प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- DigiLocker पर उपलब्ध डिग्री और अन्य दस्तावेज मानें जाएं वैध, UGC ने राज्यों और विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश
- ऑफलाइन होंगे Semester Exam, UGC ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को दी इजाजत
- उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार
- चुनाव के दौरान मतदान कर्मियों की इम्युनिटी बढ़ाएगी दी जा रही आयुरक्षा किट, किट में यह होगी सामग्री और ऐसे करना होगा प्रयोग
- राजकीय कॉलेजों में तैनात प्रवक्ता और एलटी ग्रेड शिक्षकों के प्रोन्नति की उम्मीद जल्द पूरी होने के आसार
- PFMS के माध्यम से अब रसोइयों को होगा मानदेय भुगतान
- यूपी : कल से कक्षा 9 से ऊपर के स्कूल व कॉलेज खोलने की तैयारी, इन कोविड प्रोटोकाल्स का पालन करना होगा जरूरी
| Posted: 05 Feb 2022 09:06 PM PST DigiLocker पर उपलब्ध डिग्री और अन्य दस्तावेज मानें जाएं वैध, UGC ने राज्यों और विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश शैक्षणिक दस्तावेज के साथ होने वाली छेड़छाड़ और उनकी जांच पड़ताल से बचने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों को डिजी लाकर से जुड़ने का न्योता दिया है। नई दिल्ली । शैक्षणिक दस्तावेज के साथ होने वाली छेड़छाड़ और उनकी जांच पड़ताल से बचने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों को डिजी लाकर से जुड़ने का न्योता दिया है। साथ ही इस पर उपलब्ध डिग्री, मार्कशीट सहित दूसरे दस्तावेज को वैध मानने को भी कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक डिजी लाकर पर मौजूदा समय में 40 करोड़ से ज्यादा शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध हैं जो उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा दोनों से जुड़े हैं। इसलिए आ रही बाधा यूजीसी की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि अभी भी बड़ी संख्या में संस्थान डिजी लाकर नेशनल अकेडमिक डिपाजिटरी (एनएडी) से नहीं जुड़े हैं, जबकि इसकी स्थापना ही शैक्षणिक संस्थानों के लिए की गई है। कुछ संस्थानों में डिजी लाकर की ओर से मुहैया कराए जाने वाले दस्तावेज की प्रमाणिकता पर भी संहेद जताया जा रहा है और उनकी जांच पड़ताल के लिए पुरानी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। डिजिटलीकरण पर जोर इसमें ज्यादा समय तो लगता ही है सरकार का वह उद्देश्य भी प्रभावित होती है जिसमें डिजिटलीकरण और आनलाइन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य के लिए सरकार ने हाल ही में पेश बजट में देश में एक डिजिटल यूनिवर्सिटी भी खोलने का एलान किया है। डिजी लाकर पर मौजूद दस्तावेज पूरी तरह से वैध देशभर के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के निदेशकों सहित सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूली और उच्च शिक्षा सचिवों को लिखे पत्र में यूजीसी ने कहा है कि डिजी लाकर पर मौजूद सभी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह से वैध हैं, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की ओर से ही सीधे एनएडी पर ये अपलोड किए जाते हैं। ऐसे में डिजी लाकर खाते में उपलब्ध दस्तावेज को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करें। क्या है डिजी लाकर और कैसे करता है काम डिजी लाकर केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म है, जहां शैक्षणिक संस्थानों की ओर से अपलोड किए गए शैक्षणिक दस्तावेज को छात्र कभी भी इलेक्ट्रानिक रूप से डिजी लाकर पर अपना खाता खोलकर हासिल कर सकता है। छात्र कहीं से भी अपने इस डिजी लाकर खाते को खोलकर अपने दस्तावेज की प्रमाणित प्रति हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोई शुल्क भी नहीं देना होता है। |
| ऑफलाइन होंगे Semester Exam, UGC ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को दी इजाजत Posted: 05 Feb 2022 08:52 PM PST ऑफलाइन होंगे Semester Exam, UGC ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को दी इजाजत UGC Permission For Semester Exam: UGC के मुताबिक विश्वविद्यालयों से अनुरोध है कि वे ऑफलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने की तैयारी के लिए उचित तैयारियां करें और इस संबंध में कदम उठाएं. Semester Exams Will be Offiline: UGC ने देशभर के विश्वविद्यालयों में ऑफलाइन सेमेस्टर एग्जाम आयोजित करने की इजाजत दे दी है. यूजीसी (UGC) ने कहा है कि सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय (College and Universities) में COVID प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए काम कर रहे हैं. ऐसे में अपने (होम सेंटर) घरेलू केंद्रों पर शारीरिक दूरी (Physical Distancing) बनाए रखते हुए जल्द आयोजित होने वाले सेमेस्टर के लिए ऑफलाइन परीक्षाएं (Offline Exam) ली जा सकती हैं. यूजीसी (UGC) ने ये भी कहा है कि सभी विश्वविद्यालयों को सलाह दी जाती है कि आने वाले सेमेस्टर के लिए सभी मौजूदा और भविष्य की सेमेस्टर परीक्षाओं को अपने होम सेंटरों में COVID 19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑफलाइन मोड में आयोजित करें. विश्वविद्यालयों से अनुरोध है कि वे ऑफलाइन मोड में परीक्षा आयोजित करने की तैयारी के लिए उचित तैयारियां करें और इस संबंध में कदम उठाएं. दरअसल सेमेस्टर एग्जाम को लेकर विश्वविद्यालय असमंजस की स्थिति में थे. यूजीसी की तरफ से जारी दिशा-निर्देश के बाद विश्वविद्यालयों को अपने होम सेंटर्स पर एग्जाम आयोजित करने में सहूलियत होगी. देश में लगातार घट रहे कोरोना के मामलों के बाद यूजीसी का ये फैसला विश्वविद्यालयों के लिए राहत भरा हो सकता है. |
| Posted: 05 Feb 2022 08:40 PM PST उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार यूजीसी अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ ऐसा डिजाइन कर रहा है जिसमें डिग्री के साथ साथ कौशल का भी प्रशिक्षण मिलेगा। यह प्रशिक्षण उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा जिसमें युवा पढ़ाई कर रहे हैं। नई दिल्ली । हर-पढ़े लिखे और युवा को रोजगार मुहैया कराने की राह थोड़ी आसान हो सकती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी) अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ इस तरह डिजाइन कर रहा है, जिनमें डिग्री के साथ-साथ कौशल का प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा, जिसमें छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट जैसे सभी स्तर के कोर्स शामिल हैं। सभी कोर्सों की पढ़ाई होगी शुरू माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र यानी वर्ष 2022-23 से इन मानकों के अनुरूप स्नातक से लेकर परास्नातक स्तर के सभी कोर्सों की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। यूजीसी ने इस बीच नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) में बदलाव से जुड़ा एक ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार किया है। प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय यही नहीं यूजीसी ने प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय किए गए हैं। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 13 फरवरी तक सुझाव मांगे हैं। कोर्सो में बदलाव और उसे 21वीं सदी की जरूरत को देखते हुए रोजगारपरक बनाने की सिफारिश नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई थी जिसे अब अमल में लाया जा रहा है। सभी कोर्स एक क्रेडिट से लिंक माना जा रहा है कि इन कोर्सों को पढ़कर निकलने वाले छात्रों को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनके पास पढ़ाई पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र में जाने का विकल्प मौजूद रहे। जिन अहम बदलावों को ड्राफ्ट में शामिल किया है, उनमें सभी कोर्सों को एक क्रेडिट से लिंक किया गया है। कभी भी पढ़ाई शुरू करने का मिलेगा मौका जिसमें अंडर-ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कोर्स का क्रेडिट स्कोर 40 होगा जबकि अंडर-ग्रेजुएट डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 80 होगा। बैचलर डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 120 होगा। इस क्रेडिट स्कोर से छात्रों को बीच में कभी भी पढ़ाई छोड़ने और फिर से शुरू करने का मौका मिलेगा। सीधे पीएचडी में मिलेगा दाखिला इस व्यवस्था में क्रेडिट स्कोर एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) में जमा रहेंगे। जिन छात्रों की शुरुआत से ही शोध के क्षेत्र में रुचि है, उनके लिए चार साल का बैचलर डिग्री (रिसर्च) नाम से अलग कोर्स होगा। इसके बाद वे सीधे पीएचडी में दाखिल ले सकेंगे। सात सीजीपीए लाना जरूरी हालांकि पीएचडी में दाखिला के लिए सामान्य बैचलर डिग्री कोर्स के तीसरे वर्ष में कम से कम सात सीजीपीए (क्यूमूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज) लाना जरूरी होगा। इन सभी कोर्सो में उस क्षेत्र से जुड़ी जरूरत के मुताबिक कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा जो प्रत्येक सेमेस्टर में न्यूनतम 15 घंटे का होगा। कोर्सों को कौशल के साथ जोड़ इसके साथ ही प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 30 घंटे की इंटर्नशिप या फिर सोशल एक्टिविटी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। यूजीसी ने उच्च शिक्षा के प्रस्तावित इस नए ड्राफ्ट में उच्च शिक्षा के कोर्सों को कौशल व व्यवसायिक शिक्षा के साथ जोड़ दिया है। अभी सामान्य स्नातक कोर्सों में इस तरह का प्रशिक्षण या इंटर्नशिप शामिल नहीं है। |
| Posted: 05 Feb 2022 07:58 PM PST चुनाव के दौरान मतदान कर्मियों की इम्युनिटी बढ़ाएगी दी जा रही आयुरक्षा किट, किट में यह होगी सामग्री और ऐसे करना होगा प्रयोग कोरोना काल में हो रहे चुनाव में मतदान कर्मियों को आयुष रक्षा किट दी जाएगी। जो मतदान कर्मियों की इम्युनिटी को बढ़ाएगी। इस किट में आयुष काढ़े के साथ च्यवनप्राश, अणु तेल, संशमनी वटी मिलेगी। यह किट सभी मतदान कर्मियों, हेल्थ वर्करों, फ्रंटलाइन वर्करों को देने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी लहर में हुए पंचायत चुनाव में संक्रमण से कई मतदान कर्मियों की जान चली गई थी। बड़ी संख्या में मतदान कर्मी संक्रमित भी हुए थे। इससे सबक लेते हुए विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले मतदानकर्मियों को आयुष रक्षा किट देने का निर्णय लिया गया है। एक किट की कीमत करीब एक हजार रुपये बताई जा रही है। आयुष रक्षा किट में यह होगी सामग्री- 1. च्यवनप्राश 2. आयुष काढा 3. संशमनी बटी 4. अणु तेल चुनाव ड्यूटी करने वाले सभी कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्करों, हेल्थ वर्करों को आयुष विभाग की ओर से आयुष रक्षा इम्युनिटी किट दी जाएगी। इस तरह करें प्रयोग- आयुष रक्षा किट में शामिल च्यवनप्राश को एक चम्मच दिन में एक बार लेना है, जबकि आयुष काढ़ा की तीन ग्राम मात्रा को 50 मिली ग्राम पानी में उबालने के बाद उसे छानकर सेवन करना चाहिए। संशमनी बटी के दो टेबेलेट दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लेना चाहिए। अणु तेल का दो ड्राप नाक में दो बार डालना चाहिए। सभी फ्रंटलाइन वर्कर व चुनाव डयूटी में लगने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को आयुष रक्षा किट प्रदान करने के निर्देश मिले हैं। आयुष रक्षा किट में शामिल आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही कोरोना के उपचार में भी काफी कारगर है। कोरोना के कारण होम आइसोलेशनत्र में रहने वाले मरीजों के लिए भी आयुष रक्षा किट काफी लाभदायक है। |
| Posted: 05 Feb 2022 07:20 PM PST राजकीय कॉलेजों में तैनात प्रवक्ता और एलटी ग्रेड शिक्षकों के प्रोन्नति की उम्मीद जल्द पूरी होने के आसार 🔴 अपर शिक्षा निदेशक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से मांगी आख्या प्रयागराज : सूबे के राजकीय कॉलेजों में तैनात प्रवक्ता और एलटी ग्रेड शिक्षकों के प्रोन्नति की उम्मीद जल्द पूरी होने के आसार है। शासन इस मसले को लेकर गंभीर है। अपर शिक्षा निदेशक राजकीय ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से एलटी ग्रेड और प्रवक्ता शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए गोपनीख आख्या रिपोर्ट के साथ अन्य दस्तावेज एक सप्ताह में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही पूर्व प्रेषित सूची के अतिरिक्त पदोन्नति हेतु संभावित शिक्षिकों की नवीन सूची भी भेजने को कहा है। प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों के एलटी ग्रेड शिक्षक और प्रवक्ता लंबे समय से पदोन्नति की बाट जोह रहे हैं। शासन इन शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है। इस पर निदेशालय की ओर से संबंधित अफसरों को पत्र लिखकर गोपनीय आख्या रिपोर्ट मांगी गई है। |
| PFMS के माध्यम से अब रसोइयों को होगा मानदेय भुगतान Posted: 05 Feb 2022 07:07 PM PST PFMS के माध्यम से अब रसोइयों को होगा मानदेय भुगतान अब मध्यान्ह भोजन योजना में कोई धांधली नहीं चलेगी। इसके लिए केंद्र सरकार एवं मध्याह्न भोजन निदेशालय सभी स्कूलों की जानकारी को पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) पर इंट्री करा रहा है। आने वाले समय में स्कूल एवं रसोइया, विद्यालय शिक्षा समिति के खाते का विवरण ऑनलाइन पीएफएमएस साइट पर नहीं इंट्री कराया जाता है तो उनको मिलने वाली निधि के साथ ही रसोइयों के मानदेय भुगतान पर भी संकट खड़ा हो सकता है। जनपदो में रसोइयों का डाटा फीड करने की कवायद शुरू हो गई है। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों को अब तक कोषागार के माध्यम से मानदेय भुगतान होता था। अब पीएफएमएस के माध्यम से सीधे भुगतान करने की कार्रवाई की जाएगी। इस दिशा में विभाग ने रसोइयों का डाटा फीड कराने की कवायद में जुट गया है। डाटा फीडिंग में स्कूल का नाम, पता, विद्यालय शिक्षा समिति के बैंक खाता का नंबर, आइएफसी कोड, रसोइया का नाम, पता, आधार कार्ड नंबर, बैंक खाते में शेष राशि, व्यय की गई राशि सहित पूरा विवरण अंकित होगा। इसकी इंट्री होते ही विभाग के अधिकारी अपने कार्यालय से बैठे-बैठे किसी भी स्कूल में एमडीएम की स्थित का पता ऑनलाइन कर सकते है। रसोइयों के वेतन का भी भुगतान इसी माध्यम से होना है। ऐसा होने से एमडीएम योजना में पारदर्शिता आएगी। कोई भी गलती करेगा तो साइट पर अधिकारी देख सकेंगे। साथ ही जहां खाद्यान्न की कमी होगी या राशि की कमी होगी, वहां स्थिति देख कर अविलंब भुगतान कराया जाएगा। |
| Posted: 05 Feb 2022 07:14 PM PST यूपी : कल से कक्षा 9 से ऊपर के स्कूल व कॉलेज खोलने की तैयारी, इन कोविड प्रोटोकाल्स का पालन करना होगा जरूरी ✍️ यह भी देखें : स्कूल खोलने का शासन का आदेश लखनऊ, वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर के कम होते प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी स्कूल खोले जाएंगे। प्रदेश में सात फरवरी से कोरोना गाइडलाइन्स के तहत सभी स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं के शिक्षण का कार्य प्रारंभ होगा। प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर के प्रभावी होने के कारण चार जनवरी से स्कूलों में शिक्षण कार्य बंद कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के कम होते प्रभाव को देखते हुए सात फरवरी से स्कूल खोलने का फैसला किया है। अब स्कूल में कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं को बुलाकर शिक्षण कार्य प्रारंभ किया जाएगा। स्कूलों को शीतकालीन अवकाश के बाद कोविड-19 के बढ़ते प्रसार के कारण बन्द कर दिया गया था। अब स्कूल केन्द्र सरकार की कोरोना गाइडलाइन्स के तहत खोले जाएंगे। जिसमें स्कूल परिसर को साफ रखना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क पहनना फेस कवर करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही स्टाफ व शिक्षकों को वैक्सीनेशन की दोनों डोज की भी अनिवार्यता भी रखी गई हैं। प्रदेश के प्रदेश के अपर प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी के अनुसार प्रदेश में सात तारीख से स्कूल खोले जाएंगे। जिसमें कोविड-19 का पूरी तरीके से पालन किया जाएगा। प्रदेश में स्कूल 9वीं से 12वीं क्लास तक खुलेंगे। स्कूल खोलने को लेकर शासन की ओर से विस्तृता आदेश जारी किया जायेगा। प्रदेश में सभी जगह पर चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाएंगे। केन्द् सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक पूरे स्कूल परिसर को सैनिटाइज करके रखना होगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। स्कूल में भीड़ जुटने वाले कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। सभी का मास्क पहनना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं बोर्डिंग स्कूलों में दो बेड्स के बीच उचित दूरी रखनी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में कोरोना नियंत्रण के बारे में कहा था कि कोरोना की तीसरी लहर को तरीके से कंट्रोल कर लिया गया है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी पड़ते ही प्रदेश सरकार ने सोमवार से स्कूल-कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। इसका आदेश शनिवार देर रात जारी हो गया। आदेश के अनुसार शिक्षण संस्थानों में फिलहाल नौ से 12 और डिग्री के विद्यार्थियों को ही बुलाया जाएगा। कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखने की शर्त बनी रहेगी। ऑनलाइन कक्षाएं भी चलेंगी। 🔴 स्कूलों के लिए गाइडलाइन 1. स्कूल परिसर में सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य 2. स्कूल परिसर में सभी लोगों को आवश्यक रूप से मास्क पहनना होगा। 3. स्कूलों को विकल्प के तौर पर ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करानी होगी। 4. यदि स्कूल में किसी को भी जुकाम, बुखार आदि के लक्षण दिखते हैं तो उसे चिकित्सीय सलाह के साथ उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 5. कोई भी आयोजन तब ही किया जाए जब उसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा सकता हो। 6. सांस्कृतिक गतिविधियों में कोविड प्रोटोकाल होगा लागू 7. स्कूलों को रोज सेनेटाइज करना होगा। 8. प्रवेश करते समय शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं की थर्मल स्कैनिंग की जाए। 9. हैंडवॉश और हाथों को सेनेटाइज कराने की व्यवस्था गेट पर ही की जाए। |
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