प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- 69000 शिक्षक भर्ती : अतिरिक्त 1 अंक देने के आदेश का अनुपालन न करने पर हाइकोर्ट ने पूछा सवाल
- छात्रों को लुभाने के लिए गलत जानकारी देने पर विश्वविद्यालयों पर लगेगा प्रतिबंध, दाखिला विज्ञापन और वेबसाइट पर NIRF रैंकिंग के गलत इस्तेमाल का मामला
- दो-तीन माह में 100 शैक्षणिक टीवी चैनल शुरू करने की तैयारी, आनलाइन व डिजिटल शिक्षा को तेजी से विस्तार देने में जुटा शिक्षा मंत्रालय
- IGNOU : दिसंबर टर्म एंड परीक्षा चार मार्च से, डेटशीट जल्द होगी जारी
- देशभर के बच्चों के लिए समान पाठ्यक्रम लागू करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इन्कार
- OBC अभ्यर्थियों की नियुक्ति को चुनौती, 6800 रिक्त पदों पर नियुक्ति के शासनादेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
- वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2022-23 से संबंधित उन्नमुखीकरण के संबंध में 14 फरवरी को जिला समन्वयकों (प्रशिक्षण) की ऑनलाइन बैठक
- लेटलतीफी : आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों 04 माह से और रसोइए भी 8 महीने से कर रहे हैं मानदेय का इंतजार
| 69000 शिक्षक भर्ती : अतिरिक्त 1 अंक देने के आदेश का अनुपालन न करने पर हाइकोर्ट ने पूछा सवाल Posted: 12 Feb 2022 05:31 PM PST 69000 शिक्षक भर्ती : अतिरिक्त 1 अंक देने के आदेश का अनुपालन न करने पर हाइकोर्ट ने पूछा सवाल प्रयागराज: 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से पूछा है कि जब विशेष याचिका पर दो जजों की खंडपीठ ने आदेश पारित कर दिया है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए सात मार्च 2022 की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने उपेंद्र कुमार दयाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट जब अपने आदेश में यह साफ कह चुकी है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल याचियों के एक अंक बढ़ा दिए जाएं। इसके बावजूद अंक नहीं बढ़ाए गए। अवमानना याचिका में याची का तर्क था कि वह अनुसूचित वर्ग का अभ्यर्थी है और हाईकोर्ट की ओर से पारित विशेष याचिका में वह दूसरे नंबर का याची था। उसने हाईकोर्ट के आदेश को परीक्षा नियामक प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया और एक अंक बढ़ाने जाने की मांग की। लेकिन परीक्षा नियामक ने उसके परीक्षा परिणाम में एक अंक नहीं बढ़ाया। याची के अधिवक्ता राहुल कुमार मिश्रा ने तर्क दिया कि उसने भर्ती परीक्षा में 89 अंक हासिल किए हैं। एक अंक मिलने के बाद वह चयनित सूची में शामिल हो जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से जानकारी मांगी है।भर्ती परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी होने के बाद दाखिल हुई थी विशेष याचिकासहायक अध्यापक 69 हजार भर्ती परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी होने के बाद परीक्षा में शामिल सात सौ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की इलाहाबाद और लखनऊ दोनों खंडपीठों में विशेष याचिका दाखिल की थी। अभ्यर्थियों ने पांच सवालों को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि भर्ती परीक्षा नियामक ने पांच सवाल गलत पूछे हैं और उत्तरकुंजी भी गलत जारी की है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केवल एक सवाल को गलत पाया और परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों केे एक अंक बढ़ाने का आदेश दिया। लेकिन, परीक्षा नियामक ने अभी तक अभ्यर्थियों के अंक नहीं बढ़ाए हैं। अभ्यर्थियों की ओर से इस मामले में लगातार प्रदर्शन भी किया जा रहा है। विस चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू हो गई तो अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। |
| Posted: 12 Feb 2022 03:54 AM PST छात्रों को लुभाने के लिए गलत जानकारी देने पर विश्वविद्यालयों पर लगेगा प्रतिबंध दाखिला विज्ञापन और वेबसाइट पर NIRF रैंकिंग के गलत इस्तेमाल का मामला दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी है कि यदि दाखिले के विज्ञापन में राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) का गलत इस्तेमाल किया तो उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। विश्वविद्यालयों को तत्काल प्रभाव से वेबसाइट से गलत जानकारी हटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सभी संस्थानों से रैंकिंग का गलत इस्तेमाल न करने का शपथपत्र भी मांगा गया है। दरअसल कुछ विश्वविद्यालय कथित रूप से एनआईआरएफ रैंकिंग के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं। कुछ विश्वविद्यालयों ने दाखिला विज्ञापन से लेकर वेबसाइट तक, रैंकिंग में बेहतरीन प्रदर्शन का दावा और फर्जी वर्ग तक बना लिया है। इसमें निजी विश्वविद्यालयों का नाम सबसे आगे है। कुछ विश्वविद्यालय कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। मंत्रालय को फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद एनआईआरएफ विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा गया है। इसमें उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे एनआईआरएफ रैंकिंग का गलत प्रयोग न करें। रैंकिंग में शामिल नहीं ये वर्ग एनआईआरएफ रैंकिंग में राज्य, जिला स्तर पर किसी संस्थान का आकलन नहीं होता है। इसके अलावा रैंकिंग में निजी वर्ग (निजी विश्वविद्यालय), सरकारी संस्थान, स्व वित्तपोषित और अलाभकारी जैसा कोई वर्ग ही नहीं है। जबकि कई विश्वविद्यालय दाखिला विज्ञापन और वेबसाइट में छात्रों को लुभाने के लिए राज्य और जिले में नंबर एक से लेकर निजी वर्ग में खुद को सर्वश्रेष्ठ की रैंकिंग में दिखा रहे हैं। |
| Posted: 11 Feb 2022 07:10 PM PST दो-तीन माह में 100 शैक्षणिक टीवी चैनल शुरू करने की तैयारी, आनलाइन व डिजिटल शिक्षा को तेजी से विस्तार देने में जुटा शिक्षा मंत्रालय 🔵 बजट में किया है 200 नए शैक्षणिक चैनल शुरू करने का एलान 🔵 फिलहाल वन क्लास वन चैनल प्रोग्राम के तहत चल रहे 12 चैनल नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में आनलाइन और डिजिटल शिक्षा को भले ही मजबूरी में अपनाया गया था, लेकिन अब यह बच्चों को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने का एक अहम जरिया बन गया है। यही वजह है कि सरकार इस दिशा में तेजी से बढ़ने को तत्पर है। खास बात यह है कि बजट में सरकार ने 200 नए शैक्षणिक टीवी चैनलों को शुरू करने की जो घोषणा की है, उस पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। इसके तहत अगले दो-तीन महीनों में करीब सौ टीवी चैनलों को शुरू करने की तैयारी है। इनमें कई ऐसे चैनलों को भी शुरू करने की योजना है, जिनके जरिये सिर्फ जिन चैनलों को शुरू करने की योजना है उनमें करीब सौ चैनल अकेले स्कूली शिक्षा के लिए होंगे इसी तरह उच्च शिक्षा के लिए भी करीब 50 चैनल शुरू होंगे, जबकि व्यवसायिक शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के लिए भी कुछ समर्पित चैनलों को शुरू करने की योजना है। व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा समय में पीएम ईविद्या योजना के तहत 12 टीवी चैनल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें पहली से 12वीं तक के लिए एक-एक समर्पित चैनल है। वैसे तो इन्हें काफी पहले ही शुरू होना था, लेकिन विषय वस्तु (कंटेंट) तैयार होने में देरी के चलते काफी देरी से शुरू किया गया था। इस विषय वस्तु को दूसरी भाषओं में अनुवाद कर तेजी से लाने की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के लिए डिजिटल शिक्षा एक उपयोगी पहल है। वैसे भी मौजूदा समय में ज्यादातर स्कूलों में गणित और विज्ञान सहित दूसरे वैकल्पिक विषयों के शिक्षक नहीं हैं उनमें छात्रों को देश के बेहतरीन शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिलेगा। इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को मिलेगा जो अभी बेहतर स्कूलों की पहुंच से दूर हैं। वे घर बैठे टीवी चैनलों के माध्यम से पढ़ाई जारी रख सकेंगे। इंटरनेट आदि की भी जरूरत नहीं रहेगी। |
| IGNOU : दिसंबर टर्म एंड परीक्षा चार मार्च से, डेटशीट जल्द होगी जारी Posted: 11 Feb 2022 07:02 PM PST IGNOU : दिसंबर टर्म एंड परीक्षा चार मार्च से, डेटशीट जल्द होगी जारी नई दिल्ली। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) ने कोरोना की तीसरी लहर के चलते स्थगित दिसंबर टर्म एंड परीक्षा 2021 की घोषणा कर दी है। इग्नू की दिसंबर टर्म एंड परीक्षा- 2021 अब चार मार्च से आयोजित की जाएगी। ऑफलाइन यानी परीक्षा केंद्रों में यह परीक्षा आयोजित होगी। इसके लिए देश और विदेश में भी परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। इग्नू की वेबसाइट पर जल्द ही विस्तृत जानकारी अपलोड कर दी जाएगी। इग्नू के रजिस्ट्रार डॉ. वीबी नेगी ने शुक्रवार को 4 मार्च से दिसंबर टर्म एंड परीक्षा 2021 आयोजित करने की घोषणा की है। इससे पहले 20 जनवरी से परीक्षा होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के चलते 6 जनवरी को स्थगित कर दिया गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा की डेट फाइनल होने से 15 दिन पहले छात्रों को सूचना जारी करने की बात कही थी। उसी के तहत शुक्रवार को यह घोषणा की गई है। ब्यूरो |
| देशभर के बच्चों के लिए समान पाठ्यक्रम लागू करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इन्कार Posted: 11 Feb 2022 06:54 PM PST देशभर के बच्चों के लिए समान पाठ्यक्रम लागू करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इन्कार नई दिल्ली : शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के कुछ प्रविधानों को मनमाना और अतार्किक बताने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इन्कार कर दिया। याचिका में देशभर के बच्चों के लिए समान पाठ्यक्रम लागू करने की मांग भी की गई है। जस्टिस एल. नागेश्वर राव व जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने याची के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से कहा, 'आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते ? आप संशोधन के 12 साल बाद आए हैं।' याचिका में कहा था कि आरटीई की धारा 1(4) व 1(5) संविधान की व्याख्या में सबसे बड़ी बाधा हैं और मातृभाषा में समान पाठ्यक्रम का न होना अज्ञानता को बढ़ावा देता है। याचिका के मुताबिक, समान शिक्षा प्रणाली लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व है, लेकिन वह इस आवश्यक दायित्व को निभाने में विफल रही है क्योंकि उसने पहले से उपलब्ध 2005 के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) को अपना लिया है। |
| Posted: 11 Feb 2022 05:45 PM PST OBC अभ्यर्थियों की नियुक्ति को चुनौती, 6800 रिक्त पदों पर नियुक्ति के शासनादेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी 69000 भर्ती में 6800 पदों पर ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर जवाब तलब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त रह गए 6800 पदों पर ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति करने के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को पूरे मामले की जानकारी मुहैया कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने प्रतीक मिश्र की याचिका पर अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है। अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि राज्य सरकार ने 16 मई 2020 को 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन के संज्ञान में आया कि आरक्षण लागू करने में गलती हुई है और ओबीसी के 6800 पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया है। इस पर शासन ने निर्णय लिया कि जिन सामान्य अभ्यर्थियों की ओबीसी की सीटों पर नियुक्ति कर ली गई है, उन्हें निकाला नहीं जाएगा बल्कि उनकी जगह रिक्त पड़े पदों पर 6800 ओबीसी अभ्यर्थियों की अलग से नियुक्ति कर दी जाएगी। इसे लेकर पांच जनवरी 2022 को शासनादेश भी जारी कर दिया गया। याचिका में इस शासनादेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि विज्ञापन जारी किए बगैर नियुक्ति नहीं की जा सकती क्योंकि याची भी अर्ह अभ्यर्थी हैं और सहायक अध्यापक बनने की योग्यता रखते हैं। सरकार रिक्त पदों को विज्ञापन जारी किए बगैर और नियुक्ति प्रक्रिया अपनाए बिना नहीं भर सकती। न ही इन रिक्त पदों को पुरानी भर्ती से जोड़ा जा सकता है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे मामले की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। |
| Posted: 10 Feb 2022 06:02 PM PST |
| लेटलतीफी : आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों 04 माह से और रसोइए भी 8 महीने से कर रहे हैं मानदेय का इंतजार Posted: 10 Feb 2022 04:53 PM PST लेटलतीफी : आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों 04 माह से और रसोइए भी 8 महीने से कर रहे हैं मानदेय का इंतजार यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चार महीने से मानदेय नहीं मिला है। उधर, रसोइए भी आठ महीने से मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। लखनऊ। चुनावी मौसम में सरकार चलाने वाली भाजपा समेत सभी राजनीतिक दल कर्मचारियों के हित में तमाम घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के 3.50 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को पिछले चार महीने से और इतनी ही संख्या में काम करने वाले रसोइओं को 8 महीने से मानदेय न मिलने के मुद्दे पर कोई नहीं बोल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अक्तूबर के बाद से अब तक मानदेय नहीं मिला है। ऐसे में आंगनाबाड़ी कार्यकर्ताओं का छठ, नया साल मकर संक्रांति, वसंत पंचमी जैसे त्योहार बिना मानदेय के ही बीत गए। इस वजह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में सरकार के खिलाफ नाराजगी व्याप्त है। बता दें कि बाल विकास सेवा एंव पुष्टाहार विभाग में तैनात करीब 3.50 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के अलावा करीब 4000 मुख्य सेविकाओं और 897 परियोजना अधिकारियों व 73 जिला कार्यक्रम अधिकारियों (डीपीओ) को भी अक्तूबर महीने से वेतन नहीं मिले हैं। शासन के अधिकारियों की इस लापरवाही के चलते विभाग के कर्मचारियों में हाहाकार मचा है। इस संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संगठन ने शासन और सरकार के स्तर पर कई बार गुहार लगाया है, लेकिन न तो सरकार ने इनकी आवाज सुनी और न ही मंत्री ने। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में विभागीय मंत्री को मानदेय भुगतान के लिए फाइल करीब दो महीने पहले ही भेजी गई थी, लेकिन अब तक मानदेय देने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। उधर, रसोइए भी आठ महीने से मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। |
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