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- भारत की उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी बजट
- भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में बैटरी भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण:-सुमंत सिन्हा
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- कोयला गैसीकरण: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने का प्लेटफार्म:-देव गावस्करी
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- संकट की घड़ी में असहाय, गरीब और जरुरतमंद लोगों को सहयोग करने के लिए आगे आई नवसृजन की सचिव पूजा ऋतुराज
- पटना में सीआईआई की वार्षिक बैठक दूसरी बार श्री नरेन्द्र कुमार को वर्ष 2022-23 के लिए CII बिहार राज्य परिषद का अध्यक्ष एवं श्री सचिन चंद्रा, उपाध्यक्ष के रूप में चुने गये।
- 2 मार्च 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- महाशिवरात्रि के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन,आज महाशिवरात्रि की महिमा भारी-:अकेला
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| भारत की उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी बजट Posted: 03 Mar 2022 11:46 PM PST भारत की उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी बजट-सुब्रह्मण्यम पुलीपका, सीईओ, नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई)
भारत आज नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है और स्थापित सौर क्षमता के मामले में पांचवां सबसे बड़ा देश है। फरवरी 2022 की शुरुआत में, भारत के सौर प्रतिष्ठानों ने 50 गीगावाट के मील का पत्थर पार कर लिया। इससे भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। वर्ष 2021 भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा। अगस्त 2021 में, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, भारत ने 100 गीगावाट की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षमता हासिल की। नतीजतन, दिसंबर 2021 में, भारत 150 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा (बड़े हाइड्रो सहित) वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। 2021 एक ऐसा वर्ष भी है जिसमें भारत के सौर प्रतिष्ठानों ने 2020 की स्थिति की तुलना में 210 प्रतिशत की छलांग के साथ 10 गीगावाट की क्षमता को पार कर लिया। इस प्रकार, यह कोविड से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत के सौर इतिहास का सबसे अच्छा वर्ष साबित हुआ। आज, भारत दुनिया के ऊर्जा संबंधी सबसे बड़े परिवर्तनकारी कार्यक्रमों वाले देशों में से एक है, जिसका लक्ष्य महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक दोनों है। कॉप26 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की कि भारत 2030 तक अपने नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) संबंधी लक्ष्य को 500 गीगावाट तक बढ़ा लेगा। अब जबकि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिर्फ नौ वर्ष बचे हैं, बजट 2022 ने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षेत्र को एक अनुकूल परिस्थिति प्रदान करने की दिशा में बेहद आवश्यक प्रोत्साहन दिया है। बजट 2022 भारत के ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव के लक्ष्यों और संबद्ध सामाजिक-आर्थिक लाभों को बढ़ावा देने की दृष्टि से वाकई परिवर्तनकारी है, खासकर उस स्थिति में जब यह क्षेत्र बाजार संचालित अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित हो रहा है। इस बजट में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रावधान भारतीय ऊर्जा अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख आधारभूत स्तंभों- "स्वावलंबन", "समृद्धि", "सशक्तिकरण" और "शक्ति" - पर आधारित हैं। स्वावलंबन: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2020 में आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया था। इसके अनुरूप सरकार ने भारत में उच्च दक्षता वाले सौर निर्माण के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की घोषणा की। इस बजट में इस योजना के परिव्यय में 19,500 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे इस योजना का कुल परिव्यय लगभग तीन बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। यह वृद्धि निश्चित रूप से सौर मॉड्यूल और सेल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत की उत्पादन क्षमताओं में तेजी लाने में मदद करेगी और संभावित रूप से अगले तीन वर्षों में घरेलू उत्पादन में कम से कम 45 गीगावाट की वृद्धि कर भारत को वैश्विक सौर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना देगी। इसके अतिरिक्त, मार्च 2024 तक 15 प्रतिशत की रियायती कर व्यवस्था का विस्तार करते हुए आयातित सौर सेल और मॉड्यूल पर क्रमशः 25 प्रतिशत और 40 प्रतिशत की बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) की घोषणा भी की गई। उपरोक्त सभी प्रावधान घरेलू उत्पादन को बेहद जरूरी गति प्रदान करेंगे और आयात पर एक दशक तक की निर्भरता की स्थिति में बदलाव लाते हुए भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के करीब ले जायेंगे। समृद्धि: भारत की सौर क्षमता सात वर्षों में 17 गुना बढ़ी है और यह सिर्फ भारत सरकार के संगठित एवं सुसंगत नीतिगत उपायों के कारण ही संभव हो पाया है। इस वर्ष के बजट ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास को तेजी से आगे बढ़ाया है। निवेश जुटाने के लिए सॉवरेन ग्रीन बांड जारी करने की घोषणा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की दृष्टि से दुनिया के एक आकर्षक केन्द्र के रूप में भारत की पहले से चली आ रही प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगी। जीएसडीपी के चार प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की अनुमति देने का कदम, जिसमें 0.5 प्रतिशत बिजली क्षेत्र के सुधारों से जुड़ा होगा, भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करेगा, जिससे इसके त्वरित विकास को बल मिलेगा। बुनियादी ढांचे की समन्वित सूची में चार्जिंग की सघन अवसंरचना के साथ ऊर्जा संचयन प्रणाली और ग्रिड-स्केल बैटरी प्रणाली की व्यवस्था भारत में ऊर्जा संचयन को किफायती बनाने की आधारशिला रखेंगे। सशक्तिकरण: विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा और कम आबादी, सीमित संपर्क एवं बुनियादी ढांचे वाले सीमावर्ती गांवों के लिए आजीविका सृजन के लिए सहायता का प्रावधान ग्रामीण आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में एक सही कदम है। यह भी रोचक है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने हाल ही में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा आजीविका अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए एक रूपरेखा जारी की है जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिए एक समर्थ इकोसिस्टम बनाना है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए पनबिजली और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बजट में शामिल करने का कदम किसानों की आय को दोगुना करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों को एकीकृत करने के सरकार के संकल्प का एक ठोस प्रमाण है। शक्ति: शक्ति का अर्थ है ताकत। गतिशक्ति और नारीशक्ति पर इस बजट के जोर ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक ताकत प्रदान की है। पीएम गतिशक्ति जहां भारत में आर्थिक विकास और सतत विकास से संबंधित एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण है, वहीं इस दृष्टिकोण के स्वच्छ ऊर्जा और सबका प्रयास की भावना से संचालित होने की माननीय वित्त मंत्री की घोषणा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक उत्साहजनक खबर है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र सभी, विशेष रूप से युवाओं, के लिए बड़ी संख्या में रोजगार और उद्यमशीलता के अवसर पैदा करते हुए भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए गतिशक्ति प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकता है। इस वर्ष के बजट में नारी शक्ति के महत्व को भी मान्यता दी गई है जोकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महिलाओं के नेतृत्व में विकास के आशावादी भविष्य की शुरुआत है। मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 जैसी संशोधित सरकारी योजनाओं ने बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया है और बाल विकास के लिए समृद्ध वातावरण प्रदान करने वाली ये योजनाएं स्वच्छ ऊर्जा द्वारा संचालित हैं। कुल मिलाकर, इस वर्ष का बजट कॉप-26 के दौरान माननीय प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेखित "पंचामृत" दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में सही कदम है। इस दृष्टिकोण में 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य प्राप्त करना शामिल है, जोकि कार्बन उत्सर्जन को एक अरब टन कम करते हुए 2030 तक भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं के आधे हिस्से को पूरा करेगा और 2030 तक कार्बन की तीव्रता को 45 प्रतिशत तक कम करेगा। अंत में, 2070 तक भारत को निवल शून्य (नेट जीरो) बनाने के लिए इन सभी उपायों को एकीकृत करना होगा।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में बैटरी भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण:-सुमंत सिन्हा Posted: 03 Mar 2022 11:42 PM PST भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में बैटरी भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण:-सुमंत सिन्हास्वच्छ ऊर्जा के लिए भारत में ऐतिहासिक परिवर्तन हम पर निर्भर है और देश, तेजी से जलवायु लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ रहा है। हाल के निर्णयों से पता चलता है कि राष्ट्र अपने परिवर्तनकारी बदलाव के लिए बड़े कदम उठा रहा है: कॉप26 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 500 गीगावॉट बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता संबंधी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता; एक महीने पहले हरित बजट और हाल ही में, हरित हाइड्रोजन नीति का पहला चरण। ऊर्जा का भविष्य रोमांचक है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए अक्षय ऊर्जा कंपनियों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों, सार्वजनिक क्षेत्र एवं वित्तीय संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों के दृढ़ और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होगी। केंद्र सरकार ने ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में ऊर्जा भंडारण की एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में पहचान की है, जो उचित है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा (आरई) उत्पादन को मौजूदा 12-13 प्रतिशत से बढ़ाकर कुल उत्पादन के एक तिहाई से अधिक करने पर विचार कर रहा है। इसके माध्यम से नौ साल से भी कम समय में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में अभूतपूर्व 300 गीगावॉट की वृद्धि करना है। अक्षय ऊर्जा, प्रकृति और उसकी अनियमितताओं एवं आकस्मिक परिवर्तनों पर निर्भर करती है। इसलिए, लागत प्रभावी, तीव्र गति से और स्थायी तरीके से अक्षय ऊर्जा के इस विशाल उत्पादन को एकीकृत करने के लिए, हमें ग्रिड की आवश्यकताओं के अनुसार बिजली को अवशोषित करने, भण्डार करने और फिर पुन: प्रवाहित करने के लिए आसानी से बदलने लायक भंडारण प्रणालियों की तत्काल आवश्यकता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने अपने भारत ऊर्जा दृष्टिकोण 2021 में कहा: "दुनिया के लगभग किसी भी देश की तुलना में भारत को अपने बिजली प्रणाली परिचालन में आसानी से बदलने की क्षमता की अधिक आवश्यकता है।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है: "बैटरी भंडारण विशेष रूप से अल्पकालिक आसानी से बदलने की क्षमता के अनुकूल है, क्योंकि भारत को, दिन के मध्य में सौर-ऊर्जा के सर्वाधिक उत्पादन और शाम की सर्वाधिक मांग के बीच तालमेल बिठाने की आवश्यकता है।" पिछले 10 वर्षों में, भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा की कहानी बहुत ही प्रभावशाली है। यदि केवल सौर ऊर्जा पर विचार करें, तो यह 2011 के मात्र 35 मेगावाट से बढ़कर 2021 में 35,000 मेगावाट हो गया। उद्योग ने अपनी भूमिका जरूर निभाई है, लेकिन पिछले एक दशक में हुए स्मार्ट, उत्तरदायी और अनुकूल नीति निर्माण को भी इस श्रेय का हकदार माना जाना चाहिए। चूंकि आरई राष्ट्रीय ग्रिड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, बैटरी भंडारण क्षेत्र भी अपनी भूमिका को विस्तार देना चाहता है। बैटरी भंडारण क्षेत्र: भारत के उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण दुनिया के सबसे बड़े तालमेल वाले ग्रिडों में से एक के साथ, भारत में परिवर्तनशील उत्पादन और मांग-पैटर्न के लगातार बदलते रहने में वृद्धि देखी जा रही है, जिनकी वजह से ग्रिड संतुलन में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना होगा। मांग और आपूर्ति में ये असंतुलन मौसम-आधारित और दैनिक आधार पर, दोनों ही स्तरों में मौजूद है। मौसम-आधारित मांग को बाजार द्वारा सर्वोत्तम तरीके से पूरा किया जाता है, दैनिक बदलावों का समाधान बैटरी भंडारण द्वारा किया जा सकता है। दुनिया भर में, बैटरी तेजी से 'सभी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण' समाधान के रूप में उभर रही है और ग्रिड प्रबंधन के साथ-साथ बिजली क्षेत्र के विभिन्न उप-क्षेत्रों: वितरण, पारेषण और उत्पादन से जुड़े प्रणाली संचालकों/वितरण कंपनियों द्वारा योजना बनाने के लिए अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में, 100 मेगावाट होर्न्सडेल पॉवर रिज़र्व कई अनुप्रयोगों जैसे आवृत्ति समर्थन, विभिन्न बाज़ारों में खरीद-बिक्री, ऊर्जा स्थानांतरण, नवीकरणीय को अनुरूप बनाना आदि एकदम नए क्षेत्रों से राजस्व प्राप्त कर रहा है और छोटी अवधि में ही इसे अपनी कुल लागत वापस मिल गयी है। कुल मिलाकर, बैटरी भंडारण का उपयोग मुख्य रूप से तीन बुनियादी अनुप्रयोगों को व्यापक रूप से पूरा करने के लिए किया जा रहा है। ये हैं- आवृत्ति प्रतिक्रिया प्रबंधन, ऊर्जा स्थानांतरण या विभिन्न बाज़ारों में खरीद-बिक्री और मध्य/लंबी अवधि के ऊर्जा भंडारण। अच्छी खबर यह है कि, पिछले एक दशक के दौरान, बैटरी भंडारण की लागत में तेजी से कमी आई है और निकट भविष्य में और कमी आने की उम्मीद है। यूएस और यूके जैसे देशों में पहले से ही उदाहरण मौजूद हैं, जहां बैटरी भंडारण ग्रिड नेटवर्क के उतार-चढ़ाव और विश्वसनीयता का आर्थिक रूप से व्यवहार अनुकूल स्रोत प्रदान करती है। व्यापक और संकेत देने वाले अवसर भारतीय बैटरी भंडारण की मांग में बिजली-संचालित परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ अन्य भंडारण आवश्यकताओं तेजी आयेगी। नीति आयोग के अनुसार, भारत का बैटरी भंडारण बाजार 2030 तक 1000 गीगावॉट/घंटा से अधिक होने की उम्मीद है, जो वर्तमान के मामूली स्तर से बढ़कर कुल बाजार मूल्य के रूप में 250 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच जाएगा। 1000 गीगावॉट/घंटा में से, अकेले बिजली क्षेत्र की मांग करीब 150 गीगावॉट/घंटा होने की उम्मीद है, इससे परियोजनाओं में 60 बिलियन डॉलर का पूंजी निवेश होगा। कुल 1000 गीगावॉट/घंटा क्षमता की स्थापना के लिए, हमें अगले पांच से छह वर्षों में लगभग 16.5 बिलियन डॉलर के विनिर्माण निवेश की आवश्यकता होगी। यह प्रति वर्ष लगभग 150 गीगावॉट/घंटा की क्षमता में तब्दील हो जाएगा, जिससे विनिर्माण और निर्माण में हजारों नौकरियां पैदा होंगी। वैश्विक अनुभव, स्थानीय सीख? बैटरी भंडारण निर्माण में वैश्विक क्षमता, पिछले एक दशक में सात गुना बढ़ी है। चीन की 78 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि जापान और कोरिया बहुत छोटे हिस्सेदार हैं। बैटरी निर्माण के लिए एक प्रमुख निवेश केन्द्र के रूप में यूरोप भी तेजी से उभर रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, अभी कुल विनिर्माण क्षमता लगभग 1,500 गीगावॉट/घंटा है। उम्मीद है कि यह 2030 तक बढ़कर लगभग 4,700 गीगावॉट/घंटा हो जाएगा। वर्तमान में, चीन अकेले कुल विनिर्माण क्षमता का लगभग 75 प्रतिशत (1,100 गीगावॉट/घंटा) का हिस्सेदार है और आगे भी प्रमुख हिस्सेदार बना रहेगा, लेकिन इसकी हिस्सेदारी में कमी आने की संभावना है, जो नए दशक की शुरुआत तक कम होकर 64 फीसदी रह सकती है। चिली, पेरू और बोलीविया जैसे देशों में महत्वपूर्ण खनिज खदानों के स्वामित्व वाली कंपनियों के साथ रणनीतिक गठजोड़ के जरिये, चीन ने दुनिया के बाकी देशों की तुलना में यह प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल किया है। जहां तक यूरोप की स्थिति है, विनिर्माण के लिए आपूर्ति श्रृंखला चीन की तरह मजबूत नहीं है, लेकिन बैटरी की मांग बढ़ रही है और कई गीगा-कारखाने जल्द ही सामने आएंगे। यह मांग, बिजली संचालित परिवहन प्रणाली तथा ग्रिड-स्केल भंडारण को अपनाने से प्रेरित है। यूके, फ्रांस एवं जर्मनी जैसे देशों में सहायक सेवाओं के लिए स्पष्ट और सुस्थापित बाजार हैं, जिन्हें बड़े पैमाने पर बैटरी भंडारण के उपयोग करने की आवश्यकता है। भारत के लिए चुनौतियां भारत नेट जीरो के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने अक्षय ऊर्जा में विस्तार कर रहा है और इसके लिए बैटरी भण्डारण एक महत्वपूर्ण कारक है। हालांकि, चीन और यूरोप सहित वैश्विक पृष्ठभूमि को देखते हुए, विभिन्न चुनौतियों का समाधान जरूरी है: ● भंडारण के लिए सही मूल्यांकन निवेश को आकर्षित करने और एक सक्षम इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए, यह आवश्यक है कि बैटरी भंडारण परियोजनाएं निवेश अनुकूल होने के लिए पर्याप्त राजस्व प्राप्त करें। दुनिया भर में, इस तरह की परियोजनाओं को राजस्व के विभिन्न आय स्रोत जैसे आवृत्ति प्रबंधन सेवाओं, कीमत के उतार-चढ़ाव संबंधी बाजार संचालन और एक ही परिसंपत्ति से अक्षय ऊर्जा उत्पादन की परिवर्तनशीलता को नियंत्रित करने आदि के लिए डिज़ाइन किया गया है। हालांकि, भारत में, इनमें से अधिकांश उपयोग के कार्य या तो मौजूद नहीं हैं या निजी निवेश के लिए नहीं खोले गए हैं या भंडारण परियोजनाओं को व्यावहारिक बनाने के लिए उचित आय प्रदान नहीं करते हैं। ● उच्च अग्रिम लागत ऊर्जा भंडारण एक गैर-उत्पादक संपत्ति है और इसकी लागत को कम करने की कोई भी पहल इसे व्यावहारिक बनाने में मदद करेगी। हालांकि, बैटरियों पर वर्तमान में करों और शुल्कों के साथ भारी टैक्स लगाया जाता है, जो कुल मिलाकर 40 प्रतिशत से अधिक है। इसके परिणामस्वरूप बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है। ● कच्चे माल के लिए और योजनाएं बनाने की आवश्यकता बैटरी निर्माण के लिए आपूर्ति श्रृंखला को चार अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जा सकता है: कच्चे माल का खनन; कच्चे माल का शोधन; सेल निर्माण; और मॉड्यूल को पैक करना। सेल निर्माण और बाद में, बैटरी में उपयोग के कच्चे माल के परिशोधन को मोटे तौर पर पीएलआई योजना में शामिल किया है, भारत में लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे कच्चे माल की नियमित व आसान उपलब्धता को मुख्य चुनौती के रूप में देखा जा सकता है। आगे का रास्ता? ● भंडारण के लिए बाजार निर्माण भंडारण का प्रभावी उपयोग, न केवल उत्पादन परियोजनाओं के साथ बल्कि पारेषण और वितरण सहित पूरे बिजली इकोसिस्टम के सभी स्तरों पर होता है। जहां कहीं भी बैटरी भंडारण लगाया जाता है, अधिकतम परिसंपत्ति उपयोग के लिए अनुप्रयोगों के पूरे मूल्य को प्राप्त करना सबसे जरूरी होता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि ऊर्जा भंडारण के लिए कई अनुप्रयोगों को विकसित करने और उनके लिए बाजार बनाने के लिए सही नीतियां तैयार की जाएं। इसके अलावा, चूंकि भंडारण प्रणालियों की लागत में भारी कमी आई है, और यह जारी भी रहेगी, इसलिए महत्वपूर्ण है कि लंबी अवधि के लिए योजना बनाते समय, भंडारण सेवाओं के लिए भागीदारी के अवधि छोटी रखी जाए। ● कर और शुल्क में छूट जैसे केंद्र सरकार ने पूंजीगत उपकरणों के लिए सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क पर रियायत/छूट देने के माध्यम से अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए एक मजबूत संभावित मांग बनाने में मदद की, बैटरी भंडारण के लिए भी इस सन्दर्भ में विचार किया जाना चाहिए। सरकार ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को सबसे कम जीएसटी श्रेणी (5 प्रतिशत) में रखने और शुरुआती कुछ वर्षों में आयात शुल्क को समाप्त करने पर विचार कर सकती है। बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भर होने के साथ टैक्स को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, पारेषण छूट और ब्याज दर सब्सिडी से उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की प्रति यूनिट लागत को कम रखने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, शुरुआती कुछ परियोजनाओं के लिए, निवेशकों और ग्रिड संचालकों को आकर्षित करने के लिए लागत-आय अंतर के सन्दर्भ में वित्तीय सहायता पर विचार करना उचित होगा। इसके साथ ही, और भंडारण संचालकों के लिए नियमित राजस्व प्राप्ति को प्रोत्साहित करने को ध्यान में रखते हुए, अगले तीन से पांच वर्षों के लिए भंडारण प्रणाली से भेजी गई ऊर्जा की प्रत्येक इकाई के लिए, अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा प्रमाण पत्र प्रदान किए जा सकते हैं। ● रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला और प्रौद्योगिकियों की सम्पूर्ण श्रेणी सरकार उन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला पर विचार कर सकती है, जिनका उपयोग बैटरी बनाने में किया जाता है। आपूर्ति श्रृंखला, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी के रूप में हो सकती है। एक ऐसे इकोसिस्टम पर विचार किया जा सकता है, जो वैकल्पिक भंडारण प्रौद्योगिकियों जैसे कि फ्लो बैटरी, सोडियम आयन, सोडियम सल्फर और संपीड़ित वायु ऊर्जा प्रणालियों के विकास को सक्षम बनाता है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सभी प्रौद्योगिकियां सोडियम, सल्फर, वैनेडियम, स्टील और आयरन जैसे खनिजों का उपयोग करती हैं जो भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके अलावा, यह अधिक उत्सर्जन वाली आपूर्ति की आवश्यकता को भी काफी हद तक कम करती है। सोडियम आयन जैसी भंडारण तकनीकों का उपयोग कम से मध्यम अवधि के भंडारण के लिए किया जाता है, क्योंकि इस प्रौद्योगिकी की लिथियम की तुलना में लागत कम होती है। सोडियम सल्फर बैटरी आम तौर पर चार से छह घंटे ऊर्जा अधिकतम स्थानांतरण को पूरा कर सकती है। संपीड़ित ऊर्जा भंडारण लंबी अवधि के भंडारण की जरूरतों को पूरा करता है- छह घंटे से अधिक की अवधि के लिए- जो अति महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए आवश्यक होते हैं और प्रदूषण फैलाने वाले बड़े डीजल के बदले उपयोग में लाये जा सकते हैं। भारत अपनी संपूर्ण विद्युत संरचना का पुनर्गठन कर रहा है, नेट जीरो लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों और उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भंडारण समाधानों की सम्पूर्ण श्रृंखला की आवश्यकता होगी। विनिर्माण इकोसिस्टम के अलावा, गुणवत्ता एकीकरण और मज़बूत सॉफ्टवेयर विश्लेषण के साथ प्रदर्शन पर ध्यान केन्द्रित करने सहित तैनात किये जाने से सम्बंधित संरचना विकसित करना महत्वपूर्ण है। यह अनुमान लगाते हुए, पूरी दुनिया में बैटरी भंडारण की अग्रणी कंपनी, यूएस की फ्लुएंस, स्थानीय भंडारण समाधान प्रदान करने के लिए, रीन्यू पावर के साथ भागीदारी में भारत में संयंत्र स्थापित कर रही है। यह स्पष्ट है कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में बदलाव के लिए बैटरी भंडारण महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में, नीति निर्माताओं को नीति निर्माण संबंधी अपने प्रेरक अभियान को जारी रखने की आवश्यकता है, जैसा कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में पवन और सौर ऊर्जा के लिए किया है। हाल के बजट और हरित हाइड्रोजन के लिए भी नीतियां बनायी गयी हैं। इसे अंतिम रूप दिए जाने की आवश्यकता है कि जब नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है, तो किन कारकों से ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित होगी। कई विकल्प हैं, जैसे करों और शुल्कों में कमी, एक स्थानीय विनिर्माण इकोसिस्टम का निर्माण आदि, जिनका उपयोग बाद में राजकोषीय लाभों को क्रमिक रूप से कम करने के लिए किया जा सकता है। बैटरी इकोसिस्टम के विकसित होने के साथ सरकार और उद्योग को भी एक स्थायी दृष्टिकोण अपनाने को लेकर विचार करना चाहिए। भारत द्वारा ऊर्जा के नए विकल्पों को अपनाने और कार्बन-उत्सर्जन कम करने के संकल्प में बैटरी भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए सभी हितधारकों के प्रयासों की आवश्यकता है। सरकार ने अपनी इच्छा और कार्य-क्षमता लोगों के समक्ष रखी है। शुरुआत पहले ही की जा चुकी है: भारत ने केवल एक दशक में अक्षय ऊर्जा की क्षमता में 150 गीगावॉट की वृद्धि की है, जिसे किसी भी पैमाने के सन्दर्भ में एक उल्लेखनीय उपलब्धि कहा जा सकता है। उद्योग जगत के साथ-साथ अन्य हितधारकों को भारत को एक स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था बनाने के लिए अपने प्रयासों को तेज करना चाहिए, ताकि तेज विकास और हमारे लोगों के स्वास्थ्य के बेहतर परिणाम मिल सकें। यह अब कोई विकल्प नहीं है। यह बहुत जरूरी है। सुमंत सिन्हा रीन्यू पावर के अध्यक्ष और सीईओ तथा एसोचैम के अध्यक्ष-नामित हैं।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 03 Mar 2022 06:12 PM PST बिहार सरकार वगैर ऑडिट के कर रही है कार्य हो रहा है सरकारी फंड का दुरूपयोग :- संजय कुमार झा बिहार सरकार वगैर ऑडिट के कर रही है कार्य बिहार के प्रशिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय कुमार झा ने बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार के सभी विभाग वगैर ऑडिट के कार्य करते है लगातार १७ सालो से बिहार में हो रहा है सरकारी फंड का दुरूपयोग| दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/Jubg5Zq Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/9S0rcLU visit website : https://ift.tt/9dYbPiK via YouTube https://www.youtube.com/watch?v=iCCTZqd6QrM |
| Posted: 03 Mar 2022 11:12 AM PST पटना का प्रसिद्ध घी दुकान जो जाना जाता है छ्जुबाग के राय जी के नाम से जिसके नाम का दुरूपयोग कर लोग पटना का प्रसिद्ध घी दुकान जो जाना जाता है छ्जुबाग के राय जी के नाम से जिसके नाम का दुरूपयोग कर लोग ग्राहकों के साथ कर रहें है धोखा | देखिये स्वयं रामजतन राय ने उन सबकी पोल खोल कर रख दी है |राय जी की दुकान अब पोस्टल पार्क के बैद्यनाथ आयुर्वेद के बगल में है , जहाँ से प्राप्त होता है शुद्ध घी, पनीर और पेड़ा | दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/Jubg5Zq Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/9S0rcLU visit website : https://ift.tt/9dYbPiK via YouTube https://www.youtube.com/watch?v=4je7HdfGRys |
| बरहज में कड़ी चौकसी के बीच 51% मतदान संपन्न युवाओं में दिखा खासा उत्साह Posted: 03 Mar 2022 08:13 AM PST बरहज में कड़ी चौकसी के बीच 51% मतदान संपन्न युवाओं में दिखा खासा उत्साहबरहज,देवरिया से संवाददाता पद्मनाभ त्रिपाठी की खबर । बरहज विधानसभा क्षेत्र के 369 मतदेय स्थलों पर केंद्रीय बल और पुलिस बल की निगाहबानी में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। संवेदनशील बूथों की छतों पर सुरक्षा बल के जवान डटे हुए दिखाई दिए। सुरक्षाबलों ने सख्ती दिखाते हुए बूथ पर मतदाताओं को मोबाइल नहीं ले जाने दी तथा नियम का कड़ाई से पालन कराया। ग्रामीण क्षेत्र में भी मतदान को लेकर खास उत्सुकता दिखाई दिया। खासकर युवाओं में मतदान को लेकर खासा उत्साह था दोपहर 3:00 बजे तक 42 फ़ीसदी मतदान हुआ था। विधानसभा के प्रत्याशियों ने भी पूरे विधानसभा का भ्रमण किया तथा कहीं भी गड़बड़ी नहीं मिलने से वे लोग काफी संतुष्ट दिखे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भाटपार रानी विधानसभा में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न , मतदाताओं में दिखा काफी उत्साह । Posted: 03 Mar 2022 08:12 AM PST भाटपार रानी विधानसभा में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न , मतदाताओं में दिखा काफी उत्साह । देवरिया ब्यूरो वेद प्रकाश तिवारी की खबर । आज तीन मार्च को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ । युवा मतदाताओं में बहुत उत्साह देखने को मिला । लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली । यहां मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच ही देखने को मिली । 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाटपार रानी विधानसभा सीट से आशुतोष उपाध्याय ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बीजेपी के जयनाथ कुशवाहा को 11 हजार 097 वोटों से पराजित किया था । यहां पिछली बार 57.48 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार के चुनाव में यहां से बीजेपी ने सभा कुंवर कुशवाहा, सपा ने आशुतोष उपाध्याय, बसपा ने अजय कुशवाहा और कांग्रेस ने केशव चंद यादव को प्रत्याशी बनाया है। यहां कुल 3,15,706 मतदाता हैं। आज 3 मार्च को हुए विधान सभा चुनाव में देवरिया जिले के मतदान की स्थिति प्रतिशत में-- देवरिया जिले में कुल 56.29% मतदान हुआ, सबसे ज्यादा मतदान पथरदेवा विधान सभा में हुआ । 1- 336- रुद्रपुर = 55.24% 2- 337-देवरिया= 55.21% 3- 338- पथरदेवा= 59.47% 4- 339- रामपुर कारखाना= 57.75% 5- 340-भाटपाररानी=56.07% 6- 341- सलेमपुर= 52.88% 7- 342- बरहज= 57.39% टोटल प्रतिशत = 56.29% उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विभिन्न जनपदों की स्थिति आज 5 बजे तक मतदान की स्थिति प्रतिशत में-- यूपी में 5 बजे तक 53.31 फीसदी मतदान अंबेडकर नगर में 58.68 फीसदी मतदान बलिया में 51.74 प्रतिशत मतदान बलरामपुर में 48.41 फीसदी मतदान बस्ती में 54.07 प्रतिशत मतदान देवरिया में 51.51 फीसदी मतदान गोरखपुर में 53.86 प्रतिशत मतदान कुशीनगर में 55.01 फीसदी वोटिंग महराजगंज में 57.48 प्रतिशत मतदान संतकबीर नगर में 51.14 फीसदी वोटिंगसिद्धार्थनगर में 49.83 प्रतिश मतदान हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| नई दिल्ली के होटल रॉयल प्लाजा में हुआ फैशन शो का आयोजन Posted: 03 Mar 2022 08:07 AM PST नई दिल्ली के होटल रॉयल प्लाजा में हुआ फैशन शो का आयोजनसंवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खास खबर शिल्पस्मृति स्पार्कलिंग इवेंट्स ने नई दिल्ली के होटल रॉयल प्लाजा में फैशन शो का आयोजन डायरेक्टर शिल्पी बहादुर और स्मृति महाजन ने किया। शिल्पी बहादुर और स्मृति महाजन ने अपने मॉडलिंग सफर के दौरान ये देखा की फैशन जगत में खूबसूरती के कुछ तयशुदा मापदंड हैं, इसी कारण शिल्पी और स्मृति ने स्थापित मॉडल्स को न लेकर पुलिस से लेकर बिजनेस चलाने वाली और घरेलू से लेकर कॉरपोरेट सेक्टर में कार्य करने वाली महिलाओं को मौका देकर उन्हें अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास दिखाने का मौका देकर नारीत्व का जश्न मनाया। सूत्रों के अनुसार शिल्पी बहादुर और स्मृति महाजन ने बताया कि यह फैशन शो नारीत्व और महिला सशक्तिकरण के विषय पर आधारित था। उन्होंने बताया कि इस शो में हर उम्र और कार्यक्षेत्र की महिलाओं ने अपने हुस्न और अदाओं का जलवा रैंप पर बिखेरा। फैशन जगत और राजनीति और पत्रकारिता जगत की जानी मानी हस्तियों ने शिरकत कर इस आयोजन की शोभा बढ़ाई। जिनमे प्रमुख रूप से शरद कोहली, संजोय भारद्वाज, अभिषेक बच्चन, मास्टरशेफ आशीष सिंह, पूजा दुआ, मान्या पाठक, साक्षी जैन,अली अंसारी, निजामी ब्रदर्स, अनिल अरोड़ा, मुनीश गौर, महेश चड्डा, आशा यादव, पूजा गुप्ता थे।एडोर्नियम कटूर की डिजाइनर काजल गुप्ता के खूबसूरत ड्रेसेज मॉडल्स की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ 6 साल के प्रीतिश Posted: 03 Mar 2022 08:05 AM PST इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ 6 साल के प्रीतिशसंवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खास खबर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ 6 साल के प्रीतिश का नाम। प्रीतिश बंद आंखों से, सबसे लंबे समय तक हारमोनियम बजाने का रिकॉर्ड बनाया है। प्रीतिश को 38 मिनट और 54 सेकंड्स तक बंद आंखों से हारमोनियम बजाने के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में फीट अचीवर ऑफ इंडिया का दर्जा दिया गया। सूत्रों के अनुसार उस वक्त यानि 7 फरवरी,2022 को वो 7 साल और 11 दिन के थे। इसके साथ ही प्रीतिश ने 6 अलग-अलग भाषाओं और 5 अलग-अलग स्केल्स में 10 गाने रिकॉर्ड किए हैं। 6 वर्ष 11 महीने के सरनवो प्रीतिश में 27 जनवरी,2015 को कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्मे प्रीतिश अपने टैलेंट की वजह से सुर्खियों में हैं। सरनवो को एक बेहतरीन pianist, सिंगर और संगीतकार के रूप में जाना जाता है। वह किसी भी गाने के सरगम को पहचान कर बता सकता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| श्वेत ऋषियों का देश है सोवियत रूस Posted: 03 Mar 2022 06:44 AM PST श्वेत ऋषियों का देश है सोवियत रूससंकलन अश्विनी कुमार तिवारीलेखक:- स्व हरवंशलाल ओबेरॉय (अनेक प्राच्य भारतीय विद्याओं के अधिकृत जानकार, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान) रूस आर्यों की पश्चिम यात्रा का यूरोप में प्रथम पड़ाव है। मनु के जल प्लावन के समय जब भारत, अरब ईरान का अधिकांश भाग, मध्यपूर्व के देश आदि जलमग्न हो गए थे तब आर्यों की पश्चिमोन्मुखी शाखा को, जहाँ काकेशस पर्वत की तलहटी में, कश्यप सागर के तट पर शरण योग्य भूमि मिली उसे 'आर्याणां बीजम्' कहा जाता था। कालांतर में उसी को नाम 'आर्यनम बायजो' बोला जाने लगा। उसी के पड़ोस में आर्मेनिया नामक देश है। उसका नाम भी आर्याणां था। 23 शती पूर्व सिकन्दर के काल में उसे आर्यनम् अथवा आर्यमन् कहते थे। यूनानी लोग प्रत्येक देश नाम स्त्रीलिंग वाचक बनाते थे। अत: इतली (इटली) का इतालिया, रूस का रशिया, अरब का अरेबिया, लिथूर का लिथूरिया, आर्यमन् का आर्मेनिया नाम हो गया। इसीलिए रूसी, आर्मेनी, लिथूनी भाषाओं में सहस्रों संस्कृत के तत्सम एवं तद्भव शब्द हैं। आर्य जाति की मूल भूमि भारत से यूरोप तथा अमरीका तक फैली हुई विशाल आर्य जाति की मूल भूमि तथा मूल भाषा संस्कृत के विषय में पश्चिमी इतिहासकारों ने कई अटकलें लगायी हैं- (क) अजरबेजान (आर्याणां बीजम्) का सीधा अर्थ आर्यों का बीज स्थान लगाया। यह कहा जा रहा है कि आर्य लोग काकेशस से ही आर्यावर्त (भारत) में आकर बसे तथा कुछ काकेशस से ही यूरोप की ओर फैल गए। (ख) मध्य एशिया में प्राचीन भारतीय संस्कृति के अवशेषों को पाकर कुछ इतिहासकारों ने यह अनुमान लगाया है कि आर्य वहीं से भारत तथा यूरोप की ओर फैले होंगे। (ग) महापंडित राहुल सांकृत्यापन ने अपने ग्रन्थ 'वोल्गा से गंगा' तथा 'मध्य एशिया का इतिहास' में यही संभावना प्रकट की है कि भारतीय आर्य सोवियत रूस देश (श्वेत ऋषि देश) में अजरबेजान क्षेत्र से ही पूरब में भारत की ओर पश्चिम में यूरोप की ओर फैले होंगे। वास्तव में आर्यों की मूल भूमि आर्यावर्त ही है किन्तु जल प्लावन जैसे भयंकर-प्राकृतिक प्रकोप से बचने के लिए आर्यों की एक बहुत बड़ी शाखा पश्चिम की ओर बढ़ी। यह वर्णन भारत में शतपथ ब्राह्मण, पारसियों की धर्म पुस्तक जेन्दावस्था, यहूदियों की पुरानी बाइबिल, ईसाइयों की बाइबिल, अरबों के कुरान शरीफ इत्यादि में मिलता है। राजर्षि मनु को जल-से बचने के लिए अपनी नौका हिमालय पर्वत में मनाली श्रृंग (हिमालय प्रदेश) से बाँधनी पड़ी, वहीं पश्चिमोन्मुखी आर्यों को इस जल प्लावन के समय जबकि सभी मैदान जल में डूब गए तब यूरोप एवं एशिया के संगम स्थल यूरेशिया क्षेत्र में स्थित 19237 फुट ऊँची काकेशस पर्वत की सर्वोच्च चोटी, एलबु्रस में शरण मिली। वहां आर्यों के बीच की रक्षा होने से वह क्षेत्र 'आर्याणां बीजम्' कहलाया। वह आर्यों की मूल भूमि न होकर आर्यों की शरण भूमि थी। प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार 'रूसी भाषा के प्राचीनतम् नमूने 11वीं सदीं मध्य के आस-पास के हैं। ….. सच्चे अर्थों में रूसी भाषा में साहित्य का आरम्भ 13वीं सदी से हुआ है। ब्लूमफील्ड एवं मैक्समूलर भी यह मानते हैं कि रूसी भाषा के अभिलेख 12 वीं शताब्दी से मिलते हैं। इसकी तुलना में भारतीय संस्कृत भाषा के ग्रन्थ ईसा से हजारों वर्ष पूर्व के मिलते है। ऋग्वेद जो विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है तथा कम से कम 10 हजार वर्ष पुराना माना जाता है, उसमें आर्यों की मूल भूमि के रूप में सप्तसिन्धु (उत्तरी भारत) का वर्णन है। अत: आर्यावर्त को ही आर्यों की मूल भूमि मानकर इतिहास को भूगोल के चौखटे में बिठाने से प्राचीन इतिहास एंव भाषा विज्ञान के प्राय: सभी गुप्त रहस्य प्रकट होने लगते हैं। इस प्रकार सभ्यता एवं संस्कृति का प्रवाह 'वोल्गा से गंगा' की ओर न होकर 'गंगा से वोल्गा' की ओर ही प्रमाणित होता है। प्रख्यात यूरोपीय प्राच्यविद्या मनीषी श्री लूई रेणु ने कहा है कि 'संसार की सब भाषाएं संस्कृत से प्रभावित हैं। 'प्रख्यात अमेरिकी संस्कृति शोधकर्ता श्री विल डूरेंट ने लिखा है, अर्थात् भारत ही हमारी जाति की जन्मभूमि थी तथा संस्कृत ही यूरोप की भाषाओं की जननी हैं। महापंडित राहुल सांकृत्यायन 'सोवियत' विशेषण को संस्कृत के श्वेत शब्द से व्युत्पन्न मानते हैं। संस्कृत में श्वेत का अर्थ सफेद रंग, उजला अथवा उजाला (प्रकाश) होता है। रूसी भाषा में स्वेत तथा 'त्स्वेत्' शब्द इसी अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। जैसे, स्टालिन की पुत्री श्वेतलाना का संस्कृत में अर्थ होगा श्वेतानना यानी श्वेत मुखवाली। राहुल जी के अनुसार रूसी शब्द संस्कृत के ऋषि से निकला है, जिसका अर्थ है ज्ञानी अथवा द्रष्टा। मेरा तथा कुछ अन्य विद्वानों का मत है कि रूस या रूसी शब्द 'ऋक्ष' शब्द से व्युत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है रीछ। यह मनोरंजक तथ्य है कि संस्कृत के ऋषि एवं ऋक्ष (रीक्ष) दोनों एक ही धातु ऋ से निकले हैं जिसका अर्थ है गमन करना या देखना। रीछ की लौकिक दृष्टि बडी व्यापक होती है। दोनों की गति विशेष महत्व की है। ऋषि मोक्ष का मधु विद्या-पान करता है तथा रीछ मधु के छत्ते का मधु। अत: संस्कृत एवं रूसी दोनों में रीछ को मध्वद, मधु खाने वाला कहा जाता है। उत्तरी ध्रुव की परिक्रमा करने वाले सप्तर्षि अर्थात् कश्यप, अत्रि, भृगु, वसिष्ठ, विश्वामित्र, जमदाग्नि, भरद्वाज को रूसी एवं अन्य युरोपीय भाषाओं में सात बड़े रीछ कहा जाता है। रूस में वैसे भी रीछ की इतनी प्रतिष्ठा है कि रीछ रूस का प्रतीक ही बन गया है। डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार रूसियों के एक प्राचीन कबीले का नाम रास या रासे था। इसी आधार पर देश तथा भाषा का नाम रूस-रूसी पड़ा। कुछ लोग इन नामों का सम्बन्ध रूस के दक्षिणी भाग में बहने वाली नदी रास से जोड़ते हैं। प्राचीन संस्कृत में श्रव शब्द यश, धन स्तुति आदि के अर्थ में प्रयुक्त होता था तथा अनेक सुन्दर नामों के अंत में श्रवा प्रयुक्त होता था। जैसे सोमश्रवा, वाजिश्रवा, भूरिश्रवा इत्यादि । उसी श्रवा शब्द से रूसी भाषा में स्लाव शब्द प्रचलित हुआ है जो व्यक्तिगत नामों तथा देशवाचक नामों में भी प्रयोग हुआ है। जैसे, श्वेत-स्लाव, व्याचि-स्लाव, स्व्यातोस्लाव इत्यादि व्यक्तिवाचक नाम हैं तथा चेकोस्लाव, यूगोस्लाव आदि देशवाचक नाम हैं। पूर्वा स्लाव भाषाओं में रूसी, बोल्गारी तथा सेर्बो भाषाएं गिनी जाती हैं, तथा पश्चिमी स्लाव भाषा में स्लोवानी, चेक तथा पोलो भाषाएं परिगणित हैं। ✍🏻साभार भारतीय धरोहर अजेय रूस बलि के युग में इन्द्र की त्रिलोकी में भारत, चीन और रूस थे। अतः चीन के लोग अपने देश को मध्य राज्य कहते थे। भारत उज्जैन से ४५ अंश पश्चिम से ४५ अंश पूर्व तक था। पश्चिमी सीमा से ९० अंश पूर्व वामन का प्रथम पद इण्डोनेसिया (यवद्वीप सहित ७ मुख्य द्वीप) के पूर्व भाग न्यूगिनी पर पड़ा। दूसरा पद उत्तर ध्रुव या मेरु पर पड़ा। तीसरा वापस पश्चिमी सीमा पर पड़ा। (रामायण, किष्किन्धा काण्ड, अध्याय ४०) रत्नवन्तं यवद्वीपं सप्तराज्योपशोभितम्॥२९॥ यवद्वीपमतिक्रम्य शिशिरो नाम पर्वतः॥३०॥ तत्र पूर्वपदं कृत्वा पुरा विष्णुस्त्रिविक्रमे। द्वितीयं शिखरे मेरोश्चकार पुरुषोत्तमः॥५८॥ महाभारत में रूस को अजेय कहा गया है, या अपराजिता दिक्। वर्षं हिरण्यकं नाम विवेशाथ महीपते। ------------ अथ जित्वा समस्तांस्तान् करे च विनिवेश्य च। --- शृङ्गवन्तं च कौन्तेयः समतिक्रम्य फाल्गुनः) उत्तरं कुरुवर्षं तु स समासाद्य पाण्डवः। इयेष जेतुं तं देशं पाकशासननन्दनः॥७॥---- पार्थ नेदं त्वया शक्यं पुरं जेतुं कथञ्चन। उपावर्तस्व कल्याण पर्याप्तमिदमच्युत॥९॥ --- ततो दिव्यानि वस्त्राणि दिव्यान्याभरणानि च। क्षौमाजिनानि दिव्यानि तस्य ते प्रददुः करम्॥१६॥ (महाभारत सभा पर्व, अध्याय २८-अर्जुन दिग्विजय) हिरण्यक वर्ष = रूस (हिरण्य या लाल रंग), शृङ्गवान् पर्वत (रूस की पूर्वी सीमा पर यूराल पर्वत), उत्तर कुरु वर्ष (शिविर या साइबेरिया का मध्य भाग)-ओम्स्क नगर प्राचीन शून्य देशान्तर रेखा पर था। इस रेखा पर उज्जैन के उत्तर भारत का प्रमुख नगर कुरुक्षेत्र था। सबसे उत्तर का मुख्य नगर उत्तर कुरु था। यहां से पूर्व पश्चिम दिशा में देशान्तर माप का आरम्भ होता है, अतः उत्तर कुरु को ओम् (रूसी भाषा में ओम्स्क) कहते थे। इसे अपराजिता दिक् कहा गया। वहां के लोगों ने अर्जुन से कहा कि यह जीता नहीं जा सकता है, अतः कुछ उपहार दे कर विदा किया। ये दिव्य वस्त्र थे अर्थात् अति शीत में पहनने के कपड़े जिनकी भारत में कभी आवश्यकता नहीं है। आधुनिक युग में नेपोलियन तथा हिटलर दोनों की दिग्विजय यात्रा रूस के ही विशाल हिम भूमि में फंस कर रह गयी थी। यूक्रेन को पाश्चात्य षड्यन्त्र द्वारा रूस से अलग किया गया तथा रूस विरोधी शासन स्थापित किया गया है। यह मूल रूस का मुख्य भाग था तथा दोनों देशों में एक ही जति है। रूस पर साम्राज्यवाद का आरोप लगता है। पर रूस का साम्राज्य था, कभी उपनिवेशवाद नहीं रहा। ब्रिटेन, स्पेन, पुर्तगाल, बेल्जियम या नीदरलैण्ड ने जहां अपने उपनिवेश कियॆ वहां के मूल निवासियों का पूर्ण संहार कर उत्तर, दक्षिण अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया में निर्मूल कर दिया। अफ्रीका की भी आधे से अधिक लोगों का संहार किया तथा गुलाम बना कर बेचा। अन्य देशों में भी वहां के निवासी गुलाम ही रहे, केवल कुछ दलालों को नेता बना कर रखा। किन्तु रूस ने कभी दास व्यापार नहीं किया। बल्कि वहां की जनता तुर्की के लुटेरों द्वारा गुलाम बना कर बेची जाती रही। उससे रूस को इवान तथा पीटर महान् ने मुक्त कर साम्राज्य का विस्तार किया। पर रूस में कभी भी पोलैण्ड, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान आदि के निवासियों को रूस का गुलाम नहीं माना गया। सबके लिए एक ही कानून रहा। यह भारतीय साम्राज्यों जैसा था। रूस का यूक्रेन युद्ध भी उसे अखण्ड करने के लिए है। ब्रिटेन अमेरिका की तरह अकारण नरसंहार नहीं है। अमेरिका को कोरिया से कोई खतरा नहीं था पर वहां आक्रमण कर लाखों लोगो की हत्या की तथा आज तक उसके २ खण्डों को मिलने नहीं दिया। इसी प्रकार वियतनाम को विभाजित रखने के लिए वहां बाढ़ सहायता के नाम पर अमेरिकी सेना गयी और १० लाख से अधिक लोगों की हत्या की। विख्यात जालसाज ब्रिटेन ने कहानी बनायी कि ईराक में नरसंहार के हथियार हैं और इस बहाने से ईराक पर आक्रमण कर सद्दाम हुसेन सहित १० लाख से अधिक लोगों की हत्या की। भारत को भी विभाजित कर ३० लाख लोगों की हत्या कराई तथा २ करोड़ लोगों को विस्थापित किया। यूरोप में भी चेकोस्लोवाकिया को विभाजित कर वहां युद्ध कराया, जिससे हथियार बिक्री द्वारा आय होती रहे। १९७१ में भी अमेरिका तथा ब्रिटेन दोनों के संयुक्त नौसैनिक आक्रमण से रूस ने ही भारत की सैनिक सहायता की थी। वर्तमान आक्रमण में भी रूस ने यथासम्भव कम हत्या की है तथा भारतीय छात्रों को निकलने की सुविधा दी है। ✍🏻अरुण उपाध्याय भारत सबसे समृद्ध देश होता था | ओटोमन ने एशिया माइनर पर कब्ज़ा करके भारत और यूरोप के बीच का रास्ता रोक दिया | अब सब भारतीय सामान अरब के लोगो के माध्यम से ही यूरोप पहुचते , वो भारतीय सामान के एक्सक्लूसिव रीसेलर बन गए और मन माफिक कीमते यूरोपियो से लेने लगे | पुरे यूरोप में महगाई बढ़ गइ और यूरोपीय व्यापारियों को भरी घाटा हो रहा था | कोलंबस ने प्रस्ताव दिया की भारत पहुचने का समुद्री मार्ग खोजा जाए , ताकी सीधा व्यापार भारत के साथ कर सके | उसने पूरा प्लान तैयार किया कितने लोग लगेंगे कितना खर्चा होगा | वो पुर्तगाल के राजा के पास गया प्लान ले कर , उसको इतना खर्चा करना जोखिम वाला लगा , भगा दिया , कई और के पास गया उन्होंने भी भगा दिया | आखिरी में स्पेन गया और वहा की रानी इसाबेला पैसा देने को तैयार हो गयी इस शर्त पर की 90% वहा का मुनाफा वो लेंगी और कोलुम्बस सिर्फ 10% ही लेगा | और वो जहाजो और सैनिको का खर्चा उठायेगी , बाकी के खर्चे के लिए चर्च से सेटिंग कर ली | चर्च ने घोसना कर दी कोलुम्बस इसाइयत के प्रचार के लिए और मुसलमानों से लड़ने के लिए जा रहे है , इनको सब लोग दान करो | तो किसी ने कपडे किसी न खाना तो किसी ने कुछ दान कर दिया | सब माल जहाजो में चढ़ा के कोलुम्बस चल दिए भारत के समुद्री मार्ग की खोज करने | पहले वो पंहुचा कैरेबियन द्वीप पर , जिसको उसने भारतीय द्वीप समझ कर वेस्ट इंडीज नाम रख दिया पर र वो भारत की जगह पहुच गया था अमेरिका , वहा के लोगो को उसने भारतीय ही समझा और उनको रेड इन्डियन कहने लगा | बाद में समझ में आये की ये भारत नहीं है , उसके साथ एक इटली का मेप बनाने वाला अमेरिगो नाम का आदमी था तो उसके नाम पर उसने अमेरिका नाम रख दिया | कोलुम्बस ने वहा कब्ज़ा किया , खनिज सम्पदा का दोहन किया , बहुत पैसा बना , बाद में स्पेन ने और सैनिक भेजे और अमेरिका पर कब्ज़ा कर लिया , अगले 200 साल अमेरिका स्पेन का गुलाम रहा | फिर अगले 100 साल फ्रांस ब्रिटेन का , इन्होने अमेरिका की स्थानीय भाषा धर्म सब नष्ट कर दिया , मूल अमेरिकियों की हत्या कर दी , और अमेरिका को अंग्रेजी स्पनिस भाषा वाला एक इसाई देश बना दिया | ये सब देख के बाकी यूरोपियो को भी लालच आया , उन्होंने भी सोचा हम भी समुद्री अभियान पर जाएगे , किसी देश पर कब्ज़ा करेंगे उसको लूटेंगे | पर बाद में कोलुम्बस को निपटा दिया गया था और स्पेन के राजा ने ही सब ले लिया , जम कर भ्रस्ताचार था | तो व्यापारियों ने सोचा की हम राजा की मदद नहीं लेंगे खुद ही इन अभियानों की फंडिंग करेंगे , फिर बनी कंपनी जिसमे व्यापारियों ने अपने सामर्थ से पैसा लगाया , शेयर बने जो उनके पैसे के हिसाब से उनको दिए गए | बाद में पुर्तगाल के वास्को डा गामा अभियान पर निकले वो भारत पहुच गए, भारत से लौट कर उसने 60 गुना मुनाफा एक ही ट्रिप से बनाया | धीरे धीरे बाकी ने भी सी मेपिंग करना सीख लिया और समुद्री अभियान में लग गए , फ्रांस डच डेनिश सब ने ईस्ट इंडिया कंपनी बनायीं और चल दिए कब्ज़ा करने | ये आपस में ना लड़े इसलिए पोप ने मध्यस्ता की आधे को बोल दिया ईस्ट के देशो पर कब्ज़ा करो इसाइयत फैलाओ और आधो को बोल दिया वेस्ट में जाओ | अब कई कंपनिया बन गयी थी तो उनका शेयर बाजार भी बन गया , जहा ट्रेडिंग कर सकते थे | डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयर के भाव सबसे ऊपर गए, 1637 में उसके शेयर के भाव दुनिया की जीडीपी के बारबर हो गए थे , 7.9$ ट्रिलियन का मार्किट केप , जो आज तक किसी और कंपनी का भी नहीं हो पाया है | शेयरों से बहुत बड़ा मुनाफा हुआ जो रीइन्वेस्ट हुआ कंपाउंड हुआ और इसी के पैसे से फिर ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पर भी कब्जे हो गए , अमेरिका ऑस्ट्रेलिया साउथ अमेरिका इन सब के स्थानीय लोग मार दिए गए , इसाई बना दिए गए , भाषाए नष्ट हो गयी | करोडो की संख्या में नरसंहार किया आज अमेरिका ऑस्ट्रेलिया में तो मूल निवासी है ही नहीं ये सब यूरोपियन है | भारत दुनिया एक एक मात्र एसा देश है जो सैकड़ो वर्षो के साशन में भी अपना धर्म और भाषाए बचा पाया | पूरी दुनिया को इसाई और मुस्लिम अक्रान्ताओ ने बदल दिया केवल भारत को नहीं बदल पाए | और इस पर आपको गर्व होना चाहिए आज आप हिन्दू है अपनी भाषा बोल रहे है तो अपने पूर्वजो के संघर्ष के कारण ✍🏻अभिषेक शुक्ला हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 03 Mar 2022 06:37 AM PST श्री विद्यासागर की महिमासंजय जैन "बीना" मुम्बई गुरु की महिमा गुरु ही जाने। भक्त उन्हें तो भगवान पुकारे। जो भी श्रध्दा भाव से पुकारे। दर्शन वो सब पावे। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। कितने पावन चरण है उनके। जहाँ जहाँ पड़ते तीर्थ क्षैत्र वो बनते।। ऐसे ज्ञान के सागर को। सब श्रध्दा से वंदन है करते।। ऐसे आचार्यश्री की ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। क्षमा सुधा और योगसागर जैसे। प्रतिभाशाली शिष्य है गुरुवर के। चारो दिशाओं में ये विखरे है। धर्म प्रभावना ये बड़ा रहे है।। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। जिन वाणी के प्राण है गुरुवर। ज्ञान की गंगा बहती मुख से। जो भी शरण इनके है आता। धर्म मार्ग को वो समझ जाता।। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। बुन्देखण्ड की जान है गुरुवर। घर घर में बसते है मुनिवर। धर्म प्रभावना बहाते शान बुन्देखण्ड की कहलाते। मोक्ष मार्ग का पथ दिखला कर। आत्म कल्याण के पथ पर चलाते।। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। कितने पशुओं की हत्या रुकवाये। जीव दया केंद अनेक खुलवाये। स्वभिलंबी बनाने को कितने हस्तकरधा लगवाए। इंसानों के प्राण बचाने भाग्यादोय आदि खुलवाये।। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। शिक्षा दीक्षा के लिए ब्रह्मचारी आश्रम और प्रतिभा स्थली खुलवाये। ज्ञान ध्यान पाकर के बने तपस्वी और उच्चाधिकारी। भ्रष्टाचार को ये लोग मिटावे। महावीर राज ये फिर से बसावे।। ऐसे आचार्यश्री की जय जय बोलो। मुक्ति के पथ को खुद समझ लो।। जय जिनेन्द्र संजय जैन "बीना" मुम्बई हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 03 Mar 2022 06:33 AM PST 4 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |4 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग🔅 तिथि द्वितीया 09:30 PM 🔅 नक्षत्र उत्तराभाद्रपद रात्रि 02:42 🔅 करण : बालव 09:08 AM कौलव 09:08 AM 🔅 पक्ष शुक्ल 🔅 योग शुभ +01:44 AM 🔅 वार शुक्रवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 06:13 AM 🔅 चन्द्रोदय 07:17 AM 🔅 चन्द्र राशि मीन 🔅 सूर्यास्त 05:47 PM 🔅 चन्द्रास्त 07:32 PM 🔅 ऋतु वसंत ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1943 प्लव 🔅 कलि सम्वत 5123 🔅 दिन काल 11:42 AM 🔅 विक्रम सम्वत 2078 🔅 मास अमांत फाल्गुन 🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 11:38:12 - 12:25:01 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त 08:30 AM - 09:17 AM 🔅 कंटक 01:11 PM - 01:58 PM 🔅 यमघण्ट 04:19 PM - 05:05 PM 🔅 राहु काल 10:33 AM - 12:01 PM 🔅 कुलिक 08:30 AM - 09:17 AM 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:45 PM - 03:32 PM 🔅 यमगण्ड 02:57 PM - 04:24 PM 🔅 गुलिक काल 07:38 AM - 09:06 AM ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल पश्चिम ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती ☀ चन्द्रबल 🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन 🌹विशेष ~ श्रीरामकृष्णपरमहंस जयन्ती, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश रात्रि 02:31 से 🌹 पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार 4 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक राशिफलमेष (Aries): घर, परिवार और संतान के मामले में आनंद और संतोष का अनुभव होगा। आज आप संबंधियों और मित्रों से घिरे रहेंगे। व्यापार-धंधे में प्रवास होगा और लाभ भी। मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। नौकरी में पदोन्नति मिलेगी। आग, पानी और वाहन दुर्घटना से संभलने की चेतावनी देते हैं। कार्यभार से थकान का अनुभव होगा। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 वृषभ (Tauras): व्यापारियों के लिए आज का दिन शुभ है। नए आयोजनों को हाथ में ले सकेंगे। आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है। विदेश में रहनेवाले मित्रों या स्वजनों का समाचार आपको भाव-विभोर करेगा। लंबी दूरी की यात्रा का योग है। तीर्थ यात्रा भी हो सकती है। अत्यधिक काम का बोझ थकान और ऊबन का अनुभव कराएगा। शुभ रंग = क्रीम शुभ अंक : 2 मिथुन (Gemini): बेकाबू क्रोध पर लगाम रखने की सलाह देते हैं। बदनामी और निषेधात्मक विचारों से दूर रहें। अत्यधिक खर्च से आर्थिक तंगी का अनुभव करेंगे। परिजनों और ऑफिस सहकर्मियों के साथ मनमुटाव या विवाद के प्रसंग बन सकते हैं। यदि कोई बीमार है तो नई चिकित्सा या ऑपरेशन न कराएं। ईश्वर की आराधना, जप और आध्यात्मिकता से शांति मिलेगी। शुभ रंग = हरा शुभ अंक : 3 कर्क (Cancer): सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में लाभदायक रहेगा आज का दिन। मौज-शौक के साधन, उत्तम आभूषण और वाहन की खरीददारी करेंगे। मनोरंजन की प्रवृत्ति में समय बीतेगा। विपरीत लिंगीय व्यक्ति के साथ की गई मुलाकात से सुख का अनुभव करेंगे। दांपत्य जीवन में प्रेम की अनुभूति होगी। भागीदारी में लाभ होगा। पर्यटन की भी संभावना है। शुभ रंग = आसमानी शुभ अंक : 7 सिंह (Leo): उदासीन वृत्ति और संदेह के बादल आपके मन पर घिरे होने से आप मानसिक राहत का अनुभव नहीं करेंगे। फिर भी घर में शांति का वातावरण होगा। दैनिक कार्यों में थोड़ा अवरोध आएगा। अधिक परिश्रम करने के बाद अधिकारियों के साथ वाद-विवाद में न पड़ें। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 कन्या (Virgo): किसी न किसी कारण से आज आपके मन में चिंता रहेगी। विशेष रूप से संतान और स्वास्थ्य के बारे में। पेट सम्बंधी बीमारियों की शिकायत रहेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई में कठिनाइ आएगी। आकस्मिक धन खर्च हो सकता है। शेयर सट्टे से दूर रहने की सलाह है। प्रिय व्यक्ति के साथ मुलाकात होगी। शुभ रंग = फीरोजा शुभ अंक : 6 तुला (Libra): आज आप अत्यधिक भावनाशील बनेंगे और उसके कारण मानसिक अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। माता के साथ सम्बंध बिगड़ेंगे या माताजी के स्वास्थ्य के सम्बंध में चिंता होगी। यात्रा के लिए वर्तमान समय अनुकूल नहीं है। परिवार और जमीन-जायदाद से सम्बंधित चर्चा में सावधानी रखने की आवश्यकता है। पानी से दूर रहें। शुभ रंग = लाल शुभ अंक : 1 वृश्चिक (Scorpio): कार्य सफलता, आर्थिक लाभ और भाग्यवृद्धि के लिए अच्छा दिन है। नए कार्य की शुरुआत भी कर सकते हैं। भाई-बंधुओं का व्यवहार सहयोगपूर्ण रहेगा। प्रतिस्पर्धियों को परास्त कर सकेंगे। प्रिय व्यक्ति के साथ मिलन होने से आनंद का अनुभव होगा। लघु यात्रा होगी। स्वास्थ्य बना रहेगा। बड़ो का आशीर्वाद आपके साथ है। शुभ रंग = हरा शुभ अंक : 3 धनु (Sagittarius): मन की द्विधापूर्ण स्थिति और उलझे हुए पारिवारिक वातावरण के कारण आप परेशानी का अनुभव करेंगे। निरर्थक धन खर्च होगा। विलंब से कार्य पूरा होगा। महत्वपूर्ण निर्णय लेना हितकर नहीं है। परिजनों के साथ गलतफहमी टालने का प्रयास करें। दूर बसनेवाले मित्र का समाचार या संदेश व्यवहार आपके लिए लाभदायक साबित होगा। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 मकर (Capricorn): ईश्वर को याद करने से आपके दिन शुभ रहेगा। धार्मिक कार्य और पूजा पाठ होंगे। गृहस्थ जीवन में आनंद रहेगा। हर एक कार्य सरलता से पूरे होंगे। मित्रों, सगे संबंधियों की तरफ से भेंट सौगात मिलेगी। शारीरिक, मानसिक रूप से प्रफुल्लित रहेंगे। नौकरी व्यवसाय में भी अनुकूल परिस्थिति रहेगी। दांपत्य जीवन में आनंद बना रहेगा। चोट लगने की संभावना है। शुभ अंक = फीरोजा़ शुभ अंक : 6 कुंभ (Aquarius): आज किसी का जमानती न होने और पैसे की लेन-देन न करने की सलाह देते हैं। खर्च में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य के मामले में ध्यान रखें। परिजनों के साथ संघर्ष में उतरने का अवसर आएगा। किसी के साथ गलतफहमी होने से झगड़ा होगा। क्रोध को नियंत्रण में रखना पड़ेगा। ऐसा न हो कि किसी का भला करने में आफत को गले लगा बैठें। दुर्घटना से बचें। शुभ रंग = क्रीम शुभ अंक : 2 मीन (Pisces): आज आपके लिए लाभदायक दिन है। नौकरी व्यवसाय के क्षेत्र में आय वृद्धि होगी। बुजुर्ग वर्ग और मित्रों की तरफ से आपको कुछ लाभ होगा। नए मित्र बनेंगे, जिनकी मित्रता भविष्य के लिए लाभदायक साबित होगी। मांगलिक अवसरों में जाना होगा। मित्रों के साथ प्रवास पर्यटन का आयोजन करेंगे। संतान और पत्नी की तरफ से शुभ समाचार मिलेगा। धन लाभ होगा। शुभ रंग = उजला शुभ अंक : 4 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844 हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 02 Mar 2022 10:24 PM PST दो आने की चिट्ठीदो आने की चिट्ठी का, माना दौर पुराना है, मगर सुनहरी यादों का, उसमें भरा खजाना है। अम्मा लिखती नानी को, हाल सुना दो गांव का, सखी सहेली कौन गांव में, किसका आना जाना है। चिट्ठी आती बिटिया की जब, सारा गांव झूमता था, दो आने की चिट्ठी में, कौन छिपा नजराना है? जब जब बिटिया आती याद, नानी चिट्ठी पढ लेती, नानी नाना को समझाती, खत में क्या अफसाना है। दो आने की चिट्ठी ने, यादों को आज कुरेदा है, चिट्ठी लिखी थी प्रेयसी को, किस्सा बहुत पुराना है। अ कीर्ति वर्द्धन हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 02 Mar 2022 10:22 PM PST
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| Posted: 02 Mar 2022 07:23 AM PST
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| संज्ञा समिति औरंगाबाद जिला ईकाई एवं प्रखण्ड ईकाई की संयुक्त बैठक सम्पन्न | Posted: 02 Mar 2022 07:20 AM PST संज्ञा समिति औरंगाबाद जिला ईकाई एवं प्रखण्ड ईकाई की संयुक्त बैठक सम्पन्न |संज्ञा समिति औरंगाबाद जिला ईकाई एवं प्रखण्ड ईकाई की संयुक्त बैठक जिला कार्यकारी अध्यक्ष आचार्य पं0 शशिभूषण मिश्र जी की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिसका संचालन जिला सचिव श्री गुप्तेश्वर पाठक ने की । इस बैठक में निम्न निर्णय लिए गए :-
इन दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।उक्त बैठक में धनंजय जयपुरी -संगठन सचिव, आचार्य रवीन्द्र कुमार मिश्र -संयुक्त सचिव, मदन पाठक -संयुक्त सचिव, अनिल कुमार मिश्र -वरिष्ठ सदस्य, जयनारायण पाठक -अध्यक्ष, प्रखण्ड ईकाई मदनपुर, धनंजय पाठक -संरक्षक मदनपुर, आचार्य वासुदेव मिश्र -अध्यक्ष प्रखण्ड ईकाई कुटुंबा सह अध्यक्ष विद्वत् परिषद् औरंगाबाद के साथ -साथ चलभाष के माध्यम से जिलेभरके प्रखण्ड ईकाई के अध्यक्ष / सचिव ने अपने विचार व्यक्त किए । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जम्होर में शिवरात्रि पूजा धूमधाम से संपन्न ,भगवान शंकर के बारात में हजारों ग्रामीण हुये शामिल Posted: 02 Mar 2022 07:14 AM PST जम्होर में शिवरात्रि पूजा धूमधाम से संपन्न ,भगवान शंकर के बारात में हजारों ग्रामीण हुये शामिलअरविन्द अकेला औरंगाबाद(बिहार)। सदर प्रखंड स्थित ग्राम जम्होर के दुर्गा मैदान में शिवरात्रि पूजा के अवसर पर शिव बारात धूमधाम से निकाली गयी। पारंपरिक गाजा बाजा के साथ भगवान शंकर का बारात बाजार होते हुए अनुग्रह नारायण रोड परिसर गई एवं शिव विवाह दुर्गा मैदान के प्रांगण में धूमधाम से संपन्न हुआ। माता पार्वती एवं भगवान शंकर का विवाह देखने वास्ते जम्होर एवं आसपास के हजारों ग्रामीण उपस्थित हुए। महिलाओं ने भगवान शंकर पार्वती से संबंधित मांगलिक गीत का गान किया। जय मां अंबे क्लब के नेतृत्व में आयोजित शिव पार्वती विवाह आयोजन समिति के अध्यक्ष पिंटू राजा, उपाध्यक्ष सोनू कुमार सिंह, सचिव सुमित कुमार सिंह, उप सचिव राजू ठाकुर ने सराहनीय भूमिका निभाई। वहीं सदस्य के रूप में आनंदी कुमार, अभिषेक कुमार, चंदन गुप्ता, राहुल गुप्ता, बिट्टू ठाकुर, धनु कुमार गुप्ता, अमन राज माही, अभिषेक सोनी, निक्कू कुमार, बिट्टू कुमार सोनी ने विशेष सहभागिता निभाई। सेवानिवृत्त शिक्षक शिवनाथ राम उर्फ शिबू गुरुजी ने बताया कि जम्होर ग्राम की सांस्कृतिक विरासत ऊर्जावान है इस ग्राम में सनातन संस्कृति से संबंधित सभी तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ।इस क्रम में शिवरात्रि के अवसर पर शिव पार्वती विवाह भी कई वर्षों से आयोजित होते आ रहा है। लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन से आपसी भाईचारा, सामाजिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक विरासत को उत्प्रेषित होने का अवसर मिलता है। -------0------ हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 02 Mar 2022 06:39 AM PST कोयला गैसीकरण: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने का प्लेटफार्म:-देव गावस्करीवैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत का विज़न; आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर अभियान), घरेलू भंडार के मुद्रीकरण, परिवर्तनकारी नवाचार (मेक इन इंडिया विजन), आयात में कमी और नौकरियों के सृजन, जैसी चुनौतियों के समाधान पर निर्भर है। इसके साथ ही आने वाले दशकों के लिए कार्बन मुक्त और सतत अर्थव्यवस्था का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भारत में सौर ऊर्जा, जैविक ईंधन भंडार और कोयले के रूप में तीन प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जो उपयोग के लायक हैं और प्रचुर मात्रा में हैं। भारत, सौर ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को लेकर आशावादी है और जैविक ईंधन-आधारित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और विकास कार्य किए जा रहे हैं; लेकिन वर्तमान में, इन संसाधनों को इनकी कमियों द्वारा चुनौती दी जा रही है, जैसे सौर उत्पादित बिजली का उपयोग करने के लिए डाउनस्ट्रीम प्रौद्योगिकी और जैविक ईंधन के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति से जुड़े मुद्दे। हालांकि, भारत के पास 307 अरब टन कोयले का भंडार है; जिसका 80 प्रतिशत हिस्सा ऐतिहासिक रूप से ताप विद्युत संयंत्रों द्वारा प्रयुक्त किया गया है और यह लिग्नाइट के साथ भारत में बिजली के लिए कुल ईंधन स्रोत के 55 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, भारत ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, इसलिए ऊर्जा के स्वच्छ रूपों की ओर बढ़ना एक तात्कालिक आवश्यकता है। "प्रदूषित" वर्तमान के बदले एक स्वच्छ, हरित और निरंतर बढ़ती अर्थव्यवस्था की मांगों से समझौता किए बिना सतत भविष्य के लिए संतुलन के रूप में एक वैकल्पिक रास्ते की तलाश जरूरी है। इस सामाजिक-आर्थिक स्तर पर, भारत में सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन- कोयले के विविधीकरण की तत्काल आवश्यकता है। इस संभावना के लिए, भारत एक व्यावसायिक रूप से साबित किये हुए प्लेटफार्म का उपयोग कर सकता है, जो कोयले को जलाने की बजाय कोयले में संग्रहित रासायनिक ऊर्जा को निकालता है। कोयला गैसीकरण, सिनगैस के उत्पादन की प्रक्रिया है, जो कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), हाइड्रोजन (एच2) और कार्बन डाइऑक्साइड ((सीओ2) से मिलकर बना मिश्रण होता है। इस प्रक्रिया में कोयले के साथ एक निश्चित अनुपात में वाष्प और ऑक्सीजन (या वायु) की रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिसके परिणामस्वरूप कोयले के तत्वों का गैसीकरण होता है। इस प्रक्रिया में कोयले को जलाया नहीं जाता है। इस सिनगैस का उपयोग सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी), ऊर्जा ईंधन (मेथनॉल और इथेनॉल), उर्वरकों और रसायनों के लिए अमोनिया एवं अन्य रसायनों; यहां तक कि प्लास्टिक के उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। दुनिया भर में कोयला गैसीकरण संयंत्रों को व्यापक रूप से स्थापित किया जा रहा है और देश ईंधन एवं रसायनों के उत्पादन के लिए इस प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं। कोयले के दहन के विपरीत, कोयला गैसीकरण संयंत्र से कार्बन डाइऑक्साइड का प्रवाह अत्यधिक केंद्रित होता है, जिससे कार्बन संग्रह और इसका उपयोग अधिक व्यावहारिक और किफायती हो जाता है, खासकर जब हरित हाइड्रोजन या सीओ2 अनुक्रम के अन्य साधन के स्रोत इसके साथ होते हैं। ऊपर उल्लिखित उद्देश्यों और विज़न के अनुरूप, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कोयला मंत्रालय ने कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयले का उपयोग करने की पहल की है और इस दशक के अंत तक 100 मिलियन टन कोयले को गैसीकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस मिशन के प्रति सरकार की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, कोयला मंत्रालय ने 'गैर-विनियमित क्षेत्रों के लिंकेज की नीलामी के अंतर्गत उप-क्षेत्रों' में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए एक नई कोयला-लिंकेज नीति भी बनाई है। भारत का एक अन्य प्रमुख लक्ष्य ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्र राष्ट्र बनकर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का है। 75वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि अगले 25 वर्षों में भारत ने ऊर्जा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह स्पष्ट है कि आत्मनिर्भरता और ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम, मुख्य रूप से पेट्रोलियम के आयात में कमी लाने से जुड़ा होगा। परिप्रेक्ष्य समझने के लिए, भारत का पेट्रोलियम का वार्षिक शुद्ध आयात (मुख्य रूप से परिवहन क्षेत्र में उपयोग किया जाता है) करीब 185 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसकी लागत लगभग 55 बिलियन डॉलर है। इन आयातों को कम करने और इस प्रकार विदेशी मुद्रा बचाने के लिए, 2018 में जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति की शुरुआत हुई। पहले चरण में, भारत सरकार ने पहली पीढ़ी के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) के तहत 5 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति करने का संकल्प लिया था। इसके साथ ही, सरकार ने 2025 से 2030 तक पेट्रोल (जिसे ई20 का भी नाम दिया गया है) में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह सर्वविदित है कि इथेनॉल बनाने के पारंपरिक तरीके चीनी और जैव ईंधन-आधारित रहे हैं, जिनका उपयोग; लागत, पैमाने और भूमि आवश्यकता जैसी बाधाओं और/या खाद्य श्रृंखला में बदलाव जैसे मुद्दों सहित विभिन्न कारणों से सीमित स्तर पर होता है और ये लाभप्रद भी नहीं हैं। दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल के लिए कच्चे माल की आपूर्ति भी ऊर्जा फसलों, नगरपालिका अपशिष्ट, वन और कृषि अवशेषों और बेकार खाद्यान्न के उपयोग से उभरी हैं, जो मुख्य रूप से कम दक्षता और रूपांतरण की कमी से ग्रस्त हैं। इसके अतिरिक्त, कच्चे माल की उपयोगिता चुनौतियों के कारण 2जी-इथेनॉल संयंत्रों के पैमाने पर एक ऊपरी सीमा भी निर्धारित की गयी है, जिसके तहत एक संयंत्र से सालाना 3 करोड़ लीटर तक इथेनॉल के उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है और इन तरीकों से मिश्रण का लक्ष्य, लगभग 8-9 प्रतिशत तक हासिल किया जा चुका है। लेकिन ई20 लक्ष्यों को पूरा करने के क्रम में मांग-आपूर्ति के महत्वपूर्ण अंतर के लिए समाधान पेश किये जाने चाहिए, क्योंकि इसे पारंपरिक तरीकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह समाधान कार्यकुशल व उपयोग के लायक होना चाहिए और इसकी पूरी अर्थव्यवस्था अपनाने लायक होनी चाहिए। यही वह जरूरत है, जिससे कोयले के जरिये- गैसीकरण और सिनगैस के इथेनॉल में रूपांतरण के माध्यम से – इस अंतर को समाप्त करने में मदद मिल सकती है। ऐतिहासिक रूप से सिनगैस के इथेनॉल में रूपांतरण को, खराब रूपांतरण और चयन संबंधी मुद्दों और बहु-चरण प्रतिक्रिया आदि कारणों से चुनौती दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप इसके आय-व्यय की अवधारणा अस्वीकार्य हो गयी। हालांकि, इथेनॉल में सिनगैस के अत्यधिक कुशल और चयनात्मक रूपांतरण के लिए अभिनव और परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं, जो आय-व्यय की आकर्षक अवधारणा के साथ व्यावसायीकरण के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, इन प्रौद्योगिकियों को कोयला-गैसीकरण के साथ मिलाने से ऐसे संयंत्र बनाने में मदद मिल सकती है, जो अत्यधिक व्यावहारिक होंगे। कोयले-से-इथेनॉल का एक संयंत्र सालाना 40 करोड़ लीटर से अधिक इथेनॉल का उत्पादन करने में सक्षम है और इसमें पूंजी भी काफी कम लगती है। कंपनियां पहले से ही संभावित हितधारकों और अन्य पक्षों के साथ वाणिज्यिक स्तर पर मॉडल संयंत्रों के निर्माण के लिए चर्चा कर रही हैं। उदाहरण के लिए, सिनाटा बायो प्रौद्योगिकी प्रदाता कंपनी; एक उद्देश्य-अनुरूप, सिनगैस-से-इथेनॉल प्रौद्योगिकी तथा एक मॉडल, 'कोयला-से-इथेनॉल' परियोजना का व्यावसायीकरण कर रही है, जो कोयले से उत्पादित सिनगैस से सालाना लगभग 2.5 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करेगी। इसे सिनाटा बायो और थर्मेक्स के बीच साझेदारी के माध्यम से सोनपुर-बाजरी कोल काम्प्लेक्स में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 100 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा। इस प्रकार कोयले से इथेनॉल प्रौद्योगिकियां न केवल ईंधन-इथेनॉल के लिए मांग-आपूर्ति के अंतर को हल करने (और ई20 लक्ष्य को पूरा करने) का एक प्रभावी उपाय पेश करती हैं, बल्कि भारत में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं और सिनगैस बुनियादी ढांचे के विकास एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की संभावनाओं को भी गति प्रदान करती हैं। हालांकि, ऐसे कई कदम हैं, जो अभी भी ऐसी परियोजनाओं और संबद्ध निवेशों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय पहले से ही जैव ईंधन 2018 पर राष्ट्रीय नीति को संशोधित करने की प्रक्रिया में है, ताकि इसमें कोयला-गैसीकरण आधारित इथेनॉल को शामिल किया जा सके। इनमें तेजी आने से संभावित निवेशकों में इन परियोजनाओं में निवेश करने का विश्वास पैदा होगा। इसके अलावा, इस तरह के 'सिंथेटिक' इथेनॉल के लिए बाजार मूल्य निर्धारण में स्पष्टता की आवश्यकता है। हालांकि इन प्रौद्योगिकियों पर आधारित बाद की परियोजनाओं में निस्संदेह उत्पादन की लागत में कमी आएगी। (पेट्रोलियम गैसोलीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाने की उम्मीद)। पहला संयंत्र कीमत निर्धारण के प्रोत्साहन पर निर्भर करेगा, जो संयंत्र के आकार (परियोजना पूंजी निवेश को कम करने के लिए इष्टतम से काफी छोटा होना अपेक्षित) एवं निवेशकों के लिए परियोजना से होने वाली आय को संतुलित करने के लिए आवश्यक है। संक्षेप में, कोयले से एथेनॉल का विकल्प, भारत की आत्मनिर्भरता और ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्रता के विज़न के दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक आशाजनक तथा आर्थिक रूप से आकर्षक उपाय पेश करता है। इससे ई20 लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे परिवहन क्षेत्र के विद्युतीकरण में तेजी आयेगी, ये प्रौद्योगिकियां, 'कार्बन संग्रह और उपयोग' आधारित अनूठे समाधान भी प्रस्तुत करेंगी। इस प्रौद्योगिकी में हरित हाइड्रोजन के साथ वर्तमान में प्रतिशोधित सीओ2 प्रवाह के साथ प्रतिक्रिया होती है, जिससे एथिलीन और अन्य ओलेफिन सहित प्रमुख रासायनिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन होता है। यह समग्र दृष्टिकोण; न केवल भारत की आत्मनिर्भरता और ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा, बल्कि कार्बन-उत्सर्जन में कमी लाने के भविष्य के अपरिहार्य लक्ष्य के लिए एक उपयुक्त समाधान भी पेश करेगा। आशा है कि भारत पेरिस समझौते के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को तय समयसीमा से पहले ही हासिल कर लेगा। *** हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 02 Mar 2022 06:35 AM PST
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| Posted: 02 Mar 2022 06:29 AM PST संकट की घड़ी में असहाय, गरीब और जरुरतमंद लोगों को सहयोग करने के लिए आगे आई नवसृजन की सचिव पूजा ऋतुराजहमारे संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खास खबर | महाशिवरात्रि के अवसर पर जरुरतमंद लोगों को अराधना न्यूज और राधा दरबार की सखियाँ के साथ मिलकर अपने पति संतोष कुमार के जन्म दिन पर नवसृजन की सचिव पूजा ऋतुराज ने मिलकर 01 मार्च (मंगलवार) को स्थानीय आकाशवाणी , बापू सभागार और पटना सिटी में 150 असहाय, गरीब जरुरत मंदों के बीच भोजन पैकेट का वितरण किया। उक्त जानकारी देते हुए आराधना न्यूज के प्रबंध संपादक धीरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि असहाय गरीब और जरुरत मंदों के बीच भोजन वितरण करने की यह कारवां में कोई भी अपने पूर्वजों के पुण्यतिथि अथवा जन्म दिन के अवसर पर, अपनी शादी की वर्षगांठ पर या किसी अन्य खुशी पर मजबूरों को भोजन कराने के लिए हमारी संस्था अग्रणी है। इस कार्य के लिए सहयोग राशि जिनसे जिनता हो सके सहयोग भी कर सकते हैं और हमारी संस्था उस सहयोग राशि से भोजन तैयार कराकर वितरित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के पावन कार्य में लोगों को सहभागी बनना चाहिए। श्री गुप्ता ने बताया कि इस कार्य में हमारे सहयोगी राधा दरबार की सखियाँ हैं, जिन्होंने हमे हिम्मत, हौसला और हमेशा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। उनके सहयोग और मेरी मेहनत उन गरीबों, असहाय और जरूरत मंदों के मदद के लिए हमेशा तत्पर है और तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य से गरीब, असहाय और जरूरत मंदों की सेवा करने से उनके दुआये परिवार और व्यापार पर बनी रहती है। इसलिए हमलोगो का उद्देश्य है कि "भूखा सोऐ न कोई अपना।" हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 02 Mar 2022 06:24 AM PST पटना में सीआईआई की वार्षिक बैठक दूसरी बार श्री नरेन्द्र कुमार को वर्ष 2022-23 के लिए CII बिहार राज्य परिषद का अध्यक्ष एवं श्री सचिन चंद्रा, उपाध्यक्ष के रूप में चुने गये।पटना 02 मार्च 2022 - पटना में सीआईआई की ओर से वार्षिक बैठक में विषय एडवांटेज बिहार संकल्प से सिद्धि, बिहार @ 75 के मौके पर बिहार के माननीय उद्योग मंत्री, श्री शाहनवाज़ हुसैन ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि बिहार उद्योग में पिछड़ने के बावजूद बाकी सभी सेक्टर में आगे है। हालांकि बिहार की सबसे बड़ी ताकत स्किल लेबर है। इसीलिए मेरा मानना ही कि जब बिहार आगे बढ़ेगा तब ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की मौजूदा उद्योग निति एवं स्किल लेबर के कारण हरियाणा से उद्योग बिहार में आना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल मे एथेनॉल सेक्टर में हमारे पास बिहार में 39 हज़ार करोड़ के इन्वेस्टमेंट का प्रपोजल आया। उन्होंने कहा कि वहीं 4 प्रोजेक्ट प्रोडक्शन के लिए तैयार है। उन्होंने मुजफ्फरपुर में जल्द ही फ़ूड पार्क शरू होने की बात कही। साथही बिहार में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सयैद शाहनवाज़ हुसैन ने सीआईआई के साथ मिल कर काम करने की बात कही। बैठक में श्री नरेंद्र कुमार, निदेशक, होटल विंडसर को सीआईआई, बिहार राज्य परिषद के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2022-23 के लिए एक बार फिर से चुना गया है। उनके नाम की घोषणा आज पटना में आयोजित सीआईआई बिहार राज्य परिषद की पुनर्गठित पहली बैठक में की गई। श्री नरेंद्र कुमार हॉस्पिटैलिटी एवं रियल एस्टेट कारोबार में शामिल है। उनके 29 साल के अनुभव के साथ कुमार बिल्डकॉन भारत का एक प्रसिद्ध ब्रांड है जो आपके सपने को वास्तविकता में आकार दे रहा है। उन्होंने कुमार बिल्डकॉन प्रा0 लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1987 में अपने पार्टनर के साथ की थी। आज, उनकी कंपनी को राज्य के साथ देश में एक मजबूत उपस्थिति प्राप्त है जोकि बिहार और झारखंड की परियोजनाओं के साथ रियल एस्टेट उद्योग में एक बड़ी कंपनियों में से एक के रूप में अपनी स्थिति बनाई है। भारत में रियल्टी क्षेत्र में कुमार बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, अग्र धावकों में से एक है। वहीं, स्वधा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री सचिन चंद्रा को भी दूसरी बार वर्ष 2022-23 के लिए सीआईआई बिहार राज्य परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। श्री चंद्रा पिछले 16 सालों से कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में हैं। उनका नाम बिहार निर्माण उद्योग में सबसे प्रमुख नामों में से एक है। वह बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सक्रिय सदस्य रहे हैं। वह बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया में पटना सेंटर के अध्यक्ष, राज्य समन्वयक बिहार रहे हैं। वह बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 01 Mar 2022 06:42 AM PST
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| महाशिवरात्रि के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन,आज महाशिवरात्रि की महिमा भारी-:अकेला Posted: 01 Mar 2022 06:35 AM PST महाशिवरात्रि के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन,आज महाशिवरात्रि की महिमा भारी-:अकेलाऔरंगाबाद (बिहार) साहित्य कला व संस्कृति की संवाहक संस्था साहित्यकुंज" द्वारा महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजित किया गया जिसका कवि विधिवत उद्घाटन पटना से पथारे दैनिक दस्तक प्रभात के प्रधान संपादक प्रभात वर्मा जी द्वारा किया गया,अध्यक्षता पटना से प्रकाशित हिन्दी दैनिक "चौथी वाणी" के प्रधान संपादक रूपेश कुमार सिंह ने की । मुख्य अतिथि के रूप में पलामू (झारखंड) के सूचना व जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आनन्द शांडिल्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में मालिक बाबू की गरिमामय उपस्थित रही। नवोदित संचालिका सुश्री करिश्मा सिंह एवं वरीय कवि श्री राम राय के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन में आगत अतिथियों का स्वागत पटना से पधारे "साहित्य कुंज" के महासचिव व वरीय रचनाकार अरविंद अकेला ने कहा"आज महाशिवरात्रि की महिमा भारी,जिन्हें पूजते सभी नर नारी,शिव हीं हैं दुनियाँ के रक्षक, शिव हीं हैं संहारी"।अकेला ने अपनी ओजपूर्ण वाणी से सबका मन मोह लिया। साहित्य कुंज के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राम राय के अनुसार यह कवि सम्मेलन भगवान महादेव को समर्पित था जिसमें देश के कोने- कोने से दर्जनों शिव भक्त कवि, कवियित्रियों व रचनाकारों ने शिव को समर्पित अपनी मौलिक रचना के माध्यम से शिव को याद किया। भोलेनाथ को समर्पित इस कवि सम्मेलन की शुरुआत औरंगाबाद की वरीय कवयित्री आदरणीया सुषमा सिंह की सरस्वती वंदना से हुई। भोले भंडारी को समर्पित इस कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले कवियों में शाहाना परवीन (पटियाला पंजाब),सुषमा सिंह (औरंगाबाद), राजेश तिवारी मक्खन( झांसी उ प्र),मीना जैन दुष्यंत (भोपाल), डॉ मीना कुमारी परिहार (पटना), डा अम्बे कुमारी(बोधगया),ऋतु गर्ग(सिलिगुड़ी), ,वीणा चौधरी (सिलीगुड़ी),बृंदावन राय सरल ?सागर एमपी),सुरभि जैन (देहरादून),विभा जैन ओज्स.रजनी वर्मा (भोपाल).प्रतिभा द्विवेदी मुस्कान (सागर मध्यप्रदेश), ईश्वर चंद्र जायसवाल (गोंडा उत्तर प्रदेश),शोभारानी तिवारी(इन्दौर), डॉक्टर गीता पांडे अपराजिता(रायबरेली) , ललिता कुमारी वर्मा, अतुल अविरल (अलीगढ़ ),प्रीतम कुमार झा(बिहार) .शालिनी श्रीवास्तव(हरिद्वार).भारती जोशी(उतराखंड).सोनिया (गाजियाबाद).डा ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश (वाराणसी).रामसाय श्रीवास"राम"(छ.ग.),कवयित्री अन्नपूर्णा मालवीय सुभाषिनी (प्रयागराज),आनन्द मिश्रा अकेला (सागर),कवि राम सिंह राजसमन्द (राजस्थान),अमरनाथ सोनी अमर . भेरूसिंह चौहान (झाबुआ म. प्र.),डॉक्टर शशिकला अवस्थी (इंदौर) ,सुरेंद्र हरडे,डा वत्सला)वाराणसी), वीना आडवानी तन्वी एवं उषा श्रीवास आदि प्रमुख रहे अंत में सहित तीन दर्जन कवियों व कवियित्रियों ने भक्तिमय प्रस्तुति देकर संपूर्ण वातावरण को शिवमय कर दिया।अंत में साहित्यकुंज के अध्यक्ष श्री राम राय के द्वारा सभी रचनाकारों को सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया। ------0----- अरविन्द अकेला हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 01 Mar 2022 06:21 AM PST
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| Posted: 01 Mar 2022 06:18 AM PST
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| Posted: 01 Mar 2022 06:15 AM PST महाशिवरात्रिसंकलन अश्विनी कुमार तिवारीकिसी भी मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कही जाती है , किन्तु माघ ( फाल्गुन, पूर्णिमान्त ) की चतुर्दशी सबसे महत्वपूर्ण है और महाशिवरात्रि कहलाती है । गरुड (1/124) , स्कन्द (1/1/32) , पद्म (6/240), अग्नि (193) आदि पुराणों में इसका वर्णन है । कोई भी व्यक्ति इस दिन उपवास करके बिल्व-पत्तियों से शिव की पूजा करता है और रात्रि भर 'जागर' (जागरण) करता है, शिव उसे आनन्द एवं मोक्ष प्रदान करते हैं और व्यक्ति स्वयं शिव हो जाता है । स्वयम्भूलिंगमभ्यर्च्य सोपवास: सजागर: || ईशानाय नम: || . आद्यं पुरुषमीशानं पुरुहूतं पुरुष्टुतम् | ऋतमेकाक्षरं ब्रह्म व्यक्ताव्यक्तं सनातनम् || असच्च सदसच्चैव यद् विश्वं सदसत्परम् | परावराणां स्रष्टारं पुराणं परमव्ययम् || महाभारत आदिपर्व 1/22-23 महाशिवरात्रि अर्थात् अमान्त माघ मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि या पूर्णिमान्त फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर की जाने वाली पूजा, व्रत, उत्सव तथा जागरण। शिवधर्म ग्रन्थ में शिवरात्रि पर रामलीला खेले जाने की भी बात कही गई है। कश्मीर में शिवरात्रि हररात्रि है जो बिगड़कर हेरात कही जाती है, विगत वर्ष बंदीपुरा संबल में शिव मन्दिर की सफाई, जलाभिषेक तथा प्रसाद में अखरोट वितरण भी वहाँ के मुस्लिमों ने किया था। कहते हैं कि भोलेनाथ और उमा पार्वती का विवाह इसी तिथि को हुआ था। खगोलीय दृष्टि से सूर्य एवं चन्द्रमा के मिलन की रात्रि है तथा संवत्सर की गणना का आधार माघ अमावस्या रही है, काल गणना के हेतु से यह त्योहार चतुर्दशी से तीन दिन पहले से लेकर दो दिन बाद प्रतिपदा तक चलता था। भारतवर्ष में धनिष्ठा नक्षत्र में उत्तरायणारम्भ होने के समय कालगणना नियम बने थे, एक हजार वर्षों में अयन सरक कर श्रवण में जा पहुँचा था। यह एक बड़ा कारण 'श्रवण' का अनेक त्योहारों से जुड़े होने में है। इस कारण महाशिवरात्रि को कुछ ग्रन्थ त्रयोदशी तिथि से संयुक्त प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तिथि ग्रहण कर मनाये जाने की बात करते हैं, इसमें कारण 'नक्षत्र का प्राधान्य' है। चूँकि तीज-त्योहारों के मनाये जाने सम्बन्धी नियम निर्देश बहुत पहले निश्चित किये गये थे इस कारण अब कालगणना सम्बन्ध नहीं रहा। काल के भी ईश्वर महाकालेश्वर की जय बोलते हुये उत्सव मनाइये, आशुतोष तो अवढर दानी हैं ही किसी को भी निराश नहीं करते हैं। मन्दिरों में काँच न फैलायें और न बहुत अधिक फूल पत्तियाँ ले जाना आवश्यक है केवल जल चढ़ा देने से भी शिव उतने ही प्रसन्न होते हैं। ✍🏻अत्रि विक्रमार्क अन्तर्वेदी क्या आपलोगों को पता है कि पूर्वोत्तर की कई जनजातियों में शिव एक लोकदेवता है | अपने-अपने तरीके से मतलब अपनेवाले वर्जन में वे शिव को लोकदेवता के रूप में पूजते हैं | बोड़ो-कछाड़ी जनजाति में शिव कृषि देवता है,जिनके लिये वे बाथौ पूजा करते हैं | उनके लोकगीतों में शिव साधारण गृहस्थ और कृषक है जैसे पड़ोस का ही कोई इंसान हो | लक्ष्मी,सरस्वती दो बेटी और गणेश,कार्तिक दो बेटें साथ ही भीम नामक गौपालक को लेकर सात लोगों के परिवार को पालने के लिये वे खेती करते हैं | यहाँ महाभारत भी मिक्स हो गया हों तो परवाह न करें बस भाव को देखें | राभा जनजातिवालों के लिये शिव का स्थानीय नाम शिर्गीरिश देवता है | देउरी जनजातियों के लिये शिव का स्थानीय नाम कुंडी है | पार्वती का नाम है मामा | शिव-पार्वती को वे गिरा-गिरास भी बोलते हैं | आहोम लोगों ने तो बाद में हिंदू धर्म को अपनाया | पर जब भी अपनाया शिव भगवान को अपने तरीके से लिया | राजाओं ने शिव के नाम पर बहुत से मंदिर भी बनवाये जिनके लिये स्थानीय शब्द दौल अथवा देवालय अधिक प्रचलित है | शिवसागर,नुमलीगढ़,नेघेरिटिंग आदि में स्थित शिव दौल या देवालय हैं जो आहोम राजाओं के द्वारा बनवाये गये थे | पूरा वर्णन यहाँ एक पोस्ट में तो नहीं लिख सकती | बस सार यही है कि यहाँ की कई जनजातियों के लोक-जीवन में शिव समाया हुआ है | लोग कृषिजीवी है,सरल है तो उनकी कल्पनाओं में ईश्वर भी उन्हीं लोगों की तरह ढल गया है | तभी तो वो अपना सा लगता है | वे जंगल में रहते हैं तो शिव का जीवन भी वैसा है | वे खेती करते हैं तो शिव भी कृषक है | वे बलि-विधान मानते हैं तो शिव के लिये की जानेवाली स्थानीय पूजा पद्धति में भी वो सब चीज़ें शामिल है | वे संस्कृत नहीं पढ़े हैं | आर्षग्रंथों में लिखी बातें नहीं जानते हैं | पूजा पद्धति भी नहीं पता है | बस बूढ़ा गोसाईं,पगला गोसाईं,बोलिया गोसाईं,गिरा-गिरास आदि अपनी भाषा के शब्दों के नामों से वे अपनी तरह से उनकी उपासना करते हैं,मंत्र पढ़ते हैं और खुद को धार्मिक मान संतुष्ट होते हैं | असम के हर एक ज़िले में जनजातियों के बहुत सारे शिव मंदिर हैं | उनमें से देउशाल मंदिर,वसुंधरी थान,नागशंकर मंदिर,शिंगोरी मंदिर आदि हैं | मंदिरों के ढाँचे,शिवलिंग,प्रतिमा आदि भी अलग तरह के दिख जायेंगे | उस पर एक आलेख कभी अलग से.. यहाँ तो लोग कुछ और देखने आते हैं | पर कभी ऐसे मंदिरों में आयेंगे तो आपलोगों को सुखद आश्चर्य होगा | जब देखेंगे कि जनजातीय शिव मंदिरों में जनजातीय पुरोहितों के द्वारा उनकी अपनी भाषा के मंत्र पाठ से शिव की पूजा हो रही है | हो सकता है जानकार लोग उसमें बहुत सी गलतियाँ निकालें | पर याद रखना आवश्यक है कि जनजातिवालों ने शिव को अपने हिसाब से ग्रहण किया हुआ है | या यूँ कहें शिवजी ने जनजातिवालों को उनके हिसाब से ग्रहण कर लिया है | ✍🏻राजश्री डी ये कुछ प्राचीन शहर हैं इजराइल और यमन के। कुछ खास इन सब में ?? खास है तभी पोस्ट कर रहा हूँ..!! खास है इनके नाम। पहला, दक्षिण इजराइल के प्राचीन शहर का.. नाम .. "शिवटा" (Shivta) !! इसे बसाने वाले 'नाबातियन' ट्राइब के लोग। ये शहर बसा है नेगेव मरुस्थल में। इससे मात्र 43 किलोमीटर दूर और एक शहर है.. नाम है 'तेल शिवा' (Tel Sheva) या 'बीर शिवा' (Beer Sheva)। बाइबल में एक राज्य का बड़ा नाम है.. बल्कि कई मर्तबा जिक्र भी हुआ है और वो यहूदी और इस्लाम में भी प्रचलित है।.. उस राज्य का नाम है 'शेबा' (Sheba) .. उसकी राजधानी यमन के प्राचीन शहर 'शिभम' (Shibham या Shibam) मानी जाती है, जरा नाम मे गौर करें। ये सभी साइट्स यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हैं। अरबी,हिब्रू में Sheba का मतलब टीला होता है.. लाइक शिवलिंग। ये सभी शहर कालांतर में क्रिश्चन और इस्लामिक राज के तले आते गए और बहुत से ओरिजिनल स्ट्रक्चर समाप्त होते गए। जैसे कि हमलोग रिसेंट में अफगानिस्तान में बौद्ध स्तूप और मूर्तियों को ले कर देखे। खैर आज जब इंडिया के मंदिरों के स्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग की बात पुनः शुरू हुई तो हम जरा फॉरेन घूमना ही पसंद किए।.. आगे और भी है।😊 ✍🏻गंगवा, खोपोली से। शिव की सार्वभौमिकता को जानना हो तो विश्व की अनेक सभ्यताओं के प्राचीन अध्यायों का अवलोकन करना होगा। मिस्र , हड़प्पा , बेबीलोन और मेसोपोटामिया की सभ्यता में पितृ शक्ति की उपासना के प्रतीक मिले हैं। ये प्रतीक ही शिव आस्था की वैश्विकता को सिद्घ करते हैं। जहां आगमो शिव है वेदों में शिव रुद्र हैं, वहीं पुराणों में अद्र्घनारीश्वर हो जाते हैं। यह एक गंभीर आध्यात्मिक चिंतन है। नारी को शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया। माना गया कि शिव अर्थात कल्याण, शक्ति के बिना संभव नहीं है। शक्ति के अनेक रूप हैं। प्रतीकात्मक दृष्टि से सब ज्ञान, धैर्य, वीरत्व, जिज्ञासा, क्षमा, सत्य तथा अन्य सात्विक आचरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। १) प्राचीन मिस्र, नील नदी के निचले हिस्से के किनारे केन्द्रित पूर्व उत्तरी अफ्रीका की एक प्राचीन सभ्यता थी, जो अब आधुनिक देश मिस्र है। नील नदी के उपजाऊ बाढ़ मैदान ने लोगों को एक बसी हुई कृषि अर्थव्यवस्था और अधिक परिष्कृत, केन्द्रीकृत समाज के विकास का मौका दिया, जो मानव सभ्यता के इतिहास में एक आधार बना। 5500 ई.पू. तक, नील नदी घाटी में रहने वाली छोटी जनजातियाँ संस्कृतियों की एक श्रृंखला में विकसित हुईं, जो उनके कृषि और पशुपालन पर नियंत्रण से पता चलता है और उनके मिट्टी के मूर्ति , पात्र और व्यक्तिगत वस्तुएं जैसे कंघी, कंगन और मोतियों से य स्पष्ट दिखता है की पशुाप्ति ( शिव ) ही है उन्हें पहचाना जा सकता है। ऊपरी मिस्र की इन आरंभिक संस्कृतियों में सबसे विशाल, बदारी को इसकी उच्च गुणवत्ता वाले चीनी मिट्टी की , पत्थर के उपकरण और तांबे के मार्तिओं में पशुपति शिव जोड़ी बैल ( नंदी ) उनके देवता के रूप जाना जाता है। मिस्र में शिव : कल्याण के शिवांक के अनुसार उत्तरी अफ्रीका के इजिप्ट (मिस्र) में तथा अन्य कई प्रांतों में नंदी पर विराजमान शिव की अनेक मूर्तियां पाई गई हैं। वहां के लोग बेलपत्र और दूध से इनकी पूजा करते थे। माउंट ऑफ ओलिव्स पर टैम्पल माउंट या हरम अल शरीफ यरुशलम में धार्मिक रूप से बहुत पवित्र स्थान है। इसकी पश्चिमी दीवार को यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल कहा जाता है। यहूदियों की आस्था है कि इसी स्थान पर पहला यहूदी मंदिर बनाया गया था। इसी परिसर में डॉम ऑफ द रॉक और अल अक्सा मस्जिद भी है। इस मस्जिद को इस्लाम में मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यह स्थान तीन धर्मों के लिए पवित्र है- यहूदी, ईसाई और मुसलमान। यह स्थान ईसा मसीह की कर्मभूमि है और यहीं से ह. मुहम्मद स्वर्ग गए थे। यहूदियों के गॉड : यहूदी धर्म के ईश्वर नीलवर्ण के हैं, जो शिव के रूप से मिलते-जुलते हैं। कृष्ण का रंग भी नीला बताया जाता है। यहूदी धर्म में शिवा, शिवाह होकर याहवा और फिर यहोवा हो गया। शोधकर्ताओं के अनुसार यहां यदुओं का राज था, यही यहूदी कहलाए। ✍🏻जगन्नाथ करंजे महाशिवरात्रि की कहानी..... आपके पूर्वानुमान पर, आपके पूर्वाग्रहों पर कोई चीज़ सही सही ना बैठे तो बड़ी समस्या होती है | इस से नैरेटिव बिल्ड करने में दिक्कत हो जाती है | आप ये नहीं कह सकते कि "मैंने तो पहले ही कहा था" तो आपके अहंकार को भी चोट पहुँचती है | ज्ञानी सिद्ध होने में दिक्कत हो जाती है | हिन्दुओं के बारे में पूर्वाग्रहियों को यही सबसे बड़ी दिक्कत रही | उनके रिलिजन के कांसेप्ट पर हम फिट नहीं आते | कई बार हमारे बारे में चुप्पी साधनी पड़ती है | महाशिवरात्रि की कहानी के साथ भी ऐसा ही है | यही वजह है कि जैसे होलिका दहन का किस्सा सुनाया जाता है वैसे शिवरात्रि के लिए नैरेटिव बिल्ड करने की कोशिश कम होती है | ऐसे में कोशिश की जाती है कि चुप रहकर शिवरात्रि की कहानी को भुला देने की कोशिश की जाए | इस त्यौहार से जुडी कहानी छोटी सी है, और एक व्याध यानि बहेलिये या शिकारी की कहानी है | चित्रभानु नाम के इस शिकारी ने कुछ कर्ज ले रखा होता है जिसे ना चुकाने पर साहूकार उसे बंद कर देता है | संयोग से उसी दिन शिवरात्रि थी और बंद पड़ा चित्रभानु बाहर धार्मिक चर्चा कर रहे लोगों को सुन रहा होता है | शाम में जब उसे खोला गया तो वो कर्ज चुकाने का वादा करके छूटता है | अब शिकारी था तो वो जंगल में जाकर शिकार के लिए झील के पास एक मचान बनाना शुरू करता है | इस बार किस्मत से वो बिल्व वृक्ष यानि बेल के पेड़ पर मचान बना रहा होता है जो कि शिव का प्रसाद है | मचान बनाने के लिए तोड़ी गई पत्तियां नीचे शिवलिंग पर गिर रही होती हैं | अब हिन्दुओं की कहानी है तो यहाँ अन्य जीव जंतुओं को भी मनुष्यों जैसी ही भावना, और बात-चीत में समर्थ दर्शाया जाता है | इसलिए झील पे जो पहली हिरणी आती है वो भी शिकारी को तीर चढ़ाते देख उस से बात करने लगती है। वो हिरणी बताती है कि वो गर्भवती है इसलिए उसे अभी मारना उचित नहीं | बच्चे के जन्म तक उसे जीवनदान दिया जाना चाहिए | हिरणी वादा करती है कि प्रसव के बाद वो शिकारी के पास लौट आएगी | अब अकारण की गई भ्रूणहत्या से ठीक एक स्तर नीचे का पाप गर्भवती को मारने पर होता तो शिकारी रुक जाता है | थोड़ी देर और बीती तो दूसरी हिरणी, हिरण के बच्चों के साथ आती है | शिकारी फिर तीर चढ़ाता है लेकिन ये हिरणी भी उसे देख लेती है और वो कहती है कि उसे बच्चों को पिता के पास छोड़ कर आने का अवसर दिया जाये | शिकारी कहता है कि वो मूर्ख नहीं कि हाथ आये शिकार को जाने दे, और हिरणी कहती है बच्चों को घर से दूर अनाथ करने का पाप उसपर आएगा | शिकारी फिर मान जाता है और हिरणी का बच्चों को घर छोड़ कर आने का वादा मानकर उसे जाने देता है | थोड़ी देर में तीसरी हिरणी आती है और वो भी शिकारी को देखकर उससे प्राणदान माँगना शुरू करती है | उसका कहना था कि उसका ऋतुकाल अभी समाप्त हुआ है इसलिए उसे पति से मिल आने का समय दिया जाए | शिकारी को पता नहीं क्या सूझा था, वो अपने बच्चों के भूखे होने वगैरह का सोचता भी है मगर फिर से हिरणी को जाने देता है | अब तक रात का चौथा पहर हो गया था | सुबह होने ही वाली थी कि अब एक हिरण वहां पहुंचा | अब जब शिकारी तीर चढ़ाता है तो हिरण बोला कि अगर शिकारी ने तीन हिरणियों और उसके बच्चों को मार डाला है तो उसके जीने का भी कोई ख़ास मकसद नहीं बचा | इसलिए शिकारी तीर चला दे ! चित्रभानु बताता है कि तीन हिरणियां वहां आई तो थी मगर उन सब के लौट आने के वादे पर उसने सबको जाने दिया है | अब हिरण कहता है कि अगर उसे मार दिया तो तीनों हिरणियां अपना वादा तो पूरा कर नहीं पाएंगी, क्योंकि पति तो वो है, उसी से मिलने गई हैं तीनों ! जैसा कि अभ्यास से होता है, वैसे ही, बार बार भलमनसाहत दिखाने से शायद आम हिन्दुओं टाइप, शिकारी चित्रभानु को भी दया दिखाने की आदत पड़ गई थी | अब वो हिरण को भी हिरणियों से मिल कर वापिस आने की इजाजत दे देता है | अब चारों शिकारों को जाने देने वाला शिकारी सोच ही रहा होता है कि क्या करे इतने में हिरण परिवार सहित उपस्थित हो जाता है | हिन्दुओं वाले हिरण थे तो मरने की स्थिति की स्थिति में भी वादा पूरा करने चले आये | पारधी चित्रभानु भी हिन्दू ही था तो वो ऐसा होता देख कर पश्चाताप और ग्लानी से भरा अपने मचान से नीचे उतर आया | उधर रात भर पेड़ से बेलपत्र गिरने के कारण शिव जी सोच रहे थे ये घने जंगल में पूजा कौन कर रहा है ? तो उन्होंने भी शिकारी पर नजर बना रखी थी ! शिकारी कहता नहीं मार रहा, और हिरण परिवार कहता वादा पूरा होना चाहिए, इसकी बहस हो ही रही थी कि सुबह सुबह भगवान शिव भी पूजा का फल देने प्रकट हुए | हिरण परिवार को कठिनतम परिस्थिति में भी अपना किया वादा निभाने के लिए मोक्ष मिला | शिकारी को हिंसा के त्याग और पश्चाताप के फलस्वरूप मोक्ष की प्राप्ति हुई | ये ही कहानी थोड़े बहुत अंतर के साथ सभी हिन्दू शिवरात्रि की कथा के रूप में जानते हैं | गुजरात का सोमनाथ हो, या महाकाल उज्जैन, काशी विश्वनाथ का मंदिर हो या फिर त्रयम्बकेश्वर नासिक, बैजनाथ बिहार का मंदिर हो या सुदूर रामेश्वरम, दुर्गम हिमालय का केदारनाथ हो, नेपाल का पशुपतिनाथ या फिर मद्रास का शैल मल्लिकार्जुन हर जगह यही कथा सुनाई जायेगी | ग्रंथों से कम वास्ता रखने वाले अघोरी हों, या भयानक रूप से शिक्षित नागा सन्यासी, सब इसी कथा का श्रवन करेंगे | ये कहानी विविधता में एकता का उदाहरण भी है | बहेलिये की कहानी है, सुनने वाले ब्राह्मण भी होंगे, तो मोक्ष के अधिकार पर जात-पात के बंधन की गुंजाइश भी नहीं रहती | हिरणियों या हिरण के शिकार से उनके बच्चों यानि अगली पीढ़ी पर असर ना हो ये भी याद दिलाया गया है तो आज के सस्टेनेबल डेवलपमेंट की भी कहानी है | चित्रभानु पेड़ पर बैठा अनजाने ही पूजा कर बैठा था, तो मंदिरों में प्रवेश के लिय ऊँची-नीची जाति की बात करने वालों को भी सुननी चाहिए | हां नैरेटिव बिल्ड करने, साधारण कहानियों में वर्ण भेद, स्त्री विरोध या हाशिये पर के वर्ग का शोषण ढूँढने की कहानी खोज रहे लोगों को थोड़ी निराशा होगी | वो शायद इसे ना पढ़ना-सुनना चाहें | चुप्पी साधकर वो इसे भुलाने या इग्नोर करने की कोशिश जारी रख सकते हैं | बाकी शिवरात्रि है तो "भक्तों" के साथ साथ "विभक्तों" अर्थात बंटे हुए लोगों को भी शुभकामनाएं ! ✍🏻आनन्द कुमार हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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