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Sunday, February 27, 2022

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New National Education Policy : बच्चों के मन से स्कूल जाने का डर होगा दूर, स्कूल जाने से पहले बच्चे सीखेंगे खेलना, उठना-बैठना

Posted: 27 Feb 2022 10:52 AM PST

New National Education Policy : बच्चों के मन से स्कूल जाने का डर होगा दूर, स्कूल जाने से पहले बच्चे सीखेंगे खेलना, उठना-बैठना


इसके तहत पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले प्रत्येक बच्चे को अब शुरुआत में तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें दूसरे बच्चों के साथ खेलने और उठने-बैठने आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उनमें सीखने की प्रवृत्ति को विकसित किया जाएगा।


नई दिल्ली,  New National Education Policy: स्कूली शिक्षा के नए ढांचे में अब बच्चों को स्कूल में दाखिला देने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें स्कूली माहौल के लिहाज से तैयार किया जाएगा। इस पहल को सरकार ने विद्या प्रवेश नाम दिया है। इसके तहत पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले प्रत्येक बच्चे को अब शुरुआत में तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें दूसरे बच्चों के साथ खेलने और उठने-बैठने आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उनमें सीखने की प्रवृत्ति को विकसित किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल नए शैक्षणिक सत्र से सभी स्कूलों में लागू होगी।


एनसीईआरटी की ओर से इसको लेकर एक माड्यूल भी विकसित किया गया है। इसमें शिक्षकों और अभिभावकों के लिए कुछ जरूरी टिप्स भी दिए गए हैं। सभी राज्यों को माड्यूल भेज दिया गया है। साथ ही इसे प्राथमिकता से लागू करने का सुझाव दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे स्कूलों के प्रति पैदा होने वाली अरुचि से बच्चों को बचाया जा सकेगा। देश में मौजूदा समय में बड़ी संख्या में बच्चे शुरुआत में स्कूल जाने से डरते हैं। इसके चलते वे जल्द स्कूल छोड़ भी देते हैं। मंत्रालय का मानना है कि यदि बच्चों में शुरू से ही स्कूलों और पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा कर दी जाए तो वे काफी निपुण हो जाते हैं।


गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा को 10 प्लस 2 के बंधन से निकालकर चार श्रेणियों में बांट दिया गया है। इसमें पहली श्रेणी फाउंडेशन, दूसरी श्रेणी प्राइमरी, तीसरी श्रेणी मिडिल और चौथी श्रेणी सेकेंडरी है। फिलहाल विद्या प्रवेश की जो पहल है, वह फाउंडेशन स्तर पर की गई है। इस श्रेणी में तीन से नौ वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा दी जानी है। इनमें शुरू के तीन साल प्री-प्राइमरी के होते हैं, जिसकी शिक्षा आंगनबाड़ी और बालवाटिका के जरिये दी जाएगी। बाकी के तीन साल की पढ़ाई स्कूलों के माध्यम से होगी।

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