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Wednesday, January 26, 2022

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


क्या मजाक है, नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन कंफर्म करने के बाद निरस्त कर दिए - MP NEWS

Posted: 25 Jan 2022 02:29 PM PST

भोपाल
। इन दिनों ब्यूरोक्रेसी और बाबू गिरी में कोई खास अंतर नजर नहीं आता। मान्यता है कि एक अफसर हस्ताक्षर करने से पहले सब कुछ कंफर्म कर लेता है लेकिन मध्यप्रदेश में पिछले कुछ समय से Ohh Sorry जैसे हालात बने हुए हैं। नर्सिंग कॉलेजों में 145 सीटों पर एडमिशन कंफर्म करने के बाद निरस्त कर दिए गए। 

सपना एम लोवंशी, अपर संचालक नर्सिंग, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा एमपी ऑनलाइन लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र क्रमांक 72 दिनांक 20 जनवरी 2022 के माध्यम से आदेशित किया गया है कि मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए जो काउंसलिंग कराई जा रही है उसका सेकंड राउंड निरस्त किया जाता है। 

अपर संचालक ने बताया कि काउंसलिंग के सेकंड राउंड में किन्ही कारणों से आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुआ। अतः नवीन प्रक्रिया द्वारा द्वितीय चरण के आवंटन की कार्रवाई करें। कितनी अजीब बात है, 3 शब्द (किन्ही कारणों से) लिखकर कंफर्म हो चुके एडमिशन निरस्त कर दिए गए। इस प्रकार के आदेशों से समाज में सरकार के प्रति अविश्वास का भाव पैदा होता है। सरकारी आदेशों की स्थिरता और विश्वसनीयता पर प्रश्न उपस्थित होते हैं। उच्च शिक्षा, सरकारी और प्राइवेट नौकरी एवं करियर से जुड़ी खबरों और अपडेट के लिए कृपया MP Career News पर क्लिक करें.

गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण करते हैं या ध्वज वंदन पढ़िए महत्वपूर्ण जानकारी - GK in Hindi

Posted: 25 Jan 2022 08:06 PM PST

भारत के 2 राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस समारोह और गणतंत्र दिवस समारोह के बीच में कुछ लोग काफी कंफ्यूज हो जाते हैं। कुछ विद्वान लोग ध्वज वंदन और ध्वजारोहण के बीच का अंतर नहीं समझते। कुछ लोग गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण बता देते हैं। आइए ध्वजारोहण और ध्वज वंदन के बीच का अंतर समझते हैं।

ध्वजारोहण और ध्वज फहराना

15 अगस्त के दिन देश को आजादी मिली थी। इसी दिन ब्रिटिश झंडे को उतारकर भारतीय ध्वज को ऊपर चढ़ाया गया और फहराया गया था। यानी ध्वज का 'आरोहण' हुआ था, जैसे 'पर्वतारोहण', झंडे को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराने की इस प्रक्रिया को ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं। इसलिए 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है। वहीं 26 जनवरी को भारत का संविधान लागू हुआ था। इसलिए उस दिन पहले से ऊपर बंधे झंडे को केवल फहराया (Flag Unfurling) जाता है। इसे ध्वज वंदन कहते हैं। अपने ध्वज की वंदना करना। 

15 अगस्त प्रधानमंत्री का और 26 जनवरी राष्ट्रपति का क्यों

15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। वहीं 26 जनवरी को राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रधानमंत्री देश के राजनीतिक प्रमुख होते हैं, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ था, इसलिए गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं।। इससे पहले आजाद भारत का न तो कोई संविधान था और न ही राष्ट्रपति था।

स्वतंत्रता दिवस समारोह लाल किला पर तो गणतंत्र दिवस समारोह राजपथ पर क्यों

स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन लाल किले पर ही किया जाता है। दरअसल, 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किला स्थिति लाहौरी गेट के ऊपर से ही भारतीय ध्वज फहराया था। वहीं 26 जनवरी 1950 को आजाद भारत का संविधान लागू होने पर पहले गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन राजपथ पर किया गया था। बाद के कुछ वर्ष में गणतंत्र दिवस का आयोजन कुछ अलग जगहों पर भी किया गया था।

पीएम व राष्ट्रपति का संबोधन

15 अगस्त पर प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते हैं, जबकि इसकी पूर्व संध्या पर मतलब 14 अगस्त की शाम को राष्ट्रपति राष्ट्र को संबोधित करते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी का आधिकारिक संबोधन नहीं होता है।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह में क्या अंतर होता है

15 अगस्त और 26 जनवरी का दिन देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों दिन धूमधाम से देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी स्तर पर सार्वजनिक समारोह आयोजित किए जाते हैं। देश के अन्य हिस्सों और सभी राज्यों में भी इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बावजूद इन कार्यक्रमों में कुछ आधारभूत अंतर होता है। 

15 अगस्त के दिन परेड का आयोजन नहीं होता है, जबकि 26 जनवरी पर सैनिकों, अर्धसैनिक बलों आदि की काफी लंबी परेड होती है। इसमें दिलकश झाकियां और रंगारंग कार्यक्रम को भी शामिल किया जाता है। गणतंत्र दिवस समारोह के जरिए देश जल, थल और नभ में अपनी सैन्य ताकत और संस्कृति की झलक का प्रदर्शन करता है।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि कौन हो सकता है

15 अगस्त के कार्यक्रम के कार्यक्रम में बाहर से किसी मुख्य अतिथि को बुलाने की परंपरा नहीं है, जबकि 26 जनवरी समारोह में किसी न किसी राष्ट्राध्यक्ष को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया जाता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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चुंबक, धातु होता है या पत्थर, Magnet नाम कैसे पड़ा- GK in Hindi

Posted: 25 Jan 2022 02:12 PM PST

इंजीनियरिंग के चमत्कारी प्रोडक्ट इलेक्ट्रोमैग्नेट के कारण प्राकृतिक चुंबक अपनी पहचान खो गया है लेकिन यदि प्राकृतिक चुंबक ना होता तो इलेक्ट्रोमैग्नेट का आईडिया ही नहीं आता। प्राकृतिक चुंबक आज भी अपना महत्व रखता है और दुनिया में कुछ काम उसके बिना नहीं हो सकते। और यह पता लगाते हैं कि प्राकृतिक चुंबक (जिससे लोहा चिपक जाता है) धातु है अथवा कोई पत्थर। सबसे पहले यह कहां मिला था। 

चुंबक, धातु है या पत्थर

चुंबक एक ऐसी वस्तु है जो लोहे को आकर्षित करती है। चुंबक का यही गुण उसे स्पेशल बनाता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि चुंबक एक धातु है परंतु आश्चर्यजनक बात है कि चुंबक एक पत्थर है इसे LOAD STONE कहा जाता है। इस पत्थर की खदान सबसे पहले एशिया के मैग्नीशिया शहर में पाई गई थी। मैग्नीशिया शहर के कारण चुंबक का नाम मैग्नेट रखा गया। मजेदार बात यह है कि मैग्नेट्स का पहला नाम नहीं है बल्कि सबसे पहले इसे मैग्नेटाइट कहा जाता था। 

चुंबक की कहानी- किसने खोज की और गुणों का पता कब चला 

चुंबक की खोज आज से करीब 4000 साल पहले नॉर्थ ग्रीस के एक चरवाहे द्वारा की गई थी। उसके जूतों के सोल में लोहे की कील लगी थी। उसने देखा कि कीलों से कुछ पत्थर चिपक गए हैं। आसपास कुछ बड़े पत्थर भी मिल गए। ग्रीस के लोगों ने चिपकने वाले पत्थर को मैग्नेटाइट नाम दिया। माना गया कि यह देवता का पत्थर है जो बुरी आत्माओं, नेगेटिव एनर्जी और लाइलाज बीमारियों को दूर करने के लिए बनाया गया है। 2500 साल तक दुनिया को चुंबक के गुणों के बारे में पता ही नहीं चला। इसे देवता का पत्थर मानकर झाड़-फूंक के लिए उपयोग किया जाता रहा।

सन 1600 में इंग्लैण्ड के विलियम गिलबर्ट (1544-1603) ने पहली बार चुंबक के गुणों के बारे में दुनिया को बताया। उन्होंने करीब 17 साल तक प्राकृतिक चुंबक पर अध्ययन किया और उसके बाद इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि करोड़ों साल पहले पृथ्वी एक चुंबक थी। इसके बाद विलियम गिलबर्ट पूरी दुनिया में फेमस हो गए और 1603 में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु का कारण आज तक अज्ञात है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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MP TET VARG 3 TOPIC- बुद्धि क्या है और बुद्धि के प्रकार

Posted: 25 Jan 2022 08:29 PM PST

What is Intelligence and Types of Intelligence

एमपी टेट वर्ग 3 का एक बड़ा ही महत्वपूर्ण टॉपिक है "बुद्धि की रचना का आलोचनात्मक स्वरूप और उसका मापन, बहुआयामी बुद्धि" इसी टॉपिक का एक सबटॉपिक है, बुद्धि क्या है और कितने प्रकार की होती है। इसी के बारे में चर्चा करेंगे।

बुद्धि क्या है / What is Intelligence 

Intelligence (इंटेलिजेंस) शब्द लेटिन भाषा के शब्द Intelligentsia (इंटेलीजेंशिया) या intelligenere (इंटेलिजेंटईयर) से बना है। जिसका अर्थ है "To Understand" या समझना।
पहले के समय में इंटेलिजेंट शब्द का प्रयोग सामान्यतः ज्ञान के अर्थ में लिया जाता था, परंतु आज के समय में सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना ही बुद्धि नहीं है, बल्कि सीखने की क्षमता, अमूर्त चिंतन की योग्यता, तार्किक सोच और अपने वातावरण के साथ एडजस्ट होना ही इंटेलिजेंस कहलाता है। वंशानुक्रम तथा वातावरण (Heridity and Environment) इन दोनों की l अंतः क्रिया ही बुद्धि को निर्धारित करती है। 

सुजननकी के जनक / Father of Eugenics

सर फ्रांसिस गाल्टन (Sir Fransis Galton) ने 18th सेंचुरी में सबसे पहले इंटेलिजेंस पर काम किया और अपनी बुक "हेरेडिटरी जीनस" में इसके बारे में बताया। इन्हें फादर ऑफ सुजननिकी (यूजिनिक्स, Eugenics) भी कहा जाता है।

बुद्धि परीक्षण के जनक /Father of Intelligence Test

इसके बाद बुद्धि का परीक्षण करने के लिए सबसे पहले अल्फ्रेड बिने (Alfred Binet) ने 1905 में पहला इंटेलिजेंस टेस्ट बनाया। इसी कारण उन्हें फादर ऑफ़ इंटेलिजेंस टेस्ट भी कहा जाता है। 

बुद्धि लब्धि / Intelligence Ouotient Or IQ

इसके बाद विलियम स्टर्न (William Stern) ने 1912 में  सबसे पहली बार बुद्धि लब्धि (Intelligence Quotient) की बात की. इसके बाद Louis Terman ने 1916 में बुद्धि लब्धि का फार्मूला दिया। 

बुद्धि लब्धि का सूत्र / Formula Of intelligence Quotient 

बुद्धि लब्धि मानसिक आयु (Mental Age) तथा तैथिक आयु (Chronological Age) या वास्तविक आयु (Real Age) का एक ऐसा अनुपात है जिसे 100 से गुणा कर प्राप्त किया जाता है। इसलिए इस से अनुपात बुद्धि लब्धि (Ratio iQ)भी कहा जाता है। 
बुद्धि लब्धि= मानसिक आयु /वास्तविक आयु ×100
IQ= Mental Age /Chronological Age ×100
बुद्धि लब्धि की गणना करने की चर्चा हम बाद में में करेंगे। 

बुद्धि के प्रकार / Types of intelligence

अलग-अलग मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि के अलग-अलग प्रकार बताए हैं और बहुआयामी बुद्धि हैं और बहुआयामी बुद्धि की बात भी काफी हद तक स्वीकार की जाती है परंतु मुख्य रूप से बुद्धि तीन प्रकार की होती है।
ई.एल. थार्नडाइक (E.L. Thorndike) के अनुसार बुद्धि तीन प्रकार की होती है। सामाजिक बुद्धि, अमूर्त बुद्धि तथा मूर्त बुद्धि। 

सामाजिक बुद्धि (Social Intelligence)- सामाजिक बुद्धि, एक ऐसी बुद्धि है जो व्यक्ति को सामाजिक परिस्थितियों में समायोजित होने में मदद करती है। जिन लोगों की सामाजिक बुद्धि अच्छी होती है उन्हें अन्य लोगों के साथ प्रभावपूर्ण ढंग से व्यवहार करने की क्षमता, अच्छा आचरण करने की क्षमता एवं समाज के अन्य लोगों से मिलजुल कर सामाजिक कार्य में हाथ बढ़ाने की क्षमता की क्षमता में सामाजिक कार्य में हाथ बढ़ाने की क्षमता की क्षमता में हाथ बढ़ाने की क्षमता की क्षमता अधिक होती है। इस प्रकार की बुद्धि नेताओं, वक्ताओं, मीडिया पर्सनस्  आदि में पाई जाती है। 

अमूर्त बुद्धि (Abstract intelligence) -

ऐसी चीजों के बारे में चिंतन करना जो आपके सामने नहीं हो उसे ही अमूर्त बुद्धि कहा जाता है। ऐसी बुद्धि में व्यक्ति शब्द ,प्रतीक तथा अन्य मूर्त चीजों के सहारे अच्छे से चिंतन कर लेता है। सामान्यतः जिन व्यक्तियों में अमूर्त बुद्धि अधिक होती है वे सफल कलाकार, पेंटर, गणितज्ञ, कहानीकार ,दार्शनिक आदि होते हैं। 

मूर्त बुद्धि (Concrete intelligence) -

मूर्त बुद्धि से तात्पर्य ऐसी मानसिक क्षमता से है जिसके सहारे व्यक्ति ऐसी चीजें, जो उसके सामने हैं उनके महत्व को समझता है। उनके बारे में सोचता है, अपनी इच्छा अनुसार और आवश्यकता अनुसार उनमें परिवर्तन परिवर्तन उनमें परिवर्तन परिवर्तन लाकर उन्हें उपयोगी बना लेता है। इसे व्यावहारिक बुद्धि  या प्रैक्टिकल इंटेलिजेंस भी कहा जाता है। इस प्रकार की बुद्धि इंजीनियरर्स,डॉक्टर्स, इंडस्ट्रियलिस्ट आदि में पाई जाती है।
मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.

कब सहमति तथ्यों को साबित करना न्यायालय आवश्यक नहीं समझता है जानिए- Law of Evidence

Posted: 25 Jan 2022 01:01 PM PST

किसी भी विषय पर न्यायिक विचारण के दो तरीके हो सकते है एक जाँच ढंग जिसमे न्यायाधीश भी अन्वेषण का कार्य करता है एवं तथ्यों को साबित कर सकता है एवं दूसरा विपक्षी ढंग जिससे न्यायाधीश खामोश हाकिम की तरह बैठता है। वह न तो किसी पक्षकार को कोई सलाह दे सकता हैं और न किसी विशिष्ट साक्ष्य को पेश करने के लिए कह सकता है, वह अपने निर्णय उसके सामने की गई बहस के अनुसार देता है। उसे जैसे पक्षकारों ने जो विवाद्यक (विवाद) के तथ्य निकाले हैं उन्हीं के अनुसार चलना पड़ता हैं, जो तथ्य पक्षकारों ने मान लिए है उनके बारे मे कोई विवाद नहीं होता और किसी सबूत की आवश्यकता भी नहीं रहती हैं जानिए।

साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 58 की परिभाषा:-

न्यायालय या न्यायाधीश उन तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं समझता है जब कार्यवाही के पक्षकार या उनके अभिकर्ता सुनवाई पर स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते हैं या वह सुनवाई से पहले किसी वाद पर या मामले में लिखिए सहमति दे देता है तब न्यायालय ऐसी स्वीकृति के बाद तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं समझता है।

उधानुसार:- एक पत्नी अपने पति पर द्विविवाह का आरोप का विचारण मामला न्यायालय में पेश करती है। मजिस्ट्रेट के विचारण के समय दोनो में आपसी समझौता हो जाता है तब मजिस्ट्रेट पक्षकारों से कोई तथ्य साबित करने की नहीं बोल सकता है।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

BHOPAL NEWS- लोकरंग का शुभारंभ शाम को, प्रवेश निशुल्क

Posted: 25 Jan 2022 12:55 PM PST

भोपाल
। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में 'आजादी के अमृत महोत्सव' में गणतंत्र दिवस की संध्या पर जनजातीय और लोक कलाओं के 37वें राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग' का शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। रविन्द्र भवन में 26 जनवरी को शाम 6:30 बजे आयोजित शुभारम्भ कार्यक्रम में नवनिर्मित रवीन्द्र सभागम केंद्र का लोकार्पण होगा और राष्ट्रीय नानाजी देशमुख अलंकरण समारोह भी आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण सीएम मध्यप्रदेश, जनसंपर्क और संस्कृति विभाग के फेसबुक, ट्विटर तथा यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा

राष्ट्रीय नानाजी देशमुख अलंकरण सम्मान

कार्य़क्रम में वर्ष 2013 से 2020 तक के राष्ट्रीय नानाजी देशमुख सम्मान प्रदान किये जायेंगे। इसमें भाऊ साहब भुस्कुटे सेवा न्यास होशंगाबाद को 2013 का, उत्तरांचल उत्थान परिषद् मनेरी को 2014, आचार्य प्रदीप कौशिक झारखण्ड को 2015, संस्था सम्पर्क झाबुआ को 2016, श्री सोपान जोशी दिल्ली को 2017, डॉ. शंकर अभ्यंकर को 2018, संस्था नर्मदा खरगोन को 2019 और गौमुखी सेवा धाम कोरबा को वर्ष 2020 के लिए सम्मानित किया जायेगा। साथ ही गणतंत्र दिवस की परेड में चयनित प्रतिभागी और झाँकियों को पुरस्कृत किया जायेगा।

अगले क्रम में सुगम संगीत कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री अन्नू कपूर के साथ अनुभव सुमन, सुप्रिया जोशी, साहिल सोलंकी, ऐश्वर्या पंडित द्वारा प्रस्तुति दी जाय़ेगी। कार्यक्रम में दर्शकों का प्रवेश नि:शुल्क एवं प्रथम आयें-प्रथम पायें के आधार पर होगा। समारोह के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। भोपाल की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया bhopal news पर क्लिक करें.

MPPSC NEWS- सहायक संचालक परीक्षा की answer key जारी

Posted: 25 Jan 2022 12:38 PM PST

MPPSC Assistant Director Social Justice answer key

MP Public Service Commission (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा सहायक संचालक संवर्ग (सामाजिक न्याय) परीक्षा 2021 (विषय समाज कार्य एवं मनोविज्ञान) की प्रावधिक उत्तर कुंजी जारी कर दी गई है। परीक्षार्थी अध्ययन कर सकते हैं एवं यदि कोई आपत्ति है तो चैलेंज कर सकते हैं। आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए लास्ट डेट दिनांक 1 फरवरी 2022 घोषित की गई है।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, इंदौर द्वारा जारी विज्ञप्ति क्रमांक 842 दिनांक 25 जनवरी 2022 के अनुसार सहायक संचालक संवर्ग (सामाजिक न्याय) परीक्षा 2021, जिसकी परीक्षा दिनांक 23 जनवरी 2022 को एक सत्र में संपन्न हुई है। उक्त परीक्षा के वस्तुनिष्ठ प्रकार के पत्रों की प्राविधिक उत्तर कुंजी एमपीपीएससी की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है। इसके अंतर्गत यदि किसी परीक्षार्थी को प्रश्न पत्र की उत्तर कुंजी अथवा इनके प्रश्न/उत्तर से संबंधित आपत्ति हो तो उम्मीदवार 7 दिवस के अंदर चैलेंज प्रस्तुत कर सकते हैं। 

मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभ्यर्थी अपनी आपत्ति के साथ प्रमाणित संदर्भ (संदर्भ ग्रंथ अथवा दस्तावेज संलग्न करें)। इसके अलावा उम्मीदवारों को आपत्ति के लिए निर्धारित फीस जमा करनी होगी। यदि उनकी आपत्ति सही पाई जाती है और एमपीपीएससी के विद्वान गलत साबित हो जाते हैं तब भी उम्मीदवार को ना तो कोई अवार्ड दिया जाएगा और ना ही उसकी फीस वापस की जाएगी। 
उच्च शिक्षा, सरकारी और प्राइवेट नौकरी एवं करियर से जुड़ी खबरों और अपडेट के लिए कृपया MP Career News पर क्लिक करें.

MPPSC NEWS- डेंटल सर्जन परीक्षा की answer key जारी

Posted: 25 Jan 2022 12:32 PM PST

MPPSC Dental Surgeon exams 2019 answer key 

MP Public Service Commission (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा दंत शल्य चिकित्सक परीक्षा 2019 की प्राविधिक उत्तर कुंजी जारी कर दी गई है। परीक्षार्थी अध्ययन कर सकते हैं एवं यदि कोई आपत्ति है तो चैलेंज कर सकते हैं। आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए लास्ट डेट दिनांक 1 फरवरी 2022 घोषित की गई है।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, इंदौर द्वारा जारी विज्ञप्ति क्रमांक 843 दिनांक 25 जनवरी 2022 के अनुसार डेंटल सर्जन एग्जामिनेशन 2019, जिसकी परीक्षा दिनांक 23 जनवरी 2022 को एक सत्र में संपन्न हुई है। उक्त परीक्षा के वस्तुनिष्ठ प्रकार के पत्रों की प्राविधिक उत्तर कुंजी एमपीपीएससी की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है। इसके अंतर्गत यदि किसी परीक्षार्थी को प्रश्न पत्र की उत्तर कुंजी अथवा इनके प्रश्न/उत्तर से संबंधित आपत्ति हो तो उम्मीदवार 7 दिवस के अंदर चैलेंज प्रस्तुत कर सकते हैं। 

मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभ्यर्थी अपनी आपत्ति के साथ प्रमाणित संदर्भ (संदर्भ ग्रंथ अथवा दस्तावेज संलग्न करें)। इसके अलावा उम्मीदवारों को आपत्ति के लिए निर्धारित फीस जमा करनी होगी। यदि उनकी आपत्ति सही पाई जाती है और एमपीपीएससी के विद्वान गलत साबित हो जाते हैं तब भी उम्मीदवार को ना तो कोई अवार्ड दिया जाएगा और ना ही उसकी फीस वापस की जाएगी। 
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