दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- 19 फरवरी 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- मां काली के प्रचंड भक्त मैं से एक थे| रामकृष्ण परमहंस
- जीकेसी नयी दिल्ली में 26 मार्च को आयोजित करेगा महादेवी वर्मा सम्मान समारोह
- क्या आप जानते हैं 'सैलरी' यानी तन्ख्वाह और नमक में क्या है कनेक्शन? 'सॉल्ट' से बनीं है 'सैलरी'
- भक्ति और साधना के शिखर पुरुष रामकृष्ण परमहंस
- अबकी होली में
- मुख्यमंत्री ने बिहार विधानमंडल के विस्तारित भवन स्थित सेंट्रल हॉल में प्रबोधन कार्यक्रम को किया संबोधित
- मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की
- मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की समीक्षा की
- ‘पहले हिजाब, फिर पूरी किताब ?’ इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद !
- जनता का आशीर्वाद मिला तो क्षेत्र का होगा चौमुखी विकास: सभाकुवंर
- 18 फरवरी 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- कर्मवीर पंडित कैलाश पाठक जी प्रतिभावानों को रोशनी दिखाने वाले निश्छल संत थे----डॉ विवेकानंद मिश्र
- श्याम की रसोई नियमित रुप से जरूरतमंद लोगों के बीच कर रहा है भोजन का वितरण
- स्नेह समर्पण त्याग की मूर्त है माँ
- बस आरजू है ,मेरी ऐ जिंदगी
- वे हमें अपना चारा समझने लगे
- मटकोर के दौरान कुंए का स्लैब टूटने से 13 की मौत
- शाकद्वीपीय भाषण प्रतियोगिता 2022 के परिणाम घोषित :: ऋषभ भारद्वाज को प्रथम एवं आर्या मिश्रा को द्वितीय स्थान|
| Posted: 18 Feb 2022 07:58 AM PST
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| मां काली के प्रचंड भक्त मैं से एक थे| रामकृष्ण परमहंस Posted: 18 Feb 2022 03:57 AM PST मां काली के प्रचंड भक्त मैं से एक थे| रामकृष्ण परमहंससंवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट रामकृष्ण परमहंस भारत के बहुत प्रसिद्ध संत में से एक है ,स्वामी विवेकानंद जी उनके विचारों से प्रेरित थे इसी कारण विवेकानंद जी ने उन्हें अपना गुरु माना और उनके विचारों को गति प्रदान करने के लिए रामकृष्ण मठ की स्थापना की जोकि बेलूर मठ के द्वारा संचालित है राम कृष्ण मठ और मिशन नामक यह संस्था जनमानस के कल्याण के लिए एवं उनके आध्यात्मिक विकास के लिए दुनिया भर में काम करती है, रामकृष्ण परमहंस जी एक महान विचारक थे जिनके विचारों को स्वयं विवेकानंद जी ने पूरी दुनिया में फैलाया रामकृष्ण परमहंस जी ने सभी धर्मों को एक बताया उनका मानना था सभी धर्मों का आधार प्रेम न्याय और परहित ही है, रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म 18 फरवरी सन 1836 पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के कुमार पाकुर गांव में हुआ था| बाल्यकाल में उन्हें लोग गदाधर के नाम से जानते थे यह एक ब्राह्मण परिवार से थे इनका परिवार बहुत गरीब था लेकिन इनमें आस्था सद्भावना एवं धर्म के प्रति अपार श्रद्धा एवं प्रेम था |राम कृष्ण जी एक संत थे और उन्हें परमहंस की उपाधि मिली थी |दरअसल परमहंस एक उपाधि है यह उन्हीं को मिलती है जिनमें अपनी इंद्रियों को वश में करने की शक्ति हो जिनमें असीम ज्ञान हो यही उपाधि राम कृष्ण जी को प्राप्त हुई और वे रामकृष्ण परमहंस कहलाए हालांकि राम कृष्ण जी के परमहंस उपाधि प्राप्त करने के पीछे कई कहानियां हैं| रामकृष्ण एक प्रचंड काली भक्त थे जो मां काली से एक पुत्र की भांति जुड़े हुए थे जिनसे उन्हें अलग कर पाना नामुमकिन था जब रामकृष्ण माता काली के ध्यान में जाते और उनके संपर्क में रहते तो वह नाचने लगते गाने लगते और झूम झूम कर अपने उत्साह को दिखाते लेकिन जैसे ही संपर्क टूटता वह एक बच्चे की तरह विलाप करने लगते और धरती पर लोटपोट करने लगते इनकी इस भक्ति के चर्चे सभी जगह थे |रामकृष्ण परमहंस जी को गले का रोग हो जाने के कारण उन्होंने 15 अगस्त 8886 को अपने शरीर को छोड़ दिए और मृत्यु को प्राप्त हुए इनके अनमोल वचनों ने कई महान व्यक्तियों को जन्म दिया हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जीकेसी नयी दिल्ली में 26 मार्च को आयोजित करेगा महादेवी वर्मा सम्मान समारोह Posted: 18 Feb 2022 03:52 AM PST जीकेसी नयी दिल्ली में 26 मार्च को आयोजित करेगा महादेवी वर्मा सम्मान समारोहपटना से संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस) महान कवियित्री और सुविख्यात लेखिका महादेवी वर्मा की जयंती के अवसर पर "महादेवी वर्मा सम्मान समारोह" का आयोजन नयी दिल्ली में 26 मार्च को करेगा। उक्त जानकारी मीडिया-कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि पटना में पिछले वर्ष महादेवी वर्मा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। इस बार यह अयोजन नयी दिल्ली में 26 मार्च को करने जा रहा है। महादेवी वर्मा सम्मान से उन विभूतियों को सम्मानित किया जायेगा जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर देश और समाज का नाम रौशन किया है। प्रेम कुमार ने बताया कि सम्मानित किये जाने वाले लोगों में कला, संस्कृति, संगीत, फिल्म, पत्रकारिता, समाजसेवा, समेत अन्य क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल रहेंगे। ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने बताया है कि पद्मश्री, ज्ञानपीठ, पद्मविभूषण से सम्मानित महादेवी वर्मा को हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवियत्रियों में से एक माना जाता है। महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। महादेवी वर्मा ने हिंदी साहित्य जगत में एक बेहतरीन गद्य लेखिका के रुप में अपनी पहचान बनाई थी। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। महादेवी वर्मा एक मशूहर कवियित्री तो थी, इसके साथ ही वे एक महान समाज सुधारक भी थीं। प्रेम कुमार ने बताया कि प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा है कि महादेवी वर्मा एक महान कवयित्री होने के साथ-साथ हिन्दी साहित्य जगत में एक बेहतरीन गद्द लेखिका के रूप में भी जानी जाती हैं। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें 'हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती' कहा था। उन्हें आधुनिक मीरा भी कहा गया है क्योंकि इनकी कविताओं में से एक प्रेमी से दूर होने का कष्ट एवं इसके विरह और पीड़ा को बेहद भावनात्मक रूप से वर्णित किया गया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| क्या आप जानते हैं 'सैलरी' यानी तन्ख्वाह और नमक में क्या है कनेक्शन? 'सॉल्ट' से बनीं है 'सैलरी' Posted: 17 Feb 2022 09:43 PM PST क्या आप जानते हैं 'सैलरी' यानी तन्ख्वाह और नमक में क्या है कनेक्शन? 'सॉल्ट' से बनीं है 'सैलरी'संकलन अश्विनी कुमार तिवारी कभी रोम के सौनिकों को मेहनताने के रूप में नमक दिया जाता था। मेहनताने का अंग्रेजी शब्द 'सैलरी' इसी (सॉल्ट) से बना है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीनकाल में नौकरी करने वालों के लिये कोई सिस्टम नहीं बनाया गया था. यही वजह है कि सैलरी जैसी कोई चीज़ भी नहीं थी. इसलिये उस दौर में लोगों को सैलरी के नाम पर नमक पकड़ा दिया जाता था. रोमन साम्राज्य के लिये काम करने वाले सैनिकों को सैलरी में मुठ्ठी भर नमक देते थे. हालांकि, ऐसा भी नहीं था कि सारे सैनिकों को ही नमक मिल जाता था. जो सैनिक मेहनत से काम करते थे, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार नमक दे दिया जाता था. सैनिक रोज दिन के अंत में काम खत्म करने के बाद नमक लेकर घर लौटते थे. यहीं से रोम में कहावत शुरू हुई जो कुछ इस तरह से थी, 'किसी के लिए नमक जितने कीमती बनो.' जो सैनिक अच्छा काम करता था, वो ही इस नमक को हासिल करने योग्य माना जाता था. मशहूर रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर ने कहा है, 'रोम में सैनिकों की वास्तविक सैलरी नमक थी और यहीं से सैलरी शब्द की उत्पत्ति हुई.' एल्डर ने यह बात अपनी किताब 'नैचुरल हिस्ट्री' में उस समय लिखी है जब वो सी वॉटर का जिक्र कर रहे थे. हिब्रू भाषा की किताब एजारा में 550 और 450 BCE का जिक्र है. इस किताब में भी लिखा है कि अगर आप किसी व्यक्ति से नमक लेते हैं तो फिर यह बिल्कुल उससे उसकी पे लेने या फिर उसे सैलरी देने के बराबर ही है. किसी जमाने में नमक पर उसका ही हक होता था जिसका शासन होता था. एजारा के 4:14 सेक्शन में एक मशहूर फारसी राजा आर्टाजर्क्सीस प्रथम का जिक्र है. इस राजा के नौकर जब अपनी वफादारी के बारे में उसे बताते हैं तो कहते हैं, 'क्योंकि हमें राजा से नमक मिलता है या हमें राजा से प्रबंध के लिए नमक दिया जाता है.' हिंदी में भी जब आप कहते हैं कि 'हमने आपका नमक खाया है,' तो उसका मतलब आपको मिलने वाली सैलरी और आपकी वफादारी से ही होता है. गुलामों को नहीं मिलती थी सैलरी मध्ययुग तक सैलरी हासिल करना बहुत आम नहीं था और यूरोप में काम करने वाले लोगों की हालत बहुत ही बुरी थी. बार्टर सिस्टम यानी विनिमय प्रणाली की वजह से व्यापार जिंदा था. उच्च वर्ग के लोगों को हर साल एक निश्चित रकम मिलती थी जिसमें कुछ एक्स्ट्रा पेमेंट भी शामिल होता था. निचले तबके के लोग जिसमें गुलाम और दूसरे नौकर थे, उन्हें कोई पेमेंट नहीं दिया था. वो जो कुछ भी पैदा करते थे उसमें से थोड़ा सा हिस्सा उन्हें मिलता था या खाने का कुछ सामान और रहने की जगह उन्हें दे दी जाती थी. सहायकों, यूनिवर्सिटीज में काम करने वालों और ऐसे लोगों को कोई सैलरी नहीं मिलती थी. मंच पर छिड़का जाता था नमक पुराने जमाने में जापान में थिएटर के मंच पर नाटक से पहले नमक छिड़का जाता था। ऐसा ऐक्टर्स से बुरी आत्माओं को दूर रखने के लिए किया जाता था। वास्तु शास्त्र में जीवन को सुखी और समृद्धिशाली बनाने के लिए कई अचूक फंडे बताए गए हैं। यदि किसी घर में वास्तुदोष हैं और उनका सही उपाय नहीं हो पा रहा है तो बाथरूम में एक कटोरी साबूत या खड़ा समुद्री नमक रखें। ऐसा करने पर घर की कई प्रकार नकारात्मक शक्तियां निष्क्रीय हो जाएगी और सकारात्मक ऊर्जा को बल प्राप्त होने लगेगा। नमक में अद्भुत शक्तियां होती हैं जो कई प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को नष्ट कर देती हैं। इसके अलावा इससे घर दरिद्रता का भी नाश होता है और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। परिवार के सभी सदस्यों के विचार सकारात्मक होंगे जिससे उनका कार्य में मन लगा रहेगा। असफलताओं का दौर समाप्त हो जाएगा और सफलताएं मिलने लगेंगी। लोक परंपराएं, मान्यताएं, टोने-टोटके सभी देशों में माने जाते हैं। कुछ लोग इन पर विश्वास करते हैं, तो कुछ इन्हें अंधविश्वास मानते हैं। अधिकांश मान्यताओं के पीछे कोई ठोस आधार नहीं हैं, फिर भी ये सदियों से चली आ रही हैं। नमक का गिर जाना नमक का गिरना अच्छा नहीं माना जाता। बुल्गारिया, यूक्रेन और रोमानिया जैसे देशों में इसे दुर्भाग्य और विवाद का सूचक समझा जाता है। भारत में भी नमक का इस्तेमाल करते व$क्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। दरअसल, प्राचीन समय में नमक बेहद अमूल्य और दुर्लभ होता था। रोमन साम्राज्य में सैनिकों को वेतन नमक के रूप में दिया जाता था। तनख्वाह के लिए अंग्रेज़ी में 'सैलरी' शायद यहीं से आया है। 'सैल' मतलब होता है, नमक। नमक के इसी महत्व के कारण उसका गिर जाना (यानी व्यर्थ हो जाना) किसी भी तरह की हानि का संकेत मान लिया गया होगा। शायद इसीलिए नीदरलैंड में नमक उधार देना भी बुरा माना जाता है। इंग्लैंड में लोकविश्वास है कि गिरे नमक में से एक चुटकी लेकर बाएं कंधे की ओर से पीछे फेंक देने पर अपशकुन नहीं होता। ✍🏻इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित नमक को संस्कृत में 'लवण' कहा गया है, तो अब लवण गाथा ..लवण_गाथा मैंने बहुत से लोगों से पूछा कि उन्हे कौनसा स्वाद पसंद है। किसी ने मीठा कहा, किसी ने तीखा, कुछ बीमार लोगों ने कड़वा भी कहा। किसी ने भी खारा नही कहा। क्या हमारी सोच वास्तविक स्वाद को लेकर इतनी संज्ञाहीन है? यदि श्रीकृष्ण गीता में स्वाद को लेकर कहते तो वे कहते - "स्वादानाम लवणोऽहम्!" यदि स्वाद है तो वह लवण ही है बाकी सब असार है या अरस है। भारत में दांडी के कूच की पृष्ठभूमि २५ अप्रैल १९२६ के समय गंजबासौदा (म. प्र.) के व्यापारी ने पचपदरा (राजस्थान) में लवण के सत्याग्रह हेतु तैयार कर दी थी, जोधपुर नरेश का साथ मिल गया होता तो सत्याग्रह सेठ श्री गुलाब चंद सालेचा के नाम होता। भारत का समुद्री तट सर्वाधिक विस्तृत है। फिर भी अंग्रेज़ों की मतिभ्रष्ट हो गई थी कि उन्होंने लवण जैसी सस्ती और सहज सुलभ चीज पर कर लगाया। गांधी जी को अवसर दिया सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाने का। २४ दिन की पैदल अहमदाबाद से दांडी यात्रा (गुजराती में दांडी का मतलब स्तंभ होता है, दीवादांडी का मतलब होगा समुद्री किनारे लगा प्रकाश स्तंभ।) सम्पन्न हुई। यह सत्याग्रह 'दांडी कूच' के नाम से विख्यात हुआ। गांधी जी के साथ इस कूच में ७९ यात्री १९३० में चले थे, उनमें ५ वें पंजीकृत सदस्य थे २५ वर्षीय श्री गणपतराव गोडसे। गोडसे मुम्बई से दांडी कूच में सम्मिलित हुए थे। हालांकि मैं सस्ती चीज कहकर अपमान कर रहा हूँ लवण का। हमारे छत्तीसगढ़ में जनजाति बंधु गहन वनों में १ किलो चिरौंजी के बदले २ किलो नमक खरीदते रहे हैं। इधर म. प्र. में गुजरात सीमा से जुड़े शूलपाणेश्वर पहाड़ क्षेत्र में भीताड़ा, सकरजा, चिलकदा जैसे गांव है जहां जनजाति बंधुओं को दिनभर पैदल चल कर नमक खरीद कर ले जाना पड़ता है। लवण तत्सम शब्द है, इससे तद्भव लौण > लूण का जन्म हुआ, बाद में यह नोन > नून भी कहा जाने लगा। नमक फारसी शब्द है। समुद्री पानी ज्वार में ऊपर उठता है लवण के किसान उस पानी को बड़ी बड़ी क्यारियों में जमा करता है और समुद्री नमक तैयार होता है। खनिज के रूप में सिंध की खदानों से सेंधा नमक आता है और हमारे हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से भी खदानों से मिल जाता है। कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि वाट्सएप उनीभर्सीटी के बहुत लोग नमक को जहर बताते रहे हैं। समुद्री सफेद नमक के प्रति तो इतना माहौल गरम रहता है कि किसी से भोजन के बखत मांग लो तो ऐसे देखते हैं जैसे जहर मांग लिया हो। पर मेरा मानना है कि लवण जैसा तत्व नहीं जो स्वाद, रस और प्राणों का संचारक है। "अति सर्वत्र वर्जयेत।" यदि लवण इतना बुरा होता तो पुराणकार यह क्यों कहता - पितॄणां च प्रियं भव्यं तस्मात्स्वर्गप्रदं भवेत् । विष्णुदेहसमुद्भूतो यतोऽयं #लवणो रसः ॥ यदि 'पुराणकार' कुछ वाम टाइप पंथियों के लिए वॉमिटिंग का कारण है तो लवणभास्कर नामक दवाई में मिले सेंधानमक, सांभर नमक, समुद्री नमक, विडनमक और सौंचर नमक को कभी न खाए। मैं तो कबीर बाबा की सुनता हूँ और लवण को स्वाद का राजा मानता हूँ - "कबीर गुरु गले मिलनी, रहि गए आँटि लौण। जाति पाँति कुल सब मिटा, गाँव धरीगे कौण।" यदि कबीर से भी पेट में मरोड़ उठता हो तो बुल्लेशाह को देख लीजिए - "बुल्ला साई घट-घट रवया, ज्यों आटे विच लौण।" हमारे प्राचीन साहित्य में तो एक लवणासुर नामक राक्षस का भी चित्रण है, जरूर वह अंग्रेजों की तरह लवण पर कब्जा कर बैठा हुआ कोई नमकमाफिया रहा होगा, जो आम जन को नमक का उपयोग न करने देता होगा। उसके इस आतंक का नाश राम जी के छोटे शत्रुघ्न महाराज ने किया था - "शत्रुघ्न शर निर्भिन्नो लवणः स निशाचरः। पपात सहसा भूमौ वज्राहत इवाचलः।" गुजराती में लवण को 'मीठा' कहते हैं, सही नाम तो गुजराती ही देते हैं, जो जीवन का रस से वह मीठा ही हो सकता है इसलिए 'मीठा!' क्या गलत कहा? टाटा ग्रुप ने मीठे से प्रभावित होकर पूरा शहर बसा दिया 'मीठापुर'। द्वारका के एकदम पास। यहां टाटा नमक बनता है। टाटा नमक यानी देश का नमक। अभी कुछ दिनों पहले कुछ वामी कह रहे थे कि सेंधा नमक पाकिस्तान से आता है इसलिए राष्ट्रवादी लोग उस नमक को न खाएं। क्यों भाई क्या सेंधा नमक भारत में नही होता? दूसरी बात कि भारतीय उपमहाद्वीप में पैदा होने वाला सब भारत का है और जिन्हें भारत कहते ही पेटदरद होता हो वह भारतीय उपमहाद्वीप खाली करे। नाम पर फिर एक बार आते हैं, राजस्थान में लूणकरणसर झील में 'लूण', महाराष्ट्र में लोणार झील जो भारत की प्रसिद्ध क्रेटर लेक होने का स्थान रखती है उसमें भी 'लोण' और गुजरात के कच्छ की एक दूसरी क्रेटर लेक जो लुणा गांव में है उसमें भी 'लुण' यह लवण ने कहां कहां तक जड़ें पसार रक्खी है भई? अरबी भाषा में लवण का नाम कविर है। नमकीन इलाके को दश्त - ए- कविर कहा जाता है। परचून की दुकान पर नमक बाहर रखना बरकत की निशानी है। दुकान से बाहर रखा लवण कोई नहीं चुराता। यह भी हमारा पारंपरिक कायदा है। हमारे साहित्य का "नमक का दरोगा" भी अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक और ईमानदार है। नमक हराम मुहावरा भी सब जानते हैं। तो भई जो वाट्सएप उनीभर्सीटी ने नमक का हलाला कर रक्खा है उससे बचो और लगे उतना खाओ। रक्तचाप वाले महानुभाव अपनी रिस्क पर खाएं, इन पंक्तियों के लेखक को न कोसें। मैं तो पुराण का लिक्खा मानता हूँ - "लवणं तद्रसं दिव्यं सर्वकामप्रदं नृणाम् । यस्मादन्नरसाः सर्वे नोत्कटा लवणं विना ॥" ✍🏻गजेंद्र कुमार पाटीदार गोमयेनोपलिप्ते तु दर्भस्यास्तरणे स्थितः । तत्र दत्तेन दानेन सर्वं पापं व्यपोहति ॥ २,२९.२९ ॥ लवणं तद्रसं दिव्यं सर्वकामप्रदं नृणाम् । यस्मादन्नरसाः सर्वे नोत्कटा लवणं विना ॥ २,२९.३० ॥ पितॄणां च प्रियं भव्यं तस्मात्स्वर्गप्रदं भवेत् । विष्णुदेहसमुद्भूतो यतोऽयं लवणो रसः ॥ २,२९.३१ ॥ विशेषाल्लवणं दानं तेन शंसन्ति योगिनः । ब्राह्मण क्षत्त्रियविशां स्त्रीणां शूद्रजनस्य च ॥ २,२९.३२ ॥ आतुराणां यदा प्राणाः प्रयान्ति वसुधातले । लवणं तु तदा देयं द्बारस्योद्धाटनं दिवः ॥ २,२९.३३ ॥ ये श्लोक गरुडपुराण के प्रेतकल्प का है। इसमें लवण को विष्णु के शरीर से उत्पन्न कहा गया है।✍🏻जगदानंद झा हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भक्ति और साधना के शिखर पुरुष रामकृष्ण परमहंस Posted: 17 Feb 2022 09:11 PM PST भक्ति और साधना के शिखर पुरुष रामकृष्ण परमहंसदेवरिया ब्यूरो वेद प्रकाश तिवारी, (यू पी) । 18 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में कुमार पुकुर गांव में जन्में रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत, आध्यात्मिक गुरु एवं विचारक थे। विश्व के पटल पर रामकृष्ण परमहंस के जैसा गहरा पुजारी ढूंढना मुश्किल है। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं । अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति का जीवन बिताया। एक रोचक घटना का जिक्र करना चाहूंगा । रामकृष्ण परमहंस को दक्षिणेश्वर में पुजारी के पद पर रखा गया था । उन्हें14 रुपये तनख्वाह मिलती थी । मंदिर ट्रस्टयो के अधीन था एक दिन ट्रस्टीयों को पता चला कि रामकृष्ण भगवती काली को जो भोग लगाते हैं उसे खुद चख लेते हैं उसके बाद भोग लगाते हैं । शिकायत मिलने पर ट्रस्टी यों की अदालत बैठ गई रामकृष्ण को बुलाया गया रामकृष्ण से सवाल किए गए कि हमें पता चला है कि भोग तुम पहले खुद चख लेते हो फिर भगवती काली को लगाते हो । राम कृष्ण ने कहा कि मैं ऐसे ही पूजा करूंगा क्योंकि मुझे पता ही नहीं कि मैं जो चढ़ा रहा हूं वह क्या है ? उसका स्वाद कैसा है? इसलिए मैं जब तक खुद चख नहीं लूंगा काली को भोग नहीं लगा सकता । आप चाहे तो कोई और पुजारी रख सकते हैं। एक दिन की घटना है । रामकृष्ण पूजा में तल्लीन थे। भोग रखा रखा ठंडा हो गया । फूल कुम्हला गए। दीपक जलते- जलते बुझ गया। जो लोग पूजा देखने आए थे कर जाने लगे कहने लगे यह किस माता की पूजा है । रामकृष्ण आंख बंद किए रोए जा रहे थे । सुबह से शाम हो गई, शाम से आधी रात हो गई। रामकृष्ण ने आंखें खोली और काली के सामने लटक रही तलवार को खींचकर निकाल दिया और कहा कि सब कुछ अब तक कुछ हुआ नहीं सब कुछ चढ़ा दिया अब तक कुछ हुआ नहीं आज अपने आप को चढ़ाता हूं एक झटके में तलवार उनके गर्दन के पास आ गई । अचानक रामकृष्ण बेहोश होकर गिर पड़े और जैसे किसी ने उनके हाथों से तलवार छीन लिया । वह बेहोश तो थे लेकिन रामकृष्ण के चेहरे पर जो आभा थी वह एक आध सदियों में किसी महापुरुष के चेहरे पर आती है। सुबह उनकी आँख खुली तो लोगों ने पूछा कि रामकृष्ण क्या हुआ था ? राम कृष्ण ने कहा पूजा हो रही थी पूजा पूरी हो गई। उसके बाद फिर रामकृष्ण दोबारा मंदिर नहीं गए । हां जब पुजारी नहीं होता था तेरे मंदिर में जाते थे और ऐसे बातचीत कर लेते थे जैसे कोई पुत्र अपनी मां से करता है । रामकृष्ण संसार को माया के रूप में देखते थे। उनके अनुसार अविद्या माया सृजन के काले शक्तियों को दर्शाती हैं जैसे काम, लोभ ,लालच , क्रूरता , स्वार्थी कर्म आदि , यह मानव को चेतना के निचले स्तर पर रखती हैं। यह शक्तियां मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधने के लिए ज़िम्मेदार हैं। वही विद्या माया सृजन की अच्छी शक्तियों के लिए ज़िम्मेदार हैं जैसे निःस्वार्थ कर्म, आध्यात्मिक गुण, ऊँचे आदर्श, दया, पवित्रता, प्रेम और भक्ति।रामकृष्ण के अनुसार मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है ईश्वर प्राप्ति। रामकृष्ण कहते थे की कामिनी -कंचन ईश्वर प्राप्ति के सबसे बड़े बाधक हैं। श्री रामकृष्ण परमहंस की जीवनी के अनुसार, वे तपस्या, सत्संग और स्वाध्याय आदि आध्यात्मिक साधनों पर विशेष बल देते थे। वे कहा करते थे, "यदि आत्मज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखते हो, तो पहले अहम्भाव को दूर करो। क्योंकि जब तक अहंकार दूर न होगा, अज्ञान का परदा कदापि न हटेगा। तपस्या, सत्सङ्ग, स्वाध्याय आदि साधनों से अहङ्कार दूर कर आत्म-ज्ञान प्राप्त करो, ब्रह्म को पहचानो।" उनके शिष्य विवेकानंद ने जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों को उनके सामने रखा था जिसका जवाब रामकृष्ण परमहंस ने बड़ी उदारता से दिया था । स्वामी विवेकानंद : समस्याओं से घिरे रहने के कारण हम जान ही नहीं पाते कि किधर जा रहे हैं? रामकृष्ण परमहंस : अगर तुम अपने बाहर झांकोगे तो जान नहीं पाओगे कि कहां जा रहे हो। अपने भीतर झांको। आखें दृष्टि देती हैं। हृदय राह दिखाता है। स्वामी विवेकानंद : क्या असफलता सही राह पर चलने से ज्यादा कष्टकारी है? रामकृष्ण परमहंस : सफलता वह पैमाना है, जो दूसरे लोग तय करते हैं। संतुष्टि का पैमाना तुम खुद तय करते हो। स्वामी विवेकानंद : कठिन समय में कोई अपना उत्साह कैसे बनाए रख सकता है? रामकृष्ण परमहंस : हमेशा इस बात पर ध्यान दो कि तुम अब तक कितना चल पाए, बजाय इसके कि अभी और कितना चलना बाकी है। जो कुछ पाया है, हमेशा उसे गिनो; जो हासिल न हो सका उसे नहीं। स्वामी विवेकानंद : लोगों की कौन सी बात आपको हैरान करती है? रामकृष्ण परमहंस : जब भी वे कष्ट में होते हैं तो पूछते हैं, 'मैं ही क्यों?' जब वे खुशियों में डूबे रहते हैं तो कभी नहीं सोचते, 'मैं ही क्यों?' स्वामी विवेकानंद : मैं अपने जीवन से सर्वोत्तम कैसे हासिल कर सकता हूं? रामकृष्ण परमहंस : बिना किसी अफसोस के अपने अतीत का सामना करो। पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने वर्तमान को संभालो। निडर होकर अपने भविष्य की तैयारी करो। स्वामी विवेकानंद : एक आखिरी सवाल। कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरी प्रार्थनाएं बेकार जा रही हैं? रामकृष्ण परमहंस : कोई भी प्रार्थना बेकार नहीं जाती। अपनी आस्था बनाए रखो और डर को परे रखो। जीवन एक रहस्य है जिसे तुम्हें खोजना है।स्वामी विवेकानंद उनके दिव्य ज्ञान को पाकर ही शिकागो अमेरिका में विश्व गुरु होने का परचम लहराया विवेकानंद का अध्ययन करने के बाद स्वामी विवेकानंद के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है रामकृष्ण मिशन स्थापना करके स्वामी जी ने रामकृष्ण परमहंस के उद्देश्यों को पूरा किया हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 17 Feb 2022 07:48 AM PST अबकी होली मेंअबकी होली में, आयेंगे पिया हमार । आयेंगे जब होली में, नाचूँगी,गाऊँगी, खुशियाँ मनाऊंगी, करूंगी सोलह श्रींगार। अबकी होली में...। जब वे यहाँ आयेंगे, अपनी सेज सजायेंगे, करुंगी खूब बातें उनसे, पहनाउंगी बाहों का हार। अबकी होली में...। होली में जब आयेंगें, गजरा हम लगायेंगे, बन ठनकर छमकुंगी , जाऊंगी संग-संग बाजार। अबकी होली में...। अबकी जब वे आयेंगे, छ्प्पन भोज लगायेंगे, खायेंगे संग-संग उनके, खिलाउंगी मिठाई बेशुमार। अबकी होली में...। नहीं छोड़ेंगे होली में उनको, करूंगी रंगों की बौछार, लगाउंगी अबीर गालों पर, करूंगी वेइन्तहां उनसे प्यार। अबकी होली में...।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 17 Feb 2022 07:37 AM PST मुख्यमंत्री ने बिहार विधानमंडल के विस्तारित भवन स्थित सेंट्रल हॉल में प्रबोधन कार्यक्रम को किया संबोधितपटना, 17 फरवरी 2022:- लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला एवं बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज बिहार विधानमंडल के विस्तारित भवन स्थित सेंट्रल हॉल में विधानमंडल सदस्यों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रबोधन कार्यक्रम का विषय था 'लोकतंत्र की यात्रा में विधायकों का उन्मुखीकरण एवं उत्तरदायित्व'। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस विशेष कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी का विशेष तौर पर अभिनंदन करता हूं। खुशी की बात है कि आज बिहार विधानमंडल के सदस्यों का प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसका विषय है 'लोकतंत्र की यात्रा में विधायकों का उन्मुखीकरण एवं उत्तरदायित्व'। बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष एवं स्थापना दिवस के अवसर पर यह कार्यक्रम संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, लोकसभा तथा बिहार विधानसभा, सचिवालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा जी को बधाई देता हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में पहला प्रबोधन कार्यक्रम हुआ था जिसमें तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष श्रद्धेय सोमनाथ चटर्जी जी, स्व0 मारगेट अल्वा जी शामिल हुई थी। उस समय बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री उदय नारायण चैधरी थे। वर्ष 2011 के दूसरे प्रबोधन कार्यक्रम में उस समय के लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष स्व0 अरुण जेटली शामिल हुए थे। तीसरे प्रबोधन कार्यक्रम में संसदीय मामले के विशेषज्ञ श्री जे0सी0 मल्होत्रा शामिल हुए थे। आज के चैथे प्रबोधन कार्यक्रम में लोकसभा के अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि 22 मार्च 1912 को बंगाल से बिहार और उड़ीसा अलग हुआ था और 1920 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। 7 फरवरी 1921 को विधानमंडल की पहली बैठक हुई थी। विधानमंडल भवन के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर 2021 में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोबिंद शामिल हुए थे। उन्होंने उस समय बिहार विधानसभा परिसर में शताब्दी स्मृति स्तंभ का शिलान्यास किया था और बोधगया से लाये गये पवित्र बोधिवृक्ष के षिषु पौधे का रोपण किया था। 22 मार्च 2011 को शताब्दी वर्ष कार्यक्रम का आयोजन हुआ था जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल शामिल हुई थी, उस समय विधान परिषद् के सभापति ताराकांत झा थे, जिन्होंने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 3 मई 2011 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम साहब ने व्याख्यान दिया था। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी 1913 को विधानमंडल की पहली बैठक पटना कॉलेज के सेमिनार हॉल में आयोजित की गई थी। 20 जनवरी 2012 को उसी स्थल पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। स्व0 ताराकांत झा जी ने विशेष प्रयास कर यहां के पुराने ऐतिहासिक साक्ष्यों का मंगाया था जिसे कई चीजों की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता प्रतिनिधि चुनकर भेजती है इसलिए जनप्रतिनिधियों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है। निर्वाचन के बाद शपथ के समय विधायकों को विधायी कार्यों की जानकारी से संबंधित कागजात दिया जाता है ताकि उन्हें आगे काम करने में सहूलियत हो। उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने क्षेत्र के दायित्व के साथ-साथ राज्य का भी दायित्व संभालना होता है। सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र के साथ-साथ देश का भी दायित्व संभालना होता है। विधानमंडल सत्रों के दौरान सभी विधायक, विधान पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों की बातों एवं समस्याओं को निर्भीक होकर ठीक ढंग से रखें। पूरी बुलंदी के साथ अपनी बात को सदन में रखना उनका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1989 में हम लोकसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री बने। लोकसभा के सदस्य के रुप में कई चीजों को मुझे सीखने और समझने का मौका मिला। उस समय पक्ष-विपक्ष में कितना भी वाद विवाद सदन के अंदर होता था लेकिन संसद के बाहर सेंट्रल हॉल में आपस में हमलोग स्नेहपूर्वक मिलकर बातचीत करते थे। संसद के कई सदस्यों से बातचीत के दौरान मुझे ऐसा महसूस होता था कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों की गहन जानकारी है। उन्होंने कहा कि आपस में बातचीत करने से ज्ञान बढ़ता है। हम सभी को मिलकर राज्य एवं देश की सेवा करनी है एवं जनता की समस्याओं का समाधान करना है। आपस में प्रेम, भाईचारे का भाव रखते हुए हम सबको अपनी-अपनी जिम्मेवारियों का निर्वहन करनी चाहिए। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की Posted: 17 Feb 2022 07:19 AM PST मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की
पटना, 16 फरवरी 2022:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित 'संकल्प' में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव श्री संजीव हंस ने बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति एवं प्रस्तावित सुधार को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति, प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग एवं ऊर्जा लेखांकन, ऊर्जा के दुरुपयोग एवं चोरी पर प्रभावी नियंत्रण, संरचना का सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण तथा हर खेत तक सिंचाई का पानी के लिए संरचना विस्तार एवं विद्युत संबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचा दी गई है। लोग बिजली का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं करें। उन्होंने कहा कि बिजली की चोरी रोकने एवं इसका दुरुपयोग कम करने के लिए प्रभावी कदम उठायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रीपेड मीटर लगाने का काम तेजी से करें। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए ऊर्जा विभाग की संरचनाओं का और विस्तार करें। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करें। बैठक में ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, सामान्य प्रशासन सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री एस0 सिद्धार्थ, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव श्री संजीव हंस, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की समीक्षा की Posted: 17 Feb 2022 07:14 AM PST मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की समीक्षा कीबिहार में धान की विकेंद्रीकृत अधिप्राप्ति से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिला है। इस वर्ष 45 लाख मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य के विरुद्ध 44 लाख 91 हजार मीट्रिक टन धान की रिकार्ड अधिप्राप्ति की गई है, यह खुशी की बात है- मुख्यमंत्री
पटना, 16 फरवरी 2022:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की समीक्षा की। बैठक में सहकारिता विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धान अधिप्राप्ति के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 2021 से 15 फरवरी 2022 तक धान अधिप्राप्ति का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया गया। खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में 45 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके ऐवज में रिकार्ड 44.91 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई है। राज्य में 7104 समितियों द्वारा 6 लाख 43 हजार किसानों से धान अधिप्राप्ति की गई है। प्रोक्योरमेंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम के माध्यम से 58,878 किसानों से 4.46 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई है। उन्होंने बताया कि 85 प्रतिशत किसानों के खाते में राशि का भुगतान कर दिया गया है, बाकी बचे किसानों को भी भुगतान जल्द कर दिया जायेगा। बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव श्री विनय कुमार ने भी चावल मिलों की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में धान की विकेंद्रीकृत अधिप्राप्ति से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिला है। इस वर्ष 45 लाख मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य के विरुद्ध 44 लाख 91 हजार मीट्रिक टन धान की रिकार्ड अधिप्राप्ति की गई है, यह खुशी की बात है। इसके लिए विभाग को बधाई देते हैं। इस बार 6 लाख 43 हजार किसानों से अधिप्राप्ति की गई है जो एक रिकॉर्ड है। किसानों को 8,800 करोड़ रुपये का ससमय भुगतान हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। यह राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब जन वितरण प्रणाली के लिये बिहार की चावल की आवष्यकता राज्य से ही पूरी हो जायेगी। यह बेहद संतोष की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पैक्स के माध्यम से धान अधिप्राप्ति होने से किसानों को काफी लाभ हो रहा है। प्रोक्योरमेंट पोर्टेबिलिटी सिस्टम के तहत जिन किसानों से धान अधिप्राप्ति की गई है, उसका भी जमीनी आंकलन करा लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उसना चावल की खपत ज्यादा है, इसे ध्यान में रखते हुए उसना चावल मिलों की संख्या और बढायें। उन्होंने कहा कि गेंहू की अधिप्राप्ति को लेकर भी जिलावार आंकलन करा लें और उसके आधार पर लक्ष्य निर्धारित कर उस पर काम करें। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, सामान्य प्रशासन सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री एस0 सिद्धार्थ एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव श्री विनय कुमार एवं सहकारिता विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी जुड़ी हुई थीं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ‘पहले हिजाब, फिर पूरी किताब ?’ इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद ! Posted: 17 Feb 2022 06:58 AM PST 'पहले हिजाब, फिर पूरी किताब ?' इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद !जिन देशों में हिजाब प्रतिबंधित है, उन स्थानों पर आंदोलन करके दिखाएं -श्री. टी. राजासिंह, भाजपा विधायक, तेलंगानाभारत के एक राज्य में 'हिजाब' पर प्रतिबंध का निर्णय आने पर मुसलमान अस्थिरता फैला रहे हैं । हिजाब का निमित्त कर हिन्दुत्व की अपकीर्ति कर रहे हैं । आनेवाले समय में तो पूर्ण भारत में हिजाब पर प्रतिबंध लगनेवाला है । तब वे क्या करनेवाले हैं ? हिजाब के प्रतिबंध को हमारा पूर्ण समर्थन है । फ्रान्स, जर्मनी, डेनमार्क, चीन, श्रीलंका आदि अनेक देशों में हिजाब-बुरखा पूर्णत: प्रतिबंधित है । वहां आंदोलन करनेपर उलटा लटकाकर मारते हैं, उन स्थानों पर जाकर आंदोलन कर दिखाएं, ऐसी चुनौती तेलंगाना के भाजपा के हिन्दुत्वनिष्ठ विधायक श्री. टी. राजासिंह ने दी है । वे हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित 'पहले हिजाब, फिर पूरी किताब ?' इस ऑनलाइन विशेष संवाद में बोल रहे थे । इस समय सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार संबंधित धर्म की सीख में बताए अनुसार विद्यार्थी विद्यालय, गुरुकुल में अपने धर्मानुसार शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं; परंतु संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार विद्यालयों का कारोबार, नियम धर्मनिरपेक्षता के तत्त्वानुसार होते हैं । अतः सभी धर्मों के विद्यार्थियों को उनका पालन करना ही पडेगा । ऐसे स्थान पर मुसलमान छात्राआें की हिजाब की मांग क्यों ? आज हिजाब, भविष्य में वे विद्यालयों में नमाज सहित अनेक मांगे करेंगे । संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को उनके धर्म का पालन करने का अधिकार देता है तथा केंद्र और राज्य सरकारों को यह अधिकार भी देता है कि जो अधर्म, अनीति, कुप्रथा आदि का अनुकरण करते हैं, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है, यह ध्यान में रखना चाहिए । इस समय हरियाणा की विवेकानंद कार्य समिति के अध्यक्ष श्री. नीरज अत्री ने कहा कि, जिन मुसलमान लडकियों को पहले हिजाब अनिवार्य नहीं लगता था । आज उन्हें हिजाब पुस्तकों की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण लगने लगा है । हिजाब का विषय कभी नहीं था, वह निर्माण किया गया है । पहले धर्मांध सडक पर गुंडागर्दी करते थे । अब इसके साथ ही वे कुछ प्रसारमाध्यमों को साथ लेकर 'हिजाब' का विषय लादने का प्रयत्न कर रहे हैं । इस देश में हिजाब की मांग लादने के उपरांत आगे चलकर मुसलमान 'कुरान' में बताई गई बातों के अनुसार अन्य मांगें भी लादने का प्रयत्न करेंगे । न्यायालय कोे भी विचार कर निर्णय देने चाहिए । हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा ने कहा कि, कर्नाटक राज्य में विद्यालय के नियम और न्यायालय के आदेश के अनुसार हिन्दू छात्र और छात्राएं गणवेश धारणकर विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं; परंतु मुसलमान छात्राएं अभी भी हिजाब पहनकर विद्यालयों में आ रही हैं । हिजाब का विरोध करनेवालों को मार डालने की धमकियां दी जा रही हैं । हिजाब का कारण बनाकर भारत को 'इस्लामिक राष्ट्र' बनाने का अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र निष्फल करना चाहिए । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जनता का आशीर्वाद मिला तो क्षेत्र का होगा चौमुखी विकास: सभाकुवंर Posted: 17 Feb 2022 06:56 AM PST जनता का आशीर्वाद मिला तो क्षेत्र का होगा चौमुखी विकास: सभाकुवंरदेवरिया ब्यूरो वेद प्रकाश तिवारी की खबर । देवरिया जिले के 340 भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी सभाकुंवर कुशवाहा ने गुरुवार को क्षेत्र के बहियारीबघेल,महुजा,करमुआ,चनुकी,दिस्तौली,मदनचक,कोड़रा,धवरकन,कल्याणी,रुचापार,लाखोपार आदि गांवों में संपर्क कर भाजपा के पक्ष में मतदान करने का अपील किया। बहियारी बघेल में उन्होंने जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर वृद्धा, विधवा एवं विकलांग पेंशन को रुपए 1500 किया जाएगा। 60 वर्ष के ऊपर की महिलाओं को उत्तर प्रदेश सरकार की बसों में मुफ्त में यात्रा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मेधावी छात्राओं को स्कूटी एवं प्रधानमंत्री उज्जवला गैस धारक महिलाओं को साल में दो गैस सिलेंडर मुफ्त में दिया जाएगा। श्री कुशवाहा ने कहा कि आप लोगों का आशीर्वाद मिला तो भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र का चौमुखी विकास करा कर प्रदेश के नक्शे में शीर्ष स्थान पर स्थापित करने का काम करूंगा। जनसंपर्क कार्यक्रम भाजपा नेता जयनाथ कुशवाहा गुड्डन, राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह, डाक्टर अरविंद सहाय, सुरेंद्र सिंह टुनटुन, सुरेश तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, मंडल अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल, संतोष पटेल, हरिकेश कुशवाहा, विवेक सिंह कुशवाहा, राजेश यादव, मंटू पटेल, संदीप कुशवाहा, अमरेंद्र मौर्या, शैलेश सहाय, सहित भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं ग्राम वासी उपस्थित थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 17 Feb 2022 06:51 AM PST
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| कर्मवीर पंडित कैलाश पाठक जी प्रतिभावानों को रोशनी दिखाने वाले निश्छल संत थे----डॉ विवेकानंद मिश्र Posted: 17 Feb 2022 06:42 AM PST कर्मवीर पंडित कैलाश पाठक जी प्रतिभावानों को रोशनी दिखाने वाले निश्छल संत थे:-डॉ विवेकानंद मिश्रगया जिले के इमामगंज प्रखंड के निवासी 92 वर्षीय पंडित कैलाश पाठक जी के असमय निधन पर भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा एक आभासीय शोक सभा का आयोजन डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित हरि अनंत सेवा धाम के प्रांगण में किया गया । इस मौके पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विवेकानंद मिश्र ने पाठक जी के निधन पर गहरी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि पाठक जी का सामाजिक दृष्टिकोण व्यापक एवं व्यावहारिक रहा है। अपने समाज की परिस्थितियों पर हमेशा दूरगामी चिंतन करने वाले और समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन देने वाले एक समर्पित निष्ठावान युगपुरुष का अंत हो गया। प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य राधामोहन मिश्र माधव ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी पाठक जी का व्यक्तित्व पारसधर्मी था। आने वाली पीढ़ियों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। ऑल इंडिया जूलॉजी साइंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर बी एन पांडे ने पाठक जी के निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया। मगध विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश चंद्र मिश्र ने कहा कि पाठक जी एक कर्मठ और सुलझे हुए व्यक्तित्व के धनी थे। उनके रिक्त स्थान की पूर्ति असंभव लगती है। आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज गया के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रामेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि पाठक जी समाज के बहुमूल्य धरोहर थे। इनके अलावे इस आभासीय शोकसभा में अपने विचार व्यक्त कर श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में झारखंड प्रदेश की प्रसिद्ध समाजसेविका अपराजिता मिश्रा, दयानंद मिश्रा डॉक्टर संपूर्णानंद मिश्रा,दीपेंद्र पाठक, स्पेशल पुलिस कमिश्नर, श्री ओम प्रकाश मिश्र, स्पेशल कमिश्नर रोड एंड सेफ्टी श्री पी एस पांडे, एडीजी कृषि अनुसंधान केंद्र श्री ज्ञान पांडे अभियंता, श्रीचरण बाबू डालमिया, कविराज शशिशेखर पाठक, पूर्वांचल गण परिषद के अध्यक्ष निर्मल पाठक, डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज, अधिवक्ता दीपक पाठक, आचार्य रूप नारायण मिश्र, डा. सच्चिदानंद पाठक, राममोहन शुक्ल, जयप्रकाश मिश्र अभियंता, सिद्ध नाथ मिश्र, बैद्य देवेंद्र पाठक, गजाधर लाल पाठक, केशव लाल भैया, वैष्णवी मांडवी गुर्दा, पुष्पा गुप्ता, प्रोफेसर रीना सिंह, रंजीत पाठक, पीपी मिश्रा, अजय मिश्रा रानीगंज, ओम बाबू केडिया, शंभू गिरी, कृष्णदेव पांडे, अमरजीत गिरी, देवेंद्र नाथ मिश्र, डॉ मृदुला मिश्रा, डॉ मंटू मिश्रा, तुषार राज, मनीष मिश्रा, आशुतोष आदि हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| श्याम की रसोई नियमित रुप से जरूरतमंद लोगों के बीच कर रहा है भोजन का वितरण Posted: 17 Feb 2022 06:39 AM PST श्याम की रसोई नियमित रुप से जरूरतमंद लोगों के बीच कर रहा है भोजन का वितरणजितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 17 फरवरी :: श्याम सेवा समिति ट्रस्ट द्वारा संचालित " * श्याम की रसोई *" नियमित रुप से जरूरतमंद लोगों के बीच कर रहा है भोजन का वितरण। भोजन वितरण के दौरान चेतन थिरानी ने बताया कि वृहस्पतिवार को गांधी मैदान, आकाशवाणी के नजदीक जरूरतमंदो के बीच भोजन वितरण किया जा रहा ह। उन्होंने बताया कि प्रथम कोरोना काल के समय से ही श्याम बाबा के आशीर्वाद से जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए श्याम की रसोई कार्यरत है। संस्थान का संकल्प है कि सदा असहाय की सहायता करना ताकि कोई भूखा नही सोय। थिरानी ने यह भी बताया कि श्याम हेल्थ केयर के माध्यम से प्रतिमाह स्वास्थ्य शिविर लगाये जाते है। पटना के विभिन्न स्थानों पर निःशुल्क चिकित्सा तथा रोगों की जाँच की सुविधा सुलभ कराया जाता है। कोरोना मरीजों के लिए श्याम ऑक्सिजन बैंक भी जनहित में कार्यरत है। लोग 24×7 सेवा का लाभ ले रहे है। भोजन वितरण में बसंत थिरानी, चेतन थिरानी, रोहित थिरानी, उज्जवल राज और रोशन अग्रवाल उपस्थित थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| स्नेह समर्पण त्याग की मूर्त है माँ Posted: 17 Feb 2022 06:36 AM PST स्नेह समर्पण त्याग की मूर्त है माँरमाकांत सोनी नवलगढ़ माँ शब्द की व्याख्या अनंत है, अनादि है, जिस दिन से उत्पति का बीज पड़ा जीवन वहां से शुरू हुआ, ये अन्तहीन है क्योंकी माँ शब्द सृष्टि के सृजन का धोतक है जब तक जहां तक सृष्टि है हम है, आप है, जीवन है, धरा है, आसमां है, चाँद है, तारे है, तब तक माँ है जो हम चलता फिरता देखते है वो सब नजारा माँ शब्द से है। माँ शब्द की व्याख्या वैज्ञानिकों ने दार्षनिक दृष्टि से वेद, उपनिषदों में धर्म गुरूओं ने सबने अपने अपने मानदण्डो मंें की है। जैसे की जीसस ने कहा था कि ईष्वर हर जगह मौजूद नहीं हो सकता इसलिये उसने एक माँ बनाई............. साहित्यकार कहता है कि स्नेह समर्पण त्याग की मूर्त है माँ, सागर की गहराई है माँ सारी जन्नत तेरे कदमों में है माँ। कहते है कि कला की दूनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा कि उन लोरियों में होता था जो माएं गाया करती थी। वेद, उपनिषद कहते है कि माँ का ऋण उसकी संतति उतार ही नहीं सकती। माता पिता और गुरू को देवों के समतुल्य माना गया हैं और इन सभी में माँ का स्थान सर्वोपरि है। हजरत मोहम्मद साहब ने माँ के पैरो तले जन्नत बताया है। सम्पूर्ण जगत में मातृत्व की शान है माँ। मातृत्व से बड़ा इस जगत में कुछ भी नहीं है जो ममता स,े ममत्व से, वात्सल्य से लबरेज है जो सम्पूर्ण जगत की नारी जाति को गौरवान्वित कर समस्त देवों से ऊपर देवी का दर्जा दिलाता है। हर स्त्री जाति म,ें हर उम्र में मातृत्व का अंष रहता है और वही अंष उसमें दया, सहिष्णुता, क्षमा, स्नेह, विनम्रता, गहनता, उदारता, सहनषीलता, धैर्य, समर्पण जैसे गुणों को प्रेरित कर दिग्विजयी बनाता है। इसलिये सृृष्टि सिर्फ और सिर्फ माँ के बूते की बात है। जब जब अपने बच्चों की कष्ती सैलाब में आती है उन्हे माँ की दुआओं की याद आती है। माँ जननी है जीवन भी और जीवन मूल्य भी। जीवन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन मूल्यों से चरित्र का निर्माण ।अब्राहम लिंकन ने कहा था मै जो भी हैूं या होने की आषा रखता हैूं उसका श्रेय मेरी माँ को जाता है। जन्म या जीवन देना ही सिर्फ मातृत्व को पूर्ण नहीं करता वरन पूरी करती है ममता। इसलिये कहते है कि सिर्फ जन्म देने वाली ही माँ नहीं होती है वरन जो वात्सल्य से सराबोर होकर बच्चों का पालन पोषण करती है सही मायने में वही माँ होती है। मातृभूमि मातृभाषा सदैव पूजनीय है क्योंकी इनकी ममता की छांव से हमारा अस्तित्व और पहचान है। माँ चाहे जन्मदात्री हो, दायी मा,ँ गुरू माँ हो, धरती माँ हो उसमें एक प्रेम का नाता होता हैं, ये वो शक्ति है जो खुद में यकीन करना सिखाती है। इन्सान को जो रूप, जो आकार परिवार को देष को समाज को संस्कृति को मिलता है वो रूप सिर्फ माँ ने ही हमें दिया है। अपनी ममता का इतना विस्तार करो कि सम्पूर्ण मानवता तुझमें ही माँ का रूप ढूंढे । हर बच्चा तुझमें मदर टेरेसा का चेहरा तलाष करे। यदि सारे देषों की माताएं एक साथ मिलती तो शायद कभी युद्व होते ही नहीं। माताएं कभी सरहद नहीं देखती, कभी जाति धर्म नहीं देखती, इनकी दुआएं सदा अपने पुत्रों के लिये अमन चैन की कामना करती है। सामाजिक परिवेष में जहां पांष्चात्य संस्कृति का प्रभाव आज नारी को अपने कैरियर को बेहतर बनाने में रूकावट पैदा करता है। कुछ सामाजिक समस्याएं जो एक माँ के सामने चुनौति बनकर खड़ी है। विज्ञान की तरक्की से उपजा सैरोगेट मदर शब्द आज की आवष्यकता है। पुराने जमाने की चुल्हा चैका वाली माँ आज के जमाने की आधुनिक माँ कैरियर मदर के रूप में है। पुराने जमाने की माएं त्याग बलिदान की मूर्ति होती थी और आज की मांए स्वकेन्द्रित है, सरासर निराधार व निरर्थक है। आज की नारी षिक्षा की लौ के माध्यम से सषक्त हुई है और वह अपने दायित्वों का निर्वाह बखूबी निभा रही है। वह सक्षम माँ के रूप में अपनी भूमिका को नये ढंग से परिभाषित कर रही है। स्त्री जीवन देती है पुरूष अर्थ देता है जैसी प्राचीन सोच अब खंडित हो रही है क्योंकी अब नारी पुरूष के साथ कंधे से कंघा मिलाकर आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और भावात्मक तरक्की कर साबित कर अपने जीवन को सार्थक बना रही है। देष व समाज को नारी ने एक नया आयाम दिया है। एक माँ को परिभाषित करना इतना सरल नहीं है क्योंकी माँ की संवेदनाएं न तो सिमटी होती है और न ही सीमित है। माँ आज की हो या प्राचीन जमाने की हो माँ तो बस माँ होती है जो हर युग में हर काल में केवल ममता लुटाती है। माँ की प्राथमिकता उसके बच्चे होते है ईष्वर ने उसकी शक्ति और सामथ्र्य को इतना सुदृढ़ बनाया है कि वो घर परिवार देष व समाज में अपनी जिम्मेदारी पूर्णता से निभा रही है। कवि ने कहा है कि जिगर के है सभी टूकड़े बड़ा छोटा नहीं होता, सभी नायाब है हीरे खरा खोटा नहीं होता खुदा ने परवरिष खातिर नियामत इस कदर बक्षी, मां की मोहब्बत में कभी टोटा नहीं होता हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 16 Feb 2022 09:59 PM PST बस आरजू है ,मेरी ऐ जिंदगीविभा सिंह वो बचपन लौटा दो ..... कूछ खट्टी -कूछ ,मीठी दादी की थपकी ,दादा की कंचे की टॉफी ....बहन -भाई की टोली ... गाँव की पगडंडियों पर सरपट दौड़ना ,नीम की निबौली को चाव से खाना ...... वो पल बचपन के लौटा दो जब फिक्र नही थी जीने की सिर्फ जिद थी ,जुगनू की हथेलियों पर रखकर ,खुश हो जाता महरूम थी ज़माने ,के नखरे से वो पल बचपन के लौटा दो जब फिक्र नही थी जीने की ऐ मुकम्मल जहा से ,मगरूर निगाहें ..... सपने जब देखे ,खुली निगाहों से अब झुकी नजरे ,के स्फ्कत नजरे सवालिया नजरो से ,हजारो सवाल कर रहे है .......... बेखौफ ज़माने से जीने की चाहत उम्र के पड़ाव ,मै वो कशिश की कतरा -कतरा ,सब आफ़ताब हो रहा है वो बचपन ,तितलियां को पकड़ जहा की खुशी ,छिपा-छिपाई रूठना मनाना .... बस आरजू है ,मेरी ऐ ज़िदगी वो पल बचपन के लौटा दो हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 16 Feb 2022 09:44 PM PST वे हमें अपना चारा समझने लगेजबसे हमने उन्हें भाई,बहन माना, वे हमें अपना चारा समझने लगे, हमने पिलाया उन्हें अपने हिस्से का दूध, वे अब हमसे हीं लडऩे,झगड़ने लगे। जबसे हमने उन्हें...। समझते हैं वे खुद को पाक-साफ, आकर मेरे घर को नापाक करने लगे, उस मालिक ने पढ़ाया अहिंसा का पाठ, पर वे सबसे दंगा-फसाद करने लगे। जबसे हमने उन्हें...। नहीं पता उन्हें मानवता,धर्म का अर्थ, वे असत्य,हिंसा को धर्म समझने लगे, कभी दी थी उन्हें अपने घर में पनाह, अब वे हमारे धर को अपना घर समझने लगे। जबसे हमने उन्हें...। वे समझते हैं खूद को दुनियाँ में सर्वश्रेष्ठ, दुसरों को काफिर,जाहिल कहने लगे, करते हैं वे नारियों, निहत्थे पर सितम, अब अपने आपको वे शेर समझने लगे। जबसे हमने उन्हें...। नहीं दिखता उनमें इंसानियत-भाईचारा, खूद को ये हत्यारा साबित करने लगे, तबाह है दुनियाँ इनकी कट्टरता से, उपरवाला भी खूद को गुनाहगार समझने लगे। जबसे हमने उन्हें...। कौन देगा इन्हें अपने गाँव,धर में पनाह, पनाहगार पर हीं अब खंजर करने लगे, नहीं पता इन्हें क्या होता है मानव धर्म, अपनी जाहिलपन को धर्म समझने लगे। जबसे हमने उन्हें...। --------0------- अरविन्द अकेलाहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मटकोर के दौरान कुंए का स्लैब टूटने से 13 की मौत Posted: 16 Feb 2022 09:21 PM PST मटकोर के दौरान कुंए का स्लैब टूटने से 13 की मौतदेवरिया ब्यूरो वेद प्रकाश तिवारी की खबर । कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के नौरंगिया में मटकोड़ करने गई महिलाओं के साथ दर्जनों किशोरियां व बच्चे लौटते समय कुएं में गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में 13 की मौत हो गयी है। जिला अस्पताल पर रात में इतनी भीड़ जुट गयी कि कर्मचारी नाम-पता तक नहीं दर्ज पाया। सभी शव मोर्चरी भेज दिए गए। शेष को नेबुआ नौरंगिया सीएचसी पर इलाज के बाद घर भेजा गया। सीएमओ डॉ सुरेश पटारिया ने बताया कि 11 शव जिला अस्पताल पहुंचे थे और दो और शवों के आने की सूचना है। थानाक्षेत्र के नौरंगिया के स्कूल टोला निवासी परमेश्वर कुशवाहा के पुत्र की बृहस्पतिवार को शादी है। वैवाहिक रस्म के क्रम में महिलाएं हल्दी की रस्म अदायगी के दौरान गांव में बाहर मटकोर करने गई थीं और उनके साथ बच्चे भी गए थे। लौटते समय रात हो गयी। रास्ते में भीड़ अधिक थी। महिलाएं और किशोरियां नाचते गाते हुए लौट रही थीं। दो-तीन बच्चे भी थे। गांव में आने का रास्ता संकरा है और किनारे गहरा कुआं है। इस पर बीस साल पहले स्लैब पड़ी थी। जगह न मिलने से कुछ बच्चे व महिलाएं कुएं पर चढ़ गए। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 16 Feb 2022 09:18 PM PST शाकद्वीपीय भाषण प्रतियोगिता 2022 के परिणाम घोषित :: ऋषभ भारद्वाज को प्रथम एवं आर्या मिश्रा को द्वितीय स्थान|सामाजिक संस्था 'भास्कर दिल्ली' द्वारा सूर्यसप्तमी के अवसर पर आयोजित 'शाकद्वीपीय भाषण प्रतियोगिता 2022' का परिणाम घोषित कर दिया गया है। फेसबुक लाइव के जरिये जारी किए गए परिणाम की जानकारी देते हुए संस्था प्रवक्ता श्री विवेका नन्द मिश्र ने बताया कि पटना के ऋषभ भारद्वाज एवं पटना की ही आर्या मिश्रा को क्रमशः प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त हुए हैं । इसीप्रकार जोधपुर की कनक शर्मा एवं जमशेदपुर की शुभा को संयुक्त रूप से तृतीय स्थान मिला है। ज्ञातव्य है कि 'सूर्य सप्तमी और हम' विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता के लिए देश के कुल 22 प्रतिभागियों के वीडियो भाषण को मूल्यांकित करने के लिए अलग-अलग राज्यों की कुल सात शाकद्वीपीय विभूतियों को निर्णायकमण्डल में आमंत्रित किया गया था । निर्णायकमण्डल के द्वारा दिये गए अंकों के साथ ही वीडियो के फेसबुक व्यूज़ को भी परिणाम का आधार बनाया गया। निर्णायकमण्डल में बैंगलोर से डॉ मदन मोहन तरुण, पटना से शास्त्रोपासक डॉ चन्द्रभूषण मिश्र, जमशेदपुर से डॉ सत्य नारायण पाण्डेय, वाराणसी से डॉ सत्येन्द्र मिश्र ,दिल्ली से प्रोफेसर सिद्धार्थ मिश्र, जयपुर से प्रोफेसर नन्द किशोर पाण्डेय तथा भोपाल से डॉ अजय मिश्र के नाम शामिल हैं । परिणाम के लिए आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में संस्था भास्कर के महामंत्री श्री शशि रंजन मिश्र ने परिणाम के लिए अंक गणना की बारीकियों पर प्रकाश डाला तो वहीं अध्यक्ष श्री प्रणव कुमार मिश्र ने संस्था भास्कर की कार्यप्रणाली की चर्चा करते हुए आभार ज्ञापन किया ।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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