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- 20 मार्च- मध्य प्रदेश की राजनीति में बॉसिज़्म के नुकसान याद करने का दिन - MP politics history
- मध्य प्रदेश चुनाव 2023- क्या भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन होगा, पुत्र के लिए कितने नेता कुर्सी छोड़ेंगे - MP BJP NEWS
- NICE 2022- राष्ट्रीय वर्ग पहेली प्रतियोगिता, रजिस्ट्रेशन शुरू, यहां क्लिक कीजिए
- मीना-मीणा विवाद एक बार फिर चर्चा में- संसद में भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट की- India National News
- SGSITS INDORE का TIMETABLE घोषित, परीक्षाएं 12 अप्रैल से
| 20 मार्च- मध्य प्रदेश की राजनीति में बॉसिज़्म के नुकसान याद करने का दिन - MP politics history Posted: 19 Mar 2022 11:38 PM PDT भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति के इतिहास में 20 मार्च 2020 का दिन कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस दिन मध्यप्रदेश में ऐसा हुआ, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। जो मध्य प्रदेश की राजनीतिक संस्कृति की पहचान के विरुद्ध था, परंतु फिर भी जनता ने इसे स्वीकार किया और उपचुनाव में मोहर लगाई। मध्यप्रदेश में राजनीति करने वालों और राजनीति के विद्यार्थियों के लिए 'कमलनाथ का तख्तापलट' सबसे महत्वपूर्ण केस स्टडी है, क्योंकि यह मध्य प्रदेश की राजनीति में लोकतंत्र के अपहरण का नहीं बल्कि बॉसिस्म के नुकसान का मामला है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस नहीं कमलनाथ का तख्तापलट हुआ थासभी नेता अपनी-अपनी पार्टी की गाइडलाइन के अनुसार बयान दे रहे हैं। टीवी चैनल पर डिबेट के लिए तटस्थ विशेषज्ञों को आमंत्रित ही नहीं किया जाता। इसलिए राजनीति के युवा कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को खुद समझना होगा। यहां ध्यान देना होगा कि सन 2018 में मध्य प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पार्टी को जनादेश दिया था लेकिन 20 मार्च 2020 को कांग्रेस की सरकार का नहीं बल्कि कमलनाथ का तख्तापलट हुआ। जनता की तो भूमिका ही नहीं थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित जितने भी विधायकों ने इस्तीफा दिया। वह सभी कमलनाथ से नाराज थे। इस घटनाक्रम के बाद भी, कांग्रेस पार्टी में जितने इस्तीफे हुए। उनमें से ज्यादातर कमलनाथ से नाराज थे। मध्यप्रदेश में किसी भी प्रकार के वाद और अहंकार की राजनीति नहीं चलतीकिसी भी प्रकार का अध्ययन, परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए, अनुमानों के आधार पर नहीं। सन 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जातिवाद की राजनीति की थी। उनका कॉन्फिडेंस लेवल 100% पर था। चुनाव प्रचार के दौरान भी दिग्विजय की विजय सुनिश्चित लग रही थी लेकिन जनता ने प्रमाणित किया कि जातिवाद की राजनीति से चुनाव में जीत की रणनीति, कॉन्फिडेंस नहीं ओवरकॉन्फिडेंस होती है। भाजपा ने उमा भारती को अपना चेहरा बनाया था। दस्तावेज गवाह हैं, लोगों ने लोधी समाज की महिला नेता को वोट नहीं दिया। उमा भारती को भी वोट नहीं दिया। दिग्विजय सिंह के खिलाफ वोट किया था, लेकिन उमा भारती को जीत का अहंकार हो गया। पार्टी ने समझाने की कोशिश की लेकिन नहीं मानी। अलग पार्टी बना ली। क्या हुआ सबको पता है। 2018 के चुनाव प्रचार के दौरान शिवराज सिंह के बयान भी अहंकारी थे। मेरी सरकार। मैं करूंगा। मैंने किया। इस तरह के बयान दे रहे थे जैसे मध्य प्रदेश में विकास सरकारी खजाने से नहीं शिवराज सिंह चौहान के फार्म हाउस की कमाई से हो रहा हो। कमलनाथ ने राउंड टेबल पर भले ही जाति और संप्रदाय के आधार पर रणनीति बनाई हो लेकिन जनता ने व्यापम घोटाला, अस्पतालों में घटिया इंतजाम, बड़े अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की बदतमीजी और सरकारी स्कूलों की फेल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ वोट किया था, लेकिन कमलनाथ को लगा कि उनके मैनेजमेंट से चुनाव जीत गए हैं। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ साहब हो गए। जनता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित नहीं की। प्रचार अभियानों, बयानों और भाषणों में विनम्रता के बजाय खुद को 40 साल का अनुभवी महान नेता बताने की कोशिश की गई। जनता के बीच प्रचार किया गया कि मध्य प्रदेश की जनता भाग्यशाली है जो कमलनाथ जैसा नेता उनका नेतृत्व करने के लिए आया है। चलो-चलो, वाक्य सीएम हाउस में चारों तरफ गूंजता रहता था। यही कारण रहा कि 2020 में तख्तापलट के बाद जब उपचुनाव हुए तो कमलनाथ के उम्मीदवार उन सीटों पर चुनाव हार गए जहां से 2018 में कांग्रेस पार्टी चुनाव जीती थी। स्पष्ट दिखाई देता है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी और कमल नाथ पार्टी दोनों अलग-अलग हैं। यह भी सब जानते हैं कि कमलनाथ के पास कांग्रेस पार्टी के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं। फिर भी ग्राउंड जीरो पर कांग्रेस का अस्तित्व दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश में तख्तापलट के बाद उपचुनाव से क्या सीखाएक बात फिर से स्पष्ट हो गई है। मध्य प्रदेश की जनता किसी भी प्रकार के वाद का समर्थन नहीं करती। फिर चाहे वाद की राजनीति सत्ता पक्ष की ओर से हो रही हो या फिर विपक्ष की ओर से। मध्य प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री के पद पर एक विनम्र व्यक्ति को देखना चाहती है। जो जनता की आवाज सुने और यदि गलत तरीके से सही बात कही जा रही हो तो उसे भी स्वीकार करें। मध्यप्रदेश के सर्वोच्च शिखर पर जनता के प्रति अहंकार अस्वीकार कर दिया गया है। मध्य प्रदेश की जनता अच्छी निशुल्क शिक्षा, अच्छी निशुल्क चिकित्सा और सरकारी नौकरी चाहती है। कमलनाथ की बड़ी गलतियां
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| Posted: 19 Mar 2022 11:02 PM PDT भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के सर्वमान्य नेता नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पिता और पुत्र दोनों को चुनावी राजनीति में शामिल नहीं होने देंगे। स्थिति इससे पहले भी स्पष्ट थी। मध्यप्रदेश में आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिलाने के लिए कैलाश विजयवर्गीय को सत्ता छोड़ संगठन की सेवा में जाना पड़ा था। अब सवाल यह है कि क्या 2023 के चुनाव में भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन होगा। अपने पुत्र के लिए कितने नेता कुर्सी छोड़ेंगे। कैलाश विजयवर्गीय- बलिदान दे चुके हैं, लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे परंतु अब संगठन का काम करेंगे। शिवराज सिंह चौहान- बलिदान नहीं देंगे, पिछले चुनाव में कार्तिकेय ने त्याग का ऐलान कर दिया था। उन्हें भाजपा में ना तो कोई पद चाहिए और ना ही टिकट। वह अपने पिता और किरार समाज के लिए काम कर रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया- महाआर्यमन सिंधिया अपने जन्मदिन के मौके पर कुर्ता पहन चुके हैं। ग्वालियर के महल जय विलास पैलेस से ऐलान हो चुका है। किसी ऐसे सीट की तलाश की जा रही थी जहां से रिकॉर्ड मतों से युवराज की जीत सुनिश्चित की जा सकती। देखना रोचक होगा कि अब महाराज क्या करेंगे। गोपाल भार्गव- सिर्फ एक ही सपना था। हाथ पकड़ कर अपने बेटे को विधानसभा में ले जाएं। अब तो उम्मीद भी टूट गई है। अभिषेक भार्गव को चुनाव लड़ाया तो हो सकता है विधायक बन जाए लेकिन मंत्री पद नहीं मिलेगा। 2023 में गोपाल भार्गव को टिकट मिलेगा या नहीं, इसको लेकर भी कंफ्यूजन है। नरोत्तम मिश्रा- प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता कि अपने पुत्र शुक्रण मिश्रा के लिए सत्ता में अपनी पोजीशन छोड़ दी जाए। मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। चिरंजीव को इस बार भी बैक ऑफिस संभालना पड़ेगा। नरेंद्र सिंह तोमर- अपने बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार कर रहे हैं। जिस दिन पार्टी या फिर परिस्थितियां चुनावी राजनीति से बाहर करेंगी, उस दिन देवेंद्र प्रताप को आगे कर दिया जाएगा। प्रभात झा- बलिदान का प्रश्न ही नहीं उठता, पार्टी ने रिटायर कर दिया है। संगठन का काम कर रहे हैं। अब तो सिर्फ एक मनोकामना है। सुपुत्र तुष्मुल झा के लिए कुछ अच्छा हो जाए। टिकट मिले ना मिले, लेकिन पावर मिल जाए। तुलसी सिलावट- भाजपा में 5 साल पूरे नहीं हुए। वैसे भी टिकट का फैसला महाराज को करना है। दरबार में नीतीश सिलावट की उपस्थिति बनी रहे इतना ही काफी है। मौका लगा तो इंदौर नगर निगम का दांव खेलेंगे। गोविंद सिंह राजपूत- यहां भी फैसला महाराज को करना है। सुपुत्र आकाश सिंह राजपूत को जनपद पंचायत या जिला पंचायत में अध्यक्ष पद मिल जाए। बस इतनी ही तमन्ना है। गौरीशंकर शेजवार- चुनावी युद्ध में शहीद हो चुके हैं। 2018 के चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय की तरह इन्होंने भी अपने बेटे मुदित शेजवार को अपने हिस्से का टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया था, लेकिन शायद होमवर्क पक्का नहीं था। पहले ही इलेक्शन में मुदित भैया का पॉलीटिकल एनकाउंटर हो गया। अब तो सांची सीट पर डॉक्टर प्रभु राम चौधरी का कब्जा है। गौरीशंकर बिसेन- अपनी बेटी मौसम बिसेन के टिकट के लिए लंबे समय से लॉबिंग कर रहे हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में काफी किरकिरी हो गई थी। इस बार भी प्रयास करेंगे। बाकी फैसला पार्टी को करना है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें. |
| NICE 2022- राष्ट्रीय वर्ग पहेली प्रतियोगिता, रजिस्ट्रेशन शुरू, यहां क्लिक कीजिए Posted: 19 Mar 2022 09:26 PM PDT NATIONAL INTER-COLLEGE CROSSWORD EXPEDITION के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। नेशनल क्रॉसवर्ड कंपटीशन तीन चरण में पूरा किया जाएगा। प्रारंभ के सभी चरण ऑनलाइन होंगे जबकि फाइनल राउंड ऑफलाइन होगा। इस प्रतियोगिता में जीतने से ज्यादा जरूरी है पार्टिसिपेट करना। मान्यता है कि जो स्टूडेंट्स इस प्रतियोगिता में क्वालीफाई कर जाते हैं उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं को क्वालीफाई करना बहुत आसान होता है। National Inter-college Crossword Expedition 2022नेशनल इंटर कॉलेज क्रॉसवर्ड अभियान, 1 नेशनल लेवल का कॉन्टेस्ट है। जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तुत किया गया है। भारत के सभी कॉलेज स्टूडेंट्स इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए लिंक ओपन कर दी गई है। NICE 2022 के लिए ऑफिशल वेबसाइट पर विजिट करके प्रतियोगिता के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। विजेताओं को ट्रॉफी के साथ नगद पुरस्कार दिए जाएंगे। स्टूडेंट्स को किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचाने के लिए हम डायरेक्ट लिंक उपलब्ध करा रहे हैं। यहां क्लिक करके National Inter-college Crossword Expedition 2022 की गाइडलाइन और खेल के नियम पढ़ सकते हैं। इसी पेज पर रजिस्ट्रेशन के लिए विकल्प उपलब्ध है। रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और इसी पेज पर लॉगइन करके यूजीसी राष्ट्रीय वर्ग पहेली प्रतियोगिता खेल सकते हैं। उच्च शिक्षा, सरकारी और प्राइवेट नौकरी एवं करियर से जुड़ी खबरों और अपडेट के लिए कृपया MP Career News पर क्लिक करें. |
| मीना-मीणा विवाद एक बार फिर चर्चा में- संसद में भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट की- India National News Posted: 19 Mar 2022 08:35 PM PDT नई दिल्ली। राजस्थान में मीना और मीणा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। संसद सदस्य डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने राज्यसभा में अतारांकित प्रश्न पूछा था। जिसके जवाब में जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री विश्वेश्वर टुडू ने सारी स्थिति को एक बार फिर स्पष्ट किया है। मीना और मीणा जातियों में क्या अंतर है- राजस्थान जनरल नॉलेजभारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से संसद में स्थिति स्पष्ट करते हुए राज्य मंत्री श्री विश्वेश्वर टुडू ने अतारांकित प्रश्न संख्या 1734 का उत्तर दिनांक 16 मार्च 2022 को दिया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम 1976 (1976 का अधिनियम संख्या 108) के तहत भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत राजस्थान राज्य की अनुसूचित जनजाति सूची में MINA समुदाय को क्रम संख्या 9:00 पर सूचीबद्ध किया गया है। इस आदेश के हिंदी संस्करण में MINA का अनुवाद मीना के रूप में किया गया था। तथापि मीणा (MEENA) समुदाय राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल नहीं है। Rajasthan reservation current affairsराजस्थान राज्य सरकार ने दिनांक 23 अक्टूबर 2020 को (ई-मेल) पत्र दिनांक 5 अक्टूबर 2020 के माध्यम से राजस्थान के मीना (MINA)/ मीणा (MEENA) समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा। राज्य सरकार को सूचित किया गया कि यदि राज्य सरकार का यह विचार है कि राजस्थान में अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन की आवश्यकता है, तो उनके द्वारा मौजूद कार्यप्राविधियों के अनुसार, उनके मानव जाति विज्ञान अध्ययन सहित एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाना आवश्यक है। दिनांक 16 मार्च 2022 तक राजस्थान सरकार की तरफ से इस दिशा में कोई नई कार्यवाही नहीं हुई। उच्च शिक्षा, सरकारी और प्राइवेट नौकरी एवं करियर से जुड़ी खबरों और अपडेट के लिए कृपया MP Career News पर क्लिक करें. |
| SGSITS INDORE का TIMETABLE घोषित, परीक्षाएं 12 अप्रैल से Posted: 19 Mar 2022 08:06 PM PDT इंदौर। Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science द्वारा टाइम टेबल घोषित कर दिया गया है। परीक्षाएं 12 अप्रैल से शुरू होंगी और मई के महीने तक संचालित होंगी। श्री गोविन्दराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान द्वारा I YEAR B.Tech./B.E. (4 YDC), I YEAR B.Pharm. (4 YDC), II YEAR B.Tech./B.E. (4 YDC), II YEAR B.Tech./B.E.& B. Pharm. (4 YDC), III YEAR B.Tech./B.E. (4 YDC), III YEAR B.Tech./B.E. &B. Pharma (4 YDC), IV YEAR B.Tech./B.E. (4 YDC), IV YEAR B.Tech./B.E. & B. Pharma (4 YDC), MCA II YEAR, MBA III SEM एवं MBA IV Semester का परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया गया है। इंस्टीट्यूट द्वारा स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा कार्यक्रम में परिवर्तन किया जा सकता है। स्टूडेंट्स SGSITS की ऑफिशल वेबसाइट पर टाइम टेबल देख सकते हैं। सुविधा के लिए हम डायरेक्ट लिंक उपलब्ध करा रहे हैं। यहां क्लिक करके टाइम टेबल देख सकते हैं एवं DOWNLOAD भी कर सकते हैं। उच्च शिक्षा, सरकारी और प्राइवेट नौकरी एवं करियर से जुड़ी खबरों और अपडेट के लिए कृपया MP Career News पर क्लिक करें. |
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