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Thursday, February 3, 2022

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शरीर में सही तरीके से नहीं पहुंच रहा खून तो पेरिफेरल धमनी रोग से पीड़ित हैं आप

Posted: 03 Feb 2022 12:51 AM PST

शरीर में सही तरीके से नहीं पहुंच रहा खून तो पेरिफेरल धमनी रोग से पीड़ित हैं आप

शरीर में खून के प्रवाह का सुचारू होना स्वस्थ होने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण स्थिति है। वह खून ही है जो पूरे शरीर में निरंतर बहता रहता है और हर अंग तक ऑक्सीजन के साथ-साथ ताकत भी पहुंचाता है। खून के बहाव की इस प्रक्रिया में आने वाली रुकावट का असर गंभीर हो सकता है और ऐसी ही एक स्थिति बनती है पेरिफेरल आर्टरी या आर्टरियल डिसीज के अंतर्गत। परिफेरल आर्टरी को पेरिफेरल धमनी रोग भी कह सकते हैं। यह समस्या ऐसे रूप में भी सामने आ सकती है जिसे आमतौर पर लोग सामान्य दर्द या तकलीफ समझकर नजरअंदाज कर सकते हैं। सही समय पर इसका इलाज मिलने से स्थिति को गंभीर या जानलेवा होने से रोका जा सकता है। जानिए परिफेरल आर्टरी रोग के बारे में, कैसे होता है यह रोग, पेरिफेरल आर्टरी के लक्षण, बचाव और इलाज के तरीके।

पेरिफेरल आर्टरी डिसीज क्या है

पेरिफेरल आर्टरी डिसीज या पीएडी वह स्थिति है जिसमें शरीर में खून ले जाने वाली धमनियां (नलिकाएं) संकरी हो जाती हैं और पर्याप्त मात्रा में खून शरीर के बाहरी अंगों तक नहीं पहुंचा पाता। ये बाहरी अंग मुख्यतौर पर बांहें और पैर होते हैं। जब खून इन अंगों तक नहीं पहुंचता तो धीरे-धीरे दिक्कत होना शुरू होती है। चलने-फिरने या इन अंगों को हिलाने-डुलाने पर होने वाला क्रैम्प या दर्द का झटका जो आराम करने पर ठीक हो जाए, इस समस्या का एक प्रमुख लक्षण हो सकता है। चूंकि शुरुआत में दर्द आराम करने पर ठीक हो जाता है इसलिए लोग इसे सामान्य मांसपेशियों या हड्डियों का दर्द समझकर नजरअंदाज करते हैं या इन्हीं समस्याओं का इलाज लेने लगते हैं। इससे समस्या और भी बढ़ने की नौबत आ जाती है।

पेरिफेरल आर्टरी रोग के लक्षण

बाहों और पैरों में दर्द इस समस्या का आम लक्षण होता है लेकिन इसके अलावा अन्य अंगों में भी इसका दर्द उभर सकता है। सिर और पेट के साथ ही कई बार किडनी तक में दर्द इस समस्या की वजह से हो सकता है। चूंकि यह दर्द इस तरह का होता है कि अधिकांश लोग इसे अन्य समस्याओं जैसे ऑर्थोपीडिक यानी हड्डियों की तकलीफ, मांसपेशियों का दर्द या पेट की समस्या, आदि समझने लगते हैं। इसलिए अक्सर इसके सही इलाज तक पहुंचने में समय लग जाता है। इलाज में अधिक समय लगने या इलाज न लेने से हार्ट अटैक सहित स्ट्रोक या कई बार हाथ-पैर को शरीर से अलग करने की नौबत भी आ सकती है।

खान-पान और आदतें बन सकती हैं दुश्मन:

इस समस्या के लिए मुख्यतः असंतुलित खान-पान, सिगरेट की लत और खराब रूटीन जिम्मेदार होता है। खून के बहाव में बाधा बनकर जमा होने वाला फैट और कोलेस्ट्रॉल खास दुश्मन होते हैं। ये दुश्मन लगातार स्मोकिंग करने भी शरीर में इकट्ठे हो सकते हैं, फिर भले ही आप रोज एक्सरसाइज करते हों या फिटनेस का ध्यान रखते हों, आपकी एक बुरी आदत खतरा पैदा कर सकती है। कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि खून की नलियों में प्लाक का जमा होना और इस बीमारी का शरीर में आकार लेना एक धीमी प्रक्रिया है जो कि कई बार बचपन से भी शुरू हो सकती है। इसके अलावा कभी बाँहों या पैरों में लगी चोट, ब्लड वेसल्स यानी खून की नालियों में सूजन या किसी प्रकार का संक्रमण, किसी रेडिएशन के सम्पर्क में लम्बा समय बिताना या मांसपेशियों या लिगामेंट्स के आकार का असामान्य होना, आदि भी इस समस्या का कारण हो सकता है। किसी भी प्रकार के हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा ग्रस्त और फिजिकली एक्टिव न रहने वालों में इस बीमारी की आशंका अधिक हो सकती है।

दर्द पर ध्यान दें:

पीएडी का दर्द धीरे धीरे बढ़ता है लेकिन क्रैम्प्स की तरह होता है। ठीक जैसे पेट में समस्या होने पर ऐंठन या मरोड़ होती है। यह पिंडली (पैरों में) सबसे आम होता है लेकिन कूल्हों, जाँघों और कुछ मामलों में पैरों के निचले हिस्से में भी उभर सकता है। बीमारी के बढ़ने पर कई अन्य लक्षण भी सामने आने लगते हैं, जैसे पैरों के रंग में बदलाव, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (यह ज्यादातर डायबिटिक पुरुषों में होता है), पैरों में कमजोरी, जलन या सुन्न होने का एहसास, चलने पर थकान का महसूस होना, पैरों का बांहों से ज्यादा ठंडा महसूस होना या एक पैर का दूसरे से अधिक ठंडा महसूस होना, पैरों पर के बालों का झड़ना, पैरों की त्वचा का अधिक चमकदार दिखना, पैरों के नाखूनों की धीमी बढ़त या पैरों के घाव जो जल्दी ठीक न हों, आदि।

जांच कराएं और पता लगाइए:

यदि लक्षण सामने आते हैं तो उन्हें नजरअंदाज न करें, एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण करने के अलावा खून की जांच, अल्ट्रासाउंड, एंजियोग्राफी या एंकल- ब्रैकियल इंडेक्स (पैर और बांह के ब्लड प्रेशर का तुलनात्मक अध्ययन) आदि करवाने की सलाह दे सकते हैं। ज्यादातर शुरूआती मामलों में दवाइयों, नियमित दिनचर्या और खान-पान में परिवर्तन से आराम मिल जाता है। आप अपनी दिनचर्या फिर से सामान्य बना सकते हैं। तकलीफ के बढ़ जाने पर एंजियोप्लास्टी या सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। अच्छी बात यह है कि इलाज के साथ आप अपने रूटीन की ओर धीरे-धीरे लौट सकते हैं। जरूरत होती है अपनी दिनचर्या, खान-पान और वजन को संतुलित रखने की। इसके साथ ही सिगरेट को पूरी तरह छोड़ देने की भी। इसलिए समय पर इलाज लें और वापस सामान्य जीवन की ओर लौटें।

बचाव के लिए ये करें:

एक अच्छी और पौष्टिक डाइट हमेशा अच्छे नतीजे देती है लेकिन इसके साथ सही रूटीन जिसमें सोने-जागने का समय, फिजिकल एक्टिविटी का समय हो और साथ ही मेडिटेशन जैसे तरीकों को अपनाना भी बीमारी से दूर रहने में बहुत मदद कर सकता है। स्ट्रेस दूर रहने और धूम्रपान को त्यागने से भी आप गंभीर खतरों से बच सकते हैं। अच्छी आदतों के बाद अगर बीमारी होती भी है तो आपको जल्दी रिकवर होने और फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने में बहुत मदद मिलती है। इसी तरह यदि घर-परिवार में पहले से कोई इस समस्या या अन्य किसी समस्या से ग्रसित है तो परिवार के सभी सदस्यों की सालाना जांच भी बचाव में बहुत मददगार साबित होती है।

क्या आप भी नींद की समस्या से रहते हैं परेशान? बस ये काम कर लें, दूर हो जाएगी दिक्कत

Posted: 03 Feb 2022 12:48 AM PST

क्या आप भी नींद की समस्या से रहते हैं परेशान? बस ये काम कर लें, दूर हो जाएगी दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद न आने या पर्याप्त नींद की कमी के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो ऊर्जा की कमी और तनाव-थकान महसूस होती है। इसके अलावा नींद पूरी न होने का असर हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को रोजाना पर्याप्त नींद लेना अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए। यदि आप भी नींद न आने की समस्या के शिकार हैं तो आइए आगे की स्लाइडों में उन उपायों के बारे में जानते हैं जो आपकी इस परेशानी को दूर कर सकते हैं।

नींद न आने के कारण होने वाली समस्याएं
अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है, समय के साथ उनकी इम्युनिटी कमजोर होती जाती है। इसके अलावा नींद की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर होता है, लोगों को तनाव-चिंता और अवसाद की समस्या बनी रह सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद न पूरी होने से आपके कार्य करने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर हो सकता है और यह जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है।

खान-पान का रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारा भोजन नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए। जंक फूड के सेवन से नींद में खलल पड़ सकती है। ज्यादा तला हुआ और जंक फूड का सेवन कम करें, इससे रात को अच्छी नींद लेने में मदद मिलेगी। इसके अलावा कैफीनयुक्त चीजें जैसे चाय, कॉफी आदि आपकी नींद को प्रभावित करती है, इनका भी कम से कम सेवन करें।

गैजेट्स का इस्तेमाल कम करें
मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। हमारे फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी नींद से संबंधित विकारों का कारण बन सकती है। अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए सोने से कुछ घंटे पहले तक इन उपकरणों का उपयोग करने से बचें।

योग और अभ्यास
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को नींद की समस्या बनी रहती है उनके लिए योग और कुछ प्रकार के मेडिटेशन अभ्यास फायदेमंद होते हैं। योग या ध्यान मुद्रा आपको रात की अच्छी नींद प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। मेडिटेशन के अभ्यास से मन शांत रहता है जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

वजन कम करने के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ऐसी गलतियां

Posted: 03 Feb 2022 12:45 AM PST

वजन कम करने के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ऐसी गलतियां

स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए वजन का नियंत्रित रहना सबसे आवश्यक माना जाता है। वजन बढ़ने के कारण तमाम तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हृदय रोग, डायबिटीज और रक्तचाप जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे अधिक वजन को मुख्य कारक माना जाता है। हालांकि वजन कम करना कुछ लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है जब आपको लगे कि आपकी जीवनशैली तो स्वस्थ है फिर भी आपका वजन बढ़ रहा है। इसके अलावा कुछ लोग वजन को तेजी से कम करने के लिए कई ऐसे तरीकों को प्रयोग में लाना शुरू कर देते हैं, जिससे शरीर को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वजन कम करना बहुत आवश्यक माना जाता है पर ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि वजन कम करने के लिए हम कहीं गलत तरीकों को तो प्रयोग में नहीं ला रहे हैं? वजन घटाने के लिए डाइटिंग करने और दवाइयों के सेवन जैसी आदतों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए हानिकारक मानते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही कुछ चीजों के बारे में जानते हैं जिन्हें अक्सर लोग प्रयोग में लाते हैं पर सेहत को इससे गंभीर नुकसान होने का भी जोखिम हो सकता है।

भोजन बिल्कुल भी न छोड़ें अगर आप सोचते हैं कि नाश्ता या दोपहर का भोजन छोड़ना कैलोरी कम करने का एक शानदार तरीका है, तो सावधान, यह तरीका फायदे की जगह नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा समय तक भूखे रहने से सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है। इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है जो शरीर में कई गंभीर तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है। वजन कम करने के लिए भोजन को संयमित करें, छोड़ें नहीं।

बहुत अधिक व्यायाम माना जाता है कि नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करने में मदद मिलती है। पर इस चक्कर में कहीं आप बहुत अधिक व्यायाम तो नहीं कर रहे हैं। बहुत अधिक व्यायाम करने से शरीर में इंजरी और मांसपेशियों को दिक्कत हो सकती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना 40-60 मिनट का व्यायाम पर्याप्त माना जाता है। बहुत अधिक व्यायाम करने से शरीर को क्षति हो सकती है।

प्रोटीन और फैट का सेवन कम कर देना शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए तमाम तरह के पोषक तत्वों से भरपूर आहार की आवश्यकता होती है। वजन कम करने की कोशिश में लगे लोग अक्सर प्रोटीन और फैट का सेवन कम कर देते हैं। हालांकि इस आदत को स्वास्थ्य विशेषज्ञ नुकसानदायक मानते हैं। शारीरिक गतिविधि के साथ आहार प्रोटीन और फैट की संतुलित मात्रा आवश्यक होती है। वयस्कों को रोजाना कम से कम 47 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। शरीर में इऩ पोषक तत्वों की कमी के कारण कई तरह की अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

हिमाचल: 5 फरवरी से आयोजित होने वाली सेना भर्ती रैली स्थगित

Posted: 03 Feb 2022 12:36 AM PST

हिमाचल: 5 फरवरी से आयोजित होने वाली सेना भर्ती रैली स्थगित

सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बुरी खबर हैं। क्योंकि सेना भर्ती कार्यालय हमीरपुर के माध्यम से होने वाली भर्ती रैली को स्थगित कर दिया गया है। यह भर्ती रैली हिमाचल के तीन जिलों हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर के युवाओं के लिए 5 से 20 फरवरी तक आयोजित की जानी थी।

इस बारे में जानकारी देते हुए सेना भर्ती कार्यालय हमीरपुर के निदेशक कर्नल संजीव कुमार त्यागी ने बताया कि कोरोना संकट के कारण यह भर्ती रैली स्थगित की गई है। उन्होंने बताया कि भर्ती रैली की नई तिथि बाद में घोषित की जाएगी।

शिमला में बेटे को गोद में बैठाकर खाना खिला रही थी मां के ऊपर गिरा पेड़, दोनों की मौत

Posted: 03 Feb 2022 12:28 AM PST

शिमला में बेटे को गोद में बैठाकर खाना खिला रही थी मां के ऊपर गिरा पेड़, दोनों की मौत

हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़िला में दर्दनाक हादसा हुआ है. हादसे में मां और बेटे की मौत हो गई. शिमला के नागरिक उपमंडल चौपाल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पुजारली में पेड़ कटान के दौरान यह घटना पेश आई है और महिला और बच्चे की मौक़े पर ही मौत हो गई है.

जानकारी के अनुसार पुजारली ग्राम पंचायत में किरी के जंगलों में प्राइवट सेल के तहत चिड़ के पेड़ों के कटान का कार्य चल रहा था. इस कार्य में एक निजी ठेकेदार के क़रीब 15 लोग काम कर रहे थे. दोपहर के समय माँ-बेटा जंगल में बैठकर खाना खा रहे थे कि अचानक चिड़ का पेड़ गिर गया और दोनों उसकी चपेट में आ गए. इस दर्दनाक हादसे में माँ और बेटा दोनों ने मौक़े पर ही दम तोड़ दिया.

30 साल की मौत और 3 साल का बेटा मारे गए मृतकों की पहचान रीना देवी (30) पत्नी राजेश कुमार एवं जितेश (3) पुत्र राजेश कुमार निवासी गाँव दियोठ तहसील बरोट ज़िला काँगड़ा के रूप में हुई है. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल नेरवा लाया गया था. मृतकों के परिजनों को चौपाल के एसडीएम चेत सिंह द्वारा 10-10 हज़ार की फ़ौरी राहत प्रदान की गई है.

पुलिस ने केस दर्ज किया पुलिस थाना नेरवा के प्रभारी जयंत करुण गौतम ने पुष्टि करते हुए बताया की मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले किया गया है. मामले को लेकर नियमानुसार एफ़आईआर दर्ज करके तफ़तीश की जा रही है.

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