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- Final-फाइनल और Finale-फिनाले में क्या अंतर है, क्या दोनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं- GK in Hindi
- कोर्ट में आरोपी के चरित्र पर कब बहस की जा सकती है और कब नहीं- Law of evidence,1872
- कमलनाथ सर, आपने बेरोजगारों से जो वादा किया था उसे निभाने कदम उठाओ- Khula Khat
- MP TET VARG 3 TOPIC- कोहलर का अंतर्दृष्टि का सिद्धांत - Kohler's Insightful Theory
| Final-फाइनल और Finale-फिनाले में क्या अंतर है, क्या दोनों एक दूसरे के पर्यायवाची हैं- GK in Hindi Posted: 13 Jan 2022 01:06 PM PST एक दशक पहले तक फिनाले शब्द इतना चर्चित नहीं था परंतु अब चारों तरफ ग्रैंड फिनाले ही सुनाई देता है। सवाल यह है कि जब डिक्शनरी में फाइनल (Final) शब्द मौजूद है तो फिर उसकी जगह फिनाले (Finale) का उपयोग क्यों किया जाता है। आइए पता लगाते हैं कि Final-फाइनल और Finale-फिनाले में क्या कोई अंतर है, या फिर खुद को एडवांस दिखाने के लिए लोग फिनाले शब्द का उपयोग करने लगे हैं। चंडीगढ़ में स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी के प्रियांशु नेगी बताते हैं कि फाइनल और फिनाले के बीच में बहुत बड़ा अंतर है। ज्यादातर लोग नहीं जानते लेकिन मजेदार बात यह है कि ज्यादातर लोग इसका सही उपयोग करते हैं। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार फाइनल का अर्थ होता है श्रृंखला के अंत में जबकि फिनाले का अर्थ होता है समापन। Final-फाइनल और Finale-फिनाले के बीच कोई संबंध नहीं है। दोनों शब्दों को एक दूसरे की जगह उपयोग नहीं किया जा सकता है। Final-फाइनल और Finale-फिनाले के बीच अंतर- सरल शब्दों में समझिएसेमेस्टर एग्जाम या फिर किसी भी कोर्स में जहां एक से अधिक परीक्षा कार्यक्रम होते हैं वहां अंतिम परीक्षा को फाइनल एग्जाम कहा जाता है। कृपया ध्यान दीजिए, फाइनल एग्जाम शब्द का उपयोग किया जाता है जब एक से अधिक एग्जाम होते हो। यदि किसी कोर्स में सिर्फ एक ही एग्जाम होता है तब उसे फाइनल एग्जाम नहीं कहा जाता। किसी सीरियल या फिर किसी रियलिटी शो का जब समारोह पूर्वक समापन होता है तब उसे फिनाले या फिर ग्रैंड फिनाले कहा जाता है। कृपया ध्यान दीजिए, यहां समापन के साथ समारोह अनिवार्य है। यदि समारोह नहीं होता तो फिर फिनाले भी नहीं होता। उसे अपन लास्ट एपिसोड कहेंगे। स्पोर्ट्स के मामले में भी श्रृंखला होती है। प्रश्न उपस्थित होना चाहिए कि कई बार फाइनल मैच होता है और कई बार सीरीज का ग्रैंड फिनाले। यह दोनों शब्दों का उपयोग किया जा रहा है लेकिन दोनों के बीच अंतर स्पष्ट है। यदि किसी प्रतियोगिता का अंतिम खेल होने वाला है तब उसे फाइनल मैच कहा जाएगा लेकिन यदि उसके साथ समारोह शामिल है तब उसे फिनाले कहा जाएगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article :- यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com (general knowledge in hindi, gk questions, gk questions in hindi, gk in hindi, general knowledge questions with answers, gk questions for kids, ) |
| कोर्ट में आरोपी के चरित्र पर कब बहस की जा सकती है और कब नहीं- Law of evidence,1872 Posted: 13 Jan 2022 12:18 PM PST किसी भी अपराध के विचारण की शुरूआत अभियोजन पक्ष अर्थात पीड़ित व्यक्ति के वकील की दलील द्वारा की जाती है। क्या पीड़ित व्यक्ति या उसका कोई वकील अरोपी के पूर्व (पहले के) चरित्र एवं कृत्य के बारे में न्यायालय को कोई साक्ष्य दे सकते हैं जो उसे दोषसिद्धि के आधार बन सके एवं न्यायालय ऐसे साक्ष्य को उचित मानेगा या नहीं जानते हैं इसका जबाब। साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 54 की परिभाषा:-उपर्युक्त धारा दाण्डिक मामलों में यह अभिनिर्धारित करती है कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति या उसका वकील किसी आरोपी व्यक्ति के पूर्व या वर्तमान के चरित्र या आचारण पर कोई साक्ष्य तब तक नही देगा जब तक कि आरोपी स्वयं की और से अपने चाल-चलन (चरित्र) को अच्छा नहीं बताता है। अर्थात अभियोजन पक्ष का वकील या पीड़ित तब उसके चाल-चलन के साक्ष्य को गलत साबित करेगा, जब अरोपी स्वंय अपने गलत चाल-चलन का व्यक्ति नहीं होने का साक्ष्य न्यायालय को देता है। उधानुसार:- रमेश किसी को बहुत बुरी तरह से मरता है एवं उस पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 325 के अंतर्गत आरोप लगाया जाता है। तब आरोपी रमेश या उसका वकील यह न्यायालय में यह बोलता है उसका स्वभाव या आचरण ऐसा नहीं है। वह किसी पर हाथ नहीं उठा सकता है। यह गलत आरोप है। तब पीड़ित व्यक्ति अपने साक्षियों को बुलवाकर रमेश के चाल-चलन को ग़लत साबित करने के साक्ष्य देगा। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com |
| कमलनाथ सर, आपने बेरोजगारों से जो वादा किया था उसे निभाने कदम उठाओ- Khula Khat Posted: 13 Jan 2022 12:09 PM PST प्रति, कमलनाथ, अध्यक्ष महोदय, मध्य प्रदेश काँग्रेस, भोपाल। महोदय, वर्तमान संदर्भ में जैसा आप भी जानते है कि मध्य प्रदेश के बेरोजगार अभ्यर्थियों द्वारा MPPSC परीक्षा मे आवेदन करने हेतु आयु सीमा मे 02 वर्ष की वृद्धि की मांग कि जा रही है। महोदय, पिछले 2 वर्षों से हम अभ्यर्थियों का रोजगार खतम हो गया है। हम में से कई अभ्यर्थी प्राइवेट शिक्षक और कई अभ्यर्थी अपना छोटा व्यवसाय करते थे। जो कि पिछले 02 वर्षों में सरकार के द्वारा नियमित रूप से लॉकडाउन लगाने से सड़क पर आ गए। महोदय अब हम अपनी वर्तमान दुर्दशा कवि दुष्यंत कुमार जी के पंक्तियों के माध्यम से व्यकत कर रहे है - "इस सड़क पर इस कदर कीचड़ बिछी है, हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है" महोदय हम सभी शिक्षित अभ्यर्थी है। वर्तमान आयु सीमा मे हम केवल अपना बचा हुआ जीवन सरकारी नौकरी मे सिलेक्ट होकर कर सकते है तथा अपने राज्य और समाज कि सेवा कर सकते है। महोदय, वर्तमान मे सरकार ने MPPSC की परीक्षा मे फ़ॉर्म भरने कि आयुसीमा 40 वर्ष निर्धारित की हुई है। जिसकी वजह से हम कई अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पा रहे है। महोदय हमारे द्वारा पिछले 02 माह मे कई माध्यमों द्वारा वर्तमान सरकार से विनती कि गई मगर वर्तमान सरकार हमारे मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं कर रही है, जिसकी वजह से हमारे सभी साथियों का भविष्य अंधकार मे है। महोदय हम सभी बेरोजगार अभ्यर्थी आपको याद दिलाना चाहते है कि काँग्रेस पार्टी द्वारा विधानसभा चुनाव 2018 मे प्रदेश के समस्त अभ्यर्थियों से वादा किया गया था कि मध्य प्रदेश मे काँग्रेस कि सरकार बनने पर MPPSC और PEB कि भर्ती परीक्षों मे आयु सीमा मे 2 वर्ष कि वृद्धि करते हुए 40 से बढ़ाकर 42 वर्ष कि जाएगी। आपकी इस घोषणा से उत्साहित होकर युवाओं ने बड़ी संख्या मे आपके पक्ष मे मतदान किया था परंतु महोदय, मध्य प्रदेश मे काँग्रेस कि सरकार Nov- 2018 से March- 2020 बनी रहने पर भी MPPSC और PEB कि भर्ती परीक्षों मे आयु सीमा मे 2 वर्ष कि वृद्धि नहीं कि गई। महोदय आपकी काँग्रेस सरकार ने यदि उस समय ही अपना वादा निभाते हुए आयु सीमा मे 2 वर्ष कि वद्धी करते हुए 40 से बढ़ाकर 42 वर्ष कर दी होती, तो आज हम बेरोजगार अभ्यर्थियों को वर्तमान भाजपा सरकार के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ते। महोदय, आप से हम बेरोजगार अभ्यर्थियों के द्वारा निवेदन है कि आप येन-केन- प्रकारेण वर्तमान BJP सरकार से हमें MPPSC परीक्षा मे आयु सीमा मे 2 वर्ष कि छूट दिलाएं। इसके लिए काँग्रेस पार्टी को आंदोलन भी करना पड़े तो हम बेरोजगार अभ्यर्थियों के प्रति संवेदना रखते हुए करें। महोदय, यदि काँग्रेस पार्टी के द्वारा हम बेरोजगार अभ्यर्थियों का समर्थन किया जाता है और वर्तमान मध्य प्रदेश सरकार से कि परीक्षा मे आयु सीमा मे 2 वर्ष कि छूट दिलाई जाती है तो हम सभी आपके ताउम्र आभारी रहेंगे और जीवन भर आपकी पार्टी को वोट देंगे और आपके द्वार उठाए सभी मुद्दों पर समर्थन करेंगे। अंत में महोदय हम सभी बेरोजगार अभ्यर्थी चंद पंक्तियों लिखते हुए अपने पत्र को समाप्त करते हैं:- "मेरे दिल पर हाथ रखो, मेरी बेबसी को समझो, में इधर से बन रहा हूँ, में इधर से ढह रहा हूँ" भवदीय, समस्त पीड़ित अभ्यर्थी इससे पूर्व प्रकाशित हुए खुले खत पढ़ने के लिए कृपया Khula Khat पर क्लिक करें. खुला खत एक ओपन प्लेटफार्म है। यहां मध्य प्रदेश के सभी जागरूक नागरिक सरकारी नीतियों की समीक्षा करते हैं। सुझाव देते हैं एवं समस्याओं की जानकारी देते हैं। यदि आपके पास भी है कुछ ऐसा जो मध्य प्रदेश के हित में हो, तो कृपया लिख भेजिए हमारा ई-पता है:- editorbhopalsamachar@gmail.com |
| MP TET VARG 3 TOPIC- कोहलर का अंतर्दृष्टि का सिद्धांत - Kohler's Insightful Theory Posted: 13 Jan 2022 11:53 AM PST कोहलर जो कि एक जर्मन साइकोलॉजिस्ट और गैस्टालटवादी भी थे। गेस्टाल्टवाद, साइकोलॉजी का एक अलग संप्रदाय है जो की समग्रता या पूर्णता में विश्वास रखता है। अरस्तु के अनुसार "The whole is greater than the some of its parts" यानी किसी भी परिस्थिति को समझने के लिए पूरी परिस्थिति को समझना आसान है जबकि टुकड़ों में समझना कठिन है। गेस्टाल्टवाद इसी से प्रभावित है। गेस्टाल्टवाद के जनक वर्दिमीर या वर्टहाइमर् या वर्दाइमर (Wertheimer) हैं। इनके साथ कोहलर, कोफ्का, कर्टलेविन नाम के मनोवैज्ञानिकों ने भी काम किया। गेस्टाल्टवाद से प्रभावित होकर ही कोहलर ने सूझबूझ या अंतर्दृष्टि या अंतरदृष्टि का सिद्धांत दिया ,जिसे गेस्टाल्ट सिद्धांत (Gestalt Theory) भी कहा जाता है। कोहलर के अंतर्दृष्टि सिद्धांत से संबंधित शब्दावली / Terms related with Kohler's Theory1. लक्ष्य (Goal) - जब कोई लक्ष्य सामने होता है तो उसके अनुकूल व्यवहार करना करने की अंतर्दृष्टि विकसित होने लगती है। 2. बाधा (Obstacle) - जब किसी लक्ष्य के सामने कोई बाधा आती है तो उसको हटाने का तरीका ढूंढ लेते हैं या कहें तो समस्या का समाधान ढूंढ़ लेते हैं। 3. तनाव (Tension) - यदि किसी कारण से बाधा नहीं हटती तो तनाव की स्थिति निर्मित हो जाती है। 4. संगठन (Organization) - लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रकार के तत्वों का संगठन करते हैं। 5. पुनः संगठन (Re- Organization) - जब एक बार में लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती तो फिर से प्रयास करना पड़ता है। इन सबके के अलावा साथ क्षमता, पूर्वअनुभव, तत्पर आवृत्ति, भटकावा, खोज आदि भी महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोहलर का अंतर्दृष्टि सिद्धांत / insightful theory of Kohlerकोहलर ने सुल्तान नाम के चिंपांजी (Chimpanzee) पर अपने प्रयोग किए। 1. उन्होंने पिंजरे में चिंपैंजी को बंद कर दिया और थोड़ी ऊंचाई पर केले लटका दिए, जो कि उसकी पहुंच से बाहर थे परंतु उन्होंने उस पिंजरे में कुछ बॉक्स रख दिए। Chimpanzee ने केलों को खाने के लिए उन तक पहुंचने की कोशिश की परंतु वह कामयाब नहीं हुआ। 2. फिर अचानक उसकी नजर बॉक्सेस पर पड़ी तो उसने उन बॉक्सेस को केलों के पास लगाया, तो उसका हाथ केलो तक पहुंच गया। ( यानी अचानक से अंतर्दृष्टि आ गई जिसे आम बोलचाल की भाषा में दिमाग की बत्ती जलना कहते हैं। 3. इसके बाद उन्होंने फिर से प्रयोग किया और उस पिंजरे में उनके केलों को और ज्यादा ऊंचाई पर बांध दिया और वहां पर कुछ डंडे भी रख दिये। 4. इसके बाद चिंपैंजी ने बॉक्स पर चढ़कर केलो को तोड़ने की कोशिश की तो केले नहीं टूटे, फिर उसने डंडे से केलों को खींच लिया। 5. इस तरह से चिंपैंजी ने अपनी अंतर्दृष्टि से केलों को प्राप्त कर लिया। कोहलर के सिद्धांत की विशेषताएं / Characteristics of kohler's Theory1. यह सिद्धांत ह्यूरिस्टिक पद्धति पर आधारित है। अर्थात इसमें बच्चे परिस्थिति के अनुसार अपनी समस्या सुलझाने में सफल हो जाते हैं। 2. इसमें बच्चों की मानसिक क्षमताओं का पता आसानी से लगाया जा सकता है। 3. यह सिद्धांत रटने के सिद्धांत या आदत बनाकर सीखने के सिद्धांत का विरोध करता है। कोहलर के सिद्धांत की आलोचनाएं / Criticism of kohler's Theory1. प्रसिद्ध वैज्ञानिक ऑलपोर्ट का मानना है कि सूझबूझ या अंतर्दृष्टि अचानक ना होकर क्रमिक होती है। 2. केवल अंतर्दृष्टि से ही नहीं सीखा जा सकता, सीखने के लिए प्रयास भी महत्वपूर्ण है। 3. यह सिद्धांत मंदबुद्धि वाले बच्चों के लिए उपयोगी नहीं है। 4. इस सिद्धांत में अभ्यास का अभाव है। 5. इस सिद्धांत के अनुसार अंतर्दृष्टि अचानक ही होती है, इसके लिए कोई पूर्व अभ्यास नहीं किया जा सकता। |
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