दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- आज दिवस है गणतंत्र का
- वतन के दीवाने
- माता गौरी का साधना स्थल गौरीकुंड
- भारतीय सिनेमा की शुरुआत ही , भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना से हुई थी ।
- शिक्षित होना आगे बढ़ना
- मनहरण घनाक्षरी
- बेटी का घर
- बालिका समाज का सेतु है
- बालिका दिवस पर
- बेटियां
- 25 जनवरी 2022, मंगलवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- जगदगुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का राजधानी में हुआ भव्य स्वागत-अभिनंदन
- जन जन तक संवाद
- उत्पल पर्रिकर की दलगत निष्ठा
- हमें अपने गणतंत्र पर गर्व है
- बात कहने का योगी तरीका
- चीन ने ताइवान के डिफेंस जोन में भेजे 39 विमान
- जर्मनी नौसेना के वाइस एडमिरल ने दिया इस्तीफा
- पाक के चांद नवाब ने मौसम की रोचक ढंग से दी खबर
- अमेरिका ने यूक्रेन से अपने राजनयिक वापस बुलाए
| Posted: 24 Jan 2022 11:23 PM PST आज दिवस है गणतंत्र काआज दिवस है गणतंत्र का, मिलकर सभी जन तिरंगा फहरायें , करें उन अमर शहीदों को याद, जिन्होंने अपनी जान गवायें । रहें सभी जन मिलकर यहाँ, देश को अखंड अक्षुण्ण बनायें, जब भी लड़े कोई अपने वतन से, एकजुट हो सभी मार भगायें। रहें तंदुरुस्त तन-मन-धन से, भारत को सशक्त,शक्तिशाली बनायें, कोई बाल बांका नही कर सके इसे, सबके दिलों में राष्ट्र प्रेम जगायें। बड़ी मुश्किल से पायी आजादी, इसे सभी जन-गण मन से जान जायें, नहीं कहें खूद को हिन्दु-मुस्लिम, सबसे पहले भारतीय कहलायें । ----0---- अरविन्द अकेला हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 11:07 PM PST वतन के दीवानेदेशभक्त वो दीवाने सरहद के जवान भारती के चरणों में निज शीश झुकाएंगे बैरी पछाड़ दिखाते वतन के गीत गाते हंसते-हंसते जां वतन पर लूटायेंगे जज्बा भरपूर रख पराक्रमी योद्धा वीर रण में जा रणवीर पराक्रम दिखाएंगे उर में अंगार भर बुलंद हौसला कर समर के मैदान में जौहर दिखलाएंगे सजग सेनानी वीर चलते सीना तान के गीत वंदे मातरम सदा गुनगुनाएंगे राष्ट्रधारा भाव पर हिम्मत बुलंद कर दुश्मनों को नाकों चने सेनानी चबवाएंगे गरम रेतीले धोरों में तपती लू का सामना हर बाधा तूफानों को मोड़ नया दिखाएंगे अटल इरादे रख महासमर में योद्धा आन बान शान का परचम लहराएंगे रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| माता गौरी का साधना स्थल गौरीकुंड Posted: 24 Jan 2022 10:53 PM PST
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| भारतीय सिनेमा की शुरुआत ही , भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना से हुई थी । Posted: 24 Jan 2022 06:53 AM PST भारतीय सिनेमा की शुरुआत ही , भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना से हुई थी ।![]() संकलन अश्विनीकुमार तिवारी आज से लगभग हजार वर्ष पहले भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र दिया था जिसे हमलोंग पांचवा वेद भी कहते हैं। बाद में कालिदास आदि अन्य नाटककारों ने नाटक लिखे और मंचन किया। तुलसीदास जी की रामचरितमानस की रचना के पश्चात रामलीला मंडलियाँ बनी और समाज को दिशा देने लगी। हमारे देवी देवताओं की मूर्तियों को पहली बार कागज पर लाने का कार्य सर्वप्रथम राजा रवि वर्मा जी ने किया था । बाद में वे मुंबई आ गए जहां भारतीय सिनेमा के भीष्म पितामह दादा साहब फाल्के उनके सानिध्य में आए और उनके शिष्य बन गए । बाद में महान चित्रकार रवि वर्मा से प्राप्त कैमरे से ही उन्होंने पहली भारतीय मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र 1013 में बनाई और भारतीय फिल्म के निर्माण का श्रीगणेश किया था। संस्कृत में जिसे रूपक कहा गया है उसे आज की फ़िल्म मान सकते हैं। वैसे ये रूपक दस प्रकार के हैं लेकिन आगे जाकर कई भेद हो जाते हैं। इनमें जो प्रथम स्थान पर है उसे नाटक कहते हैं। नाटक की यह शर्त है कि उसका नायक कोई सद्वन्श क्षत्रिय अथवा देवता होना चाहिए, उसकी कथा बहुत भव्य, विराट और धर्म अर्थ काम मोक्ष से गुम्फित होनी चाहिए। अब यदि हम फ़िल्म बाहुबली को देखते हैं तो वह नाटक श्रेणी की है। (यहाँ एक एक ही उदाहरण दे रहा हूँ, आगे आप अनुमान लगा सकते हैं।) दूसरा स्थान आता है #प्रकरण का। यह बाकी सब नाटक जैसी ही होती है लेकिन मोक्ष के अतिरिक्त शेष तीन वर्ग और नायक कोई थोड़ा मध्यम श्रेणी का होता है। दक्षिण की फ़िल्म #अपरिचित इस श्रेणी की है। ऐसे ही जिस फ़िल्म में हास्य प्रधान हो, धूर्त और निम्न चरित्र अभद्र भाषा में ईर्ष्या, लोभ के साथ चेष्टाएँ करें वह #समवकार कहलाता है, उदाहरण के लिए हेराफेरी सीरीज की सभी फिल्में। विशुद्ध हास्य की फ़िल्म प्रहसन मानी जायेगी जैसे पड़ोसन। ऐसे ही एक होता है #डिम जिसमें अधर्मी कुटिल पात्र भूत, प्रेत, रहस्य रोमांच का प्रदर्शन करते हैं, उदाहरण : दक्षिण की फ़िल्म kashmoraa। जहां सभी धूर्त, भांड, अपराधी हो वह भाण कहलाता है, जैसे गैंग ऑफ वासेपुर। ऐसे ही एक होता है व्यायोग, इसमें अत्यंत बलशाली नायक अत्यंत कठिन मिशन को पूरा करता है, इसमें वीर रस प्रधान होता है। उदाहरण उरी या कारगिल पर बनी फिल्में। अंक में स्त्री विलाप अधिक होता है, वीथी में स्त्रियां ही प्रमुख होती है,,,, इत्यादि। ये जो लल्ला लल्ली के खेल वाली फिल्में, जिनमें इश्क, सौतन, मिलन में अवरोध और अंत में नायक नायिका का मिलन, बीच बीच में नाच गाना और कभी मिलन कभी जुदाई.... इन्हें तो रूपक श्रेणी में भी नहीं माना जाता। ये तो उपरूपक में भी नाटिका श्रेणी की फिल्में हैं जिन्हें स्त्रियां अधिक पसंद करती हैं। हाल ही में पुष्पा फ़िल्म हिट हुई, दक्षिण की फिल्में बाजी मारती जा रही है, इसका एक कारण यह भी है कि दक्षिण के सभी फिल्मकार प्रायः भरत मुनि के #नाट्यशास्त्र और धनंजय के दशरूपक का अध्ययन कर उन नियमों का पालन करते हैं। नाट्यशास्त्र के बाद धनञ्जय की कृति ही अपने में परिपूर्ण है जो आपको कथा, उपकथा, उसके भेद, प्रभेद, कहानी के मोड़, उसे समेटने की विधि, एक एक बात का इतना सूक्ष्म और सोदाहरण विवेचन है कि कोई भी साहित्यकार चमत्कृत हो सकता है। एक उदाहरण देता हूँ, फ़िल्म में नायक की एंट्री (प्रथम प्रवेश) करने के ही 64 तरीके बताए हैं दशरूपक में। यह संस्कृत में है और हिन्दी अनुवाद उपलब्ध है। धनंजय का तो अध्ययन निश्चित रूप से हॉलीवुड भी लेता है, मैंने भी अनुभव किया है। दशरूपक कालजयी रचना है, न भूतों न भविष्यति। अस्तु, यह विषय बहुत लंबा चौड़ा है। पोस्ट का भाव यही है कि दक्षिण भारत के फिल्मकार अभी भी शास्त्रीय नियमों को फॉलो करते हैं इसलिए इतना अच्छा ला पाते हैं। जैसे जैसे भारत की सांस्कृतिक प्यास बढ़ेगी, यह क्रम बढ़ता जाएगा। बाकी हमारी नजर में तो दद्दा जिसे गुलजार, जावेद अख्तर, सलीम, और नासिर का बेहतरीन कार्य बता लहालोट हो रहे हैं, निहायत ही घटिया सिनेमा है। ✍🏻कुमार_एस धर्म, दर्शन और कला का त्रिक अगर किसी एक ग्रंथ में रूपायित हुआ है तो वह "विष्णु धर्मोत्तर" है। भारतीय शास्त्रीय कलाओं के जो सिद्धांतकार हैं, अगर आप उनसे वार्ता करें तो पाएंगे कि उनके लिए जो महत्व भरतमुनि के नाट्यशास्त्र का है, उससे कम महत्व विष्णु धर्मोत्तर का नहीं है। इसके तृतीय परिवर्त में छंद, अलंकार, नाट्यगीत, नृत्यस्थान, अभिनय कला, नवरस प्रतिपाद, चित्र सूत्र, मंदिर स्थापन, मूर्ति प्रतिष्ठा आदि का विस्तृत विवेचन है। दण्डी और भामह के काव्यालंकार सम्बंधी ग्रंथ भी इसी "विष्णु धर्मोत्तर" से प्रणीत हुए हैं। एक बार मैं इन्दौर में नृत्याचार्य श्री पुरु दाधीच- जिन्हें हाल ही में पद्मश्री दिया गया- से वार्ता कर रहा था। उनके पुस्तकालय में नाट्यशास्त्र था और काव्यालंकार के ग्रंथ थे किंतु विष्णु धर्मोत्तर देखकर चौंका। पूछने पर उन्होंने बतलाया- नृत्याचार्य के यहाँ यह ग्रंथ नहीं होगा तो और कौन-सा होगा, यह तो ललित कलाओं की गीता है। विष्णुधर्मोत्तर पुराण में मृत्यु की विलक्षण परिभाषा दी गई है। उसके शुद्धितत्व प्रकरण में कहा गया है कि जिसे हम मृत्यु कहते हैं, उसमें वास्तव में शरीर के पांच में से दो ही तत्वों की क्षति होती है- पृथ्वी और जल। पार्थिव शरीर इन्हीं से बनता है। पदार्थ का गुरुत्व भी इन्हीं को खींचता है। किंतु मृत्यु के बाद तीन तत्व शेष रह जाते हैं- अग्नि, आकाश और वायु। अग्नि पुराण में अग्नि को तेज तत्व कहा गया है। यह तीनों ही तत्व गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हैं, अपार्थिव हैं और जिस सूक्ष्म शरीर का निर्माण करते हैं, उसे आतिवाहिक या प्रेतदेह कहा गया है। कदाचित्- कल्पना, आकांक्षा, स्मृति, चेतना और संकल्प इस आतिवाहिक शरीर के अंग होंगे, जो मृत्यु के बाद जीवित रहते हों। पिंडों के दान से जिस देह का निर्माण होता है, उसे भोगदेह कहा गया है। वहां से फिर लौकिक संसार की ओर वापसी है- वैसा वर्णित है। कितना अचरज है कि प्रियजन की मृत्यु के तुरंत बाद हम इन प्रयासों में जुट जाते हैं कि जीव को पुनः पार्थिव देह मिले, जिसमें तर्पण का जल है और पिंड की पृथिवी। जबकि एक जीवनपर्यंत विषाद के बाद वह अब अग्नि, आकाश और वायु के तत्व में थिर हुआ है। कौन जाने, आतिवाहिक चेतनाओं का अंधकार भरा जो पितृलोक या प्रजापति लोक है, वह इससे राज़ी होता है या नहीं, कहीं वह इससे संघर्ष तो नहीं करता? जो जीवित हैं वो जीवनभर मृत्यु का प्रतिकार करते हैं। तो क्या जो मर चुके वो फिर जीवन में लौट आना चाहते होंगे? ✍🏻सुशोभित सुमेरियन तंत्री वाद्य : भारतीय संदर्भ नाट्यशास्त्र आदि में चार प्रकार के वाद्याें में तंत्रवाद्य का जिक्र आया है और इसमें वे वाद्य कोटिकृत किए गए हैं जिनके लिए तार का प्रयोग होता आया था। ऐसे वाद्य सुमेरियन सभ्यता में भी प्रयोग में आते थे। लगभग 2000 ईसापूर्व की एक मृणपट्टिका में एक हारपिस्ट या तंत्रीवादक को दिखाया गया है जिसके लिए कहा गया है कि वह कविता को संगीतबद्ध करने में सहायता करता था। (Stamped clay plaque of a harpist- 2000 B.C, Music was an important part of daily life. Sumerians used many instruments including harps, pipes, drums, and tambourines. The music was often used in conjunction with poems and songs dedicated to the gods) नाट्यशास्त्र में हारपिस्ट के लिए 'वेणिक' का प्रयोग हुआ है। हमारे यहां भी तंत्री वाद्य का वैदिक काल से ही जिक्र मिलता है। बाण, कर्करी, गर्गर, गोथा और आघाटी नामक वीणाओं का यही स्वरूप हाेता था। जिसमें तूंबे का प्रयोग होता, वह 'अलाबु वीणा' कही जाती थी। शांख्यायन ब्राह्मण की वह कथा मशहूर है कि असुर ने सिद्धत्व के परीक्षण के लिए कण्व मुनि को कैद कर लिया। चुनौती दी कि वह बिना देखे बताए कि सूर्योदय हो गया है। तब उन्होंने अश्वि देवता के प्रात:कालीन तंत्रीवादन को सुनकर बताया कि सवेरा हाे गया है... तब जाकर असुरों ने उनको स्वतंत्र किया। रामायण काल में भी 'तंत्रीलय समन्वितम्...' (बालकांड, सर्ग 4) का संदर्भ सुबह सुबह गूंजने वाली मंगलध्वनि के प्रसंग में आया है। बौद्ध ग्रंथों में गुत्तिल जातक में एेसी ही कथा आती है। तब वीणा वादन की प्रतियोगिताएं होती थी। उज्जैनी या उज्जैन के वीणा वादक मूसिल और वाराणसी के राजवादक गुत्तिल के बीच राजदरबार में जो प्रतियोगिता हुई, उसमें बड़ी भीड़ जुटी थी। गुत्तिल ने वीणा की सप्ततंत्रियों में से प्रत्येक तार को तोड़ते हुए भी अपना वादन निरंतर रखा। जब सारे ही तार भूमि पर गिर पड़े तब भी तमाशबीन देख रहे थे कि वीणा से ध्वनि निकल रही थी,, दर्शक चकित थे... दण्ड ही ध्वनि निष्पन्न कर रहा था। है न तंत्रीवाद्य की रोचक कहानियां और प्रसंग। ऐसे दर्जनों प्रसंग याद हैं मगर, सबसे अधिक रोचक बात यह है कि यह वाद्य भारत से लेकर सुमेरियन सभ्यता तक अपनी झंकार से जनजीवन में सुरों का सुख पूरित करता रहा है...। ✍🏻श्रीकृष्ण जुगनु दसवीं सदी में राजा भोज से पूर्व मालवा की धारा नगरी ने साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में उज्जयिनी के वैभव को बहुत पीछे छोड़ दिया था। वह समय भोज के पितृव्य मुञ्ज का था, जिन्हें वाक्पतिराज द्वितीय के नाम से जाना जाता है।मुञ्ज का शासनकाल सन् 974 से 994 तक का माना जाता है । राजा मुञ्ज ने 16 बार चालुक्यवंशी राजा तैलपदेव पर आक्रमण किया। अंतिम युद्ध के बाद मुञ्ज तैलपदेव को बंदी बना कर उज्जयिनी ले आये, और फिर उदारतापूर्वक छोड़ भी दिया । कुछ ही दिनों बाद तैलपदेव ने फिर आक्रमण कर दिया, और मुञ्ज को पराजय झेलना पड़ी । कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए मृत्यु का वरण करना पड़ा । वाक्पतिराज मुञ्ज विद्वानों, कवियों और कलाकारों से प्रेम करते थे , वे सरस्वती के अनन्य उपासक थे । राजा मुञ्ज की मृत्यु पर कही गई उक्ति धार के लोगों की जुबान पर अब तक है। " गते मुञ्जे यश:पुञ्जे निरालम्बा सरस्वती ", अर्थात् यशस्वी मुञ्ज के चले जाने से तो सरस्वती का भी सहारा चला गया। मुञ्ज के समय में धारानगरी में दो भाई रहते थे । बड़े भाई का नाम था धनञ्जय ,और छोटे का नाम था धनिक। दोनों भाई साहित्य में रुचि रखने वाले योग्य विद्वान् थे। दोनों ही कुशाग्र थे, और दोनों पर ही मुञ्ज की स्नेह-दृष्टि थी। यह समय आज से लगभग 1100 वर्ष पहले का है। सभाओं में भास, कालिदास, भट्टनारायण, भवभूति के नाटक खेले जाने की परम्परा थी। धनञ्जय और धनिक दोनों की ही गहरी रुचि संस्कृत नाटकों में थी, प्राय: दोनों मिल कर ही नाट्यनिर्देशन और रंगकर्म करते, और मुञ्ज की उपस्थिति में नाट्यसभाओं का आयोजन होता। उन दिनों धारा नगरी में नाटक एक आन्दोलन की तरह था, और ये दोनों भाई ही इस सांस्कृतिक आन्दोलन के सूत्रधार थे। इसी दौर में बड़े भाई धनञ्जय ने नाट्यशास्त्र पर तीन सौ कारिकाएँ लिखीं, और छोटे भाई धनिक ने उन कारिकाओं पर साथ ही साथ 'अवलोक' नामक टीका भी लिखी। धनञ्जय की इन कारिकाओं का संग्रह " दशरूपकम् " के नाम से जाना जाता है। यह 'दशरूपक' प्राचीन नाट्यशास्त्र का आधुनिक संस्करण माना जाता है, और ग्यारह सदियाँ बीत जाने के बाद आज भी यही एक ग्रंथ है, जिसके सूत्र नाटककारों की अमूल्य निधि समझे जाते हैं । मालवा की सांस्कृतिक राजधानी रही धारा नगरी में लिखा गया 'दशरूपकम्' भरत मुनि के नाट्यशास्त्र के बाद सबसे ज्यादा लोकप्रिय ग्रंथ है। यह ग्रंथ चार प्रकाशों (अध्यायों ) में बाँटा गया है। 'दशरूपकम्' में नाटक के लक्षण, नाटक की पञ्चसन्धियों, कथावस्तु के भेदों के साथ नायक और नायिकाओं के भेदों को सरलतापूर्वक समझाया गया है। नाटक में रसों की महत्ता, पात्रों की संख्या, मंचनिर्माण की प्रक्रिया और रसास्वादन के प्रकारों पर भी विस्तार से चर्चा हुई है । 'दशरूपकम्' में जो कारिकाएँ हैं , वे सामान्यत: कुछ सूत्रों को मिलाकर बने हुए सम्पूर्ण छंद हैं। उदाहरण के लिये देखिए- "अवस्थानुकृतिर्नाट्यं। रूपं दृश्यतयोच्यते। रूपकं तत्समारोपात्। दशधैव रसाश्रयम्। "धनञ्जय ने बहुत ही अच्छी तरह समझाया है कि नाटक अवस्था की अनुकृति है। नाटक "रस" पर ही आश्रित होता है, और नृत्य "भाव" पर आश्रित होता है। ताल और लय पर जो होता है, वह "नृत्त" कहलाता है। धनिक ने अपनी अवलोक टीका से 'दशरूपकम्' में चार चाँद लगा दिये हैं। संस्कृत साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण और चुने हुए काव्य-अंशों को एक जगह ला कर धनिक ने बड़े भाई की इस अनुपम कृति को रोचक बना दिया है। 'दशरूपकम्' एक विश्वस्तर का शास्त्रीय ग्रंथ है, किंतु आप इसे विविध रसों से परिपूर्ण आह्लादमयी कविता की तरह भी आराम से पढ सकते हैं। दशरूपककार धनञ्जय के बाद नाट्यशास्त्र का कोई बड़ा आचार्य अब तक नहीं हुआ। धनञ्जय के बाद भट्टनायक, महिमभट्ट, क्षेमेन्द्र , मम्मट, शारदातनय, विश्वनाथ आदि ने धनञ्जय की शैली तो अपनायी, किन्तु शारदातनय को छोड़ कर कोई भी नाट्यशास्त्र के नहीं, काव्यशास्त्र के ही आचार्य हुए। नि:सन्देह 'दशरूपक' अकेले धनञ्जय का पराक्रम नहीं है। छोटे भाई धनिक की बहुमूल्य टीका को वहाँ से हटा लिया जाए, तो शायद यह एक नीरस ग्रंथ हो। पूरे 'दशरूपकम्' में धारा नगरी के इन दोनों भाइयों की उपस्थिति साथ-साथ अनुभव होती है। धनिक ने तो बाद में 'काव्यनिर्णय' ग्रंथ भी लिखा था। धनिक का पुत्र वसन्ताचार्य भी बड़ा विद्वान् था। वह भी मुञ्ज की राजसभा में सम्मानित हुआ था। दशरूपक के समापन में धनञ्जय ने एक श्लोक लिखा है, जिसमें वे धारनरेश के प्रति अत्यंत कृतज्ञ होकर कहते हैं कि मुञ्ज की राजसभा में कुशलता को प्राप्त करने वाले विष्णुपुत्र धनञ्जय ने पंडितों के मन को प्रसन्नता व प्रेम में बाँध लेने वाले इस दशरूपक का "आविष्कार " किया है। "विष्णो: सुतेनापि धनञ्जयेन विद्वन्मनोरागनिबन्धहेतु: । आविष्कृतं मुञ्जमहीशगोष्ठीवैदग्धभाजा दशरूपमेतत्।।" ✍🏻अत्रि विक्रमार्क अन्तर्वेदी काव्यशास्त्र से सम्बन्धित ग्रन्थ नाट्यशास्त्र -- भरतमुनि काव्यप्रकाश -- मम्मट टीकाएँ अलंकारसर्वस्व -- रुय्यक संकेत टीका -- माणिक्यचंद्र सूरि (रचनाकाल ११६० ई.) दीपिका -- चंडीदास (१३वीं शती) काव्यप्रदीप -- गोविंद ठक्कुर (१४वीं शती का अंतभाग) सुधासागर या सुबोधिनी -- भीमसेन दीक्षित (रचनाकाल १७२३ ई.) दीपिका -- जयंतभट्ट (रचनाकाल १२९४ ई.) काव्यप्रकाशदर्पण -- विश्वनाथ कविराज (१४वीं शती) विस्तारिका -- परमानंद चक्रवर्ती (१४वीं शती) साहित्यदर्पण -- विश्वनाथ काव्यादर्श -- दण्डी काव्यमीमांसा -- कविराज राजशेखर (८८०-९२० ई.) दशरूपकम् -- धनंजय अवलोक -- धनिक (धनंजय के लघु भ्राता) ध्वन्यालोक -- आनन्दवर्धन लोचन -- अभिनवगुप्त (ध्वन्यालोक की टीका) काव्यप्रकाशसंकेत -- माणिक्यचंद्र (११५९ ई) अलंकारसर्वस्व -- राजानक रुय्यक चंद्रालोक --अलंकारशेखर -- केशव मिश्र हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 06:48 AM PST शिक्षित होना आगे बढ़नाशिक्षित होना आगे बढ़ना, लक्ष्य मैंने मान लिया, ज्ञान मिलेगा जहां कहीं से, मैंने पाना ठान लिया। कोरोना का काल चल रहा, बन्द पड़े विद्यालय, घर पर रहकर लिखना पढ़ना, उद्देश्य जान लिया। शिक्षा से बनते ज्ञानवान, मां ने मुझको बतलाया, शिक्षित होकर आगे बढ़ते, गुरू जनों ने सिखलाया। संस्कार संस्कृति क्या, इतिहास भूगोल की बातें हों, धरती अम्बर और अनल में, छिपा रहस्य दिखलाया। मैं भारत की बेटी हूं, कभी नहीं पीछे रहती हूं, वेद ऋचाओं में भी देखो, बनी विदुषी रहती हूं। अंतरिक्ष तक उड़ान मेरी, कल्पना सी पहचान है, साहित्य या राजनीति, सदा शिखर पर रहती हूं। युद्ध क्षेत्र में मैंने हरदम, अपना परचम फहराया, लक्ष्मी जैसी वीरांगना बन, नारी साहस दिखलाया। मां- पापा की परी हूं मैं, भैया की प्यारी बहना, खेलों में भी आगे रहना, दादी ने मुझको समझाया। अ कीर्ति वर्द्धन हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 06:45 AM PST मनहरण घनाक्षरीलक्ष्मी अवतार बेटी घर का संस्कार बेटी देश का सम्मान होती दो दो वंश तारती शिक्षा की जोत जलाती घर में रौनक लाती हुनर कौशल दिखा घर को संवारती मां का अरमान बेटी पिता का सम्मान बेटी वतन की बागडोर कमान संभालती गुणों का विधान बेटी हौसला उड़ान बेटी मात-पिता का मान है गर्व करे शान से गुणों से कुल तारती गृहस्थ रथ सारथी मंजिलें बेटियां पाती उन्मुक्त उड़ान से रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 06:39 AM PST
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| Posted: 24 Jan 2022 06:38 AM PST बालिका समाज का सेतु हैजहानाबाद । राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर भारतीय जन क्रांति दल् की ओर से सच्चिदानद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान कक्ष में बालिका संगोष्टी में भारतीय जन क्रांति दल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि देश में 24 जनवरी 2009 को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की प्रारम्भ हुई है। सरकार ने 24 जनवरी 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी । समाज में बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक बनाने के लिए बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है । कन्या भ्रूण हत्या की वजह से लड़कियों के अनुपात में काफी कमी आयी है। देश में लिंगानुपात 940 - 1000 है। एशिया महाद्वीप में भारत की महिला साक्षरता दर सबसे कम है। भारत में 6 से 14 साल तक की ज्यादातर लड़कियों को हर दिन औसतन 8 घंटे अपने घर के छोटे बच्चों को संभालने में बिताना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 6 से 10 साल की 25 प्रतिशत लड़कियों एवं 10 से 13 साल की 50 प्रतिशत से भी ज्यादा लड़कियों को स्कूल छोडऩा पड़ता है। बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में खेल , राजनीति, घर , उद्योग , एशियन खेलों के गोल्ड मैडल जीतना , राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होकर देश सेवा करने का कार्य की है ।। फिर भी वह अनेक कुरीतियों की शिकार हैं। ये कुरीतियां उसके आगे बढऩे में बाधाएं उत्पन्न करती हैं। पढ़े-लिखे लोग और जागरूक समाज समस्या से अछूता नहीं है। कन्या शक्ति को सामने लाने हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है । अनेकों अवसरों पर कन्या का पूजन करते हैं लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेती है । कन्याओं को अभिशाप मानने वाले यह भूल जाते हैं कि देश के वासी हैं जहां देवी दुर्गा को कन्या रूप में पूजने की प्रथा है। कन्याओं को बोझ मानते हैं उन्हें ही सही मार्ग बताने और कन्या शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। बालिका समाज के प्रत्येक स्थान पर सेतु का काम करती है । कुलों , समाज का सेतु बन कर बालिका निरंतर खड़ी रहती है । राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिका का चतुर्दिक विकास के लिए संकल्प लेना आवश्यक है । इस अवसर पर जिला कृषक संगठन जहानाबाद के अध्यक्ष कामेश्वर सिंह , संस्थान के सदस्य उर्वशी ,प्रियंका , संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार आदि ने बालिका संगोष्टी में अपने अपने विचार प्रकट किए । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 06:18 AM PST बालिका दिवस परबेटियां बेटियां बेटियां बेटियां ---------------------------------------- बेटियां बेटियां बेटियां बेटियां कुण्डियां कुण्डियां कुण्डियां कुण्डियां काटती जा रहीं बंधनों की सभी बेड़ियां बेड़ियां बेड़ियां बेड़ियां खोलती कर्म से हैं प्रगति की यहां खिड़कियां खिड़कियां खिड़कियां खिड़कियां दौड़ती-भागती कूदती फिर रहीं रस्सियां रस्सियां रस्सियां रस्सियां एक से एक बढ़कर के होने लगीं हस्तियां हस्तियां हस्तियां हस्तियां आस्मां छू रही हैं , खींचती धैर्य से कश्तियां कश्तियां कश्तियां कश्तियां खोजतीं राह जय फिर बसाती नई बस्तियां बस्तियां बस्तियां बस्तियां 24 जनवरी 2022~जयराम जय ,'पर्णिका' बी-11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,कल्याणपुर,कानपुर-208017(उ.प्र.) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 06:13 AM PST बेटियांमेरे घर में लक्ष्मी बनाकर आती है जब बेटियां, रून-झून, रून'-झून पायल को झनकाती है तब बेटियां । भैया- भैया कह-कहकर शोर मचाती है जब बेटियां, भाई के मन मंदिर में खुशियां जगाती है तब बेटियां । थोडी-थोडी और बडी हो जाती है जब बेटियां, अपने पिता की लाडली बन जाती है तब बेटियां। माँ- माँ कह के आँचल में छिप जाती है जब बेटियां, मा के संजोए सपनों को खूब सजाती तब बेटियां । दादा- दादी के लाढ प्यार को पाती है जब बेटियां, जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ जाती है तब बेटियां । दोनों कुल के मर्यादा को हृदय बसाती है जब बेटियां, सबको खूब रूलाती है पराई हो जाती है तब बेटियां। उषा किरण श्रीवास्तव, मुजफ्फरपुर, बिहार हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 05:48 AM PST
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| जगदगुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का राजधानी में हुआ भव्य स्वागत-अभिनंदन Posted: 24 Jan 2022 05:35 AM PST जगदगुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का राजधानी में हुआ भव्य स्वागत-अभिनंदनजगदगुरू पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवतगीता आपके द्वार अभियान की ली पूर्ण जानकारी। विश्व के महान विद्वान, शिक्षाविद, बहुभाषाविद, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरू जगदगुरू पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के आज पटना पहूँचने पर राघव परिवार के सैंकड़ों सदस्यों द्वारा हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए आर्षिवाद प्राप्त किया गया। जगदगुरू चित्रकुट से समस्तीपुर एक विवाह समारोह में भाग लेकर श्री तुलसीपीठ पटना होकर लौट रहे थे। श्रीमöगवद्गीता आपके द्वार अभियान के संस्थापक, बिहार भाजपा के प्रदेष कार्य समिति सदस्य, पूर्व प्रदेष प्रवक्ता तथा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र के नेतृत्व में जगदेव पथ स्थित बिकानेर स्वीट्स के पास पूज्यपाद स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का स्वागत कर राधव परिवार के सदस्यों ने चरण वंदना कर पवित्र आर्षिवाद प्राप्त किया। चित्रकुट से रथ पर सवार होकर पटना पहूँचे पर्मपूज्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने श्रीमöगवद्गीता आपके द्वार अभियान के संस्थापक संजीव कुमार मिश्र से निःषुल्क गीता अभियान की विस्त्त जानकारी प्राप्त कर अभियान को और तेज करने हेतु मार्गदर्षन किया। ज्ञात्वय है कि स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज श्रीमöगवद्गीता आपके द्वार अभियान के प्रधान संरक्षक-सह-मुख्य मार्गदर्षक हैं। श्री तुलसीपीठ के प्रबंध न्यासी तथा जगतगुरू स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के उतराधिकारी आचार्य राम चंद्र दास उर्फ जय महाराज जी का भी भक्तगण ने आर्षीवाद ग्रहण किया। इस अवसर पर अचार्य हिमांषु त्रिपाठी ने लोगो को बारी-बारी से आर्षीवाद दिलवाये। पूज्यपाद गुरूमहाराज के स्वागत अभिनंदन करने वालों में श्री मिश्र के अलावे राघव परिवार के सदस्य विपिन भारती, रत्नेष आनंद समेत कई लोग थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 05:26 AM PST जन जन तक संवाद(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) कोरोना की तीसरी लहर के चलते चुनाव आयोग ने दिशा निर्देश लागू किये है। इसके अंतर्गत रैलियों या जनसभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने चुनाव प्रचार के अंदाज को बदल दिया है। अब लोगों के घरों तक संवाद बनाने का प्रयास चल रहा है। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं के साथ बैठक का सिलसिला भी जारी है। इस प्रकार के प्रचार में मेहनत अवश्य है। इसके बाबजूद भाजपा के लिए एक सुविधा भी है। उसने एक पत्रक प्रकाशित किया है। इसमें सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख है। इस पत्रक को लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है। इस प्रकार का प्रचार करने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना आपदा प्रबंधन का लगातार जायजा लेने के साथ ही लोगों से संवाद भी कर रहे है। इस दौरान सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ ही विपक्ष पर प्रहार भी चल रहा है। वर्तमान व पिछली सरकारों की कार्यशैली का तुलनात्मक विवरण भी प्रस्तुत किया जा रहा है। वर्तमान सरकार ने व्यवस्था को बदला है। सुशासन की स्थापना की है। बताया जा रहा है कि डबल इंजन की सरकार ने उप्र में परिवर्तन किया है। एक करोड़ सड़सठ लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन दिए। दो करोड़ इकसठ लाख घरों में शौचालय बनवाए। मातृ वंदना योजना में चालीस लाख महिलाओं को लाभान्वित किया गया। एक करोड़ इकतालीस लाख घरों में बिजली पहुंची। उजाला योजना में दो करोड़ साठ लाख बल्ब बांटे गए। पन्द्रह करोड़ लोगों को दो साल मुफ्त राशन मिला। पैंतालीस लाख लोगों को आवास दिया गया। प्रधानमंत्री सम्मान निधि दो करोड़ पैंतालीस लाख लोगों को मिली। पहले उप्र को बीमारू प्रदेश माना जाता था। अब यहां निवेश किया जा रहा है। पांच साल में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी होने का दावा किया गया। पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट बने। आठ एयरपोर्ट अंतरदेशीय है। पांच नए एक्सप्रेस वे बनाए। चैदह हजार किलोमीटर सड़कों का चैड़ीकरण किया। कई शहरों में मेट्रो चली। प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज का सपना साकार हो रहा है। अमित शाह ने कहा कि केवल भाजपा ही उत्तर प्रदेश का विकास कर सकती है। योगी आदित्यनाथ परिणाम लेकर आए हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 व 35 ए को समाप्त किया। इसका समर्थन करने वाली पार्टियों की हकीकत सबके सामने आ गई है। विरोधियों ने श्रीराम मंदिर का मामला सालों तक लटकाए रखा। रामभक्तों पर गोली चलाने वालों को सब जानते हैं। अब अयोध्या में भव्य श्रीराम का मंदिर बन रहा है। शाह ने मेरठ में प्रबुद्ध जनों की बैठक को भी संबोधित किया। कहा कि करीब दो दशक तक उत्तर प्रदेश में जातिवाद, भ्रष्टाचार व तुष्टिकरण का बोलबाला था। विकास के नाम पर लोगों को गुमराह किया गया। एक सरकार आई तो एक जाति का भला किया। दूसरी सरकार आई तो दूसरी जाति का भला किया। बाकी सभी लोग ताकते रह गए। भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश को इस दशा से बाहर निकाला। इसको विकास की दिशा में आगे बढ़ाया। इसको देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनाया है। यह यात्रा जारी रखनी है।पहले कैराना के लोगों की आंखों में भय था। लोग अपने घर बेचकर जाने को मजबूर हुए। आज उनके चेहरे पर प्रसन्नता देखकर सुकून मिला। यह लोगों की आत्मा से निकली हुई आवाज है। कैराना में आया यह परिवर्तन बहुत बड़ा परिवर्तन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार में सांसद बनने तक अनेक योजनाएं उप्र में भेजी लेकिन उस समय की सरकार ने नीचे तक योजनाओं का लाभ नहीं भेजा। उप्र में सरकार ने इन सभी योजनाओं को क्रियान्वित किया। अब पैंतालीस योजनाओं में यूपी नम्बर वन है। किसानों की सर्वाधिक फसल खरीद विगत पांच वर्ष में हुई। अस्सी हजार करोड़ रुपए किसानों के खातों में भेजा। गन्ना, चीनी, गेहूं, आलू, हरी मटर, आम, आंवला और दूध में उप्र पूरे देश में पांच साल में नंबर वन हो गया है। भाजपा सरकार ने कच्ची चीनी के आयात पर आयात शुल्क लगाया। पहले इक्कीस चीनी मिल बन्द हुई थी, योगी सरकार के समय कई मिल चालू कराई गई। वर्तमान सरकार राष्ट्रवाद,विकास सुशासन व अंत्योदय के विचार को चरितार्थ कर रही है। भाजपा सरकार ने उन सभी संकल्पों को पूरा किया। वंशवादी व जातिवादी राजनीति से प्रदेश को मुक्ति मिली है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ विकास के अभूतपूर्व कार्य किये गए है। गृहमंत्री के रूप में अमित शाह ने ही संसद में जम्मू कश्मीर संशोधन विधेयक पेश किया था। अमित शाह के तर्कों से जनता के सामने सच्चाई उजागर हो गई थी। अमित शाह जन संवाद के दौरान जम्मू कश्मीर में हुए सुधारों का भी उल्लेख कर रहे है। जम्मू कश्मीर में पहले सत्तासी विधायक,छह सांसद और तीन परिवार ही राज करते थे। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गांव-गांव तक लोकतंत्र पहुंचा है जिससे करीब तीस हजार चुने हुए सदस्य जनता की सेवा कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी ने शासन को कुछ लोगों की गिरफ्त से निकाल कर जनता तक पहुंचाया है। कुछ दिन पहले शाह ने जम्मू-कश्मीर में जिला सुशासन सूचकांक जारी किया था। उन्होंने कहा था कि सुशासन को अगर जमीनी स्तर तक पहुंचाना है तो इसके लिये जिला एक महत्वपूर्ण इकाई है। जब तक जिले में सुशासन नहीं पहुंचता, तब तक उसके कोई मायने नहीं हैं। जिला सुशासन सूचकांक से जिलों के बीच स्पर्धा होगी, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिसका सबसे बड़ा लाभ जम्मू-कश्मीर की आम जनता को होगा। नरेन्द्र मोदी का यह संकल्प है कि जम्मू-कश्मीर की जनता को भ्रष्टाचार विहीन शासन मिले। यह मोदी सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए उन्होंने जनता को बिचैलियों से मुक्त करने का काम किया है। जिन विकास कार्यों को राजनीतिक दल इतने सालों में नहीं कर पाए थे और सिर्फ जनता को गुमराह करने का काम किया था, उन कार्यों को मोदी सरकार ने कर दिखाया है। कश्मीर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। जिससे युवाओं को रोजगार मिलता है। कश्मीर पर्यटकों के आने के सभी रिकॉर्ड टूटेगा। नरेन्द्र मोदी ने जम्मू कश्मीर के बजट को नौ हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर इक्कीस हजार करोड़ रुपये किया। युवाओं के रोजगार के लिये अनेकों शुरुआत की गई है। अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर को बहुत लाभ मिल रहा है। केंद्र की नीतियों को जिला स्तर पर मॉनिटर किया जाएगा। इससे यह भी पता चलेगा कि किस जिले में किस सेक्टर में काम करने की जरूरत है। ये इंडेक्स दस विभागों पर बनाया गया है। जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद में चालीस प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में तो जम्मू-कश्मीर का नाम अब शीर्ष पांच में लिया जाता है। इन दो सालों में जम्मू-कश्मीर में बहुत कुछ हुआ है परंतु कुछ बिचैलिए नाराज हैं। जनता को आज और पहले की स्थिति का खुद ही आंकलन करना चाहिए। पहले इन तीनों परिवारों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों का हक खाया है। खुद व अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के स्वार्थों को प्राथमिकता दी। जम्मू और कश्मीर में दो एम्स बने, नौ मेडिकल कालेज बने, पन्द्रह नर्सिंग कालेज बने, आईआईटी आईआईएम बना। नौकरियों में पारदर्शिता आई है। जम्मू-कश्मीर के पांच लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। पचास हजार करोड़ का निवेश होने वाला है।(हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 05:23 AM PST उत्पल पर्रिकर की दलगत निष्ठा(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर बहुत लोकप्रिय नेता हुआ करते थे। भाजपा ने भी उनको पूरा महत्व दिया था। अब पांच राज्यों के साथ गोवा में भी जब विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं, तब पार्टी की चुनावी रणनीति के तहत स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर को टिकट नहीं दिया गया। पणजी सीट से लम्बे समय तक उनके पिता ने ही प्रतिनिधित्व किया। अबकी बार पार्टी ने मौजूदा विधायक अतानासियो माॅन्स रेट को पणजी सीट से उतारा है। इसी के चलते उत्पल पर्रिकर ने भाजपा छोड़ दी लेकिन इसे सबसे मुश्किल फैसला बताया वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे लेकिन यह भी कहा कि भाजपा यदि किसी अच्छे प्रत्याशी को पणजी से चुनाव लड़ाती है तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। इससे इतना तो साबित होता है कि उत्पल पर्रिकर की दलगत निष्ठा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को गोवा का यह विवाद वार्ता करके सुलझा लेना चाहिए। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़ना उनके लिए सबसे मुश्किल फैसला था और यदि भगवा दल पणजी से किसी अच्छे उम्मीदवार को खड़ा करता है, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। उत्पल ने 21 जनवरी को भाजपा छोड़ दी थी और घोषणा की कि वह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव पणजी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे। भाजपा ने उत्पल को टिकट न देकर मौजूदा विधायक अतानासियो मॉन्सरेट को पणजी सीट से मैदान में उतारा है, जिसका प्रतिनिधित्व लंबे समय तक मनोहर पर्रिकर ने किया था। मनोहर पर्रिकर के बड़े बेटे उत्पल पर्रिकर ने कहा कि भाजपा हमेशा उनके दिल में है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था। उत्पल ने कहा, 'यह सबसे मुश्किल फैसला था। इस दौरान मैं यही उम्मीद करता रहा कि मुझे यह फैसला नहीं करना पड़े। साथ ही उन्होंने कहा, 'मैं इस बात से नाखुश हूं कि मुझे यह फैसला (पार्टी छोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का) करना पड़ा, लेकिन आपको कभी-कभी मुश्किल फैसले करने पड़ते हैं। यदि पार्टी पणजी से किसी अच्छे उम्मीदवार को खड़ा करती है तो मैं फैसला वापस लेने के लिए तैयार हूं। उत्पल ने अधिक विस्तार से बात किए बिना दावा किया कि उन्हें टिकट नहीं दिया जाना 1994 की उस स्थिति के समान है, जब उनके पिता को पार्टी से बाहर निकालने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा, 'उस समय मनोहर पर्रिकर को बाहर इसलिए निकाला नहीं जा सका था, क्योंकि उनके पास लोगों का समर्थन था। उन्होंने कहा वे (उनके पिता के विरोधी) लोग अब भी पार्टी में 'ऊंचे पदों' पर बैठे हैं, जबकि उनके जैसा व्यक्ति 'लोगों के साथ है। उत्पल ने 2019 पणजी उपचुनाव का जिक्र किया, जो उनके पिता के निधन के बाद हुआ था। उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय भी टिकट नहीं दिया गया था, जबकि उनके पास 'समर्थ' था। उत्पल ने कहा, 'जब (भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा) नड्डा जी गोवा आए थे, तो पांच दंपत्तियों ने (अगले महीने होने वाले चुनाव के लिए) पार्टी का टिकट मांगा था। यदि मनोहर पर्रिकर जीवित होते, तो एक भी पुरुष नेता अपनी पत्नी के लिए टिकट मांगने की हिम्मत नहीं कर पाता। भाजपा ने मॉन्सरेट की पत्नी जेनिफर, स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे और उनकी पत्नी दिव्या राणे को भी टिकट दिया है। उत्पल ने कहा कि उनके पिता राजनीति में परिवार राज के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने मनोहर पर्रिकर के बेटे के रूप में टिकट नहीं मांगा था। गोवा विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर को टिकट देने से भाजपा के इनकार के बाद, राज्य के मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा था कि सिर्फ इसलिए कि आप किसी के बेटे हैं पार्टी आपका समर्थन नहीं करेगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राणे ने स्वीकार किया कि मनोहर पर्रिकर गोवा में सत्तारूढ़ भाजपा के सबसे बड़े नेता थे, लेकिन उन्होंने घोषित किया कि उनके बेटे उत्पल को भाजपा के साथ काम करना चाहिए, सीखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। राणे ने कहा, सिर्फ इसलिए कि आप किसी के बेटे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आपको टिकट मिलेगा। विरासत को आगे बढ़ाने का मतलब यह नहीं है कि टिकट दिया जाएगा। राणे ने कहा कि पंजिम का टिकट मौजूदा विधायक अतानासियो बाबुश मोनसेरेट को दिया गया है, क्योंकि पूर्व कांग्रेस नेता ने पंजिम में अच्छा काम किया है। लोगों ने इसे देखा हैष्। मनोहर पर्रिकर के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे बाबुश ने उपचुनाव में यह सीट जीती थी। राणे ने कहा, बाबुश को पंजिम का टिकट मिला है क्योंकि उन्होंने वहां अच्छा काम किया है। वहां के लोगों ने इसे देखा है और उन्हें वोट दिया है। मैं भी एक राजनीतिक पृष्ठभूमि से हूं, लेकिन किसी ने मुझे थाली में परोस कर टिकट नहीं दिया था। मैंने भी यहां अपनी जगह बनाई है और टिकट पाने व अपनी विरासत बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। उत्पल पर्रिकर ने उस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी जहां से उनके पिता ने 25 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया था। भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं जल्द ही अपना रुख स्पष्ट करूंगा। गौरतलब है कि शिवसेना ने समर्थन व्यक्त किया है और आप ने उन्हें टिकट की पेशकश की है। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर ने बागी तेवर अपना लिये हैं। उन्होंने बीजेपी से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी पर सवाल उठाए हैं। उत्पल पर्रिकर ने कहा, अब समय आ गया है कि मैं अपने पिताजी के मूल्यों के साथ खड़ा रहा हूं। मैंने बीजेपी को यह समझाने का भरपूर प्रयास किया कि मुझे कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त है, लेकिन यहां टिकट एक अवसरवादी उम्मीदवार को दे दिया गया है। मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा। मनोहर पर्रिकर के बेटे ने इसी के साथ बीजेपी छोड़ने का ऐलान भी कर दिया है। उत्पल पर्रिकर ने पणजी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है। बीजेपी ने गोवा की अपनी लिस्ट में उत्पल को उम्मीदवार नहीं बनाया था। आम आदमी पार्टी ने उत्पल को अपनी पार्टी से टिकट देने और मौजूदा प्रत्याशी को वापस लेने की पेशकश भी की थी, हालांकि उत्पल ने बिना किसी पार्टी के समर्थन के ही मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया है। उत्पल पर्रिकर ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़ना उनके लिए ''सबसे मुश्किल'' फैसला था और यदि भगवा दल पणजी से किसी ''अच्छे उम्मीदवार'' को खड़ा करता है, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। इससे इतना तो पता चलता ही है कि मनोहर पर्रिकर के बेटे में भाजपा के प्रति निष्ठा भी है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jan 2022 04:59 AM PST हमें अपने गणतंत्र पर गर्व है(मनीषा स्वामी कपूर-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) इस बार हम भारतवासी 72वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। स्वाधीनता की हीरक जयंती का यह पर्व और भी विशिष्ट हो गया। गणतंत्र तो हमारे पड़ोसी देश ने भी अपनाया था लेकिन एक दशक बाद ही वहां सैनिक शासन लागू हो गया। भारत ने इसी दिन 1950 में भारत सरकार अधिनियम एक्ट (1935) को हटाकर अपने संविधान को लागू किया था। हमारे देश के लिए 26 जनवरी का विशेष महत्व है क्योंकि आजादी मिलने से पहले इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था। भारत के गणतंत्र की यात्रा 1930 से शुरू हुई थी और 1930 से 1947 तक 30 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से यूनियन जैक को हटाकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया। देश का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की गयी जिसने 2 साल 11 महीने 17 दिन में 26 नवम्बर 1949 को संविधान तैयार किया। इसे 26 जनवरी 1950 से हम भारतीयों ने स्वयं पर लागू किया। भारत को गणतंत्र राष्ट्र बनाने के बारे में कांग्रेस के लाहौर सत्र में 31 दिसम्बर 1929 को रात मे विचार किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित अटल बिहारी बाजपेयी ने जिस राबी की शपथ को एक कविता में अधूरा बताया है, उसीे राबी के तट पर भारत के रणबांकुरो ने शपथ ली थी कि 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाएंगे। ताकि ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता की मांग की जा सके। इस शपथ में क्रांतिकारी भी शामिल थे। हमारे देश भारत की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो हमें दुनिया भर में नहीं मिलतीं। इनमें सबसे बड़ी है अनेकता में एकता। यहां हर जाति, धर्म वर्ग, सम्प्रदाय के लोग एक साथ मिलजुलकर रहते हैं और तीज त्योहार भी मनाते हैं। इस देश में ही एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान भी किया जाता है। अभी हमने मकर संक्रांति का पर्व मनाया है और इस पर्व पर पतंग उड़ाने वाले सिर्फ हिन्दू ही नहीं थे, बल्कि सभी वर्ग-सम्प्रदाय के लोग शामिल थे। यहां की जलवायु और मौसम दुनिया भर में नहीं मिलते। भारत के पारंपरिक व्यंजन भी दुनिया भर में देश की शान बढ़ाते हैं। सरसों के साग के साथ मक्के की रोटी और रसभरी जलेबी। भारत के इस छोर से उस छोर तक संस्कृति की विभिन्नताओं को साफतौर पर देखा जा सकता है। हिन्दी के साथ मराठी, गुजराती, पंजाबी, उड़िया, कन्नड़, तमिल और तेलुगु के साथ आमार सोनार बांग्ला वाली बंगाली की मिठास सहज ही आकर्षित कर लेती है। भारत का ही गणतंत्र है जहां सभी को अपनी बात कहने की पूरी स्वतंत्रता है। इसलिए हमें अपने गणतंत्र पर गर्व है। एक गणराज्य या गणतंत्र सरकार का एक ऐसा रूप है जिसमें देश को एक 'सार्वजनिक मामला' माना जाता है, न कि शासकों की निजी संस्था या सम्पत्ति। एक गणराज्य के भीतर सत्ता के प्राथमिक पद विरासत में नहीं मिलते हैं। यह सरकार का एक रूप है जिसके अन्तर्गत राज्य का प्रमुख राजा नहीं होता।प्राचीन काल में दो प्रकार के राज्य कहे गए हैं। एक राजाधीन और दूसरे गणधीन। राजाधीन को एकाधीन भी कहते थे। जहाँ गण या अनेक व्यक्तियों का शासन होता था, वे ही गणाधीन राज्य कहलाते थे। इस विशेष अर्थ में पाणिनि की व्याख्या स्पष्ट और सुनिश्चित है। उन्होंने गण को संघ का पर्याय कहा है (संघोद्धौ गणप्रशंसयो (अष्टाध्यायी 3,3,86)। साहित्य से ज्ञात होता है कि पाणिनि और बुद्ध के काल में अनेक गणराज्य थे। तिरहुत से लेकर कपिलवस्तु तक गणराज्यों का एक छोटा सा गुच्छा गंगा से तराई तक फैला हुआ था। बुद्ध शाक्यगण में उत्पन्न हुए थे। लिच्छवियों का गणराज्य इनमें सबसे शक्तिशाली था, उसकी राजधानी वैशाली थी किंतु भारतवर्ष में गणराज्यों का सबसे अधिक विस्तार वाहीक (आधुनिक पंजाब) प्रदेश में हुआ था। उत्तर पश्चिम के इन गणराज्यों को पाणिनि ने आयुधजीवी संघ कहा है। वे ही अर्थशास्त्र के वार्ताशस्त्रोपजीवी संघ ज्ञात होते हैं। ये लोग शांतिकल में वार्ता या कृषि आदि पर निर्भर रहते थे किंतु युद्धकाल में अपने संविधान के अनुसार योद्धा बनकर संग्राम करते थे। इनका राजनीतिक संघटन बहुत दृढ़ था और ये अपेक्षाकृत विकसित थे। इनमें क्षुद्रक और मालव दो गणराज्यों का विशेष उल्लेख आता है। उन्होंने यवन आक्रांता सिकंदर से घोर युद्ध किया था। वह मालवों के बाण से तो घायल भी हो गया था। इन दोनों की संयुक्त सेना के लिये पाणिनि ने गणपाठ में क्षौद्रकमालवी संज्ञा का उल्लेख किया है। पंजाब के उत्तरपश्चिम और उत्तरपूर्व में भी अनेक छोटे मोटे गणराज्य थे, उनका एक श्रुंखला त्रिगर्त (वर्तमान काँगड़ा) के पहाड़ी प्रदेश में विस्तारित हुआ था जिन्हें पर्वतीय संघ कहते थे। दूसरा श्रुंखला सिंधु नदी के दोनों तटों पर गिरिगहवरों में बसने वाले महाबलशाली जातियों का था जिन्हें प्राचीनकाल में ग्रामीणाय संघ कहते थे। वे ही वर्तमान के कबायली हैं। इनके संविधान का उतना अधिक विकास नहीं हुआ जितना अन्य गणराज्यों का। वे प्रायः लूटमार कर जीविका चलानेवाले थे। इनमें भी जो कुछ विकसित थे उन्हें पूग और जो पिछड़े हुए थे उन्हें ब्रात कहा जाता था। संघ या गणों का एक तीसरा गुच्छा सौराष्ट्र में विस्तारित हुआ था। उनमें अंधकवृष्णियों का संघ या गणराज्य बहुत प्रसिद्ध था। कृष्ण इसी संघ के सदस्य थे अतएव शांतिपूर्व में उन्हें अर्धभोक्ता राजन्य कहा गया है। ज्ञात होता है कि सिंधु नदी के दोनों तटों पर गणराज्यों की यह श्रृंखला ऊपर से नीचे को उतरती सौराष्ट्र तक फैल गई थी क्योंकि सिंध नामक प्रदेश में भी इस प्रकार के कई गणों का वर्णन मिलता है। इनमें मुचकर्ण, ब्राह्मणक और शूद्रक मुख्य थे। भारतीय गणशासन के संबंध में भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। गण के निर्माण की इकाई कुल थी। प्रत्येक कुल का एक एक व्यक्ति गणसभा का सदस्य होता था। उसे कुलवृद्ध या पाणिनि के अनुसार गोत्र कहते थे। उसी की संज्ञा वंश्य भी थी। प्रायः ये राजन्य या क्षत्रिय जाति के ही व्यक्ति होते थे। ऐसे कुलों की संख्या प्रत्येक गण में परंपरा से नियत थी, जैसे लिच्छविगण के संगठन में 7707 कुटुंब या कुल सम्मिलित थे। उनके प्रत्येक कुलवृद्ध की संघीय उपाधि राजा होती थी। सभापर्व में गणाधीन और राजाधीन शासन का विवेचन करते हुए स्पष्ट कहा गया है कि साम्राज्य शासन में सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में रहती है। (साम्राज्यशब्दों हि कृत्स्नभाक्) किंतु गण शासन में प्रत्येक परिवार में एक एक राजा होता है। (गृहे गृहेहि राजानः स्वस्य स्वस्य प्रियंकराः, सभापर्व, 14,2)। इसके अतिरिक्त दो बातें और कही गई हैं। एक यह कि गणशासन में प्रजा का कल्याण दूर दूर तक व्याप्त होता है। दूसरे यह कि युद्ध से गण की स्थिति सकुशल नहीं रहती। गणों के लिए शम या शांति की नीति ही थी। यह भी कहा है कि गण में परानुभाव या दूसरे की व्यक्तित्व गरिमा की भी प्रशंसा होती है और गण में सबको साथ लेकर चलनेवाला ही प्रशंसनीय होता है। गण शासन के लिए ही परामेष्ठ्य पारिभाषिक संज्ञा भी प्रयुक्त होती थी। संभवतः यह आवश्यक माना जाता था कि गण के भीतर दलों का संगठन हो। दल के सदस्यों को वग्र्य, पक्ष्य, गृह्य भी कहते थे। दल का नेता परमवग्र्य कहा जाता था। गणसभा में गण के समस्त प्रतिनिधियों को सम्मिलित होने का अधिकार था किंतु सदस्यों की संख्या कई सहस्र तक होती थी अतएव विशेष अवसरों को छोड़कर प्रायः उपस्थिति सीमित ही रहती थी। शासन के लिये अंतरंग अधिकारी नियुक्त किए जाते थे। किंतु नियमनिर्माण का पूरा दायित्व गणसभा पर ही था। गणसभा में नियमानुसार प्रस्ताव रखा जाता था। उसकी तीन वाचना होती थी और शलाकाओं द्वारा मतदान किया जाता था। इस सभा में राजनीतिक प्रश्नों के अतिरिक्त और भी अनेक प्रकार के सामाजिक, व्यावहारिक और धार्मिक प्रश्न भी विचारार्थ आते रहते थे। उस समय की राज्य सभाओं की प्रायरू ऐसे ही लचीली पद्धति थी। भारतवर्ष में लगभग एक सहस्र वर्षों (600 सदी ई. पू. से 4 थी सदी ई.) तक गणराज्यों के उतार चढ़ाव का इतिहास मिलता है। उनकी अंतिम झलक गुप्त साम्राज्य के उदय काल तक दिखाई पड़ती है। आक्रांताओं ने हमें भौतिक रूप से कमजोर किया लेकिन हमारी संस्कृति को नहीं हिला पाए। यही संस्कृति जनतंत्र के रूप में फल फूल रही है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews 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| Posted: 24 Jan 2022 04:54 AM PST बात कहने का योगी तरीका(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी और तेज हो गयी है क्योंकि सभी पार्टियों ने उम्मीदवारों की सूची जारी करनी शुरू कर दी है। इस प्रकार अपेक्षा के अनुसार जिसको टिकट नहीं मिलता है, वही आत्मा की आवाज भविष्य को देखकर सुनने लगता है। भगदड़ सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा में भी मची लेकिन योगी आदित्यनाथ का चुनाव प्रचार और परिस्थितियों का सामना करने का अलग ही तरीका है। वे अभी पिछले दिनों 80 और 20 फीसदी का फार्मूला सुनाकर विपक्षी दलों को उलझा चुके हैं। अब उन्हांेने कहा कि वे (विपक्षी) अवैध तरीके से हजहाउस बनवाते हैं और हम नियम संगत कैलाश मानसरोवर भवन। इसी संदर्भ में योगी काशी, मथुरा और अयोध्या के राम मंदिर का भी जिक्र करते हैं। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के समय की गुंडागर्दी का उल्लेख करते हुए 2017 के बाद माफियाओं पर जिस तरह से बुलडोजर चला है, योगी उसका जिक्र करना नहीं भूलते। इसके साथ ही मुख्य प्रतिद्वन्द्वी सपा को घेरने के लिए भाजपा की नयी-नयी रणनीति भी बनती रहती है। योगी के सारगर्भित बयानों से विपक्षी दल तिलमिला कर रह जाते हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बात करने का तरीका ही कुछ अलग है। भाजपा ने विवादित सीटों पर टिकट वितरण फिलहाल रोक दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी सरकार पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने राम जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ मंदिर, कैलाश मानसरोवर भवन का जिक्र किया। उन्होंने टिप्पणी की कि वे नियमों की अनदेखी कर हज हाऊस बनाते हैं, हम नियमसंगत कैलाश मानसरोवर भवन बनाते हैं। सीएम योगी ने गाजियाबाद के मोहन नगर इलाके में घर-घर जाकर प्रचार किया और साहिबाबाद में बुद्धिजीवियों को संबोधित कर आगामी चुनाव में लोगों का समर्थन मांगा। साहिबाबाद में एक कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए, सीएम योगी ने कहारू "जो लोग सत्ता में रहते हुए लोगों को बिजली देने में विफल रहे। वे 300 यूनिट मुफ्त में देने का वादा कर रहे हैं क्योंकि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि वे नहीं आ रहे हैं।" उन्होंने कहा कि लोगों से अपने वायदे को निभाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। दरअसल, उन्हें अंधेरे में रहने की आदत है क्योंकि चोरों को चांदनी रात पसंद नहीं होती है। सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल कोविड महामारी के दौरान गायब हो गए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में विकसित दो टीकों पर लोगों को गुमराह करने में लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि "भारत ने पीएम मोदी के नेतृत्व में कोविड प्रबंधन में दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है। यह प्रभावी प्रबंधन के कारण है कि अमेरिका की तुलना में चार गुना अधिक आबादी होने के बावजूद, भारत में महामारी के कारण अमेरिका से आधी मौतें हुई हैं। साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र के कृष्णा इंजीनियरिंग कालेज में आयोजित प्रभावी मतदाता संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि लोगों को इस तथ्य को पहचानना चाहिए कि जो लोग महामारी के दौरान उनके साथ नहीं खड़े थे और जिनके एजेंडे में विकास नहीं है, वे उनके असली दुश्मन हैं और उन्हें उनका समर्थन नहीं करना चाहिए। सपा पर तीखा प्रहार करते ही उन्होंने कहा की उसने हिस्ट्रीशीटर और खूंखार गैंगस्टरों को टिकट दिया है। भारतीय जनता पार्टी अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी को मात देने के लिए एक बार फिर वर्ष 2017 में अपनाई गई रणनीति पर ही अमल करती दिख रही है। बीजेपी एक ओर जहां पिछली बार की ही तरह यादव कुनबे की कलह और सपा सरकार में 'गुंडाराज' का मुद्दा उछाल रही थी, वहीं कैराना दौरे पर गए अमित शाह ने पलायन का मु्द्दा उठाकर इस थ्योरी को पक्का कर दिया। 'कैराना में पलायन' का मुद्दा लोगों के दिलोंदिमाग में अब भी जिंदा है। 'बीजेपी सरकार बनने से पहले और बाद में भी कैराना से हिंदू परिवारों का पलायन हमेशा चिंता का विषय रहा है। कैराना से बीजेपी के पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने सबसे पहले पलायन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने जून, 2016 में 346 लोगों की एक लिस्ट जारी की थी, जिन्हें 'एक विशेष समुदाय के आपराधिक तत्वों द्वारा धमकी और जबरन वसूली' के कारण मुस्लिम बहुल शहर कैराना से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।' हालांकि हुकुम सिंह ने बाद में अपने बयान को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि कैराना से पलायन की वजह खास तौर से 'कानून-व्यवस्था का मुद्दा' था और कई परिवारों ने कारोबारी वजहों से भी पलायन किया। इससे यूपी में हिन्दुओं के कथित पलायन का एक नैरेटिव सेट हो चुका था और इसने कुछ ही महीनों बाद हुए विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव सरकार के खिलाफ बीजेपी के एक बड़े हथियार की तरह काम किया। केंद्र सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री अमित शाह एक बार फिर कैराना पहुंचे थे। उन्होंने यहां घर-घर जाकर बीजेपी के लिए प्रचार किया और हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाते हुए समाजवादी पार्टी को घेरा था। सपा-आरएलडी गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में होने पहले चरण के मतदान के लिए जब उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी, तब भी बीजेपी ने कैराना से सपा उम्मीदवार नाहिद हसन को लेकर अखिलेश यादव पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने सपा सुप्रीमो पर 'कैराना से हिन्दुओं के पलायन के जिम्मेदार' को टिकट देने का आरोप लगाया है। इसके साथ यादव परिवार में 'तथाकथित दरार' को उछालने का प्रयास भी भाजपा की उसी स्क्रिप्ट का हिस्सा है। उन्होंने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव और दो पूर्व सपाई प्रमोद गुप्ता और हरिओम यादव के बीजेपी में जाने का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, 'जो नेता सपा छोड़ रहे हैं उनके पास अपना कोई जनाधार नहीं ह। साल 2017 के चुनाव में भी भाजपा ने सपा शासन के दौरान खराब कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए उस पर अपराधियों और माफियाओं को आश्रय देने का आरोप लगाया था। वहीं इस बार भी सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी चुनाव के पहले दो चरणों में आपराधिक इतिहास वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के लिए सपा नेतृत्व की आलोचना की थी। भारतीय जनता पार्टी ने विवादित सीटों पर टिकट का ऐलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि पार्टी ने बगावत होने के डर से ऐसा कदम उठाया है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| चीन ने ताइवान के डिफेंस जोन में भेजे 39 विमान Posted: 24 Jan 2022 04:50 AM PST चीन ने ताइवान के डिफेंस जोन में भेजे 39 विमानबीजिंग। चीन ने एक बार फिर ताइवान में घुसपैठ की है। चीन ने यहां के डिफेंस जोन में 39 लड़ाकू विमान भेजे हैं। ये बीते कई महीनों में सबसे बड़ी घुसपैठ बताई जा रही है। इनकी संख्या अक्टूबर के बाद सबसे अधिक रही। दरअसल, इस देश को आशंका है कि चीन इसपर हमला कर देगा। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है, जबकि ताइवान का कहना है कि वह एक स्वंतत्र देश है। चीन इतना कह चुका है कि वह ताइवान को खुद में शामिल कर लेगा, फिर चाहे उसे बल प्रयोग का ही सहारा क्यों ना लेना पड़ा। बीते साल चीन ने ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (एडीआईजेड) में कई बार घुसपैठ की थी। 4 अक्टूबर की ही बात है, जब चीन के 56 लड़ाकू विमानों ने यहां घुसपैठ कर दी थी। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने देर रविवार को एक बयान में कहा कि उसने चीनी लड़ाकू विमानों की सूचना मिलते ही चेतावनी के तौर पर अपने लड़ाकू विमान भी भेज दिए। साथ ही ।क्पर्् में दाखिल होने वाले 39 चीनी लड़ाकू विमानों को ट्रैक करने के लिए मिसाइलें तैनात कर दीं। घुसपैठ के लिए भेजे गए इन लड़ाकू विमानों में 24, जे-16 शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र का परीक्षण करने के लिए यह चीन का पसंदीदा लड़ाकू विमान है जबकि 10, जे-10 विमान और एक परमाणु बम गिराने में सक्षम एच-6 बॉम्बर भी भेजा गया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जर्मनी नौसेना के वाइस एडमिरल ने दिया इस्तीफा Posted: 24 Jan 2022 04:47 AM PST जर्मनी नौसेना के वाइस एडमिरल ने दिया इस्तीफानई दिल्ली। जर्मनी नौसेना के वाइस एडमरिल के अचिम शोएनबैक को भारत में दिए गए एक बयान के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। शोएनबैक हाल ही में नई दिल्ली के दौरे पर थे। इस दौरान एक कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ कर दी। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान शोएनबैक ने कहा था कि यूक्रेन कभी भी क्रीमिया को वापस हासिल नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा था कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बेहतर सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन को यूक्रेन मामले में सम्मान दिया जाना चाहिए। वाइस एडमरिल के अचिम शोएनबैक नई दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (एमपी-आईडीएसए) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। रूस ने 2014 में जिस क्रीमिया प्रायद्वीप पर कब्जा किया था, वह यूक्रेन को वापस नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा था कि रूस को चीन के खिलाफ एक ही पक्ष रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने साथ ही कहा था कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 'सम्मान' के हकदार हैं। शोएनबैक के इन बयानों ने यूक्रेन को नाराज कर दिया और उसने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए जर्मनी के राजदूत को तलब किया था। शोनएबैक को बर्लिन में भी आलोचनाएं झेलनी पड़ीं। शोएनबैक ने इस्तीफा देते हुए कहा कि वह 'बिना सोचे-समझे दिए गए अपने बयानों' के कारण जर्मनी और उसकी सेना को और नुकसान होने से बचाना चाहते हैं। जर्मन नौसेना ने एक बयान में बताया कि रक्षा मंत्री क्रिस्टीन लैम्ब्रेक्ट ने शोएनबैक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नौसेना के उप प्रमुख को अंतरिम प्रमुख बना दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि शोएनबैक की भविष्यवाणी ने यूक्रेन को सबसे ज्यादा परेशान किया है। उन्होंने कहा कि क्रीमिया, जिसे पश्चिमी सरकारों द्वारा अवैध माना जाता है, उसे यूक्रेन ने हमेशा के लिए खो दिया है। शोएनबैक ने कहा, 'क्रीमियन प्रायद्वीप चला गया है। यह कभी वापस नहीं आ रहा है। यह सच है।' हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पाक के चांद नवाब ने मौसम की रोचक ढंग से दी खबर Posted: 24 Jan 2022 04:44 AM PST पाक के चांद नवाब ने मौसम की रोचक ढंग से दी खबरइस्लामाबाद। एक बार फिर पाकिस्तान के पत्रकार चांद नवाब ने फिल्म बजरंगी भाईजान की याद दिला दी। चांद नवाब का एक और वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह कराची में समंदर किनारे धूल भरी आंधी और सर्द हवाओं की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि कराची में साहिल किनारे का मौसम बेहत मस्त हैं, इसलिए किसी दुबई या विदेश जाने की जरूरत नहीं लेकिन साथ ही वे यह भी कह रहे हैं कि दुबले-पतले लोग यहां न आए। वे इस हवा में उड़ जाएंगे। पाकिस्तान के कई लोगों ने उनके इस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है और उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। चांद नवाब के किरदार को फिल्म बजरंगी भाईजान में दिखाया गया था जिसे नवाजुद्दीन सिद्दकी ने प्ले किया था। चांद नवाब हाथ में न्यूज चैनल का माइक लेकर बोल रहे हैं- इस वक्त मैं कराची में साहिल पर खड़ा हूं जहां मिट्टी का तूफान है, ठंडी-ठंडी हवाएं हैं, मौसम बड़ा खुशगवार है, कराची के शहरी समंदर पर पहुंच रहे हैं। लेकिन इस तूफान से मेरे बाल उड़ रहे हैं, मुंह में मिट्टी जा रहा है और आंखें खोली नहीं जा रही है। जो दुबले-पतले लोग हैं वो यहां न आएं, वे हवा के साथ उड़ सकते हैं लेकिन मौसम खुशगवार है। लेकिन मिट्टी का तूफान इतना अच्छा है कि आपको सउदी या दुबई जाने की जरूरत नहीं है। चांद नवाब कहते हैं कि मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे तक कराची में समंदर किनारे इसी तरह ठंडी हवा चलती रहेगी। इसलिए आप यहां आए और इसका मजा लें। इस वक्त में कोई अरब में नहीं बल्कि कराची के साहिले समंदर में मौजूद हूं जहां तेज हवा के साथ मिट्टी का तूफान है लेकिन लोग यहां पर तफरी के लिए आ रहे हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अमेरिका ने यूक्रेन से अपने राजनयिक वापस बुलाए Posted: 24 Jan 2022 04:40 AM PST अमेरिका ने यूक्रेन से अपने राजनयिक वापस बुलाएवॉशिंगटन। रूस और नाटो के बीच यूक्रेन के मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है। इस मामले में तेजी से डेवलपमेंट हो रहे हैं। पूरे यूरोप में हाई अलर्ट जैसी स्थिति है। बेशक रूस और अमेरिका के अधिकारी इस संकट को टालने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका कुछ ऐसे बड़े कदम भी उठा रहा है, जिससे युद्ध होने की आशंका बढ़ती जा रही है। अमेरिका ने अपने कुछ राजनयिकों के परिवारों को यूक्रेन से वापस बुला लिया है। अमेरिका के विदेश विभाग ने पहले ही यूक्रेन के लिए 'लेवल 4' की एडवाइजरी जारी की हुई है। जिसमें अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी और 'रूस के बढ़ते खतरे' के मद्देनजर यूक्रेन की यात्रा न करें। नॉन स्टाफ सदस्यों को वापस बुलाने की योजना उसी दिन बनी, जब अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंक ने रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव से मुलाकात की है। ये मुलाकात भी वर्तमान तनाव को कम करने के लिए हुई थी। युद्ध होने की आशंका को उस खबर से भी बल मिल रहा है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ने यूक्रेन को 90 टन की 'घातक मदद' पहुंचाई है। रूस ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया हुआ है। इस बीच अमेरिका का यूक्रेन को 90 टन की मदद भेजना एक बड़ी बात है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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