दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- कविता
- तेलंगाना में शिवाजी की प्रतिमा को लेकर विवाद
- हरभजन को आप भेजेगी राज्यसभा
- भाजपा ने अंतिम दिन विधान परिषद के लिए 6 अन्य प्रत्याशी किये घोषित
- पोस्टल बैलेट का आकलन निराधार
- गौरैया बिना सूना आंगन
- अपनों के निशाने पर कांग्रेस पार्टी
- पंजाब में आप की सियासत
- इमरान की कुर्सी आज और कल की मेहमान!
- डा. शंकर प्रसाद शर्मा नेपाल के भारत में राजदूत
- यात्रियों समेत चीन का जहाज क्रैश, कई मौतें
- रूस पर अनाज लदे पांच जहाज चुराने का आरोप
- शानू को जन्म दिन की बधाई
- दुख तो अपना सगा-सगा सा भाई है
- 22 मार्च 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- भारत-जापान सार्थक संवाद
- विश्व गौरैया दिवस पर पटना ज़ू में "अभी मैं जिंदा हूँ गौरैया" थीम पर समारोह का आयोजन
| Posted: 21 Mar 2022 08:10 AM PDT कवितायुगो युगो से कविता महकी सदियों अलख जगाई दिलों तक दस्तक दे जाती शब्द सुधा रस बरसाई भावों की बहती सरिता काव्यधारा बन बह जाती जनजागरण जोत जला उजियारा जग में फैलाती प्रेम की पावन गंगा सी सद्भावों की अविरल धारा देशप्रेम जन मन जगाती हरती मन का अंधियारा कवि मंचो की शान बने गूंजती बुलंद आवाज में सत्ता को संभाले रखती प्रखर होकर हर राज में शब्दों के मोती चुन चुन काव्य प्रभा हो दमकती वाणी का उद्गार कविता कवि अधरों पर चमकती गीतों के तराने उमड़े दोहा मुक्तक मोती बरसे छंद सोरठा चौपाई के बोल सुनकर हृदय हरसे काव्य की गंगा सुहानी सी बहती पावन रसधार जन मन भीगे प्रेम में हो कविता की मधुर फुहार ओज भरी हुंकार बनती कभी प्रीत तराने गाती है हंसी खुशी की फुलझड़ियों से रंग नए बरसाती है शब्द सुमन से समां महके खुशबू जग फैलाती है लेखनी की मशाल जलाकर राष्ट्रप्रेम जगाती है रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| तेलंगाना में शिवाजी की प्रतिमा को लेकर विवाद Posted: 21 Mar 2022 07:17 AM PDT तेलंगाना में शिवाजी की प्रतिमा को लेकर विवादनिजामाबाद। तेलंगाना के निजामाबाद जिले के बोधन कस्बे में अंबेडकर चैराहे पर रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने को लेकर दो समूहों के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर पथराव किया। निजामाबाद पुलिस आयुक्त केआर नागराजू ने जानकारी दी कि इलाके में तनाव को देखते हुए निषेधाज्ञा लागू (सीआरपीसी की धारा 144) की गई है। एक पक्ष भाजपा कार्यकर्ताओं का और दूसरा पक्ष टीआरएस और एआईएमआईएम वर्कर्स का बताया जा रहा है। निजामाबाद पुलिस के मुताबिक, एक गुट ने छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति लगाई थी, जिसका दूसरे गुट ने विरोध किया। इसके चलते दोनों गुटों के बीच विवाद हुआ और फिर दोनों तरफ से पथराव हुआ। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़ गए। काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया गया। इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। राज्य में कानून व्यवस्था का प्रभार देखने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जितेंद्र ने बताया कि प्रतिमा स्थापित करने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। मौके पर शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारियां की जा रही हैं। भाजपा नेता और निजामाबाद से पार्टी के सांसद धर्मपुरी अरविंद ने ट्वीट कर सत्ताधारी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति और ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि बोधन नगर परिषद शिवाजी महाराज की मूर्ति लगाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था और इसे पारित भी किया था। फिर भी, टीआरएस-एमआईएम के गुंडे शिवाजी महाराज की मूर्ति लगाने का विरोध कर शहर में हंगामा और तनाव पैदा कर रहे हैं। भाजपा नेता ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि सत्तारूढ़ टीआरएस पार्षद ने बोधन शहर में शिवाजी महाराज की मूर्ति स्थापित करने पर कानून-व्यवस्था को बाधित करने की धमकी दी है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 21 Mar 2022 07:15 AM PDT हरभजन को आप भेजेगी राज्यसभानई दिल्ली। आखिरकार आम आदमी पार्टी ने क्रिकेटर हरभजन सिंह, डॉ संदीप पाठक और राघव चड्ढा का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में कंफर्म कर दिया है। आज पंजाब की 5 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की आखिरी तारीख है। हालांकि इन पांच सीटों के लिए एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल, क्रिकेटर हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अमन अरोड़ा के नामों की चर्ची पहले से थी। दो अन्य नामों में नरेश पटेल और किशलय का नाम की चर्चा है। बहुत जल्द ही इसकी भी घोषणा कर दी जाएगी। एएनआई की खबर के मुताबिक अंतिम रूप से हरभजन सिंह, राघव चड्ढा, डॉ संदीप पाठक, ब्रेस्ट कैंसर केयर चेरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर कृष्ण प्राण और संजीव अरोड़ा का नाम तय कर लिया गया है। दिल्ली के प्रोफेसर डा. संदीप पाठक के अलावा चैथा नाम कृष्ण प्राण का है। कृष्ण प्राण ब्रेस्ट केयर चेरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर हैं। पंजाब में राज्यसभा की सात सीटें खाली हो रही हैं, इनमें 5 का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इन्हीं सीटों के लिए नामांकन की आज आखिरी तारीख है। संदीप पाठक पर्दे के पीछे से कई सालों से पंजाब में रणनीति भूमिका निभा रहे हैं। आप के अंदर उन्हें चाणक्य बुलाया जाता है। संदीप पाठक दिल्ली आईआईटी डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी हैं और अमेरिका के एमआईटी से भी पढ़ाई कर चुके हैं। 9 अप्रैल को समाप्त होने वाले निम्नलिखित राज्यसभा सांसदों के कार्यकाल पूरा होने के कारण पंजाब की पांच पद खाली हैं। इनमें सांसद प्रताप सिंह बाजवा और एसएस डुलो (दोनों कांग्रेस से), श्वेत मलिक (भाजपा), नरेश गुजराल (शिअद) और एसएस ढींडसा शामिल हैं। ( शिअद-संयुक्त)। पंजाब में आरएस की सात सीटें हैं। बलविंदर सिंह भुंदर (शिअद), अंबिका सोनी (कांग्रेस) का कार्यकाल 4 जुलाई को समाप्त होगा और इन दोनों सीटों पर इस साल के अंत में मतदान होगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भाजपा ने अंतिम दिन विधान परिषद के लिए 6 अन्य प्रत्याशी किये घोषित Posted: 21 Mar 2022 07:12 AM PDT भाजपा ने अंतिम दिन विधान परिषद के लिए 6 अन्य प्रत्याशी किये घोषितलखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 36 सीटों के लिए 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी ने सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन 6 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। जारी की गई सूची में सुभाष यदुवंश, अविनाश सिंह चैहान, विनीत सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, सुदामा सिंह पटेल और बृजेश सिंह प्रिशु को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे पहले बीजेपी ने एमएलसी के 30 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया था। बता दें कि यूपी में बुधवार को एमएलसी चुनाव नामांकन की तारीख बढ़ा दी गई है। अब 19 मार्च की जगह 21 मार्च तक प्रत्याशी अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे। 36 सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनावों के लिए नामांकन 15 मार्च से शुरू हुआ है। इन सीटों के लिए 9 अप्रैल को चुनाव होना है और नतीजे 12 अप्रैल को आएंगे। विधान परिषद में 6 साल के लिए सदस्य चुने जाते हैं। यूपी में परिषद की कुल 100 सीटें हैं। अलग-अलग तरीके से चुनकर पहुंचते हैं। 100 में से 36 सीटें स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि चुनते हैं। इसके अलावा कुल 100 सीटों में से 1ध्12 यानी 8-8 सीटें शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं। वहीं, 10 अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को राज्यपाल विधान परिषद के रूप में मनोनीत करते हैं। बाकी बची 38 सीटों पर विधानसभा के विधायक वोट करते हैं और विधान परिषद के विधायक चुनते हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं, जिनमें बहुमत के लिए 51 का आंकड़ा चाहिए। उच्च सदन में 48 सीटों के साथ सपा बहुमत में है जबकि बीजेपी के पास 36 सदस्य हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव के दौरान सपा के 8 सदस्यों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। वहीं, बसपा के एक एमएलसी भी बीजेपी में पहुंच गए। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 21 Mar 2022 07:09 AM PDT पोस्टल बैलेट का आकलन निराधार(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार को अनेक लोग सहज रूप में स्वीकार नहीं कर सके थे। सात वर्ष बाद भी उनका यही नजरिया कायम है। वह यह तथ्य स्वीकार करने को तैयार नहीं कि नरेंद्र मोदी आज भी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता है। आमजन के बीच उनकी विश्वसनीयता शिखर पर है। यही कारण है कि लगातार दूसरी बार उनके नेतृत्व में भाजपा को सरकार बनाने का जनादेश मिला था। अनेक प्रदेशों में भी भाजपा को मोदी के नेतृत्व का लाभ मिलता है। योगी आदित्यनाथ भी व्यक्तिगत व राजनीतिक जीवन में नरेंद्र मोदी की तरह है। दोनों में समाज सेवा व संन्यास का अलग अलग रूप में समन्वय दिखाई देता है, जिसमें परिवारवाद के लिए कोई जगह नहीं है। इनका पूरा जीवन देश समाज के प्रति समर्पित है। विपक्ष इनसे मुकाबले का तरीका ही नहीं समझ सका क्योंकि विपक्षी नेता सेवा व समर्पण के उस धरातल पर पहुंचने की कल्पना ही नहीं कर सकते। यही कारण है कि यह पार्टियां अपनी पराजय पर आत्मचिंतन करने से बचती हैं। इसके लिए उन्होंने एक नायाब तरीका निकाल लिया है। किसी प्रदेश में इनकी सरकार बन गई तो इसे अपनी लोकप्रियता बताया गया। जीत का जश्न मनाने अन्य विपक्षी नेता भी वहां पहुंच जाते है लेकिन भाजपा को जनादेश मिला तो ईवीएम की खैर नहीं। विगत सात वर्षों से यह चल रहा है। इस शोध ग्रन्थ में एक नया अध्याय जुड़ा है। उत्तर प्रदेश में पोस्टल बैलेट के आधार पर पूरे चुनाव की सीटों का आकलन कर लिया गया। यह आंकड़ा तीन सौ प्लस तक पहुंच गया। कहा गया कि भाजपा चालाकी बेईमानी से जीत गई जबकि बैलेट पोस्टल पर पुरानी पेंशन बहाली व तीन सौ यूनिट फ्री बिजली वादे का असर हुआ। कहा गया कि पोस्टल बैलेट में समाजवादी पार्टी गठबंधन को करीब इक्यावन प्रतिशत वोट मिले हैं। इस हिसाब से कुल तीन सौ चार सीटों पर सपा गठबंधन की जीत चुनाव का सच बयान कर रही है। वैसे भी प्रदेश के मतदाताओं ने सपा की ढाई गुना सीटें बढ़ाकर अपना रुझान जता दिया है। बैलेट पोस्टल की सुविधा सरकारी सेवा के लोगों को मिलती है। इनमें भी उन लोगों ने उत्साह दिखाया जिन्हें पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। अनेक लोगों ने सोशल मीडिया पर अभियान भी चलाया था। इनका कहना था कि राष्ट्रवाद कानून व्यवस्था विकास आदि के मुद्दे अगले चुनाव में देखे जाएंगे। इस बार केवल पुरानी पेंशन बहाली के वादे पर वोट करना है। दो सौ फ्री यूनिट बिजली वादे से सरकार बनने के उदाहरण है। उत्तर प्रदेश में तो तीन सौ यूनिट फ्री बिजली का वादा किया गया था। इन वादों को गेंम चेंजर कहा जा रहा था। पोस्टल बैलेट का प्रयोग करने वालों के लिए पुरानी पेंशन बहाली सर्वाधिक महत्वपूर्ण था। वैसे भी भाजपा को छोड़ कर देश से प्रायः सभी दल व्यक्ति व परिवारवादी हैं। अन्य प्राथमिकता इसके बाद ही प्रारंभ होती है। वह अपनी इस कमजोरी को छिपाना चाहते हैं। इसके लिए पिछड़ों दलितों अल्पसंख्यकों आदि की दुहाई दी जाती है। इस परम्परागत राजनीति से ऊपर उठने का इनके पास कोई विजन ही नहीं, जबकि लोग जागरूक हो चुके है। वह असलियत को देखते व समझते है। गरीबों, किसानों आदि के हित में सभी सरकारों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रहता है। करोड़ों की संख्या में कल्याणकारी योजनाओं से लाभांवित होने वाले लोग है। इनके ऊपर जाति मजहब के समीकरण ज्यादा महत्व नहीं रखते। लोकलुभावन वादों में कोई कसर न छोड़ने के बाद भी विपक्ष को सरलता नहीं मिली। मुकाबले में एकमात्र दल था। इसलिए उसकी सीटें बढ़ाना स्वाभाविक था लेकिन बेशुमार वादों के बाद भी उसे सत्ता से दूर रखने का मतदाताओं ने निर्णय लिया। इस पराजय पर आत्मचिंतन की आवश्यकता थी लेकिन फिर ईवीएम व बेईमानी की बात हुई। कहा गया कि जनता ने सपा को भाजपा का विकल्प मान लिया है जबकि यह तब सच होता जब सपा को बहुमत मिलता। इस चुनाव में उसे एक मात्र विपक्षी अवश्य माना गया। फिलहाल वह कांग्रेस व बसपा की विकल्प अवश्य बनी है लेकिन इस आधार पर पांच वर्ष बाद का निष्कर्ष नहीं निकल सकता। पांच वर्ष बाद मतदाता सरकार व मुख्य विपक्षी पार्टी के कार्यों के आधार पर निर्णय करेंगे। उत्तर प्रदेश में बीजेपी पर छल प्रपंच से चुनाव जीतने का आरोप लगाना निराधार है। कांग्रेस व बसपा लड़ ही नहीं सकी। ऐसे में सपा की सीटें व मत प्रतिशत बढा। इसके पहले बसपा व सपा को पूरे बहुमत से सरकार चलाने का अवसर मिला था। योगी सरकार के कार्यकाल में दो वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना का प्रकोप रहा। इससे अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा। अनेक विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा। इसके बाद भी भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला। परिस्थितियों को देखते हुए यह सफलता भी कम नहीं है। लेकिन ईवीएम को लेकर फिर वही अंदाज सामने है। मतलब भाजपा ईवीएम से विजयी होती है। गैर भाजपा पार्टियां अपनी लोकप्रियता व नैतिक राजनीति से परचम फहराती है। ममता बनर्जी, कुमार स्वामी कमलनाथ,अशोक गहलोत,हेमंत सोरोंन आदि लोकप्रयिता से मुख्यमंत्री बने जबकि योगी आदित्यनाथ की वापसी पर ईवीएम को कोसा जा रहा है। आमजन इस दोहरे मापदंड को देख व समझ रहे हैं। सच्चाई को सहज रूप में स्वीकार करना चाहिए। तीन सौ यूनिट बिजली का वादा बहुत लोक लुभावन था लेकिन बिजली की आपूर्ति का मुद्दा भी चर्चा में रहा। यह किसी पार्टी के कहने की बात नहीं थी। इसका लोगों को प्रत्यक्ष अनुभव रहा है। करोड़ों गरीबों को अनेक योजनाओं का सीधा लाभ मिला। करीब पैतालीस लाख गरीबों को आवास मिला। पांच साल पहले तक यूपी में किसान सरकारों की प्राथमिकता से बाहर था,लेकिन आज वह राजनीति के एजेंडे में शामिल है। किसानों के उत्थान के लिए,उनकी आय में दोगुना वृद्धि के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं। सरकार ने दो करोड़ इकसठ लाख शौचालय बनाकर तैयार किए जिसका लाभ दस करोड़ लोगों को मिला है। जिला मुख्यालयों में दस घंटे बिजली और तहसील मुख्यालय पर बाइस घंटे बिजली की सुविधा दी जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अठारह घंटे बिजली पहुंचाने का काम सरकार कर रही है। किसान व गरीब कल्याण,लाखों करोड़ के निवेश, अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार, पांच एक्सप्रेस वे पर कार्य,स्वास्थ्य आदि तमाम और क्षेत्रों में भी पिछली सरकारों के रिकार्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया गया है। राज्य सरकार की कार्यपद्धति में बदलाव से आय भी बढ़ी है। शीघ्र ही स्टेट जीएसटी से होने वाली आय एक लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार कर लेगी। राज्य सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए के गन्ना मूल्य का भुगतान कराया है। कोरोना काल में भी सभी एक सौ उन्नीस चीनी मिलें संचालित की गईं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अन्तर्गत प्रदेश के दो करोड़ बयालीस लाख किसानों को लाभान्वित किया गया है। इसके लिए राज्य को भारत सरकार से प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। व्यापार का वातावरण बना है और प्रदेश देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरे स्थान पर आ गया है। आज प्रदेश में तेजी के साथ निजी निवेश हो रहा है। मतदाता इन सभी बातों को देखते हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें 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| Posted: 21 Mar 2022 07:06 AM PDT गौरैया बिना सूना आंगन(प्रभुनाथ शुक्ल-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) गौरैया हमारी प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह हमारे आँगन और नीम के पेड़ के नीचे फुदकती और बिखेरे गए चावल या अनाज के दाने को चुगती। कभी प्यारी गौरैया घर की दीवार पर लगे आईने पर अपनी हमशक्ल पर चोंच मारती दिख जाती थीं। लेकिन बदलते वक्त के साथ गौरैया का बयां बेहद कम दिखाई देता है। एक वक्त था जब बबूल के पेड़ पर सैकड़ों की संख्या में घोसले लटके होते और गौरैया के साथ उसके चूजे चीं-चीं-चीं का शोर मचाते। बचपन की यादें आज भी जेहन में ताजा हैं लेकिन वक्त के साथ गौरैया एक कहानी बन गई है। गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खास भूमिका भी है। दुनिया भर में 20 मार्च को गौरैया संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद मो. ई. दिलावर के प्रयासों से इस दिवस को चुलबुली गौरैया के लिए रखा गया। 2010 में पहली बार यह दुनिया में मनाया गया। प्रसिद्ध उपन्यासकार भीष्म साहनी ने अपने बाल साहित्य में गौरैया पर बड़ी अच्छी कहानी लिखी है, जिसे उन्होंने गौरैया नाम दिया। हालांकि, जागरूकता की वजह से गौरैया की आमद बढ़ने लगी है। हमारे लिए यह शुभ संकेत है। गौरैया एक घरेलू और पालतू पक्षी है। यह इंसान और उसकी बस्ती के पास अधिक रहना पसंद करती है। पूर्वी एशिया में यह बहुतायत पायीजाती है। यह अधिक वजनी नहीं होती हैं। इसका जीवन काल दो साल का होता है। यह पांच से छह अंडे देती है। आंध्र यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में गौरैया की आबादी में 60 फीसदी से अधिक की कमी बताई गई थी। ब्रिटेन की 'रॉयल सोसाइटी आफ प्रॉटेक्शन आफ बर्डस' ने इस चुलबुली और चंचल पक्षी को 'रेड लिस्ट' में डाल दिया था । गौरैया पासेराडेई परिवार की सदस्य है। लेकिन इसे वीवरपिंच परिवार का भी सदस्य माना जाता है। इसकी लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है। इसका वजन 25 से 35 ग्राम तक होता है। यह अधिकांश झुंड में रहती है। यह अधिक दो मिल की दूरी तय करती है। गौरैया को अंग्रेजी में पासर डोमेस्टिकस के नाम से बुलाते हैं। शहरी हिस्सों में इसकी छह प्रजातियां पायी जाती हैं जिसमें हाउस स्पैरो, स्पेनिश, सिंउ स्पैरो, रसेट, डेड और टी स्पैरो शामिल हैं। यह यूरोप, एशिया के साथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अधिकतर हिस्सों में मिलती है। बढ़ती आबादी के कारण जंगलों का सफाया हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में पेड़ काटे जा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में बाग-बगीचे खत्म हो रहे हैं। इसका सीधा असर इन पर दिख रहा है। गांवों में अब पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। जिसका कारण है कि मकानों में गौरैया को अपना घोंसला बनाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल रही है। पहले गांवों में कच्चे मकान बनाए जाते थे, उसमें लकड़ी और दूसरी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता था। कच्चे मकान गौरैया के लिए प्राकृतिक वातावरण और तापमान के लिहाज से अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते थे, लेकिन आधुनिक मकानों में यह सुविधा अब उपलब्ध नहीं होती है। यह पक्षी अधिक तापमान में नहीं रह सकता है। गगनचुंबी ऊंची इमारतें और संचार क्रांति इनके लिए अभिशाप बन गई। शहर से लेकर गांवों तक मोबाइल टावर एवं उससे निकलते रेडिएशन से इनकी जिंदगी संकट में है। खेती-किसानी में रसायनिक उर्वरकों का बढ़ता प्रयोग बेजुबान पक्षियों और गौरैया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। केमिकलयुक्त रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से कीड़े मकोड़े भी विलुप्त हो चले हैं जिससे गौरैया के लिए भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है। दूसरा बड़ा कारण मकर सक्रांति पर पतंग उत्सवों के दौरान काफी संख्या में हमारे पक्षियों की मौत हो जाती है। पतंग की डोर से उड़ने के दौरान इसकी जद में आने से पक्षियों के पंख कट जाते हैं। हवाई मार्गों की जद में आने से भी इनकी मौत हो जाती है। दूसरी तरफ बच्चों की ओर से चिड़ियों को रंग दिया जाता है। जिससे उनका पंख गीला हो जाता है और वे उड़ नहीं पातीं। हिंसक पक्षी जैसे बाज इत्यादि हमला कर उन्हें मौत की नींद सुला देते हैं। दुनिया भर में प्रसिद्ध पर्यावरणविद मोहम्मद ई. दिलावर नासिक से हैं और वह बाम्बे नैचरल हिस्ट्री सोसाइटी से जुड़े हैं। उन्होंने यह मुहिम 2008 से शुरू की थी। आज यह दुनिया के 50 से अधिक मुल्कों तक पहुंच गई है। गौरैया के संरक्षण के लिए सरकारों की तरफ से कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखती है। हालांकि, यूपी में में भी 20 मार्च को गौरैया संरक्षण दिवस मनाया गया लेकिन सिर्फ एक दिन इस पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है। दिलावर के विचार में गौरैया संरक्षण के लिए लकड़ी के बुरादे से छोटे-छोटे घर बनाए जाएं और उसमें खाने की भी सुविधा भी उपलब्ध हो। अमेरिका और अन्य विकसित देशों में पक्षियों का ब्योरा रखा जाता है लेकिन भारत में ऐसा नहीं हैं। पक्षियों के संरक्षण के लिए कॉमन बर्ड मॉनिटरिंग आफ इंडिया के नाम से साइट बनाई है जिस पर आप भी पक्षियों से संबंधी जानकारी और आंकड़ा दे सकते हैं। कुछ सालों से उनकी संस्था गौरैया को संरिक्षत करने वालों को स्पैरो अवॉर्ड्स देती है। विज्ञान और विकास के बढ़ते कदम ने हमारे सामने कई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। जिससे निपटना हमारे लिए आसान नहीं है। विकास की महत्वाकांक्षी इच्छाओं ने हमारे सामने पर्यावरण की विषम स्थिति पैदा की है। जिसका असर इंसानी जीवन के अलावा पशु-पक्षियों पर साफ दिखता है। इंसान के बेहद करीब रहने वाली कई प्रजाति के पक्षी और चिड़िया आज हमारे बीच से गायब हैं। उसी में एक है स्पैरो यानी नन्ही सी वह गौरैया। समय रहते इन विलुप्त होती प्रजाति पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब गिद्धों की तरह गौरैया भी इतिहास बन जाएगी और यह सिर्फ गूगल और किताबों में ही दिखेगी। सिर्फ सरकार के भरोसे हम इंसानी दोस्त गौरैया को नहीं बचा सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों को अभियान चलाकर लोगों को मानव जीवन में पशु-पक्षियों के योगदान की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा स्कूली पाठ्यक्रमों में हमें गौरैया और दूसरे पक्षियों को शामिल करना होगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अपनों के निशाने पर कांग्रेस पार्टी Posted: 21 Mar 2022 07:02 AM PDT अपनों के निशाने पर कांग्रेस पार्टी(रमेश सर्राफ धमोरा-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अपने ही नेताओं के निशाने पर आ गई है। जी-23 ग्रुप के नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने तो सीधे गांधी परिवार पर हमला करते हुए उन्हें पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर दूसरे किसी कांग्रेस जन को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने तक की मांग कर डाली है। कपिल सिब्बल के बाद बहुत से नेताओं ने भी पार्टी संगठन में आमूलचूल बदलाव की मांग की है। कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। कांग्रेस पार्टी दो बार लोकसभा तथा राज्यों के विधानसभा चुनाव में लगातार हारती जा रही है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा व मणिपुर में बहुत बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रांत में तो कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ हो गया है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जहां भाजपा का प्रदर्शन लगातार अच्छा होता जा रहा है, वहीं कांग्रेस दिनों दिन कमजोर होती जा रही है। कुछ दिनों पूर्व संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस महज दो सीटें ही जीत सकी है, जबकि 2017 में कांग्रेस 7 सीटों पर विजयी हुई थी। इस बार कांग्रेस को 21 लाख 51 हजार 234 वोट मिले जो पिछली बार 54 लाख 16 हजार 540 वोटों की तुलना में 32 लाख 65 हजार 306 वोट यानी 3.92 प्रतिशत कम मिले हैं। इस बार कांग्रेस 397 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जबकि पिछली बार समाजवादी पार्टी से समझौता होने के चलते महज 114 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई थी। उत्तराखंड में कांग्रेस 70 में से 19 सीटें ही जीत पाई है जबकि इस बार कांग्रेस को सबसे अधिक विश्वास उत्तराखंड में सरकार बनाने का था। मगर वहां 4.40 प्रतिशत वोट बढ़ने के बावजूद भी कांग्रेस सरकार बनाने से बहुत पीछे रह गई। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस बार भी लालकुआं विधानसभा सीट से भाजपा के डॉ मोहन सिंह बिष्ट से करीब 17 हजार वोटों से चुनाव हार गए। 2017 में भी हरीश रावत मुख्यमंत्री रहते दो विधानसभा सीटों से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस को सबसे बुरी स्थिति का पंजाब में सामना करना पड़ा है। यहां कांग्रेस महज 18 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। उसे 59 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी घटकर 22.98 प्रतिशत रह गया है, जो पिछली बार की तुलना में 15.66 प्रतिशत कम है। कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे चरणजीत सिंह चन्नी दोनों विधानसभा सीटों चमकौर साहिब व भदौड़ से तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर पूर्व सीट से चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा कांग्रेस के अधिकांश मंत्री व बड़े नेता चुनाव हार गए हैं। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में भी कांग्रेस से सत्ता छीन ली है। राजनीति के जानकार गोवा विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस, कांग्रेस की सरकार बनने के कयास लगा रहे थे। लोगों का मानना था कि लगातार 15 साल से सत्ता में रहने के कारण भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर व्याप्त हो रही थी, जिसका लाभ कांग्रेस को मिलता नजर आ रहा था। मगर चुनाव परिणामों में कांग्रेस बुरी तरह पिछड़ गई। कांग्रेस को 40 में से महज 11 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। 20 सीटें जीतकर भाजपा फिर सरकार बनाने जा रही है। गोवा विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को पिछली बार की तुलना में 6 सीटों का व 4.58 प्रतिशत वोटों का घाटा उठाना पड़ा है। गोवा के मतदाताओं ने कांग्रेस की पिछली बार की गलती को माफ नहीं किया है। रही सही कसर वहां आम आदमी पार्टी व तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशियों ने कांग्रेस के वोट काटकर पूरी कर दी। मणिपुर विधानसभा के चुनाव में भी कांग्रेस बहुत कमजोर स्थिति में आ गई है। इस बार कांग्रेस महज 5 सीटें ही जीत पाई है जबकि पिछली बार उसने 28 सीटों पर चुनाव जीता था। पिछली बार की तुलना में वहां कांग्रेस को 18.17 प्रतिशत वोट भी कम मिले है। उत्तर पूर्व के सभी आठों राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई है। 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई थी। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस हार गई थी। इसके साथ ही राज्य विधानसभाओं के चुनाव में भी कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। 2018 जरूर कांग्रेस के लिए कुछ अच्छा रहा। इस वर्ष कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में अपनी सरकार बनाई। मगर पार्टी में नेताओं की आपसी गुटबाजी के चलते कर्नाटक व मध्य प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस में दलबदल करवा कर अपनी सरकार बनवा ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने साथी विधायकों को संतुष्ट नहीं कर पाए जिसके चलते उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी। अभी राजस्थान व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार चल रही है। महाराष्ट्र व झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सरकार में शामिल है। कभी पूरे देश पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज महज दो- चार प्रदेशों तक ही सिमट कर रह गई है। कांग्रेस के बड़े नेता जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुष्मिता देव, लुइजिन्हो फलेयरो, आर पी एन सिंह, आदिति सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की मीटिंग में रस्मी तौर पर तो सभी ने गांधी परिवार पर भरोसा जताया और सोनिया गांधी को पद बने रहने का प्रस्ताव पास कर दिया था मगर पार्टी के अंदर खाने लोगों में बदलाव की मांग तेज होती जा रही है। बहुत से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को बनाने की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 397 सीटो पर चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को महज 2.33 प्रतिशत वोट मिले जबकि मात्र 34 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले राष्ट्रीय लोकदल को कांग्रेस से अधिक 2.85 प्रतिशत वोट मिले हैं। उत्तर प्रदेश से लोकसभा की 80 सीटें आती हैं। वहां कांग्रेस का महज दो सीटों पर सिमट जाना पार्टी के लिए चिंतन मनन का विषय है जबकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पिछले तीन वर्षों से उत्तर प्रदेश में लगातार पार्टी को मजबूत करने में लगी हुई है। प्रदेश प्रभारियों का खूब विरोध हो रहा है। अधिकांश प्रभारी ऐसे नेताओं को लगाया गया है जो स्वंय कई चुनाव हार चुके हैं। ऐसे नेता जो खुद चुनाव नहीं जीत सकते वो संगठन को कैसे मजबूत करेगें यह ज्वलंत सवाल है। हरियाणा में सिटिंग विधायक रहते विधायक का चुनाव हारने वाले रणदीप सिंह सुरजेवाला के पास पार्टी के कई बड़े पद हैं। विवादों के चलते राजस्थान के प्रभारी महासचिव के पद से हटाये गये अविनाश पांडे को फिर से महासचिव व झारखंड का प्रभारी बना दिया गया हैं। मौजूदा समय में कांग्रेस पार्टी में बड़े बदलाव की जरूरत है। राजस्थान व छत्तीसगढ़ जहां कांग्रेस की सरकार चल रही है। वहां के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कांग्रेसी विधायकों में व्याप्त असंतोष को भी पार्टी आलाकमान को समय रहते समाप्त करवाना चाहिए। वरना 2023 के विधानसभा चुनाव में वहां भी कांग्रेस को बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 21 Mar 2022 06:59 AM PDT पंजाब में आप की सियासत(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) राजनीति में चुनाव जीतकर सरकार बनाना ही पर्याप्त नहीं होता है। इसके बाद सत्ता को बनाये रखने और उस पर हाईकमान का नियंत्रण रखना दो सबसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बार प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनायी है लेकिन लोगों का मानना है कि वहां आप के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान का 'मान' कुछ ज्यादा है। यही कारण रहा कि पहले अरविन्द केजरीवाल ने अपने नाम पर ही चुनाव लड़ने का विचार किया था लेकिन उन्हें 2017 की याद आ गयी जब आप मुख्य विपक्षी दल तो बन गयी लेकिन सत्ता नहीं मिली थी। इसीलिए पंजाबी चेहरे को सामने रखा गया और उस चेहरे ने राज्य में सरकार भी बना ली। अब पार्टी और सरकार में संतुलन बनाने के लिए अरविन्द केजरीवाल राज्यसभा की गोटें बिछा रहे हैं। इसी 31 मार्च को पंजाब की पांच राज्यसभा सीटांे का चुनाव होना है। इसलिए केजरीवाल ने सबसे पहले प्राथमिकता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राघव चड्ढा को दी है। श्री चड्ढा भी मुख्यमंत्री बनने की लाइन में थे। चड्ढा के अलावा प्रोफेसर संदीप पाठक और क्रिकेटर हरभजन सिंह को भी राज्यसभा में भेजकर आम आदमी पार्टी संतुलन बना रही है। आम आदमी पार्टी ने राज्य विधानसभा की 117 सीटों में से 92 पर कब्जा जमाया है। राघव चड्ढा दिल्ली की राजेन्द्र नगर विधानसभा सीट से 2020 में पहली बार ही विधायक बने। इस प्रकार केजरीवाल के करीबी राघव चड्ढा पंजाब की राजनीति में दखल रख सकेंगे। दरअसल मान बड़ी तेजी से कार्य कर रहे हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान पंजाब में 'आप' को मिली धमाकेदार जीत के बाद पार्टी के सर्वेसर्वा दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल के कहे हुए शब्दों ने चैंकाया भी है। मतगणना के दौरान जीत के बढ़ते ग्राफ को देख कर केजरीवाल ने कहा कि 'पंजाब की जीत डरा रही है।' सामान्य तौर पर इन शब्दों का भाव है कि जैसे केजरीवाल कह रहे हों कि देश की जनता ने बड़ी जिम्मेवारी के लिए पार्टी से नई उम्मीद बान्धी है और जनता की पार्टी के प्रति बढ़ी अपेक्षा डरा रही है। हालांकि कुछ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या भगवन्त मान की लोकप्रियता ने केजरीवाल को भी डरा दिया? केजरीवाल भगवन्त मान के अपने से ऊंचे कद को बर्दाश्त कर पाएंगे ? केजरीवाल व मान पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है कि गुरु गुड़ रहे और चेला शक्कर हो गए। केजरीवाल दिल्ली जैसे छोटे व केन्द्र शासित राज्य के मुख्यमन्त्री हैं तो भगवन्त मान दिल्ली से कई गुणा बड़े और पूर्णरुपेण राज्य के सूबेदार बन गए हैं। दिल्ली में केजरीवाल को हर निर्णय के लिए उप-राज्यपाल के मुंह की ओर तकना पड़ता है जबकि भगवन्त मान के सामने ऐसी कोई विवशता नहीं होगी। केजरीवाल के नियन्त्रण में दिल्ली पुलिस सहित मुख्यमन्त्री के अनेक अधिकार नहीं हैं परन्तु भगवन्त मान के पास एक पूर्ण राज्य के मुख्यमन्त्री की सारी शक्तियां होंगी। देश के मुख्यमन्त्रियों की पंक्ति में मान को केजरीवाल से अधिक 'मान' मिलना तय है और केजरीवाल के स्वभाव की ओर देखें तो यह उनको अखर सकता है। पंजाब के विगत विधानसभा चुनावों में केजरीवाल ने अपना चेहरा आगे कर राजनीतिक पासा फेंका था परन्तु, उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली। अबकी बार 2022 के चुनावों में भी केजरीवाल ने प्रचार का प्रारम्भ बिना पंजाबी नेता के चेहरे के किया। इसको लेकर पार्टी के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं में आक्रोश भी था कि केजरीवाल दिल्ली के लोगों को आगे ला रहे हैं। ध्यान, आम आदमी पार्टी का गठन नवम्बर 2012 में हुआ और तब से पार्टी के त्रराष्ट्रीय संयोजक पद पर अरविन्द केजरीवाल ही आसीन चले आ रहे हैं। केवल इतना ही नहीं पार्टी व दिल्ली सरकार के महत्त्वपूर्ण पद भी उन्होंने अपने चहेतों में ही बांटे हुए हैं। पार्टी की बैठकों में अरविन्द केजरीवाल के इशारों को ही भगवद् इच्छा मान कर स्वीकार कर लिया जाता है। केजरीवाल ने पार्टी में अपना विरोध करने वालों व उनको भविष्य में चुनौती पेश करने वाले कद्दावर नेताओं को एक के बाद एक निस्तेज कर दिया जिन्हें अन्ततः पार्टी को छोड़ना पड़ा। याद करें कि अन्ना हजारे आन्दोलन में केजरीवाल के साथ किरण बेदी, योगेन्द्र यादव, पत्रकार आशुतोष, प्रशान्त किशोर, जनरल वीके सिंह, कुमार विश्वास, कपिल मिश्रा सहित कई ज्ञात-अज्ञात चेहरे मंच पर नजर आते थे। बाद में इनमें कइयों ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की और कई स्तर पर चुनाव भी लड़े, परन्तु आज वे पार्टी में दिखाई नहीं पड़ते। केजरीवाल की तानाशाह कार्यप्रणाली के चलते इन्हें या तो दूसरे दलों में जाना पड़ा या राजनीतिक हाशिए पर। दरअसल, व्यक्तिवादी व परिवारवादी दल देश की राजनीति के लिए बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं। इस तरह के विचारशून्य दलों में उच्च पद पर आसीन कोई भी नेता स्वेच्छा से अपना पद छोड़ने को राजी नहीं होता। केवल इतना ही नहीं, भविष्य में जो उनके लिए खतरा बने उस नेता के पर काटने में भी देर नहीं लगाई जाती। भगवन्त मान ने लोकप्रियता के मामले में अरविन्द केजरीवाल से ऐसी बड़ी लकीर खींच दी है जो पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव में खुद 'आप सुप्रीमो' भी नहीं खींच सके। सच पूछा जाए तो आज आम आदमी पार्टी में पहले-दूसरे नम्बर के नेता की बात की जाए तो मान केजरीवाल से ठीक उसी तरह आगे नजर आते हैं जैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सक्रिय हैं। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में प्रत्येक मंत्री के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं और अगर वह पूरा नहीं होता है, तो लोग "मंत्री को हटाने की मांग कर सकते हैं।" नई सरकार द्वारा शुरुआती घोषणाओं की ओर इशारा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि भगवंत मान ने 'केवल तीन दिनों के भीतर बहुत सारी जमीन को कवर कर लिया है।' आप नेता भगवंत मान ने 16 मार्च को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। केजरीवाल ने कहा, "नए मुख्यमंत्री ने पहले ही पुराने मंत्रियों की सुरक्षा हटा दी है और जनता को सुरक्षा दी है। बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिया गया है।" उन्होंने कहा, "भगवंत मान ने एंटी करप्शन फोन लाइन की भी घोषणा की, जिसके बाद दिल्ली में लोगों के फोन आने लगे३ सुधार अपने आप शुरू हो गए हैं।" दरअसल पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के शहादत दिवस पर 23 मार्च को वह एक व्हाट्स ऐप नंबर जारी करेंगे और अगर कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो लोग इस नंबर पर बातचीत की रिकॉर्डिंग साझा कर सकते हैं। अपने शुरुआती फैसलों में से एक में, भगवंत मान ने पुलिस बल में 10,000 सहित विभिन्न राज्य विभागों में 25,000 रिक्त पदों को भरने को भी मंजूरी दी है। केजरीवाल अपनी अहमियत कायम रखना चाहते हैं। इसीलिए मोहाली में विधायकों की बैठक को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि विधायकों को 'चंडीगढ़ में नहीं बैठना चाहिए' नहीं तो उन्हें 'घुड़सवार कोचों की आदत हो जाएगी।' उन्होंने कहा, 'पार्टी का मंत्र है कि एक विधायक लोगों के बीच घूमेगा, गांवों में जाएगा।' उन्होंने कहा, "पंजाब के लोगों ने हीरों का चयन किया है और हमें भगवंत मान के नेतृत्व में 92 लोगों की टीम के रूप में काम करना है। मैं सिर्फ उनका बड़ा भाई हूं।" अपने संबोधन में सीएम भगवंत मान ने मूल बातों की ओर लौटते हुए विधायकों से समय का पाबंद रहने, अपने निर्वाचन क्षेत्र के हर शहर में एक कार्यालय खोलने और दिन में 18 घंटे काम करने का आह्वान किया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| इमरान की कुर्सी आज और कल की मेहमान! Posted: 21 Mar 2022 06:55 AM PDT इमरान की कुर्सी आज और कल की मेहमान!इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अब इमरान खान की प्रधानमंत्री की कुर्सी जाती दिख रही है। इमरान खान को पाकिस्तानी सेना ने तगड़ा झटका दिया है. खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इमरान खान को ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन की मीटिंग के बाद इस्तीफा देने को कह दिया गया है। ओआईसी की यह मीटिंग 22 और 23 मार्च को पाकिस्तान में होनी है। सेना की तरफ से यह बात कहने वालों में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा भी शामिल हैं। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इमरान खान को पीएम पद से उतारने का फैसला जनरल बाजवा और अन्य तीन लेफ्टिनेंट जनरलों ने ली है. इनकी बैठक से पहले बाजवा और लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम पीएम इमरान खान से भी मिले थे. जानकारी के मुताबिक, सेना के चारों शीर्ष अधिकारी अब इमरान को कोई मौका नहीं देना चाहते। दरअसल, पाकिस्तान की सेना इमरान खान से कई वजहों से खफा है. पहली यह कि बाजवा ने इमरान को हिदायत दी थी कि वह विपक्षी नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल ना करें। बावजूद इसके वह जेयूआई-एफ के नेता मौलाना फैंजलुर रहमान को डीजल कहकर चिढ़ाते रहे. इसके साथ पाकिस्तानी सेना इस बात से भी भड़की है कि इमरान ने यूक्रेन संकट के लिए बेवजह ही अमेरिका और यूरोपीय संघ को घेरा। सत्ता बचाने के लिए इमरान खान कुछ भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'अल्लाह भी अपने दासों को माफ कर देता है। मैं आप सभी के लिए पिता के समान हूं लेकिन अल्लाह के लिए इतनी बड़ी गलती मत करो. अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचो।' इस जनसभा में इमरान खान ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा- 'मैं भारत की विदेश नीति को सलाम करता हूं. भारत ने हमेशा एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है. आज भारत अमेरिका के साथ क्वाड में भी शामिल है और प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद रहा है, क्योंकि उसकी विदेश नीति उसके लोगों के लिए है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| डा. शंकर प्रसाद शर्मा नेपाल के भारत में राजदूत Posted: 21 Mar 2022 06:52 AM PDT डा. शंकर प्रसाद शर्मा नेपाल के भारत में राजदूतकाठमांडू। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने अर्थशास्त्री डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा को भारत में राजदूत नियुक्त किया है. एक आधिकारिक घोषणा में रविवार को ये जानकारी दी गई. डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा अमेरिका में नेपाल के राजदूत रह चुके हैं. नई दिल्ली में नेपाल के राजदूत का पद पिछली सरकार की ओर से नियुक्त राजदूत नीलांबर आचार्या को करीब छह महीने पहले वापस बुला लिए जाने के बाद से खाली पड़ा था. राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति भंडारी ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 282 के अनुरूप मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा को भारत में राजदूत नियुक्त किया है। शंकर प्रसाद शर्मा ने इससे पहले अमेरिका में नेपाल के राजदूत की भूमिका निभाई है। उन्होंने 2002 और 2006 के बीच राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यात्रियों समेत चीन का जहाज क्रैश, कई मौतें Posted: 21 Mar 2022 06:49 AM PDT यात्रियों समेत चीन का जहाज क्रैश, कई मौतेंबीजिंग। चीन में एक बड़ा विमान हादसा हुआ है. चीन का बोईग 737 एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया है. हादसे के वक्त बोईग 737 में कुल 133 यात्री सवार थे. चीनी मीडिया के मुताबिक हादसा दक्षिण चीन सागर में हुआ. हादसे में कितने लोगों की जान गई या कितने घायल हुए, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक- चाइना ईस्टर्न फ्लाइट एमयू 5735 हवाई अड्डे के कर्मचारियों का हवाला देते हुए सोमवार दोपहर 1 बजे के बाद कुनमिंग शहर से उड़ान भरने के बाद गुआंगझोउ में निर्धारित अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची. मौके पर रेस्क्यू टीम पहुंच चुकी है। चीनी मीडिया के मुताबिक एमयू 5735 प्लेन ने दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत में मौजूद क्यूनमिंग शहर के चेन्जश्यूई एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। इसे 3 बजे तक जिआन झिऊ प्रांत पहुंचना था, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया. जहां पर हादसा हुआ उस इलाके में बुरी तरह आग लग गई. ऐसे में माना जा रहा है कि हादसे में मौतों की संख्या ज्यादा होगी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| रूस पर अनाज लदे पांच जहाज चुराने का आरोप Posted: 21 Mar 2022 06:43 AM PDT रूस पर अनाज लदे पांच जहाज चुराने का आरोपकीव। यूक्रेन पिछले 26 दिनों से रूस के हमले झेल रहा है। जंग के बीच यूक्रेन ने रूस पर अनाज से लदे 5 जहाज चुराने का आरोप लगाया है। जपोरिजिया गवर्नर ने बताया कि जिन जहाजों की चोरी की गई है, उनमें हजारों टन अनाज था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि उन जहाजों को बेरडियान्स्क बंदरगाह से रूसी टगबोट्स ने चुराया है। हालांकि, रूस की ओर से अभी तक इसपर कोई रिएक्शन नहीं आया है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से सोमवार को बताया गया कि उत्तरी कीव में रूस और यूक्रेन की सेना के बीच जबरदस्त लड़ाई चल रही है. शहर के उत्तर-पूर्व में यूक्रेनी सैनिकों ने रूस को रोक कर रखा है। कीव में रातभर से बमबारी हो रही है. रूस की ओर से किए गए हमलों में 4 लोगों की मौत हो गई. राज्य आपातकालीन सेवा की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रूसी हमलों के बाद कई जगह आग लग गई. इसकी चपेट में चार लोग आ गए, जिनकी मौत हो गई। वहीं, एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। इस बीच रूसी सैनिक ने सामरिक रूप से अहम बंदरगाह शहर मारियुपोल को चारो तरफ से घेर लिया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 21 Mar 2022 06:32 AM PDT
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| Posted: 21 Mar 2022 06:28 AM PDT दुख तो अपना सगा-सगा सा भाई हैकठिनाई अपनी ही तो परछाँई है। इसके होने से ही हम भी होते हैं पाकर भी सारा कुछ ऐसे खोते हैं जैसे मेरी रही न कभी कमाई है। जो बुनकर आए थे सस्ते काट रहे फिर भी जो है उसको कहीं न बाँट रहे यही बचे जीवन की भी सच्चाई है। सदेहों मे डूबा रहा हमारा मन और शून्य से टकरा रहा दुलारा तन खुली खुली आँखों में प्रीत समाई है। रामकृष्ण हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 21 Mar 2022 06:06 AM PDT
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| Posted: 20 Mar 2022 10:51 PM PDT भारत-जापान सार्थक संवादडॉ. वेदप्रताप वैदिक जापान के नए प्रधानमंत्री फ्यूमियो किशिदा ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना, यह अपने आप में महत्वपूर्ण है। भारत और जापान के बीच कुछ दिन पहले चौगुटे (क्वाड) की बैठक में ही संवाद हो चुका था लेकिन इस द्विपक्षीय भेंट का महत्व इसलिए भी था कि यूक्रेन-रूस युद्ध अभी तक चला हुआ है। दुनिया यह देख रही थी कि जो जापान दिल खोलकर भारत में पैसा बहा रहा है, कहीं वह यूक्रेन के सवाल पर भारत को फिसलाने की कोशिश तो नहीं करेगा लेकिन भारत सरकार को हमें दाद देनी होगी कि मोदी-किशिदा वार्ता और संयुक्त बयान में वह अपनी टेक पर अड़ी रही और अपनी तटस्थता की नीति पर टस से मस नहीं हुई। यह ठीक है कि जापानी प्रधानमंत्री ने अगले पांच साल में भारत में 42 बिलियन डाॅलर की पूंजी लगाने की घोषणा की और छह मुद्दों पर समझौते भी किए लेकिन वे भारत को रूस के विरुद्ध बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सके। भारत ने राष्ट्रों की सुरक्षा और संप्रभुता को बनाए रखने पर जोर जरुर दिया और यूक्रेन में युद्धबंदी की मांग भी की लेकिन उसने अमेरिका के सुर में सुर मिलाते हुए जबानी जमा-खर्च नहीं किया। अमेरिका और उसके साथी राष्ट्रों ने पहले तो यूक्रेन को पानी पर चढ़ा दिया। उसे नाटो में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और रूस ने जब हमला किया तो सब दुम दबाकर बैठ गए। यूक्रेन को मिट्टी में मिलाया जा रहा है लेकिन पश्चिमी राष्ट्रों की हिम्मत नहीं कि वे रूस पर कोई लगाम कस सकें। किशिदा ने मोदी के साथ बातचीत में और बाद में पत्रकारों से बात करते हुए रूस की काफी भर्त्सना की लेकिन मोदी ने कोरोना महामारी की वापसी की आशंकाओं और विश्व राजनीति में आ रहे बुनियादी परिवर्तनों की तरफ ज्यादा जोर दिया। जापानी प्रधानमंत्री ने चीन की विस्तारवादी नीति की आलोचना भी की। उन्होंने दक्षिण चीनी समुद्र का मुद्दा तो उठाया लेकिन उन्होंने गलवान घाटी की भारत-चीन मुठभेड़ का जिक्र तक नहीं किया। भारत सरकार अपने राष्ट्रहितों की परवाह करे या दुनिया भर के मुद्दों पर फिजूल की चौधराहट करती फिरे ? चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी भारत आ रहे हैं। चीन और भारत, दोनों की नीतियां यूक्रेन के बारे में लगभग एक-जैसी हैं। भारत कोई अतिवादी रवैया अपनाकर अपना नुकसान क्यों करें? भारत-जापान द्विपक्षीय सहयोग के मामले में दोनों पक्षों का रवैया रचनात्मक रहा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| विश्व गौरैया दिवस पर पटना ज़ू में "अभी मैं जिंदा हूँ गौरैया" थीम पर समारोह का आयोजन Posted: 20 Mar 2022 10:46 PM PDT विश्व गौरैया दिवस पर पटना ज़ू में "अभी मैं जिंदा हूँ गौरैया" थीम पर समारोह का आयोजन
पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बिहार सरकार के पटना ज़ू द्वारा परिसर में आज "विश्व गौरैया दिवस" का आयोजन किया गया। विभाग के अवर प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह, अपर प्रधान मुख्य संरक्षक सह वन मुख्य वन प्राणी प्रतिपालक प्रभात कुमार गुप्ता, चंद्रशेखर, सदस्य बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पटना,अभय कुमार क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक भागलपुर ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री सुधा वर्गीय सी मौजूद रही। मौके पर पीआईबी पटना के सहायक निदेशक और गौरैया संरक्षक संजय कुमार की चर्चित पुस्तक "अभी मैं जिंदा हूं गौरैया" के बहुरंगी संस्करण का लोकार्पण किया गया है। साथ ही गौरैया संरक्षण में महत्वपूर्ण कार्य के लिए संजय कुमार को अवर प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने सम्मानित भी किया। मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान 'पर्यावरण योद्धा और हमारी गौरैया' पटना, बिहार द्वारा संजय कुमार द्वारा खींची गई गौरैया की तस्वीरों पर आधारित 'अभी मैं जिंदा हूँ गौरैया' फ़ोटो प्रदर्शनी,कलमगार द्वारा स्पैरो स्टूडियो, कबाड़ से जुगाड़ और फोटो पर डाक टिकट पर प्रदर्शनी लगाई गई। गौरैया संरक्षण को लेकर अभी मैं जिन्दा हूँ गौरैया प्रदर्शनी स्टॉल पर गौरैया के आवासी संकट यानी घोंसला के विभिन्न प्रारूपों की प्रदर्शनी पर्यावरण योद्धा की ओर से लगाई गई है। प्लाई, गत्ता, बांस, मिट्टी, कद्दू, पेड़ के छाल आदि से निर्मित घोंसलों को प्रदर्शित किया गया। ताकि बच्चे गौरैया संरक्षण से जुड़े और अपने अपने घरों पर गौरैया के आवासीय संकट से उबरने के लिये घोंसला(बॉक्स) लगाये। प्रदर्शनी में गौरैया के आहार क्या क्या है उसे भी रखा गया है। साथ ही तरह तरह का दाना-पानी बॉक्स को भी प्रदर्शित किया गया है। विभिन्न मॉडलों के माध्यम से गौरैया के आवासीय संकट के बारे में बताया गया। प्रदर्शनी ने बच्चों और दर्शकों को अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अवर प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि दुनिया केवल इंसानों के लिए नहीं है बल्कि इसमें जितने भी जीव जंतु है उनका भी हक है उन्हें जीने का अधिकार है। लेकिन इंसान ने अपनी सुविधा के लिए जंगलों को उजाड़ दिया। जीव जंतुओं का बसेरा छीन लिया। उन्होंने कहा कि हम दिवस इसलिए मानते है ताकि जीव जंतुओं के संरक्षण की दिशा में पहल हो। श्री सिंह ने कहा कि गौरैया दिवस भी उसी कड़ी में हैं हमने उसका सब कुछ छीन लिया है वह हमसे दूर चली गई है उसे वापस बुलाने की पहल के लिए आहार आवास आदि की व्यवस्था करनी होगी। चंद्रशेखर, सदस्य बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पटना ने कहा कि आज के शहरी आवासीय संकट में भी गौरैया को हम वापस कैसे बुला सकते हैं ,यह संजय कुमार की पहल और अभी मैं जिन्दा हूँ गौरैया प्रदर्शनी से सीख जा सकता है। मौके पर अपर प्रधान मुख्य संरक्षक सह वन मुख्य वन प्राणी प्रतिपालक प्रभात कुमार गुप्ता ने कहा कि गौरैया के संरक्षण की पहल को और तेज करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से यकीनन गौरैया संरक्षण को दिशा मिलेगी। वही, अभय कुमार, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, भागलपुर ने कहा कि घर आंगन में फुदकने वाली गौरैया का विलुप्त होना इकोसिस्टम के लिए ठीक नहीं है। इसके संरक्षण की पहल होनी ही चाहिए। इस अवसर गौरैया संरक्षण संजय कुमार ने कहा कि गौरैया इंसान की मित्र है और यह हमसे दूर हुई है तो हम ही दोषी हैं। इसलिए इसे वापस बुलाने के लिए पहल हमे ही करनी होगी। दाना पानी घर घर में रखना होगा और आवासीय संकट से उबारने के लिए बॉक्स लगाने होंगे, साथ ही थोड़ा प्यार देना होगा । यकीनन गौरैया घर आंगन में वापस आएगी और अपनी चहचहाहट से खुशियां भर देगी। बाद में थ्री डी हॉल में संजय कुमार द्वारा लिखित और रितेश परमार द्वारा निर्देशित 'गौरैया जिन्दा है' फ़िल्म दिखायी गयी। मौके पर पटना ज़ू के निदेशक सत्यजीत, उपनिदेशक अमित कुमार, पर्यावरण योद्धा के अध्यक्ष निशान्त रंजन, 360 डिग्री के निदेशक अजित झा, सीआरपीएफ के कमांडेंट मुन्ना सिंह,ज़ू के अधिकारी आनंद सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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