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Sunday, February 13, 2022

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Liked on YouTube: देवरिया जिले के विकास की सच्ची कहानी कहती हमारे संवाददाता की खबर देखें कितना विकास हुआ है पिछले ७०

Posted: 12 Feb 2022 07:12 AM PST

देवरिया जिले के विकास की सच्ची कहानी कहती हमारे संवाददाता की खबर देखें कितना विकास हुआ है पिछले ७०
सभी पार्टिया विकास के दावे करते है परन्तु हकीकत क्या है देखिये हमारे संवाददाता पद्मनाभ त्रिपाठी की जमीनी हकीकत की खबरें नेताओ से उल्ट क्या कहती है क्षेत्र की जनता दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/8mxbdK4 Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/ap8V0wt visit website : https://ift.tt/ngSbMZi
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रविवार 13 फरवरी 2022 का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 12 Feb 2022 06:26 AM PST

रविवार 13 फरवरी 2022 का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

रविवार 13 फरवरी 2022 का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि द्वादशी सायं 05:58:16

🔅 नक्षत्र आर्द्रा दिन। 09:01:26

🔅 करण बालव 06:44

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग प्रीति 09:13

🔅 वार रविवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:26:52

🔅 चन्द्रोदय 02:35

🔅 चन्द्र राशि मिथुन

🔅 सूर्यास्त 05:34:47

🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 11:15

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत माघ

🔅 मास पूर्णिमांत माघ

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:41:29 - 12:26:29

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 04:11 से 04:56 PM

🔅 कंटक 10:11 से 10:56 AM

🔅 यमघण्ट 01:11 PM - 01:56 PM

🔅 राहु काल 04:17 PM - 05:41 PM

🔅 कुलिक 04:11 PM - 04:56 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 11:41 AM - 12:26 PM

🔅 यमगण्ड 12:03 PM - 01:28 PM

🔅 गुलिक काल 02:52 PM - 04:17 PM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर

🌹विशेष ~ भीष्म द्वादशी, वाराहद्वादशी, तिल द्वादशी, कुम्भ राशि में सूर्य का प्रवेश प्रातः 06:49:21 से।

पं. प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

रविवार 13 फरवरी 2022 का दैनिक राशिफल

मेष (Aries) : आज आप परिजनों के साथ मिलकर घरेलू मामलों में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श करेंगे। घर की कायापलट करने के लिए कुछ नई योजना बनाएंगे। कार्यस्थल पर उच्च पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। ऑफिस के कार्य के लिए यात्रा पर जाने की संभावना है। माता तथा स्त्री वर्ग की तरफ से लाभ होने की संभावना है। आपके किसी कार्य या प्रॉजेक्ट में सरकार की मदद मिलेगी। अत्यधिक कार्यभार से अस्वस्थ रहेंगे।
शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1

वृषभ (Taurus) : विदेश में रहने वाले स्वजन या मित्र का समाचार मिलने से आपका मन प्रसन्नता का अनुभव करेगा। विदेश जाने के इच्छुक लोगों के लिए अनुकूल संयोग खड़े होंगे। लंबी दूरी की यात्रा करने का अवसर आएगा। ऑफिस या व्यावसायिक स्थान पर कार्यभार बढ़ेगा। व्यापार-धंधे में लाभ होने की संभावना है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से मध्यम रहेगा।

शुभ रंग = फीरोजा़

शुभ अंक : 6

मिथुन (Gemini) : किसी भी प्रकार के अनिष्ट से बचने के लिए आज क्रोध की भावनाओं को नियंत्रण में रखने की सलाह देते हैं। ऑपरेशन कराने के लिए आज का दिन अनुकूल नहीं है। खर्च बढ़ जाने से आर्थिक तंगी का अनुभव होगा। कुटुंबीजनों और सहकर्मचारियों के साथ मनमुटाव होगा, जिसके कारण आप मानसिक बेचैनी अनुभव करेंगे। स्वास्थ्य खराब होगा। ईश्वर की प्रार्थना तथा जाप करने से राहत महसूस होगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer) : आज के दिन मौज-शौक और मनोरंजन की प्रवृत्तियों में आप सराबोर होंगे। मित्रों, परिवार के साथ मनोरंजन के स्थान या पर्यटन पर जाने का अवसर मिलेगा। स्वादिष्ट भोजन और नए वस्त्राभूषण आदि की खरीदारी होगी। वाहन सुख प्राप्त होगा। सार्वजनिक क्षेत्र में मान तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भागीदारी में लाभ मिलेगा। विपरीत लिंगीय व्यक्तियों के प्रति आकर्षण होगा। प्रेमीजनों को प्रणय में सफलता मिलेगी।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

सिंह (Leo) : आज आपके परिवार में हर्षोल्लास का वातावरण रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर आप आनंदपूर्वक समय व्यतीत करेंगे। शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यश, कीर्ति और आनंद की प्राप्ति होगी। नौकरी के क्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा। बीमार व्यक्ति को रोग से मुक्ति मिलेगी। ननिहाल की तरफ से अच्छे समाचार मिलेंगे तथा लाभ होगा। प्रतिस्पर्द्धियों की पराजय होगी।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5

कन्या (Virgo) : आज आप संतान की समस्या से चिंतित रहेंगे। अपच आदि पेट दर्द की बीमारियों की शिकायत रहेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई में विघ्न आएगा। बौद्धिक चर्चा तथा बातचीत में भाग न लें। प्रणय प्रकरण में सफलता मिलेगी। प्रिय व्यक्ति के साथ मुलाकात होगी। कामुकता अधिक रहेगी। शेयर-सट्टा में सावधानी रखेंगे।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra) : अत्यधिक संवेदनशीलता और विचारों के बवंडर से आप मानसिक अस्वस्थता अनुभव करेंगे। माता और स्त्रियों के मामले में आपको चिंता रहेगी। यात्रा के लिए आज का दिन अनुकूल न होने से यात्रा करना टालें। छाती के दर्द से परेशानी होगी। जमीन-सम्बंधी मामलों में सावधानीपूर्वक व्यवहार करने की सलाह देते हैं। विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 7

वृश्चिक (Scorpio) : आज का दिन खुशीपूर्वक व्यतीत करेंगे। नए कार्य की शुरुआत करेंगे। घर में भाई-बहनों के साथ मेल-मिलाप रहेगा। स्वजनों और मित्रों के साथ मिलन-मुलाकात होगी। लघु प्रवास का योग है। आज आपके कार्य सफल होंगे। भाग्य में लाभदायक परिवर्तन आएंगे। दुश्मन और प्रतिस्पर्द्धी अपनी चाल में असफल रहेंगे। आपकी लोकप्रियता में वृद्धि होगी।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1

धनु (Sagittarius) : आपका आज का दिन मध्यम फलदायी साबित होगा। पारिवारिक सदस्यों के साथ गलतफहमी पैदा होने के कारण मनमुटाव होगा। आप मानसिक दृढ़ता कम होने से कोई भी निर्णय तेजी से नहीं ले सकेंगे, कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें। व्यर्थ धन खर्च और कार्यभार आपके मन को व्यवस्थित रखेंगे।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

मकर (Capricorn) : आज निर्धारित कार्य सरलतापूर्वक पूरे होंगे। ऑफिस या व्यावसायिक स्थान पर आपका वर्चस्व बढ़ेगा। गृहजीवन में आनंद का वातावरण रहेगा, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मानसिक स्वस्थता बनी रहेगी। मित्रों और स्नेहीजों के साथ की मुलाकात से खुशी का वातावरण रहेगा। उत्तम भोजन और वस्त्राभूषण मिलेंगे तथा वैवाहिक जीवन में सुख-संतोष का अनुभव होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

कुंभ (Aquarius) : आज किसी की जमानत लेने तथा आर्थिक लेन-देन नहीं करने की सलाह देते हैं। खर्च की मात्रा अधिक रहेगी। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य नहीं रहेंगे। स्वजनों के साथ मतभेद खड़े होंगे। किसी का हित करने में स्वंय परेशानी में पड़ जाने की संभावना है। क्रोध पर नियंत्रण रखें, मानहानि की संभावना है।

शुभ रंग = फीरोजा़

शुभ अंक : 6

मीन (Pisces) : सामाजिक कार्यों या समारोहों में भाग लेने का अवसर आएगा। मित्रों-स्नेहीजनों के साथ की मुलाकात मन को खुशी देगी। सुंदर स्थान पर पर्यटन का आयोजन होगा। शुभ समाचार मिलेगा। पत्नी और संतान से लाभ प्राप्त होगा। आकस्मिक धन प्राप्त होने की संभावना है। वस्तुएं खरीदने के लिए अनुकूल।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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देश की युवापीढी को गर्त में ले जानेवाले ‘वेलेंटाइन डे’ पर रोक लगाने हेतु सरकार ठोस कदम उठाए ! - राष्‍ट्रप्रेमियों की मांग

Posted: 12 Feb 2022 04:38 AM PST

हिन्‍दू जनजागृति समिति द्वारा मुजफ्‍फरपुर और हाजीपुर में जिलाधिकारी को ज्ञापन !

देश की युवापीढी को गर्त में ले जानेवाले 'वेलेंटाइन डे' पर रोक लगाने हेतु सरकार ठोस कदम उठाए  ! - राष्‍ट्रप्रेमियों की मांग

मुजफ्‍फरपुर / हाजीपुर - पूरे विश्‍व में सर्वाधिक युवाशक्‍ति भारत में है । किंतु कई वर्षों से 14 फरवरी 'वेलेंटाइन डे' के रूप मे मनाने की पाश्‍चात्‍यों की कुप्रथा भारत में भी प्रचलित हो गई है । व्‍यवसायिक लाभ के लिए प्रेम के नाम पर पाश्‍चात्‍यों की इस विकृत संकल्‍पना के कारण युवा पीढी भोगवाद और अनैतिकता की गर्त में जा रही है । इस दिन होनेवाली पार्टियों में युवक-युवतियों में मद्यपान, धूम्रपान, मादक पदार्थों का सेवन, एक पक्षीय प्रेम में लडकियों की छेडछाड और हिंसक कृत्‍यों आदि अनुचित प्रकारों में प्रचंड वृद्धि हुई है । इस दिन संतति प्रतिबंधक साधनों की बिक्री में बडी मात्रा में होती वृद्धि अनैतिक संबंधों की वृद्धि दर्शाती है । लडकियों को प्रभावित करने के लिए तेज गति से वाहन चलाने से दुर्घटनाएं होना तथा 'लव जिहाद' की घटनाएं भी होती है । इन सभी अनुचित कृत्‍यों पर प्रतिबंधात्‍मक उपाय प्रशासन करे, इस दृष्‍टि से हिन्‍दू जनजागृति समिति द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया ।

संक्षेप में 'वेलेंटाइन डे' के कारण विद्यालय-महाविद्यालय के परिसर में कानून-व्‍यवस्‍था तथा शैक्षणिक वातावरण बिगाडनेवाली स्‍वैराचारी और भोगवादी वृत्ति दिनोंदिन बढते जा रही है । इसके कारण होनेवाली घटनाआें का अतिरिक्‍त तनाव पुलिस और प्रशासन पर भी आ रहा है । वर्तमान स्‍थिति में भारत में प्रति 18 मिनट पर एक बलात्‍कार हो रहा है । महिलाआें पर हो रहे अत्‍याचारों के भयानक आंकडे इस संदर्भ में प्रतिबंधात्‍मक उपायों की नितांत आवश्‍यकता दर्शाते हैं । भारतीय समाजव्‍यवस्‍था उत्तम बनी रहे तथा अनैतिक कृत्‍यों के कारण होनेवाले अनाचारों पर रोक लगाने के लिए कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने सहित युवापीढी का उद़्‍बोधन करने की भी आवश्‍यकता है ।

इस दृष्‍टि से समिति की ओर से आगे दी मांगें की गईं -
1. 14 फरवरी को पुलिस के विशेष दल गश्‍ती दल नियुक्‍त कर महाविद्यालय परिसर में अनाचार करनेवाले असामजिक तत्‍वों को नियंत्रण में लेना, द्रुत गति से वाहन चलानेवालों पर कार्यवाही करना आदि उपाययोजनाएं की जाए ।
2. 'वेलेंटाइन डे' के निमित्त महिलाआें पर होनेवाले अत्‍याचारों की मात्रा को देखते हुए ऐसी घटनाआें को रोकने के लिए विद्यालय-महाविद्यालय के परिसर में 'मार्गदर्शक सूचनाएं' निर्देशित की जाए ।
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नफरत की दुनियाँ छोड़कर प्यार की बात करें-अकेला

Posted: 12 Feb 2022 04:36 AM PST

प्रेम दिवस के अवसर पर पांचवें दिन का आयोजन

नफरत की दुनियाँ छोड़कर प्यार की बात करें-अकेला

अरविन्द अकेला की खबर 
औरंगाबाद,12फरवरी।अपना भारत कवि सम्मेलन (द्वितीय) पटल पर वैलेंटाइन को समर्पित पांचवें दिन प्यार के वायदे विषय पर ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ पटना के वरीय रचनाकार अरविंद अकेला ने अपनी इन पंक्तियों "आओ अंधेरों की बस्ती में प्रकाश की बात करें,नफरत की दुनियाँ छोड़कर प्यार की बात करें" से की । श्री अकेला ने माँ सरस्वती को स्मरण कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।।मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर अलका पाण्डेय जबकि समारोह के अध्यक्ष के रूप में वाराणसी के वरीय कवि डॉक्टर ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश की मौजूदगी देखने को मिली। इस भव्य कवि सम्मेलन में वाराणसी से वरीय कवि डॉ शैलेश ने प्यार के वादे विषय पर अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं मुंबई से डॉ अलका पांडे मुख्य अतिथि के रुप में कवियों का उत्साह वर्धन करते हुये देखी गयीं। इस कवि सम्मेलन का संचालन औरंगाबाद की सुप्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती सुषमा सिंह ने अपने अनूठे अंदाज में करते हुए प्यार के वादे विषय पर आयोजित इस कवि सम्मेलन में चार चांद लगा दिया। संयोजक श्री राम राय के अनुसार कवि सम्मेलन के संचालन में श्रीमती सुषमा सिंह के साथ आदरणीय अरविंद अकेला ने भी अपना सराहनीय योगदान दिया ।आज के कवि सम्मेलन में दो दर्जन उपस्थित कवि कवित्रीयों में से डॉ बृजेंद्र नारायण द्विवेदी शैलेश, ईश्वरचंद जायसवाल, डॉ राजेंद्र सिंह विचित्र, वृंदावन राय सरल, नरेंद्र चावला, वीना आडवानी तन्वी, अन्नपूर्णा मालवीय सुरभि जैन, प्रोफेसर डॉक्टर वत्सला एवं डॉक्टर अंबे कुमारी को लोग घंटो सुनते रहे। अंत में संयोजक श्री राम राय के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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भाटपार रानी में खिलेगा कमल या दौड़ेगी साइकिल,आखिर किसकी होगी भाटपार रानी ?

Posted: 12 Feb 2022 03:41 AM PST

भाटपार रानी में खिलेगा कमल या दौड़ेगी साइकिल,आखिर किसकी होगी भाटपार रानी ?

  • सपा से लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके डॉ आशुतोष उपाध्याय इस बार हैट्रिक लगाने की तैयारी में ।
  •  जातीय समीकरण और विकास के मुद्दे पर भाजपा ने सभा कुंवर कुशवाहा को बनाया उम्मीदवार ।

वेद प्रकाश तिवारी, ब्यूरो देवरिया (यू पी) 
देवरिया जिले की भाटपार रानी विधानसभा की सीट पर बीजेपी और सपा में कांटे की टक्कर है। छठे चरण में यहां 3 मार्च को मतदान होना है । भारतीय जनता पार्टी के द्वारा 2017 का चुनाव केंद्र में भाजपा के कार्यों व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा गया था। उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित देवरिया जनपद में 7 विधानसभा सीट है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 7 में से 6 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था। भाटपार रानी सीट पर भाजपा हार गई । 2017 में भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा के अनुज जयनाथ कुशवाहा गुड्डन को अपना प्रत्याशी बनाया था जिन्हें सपा प्रत्याशी डॉक्टर आशुतोष उपाध्याय ने 11000 मतों से पराजित कर समाजवाद का झंडा बुलंद किया था। भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र समाजवाद को मानने वालों का गढ़ रहा है । यहां से राज मंगल तिवारी, कैलाश कुशवाहा, हरिवंश सहाय के साथ-साथ कामेश्वर उपाध्याय 2007 एवं 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इस क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके हैं। 2012 में कामेश्वर उपाध्याय के निधन के बाद 2013 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र डॉक्टर आशुतोष उपाध्याय ने जीत का परचम लहराया था। 2017 में भी आशुतोष उपाध्याय को विजय श्री हासिल हुई थी। एक महत्वपूर्ण बात किया है कि भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड लहर के बावजूद भाटपार रानी विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी नहीं जीत पाई । इसका कारण एक यह भी है कि दिवंगत सपा विधायक कामेश्वर उपाध्याय का व्यक्तित्व ऐसा रहा है की हर जाति, हर कौम, हर समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ रही है । वे निर्दलीय, कांग्रेस या सपा से लड़े , उन्हें पार्टी के आधार पर तो वोट मिला ही, उनके व्यक्तित्व के आधार पर भी उन्हें ज्यादा वोट मिले। उनकी इस छवि को उनके पुत्र डॉ आशुतोष उपाध्याय ने बरकरार रखा है और उनके साथ भी वे सारे लोग जुड़े हैं जो उनके पिताजी के साथ जुड़े थे। यादव, मुस्लिम वोट बैंक के अलावा एक ब्राह्मण चेहरा होने के नाते ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग भी काफी संख्या में जुड़े हुए हैं । इस कारण आज तक भाजपा अपनी जीत नहीं दर्ज कर कर पाई है पर इस बार भाजपा की खास नजर है भाटपार रानी विधानसभा सीट पर । भाजपा का टिकट पाने के लिये भाजपा के पूर्व प्रत्याशी जय नाथ कुशवाहा, सभा कुंवर कुशवाहा और युवा नेता अश्वनी कुमार सिंह, राजकुमार शाही कतार में थे । पिछले चुनाव में भाजपा से प्रत्याशी बने जयनाथ कुशवाहा को 51000 वोट मिले थे । वहीं बहुजन समाज पार्टी से सभा कुंवर 42000 वोटों पर सिमट गए थे । युवा चेहरा अश्वनी कुमार सिंह जो एक क्षत्रिय चेहरा हैं, निर्दलीय प्रत्याशी थे उन्हें 13000 वोट मिले । भारतीय जनता पार्टी सबका साथ सबका विकास के नारों को बुलंद करते हुए अपने विकास कार्यों के आधार पर चुनाव लड़ रही है, साथ ही उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का चेहरा सबसे पसंदीदा है । यह फैक्टर भी काफी अहम है । कुशवाहा बिरादरी के चेहरे के रूप में अजय कुशवाहा भी अपनी एक पहचान रखते हैं । वह एक युवा चेहरा हैं और जिला पंचायत सदस्य के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है । इस बार वह बीएसपी के प्रत्याशी के रूप में खड़े हैं । ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि राशन, श्रम कार्ड ,जनधन योजना, आवास, गैस रसोई, आदि की सुविधाओं का लाभ पाकर दलित समुदाय के वोटों में से मेजर वोट भाजपा को जा सकता है । जातीय समीकरण के आधार पर अजय कुशवाहा को भी कुशवाहा बिरादरी का वोट प्राप्त होगा, परंतु उनके वोटों का प्रतिशत कम रहने की संभावना है । कांग्रेस के उम्मीदवार केशव चंद्र यादव को अभी संघर्ष करना पड़ सकता है । कांग्रेस का कोई विशेष जनाधार इस विधानसभा में नहीं है । भाटपार रानी विधानसभा सीट पर आप नजर दौड़ाएंगे तो पार्टी के आधार पर या विकास कार्यो के आधार पर वोट मिलता ही है पर इन सबसे इतर व्यक्तित्व का आधार भी बहुत महत्वपूर्ण है। जातीय समीकरण का आधार अगर माने तो कुशवाहा बहुल क्षेत्र होने के नाते उनका वोट प्रतिशत सभा कुंवर कुशवाहा की तरफ जा सकता है । जो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं चाहे वह किसी भी जाति के हो को भाजपा को वोट करेंगे । अब देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है । फिलहाल भाजपा और सपा प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं ।
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गुम हो गई चौपाल की फागुनी बयार --

Posted: 12 Feb 2022 04:11 AM PST

गुम हो गई चौपाल की फागुनी बयार :-विभा सिंह

रेडियो पर प्रसारित होने वाले चौपाल की ताजगी आज भी बरकरार है!लेकिन गांव चौक चौराहे पर लगने वाले चौपाल पर संकट पैदा हो गया है दरअसल आज के सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक परिवेश के बदलावों ने मानव जीवन को प्रभावित किया है होली आने से 20 25 दिन पहले से ही गांव में लगने वाली चौपाल के गीतों की खुशबू लोगों के अंदर रंगों से सराबोर कर जाती थी, होली गीत हमारे मन के भाव में सरसता व ताजगी भर देते थे शहरों की दौड़ती भागती जिंदगी या गांव की थकान भरी जिंदगी ऐसे लोगों को चौपाल में जाने से सुकून मिलता था और ऐसे रंगीन माहौल में होली की मस्ती का असर आ ही जाता था पहले होली गीत में चौपाल के माध्यम से हल्की चुहेलबाजी होती थी परंतु आजकल के होली के मस्ती में कुछ गीत कारों ने ऐसे गीतों की रचना कर डाली जिनसे रिश्तो के सभी मायने ही बदल कर रख दिया है!पहले की होली गीत में गांव की गोरी या उसका अल्हड़पन पर का वर्णन इतनी खूबसूरती से किया जाता था जो कर्णप्रिय होता था! यहां तक लोगों की होलिका दहन आगजा के समय लोगों के घरों में भजन-कीर्तन व होली गीत में मस्त रहते थे, लेकिन आजकल के होली गीत में शरारत और चुहेलबाजी ज्यादा होती है ! होली एक पारंपरिक त्योहार के साथ हमारी संस्कृति की पहचान भी है!होली जैसे पावन त्यौहार में शहर और गांव के बीच में कोई दूरी नहीं रह जाती थी लोग परेशानी या आपसी दुश्मनी को भूल कर होली गीत के चौपाल में अवश्य शामिल होने की कोशिश करते थे बड़ों के साथ बच्चे भी पूरा उत्साह दिखाते थे होली का यह खुमार सभी के सिर चढ़कर बोलता था!आलम यह था कि लोग अपने गांव जाने के ललक और अपने प्रिय जनों से मिलने का आतुर रहते थे!असली मस्ती होली का गांव में ही होती थी! गांव का वह माहौल था कि लोग अपनेपन और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर गांव के ही हो जाते थे कोई व्यक्ति होली के मस्ती में इतना साराबोर हो जाता था कि बड़े छोटे का महत्व को भूल जाता था हर व्यक्ति रिश्तो को समेटकर गांव में लगने वाले चौपाल या होली के रंगों में डूब जाते थे, चौपाल में बैठकर होली गीत या रंग गुलाल को सजीदगी से स्वीकारते थे, होली के बहाने साल में एक बार अपने संबंधों को जिंदा करते थे!बच्चों को भी गांव के परिवेश में घूमने का अच्छा अवसर होता था इसी बहाने बच्चे गांव के रिश्ते व गरिमा को समझते थे! इतना सब कुछ होने के बाद भी लोग आजकल गांव की संस्कृति व मिट्टी की खुशबू भूलते जा रहे हैं! गांव में आज जो होली मनाई जाती है उसका तुलना पिछले कुछ वर्षों से इसमें काफी बदलाव आया है गांव की होली में पारंपरिक रिवाजों को निभाते हुए अध्ययन किया जाता था इसका शाब्दिक अर्थ है समाज की कुरीतियों और बुराइयों और आप आपसी द्वेष को होली की आग में जला दिया जाए इसके बाद लोग समूह में होली गीत गाते बजाते घर-घर घूमकर होली खेलते थे दोपहर बाद नए कपड़े पहन कर बड़े छोटे के बीच गले मिलते हैं! एक दूसरे से आशीर्वाद लेते थे आज गांव की होली ठीक इसके विपरीत दिखती है लोगों में एक दूसरे के प्रति प्यार और अपनत्व की भावना में कमी आ गई है! ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ छोटे क़सवे और शहरों में में बसने लगे हैं!धीरे-धीरे गांव के लोग नशे के गिरफ्त में शिकार होते जा रहे हैं! लोग काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं! अपनी संस्कृति और संस्कार को भूलते जा रहे हैं!गांव में होली कई दिनों तक लोग मनाते थे,जबकि शहरो की होली बहुत ही कम समय में खत्म हो जाती है! होली गोवा में, शिकागो में,हरियाणा में,धुलेड़ी,पंजाब में होली महाहल्ला के रूप में मनाई जाती है!बिहार में होली परंपरागत ढंग से मनाई जाती है!मगर इसमें से इसे मनाने वालों के मन में अब पहले जैसा भाव नहीं रह गया है "!
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शहरी निकाय चुनाव और महिला अधिकार:-विभा सिंह

Posted: 12 Feb 2022 03:33 AM PST

शहरी निकाय चुनाव और महिला अधिकार:-विभा सिंह

पंचायती राज और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण ने सामाजिक ढांचा और राजनीतिक स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है पंचायती राज में मुखिया ग्राम पंचायत सदस्य पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य तथा शहरी निकाय में नगर निगम नगर परिषद और नगर पंचायतों के वार्ड सदस्यों के चुनाव में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण दिया गया है इतना ही नहीं मुखिया प्रमुख जिला परिषद अध्यक्ष और शहरी निकायों के मुख्य वार्ड सदस्यों के चुनाव में भी 50 फ़ीसदी आरक्षण दिया गया है यह सुखद आश्चर्य है कि महिलाओं ने अनारक्षित सीटों पर भी बड़ी संख्या में कब्जा जमाकर पुरुषों के साथ चुनौती खड़ी कर दी है! बिहार के साथ नगर निगम में से 2 गया और मुजफ्फरपुर में मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित था लेकिन महिलाओं ने 3 सीटों पर कब्जा जमा लिया आरक्षित सीटों के अलावा भागलपुर अनारक्षित सीट पर भी महिला की झोली में चली गई!
उधर चास नगर निगम 42 नगर परिषद और सात नगर पंचायतों की मुख्य पार्षद को कुल 199 सीटों में से 58 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थी लेकिन महिलाओं ने इसे अधिक पदों पर कब्जा कर लिया है शहरी निकाय में मुख्य पार्षद के पद के कुल 119 पदों में से चिप छत्तीसगढ़ी पंथी पुरुषों के हाथ लगे मुख्य पार्षदों की कुर्सियों में 76 पर महिलाओं ने अपना दबदबा कायम कर लिया सबको हैरत में डाल दिया जो महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या से यह 18 अधिक है!
मिलन के अलावा नगर पंचायत और नगर परिषदों में भी अध्यक्ष पद की दौड़ में महिलाओं पुरुषों से आगे वही उनका आंकड़ा 50 सर्जरी के आरक्षण की सीमा लांग सांसद फिर से तक जा पहुंचे गया आ गया उप मुख्य पार्षद के अनारक्षित पदों पर भी महिलाओं ने अपना दबदबा बनाने का भरसक कोशिश की उस पर मुख्य पार्षद के 119 पदों में से 25 सीटों पर महिलाएं चुनकर आए आंकड़ों से हटकर भी स्थानीय निकाय चुनाव को व्यापक असर रहा है आरक्षण के कारण पहली बार महिलाओं के की बड़ी संख्या में चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिला इसमें सभी प्रकार के सामाजिक परिवेश वाली महिलाएं शामिल हैं कुछ राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार की थी तो कुछ के लिए राजनीति और चुनाव एकदम नई चीज थी ऐसी स्थिति में उन्हें पहली बार घर से बाहर निकल कर वोट मांगने के लिए घर घर घूमना पड़ा ऐसी स्थिति में उनमें आत्मविश्वास लाया और वे मुखर्जी हुए यही वजह रही कि कई इसी कारण में वार्ड सदस्य के चुनाव में कमजोर दिखने वाली महिलाएं निर्वाचित होने पर मुख्य बाद पार्षद और उप मुख्य वार्ड पार्षद के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कि इनमें से कुछ मेयर नगर परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष भी चुनी गई!
महिलाओं के इस नए चेहरे और भूमिका को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सचिन यादव कहती हैं कि आरक्षण ने महिलाओं को अपने अधिकार के लिए प्रति जागृत किया है और उन्होंने में भी सत्ता की भूख पैदा की है उन्हें भी सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया है यह एक शुभ संकेत है इससे सामाजिक और राजनैतिक परिवेश में व्यापक सुधार होने की उम्मीद की जा सकती है!
जबकि अनीता भरत शर्मा का मानना है कि आरक्षण ने शहरी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है और उनकी भूमिका को व्यापर किया है लेकिन अधिकांश मामलों में आज भी महिलाओं के नाम पर पुरुषों की सत्ता भी चल रही है जहां पुरुष खुद चुनाव नहीं लड़ सकता था वहां अपनी पत्नी बहू या बेटी को मैदान में उतार दिया महिलाएं बस मुखौटा भर है हालांकि वे मानती हैं कि आरक्षण से आ रहे परिवर्तन को एकदम नकारा नहीं जा सकता है!
उधर राज्य महिला आयोग की सदस्य आरती सिंह का कहना है कि आरक्षण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है राज्य सरकार ने 50 फ़ीसदी आरक्षण देकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है लेकिन परिवार व समाज का भी दायित्व बनता है राजनीति में आगे आ रही महिलाओं की प्रसारित करें उनको मनोबल बढ़ाएं यही समाज पर प्रदेश और देश के हित में आवश्यक है
आजाद भारत में अभिजात्य परिवार की महिलाओं को की राजनीति के क्षेत्र में भागीदारी और यहीं से दाढ़ी पहले से भी मिलती रही है अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी उसी भर के बड़े परिवार की महिलाओं को मौका मिलता रहा है यह पहला मौका है जब सामान एवं मध्यवर्गीय परिवार की महिलाएं बड़ी संख्या चुनाव में उतरी और सफल भी हुई! राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का परिणाम है कि पहली बार देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के चुनाव में एक महिला ने अपनी दावेदारी जताई है उन्हें केंद्र सरकार में शामिल पार्टियों के साथ समर्थन कर रही पार्टियों ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है यह सब राजनीति में नए युग की शुरुआत के समान है जब शक्ति का स्वरुप मानी जाने वाली नारी को सामाजिक एवं राजनीतिक सत्ता सौंपने का प्रयास किया जा रहा है! समाज और व्यवस्था में बदलाव के पर्याय सदियों से किए जाते रहे हैं इनका असर भी होता आया है! लेकिन राजनीति की निर्णय प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कर राज्य सरकारों ने क्रांतिकारी कदम उठाया है बिहार सरकार ने महिलाओं को स्थानीय निकायों में 50 फ़ीसदी आरक्षण देकर गांव एवं शहरी शहरों के विकास में उनकी हिस्सेदारी बढ़ा दी है पिछले 5 वर्षों का अनुभव रहा है! की महिलाओं ने अपनी भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वाह किया है स्थानीय निकाय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनकर उभरी उम्मीद है कि स्थानीय निकाय में 50 पीवीसी से फ़ीसदी से अधिक भागीदारी महिलाओं की भूमिका को और उत्तरदा यी पूर्ण बनाएगी! इसके साथ ही महिला जनप्रतिनिधि गांव एवं शहरों के विकास में अपनी भूमिका को सार्थक बना सकेगी!
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रिमांड होम या प्रताड़ना केंद्र ?विभा सिंह

Posted: 11 Feb 2022 10:12 PM PST

रिमांड होम या प्रताड़ना केंद्र ?विभा सिंह 

पटना के गायघाट की महिला सुपरिटेंडेंट बंदना गुप्ता पर रिमांड होम से एक भागी महिला ने बंदना गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाया है उसने बेहद खौफनाक आरोप लगाया है उसका कहना है कि रिमांड होम में सुंदर लड़की आती है वह वंदना गुप्ता की चहेती होती है उस लड़कियों के साथ मानसिक शारीरिक प्रताड़ना की जाती है लड़की को रिमांड होम से बाहर भेजा जाता है अगर जब वह बात ना माने तो इंकार करती है तो उसे दवा खिलाकर पागल बनाया जाता है 1
इस वक्त वह में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने पत्र लिखकर गायघाट रिमांड होम मैं जा रही लड़कियों का सप्लाई बिहार सरकार के कई मंत्रियों तक की जाती है इसलिए इस पर सरकार चुप्पी की हुई है जिसके नतीजे अच्छे नहीं आ रहे हैं उन्होंने राजपाल से सीबीआई के जांच के आदेश दिए जाने की मांग भी की थी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड का भी हवाला दिया कि मुजफ्फरपुर वाले कांड में उस वक्त समाज कल्याण मंत्री मंजू सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था 1
पटना हाईकोर्ट ने गायघाट महिला रिमांड होम के मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य समाज कल्याण विभाग और पुलिस को फटकार लगाई है उनके कार्यशैली पर प्रश्न उठाया और कहा है कि साक्ष्य मौजूद मौजूद होने के बाद भी उस महिला के बयान को प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई
जैसा की ज्ञात होगा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कोर्ट ने लिया था संज्ञान
माननीय न्‍यायालय ने इस पूरे मामले को न्‍यूज चैनल और मीडिया में आई रिपोर्ट के आधार पर स्‍वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए। कोट ने यह मामला गायघाट रिमांड होम में रह रही 260 महिलाओं के ऊपर मंडराते खतरे को देखकर लिया है। कोर्ट ने इस याचिका को जुबेनाइल जस्टिस मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं। कमेटी ने इस मामले को मी‍डिया रिपोर्ट के आधार पर गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने बिहार सरकार के समाज कल्‍याण विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लड़की के आरोपों को कैसे बेबुनियाद बताया जा सकता है।

ये थे लड़की के आरोप
सार्वजनिक तौर पर गायघाट रिमांड होम की अमानवीय स्थिति बताई। उसने बताया कि वहां की सुप्री‍टेंडेंट वंदना गुप्‍ता किस तरह से लड़कियों का शारीरिक और मानसिक शोषण कर रही है। ल़ड़की का आरोप है कि वंदना गुप्‍ता नशे का इंजेक्‍शन लगाकर सेक्‍स रैकेट का धंधा करवाती है। साथ ही रिमांड होम में लड़कियों की मौत पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। लड़की का कहना है वहां आई लड़कियों को वंदना गुप्‍ता की बात नहीं मानने पर मारा पीटा और भूखे रखा जाता है।
पटना हाई कोर्ट ने गाय घाट रिमांड होम मामले को स्‍वत: संज्ञान ले लिया है। इतना ही नहीं मामले को स्‍वत: संज्ञान लेते हुए पटना हाई कोर्ट ने पुलिस और समाज कल्‍याण विभाग को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने सबसे पहले बिहार पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाया। कोर्ट ने सवाल पूछते हुए कहा कि इस मामले के सामाने आने के बाद भी पीडि़ता के बयान पर अब तक कोई FIR दर्ज क्‍यों नहीं की गई। वहीं समाज कल्‍याण की ओर से इस पूरे मामले में एक दिन पहले एक सफाई जारी की गई थी। इसे कोर्ट ने लीपापोती समझते हुए समाज कल्‍याण विभाग को भी जमकर लताड़ लगाई। कोर्ट ने कहा कि केवल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पीडि़ता के द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार कैसे मान लिया गया? पटना हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा कहीं भी प्रतीत नहीं होता और न ही इस मामले में पीडि़ता का बयान लिया गया। कोर्ट ने कहा कि समाज कल्‍याण विभाग की ओर से पीडि़ता के स्‍तर पर कोई भी जांच क्‍यों नहीं की गई।
पटना के गायघाट रिमांड होम में जेल सुपरिटेंडेंट वंदना द्वारा लड़कियों से गंदा काम कराने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने संज्ञान ले लिया है. स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाया है. अभी तक मामला दर्ज नहीं करने को लेकर फटकार लगाया है. इधर इस मामले में एक और अब एक ऑडियो सामने आया है. एक निजी अखबार के हाथ लगे ऑडियों में रिमांड होम में रह चुकी एक लड़की ने भी खुलासा किया है कि वहां गंदा काम करवाया जाता है. वंदन गुप्ता की बात नहीं मानने वाली लड़कियों के साथ जबरदस्ती की जाती है. इस ऑडियो में पटना हाईकोर्ट की महिला वकील मीनू कुमारी से लड़की रिमांड होम की सच्चाई बया कर रही है.
ऑडियो में लड़की ने कहा कि सुपरिटेंडेंट वंदना गुप्ता के ऊपर जो आरोप लग रहे हैं, उसमें में भी पूरी सच्चाई है. वो लड़कियों को जबरन दवा खिलवाती है. बाहर से लड़कों को भी बुलवाती है. वहां रह रही लड़कियों को लड़कों के साथ सेक्स करने के लिए कहा जाता था. इस आरोप में पूरा दम है. फोन पर हुई बातचीत के दौरान लड़की ने बताया कि जब वो शुरू में सुपरिटेंडेंट बन कर आई थी तो उसके कुछ दिनों बाद ही रिमांड होम में उसकी गंदी हरकतों की वजह से जमकर बवाल हुआ था. लड़कियों ने काफी तोड़फोड़ मचा दी थी. किसी तरह से उस वक्त उस बवाल को खत्म किया गया था. लड़की वकील से बता रही है कि रिमांड होम की हर बात सही है. लड़कियों को दवा देने और रात में लड़का बुलाने का आरोप बिल्कुल सच है.
महिला वकील के अनुसार लड़की गाय घाट के महिला रिमांड होम में करीब 5 साल रह चुकी है. डेढ़ साल पहले वो वहां से निकली थी. लड़की पटना जिला की ही रहने वाली है. लव मैरिज के चक्कर उसके ऊपर अपने ही मां की हत्या करने का गंभीर आरोप लगा था.
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वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका:-विभा सिंह

Posted: 11 Feb 2022 10:07 PM PST

वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका :-विभा सिंह

भारतीय समाज में नारी को नारायणी और शक्ति स्वरूपा कहा जाता है. उसकी पूजा सदियों से कर रहे हैं लेकिन आज के वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका बदला है आज की परिदृश्य की बात करे तो संघर्ष और आंदोलन के बाद भी आज की महिला ने अपना वह वजूद कायम करने मै असमर्थ है!जिसे शक्ति का पर्याय माना जाता है!आज जमीन नहीं चांद तक छू आई है,सागर ही नहीं चांद की दूरी तय कराई है,आसान नहीं था,आज क्षेत्र कोई भी है सभी जगह महिलाओं ने अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की है आजादी के 75thसाल होने के बाद भी महिलाएं कई ऐसे कार्य किए हैं जिसे गर्व के साथ हमारा सिर ऊपर उठ जाता है l आज की महिलाओं ने मध्ययुगीन रूढ़िवादी श्रृंखलाओ को तोड़कर अपनी स्त्री शक्ति का परिचय दिया है.
आजादी के 75 वे वर्ष होने के बाद भी क्या नारी की सशक्तिकरण के आईने में आज भी स्त्रियों को स्वतंत्र अस्तित्व धुंधला नजर नहीं आता? सफल और आर्थिक रूप से संबल महिला समाज के उदाहरण बन कर सामने आई है? क्या स्वीकारोक्ति आज भी पूरी हुई है?
आज भी सामाजिक स्तर, आर्थिक स्तर हो या राजनीति का स्तर मुद्दा चाहे जो भी हो आज भी समाजीकरण के ढांचे में एक साधारण महिला को स्वयं को एक आवश्यक स्थान दिलाने की जद्दोजहद में कठिन परिस्थितियों के साथ सदैव अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए पूर्व से अधिक परिश्रम करना पड़ता है l
महिलाओं के लिए सरकार की तरफ से एनजीओ चलाए जा रहे हैं कितनी योजनाएं काम कर रही है बिहार में राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया है नित्य नई की कितने मुद्दे उठा ले जाते हैं लेकिन क्या आज महिलाएं को सफल बनाने के सभी कार्यरत योजना सफल हो रही है? जैसे बालिका साक्षरता प्रौढ़ महिला साक्षरता आदि कहां तक सफल हुआ है या यह विचारणीय प्रश्न है एक आंकड़े के अनुसार पहले की अपेक्षा महिलाओं में साक्षरता की दरें में वृद्धि हुई है?64.84% महिलाएं साक्षर हुई है. लेकिन वास्तविक स्थिति इतना स्पष्ट है?
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शिक्षा पर चिंता बताते हुए कहा था कि समाज में सर्वागीण विकास के लिए महिलाओं के साथ शिक्षा का बढ़ावा देना आवश्यक है और इस पर विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता है लेकिन उन्होंने यह बात भी सही कहा कि एक दशक के उपरांत महिलाओं की साक्षरता दर बड़ा है परंतु 6 4.84% महिलाओं में साक्षरता दरें बढ़ने के बावजूद भी सार्थक महिला और पुरुषों में काफी अंतर है ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो साक्षरता दर में अंतर और भी ज्यादा है महिला एवं पूर्व बाल विकास राज्य मंत्री केंद्रीय श्रीमती रेणुका चौधरी ने भी चिंता जताई थी,श्रीमती रेणुका चौधरी ने महिलाओं के अधिकारों के लिए आप अपने वक्तव्य में कहा है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित करने का आग्रह किया इस पर ठोस कार्रवाई करने को कहा लेकिन ठोस कार्रवाई करेगा कौन?
महिला उत्पीड़न रोकने के लिए सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के साथ महिला शोषण से निजात दिलाने के लिए जाने कितने अधिनियम बनाए गए हैं जिसमें प्रमुखता से बाल विवाह निरोध अधिनियम उन्नीस सौ 54 हिंदू विवाह अधिनियम 1955 बाल मजदूर अधिनियम 1981 दहेज निषेध अधिनियम 1961 महिलाओं की अश्लीलता प्रस्तुतीकरण निवारण अधिनियम 1986 घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 जो 26 अक्टूबर 2006 दिन बृहस्पतिवार से प्रभावी हुआ आदि कितने अधिनियम लागू होने के बावजूद महिलाओं के उत्पीड़न में कभी ना होकर प्रतिदिन हिंसात्मक रूप में सकारात्मक रूप सामने आती है?इसका प्रमुख कारण है सभी अधिनियमओ के सम्यक ढंग से क्रियान्वयन ना होना और आम लोगों द्वारा कानून की मर्यादाओं का पालन अच्छे ढंग से ना किया जाना,साथ ही किसी अधिनियम के निर्देश पर करवाई एवं ईमानदारी पूर्वक पालन ना होना हालांकि पहले की अपेक्षा महिलाएं जागरूक हुई है लेकिन उनको अपने अधिकारों की प्रतिबद्धता का समय आसान नहीं है l वही नियम तोड़ते नजर आते हैं जिन्होंने नियमावली में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैंl
कानून बाल विवाह अपराध है लेकिन आज भी देश व राज्य के प्रत्येक हिस्से में लड़कियों को छोटी उम्र में वैवाहिक बंधन में बांधे नहीं जाते माना कि कानून महिलाओं का संरक्षण देती है लेकिन महिलाओं को संरक्षण का लाभ कितने को मिल पाता है?
राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष गिरिराज व्यास कहती है कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं की अपने हक के लिए लड़ना होगा लेकिन अपने हक के लिए लड़ाई लड़ेगा कौन पारिवारिक संस्कारगत या व्यवसायिक संस्थागत शिक्षा ?
नित्य नई सफलता की ऊंचाई पर पहुंचे समाज में आज भी दहेज हत्या व कन्या भ्रूण हत्या आम हो गई है 31 मार्च 2005 तक 303 मामले भ्रूण हत्या को सामने आए थे यह सिर्फ आंखें भर है हकीकत के घर में ना जाने कितनी मासूम ने दम तोड़ तोड़ती है महिला जनसंख्या 2001 तक पुरुष का 43,155,964 और महिला 39,724,832 है आंकड़े के अनुसार एक महिला चाय कितनी ऊंचाइयों को छुए लेकिन महिला होने का टिस उसको हमेशा खाता है.
अतः स्पष्ट है कि स्त्री और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक है नारी सशक्तिकरण के नारे और नियमावली से कहीं ज्यादा आवश्यक है जमीनी स्तर पर महिलाओं को जागरूक करने का प्रयास किया जाना जब सामाजिक विकलांगता ओं का पंगु बना रही सोच में अगर परिवर्तन हो जाए तो नारी सशक्तिकरण के मार्ग स्वयं खुलते नजर आएंगे क्योंकि महिला उत्पीड़न रोकने की बात करने वाले लोग ही एक बेबस महिला को रबड़ स्टैंप बनाकर उसका उपयोग कर रहे कर रहे हैं आज पुरुष को जन्म देने वाली जननी न गर्भ में सुरक्षित है ना संसार में समस्याओं के दलदल में धकेलने वाला पुरुष और महिला,महिलाओं के सशक्तिकरण के नारा लगा रहे है जबकि प्रत्येक समाज में महिलाओं की समस्या हर जगह हर परिस्थितियों के अनुसार सामने आता है आज विकास की गतिशील समाज में आज भी ग्रामीण क्षेत्र में खुले मैदान में शौच करने के लिए मजबूर है कितनी कम उम्र की लड़कियां जी ने लिखने पढ़ने खेलने कूदने की उम्र में परिवार की जिम्मेदारी निभा रही है l पिछले वर्षों में बलात्कार छेड़छाड़ पर अश्लीलता प्रदर्शन यौन शोषण अपराध दहेज हत्या के मामले में वृद्धि हुई है सभी योजनाओं को सफल तभी बनाया जा सकता है l महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा की वारदातों के मूल्यांकन करने की जरूरत है कारक तत्व नेक है और इन के विविध आयाम भी सभी अधिनियम को अवहेलना करने वाले लोग चाहे किसी समाज का हो उसको सख्ती से पालन कर कर ले कर के उस व्यक्ति को सख्त सजा देने के प्रावधान होना आवश्यक है

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जीत मे भी, हार मे भी

Posted: 11 Feb 2022 10:00 PM PST

जीत मे भी, हार मे भी

अविचल चलता रहूँगा,
विश्वास का संबल लिये
मंजिलें गढता रहूँगा।
था नही कुछ भी हमारा
जो यहाँ पर खो दिया हो,
पा सकूँ सारा जहां
इस आस मे बढता रहूँगा।
हैं कुछ बाधायें यहाँ
और पग में कंकर चुभ रहे,
हौसलों की डोर थामे
नित सृजन करता रहूंगा।
कौन जीता कौन हारा
किसका लक्ष्य क्या बना?
क्यों करूँ चिन्ता विगत की,
आगत पर ही ध्यान धरूँगा।
कर्म मै खुद ही करूँ और 
फिर प्रभु से हो कामना,
मार्ग मेरा प्रशस्त करें
मैं पर्वतो तक बढ चलूँगा।
हूँ बहुत कृतज्ञ जग मे
दोस्तों के साथ का,
हर मुकाम उनको मिले
आराधना करता रहूंगा।
था नही जिस योग्य
उससे बढकर मुझको मिला,
है कृपा तुम्हारी प्रभु
नित गुणगान करता रहूंगा।

अ कीर्ति वर्द्धन
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