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Saturday, December 25, 2021

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मुख्यमंत्री ने गोपालगंज, सीवान एवं सारण जिले के समाज सुधार अभियान की बैठक कर समीक्षा की

Posted: 24 Dec 2021 07:16 AM PST

मुख्यमंत्री ने गोपालगंज, सीवान एवं सारण जिले के समाज सुधार अभियान की बैठक कर समीक्षा की

पटना, 24 दिसम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार, गोपालगंज में आज समाज सुधार अभियान की समीक्षात्मक बैठक हुई। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष आयुक्त सारण प्रमण्डल छपरा ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से गोपालगंज, सीवान एवं सारण जिले में समाज सुधार अभियान की दिशा में की गई कार्रवाई के संबंध में अद्यतन स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। प्रेजेंटेशन के जरिये मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अंतर्गत वाहनों की नीलामी, उत्पाद एवं पुलिस के अधीन जब्त शराब का विनष्टीकरण, नीरा उत्पादन, नशा मुक्ति केंद्र, सघन नदी गश्ती, जमानत प्राप्त अभियुक्तों के विरुद्ध कार्रवाई, उत्पाद वादों की अद्यतन स्थिति आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन कार्यक्रमों से संबंधित प्रतिवेदन में बाल विवाह की स्थिति, दहेज प्रथा की स्थिति, दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज कांडों की विवरणी, जन जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, अन्य हितधारकों का उन्मुखीकरण, गृह विभाग से संबंधित प्रतिवेदन के अंतर्गत भूमि विवाद का समाधान थाना/ अनुमंडल एवं जिला स्तर पर, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के वादों के निष्पादन की स्थिति, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के कांडों में मुआवजा के संवितरण की स्थिति, 1 जनवरी से 30 नवंबर 2021 तक लंबित पुलिस वादों का विवरण, सतत् जीविकोपार्जन योजना से संबंधित प्रतिवेदन, हर घर नल का जल योजना की स्थिति, मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना का प्रगति प्रतिवेदन, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान-2 के तहत निर्मित शौचालय संबंधित प्रतिवेदन, खरीफ विपणन मौसम 2021-22 के अंतर्गत धान अधिप्राप्ति का प्रतिवेदन, 2021 में बाढ़ के दौरान की गई कार्रवाई, कोविड-19 संक्रमण के आलोक में की गई कार्रवाई, कृषि इनपुट अनुदान से संबंधित स्थिति, मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना का प्रतिवेदन आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।
समाज सुधार अभियान की समीक्षा बैठक के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मद्य निषेध विभाग एवं पुलिस के द्वारा जब्त शराब का विनष्टीकरण, वाहनों की नीलामी और लंबित वादों का निपटारे में तेजी लायें, इसमें विलंब नहीं करें। निर्धारित समय के अंदर चार्जशीट दायर करें ताकि दोषियों को न्यायालय से सख्त सजा दिलवायी जा सके। उन्होंने कहा कि सभी पुलिस अधीक्षक लंबित मामलों के संबंध में थाना प्रभारियों के साथ मीटिंग कर उन्हें गाइड करें ताकि ससमय मामलों का निष्पादन हो सके। पुलिस के दोनों कामों अनुसंधान और लाॅ एंड ऑर्डर की एसेस्मेंट कर उसकी सतत् मॉनिटरिंग करें। इस काम में लगे कर्मियों को दूसरे कार्यों में नहीं लगायें। माह में एक बार होने वाली मीटिंग में थानों के सभी कार्यों की समीक्षा करें। बिहार में आबादी का घनत्व सबसे अधिक है। बिहार में एक वर्ग किलोमीटर में 1106 लोग रहते हैं जबकि देश का प्रति वर्ग किलोमीटर आबादी का औसत घनत्व 370 के करीब है इसलिए प्रत्येक थाना क्षेत्र की आबादी को ध्यान में रखते हुए पूरी सतर्कता एवं निष्पक्षता के साथ कार्य करने की जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने बिहार के 3 जिलों में नीरा का उत्पादन का कार्य बहुत अच्छे ढ़ंग से शुरु कराया था। नीरा का उत्पादन करने पर आमदनी में चार गुणा की बढ़ोत्तरी होगी और ताड़ी के व्यवसाय से कोई नहीं जुड़ेगा। नीरा स्वास्थ्यवर्द्धक, उपयोगी एवं स्वादिष्ट पेय पदार्थ है। नीरा उत्पादन के कार्य पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों जिलों के चेक पोस्ट पर सघन एवं निरंतर जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि बाहर से शराब की आवक बिहार में नहीं हो सके। इस पर सतत् निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि कोरोना को देखते हुए शादी समारोह की अनुमति लेने के लिए जो फॉर्मेट तय किया गया है उसमें यह भी कॉलम जोड़ा जाए कि यह शादी समारोह दहेज मुक्त, बाल विवाह रहित और नशामुक्त आयोजन होगी। ऐसा होने पर ही शादी समारोह की अनुमति दें। इसे पूरे बिहार में लागू करें। इससे लोगों पर काफी प्रभाव पड़ेगा। कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका भी जतायी जा रही है इसलिए सभी लोगों को सजग रहने की जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कम उम्र में बच्चियों की शादी करने वालों पर नजर रखें और इसके लिए आशा, आंगनबाड़ी, चैकीदारों और नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें। पंचायत चुनाव संपन्न हो चुका है, उसमें जो ट्रेनिंग दी जाएगी उस प्रशिक्षण में भी इसको शामिल करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि बिहार में भूमि विवाद के कारण अधिकांश आपराधिक घटनाएं होती है। 60 प्रतिशत हत्या की घटनाएं भूमि विवाद के कारण होती है। भूमि विवाद के समाधान हेतु थाना, अनुमंडल एवं जिला स्तर पर निर्धारित तिथि पर होनेवाली मीटिंग न करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 से ही हमलोगों का इस पर जोर रहा है कि बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति में सभी प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध हो, कोई प्रभावित परिवार छूटे नहीं। उन्होंने कहा कि जलजमाव के कारण तीनों जिलों में प्रभावित कृषि योग्य भूमि का सर्वे करायें। इस संबंध में तीनों जिलों के जिलाधिकारी, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग कर विस्तृत चर्चा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों जिलों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पूरी गंभीरता से लोगों की समस्याओं के निपटारे के साथ-साथ समाज सुधार अभियान की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि गोपालगंज जिले में नकली शराब मिलने की शिकायतें आने पर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है। इसको लेकर विशेष चैकसी बरतने की जरुरत है।
समीक्षा बैठक में गोपालगंज, सीवान एवं सारण जिले के विधायक एवं विधान पार्षदगणों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं रखीं, जिसका त्वरित निष्पादन करने का मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया।
समीक्षा बैठक में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, कृषि मंत्री सह गोपालगंज जिले के प्रभारी मंत्री श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डे, पर्यटन मंत्री सह सीवान जिले के प्रभारी मंत्री श्री नारायण प्रसाद, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री सह सारण जिले के प्रभारी मंत्री श्री सुमित कुमार, खान एवं भूतत्व मंत्री श्री जनक राम, सांसद श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, सांसद डॉ0 आलोक कुमार सुमन, सांसद श्रीमती कविता सिंह, गोपालगंज, सीवान एवं सारण जिले के विधायक एवं विधान पार्षदगण, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक श्री एस०के० सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, प्रमंडलीय आयुक्त सारण श्रीमती पूनम, गोपालगंज, सिवान एवं सारण के जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।
बैठक की समाप्ति के पश्चात् गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया।

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गोपालगंज में समाज सुधार अभियान में हुए शामिल मुख्यमंत्री

Posted: 24 Dec 2021 07:12 AM PST

गोपालगंज में समाज सुधार अभियान में हुए शामिल मुख्यमंत्री

  • शराबबंदी के पक्ष में और बाल-विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान चलाते रहिए- मुख्यमंत्री
  • विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, राज्य और देष आगे बढ़ेगा- मुख्यमंत्री

पटना, 24 दिसम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज गोपालगंज के मिंज स्टेडियम में बिहार में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्ति हेतु समाज सुधार अभियान का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को लेकर बने मंच पर जिलाधिकारी गोपालगंज ने पौधा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल के समीप विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी एवं फोटो गैलरी का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों ने बढ़ते कदम-बढ़ते कदम गीत का गायन किया। एस0एस0 बालिका उच्च विद्यालय गोपालगंज की छात्राओं द्वारा स्वागत गान किया गया। कार्यक्रम के अंत में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी० एवं जीविका दीदी ने भी मुख्यमंत्री को मोमेंटो प्रदान कर उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आप सबों की उपस्थिति के लिए धन्यवाद देता हूं। समाज सुधार अभियान चलाया जा रहा है। छह दीदियों ने अपने अनुभव को साझा किया। शराबबंदी, बाल विवाह, दहेज प्रथा को लेकर समाज सुधार अभियान जो चलाया जा रहा है, इसमें हमलोग सारी चीजों को लेकर चल रहे हैं। महिलाओं की मांग पर शराबबंदी लागू की गई। जननायक कर्पूरी ठाकुर जी जब वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने शराबंदी लागू किया था लेकिन दो वर्ष बाद फिर से शुरु कर दिया गया। हमारे मन में शराबबंदी की बात शुरु से थी लेकिन हमारे मन में यह आशंका थी कि शराबबंदी लागू कर पाएंगे कि नहीं। विकास के साथ-साथ हमलोग समाज सुधार के लिए भी काम कर रहे हैं। आपको पता है हमलोग शराब को लेकर वर्ष 2011 से अभियान चला रहे हैं। इसको क्रियान्वित करने को लेकर मेरे मन में शंका थी, लेकिन जब वर्ष 2015 में महिलाओं के एक सम्मेलन में मैं गया हुआ था, महिलाओं के विकास की बातें हो रही थीं। जुलाई महीना था, उसके तीन माह बाद चुनाव होना था। जैसे ही हम बोलकर बैठे कि पीछे से महिलाओं ने आवाज लगायी शराब बंद कराईये। उसके बाद वापस मैं माइक पर आया और कहा कि अगली बार काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू करुंगा। चुनाव में जब हमलोगों को फिर से काम करने का मौका मिला तो सबसे पहले हमने 26 नवंबर को बैठक की और सब बातों को तय किया। विधानसभा और विधान परिषद के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से कानून पास हुआ। सभी सदस्यों ने इसके पक्ष में शपथ ली। 1 अप्रैल 2016 को पहले ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों में विदेशी शराब बंद नहीं की गयी थी। शहरों में महिलाओं, लड़कियां एवं पुरुषों ने शराब के आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया और दुकानों को खोलने नहीं दिया। उसके बाद हमने निर्णय लिया और 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। वर्ष 2016 में सभी नौ प्रमण्डलों में महिलाओं एवं जीविका दीदियों के साथ हमने बैठक की। निरंतर यह अभियान चल रहा है। एक जीविका समूह की महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले मेरे पति काम से लौटते थे तो दारू पीकर आते थे, परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में भी वे खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो घर आते समय वे बाजार से सब्जी, फल लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं। अब देखने में अच्छे लगते हैं, यह कितना बड़ा परिवर्तन हुआ है। समाज में कुछ लोग गड़बड़ करने वाले होते हैं। किसी मजहब, धर्म के मानने वाले लोग हों, कितना भी अच्छा काम कीजिएगा कुछ लोग तो गड़बड़ी करेंगे ही। शराबबंदी का कितना असर पड़ा है, आप खुद ही देख लीजिए। गड़बड़ शराब पीकर इसी गोपालगंज में लोग मरे थे। 9 गड़बड़ करने वालों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। आप सोच लीजिए गड़बड़ करेंगे तो क्या होगा। जो महिलाएं इस कारोबार में शामिल थीं उनको आजीवन कारावास की सजा हो गई। गड़बड़ करने वालों से सजग और सतर्क रहने की जरुरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीने वालों को समझना चाहिए कि शराब खराब चीज है। आप देख लीजिए इस शराब के पीने से कितने लोग मर गए। हम तो हमेशा इसके प्रति सजग रहते हैं। आपको सजग और सचेत रहने के लिए हमलोग अभियान चला रहे हैं। जीविका दीदियों से कहेंगे कि आज दीदियों ने जो बातें कहीं हैं अपने उत्थान के लिए जरूर उन बातों का ध्यान रखिये। समाज कितना आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के उत्थान के लिए कितना काम किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह का यहां बहुत कम काम था। हमलोगों ने जीविका समूह को बनाया। वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर के 2-3 जगहों पर जाकर हमने इनके कार्यों को देखा था। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं काम कर रही थीं। फिर हमने वल्र्ड बैंक से कर्ज लेकर काम शुरु कराया। हमलोगों का 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था। अब तो 10 लाख के लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। बिहार में ही जीविका का नामकरण किया गया। इससे प्रभावित होकर उस समय की केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका समूह के नाम से इसको शुरु किया, यह कितनी बड़ी बात है। आप अपने साथ पूरे समाज को आगे बढ़ा रही हैं। आपलोगों की मांग पर शराबबंदी लागू की गयी। मेरी आप सभी से अपील है कि अपने-अपने इलाकों में घूम-घूमकर जागरुकता अभियान चलाते रहिए। शराबबंदी के पक्ष में और बाल-विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान चलाते रहिए। गड़बड़ी करने वाले शराब जो बेचते हैं और पीते हैं आपको नंबर बता दिया गया है। आग्रह है कि कोई गड़बड़ करता है तो भारी संख्या में चारो तरफ शराबबंदी के पक्ष में नारा लगाकर विरोध कीजिए। शराब इतनी बुरी चीज है इसके संबंध में सूचना विभाग द्वारा विज्ञापन के जरिए भी लोगों को जानकारी दी जा रही है, उस पर भी गौर कीजिएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का वर्ष 2016 में शराब पर आकलन किया, सर्वेक्षण कराया और 2018 में ही उसकी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार एक साल में शराब पीने से दुनिया में 30 लाख लोग मरते हैं। 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत मृत्यु जो होती है, उसमें शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। कैंसर एवं टीबी जैसी बीमारियों को बढ़ाता है, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने से आत्महत्या कर लेते हैं। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने से दुनियाभर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। मिरगी के 13.5 प्रतिशत मामले शराब के सेवन से होते हैं। दुनिया में जितनी मृत्यु होती है उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से होती है। शराब के सेवन से 48 प्रतिशत लोग लीवर की गंभीर बीमारी के शिकार होते हैं। माउथ कैंसर के कुल मामलों का 26 प्रतिशत शराब पीने के कारण होता है। पैंक्रियाज के 26 प्रतिशत, बड़ी आंत की बीमारी के 11 प्रतिशत मरीजों की शराब पीने से मौत होती है। ब्रेस्ट कैंसर के 5 प्रतिशत और टीबी के 20 प्रतिशत मामले शराब सेवन से होते हैं। बहुत लोग कहते हैं कि शराबबंदी के कारण पर्यटक बिहार नहीं आएंगे। कोरोना काल में इसमे थोड़ी कमी आयी लेकिन शराबबंदी के बाद 2 करोड़ से ज्यादा पर्यटक बिहार आए हैं। कोई कहता है कि नहीं पीएंगे तो बीमार हो जाएंगे, मैं कहता हूं कि नहीं पीओगे तो ठीक हो जाओगे। शराब के दुष्परिणामों के जो आंकड़े दिए गए हैं, उस पर सबलोग गौर कीजिए और हमारा आपलोगों से आग्रह है कि इसके बारे में सभी को बताएं। शराबबंदी के लिए निरंतर अभियान चलाते रहने की जरुरत है। बापू ने कहा था कि अगर एक घंटे के लिए भी मैं देश का तानाशाह बन जाउं तो सभी शराब की दुकानें बंद करवा दूंगा। बापू ने कहा था- शराब न सिर्फ आदमी का पैसा, बल्कि बुद्धि भी हर लेता है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। बाल विवाह करने से तरह-तरह की परेशानी होती है, बेटियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। जो बच्चे पैदा होते हैं वे कुपोषण के शिकार होते हैं। दहेज प्रथा और भी खराब है। कोरोना से सतर्क रहने की जरुरत है। दुनिया के विकसित देशों में यह एक बार फिर फैलने लगा है। सभी लोगों से आग्रह है कि प्रचार कीजिए की दहेज प्रथा बहुत खराब काम है। हमने कहा था कि निमंत्रण में लिखना होगा कि दहेजमुक्त शादी हो रही है तभी जाना है। जिस कार्ड पर दहेज मुक्त लिखा होगा उसी शादी में हम जाएंगे। समाज में एक-दूसरे की इज्जत का भाव रखना चाहिए। प्रेम-सौहाद्र्र का भाव रखें। इससे ही समाज का विकास होगा। हमने वर्ष 2007 में साईकिल योजना चलायी। हर परिवार की लड़की को साइकिल दिया तो बच्चियों में कितना आत्मविश्वास पैदा हुआ। बाद में लड़कों को भी साईकिल दिया। मैट्रिक की परीक्षा में पिछली बार लड़कियों की संख्या लड़कों से 200-300 ज्यादा थीं। हम तो दिन रात आपकी सेवा करते ही रहते हैं। समाज सुधार अभियान सिर्फ मेरा काम नहीं बल्कि आपलोग मिल-जुलकर इसको चलाते रहिएगा। गांव में गाना गाकर सुनाईये, नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। बापू के बारे में लोग जानें। एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। विकास का काम तो किया ही जा रहा है। अगर समाज सुधार नहीं तो विकास का कोई मतलब नहीं। गड़बड़ी करने वाले पुलिस और अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा, वे जेल जाऐंगे और उनपर कार्रवाई होगी। विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, राज्य और देष आगे बढ़ेगा। आपलोगों से उम्मीद करता हूं कि आप अपने गांव, इलाकों में जाकर इस अभियान को चलाईयेगा। आपने हाथ उठाकर संकल्प भी लिया इस बात के लिए आपलोगों को हृदय से धन्यवाद देता हूं।
कार्यक्रम को कृषि मंत्री सह गोपालगंज जिले के प्रभारी मंत्री श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, पर्यटन मंत्री सह सीवान जिले के प्रभारी मंत्री श्री नारायण प्रसाद, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री सह सारण जिले के प्रभारी मंत्री श्री सुमित कुमार सिंह, खान एवं भूतत्व मंत्री श्री जनक राम, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के०के० पाठक ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत सतत् जीविकोपार्जन योजना की लाभार्थी श्रीमती रेणु देवी, श्रीमती राजमती देवी, बाल विवाह के दुष्परिणामों से सबक लेकर इस कुप्रथा के विरुद्ध सक्रिय श्रीमती गुड्डी देवी, दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद करनेवाली श्रीमती सुनीता देवी, नशामुक्त समाज की दिशा में कार्य करनेवाली श्रीमती इंद्रावती देवी सहित अन्य महिलाओं ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया। महिलाओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि नशाखोरी, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ समाज सुधार अभियान चलाकर मुख्यमंत्री ने लोक कल्याण का कार्य किया है। इसके लिए हम सभी मुख्यमंत्री के आभारी हैं। सतत् जीविकोपार्जन योजना से न सिर्फ महिलाएं स्वावलंबी हुई हैं बल्कि परिवार की आमदनी भी बढ़ी है। समाज में महिलाओं का सम्मान बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने गोपालगंज, सारण एवं सीवान जिले के 10,878 स्वयं सहायता समूहों को बैंको के माध्यम से कराए गए कैश क्रेडिट लिमिट का 173 करोड़ 25 लाख 50 हजार का चेक प्रदान किया। सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत तीनों जिलों के 3,745 लाभार्थियों को 5 करोड़ 35 लाख रुपये की राशि और जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से 6 नवसृजित सार्वजनिक जलाशयों के रखरखाव हेतु 14 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। सड़क दुर्घटना में मृतक के आश्रित श्रीमती मीना देवी को 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि का डमी चेक मुख्यमंत्री के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया।
इस अवसर पर सांसद श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, सांसद डॉ0 आलोक कुमार सुमन, सांसद श्रीमती कविता सिंह, विधायक श्री जनक सिंह, विधायक श्री अमरेंद्र कुमार पांडेय, विधायक श्री कृष्ण कुमार मंटू, विधान पार्षद श्री बिरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद श्री आदित्य नारायण पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, लघु जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव श्री रवि मनुभाई परमार, सचिव गृह श्री के0 सेंथिल, सारण प्रमंडल के आयुक्त श्रीमती पूनम, परिवहन सह आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल, सूचना एवं जन संपर्क विभाग के सचिव श्री अनुपम कुमार, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी०, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री रविन्द्र कुमार, गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी डॉ0 नवल किशोर चैधरी, जिलाधिकारी सीवान श्री अमित कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी सारण श्री राजेश कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक गोपालगंज श्री आनंद कुमार, पुलिस अधीक्षक सारण श्री संतोष कुमार, पुलिस अधीक्षक सीवान श्री शैलेश कुमार सिंह सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, जीविका दीदियां एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

25 दिसम्बर 2021, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 24 Dec 2021 05:35 AM PST

25 दिसम्बर 2021, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

25 दिसम्बर 2021, शनिवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि षष्ठी दिन 04:03:21

🔅 नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी रात्रि 01:33:14

🔅 करण :

                गर 07:58:53

                वणिज 20:12:05

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग प्रीति 11:23:33

🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:47:32

🔅 चन्द्रोदय 23:03:59

🔅 चन्द्र राशि सिंह

🔅 सूर्यास्त 17:13:27

🔅 चन्द्रास्त 11:30:00

🔅 ऋतु शिशिर
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 10:19:23

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत मार्गशीर्ष

🔅 मास पूर्णिमांत पौष

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 12:00:19 - 12:41:37

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त :

                    07:11:17 - 07:52:34

                    07:52:34 - 08:33:52

🔅 कंटक 12:00:19 - 12:41:37

🔅 यमघण्ट 14:45:29 - 15:26:47

🔅 राहु काल 09:46:07 - 11:03:33

🔅 कुलिक 07:52:34 - 08:33:52

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 13:22:54 - 14:04:12

🔅 यमगण्ड 13:38:23 - 14:55:49

🔅 गुलिक काल 07:11:17 - 08:28:42

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

🌹विशेष ~ भद्रा दिन 04:03:21 से रात्रि 03:39:12 तक, ज्येष्ठ दिन (बड़ा दिन) क्रिसमस डे (ईसाई समाज), महामना पं. मदन मोहन मालवीयजी जयन्ती (अंग्रेजी तारीख अनुसार)। 🌹

पं..प्रेम सागर पाण्डेय्

25 दिसम्बर 2021, शनिवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज का दिन आपके लिए लाभदायी है। व्यापार में अपेक्षित सफलता मिलने की संभावना है। आय में वृद्धि होगी।त आनंद-प्रमोद और मनोरंजक प्रवृत्तियां दिनभर चलती रहेंगी। घर को सजाने की व्यवस्था में भी परिवर्तन आज करेंगे। वाहन सुख भी मिलेगा। सामाजिक प्रसंग में कहीं बाहर जाने का प्रसंग उपस्थित होगा। रमणीय स्थान पर प्रवास का आनंद ले सकेंगे।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 5

वृषभ (Tauras): आज के दिन व्यापार को विकसित करने की ओर अधिक ध्यान देंगे। कार्य सफलता मिलने में विलंब हो सकता है। कहीं बाहर जाने की संभावना उपस्थित हो सकती है। पदोन्नति हो सकती है। आप की कार्यपद्धति से उच्च अधिकारीगण भी आप पर प्रसन्न रहेंगे। पिता और बड़ों से लाभ की आशा है।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

मिथुन (Gemini): खान-पान में आज विशेष ध्यान रखें। नकारात्मक विचारों को मन से निकाल दें। अनैतिक और अप्रमाणिक कार्य विपत्ति में डाल सकता है। आकस्मिक प्रवास का योग अच्छा है। मध्याहन के बाद मानसिक अवस्था में कमी आएगी। लेखन या साहित्यिक प्रवृत्ति में विशेष रुची रहेगी। व्यापार में विकास होने से नई योजनाएं अमल में आएगी। ऊपरी अधिकारियों के साथ वाद-विवाद में न पड़ें।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): किसी के साथ आज भावनात्मक संबंध से बंध सकते हैं। आनंद-प्रमोद तथा मनोरंजक प्रवृत्ति से मन प्रफुल्लित रहेगा। मध्याहन के बाद आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। वाहन चलाते समय ध्यान रखें और क्रोध पर संयम रखें। वाणी उग्र न हो जाए इसका भी ध्यान रखें। नए कार्य को प्रारंभ करने के लिए आज का दिन अच्छा नहीं है।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

सिंह (Leo): व्यापार के विस्तार के लिए धन का आयोजन कर सकते हैं। व्यवसायियों को लाभ होगा। धन प्राप्ति का प्रबल योग है। ब्याज,दलाली आदि के द्वारा आय में वृद्धि होने की संभावना है। आर्थिक रूप से आय होने से आर्थिक कष्ट दूर हो जाएगा। अच्छे वस्त्र और अच्छे खान-पान से मन प्रफुल्लित रहेगा। छोटे प्रवास या पर्यटन का योग है।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

कन्या (Virgo):
वस्त्राभूषणों की खरीदी आप के लिए रोमांचक और आनंददायी रहेगी। कला के प्रति आप की अभिरुची रहेगी। व्यापार में विकास होने से मन में आनंद रहेगा। व्यवसाय में समय अनुकूल रहेगा। प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त होगें।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 5

तुला (Libra): आज का दिन आप के लिए मध्यम फलदायी रहेगा। स्थावर संपत्ति सम्बंधित दस्तावेज करने हेतु सावधानी बरतें। माता के स्वास्थ्य के विषय में चिंता रहेगी। परिवार में तकरार न हो इसका ध्यान रखें। मध्याहन के बाद स्वस्थ अनुभव करने पर सृजनात्मक प्रवृत्तियों की ओर ध्यान जाएगा। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

वृश्चिक (Scorpio): आज का दिन व्यवसायियों के लिए अनुकूल है। गृहस्थ जीवन में उलझे हुए प्रश्नों का निराकरण मिलेगा। स्थावर संपत्ति से जुड़े मामलों का हल निकलेगा। भाई- बहनों के साथ संबंधो में प्रेम बना रहेगा। मध्याहन के बाद कार्य में प्रतिकूलताओं में वृद्धि होगी। शारीरिक और मानसिक रूप से बेचैनी रहेगी। सामाजिक क्षेत्र में अपयश प्राप्त होगा। परिजनों के साथ मतभेद हो सकता है। धन की हानि के योग हैं।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

धनु (Sagittarius): वाणी और वर्तन पर संयम रखने से अन्य लोगों के साथ मनमुटाव के प्रसंगो को टाल सकेंगे। आध्यात्मिक विचार और प्रवृत्तियों में आज दिनभर मन लगा रहेगा। फिर भी विद्यार्थियों के पढ़ने-लिखने में एकाग्रता रखनी पड़ेगी। मध्याहन के बाद चिंता निवारण करने के उपाय मिलने से मानसिक शांति का अनुभव होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थता बनी रहेगी।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn): व्यवसायिक क्षेत्र में अनुकूल वातावरण मिलेगा। प्रत्येक कार्य बिना विघ्न के संपन्न होगा। गृहस्थ जीवन में उग्र वातावरण बना रहेगा। आध्यात्मिक प्रवृत्ति में आप की अभिरुचि रहेगी। कार्यालय में आप का प्रभाव बना रहेगा। मन पर नकारात्मक विचार छाए रहेंगे। निर्णय शक्ति का अभाव रहेगा। घर के कार्यों के पीछे धन का खर्च होने की संभावना है।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 6

कुंभ (Aquarius): धार्मिक कार्य अथवा धार्मिक यात्रा के पीछे धन खर्च होगा। कोर्ट-कचहरी के कार्य में सफलता प्राप्त होगी। पूण्य कार्य के पीछे धन का व्यय होगा। ईश्वर की आराधना आप के मन को शांति प्रदान करेगी। मध्याहन के बाद आप के प्रत्येक कार्य सरलतापूर्वक संपन्न होंगे। गृहस्थ जीवन में संवादिता बनी रहेगी। शारीरिक स्वास्थ्य भी बना रहेगा।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

मीन (Pisces): शेयर-सट्टे की प्रवृत्ति से आज आप को आर्थिक लाभ होगा। विवाहोत्सुकों को योग्य पात्र मिलेगा। व्यवसायिक क्षेत्र में भी लाभ होगा। जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। किसी मनोहर स्थल पर प्रवास हो सकता है। मित्रों से भी लाभ मिलेगा। मध्याहन के बाद किसी कारणवश मानसिक रूप से चिंतित रहेंगे। आय की अपेक्षा खर्च की मात्रा अधिक होगी।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8 
 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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क्रिसमस पर होगी कोरोना मुक्ति की प्रार्थना

Posted: 24 Dec 2021 05:24 AM PST

क्रिसमस पर होगी कोरोना मुक्ति की प्रार्थना

(पं. आर.एस. द्विवेदी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

एक बार फिर कोरोना वायरस ने क्रिसमस की उमंग को फीका कर दिया है। इस बार तो ओमिक्रोन वैरिएंट ने ज्यादा ही डरा दिया है। इंग्लैण्ड की महारानी ने तो पारंपरिक क्रिसमस समारोह मनाने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिन दुनिया भर में मनाया जाएगा और यीशु से कोरोना मुक्ति की प्रार्थना की जाएगी।

ईसाइयों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार क्रिसमस विश्व भर में 25 दिसम्बर को खूब हर्षोल्लास से मनाया जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसंबर से ही क्रिसमस से जुड़े कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। यूरोपीय और पश्चिमी देशों में इस दौरान खूब रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत में गोवा राज्य में क्रिसमस की काफी धूम रहती है इसके अलावा विभिन्न शहरों की बड़ी चर्चों में भी इस दिन सभी धर्मों के लोग एकत्रित होकर प्रभु यीशु का ध्यान करते हैं। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर लोग प्रभु की प्रशंसा में कैरोल गाते हैं और क्रिसमस के दिन प्यार व भाईचारे का संदेश देने एक दूसरे के घर जाते हैं।

क्रिसमस अब सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं रहा बल्कि इसने सामाजिक पर्व का रूप धारण कर लिया है तभी तो अब सभी समुदायों के लोग बढ़.चढ़कर इसे मनाते हैं और आपस में खुशियां बांटते हैं। क्रिसमस हंसी.खुशी का त्यौहार है इस दिन विश्व भर के गिरजाघरों में प्रभु यीशु की जन्मगाथा की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं और गिरजाघरों में प्रार्थना की जाती है। क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते हैं और आजकल कई गैर ईसाई लोग भी इसे एक धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाते हैं। बाजारवाद ने भी इस पर्व के प्रचार में बड़ी भूमिका निभाई है। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान.प्रदान, सजावट का सामान और छुट्टी के दौरान मौजमस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि भी बन गया है।

इस पर्व के दौरान सभी लोग अपने घरों में क्रिसमस ट्री लगाते हैं जिसे अच्छे अच्छे उपहारों से सजाया जाता है। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। इस पर्व पर बच्चों के बीच सांता क्लाज की बहुत धूम रहती है। सांता क्लाज बच्चों के लिए मनचाहे तोहफे लेकर आते हैं और बच्चों को खुशियों से भर देते हैं। बच्चे खुद भी इस पर्व पर सुंदर रंगीन वस्त्र पहनते हैं और हाथ में चमकीली छड़ियां लिए हुए सामूहिक नृत्य करते हैं। बच्चों के अलावा बड़ों में भी इस पर्व को लेकर उत्साह रहता है। ईसाइयों के अलावा अन्य लोग भी इस दौरान अपने घर में क्रिसमस ट्री लगाते हैं। इसे अच्छे अच्छे उपहारों से सजाया जाता है और इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। क्रिसमस त्योहार को लेकर एक कथा प्रचलित है। एक बार ईश्वर ने ग्रैबियल नामक अपना एक दूत मैरी नामक युवती के पास भेजा। ईश्वर के दूत ग्रैबियल ने मैरी को जाकर कहा कि उसे ईश्वर के पुत्र को जन्म देना है। यह बात सुनकर मैरी चैंक गई क्योंकि अभी तो वह कुंवारी थी, सो उसने ग्रैबियल से पूछा कि यह किस प्रकार संभव होगा? तो ग्रैबियल ने कहा कि ईश्वर सब ठीक करेगा। समय बीता और मैरी की शादी जोसेफ नाम के युवक के साथ हो गई। भगवान के दूत ग्रैबियल जोसेफ के सपने में आए और उससे कहा कि जल्द ही मैरी गर्भवती होगी और उसे उसका खास ध्यान रखना होगा क्योंकि उसकी होने वाली संतान कोई और नहीं स्वयं प्रभु यीशु हैं। उस समय जोसेफ और मैरी नाजरथ जोकि वर्तमान में इजराइल का एक भाग है, में रहा करते थे। उस समय नाजरथ रोमन साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। एक बार किसी कारण से जोसेफ और मैरी बैथलेहम, जोकि इस समय फिलस्तीन में है, में किसी काम से गए, उन दिनों वहां बहुत से लोग आए हुए थे जिस कारण सभी धर्मशालाएं और शरणालय भरे हुए थे जिससे जोसेफ और मैरी को अपने लिए शरण नहीं मिल पाई। काफी थक.हारने के बाद उन दोनों को एक अस्तबल में जगह मिली और उसी स्थान पर आधी रात के बाद प्रभु यीशु का जन्म हुआ। अस्तबल के निकट कुछ गडरिए अपनी भेड़ें चरा रहे थे, वहां ईश्वर के दूत प्रकट हुए और उन गडरियों को प्रभु यीशु के जन्म लेने की जानकारी दी। गडरिए उस नवजात शिशु के पास गए और उसे नमन किया। यीशु जब बड़े हुए तो उन्होंने पूरे गलीलिया में घूम.घूम कर उपदेश दिए और लोगों की हर बीमारी और दुर्बलताओं को दूर करने के प्रयास किए। धीरे.धीरे उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैलती गई। यीशु के सद्भावनापूर्ण कार्यों के कुछ दुश्मन भी थे जिन्होंने अंत में यीशु को काफी यातनाएं दीं और उन्हें क्रूस पर लटकाकर मार डाला लेकिन यीशु जीवन पर्यन्त मानव कल्याण की दिशा में जुटे रहे, यही नहीं जब उन्हें कू्रस पर लटकाया जा रहा था, तब भी वह यही बोले कि हे पिता इन लोगों को क्षमा कर दीजिए क्योंकि यह लोग अज्ञानी हैं। उसके बाद से ही ईसाई लोग 25 दिसम्बर यानि यीशु के जन्मदिवस को क्रिसमस के रूप में मनाते हैं।

क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसंबर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। 25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक तिथि नहीं हैं और लगता है कि इस तिथि को एक रोमन पर्व या मकर संक्रांति (शीत अयनांत) से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है। आधुनिक क्रिसमस की छुट्टियों मे एक दूसरे को उपहार देना, चर्च मे समारोह और विभिन्न सजावट करना शामिल हैं। इस सजावट के प्रदर्शन मे क्रिसमस का पेड़, रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म के झाँकी और हॉली आदि शामिल हैं। सांता क्लॉज (जिसे क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है हालांकि, दोनों का मूल भिन्न है) क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक परंतु कल्पित शख्सियत है जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए उपहार लाने के साथ जोड़ा जाता है। सांता के आधुनिक स्वरूप के लिए मीडिया मुख्य रूप से उत्तरदायी है। क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते हैं और आजकल कई गैर ईसाई लोग भी इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप मे मनाते हैं। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान प्रदान, सजावट का सामान और छुट्टी के दौरान मौजमस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन गया है।

दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह 25 दिसम्बर को मनाया जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसम्बर को ही जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं। ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसम्बर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार २५ दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडरों में 13 दिनों का अंतर होता है। (हिफी)
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गोवा में दो नये पहलवान

Posted: 24 Dec 2021 05:21 AM PST

गोवा में दो नये पहलवान

(अशेाक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

अगले साल जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं उनमें एक राज्य गोवा भी है। देश का यह राज्य अलग मिजाज रखता है लेकिन दो बड़ी पार्टियों- कांग्रेस और भाजपा ने ही इसकी सत्ता की लगाम थामी है। पिछली बार तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी सरकार नहीं बना पायी और भाजपा ने वहां भी भगवा फहरा दिया। कांग्रेस के पास अब तीन विधायक बचे हैं। इसलिए यहां भी चुनावी दंगल मनोरंजक रहता है। इस बार इस दंगल में दो नये पहलवानों- तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने उतर कर चुनाव को ज्यादा आकर्षक बना दिया है।

गोवा में इस बार आम आदमी और टीएमसी पूरी ताकत लगाए है। आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गोवा में ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि खंडित जनादेश की सूरत में वह विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद गैर-भाजपा दलों के साथ गठबंधन पर विचार कर सकते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप गोवा विधानसभा की सभी 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और पार्टी की तरफ मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर आने वाले दिनों में घोषणा करेगी। केजरीवाल ने भाजपा के दिग्गज दिवंगत नेता मनोहर पर्रिकर की भी सराहना की और कहा कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में अगर किसी को घुटन महसूस हो रही है तो वो आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकता है। पणजी दौरे के दौरान केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश की सूरत में बेहद आवश्यक होने पर चुनाव बाद गैर-भाजपा दलों से गठबंधन कर सकती है। तृणमूल कांग्रेस के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए केजरीवाल ने कहा, हमें गोवा में तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों करना चाहिए? हम उनके साथ कोई गठबंधन नहीं करने जा रहे।

केजरीवाल ने कहा कि गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में यदि आप सत्ता में आयी तो वह राज्य में भ्रष्टाचार मुक्त और ईमानदार सरकार देगी। केजरीवाल ने पणजी में संवाददाताओं से कहा कि आप की दिल्ली सरकार के पिछले कार्य निष्पादन रिकार्ड के आधार पर यह गारंटी दी गई है जहां उसके ही मंत्री को एक दुकानदार से रिश्वत मांगने के आरोप में पद से हटा दिया गया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि मंत्री या विधायक

रिश्वत मांगते पाए जाते हैं तो उन्हें दंड से बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया, 'हम गोवा में पहली भ्रष्टाचार मुक्त और ईमानदार सरकार देंगे।

उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक राज्य का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ही गोवा में बीजेपी शासन का एकमात्र विकल्प है। उन्होंने तटीय राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, टीएमसी का मतलब मंदिर, मस्जिद और चर्च है। बनर्जी का यह बयान तब आया है जब पीएम मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने वाराणसी में थे।

गोवा के तीन दिवसीय दौरे पर बनर्जी ने कहा, हम यहां वोट-विभाजन के लिए नहीं बल्कि वोटों को एकजुट करने और टीएमसी गठबंधन को जीत दिलाने के लिए हैं। यह बीजेपी का विकल्प है। अगर कोई इसका समर्थन करना चाहता है, तो इसका निर्णय उन्हें करना है, हम पहले ही फैसला कर चुके हैं। हम लड़ेंगे और मरेंगे लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।" बता दें कि गोवा एक हिंदू-बहुल राज्य है, जहां ईसाइयों का एक बड़ा हिस्सा है- जो अपने पुर्तगाली अतीत की विरासत संभाले है। राज्य में मुसलमानों की भी अच्छी तादाद है। राज्य में लंबे समय से कांग्रेस का शासन रहा है लेकिन बीजेपी लगभग एक दशक से वहां सत्ता में है। तृणमूल- जो 2022 में होने वाले विधान सभा चुनावों के लिए अपने जनाधार का विस्तार कर रही है- पहले ही कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। बनर्जी ने इशारा किया कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पिछले चुनाव में कांग्रेस ने व्यावहारिक रूप से बीजेपी को वाक-ओवर दिया है। बनर्जी ने सुधीन धवलीकर के नेतृत्व वाली महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के साथ भी गठबंधन किया है, जिसने 2017 में राज्य में बीजेपी को सत्ता में आने में मदद की थी और अभी भी कई इलाकों में उसकी अच्छी पकड़ है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने गोवा में अपनी गृह लक्ष्मी योजना की घोषणा की। इसके तहत घर की प्रत्येक महिला मुखिया को हर महीने 5,000 रुपये नकद हस्तांतरण के रूप में मिलेगा। चाहे उनकी आय कुछ भी हो। टीएमसी सांसद और गोवा राज्य प्रभारी महुआ मोइत्रा ने कहा, यह किसी विशेष जाति या समुदाय से संबंधित नहीं है, आपको किसी विशेष आर्थिक रूप से वंचित वर्ग या बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी से संबंधित नहीं होना है। सभी को योजना का लाभ मिलेगा।" उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी जल्दी ही योजना के लाभार्थियों के बीच कार्ड का वितरण शुरू करेगी । इस कार्ड में एक पहचान संख्या होगी और तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद इसका कार्यान्वयन शुरू हो जायेगा । ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी ने घोषणा की है कि यह प्रदेश में सभी 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल कांग्रेस की गोवा की सह प्रभारी महुआ ने कहा, ''प्रदेश के साढे तीन लाख घरों की महिलाओं को गृहलक्ष्मी योजना में शामिल किया जायेगा और अधिकतम आय की व्यवस्था इस योजना पर लागू नहीं होगी जो भाजपा सरकार की मौजूदा गृह आधार योजना में शामिल है।

कुछ समय पहले तक दोस्त जैसे रहे कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गोवा के विधानसभा चुनाव से अब आमने-सामने हैं। तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने पर महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकदी अंतरण योजना शुरू करने के वादे के एक दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा, भगवान गोवा का भला करे।

इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गोवा में भी वादा किया कि अगर उनकी पार्टी राज्य में सत्ता में आती है तो गोवा में महिलाओं के लिए नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा ''महिला विरोधी'' है। वर्ष 2017 के गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन सरकार बनाने में विफल रही थी। भाजपा ने तब सरकार बनाने के लिए कुछ क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ गठजोड़ किया था। चालीस सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास वर्तमान में केवल तीन विधायक हैं। (हिफी)
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विराट ब्रह्म है गाय

Posted: 24 Dec 2021 05:18 AM PST

विराट ब्रह्म है गाय

(हृदयनारायण दीक्षित-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाय को आदरणीय बताया है। उनका यह वक्तव्य स्वागतयोग्य है। भारतीय संस्कृति में गाय पूज्य है लेकिन स्वयंभू प्रगतिशील समूह पूर्वजों को गोमांस भक्षी बताते रहे हैं। वे पूरे भारतीय समाज का अपमान करते रहे हैं लेकिन भारतीय संविधान निर्माता सजग थे। संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में गोवंश संवर्धन/रक्षण का संकल्प है। वैदिक श्रुति/अनुश्रुति और लोक स्मृति में गाय माता है पर कथित प्रगतिशील इतिहासविद् गाय को खाद्य पदार्थ बताने/बनाने पर आमादा रहे हैं। वे वैदिक पूर्वजों को गोमांस भक्षी बताते रहे हैं। लोक आस्था का ऐसा अपमान दुस्साहसिक है। इस इतिहास दृष्टि में आर्य बर्बर और असभ्य विदेशी आक्रांता।

गोमांस भक्षण की बात भारतवंशी इतिहास और संस्कृति का अपमान है। बच्चे पूर्वजों को गोमांस भक्षी जानकर क्या पाएंगे? आर्यों को विदेशी, आक्रमणकारी व गोमांस भक्षी सिद्ध करना राष्ट्र का अपमान है। भारतीय इतिहास के वैदिककाल से ही गाय आदरणीय है। प्रो. राधाकृष्ण चैधरी ने बताया है कि "वैदिक साहित्य, महाकाव्य, पुराण, विदेशी यात्रियों के वर्णन और पुरातत्व में भारतीय इतिहास के आधारभूत सिद्धांतों के अध्ययन की पर्याप्त सामग्री है।" (प्राचीन भारत का इतिहास, पृ. 8-9) हिन्दुओं का प्राचीन इतिहास समझने के लिए ऋग्वेद सहित 4 वेद, उपनिषद, पुराण और हड़प्पा सभ्यता के तथ्य साक्ष्य हैं। प्राचीन भारत का वास्तविक इतिहास समझने के लिए वेद ही तथ्य है। समूचे वैदिक व उत्तर वैदिक कालीन इतिहास में गाय की महत्ता है।

वैदिक समाज गाय को अघन्या/अबध्य मानता था। ऋग्वेद (1.164.27) में वह अघन्या है (वध न किए जाने योग्य), सौभाग्यदायिनी है। गाय सम्पूर्ण वैदिक साहित्य की श्रद्धा केन्द्र है। अथर्ववेद में वह विराट ब्रह्म है। वह एक सूक्त (9.12) की देवता भी हैं- "गाय का ऊपरी जबड़ा द्युलोक है, निचला पृथ्वी, जीभ विद्युत है, दाँत मरुद्गण हैं, उदर भाग अंतरिक्ष है, दोनों कंधे मित्र और वरुण हैं आदि।" इसके पहले ऋग्वेद (8.101.215) में कहते हैं- "यह रूद्रों की माता, वसुओं की दुहिता, आदित्यों की बहन तथा अमृत की नाभि है। यह अवध्य है।" थोड़े शब्द बदलकर यही मंत्र अथर्ववेद में भी दुहराया गया है। यजुर्वेद भी गाय की महिमा से भरापूरा है। अथर्ववेद (12.4) में गाय को कष्ट पहुँचाने वालों का दण्ड वर्णित है- "जो गाय के कान को पीड़ा देते हैं वे मानो देवताओं पर प्रहार करते हैं। जो गौ पर परिचय चिन्ह बनाते हैं, उनका धन नष्ट होता है। जो साज-सज्जा के लिए गौ बाल काटते हैं इस अपराध कर्म से उनकी संतानें मृत्यु को प्राप्त होती हैं। जिस गोपति के सामने कौआ गाय के बाल नोचता है, उसकी संतानें मर जाती हैं आदि।" फिर गोहत्या के बारे में (अथर्व 12.9) कहा- "गौघाती लोग इस लोक और परलोक दोनों में दण्डनीय है।"

भारतीय समाज में देवोपासना रही है। अधिकांश देवता प्रकृति की शक्तियाँ हैं। वे दिव्य हैं। देवता मनुष्य की श्रद्धा है। मनुष्य अपना प्रिय खाद्य ही देवताओं को अर्पित करता है। गोदुग्ध वैदिक समाज का प्रिय पेय है। एक मंत्र में ऋषि अग्नि देव को दूध देना चाहते हैं लेकिन उनके पास 'अघन्या गाय' है नहीं। (ऋ 8.102.19) ऋषि इन्द्र से कहते है- "अघन्या अपना दूध तुम्हें देती है। (9.1.9) इन्द्र 'अघन्या रक्षक' (8.69.2) है। तब वह और उनके अनुयायी आर्य अघन्या भक्षक कैसे होंगे? अघन्या अश्विनी देवों को भी दूध देती है। (1.164.27) गाएँ ऋग्वैदिक समाज में ही ऋषित्व की श्रेणी में पहुँच गई थी। वे सोम की स्तुति करती हैं। अथर्ववेद में तो खैर वे देवता हैं ही। अथर्ववेद में सुंदर घर की प्रशंसा में कहा गया है कि हमारे घर में सब तरफ गाएँ घूमें।" वेदों में घी, अग्नि का अन्न है। घी अग्निदेव का प्रिय है खाद्य है। वैदिक समाज जौ खाता था। अग्नि को भी जौ खिलाता था। वे इन्द्र को धाना खिलाते थे। धाना अन्न से बना खाद्य था। (ऋ 4.24.7) ऋषि इन्द्र से कहते हैं- "प्रतिदिन पधारो, धाना खाओ।" (ऋ 3.53.7) खेती के देवता पूषन थे। वे 'करम्भ' प्रेमी है।

माक्र्सवादी विचारण डाॅ॰ रामविलास शर्मा ने बताया, करम्भ भुना हुआ अनाज था। करम्भ इन्द्र पूषत सबका प्रिय है। एक प्रिय खाद्य अपूप था। संभवता पुआ था। घी के साथ मिलाकर तैयार 'अपूप' अन्य देवों के साथ मरुतगण भी खाते हैं। (ऋ 3.52.7) मैक्डनल और कीथ ने एक और वैदिक व्यंजन 'पुरोडास' को 'यज्ञ की रोटी' बताया है। ऋषि इन्द्र से कहते हैं- "प्रार्थना सुनो, पुरोडास खाओ।" (ऋ 4.32.16) जो इन्द्र को पुरोडास खिलाता है, उसे इन्द्र पापों से बचाते हैं (ऋ 8.31.2) वैदिक समाज का जौ, धाना, करम्भ, अपूप, पुराडास, दूध और घी प्रेम चारों वेदों में व्याप्त है। गोमांस का कहीं जिक्र ही नहीं। गाएँ श्रद्धा हैं। अन्न खाद्य है। एक देवता बृहस्पति हैं। उन्होंने गायों को आकाश तक चरने भेजा (ऋ 2.24.14) मैक्डनल ने लिखा, "वह बादलों में जाकर गायों को पुकारते हैं।" (ऋ 10.68.12) गायों को आकाश में चरते देखना भारत के मन की दिव्य उड़ान है। यह बात सही हे कि गाएँ आकाश में विचरण नहीं करती। लेकिन ऋषि की भाव विह्वलता उन्हें आकाश तक ले जाती है। गंगा भी पृथ्वी के निवासियों को आशीष देती है। श्रद्धालुओं ने आकाश गंगा को नमन किया।

ऋग्वेद से लेकर महाभारत और वर्तमानकाल तक गाय भारतीय संस्कृति और परम्परा में पूज्य है। तुलसीदास ने श्रीराम जन्म के कारणों में से एक कारण गोसंवर्द्धन बताया- "विप्र धेनु सुर संतहित लीन्ह मनुज अवतार।" गीता में कृष्ण ने अर्जुन को अपने तमाम रूपों में से एक गाय रूप भी बताया। कृष्ण गोपाल थे। कौटिल्य ने भी 'गोसंरक्षण' को जरूरी बताया। प्राचीन भारत गोपूजक था। गाय प्रतिष्ठा थी, गाय समृद्धि थी, गाय ऐश्वर्य थी। चैथी सदी के चीनी यात्री फाहियान व 7वीं सदी ह्नेनसांग के निष्कर्ष हैं कि भारत में मांसाहारी नहीं हैं। गोहत्या के विरूद्ध भारत में अनेक आंदोलन हुए। गांधीजी ने गोहत्या बंदी को स्वराज का एक अंग बताया। गाय भारतीय अर्थव्यवस्था की माँ है, समाज व्यवस्था और सांस्कृतिक व्यवस्था का श्रद्धा केन्द्र। प्रधानमंत्री ने उचित ही गाय को सम्मानीय बताया है। (हिफी)
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मोदी ने बनाया काशी को विकास धाम

Posted: 24 Dec 2021 05:16 AM PST

मोदी ने बनाया काशी को विकास धाम

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

तीन लोक से न्यारी काशी नगरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना चुनाव क्षेत्र बनाकर नव्य-भव्य धाम बना दिया है। सबसे बडी बात यह कि अयोध्या में जहां मस्जिद को तोड़ना पड़ा, वहीं काशी में मस्जिद को बरकरार रखते हुए बाबा विश्वनाथ कारीडोर बनाया गया है। काशी की पहचान गंगा के साथ ही प्राचीन कुंडों और तालाबों को लेकर भी है, जिनका पीएम मोदी ने जीर्णोद्धार कराया है। काशी में अब कचरे से कोयला बनेगा। उत्तर प्रदेश के विकास का प्रमुख स्थल काशी बन गयी है। यहां ड्रोन का भी निर्माण होगा और अध्यात्म की भी सरिता अनवरत प्रवाहित होगी।

उत्तर प्रदेश में चुनावी रण की तैयारी जोरों पर है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए साल में काशीवासियों को कई नई सौगात देंगे। इसमें प्रमुख रूप से कचरे से कोयला बनाने वाले प्लांट और रोपवे परियोजना का शिलान्यास शामिल हैं। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी के जनवरी के पहले हफ्ते में वाराणसी आने की संभावना है।फिलहाल तारीख अभी तय नहीं हुई है। उधर, जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कचरे से कोयला बनाने का प्लांट देश का पहला प्लांट होगा और पायलट प्रोजेक्ट के तहत रमना में स्थापित किया जा रहा है। कचरे से कोयला बनाने का पहला प्लांट रमना में तैयार होगा। एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्लांट निर्माण के लिए नगर निगम ने रमना में 25 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है। 20 एकड़ में प्लांट निर्माण होगा तो पांच एकड़ में कोयला निर्माण के दौरान निकले अवशेष को निस्तारित करने के लिए वैज्ञानिक विधि से व्यवस्था की जाएगी। काशी में प्लांट की उपयोगिता सिद्ध हुई तो देश के दो अन्य शहरों इंदौर व भोपाल में भी प्लांट निर्माण होगा। इससे पहले इस महीने पीएम मोदी ने काशी आकर 13 दिसंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया था। यही नहीं, भाजपा शासित राज्यों के सीएम और डिप्टी सीएम के साथ क्रूज पर बैठकर गंगा आरती देखते हुए अगले दिन सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था। वहीं 23 दिसंबर को पीएम मोदी ने 2100 करोड़ की योजनाओं की सौगात देते हुए गोदौलिया और मैदागिन की अत्याधुनिक पार्किंग के बाद बेनियाबाग पार्किंग और पार्क को जनता को समर्पित किया था। गलियों के इस सुंदरीकरण से स्थानीय लोगों में भी खुशी का माहौल है। गलियों का जैसा अब स्वरूप है पहले उन्होंने कभी ऐसा नहीं देखा गया। पहले यहां सीवर बहने के साथ ही गंदगी रहती थी। लेकिन अब पूरी तस्वीर ही बदल गई है। इसके लिए हम लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हैं। काशी की पहचान बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के साथ गलियों से भी है। काशी की इन्ही गलियों को अब क्योटो की तर्ज पर स्मार्ट बनाया गया है। लगभग 68 करोड़ 24 लाख की लागत से वाराणसी के पांच वार्ड की गलियों को हाईटेक बनाया गया है।

इन वार्ड की गलियों में साफ सफाई के साथ ही दीवारों पर आकर्षण पेंटिंग उकेरी गई है जो आपको काशी का अहसास कराएगी।इसके अलावा गलियों में बिछाए गए पत्थर भी बेहद खास है। चिकने गुलाबी पत्थरों की इन गलियों में जब आप बाइक से भी चलेंगे तो आपको हिचकोले नहीं मिलेंगे। स्मार्ट सिटी के जीएम डी वासुदेवन बताते हैं कि प्राचीनता को बरकरार रखने हुए इन गलियों को आधुनिक रूप प्रदान किया गया है। गलियों के इस सुंदरीकरण से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। गोदौलिया और मैदागिन की अत्याधुनिक पार्किंग के बाद बेनियाबाग पार्किंग और पार्क को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को समर्पित किया है।

काशी को जाम से निजात दिलाने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना ने मूर्त रूप ले लिया है। बेनियाबाग व मैदागिन वाराणसी के धार्मिक व व्यापारिक स्थलों के काफी करीब हैं, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र में कोई व्यवस्थित पार्किंग नहीं थी जिसके कारण अक्सर पर्यटक और व्यवसाई जाम में फंस जाते थे। बेनियाबाग मैदान में अंडरग्राउंड पार्किंग स्थल बन जाने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और पूर्वांचल से आने वाले व्यापारियों की गाड़ियां सुरक्षित पार्क हो सकेंगी। यहां बहुउद्देशीय मैदान भी होगा, जहां जरुरत पड़ने पर हेलीकाप्टर भी उतारा जा सकता है। अंडरग्राउंड पार्किंग के ऊपर 13.5 एकड़ में खूबसूरत पार्क का निर्माण हुआ है। बेनियाबाग मैदान से राष्ट्रीय स्तर के फूटबाल खिलाड़ी निकले है। इसका ध्यान रखते हुए फुटबाल का मैदान रखा गया है। पार्क में खूबसूरत लैंडस्कैपिंग किया गया है। जूडो प्रैक्टिस एरिया, ओपन जिम, चेस गार्डन, एम्यूजमेंट एरिया यानी कई मनोरंजन के साधन युक्त पार्क है। वॉक-वे, वाटर स्पोर्ट्स स्थल, बच्चों को खेलने के लिए आकर्षक झूले, फूड कोर्ट, फ्लावर कोर्ट के अलावा वाटर बॉडी में बोटिंग की भी व्यवस्था रहेगी। ओपन एयर थियेटर, योगा गार्डन, वेंडिंग जोन, ओल्ड ऐज जोन का भी प्रावधान किया गया है। सेंचुरी पार्क बनाया गया है, जिससे दृष्टि बाधित लोग सुगंध व टच से नेचर के विभिन्न फूलों और अन्य चीजों का आनंद ले सकेंगे। इस तरह का गार्डन उत्तर प्रदेश में अपने आप में अनूठा होगा। बेनियाबाग पार्क को जिले के सेंट्रल पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है जो शहर का लैंडमार्क जैसा होगा। मार्च 2020 में शुरू हुआ पार्किंग का काम पूरा हो गया है।

महादेव की नगरी काशी की पहचान गंगा के साथ ही यहां के प्राचीन कुंड और तालाबों से है। इनमे से कई ऐसे कुंड और तालाब है जो अपनी पहचान खो रहे थे।काशी के इन्ही कुंड और तालाबों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संजीवनी दी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत काशी के सोनभद्र और नदेसर तालाब का जीर्णोद्धार किया गया है। 4 करोड़ 40 लाख की लागत से इन दोनों तालाबों को नया रूप दिया गया है, जिससे ये नए पर्यटक स्थल के रूप में अब सामने आए हैं।

गत 23 दिसम्बर वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी को इन दोनों तालाबों की सौगात दी है। इन दोनों तालाबों के सौंदर्यीकरण के साथ यहां पार्क का निर्माण किया गया है। दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग और बैठने के लिए आरामदयक चेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नदेसर तालाब पर ओपन जिम,पाथ वे और बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। सोनभद्र तालाब के सुंदरीकरण के काम से स्थानीय लोगो मे खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगो ने बताया कि सोनभद्र तालाब अपने अस्तित्व को खो चुका था। यहां कूड़े और गंदगी का अंबार था लेकिन अब ये तालाब नए पर्यटन स्थल के रूप में सामने आया है इसके लिए हम लोग तहे दिल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं। (हिफी)
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बांग्लादेश में फेरी में आग लगने से 32 लोगों की मौत

Posted: 24 Dec 2021 05:12 AM PST

बांग्लादेश में फेरी में आग लगने से 32 लोगों की मौत

ढाका। बांग्लादेश के झलकोटी जिले में शुक्रवार 24 दिसम्बर सुबह एक फेरी में आग लगने की खबर है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आग लगने से फेरी में सवार 32 लोगों की मौत हो गई है। 100 लोग घायल हो गए हैं। झलोकाटी जिले के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद नजमुल आलम ने बताया कि फेरी में करीब 1,000 लोग सवार थे। फेरी ढाका से बरगुना जिले की तरफ जा रही थी। हादसा बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 200 किमी की दूरी पर हुआ।

स्थानीय पुलिस प्रमुख मोइनुल इस्लाम ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया, 'तीन मंजिला फेरी ओबीजान 10 ने बीच नदी आग पकड़ ली। अभी तक 32 शव बरामद किए गए हैं। झुलसे लोगों को देखकर लगता है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। ज्यादातर लोगों की मौत आग में झुलसने से हुई है जबकि कुछ लोग जान बचाने के लिए नदी में कूद गए थे। पानी गहरा होने के कारण उनकी मौत हो गई।' रिपोर्ट के मुताबिक, मोइनुल इस्लाम ने कहा कि प्राथमिक जांच के तौर पर पता चला है कि आग फेरी के इंजन में लगी थी।आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।
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अमेरिका के समुद्र में मिला समुद्री राक्षस

Posted: 24 Dec 2021 05:10 AM PST

अमेरिका के समुद्र में मिला समुद्री राक्षस

वाशिंगटन। अमेरिका में वैज्ञानिकों की एक टीम ने डायनासोर के समय के एक समुद्री राक्षस की खोज की है। इस जीव की लंबाई 55 फीट तक देखी गई है। इस जीव के सिर का आकार 6।5 फीट मापा गया है। इस जीव का नाम इचिथ्योसॉर (पबीजीलवेंनत) है, जो समुद्री मछली का ही एक प्रकार है। रिसर्च से पता चला है कि मछली के आकार के इन समुद्री सरीसृपों का आकार 24 करोड़ साल पहले काफी तेजी से बढ़ा। कैलिफोर्निया के स्क्रिप्स कॉलेज में जीव विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर और वरिष्ठ शोधकर्ता लार्स शमित्ज ने अपनी स्टडी में कहा है कि इचिथ्योसॉर ने व्हेल की तुलना में अपने आकार को काफी तेजी से बढ़ाया है। वह भी उस समय में जब धरती से डायनासोर जैसे जीव तेजी से विलुप्त हो रहे थे। शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी नेवादा के ऑगस्टा पर्वत की चट्टानों में पहली बार 1998 में प्राचीन इचिथ्योसॉर के जीवाश्मों की खोज की थी। इसमें से कुछ हड्डियां चट्टानों के बाहर तक निकली हुई मिली थीं। वैज्ञानिकों ने इससे अंदाजा लगाया कि इस जीव का आकार काफी विशाल था। रसिद्ध जर्नल साइंस में 23 दिसंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि इन जीवाश्मों को लॉस एंजिल्स के नेचुरल साइंस म्यूजियम लेकर जाया गया।
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लोक लेखा समिति ने इमरान की खोली पोल

Posted: 24 Dec 2021 05:07 AM PST

लोक लेखा समिति ने इमरान की खोली पोल

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने वादे के मुताबिक कोरोना महामारी पैकेज देने में नाकाम रहे हैं। वे कुल राशि का केवल 37 प्रतिशत ही दे सके। कुछ मामलों में उनकी सरकार बेहद नाकाम रही, जैसे दिहाड़ी मजदूरों को राहत देने के वादे में में कुल राशि का मात्र 8 फीसदी ही दे सके। उनकी यह नाकामियां सुर्खियां बटोर रहीं हैं। यह खुलासा लोक लेखा समिति की एक ऑडिट रिपोर्ट से सामने आए हैं। इसमें कहा गया है कि वादे के अनुसार प्रोत्साहन पैकेज का जो वादा किया गया था, वह पूरा नहीं हुआ है।

लोक लेखा समिति (पीएसी) में साझा किए गए विवरण के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने कुल 500 अरब रुपये में से केवल 186 अरब रुपये जारी किए हैं, जो कि प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा वादा किए गए कुल राशि का केवल 37 प्रतिशत है। वहीं, पीएम पैकेज के तहत दिहाड़ी मजदूरों को 200 अरब रुपये की राहत देने का वादा किया गया था, लेकिन वास्तविक रिलीज सिर्फ 16 अरब रुपये थी। इसी तरह, यूटिलिटी स्टोर्स को फंडिंग 50 अरब रुपये थी लेकिन केवल 10 अरब रुपये मिले। इसके साथ ही बिजली और गैस पर सब्सिडी 100 अरब रुपये थी लेकिन इस क्षेत्र में केवल 15 अरब रुपये मिले।
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घाना की संसद में पक्ष-विपक्ष में चले लात घूसे

Posted: 24 Dec 2021 05:04 AM PST

घाना की संसद में पक्ष-विपक्ष में चले लात घूसे

अक्करा। घाना की संसद में एक बिल पर बहस के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच विवाद हो गया। मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि सदम में सांसदों के बीच जमकर लात-घूंसे चलने लगे। इसका वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट टैक्स बिल पर बहस के दौरान विपक्ष के सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया, जिसके बाद मामला बिगड़ता चला गया। विपक्षी सांसद चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंच गए और मारपीट होने लगी।

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब सांसदों के बीच हाथापाई नहीं रुकी, तो सिक्योरिटी में तैनात मार्शलों ने बीच में आकर हालात संभालने की कोशिश की। मार्शलों के रोकने के बाद भी लड़ाई शांत नहीं हुई। जिसके बाद सदन को स्थगित करना पड़ा। घाना की सरकार ई-पेमेंट, यानी मोबाइल से होने वाले पेमेंट पर टैक्स लगाना चाहती है। इसके लिए वो संसद में बिल लेकर आई थी। इस बिल के समर्थन और विरोध में बराबर वोट पड़े, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
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खेल

Posted: 24 Dec 2021 05:01 AM PST

खेल

खेल खिलौने हम हरि के वो ही पालनहार है
रचता नए नए प्रतिमान दुनिया का करतार है


उसकी मर्जी यहां पे चलती वो ही डोर हिलाता है
माटी के पुतलों को प्रभु क्या-क्या खेल दिखाता है


अंधकार छा जाए जब ज्योति नयन में भर देता
नैनो का सुख देकर वो घट उजियारा कर देता


खेल खेल में करतब कितने जगत को दिखा देता
गर्व चकनाचूर करके जीवन क्या है वो सीखा देता


मूसलाधार बरसता पानी कल कल झरना बहता
सरिताओ की धाराओं में गंगाजल पावन रहता


नीला अंबर चांद तारे पर्वत घटाएं सब मनभावन
कहीं गर्म थार मरुस्थल कहीं घुमड़ बरसे सावन


उसके खेल निराले हैं वो सबका रखवाला है
हम कठपुतली प्यारे वो बाजीगर मतवाला है


रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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जितन राम मांझी का बयान प्रेसर पोलिटिक्स का हिस्सा है , वो अपने परिवार को सेट करना चाहते है इसलिए ऊलूल जलूल बयान देते है : डॉ राकेश दत्त मिश्र

Posted: 24 Dec 2021 04:44 AM PST

जितन राम मांझी का बयान प्रेसर पोलिटिक्स का हिस्सा है , वो अपने परिवार को सेट करना चाहते है इसलिए ऊलूल जलूल बयान देते है : डॉ राकेश दत्त मिश्र

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने 18 दिसंबर (शनिवार) को ब्राह्मण समाज को लेकर बयान दिया था। पटना में भुइयां समाज के मंच से उन्होंने ब्राह्मण समाज के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल किया था । उनके इस बयान का वीडियो रविवार को वायरल हो गया। वीडियो में मांझी कहते नजर आए कि दलित समाज में आजकल सत्य नारायण भगवान की पूजा का प्रचलन काफी तेज हो गया है। जगह-जगह ब्राह्मण जाकर सत्य नारायण भगवान की पूजा कराते हैं। हमारे समाज में ब्राह्मण हरामी (गाली) जाते हैं, लेकिन खाना नहीं खाते हैं। सिर्फ पैसा लेते हैं।सत्यनारायण भगवान और ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक शब्द कहकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सम्पूर्ण हिन्दू समाज को अपमानित किया इसी के कारण । उनके खिलाफ कोर्ट में भारतीय जन क्रान्ति दल के राष्ट्रीय महासचिव डॉ राकेश दत्त मिश्र ने कंप्लेन केस नम्बर ८१०९ दाखिल किया था उसे चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विजय कुमार सिंह ने आज एमपी एम एल ऐ कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थान्तरित कर दिया है| इस मामले में हमारे संवाददाता को पूर्ण जानकारी डॉ मिश्र ने दिया उन्हों ने अपने बयान में कहाकि जीन मामलों में हमने केस किया है उसपर कम से कम 2 से 5 साल तक की सजा हो सकती है | हमें भारत की न्याय व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है | वैसे इस मामले में सबसे पहले गवाही होगी। इसके बाद कोर्ट कांगनिजेंस लेगी। फिर उन्हें कोर्ट की तरफ से समन भेजा जाएगा। अगर समन भेजने के बाद वो कोर्ट नहीं आते हैं तो उनके खिलाफ वारंट भी जारी हो सकता है। वारंट बेलेबल या नॉन बेलेबल भी हो सकता है। जीतन राम मांझी को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इस केस में IPC की (IPC) की धारा 124-A , 153ए , 295A , 298, 499 जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया। उसके अनुसार ही कार्रवाई होगी। हमने जो केस बनाया है और उनके ऊपर जो गंभीर आरोप लगे हैं जाति को बांटने का, उसके अनुसार 2 साल से लेकर 5 साल तक की सजा उन्हें हो सकती है। हमारे अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खास जाति पर बयान दिया है। वो प्रमाणित करता है कि उन्होंने समाज में जातीय उन्माद और विद्वेष फैलाने की भावना से आपत्तिजनक बयान दिया था। वो दिखाना चाहते हैं कि ब्राह्मण समाज का आज के समय में कोई अस्तित्व नहीं है। जबकि, उन्हें मालूम होना चाहिए कि समाज को बनाने और आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज का अस्तित्व काफी बड़ा है। जिस तरह का बयान पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया और उनके खिलाफ कंप्लेन केस किए गए हैं तो उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

वैसे भी मांझी जी का विवादित बयानों से पुराना नाता है हम आपको उनके द्वारा दिये गये कुछ विवादित बयान बताते है जिससे आप सभी को लगेगा वो किस प्रकार के नेता है |

उन्हों ने कहाकि 10 बजे रात के बाद पिया करो
बिहार में शराबबंदी है और इसको लेकर जीतनराम मांझी ने भी शपथ ली थी। लेकिन अब मांझी को लग रहा है कि शराबबंदी के नाम पर सबसे ज्यादा दलित और पिछड़ी जाति को लोगों को जेल भेजा जा रहा है। इसलिए मांझी गुजरात की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में आईएएस-आईपीएस भी शराब पीते हैं अगर आपको भी रात को शराब पीना है तो 10:00 बजे के बाद पीजिए।

उन्हों ने कहाकि हरामी पंडित आते हैं और कहते हैं कुछ नहीं खाएंगे, सब कुछ नगद दे दीजिए

मांझी का कहना है कि वे जब अपने स्कूल की तरफ से एक बार मंदिर गए तो बाकी लड़कों को तो मंदिर में जाने दिया गया। लेकिन, उन्हें हाथ पकड़कर बाहर कर दिया गया। इसके बाद से उन्होंने भगवान की पूजा करनी छोड़ दी। अब कुछ दिनों पहले 18 दिसंबर 2021 को एक सम्मेलन में पंडितो पर विवादित टिप्पण की। कहा कि अब हर टोला में हमलोग के यहां सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है। इतनी बेशर्म, लज्जा नहीं लगता है कि.... पंडित आते हैं और कहते हैं कि कुछ नहीं खाएंगे आपके यहां, सब कुछ नगद दे दीजिए।

उन्हों ने कहाकि राम एक काल्पनिक पुरुष हैं, मैं उन्हें नहीं मानता

मांझी की पार्टी हम बिहार में एनडीए के साथ शामिल है। एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है और भाजपा राम के नाम पर लंबे समय से राजनीति करती रही है। लेकिन जीतन राम मांझी ने इसकी परवाह किए बिना कहा कि वे भगवान राम को नहीं मानते हैं। राम एक काल्पनिक पुरुष हैं। रामायण में कई अच्छी बातें हैं लेकिन मैं राम को नहीं मानता। मूर्तियों की पूजा नहीं करता बल्कि प्रकृति की पूजा करता हूं। माता शबरी की पूजा करता हूं।

उन्हों ने कहाकि आपकी पत्नी घर पर क्या कर रही हैं....

बिहार पलायन की त्रासदी झेलता रहा है। मांझी ने 2014 में कहा था कि बिहार के लोग आजीविका कमाने के लिए असम, महाराष्ट्र और गुजरात जाते हैं, मेरे शब्दों को अन्यथा ना लें लेकिन यह सच है कि एक युवक अपनी पत्नी को छोड़कर पैसा कमाने के लिए दूसरी जगह चला जाता है। आप एक साल बाद लौटते हैं आपकी पत्नी घर पर क्या कर रही है आप उसकी हरकतों से पूरी तरह अनजान रहते हैं।

उन्हों ने कहाकि ....ये तीनों नेता हनीमून पर चले जाते हैं

जीतन राम मांझी ने तीन युवा नेताओं पर भी विवादित टिप्पणी दी थी। उन्होंने राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और चिराग पासवान पर बयान देते हुए कहा था कि जब भी देश या बिहार में किसी प्रकार का संकट आता है देश के ये तीनों नेता हनीमून मनाने के लिए चले जाते हैं।

उन्हों ने कहाकि उच्च जाति के लोग विदेशी, आदिवासी और दलित ही स्वदेशी

आर्य और अनार्य को लेकर इतिहासकारों ने काफी लिखा है। लेकिन सार्वजनिक रुप से यह बयान देकर मांझी ने बैकवर्ड-फारवर्ड की राजनीति गर्म कर दी थी। उन्होंने कहा था कि उच्च जाति के लोग विदेशी हैं और आर्य के वंशज हैं वे विदेशों से यहां आए। केवल आदिवासी और दलित ही स्वदेशी लोग हैं।

उन्हों ने कहाकि कोरोना के डेथ सर्टिफिकेट पर भी पीएम की फोटो हो

कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद जो सर्टिफिकेट सरकार देती है उस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर रहती है। इस पर भी मांझी ने अपनी टिप्पणी दी थी और मांग की थी कि वैक्सीन के सर्टिफिकेट पर यदि तस्वीर लगाने का इतना ही शौक है तो कोरोना से हो रही मृत्यु के डेथ सर्टिफिकेट पर भी तस्वीर लगाई जाए। यही न्याय संगत होगा। हालांकि इस ट्वीटर को मांझी ने बाद में हटा लिया था।

उन्हों ने कहाकि ठेकेदार का अच्छा नहीं करता तो नक्सलियों द्वारा लेवी वसूली गलत नहीं

मांझी जब सीएम थे, तब उन्होंने नक्सलियों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर ठेकेदार काम अच्छा नहीं करते हैं, तो नक्सलियों द्वारा की जाने वाली वसूली गलत नहीं है। यदि किसी ठेकेदार को 50 हजार मिलता है तो वह केवल 5 हजार ही खर्च करता है। इस स्थिति को सुधारने के लिए अब ठेकेदारी में आरक्षण लाया गया है और साफ सुथरे लोगों को काम दिया जा रहा है। ऐसे में विद्रोह का रास्ता अपनाने वाले मुख्यधारा में लौट आएंगे।

वैसे इस प्रकार का बयान वो सिर्फ इसलिए दे रहें है की उन्हें अपने परिवार के बाकी सदस्यों को सेट करना है |यह उनकी राजनीतिक चाल और प्रेशर पॉलिक्टिक्स हैं। वह समय-समय पर इसलिए बयानबाजी तेज करते हैं, क्योंकि उनका राजनीतिक उल्लू सीधा हो सके। उनकी राजनीति अपने परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आती है। इससे पहले भी 2018 में महागठबंधन में शामिल होने के तुरंत बाद अपने पुत्र संतोष सुमन मांझी को MLC बनवाया था, जबकि विधायक के नाम पर एकमात्र वोट खुद जीतन राम मांझी ही थे। चुनावी गणित में माहिर मांझी ने लालू यादव से साठगांठ कर अपने पुत्र को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की तरफ से उम्मीदवार बनाकर RJD विधायकों के वोट से MLC बना दिया था। अब एक बार फिर जब बिहार में 24 MLC के सीटों के लिए चुनाव होना है, तो वह इस तरह से बयानबाजी कर रहे हैं। उम्मीद है कि उन्हें NDA की तरफ से ज्यादा सीट मिले और वह अपने परिवार के लोगों को सेट करें। बताया जा रहा है कि वह कम से कम 3 MLC की सीट मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के 2 पुत्र और 5 पुत्रियां हैं। उन्होंने अपने बड़े पुत्र संतोष सुमन मांझी को 2018 में ही RJD की मदद से विधान परिषद भेज दिया था। संतोष मांझी की पत्नी दीपा मांझी जिला परिषद सदस्य हैं। वह भी सक्रिय राजनीति में हैं। मांझी के छोटे पुत्र सक्रिय राजनीति में तो नहीं हैं, लेकिन अपने पिता के साथ देखे जाते हैं। वो बिजनेसमैन हैं।इसके अलावा जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी सक्रिय रूप से राजनीति में हैं। उन्हें लगातार विधानसभा का टिकट देकर चुनाव लड़वाते रहे हैं, लेकिन अब तक जीत नहीं पाए हैं। इससे अलग बात यह है कि 2006 से लेकर 2015 तक जीतन राम मांझी ने मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री रहने तक अपने दामाद को अपने निजी सहायक के रूप में नियुक्त किया था। मांझी चाहते हैं कि किसी भी तरह अपने दामाद देवेंद्र मांझी को सदन में भेजा जाए। इसे ही लेकर जीतन राम मांझी NDA पर दबाव बना रहे हैं। अपने बयानों से NDA के कोर वोटर ब्राह्मण समाज पर हमला करके अपनी राजनीतिक मंशा पूरी करना चाहते हैं। बिहार में भूमिहार ब्राह्मण 6% और ब्राह्मण 5.5% हैं। दोनों को मिला दिया जाए तो कुल आबादी 11.5 फीसदी है। मांझी के इस बयान से दोनों समुदायों के लोग आहत हैं।

क्योकि वो अच्छी तरह से जानते है सरकार की नाव डूबने से बचाने के लिए भी जरूरी हैं मांझी| अगर बिहार विधान सभा के गणित को देखा जाए तो अभी सत्तारूढ़ NDA के पास 127 विधायक हैं। इनमें JDU के पास 45 MLA हैं। एक निर्दलीय का समर्थन है। कुल 46 विधायक हैं। भाजपा के पास कुल 74 विधायक हैं। वहीं, 4 विधायक हम के हैं और 3 VIP के विधायक हैं। एक का निधन हो चुका है।

इधर, महागठबंधन में RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को मिलाकर 110 विधायक हैं। पांच विधायक AIMIM के हैं। उन्होंने किसी को समर्थन नहीं दिया है।

बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में मांझी और मुकेश सहनी यदि पलटते हैं तो सरकार संकट में आ जाएगी। इसी बात का फायदा जीतन राम मांझी उठा रहे हैं। हाल में MLC के 24 सीटों पर चुनाव होना है। मांझी उस पर निगाह टिकाए हुए हैं। मांझी इन 24 सीटों में अपने छोटे पुत्र, पुत्रवधू और दामाद को सेट करना चाहते हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

भाटपार रानी में खिलेगा कमल या होगा समाजवाद का झंडा बुलंद

Posted: 24 Dec 2021 03:53 AM PST

भाटपार रानी में खिलेगा कमल या होगा समाजवाद का झंडा बुलंद

देवरिया से हमारे संवाददाता वेद प्रकाश तिवारी की खास पड़ताल |
उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। जिसको लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक दलों के द्वारा एक दूसरे को मात देने के लिए रोज नए-नए राजनीतिक चालें चली जा रही हैं। उत्तर प्रदेश की जनता ने 2017 में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड मत देने का काम किया था। भारतीय जनता पार्टी 2017 में सीएम के चेहरे को सामने रखकर चुनाव नहीं लड़ी थी। संगठन के तत्कालीन मुखिया केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित देवरिया जनपद में 7 विधानसभा सीट है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 7 में से 6 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था। भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र जो देवरिया जिले के पूर्वी छोर पर बिहार सीमा से सटे स्थित है, यहां पर कमल नहीं खिल पाया। 2017 में भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा के अनुज जयनाथ कुशवाहा गुड्डन को अपना प्रत्याशी बनाया था जिन्हें सपा प्रत्याशी डॉक्टर आशुतोष उपाध्याय ने 11000 मतों से पराजित कर समाजवाद का झंडा बुलंद किया था। भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र समाजवाद को मानने वालों का गढ़ रहा है । यहां से राज मंगल तिवारी, कैलाश कुशवाहा, हरिवंश सहाय के साथ-साथ कामेश्वर उपाध्याय 2007 एवं 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इस क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके हैं। 2012 में कामेश्वर उपाध्याय के निधन के बाद 2013 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र डॉक्टर आशुतोष उपाध्याय ने जीत का परचम लहराया था। 2017 में भी आशुतोष उपाध्याय को विजय श्री हासिल हुई थी। भारतीय जनता पार्टी अब अपने संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से दुरुस्त करने में लगी हुई हैं। पार्टी इस बार के चुनाव में कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाह रही है। यहां तक की सेक्टर एवं बूथ समिति के साथ-साथ इस बार बूथ स्तर पर पन्ना प्रमुखों की भी तैनाती की जा रही है। मतदाता सूची के एक पन्ने की जिम्मेवारी एक कार्यकर्ता के पास होगी और वह उस एक पन्ने के साठ मतदाताओं से संपर्क कर भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए आग्रह करेगा। अपने संगठन के दम पर 2022 के विधानसभा चुनाव में एक तरफ भारतीय जनता पार्टी समाजवाद के गढ़ में जहां कमल खिलाने के लिए बेताब दिख रही है, वही डॉ आशुतोष उपाध्याय हैट्रिक लगाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी इस क्षेत्र से 2007 एवं 12 के चुनाव में मुख्य लड़ाई में रही लेकिन 2017 के चुनाव में बसपा के प्रत्याशी रहे सभाकुवंर कुशवाहा जो अब भारतीय जनता पार्टी में हैं वह तीसरे स्थान पर थे। 2022 के चुनाव के निमित्त सभी राजनीतिक दल चुनावी मैदान में ताल ठोकते नजर आ रहे हैं लेकिन बसपा अभी कहीं दिखाई नहीं दे रही है। 2007 एवं 12 में एवं 17 में जिस बसपा से टिकट लेने के लिए होड़ लगा रहता था। आज कहीं उसके विधानसभा प्रभारी जो संभावित प्रत्याशी होते थे दिखाई नहीं दे रहे हैं। बसपा की निष्क्रियता से ऐसा लग रहा है कि भाटपार रानी विधानसभा का चुनाव भाजपा बनाम सपा होने वाला है। भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र को कुशवाहा बाहुल्य सीट कहा जाता है लेकिन 1993 से लेकर बीच में 1996 और 2002 तक का कार्यकाल छोड़ दिया जाए तो उसके बाद से यहां लगातार ब्राम्हण विधायक रहे हैं और वर्तमान में हैं । ब्राह्मण इस विधानसभा क्षेत्र में चौथे-पांचवें नंबर का मतदाता है।राजनीतिक दलों के लिए यह यक्ष प्रश्न है कि कुशवाहा बाहुल्य सीट होने के बाद भी यहां से लगातार ब्राह्मण विधायक होने के पीछे कारण क्या है ? भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र की जनता यह भी स्वीकार करती है कि दिवंगत पूर्व विधायक कामेश्वर उपाध्याय की कार्यशैैैैली और उनका व्यक्तित्व उन्हें इस पद पर आसीन करता रहा और उन्हीं के व्यक्तित्व की वजह से उनकेे पुत्र डॉ आशुतोष उपाध्याय इस पद पर आसीन हैं । ऐसा भी माना जाता है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से टिकट के दावेदार रहे कुछ नेताओं के भीतर घात के कारण भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई थी। वहीं समाजवादी पार्टी भाजपा प्रत्याशी को बाहरी प्रत्याशी बताकर अपनी रणनीति धार देने में सफल हो गई और उसकी चुनावी जमीन पहले से ही तैयार भी थी। 2022 के चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी से एक दर्जन से ऊपर नेता टिकट की दावेदारी किए हुए हैं। अब देखना यह है कि पार्टी 2017 के प्रत्याशी को रिपीट करती है या नये चेहरे पर दाव लगाती है । वैसे क्षेत्र की जनता का मूड देखकर पार्टी तय करेगी कि प्रत्याशी कौन होगा । यदि पूर्वांचल की विकास की बात करें तो योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूर्वांचल में विकास की धारा तेज हुई है । एम्स, खाद कारखाना की सौगात देने के अलावे पूर्वांचल को मेडिकल हब बना दिया गया है । कोरोना काल में मुख्यमंत्री की कार्यशैली को देश ने सराहा है । कानून व्यवस्था की स्थिति से लेकर जन- जन तक खाद्यान्न की व्यवस्था भी उन सराहनीय कार्यों में से एक है । जन विश्वास यात्रा के जरिए भाजपा मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रही है । योगी आदित्यनाथ आज भी उत्तर प्रदेश में सबसे पसंदीदा चेहरा हैं । देखना यह है कि भाटपार रानी की जनता भाजपा के प्रत्याशी को100 में से कितने नंबर देती है । फिलहाल टिकट पानेे की होड मेें सभी नेता अपनी- अपनी शक्तियों का प्रदर्शन कर रहे हैं ।
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'कोविड-19 टीकाकरण', 'एक जिला एक उत्पाद' एवं 'पूर्ण शराबबंदी' पर विशेष कार्यक्रम का किया गया आयोजन

Posted: 24 Dec 2021 03:41 AM PST

'कोविड-19 टीकाकरण', 'एक जिला एक उत्पाद' एवं 'पूर्ण शराबबंदी' पर विशेष कार्यक्रम का किया गया आयोजन

पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाने के लिए महिलाएं आगे आएं - डीएम
ऊंटा मध्य विद्यालय के एक कमरे को मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है - जिलाधिकारी
आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आज जहानाबाद जिले की ऊंटा मध्य विद्यालय में 'कोविड-19 टीकाकरण' एवं 'एक जिला एक उत्पाद' विषय पर वृहद प्रचार-प्रसार हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सकार के रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा किया गया। जहानाबाद के जिलाधिकारी हिमांशु कुमार राय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
मौके पर कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अमरेंद्र मोहन, विशेष कार्य पदाधिकारी संजीव जमुआर, आत्मा के उप प्रबंधक राकेश कुमार, ऊंटा मध्य विद्यालय के प्राचार्य प्रमोद कुमार और अरवल के दूरदर्शन संवाददाता एवं प्रख्यात कवि प्रवीण कुमार मिश्र मौजूद थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जहानाबाद के जिलाधिकारी हिमांशु कुमार राय ने कहा कि हमें आंदोलन के समय के मूल्यों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक उन आदर्शों और मूल्यों को बच्चों तक पहुंचाएं और बच्चे इन्हें सहेज कर रखें। इससे न केवल समाज का बल्कि देश का विकास होगा। एक जिला एक उत्पाद विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जहानाबाद में मशरूम की खेती को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊंटा मध्य विद्यालय के एक कमरे को मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मशरूम ना केवल उच्च प्रोटीन उक्त बल्कि अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चे कल का भविष्य है, उन्हें कृषि और कृषि संबंधी विभिन्न क्रियाकलापों से अवगत कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्ण शराबबंदी की दिशा में जिला प्रशासन विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चला रहा है। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं पुरुषों को शराब पीते हुए थे उनका पुरजोर विरोध करें प्रभात फेरिया निकाले और राज्य सरकार के इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा कि कोविड-19 टीकाकरण और एक जिला एक उत्पाद के प्रति लोगों के बीच वृहद प्रचार प्रसार के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के नए वेरिएंट ओमीक्रोन के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर लोगों को पूर्ण टीकाकरण अति आवश्यक है। जिन लोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उन्हें जल्द से जल्द टीका लेना चाहिए। कोविड-19 का टीका से इस जानलेवा बीमारी के फैलने से रोक जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक जिला एक उत्पाद स्कीम ना केवल जिले के विकास के लिए बल्कि भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत और लोकल फॉर वोकल योजना को बल देने वाला है। इससे बेरोजगारी को कम किया जा सकेगा और साथ ही जिले में व्यवसाय के नए आयाम बनाए जाएंगे।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय के सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अमरेंद्र मोहन ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव वास्तव में आजादी के महान स्वतंत्रता सेनानियों और गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि देने के लिए है। हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को उन नायकों के बारे में रूबरू करवाना, उनके संदेशों मूल्यों और आदर्शों पर चलने का सबक देना इसका मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का प्रचार-प्रसार अधिक ना हो इसके लिए हमें 4 नियमों का पूर्ण का पालन करना है, पहला मास्क पहनना, दूसरा बार बार हाथ धुलना, तीसरा उचित दूरी बनाए रखना और चौथा सबसे महत्वपूर्ण है टीकाकरण करवाना।
ऊंटा मध्य विद्यालय के प्राचार्य और 2021 के राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित प्रमोद कुमार ने कहा कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने और देश के विकास में केंद्र सरकार का एक जिला एक उत्पाद योजना दूरगामी साबित होगा। जहानाबाद जिले में मशरूम की खेती की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में न केवल जानना चाहिए बल्कि उनके आदर्शों और उन्हें उनके संदेशों को अमल में भी लाना चाहिए।
आत्मा के उप प्रबंधक राकेश कुमार और वृहत पैमाने पर मशरूम की खेती करने वाले किसान गौरव राज ने मशरूम की गुणवत्ता और इसके व्यवसाय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि मशरूम न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से एक शानदार फसल है बल्कि यह कैंसर, अस्थमा जैसी 84 प्रकार की बीमारियों को दूर भगा सकता है। सप्ताह में कम से कम 2 बार मशरुम का सेवन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मशरूम प्रोटीन, विटामिन डी, विटामिन बी12 जैसी कई आवश्यक पोषक तत्वों से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती ना केवल पूरे साल की जा सकती है बल्कि यह बेहद कम लागत में भी संभव है। उन्होंने कहा कि जहानाबाद में कोई भी व्यक्ति 4 से 5 प्रजाति के मशरूम की खेती आसानी से कर सकता है। कार्यक्रम की समाप्ति से पूर्व जिलाअधिकारी हिमांशु कुमार राय ने चित्रांकन प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहीं ऊंटा मध्य विद्यालय की छात्राओं क्रमश ज्योति कुमारी, खुशी कुमारी और सिमरन कुमारी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें बच्चों के साथ-साथ आम ग्रामीणों ने भी हिस्सा लिया और मौके पर पुरस्कार प्राप्त किया। इसके साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पंजीकृत सांस्कृतिक दल भारतीय संगीत कला एवं सेवा संस्थान वैशाली के कलाकारों के द्वारा भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं पर लोकगीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसका लोगों ने खूब लुफ्त उठाया।
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अटल बिहारी वाजपेयी: सुशासन के पर्याय

Posted: 24 Dec 2021 03:20 AM PST

अटल बिहारी वाजपेयी: सुशासन के पर्याय

- अर्जुन राम मेघवाल,केन्द्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार
सुशासन ऐसी धरोहर है जिसे भारत की प्राचीन संस्कृति और लोकाचार से आत्मसात किया गया है। बौद्ध धर्म के गण संघ, भगवान बासवेश्वकर द्वारा 11वीं शताब्दी ईस्वी में स्थापित अनुभव मंडप, चाणक्य के अर्थशास्त्र, सिधुं घाटी सभ्यता के दौरान नगर योजना, मौर्य सम्राट अशोक की धरोहर के और अन्य माध्यमों से पुनः संचित प्रजातांत्रिक मूल्य बेहतर सुशासन हेतु विरासत में मिले ज्ञान भंडार हैं। श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को मनाने हेतु सुशासन दिवस के अवसर पर, यह अत्यावश्यक है कि हम स्वतंत्र भारत में सर्वोत्तम सुशासन उपायों को संस्थागत बनाने में उनकी असाधारण भूमिका पर प्रकाश डालें और उसे आज के संदर्भ में ग्रहण करें।

स्वतंत्रता के बाद, सुशासन का मुद्दा शासन संबंधी सुधारों का केन्द्र बिन्दु रहा, परन्तु ऐसा केवल बातचीत के स्तर पर ही होता रहा। संविधान सभा के वाद-विवाद में या योजना आयोग जैसी संस्थाओं में, विधिवत रूप से तैयार की गई नीति परिचर्चा केवल कागजों में ही सिमटी रही और इन्हें कार्यान्वित करने हेतु कारगर उपाय नहीं किए जा सके। श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व और राजनैतिक कौशल के साथ, हमारा देश ऐतिहासिक सुशासन प्रयासों का साक्षी बना जिनसे जनता के जीवन में समृद्धि आई।

लोक सभा सदस्य के रूप में दस कार्यकाल और राज्य सभा सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरे करने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सांसद के रूप में अपनी कार्यावधि के दौरान सुशासन की बारीकियों पर प्रकाश डाला। नेता, प्रतिपक्ष के रूप में उनकी तर्कसंगत दलीलों और रचनात्मक समालोचनाओं में कल्याण-केन्द्रित सुशासन तंत्र के लिए प्रेरित करने का बल था। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, उनकी जनोन्मुखी पहलें नये भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित हुईं। उनके द्वारा किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए प्रारंभ किए गए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के द्वारा अवसरंचनात्म्क संवर्धन, नदियों को आपस में जोड़ने तथा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम की अवधारणा तैयार करना, सर्व शिक्षा अभियान के माध्य्म से शैक्षिक सुधार, पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन आदि ऐसे कुछ उपाय हैं जिन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रभावित किया। अर्द्ध-न्यायिक केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग की स्थापना की गई और विद्युत क्षेत्र में वर्षों पुराने विद्युत अधिनियम में संशोधन किया गया ताकि विनियामक रूपरेखा में सुधार किया जा सके।

मई, 1998 में, पोखरण, राजस्थान में उनकी राष्ट्रीय शासन कार्यसूची के भाग के रूप में किए गए परमाणु परीक्षणों के कारण भारत का नाम परमाणु शक्ति संपन्न देशों में शामिल हो गया। कश्मीर की जटिल समस्या का समाधान करने के लिए वाजपेयी जी के मानवता, शांति और कश्मीरी लोगों के आत्मसम्मान को कायम रखने हेतु प्रसिद्ध सिद्धांत 'इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत' में उनकी लोकप्रिय बौद्धिकता प्रतिबिंबित होती है। विदेश नीति से संबंधित उनके ये विचार कि 'आप मित्र बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं', सभी मंचों पर भागीदारी का निरन्तर स्रोत रहे हैं। मां भारती की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति देने वाले हमारे वीर सैनिकों के पार्थिव शव उनके परिवारजनों को सौंपने का निर्णय भी अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार द्वारा किया गया ताकि मातृभूमि की रक्षा में अपना बलिदान देने वाले शहीदों का अंतिम संस्कार उनके परिवारजनों के द्वारा सम्मानपूर्वक किया जा सके। अटल जी, आपसी सामंजस्य में विश्वास रखने वाले यथार्थवादी राजनेता थे और यह तथ्य इस बात से प्रकट होता है कि वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में से शांतिपूर्ण रूप से क्रमशः छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड नामक तीन नए राज्यों की स्थापना की गई। यह सरकार को जनता के निकट ले जाकर सुशासन स्थापित करने का एक सुविचारित प्रयास था।

वह डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के विचारों की भविष्योन्मुखी अंतर्दृष्टि से अत्यंत प्रभावित थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी और लाल कृष्ण आडवाणी जी के प्रयास से ही वी. पी. सिंह सरकार ने भाजपा के समर्थन से डॉ. भीमराव अम्बेडकर को 31 मार्च, 1990 को भारत रत्न से सम्मानित किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी की इच्छानुसार दिल्ली स्थित 26 अलीपुर रोड, जहां सिरोही, राजस्थान के महाराजा ने डॉ. अम्बेडकर को केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा (1951) देने के पश्चात रहने के लिए आमंत्रित किया था, को संग्रहालय के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई जिससे लोगों को सामाजिक समता के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। डॉ. अम्बेडकर ने इसी स्थान पर अपनी अंतिम सांस ली थी। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा वाजपेयी जी की देखरेख में 14 अक्तूबर, 2003 को निजी संपत्ति के विनिमय विलेख पर हस्ताक्षर किए गए और दिसम्बर, 2003 में विकास कार्य शुरू किया गया। बाद में यूपीए के कार्यकाल के दौरान इस परियोजना को रोक दिया गया। मोदी सरकार ने इसे 100 करोड़ रुपए की लागत पर डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया और 13 अप्रैल, 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 21वीं शताब्दी के प्रारंभ होते ही कई पहलों के साथ सुशासन अभियान को शुरु कर दिया था। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और नए भारत (न्यू इंडिया) को 21वीं शताब्दी का वैश्विक नेता बनाने के लिए इसे तेज गति के साथ आगे बढ़ाया है। डीबीटी, जेएएम ट्रिनिटी, फेसलेस टैक्सेशन जैसी प्रौद्योगिक युक्तियों और इन्हीं के समान अन्य कार्य योजनाओं को कार्यान्वित करने से विवेकाधीन संसाधनों के कम उपयोग की संभावना बनी है, जिसके फलस्वरूप ऐसी संस्थाओं में लोगों का विश्वास बढ़ा है। जहां किसान क्रेडिट कार्डों का दायरा बढ़ा है वहीं कृषि से संबंधित कार्यकलापों का निगमीकरण हुआ है। भारतमाला, सागरमाला, राष्ट्रीय परिसंपत्ति, नेशनल ऐसेट मोनेटाइनेशन पाइपलाइन, कृषि अवसंरचना निधि और पीएमजीएसवाई चरण के विस्तारण के कारण निर्माण क्षेत्र को अत्यधिक बढ़ावा मिला है। अनुच्छेद 370 अर्थात् जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति के फलस्वरूप जम्मू और कश्मीर में प्रभावी और दक्ष सेवाओं से संबंधित संवितरण कार्य तंत्र (डिलीवरी मकैनिज्म) के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। अब प्रत्येक वर्ग के लोगों को विकास कार्य सूची के दायरे में लाया जा रहा है।

'सरकार की न्यूनतम भूमिका और सुशासन की अधिकतम मात्रा' (मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस) नामक इस मंत्र से नागरिकों के बीच जीवन की सहज अनुभूति हुई है। संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा व्यापारियों, व्यक्तियों और अन्य हितधारकों पर अनुपालन का भार कम करने पर विशेष ध्यान देकर 'मिशन कर्मयोगी' के माध्यम से प्रधानमंत्री गतिशक्ति, प्रगति क्षमता निर्माण जैसी पहलों सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के द्वारा सुशासन संबंधी बाधाओं का निराकरण बेहतर सेवा संवितरण सुनिश्चित करेगा। जीएसटी, श्रमिक संहिताओं, दिवाला और वंचन संहिता, नयी शिक्षा नीति, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान और कर संबंधी विवादों के निर्बाध समाधान कार्य कुछ ऐसे अन्य पहलू हैं जिनसे पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के अन्य आयाम सुदृढ़ हो रहे हैं। यह ऐसे किए गए उपायों का ही प्रमाण है कि आज भारत सहज व्यवसाय संचालन के क्षेत्र में वर्ष 2015 में 145 से 79वें स्थान पर और वर्ष 2020 में 63वें स्थान पर पहुंच गया है। इसी प्रकार भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में वर्ष 2015 में 81वें स्थान से वर्ष 2021 में 46वें स्थान पर पहुंच गया है। हाल ही में 8 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री परिषद द्वारा केन-बेतवा अंतर संबद्ध परियोजना को मंजूर किए जाने से यह परियोजना अतिशेष जल क्षेत्रों से सूखाग्रस्त और अल्प जल मात्रा वाले क्षेत्रों में जल पहुंचाने वाली पहली प्रमुख केंद्र संचालित परियोजना बन गई है, जिससे अटल जी का देखा सपना साकार हो रहा है।

समाज, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास श्रृंखलाओं से जुड़ा हुआ हैं। इसी प्रकार सुशासन संबंधी सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए समानता होना आवश्यक है ताकि सभी हितधारकों के कल्याण के लिए इन रचनात्मक परिवर्तनों को उपयोग में लाया जा सके। मोदी सरकार द्वारा समयबद्ध ढंग से योजनाओं को लागू करना वस्तुतः एक उल्लेखनीय उपलब्धि है जिसके फलस्वरूप अब तक बहुत-सी ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। कहा जाता है कि सुधार के लिए हमेशा गुंजाइश रहती है, इसलिए बहुत-से महत्वपूर्ण सुधार कार्य अनवरत रूप से किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने एक साथ चुनाव कराने, एकल चुनाव पंजि बनाने और राष्ट् के सर्वाधिक हित में बहुत-से मंचों पर अखिल भारतीय न्यायिक सुधारों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है। सुधार प्रक्रियों पर तेजी से अमल करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के बीच संघीय और राजनीतिक स्तरों पर उचित परामर्श किए जा रहे हैं।

अच्छे सुशासन से अभिप्रेत, सुसंस्थापित संवैधानिक कार्ययोजना के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कदम उठाते हुए उनकी अपरिहार्य रूप में सेवा करने से है। अटल जी का दृष्टिकोण, नेतृत्व, मार्गदर्शन और उनकी अमूल्य अंतर्दृष्टि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा ही प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। चूंकि, राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान सुशासन दिवस मना रहा है, इसलिए आवश्यक है कि हम न्यू इंडिया का निर्माण करने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' की भावना से काम करने के लिए अपना आत्मविश्लेषण करते हुए शपथ लें।



- अर्जुन राम मेघवाल,

केन्द्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार एवं लोकसभा सांसद,बीकानेर
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जन्म के समय ईसा मसीह का नाम एमानुएल था और इस शब्द का अभिप्राय मुक्ति प्रदान करने से है |

Posted: 23 Dec 2021 07:53 AM PST

जन्म के समय ईसा मसीह का नाम एमानुएल था और इस शब्द का अभिप्राय मुक्ति प्रदान करने से है | 

जितेन्द्र कुमार सिन्हा

विभिन्न धर्म के लोग भारत में रहते हैं, जिनमें हिन्द, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध प्रमुख है। यही कारण है कि सभी तरह के पर्व, धर्म निरपेक्ष भारत में मनाया जाता हैं। ईसाई धर्म के लोगों का महान पर्व है क्रिसमस अर्थात् बड़े दिन का त्योहार । यह त्योहार लगभग विश्व के सभी देशों में मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष यह पर्व 25 दिसम्बर को मनाया जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह का जन्म हुआ था।


भूगोल की दृष्टि से यह दिन सबसे बड़ा दिन होता है इसलिए इसे बड़ा दिन भी कहते हैं। क्रिसमस का त्योहार मुख्य रूप से इसाई धर्म के अनुयायियों और उसके समर्थकों द्वारा मनाया जाता है। क्योंकि ईसा मसीह का जन्म 25 दिसम्बर की रात बारह बजे बेथलेहम शहर में स्थित एक गौशाला में हुआ था। इनकी माँ का नाम मरियम था, जो दाउद वां की थी। जन्म के समय ईसा मसीह का नाम एमानुएल रखा गया था। इस शब्द से अभिप्राय मुक्ति प्रदान करने वाले से है। इनके नाम के अनुरूप ही कहा जाता है कि ईश्वर ने उन्हें इस धरती पर मुक्ति प्रदान करने वाले के रूप में अपना दूत बनाकर भेजा था, जिसे ईसा मसीह ने अपने कार्यों द्वारा सिद्ध भी कर दिखाया था। पर्व से ठीक एक दिन पूर्व 24 दिसम्बर से लोग अपने घरों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों को सजाने लग जाते हैं। ईसा मसीह के जन्म दिन के दिन रात्रि 12 बजे गिरजाघरों में प्रार्थना सभा शुरू हो जाती है और शुरू हो जाता है बड़े दिन का त्योहार। प्रार्थना समाप्त होने पर वहां उपस्थित सभी लोग एक दूसरे को बधाई देकर अपने अपने घर लौट जाते हैं। यह त्योहार विश्व का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है।


ईसाई धर्म के विशालता के कारण इस सम्प्रदाय के लोग लगभग विश्व के हर हिस्से में रहते हैं। इसलिए यह त्योहार पूरे विश्व में बहुत धुमधाम से मनाया जाता है। सत्य, अहिंसा और मानवता के संस्थापक और प्रतीक कहलाते हैं ईसा मसीह।
ईसा मसीह ने भेड़ बकरियों को चराते हुए उस समय प्रचलित अंधविश्वासों और रूढ़ियों के प्रति विरोध जाताना शुरू किया था, जिसका लोगों ने काफी विरोध किया था। उनके विरोधी ज्यादा होने के कारण उन्हें प्रसिद्धि मिलने में समय नहीं लगा। ईसा मसीह के विचारों को सुन यहूदी लोग घबरा उठे। यहूदी अज्ञानी होने के साथ-साथ अत्याचारी भी थे। वे ईसा मसीह को मूर्ख कह कर जलते भी थे लेकिन अंदर से वह ईसा मसीह से भयभीत भी रहते थे। उन्होंने ईसा मसीह का विरोध करना जोर-सोर से शुरू कर दिया था और यहूदियों ने ईसा मसीह को जान से मार डालने की योजना भी बनानी शुरू कर दी थी। ईसा मसीह को जब पता चला कि यहूदि उन्हें मारना चाहते हैं तो वे यहूदियों से कहा करते थे कि तुम मुझे आज मारोगे मै कल फिर जी उठूंगा।

भारत की राजधानी दिल्ली में ओमिक्रोन के बढ़ते मामले को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर इस वर्ष क्रिसमस का जशन मनाने पर रोक लगा दी है।
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मन के भाव

Posted: 23 Dec 2021 07:47 AM PST

मन के भाव

लेखनी ले भाव लिखता मन में धर सुविचार कोई 
ह्रदय के भावों में बहती मधुरम सी रसधार कोई

वाणी का आराधक बनकर शब्द सुमन सजाता हूं 
अल्फाजों के मोती चुन चुन गीत सुहाने गाता हूं

वीणा वादिनी प्रज्ञा दायिनी हंस वाहिनी करो कृपा 
दिव्य शब्द अलंकारों से मात भवानी कलम सजा

मन की वीणा के तारों से ध्वनी दस्तक दे दिल को
हर्ष भरा मन का आंगन हृदय सारा प्रफुल्लित हो 

बहे प्रेम की पावन धारा गीतों से महफिल महके 
उर उमंग हर्षोल्लास से हृदय का कोना चहके 

होठों की मुस्कान मधुर सी चेहरे पर खुशियां लाये 
तेरी कृपा से मात भवानी लेखनी चलती जाये 

दीप जले आलोकित घट में पूजा मनमंदिर तेरी 
शब्दों का भंडार दो माता भर दो मां झोली मेरी

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुयी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्यस्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक जब से हमें काम करने का मौका मिला है, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिये काफी काम किया गया है- मुख्यमंत्री

Posted: 23 Dec 2021 07:22 AM PST

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुयी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्यस्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक जब से हमें काम करने का मौका मिला है, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिये काफी काम किया गया है- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री के निर्देष-

  • पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधीक्षकों के साथ लंबित कांडों के अनुसंधान की महीने में कम से कम एक बार नियमित समीक्षा करें ताकि मामलों का निष्पादन तेजी से हो सके।
  • पुलिस महानिदेशक विशेष अभियान चलाकर लंबित काण्डों का अनुसंधान कराकर निर्धारित 60 दिन के अन्दर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कराएं।
  • कनविक्शन रेट बढ़ाने हेतु स्पीडी ट्रायल के लिए विशेष प्रयास करें ताकि समाज के कमजोर वर्ग के सभी व्यक्तियों को ससमय न्याय मिल सके।
  • जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जिलों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें एवं पीड़ित व्यक्तियों को ससमय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करायें।

पटना, 23 दिसम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित 'संवाद' में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुयी। यह बैठक साढ़े चार घंटे से भी अधिक समय तक चली। बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव श्री दिवेश सेहरा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विगत बैठक की कार्यवाही एवं अनुपालन की विस्तृत जानकारी दी। समीक्षा के क्रम में अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), निदेशक अभियोजन, सचिव, विधि विभाग द्वारा इस संबंध में किए जा रहे कार्यों की बिंदुवार जानकारी दी।
बैठक में पुलिस महानिदेशक के स्तर पर दोष सिद्धि निपटारे के लिये की गयी कार्रवाई, पीड़ित व्यक्तियों को दी जाने वाली राहत एवं पुनर्वास सुविधाओं तथा उनसे जुड़े अन्य मामलों की भी समीक्षा हुई। जिलास्तर पर गठित निगरानी एवं अनुश्रवण समिति के कार्यकलापों की जानकारी, विशेष लोक अभियोजकों के कार्यों की समीक्षा, संबंधित पदाधिकारियों के लिए नियमित रुप से प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ अन्य कार्यवाही की भी जानकारी दी गयी।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की बैठक में आप सभी सदस्य शामिल हुए हैं, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूूॅ। सभी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़ी अपनी बातें एवं सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जो बातें सामने रखीं गई हैं, उसका एक पक्ष इस अधिनियम के अंतर्गत की जा रही कार्यवाही के संबंध में है तो दूसरा पक्ष अनुसूचित जाति/जनजाति के हित में काम किये जा रहे कार्यों को और बेहतर ढ़ंग से क्रियान्वित करने को लेकर है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग संबंधित विभागों को जनप्रतिनिधियों द्वारा रखी गयी समस्याओँ एवं सुझावों से अवगत कराये ताकि उस पर तेजी से अमल हो सके। विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में भी जन प्रतिनिधियों को अवगत करायें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधीक्षकों के साथ लंबित कांडों के अनुसंधान की महीने में कम से कम एक बार नियमित समीक्षा करें ताकि मामलों का निष्पादन तेजी से हो सके। पुलिस महानिदेशक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अधिसूचित कार्याे की समीक्षा करें तथा विशेष अभियान चलाकर लंबित काण्डों का अनुसंधान कराकर निर्धारित 60 दिन के अन्दर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कराएं। कनविक्शन रेट बढ़ाने हेतु स्पीडी ट्रायल के लिए विशेष प्रयास करें ताकि समाज के कमजोर वर्ग के सभी व्यक्तियों को ससमय न्याय मिल सके। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जिलों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें एवं पीड़ित व्यक्तियों को ससमय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करायें। जिला स्तर पर गठित सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति के कार्यकलापों भी समीक्षा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष लोक अभियोजकों की कार्य क्षमता की समीक्षा करें और योग्य विशेष लोक अभियोजकों को दायित्व सौंपे ताकि वे न्यायालय में बेहतर ढ़ंग से पक्ष रख सकें। इस अधिनियम के तहत दर्ज कांडों के त्वरित निष्पादन हेतु 9 अनन्य विशेष न्यायालयों के गठन की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूर्ण करें। अनन्य विशेष न्यायालयों में इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की ही सुनवाई हो। अत्याचार होने पर घटना स्थल का निरीक्षण निश्चित रुप से हो। अगर संबंधित अधिकारी ऐसा नहीं करते हैं तो वरीय अधिकारी जाकर स्थल निरीक्षण करें। गृह विभाग एवं विधि विभाग कनविक्शन रेट में सुधार एवं लंबित मामलों में कमी लाने के लिए नियमित अनुश्रवण करे। चिकित्सा जांच प्रतिवेदन ससमय प्राप्त हो, यह सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में कनविक्शन रेट में कमी और स्पीडी ट्रायल में सुधार लाने को लेकर लगातार समीक्षा करें। विधि विभाग यह सुनिश्चित करें कि गवाह ससमय कोर्ट पहुंचे और उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जिलास्तर पर अत्याचार के पीड़ित/आश्रितों को राहत अनुदान की स्वीकृति तत्काल दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से हमें काम करने का मौका मिला है अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए काफी काम किया गया है। अनुसूचित जाति में से महादलित वर्ग के लिए विशेष काम किया गया। बाद में सभी अनुसूचित जातियों को वह सारी सुविधायें दी गई। सरकार में आने के बाद सर्वे कराने के बाद यह पता चला कि 12.5 प्रतिशत बच्चे-बच्चियां जो स्कूल नहीं जा पाते हैं, उनमें ज्यादातर महादलित एवं अल्पसंख्यक वर्गों से आते हैं। सभी बच्चे-बच्चियों को स्कूल पहुंचाया गया। वर्ष 2008 तक पूरे बिहार में 22,000 स्कूल बनवाये गये। अनुसूचित जाति-जनजातियों के जिन संस्थानों के भवनों की स्थिति ठीक नहीं थी उन्हें अलग से ठीक कराया गया। शिक्षकों की बहाली की गई। पहले अनुसूचित जाति-जनजाति की क्या स्थिति थी सभी जानते हैं। हमलोगों के सरकार में आने के बाद से इस वर्ग के लिए काफी काम किया गया है। आज की बैठक में शामिल सदस्यों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण के कार्यों और बेहतर ढ़ंग से क्रियान्वित करने के लिए जो सुझाव दिये, विभाग उस पर भी तेजी से काम करे।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री-सह-सदस्य बिहार विधानसभा श्री जीतन राम मांझी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, विधान सभा के उपाध्यक्ष श्री महेश्वर हजारी, सांसद श्री विजय कुमार, सांसद श्री आलोक कुमार सुमन सहित अन्य विधायकगण, विधान पार्षदगण उपस्थित थे, जबकि दिल्ली से वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से सांसद श्री प्रिंस राज भी जुड़े हुए थे।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री विवेक कुमार सिंह, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव श्री दिवेश सेहरा, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, निदेशक अभियोजन, श्री प्रभुनाथ सिंह, सचिव विधि श्री फूलचंद्र चैधरी, अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग, श्री अनिल कुमार यादव सहित अन्य वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

‘हिन्दू देवस्थानोंको सेक्युलर बनानेका षड्यंत्र !’ इस विषय पर ‘ऑनलाइन’ विशेष संवाद !

Posted: 23 Dec 2021 07:07 AM PST

'हिन्दू देवस्थानोंको सेक्युलर बनानेका षड्यंत्र !' इस विषय पर 'ऑनलाइन' विशेष संवाद !

हिन्दू मंदिर में हस्तपेक्ष करने का अधिकार सरकार एवं न्यायालय को नहीं !
- स्वामी परिपूर्णानंद महाराज, तेलंगणा


     हिन्दू मंदिरों की व्यवस्थापन समितियों में अन्य धर्मियों ने भी घुसपैठ की है । हिन्दू मंदिरों के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है । जो निधर्मी लोग हिन्दू मंदिरों का कामकाज चलाना चाहते हैंवे ही हिन्दुओं की देवी-देवताओं को 'सैतान' मानते हैं । मंदिर परिसर के पास अन्य धर्मीय अपनी दुकान खोलते हैंकिंतु मस्जिदें एवं चर्च के समीप हिन्दुओं के उत्सवों की शोभायात्रा निकालने पर उसे विरोध किया जाता है । 'हलाल' पर प्रतिबंध लगानेहिन्दुओं के उत्सवों के निमित्त शोभेयात्राआें को स्वतंत्रता देने पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय करना चाहिएपरंतु हिंदुओं के मंदिर अन्य धर्मियों के नियंत्रण में देने का निर्णय हिन्दुओं पर लादा जा रहा है । सरकार आणि सर्वोच्च न्यायालय को हिन्दुओं के मंदिरों का धननियमों में हस्तपेक्ष करने का अधिकार नहीं हैऐसा स्पष्ट प्रतिपादन तेलंगाना के स्वामी परिपूर्णानंद महाराजजी ने किया । हिन्दू जनजागृति समिति आयोजित 'हिन्दू देवस्थानों को सेक्युलर बनाने का षड्यंत्र !' इस 'ऑनलाइन' विशेष संवाद में वे बोल रहे थे ।

     'हिंदु फ्रंट फॉर जस्टिस्' के प्रवक्ता अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा किसरकार किसी भी प्रकार से हिन्दुओं के मंदिरों को नियंत्रण में नहीं रख सकती । भक्त एवं श्रद्धालु जो पैसा हिंदुओं के मंदिर में अर्पण करते हैंवह पैसा सरकार अन्य धर्मियों के लिए कैसा उपयोग में ला सकती है यह हिंदुओं के साथ विश्‍वासघात एवं घोटाला है । मंदिरों में केवल देवताओं के नियम चलेंगे । हिन्दुओं के मंदिर व्यवस्थापन में अन्य धर्मीय हस्तक्षेप कर हिंदुओं के मंदिर भ्रष्ट कर रहे हैं । संविधान के अनुच्छेद 26 के अनुसार ' हिंदुओं   को अपने मंदिरों की व्यवस्था देखने का पूर्ण अधिकार है'तथा अनुच्छेद 25 के अनुसार ' हिंदुओं   को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता अबाधित रखकर धर्म अपनी पद्धति से जीने का अधिकार है ।' अधिवक्ता विष्णु जैन ने बताया किइस विषय में हिन्दुओं का पक्ष वे सर्वोच्च न्यायालय में रखेंगेयदि न्यायालय ने इसकी अनदेखी कीतो जनता में जाग्रति कर हिन्दुओं की आवाज लोकप्रतिनिधियों द्वारा संसद में पहुचाएंगे ।

     कर्नाटक के अधिवक्ता श्रीहरी कुत्स ने कहाअन्य धर्मियों को मंदिर परिसर में दुकान खोलने के लिए अनुमति दी जाती हैपरंतु क्या मस्जिद परिसर में हिन्दुओं को दुकान चलाए दिए जाएंगे सरकार मंदिरों को प्रेक्षणीयपर्यटन स्थल के समान क्यों देख रही है इस पर रोक लगनी चाहिए । इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता श्रीनरेंद्र सुर्वे ने कहा किमंदिर धर्म की आधारशीला है । विविध सरकारों ने मंदिरों को अधिग्रहीत कर मंदिरों को लुटना आरंभ किया है । अनेक मंदिरों की भूमि पर अतिक्रमण कर वह भूमि हडप ली गई । मंदिरों के धन का अनुचित उपयोग हज यात्रियों को अनुदान देने सहित अनेक बातों के लिए किया जा रहा है । अब उन्होंने धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करना आरंभ किया है । हिंदुओं की मंदिर संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास एक सुनियोजित षड्यंत्र द्वारा किए जा रहे हैं । यह वेदनादायी हैं । जिससे हिंदुओं के मन में असंतोष निर्माण हो रहा है । अब हिन्दू समाज यह अधिक काल सहन नहीं करेगा ।



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हरीश रावत का नया सियासी चेहरा

Posted: 23 Dec 2021 06:50 AM PST

हरीश रावत का नया सियासी चेहरा

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

उत्तराखण्ड में पूर्व मुख्यमंत्री और कांगेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत मनमर्जी न होने से परेशान हैं। राज्य में एक महीने बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस चाहती है कि मुख्यमंत्री का कोई चेहरा सामने न रखकर पार्टी के नाम पर चुनाव कराया जाए। हरीश रावत इसके पक्ष में नहीं हैं और उनके समर्थकों ने जिस तरह का अभियान पूर्व में चलाया था, उससे लगता है कि हरीश रावत अपने चेहरे को सामने रखना चाहते हैं। प्रदेश कांग्रेस में कुछ और समस्याएं भी हो सकती हैं लेकिन हरदा के इन दिनों जिस तरह से ट्वीट आ रहे हैं, उससे कांग्रेस आला कमान अपने को असहज महसूस करने लगा है। हरीश रावत कहते हैं- सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं, जिनके आदेश पर तैरना है। उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है। इसके बाद हरीश रावत एक और ट्वीट करते हैं, फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है न दैन्यं न पलायनम्। बड़ी ऊहापोह की स्थिति में हूं। नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति मे मेरा मार्ग दर्शन कर सकेंगे। इस प्रकार हरीश रावत एक तरह से अपनी पार्टी के नेतृत्व से ही परेशान है। लेकिन हाईकमान इसे घातक नाटक समझ रहा। इसीलिए पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी याद दिलाते हैं- पहले असम, फिर पंजाब, अब उत्तराखण्ड भोग पूरा ही पाउण गे, कसर न रह जाए कोई ध्यान रहे कि हरीश रावत पंजाब, असम के प्रभारी रह चुके हैं और अब उत्तराखण्ड का प्रभार संभाले हैं। हरीश के इस व्यवहार पर भाजपा भी तंज कस रही है।

कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने उत्तराखंड में फ्री हैंड न मिलने और संगठन के लोगों से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी। इस पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने हरीश रावत पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया है, पहले असम, फिर पंजाब, अब उत्तराखंड... भोग पूरा ही पाउण गे, कसर न रह जावे कोई। बता दें कि तिवारी पहले भी पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू से लेकर कांग्रेस हाईकमान के नए नेताओं पर निशाने साधते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत न इसके बाद फिर ट्विटर पर लिखा था, है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है! इसके बाद से कांग्रेस नेता ने मनीष तिवारी ने निशाना साधा है। वहीं हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से बदलावों के संकेत दिए थे। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था। नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।

कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने उत्तराखंड में फ्री हैंड न मिलने और संगठन के लोगों से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है। उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव होने में अब दो महीने ही रह गए हैं। ऐसे में सीएम का चेहरा बनाने पर अभी तक फैसला नहीं लेने पर भी चिंता जताई है। ट्विटर पर एक लंबे पोस्ट में रावत ने लिखा, है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है! अगले ट्वीट में रावत ने लिखा है, फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है न दैन्यं न पलायनम् बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे। हरीश रावत के ट्विटर पोस्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि वो कांग्रेस आलाकमान यानी गांधी परिवार से नाराज हैं। बता दें कि हरीश रावत कुछ वक्त पहले तक पंजाब में कांग्रेस प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे।

कांग्रेस नेता हरीश रावत के अपनी पार्टी के नेतृत्व और संगठन पर निशाना साधने वाले ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने तंज कसा है। रावत ने कहा कि ष्वह चुनाव नहीं छोड़ेंगे, क्योंकि वह उनकी प्राथमिकता है, लेकिन उन्हें अब थोड़ा आराम करना चाहिए। तीरथ सिंह रावत ने कहा, हरीश रावत आराम नहीं करेंगे। मुझे लगता है कि वह पार्टी में अपना दबदबा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। वह चुनाव से मुंह नहीं मोड़ेंगे क्योंकि चुनाव उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, जिस तरह से वह अपना दर्द व्यक्त कर रहे हैं, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ा आराम करना चाहिए। कांग्रेस नेता द्वारा की गई टिप्पणी को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, यह आराम करने का समय है, भाजपा नेता ने कहा, वह दबाव की राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। कोई नहीं जानता कि वह क्या कहते हैं और क्या करते हैं। लोग उनके अतीत को जानते हैं।

भाजपा नेता ने कहा, वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने आज जो कहा वह पार्टी के प्रति उनके दर्द को दर्शाता है। मुझे उम्मीद है कि वह आज व्यक्त की गई भावनाओं पर खरे उतरेंगे। तीरथ सिंह रावत ने हरीश रावत की आलोचना की है। हरीश रावत पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भी थे। राज्य में अंदरूनी कलह के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी। तीरथ सिंह रावत ने कहा, हाल ही में वह पंजाब में थे। वहां क्या हुआ, हम जानते हैं। कांग्रेस टुकड़ों में बंट गई और कप्तान ने पार्टी छोड़ दी। मुझे लगता है कि उन्होंने उस स्थिति से ही कुछ सीखा होगा। इसके साथ ही पार्टी की उत्तराखंड इकाई में अंदरूनी कलह पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए तीरथ सिंह रावत ने कहा कि इस स्थिति में भाजपा के लिए चुनाव में जाना आसान होगा। कांग्रेस हमेशा बिखरी हुई है, जिनके परिवार में इतनी फूट है, आपस में इतनी लड़ाई है, वे बाहर जाकर चुनाव कैसे लड़ेंगे। मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस के लिए इस तरह चुनाव लड़ना आसान होगा। निश्चित तौर पर इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा होगा। तीरथ सिंह रावत की टिप्पणी पर गर्व करना चाहिए। उनका बीत रात भी ढोंग नजर आ रहा है। (हिफी)
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बहुआयामी व्यक्तित्व वाले अटल जी

Posted: 23 Dec 2021 06:41 AM PST

बहुआयामी व्यक्तित्व वाले अटल जी

(मनीषा स्वामी कपूर-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब संसद में कहते थे- सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी लेकिन ये देश रहना चाहिए, तब लगता है कि उनसे बढ़कर कोई राजनेता नहीं है। अटल जी जब कहते थे- काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं... तब लगता है कि उनसे बड़ा कोई कवि नहीं है। अटल जी जब कहते थे कि मन हार कर मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन जीते जाते हैं तो लगता कि इनसे बड़ा कोई दर्शनिक नहीं है। कूटनीति का उदाहरण देते हुए अटल जी ने कहा था- हमारे पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा चुटकी तो बज सकती है, ऐसा बहुआयामी व्यक्तित्व था भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी का, जिन्होंने 25 दिसम्बर को जन्म लिया था और 16 अगस्त को स्वर्ग प्रयाण कर गये। आज भी उनकी विराट प्रतिभा की देश भर में चर्चा होती है और अटल जी ने ही स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से भारत को चारों कोनों से सड़क मार्ग से जोड़ने का सपना देखा था।

अटल जी एक अच्छे नेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पत्रकार और कवि भी थे। उन्होंने कई बार भारतीय सदन के अंदर भी कविताओं के जरिए पक्ष और विपक्ष के नेताओं का दिल जीत लिया था। कवित्व का गुण उनको विरासत में उनके पिता से मिला था। तीन बार प्रधानमंत्री रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में 25 दिसंबर 1924 में मध्य प्रदेश जिले के ग्वालियर के एक गांव में हुआ था (पैतृक गांव बटेश्वर)। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और एक कवि भी थे। उनकी माता का नाम कृष्णा देवी वाजपेयी और उनके 7 भाई बहन भी थे। वाजपेयी जी ने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर, गोरखी, बाड़ा, विद्यालय से प्राप्त की इसके बाद उन्होंने स्नातक की शिक्षा लक्ष्मीबाई कॉलेज से पूरी की और विधि स्नातक की डिग्री उन्होंने कानपुर में स्थित डीएवी कॉलेज से अर्थशास्त्र विषय में ली। अटल जी छात्र जीवन से ही राजनीतिक तथ्यों से संबंधित वाद विवाद में हिस्सा लेना पसंद करते थे और वे हमेशा ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहते थे। आगे चलकर सन् 1939 अपने छात्र जीवन में उन्होंने स्वयंसेवक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने हिंदी न्यूज पेपर में संपादक का काम भी किया।उन्होंने दो बच्चियों को गोद लिया था जो बीएन कॉल की बेटियां नमीता और नंदिता थी। आजादी की लड़ाई में वे अनेक नेताओं के साथ मिलकर लड़े। फिर हमारे देश के लिए अत्यंत दुःख भरा दिन रहा, जब 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।

सन् 1942 में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपने राजनीतिक जीवन का सफर शुरू किया था। उस समय भारत छोड़ो आंदोलन जोर शोर से चल रहा था और इसी दौरान उनके भाई को इस आंदोलन में गिरफ्तार कर लिया गया था। इनके भाई को 23 दिनों के लिए जेल में रहना पड़ा था, उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। उसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई और उनके आग्रह करने पर उन्होंने भारतीय जनसंघ पार्टी को ज्वाइन कर लिया। भारतीय जनसंघ पार्टी का गठन सन् 1951 में हुआ था। इसके बाद सन् 1957 में जनसंघ पार्टी द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी जी को अपने उम्मीदवार के तौर पर उत्तर प्रदेश जिले के बलरामपुर लोकसभा सीट से इलेक्शन के लिए टिकट दी गयी और अटल जी ने लोकसभा चुनाव में अपनी पहली जीत दर्ज की। इसके बाद उनकी उपलब्धि को देखते हुए उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। अटल जी 2 साल तक मोरारजी देसाई की सरकार में वर्ष 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे जिससे हमारे देश के प्रति विदेशों में एक विश्वासी देश की पृष्ठभूमि तैयार करने में उनका बहुत योगदान रहा। इसके बाद सन् 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपनी एक पार्टी का गठन किया जो थी भारतीय जनता पार्टी और 06 अप्रैल 1980 को अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। लोकसभा चुनाव सन् 1996 में भारतीय जनता पार्टी का देश भर में पहला विजय चुनाव रहा। इस चुनाव से बीजेपी ने देश में पहली बार अपनी सरकार को स्थापित किया और मात्र 13 दिनों के लिए 06 मई से 21 जून 1996 तक देश के दसवें प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने शपथ ली। फिर सन् 1988 में सरकार गिरने के 2 साल बाद पार्टी सत्ता में आई और 19 मार्च 1998 में अटल जी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और फिर 10 अक्टूबर 1999 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ ली।

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए राजस्थान के पोखरण में सन् 1998 में 11 मई और 13 मई को पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके हमारे देश को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। यह एक साहसिक कदम था, जिससे हमारे देश को अलग ही पहचान मिली। भारत देश का यह परमाणु परीक्षण इतनी गोपनीयता से किया गया था की पश्चिमी देशों की आधुनिक तकनीक भी नहीं पकड़ पायी थी। परमाणु परीक्षण के बाद कुछ देशों ने अनेक प्रतिबंध भी लगाये परन्तु अटल जी इन सब चीजों की परवाह न करते हुए आगे बढ़े और हमारे देश को नई आर्थिक विकास की ऊँचाईयों तक ले गए।अटल जी ने 19 फरवरी 1999 में दिल्ली से लाहौर तक की बस सेवा शुरू की, जिसे सदा-ए-सरहद का नाम दिया गया। बस सेवा शुरू कर के दोनों देश के बीच आपसी रिश्ते में सुधार लाने की पहल की और उस समय उन्होंने पाकिस्तान का दौरा भी किया और वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात भी की।कुछ समय बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ शुरू कर दी और कई पहाड़ की चोटियों पर अपना कब्जा कर लिया। जवाबी कार्यवाई में अटल बिहारी जी की सरकार ने ठोस कदम उठाएं और भारतीय सेना को खुला समर्थन दिया। जिससे कि हमारी सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया और उन्हें धूल चटा दी।अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ही भारत के सड़क मार्ग को जोड़ने का काम चारों कोनों से किया है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को राजमार्गों से जोड़ने का काम किया गया जिसे स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का नाम दिया गया और अभी तक अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने ही सबसे ज्यादा सड़के बनवाई है।

अटल जी की सरकार में 100 वर्ष से भी पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया गया। कई समितियों और आयोगों का गठन किया गया जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति आदि। राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास किया गया। नयी टेक्नोलॉजी, विद्यतीकरण को गति देना, दूरसंचार को बढ़ावा देना आदि। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना और विदेशों में बसे भारतीयों के लिए बिमा योजना को शुरू किया। अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त कर आवास निर्माण को प्रोत्साहन दिया।

नई टेलीकॉम नीति और कोकण रेलवे की शुरुआत की। इनके कार्यकाल में टेलीकॉम क्षेत्र और रेलवे विभाग विकास की नई ऊँचाईयों को छुआ।

अटल जी एक अच्छे प्रधानमंत्री के साथ-साथ एक अच्छे लेख और कवि भी रहे है उनके द्वारा कुछ प्रकाशित रचनाओं के नाम इस प्रकार है- भारत की विदेश नीतिरू नई डायमेंशन, राजनीति की रपटीली राहें, राष्ट्रीय एकीकरण, क्या खोया क्या पाया, मेरी इक्यावन कविताएं, न दैन्यं न पलायन, 21 कविताएं। असम समस्या: दमन समाधान नहीं और शक्ति से संती, ऐसे अमिट अटल को शत्-शत् नमन। (हिफी)
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सरकारों की ईमानदारी

Posted: 23 Dec 2021 06:39 AM PST

सरकारों की ईमानदारी

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

कोई भी अपने को बेईमान नहीं कहता लेकिन शत-प्रतिशत ईमानदार होना भी एक आश्चर्य ही होगा। हरियाणा और झारखण्ड की सरकारें अपने-अपने राज्य की महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर ईमानदार होने का दावा कर रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कहते हैं कि हरियाणा लोकसेवा आयोग की परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। इसके बावजूद वहां के विपक्षी दल आरोप लगा रहे कि भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। इसी प्रकार झारखण्ड में झारखण्ड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है और मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया कि जेपीएससी परीक्षा में कोई गड़बड़ी ही नहीं हुई तो जांच किस बात की होगी? झारखण्ड में अब स्कूल में ही जाति प्रमाण पत्र भी बनेंगे।

हरियाणा में लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं पर जब सवाल उठे तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा लोक सेवा आयोग स्वायत निकाय है। आयोग का एक अध्यक्ष और 5 सदस्य हैं। आयोग द्वारा भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसमें पूर्ण पारदर्शिता बरती जाती है। आयोग द्वारा संचालित किसी भी लिखित परीक्षा में अब तक प्रश्नपत्र लीक होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। एच.सी.एस. (कार्यकारी शाखा) और अन्य संबद्ध सेवाएं 2021 के 155 पदों के लिए विज्ञापन 26 फरवरी 2021 को जारी किया गया था। इन पदों के लिए 1,48,262 उम्मीदवारों ने आवेदन किया। प्रारंभिक परीक्षा 12 सितम्बर 2021 को 13 जिलों में स्थित 535 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 24 सितम्बर 2021 को घोषित किया गया, जिसमें 2041 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया। डेंटल सर्जन के 81 पदों के लिए विज्ञापन 25 फरवरी 2021 को जारी किया गया था। इन पदों के लिए 7,891 उम्मीदवारों ने आवेदन किया। लिखित परीक्षा 26 सितम्बर 2021 को पंचकूला स्थित 29 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की गई। लिखित परीक्षा का परिणाम 10 नवम्बर 2021 को घोषित किया गया। जिसमें कुल 220 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कहते हैं कि हमारी सरकार काबलियत पर भर्ती करने के अपने नारे पर पूरी तरह से कायम है। नौकरियों में भ्रष्टाचार करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। राज्य चैकसी ब्यूरो द्वारा प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले गिरोह को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जारी है। इस पर कांग्रेस व विपक्ष के कई सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल तो ईमानदार हैं, लेकिन नीचे वाले कुछ लोग अधिकारियों के साथ मिलकर गड़बड़ कर रहे हैं। इनको बख्शा नहीं जाना चाहिए, इनके खिलाफ जांच करवा कर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विपक्ष यह बात मानता है कि मैं ईमानदार हूं तो फिर शंका क्यों। मैं विपक्ष का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाता हूं कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

हरियाणा सरकार ने बिना पर्ची और बिना खर्ची के 84 हजार नौकरियां दी हैं, उसमें गरीब व्यक्ति भी शामिल हैं। पूर्व की सरकारों में चेहरा देखकर तिलक किया जाता था। लोग अपने गहने तक बेचकर नौकरियां खरीदते थे लेकिन अब योग्यता के आधार पर बिना किसी पर्ची और खर्ची के नौकरियां दी जा रही हैं।

उधर झारखंड बीजेपी अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि जेपीएससी की परीक्षा में घोटाला नहीं, बल्कि महाघोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के संरक्षण में यह महाघोटाला हुआ है। दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया कि सरकार चलाने वाले राजनीतिक दल के लोग उसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। इसलिए राज्य सरकार जांच कराने से डर रही है। उन्होंने कहा कि तय नियमों को पूरी परीक्षा के दौरान शिथिल किया गया। इसके अलावा फेल हुए बच्चों को पास कराया गया है। यह सब प्रमाणित हुआ है, उसके बाद भी सरकार बचाव कर रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार इसमें पूरी तरह से लिप्त है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से मनुवादी होने का आरोप लगाने पर दीपक प्रकाश ने कहा कि सीबीआई से आप जांच करवाइए। बीजेपी के लोग गीता पर विश्वास करते हैं, वेद -रामायण पर विश्वास करते हैं, सर्वधर्म समभाव पर विश्वास करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि आपको सीबीआई जांच से डर क्यों लग रहा है ? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विपक्ष के आरोप को खारिज करते हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जाति प्रमाणपत्र को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब स्कूलों में ही जाति प्रमाणपत्र बनाए जा सकेंगे। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि 29 दिसंबर के बाद से सरकारी और निजी स्कूलों में ही प्रमाणपत्र बनवाए जा सकेंगे। सभी कक्षा के छात्र जाति प्रमाणपत्र बना सकेंगे। विधानसभा में जेपीएससी के मुद्दे पर सरकार और विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच जेपीएससी-सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर सदन में टकराव की स्थिति बनी रही। भाजपा के सदस्य वेल में जाकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इसको लेकर हो-हंगामा शुरू हो गया। इसपर विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही दोबारा जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्य फिर से इस मसले पर विरोध करने लगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वह यहां (सदन) झारखंड के लोगों का काम करने के लिए बैठे हैं, न कि बांग्लादेशी या पाकिस्तानी के लिए। इसके बाद बीजेपी विधायक मनीष जायसवाल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की प्रति फाड़ दी। भाजपा सदस्य के इस कदम को विधायक प्रदीप यादव ने सदन की अवमानना बताते हुए कार्रवाई की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि निश्चित ही कार्रवाई होगी। अध्यक्ष ने कहा कि यह कैसे व्यवहार है? आप लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहते हैं। यह लड़ाई भी सरकार की ईमानदारी को लेकर थी। (हिफी)
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जापान में बह रहीं दूध की नदियां

Posted: 23 Dec 2021 06:36 AM PST

जापान में बह रहीं दूध की नदियां

टोक्यो। दुनियाभर में जापान की इमेज एक हाईटेक देश के रूप में है, लेकिन इन दिनों जापान दो चीजों से जूझ रहा है। पहला मैकडोनाल्ड के फ्रेंच फ्राइज की कमी और दूसरा एक्सट्रा दूध। जापान के राजनेता लोगों से इसलिए ज्यादा से ज्यादा दूध पीने का आग्रह कर रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री फुमियो किशिदालोगों से हर रोज एक गिलास दूध पीने को कह रहे हैं, ताकि दूध की बर्बादी न हो। इतना ही नहीं किसी न्यूज कॉन्फ्रेंस के दौरान देश के मंत्री दूध पीते भी नजर आ रहे हैं और लोगों से ऐसा करने की अपील भी कर रहे हैं।

जापान के प्रधानमंत्री फुमिओ किशिदा ने कहा, ' हम यह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा आबादी एक्स्ट्रा दूध पीने में सहयोग करे और खाना बनाते वक्त दूध से बने सामानों का इस्तेमाल करे।' प्रधानमंत्री संसद सत्र के खत्म होने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। हालांकि, सिर्फ पीएम ही नहीं, बल्कि उनके मंत्री भी कुछ इसी तरह की सलाह जनता को दे रहे हैं। 17 दिसंबर को देश के मंत्री गेंजिरो कैनिको और टोक्यो के गवर्नर यूरिको कोइके ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिलास में रखा दूध भी पीया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सरकारी आंकड़ों के हवाले बताया गया है कि सर्दियों में अभी तक जापान में 5000 टन दूध बर्बाद हो चुके हैं। यहां के किसान भी दूध को बर्बाद होने से रोकने के लिए चलाए जा रहे इस कैंपेन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। जापान में इस साल दूध की मांग में काफी गिरावट आई है। यहां तक कि जापान में स्कूली बच्चों को भी लंचबॉक्स में दूध दिये जा रहे हैं। दूध की मांग में गिरावट की एक वजह कोरोना महामारी को भी माना जा रहा है।
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हांगकांग से पिलर्स आफ द शेम डे हटाया गया

Posted: 23 Dec 2021 06:34 AM PST

हांगकांग से पिलर्स आफ द शेम डे हटाया गया

हांगकांग। हांगकांग की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी ने बीजिंग के तियानमेन स्क्वॉयर में मारे गए लोगों की याद में बनाई गई प्रतिमा को हटा दिया। प्रतिमा को नष्ट करने के लिए रातभर ऑपरेशन चला। करीब 8 मीटर ऊंची ये प्रतिमा यूनिवर्सिटी कैंपस में साल 1997 से थी। इसे पिलर्स ऑफ द शेम नाम से जाना जाता था। 1997 में ही ब्रिटिश उपनिवेश से हांगकांग को चीन को सौंप दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों ने प्रतिमा को कोई देख न सके, इसके लिए छत तक की चादरों और प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल हुआ। रातभर ड्रिलिंग की आवाजें सुनी जा सकती थी। इस प्रतिमा में 50 पीड़ित चेहरे थे। इन्हें एक दूसरे पर ढेर करके बनाया गया था। ये 1989 में तियानमेन स्क्वॉयर में चीनी सैनिकों की गोली से मारे गए प्रदर्शकारियों के प्रतीक थे। हांगकांग में इस प्रतिमा की उपस्थिति चीन की अपेक्षा हांगकांग की स्वतंत्रता का एक ज्वलंत उदाहरण थी। बता दें कि चीन में तियानमेन स्क्वॉयर से जुड़ी खबरों या फोटो को बड़ी मात्रा में सेंसर किया जाता है।
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