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Friday, March 18, 2022

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल

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कुर्सियाँ खाली नहीं रहतीं

Posted: 18 Mar 2022 07:17 AM PDT

कुर्सियाँ खाली नहीं रहतीं

रामकृष्ण
भले पुतले बदलते हों
दबे कुचले सम्भलते हों
लीक नियमो की बनाते
और उनको कुचलते हों
किंतु अनगढ़  सोंच पर
ताली नहीं बजती!!

मुकुट की जगमग चमक
  कुछ  दे सकेगी क्या
आसरे में  हर शरीरी
करे मी तो क्या
पाक्षदानो की बही
जाली नहीं बनती!!,

मुस्कुराने कै लिए 
अनगिन बहानै हैं
भीड़ से कुछ अलग के
भी तो तराने हैं
किंतु  ओढे त्रासदी
क्या जिंदगी चलती??
रामकृष्ण
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वेदनाओं के भंवर में

Posted: 18 Mar 2022 07:14 AM PDT

वेदनाओं के भंवर में

कब तलक उलझे रहेंगे
भूली बिसरी यादों संग
क्या यूं ही जलते रहेंगे?

जीवन क्या मृत्यु क्या
बैठकर इस पर विचारें
जो दिया ईश्वर ने हमको
आभार कह उसको पुकारें।

ज़िन्दगी एक सफर है
साथ चलते राही अनेकों
सबकी मन्जिल जुदा जुदा
मुकाम आया बिछड़े अनेकों।

हैं सफर के अनुभव अपार
खुशी गम अवसाद प्यार
सीखते हैं हम सफर में
जो अच्छा लगा उसका आभार।

यह सफर की परिणीति है
फूल बगिया में महकते
सुख दुःख खुशी और क्रंदन
बच्चों से ही घर चहकते।

जी रहे बुढ़ापे में बचपन
याद आता सारा लड़कपन
आभार उस सहयात्री का
जिसने सजाया सारा जीवन।

कब हुए थे इतने व्यथित
कब सफर में थे थकित
निराशा भाव से मिला क्या
सोच कर कहना पथिक।

जब जब फंसी कश्ती डगर में
हौसलों की पतवार संग थी
निकाल लाये तूफां से कश्ती
जब कभी वह बीच भंवर थी।

हैं बहुत सी मधुर यादें
उनको ही सम्बल बना लो
तन्हाइयों को कर दो जुदा
स्वप्न में उनसे विदा लो।

है बहुत मुश्किल लगेगा
धार के विपरीत चलना
जो मिला उसमें बहुत कुछ
जो बचा सब मृगतृष्णा।

डॉ अ कीर्ति वर्द्धन 
53 महालक्ष्मी एनक्लेव 
मुज़फ़्फ़रनगर 
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19 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 18 Mar 2022 07:12 AM PDT

19 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

19 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि प्रतिपदा 12:13 PM

🔅 नक्षत्र हस्त रात्रि 12:28

🔅 करण :

                कौलव 11:39 AM

                तैतिल 11:39 AM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग वृद्धि 09:00 PM

🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:02 AM

🔅 चन्द्रोदय 07:07 PM

🔅 चन्द्र राशि कन्या

🔅 सूर्यास्त 05:58 PM

🔅 चन्द्रास्त 06:37 AM

🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:04 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

 शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:33:33 - 12:21:52

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 05:55 AM - 06:43 AM

🔅 कंटक 11:33 AM - 12:21 PM

🔅 यमघण्ट 02:46 PM - 03:35 PM

🔅 राहु काल 08:56 AM - 10:27 AM

🔅 कुलिक 06:43 AM - 07:31 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:10 PM - 01:58 PM

🔅 यमगण्ड 01:28 PM - 02:58 PM

🔅 गुलिक काल 05:55 AM - 07:25 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

🌹विशेष ~ फसली चैत्र मासारम्भ, होलिकोत्सव रंगोत्सव (होली) सर्वत्र, बसन्तोत्सव, होलिका विभूतिधारण। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

19 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज आपका दिन अनुकूलता से परिपूर्ण रहेगा। सभी कार्यों में सफलता मिलने से मन में प्रसन्नता होगी। आर्थिक क्षेत्र में दिन लाभदायक साबित होगा। मित्रों और सगे-सम्बंधियों के साथ मिलने से घरेलू वातावरण उल्लास से भरा रहेगा। उत्तम वस्त्र और भोजन मिलेगा। मित्र वर्ग और शुभेच्छकों की तरफ से भेंट-उपहार मिल सकता है।
शुभ रंग = पींक
शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras): आज के दिन आपको सावधानीपूर्वक चलने की सलाह देते हैं। मन में अनेक प्रकार की चिंता रहेंगी। स्वास्थ्य भी नरम-गरम रहेगा। परिजनों के साथ मनमुटाव के अवसर खड़े होने से मन में ग्लानि होगी। आपके कार्य अधूरे रहेंगे। खर्च की मात्रा बढ़ेगी। उचित पारिश्रमिक न मिलने से निराशा होगी। अविचारी कदम या निर्णय से गलतफहमी न हो इसका ध्यान रखें।
शुभ रंग = श्याम
शुभ अंक : 3

मिथुन (Gemini): आपका दिन विविध लाभों की प्राप्ति करानेवाला साबित होगा। परिवार में पुत्र और पत्नी से लाभ के समाचार मिलेंगे। मित्रों के साथ मुलाकात आपको आनंदित करेगी। व्यापारी वर्ग की आय में वृद्धि होगी। नौकरी में उच्च पदाधिकारियों की कृपादृष्टि रहेगी। विवाहोत्सुक व्यक्तियों को जीवनसाथी मिलने का योग है। आनंददायक प्रवास होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
शुभ रंग = नीला
शुभ अंक : 6

कर्क (Cancer): नौकरी या व्यवसाय करनेवालों के लिए आज का दिन लाभदायक बताते हैं। उच्च पदाधिकारियों की कृपादृष्टि रहने से पदोन्नति की संभावना है। अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मामलों पर खुले मन से चर्चा करेंगे। माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। धन मान-सम्मान के हकदार बनेंगे। गृह-सुशोभन में रुचि लेंगे। वाहन सुख मिलेगा। सांसारिक सुख में वृद्धि होगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

सिंह (Leo): आज का दिन मध्यम फलदायक होगा। आप धार्मिक और मांगलिक कार्यों में उपस्थित रहेंगे। आपका व्यवहार न्यायप्रिय रहेगा। धार्मिक प्रवास का आयोजन होगा। पेट दर्द से परेशान रहेंगे। विदेश में रहनेवाले स्वजनों का समाचार मिलेगा। उच्च पदाधिकारियों के साथ सावधानीपूर्वक बर्ताव करें। नौकरी धंधे में तकलीफ आएगी। संतान की चिंता रहेगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

कन्या (Virgo): आज के दिन नए कार्य शुरू न करने की आपको सलाह देते हैं। बाहर का खाना सेहत खराब कर सकता है। गुस्से की मात्रा अधिक होगी। वाणी पर संयम रखें। पारिवारिक सदस्यों के साथ मनमुटाव हो सकता है। पानी से बचें। हित शत्रुओं से संभलकर रहें। गूढ़ रहस्यमय मामले में अधिक रुचि रहेगी।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 6

तुला (Libra): आपका आज का दिन सफलता और आमोद-प्रमोद से भरा होगा, जिससे पूरे दिन प्रसन्नता का अनुभव होगा। सार्वजनिक जीवन में सफलता और सिद्धि मिलेगी। मौज-मस्ती के पीछे खर्च होगा। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहेगा। उत्तम भोजन और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होगी। प्रणय प्रसंगों के लिए दिन शुभ होगा।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 3



वृश्चिक (Scorpio): आज के दिन कुछ आकस्मिक घटनाएं होंगी। पूर्व निर्धारित मुलाकातें रद्द होने से हताशा और क्रोध आ सकता है। हाथ में आए अवसर निकलते हुए प्रतीत होंगे। पारिवारिक सदस्यों के साथ मतभेद होंगे। ननिहाल पक्ष से कोई समाचार मिलने से मन बेचैन होगा। विरोधी प्रतिस्पर्धियों से संभलने की सलाह देते हैं। आय की अपेक्षा व्यय की मात्रा अधिक रहेगी।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आपका आज का दिन मिश्र फलदायी बताते हैं। आज आपको पेट सम्बंधी समस्याएं होंगी। संतान का स्वास्थ्य और उनकी पढ़ाई चिंता का विषय बनेगा। सफलता न मिलने से क्रोध आएगा जिसपर काबू रखें। प्रिय व्यक्ति के साथ रोमांचक क्षणों का आनंद उठा सकेंगे। साहित्य और लेखन के क्षेत्र में रुचि रहेगी। बौद्धिक चर्चा से दूर रहना हितकर है।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 1

मकर (Capricorn): गणेशजी बताते हैं कि आपका आज का दिन प्रतिकुलताओं से भरा रहेगा, जिससे मन में खिन्नता का अनुभव होगा। शरीर में स्फूर्ति और ताजगी का अभाव रहेगा। सार्वजनिक जीवन में मानहानि होने की संभावना रहेगी। छाती में दर्द रहने की संभावना है। स्त्रियों के साथ काम लेने में अपने को संभालने की सलाह देते हैं।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 6

कुंभ (Aquarius): आज आप तन-मन से प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। मन पर छाए चिंता के बादल दूर होने से उत्साह बढ़ेगा। भाई-बंधुओं के साथ लकर नए आयोजन को हाथ में लेंगे। उनके साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा। लघु प्रयास होंगे। मित्रों तथा स्वजनों के साथ की गई मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी। कार्यक्षेत्र में प्रणालियों द्वारा प्रभावकारी परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

मीन (Pisces): आज वाणी पर संयम रखें। क्रोध के कारण किसी के साथ मनमुटाव होने की संभावना है। शारीरिक कष्ट का अनुभव होगा। विशेष रूप से आंख का ध्यान रखें। पारिवारिक सदस्य और प्रेमीजनों द्वारा घर में विरोध का वातावरण बनेगा। गलत खर्च होगा। नकारात्मक विचार आपके मन पर हावी न हों, इसका ध्यान रखें। खान-पान पर संयम रखें। सोच-समझकर चलें।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) का वह मंदिर जहाँ से होली की शुरुआत हुई, अब खंडहर बन चुका है;:-लेखक - अतुल मालवीय

Posted: 18 Mar 2022 06:54 AM PDT

मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) का वह मंदिर जहाँ से होली की शुरुआत हुई, अब खंडहर बन चुका है;:-लेखक - अतुल मालवीय

क्या बात है कि हस्ती मिटती जा रही है हमारी, क्यों हम नहीं बचा पा रहे नामोनिशां हमारा?
मुहम्मद बिन कासिम ने मुल्तान के सूर्य मंदिर स्थित 330 खजानों से 13300 मन सोना लूटा;
किस तरह "सूफी संस्कृति" सनातन धर्म को नष्ट कर इस्लाम की पोषक बनी?
वर्तमान में पाकिस्तान के अंतर्गत पंजाब का "मुल्तान" (संस्कृत के मूलस्थान का अपभ्रंश) एक समय हिंदू संस्कृति का गढ़ था| इसे कश्यप पुरी भी कहा जाता था| बारहमासी पर्वतीय नदियों से अभिसिंचित इसकी शस्य श्यामला भूमि रत्नगर्भा थी| लहलहाते खेत जैसे सोना उगला करते थे| आर्य संस्कृति जितनी यहाँ फलीफूली, शायद ही अन्यत्र किसी स्थान पर विकसित हुई हो| देवालयों में हो रहे पूजापाठ, घाटों पर स्नान कर चंदन और त्रिपुंड लगाये लोगों की संपन्नता देखते ही बनती| हिंदुओं के इस पवित्र तीर्थस्थान में जब भारत के कोने कोने से यात्री आते तो इस नगर की भव्यता और समृद्धि देखकर ईर्ष्या भी करते और लौटकर अपने अपने नगरों, गाँवों में जाकर इसका बखान करते हुए फूले नहीं समाते थे|
ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए उसके पिता और विष्णु को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझने वाले असुरराज हिरण्यकश्यप ने आग में जलाने के लिए जिस स्थान पर अपनी बहिन "होलिका" को चिता में प्रह्लाद को लेकर प्रवेश कराया वह यहीं मुल्तान में स्थित है| जैसा कि सर्वविदित है "होलिका दहन" की परम्परा की शुरुआत इसी प्रसंग से हुई| भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार द्वारा हिरण्यकश्यप का वध किये जाने के उपरांत "भक्त प्रह्लाद" ने होलिका दहन वाले स्थान पर एक भव्य विष्णु मंदिर का निर्माण कराया जो युगों युगों तक सनातन धर्मियों की श्रद्धा का केंद्र बना रहा|
आठवीं शताब्दी के प्रारंभ से ही अरब से आये बर्बर आक्रमणकारी "मुहम्मद बिन कासिम" ने मुल्तान और सटे हुए सिंध के क्षेत्र पर न सिर्फ हमले किये बल्कि नागरिकों का नरसंहार शुरू कर दिया| हिंदू राजा हुरंकास का बनाया हुआ विशाल प्राचीन "सूर्य मंदिर" इन बर्बर लुटेरों का पहला निशाना बना| तत्कालीन राजा जेसुबिन ने यथाशक्ति इस मंदिर और मुल्तान को बचाने का प्रयास किया परंतु वीरगति को प्राप्त हुए| इतिहासकारों का आकलन है कि इसी सूर्य मंदिर प्रांगण में पानी का एक ऐसा विशाल फव्वारा बना हुआ था जिसकी सैकड़ों धाराएं पैंतीस फुट ऊंचे तक जाकर वापिस आती थीं| मुहम्मद बिन कासिम ने इसी फव्वारे को खोदकर उसके नीचे तीस अलग अलग चैम्बरों में से खज़ाना निकाला तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं| एक दो या सैकड़ों नहीं पूरा तेरह हज़ार तीन सौ मन सोना इन खजानों में से निकला जिसे वर्तमान ईराक के बसरा शहर भिजवा दिया गया|
मूर्तिभंजक बर्बर हमलावरों ने न सिर्फ मुल्तान (मूलस्थान) की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को मटियामेट कर दिया बल्कि वहाँ कत्लेआम मचा दिया| हज़ारों निरीह नागरिक मारे गए, बच्चियों और महिलाओं को अगवा कर लिया गया उन्हें संपत्ति की तरह लूटकर बंटवारा कर लिया, शहर में बलात धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम थोप दिया गया| कहते हैं कि कालान्तर में मुल्तान "सूफी संस्कृति" और विभिन्न सूफी संतों की दरगाहों का एक बड़ा केंद्र बन गया| दरअसल, ये तथाकथित सूफी संत और कोई नहीं बल्कि हिंदुओं का तेज़ी से और अधिकाधिक इस्लाम में धर्मांतरण करवाने वाले चालाक लोग हुआ करते थे| जहाँ मुसलमान हिंदू भक्ति संतों की समाधियों पर जाना पाप समझते हैं वहीं हम हिंदू बड़ी संख्या में, बल्कि मुसलमानों से भी अधिक बढ़चढ़कर उनकी दरगाहों पर अपना माथा घिसते रहते हैं जिन्होंने हमारे धर्म, हमारी संस्कृति को मिटाने में सर्वाधिक सक्रिय भूमिका निभाई|
इतना सब हो जाने के बावजूद भारत की आजादी के समय मुल्तान में लगभग एक चौथाई संख्या हिंदुओं की बची हुई थी, जिनमें से अधिकांश या तो मार दिए गए या किसी तरह अपनी जान बचाकर भारत पलायन कर गए| जो तीन चार प्रतिशत अब भी बाकी रह गए, कालांतर में वे भी हिंसक धर्मपरिवर्तन की भेंट चढ़ गए| एक समय हिंदुओं के बड़े तीर्थस्थल और धार्मिक केंद्र रहे मुल्तान में आज हिंदुओं की संख्या उँगलियों पर गिनने लायक बची हुई है| आजादी के समय तक भक्त प्रह्लाद द्वारा निर्मित "होलिका दहन" के मूलस्थान वाला जो विष्णु मंदिर बचा हुआ था, कालांतर में वह भी अपनी शोभा खोता गया| इसके पराभव का पीड़ादायक चरम देखने को मिला 6 दिसम्बर 1992 के पश्चात जब अयोध्या में विवादित "रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद" ढांचा गिराया गया तब उसकी हिंसक प्रतिक्रिया पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में देखने को मिली| उसी हिंसा की भेंट चढ़ गया ये बचाखुचा "विष्णु मंदिर" जिसे कट्टर जिहादियों ने खंडहर बना दिया|
आज भी इस स्थान पर इक्कादुक्का पुजारी और हिंदू समुदाय के लोग "होलिका दहन" की परंपरा को संगीनों के साये और मार दिए जाने के भय के बीच प्रतीकात्मक रूप से निभाते हैं| आप सभी से निवेदन है कि होली के इस पर्व पर चाहे होलिका दहन हो या रंग खेलना, मुल्तान के इस मूल होलिका दहन वाले स्थान, सूर्य मंदिर और विष्णु मंदिर को मन ही मन अवश्य याद कर लिया करें और साथ ही ये भी याद रखें कि जिस महान संस्कृति पर गर्व करते हुए हम फूले नहीं समाते वह किस तरह नष्ट होती जा रही है, उजड़ती जा रही है, मुल्तान इसका एक उदाहरण मात्र है, ऐसे असंख्य प्रसंग और स्थान हैं| हमें इन सबसे क्या लेना देना या हमें क्या फर्क पड़ता है वाली सोच हम आखिर कब तक रखेंगे?
फिर भी यदि मस्तिष्क की घंटी न बजी हो तो सोशल मीडिया पर होली की शुभकामनाओं के संदेश या कॉपी किये हुए ग्राफ़िक्स सैकड़ों की संख्या में एक दूसरे को भेजते हुए मस्त रहें, लोगों के मोबाइलों की मेमोरी की ऐसीतैसी करते रहें, रंग खेलने के बाद उसे छुड़ाने के लिए साबुन के स्थान पर "मुल्तानी मिट्टी" का प्रयोग करें फिर दारू या भांग के नशे के प्रभाव में गहरी नींद सो जायें| इस विश्वास के साथ कि आपकी त्वचा के साथ साथ हमारी संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी| आखिर पाकिस्तान की विचारधारा के प्रवर्तक, मुस्लिम लीग के संस्थापक और मशहूर शायर "अल्लामा मुहम्मद इकबाल" साहब अपने "कौमी तराने" में लिख गए हैं, जिसे जब सोकर उठें तो प्रेम से बाकायदा तरन्नुम में गाइये, हैंगओवर मिटाने में सहायक होगा –
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी नामों निशाँ हमारा
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

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तुलसी चरित

Posted: 18 Mar 2022 06:43 AM PDT

तुलसी चरित

यूँ तो शिव प्रभाकर ओझा जी से मेरा परिचय बहुत ही पुराना है और मैं उनकी साहित्य साधना से भी परिचित रहा हूँ मगर 'तुलसी चरित' की प्रति प्राप्त होने पर मुझे अत्याधिक ख़ुशी हुयी और उनकी प्रतिभा से साक्षात्कार का एक और अवसर भी प्राप्त हुआ। तुलसी जिन्होंने राम को भगवान राम बनाकर रामचरित मानस के रूप में जगत में अधिष्ठापित किया, उनके जीवन चरित्र को 108 मनकों में पिरोना बहुत ही साधना की बात है। यह काम ओझा जी ने सरलता व कुशलता से संपन्न किया है। मैं अपने मित्र तथा अनुज शिव प्रभाकर ओझा को हार्दिक साधुवाद देता हैं और कामना करता हूँ कि वह निरंतर आगे बढ़ते रहें और साहित्य क्षितिज पर अपना अलग मुकाम बनाने में सक्षम हों।
वंदन 'शिव' सदा तुम्हे, कृपा कीजो नाथ,
आपकी दया रहे, सरस्वती भी हों साथ।
प्रभावान मुखमंडल रहे, दीजो आशीर्वाद,
मुझ दास सिर पर सदा, रहे आपका हाथ।
तुलसी चरित पढ़कर लगा, तुलसी हैं साक्षात,
जन्म से मृत्यु तक कथा, सदा रही विख्यात।
रामचरित मानस रचा, घर- घर में सम्मान,
तुलसी के सम्मुख सभी, संत लगें अज्ञात।
एक सौ आठ मनकों में, 'तुलसी चरित' रच डाला,
जन्म से मृत्यु तलक, जीवन चरित्र बता डाला।
राम-कथा को तुलसी ने, घर- घर तक पहुंचाया,
'ओझा जी' ने तुलसी को ही, मनकों में गढ़ डाला।
रामचरित मानस तुलसी ने, अवधि में गढ़ डाला था,
सरल सहज भाषा में रच, स्वांत सुखाय कह डाला था।
वही भाव प्रबल होकर, शिव प्रभाकर के मन के आये,
हुयी प्रेरणा तुलसी की, तुलसी चरित ही रच डाला था।


नरहरि दास ने तुलसी को, राम कथा सुनाई थी,
बचपन में सुनी रामकथा, रामचरित में छायी थी।
तुलसी की यही कथा, जब 'प्रभाकर' मन को भायी,
तुलसी चरित रच 'शिव' ने, तुलसी की रीत निभायी थी।


मेरी अनुनय और विनय, सुनना तुम भगवान,
प्रभाकर को दीजिये प्रभु, साहित्य का वरदान।
साहित्य का वरदान, प्रभाकर शीर्ष पर छा जाए,
करे नित साहित्य सृजन और प्रेरक बन जाए।
गाता भगवन 'कीर्ति', गुणगान औ' महिमा तेरी,
तुम हो दीनदयाल, सुनो विनय- अनुनय मेरी।


डॉ अ कीर्तिवर्धन
विद्यालक्ष्मी निकेतन,
53- महालक्ष्मी एन्क्लेव,
मुज़फ्फरनगर-251001 (उत्तर-प्रदेश)
08265821800


पुस्तक----तुलसी चरित (108 मनके)रचियता श्री शिव प्रभाकर ओझा
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जीवात्मा नहीं परमात्मा के कारण होती है प्राणियों में गति :-अशोक “प्रवृद्ध”

Posted: 18 Mar 2022 06:33 AM PDT

जीवात्मा नहीं परमात्मा के कारण होती है प्राणियों में गति :-अशोक "प्रवृद्ध"

इस आश्चर्यमय, विस्मयजनक और रहस्ययुक्त घटनाओं से युक्त जगत की माप, यहाँ अवस्थित पदार्थ, उन पदार्थों की अवस्थिति, उनके बनने का कारण और काल और इनसे होने वाले लाभों जैसे प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए आदिकाल से ही मनुष्य इच्छा करता रहा है, और वर्तमान में भी वैज्ञानिक, मीमांसक और अन्वेषक इस प्रश्न का उत्तर ढूँढ़ने में लीन हैं। इस बात को अब सभी स्वीकार करते हैं कि यह दृश्यमान जगत बनता, चलता और विनष्ट होता है। यह भी सिद्ध है कि संसार में किसी भी वस्तु के बनने, चलने और टूटने में तीन कारण होते हैं। वह यह कि उस वस्तु का बनाने वाला, पालन करने वाला और संहार करने वाला कोई सामर्थ्यवान, ज्ञानवान और महान होना चाहिए। इसे निमित्त कारण कहते हैं। बनाने वाले के साथ वह पदार्थ भी होना चाहिए जिससे कि यह जगत बना है। अभाव से भाव नहीं होता। कुछ होना चाहिए जिससे जगत बना है। वह उपादान कारण कहलाता है। इसी प्रकार प्रत्येक बनने वाली वस्तु के बनने का कुछ उद्देश्य होना चाहिए। जगत का रचयिता परमात्मा है। जिस पदार्थ से जगत बना है, उसे प्रकृति अथवा प्रधान कहते हैं, और यह जगत जीवात्मा समूह के लाभ के लिए बना है। इस जगत में एकमात्र मनुष्य प्राणी ही मन और बुद्धि युक्त है, जो ज्ञान प्राप्त कर सकता है। किंतु मन और बुद्धि प्रकृति का अंग होने से जड़ हैं। इसलिए ये स्वतः ज्ञान युक्त नहीं हो सकते। ज्ञान प्राप्त करने वाला कोई अन्य है। ज्ञान देने वाला कोई अन्य स्वयं ज्ञानवान होना चाहिए तभी वह ज्ञान दे सकता है। जब सृष्टि बन गई तो इसको स्थिर रखने वाला भी कोई अति महान सामर्थ्य वान होना चाहिए। अन्यथा पृथ्वी, सूर्य, नक्षत्र और ग्रह जो निरंतर जगत में घूमते हैं, जड़ होने के कारण चल नहीं सकते। इससे स्पष्ट है कि संसार का समन्वय करने वाला भी परमात्मा है। इसीलिए परब्रह्म में प्रकृति, आत्मा और परमात्मा तीनों की गणना होती है। तीनों तत्व अनादि हैं, अक्षर हैं। इन तीनों में दो चेतन है- एक सामर्थ्यवान चेतन है, वह परमात्मा कहलाता है। दोनों का गुण ईक्षण करना है। ईक्षण का अर्थ है -कर्म के आरंभ और अंत करने का काल, कर्म के दिशा कर्म के काल और स्थान का निश्चय करना। ब्रह्मांड तो अनंत है। इसे आकाश की संज्ञा प्रदान की गई है। इस ब्रह्मांड में जगत रचना का स्थान, काल और दिशा निश्चय करने वाला चेतन ज्ञानवान कहलाता है, जो कि परमात्मा है। जगत में परमात्मा के अतिरिक्त दो गौण तत्व हैं-जीवात्मा और प्रकृति। परमात्मा गौण तत्व नहीं हो सकता। जगत का बनाने वाला गौण तत्व नहीं, अपितु मुख्य ही होगा। जीवात्मा का सामर्थ्य सीमित है, और प्रकृति तो जड़ होने से किसी भी निर्मित वस्तु का निमित्त कारण नहीं हो सकती। उल्लेखनीय है कि जीवात्मा परमात्मा से जुष्ट होकर मोक्ष पाता है। परमात्मा तत्व हीन नहीं है। यह महान है और हीन तत्वों अर्थात जीवात्मा और प्रकृति पर शासन करता है। यह परमात्मा अपने आप गमन करता है अर्थात यह अपने कर्म अपने आप ही करता है, किसी दूसरे का आश्रय नहीं लेता। यह देखा जाता है कि जगत के सब पदार्थों के व्यवहार में समानता है। नक्षत्र और ग्रहों की गति में और पृथ्वी पर पदार्थों के समन्वय तथा प्राणियों के जीवन में एक समान व्यवहार देखा जाता है। इस कारण इन सबका रचयिता एक ही है। यदि एक से अधिक होते तो पदार्थों के व्यवहार में भिन्नता होती, लेकिन ऐसा नहीं है। वेद व दर्शन शास्त्रों में परब्रह्म में चेतन तत्व परमात्मा के कुछ गुणों का वर्णन किया गया है। यह जगत का रचने वाला, पालन करने वाला और प्रलय करने वाला है। यह मनुष्य के ज्ञान का स्रोत है। यह संसार में संयोग - वियोग करने की सामर्थ्य वाला है। यह ईक्षण करने वाला है। ब्रह्म में अन्य दो तत्व हीन गुण वाले हैं। परमात्मा वैसा नहीं। यह किसी के आश्रय नहीं। स्वयं करता है, और यह आनंदमय है। परमात्मा की उपासना अर्थात उसके समीप बैठने से जीवात्मा भी आनंदमय हो जाता है। वैदिक शास्त्रों में भी ऐसा ही कहा गया है। ब्रह्म में वर्णित दूसरे तत्व अर्थात जीवात्मा और प्रकृति आनंदमय नहीं। प्रकृति तो जड़ है। उसके आनंदमय होने की कोई संभावना नहीं। साथ ही जीवात्मा भी स्वयं आनंदमय नहीं है। वह जब परमात्मा से जुष्ट होता है तब ही आनंदमय होता है। परमात्मा के गुण जीवात्मा में नहीं हो सकते। इस कारण परमात्मा और जीवात्मा में भेद है। परमात्मा का एक लक्षण आकाश है, और उसका गुण है सर्वव्यापक होना। अर्थात जितना भी स्थान विश्व में है, उस सबमें परमात्मा व्यापक है। विश्व के स्थान को अवकाश भी कहा जाता है। परमात्मा का दूसरा लक्षण है गति। इसे प्राण कहते हैं। परमात्मा का गुण है सामर्थ्य। इसी गुण के कारण इसे सर्व शक्तिमान कहा है। उस शक्ति का प्रदर्शन गति में होता है। परमात्मा का तीसरा लक्षण है प्रकाश। ज्योति के अर्थ में प्रकाश और चेतना दोनों लिए जाते हैं। परमात्मा ने सृष्टि की रचना खंडशः की है। सर्वप्रथम देवता और पृथ्वी बनी। देवताओं में से नक्षत्र बने और पृथ्वी में से ग्रह बने। अर्थात प्रकृति से यह जगत एक क्षण में नहीं बना। मूल प्रकृति से वर्तमान कार्य जगत पग पग कर बनता चला गया। वैदिक ग्रंथों और दर्शन शास्त्रों के अनुसार प्रकृति से महत अर्थात महान बना। महान से तीन अहंकार बने - वैकारिक अहंकार, तैजस अहंकार और भूतादि अहंकार। ये क्रमशः सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण प्रधान वाले हैं। इन अहंकारों को वैदिक भाषा में अपः कहा जाता है। ऋग्वेद में भी इस स्थिति का वर्णन अंकित है। ऋग्वेद 1-163- 1, 2के अनुसार, सबसे पहले एक महान गति वाला अग्नि स्वरूप अर्वन अर्थात तेज उत्पन्न हुआ और वह त्रित अर्थात परमाणुओं पर अधिष्ठित हो गया। पूर्व में उस पर इंद्र अधिष्ठित था। इसके आगे ऋग्वेद1-163- 3, 4 में कहा गया है-

असि यमो अस्यादित्यो अर्वन्नसि त्रितो गुह्येन व्रतेन ।

असि सोमेन समया विपृक्त आहुस्ते त्रीणि दिवि बन्धनानि ।।

त्रीणि त आहुर्दिवि बन्धनानि त्रीण्यप्सु त्रीण्यन्तः समुद्रे ।

उतेव मे वरुणश्छन्त्स्यर्वन्यत्रा त आहुः परमं जनित्रम् ।।- ऋग्वेद 1-163- 3,4

अर्थात- तू अर्वन यम अर्थात नियंत्रण करने वाला प्रकाशयुक्त है। गुप्त रूप से संगठित त्रित को. जो साम्यावस्था में है और जो विमुक्त पृथक –पृथक है, तू उससे तीन बंधन अर्थात संयोग उत्पन्न करता है। वे तीन दिव्य बंधन अर्थात संयोग अन्तरिक्ष में अपः हुए और इनसे जगत के अनेकानेक पदार्थ उत्पन्न हुए।
वैदिक विज्ञान के अनुसार परमाणुओं में गुण साम्यावस्था में थे। परमाणु तीन -तीन गुणों का समूह अर्थात गुट होने के कारण त्रित कहलाते हैं। ये गुट अर्थात त्रित एक दूसरे से पृथक -पृथक थे। इसी अवस्थाको ऋग्वेद 1-129- 3 में सलिल कहा गया है। इन परमाणुओं पर परमात्मा का तेज अर्वन अधिष्ठित हुआ, तो तीन प्रकार के दिव्य बंधन अर्थात योग उत्पन्न हुए। ये तीनों अपः हैं। संख्य दर्शन में इन्हें अहंकार कहा गया है। अहंकारों से जगत की सृष्टि हुई और इस जगत में प्राणी और अप्राणी सृष्टि हुई। सांख्य दर्शन 1-61 के अनुसार अहंकारों से पञ्च तन्मात्र समूह और दोनों प्रकार की इन्द्रियां बनीं। इन तन्मात्र समूह से स्थूल भूत बने। वैकारिक अहंकार और तैजस अहंकार के समूह से दोनों प्रकार की इंद्रियां बनी, और भूतादि अहंकार और तैजस अहंकार से पञ्च महाभूत तन्मात्र अर्थात स्थूल महाभूत बने। वेद व दर्शन शास्त्रों में यही प्रक्रिया है मूल प्रकृति से पग- पग प्राणी बनने की। वेद शास्त्र यही वर्णन करते हैं। चर और अचर जगत में अंतर यह है कि ईश्वर का लक्षण प्राण एक में तो विद्यमान है, परन्तु दूसरे में नहीं। प्राणवान को ही प्राणी कहते हैं । और प्राण अर्थात गति ईश्वर की है। प्राणी में भी ईश्वर के कारण गति है, जीवात्मा के कारण नहीं।
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बगैर किसी देरी के पुरानी पेंशन बहाल करे सरकार

Posted: 18 Mar 2022 05:14 AM PDT

बगैर किसी देरी के पुरानी पेंशन बहाल करे सरकार:-सुरेश चन्द्र पाण्डेय (त्यागी)

विजयपुर (गोपालगंज) बिहार राज्य शिक्षक महासंघ ( 34540) पटना ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अब बिना  देर किए पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की है।
विहार राज्य शिक्षक महासंघ पटना के प्रवक्ता सुरेश चन्द्र पाण्डेय त्यागी ने कहा है कि गैर भाजपा शासित राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल कर दिया है और अन्य राज्य पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर मूर्तरुप देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दिए हैं।
श्री पाण्डेय ने कहा कि जिस प्रकार किसान विरोधी काला कानून सरकार को वापस लेने के लिए मजवूर होना पड़ा ठीक वैसे पुरानी पेंशन बहाली का माहौल वनने से रोका जाना चाहिए और सरकार को तानाशाही की रवैया नहीं अपना कर लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए।
सनद रहे कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दिया गया है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि बर्ष 2004मे तत्यकालीन अटल सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों को दी जाने वाली पुरानी पेंशन योजना को अनावश्यक वित्तीय वोझ वता कर पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर नयी पेंशन योजना थोपने का काला कानून पारित करा कर कर्मचारियों की बुढ़ापा का सहारे का अपहरण कर लिया। यह दिगर वात है कि जिस पुरानी पेंशन योजना को अनावश्यक रूप से वित्तीय वोझ वताने वाले सरकार के मुखिया अटल विहारी वाजपेई जी जीवनोपरांत पुरानी पेंशन का लाभ लेते रहे।अव यह लोकोक्ति सटीक लगती है कि -हम करें तो राश लीला और दूसरा करें तो करेक्टर ढीला वाला जुमला सटीक लगता है।
गौरतलब है कि एक कर्मचारी लग भग तीस साल तक अपना जीवन सरकारी सेवा में लगा देता है और सरकार पुरानी पेंशन योजना को अनावश्यक रूप से वित्तीय वोझ वता कर समाप्त कर दिया है और जिन औलाद की परवरिश किया वे बुढ़ापे में माता पिता को वोझ समझने लगते है ऐसे में सेवा निवृत्त कर्मचारियों का जीवन नरकमय वनना निश्चित है वहीं जन प्रतिनिधि पांच साल के लिए चुन कर जाते हैं और आजीवन पुरानी पेंशन योजना का लाभ उठाते है जव कि राजनीति को समाज सेवा का दर्जा दिया जाता है उनके लिए पुरानी पेंशन जरूरी है और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दिया जाना सरकार कु वित्तीय मजदूरी है। और तो और सवसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि एक एक वार विधायक,पार्षद एवं सांसद चुन लिया गया लो उसे तीन पुरानी पेंशन योजना का लाभ उठाना वैधानिक है। यदि सांसद पेंशन भोगी किसी राज्य सरकार में मंत्री वन जाता है तो मंत्री के वेतन भत्ते के साथ पेंशन योजना का लाभ उठाता है।मिशाल के तौर विहार सरकार के कवीना मंत्री जनक चमार, शाहनवाज हुसैन और पिछड़े वर्गों के मसीहा उपेंद्र कुशवाहा ने मंत्री का वेतन भत्ते के साथ सांसद का पेंशन भी डकार गए हैं जिसका खुलासा आर टी आई के तहत किया गया है।सच में किसी शायर ठीक कहा है कि-
शीशे की अदालत है पत्थर की गवाही है।
कातिल ही लुटेरा है, कातिल ही सिपाही है।
ऐ सफेद चादर पे इतराने वाले लोगों ( नेता)
ऐ मत भूलो ए तुम्हारे गुनाहों की कमाई है।शीशे की अदालत है----
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बरसाने में आयो गिरधारी

Posted: 18 Mar 2022 05:08 AM PDT

बरसाने में आयो गिरधारी

-मनोज मिश्र

बरसाने में आयो गिरधारी, लिए रंग भरी पिचकारी।
खोज खोज ढूंढे कुंज गलियन में, कहाँ है राधा प्यारी।।
गुलाल उड़े अबीर उड़े, हो रही रंगों की चित्रकारी। 
हाथ जोड़ सखियां करें विनती पर माने नहीं त्रिपुरारी।।
चली गोपियन की टोली भी, लिए रंग अबीर भारी।
अब छुपने की आ गई देखो नटवर नागर की बारी।।
तुम्हरे रंग में रंगी है राधा अब जानत यह दुनिया सारी।
आओ मधुसूदन संग खेलो होरी शरण तेरे हम गोवर्धन धारी।।
हे मुरलीधर हे गोपीश्वर रंग दो अंतर्मन की फुलवारी।
तुम सम कौन दीन हित पालक प्रभु मेरे जगत मुरारी।।
जहां तुम हो सब रंग वहीं हैं कैसी ये लीला न्यारी।
हे नंद नंदन हे नारान्तक चैतन्य प्रभु मैँ आया शरण तिहारी।।
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होली

Posted: 18 Mar 2022 05:02 AM PDT

होली 

                उषा किरण श्रीवास्तव 


नये सालों के स्वागत का ये
 बस शुरूआत है होली ,
कि अंतर्मन में खुशियों से
 भरी उल्लास है होली ।

चरणों में चढाते देवता 
और देवियों को हम ,
फिर एक दूजे में मिल खो
 जाते हैं गुलाल की होली, 
नये सालों,,,,,,,,,,,,

न जाने कब से चलती आ
 रही त्योहार ये होली, 
सनातन धर्म संस्कृति की है
 पहचान ये होली, 
नये सालों,,,,,,,,,,,,,,,

प्रकृति ने भी छेडा है  
बसंती राग धरती पर ,
 विरासत में मिली है पूर्वजों 
से आज ये होली, 
नये सालों,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

चलो खुशियां मनाये और
मिल के फाग गाऐ हम, 
बडे सौभाग्य से हमको
 मिली संस्कार की टोली, 
नये सालों,,,,,,,,,,,,,,,,,
कि अंतर्मन,,,,,,,,,,,,,, 
 
मुजफ्फरपुर, बिहार  ।
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यह होली रहनी चाहिए

Posted: 18 Mar 2022 04:59 AM PDT

यह होली रहनी चाहिए 

कल हम रहें या नहीं रहें,
यह होली रहनी चाहिए,
नहीं टूटे यह प्रेम भाईचारा,
सभी धर्म की टोली रहनी चाहिए।
      यह होली रहनी...।

ईश्वर ने दी प्रकृति को हरियाली,
उसीने दी कालिमा काली,
नहीं रहे निराश कभी कोई,
जीवन में हंसी-ठिठोली रहनी चाहिए।
      यह होली रहनी...।

नीला,काला,पीला ईश्वर ने बनाया,
लाल,गुलाबी उसी ने सजाया,
अपना जीवन भले हीं रहे रंगहीन ,
चहुँओर रंगोली रहनी  चाहिए।
      यह होली रहनी...।

आपस में भले हो मतभेद,
पर दिलों में नहीं हो कोई छेद,
नहीं रखें दिल में कोई कटुता,
मूंह में मीठी बोली रहनी चाहिए ।
       यह होली रहनी...।
          -----0----
        अरविन्द अकेला,पूर्वी रामकृष्ण नगर-पटना-27
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होली

Posted: 18 Mar 2022 04:55 AM PDT

होली

होली आई होली आई!

राधा गुलाल मोहन पर डाले,भर भर मारे रंग पिचकारी

नंदलाल हो रहे लाल गुलाबी,लाल लाल हो रही बृषभानुसुता बृज नारी

अधरों पर मुरली मधुर धर के, मधुरिम मनोरम तान सुनावत गोवर्धनधारी

यमुना तट पर तरु कदम तर,रास रचावत श्री मुरली मनोहर कुंज बिहारी

मधुर तान तन राग जगावत,खिंची चली आवत सतरंगी चूनर पहने राधा प्यारी

निरख बदन मनमोहन का बाहें गले में डालीं,तन मन सुधि सकल बिसारी

खनक रही है पायल रुनझुन राधा की, मिला रही सुर कृष्ण की बांसुरी प्यारी

घन- घनश्याम बीच मानो चमक- चमक जा रही हो चंचल चपला न्यारी

प्रकृति सृष्टि मिल कर मानो धूम मचा रहे हों,दिख रही है रम्य मनोरम जोरी

गोकुल की गली गली में,बृज की कुंज गलिन में, नर-नारी खेल रहे अद्भुत अलौकिक होरी

गिरिराज मंद मंद मुस्कुरा रहे,देख राधा कृष्ण को,रवि तनया अठखेली कर रही अति न्यारी

मानो बृजभूमि का कण- कण गोपी ग्वाल बाल,सब नाच रहे,संग राधा कृष्ण मुरारी

होली आई होली आई!

राधा गुलाल मोहन पर डाले,भर भर मारे रंग पिचकारी

नंदलाल हो रहे लाल गुलाबी,लाल लाल हो रही बृषभानुसुता बृज नारी


      जय जय श्री राधे कृष्णा

         चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र"
               (ओज कवि )
          अहमदाबाद गुजरात
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होली का रंग*

Posted: 18 Mar 2022 04:51 AM PDT

होली का रंग

संजय जैन "बीना"
तुम्हें कैसे रंग लगाएं,
और कैसे होली मनाएं ?
दिल कहता है होली,
एक-दूजे के दिलों में खेलो
क्योंकि बहार का रंग तो,
पानी से धुल जाता है
पर दिल का रंग दिल पर,
सदा के लिए चढ़ा जाता है॥

प्रेम-मोहब्बत से भरा,
ये रंगों का त्यौहार है।
जिसमें राधा कृष्ण का,
स्नेह प्यार बेशुमार है।
जिन्होंने स्नेह प्यार की,
अनोखी मिसाल दी है।
और रंग लगा कर,
दिलों की कड़वाहट मिटाते हैं॥

होली आपसी भाईचारे,
और प्रेमभाव को दर्शाती है।
और सात रंगों की फुहार से,
सात फेरों का रिश्ता निभाती है।
साथ ही ऊँच-नीच का,
भेदभाव मिटाती है।
और लोगों के हृदय में,
भाईचारे का रंग चढ़ाती है॥

आप सभी को होली की मंगल शुभ कामनाएं और बधाई। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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Liked on YouTube: लोक गायिका मोना सिंह के साथ होली के अवसर पर उनके होली गीतों को लेकर एक साक्षात्कार |

Posted: 17 Mar 2022 08:12 AM PDT

लोक गायिका मोना सिंह के साथ होली के अवसर पर उनके होली गीतों को लेकर एक साक्षात्कार |
मोना सिंह के साथ वेबाक साक्षात्कार उनके नए एल्बम एवं होली के गीतों के साथ | दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/EKISj2p Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/BmWSq68 visit website : https://ift.tt/ZmyEdrz
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होली में प्रियतम मैं तुमको

Posted: 17 Mar 2022 07:23 AM PDT

होली में प्रियतम मैं तुमको रंगों की बौछार करूँ,

गालों में गुलाल रगड़कर,                                           
इन्द्र धनुष सा प्यार करूँ।

महुआ गिरें अब कानन कानन,
अमुआं बैठी कोयल सा मल्हार करूँ।

पायलिया आंगन जब जब खनके,
अंग अंग  झनकार भरूँ।

घर भीतर जब ओझल हो जाओ,
खिड़की से दीदार करूँ।

होली के रंग संग, बहे उमंग की सरिता,
तम कस्ती, मैं हाथों को पतवार करूं।

जीवन रंग चले खुशियों की होली,
दुख सुख में सपने साकार करूँ।

पल दो पल की झलक देखने
सारी उमर इंतजार करूँ ।

होली में प्रियतम मैं तुमको,                                                    
रंगों की बौछार करूँ,

गालों में गुलाल रगड़कर,                      .             
इन्द्र धनुष सा प्यार करूँ।
राजेश लखेरा, जबलपुर।
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Liked on YouTube: प्रसिद्ध लेखिका शकुंतला मिश्रा के साथ वेबाक बातचीत | देखिये किस प्रकार दृढ इक्षा शक्ति लोगों को सफल

Posted: 17 Mar 2022 07:12 AM PDT

प्रसिद्ध लेखिका शकुंतला मिश्रा के साथ वेबाक बातचीत | देखिये किस प्रकार दृढ इक्षा शक्ति लोगों को सफल
दृढ इक्षा शक्ति और अपने परिवार के लोगों के कारण आज मै लेखिका बनी :-शकुंतला मिश्रा दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/hzbAdMs Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/boIc01q visit website : https://ift.tt/PTlr7U4
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भविष्य निधि निदेशालय ने मनाया होली मिलन

Posted: 17 Mar 2022 06:56 AM PDT

भविष्य निधि निदेशालय ने मनाया होली मिलन

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 17 मार्च::
बिहार सरकार के भविष्य निधि निदेशालय के पदाधिकारियो और कर्मचारियों ने कार्यालय अवधि के बाद कार्यालय छोड़ने से पूर्व पंत भवन, पटना में धूमधाम के साथ होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए भविष्य निधि निदेशालय के निदेशक नीलम चौधरी ने कहा कि होली का त्योहार हमें समृद्धि, शांति, प्रगति, सद्भाव तथा खुशी साझा करने के लिए एकजुट करता है।
निदेशक नीलम चौधरी ने सभी कर्मियों से अपील की कि वे होली के त्योहार को पारस्परिक प्रेम, आपसी भाईचारे एवं सामाजिक सद्भाव के साथ मनाएं। उन्होंने भविष्य निधि निदेशालय एवं इसके अधीनस्थ सभी जिला भविष्य निधि कार्यालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को होली की शुभकामना दी।
उक्त अवसर पर उप निदेशक सुजीत कुमार, सहायक निदेशक कनक बाला, सहायक आयुक्त अनीता रानी एवं प्रियंका कुमारी ने कहा कि होली के त्योहार को उल्लास, उमंग एवं भाईचारे के साथ मनाया जाए।
कार्यक्रम के संयोजक निलेश रंजन ने कहा कि होली महापर्व रंग, उमंग, उल्लास और आनंद का प्रतीक है। इस त्योहार में हम सभी पारस्परिक मतभेदों को भूलकर प्रेम एवं भाईचारे के रंगों में रंग जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना माहामारी के कारण दो वर्षों से सार्वजानिक रूप से होली नही खेला गया है, लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी राज्य में नग्नय है, इसलिए कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए होली खेली जायेगी।
उक्त अवसर पर राणा प्रताप सिंह, सुरेश कुमार शर्मा, राकेश कुमार, अखिलेश कुमार सहाय, अभिषेक आनन्द, शंकर प्रसाद, अनुज कुमार, छोटे कुमार, संजय कुमार उपाध्याय, आनन्द प्रसाद, अजय चन्द्र, रत्नेश कुमार, आनन्द मोहन, राम प्रवेश यादव, सन्नी आनन्द, अमरेन्द्र कुमार, विनय कुमार, पप्पु कुमार, मिन्टु कुमार, मुकेश कुमार, मुकेश कुणाल, उमेश प्रसाद, अशोक कुमार, रामबाबू पासवान, मो0 शफीक, नीलू देवी, रविन्द्र गिरी, प्रभात कुमार, राज कुमार, अजय कुमार, आनन्द किशोर प्रसाद सिन्हा, सुशील कुमार, सुजीत कुमार, रंजीत कुमार, उदय प्रकाश तिवारी, मनोज कुमार, संजय कुमार, राजेश कुमार, श्रवण कुमार, आलोक कुमार, वरूण कुमार, कमलेश कुमार, नन्दन कुमार, प्रेम प्रकाश, उमेश प्रसाद, प्रमोद कुमार सिंह, किशोर प्रसाद सिन्हा, अविनाश कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए निदेशक नीलम चौधरी ने कार्यक्रम संयोजक निलेश रंजन सहित राकेश कुमार, अभिषेक आनन्द, रामप्रवेश यादव, सन्नी आनन्द, मुकेश कुणाल, अविनाश कुमार, रंजीत कुमार, सुशील कुमार एवं सुजीत कुमार को धन्यवाद दिया।
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18 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 17 Mar 2022 06:58 AM PDT

18 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

18 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि पूर्णिमा 12:53 PM

🔅 नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी रात्रि 12:44

🔅 करण :

                बव 12:49 PM

                बालव 12:49 PM

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग गण्ड 11:13 PM

🔅 वार शुक्रवार



☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:03 AM

🔅 चन्द्रोदय 06:07 PM

🔅 चन्द्र राशि सिंह

🔅 सूर्यास्त 05:57 PM

🔅 चन्द्रास्त 06:03 AM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:03 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन
☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:33:53 - 12:22:06

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 08:21 AM - 09:09 AM

🔅 कंटक 01:10 PM - 01:58 PM

🔅 यमघण्ट 04:23 PM - 05:11 PM

🔅 राहु काल 10:27 AM - 11:57 AM

🔅 कुलिक 08:21 AM - 09:09 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:46 PM - 03:34 PM

🔅 यमगण्ड 02:58 PM - 04:29 PM

🔅 गुलिक काल 07:26 AM - 08:57 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

🌹विशेष ~ स्नान-दान की पूर्णतम, श्रीविष्णुदोलोत्सव, काशी में होलिकोत्सव, उत्तराभाद्रपद में सूर्य का प्रवेश रात्रि 10:12 से। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

18 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): घर, परिवार और संतान के मामले में आनंद और संतोष का अनुभव होगा। आज आप संबंधियों और मित्रों से घिरे रहेंगे। व्यापार-धंधे में प्रवास होगा और लाभ भी। मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। नौकरी में पदोन्नति मिलेगी। आग, पानी और वाहन दुर्घटना से संभलने की चेतावनी देते हैं। कार्यभार से थकान का अनुभव होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

वृषभ (Tauras): व्यापारियों के लिए आज का दिन शुभ है। नए आयोजनों को हाथ में ले सकेंगे। आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है। विदेश में रहनेवाले मित्रों या स्वजनों का समाचार आपको भाव-विभोर करेगा। लंबी दूरी की यात्रा का योग है। तीर्थ यात्रा भी हो सकती है। अत्यधिक काम का बोझ थकान और ऊबन का अनुभव कराएगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मिथुन (Gemini): बेकाबू क्रोध पर लगाम रखने की सलाह देते हैं। बदनामी और निषेधात्मक विचारों से दूर रहें। अत्यधिक खर्च से आर्थिक तंगी का अनुभव करेंगे। परिजनों और ऑफिस सहकर्मियों के साथ मनमुटाव या विवाद के प्रसंग बन सकते हैं। यदि कोई बीमार है तो नई चिकित्सा या ऑपरेशन न कराएं। ईश्वर की आराधना, जप और आध्यात्मिकता से शांति मिलेगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में लाभदायक रहेगा आज का दिन। मौज-शौक के साधन, उत्तम आभूषण और वाहन की खरीददारी करेंगे। मनोरंजन की प्रवृत्ति में समय बीतेगा। विपरीत लिंगीय व्यक्ति के साथ की गई मुलाकात से सुख का अनुभव करेंगे। दांपत्य जीवन में प्रेम की अनुभूति होगी। भागीदारी में लाभ होगा। पर्यटन की भी संभावना है।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

सिंह (Leo): उदासीन वृत्ति और संदेह के बादल आपके मन पर घिरे होने से आप मानसिक राहत का अनुभव नहीं करेंगे। फिर भी घर में शांति का वातावरण होगा। दैनिक कार्यों में थोड़ा अवरोध आएगा। अधिक परिश्रम करने के बाद अधिकारियों के साथ वाद-विवाद में न पड़ें।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4
कन्या (Virgo): किसी न किसी कारण से आज आपके मन में चिंता रहेगी। विशेष रूप से संतान और स्वास्थ्य के बारे में। पेट सम्बंधी बीमारियों की शिकायत रहेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई में कठिनाइ आएगी। आकस्मिक धन खर्च हो सकता है। शेयर सट्टे से दूर रहने की सलाह है। प्रिय व्यक्ति के साथ मुलाकात होगी।

शुभ रंग = फीरोजा

शुभ अंक : 6

तुला (Libra): आज आप अत्यधिक भावनाशील बनेंगे और उसके कारण मानसिक अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। माता के साथ सम्बंध बिगड़ेंगे या माताजी के स्वास्थ्य के सम्बंध में चिंता होगी। यात्रा के लिए वर्तमान समय अनुकूल नहीं है। परिवार और जमीन-जायदाद से सम्बंधित चर्चा में सावधानी रखने की आवश्यकता है। पानी से दूर रहें।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1
वृश्चिक (Scorpio): कार्य सफलता, आर्थिक लाभ और भाग्यवृद्धि के लिए अच्छा दिन है। नए कार्य की शुरुआत भी कर सकते हैं। भाई-बंधुओं का व्यवहार सहयोगपूर्ण रहेगा। प्रतिस्पर्धियों को परास्त कर सकेंगे। प्रिय व्यक्ति के साथ मिलन होने से आनंद का अनुभव होगा। लघु यात्रा होगी। स्वास्थ्य बना रहेगा। बड़ो का आशीर्वाद आपके साथ है।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

धनु (Sagittarius): मन की द्विधापूर्ण स्थिति और उलझे हुए पारिवारिक वातावरण के कारण आप परेशानी का अनुभव करेंगे। निरर्थक धन खर्च होगा। विलंब से कार्य पूरा होगा। महत्वपूर्ण निर्णय लेना हितकर नहीं है। परिजनों के साथ गलतफहमी टालने का प्रयास करें। दूर बसनेवाले मित्र का समाचार या संदेश व्यवहार आपके लिए लाभदायक साबित होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn): ईश्वर को याद करने से आपके दिन शुभ रहेगा। धार्मिक कार्य और पूजा पाठ होंगे। गृहस्थ जीवन में आनंद रहेगा। हर एक कार्य सरलता से पूरे होंगे। मित्रों, सगे संबंधियों की तरफ से भेंट सौगात मिलेगी। शारीरिक, मानसिक रूप से प्रफुल्लित रहेंगे। नौकरी व्यवसाय में भी अनुकूल परिस्थिति रहेगी। दांपत्य जीवन में आनंद बना रहेगा। चोट लगने की संभावना है।

शुभ अंक = फीरोजा़

शुभ अंक : 6

कुंभ (Aquarius): आज किसी का जमानती न होने और पैसे की लेन-देन न करने की सलाह देते हैं। खर्च में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य के मामले में ध्यान रखें। परिजनों के साथ संघर्ष में उतरने का अवसर आएगा। किसी के साथ गलतफहमी होने से झगड़ा होगा। क्रोध को नियंत्रण में रखना पड़ेगा। ऐसा न हो कि किसी का भला करने में आफत को गले लगा बैठें। दुर्घटना से बचें।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मीन (Pisces): आज आपके लिए लाभदायक दिन है। नौकरी व्यवसाय के क्षेत्र में आय वृद्धि होगी। बुजुर्ग वर्ग और मित्रों की तरफ से आपको कुछ लाभ होगा। नए मित्र बनेंगे, जिनकी मित्रता भविष्य के लिए लाभदायक साबित होगी। मांगलिक अवसरों में जाना होगा। मित्रों के साथ प्रवास पर्यटन का आयोजन करेंगे। संतान और पत्नी की तरफ से शुभ समाचार मिलेगा। धन लाभ होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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स्वागत नई सदी का

Posted: 16 Mar 2022 09:32 PM PDT

स्वागत नई सदी का

पं.मार्कण्डेय शारदेय
ढहते हुए भवन में स्वागत नई सदी का।
अहम्मन्यता के रण में स्वागत नई सदी का।
टोली बना बुभुक्षा करताल है बजाती,
चिथड़ा पहन गरीबी आशा- रतन लुटाती,
बम फट रहे कहीं औ' संगीन सनसनाती,
विधवा-विलाप-जैसा है गीत धरा गाती,
ऐसे विषाक्त क्षण में स्वागत नई सदी का।
प्रादूषणिक चँवर ले स्वार्थान्धता खड़ी है,
दादागिरी उसी की इस हेतु भी अड़ी है,
विज्ञान को घुमाती उसकी निजी छड़ी है,
लाचार हो चरण में दुनिया स्वतः पड़ी है,
चीत्कार की शरण में स्वागत नई सदी का।
कुछ स्वागती बड़ा ही उत्साह हैं दिखाते,
मानव-रुधिर मँगाकर घर-द्वार हैं धुलाते,
शोषण, दलन, हड़प से आतिथ्य-द्रव्य लाते,
लोभी पुरोहितों से हैं 'स्वस्ति नः' कराते,
उनके सड़े सपन में स्वागत नई सदी का।
जीवन नया दिलाने या और कहर ढाने,
स्वार्थान्धता मिटाने या औ उसे बढ़ाने,
सद्भाव को जगाने या मनुजता मिटाने,
क्या प्रकृति को रिझाने या औ उसे खिझाने,सुर या कि असुर-तन में स्वागत नई सदी का।
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होली का हुड़दंग

Posted: 16 Mar 2022 09:29 PM PDT

होली का हुड़दंग
पं.मार्कण्डेय शारदेय

होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।
घर से निकला होली पर कुछ सोच रहा था मन में।
क्यों ऐसे त्योहार बने हैं नाहक इस जीवन में।
घूम रहे हैं लोग आजकल पागल वेश बनाके।
होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।।
आगे बढ़ा तभी कौए ने की ऊपर से विष्ठा।
फैली मुखड़े पर आकर दी उसने यही प्रतिष्ठा।
पोंछा, समझा पक्षी भी हैं जाते जश्न मनाके।
होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।।
एक पानखौके जी से कुछ लगा खड़ा बतियाने।
सहसा खाँसी चढ़ी लगे बेढंगा मुँह बिजकाने।
खाँसा तन पर पड़ी पीक फब्बारे-सी फर्राके।
होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।।
पीता था मैं चाय चायखाने के पास खड़ा हो।
एक चित्र यों देख रहा था, जैसे वहीं गड़ा हो।
कुत्ते ने तब टाँग पखारी अपनी डाँग उठाके।
होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।।
विदा मिली इन तीनों से तो छत से बड़ी बुहारन।
अच्छी तरह हुआ मेरा इस होली में अभिनन्दन।
भींगी बिल्ली-सा घर लौटा मन ही मन पछताके।
होली ने हुड़दंग किया मेरे ऊपर भी आके।।
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असामाजिक तत्वों द्वारा काली मंदिर की प्रतिमा (पिंडी) खंडित कर, की गई घंटे की चोरी ।

Posted: 16 Mar 2022 09:16 PM PDT

असामाजिक तत्वों द्वारा काली मंदिर की प्रतिमा (पिंडी) खंडित कर, की गई घंटे की चोरी । 

सरोजीत कुमार, बंगरा बाजार देवरिया। 
भाटपार रानी तहसील अंतर्गत पिपरा दक्षिण पट्टी गांव में खेत के बीचो बीच काली जी का एक मंदिर है जहां गांव की महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं। बीती रात किसी के द्वारा मंदिर की प्रतिमा को खंडित कर बाहर बने हुए मिट्टी के बाघों को तोड़ा गया और मंदिर का घंटा निकाल लिया गया । सुबह जब पूजा करने हेतु लोग वहां पहुंचे तो मंदिर का दरवाजा खुला हुआ था। प्रतिमा जो पिंडी के रूप में है, खंडित कर दी गई थी । यह सब देखने के बाद गांव में आक्रोश फैल गया । मौके पर पुलिस प्रशासन भी पहुंचा और छानबीन में लग गया । यह बात समझ में नहीं आ रही है कि आखिर इस तरह की हरकतें कौन कर सकता है। क्योंकि हिंदुओं को छोड़कर अन्य समुदाय के लोग वहाँ नहीं हैं। पुलिस भी इस छानबीन में जुटी हुई है कि आखिर मंदिर की प्रतिमा तोड़ने का अर्थ क्या है ? कहीं कोई साजिश तो नहीं या कोई शराब के नशे में आकर या कोई मानसिक रूप से विक्षिप्त आदमी के द्वारा तो यह कार्य नहीं किया गया । पुलिस सारी बातों पर विचार कर रही है। दिव्य रश्मि न्यूज़ की टीम जब मौके पर पहुंची तो वहाँ खामपार के थाना अध्यक्ष मौके पर मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम पूरी तत्परता के साथ कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा। वहीं दूसरी तरफ ग्राम प्रधान राधेश्याम यादव का कहना है कि ज्योहि  देखा गया की प्रतिमा खंडित किया गया है तो मजदूर बुलाकर तत्काल  पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया है । ग्राम प्रधान राधेश्याम यादव का कहना है कि इस गांव में किसी समुदाय विशेष के द्वारा यह कार्य नहीं किया गया है । उन्होंने आशंका जताई कि यह कार्य हो सकता है किसी विक्षिप्त व्यक्ति के द्वारा या शराब के नशे में किसी व्यक्ति के द्वारा किया गया हो । अब प्रश्न यह उठता है की मंदिर की प्रतिमा तोड़ने का मकसद क्या हो सकता है। वह भी जो खेत के बीचो बीच बना हुआ है । जहां न कोई  कीमती समान है, न ही कोई चढ़ावा चढता है। फिलहाल मंदिर में पुनर्निर्माण कार्य करा दिया गया है और मंदिर में पूजा अर्चना जारी है ।
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होलिका से हिरण्यकश्यपकी बहन का कोई सम्बन्ध नहीं । होली या होरी अन्न को जलाने को कहते हैं और हिरण्यकश्यपकी बहन सिंहिका थी होलिका नहीं ।

Posted: 16 Mar 2022 09:14 PM PDT

होलिका से हिरण्यकश्यपकी बहन का कोई सम्बन्ध नहीं । होली या होरी अन्न को जलाने को कहते हैं और हिरण्यकश्यपकी बहन सिंहिका थी होलिका नहीं ।

संकलन अश्विनी कुमार तिवारी

प्रजापति कश्यपकी १३ पत्नियोंमें दिति सबसे बड़ी थीं । उनकी तीन सन्तान थीं हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष यमल सन्तान थे और कनिष्ठ सन्तान सिंहिका थी जिसका विवाह दनु पुत्र विप्रचित्तिके साथ हुआ था और सिंहिकाका पुत्र राहु है जो नवगृहों में दो रूपों राहु-केतु हैं ।

होलिकादहन के दिन बच्चे गाते हैं -
सम्हति मइया जरि गइली
पुआ पका के ध गइली।
होलिकादहन के अगले दिन रंग होली पर पुये बनते हैं न? नये संवत्सर का नये अन्न से बने व्यञ्जन द्वारा स्वागत का चलन बहुत पुराना है। श्रौत सत्रों में देवताओं को इसकी आहुति दी जाती थी। इसे अपूप कहते थे। ऋषिका अपाला इन्द्र को अपूप अर्पित करती हैं।


नया संवत्सर तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है किन्तु पूर्वाञ्चल में कभी होली के अगले दिन नया पत्रा ले पुरोहित पधारते और पूजा होती। अब लुप्तप्राय प्रथा है।
यहाँ होली तो 'अब' नहीं मनाई जाती किन्तु आज का दिन शुभ माना जाता है - मनकल नल्ल जैसा कुछ कहते हैं जिसे शुभ दिन समझा जा सकता है। नए यज्ञोपवीत धारण किए जाते हैं।
सूर्य अब बली हो रहे हैं न?

अथर्ववेद में पृथ्वी को धारण करने वाले सूर्य गन्धर्व (दिव्यो गन्धर्वो भुवनस्य यस्पतिरेक) और किरणें अप्सरा देवियाँ हैं। उनकी स्तुति इस प्रकार की गयी है:
दिवि स्पृष्टो यजत: सूर्यत्वगवयाता हरसो दैव्यस्य।
मृडाद् गन्धर्वो भुवनस्य यस्पतिरेक एव नमस्य: सुशेवा:॥
अनवद्याभि: समु जग्म आभिरप्सरास्वपि गन्धर्व आसीत्।
समुद्र आसां सदनं म आहुर्यत: सद्य आ च परा च यंति॥
अभ्रिये दिद्युन्नक्षत्रिये या विश्वावसुं गन्धर्व सचध्वे।
ताभ्यो वो देवीर्नम इत् कृणोमि॥

यहाँ समुद्र वह नहीं जो आप समझ रहे हैं। समुद्र अंतरिक्ष है। अथर्वण परम्परा का इक्ष्वाकु कुल से सम्बन्ध प्रसिद्ध है। वाल्मीकीय रामायण में लङ्का दहन के पश्चात लौटते हुये हनुमान जी की छलांग का जो भव्य वर्णन है उसमें समुद्र और अंतरिक्ष एक हो गये हैं। पहले उस पर आलेख लिखा था। आज यह मिल गया :)

सूर्य के बली होने से बसंत का भी सम्बन्ध है। आँखें बहकने लगती हैं, कामनायें चहकने लगती हैं। है न? गन्धर्व पत्नी अप्सराओं की स्तुति आँखों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाली देवियों के रूप में की गयी है:
या: क्लन्दास्तमिषीचयोऽक्षकामा मनोमुह:।
ताभ्यो गन्धर्वपत्नीभ्योऽप्सराभ्योऽकरं नम:॥

मधु ऋतु में मातृनामा ऋषि द्वारा दर्शित इस भुवनपति सूक्त का पाठ प्रियतम के दर्शन कराने में सहायक है।
✍🏻सनातन कालयात्री

बहकावे मे आकर संस्कृति को पर्वों को गलत बताने वालों इस लेख को पूरा पढ़ना होली का वास्तविक स्वरुप
होली पर्व पर अपनी आदत के अनुसार नवभौड सोशल मीडिया में चिल्ला रहे है कि होलिका दहन नारी अधिकारों का दमन है। मैं ऐसे त्योहार की बधाई किसी को क्यों दूँ। होलिका का दोष क्या था ? होलिका को किसने जलाया? ऐसा करना ब्राह्मणवादी और मनुवादी सोच है। बला बला बला..........
अब आप होली का वास्तविक स्वरुप समझे।
इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है।
यथा–
तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।(भाव प्रकाश)
अर्थात्―तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं। यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है।
(ब) होलिका―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते है कि वह चनादि का निर्माण करती (माता निर्माता भवति) यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता। जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद बच जाता है। उस समय प्रसन्नता से जय घोष करते हैं कि होलिका माता की जय अर्थात् होलिका रुपी पट पर (पर्त) ने अपने को देकर प्रह्लाद (चना-मटर) को बचा लिया।
(स) अधजले अन्न को होलक कहते हैं। इसी कारण इस पर्व का नाम होलिकोत्सव है और बसन्त ऋतुओं में नये अन्न से यज्ञ (येष्ट) करते हैं। इसलिए इस पर्व का नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है। यथा―वासन्तो=वसन्त ऋतु। नव=नये। येष्टि=यज्ञ। इसका दूसरा नाम नव सम्वतसर है। मानव सृष्टि के आदि से आर्यों की यह परम्परा रही है कि वह नवान्न को सर्वप्रथम अग्निदेव पितरों को समर्पित करते थे। तत्पश्चात् स्वयं भोग करते थे। हमारा कृषि वर्ग दो भागों में बँटा है―(1) वैशाखी, (2) कार्तिकी। इसी को क्रमश: वासन्ती और शारदीय एवं रबी और खरीफ की फसल कहते हैं। फाल्गुन पूर्णमासी वासन्ती फसल का आरम्भ है। अब तक चना, मटर, अरहर व जौ आदि अनेक नवान्न पक चुके होते हैं। अत: परम्परानुसार पितरों देवों को समर्पित करें, कैसे सम्भव है। तो कहा गया है–
अग्निवै देवानाम मुखं अर्थात् अग्नि देवों–पितरों का मुख है जो अन्नादि शाकल्यादि आग में डाला जायेगा। वह सूक्ष्म होकर पितरों देवों को प्राप्त होगा।
हमारे यहाँ आर्यों में चातुर्य्यमास यज्ञ की परम्परा है। वेदज्ञों ने चातुर्य्यमास यज्ञ को वर्ष में तीन समय निश्चित किये हैं―(1) आषाढ़ मास, (2) कार्तिक मास (दीपावली) (3) फाल्गुन मास (होली) यथा फाल्गुन्या पौर्णामास्यां चातुर्मास्यानि प्रयुञ्जीत मुखं वा एतत सम्वत् सरस्य यत् फाल्गुनी पौर्णमासी आषाढ़ी पौर्णमासी अर्थात् फाल्गुनी पौर्णमासी, आषाढ़ी पौर्णमासी और कार्तिकी पौर्णमासी को जो यज्ञ किये जाते हैं वे चातुर्यमास कहे जाते हैं आग्रहाण या नव संस्येष्टि।
समीक्षा―आप प्रतिवर्ष होली जलाते हो। उसमें आखत डालते हो जो आखत हैं–वे अक्षत का अपभ्रंश रुप हैं, अक्षत चावलों को कहते हैं और अवधि भाषा में आखत को आहुति कहते हैं। कुछ भी हो चाहे आहुति हो, चाहे चावल हों, यह सब यज्ञ की प्रक्रिया है। आप जो परिक्रमा देते हैं यह भी यज्ञ की प्रक्रिया है। क्योंकि आहुति या परिक्रमा सब यज्ञ की प्रक्रिया है, सब यज्ञ में ही होती है। आपकी इस प्रक्रिया से सिद्ध हुआ कि यहाँ पर प्रतिवर्ष सामूहिक यज्ञ की परम्परा रही होगी इस प्रकार चारों वर्ण परस्पर मिलकर इस होली रुपी विशाल यज्ञ को सम्पन्न करते थे। आप जो गुलरियाँ बनाकर अपने-अपने घरों में होली से अग्नि लेकर उन्हें जलाते हो। यह प्रक्रिया छोटे-छोटे हवनों की है। सामूहिक बड़े यज्ञ से अग्नि ले जाकर अपने-अपने घरों में हवन करते थे। बाहरी वायु शुद्धि के लिए विशाल सामूहिक यज्ञ होते थे और घर की वायु शुद्धि के लिए छोटे-छोटे हवन करते थे दूसरा कारण यह भी था।

ऋतु सन्धिषु रोगा जायन्ते―अर्थात् ऋतुओं के मिलने पर रोग उत्पन्न होते हैं, उनके निवारण के लिए यह यज्ञ किये जाते थे। यह होली हेमन्त और बसन्त ऋतु का योग है। रोग निवारण के लिए यज्ञ ही सर्वोत्तम साधन है। अब होली प्राचीनतम वैदिक परम्परा के आधार पर समझ गये होंगे कि होली नवान्न वर्ष का प्रतीक है।

पौराणिक मत में कथा इस प्रकार है―होलिका हिरण्यकश्यपु नाम के राक्षस की बहिन थी। उसे यह वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यपु का प्रह्लाद नाम का आस्तिक पुत्र विष्णु की पूजा करता था। वह उसको कहता था कि तू विष्णु को न पूजकर मेरी पूजा किया कर। जब वह नहीं माना तो हिरण्यकश्यपु ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को आग में लेकर बैठे। वह प्रह्लाद को आग में गोद में लेकर बैठ गई, होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। होलिका की स्मृति में होली का त्यौहार मनाया जाता है l जो नितांत मिथ्या हैं।।

होली उत्सव यज्ञ का प्रतीक है। स्वयं से पहले जड़ और चेतन देवों को आहुति देने का पर्व हैं। आईये इसके वास्तविक स्वरुप को समझ कर इस सांस्कृतिक त्योहार को बनाये। होलिका दहन रूपी यज्ञ में यज्ञ परम्परा का पालन करते हुए शुद्ध सामग्री, तिल, मुंग, जड़ी बूटी आदि का प्रयोग कीजिये।

आप सभी को होली उत्सव की हार्दिक शुभकामनायें।
भृगु वेदपाठी का हर महादेव जय परशुराम ।।
✍🏻वरुण शिवाय

★★होलिका★★
होली या होलिका आनन्द एवं उल्लास का उत्सव है ।
बंगाल को छोड़कर होलिका-दहन सर्वत्र देखा जाता है ।
यह बहुत प्राचीन उत्सव है ।
इसका आरम्भिक शब्दरूप होलाका था । (जैमिनि , १.३.१५-१६ )
जैमिनि एवं शबर के अनुसार होलाका समस्त भारती द्वारा सम्पादित होना चाहिए ।
"राका होलाके" | काठक गृह्य (७३.१ ) इस पर देवपाल की टीका है- 'होला कर्मविशेष: सौभाग्याय स्त्रीणां प्रातरनुष्ठीयते । तत्र होलाके राका देवता । यास्ते राके सुमतय इत्यादि ।'
होला कर्मविशेष है जो स्त्रियों के सौभाग्य के लिए सम्पादित होता है । राका ( पूर्णचन्द्र ) देवता है ।
होलाका उन २० क्रीडाओं में से एक है , जो सम्पूर्ण भारत में प्रचलित हैं । इसका उल्लेख वात्स्यायन के कामसूत्र (१.४.४२ )
में भी हुआ है ।
लिंग, वराह पुराण में होली का उल्लेख है ।
हेमाद्रि ( काल ) में बृहद्यम का श्लोक उद्धृत है, जिसमें होलिका-पूर्णिमा को हुताशनी कहा गया है ।
हेमाद्रि (व्रत भाग) ने भविष्योत्तर (१३२.१.५१ ) से उद्धरण देकर एक कथा दी है - युधिष्ठिर-कृष्ण संवाद के रूप में । होली के लिए अडाडा नाम आया है । राजा रघु के काल का उल्लेख है ।
ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति चंदन-लेप के साथ आम्र मंजरी खाता है वह आनन्द से रहता है ।
दक्षिण में होलिका के पाँचवें दिन (रंग-पंचमी ) मनाई जाती है ।
बंगाल में यह उत्सव दोलयात्रा के रूप में गोविन्द की प्रतिमा के साथ मनाते हैं ।
♪वर्षकृत्यदीपक ( पृ° ३०१ ) ब्राह्मणै: क्षत्रियैर्वैश्यै: शूद्रैश्चान्यैश्च जातिभि:| एकीभूय प्रकर्तव्या क्रीडा या फाल्गुने सदा |♪
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होली के डांड़ (दण्ड) के पतन, उस पर लगी पताका और होली के धुंए से वायु परीक्षा की जाती थी। इससे राजा और प्रजा के भविष्‍य का अनुमान लगाया जाता था।
अथ होलिकावातपरीक्षा ।

पूर्वे वायौ होलिकायां प्रजाभूपालयो : सुखम्‌ । पलयनं च दुर्भिक्षं दक्षिणे जायते ध्रुवम्‌ ॥
पश्विमे तृणंसपत्तिरुत्तरे धान्यसंभव : । यदि खे च शिखा वृष्टर्दुंर्ग राजा च संश्रयेत्‌ ॥
नैऋत्यां चैव दुर्भिक्षमैशान्यां तु सुभिक्षकम्‌ । अग्नेर्भीतिरथाग्नेय्यां वायव्यां बाहवोऽजनला : ॥
अथ होलिकानिर्णय : । प्रतिपद्भूत भद्रासु याऽर्चिता होलिका दिवा । संवत्सरं तु तद्राष्ट्रं पुरं दहति सा द्रुतम्‌ ॥
प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या पूर्णिमा फाल्गुनी सदातिस्यां भद्रामुखं त्यक्त्वा पूज्या होला निशामुखे ॥
( होली के वायु का फल ) होलीदीपन के समय में पूर्व की वायु चले तो प्रजा , राजा को सुख हो और दक्षिण की वायु हो तो भगदड़ पडे़ , या दुर्भिक्ष पडे़ ॥
पश्चिम की हो तो तृण बहुत हो , उत्तर की चले तो अन्न बहुत हो और आकाश में होली की लपट जावे तो वर्षा हो और राजा को किले का आश्रय लेना चाहिये कारण शत्रु का भय होगा ॥
नैऋत्यकोण की वायु हो तो दुर्भिक्ष पडे , ईशान की हो तो सुभिक्ष हो , अग्निकोण की वायु हो तो अग्नि का भय हो और वायुकोण की वायु हो तो संवत्‌ भर में पवन बहुत चले ॥
यदि होलिका प्रतिपदा चतुर्दशी , भद्राको जलाई जावे तो वर्षभर राज्य को और पुरुष को दग्ध करती है ॥
फाल्गुन सुदि पूर्णिमा प्रदोषकालव्यापिनी लेनी चाहिये उस समय में भद्रा हो तो भद्रा के मुख की घडी त्याग के प्रदोष में ही होली पूजनी जलानी शुभ है ॥
गोस्‍वामी तुलसीदास जी की गीतावली में वर्णित होलिकोत्‍सव :

खेलत बसंत राजाधिराज। देखत नभ कौतुक सुर समाज।
सोहे सखा अनुज रघुनाथ साथ। झोलिन्‍ह अबीर पिचकारी हाथ।
बाजहिं मृदंग, डफ ताल बेनु। छिरके सुगंध भरे मलय रेनुं।
लिए छरी बेंत सोंधे विभाग। चांचहि, झूमक कहें सरस राग।
नूपुर किंकिनि धुनिं अति सोहाइ। ललना-गन जेहि तेहि धरइ धाइ।
लांचन आजहु फागुआ मनाइ। छांड़हि नचाइ, हा-हा कराइ।
चढ़े खरनि विदूसक स्‍वांग साजि। करें कुट निपट गई लाज भाजि।
नर-नारि परस्‍पर गारि देत। सुनि हंसत राम भइन समेत।
बरसत प्रसून वर-विवुध वृंद जय-जय दिनकर कुमुकचंद।
ब्रह्मादि प्रसंसत अवध-वास। गावत कल कीरत तुलसिदास।✍🏻अत्रि विक्रमार्क अन्तर्वेदी
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रंगोत्सव होली

Posted: 16 Mar 2022 09:08 PM PDT

रंगोत्सव होली

जोश जुनून उमंग जगाता, तन मन को हर्षाता। 
रंगों का त्योहार होली, सद्भाव प्रेमरस बरसाता।

गाल गुलाबी दमकते, गोरी के गुलाल लगाकर। 
पीला रंग प्रेम झलकाता, घर में खुशियां लाकर।

स्वाभिमान शौर्यता लाता, रक्तवर्ण महावीरों में। 
तलवारों का जोश उमड़ता, जोशीले रणधीरों में।

सुखद अनुभूति अंतर्मन, धीरज विश्वास बढ़ाता है। 
नीलवर्ण व्योम व्यापकता, सिंधु थाह बताता है।

ज्ञान और गरिमा संतुलित, जीवन का मूलमंत्र। 
रंग बैंगनी आस्था श्रद्धा, विश्वास का मानो मंत्र।

हरा रंग हरियाली ले हमें, तरोताजा कर देता। 
कुदरत संग जुड़े रहने का, सबको संदेशा देता।

त्याग और बलिदान से, केसरिया ध्वज लहराता। 
वीरों रणवीरों में वीरता, शौर्य पराक्रम भर जाता।

श्वेत शांति सदाचरण, पावनता का प्रतीक हमारा। 
सत्य सादगी प्रेम भरकर, दमकता भाग्य सितारा।

रहस्यमई शक्तिशाली जो, अंधकार का राजा है। 
काला रंग बुराई के दम पे, बजाता निज बाजा है।

इंद्रधनुष के सात रंग मिल, सतरंगी बन जाते। 
जीवन में अनुराग भरकर, आनंदित कर जाते।

रमाकांत सोनी
नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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रंगोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

Posted: 16 Mar 2022 08:40 AM PDT

रंगोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। 

किन रंगों की बात कर रहे, मैं क्या जानूं ?
मेरा रंग है श्याम, इसे उतारो तो मैं जानूँ। 

मीठे बोलों की पिचकारी से चलता है यह,
कृष्ण रंग में तुम भी रंग जाओ, तो मैं जानूँ। 

मन-मंदिर की दीवारें भी इसमे रंग जाती हैं,
जग केसरिया करने की ठानो, जब मैं जानूँ। 

काट-काट कर तुलसी-पीपल, नागफनी को बोते,
हरित क्रान्ति लाकर दिखलाओ, तो तुमको जानूँ। 

जाति-धर्म क्षेत्रवाद में, बाँट दिया भारत को तुमने,
राष्ट्रवाद सिद्धांत मोदी सा बन जाओ, तो मैं जानूँ। 

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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Liked on YouTube: दिव्य रश्मि के पत्रकारों ने मनाया होली मिलन , गुलाल और फूलों से खेली होली |

Posted: 16 Mar 2022 08:12 AM PDT

दिव्य रश्मि के पत्रकारों ने मनाया होली मिलन , गुलाल और फूलों से खेली होली |
दिव्य रश्मि कार्यालय में पत्रकारों ने मनाया होली मिलन फूलों और गुलाल के संग खेली होली| दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/hzbAdMs Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/boIc01q visit website : https://ift.tt/PTlr7U4
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राजबंशी कल्याण परिषद द्वारा किया गया होली मिलन समारोह का आयोजन

Posted: 16 Mar 2022 08:06 AM PDT

राजबंशी कल्याण परिषद द्वारा किया गया होली मिलन समारोह का आयोजन

कटिहार :-बलरामपुर बिधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत बारसोई प्रखंड के अन्तर्गत एकशाला पंचायत के जफरपुर सामुदायिक भवन में राजवंशी कल्याण परिषद के द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया ।समारोह में अतिथि के रूप में जगन्नाथ दास, अजय सिंह बोसन रहे। मंच संचालन प्रकाश कुमार दास ने किया। समारोह में अतिथि जगन्नाथ दास ने बताया कि होली का त्यौहार आपसी भाईचारा प्रेम के प्रतीत है आपसी गिले- शिकवे भुलाकर एक सुत्र समाज में एक परिवार की तरह रहे और एक दुसरे को मदद करते हुए एक मिसाल के रूप में काम करें। इस दौरान सदस्यों ने एक -दुसरे को गुलाल लगाकर और मिठाई खिला कर होली का त्यौहार आपसी प्रेम ओर भाईचारा के साथ मनाने का संदेश दिया । होली का त्यौहार प्रेम और भाईचारा प्रतीक है, इस त्यौहार को शांति सौहार्दपूर्ण के साथ मनाना चाहिए। तथा इसके साथ ही राजवंशी कल्याण परिषद द्वारा ही सदस्यता अभियान की शुरूआत की और विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया। नये रणनीति पर भी चर्चा की। इस मोकै पर तारकेश्वर दास, फुलेश्वर दास ,मनोरंजन दास,प्रकाश कुमार दास, यमुना सिंह, पवन कुमार दास आदि उपस्थित थे।
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