दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- मकर संक्रांति स्पेशियल
- सामूहिकता दिखाते हुए करें कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला
- मंत्रियों के पैंतरा बदल पर संवैधानिक प्रश्न
- जनतंत्र में जन को सम्मान
- गौ आधारित खेती का कमाल
- ओमिक्रोन संक्रमण के कारण अमेरिका में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई
- गलवान घाटी जैसी घटना को चीन ने फिर दिया अंजाम
- कोरोना के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने की दो दवाओं की सिफारिश
- क्यूबा संकट को दोहराना चाहते हैं पुतिन
- एक छोटा सा दीप जला ले
- 15 जनवरी 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- सार्वभौम शाक्यद्वीपीय ब्राह्मण महासंघ के जिला कार्यकारिणी का चुनाव सम्पन्न
- पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर की गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी की अनैतिक हरकतों से गुरु घर की नष्ट होती मर्यादा को बचाने की गुहार
- बढ़ते कोरोना केस के मद्देनजर दर्शनार्थियों के लिए बंद हुआ गढ़ देवी मंदिर
- युवा दिवस के रूप में मनाई विवेकानंद की जयंती
- मकर संक्रांति की 8 पौराणिक घटनाएं जो इस दिन को बनाती है खास
- डॉ श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती संस्थान परिसर में मनायी गयी ।
- मकर संक्रांति का महत्त्व
- 14 जनवरी 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ?
| Posted: 14 Jan 2022 05:58 AM PST आप सभी को मकर सक्रांति की ढेरों शुभकामनाएं
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| सामूहिकता दिखाते हुए करें कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला Posted: 14 Jan 2022 05:53 AM PST सामूहिकता दिखाते हुए करें कोरोना की तीसरी लहर का मुकाबला(पं. आर.एस. द्विवेदी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) कोेरोना की तीसरी लहर एक बार फिर बड़े संकट का इशारा कर रही है। अमेरिका से भारत तक एवं दुनिया के अन्य देशों में कोरोना के बढ़ते मामले चिंता में डालने लगे हैं, क्योंकि कोरोना की पहली एवं दूसरी लहर में जन-तबाही देखी है। पिछले सप्ताह से भारत में कोरोना संकट तेजी से बढ़ने लगा है। जबकि ठीक होने वालों का दैनिक आंकड़ा बहुत कम है, इसलिये सक्रिय मामलों की संख्या बढ़ने लगी है। इस बीच देश में 15 से 18 साल के किशोरों को कोरोना टीका लगाने की शुरुआत स्वागत योग्य है। लंबे इंतजार के बाद जब किशोरों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हुआ तो स्वाभाविक ही इसे लेकर उत्साह दिखा। पहले ही दिन चालीस लाख से अधिक किशोरों ने टीका लगवाया। टीकाकरण शुरू होने से पहले इस उम्र वर्ग के आठ लाख किशोरों ने जिस उत्साह के साथ पंजीकरण कराया है, उससे साफ है कि इस आयु वर्ग के टीकाकरण में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। पहली लहर में देखा गया था कि बच्चों और किशोरों पर कोरोना का बहुत असर नहीं हुआ था। मगर दूसरी लहर में वे भी भारी संख्या में चपेट में आए थे। इसलिए भी तीसरी लहर को लेकर एक भय, डर एवं आशंका का माहौल है, किशोरों के सुरक्षित जीवन के लिये उनका टीकाकरण एक जरूरी एवं उपयोगी कदम है।देश में इस आयु वर्ग के करीब दस करोड़ किशोरों को वैक्सीन दी जानी है। किशोरों को केवल भारत बायोटेक की कोवैक्सीन ही लगाई जाएगी। किशोरों का दसवीं कक्षा का आईडी कार्ड रजिस्ट्रेशन के लिए पहचान का प्रमाण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर बच्चों-किशोरों को वैक्सीन देने की घोषणा की थी। कोरोना वैक्सीन की दोनोंघ्डोज लगा चुके वृद्ध लोगों के लिये 10 जनवरी 2022 से बूस्टर डोज लगाने का उपक्रम शुरू करना भी कोरोना को परास्त करने का एक प्रभावी चरण है। प्रारंभ में 60 से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों, स्वास्थ्यकर्मियों व अन्य कोरोना योद्धाओं को बूस्टर डोज लगने की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। इससे प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार एवं प्रांत की सरकारें कोरोना को लेकर गंभीर है, जागरूक हैं। लेकिन सरकार की जागरूकता से ज्यादा जरूरी है आम आदमी की जागरूकता और अपनी सुरक्षा के लिए सचेत रहना। किशोरों के टीकाकरण में उत्साह से सहभागी बनने की जरूरत है, बिना किसी भय एवं आशंका के। याद रखें कि पूर्ण रूप से टीकाकरण के बावजूद इजरायल भी चिंता में है और अमेरिका में तो कोरोना की नई लहर आ गई है। भारत को हर तरह से सचेत रहकर कोरोना महामारी से लड़ना है और साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फिर से लॉकडाउन की नौबत न आने पाए। दरअसल, टीके की उपलब्धता और किशोरों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों आदि के मद्देनजर सरकार ने इस दिशा में कोई कदम बढ़ाने से खुद को रोक रखा था। व्यापक जांच एवं परीक्षण के बाद अब वे दुविधाएं दूर हो चुकी हैं। हमारे देश में किशोरों की खासी बड़ी आबादी है। उनका टीकाकरण न हो पाने की वजह से स्कूल-कालेज खोलने को लेकर भी रुकावट पैदा हो रही थी। अभिभावक इस बात से सशंकित थे कि बच्चों को स्कूल भेजेंगे तो संक्रमण का खतरा बना रहेगा। ऐसा कई जगहों पर हुआ भी, जब स्कूल-कालेज खोले गए और बच्चे वहां गए, तो बड़ी संख्या में संक्रमित हो गए। फिर स्कूल बंद करने पड़े। पिछले दो साल से स्कूल-कालेज बंद रखने, आंशिक रूप से खोलने या ऑनलाइन पढ़ाई का नतीजा यह हुआ है कि बच्चों के सीखने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं को लेकर फैसला करने में अड़चन आ रही थी। ऐसे में टीकाकरण अभियान शुरू होने से बच्चे, अभिभावक, स्कूल और बोर्ड परीक्षा संचालित कराने वाली संस्था तक संक्रमण से सुरक्षा को लेकर कुछ आश्वस्त हो सकेंगे। ऐसा इसलिये भी जरूरी है कि बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है। बच्चों के उन्नत, स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य एवं कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने सोच-समझकर कोरोना के विरुद्ध कोई सार्थक वातावरण निर्मित किया है तो यह सराहनीय स्थिति है। ओमीक्रोन की तीव्र संक्रमण दर और बच्चों-किशोरों के भी इसकी चपेट में आने की खबरों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। स्कूल-कालेज बंद करने और कड़ी पाबंदियों के लौटने से हर कोई चिंतित है। अभिभावक तो पहले ही बच्चों का वैक्सीनेशन नहीं होने तक उन्हें स्कूल भेजने को तैयार नहीं थे। अब बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू होने से अभिभावकों को चिंता कम होगी, वहीं दूसरी ओर देश की शिक्षण संस्थाओं में स्थिति सामान्य बनाने में भी मदद मिलेगी। बच्चों के टीकाकरण से देशवासियों को नया सबल मिलेगा, स्वास्थ्य-सुरक्षा का वातावरण बनेगा। अभिभावकों को चाहिए कि वे किसी भ्रम में न रहें और बेवजह भयभीत न हों। अभिभावकों को जिम्मेदार व्यवहार दिखाते हुए किशोरों का टीकाकरण कराना चाहिए, इस टीकाकरण के लिये सकारात्मक वातावरण बनाने में सहयोगी बनना चाहिए। इस संबंध में उन्हें कोई लापरवाही नहीं बतरनी चाहिए। किशोरों के लिए शुरू हुए टीकाकरण अभियान में सरकार ने काफी सूझबूझ से काम लिया है, इस टीकाकरण की एक अच्छी बात यह भी है कि उनके लिए अलग से केंद्र बनाए गए हैं और स्कूलों में भी इसकी सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। स्कूलों को टीकाकरण केन्द्र बनाने से बच्चों को काफी सुविधा हुई है। किशोरों को आगामी बोर्ड परीक्षा को लेकर चिंता है। वे चाहते हैं कि परीक्षाएं शुरू होने से पहले दोनों खुराक ले लें, ताकि प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वे संक्रमण से बच सकें। इसलिए भी किशोरों में टीकाकरण को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। शुरू में जब टीकाकरण अभियान चला था, तो इसे लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई गई थीं, जिसके चलते बहुत सारे लोगों के मन में हिचक बनी हुई थी। मगर कोरोना की दूसरी लहर में देखा गया कि जिन लोगों ने टीका लगवाया था, उन पर कोरोना का असर घातक नहीं रहा। इससे भी लोगों में टीकों को लेकर विश्वास पैदा हो गया था। इसलिए भी बहुत सारे अभिभावकों की मांग थी कि किशोरों के लिए भी टीकाकरण अभियान जल्दी शुरू किया जाए।भारत में कठिन परिस्थितियों में भी देशवासियों ने जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर का सामना किया है वे आज भी तीसरी लहर का सामना करने में सक्षम हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सतत जागरूकता, देशवासियों और कोरोना वारियर्स के लगातार संघर्ष ने हताशा के बीच भी जीवन को आनंदित बनाने का साहस प्रदान किया है, जो समूची दुनिया के लिये प्रेरणा का माध्यम बना है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मंत्रियों के पैंतरा बदल पर संवैधानिक प्रश्न Posted: 14 Jan 2022 05:50 AM PST मंत्रियों के पैंतरा बदल पर संवैधानिक प्रश्न(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भारतीय राजनीति में दल बदल सहज प्रक्रिया के रूप में समाहित है। कोई भी राजनीतिक दल इससे मुक्त नहीं है। सभी को इस आवागमन का पर्याप्त अनुभव है। सभी पार्टियों में निष्ठावान लोग भी होते है। जो सुख दुख सम्मान अपमान में समान रूप से पार्टी के साथ रहते है। कोई भी प्रलोभन इन्हें विचलित नहीं करता। निराश होते हैं,तो मौन और निष्क्रिय हो जाते है। दूसरी तरफ दल बदल में माहिर नेताओं की भी कमी नहीं। इन्हें किसी भी झंडे और टोपी से कोई परहेज नहीं रहता। इनके लिए विचारधारा वस्त्रों की भांति होती है,जिन्हें कभी भी बदला जा सकता है। ये खुद नहीं जानते कि कब और कहां इनका दम घुटने लगेगा,कब इनकी घर वापसी होगी,कब ये अपना घर छोड़ देंगे,आदि। ऐसे प्रत्येक अवसरों के लिये इनके पास बयान तैयार रहते है। इनके माध्यम से अपनी मासूमियत छिपाने का प्रयास किया जाता है। इनका लगता है कि इनकी सभी बातों पर जनता विश्वास करेंगी। ऐसा लगता है कि गरीबों वंचितों किसानों दलितों पिछड़ों का इनसे बड़ा कोई हमदर्द नहीं है। इस कारण ये सदैव बेचैन रहते है। इसके लिए बार बार पार्टी बदलने का कड़वा घूंट इन्हें पीना पड़ता है। कोई यह नहीं कहता कि उन्हें अपने बेटे बेटी को टिकट दिलानी है। विपरीत ध्रुवों को नाप लेने की इनमें क्षमता होती है। जिस पार्टी में जब तक रहते है उसका गुणगान करते है। उसके नेतृत्व में आस्था व्यक्त करते है। उसकी नीतियों पर न्योछावर हो जाते है। विरोधी पार्टी पर दलित वंचित पिछड़ा गरीबों किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते है। इधर पार्टी बदली,उधर बयान को घुमा दिया। इसके साथ ही दूसरी पार्टी गरीब वंचित दलित पिछड़ा किसान विरोधी घोषित हो जाती है। कई बार उनका यह ज्ञान पांच वर्ष तक सत्ता भोग के बाद जागृत होता है। विधायक या सामान्य नेता का पार्टी बदलना अलग विषय है। लेकिन जब पांच वर्ष तक मंत्री रहने वाले पाला बदलते है तो कई संवैधानिक प्रश्न उठते है। संविधान निर्माताओं ने भारत में संसदीय शासन व्यवस्था स्थापित की है। इसमें मंत्रिपरिषद सामूहिक उत्तर दायित्व की भावना से कार्य करती है। इसके अनुरूप मंत्री बनने के लिए पद के साथ गोपनीयता की शपथ लेनी पड़ती है। यदि विधानमंडल किसी एक मंत्री के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित कर दे तो पूरी मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना होता है। यह संसदीय प्रणाली के सामूहिक उत्तर दायित्व का तकाजा है। मंत्रिमंडल के निर्णय सामूहिक उत्तर दायित्व के अनुरूप ही सार्वजनिक किए जाते है। यह संविधान की व्यवस्था व भावना है। मंत्रीगण इस संवैधानिक प्रावधान से बंधे होते है। किंतु उनका एक अधिकार अवश्य सुरक्षित रहता है। वह किसी भी समय अपने मंत्री पद से त्याग पत्र दे सकते है। इस पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। यदि मंत्री को लगता है कि सरकार गरीब वंचित दलित पिछड़ा किसान विरोधी है,या उसके विचारों को महत्व नहीं मिल रहा है,तो वह मंत्री परिषद से अपने को अलग कर सकता है। जिसने पांच वर्षों तक ऐसा नहीं किया,उसे सरकार के कार्यों पर कुछ भी कहने का नैतिक अधिकार नहीं हो सकता। वह पांच वर्ष मंत्री रहा,इसका मतलब है कि वह सरकार के कार्यों से सहमत था। उसके कार्यों में बराबर का सहभागी था। यह कहने से काम नहीं चलेगा कि उसने प्रतिकूल परिस्थिति में कार्य किया। सच्चाई यह है कि मंत्री पद के मोह को वह छोड़ना नहीं चाहता था। इसमें उसका स्वार्थ था। मतदान तारीख के अट्ठाइस दिन बाद उसने मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र दिया। इसमें में उसका स्वार्थ था। जब स्वार्थ सर्वोच्च है,यह राजनीतिक जीवन का साध्य है,तब गरीब पिछड़ा दलित किसान की बातें स्वतः बेमानी हो जाती है। ऐसे लोगों की बताना चाहिए कि उन्हें चुनाव के ठीक पहले क्यों लगा कि सरकार जनविरोधी थी। ऐसे लोग पिछले विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा में शामिल हुए थे। उस समय ये विपक्ष के नेता हुआ करते थे। वह मंत्री नहीं थे। इसलिए संवैधानिक उत्तरदायित्व से मुक्त थे। उस समय इनके निशाने पर सत्तारूढ़ सपा हुआ करती थी। तब ये सपा को दलित किसान विरोधी बताया करते थे। यह सब पैतरे उनके व्यक्तिगत हो सकते है। लेकिन पांच वर्ष मंत्री रहने के बाद इन्हें संविधान से संबंधित प्रश्नों का जबाब देना होगा। ये प्रश्न उनका पीछा करते रहेंगे। प्रश्न यह कि सरकार की नीतियां गलत थी तो ये पांच वर्ष उसके साथ क्यों रहे,क्यों अनगिनत बार सरकार की नीतियों व नेतृत्व की सराहना करते रहे। मंत्री पद और भाजपा छोड़ने वालों के तर्क दिलचस्प है। एक ने कहा कि अलग विचारधारा के बावजूद सरकार में रहकर उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ काम किया। प्रदेश की सेवा की है। योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में श्रम सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तर दायित्व का निर्वहन किया है। दलितों, पिछड़ों, किसानों,बेरोजगारों, नौजवानों एवं छोटे,लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैया के कारण उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहा हूं। यदि इनकी बात पर एक पल को विश्वास करें तो यह भी मानना पड़ेगा कि इसके लिए वह बराबर के दोषी है। मंत्री रहते हुए वह अपने दायित्व का उचित निर्वाह नहीं कर सके। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि इतनी प्रतिकूल परिस्थिति थी तो वह पांच वर्ष खामोश क्यों रहे। ऐसे ही दूसरे नेता कहते है कि मैंने इसलिए बीजेपी छोड़ी, क्योंकि मेरी किसी भी तरह की बात नहीं सुनी गई। इन्होंने करीब तीन वर्ष पहले की घटना का उल्लेख किया। कहा कि एक सौ चालीस विधायकों ने जब धरना दिया था तब सब धमकाए गए थे। तभी सबने तय किया था कि उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। आश्चर्य यह कि इनको भी चुनाव के अट्ठाइस दिन पहले ही दर्द का अनुभव हुआ। इन्होंने भी उस सरकार पर दलित पिछड़ा किसान विरोधी होने का आरोप लगाया,जिसमें ये पांच वर्षों तक सहभागी थे। इतना ही नहीं मंत्री पद व भाजपा छोड़ने के कुछ घण्टे पहले तक इनकी निष्ठा नहीं बदली थी। इन्होंने कहा था कि श्मेरे बड़े भाईश् ने इस्तीफा क्यों दिया,इसकी जानकारी नहीं है। पता चला है कि जो उन्होंने सपा में जाने वालों की सूची दी है,उसमें मेरा भी नाम है। उन्होंने यह मेरे से पूछे बिना किया। जो गलत किया। मैं इसका खंडन करता हूं। मैं भाजपा में हूं और भाजपा में ही रहूंगा। इसके बाद अगला बयान आया कि सरकार में दलितों पिछड़ों किसानों की उपेक्षा हो रही थी। इसलिए मंत्री पद व भाजपा छोड़ रहे है। इस्तीफा देने वाले एक मंत्री का कुछ समय पहले दिया गया बयान गौरतलब है। उनका कहाना था कि 2009 से 2017 तक केवल 36 लाख श्रमिकों का पंजीयन व सात लाख को योजनाओं का लाभ मिला था। योगी सरकार ने साढ़े चार साल में एक करोड़ 20 लाख श्रमिकों का पंजीयन कराते हुए 77 लाख श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिलाया है। कोरोना काल में सरकार श्रमिकों व प्रवासी मजदूरों के साथ खड़ी रही। मुफ्त राशन व धन लगातार वितरित हो रहा है। सामूहिक विवाह के आयोजन फिर शुरू होने जा रहे हैं। प्रदेश सरकार श्रमिक एवं उनके परिवार के कल्याण के लिए तथा उनके जीवन स्तर को उन्नतिशील बनाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के लिए अठारह कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jan 2022 05:47 AM PST जनतंत्र में जन को सम्मान |
| Posted: 14 Jan 2022 05:43 AM PST गौ आधारित खेती का कमाल(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) देसी गाय का ताजा गोबर खेती के लिए बहुत उपयोगी होता है। वहीं, गोमूत्र जितना पुराना होगा, उतना ही असरदार होगा। गाय के गोबर में समाहित सुगंध एवं पोषण से केंचुए आकर्षित होते हैं, जो भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए निरंतर कार्य में लगे रहते हैं। भूमि में केंचुए की संख्या जितनी अधिक होगी , भूमि की उर्वरा शक्ति उतनी ही अधिक होती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गोवंश के महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता। आज खेती आधुनिक तरह से होने लगी है। ट्रैक्टर से जुताई होती हैऔर थ्रेशर से गहाई करके फसल घर के आंगन में पहुंच जाती है। हमारे जैसे साठ साल के ऊपर के लोगों को बैलों से खेत की जुताई और खलिहान में बैलों के द्वारा ही फसल की मड़ाई के वे आकर्षक दिन अब भी याद होंगे । वस्तुतरू गोवंश का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है क्योंकि गोबर की खाद और रासायनिक खाद के अंतर को आलू और अन्य सब्जियों के स्वाद से भी समझा जा सकता है। गोवंश के विकास की तरफ पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया जिससे गौआधारित खेती की परम्परा भी कमजोर हुई । योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व में यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद गोवंश विशेष रूप से चर्चा में आया। योगी की सरकार बनते ही अबैध बूचडखाने बन्द हो गये। गोवंश को पालने के लिए लोगों को प्रोत्साहित भी किया गया । छुट्टा पशुओं से गांवों से लेकर शहरों तक समस्या भी खड़ी हुई । प्रदेश के नये मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को अभी कुछ दिनों पूर्व ही निर्देश दिया है कि छुट्टा पशुओं को गौशालाओं में रखा जाए ताकि वे फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। इसके साथ ही अब योजना बन रही है कि सरकार के माध्यम से गोबर की भी खरीद की जाए। गोबर से खाद और बायो गैस बनाकर ग्रामीणों को दी जाएगी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ से 25 किलोमीटर दूर किला परीक्षितगढ़ में किसान गौ आधारित खेती कर रहे हैं जिससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है। मेरठ के एक किसान बृजेश कुमार त्यागी ने बताया कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती के माध्यम से जहां कम लागत में बेहतर फसल होती है, वहीं जमीन की उर्वरक क्षमता भी बढ़ रही है और पानी की खपत कम होती है। किसान बृजेश कुमार त्यागी आम, लीची, अमरूद सहित अन्य प्रकार के फलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने एक समाचार चैनल की टीम से खास बातचीत करते हुए बताया कि वह खेती करते समय देसी गाय के गोमूत्र व गोबर का उपयोग करते हैं। भूमि में केंचुए की संख्या जितनी अधिक होगी , भूमि की उर्वरा शक्ति उतनी ही अधिक होती है। किसान बृजेश त्यागी के अनुसार उन्होंने 2004 में इस तरह से खेती की शुरुआत की थी। वह गुजरात में नौकरी करते थे लेकिन उन्होंने नौकरी को छोड़कर सोचा कि वह अपनी खेती करेंगे ,जिसके लिए उन्होंने खेती की प्राकृतिक पद्धति को अपनाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में किसान रासायनिक खाद को अधिक उपयोग करते हुए जमीन को खोखला बनाते जा रहे हैं, जिससे कि जो कीटाणु जमीन के लिए आवश्यक होते हैं ,वह नीचे धरातल पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज फसल को पानी की भी अति आवश्यकता होती है। वहीं, खेती की बात की जाए तो उसमें खाद की मात्रा अधिक होती है. लेकिन गौ आधारित खेती ऐसी है. जहां बेहतर फसल होती है, वहीं खर्चा भी कम बैठता है। उन्होंने बताया कि पहले तो वह सिर्फ अकेले ही अपनी 13 एकड़ जमीन में यह फसल ऊगा रहे थे. लेकिन अब किला परीक्षित गढ़ में अन्य किसानों को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं। श्री त्यागी वर्ष 2019 से विभिन्न सेमिनार को अटेंड करते हुए गौ आधारित खेती को ही आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में गोप्रेमी योगी आदित्य नाथ के मुख्यमंत्री बनते ही भाजपा सरकार में गायों के अच्छे दिन भी शुरू हो गए। प्रदेश में गोवंश के संवर्द्धन के लिए पशुपालन एवं दुग्ध विकास के अलावा अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। दरअसल, 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद जब मुख्यमंत्री के पद पर योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी हुई, उसके दूसरे दिन से ही प्रदेश में योगी सरकार ने राज्य भर में चल रहे अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई शुरू की, जिसे लेकर मीट कारोबारी हड़ताल पर भी गए। राज्य सरकार का दावा है कि सभी अवैध बूचड़खाने बंद हो गए हैं। बूचड़खानों पर कार्रवाई के अलावा सरकार का गायों की सुरक्षा और संरक्षा पर खघसा जोर रहा है।खघ्ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाय और गोशाला को लेकर काफी संवेदनशील रहे हैं। उनकी संवेदनशीलता और गोप्रेम इसी बात से देखा जा सकता है जब उन्होंने 2019 में गोवंश कल्याण के लिए विभिन्न मदों में 632.60 करोड़ खर्च करने का बजट जारी कर दिया। वहीं इस वर्ष बजट के दौरान भी वित्त मंत्री ने कहा कि गोवंश के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार द्वारा चलाई गई गोवंश योजना मेरठ मंडल के सभी जिलों में संचालित हो रही है। मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड, नोएडा और बागपत में योजना के क्रियान्वयन के लिए पशुपालन विभाग जुटा हुआ है। मंडल के सभी छह जिलों में गोवंश संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं जहां पर गायों की पूरी तरह से देखभाल की जाती है। अकेले मेरठ में ही दो बड़ी गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें देशी गायों की देखभाल की जा रही है। योगी सरकार की इस योजना का एक दूसरा पहलू और भी है। एक ओर जहां गोशालाओं में गायों की उपेक्षाओं की खबरें आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे प्रदेश में किसान आवारा गायों से अपनी फसलों की रक्षा के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। कई बार किसान प्रशासन से इन आवारा गोवंशों पर रोक लगाने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन प्रशासन भी किसानों को इस समस्या से मुक्ति नहीं दिला सका। प्रदेश के नवनियुक्त मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने 31दिसम्बर को लोक भवन स्थित कार्यालय में कार्यभार संभाला था। निवर्तमान मुख्य सचिव आरके तिवारी ने उन्हें कार्यभार सौंपा। दुर्गा शंकर मिश्रा 1984 बैच के आईएएस अफसर हैं। कार्यभार संभालने के बाद मुख्य सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नया दायित्व देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की विकास व जनकल्याणकारी योजनाओं को अभियान के तौर पर पूरा करने की प्रतिबद्धता भी जताई। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की गोवंश संवर्द्धन संबंधी योजनाओं को निश्ठा के साथ लागू करने का निर्देश देते हुए कहा था कि वह दफ्तर में बैठकर नहीं, बल्कि फील्ड में उतरकर काम करेंगे।मुख्य सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बार कहा कि वह इसी प्रदेश के रहने वाले हैं। इसलिए प्रदेश के प्रति उनकी जिम्मेदारी और अधिक है। वह प्रदेश के बहुत कुछ देना चाहते हैं, इसके लिए भरपूर प्रयास भी करेंगे। वह पहले भी यहां कई जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं। उनको यहां की ब्यूरोक्रेसी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश का दौरा करने के बाद विकास का ब्ल्यू प्रिंट तैयार कराकर काम शुरू कराएंगे। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews 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| ओमिक्रोन संक्रमण के कारण अमेरिका में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई Posted: 14 Jan 2022 05:41 AM PST ओमिक्रोन संक्रमण के कारण अमेरिका में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराईवाशिंगटन। अमेरिका में रिकार्ड स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती हुए कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या रिकार्ड 1,51,261 तक पहुंच गई। पूरे देश में कोरोना के ओमिक्रोन संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। बड़ी तादाद में चिकित्साकर्मियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में स्वास्थ्य प्रणालियों का आलम ये है कि, तकरीबन 19 राज्यों के पास आईसीयू क्षमता 15फीसदी से भी कम बची है। वहीं, केंटकी, अलबामा, इंडियाना और न्यू हैम्पशायर सरीखे राज्यों में आईसीयू क्षमता 10फीसदी से भी कम है। ये आंकड़े अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के तरफ से बुधवार को जारी किए गए थे। देश के अन्य राज्य एरिजोना, डेलावेयर, जॉर्जिया, मैसाचुसेट्स, मिसिसिपि, मिसौरी, नेवादा, न्यू मैक्सिको, उत्तरी कैरोलिना, ओहियो, ओक्लाहोमा, पेंसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, टेक्सास और वरमोंट में भी संक्रमण के लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गलवान घाटी जैसी घटना को चीन ने फिर दिया अंजाम Posted: 14 Jan 2022 05:38 AM PST गलवान घाटी जैसी घटना को चीन ने फिर दिया अंजामबीजिंग चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीनी सेना ने वियतनाम के जवानों पर पत्थरबाजी की है। ये घटना ठीक वैसी ही है, जैसी घटना चीन ने साल 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सेना के जवानों के साथ की थी। साल 2020 में चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर गलवन घाटी में पत्थर, डंडों और अन्य तेज धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। ठीक उसी रणनीति के साथ चीन ने वियतनाम सैनिकों पर हमला किया है। चीनी सैनिकों के हमले का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो को ट्विटर पर पोस्ट किया गया है। वीडियो में चीनी सैनिक वियतनामी निर्माण श्रमिकों पर पत्थर फेंकते हुए और निहत्थों को गाली देते हुए दिख रहे हैं। पत्थरबाजी की ये घटना चीन की सीमा से लगे उत्तरी वियतनाम के हा गियांग प्रांत की है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| कोरोना के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने की दो दवाओं की सिफारिश Posted: 14 Jan 2022 05:31 AM PST कोरोना के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने की दो दवाओं की सिफारिशजेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए दो दवाओं के इस्तेमाल की सिफारिश की है। ये दवाएं मरीजों की हालत गंभीर होने की स्थिति में दी जा सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये दवाएं मरीजों को आराम देने वाली होंगी और इससे कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में भी कमी आएगी। बता दें कि इस समय भारत समेत कई देशों में कोरोना के मामलों में एक बार फिर से तेजी देखी गई है, जिस कारण देशों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। डब्ल्यूएचओ ने कार्टिकोस्टेराइड्स के साथ संयोजन में बारिसिटिनिब और इंटरल्यूकिन-6 नामक दो गठिया दवाओं के उपयोग की सिफारिश की है। कोरोना के इलाज में ये दवाएं वेंटिलेटर पर जाने से बचाती हैं। विशेषज्ञों ने कहा, डाक्टर मरीजों के इलाज में उपलब्ध इन दोनों दवाओं में से किसी एक दवा का उपयोग कर सकते हैं। एक ही समय में दोनों दवाओं का उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती है। डब्ल्यूएचओ की ताजा गाइडलाइन में मोनोक्लोनल एंटीबाडी दवाओं, जैसे सोट्रोविमैब और कासिरिविमैबध्इमडेविमैब के इस्तेमाल की भी सिफारिश की गई है, जिसका कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सिर्फ उन लोगों में जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने का सबसे अधिक जोखिम है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| क्यूबा संकट को दोहराना चाहते हैं पुतिन Posted: 14 Jan 2022 05:28 AM PST क्यूबा संकट को दोहराना चाहते हैं पुतिनमास्को। यूक्रेन को लेकर अमेरिका समेत नाटो देशों और रूस के बीच जारी तनाव में अब नया मोड़ आता दिख रहा है। रूस ने संकेत दिया है कि वह लैटिन अमेरिकी देशों वेनेजुएला और क्यूबा में सेना तैनात करने से हिचकेगा। रूस की इस चेतावनी से शीत युद्ध के समय पैदा हुए क्यूबा संकट की यादें ताजा हो गई हैं। सोवियत संघ ने क्यूबा में अपनी परमाणु मिसाइल तैनात कर दी थी। क्यूबा में जिस जगह यह सोवियत मिसाइल तैनात थी, वह अमेरिका से सिर्फ 145 किमी दूर था। इससे तनाव काफी बढ़ गया था। दरअसल, यूक्रेन को लेकर पश्चिम देशों के साथ रस्साकशी में रूस ने अपना रुख आक्रामक कर दिया। रूस के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के साथ तनाव बढ़ता है तो क्यूबा और वेनेजुएला में रूस की सैन्य तैनाती की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। जिनेवा में अमेरिका के साथ वार्ता में रूसी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करने वाले उप विदेश मंत्री सर्जेई रियाबकोव की टिप्पणी टीवी पर प्रसारित हुई। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jan 2022 05:17 AM PST एक छोटा सा दीप जला लेमन के गहन अंधेरे में तुम एक छोटा सा दीप जला ले । संस्कारहीन चिंतन, चरित्र तज सद्विवेक का पथ अपना ले। जीवन को तू सफल बना ले।। दुर्भाव, द्वेष, तंद्रा विकार अंकुरित, पुष्पित, पल्लवित न हो। ईमानदारी, जिम्मेदारी से संकल्पित लक्ष्य तू पा ले। जीवन को तू सफल बना ले।। प्रगति सोपान यदि चढ़ना है, कुंदन बन यदि निखरना है। साहस करके चुनौती ले ले, जीवन को कर्मण्य बना ले। जीवन को तू सफल बना ले।। भूल न जाना उस अतीत को जिस का स्वर्णिम काल रहा है। अवसाद ग्रस्त या विवश न रह छोड़ अहं "विवेक" जगाले। एक छोटा सा दीप जला ले।। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jan 2022 05:05 AM PST
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| सार्वभौम शाक्यद्वीपीय ब्राह्मण महासंघ के जिला कार्यकारिणी का चुनाव सम्पन्न Posted: 14 Jan 2022 06:11 AM PST सार्वभौम शाक्यद्वीपीय ब्राह्मण महासंघ के जिला कार्यकारिणी का चुनाव सम्पन्नआज दिनांक १४.०१.२०२२ को शीतलपुर स्थित केन्द्रीय कार्यालय,गिरिडीह में जिला कार्यकारिणी के निवर्तमान पदाधिकारियों ,सदस्यों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए एक बैठक श्री राजेंद्र मिश्र,लेदा की अध्यक्षता में हुई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक उपाध्याय एवं प्रदेश अध्यक्ष संजीव मिश्र उपस्थित हुए ।इस बैठक में सर्वसम्मति से शरद भक्त को जिला अध्यक्ष,उदय मोहन पाठक को जिला महासचिव, उदय चंद्र मिश्र को कोषाध्यक्ष एवं सुनील पाठक को संयुक्त सचिव तथा राजेन्द्र मिश्र,लेदा को जिला मुख्य संरक्षक बनाया गया।राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति से प्रदेश अध्यक्ष संजीव मिश्र ने निवर्तमान जिला अध्यक्ष संतोष कुमार पाठक को प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत किया जिसका बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया ।साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने 15 दिनों के भीतर शेष पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों का मनोनयन कर प्रदेश कार्यालय को सूचित करने हेतु कहा I राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उपाध्याय एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री मिश्रा जी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को माला पहनाकर स्वागत किया । इस बैठक में मुख्य रूप से श्री अशोक मिश्र ,श्री महेश प्रसाद पाठक , श्री रामाधार मिश्र ,श्री दिलीप कुमार उपाध्याय ,पवन कुमार मिश्र, अश्विनी मिश्र ,मुकुंद मुरारी ,शिव शंकर उपाध्याय, प्रकाश चंद्र मिश्र ,बाबूलाल मिश्र, कुलदीप मिश्र , शिवदत्त मिश्र ,प्राण बल्लभ भक्त ,राजेंद्र मिश्र ,अरविंद कुमार मिश्र, रतनलाल मिश्र ,नकुल कुमार मिश्र ,दिनेश कुमार उपाध्याय, विपुल वत्सल, हेमंत कुमार पाठक, शिवदत्त मिश्र ,राजेंद्र मिश्र श्याम सुंदर पाठक, ज्वलंत उपाध्याय, कपिल कुमार मिश्र आदि उपस्थित थे। यह जानकारी नवनिर्वाचित महासचिव उदय मोहन पाठक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jan 2022 03:51 AM PST पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर की गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी की अनैतिक हरकतों से गुरु घर की नष्ट होती मर्यादा को बचाने की गुहारपटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर ने जिला सत्र न्यायाधीश सह संरक्षक तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी,पटना को निबंधित पत्र लिखकर तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी की अनैतिक हरकतों से गुरु घर की नष्ट होती मर्यादा को बचाने की गुहार लगाई है। सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर ने कहा कि पटना साहिब गुरूद्वारा इन दिनों क्षुद्र राजनीति का अड्डा बना हुआ है। पटना साहिब गुरूद्वारा पर पंजाब के सिख अपना नियंत्रण बनाना चाहते हैं। इसमें कुछ हद तक सफल भी हुऐ हैं। इन दिनों सिखों के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक तख्त श्री गुरूगोबिन्द सिंह जी महाराज की जन्म स्थली पटना साहिब गुरूद्वारा क्षुद्र राजनीति का रणक्षेत्र बन गया है। यहाँ प्रबन्धक कमिटी के आपसी विवाद के कारण तलवारबाजी से लेकर पत्थरबाजी की घटना आम बात हो गई है। इसी कड़ी में पिछले दिनों तख्त के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी राजेन्द्र सिंह जी पर तलवार से हुई जानलेवा हमला जांच का विषय हो सकता है। हाल में मुख्य ग्रंथी राजेन्द्र सिंह के साथ कुछ अन्य लोगों का गुरूघर के सेवकों की जबरन सेवानिवृत्ति को लेकर विवाद भी हुआ था। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह पर भी तलवार से ही हमला हुआ था। यह विचारणीय है कि जब-जब पंजाब के अकाली दल के समर्थक गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी पर वर्चस्व बनाते हैं तो स्थानीय सिख जनप्रतिनिधियों से उनका टकराव होता है। अपने वर्चस्व के लिए ये धर्मकंटक हिंसा का सहारा लेने से भी नहीं चूकते। सुधार समिति के महासचिव बताया कि इन दिनों तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी की मनमानी की खबर आये दिन समाचारों में पढ़ने को मिलती है कि किस तरह वे स्थानीय सिख जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर नित्य नया आदेश निर्गत करते हैं। ये सभी तख्त की प्राचीन सनातनी पूजा पद्धति के साथ भी खिलवाड़ करने से नहीं चूकते हैं। इनलोगों ने गुरु के शयन कक्ष की प्राचीन परंपरा को भी नुकसान पहुंचाया है। पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर ने जिला सत्र न्यायाधीश व संरक्षक गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी पटना से अनुरोध किया है कि धर्म की आड़ में राजनीति की रोटी सेंकने वाले इन धर्मकंटकों पर ठोस कार्रवाई करते हुये गुरुघर की नष्ट होती मर्यादा को बचाने की कृपा करते हुए स्थानीय और बाहरी के विवाद को खत्म करने के लिए प्रबंधक कमिटी को भंग कर नया चुनाव कराने की मांग पत्र में की है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| बढ़ते कोरोना केस के मद्देनजर दर्शनार्थियों के लिए बंद हुआ गढ़ देवी मंदिर Posted: 13 Jan 2022 11:10 PM PST बढ़ते कोरोना केस के मद्देनजर दर्शनार्थियों के लिए बंद हुआ गढ़ देवी मंदिरमढौरा, सारण से संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट नगर पंचायत मढौरा स्थित प्रसिद्ध गढ़ देवी मंदिर बढ़ते करोना केस को देखते हुए अगले आदेश तक शासन के द्वारा बंद कर दिया गया है । इस मंदिर में अन्य दिन के अलावे विशेषकर शुक्रवार और सोमवार को दर्शनार्थियों की विशेष भीड़ होती है । दर्शनार्थी दूर-दूर से मंदिर में मन्नत मांगने और पूजा अर्चना करने आते हैं । मीडिया से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी तुकाई बाबा और मनोज बाबा ने बताया कि आदेशानुसार मंदिर में सुबह- शाम सिर्फ पुजारी पूजा अर्चना करेंगे । बिहार सरकार के द्वारा पार्क, मॉल, विद्यालय जैसे प्रतिष्ठानों के साथ भीड़भाड़ वाले स्थानों में प्रसिद्ध मंदिर को भी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत बंद रखने का निर्णय किया गया है । पुलिस प्रशासन के द्वारा मास्क का प्रयोग ना करने वाले के खिलाफ आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है ।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| युवा दिवस के रूप में मनाई विवेकानंद की जयंती Posted: 13 Jan 2022 11:08 PM PST युवा दिवस के रूप में मनाई विवेकानंद की जयंतीदेवरिया ब्यूरो वेद प्रकाश तिवारी, भाटपार रानी ,देवरिया।भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के बखरी बाजार स्थित आरएमएस पैरामेडिकल कॉलेज के प्रांगण में बुधवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गई।इस मौके पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में कवि मक़सूद अहमद भोपतपुरी ने अपनी रचना- जीवन अपना समर्पित कर के दिया हमें आनन्द,अमर रहेंगें सदा दुनिया में स्वामी विवेकानंद---प्रस्तुत कर स्वामी जी के जीवन आदर्शों पर प्रकाश डाला।साहित्यकार डॉ वेद प्रकाश तिवारी ने ढ़ोंगी बाबाओं की बढ़ती हुई संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म की आड़ में गलत काम करने वालों से सावधान रहने की जरूरत है।इंजीनियर प्रमोद चौधरी,मुस्ताक अहमद आदि ने गीत प्रस्तुत किया।श्रीमद्भागवत व श्रीरामचरितमानस कथा वाचक पं० घनश्यामानन्द ओझा व पं० मण्डलेश्वर त्रिपाठी ने स्वामी जी के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जैसे सन्तों की आज जरूरत है,जिन्होंने अमेरिका सहित तमाम देशों में भारतीय संस्कृति व सभ्यता का डंका बजाया।मुख्य अतिथि भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री हरिचरन सिंह कुशवाहा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अंदर देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई थी।उनके विचारों पर चलने की जरूरत है।विशिष्ट अतिथि समाजसेवी जटाशंकर सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।कार्यक्रम को एडवोकेट रवि प्रकाश कुशवाहा, संजय पटेल,संत तीर्थराज,गेनालाल यादव,जवाहरलाल यादव,अरविंद मिश्र आदि ने सम्बोधित किया।कार्यक्रम के संयोजक व लोकतंत्र रक्षक सेनानी केशवकान्त सिंह ने आभार प्रकट किया।यहां मुख्य रूप से प्राचार्य डॉ एके सिंह,समीर हुसैन, अखिलेश, पंकज,राजेश,सूरज कुशवाहा,आर्यन,मुकेश, पूनम,सबरा,रानी,रौशनतारा,अन्नू आदि शिक्षक गण व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मकर संक्रांति की 8 पौराणिक घटनाएं जो इस दिन को बनाती है खास Posted: 13 Jan 2022 11:05 PM PST मकर संक्रांति की 8 पौराणिक घटनाएं जो इस दिन को बनाती है खाससंवाददाता कन्हैया तिवारी की कलम से | मकर संक्रांति का पर्व प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी को मनाया जाता है। आओ जानते हैं कि आखिर मकर संक्रांति के दिन कौनसी 8 पौराणिक घटनाएं घटी थी जिसके चलते मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। 1. गंगा जा मिली थी गंगा सागर में : मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथजी के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर में मेला लगता है। राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों का गंगाजल, अक्षत, तिल से श्राद्ध तर्पण किया था। तब से ही माघ मकर संक्रांति स्नान और मकर संक्रांति श्राद्ध तर्पण की प्रथा आज तक प्रचलित है। पावन गंगा जल के स्पर्श मात्र से राजा भगीरथ के पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। कपिल मुनि ने वरदान देते हुए कहा था, 'मातु गंगे त्रिकाल तक जन-जन का पापहरण करेंगी और भक्तजनों की सात पीढ़ियों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करेंगी। गंगा जल का स्पर्श, पान, स्नान और दर्शन सभी पुण्यदायक फल प्रदान करेगा।' कथा के अनुसार एक बार राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ किया और अपने अश्व को विश्व-विजय के लिए छोड़ दिया। इंद्रदेव ने उस अश्व को छल से कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। जब कपिल मुनि के आश्रम में राजा सगर के 60 हजार पुत्र युद्ध के लिए पहुंचे तो कपिल मुनि ने श्राप देकर उन सबको भस्म कर दिया। राजकुमार अंशुमान, राजा सगर के पोते ने कपिल मुनि के आश्रम में जाकर विनती की और अपने बंधुओं के उद्धार का रास्ता पूछा। तब कपिल मुनि ने बाताया कि इनके उद्धार के लिये गंगाजी को धरती पर लाना होगा। तब राजा अंशुमन ने तप किया और अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दिया। बाद में अंशुमान के पुत्र दिलीप के यहां भागीरथ का जन्म हुआ और उन्होंने अपने पूर्वज की इच्छा पूर्ण की। 2. श्रीहरि विष्णु ने किया था असुरों का वध : इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इसलिए यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है। 3. सूर्यवंशी राजा करते हैं सूर्य की पूजा : रामायण काल से ही भारतीय संस्कृति में दैनिक सूर्य पूजा का प्रचलन चला आ रहा है। रामकथा में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा नित्य सूर्य पूजा का उल्लेख मिलता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की विशेष आराधना होती है। 4. सूर्य की सातवीं किरण : सूर्य की सातवीं किरण भारतवर्ष में आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देने वाली है। सातवीं किरण का प्रभाव भारत वर्ष में गंगा-जमुना के मध्य अधिक समय तक रहता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला अर्थात मकर संक्रांति या पूर्ण कुंभ तथा अर्द्धकुंभ के विशेष उत्सव का आयोजन होता है। 5. भीष्म पितामह : महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का ही इंतजार किया था। कारण कि उत्तरायण में देह छोड़ने वाली आत्माएं या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती हैं या पुनर्जन्म के चक्र से उन्हें छुटकारा मिल जाता है। उनका श्राद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था। फलतः आज तक पितरों की प्रसन्नता के लिए तिल अर्घ्य एवं जल तर्पण की प्रथा मकर संक्रांति के अवसर पर प्रचलित है। 6. सूर्य जाते हैं अपने पुत्र शनि के घर : हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार इसी दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। कथा के अनुसार सूर्यदेव ने शनि और उनकी माता छाया को खुद से अलग कर दिया था, जिसके कारण शनि के प्रकोप के चलते उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। तब सूर्यदेव के दूसरे बेटे यमराज ने इ रोग को ठीक किया था। रोगमुक्त होने के बाद सूर्यदेव ने क्रोध में आकर उनके घर कुंभ को जला दिया था। परंतु बाद में यमराज के समझाने पर वे जब शनि के घर गए तो उन्होंने वहां देखा कि सबकुछ जल चुका था केवल काला तिल वैसे का वैसा रखा था। अपने पिता को देखकर शनिदेव ने उनका स्वागत उसी काले तिल से किया। इससे प्रसन्न होकर सूर्य ने उन्हें दूसरा घर 'मकर' उपहार में दे दिया। इसके बाद सूर्यदेव ने शनि को कहा कि जब वे उनके नए घर मकर में आएंगे, तो उनका घर फिर से धन और धान्य से भर जाएगा। साथ ही कहा कि मकर संक्रांति के दिन जो भी काले तिल और गुड़ से मेरी पूजा करेगा उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। 7. यशोदाजी ने किया था व्रत : कहते हैं कि माता यशोदा जी ने श्रीकृष्णजी के लिए व्रत किया था तब सूर्य उत्तरायण हो रहे थे और उस दिन मकर संक्रांति थी। तभी से मकर संक्रांति के व्रत का प्रचलन प्रारंभ हुआ। 8. उत्तरायण होता है सूर्य तब देवताओं का प्रारंभ होता है दिन : मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण गति करने लगते हैं। इस दिन से देवताओं का छह माह का दिन आरंभ होता है, जो आषाढ़ मास तक रहता है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से देवों की ब्रह्म मुहूर्त उपासना का पुण्यकाल प्रारंभ हो जाता है। इस काल को ही परा-अपरा विद्या की प्राप्ति का काल कहा जाता है। इसे साधना का सिद्धिकाल भी कहा गया है। इस काल में देव प्रतिष्ठा, गृह निर्माण, यज्ञ कर्म आदि पुनीत कर्म किए जाते हैं। मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व से ही व्रत उपवास में रहकर योग्य पात्रों को दान देना चाहिए। सूर्य संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। संत-महर्षियों के अनुसार इसके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है। संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञान तंतु विकसित होते हैं। मकर संक्रांति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। विष्णु धर्मसूत्र में कहा गया है कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए एवं स्व स्वास्थ्यवर्द्धन तथा सर्वकल्याण के लिए तिल के छः प्रयोग पुण्यदायक एवं फलदायक होते हैं- तिल जल से स्नान करना, तिल दान करना, तिल से बना भोजन, जल में तिल अर्पण, तिल से आहुति, तिल का उबटन लगाना हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| डॉ श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती संस्थान परिसर में मनायी गयी । Posted: 13 Jan 2022 10:59 PM PST डॉ श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की जयंती संस्थान परिसर में मनायी गयी ।इस शुभ अवसर पर संस्थान के महासचिव डॉ हरि बल्लभ सिंह आरसी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद नास्तिक थे । जब उनकी भेंट राम कृष्ण परमहंस जी से हुई तो परमहंस जी ने कहा कि तुम्हें दीक्षा देंगे । तब विवेकानंद ने कहा कि मैं कोई दीक्षा नहीं लूंगा । मुझे ईश्वर के होने का कोई प्रमाण दीजिए , तभी मैं आपकी बात मानूंगा । स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने उनको कहा जाओ मां के दर्शन करो । विवेकानंद मंदिर के अंदर गए और फिर बाहर आकर बोले कि वहां तो केवल मूर्ति है , मैं कैसे मान लूं कि ईश्वर है । तब परमहंस जी ने कहा कि फिर से जाओ और दरवाजा बंद कर लो और फिर दर्शन करो । तब काफी देर हो गई । लगभग आधा घंटा बीत गया और जब विवेकानंद बाहर नहीं निकले तब परमहंस जी ने दरवाजा खुलवाया और फिर देखा तो विवेकानंद पसीने से लथपथ बेहोशी में पड़े हैं । उनको बाहर लाया गया व उनका पसीना पोंछा गया और उन्हें होश में लाया गया । जब विवेकानंद होश में आए तो रामकृष्ण परमहंस जी के चरण पकड़ लिए व कहा कि आपकी इच्छा से मुझे मां ने दर्शन दिए । अब आप जैसा कहेंगे , मैं करूंगा । कहा कि जब वह शिकागो में धर्म सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे , तो उन्होंने कहा था 'ब्रदर्स एंड सिस्टर्स' । विदेशों में इस बात से उन्हें बहुत प्रसिद्धि मिली । उन्होंने विश्व के लोगों को भारत के अध्यात्म के बारे में बताया और तब से वे स्वामी विवेकानंद के रूप में जाने जाते हैं । इस अवसर पर उपस्थित भारतीय जन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद पूरे विश्व मे काफी प्रसिद्ध हुए ।भारत में उनके नाम से विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण किया गया जो कन्याकुमारी से के पास समुद्र में कई करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है । श्री पोद्दार ने बताया कि उन्हें याद है कि जब हम लोग बहुत छोटे थे उस समय केवल एक रुपैया लोगों से विवेकानंद शिला स्मारक बनाने के लिए मांगा गया था और इस प्रकार आज से लगभग 60 वर्ष पहले सवा करोड़ रुपया इकट्ठा हुआ था और उससे विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण हुआ । कहा कि बहुत खुशी की बात है कि आज वह भारत में ही नहीं पूरे विश्व में एक दर्शनीय स्थल के रूप में जाना जाता है । इस अवसर पर डॉ हरि बल्लभ सिंह आरसी के अलावे धर्म चन्द्र पोद्दार , श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल की प्राचार्या संगीता सिंह , अशोक शर्मा , डॉ श्याम लाल पांडेय , रंजीत शर्मा, संजय सिंह, उत्तम प्रमाणिक, पुनीत शर्मा, आशिष चौधरी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 13 Jan 2022 10:54 PM PST प्रस्तावना - मकर संक्राति के दिन सूर्य मकर राशी में प्रवेश करता है । हिन्दू धर्म में संक्रांति को भगवान माना गया है। भारतीय संस्कृति में मकरसंक्रांति का त्योहार आपसी कलह को मिटाकर प्रेमभाव बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन तिल गुड़ एक दुसरे को देकर आपसी प्रेम बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। वर्तमान में सर्वत्र कोरोना महामारी के कारण सदा की भांति त्योहार मनाने में बाधा आ सकता है। तो भी इस आपातकाल में सरकार द्वारा बताए गए सभी नियमों का कठोरता से पालन कर यह त्योहार मनाया जा सकता है। यह त्योहार मनाते समय इसका महत्त्व, त्योहार मनाने की पद्धति, तिल गुड़ का महत्त्व, पर्व काल में दान का महत्त्व, अन्य स्त्रियों को हल्दी कुमकुम लगाने का आध्यात्मिक महत्त्व तथा इस दिन की जाने वाली धार्मिक विधियों की जानकारी इस लेख में देने का प्रयास किया है। हम इसका लाभ लेंगे। तिथि - यह त्योहार तिथि वाचक न होकर अयन-वाचक है। इस दिन सूर्य का मकर राशि में संक्रमण होता है। वर्तमान में मकर संक्रांति का दिन 14 जनवरी है। सूर्य भ्रमण के कारण होने वाले अंतर को भरने ने लिए ही संक्रांति का दिन एक दिन आगे बढ़ाया जाता है। सूर्य के उत्सव को 'संक्रांत' कहते हैं। कर्क संक्रांति के उपरांत सूर्य दक्षिण की ओर जाता है और पृथ्वी सूर्य के निकट, अर्थात नीचे जाती है। इसे ही 'दक्षिणायन' कहते हैं। मकर संक्रांति के पश्चात सूर्य उत्तर की ओर जाता है और पृथ्वी सूर्य से दूर, अर्थात ऊपर जाती है। इसे 'उत्तरायण' कहते हैं। मकरसंक्रांति अर्थात नीचे से ऊपर चढने का उत्सव; इसलिए इसे अधिक महत्व है। इतिहास - संक्रांति को देवता माना गया है। संक्रांति ने संकरासुर दैत्य का वध किया, ऐसी कथा है । तिल गुड़ का महत्व - तिल में सत्त्वतरंगें ग्रहण और प्रक्षेपित करने की क्षमता अधिक होती है । इसलिए तिलगुड का सेवन करने से अंतःशुद्धि होती है और साधना अच्छी होने हेतु सहायक होते हैं । तिलगुड के दानों में घर्षण होने से सात्त्विकता का आदान-प्रदान होता है । 'श्राद्ध में तिल का उपयोग करने से असुर इत्यादि श्राद्ध में विघ्न नहीं डालते ।' सर्दी के दिनों में आने वाली मकर संक्रांति पर तिल खाना लाभप्रद होता है । 'इस दिन तिल का तेल एवं उबटन शरीर पर लगाना, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित जल पीना, तिल होम करना, तिल दान करना, इन छहों पद्धतियों से तिल का उपयोग करने वालों के सर्व पाप नष्ट होते हैं ।' संक्रांति के पर्व काल में दांत मांजना, कठोर बोलना, वृक्ष एवं घास काटना तथा कामविषयक आचरण करना, ये कृत्य पूर्णतः वर्जित हैं ।' त्यौहार मनाने की पद्धति - 'मकर संक्रांति पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पुण्य काल रहता है । इस काल में तीर्थ स्नान का विशेष महत्त्व हैं । गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियोंके किनारे स्थित क्षेत्र में स्नान करने वाले को महापुण्य का लाभ मिलता है ।' मकर संक्रांति पर दिए गए दान का महत्व - मकर संक्रांति से रथ सप्तमी तक की अवधि पर्वकाल है। इस पर्व में किया गया दान और शुभ कार्य विशेष फलदायी होता है। धर्मशास्त्र के अनुसार इस दिन दान, जप और साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यधिक महत्व बताया गया है। हल्दी और कुमकुम का आध्यात्मिक महत्व - हल्दी और कुमकुम लगाने से सुहागिन स्त्रियों में श्री दुर्गा देवी का अप्रकट तत्त्व जागृत होता है तथा श्रद्धा पूर्वक हल्दी और कुमकुम लगाने से यह जीव में कार्यरत होता है। हल्दी कुमकुम धारण करना अर्थात एक प्रकार से ब्रह्मांड में अव्यक्त आदिशक्ति तरंगों को जागृत होने हेतु आवाहन करना है । हल्दी कुमकुम के माध्यम से पंचोपचार करना अर्थात एक जीव का दूसरे जीव में उपस्थित देवता तत्त्व की पूजा करना है । हल्दी, कुमकुम और उपायन देने आदि विधि से व्यक्ति पर सगुण भक्ति का संस्कार होता है साथ ही ईश्वर के प्रति जीव में भक्ति भाव बढ़ने में सहायता होती है । उपायन देने का महत्व तथा उपायन में क्या दें - 'उपायन देना' अर्थात तन, मन एवं धन से दूसरे जीव में विद्यमान देवत्व की शरण में जाना । संक्रांति-काल साधना के लिए पोषक होता है । अतएव इस काल में दिए जाने वाले उपायन से देवता की कृपा होती है और जीव को इच्छित फल प्राप्ति होती है । आजकल प्लास्टिक की वस्तुएं , स्टील के बर्तन इत्यादि व्यावहारिक वस्तुएं उपायन के रूप में देने के कारण उपायन देनेवाला तथा ग्रहण करने वाला दोनों के बीच लेन देन का सम्बन्ध निर्माण होता है । वर्तमान में अधार्मिक वस्तुओं के उपायन देने की गलत प्रथा आरम्भ हुई है इन वस्तुओं की अपेक्षा सौभाग्य की वस्तु जैसे उदबत्ती (अगरबत्ती), उबटन, धार्मिक ग्रंथ, पोथी, देवताओं के चित्र, अध्यात्म संबंधी दृश्य श्रव्य-चक्रिकाएं (CDs) जैसी अध्यात्म के लिए पूरक वस्तुएं उपायन स्वरूप देनी चाहिए । सात्विक उपायन देने के कारण ईश्वर से अनुसन्धान होकर दोनों व्यक्ति को चैतन्य मिलता है जिसके कारण ईश्वर की कृपा होती है। मिटटी के बर्तनों (घडिया) के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का त्यौहार - सूर्य देव ने अधिक मात्रा में उष्णता देकर पृथ्वी के बर्फ को पिघलाने के लिए साधना (तपस्या) आरम्भ की । उस समय रथ के घोड़े सूर्य की गर्मी को सहन नहीं कर पा रहे थे और उन्हें प्यास लगी । तब सूर्यदेव ने मिट्टी के घड़े के माध्यम से पृथ्वी से जल खींचकर घोड़ों को पीने के लिए दिया; इसलिए संक्रांति पर घोड़ों को पानी पिलाने के कारण मटकों की प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मिट्टी के बर्तनों की पूजा करने की प्रथा आरम्भ हुई। रथ सप्तमी के दिन तक सुहागिन महिलाऐं हल्दी कुमकुम के अवसर पर इन पूजित बर्तनों को एक-दूसरे को उपायन स्वरूप भेंट में देती हैं । मिट्टी के बर्तन (घड़िया) को अपनी अंगुलिओं के माध्यम से हल्दी-कुमकुम लगा कर घड़िए पर धागा लपेटा जाता तथा उसमे गाजर, बेर, गन्ने के टुकड़े, मूंगफली, कपास, काले चने, तिल के लड्डू, हल्दी आदि वस्तु भरकर भेंट स्वरुप दिया जाता है । पतंग न उड़ाएं - इस काल में अनेक स्थानों पर पतंग उड़ाने की प्रथा है परन्तु वर्तमान में राष्ट्र एवं धर्म संकट में होते हुए मनोरंजन हेतु पतंग उडाना, 'जब रोम जल रहा था, तब निरो बेला (फिडल) बजा रहा था', इस स्थिति समान है । पतंग उडाने के समय का उपयोग राष्ट्र के विकास हेतु करें, तो राष्ट्र शीघ्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा और साधना एवं धर्मकार्य हेतु समय का सदुपयोग करने से अपने साथ समाज का भी कल्याण होगा । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| 14 जनवरी 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? Posted: 14 Jan 2022 05:06 AM PST श्री
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