादेश देते हैं और अल्पमत वाले समूह को सरकार की आलोचना करने का अधिकार देते हैं। यहाँ अल्पमत की उपेक्षा नहीं है। अल्पमत की भी प्रतिष्ठा है। अल्पमत के कर्तव्य भी सुपरिभाषित है। उसे सरकार को सुझाव देना चाहिए। सकारात्मक विरोध उसका कर्तव्य है। लेकिन कुछ समय से सदनों में व्यवधान है। संप्रति सदन में अनुचित आचरण और व्यवहार के लिए निलम्बित सदस्यों को लेकर गतिरोध है। यह शुभ नहीं है। हंगामा सार्थक संवाद का विकल्प नहीं हो सकता। जनप्रतिनिधि को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए संयम और अनुशासन में रहना चाहिए। आमजन अपने जन प्रतिनिधि के आचार व्यवहार को ध्यान से देखते हैं। संसदीय लोकतंत्र में आचार और व्यवहार की महत्ता है। विचार अभिव्यक्ति का सौन्दर्य जरूरी है। इससे विविधता की अभिव्यक्ति के साथ राष्ट्रीय एकता भी विकसित होती रहती है। काॅमनवेल्थ पार्लियामेण्ट्री एसोसिएशन लोकतंत्रीय संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में लंबे अरसे से सक्रिय है। इस सक्रियता के कारण काॅमनवेल्थ देशों के साथ भारत के लोगों का संवाद चलता है। लोकतंत्र का कोई विकल्प नहीं है। लोकतंत्र में विविधता के साथ एकता का भी आदर्श गतिशील रहता है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| धरातल पर आ रही है अधर में अटकी योजनाएं Posted: 11 Dec 2021 07:18 AM PST धरातल पर आ रही है अधर में अटकी योजनाएं(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) वर्तमान सरकार ने दशकों से लंबित अनेक परियोजनाओं को धरातल पर उतारा है। इसके लिए समय सीमा व संसाधन का निर्धारण किया गया। इस अवधि में प्रोलियोजनों को पूर्णता प्रदान की गई। इस श्रंखला में सरयू परियोजना भी शामिल हुई। चालीस वर्षों से यह भी अधर में अटकी थी। मात्र चार वर्ष में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसके शेष करीब आधे कार्य को पूर्ण किया। इसके पहले उत्तर प्रदेश में ही बाणसागर परियोजना भी इसी प्रकार लंबित थी। इसकी भी वर्तमान सरकार ने पूरा किया। सरदार सरोवर परियोजना को तो आधी शताब्दी से अधिक समय बाद अंजाम तक पहुंचाया गया। अटल टर्मिनल का मामला दिलचस्प है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने यह योजना तैयार की थी लेकिन आम चुनाव के बाद यूपीए सरकार बनी थी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस परियोजना को पूरा करना उसकी जिम्मेदारी थी। लेकिन इसे नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरा किया। यदि यूपीए सरकार की गति से इस पर कार्य चलता तो परियोजना चालीस वर्ष में पूरी होती। इस परियोजना को को 2003 में अंतिम तकनीकी स्वीकृति मिली थी। इसके अगले वर्ष भू वैज्ञानिक रिपोर्ट पेश की गई। फिर सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी की स्वीकृति मिली। इसके चार वर्ष बाद यह सुरंग बनना शुरू हुई। इसे पांच वर्ष में पूरा होना था। इसे मोदी सरकार ने पूरा किया। नरेंद्र मोदी के हांथों इसका लोकार्पण हुआ। पीर पंजाल की पहाड़ियों को काटकर बनाई गई सुरंग के कारण छियालीस किमी की दूरी कम हो गई है। यह रोहतांग दर्रे के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है। मनाली वैली से लाहौल और स्पीति वैली तक पहुंचने में करीब पांच घंटे लगते थे। अब दस मिनट लगते है। हर साल सर्दी में करीब छह महीने के लिए देश के शेष हिस्से से कट जाता था। इससे सेना को हथियार और राशन पहुंचाना आसान सुगम हो गया। अब लद्दाख में तैनात सैनिकों से बेहतर संपर्क बना रहेगा। उन्हें हथियार और रसद कम समय में पहुंचाई जा सकेगी। बाणसागर परियोजना करोड़ तीन सौ करोड़ रुपये की थी। पैतीस सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। बाणसागर परियोजना की परिकल्पना 1956 में केन्द्रीय जल विद्युत शक्ति आयोग ने देश में जल विद्युत की संभावना के सर्वेक्षण के दौरान की गई थी। बाणसागर परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1978 को किया था। इस बड़ी परियोजना का कार्य दस वर्ष में पूर्ण किया जाना था। यूपी में नहर परियोजना की लंबाई लगभग डेढ सौ किलोमीटर रही जिसमें बाणसागर से अदवा बैराज तक अदवा नदी से होकर पानी आना था। अदवा बैराज से मेजा बांध लिंक नहर व मेजा बांध से जरगो लिंक नहर का कार्य किया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने बाणसागर परियोजना को पूरा किया। सरदार सरोवर बांध को बनाने की पहल आजादी से पहले ही हो गई थी। 1945 में सरदार पटेल ने इसके लिए पहल की थी। 1961 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसकी नींव रखी थी। छप्पन वर्ष बाद 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश को समर्पित किया। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ने जब अटकी लटकी भटकी हुई योजनाओं को खंगालना शुरू किया था। इन सभी योजनाओं को पूरा करने का संकल्प लिया गया। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना पर वर्ष 1978 में परियोजना पर काम शुरू हो गया था। 2016 में इस परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि संचयी योजना में शामिल किया गया। इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। नई नहरों के निर्माण के लिये नये सिरे से भूमि अधिग्रहण करने तथा परियोजना की खामियों को दूर करने के लिये नये समाधान किये गये। पहले जो भूमि अधिग्रहण किया गया था,उससे सम्बंधित लंबित मुकदमों को निपटाया गया। नये सिरे से ध्यान देने के कारण परियोजना लगभग चार वर्षों में ही पूरी कर ली गई। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के निर्माण की कुल लागत 9800 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें से 4600 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान पिछले चार वर्षों में किया गया। परियोजना में पांच नदियों घाघरा,सरयू, राप्ती,बाणगंगा और रोहिणी को आपस में जोडने का भी प्रावधान किया गया है। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सरयू बैराज से प्रारम्भ होती है। यह परियोजना जनपद बहराइच, श्रावस्ती, गोण्डा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर तथा महराजगंज तक नौ जनपदों को जोड़ती है। सरयू नहर की योजना वर्ष 1972 में बन गयी थी। वर्ष 1978 में इस पर कार्य प्रारम्भ हुआ। प्रारम्भिक रूप से देवीपाटन मण्डल के तीन जनपदों में यह कार्य किया जाना था। 1982 में इस परियोजना का विस्तार नौ जनपदों तक कर दिया गया। लगभग चालीस वर्षों में इस परियोजना का आधा अधूरा कार्य किया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे लोकार्पण की स्थिति तक पहुंचाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का लाभ प्राप्त होने से इस क्षेत्र के किसानों की आमदनी में कई गुना वृद्धि होगी। उनके जीवन में खुशहाली आएगी। प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी दोगुना करने का संकल्प लिया था। उस संकल्प को सिद्ध करने की दृष्टि से यह परियोजना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। योगी आदित्यनाथ ने सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से सम्बन्धित मॉडल का भी अवलोकन किया। सिंचाई सुविधाओं के साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में तीर्थाटन व पर्यटन विकास विकास की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समग्र विकास की अवधारणा में अनेक विषयों को शामिल किया। प्रयागराज में भव्य दिव्य कुंभ के आयोजन से सरकार ने दुनिया को एक सन्देश दिया था। इसके साथ ही काशी अयोध्या मथुरा आदि स्थानों का विकास किया जा रहा है। काशी में श्री विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन तेरह दिसंबर को होगा। विंध्याचल कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। प्रदेश सरकार ने ब्रज क्षेत्र की धरोहरों की पुनर्प्रतिष्ठा हेतु उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन कराया जा रहा है। सरकार ने मथुरा वृन्दावन को नगर निगम का दर्जा प्रदान किया है। वृन्दावन बरसाना, नन्दगांव गोवर्धन, राधाकुण्ड गोकुल तथा बलदेव को तीर्थ स्थल घोषित किया है। योगी आदित्यनाथ ने मथुरा की मांट तहसील में दो सौ करोड़ रुपये से अधिक लागत की करीब दो सौ विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| क्रिप्टो करेंसी पर मोदी का नजरिया Posted: 11 Dec 2021 07:16 AM PST क्रिप्टो करेंसी पर मोदी का नजरिया(अखिलेश पाठक-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) अर्थ व्यवस्था की उभरती तकनीक क्रिप्टो करेंसी में 6 अरब डालर का खुदरा निवेश हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी चाहते हैं कि इस प्रकार की अर्थव्यवस्था से लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए लेकिन रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास इसे देश के लिए लाभदायक नहीं मानते हैं। इसको लेकर असमंजस कायम है। लोगों का मानना है कि डिजिटल करेंसी वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए अर्थशास्त्रियों को इस पर खुलकर अपनी राय भी देनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसम्बर को कहा कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी उभरती तकनीक का इस्तेमाल लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन के ढांचे के लिए जल्द ही फैसला लेने वाले हैं। हालांकि इसको लेकर असमंजस कायम है। नीतिनिर्माताओं का कहना है कि रेगुलेशन से बाहर डिजिटल करेंसी अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ लोकतंत्र के मुद्दे से जुड़ी समिट फॉर डेमोक्रेसी पर वर्चुअल कान्फ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा, हमें सोशल मीडिया और क्रिप्टोकरेंसी जैसी उभरती तकनीकों पर वैश्विक मानदंड तय करने पर संयुक्त तौर पर काम करना चाहिए। यह पहला मौका नहीं है, जब पीएम मोदी ने क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए सभी देशों से साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया हो। इससे पहले 18 नवंबर को सिडनी डायलॉग के दौरान भी पीएम मोदी ने सभी लोकतांत्रिक देशों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया था कि क्रिप्टोकरेंसी का गलत इस्तेमाल न हो। हमारे देश में सरकार ने पहले सभी तरह की क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंधित करने का इरादा जताया था लेकिन बाद में उसने कहा कि वो इसके लिए नियामकीय ढांचा तैयार करेगी। इसके लिए जल्द ही नया क्रिप्टो बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि क्रिप्टो को भारत में मुद्रा या किसी भी आधिकारिक लेनदेन का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। विधेयक में क्रिप्टोकरेंसी की जगह क्रिप्टोएसेट शब्द डाला गया है। इस विधेयक के तहत वित्तीय स्थिरता को किसी भी खतरे को कम से कम करने का प्रयास है। संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयक के तहत डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। साथ ही आरबीआई द्वारा भविष्य में जारी की जाने वाली डिजिटल करेंसी की रूपरेखा तय की जाएगी। यह डिजिटल करेंसी आरबीआई कानून के तहत नियमित की जाएगी। क्रिप्टोकरेंसी का आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल न हो, इसके लिए मनी लांड्रिंग ऐक्ट के प्रावधानों में भी संशोधन किया जाएगा। बिल में प्रावधान है कि क्रिप्टो फाइनेंस पर सरकार के नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों पर 20 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और 1.5 साल तक की जेल हो सकती है। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नए बिल में इसका उल्लेख होगा। क्रिप्टो बिल के तहत जनहित को ध्यान में रखते हुए क्रिप्टो माइनिंग जैसी कुछ गतिविधियों को इजाजत दे सकती है। इसमें एक्सचेंज के माध्यम से होल्डिंग, सेलिंग, डीलिंग जैसी गतिविधियों को भी इजाजत दी जा सकती है। क्रिप्टोएसेट का लेनदेन क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिये होगा और इसे भारतीय प्रतिभूति विनियम बोर्ड के जरिये रेगुलेट किया जाएगा। सरकार क्रिप्टोएसेट रखने वालों के लिए इसका खुलासा करने के लिए एक कटऑफ डेट तय करेगी और इसे क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के तहत लाएगी- जो सेबी द्वारा रेगुलेट किए जाएंगे। क्रिप्टो करेंसी को लेकर इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा था कि नया बिल वर्चुअल करेंसी के जगत में तेजी से हो रहे बदलावों को अपने दायरे में लेगा। इसमें पिछले विधेेयक के नियमों को भी शामिल किया जाएगा, जो अभी तक इसका हिस्सा नहीं रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी पर संसद में पेश किए जाने वाले एक नए बिल को लेकर हाल के समाचारों से भ्रम की स्थिति बनी है। शुरुआत में इससे घबराहट का माहौल बना था और देश में क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी थी क्योंकि बैन की आशंका बढ़ गई थी। ऐसे में भारत में क्रिप्टो का भविष्य क्या है? क्या देश में वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगेगा? सरकार जो बिल लाने की योजना बना रही है वह किस तरह का है? क्या मुझे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जारी रखना चाहिए? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो बहुत से लोगों के दिमाग में हैं क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी में लाखों भारतीयों का कारोबार और निवेश जारी है। ऐसे कुछ बड़े प्रश्नों के उत्तर और सामान्य उलझनों को दूर करने के लिए, क्वाइन स्विच कुबेर ने कंपनी के सीईओ आशीष सिंघल के साथ हाल ही में एक एएमए सेशन आयोजित किया था। क्वाइन स्विच अभी देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों में से एक है। इसके को-फाउंडर और सीईओ आशीष ने इससे पहले रीप बेनेफिट, अर्बन टेलर, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य कंपनियों में काम किया है। उन्होंने नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से डिग्री ली है। उनके एक पावरफुल और यूजर-फ्रेंडली क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज शुरू करने के नजरिए का परिणाम क्वाइन स्विच का लॉन्च है। क्वाइन स्विच के एएमए में जिन प्रश्नों पर चर्चा की गई उनमें से कुछ यहां दिए जा रहे हैं। प्रस्तावित बिल का भारत में क्रिप्टो के लिए क्या मतलब है? आशीष कहते हैं चलिए पहले प्रस्तावित क्रिप्टो बिल का इतिहास समझते हैं। हमें केवल बिल के शीर्षक की जानकारी है, जो पिछले साल लाए जाने वाले बिल के समान है। हालांकि, वह बिल संसद में प्रस्तुत नहीं किया गया था और चीजें तब काफी अलग थीं। मौजूदा स्थितियों की बात की जाए तो भारत में क्रिप्टो कम्युनिटी इस अवधि में तेजी से बढ़ी है। लाखों लोग अब क्वाइन स्विच और अन्य एप्लिकेशंस का हिस्सा हैं। क्रिप्टो को अब एक एसेट क्लास के तौर पर देखा जा रहा है और इसे केवल एक करेंसी की तरह नहीं मानना चाहिए। यह भविष्य में गूगल, एमेजॉन, आदि की तरह बन सकता है। सरकार क्रिप्टो के कॉन्सेप्ट को समझने की कोशिश कर रही है और इसके साथ ही उसकी सोच भी बदल रही है। हमें नहीं पता कि प्रस्तावित बिल में वास्तव में क्या है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए सरकार के बिल लाने के प्रस्ताव से एक प्रगतिशील क्रांति होगी। आशीष का मानना है कि उनकी राय पक्षपात वाली है क्योंकि वे एक क्रिप्टो कंपनी चलाते हैं। वे कहते हैं कि क्रिप्टो से फाइनेंस इंडस्ट्री और कंपनी में फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव हो सकता है। अभी तक हमें प्रस्तावित क्रिप्टोकरेंसी बिल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। सरकार यह समझती है कि क्रिप्टो इंडस्ट्री बहुत बड़ी हो सकती है। वे मुख्यतौर पर निवेशकों को नुकसान पहुंचाने की आशंका वाले भ्रामक विज्ञापनों जैसी चीजों से चिंतित हैं। हमें सरकार को क्रिप्टो के फायदे और नुकसान के बारे में बताने और इंडस्ट्री को खुला रखने के साथ इसके गलत इस्तेमाल से बचने में उनकी मदद करने की जरूरत है। क्रिप्टो को स्वीकृति मिलना ही हम सभी के लिए एक बड़ी उपलब्ध है। क्रिप्टो रेगुलेशन पर एक बिल लाना सरकार के लिए भी मुश्किल है क्योंकि हर दिन एक बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट सामने आता है। एक रेगुलेशन बनाने का मतलब ऐसा बिल लाना है जो न केवल अभी बल्कि पांच वर्ष बाद भी कारगर होगा। क्रिप्टो पर पूरी तरह बैन लगना टेक्नोलॉजी के नजरिए से काफी मुश्किल है क्योंकि प्रत्येक चीज आपस में जुड़ी है। एक्सचेंजों या क्रिप्टो को बैन करना समाधान नहीं है। इसके संचालन के लिए रूपरेखा बनाना एक आदर्श समाधान हो सकता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 11 Dec 2021 06:10 AM PST 12 दिसम्बर 2021, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |श्री गणेशाय नम: !! |
| Posted: 10 Dec 2021 09:35 PM PST
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| Posted: 10 Dec 2021 09:32 PM PST ![]() तुम्हारे कान बहरे हैंप्रगति के पाँव ठहरे हैं दिलों में घाव गहरे हैं सुना कब आपने,लगता तुम्हारे कान बहरे हैं आप जब से यहाँ आए झूठ के 'फ्लैग' फहरे हैं पढ़ाओ मत हमें ज्यादा पढ़ा हमने ककहरे हैं असल चेहरा नहीं दिखता लगे चेहरे पे चहरे हैं सूख कर हो गए काॅटा बदन सबके इकहरे हैं तुम्हारे राज में देखा सिरफ सपने सुनहरे हैं छांट दी डालियाँ, सारे पेड दिखते छरहरे हैं नहीं विश्वास है जय पे लगाए खूब पहरे हैं * -जयराम जय 'पर्णिका',बी-11/1,कृष्ण विहार,आ.वि. कल्याणपुर,कानपुर-208017 (उ०प्र०)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 10 Dec 2021 09:30 PM PST
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| Posted: 10 Dec 2021 08:04 AM PST
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| Posted: 10 Dec 2021 07:54 AM PST किसान आंदोलन का सुखद अंत(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) कहते हैं कि अंत भला तो सब भला- इसलिए लगभग एक साल से चल रहे किसान आंदोलन को अच्छे समझौते के साथ समाप्त कर दिया गया है और आंदोलनरत किसान अपने तम्बू उखाड़कर घर की तरफ रवाना होने लगे हैं। इस आंदोलन मंे लगभग 700 किसानों की जान चली गयी है। किसानों की प्रमुख मांगों पर भी सरकार से सहमति बन गयी है। मुख्य मांग तो तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की थी, जिसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता के नाम संदेश में पूरा किया, फिर संसद के दोनों सदनो से तीनों कानून वापस ले लिये गये हैं। अब इस प्रकार का कोई तनाव नहीं रहना चाहिए। किसान हमारे देश के अन्नदाता हैं और सरकार भी उनके हित की बात ही कहती है। एक-दूसरे को समझने मंे कहीं न कहीं भूल हो रही है। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर शुरू हुआ किसान आंदोलन एक साल 14 दिन बाद खत्म हो रहा है। इसके साथ किसान आंदोलन में शामिल पंजाब, हरियाणा और यूपी समेत अन्य प्रदेशों के लोग अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो जाएगे। इसके साथ 11 दिसंबर से दिल्ली के टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और यूपी-गाजीपुर बॉर्डर से गुजरने वालों को बड़ी राहत मिल जाएगी, जो कि ट्रैफिक जाम की वजह से अपने घर या फिर दफ्तर देर से पहुंच रहे थे। तीन नए कृषि कानूनों की वापसी सहित कुछ अन्य मांगों को लेकर पिछले साल 26 नवंबर को सिंघु, गाजीपुर और टीकर बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। एक साल से भी ज्यादा समय तक चले इस आंदोलन में किसानों ने एक तरह से बॉर्डर ही अपने घर बसा लिये थे। वहीं, तमाम सुविधाओं से लैस झोपड़ी और टेंटों में रहकर किसानों ने लंबा संघर्ष किया और अब कृषि कानूनों की वापसी होने के साथ ही किसानों की अन्य मांगों पर संयुक्त किसान मोर्चा और सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। किसानों की तरफ से सामान समेटना शुरू किया गया है। हालांकि अभी किसानों की एक साथ घर वापसी संभव नहीं है, क्योंकि पक्के तंबू और टेंटों को हटाने में अभी 4 से 5 दिन का समय लग सकता है। बहादुरगढ़ के श्रीराम शर्मा मेट्रो स्टेशन के नीचे 10 दिसम्बर को ही किसानों ने अपने टेंट और झोपड़ी हटानी शुरू कर दी। इसके अलावा भी कुछ अन्य जगह किसान झोपड़ी और टेंट हटाकर सामान ट्रैक्टर में डाल रहे थे। संयुक्त मोर्चा ने कहा है कि वे 11 दिसंबर को रवानगी करेंगे और 13 दिसंबर को जलियांवाला बाग में मत्था टेकेंगे। आंदोलन के कारण जिन लोगों को दिक्कत हुई उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगेंगे। दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहे आंदोलन को खत्म करने का ऐलान संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से होते ही टीकरी, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर जश्न शुरू हो गया था। बॉर्डर पर किसान खुशी में जमकर डांस कर रहे थे। यही नहीं, इस बीच किसानों ने टेंट और झोपड़ी सड़क से उखाड़कर सामान समेटना शुरू कर दिया। किसान अपना सामान ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में लाद रहे थे, ताकि घर वापसी की जा सके। 15 किमी. तक किसानों के टेंट और झोपड़ियां बनी हुई थीं। इनमें बहुत सी पक्की झोपड़ियां भी शामिल हैं। सिंघु बॉर्डर पर किसानों में जीत की खुशी बनी हुई है। पहले से ज्यादा भीड़ जमा है। किसानों ने खुशी-खुशी वापसी के लिए तैयारी शुरू कर दी। किसानों ने अपने साधन और साथियों को बुला लिया है, जो जीत का जश्न मना रहे हैं। इनमें से कुछ अपने तंबुओं को समेटने में लग गए हैं। खासकर पंजाब के किसानों ने अपना सामान पैक कर लिया है। वहीं, दिल्ली और यूपी के गाजीपुर बॉर्डर से भी किसानों के जश्न के वीडियो सामने आए हैं। यहां पर भी टेंट और तंबू उखाड़ने का काम शुरू हो गया है। दूसरी तरफ महिलाओं की संख्या बॉर्डर पर बहुत कम हो गई है। रोजाना होने वाली सभा और मंच 9 दिसम्बर को तो सजा, लेकिन अगले दिन बॉर्डर पर सभा नहीं हुई। किसानों का कहना है कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद एमएसपी पर कमेटी बनाने और एक साल में दर्ज हुए मुकदमों पर लिखित आश्वासन पर सहमति बन गई है। वहीं, किसानों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी गई है, जो किसानों के जत्थे के साथ-साथ चलेगी। एक साल से टिकरी बॉर्डर बंद होने से स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा है। रास्तों को खुलवाने के लिए उद्योगपतियों को मानव अधिकार आयोग से लेकर कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा, लेकिन अब आंदोलन खत्म हो रहा था। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ उद्योगपतियों को भी फिर से काम पटरी पर लौटने की उम्मीद है। हालांकि पूरी तरह रास्ता साफ होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। किसानों की तरफ से कहा गया है कि वह सड़क को पूरी तरह साफ करके ही घर लौटेंगे। जबकि ऐसा ही हाल सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर का था। अब तीनों बॉर्डर के लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिल जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा किसानों की अन्य मांगें मानने के बाद एक साल से चल रहा किसान आंदोलन खत्म हो गया है। इस बीच हरियाणा में जींद के किसान नेताओं ने घोषणा की कि अब वे भाजपा-जजपा नेताओं का बहिष्कार नहीं करेंगे और दोनों दलों के नेता गांवों में आकर जनसभा कर सकते हैं। तीन कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद भी किसानों ने सरकार के सामने नई मांगें रखी थीं। इनमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लेने, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा, पराली जलाने पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल पर चर्चा की बात शामिल थी। बता दें कि आंदोलन करने वाले 40 किसान संगठनों का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से अधिक समय से जारी प्रदर्शन को स्थगित करने का फैसला किया है। इसके साथ घोषणा की है कि किसान 11 दिसंबर को दिल्ली की सीमाओं वाले विरोध स्थलों से घर लौट जाएंगे। जींद की महिला किसान नेता सिक्किम देवी ने कहा कि किसानों की जीत हुई है और जब दिल्ली सीमा से हरियाणा में किसान आएंगे तो उनका भव्य स्वागत किया जाएगा और जल्द ही टोल को भी खाली किया जाएगा। इसके साथ उन्होंने कहा, 'अब हम भाजपा और जजपा के नेताओं का बहिष्कार नही करेंगे। अब वे गांव में आ जा सकते हैं और कोई भी रैली या जनसभा कर सकते है। किसान नेता आजाद पालवां का कहना था कि उचाना में राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों की आखरी ट्रॉली नहीं गुजरने तक लंगर की सेवा सुचारू रूप से चलती रहेगी। इसके साथ उन्होंने कहा कि खटकड़ टोल प्लाजा पर चल रहा धरना भी 11 दिसम्बर को खत्म कर दिया जाएगा। वहीं, किसान संगठन के नेताओं ने यह भी कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं से वापस आने वाले किसानों का सम्मान करने की तैयारी भी कर रहे हैं। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| सरयू परियोजना के चालीस बनाम चार साल Posted: 10 Dec 2021 07:50 AM PST सरयू परियोजना के चालीस बनाम चार साल(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) वाण सागर सहित दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण की गई। इस क्रम में एक नाम और जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरयू नहर सिंचाई योजना का लोकर्पण करेंगे। चालीस वर्षों में इस पूरी परियोजना का करीब मात्र बावन प्रतिशत कार्य ही किया गया था जबकि विगत पांच वर्षों के बीच सरयू नहर परियोजना का शेष अड़तालीस प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया। भारतीय राजनीति में दशक बनाम वर्ष का नारा पुराना है लेकिन इस बार योगी सरकार ने तथ्यों व प्रमाणों के आधार पर इस मुद्दे को उठाया है। मेडिकल कॉलेज,एयर पोर्ट एक्सप्रेस वे आदि पर पर सत्तर वर्ष के मुकाबले पांच वर्ष की उपलब्धि के आंकड़े दिए गए। वाण सागर सहित दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण की गई। इस क्रम में एक नाम और जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरयू नहर सिंचाई योजना का लोकर्पण करेंगे। चालीस वर्षों में इस पूरी परियोजना का करीब मात्र बावन प्रतिशत कार्य ही किया गया था जबकि विगत पांच वर्षों के बीच सरयू नहर परियोजना का शेष अड़तालीस प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया। नौ जनपदों के बीच साढ़े छह सौ किलोमीटर से अधिक लम्बी नहर प्रणाली बनायी गयी है। घाघरा नदी को सरयू नदी से सरयू को, राप्ती नदी से राप्ती को बाणगंगा नदी से, बाणगंगा को रोहिन नदी के साथ जोड़कर पूरी नहर प्रणाली विकसित की गयी है। यह परियोजना नदी जोड़ो अभियान का बेहतरीन उदाहरण है। परियोजना से प्रदेश के नौ जनपदों के चैदह लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल को सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी। इससे लगभग तीस लाख किसान लाभान्वित होंगे। केंद्र व उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकारों को दशकों से लंबित अनेक परियोजनाओं को पूर्ण करने का श्रेय प्राप्त है। इस अवधि में सिंचाई योजना के माध्यम से भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों को व्यापक रूप से धनराशि उपलब्ध कराई गई। इससे सिंचाई की बेहतर सुविधा सृजित करने में और तेजी आयी है। वर्तमान राज्य सरकार ने इसका भरपूर लाभ उठाया है। इसी का परिणाम है कि केन्द्र सरकार के सहयोग से सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना अब बनकर पूरी हो चुकी है। नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्यारह दिसम्बर को जनपद बलरामपुर में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के लोकार्पण का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सरयू बैराज से प्रारम्भ होती है। यह परियोजना जनपद बहराइच, श्रावस्ती, गोण्डा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर तथा महराजगंज तक नौ जनपदों को जोड़ती है। सरयू नहर की योजना वर्ष 1972 में बन गयी थी। वर्ष 1978 में इस पर कार्य प्रारम्भ हुआ। प्रारम्भिक रूप से देवीपाटन मण्डल के तीन जनपदों में यह कार्य किया जाना था। 1982 में इस परियोजना का विस्तार नौ जनपदों तक कर दिया गया। लगभग चालीस वर्षों में इस परियोजना का आधा अधूरा कार्य किया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे लोकार्पण की स्थिति तक पहुंचाया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का लाभ प्राप्त होने से इस क्षेत्र के किसानों की आमदनी में कई गुना वृद्धि होगी। उनके जीवन में खुशहाली आएगी। प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी दोगुना करने का संकल्प लिया था। उस संकल्प को सिद्ध करने की दृष्टि से यह परियोजना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। योगी आदित्यनाथ ने सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से सम्बन्धित मॉडल का भी अवलोकन किया। सिंचाई सुविधाओं के साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में तीर्थाटन व पर्यटन विकास विकास की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समग्र विकास की अवधारणा में अनेक विषयों को शामिल किया। प्रयागराज में भव्य दिव्य कुंभ के आयोजन से सरकार ने दुनिया को एक सन्देश दिया था। इसके साथ ही काशी अयोध्या मथुरा आदि स्थानों का विकास किया जा रहा है। काशी में श्री विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन तेरह दिसंबर को होगा। विंध्याचल कॉरिडोर का निर्माण प्रगति पर है। प्रदेश सरकार ने ब्रज क्षेत्र की धरोहरों की पुनर्प्रतिष्ठा हेतु उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन कराया जा रहा है। सरकार ने मथुरा वृन्दावन को नगर निगम का दर्जा प्रदान किया है। वृन्दावन बरसाना, नन्दगांव गोवर्धन, राधाकुण्ड गोकुल तथा बलदेव को तीर्थ स्थल घोषित किया है। योगी आदित्यनाथ ने मथुरा की मांट तहसील में दो सौ करोड़ रुपये से अधिक लागत की करीब दो सौ विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रंगोत्सव कृष्णोत्सव एवं वैष्णव बैठक के आयोजन पूरी दुनिया में ब्रज संस्कृति को पुष्पित एवं पल्वित कर रहे हैं। पांच हजार वर्षों से यह क्षेत्र धर्म, संस्कृति अध्यात्म तथा हर्ष एवं उल्लास के माहौल के लिए जाना जाता रहा है। मथुरा से प्रदेश के विभिन्न जनपद अच्छी सड़कों के माध्यम से जुड़ चुके हैं। प्रदेश में विभिन्न एक्सप्रेस वे, हाई वे,सड़कों के निर्माण, मेट्रो एवं एयरपोर्ट के विकास के साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को विकसित करते हुए आधारभूत अवसंरचना को मजबूत किया गया है। लोगों की आस्था के अनुरूप अयोध्या में श्रीराम के भव्य मन्दिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। प्रदेश के सभी क्षेत्रों में बिना भेदभाव के निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाले निःशुल्क खाद्यान्न को आगामी होली पर्व तक बढ़ा दिया है। होली पर रंगोत्सव का कार्यक्रम बरसाना में होगा, तब तक हम अन्न देंगे। कोरोना अगर तब तक समाप्त नहीं होगा, तो उसके बाद भी अन्न योजना का लाभ गरीबों को देने का कार्य सरकार करेगी। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर 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| प्रियंका का महिला ट्रम्प कार्ड Posted: 10 Dec 2021 07:10 AM PST प्रियंका का महिला ट्रम्प कार्ड(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा देने वाले कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बार उत्तर प्रदेश मंे महिलाओं के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया है। प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भले ही यह कहते हैं कि पार्टी को इस बार के चुनाव में प्रत्याशी तक नहीं मिल रहे हैं लेकिन प्रियंका का महिला कार्ड चर्चा में है। विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने छात्राओं को स्कूटी समेत कई आश्वासन दिये हैं। वे कांग्रेस को मुकाबले मंे लाना चाहती हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महिलाओं के लिए पार्टी का अलग घोषणापत्र जारी किया। कांग्रेस ने इस घोषणापत्र का नाम 'शक्ति विधान' रखा है। कांग्रेस ने इस घोषणापत्र में 12वीं में पढ़ने वाली प्रत्येक छात्रा को स्मार्टफोन और ग्रेजुएशन कर रही लड़कियों को फ्री स्कूटी देने जैसे कई बड़े वादे किए। कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की घोषणा की है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के ही चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने इसके लिए 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' का नारा भी दिया है। प्रियंका गांधी ने महिलाओं के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करते हुए कहा, 'हम राजनीति में 40 फीसद महिलाओं को हिस्सेदारी देंगे। यूपी में कामकाजी महिलाओं की 9.4 फीसद भागीदारी है। हम 20 लाख में से 8 लाख महिलाओं को सरकारी नौकरी देंगे। 50 लाख तक का व्यवसाय करने वाली महिलाओं को टैक्स में छूट मिलेगी। आंगनबाड़ी और आशा बहुओं को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देंगे। 50 फीसद राशन की दुकानों का प्रबंध महिलाओं को मिलेगा। 10़2 छात्राओं को स्मार्ट फोन दिया जाएगा और स्नातक में पढ़ने वाली छात्राओं को फ्री स्कूटी दी जाएगी।' इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया, 'यूपी में वीरांगनाओ के नाम पर 75 प्रतिशत दक्षता विद्यालय बनेंगे। सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिला पंचायत का निर्माण होगा। 1 हजार रुपये प्रति माह वृद्धा-विधवा पेंशन मिलेगी। गरीब परिवारों को मुफ्त इंटरनेट मिलेगा। हर बच्ची के पैदा होने पर एफडी करवाई जाएगी।' प्रियंका गांधी ने घोषणापत्र जारी करते हुए कहा, 'महिलाएं अब अन्याय सहने को तैयार नहीं हैं। इसलिए हमने महिला घोषणापत्र बनाया है। इसके छह हिस्से हैं। स्वाभिमान, स्वावलंबन, शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा और सेहत।' उन्होंने कहा कि ये घोषणापत्र प्रदेश की महिलाओं की आशाओं-आकांक्षाओं की सामूहिक अभिव्यक्ति है जो वर्तमान सरकार में अभूतपूर्व हिंसा, शोषण व सरकार की महिला विरोधी विचारधारा का सामना कर रही हैं। प्रियंका गांधी ने इससे पहले ट्वीट कर कहा, 'यह महिला घोषणा पत्र (शक्ति विधान) महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की भूमिका के लिए मील का पत्थर बनेगा। पिछले कई महीने में यूपी कांग्रेस ने प्रदेश भर की महिलाओं से सलाह-मशविरा किया और उनके लिए एक नई राह बनाने का खाका तैयार किया। शक्ति विधान गृहणियों, कॉलेज की लड़कियों, आशा व आंगनबाड़ी बहनों, स्वयं-सहायता समूह की बहनों, शिक्षिकाओं और प्रोफेशनल महिलाओं की आवाज का प्रतिबिंब है।' प्रियंका गांधी राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस को मजबूत कर रही हैं। इसी सिलसिले में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने छत्तीसगढ़ के कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुलाया। बताया जा रहा है कि इन विधायकों को संगठन और चुनाव को लेकर बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है। आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में इन विधायकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है। प्रियंका गांधी के बुलावे पर वरिष्ठ विधायक कुलदीप जुनेजा, विधायक सत्यनारायण शर्मा, विधायक अरुण वोरा दिल्ली गए हैं। इनके साथ ही विधायक रामकुमार साहू, अम्बिका सिंहदेव, रेखचन्द जैन, राजमन बेन्जाम, कुंवर सिंह निषाद समेत कई अन्य नेता दिल्ली पहुंचे। दिल्ली रवाना होने से पहले कुलदीप जुनेजा ने कहा था बैठक में उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर जिम्मेदारियां तय की गयीं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी से मिली जानकारी के मुताबिक एमएलए सत्यनारायण शर्मा, भुवनेश्वर सिंह बघेल, इंद्रशाह मांडवी, कुलदीप जुनेजा, राजमन बेंजाम, रेखचंद जैन, लक्ष्मी ध्रुव, विनोद चन्द्राकर, गुलाब केमरो, रामकुमार यादव, अरुण वोरा को दिल्ली बुलाया गया है। इनके अलावा संगठन के नेता लक्ष्मण पटेल, मोतीलाल देवांगन, प्रतिमा चंद्राकर, अंबिका मरकाम, प्रेमचंद जायस, चेतराम साहू, चुन्नीलाल साहू, जनकराम वर्मा को दिल्ली बुलाया गया था। प्रियंका ने महिलाओं को मुख्य रूप से साधा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीजेपी विधायक संगीत सोम के गनर की दबंगई का मामला सामने आया है। सिपाही सत्येंद्र ने बेहद मामूली विवाद में एक महिला को जमकर पीटा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें सत्येंद उस महिला को एक के बाद एक कई थप्पड़ लगाते दिख रहा है। यह मामला मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के राजनगर कॉलोनी का है, जहां सिपाही सत्येंद्र अपनी फैमिली के साथ किराए पर रहते हैं। उसी कॉलोनी में कई परिवार रहते हैं, जिसमें से सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिला अपने घर के सामने वाले प्लॉट में कपड़े सुखाती हैं। बताया जाता है कि इसी कपड़े सुखाने की बात को लेकर विवाद हो गया और सिपाही ने महिला के साथ पहले गाली गलौज की और फिर जब विवाद बढ़ गया तो मारपीट शुरू कर दी। पुलिस की वर्दी और विधायक की हनक के आगे इलाके में किसी के बोलने की हिम्मत नहीं हुई। मौके पर मौजूद एक शख्स ने सिपाही की करतूत का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वहीं अब महिला अपनी तहरीर लेकर थाने पहुंच गई। हालांकि इस मामले में पुलिसवाले भी सिपाही का साथ देते दिखे और एक क्रॉस तहरीर सिपाही से भी ले ली। अब पुलिस ने दोनों मामले की जांच की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। प्रियंका ने कांग्रेसियों ने ऐसे मामलों मंे तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा है। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रतापगढ़ में माहौल पूरी तरह से गर्म है। सभी राजनीतिक पार्टियां जनता के बीच जाकर उनको अपने पाले में करने के लिए जुटी हैं। इसी बीच कुंडा के विधायक व जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप उर्फ राजा भैया की पार्टी को चुनाव आयोग ने स्थाई चुनाव चिह्न आवंटित किया है। राजा भैया की पार्टी का नया चुनाव चिह्न अब 'आरी' होगा। इससे पहले राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल का अस्थाई चुनाव निशान फुटबॉल खेलता हुआ खिलाड़ी था। चुनाव आयोग ने जैसे ही पार्टी का चुनाव सिबल आवंटित किया, वैसे ही राजा भैया ने ट्वीट करते हुए खुशी जताई। उन्होंने लिखा, 'आप सभी साथियों को ये बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि चुनाव आयोग द्वारा जनसत्ता दल को 'आरी' चुनाव निशान आवंटित हुआ है।' जानकारी के मुताबिक राजा भैया ने चुनाव आयोग को पहली पसंद के रूप चुनाव निशान 'आरी' आवंटित करने की माग की थी। इन छोेटे-छोटे दलों का बड़ा मोर्चा भी बन रहा है लेकिन प्रियंका कांग्रेस की अलग पहचान रखना चाहती हैं। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| 110 अफगान नागरिकों को भारत लाया गया Posted: 10 Dec 2021 06:46 AM PST 110 अफगान नागरिकों को भारत लाया गयानई दिल्ली। काबुल से हिंदू और सिख समुदायों के अफगान नागरिकों सहित लगभग 110 लोगों को एक विशेष विमान से भारत लाया जा रहा है। यह विशेष विमान इनको लेकर शुक्रवार दोपहर दिल्ली पहुंचा। इनमें करीब 102 अफगान हिन्दू, सिख और करीब 14 भारतीय शामिल हैं। वापसी में यह विमान दिल्ली से करीब 90 अफगान नागरिकों और दवा जैसी कुछ मानवीय जरूरत की चीज लेकर जाएगा। इंडिया वल्र्ड फोरम के एक बयान के मुताबिक, वहां फंसे भारतीय नागरिकों और हिंदू और सिख समुदाय के दुखी अफगान नागरिकों को वहां से लाया जा रहा है। अफगानिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारों से तीन श्री गुरु ग्रंथ साहिब और प्राचीन 5 वीं शताब्दी के असमाई मंदिर, काबुल से रामायण, महाभारत और भगवद गीता सहित हिंदू धार्मिक ग्रंथों को भी भारत लाया गया है। इंडिया वल्र्ड फोरम ने कहा कि उनके आने के बाद अफगान नागरिकों का सोबती फाउंडेशन द्वारा पुनर्वास किया जाएगा। बयान में कहा गया है, काबुल के शोर बाजार में स्थित गुरुद्वारा गुरु हर राय में आतंकवादी हमले के दौरान मारे गए स्थानीय सुरक्षा गार्ड महरम अली के परिवार को भी एयरलिफ्ट किया जा रहा है और उनका भी सोबती फाउंडेशन द्वारा पुनर्वास किया जाएगा। काबुल में तालिबान लड़ाकों के कब्जे के बाद से भारत ने अफगानिस्तान से 565 फंसे हुए लोगों को निकाला है। यह जानकारी सरकार ने पिछले सप्ताह लोकसभा में दी थी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| इस्लामाबाद कान्क्लेव मंे इमरान ने संघ की आलोचना की Posted: 10 Dec 2021 06:29 AM PST इस्लामाबाद कान्क्लेव मंे इमरान ने संघ की आलोचना कीइस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर से भारत के खिलाफ बयानबाजी की है। इमरान खान ने इस्लामाबाद कॉन्क्लेव 2021 को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेक संघ जो कि ब्राह्मणों पर आधारित विचारधारा है, वह भारत के 50-60 करोड़ अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है। इतना ही नहीं, इमरान खान ने कश्मीर को दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बता दिया। इमरान खान ने अपने भाषण में क्षेत्रीय स्थिति पर कहा कि पूरे दक्षिण एशिया को कश्मीर के मुद्दे ने बंधक बनाकर रखा हुआ है। मुझे बहुत अफसोस से कहना पड़ता है कि हमने भारत सरकार से संपर्क की पूरी कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। हमने पीएम मोदी को फोन भी किए, लेकिन हमें आहिस्ता-आहिस्ता अहसास हुआ कि इसे हमारी कमजोरी समझा जा रहा था। पाकिस्तान के पीएम ने कहा- 'दुर्भाग्य से हम एक सामान्य भारत सरकार के साथ नहीं, बल्कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की विचारधारा के साथ बातचीत कर रहे थे। इस विचारधारा के साथ बातचीत करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने आगे कहा कि जिसने भी आरएसएस की विचारधारा पढ़ ली है, उनके संस्थापक के बयानों को देख लें, तो ऐसे लोगों के साथ मुश्किल है कि वे हमारे साथ सही मायनों में बातचीत करते।' हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जो बाइडेन ने अपने भाषण मंे लिया महात्मा गांधी का नाम Posted: 10 Dec 2021 06:27 AM PST जो बाइडेन ने अपने भाषण मंे लिया महात्मा गांधी का नामवॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने समिट फॉर डेमोक्रेसी में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और कांग्रेसी जॉन लुईस द्वारा किए गए कामों का जिक्र करते हुए महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला का नाम लिया। उन्होंने कहा कि जॉन लुईस दुनिया भर में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को सामने लाने का काम किया। इसके लिए उन्होंने गांधी और मंडेला से प्रेरणा ली। जो बाइडेन ने कहा, 'लोकतंत्र सभी के लिए एक समान नहीं होता है। हम हर चीज पर सहमत नहीं होते हैं, लेकिन आज हम जो विकल्प चुनने जा रहे हैं, वे मेरे तरीके से आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे साझा भविष्य के पाठ्यक्रम को परिभाषित करने वाले हैं।' उन्होंने कहा, 'कांग्रेसी जॉन लुईस दुनिया भर में अमेरिकी लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के एक महान चैंपियन थे। उन्होंने गांधी और मंडेला जैसे अन्य महान नेताओं से सीख और प्रेरणा ली। दुनिया को अलविदा कहने से पहले उन्होंने हमारे देश को याद दिलाया कि लोकतंत्र एक राज्य नहीं है, यह एक काम करने का तरीका है।' बाइडेन ने कहा कि लोकतंत्रों को उन मूल्यों के लिए खड़ा होना होगा जो 'हमें' परिभाषित करते हैं। उन्होंने कहा, 'हमें हर व्यक्ति के लिए निहित मानवाधिकारों के लिए न्याय और कानून के शासन के लिए स्वतंत्र भाषण, स्वतंत्र सभा और स्वतंत्र प्रेस, धर्म की स्वतंत्रता के लिए खड़ा होना होगा।' हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| बोरिस जानसन सातवें बच्चे के बने पिता Posted: 10 Dec 2021 06:24 AM PST बोरिस जानसन सातवें बच्चे के बने पितालंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 57 साल की उम्र में सातवीं बार पिता बने हैं। उनकी पत्नी कैरी जॉनसन ने गुरुवार को एक बच्ची को जन्म दिया। मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। उनके प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की पत्नी ने लंदन हॉस्पिटल में गुरुवार सुबह एक बच्ची को जन्म दिया है। दोनों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा की योग्य टीम को उनकी देखभाल और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है। इस साल की शुरुआत में कैरी जॉनसन का गर्भपात हो गया था। बोरिस जॉनसन ने इस साल मई में वेस्टमिंस्टर कैथेड्रल में कैरी जॉनसन (33) से बेहद साधारण तरीके से शादी की थी। इससे पहले कैरी साइमंड्स बोरिस जॉनसन की पत्नी थीं। यह बोरिस जॉनसन की तीसरी शादी है। बोरिस जॉनसन की पूर्व पत्नी भारतीय मूल की मरीना व्हीलर से तलाक के बाद यह उनकी तीसरी शादी है। मरीना से उनके चार बच्चे हैं। बोरिस जॉनसन का उनकी आर्ट कंसल्टेंट हेलेन मैकिनटायर से भी अफेयर था, जिससे उन्हें साल 2009 में एक बच्चा पैदा हुआ था। उनकी पहली पत्नी एलेग्रा मोस्टिन-ओवेन से उन्हें कोई संतान नहीं हुई थी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गरिमा और सम्मान का द्योतक मानवाधिकार Posted: 10 Dec 2021 05:19 AM PST गरिमा और सम्मान का द्योतक मानवाधिकारजहानाबाद । मानव के अधिकारों की रक्षा करने और सशक्त बनाने के लिए विश्व में प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनुमति के बाद सन 1948 में प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 2021 की थीम 'असमानताओं को कम करना और मानव अधिकारों को आगे बढ़ाना' रखी गई है । सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर मानवाधिकार दिवस संगोष्टी में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि मानव की गरिमा और सम्मान का संरक्षण का द्योतक मानवाधिकार है । संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव अधिकारों की पहली वैश्विक घोषणाओं में 4 दिसंबर 1950 को, मानवाधिकार दिवस का औपचारिक उत्सव महासभा की 317वीं पूर्ण बैठक में महासभा ने प्रस्ताव 423 (वी) की घोषणा की थी । शिह मिंग ने 1979 ई. में ताइवान के काऊशुंग में मानवाधिकार अभियान का आयोजन के कारण काऊशुंग घटना हुई जिसमें सत्तारूढ़ कुओमिन्तांग पार्टी के राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी के तीन दौर और उनके कारावास के बाद नकली परीक्षण शामिल थे। 1983 में, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति राउल अल्फोन्सिन ने 10 दिसंबर को पद संभालने का फैसला करने पर सैन्य तानाशाही के अंत को चिह्नित करता था । तानाशाही के दौरान हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित था। 2004 में, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस को अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी और नैतिक संघ द्वारा मानवाधिकार उत्सव के आधिकारिक दिन के रूप में स्वीकृत किया गया था। मानव की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और गरिमा को संरक्षात्मक का संकल्प कारने का रूप मानवाधिकार द8वीएएस है । मानवाधिकार संगोष्टी में संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , उर्वशी , प्रियंका ने मनावधिकार की चर्चा की वही दिव्य रश्मि के संपादक राकेश दत्त मिश्र ने मानवाधिकार दिवस की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि मानवोचित अभिव्यक्ति एवं गरिमा का संरक्षण मानवाधिकार है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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