दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- इनसे हैं हम पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में संपन्न
- भाजपा की प्रचंड विजय का अर्थ
- लड़की हूँ मैं लड़ सकती हूँ
- आभूषण की दुकान में लूट और हत्या के विरोध में व्यवसायियों ने आज बंद रखा सोनार पट्टी बाजार
- कल के कद्दावर
- 26 मार्च को होगा जीकेसी का महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह
- गोरखपुर और देवरिया की सभी सीटें बीजेपी की झोली में ।
- इतिहास की पाश्चात्य तथा भारतीय परम्परा
- चुनाव और कांग्रेस की दुर्दशा -मनोज मिश्र
- 11 मार्च 2022 शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- नारी
- मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग से भ्रमण कर विभिन्न निर्माणाधीन पथ प्रोजेक्टों का किया निरीक्षण, निर्माण कार्य में तेजी लाने का दिया निर्देश
- महिलायें हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं : राजीव रंजन प्रसाद
- धरती के अंग-अंग
- विश्व अग्निहोत्र दिवस : हिन्दू धर्म की विशिष्टता का प्रमाण - अग्निहोत्र
- समर्थ नारी समर्थ भारत के स्थापन दिवस पर संस्था की ओर से महिलाओ के उत्थान पर संगोष्ठी व होली मिलन समारोह का आयोजन संस्था के कार्यालय पुनाईचक में पुष्पा पाठक की अध्यक्षता और पुष्पा कुमारी के संचालन में सम्पन्न हुआ।
- 10 मार्च 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- निरो सो रहा है
- सामाजिक संस्था "खिलखिलाहट" के अध्यक्ष बने प्रदीप कुमार
- अज्ञात अपराधियों द्वारा सरेआम खुले बाजार में आभूषण की दुकान में घुसकर अंधाधुंध की गई फायरिंग, तीन लोग बुरी तरह घायल
- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 51 स्लम के बच्चियाँ और महिलाओं को सम्मानित किया मानव अधिकार रक्षक
- कन्या भ्रूण हत्या
- भारतीय जन महासभा ने माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम पर 10 सूत्री मांग पत्र सौंपा |
- अष्टग्रहों का मिलन होलाष्टक
- खूबसूरती का मतलब
| इनसे हैं हम पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में संपन्न Posted: 10 Mar 2022 08:48 PM PST इनसे हैं हम पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली में संपन्नभारतीय जन महासभा के द्वारा प्रकाशित पुस्तक इनसे हैं हम का विमोचन मुख्य अतिथि श्री गंगा दीन शर्मा के कर कमलों द्वारा बृहस्पतिवार को पहाड़गंज नई दिल्ली स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर भवन में संपन्न हुआ । संस्था के संरक्षक व मुख्य अतिथि श्री गंगा दीन शर्मा ने कहा कि पुस्तक इनसे हैं हम से देशवासियों को अपने वैसे महापुरुषों एवं क्रांतिकारियों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी जिनको पढ़कर व प्रेरणा लेकर हमारी भावी पीढ़ी अपने पूर्वजों को सही प्रकार से जान सकेगी । समारोह की अध्यक्षता कर रहे भारतीय जन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने कहा कि डॉ अवधेश कुमार अवध के संपादन में पुस्तक ऐसे बलिदानी वीरों को लेकर बनाई गई है जिन्होंने विभिन्न कालों में भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया । कहा कि इनको विगत काल में कतिपय कारणों से भुला दिया गया या इनकी भूमिका कम कर दी गई और पाठ्य पुस्तकों में इनको उचित स्थान नहीं दिया गया । कहा कि इस पुस्तक को अधिक से अधिक प्रचारित-प्रसारित किए जाने की आवश्यकता है । धन्यवाद ज्ञापन तीर्थ पुरोहित कमल राज जजवाडे के द्वारा किया गया । समारोह में श्री पोद्दार के अलावे संस्था के संरक्षक श्री गंगा दीन शर्मा , प्रमोद कुमार खीरवाल , अजय कुमार सिंह , कमलराज जजवाडे , सचेन्द्र कुमार गौतम , अनिल कुमार एवं अन्य अनेक लोग उपस्थित थे । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 10 Mar 2022 08:34 PM PST ![]() भाजपा की प्रचंड विजय का अर्थडॉ. वेदप्रताप वैदिक पांच राज्यों के इन चुनाव-परिणामों का असली अर्थ क्या है और राष्ट्रीय राजनीति पर उनका क्या असर पड़ेगा? पंजाब को छोड़ दें तो चार राज्यों— उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा को अपने प्रमुख विरोधी दलों से दुगुनी सीटें मिली हैं। पंजाब में उसका पिछड़ जाना और आप पार्टी का प्रचंड बहुमत पहले से अपेक्षित ही था। भाजपा की इस विजय का दूरगामी संदेश यह है कि 2024 के अगले आम चुनाव में भाजपा की विजय सुनिश्चित है। इस समय कोई भी अखिल भारतीय पार्टी ऐसी नहीं है कि जो भाजपा या मोदी के नेतृत्व को चुनौती दे सके। लगभग सभी प्रांतों में कांग्रेस की पराजय असाधारण रही है। जिन प्रांतों में आज भी कांग्रेस की सरकारें हैं, वे भी योग्य नेताओं के हाथ में होते हुए भी अब खिसक सकती हैं। इन राज्यों के राज्यपालों और गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के बीच चल रही मुठभेड़ कभी भी खतरनाक रूप धारण कर सकती है। अखिल भारतीय विपक्ष का इतना कमजोर होना भारतीय लोकतंत्र के लिए प्रसन्नता का विषय नहीं हो सकता है। यह असंभव नहीं कि भाजपा की यह प्रचंड विजय सारे विरोधी दलों को इतना डरा दे कि वे 2024 में एक संयुक्त मोर्चा खड़ा कर लें। उ.प्र. में सपा ने छोटी-मोटी पार्टियों से गठबंधन करके अपनी शक्ति ढाई-तीन गुना बढ़ा ली है। इस विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने का साहस, हो सकता है कि, आप पार्टी करने की कोशिश करे। उसने कांग्रेस को पंजाब में पटकनी मारकर चमत्कारी विजय हासिल की है। पंजाब और उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं का हारना देश भर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को अपने राष्ट्रीय नेताओं पर तरस खाने के लिए मजबूर करेगा। इस चुनाव ने यह भी सिद्ध किया है कि जातिवाद इस बार मात खा गया है। सपा ने पिछड़ी जातियों और मुस्लिमों को जोड़ने की जबर्दस्त कोशिश की थी। उसे थोड़ी-बहुत सफलता भी मिली लेकिन उ.प्र. में भाजपा सरकार के लोकहितकारी काम उक्त कोशिश पर भारी पड़ गए। किसान आंदोलन भी इस चुनाव पर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाया। उ.प्र. में अब तीन-चार दशक बाद ऐसा हुआ है कि भाजपा सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पहली बार पूरा किया है और यह ऐसी पहली सरकार है, जो लगातार दूसरी बार भी राज करेगी। भाजपा की यह प्रांतीय विजय उसके राष्ट्रीय मनोबल में चार चांद लगा देगी लेकिन यह मनोबल उसके ऊँट को किसी भी करवट बिठा सकता है। चुनाव-अभियान के दौरान मोदी और योगी की मुख-मुद्रा चिंतास्पद दिखाई पड़ती थी लेकिन यह प्रचंड विजय उनके अहंकार को ऐसा उछाला दे सकती है, जैसा कि 1971 के चुनाव के बाद इंदिरा गांधी को दिया था। भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के मार्गदर्शक मंडल को इस खतरे से सावधान रहने की जरुरत है। भाजपा सरकार चाहे तो अपनी इस शेष अवधि में शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और विदेश नीति के क्षेत्र में ऐसे क्रांतिकारी काम कर सकती है, जो उसे 21 वीं सदी की संसार की सबसे बड़ी ही नहीं, दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पार्टी बना सकती है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 10 Mar 2022 08:21 PM PST
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| आभूषण की दुकान में लूट और हत्या के विरोध में व्यवसायियों ने आज बंद रखा सोनार पट्टी बाजार Posted: 10 Mar 2022 07:57 AM PST आभूषण की दुकान में लूट और हत्या के विरोध में व्यवसायियों ने आज बंद रखा सोनार पट्टी बाजार• व्यवसायियों में जबरदस्त आक्रोश अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग हुई तेज। संवाददाता मुकेश कुमार की खबर कल दिन दहाड़े मढौरा बाजार (सारण) के सोनार पट्टी बाजार में आर के ज्वेलर्स शॉप में अपराधियों ने घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। और आभूषण का बैग लेकर फायरिंग करते हुए भाग निकले जिसमें दुकान के मालिक बृजभूषण सोनी को हाथ में गोली लगी और सेल्समैन अनिल कुमार को सर में गोली लगने से इलाज के क्रम में ही मृत्यु हो गई । घटना के बाद आसपास के सीसी टीवी कैमरा से जो फुटेज मिला है उससे यह स्पष्ट होता है कि घटना को तीन बाइक पर सवार छह अपराधी ने अंजाम दिया। घटना की सूचना पाकर पुलिस पदाधिकारी घटनास्थल पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू किया । सारण एसपी ने बताया कि सीसी टीवी के आधार पर अपराधी की गिरफ्तारी की जाएगी। सभी व्यवसाई आक्रोश में हैं कि जब तक अपराधी को पकड़ा नहीं जाएगा तब तक हम लोग सोनार पट्टी बाजार का एक भी दुकान नहीं खोलेंगे । पूरे बाजार में सन्नाटा छाया हुआ है ।सभी लोग डरे हुए हैं । पूरे बाजार में प्रशासन से सीसी टीवी कैमरा लगाने की मांग व्यवसायियों के द्वारा की जा रही है और पूरे बाजार में सुबह 8बजे से रात 9 बजे तक प्रशासन से सुरक्षा की मांग की जा रही है हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 10 Mar 2022 07:53 AM PST कल के कद्दावर ---:भारतका एक ब्राह्मण. संजय कुमार मिश्र"अणु" ---------------------------------------- कल के कद्दावर- आज हो गये दर-ब-दर। लगी नजर है इस कदर- कि हो गये तितर-बितर।। न काम के न काज के अलाप बस सुराज के न जन से सरोकार कुछ और दावेदार तख्तोताज के बस खुद का विकास हो है घृणित सोच इस कदर।। न देश पर गुमान है, न नीति कुछ विधान है विरोध के लिये विरोध बस इसी पर ध्यान है न लोक लाज बचा सके ये काटकर बडी उमर।। हो निज स्वार्थ मे है अंधा, थे पकडे कमजोर कंधा, अनाप-सनाप जगहो पर- थे मार रहे पंजा जन भावनाओं के विपरीत- हो दुष्परिणाम से बेखबर।। न ममता चली न माया, ऐसा जनमत बौराया, जिसे वे कहते रहे निकम्मा फिर उसीको जितवाया, सब एक साथ उखाड़ गये- ऐसा ही कुछ उठा लहर।। ये मेरा देश है बदल रहा, देख दुश्मन का मन दहल रहा ये जन्म का राजकुमार है जो है राजपथ पर टहल रहा, योगी बने राजयोगी- जनता कही है एक स्वर।। ---------------------------------------- वलिदाद,अरवल(बिहार)८०४४०२हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| 26 मार्च को होगा जीकेसी का महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह Posted: 10 Mar 2022 07:49 AM PST 26 मार्च को होगा जीकेसी का महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोहजितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना (नयी दिल्ली), 10 मार्च :: जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) ने महान कवियित्री और सुविख्यात लेखिका महादेवी वर्मा की जयंती के अवसर पर 26 मार्च को "महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह" का आयोजन नयी दिल्ली में करेगा। महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान की तैयारी को लेकर ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद की अध्यक्षता में द फॉरेन कोरेस्पोंडेंटस क्लब ऑफ साउथ एशिया में बैठक हुई। बैठक में आयोजन समिति का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष ई. सुनील श्रीवास्तव करेंगे। उक्त अवसर पर ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि 26 मार्च को गांधी स्मृति संस्थान नई दिल्ली में महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस साल भी यह सम्मान पिछले साल की तरह फिल्म, पत्रकारिता, कला-संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र के लिए दिया जाएगा। इसके लिए जीकेसी ने इन क्षेत्र के दिग्गजों का नामांकन आमंत्रित किया था, जिसमें से जानेमाने विभूतियों के नाम को जूरी ने अपनी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। महादेवी वर्मा एक मशूहर कवियित्री तो थी ही, इसके साथ ही वे एक महान समाज सुधारक भी थीं। श्री प्रसाद ने कहा कि 27 मार्च को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल वर्किंग कमिटी की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि ये दोनों कार्यक्रम दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित आयोजन समिति करेगी। उन्होंने कहा कि 26 मार्च को आयोजित महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान के लिए आमंत्रित मुख्य अथिति सहित कार्यक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी जल्द ही मीडिया को दी जाएगी। जीकेसी की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने बताया कि महादेवी वर्मा एक महान कवयित्री होने के साथ-साथ हिंदी साहित्य जगत में एक बेहतरीन गद्द लेखिका के रूप में भी जानी जाती हैं। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें 'हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती' कहा था। उन्हें आधुनिक मीरा भी कहा गया है क्योंकि इनकी कविताओं में से एक प्रेमी से दूर होने का कष्ट एवं इसके विरह और पीड़ा को बेहद भावनात्मक रूप से वर्णित किया गया है। उक्त अवसर पर जीकेसी की प्रबंध न्यासी -सह- दिल्ली प्रदेश प्रभारी रागिनी रंजन, अभय सिन्हा, सुभ्रांशु शेखर, नितिन माथुर, सर्वेश श्रीवास्तव सहित जीकेसी के अन्य सम्मानित सदस्य मौजूद थे। उक्त जानकारी दिल्ली प्रदेश के मीडिया अध्यक्ष प्रजेश शंकर ने दी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गोरखपुर और देवरिया की सभी सीटें बीजेपी की झोली में । Posted: 10 Mar 2022 07:43 AM PST गोरखपुर और देवरिया की सभी सीटें बीजेपी की झोली में ।• ऐसा पहली बार हुआ है कि सत्तारूढ़ पार्टी की पुनः सत्ता में वापसी हुई है वेद प्रकाश तिवारी, ब्यूरो देवरिया । उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव की मतगणना आज 10 मार्च 2022 को हो रही है । उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ रही भारतीय जनता पार्टी की वापसी हो गई है। चार सौ तीन विधानसभा सीटों में 267 सीटों पर बीजेपी अपनी बढ़त बनाए हुए है। गोरखपुर, देवरिया जिलों में बीजेपी ने सभी सीटों पर अपनी जीत दर्ज की है । गोरखपुर विधानसभा सीट से योगी आदित्यनाथ ने 102000 वोटों से अपनी विजय दर्ज की साथ ही गोरखपुर की सभी नौ सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं । देवरिया जिले की सभी 7 सीटें बीजेपी के पक्ष में गई है जिसमें भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र से सभा कुंवर कुशवाहा विजई हुए हैं । सलेमपुर से विजय लक्ष्मी गौतम ,बरहज से दीपक मिश्र उर्फ शाका , रुद्रपुर से जयप्रकाश निषाद, रामपुर कारखाना से सुरेंद्र चौरसिया ,पथरदेवा से सूर्य प्रताप शाही और देवरिया सदर सीट से शलभ मणि त्रिपाठी विजई घोषित किए गए हैं । पिछले दो बार से भाटपार रानी विधानसभा क्षेत्र से लगातार डॉ आशुतोष उपाध्याय समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजई होते रहे हैं । इस बार उन्हें मात देते हुए भाजपा प्रत्याशी सभा कुंवर कुशवाहा ने 18088 मतों से जीत दर्ज की । उत्तर प्रदेश चुनाव में योगी आदित्यनाथ सबसे पसंदीदा चेहरा रहे । ओपिनियन पोल्स और जनता की सोशल मीडिया पर लगातार आ रहे उनके पोस्ट से यह अनुमान लग गया था कि उत्तर प्रदेश में योगी जी की जनकल्याणकारी योजनाएं , महिलाओं की सुरक्षा, कानून व्यवस्था, गुंडों माफियाओं के खिलाफ कड़े एक्शन, काशी वाराणसी अयोध्या में किए जय अभूतपूर्व कार्य इस जीत के लिए जिम्मेदार हैं हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| इतिहास की पाश्चात्य तथा भारतीय परम्परा Posted: 10 Mar 2022 07:12 AM PST इतिहास की पाश्चात्य तथा भारतीय परम्परासंकलन अश्विनी कुमार तिवारी१. पाश्चात्य और भारतीय इतिहास-पाश्चात्य इतिहास को हिस्ट्री कहते हैं, जिसका अर्थ है, उसकी कहानी (History = His story)। इसमें स्वयं तथा अपने देश की महानता दिखाने के लिये कहानियां गढ़ी जाती हैं तथा दूसरे देशों का इतिहास नष्ट कर उन्हें निन्दित किया जाता है। भारत में जैसी घटना हुई उनका क्रमबद्ध वर्णन इतिहास है। इतिहास = इति+ ह + आस = ऐसा ही हुआ था। पाश्चात्य इतिहास के उदाहरण-(१) खाल्डिया के बेरोसस ने बेबीलोन के इतिहास में लिखा कि ग्रीक लोग (हेरोडोटस आदि) इतिहास नहीं जानते तथा केवल अपनी प्रशंसा के लिये कहानियां लिखते हैं। असीरिया के बारे में भी लिखा कि नबोनासर (लवणासुर) ने अपने पूर्व के सभी अवशेष नष्ट कर दिये थे जिससे लोग उसी को प्रथम महान् राजा समझें। Berosus derided the "Greek historians" who had so distorted the history of his country. He knew, for example, that it was not Semiramis who founded the city of Babylon, but he was himself the prisoner of his own environment and cannot have known more about the history of his land than was known in Babylonia itself in the 4th century BC. (1/5) Nabonasaros collected together and destroyed the records of the kings before him in order that the list of the Chaldaean kings might begin with him. (२) सिकन्दर ने अलेक्जेण्ड्रिया तथा भारत के तक्षशिला पर भी इसी लिये आक्रमण किया कि उन केन्द्रों का इतिहास नष्ट किया जा सके जहां ग्रीस के लोग पढ़ने आते थे। दूसरा लाभ यह था कि वहां सेना से मुकाबला नहीं करना पड़ता। पाकिस्तान में भी आतंकवादी पेशावर का स्कूल ही आक्रमण के लिये चुनते हैं। Hipparchus, Euclid and Ptolemy had gone to Alexandria for study which is well recorded in their books. No Indian, Egyptian or Sumerian has written that they had gone to Greece. Father of Greek science Pythagoras had studied in India as claimed by Apollonius- (३) Al-Biruni-Chronology of Ancient Nations, page 44- However, enemies are always eager to revile the patronage of people, to detract from their reputation, and to attack their deeds and merits, in same way as friends and partisans are eager to embellish that which is ugly, to cover up the weak parts, to proclaim publicly that which is noble, and to refer everything to great virtues, as the poet describes them in these words-"The eye of benevolence is blind to every fault, (४) भारत में अंग्रेजों का एकमात्र उद्देश्य था यहां के इतिहास तथा वैदिक सभ्यता को नष्ठ करना जिससे इसाई धर्म का प्रचार हो तथा अंग्रेजी शासन स्थायी हो। Sir William Jones, 1784 (from Asiatic Researches Vol. 1. Published 1979, pages 234-235. First published 1788) – (५) मुस्लिम इतिहासकार-ईरान में मुस्लिम शासन होने के बाद वहां के मुस्लिम इतिहासकारों ने अपना या भारत का प्रायः निष्पक्ष इतिहास लिखा है। मुजमा-इ-तवारिख (१२वीं सदी) में प्राचीन संस्कृत पुस्तक के आधार पर लिखा है कि तक्षशिला विश्वविद्यालय दुर्योधन ने स्थापित किया था जहां पूरे भारत से ३०,००० विद्वानों को एकत्र किया गया था। सिन्ध पर अधिकार के बाद वहां की सभी पुस्तकें नष्ट कर दीं। बाद में बची पुस्तकों तथा कहानियों के आधार पर अल कुफी द्वारा चाचनामा लिखा गया। मुहम्मद बिन कासिम का अन्य इतिहासकार था अल-बिदौरी जिसने फतह-उल्-बुल्दान लिखी। इसमें हत्या लूटपाट, स्त्रियों का अपहरण तथा गुलामों की बिक्री को इस्लाम के गौरव रूप में वर्णन किया गया है। महमूद गजनवी के इतिहासकार अल-उत्बी ने असीमित लूट, मन्दिरों का ध्वंस, ५० लाख हत्याओं तथा उतने ही स्त्रियों के अपहरण और बिक्री के गौरव का वर्णन किया है। उस काल की पुस्तकें थी-अल उत्बी का तारीख-इ-यामिनी तथा ख्वाजा बैहागी का तारीख-इ-सुबुक्तगीन, हसन निज़ामी का ताज-उल-मासीर। अल बिरुनि ने भी भारत का तथा प्राचीन देशों की कालगणना पर पुस्तकें लिखी हैं जिनमें ब्राह्मणों की निन्दा है तथा लिखा है कि भारत की पूरी सम्पत्ति को नष्ट कर दिया गया। उसके बाद मुख्य पुस्तकें थीं (१) मिन्हाज उज़-सिराज का तबकत-इ-नासिरी, (२) जियाउद्दीन बरनी का तारीख-ए-फिरोजशाही, (३) अब्दुल्ला वस्साफ का तारीख-इ-वस्साफ, (४) अमीर खुसरो का तारीख-इ-अलाई और नूर-सिफर, (५) फरिश्ता तथा सिराज के सिरात-इ-फिरोजशाही, (६) तिमूर या तैमूर लंग की जीवनी-मुल्फुज़ात-ई-तिमूरी, (७) बाबरनामा, (८) अब्बास खान शेरवानी का तारीख-इ-फरिश्ता, (९) अब्बास खान शेरवानी का तारीख-ई-शेरशाही, (१०) हुसैनशाही द्वारा अहमदशाह अब्दाली की डायरी, (११) अबुल फजल का अकबरनामा तथा फरिश्ता द्वारा १००० से १५२६ तक ८ करोड़ हिन्दुओं की हत्या तथा ३ करोड़ को गुलाम बनाने का इतिहास, (१२) औरंगजेब काल की मासीर-इ-आलमगीरी, कलीमात-इ-अहमदी, खफी खान की पुस्तक, औरंगजेबनामा। इन सभी में कुरान के अनुसार काफिर हिन्दुओं की हत्या, लूट, मन्दिरों विश्वविद्यालयों का ध्वंस, अपहरण का गौरवपूर्ण वर्णन है। ब्रिटिश शासन आने के बाद उनके दया तथा अच्छे शासन की प्रशंसा दिखाने में मुस्लिम शासक लगे। इब्न बतूता की डायरी का अनुवाद दिल्ली के वीरेन्द्र गुप्त ने किया था। पर इरफान हबीब ने कहा कि केवल मुस्लिम ही अरबी पुस्तक का ठीक अनुवाद कर सकता है और अपने नाम से १५ लाख रुपये का अनुदान लिया। प्रेस में प्रूफ रीडिंग करने वाले ने बताया कि उसमें कुतुब मीनार को ईसा पूर्व का निर्माण बताया है तो पूरी पुस्तक जलवा दी पर पैसा नहीं वापस किया जिस पर महालेखा परीक्षक ने २००१ में आदेश दिया था। बाद में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा संक्षिप्त रूप प्रकाशित हुआ। मुस्लिम इतिहासकारों की पुस्तकें ईरान सरकार के वेबसाईट पर पूरी तरह उपलब्ध हैं। भारत में उनको या तो नष्ट कर दिया है या उसमें हिन्दू या काफिर शब्दों को हटा कर मुस्लिम राजाओं को उदार तथा कल्याणकारी बनाने का अभियान चलाया है। कुछ मुख्य पुस्तकों का अंग्रेज लेखकों द्वारा अनुवाद उपलब्ध हैं। २. भारतीय इतिहास-सभी प्रसिद्ध ग्रन्थों में निष्पक्षता, सत्य पर जोर दिया गया है। (१) रामायण को प्रथम इतिहास ग्रन्थ मानते हैं तथा सत्य सनातन प्रभाव होने के कारण आदि काव्य कहते हैं। वाल्मीकि रामायण - बालकाण्ड- सर्ग-२- मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीं समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥१४॥ आजगाम ततो ब्रह्मा लोककर्ता स्वयम्प्रभुः। चतुर्मुखो महातेजा द्रष्टुं तं मुनिपुङ्गवम्॥२२॥ तमुवाच ततो ब्रह्मा प्रहसन्मुनिपुङ्गवम्। श्लोक एव त्वया बद्धो नात्र कार्या विचारणा॥२९॥ न ते वागनृता काव्ये का चिदत्र भविष्यति। कुरु राम कथां पुण्यां श्लोकबद्धां मनोरमाम्॥३४॥ छन्द पहले से थे, किन्तु यहां एक मार्मिक घटना को व्यापक बना कर राम कथा द्वारा प्रचारित किया गया। घटना (वाक़या) का वर्णन वाक्य है, उसे शाश्वत रूप देना काव्य है। अन्तिम श्लोक में स्वयं ब्रह्मा द्वारा कहा गया कि इस काव्य की कोई बात असत्य नहीं होगी। (२) महाभारत अन्य प्रसिद्ध ग्रन्थ तथा पञ्चम वेद रूप में प्रसिद्ध है। इसके भी प्रथम अध्याय में इसे सत्य, सनातन, पवित्र कहा है। महाभारत, आदि पर्व, अध्याय १- भारताध्ययनं पुण्यमपि पादमधीयतः। श्रद्दधानस्य पूयन्ते सर्वपापान्यशेषतः॥२५४॥ भगवान् वासुदेवश्च कीर्त्यतेऽत्र सनातनः। स हि सत्यमृतं चैव पवित्रं पुण्यमेव च॥२५६॥ नवनीतं यथा दध्नो द्विपदां ब्राह्मणो यथा॥२६४॥आरण्यकं च वेदेभ्य ओषधिभ्योऽमृतं यथा। ह्रदानामुदधिः श्रेष्ठो गौर्वरिष्ठा चतुष्पदाम्॥२६५॥ यथैतानीतिहासानां तथा भारतमुच्यते। इतिहास पुराणाभ्यां वेदं समुपबृंहयेत्॥२६७॥ बिभेत्यल्पश्रुताद् वेदो मामयं प्रहरिष्यति। कार्ष्ण्यं वेदमिमं विद्वान् श्रावयित्वार्थमश्नुते॥२६८॥ एकतश्चतुरो वेदान् भारतं चैतदेकतः।२७१॥ पुरा किल सुरैः सर्वैः समेत्य तुलया धृतम्। चतुर्भ्यः स रहस्येभ्यो वेदेभ्यो ह्यधिकं यदा॥२७२॥ तदा प्रभृति लोकेऽस्मिन् महाभारतमुच्यते। महत्त्वे च गुरुत्वे च ध्रियमाणं यतोऽधिकम्॥२७३॥ (३) कल्हण कृत राजतरङ्गिणी (११४९ ई.)-इसमें प्राचीन इतिहास ग्रन्थों का उल्लेख तथा उनके निष्पक्ष तथा सत्य सङ्कलन पर जोर दिया है। प्रथम तरङ्ग के आरम्भ में इनका उल्लेख है- श्लाघ्यः स एव गुणवान् राग-द्वेष बहिष्कृता। भूतार्थ कथने यस्य स्थेयस्येव सरस्वती॥७॥ कुछ पूर्व ग्रन्थों तथा स्रोतों के उदाहरण दिये हैं-(१) सुव्रत द्वारा प्राचीन ग्रन्थों का संक्षेप, (२) क्षेमेन्द्र कृत नृपावली, (३) राजकथा विषयक अन्य ११ ग्रन्थ, (४) नीलमुनि का नीलमत पुराण, (५) प्राचीन राजाओं द्वारा निर्मित देव मन्दिरों, नगरों, ताम्रपत्रों, आज्ञा पत्र, प्रशस्ति पत्र, (६) गोनन्द आदि प्राचीन ५२ राजाओं का इतिहास, (७) हेलराज का १२,००० श्लोकों में पार्थिवावली, (८) पूर्व मिहिर द्वारा अशोक के पूर्वज ८ राजाओं का वर्णन। इसके अतिरिक्त जोनराज तथा शुक की भी राजतरङ्गिणी उपलब्ध हैं। श्रीवर रचित जैन राजतरङ्गिणी भी है। ३. पुराण परम्परा- (१) इतिहास-पुराण-घटनाओं का कालक्रम में वर्णन इतिहास है। इतिहास = इति + ह + आस = ऐसा ही हुआ था। घटना क्रम के अतिरिक्त उनका विज्ञान समझने के लिये पुराण है। दीर्घकाल के सृष्टि निर्माण या लघुकाल के वंश चरित, दोनों तभी लिखे जा सकते हैं जब समय समय पर उनका निरीक्षण और वर्णन हो। विज्ञान समझने के लिये भी एक क्रिया तथा उसके कुछ समय बाद परिवर्तन का अध्ययन जरूरी है। अतः विज्ञान का आधार वेद तभी बन सकता है जब कि काल-क्रम से निसर्ग का निरीक्षण हो। निसर्ग से आगत होने के कारण ही वेद निगम है। मनुष्य ब्रह्मा को चिन्ता हुई-सृष्टि का आरम्भ कैसे करें। इसके लिये पुराणों का स्मरण किया। इससे पता चला कि पहले कैसे सृष्टि हुई थी। उसके अनुसार पुनः वैसे ही सृष्टि हुई। निर्माण की विधि समझना तन्त्र का विषय है। मत्स्य पुराण (५३/२-१०)- इदमेव पुराणेषु पुराण पुरुषस्तदा। (२) पुराणं सर्व शास्त्राणां प्रथमं ब्रह्मणा स्मृतम्। अनन्तरं च वक्त्रेभ्यो वेदास्तस्य विनिर्गताः॥३॥ पुराणमेकमेवासीत् तदा कल्पान्तरे ऽनघ। त्रिवर्ग साधनं पुण्यं शतकोटि प्रविस्तरम्॥४॥ परिवर्तनशील विश्व का वर्णन पुराण है। यदि वेद या पुराण एक ही समय के हों तो यह पता नहीं चल सकता कि उसके बाद अब तक कितना समय बीता। इसकी परिभाषायें हैं- पुरा परम्परां वक्ति पुराणं तेन तत् स्मृतम् (पद्म पुराण, १/२/५३) यस्यात् पुरा ह्यनन्तीदं पुराणं तेन चोच्यते (वायु पुराण, उत्तर, ४१/५५) यस्मात् पुरा ह्यभूच्चैतत् पुराणं तेन तत् स्मृतम् (ब्रह्म पुराण, १/१/१७३) पुराणं कस्मात्। पुरा नवं भवति (निरुक्त, ३/१९) वेद के लिये पुराणों की जरूरत थी अतः वेद में भी पुराणों का उल्लेख है- अथर्व (११/७/२५)-ऋच सामानि छन्दांसि पुराण यजुषा सह। उच्छिष्टाज्जज्ञिरे सर्वे दिवि देवा दिविश्रिता। (२) २८ व्यासों द्वारा वेद पुराण संकलन- २८ युगों में २८ व्यास हुए थे जिनका ब्रह्माण्ड (१/२/३५), वायु (९८/७१-९१), कूर्म (१/५२), विष्णु (३/३), लिङ्ग (१/७/११, १/२४), शिव (३/४), देवीभागवत (१/२, ३) आदि पुराणों में वर्णन है। हर युग में, ब्रह्मा से बादरायण तक २८ व्यासों ने प्रायः ४ लाख श्लोकों में पुराण संहिता लिखी। देवीभागवत पुराण (१/३)-द्वापरे द्वापरे विष्णुर्व्यास रूपेण सर्वदा। वेदमेकं स बहुधा कुरुते हित काम्यया॥१९॥ अल्पायुषोऽल्पबुद्धींश्च विप्राञ्ज्ञात्वा कलावथ। पुराणसंहितां पुण्यां कुरुतेऽसौ युगे युगे॥२०॥ (यहां वेद और पुराण को सम्बन्धित या पूरक कहा है।) स्त्री शूद्र द्विजबन्धूनां न वेदश्रवणं मतम्। तेषामेव हितार्थाय पुराणानि कृतानि च॥२१॥ अतीतास्तु तथा व्यासाः सप्तविंशतिरेव च। पुराणसंहितास्तैस्तु कथितास्तु युगे युगे॥२४॥ ऋषयः उचुः-ब्रूहि सूत महाभाग व्यासाः पूर्वयुगोद्भवाः। वक्तारस्तु पुराणानां द्वापरे द्वापरे युगे॥२५॥ सूत उवाच-द्वापरे प्रथमे व्यस्ताः स्वयं वेदाः (पुराण के बाद) स्वयंभुवा। प्रजापति (कश्यप) द्वितीये तु द्वापरे व्यास कार्यकृत्॥२६॥ तृतीये चोशना (उशना = शुक्र, कवि) व्यासश्चतुर्थे तु बृहस्पतिः। पञ्चमे सविता (विवस्वान्) व्यासः षष्ठे मृत्यु (वैवस्वत यम) स्तथापरे॥२७॥ मघवा ( १४ इन्द्रों में वैकुण्ठ इन्द्र) सप्तमे प्राप्ते वसिष्ठस्त्वष्टमे स्मृतः। सारस्वतस्तु (वाणी-हिरण्यगर्भ के पुत्र अपान्तरतमा) नवमे त्रिधामा दशमे तथा॥२८॥ एकादशेऽथ त्रिवृषो भरद्वाजस्ततः परम्। त्रयोदशे चान्तरिक्षो धर्मश्चापि चतुर्दशे॥२९॥ त्रय्यारुणिः पञ्चदशे षोड़शे तु धनञ्जयः। मेधातिथिः सप्तदशे व्रती ह्यष्टादशे तथा॥३०॥ अत्रिरेकोनविंशेऽथ गौतमस्तु ततः परम्। उत्तमश्चैकविंशेऽथ हर्यात्मा परिकीर्तितः॥३१॥ वेनो वाजश्रवश्चैव सोमोऽमुष्यायणस्तथा। तृणविन्दुस्तथा व्यासो भार्गवस्तु ततः परम्॥३२॥ ततः शक्तिर्जातूकर्ण्यः कृष्णद्वैपायनस्ततः। अष्टाविंशति संख्येयं कथिता या मया श्रुता॥३३॥ (३) बादरायण व्यास द्वारा विभाजन- कृष्ण द्वैपायन (बदरी वन में रहने के कारण बादरायण) व्यास ने पुराणों को १८ भागों में बांटा- मत्स्यपुराण, अध्याय ५५- व्यासरूपमहं कृत्वा संहरामि युगे युगे। चतुर्लक्ष प्रमाणेन द्वापरे द्वापरे सदा॥९॥ तथाष्टादशधा कृत्वा भूलोकेऽस्मिन् प्रकाश्यते। (१०) नामतस्तानि वक्ष्यामि शृणुध्वं मुनिसत्तमाः। (१२) देवीभागवत पुराण (१/३/२) के अनुसार इनकी सूची है- मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं व-चतुष्टयम्। अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि पृथक् पृथक्॥ म से २ पुराण-मत्स्य, मार्कण्डेय भ से २-भागवत, भविष्य ब्र से ३-ब्रह्म, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त्त। व से ४-विष्णु, वामन, वाराह, वायु। अ-अग्नि, ना-नारद, प-पद्म, लिं-लिङ्ग, ग-गरुड़, कू-कूर्म, स्का-स्कन्द। १८ पुराणों का क्रम सृष्टि निर्माण क्रम के अनुसार है। मधुसूदन ओझा ने इनका वर्णन जगद्गुरुवैभवम्, अध्याय २ तथा पुराण निर्माणाधिकरणम् में किया है। पुराणों का यह क्रम बृहन्नारदीय पुराण, अध्याय ९२-१०९ में दिया है। (४) लोमहर्षण परम्परा-लोमहर्षण के ८ शिष्यों में काश्यप, सावर्णि, शांशम्पायन ने संहिताओं का संकलन किया। विष्णु पुराण (३/४/१८)-काश्यपः संहिता कर्ता सावर्णिः शांशपायनः। लौमहर्षणिका चान्या तिसृणां मूलसंहिता॥ वायु पुराण (६१/५७) ब्रह्माण्ड पुराण (२/३/६५-६६)-त्रिभिस्तत्र कृतास्तिस्रः संहिता पुनरेव हि॥।५७॥ काश्यपः संहिता कर्ता सावर्णिः शांशपायनः। मामिका च चतुर्थी स्यात् सा चैषा पूर्व संहिता॥५८॥ (५) शौनक की महाशाला (विश्वविद्यालय) में महाभारत युद्ध के बाद ८८,००० विद्वानों ने पुराणों का संकलन किया। इसके अध्यक्ष उग्रश्रवा थे। यह परीक्षित जन्म के बाद १००० वर्षों तक (२१३८ ई.पू. तक) चलता रहा। इसे नैमिषारण्य में शौनक का १००० वर्ष का सत्र कहा गया है। शौनको ह वै महाशालोऽङ्गिरसं विधिवदुपसन्नः पप्रच्छ ॥३॥-मुण्डक उपनिषद् (१/१/२-३) भागवत पुराण (१/१/४)-नैमिषेऽनिमिषक्षेत्रे ऋषयः शौनकादयः। सत्रं स्वर्गाय लोकाय सहस्रसममासत॥ पद्मपुराण, सृष्टिखण्ड (५) अध्याय १- सूतमेकान्तमासीनं व्यासशिष्यो महामतिः। लोमहर्षणनामा वै उग्रश्रवसमाह तत्॥२॥ पुराणं चेतिहासं वाधर्मानथ पृथग्विधान्(१५) अथ तेषां पुराणस्य शुश्रूषा समपद्यत (१७) तस्मिन् सत्रे गृहपत्ः सर्वशास्त्र विशारदः(१७) शौनको नाम मेधावी विज्ञानारण्यके गुरुः (१८) पद्मपुराण, उत्तरखण्ड (१९६/७२)- कलौ सहस्रमब्दानामधुना प्रगतं द्विज। परीक्षितो जन्मकालात् समाप्तिं नीयतां मखः॥ (६) उज्जैन के सम्वत् प्रवर्त्तक सम्राट् विक्रमादित्य (८२ ई.पू.-१९ ई. तक) काल में भी बेताल भट्ट की अध्यक्षता में पुराणों का वैसे ही सम्पादन हुआ जैसा पहले शौनक की महाशाला में हुआ था। अतः उसके ज्योतिषीय विवरण उसी काल से मिलते हैं। पुराण संकलन के स्थानों को भी विशाला (विशेष शाला) कहा गया जैसे शौनक संस्था को महाशाला कहते थे। एक तो उज्जैन के पास ही था, जिसाके कारण उज्जैन को विशाला भी कहा गया है। एक उत्तर बिहार के वैशाली की राजधानी थी। बद्रीनाथ में भी शंकराचार्य द्वारा ब्रह्म सूत्र की व्याख्या होने के कारण उसे बद्रीविशाल कहते हैं। भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व ४, अध्याय १- एवं द्वापरसन्ध्याया अन्ते सूतेन वर्णितम्। सूर्यचन्द्रान्वयाख्यानं तन्मया कथितम् तव॥१॥ विशालायां पुनर्गत्वा वैतालेन विनिर्मितम्। कथयिष्यति सूतस्तमितिहाससमुच्चयम्॥२॥ तन्मया कथितं सर्वं हृषीकोत्तम पुण्यदम्। पुनर्विक्रमभूपेन भविष्यति समाह्वयः॥३॥ नैमिषारण्यमासाद्य श्रावयिष्यति वै कथाम्। पुनरुक्तानि यान्येव पुराणाष्टादशानि वै।।४॥ तानि चोपपुराणानि भविष्यन्ति कलौ युगे। तेषां चोपपुराणानां द्वादशाध्यायमुत्तमम्॥५॥ सारभूतश्च कथित इतिहाससमुच्चयः। यस्ते मया च कथितो हृषीकोत्तम ते मुदा॥६॥ तत्कथां भगवान् सूतो नैमिषारण्यमास्थितः। अष्टाशीति सहस्राणि श्रावयिष्यति वै मुनीन्॥८॥ (७) विदेशी विकृतियां- अकबर के समय में भी भविष्य पुराण में कई अध्याय जोड़े गये जिनमें कई में अकबर को पृथ्वीराज चौहान का अवतार कहा गया है। उसने विक्रमादित्य की नकल कर नवरत्न भी बनाये तथा उसके लगान व्यवस्था को भी आरम्भ किया। शेरशाह आदि मुगलों को विदेशी रूप में विरोध कर रहे थे, अतः अपने को भारतीय दिखाने के लिये किया। ब्रिटिश काल में एरिक पार्जिटर तथा विलियम जोन्स ने भी कुछ हेराफेरी की जिससे उनका कालक्रम बदला जा सके। भविष्य पुराण में कुछ अध्याय जोड़ कर कहा कि अंग्रेज हनुमान् के वंशज हैं जिनको भगवान् राम ने आशीर्वाद दिया था कि तुम्हारे वंशज भारत पर राज्य करेंगें। हनुमान् के वंशज होने के कारण वे मनुष्य को हुमैन (Human) कहते हैं। हनुमान मरुत् के पुत्र हैं तथा इंगलैण्ड मरुत् कोण दिशा में है। पुराणों में ज्योतिष तथा भूगोल सम्बन्धी विवरण पुराने हैं। महाभारत के बाद उनका संकलन करनेवाले माप की भिन्न इकाइयां तथा आकाश के क्षेत्रों के पृथ्वी जैसे नाम समझ नहीँ पाये। पर उसमें कोई उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन नहीँ हैं। उन्हीं मूल मापों पर ज्योतिष की सभी पुस्तकें आधारित हैं। ज्यादा पुरानी घटनाएं क्रमशः संक्षिप्त होती गयी जैसा इतिहास लेखन में होता है तथा वायु पुराण आदि में स्पष्ट उल्लेख भी है। उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन अकबर काल में तथा पार्जिटर आदि द्वारा हुआ। शौनक या विक्रमादित्य को इससे कोई लाभ नहीं था। १७३० में बलदेव विद्याभूषण ने ब्रह्मसूत्र के गोविन्द भाष्य में प्रथम सूत्र में भागवत पुराण की सहायता का आधार लिखा था-उक्तं च गारुडे- अर्थोऽयं ब्रह्मसूत्राणां भारतार्थ विनिर्णयः। गायत्री भाष्य रूपोऽसौ वेदार्थ परिबृंहणः।। १७८० के बाद के गरुड पुराण के किसी संस्करण में यह श्लोक उपलब्ध नहीँ है। ४. स्रोत ग्रन्थों में इतिहास-(१) वेद संहिता में इतिहास- वेद मन्त्रों के ३ प्रकार के अर्थ हैं-आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक। आधिदैविक में सृष्टि का इतिहास तथा आधिभौतिक में मनुष्य समाज के इतिहास हैं। उदाहरण- (१) नासदीय सूक्त (ऋग्वेद, १०/१२९/१-७)- नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत्। किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद् गहनं गभीतम्॥१॥ को अद्धा वेद क इह प्रवोचत् कुत आजाता कुत इयं विसृष्टिः। अर्वाग् देवा अस्य विसर्जनेनाथा को वेद यत आबभूव॥६॥ सृष्टि के आरम्भ में न सत् था न, असत्, उस समय देव भी नहीं हुये थे, अतः कोई भी निश्चित रूप से नहीं बता सकता कि सृष्टि, विसृष्टि (पुराण का सर्ग, प्रतिसर्ग) कैसे हुई, इसका स्रोत या बताने वाला, आवरण आदि क्या था? (२) या ओषधीः पूर्वा जाता देवेभ्यस्त्रियुगं पुरा (ऋक्, १०/९७/१, वाज. सं. १२/७५, काण्व सं. १३/१६, शतपथ ब्राह्मण, ७/२/४/२६) = जो ओषधियां ३ युग पूर्व देवों द्वारा हुयी थीं (यहां ऐतिहासिक युग है) (३) दीर्घतमा मामतेयो जुजुवान् दशमे युगे। (ऋक्, १/१५८/६)-यहां दशम युग व्यक्ति के जीवन काल का सबसे छोटा युग है-प्रति युग ५ वर्ष का। १० युग = ५० वर्ष होने पर दीर्घतमा ने ज्योतिषीय तथ्य खोजे। (४) बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं यत् प्रैरत् नामधेयं दधानाः (ऋक्, १०/७१/१) गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तम्। ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आनः शूण्वन्नृतिभिः सीद सादनम्॥१॥ बृहस्पते यो नो अभि ह्वरो दधे स्वा तं मर्मतुं दुच्छुना हरस्वती॥६॥ (ऋक्, २/२३) = बृहस्पति ने सबसे पहले वस्तुओं के नाम दिये। उसके बाद ब्रह्मा ने लिपि के लिये गणपति को अधिकृत किया और उनको ज्येष्ठराज कहा। (५) पुरुष सूक्त-यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नाकं महिमानः सचन्तः यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥१६॥ (ऋक्, १/१६४/५०, १०/९०/१६, अथर्व, ७/५/१, वाज. सं. ३१/१६, तैत्तिरीय सं. ३/५/११/५, मैत्रायणी सं. १४८/१६, २१८/२, काण्व सं. ८/२) देव युग के पहले साध्य गण थे। वे एक यज्ञ से अन्य यज्ञ (उत्पादन साधनों का समन्वय) कर उन्नति के शिखर पर पहुंचे और देव बने। (६) इन्द्र द्वारा असुरों का संहार से युद्धभूमि (वैल, महावैल) श्मशान भूमि (अर्मक) बन गयी जिसे आजकल आर्मीनिया कहते हैं। उनके हाथी को वटूरि कहा गया है जो आज भी बर्मा की इरावती नदी के पूर्व प्रचलित है (इन्द्र पूर्व के लोकपाल थे तथा इरावती क्षेत्र का ऐरावत उनका हाथी था। (ब्रह्माण्ड पुराण, २/३/७/३२६-३२७, वायु पुराण, ३७/२५) उभे पुनानि रोदसी ऋतेन द्रुहो दहामि सं महीरिन्द्राः। अभिव्लग्य यत्र हता अमित्रा वैलस्थानं परि तृळहा अशेरन्॥१॥ अभिव्लग्या चिदद्रिवः शीर्षा यातुमतीनाम्। छिन्धि वटुरिणा पदा महावटूरिणा पदा॥२॥ अवासां मघवञ्जहि शर्धो यातुमतीनाम्। वैलस्थानके अर्मके महावैलस्थे अर्मके॥३॥ (ऋक्, १/१३३) (७) प्रथम जैन तीर्थङ्कर ऋषभदेव जी ११वें व्यास थे। द्वितीय जल प्रलय के बाद सभ्यता का आरम्भ उसी प्रकार किया जैसा प्रथम जल प्रलय के बाद स्वायम्भुव मनु ने किया थ। अतः उनको स्वायम्भुव का वंशज कहा है। (भागवत पुराण, अध्याय ५/१-४) उनके सूक्त में अरिहन्त, कृषि विकास तथा लेखन (ब्राह्मी लिपि) का उल्लेख है जिनको जैन शास्त्र असि-मसि-कृषि का प्रवर्तक कहते हैं। ऋषभं मा समानानां सपत्नानां विषासहिम्। हन्तारं शत्रूणां कृधि विराजं गोपतिं गवाम्॥१॥ वाचस्पते नि षेधेमान् यथा मदधरं वदान्॥३॥ (ऋक्, १०/१६६) हन्तारं शत्रूणां = अरिहन्त, कृधि, गोपतिं आदि = कृषि कार्य, वाचस्पति = लिपि कर्ता। (२) ब्राह्मण भाग में इतिहास-इसमें जहां इतिहास कथा है, वहां इतिहास शब्द के ३ खण्ड लिखे रहते हैं-आरम्भ में ह, बाद में आस तथा समाप्ति पर इति। आरण्यक तथा उपनिषद् प्रायः इसी के अंश हैं अतः वहां भी ऐसा ही है। दुष्यन्त पुत्र भरत के यज्ञ, ६७७७ ई.पू. में डायोनिसस (असितधन्वा) का आक्रमण, जनक, श्वेतकेतु, याज्ञवल्क्य, उद्दालक आदि कई राजाओं ऋषियों की कथा है। (१) भरत के यज्ञ- तेन हैतेन भरतो दौःषन्तिरीजे... तदेतद् गाथयाभिगीतम्-अष्टासप्ततिं भरतो दौःषन्तिर्यमुनामनु। गङ्गायां वृत्रघ्ने ऽबध्नात् पञ्चपञ्चाशतँ हयान्-इति॥१३॥ महदद्य भरतस्य न पूर्वे नापरे जनाः। दिवं मर्त्य इव बाहुभ्यां नोदापुः पञ्चमानवाः-इति॥१४॥ (शतपथ ब्राह्मण, १३/५/४) तद्यप्येते श्लोका अभिगीताः। हिरण्येन परीवृतान् कृष्णान् शुक्लदतो मृगान्। मष्णारे भरतो ऽददाच्छ्तं बद्धानि सप्त च॥ भरतस्यैष दैष्यन्तेरग्निः साचिगुणे चितः। यस्मिन्सहस्स्रं ब्राह्मना बद्धशो गावि भेजिरे॥ अष्टासप्तति भरतो दौष्यन्तिर्यमुनामनु। गङ्गायां वृत्रघ्ने ऽबध्नात् पञ्चपञ्चाशतं हयान्॥ त्रयस्त्रिंशच्छतं राजा ऽश्वान् बध्वाय मेध्यान्। दौष्यन्तिरत्यगाद्राज्ञो मायां मायावत्तरः॥ महाकर्म भरतस्य न पूर्वे नापरे जनाः। दिवं मर्त्य इव हस्ताभ्यां नोदापुः पञ्चमानवाः॥ (ऐतरेय ब्राह्मण, ८/२३) (२) ऐतरेय-एतत् ह स्म वै तद्विद्वानाह महिदास ऐतरेयः .... स ह षोडशं वर्षशतमजीवत्। (छान्दोग्य उपनिषद्, ३/१६/६) (३) जनमेजय-एतेन ह इन्द्रोतो दैवापः शौनकः। जनमेजयं पारिक्षितं याजयां चकार ....॥१॥ तदेतत् गाथया अभिगीतम्- आसन्दीवति धान्यादँ रुक्मिणँ हरितस्रजम्। अबध्नादश्वँ सारंगं देवेभ्यो जनमेजयः-इति॥ (शतपथ ब्राह्मण, १३/५/४) यही ऐतरेय ब्राह्मण में- एतेन ह वा ऐन्द्रेण महाभिषेकेन तुरः कावषेयो जनमेजयं पारिक्षितम्भिषिषेच। .... तदेषाभि यज्ञगाथा गीयते-आसन्दीवति .....॥ (ऐतरेय, ८/२१) (४) असितधन्वा-असितोधान्वो (असितधन्वा = डायोनिसस) राजेत्याह तस्यासुरा विशस्तऽइमऽआसत इत् (शतपथ ब्राह्मण, १३/४/३/११) (५) शौनको ह वै महाशालोऽङ्गिरसं विधिवदुपसन्नः पप्रच्छ ॥३॥-मुण्डक उपनिषद् (१/१/२-३) ५. इतिहास के अन्य रूप-इतिहास सम्बन्धी कई अन्य ग्रन्थों का उल्लेख वेद के अंगों में किया गया है-(१) श्लोक-इसका सामान्य अर्थ है छन्दोबद्ध काव्य। पर यह किसी व्यक्ति की ख्याति सम्बन्धित वाक्य थे जो समाज में प्रचलित तथा उद्धृत थे। (२) विद्या-यह विषय या आविष्कर्ता व्यक्ति से सम्बन्धित वर्णन था। (३) व्याख्यान-अनुव्याख्यान-महत्त्वपूर्ण घटना, युद्ध आदि का वर्णन, उस पर विभिन्न मत या चर्चा। (४) वाकोवाक्य-बातचीत? (५) गाथा-प्राचीन कथायें, (६) नाराशंसी-किसी महापुरुष की जीवनी, प्रशंसा। (७) चरित-पुरुष या उसके वंश का वर्णन। रघु चरित के आधार पर रघुवंश लिखा गया था। (८) एकायन-प्राचीन संग्रह कोष आदि। इनके आधार पर पाञ्चरात्र ग्रन्थ थे। (९) कई अन्य विद्या जिनका रूप अस्पष्ट है-देवविद्या, ब्रह्मविद्या, भूतविद्या, क्षत्रविद्या, नक्षत्रविद्या, सर्पदेवजनविद्या। पुराण के अंग-सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च। वंशानुचरितं चेति पुराणं पञ्च लक्षणम्। (विष्णु पुराण, ३/३/२४) ब्रह्मवैवर्त्त पुराण, कृष्ण खण्ड, अध्याय १३३ में ये ५ लक्षण उपपुराणों के कहे हैं तथा महा पुराणों के १० लक्षण कहे हैं- पुराणों के अन्य मुख्य विषय हैं-आख्यानैश्चाप्युपाख्यानैर्गाथाभिः कल्पशुद्धिभिः। पुराण संहितां चक्रे पुराणार्थ विशारदः॥ (विष्णु पुराण, ३/६/१५) वेद में जिन घटनाओं का संकेत है उनका वर्णन आख्यान है, या स्वयं देखी घटना का वर्णन है। अन्य वर्णन उपाख्यान हैं। या मुख्य कथा आख्यान है तथा उदाहरण के लिये अन्य कथायें उपाख्यान हैं। प्रसिद्ध प्राचीन कथायें गाथा हैं। कल्प शुद्धि के २ अर्थ किये जाते हैं-कल्प आदि गणना से काल निर्धारण, या कल्प ग्रन्थों की विधियों की व्याख्या। पुराण में कई अन्य विषय भी हैं-व्याकरण, छन्द शास्त्र, योग, फलित ज्योतिष, आत्मा की गति, शिल्प शास्त्र, नगर निर्माण, चित्र कला आदि। पुराण प्रवक्ता-(१) संकलन कर्ता २८ व्यास, (२) प्रवचन तथा पुस्तक द्वारा प्रचार करने वाले सूत, (३) मागध-किसी देश या राज्य का वर्णन करने वाले, (४) बन्दी-राज्य सेवक, ये अपने शासक की प्रशंसा अधिक करते हैं। ६. अन्य विषयों के इतिहास-स्वायम्भुव मनु के काल से अधिकांश विषयों के इतिहास आरम्भ होते हैं। उसके पूर्व की पुस्तकों के संग्रहों से यह आरम्भ हुआ था। उससे पूर्व चिकित्सा के लिये सिद्ध परम्परा का उल्लेख है। पृथ्वी तथा आकाश की माप हो चुकी थी तथा मणिजा काल में खनिजों का खनन तथा धातु कर्म भी आरम्भ हो चुका था। (१) वेद तथा ज्योतिष में २ मुख्य परम्परा है-स्वायम्भुव मनु से ब्रह्म सम्प्रदाय तथा वैवस्वत मनु से आदित्य सम्प्रदाय। आदित्य सम्प्रदाय का पुनरुद्धार महाभारत से प्रायः १००० वर्ष पूर्व याज्ञवल्क्य द्वारा हुआ। ब्रह्म सम्प्रदाय के अनुसार वर्गीकरण कृष्णद्वैपायन व्यास के समय हुआ। किन्तु बहुत पूर्व काल (वाल्मीकि या उससे पूर्व) कृष्ण यजुर्वेद कि शाखाओं का विस्तार पूरे विश्व में वर्णित है, केवल पुष्कर द्वीप में नहीं है। ज्योतिष में पितामह सिद्धान्त स्वायम्भुव मनु काल का था जो दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है (बार्हस्पत्य वर्ष पद्धति)। उसका उद्धार कलि वर्ष ३६० में आर्यभट ने किया। पितामह सिद्धान्त को ही आर्य सिद्धान्त कहा जिसके कारण आर्य (अजा) का प्रचलित अर्थ पितामह है। सूर्य सिद्धान्त का आरम्भ वैवस्वत मनु के पिता विवस्वान् ने १३९०० ई.पू. में किया। जल प्रलय के बाद ९२२३ ई.पू. में मय ने रोमक पत्तन (उज्जैन से ९० अंश पश्चिम, मोरक्को के पश्चिम का तट) में किया। उस परम्परा में मैत्रेय ने पराशर को शिक्षा दी है जिसका विष्णु पुराण में वर्णन है। इसके आधार पर विक्रमादित्य के समकालीन ब्रह्मगुप्त ने ब्राह्म-स्फुट-सिद्धान्त लिखा। इसका काल चाहमान शक (६१२ ई.पू.) में ५५० अर्थात् ६२ ई.पू. में है। उससे पूर्व वराहमिहिर ने सूर्य सिद्धान्त का संक्षिप्त रूप पञ्चसिद्धान्तिका में लिखा। पूर्ण रूप महाभारत के कुछ बाद का है जो शौनक महाशाला में लिखा गया था (महासिद्धान्त, २/२) (२) आयुर्वेद का आरम्भ भी ब्रह्मा से हुआ। किन्तु इन्द्र के काल में पुनः रोग बढ़ने लगे तो हिमालय के निकट ऋषियों की सभा हुयी जिसके निर्णय से भरद्वाज इन्द्र के पास गये और आयुर्वेद शास्त्र रचा। इसे चरक संहिता कहा गया, जिस नाम से कृष्ण यजुर्वेद की १२ शाखायें हैं। बाद में इसे वैशम्पायन ने इसे नया रूप दिया। वर्तमान संस्करण दृढ़बल द्वारा है। देवासुर संग्राम के समय बहुत हत्यायें हुयीं तो शल्य चिकित्सा पर अधिक ध्यान दिया गया। समुद्र मन्थन के समय धन्वन्तरि हुये जिनसे सुश्रुत संहिता आरम्भ हुयी। काशी के राजा दिवोदास (७२०० ई.पू.) को धन्वन्तरि का अवतार कहते हैं। परीक्षित काल में एक धन्वन्तरि उनकी विष चिकित्सा करने आ रहे थे जिनको तक्षक ने पैसे दे कर वापस कर दिया था। उसके बाद काशी में कल्प दत्त के पुत्र सुश्रुत ने धन्वन्तरि की पुस्तक का सारांश लिखा जिसे सुश्रुत संहिता कहा गया (भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग, ३/९/२०-२१)। अन्तिम धन्वन्तरि विक्रमादित्य के नवरत्नों में से थे। वागभट के अष्टाङ्ग हृदय में बाक्कस नाम की यव की सुरा (whisky) का उल्लेख है (अष्टाङ्ग हृदय, सूत्र स्थान ३/५/६८, अष्टाङ्ग सूत्र, ६/११६)। मूल ग्रन्थ बाक्कस काल का होगा जब उसने भारत पर आक्रमण किया था (६७७७ ई.पू.)। (३) व्याकरण का इतिहास पं युधिष्ठिर मीमांसक जी ने विस्तार से लिखा है। ब्रह्मा के अतिरिक्त महेश्वर की परम्परा रही है। ब्रह्मा परम्परा में बृहस्पति, गणपति ने लिपि आरम्भ की तथा हर वस्तु के लिये अलग अलग नाम और चिह्न दिये। बाद में इन्द्र ने शब्द विज्ञान के आचार्य मरुत् की सहायता से शब्दों को मूल ध्वनियों में व्याकृत (खण्डित) किया तथा उच्चारण स्थान के अनुसार वर्गीकरण किया। व्याकृत होने के कारण व्याकरण कहा गया। उससे पूर्व शब्द पारायण था। आज भी इन्द्र क्षेत्र पूर्व से मरुत् क्षेत्र उत्तर पश्चिम तक देवनागरी लिपि प्रचलित है। इसमें ४९ मरुत् के चिह्न ४९ वर्ण हैं जिनमें ३३ देवों के चिह्न ३३ स्वर ( क से ह) हैं। चिह्न रूप में देवों का नगर होने के कारण इसे देवनागरी कहते हैं। इसमें असम्बद्ध (अयोगवाह) वर्णों को जोड़ने पर ६३ या ६४ वर्ण की लिपि शम्भु मत से है (पाणिनीय शिक्षा) जिसे ब्राह्मी लिपि कहते हैं। महेश्वर ने ४३ मूल वर्णों को १४ सूत्रों में निबद्ध किया जिनसे व्याकरण के सूत्र बनते हैं। माहेश्वर परम्परा के १८ पूर्ववर्त्ती व्याकरणों का उल्लेख पाणिनि ने किया है जिनकी अष्टाध्यायी में ४००० सूत्र हैं। इस पर पतञ्जलि का महाभाष्य है जिनका योग सूत्र है। यह व्यास के समकालीन थे जिन्होंने योगसूत्र पर टीका लिखी है। कालक्रम में नष्ट होने पर कश्मीर में तथा बाद में आदि शंकर के गुरु गोविन्दपाद (पूर्व नाम चन्द्रशर्मा) ने संकलन किया जिसे अजभक्षित भाष्य कहते हैं। अतः इसमें पुष्यमित्र शुंग के अश्वमेध का वर्णन है। प्रक्रिया क्रम से भी सिद्धान्त कौमुदी परम्परा में सूत्रों का अध्याय अनुसार क्रम बदल दिया गया है। (४) शिल्प शास्त्र की परम्परा विश्वकर्मा से है जिनके ऋग्वेद में २ सूक्त हैं (१०/८१-८२)। बाद में मय ने शिल्पशास्त्र की रचना की (मयमतम्) तथा इसके बाद के कई ग्रन्थ हैं। (५) अर्थशास्त्र का इतिहास महाभारत, शान्ति पर्व, अध्याय ५८-५९ में दिया है। आरम्भ में ब्रह्मा (स्वायम्भुव मनु) ने त्रिवर्ग विषय (धर्म, अर्थ, काम) का १ लाख अध्याय का शास्त्र लिखा था। उसके अर्थशास्त्र विभाग का विशालाक्ष शिव ने १०,००० अध्याय में संक्षेप किया। पुरन्दर इन्द्र ने ५,००० अध्यायों में बाहुदन्तक नाम से संक्षेप किया। विष्णुगुप्त के अर्थशास्त्र में उस इन्द्र को बाहुदन्तीपुत्र लिखा है। इसका ३००० अध्याय में बृहस्पति ने संक्षेप किया। काव्य उशना ने १,००० अध्याय में संक्षेप किया। उसके बाद पुरूरवा के पिता बुध (मत्स्य पुराण, २४/२) तथा सुधन्वा (आङ्गिरस बृहस्पति के भाई), प्राचेतस मनु, भरद्वाज, गौरशिरा आदि के अर्थशास्त्रों का उल्लेख है। कौटल्य अर्थशास्त्र, अध्याय ७ में कुछ अन्य का भी उल्लेख है- पराशर, पिशुन (नारद), कौणपदन्त, वातव्याधि, बाहुदन्ती-पुत्र (इन्द्र)।✍🏻अरुण उपाध्याय हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| चुनाव और कांग्रेस की दुर्दशा -मनोज मिश्र Posted: 10 Mar 2022 07:09 AM PST
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| Posted: 10 Mar 2022 07:03 AM PST
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| Posted: 09 Mar 2022 08:23 AM PST
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| Posted: 09 Mar 2022 08:15 AM PST मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग से भ्रमण कर विभिन्न निर्माणाधीन पथ प्रोजेक्टों का किया निरीक्षण, निर्माण कार्य में तेजी लाने का दिया निर्देशपटना, 09 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज सड़क मार्ग से भ्रमण कर विभिन्न निर्माणाधीन पथ प्रोजेक्टों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को मीठापुर गोलंबर पर अधिकारियों ने रेखाचित्र के माध्यम से मीठापुर-महुली एलिवेटेड पथ के निर्माण से संबंधित विभिन्न पहलूओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मीठापुर-महुली निर्माणाधीन सड़क निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करने निर्देश दिया। इसके पष्चात् मुख्यमंत्री करबिगहिया गोलंबर से सिपारा होते हुए महुली पहुॅच कर एन0एच0-83 (पटना-गया-डोभी सड़क) निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को रेखाचित्र के माध्यम से इस पथ के निर्माण कार्य से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माणाधीन कार्यों को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गया ऐतिहासिक जगह है। गया और पुनपुन में बड़ी संख्या में लोग पिंडदान करने के लिये आते हैं। पटना-गया-डोभी मार्ग के बन जाने से पटना से गया आवागमन और आसान हो जायेगा। साथ ही पर्यटकों को भी काफी सहुलियत होगी तथा इस क्षेत्र का भी तेजी से विकास होगा। मुख्यमंत्री ने वहाॅ रूककर स्थानीय लोगों से बातचीत कर वहाॅ की समस्याओं की जानकारी ली और अधिकारियों को शीघ्र समाधान करने का निर्देष दिया। मुख्यमंत्री ने एन0एच0-83 का निरीक्षण करने के पश्चात् मसौढ़ी-पितमास-नौबतपुर मार्ग होते हुए दानापुर में दानापुर-बिहटा एलिवेटेड पथ के निर्माण कार्य के विभिन्न पहलूओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल्द कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव सह बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के अध्यक्ष श्री पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न स्थलों पर जाकर सड़कों के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हैं। इसी सिलसिले में आज भी विभिन्न स्थानों का दौरा कर सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण किया है। सड़क निर्माण कार्य में क्या दिक्कत आ रही है इसकी भी जानकारी ली है। शराबबंदी का अध्ययन करने राजस्थान से आयी टीम के संबंध में पूछे गए प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान से टीम आयी हुई है। उन लोगों से कल मेरी मुलाकात हुई है। वे लोग बिहार में घूमकर पूर्ण शराबबंदी के सफल क्रियान्वयन का अध्ययन करना चाहते हैं। पहले भी कई राज्यों से टीम आकर बिहार की शराबबंदी का अध्ययन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दानापुर-बिहटा एलिवेटेड पथ के निर्माण को लेकर रेलवे से बात हो गयी है। यहां पर एलिवेटेड रोड बन जाने से लोगों को आने-जाने में और सहूलियत होगी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| महिलायें हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं : राजीव रंजन प्रसाद Posted: 09 Mar 2022 08:07 AM PST महिलायें हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं : राजीव रंजन प्रसादजितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना जीकेसी ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को कहा कि महिलायें हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। आज के समय में महिलाएं किसी भी पैमाने पर पुरुषों से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, शिक्षा हो या फिर चिकित्सा, राजनीति हो या फिर समाजसेवा, सिनेमा हो या फिर खेलकूद या फिर विज्ञान महिलायें हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। महिलाएं आज पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में उनसे कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं। उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। बस उनके हौसलों को पंख देने की जरूरत है। कार्यक्रम के संयोजक प्रेम कुमार ने बताया कि जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वर्चुअल "सशक्तीकरण संगोष्ठी" का आयोजन किया था। महिलाओं के प्रति सम्मान को दर्शाते हुये जीकेसी ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन था। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तीकरण संगोष्ठी का संचालन कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव सोमिका श्रीवास्तव ने की और धन्यवाद ज्ञापन ग्लोबल वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने किया। डिजिटल-तकनीकी और संचार प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन श्रीवास्तव, डिजिटल-तकनीकी और संचार प्रकोष्ठ के ग्लोबल महासचिव सौरभ श्रीवास्तव, ग्लोबल उपाध्यक्ष आनंद सिन्हा और डिजिटल-आईटी प्रकोष्ठ के बिहार प्रदेश आशुतोष ब्रजेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। संगोष्ठी में शिरकत करने वाली सभी महिला शक्तियों को जीकेसी ने प्रशंसा प्रमाण पत्र दिया। उक्त अवसर पर जीकेसी की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि चाहे खेल-कूद की दुनिया हो या अंतरिक्ष विज्ञान, सीमाओं की सुरक्षा हो या फिर समाज उत्थान की बेटियां हर कदम पर बढ़ा रही है भारत का मान, महिला सशक्तिकरण से ही बढ़ेगा मां भारती का स्वाभिमान। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में महिलाएं अपनी योग्यता व आत्मविश्वास के दम पर अपनी पहचान कायम कर रही है तथा सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनकर नारी उत्थान की नई दास्तां लिख रही है। आइए, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम सभी महिलाओं की गरिमा को बनाये रखने तथा सभी क्षेत्रों में नारी शक्ति की समान भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लें। महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी में महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष रितु खरे, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष श्रुति सिन्हा, मुख्य वित्तीय पदाधिकारी निष्का रंजन, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय सचिव शिवानी गौड़, राष्ट्रीय सचिव सुबाला वर्मा, अध्यक्ष नेपाल डा. पूनम कर्ण, राष्ट्रीय सचिव महिला प्रकोष्ठ रचना सक्सेना, प्रदेश अध्यक्ष बिहार डा. नम्रता आनंद, प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा रजनी श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष आसाम नूतन सिन्हा, अध्यक्ष अमृतसर पुष्पाजंली वर्मा, अध्यक्ष कला संस्क़ति प्रकोष्ठ झारखंड मृणालिनी अखौरी, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष महाराष्ट्र मनीषा सिन्हा, अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ राजस्थान मुक्ता माथुर, कार्यवाहक अध्यक्ष कला-संस्कृति प्रकोष्ठ महाराष्ट्र डा. शालिनी श्रीवास्तव बैरागी, प्रदेश उपाध्यक्ष शिक्षा प्रकोष्ठ बिहार रश्मि सिन्हा और उत्तर प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ की सचिव अलका सक्सेना ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि मृणालिनी अखौरी ने अपनी स्वरचित कविता "सारे जग पर भारी हूँ मैं आज के युग की नारी हूँ मैं", जबकि डा. शालिनी श्रीवास्तव बैरागी ने "रहें ना रहे हैं" गाकर लोगों का दिल जीत लिया। महिला संगोष्ठी में शिरकत करने वाली महिला शक्तियों ने कहा कि 08 मार्च का दिन महिलाओं को समर्पित किया जाता है। दुनिया भर में महिलाओं के खिलाफ भेद-भाव को खत्म करने के लिए इस दिन को खास सेलिब्रेट किया जाता है। साथ ही इस दिन को इसलिए भी सेलिब्रेट किया जाता है, जिससे महिलाओं के विकास पर ध्यान दिया जाए, साथ ही उनकी उपलब्धियों पर भी गौर किया जा सकें। इस दिन उन महिलाओं को याद किया जाता है, जिन्होंने उलब्धियां, जज्बे के साथ आगे बढ़ने से लेकर कई ऊच्चाईंयां हासिल की है। नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है। यह जरूरी है कि हम स्वयं को और अपनी शक्तियों को समझें। जब कई कार्य एक समय पर करने की बात आती है तो महिलाओं को कोई नहीं पछाड़ सकता। यह उनकी शक्ति है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए। उक्त अवसर पर ग्लोबल वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुये सभी उपस्थित प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 07:56 AM PST
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| विश्व अग्निहोत्र दिवस : हिन्दू धर्म की विशिष्टता का प्रमाण - अग्निहोत्र Posted: 09 Mar 2022 07:52 AM PST आज हमारे चारों ओर का वातावरण अत्यंत दूषित हो गया है। जब हम प्रदूषण की बात करते हैं, तो सामान्यतः हम वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, भोजन प्रदूषण और भूमि प्रदूषण के विषय में विचार करते हैं । परन्तु यह प्रदूषण भौतिक स्तर तक ही सीमित नहीं है; अपितु वायुमंडल में उत्सर्जित मानसिक तथा आध्यात्मिक प्रदूषण भी सम्मिलित है । मानसिक प्रदूषण लोगों के नकारात्मक विचार जैसे लालच, धोखा, घृणा, विनाश हेतु योजना बनाना, इत्यादि के कारण होता है । यह मानसिक प्रदूषण वातावरण में प्रसारित होता है, इसलिए यह हमारे मन के नकारात्मक विचारों को बढाने वाला वातावरण बना देता है । अग्निहोत्र क्या है ? अग्निहोत्र एक वैदिक हवन पद्धति है। वर्तमान में जब सम्पूर्ण विश्व इस प्रकार के भौतिक प्रदूषण पर शीघ्र ही रोक लगाने हेतु उपाय ढूंढने हेतु प्रयत्नशील है । पवित्र अथर्ववेद (11:7:9) में एक सरल धार्मिक विधि का उल्लेख है । जिसका विस्तृत वर्णन यजुर्वेद संहिता और शतपथ ब्राह्मण (12:4:1) में है । इससे प्रदूषण में कमी आएगी तथा वातावरण भी आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होगा । जो व्यक्ति यह पवित्र अग्निहोत्र विधि करते हैं, वे बताते हैं कि इससे तनाव कम होता है, शक्ति बढती है, तथा मानव को अधिक स्नेही बनाती है । ऐसा माना जाता है कि अग्निहोत्र पौधों में जीवन शक्ति का पोषण करता है तथा हानिकारक विकिरण और रोगजनक जीवाणुओं को उदासीन बनाता है । जल संसाधनों की शुद्धि हेतु भी इसका उपयोग किया जा सकता है । ऐसा माना जाता है कि यह नाभिकीय विकिरण के दुष्प्रभावों को भी न्यून कर सकता है । वर्तमान प्रदूषित वातावरण में वायु की शुद्धता तथा विषैली वायु और विकिरण से रक्षा करनेवाली 'अग्निहोत्र' विधि अवश्य करें । पर्यावरण की शुद्धि के लिए किए जाने वाले अग्निहोत्र को आज कई लोग सीखकर अपने घरों में भी करने लगे हैं। अग्निहोत्र एक ऐसी-हवन पद्धति है जिसमें समय भी कम लगता है तथा इसे आसानी से किया भी जा सकता है। इस संसार में ईश्वर ने हमें सब कुछ प्रदान किया है, कृतज्ञता स्वरुप हमें प्रतिदिन अग्निहोत्र करने के लिए समय निकालना चाहिए। इस यज्ञ को स्वयं करना चाहिए व अन्यों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए । अग्निहोत्र के लाभ अग्निहोत्र से वनस्पतियों को वातावरण से पोषण द्रव्य मिलते हैं और वे प्रसन्न होती हैं । अग्निहोत्र के भस्म का भी कृषि और वनस्पतियों की वृद्धि पर उत्तम परिणाम होता है । परिणामस्वरूप अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट अनाज, फल, फूल और सब्जियों की उपज होती है तथा चैतन्यप्रदायी और औषधीय वातावरण उत्पन्न होता है । अग्निहोत्र के लाभ का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण उदाहरण है, भोपाल में दिसंबर, 1984 में हुई गैस त्रासदी । इसमें लगभग 15,000 से अधिक लोगों की जान चली गई और कई लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए, तबाही की इस काली रात में हजारों परिवारों के बीच भोपाल में कुशवाहा परिवार भी था । कुशवाहा परिवार में प्रतिदिन सुबह और शाम 'अग्निहोत्र यज्ञ' होता था । इसलिए उस काली रात में भी कुशवाहा परिवार ने अग्निहोत्र यज्ञ करना जारी रखा । इसके बाद लगभग 20 मिनट के अंदर ही उनका घर और उसके आस-पास का वातावरण 'मिथाइल आइसो साइनाइड गैस' से मुक्त हो गया। कैसे होता है अग्निहोत्र ? अग्निहोत्र के लिए अग्नि प्रज्वलित करना - हवन पात्र के तल में उपले का एक छोटा टुकडा रखें । उस पर उपले के टुकडों को घी लगाकर उन्हें इस प्रकार रखें (उपलों के सीधे-आडे टुकडोें की 2-3 परतें) कि भीतर की रिक्ति में वायु का आवागमन हो सके । पश्चात उपले के एक टुकडे को घी लगाकर उसे प्रज्वलित करें तथा हवन पात्र में रखें । कुछ ही समय में उपलों के सभी टुकडे प्रज्वलित होंगे । अग्नि प्रज्वलित होने के लिए वायु देने हेतु हाथ के पंखे का उपयोग कर सकते हैं अग्नि प्रज्वलित करने के लिए मिट्टी के तेल जैसे ज्वलनशील पदार्थों का भी उपयोग न करें । अग्नि निरंतर प्रज्वलित रहे अर्थात उससे धुआं न निकले ।' अग्निहोत्र मंत्र सूर्योदय के समय बोले जानेवाले मंत्र सूर्याय स्वाहा सूर्याय इदम् न मम प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम सूर्यास्त के समय बोले जानेवाले मंत्र अग्नये स्वाहा अग्नये इदम् न मम प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम मंत्र बोलते समय भाव कैसा हो ? : मंत्रों में सूर्य', अग्नि', प्रजापति' शब्द ईश्वरवाचक हैं । इन मंत्रों का अर्थ है, सूर्य, अग्नि, प्रजापति इनके अंतर्यामी स्थित परमात्मशक्ति को मैं यह आहुति अर्पित करता हूं । यह मेरा नहीं ।', ऐसा इस मंत्र का अर्थ है । इस क्रिया में हवनद्रव्य (दो चुटकी चावल, गाय के घी के साथ मिला हुआ) अग्नि में समर्पित करें । हवन करते समय मध्यमा और अनामिका से अंगूठा जोडकर मुद्रा बनाएं (अंगूठा आकाश की दिशा में रखें ।) उचित समय अर्थात सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय (संधिकाल में) अग्निहोत्र करना अपेक्षित है । प्रजापति को ही प्रार्थना कर और उनके ही चरणों में कृतज्ञता व्यक्त कर हवन का समापन करें । आवाहन : 'अग्निहोत्र' हिन्दू धर्म द्वारा मानवजाति को दी हुई अमूल्य देन है । अग्निहोत्र नियमित करने से वातावरण की बडी मात्रा में शुद्धि होती है । इतना ही नहीं यह करनेवाले व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि भी होती है । इसके साथ ही वास्तु और पर्यावरण की भी रक्षा होती है । समाज को अच्छा स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन जीने के लिए सूर्यादय और सूर्यास्त के समय 'अग्निहोत्र' करना चाहिए । अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रान्स जैसे 70 देशों ने भी अग्निहोत्र का स्वीकार किया है तथा उन्होंने विविध विज्ञान मासिकों में उसके निष्कर्ष प्रकाशित किए हैं । इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से सिद्ध हुई यह विधि सभी नागरिकों को मनःपूर्वक करना चाहिए । सन्दर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ 'अग्निहोत्र' हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 07:48 AM PST समर्थ नारी समर्थ भारत के स्थापन दिवस पर संस्था की ओर से महिलाओ के उत्थान पर संगोष्ठी व होली मिलन समारोह का आयोजन संस्था के कार्यालय पुनाईचक में पुष्पा पाठक की अध्यक्षता और पुष्पा कुमारी के संचालन में सम्पन्न हुआ।स्थापना समारोह संगोष्ठी व होली मिलन समारोह में उपस्थित महिलाओ को सम्बोधित करते हुए समर्थ नारी समर्थ भारत की राष्ट्रीय सह संयोजिका माया श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्तर पर संस्था के द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कही की महिलाए ही समाज की धरोहर है। उन्हे हम सम्मान देकर ही इतिहास बना सकते है। महिलाओ को संगठित कर उनके अधिकार की रक्षा के लिय हम सब एकजुट होकर आगे आकर उनके सम्मान को बरकरार रखने की चुनौती हम महिलाओं के उपर है जिसे बरकरार रखने की जरुरत हैं। राम और कृष्ण के काल से ही महिलाएं सशक्त होकर विश्व में संदेश देती रही है।इसी का परिणाम है की आज भी राष्ट्र की आधी आबादी साहित्य, सांस्कृतिक, राजनीतिक, समाजसेवा, शिक्षा, व्यवसाय , सेना समेत सभी क्षेत्रों में स्थापित कर पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवा चुकी हैं। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष और त्याग के दिशा में भी महिलाएं आगे है।आज भारतीय संस्कृति में महिलाएं हर समय पूजनीय है।हमे महिलाओं के साथ घट रही घटनाओं व समाज में टूट रहे परिवार को बचाने में हम महिलाओं को हर हाल में आगे आकर सड़क तक संघर्ष तेज करने की जरूरत है।इस अवसर पर माहिलाओ ने आपस मे रंग गुलाल खेलकर और होली के गीत गाकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी। होली को आपसी एकता का मिशाल बताते हुए रंग अबीर का महान पर्व बताया।डॉ अनिता ,मीना श्रीवास्तव ,नीलम राज,अनीता कुमारी ,बबिता गुप्ता ,स्मिता सिन्हा, किरण ठाकुर ,नूतन सिन्हा पटेल, रश्मि देवी ,सविता देवी मोनिका प्रसाद , रुक्मिणी देवी , क्रांति ठाकुर ,अनिता सिंह , वीणा देवी , शारदा देवी , अंजलि ठाकुर, पूजा तिवारी ,संगीता बनर्जी, विमला देवी , चांदनी कुमारी,कुमारी पिंकी वर्मा , मिनी सिन्हा, सीता देवी,रीना सिंह आदि प्रमुख थी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 07:42 AM PST
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| Posted: 09 Mar 2022 02:07 AM PST निरो सो रहा हैछोटा भाई हर समय लडता था हर जगह वो बात-बात में अडता था अगल बगल वाले उसे देते रहते थे शह पर शह कि अपना हिस्सा मांग और फिर उससे तु अलग रह और वह समय-समय पर ठान लेता जिद कि विश्व समुदाय के सामने होता रहे उसकि बस मिट्टी पलीद अंततः थक हार मिटाने को तकरार देकर उसका हिस्सा किया खुद से किनार साथ हीं समझाया जो भी बात हो हमसे कहना बस उसकि गोद में मत रहना पर वो नालायक हमेशा नाचते रहा उसके इशारे पर और पैदा करता रहा इधर वो बस डर पर डर सब दिन करता रहा माफ ये समझकर कि वो एक दिन समझ जायेगा जब कभी उससे धोखा खायेगा पर होता रहा उलटा रोज-रोज करता था जलील देकर सबको-उलटी सीधी दलील देखते देखते हीं इधर गरम हुआ उसका पारा उसे घेरकर खुब मारा उसे पिटाते देख निकालने लगा सब मीन-मेख कहते हुए की ये है अन्याय इस छोटी जान पर हाय!हाय मार खाकर वह हो रहा बेहाल और इधर सब दुश्मन दे रहा ताल वो अपनी करनी पर रो रहा है लगाकर आग अपनें ही हाथों निरो सो रहा है -------------------------------------–- वलिदाद, अरवल(बिहार)८०४४०२. हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| सामाजिक संस्था "खिलखिलाहट" के अध्यक्ष बने प्रदीप कुमार Posted: 09 Mar 2022 02:04 AM PST सामाजिक संस्था "खिलखिलाहट" के अध्यक्ष बने प्रदीप कुमारजितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, सामाजिक संस्था "खिलखिलाहट" की मंगलवार को हुई वर्चुअल बैठक की जानकारी देते हुए संस्था के अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने बताया कि स्लम वस्ती के बच्चो के बीच पिचकारी, रंग, गुलाल का वितरण करने और स्लम वस्ती के परिवारों के बीच स्वच्छता जागरण हेतु साबुन की टिकिया वितरित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में शिवानी गौर ने रंग अबीर के साथ साथ खाने पीने के लिए उस दिन स्लम बस्तियों में बच्चों के बीच पेडकीया (गुझिया) का भी वितरण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि तरुण सोनी ने बच्चों के बीच उस दिन चॉकलेट और टॉफी, कुमार संभव ने उस दिन कुछ बच्चो के लिए कपड़े का भी वितरण किया जायेगा। प्रदीप कुमार ने बताया कि यह स्लम बस्तियों के बच्चों के बीच 17 मार्च को होली के ठीक पहले पिचकारी, रंग, अबीर, साबुन की टिक्की, पेडकिया, टॉफी चॉकलेट, और वस्त्र वितरित किया जायेंगा। सूत्रों ने बताया कि प्रदीप कुमार जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया है वे डॉ मदन गोपाल सिंहा के पुत्र हैं और उनका 4 जून, 1967 को हुआ है। पेशे से श्री कुमार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं, लेकिन वे एक अच्छे रचनाकार भी है और उनकी रचना "हस्ताक्षर", "साहित्यनामा", "फेस ऑफ इंडिया", "आज आवाज", "श्री राम एक्सप्रेस" और"लोकजंग" प्रकशित हो चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रदीप कुमार को आगमन सम्मान, सुमित्रानंदन पंत सम्मान, काव्य सारथी सम्मान, बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार, लाल बहादुर शास्त्री सम्मान से नवाजा भी गया है। श्री प्रदीप कुमार ने बताया कि सामाजिक संस्था खिलखिलाहट के कार्यकारिणी के सदस्यों की बैठक ऑनलाइन सम्पन्न हुआ है जिसमें कार्यकारिणी के सदस्य निशा परासर, शिवानी गौर, तरुण सोनी और कुमार संभव शामिल थे। लेकिन आलोक कुमार सिन्हा, संजय सिन्हा और शालिनी वर्मा बैठक अपरिहार्य कारण से शामिल नही हुए थे। उन्होंने बताया कि किसी संस्था की शक्ति उसके सदस्य होते हैं और चुकी यह संस्था अभी नवजात की स्थिति में है । अतः इसे विशेष देखभाल की आवश्यकता है। उन्होंने सदस्यों से नये सदस्य को जोड़ने का सुझाव देते हुए कहा कि यदि हर सदस्य हर महीने एक सदस्य भी जोड़ेंगे तो बहुत जल्द ही यह संस्था "खिलखिलाहट" एक महापरिवार का रूप ले लेगी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 02:01 AM PST अज्ञात अपराधियों द्वारा सरेआम खुले बाजार में आभूषण की दुकान में घुसकर अंधाधुंध की गई फायरिंग, तीन लोग बुरी तरह घायलसंवाददाता मुकेश कुमार का रिपोर्ट • घायलों की हालत बेहद गंभीर •आभूषणों पर लुटेरों ने किया हाथ साफ • पुलिस छानबीन में जुटी आज सुबह 11:00 बजे मढौरा ( छपरा) बाजार में आर के ज्वेलर्स में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग अज्ञात अपराधियों के द्वारा की गई जिसमें 2 लोग बुरी तरह घायल हैं और एक की हालत बेहद नाजुक है। अपराधी लाखों का आभूषण लेकर फायरिंग करते हुए भाग निकले। पूरे बाजार में दहशत का माहौल बना हुआ है । सभी दुकान बंद हैं। पुलिस प्रशासन मामले की जांच में लगी हुई है ।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 01:56 AM PST अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 51 स्लम के बच्चियाँ और महिलाओं को सम्मानित किया मानव अधिकार रक्षकहमारे संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खबर : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मानव अधिकार रक्षक ट्रस्ट ने 8 मार्च (मंगलवार) को पटना के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) हॉल में 51 स्लम के बच्चियों और महिलाओं को सम्मानित किया है। मानव अधिकार रक्षक के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्थान की संस्थापिका रीता सिन्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि में प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ.बिंदा सिंह, मेयर सीता साहू, इंस्पेक्टर आरती जायसवाल, वार्ड पार्षद अनीता सहाय, वार्ड पार्षद पिंकी यादव, वार्ड पार्षद अर्चना राय थी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत एक आंदोलन के रूप में हुई थी। यह आंदोलन आज से करीब 113 वर्ष पहले 1908 में शुरु हुई थी। इसकी शुरूआत अमेरिका के न्यूयॉर्क में करीब 15 हजार महिलाओं ने मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों, बेहतर वेतन और मतदान के अधिकार की मांग की गई थी। श्री अरविन्द कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश अध्यक्ष बिहार चेतन थिरनी द्वारा किया गया था। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार रक्षक की संस्थापिका रीता सिन्हा ने मंच से अवगत कराया कि मानव अधिकार रक्षक टीम में जितेन्द्र कुमार सिन्हा को बिहार प्रदेश के मीडिया प्रभार के अध्यक्ष और डा. आर.के. गुप्ता को बिहार प्रदेश के हेल्थ कमिटी के अध्यक्ष बनाया गया है और दोनों को मानव अधिकार रक्षक की ओर से प्रमाण पत्र एवं परिचय पत्र दी। उक्त अवसर पर मंचाधीन लोगों ने कहा कि महिला दिवस को अंतर्राष्ट्रीय बनाने का विचार क्लारा ज़ेटकिन नामक महिला की देन है। 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में क्लारा ज़ेटकिन ने इस विचार का सुझाव दिया था। वहां 17 देशों की 100 महिलाएं थीं और वह सब सर्वसम्मति से उसके सुझाव पर सहमत हुए। उसके बाद, पहली बार 1911 में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में महिला दिवस मनाया गया था। रूस ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक अवकाश घोषित किया था। उक्त अवसर पर शिक्षक इंदु उपाध्याय, रक्तदाता मीनू मोदी, शिक्षक एवं चिकित्सक डॉ. माधुरी भट्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.अनिता सहाय, प्रदर्शनी कामिनी कुमारी एवं टिकली काला, बिहार पुलिस के सब इंस्पेक्टर पूजा कुमारी, खुशबू कुमारी एवं प्रीति प्रियदर्शी, दंत चिकित्सक डॉ. प्रियंका, केवल सच के पत्रकार रीता कुमारी, गायिका अपर्णा कुमारी सहित स्लम के बच्चियों को (जिन्होंने कला का प्रदर्शन किया था) उन्हें सर्टिफिकेट और मेडल देकर सम्मानित किया गया। उक्त अवसर पर संस्थान की संस्थापिका रीता सिन्हा ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब पुरुष युद्ध पर थे, तब महिलाएं भोजन की कमी से जूझ रही थी और सरकारें उनकी बात नहीं सुन रही थी। ऐसी स्थिति में 8 मार्च 1917 को हजारों रूसी महिलाओं ने बदलाव की मांग करते हुए सड़कों पर उतरीं थी। उक्त अवसर पर संस्था के पटना जिला अध्यक्ष विनीत कुमार सोनी, जिला सचिव रेनू कुमारी, जिला संयुक्त सचिव अनिल कुमार, बख्तियारपुर प्रवक्ता सूरज सिंह, पटना सदर प्रखंड महासचिव विकाश कुमार गुप्ता, सक्रिय सदस्य सूरज कुमार, अक्षय कुमार, निरंजन कुमार, बंटी कुमार, आदित्या कुमार, प्रवीण कुमार, सुरेश कुमार, उत्तम कुमार उपस्थित थे। उक्त अवसर पर मानव अधिकार रक्षक की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संध्या 5 बजे से कदमकुआं में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविन्द कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बिहार चेतन थिरानी के नेतृत्व में प्रदेश के हेल्थ कमिटी के अध्यक्ष डॉक्टर राकेश कुमार गुप्ता के सहयोग से हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने सलाह और मुफ्त दवा लेकर लाभान्वित हुए। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 01:35 AM PST
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| भारतीय जन महासभा ने माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम पर 10 सूत्री मांग पत्र सौंपा | Posted: 09 Mar 2022 01:31 AM PST भारतीय जन महासभा ने माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम पर 10 सूत्री मांग पत्र सौंपा |भारतीय जन महासभा (देश व समाज को समर्पित अखिल भारतीय संगठन) के विभिन्न प्रांतों से आए हुए प्रतिनिधियों ने 9 मार्च 2022 (मंगलवार) को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना दिया और माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम पर 10 सूत्री मांग पत्र (ज्ञापन) भी सौंपा । ज्ञापन में सम्मिलित मांगे निम्नलिखित हैं : -- 1 ) दिल्ली के लगभग सभी स्थान मुगलों और आताताईयों के नाम पर हैं । उनका नाम हिन्दू सम्राटों के नाम पर किया जाना चाहिए तथा दिल्ली का नाम पुनः इंद्रप्रस्थ हो । 2 ) भारत को अंग्रेजी में India नहीं लिखकर Bharat ही लिखा जाए । 3 ) क) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की फोटो वर्तमान में प्रचलित कुछ नोटों पर आये । ख) कुछ नोटो पर वीर विनायक दामोदर सावरकर की फोटो भी आए । ग) कुछ नोटों पर भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की फोटो आये । घ) कुछ नोटों पर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की फोटो आये । 4 ) नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के समय का राष्ट्रगान लागू किया जाए । जिसका लिंक यहां दे रहे हैं । इस लिंक को टच कर उक्त समय के राष्ट्रगान को सुना जा सकता है । https://fb.watch/aWRRd6K2ew/ उपरोक्त राष्ट्रगान के कुछ अंश का हिंदी अनुवाद : -- शुभ सुख चैन की बरखा बरसे भारत भाग्य है जागा पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा द्राविण, उत्कल, बंगा चंचल सागर, विंध्य, हिमालय नीला जमुना गंगा .... तेरे नित गुण गाएँ, तुझसे जीवन पाएँ सब तन पाएँ आशा .. सूरज बन कर जग पर चमके भारत नाम सुभागा जय हो ! जय हो ! जय हो ! जय जय जय जय हो। (ऐसे ही अन्य अन्तरा) 5 ) लाहौर में रावी नदी के तट पर विशाल मेला लगता था । हजारों-लाखों की संख्या में हिंदू वहां जाकर धर्म वीर हकीकत राय की समाधि पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किया करते थे । इस समाधि को सन 1947 के पश्चात पाकिस्तान ने तुड़वा दिया था । हमारी मांग है कि इस समाधि को फिर से बनवाया जाए । 6 ) कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वतुल-इस्लाम मस्जिद के ढांचे में लगी खंडित मूर्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद व मीनार है । हमारी मांग है कि इसको पुनः मंदिर का रूप दिया जाए । 7 ) गूगल , फेसबुक यूट्यूब एवं अन्य सभी सोशल साइट्स से अश्लील सामग्री को हटवाया जाए । 8 ) टीवी में 'स्टार भारत' नामक चैनल के द्वारा सोमवार एवं शुक्रवार को रात्रि 9:00 बजे से 'राधा कृष्ण' नाम का सीरियल दिखाया जा रहा है । इस सीरियल में राधा रानी को द्वारिका में रहते हुए दिखाया गया है , साथ ही इस प्रकार का माहौल दिखाया जा रहा है जैसे द्वारिका में हमेशा पारिवारिक कलह की स्थिति रही हो जबकि राधा रानी वृंदावन छोड़ कर कभी भी द्वारिका नहीं गई । इसका लिंक यह है : -- https://youtu.be/gTxnuHZv_dI इस प्रकार के ऐतिहासिक/पौराणिक सीरियल को बंद करवाया जाए और भविष्य में भी संबंधित अधिकारी इसका ध्यान रखें। 9 ) भगवान शिव एवं माता पार्वती के चित्र वाले पेपर को टॉयलेट पेपर के रूप में यूज करने की बात कहने वाली इस महिला की गिरफ्तारी होनी चाहिए । इस लिंक के द्वारा देख सकेंगे : -- https://theprint.in/india/delhi-journalists-video-trashing-teej-sparks-row-sambit-patra-asks-dont-hindus-get-hurt/489665/ इस पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है जिससे हमारे धर्म का कोई भी मजाक नहीं उड़ा सके और हमारी भावनाओं को ठेस ना पहुंचा सके। 10 ) रेप के मामलों में कानून बड़ा लचीला है । ऐसी स्थिति में अनेक रेपिस्ट कई प्रकार से छूट जा रहे हैं । ऐसा भी देखा गया है कि उसने रेप किया है लेकिन नाबालिग बोल कर छोड़ दिया गया । निर्भया कांड का पांचवा दोषी 'अफरोज' जो कि सबसे बड़ा गुनाहगार था वह बच निकला । यह अत्यंत ही दु:ख का विषय है । हमारी मांग है कि ऐसे दुष्ट को खोज कर अब भी उसे सजा दी जाए , भले इसके लिए कानून में आवश्यकतानुसा संशोधन और वह भी पिछली तिथि से प्रभावी किया जा सकता है तब मरणोपरांत ही सही निर्भया को सही मायने में न्याय मिल सकेगा । रेप के मामलों में इतना कड़ा कानून बनाए जाने की आवश्यकता है कि रेपिस्ट को पकड़ में आते ही एक माह के अंदर जाँच पूरी कर मौत की ही सजा सुनाई जाए। उपरोक्त सभी बिंदुओं पर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है । धरना के कार्यक्रम में श्री पोद्दार के अलावे अजय कुमार सिंह , कमल राज जजवाडे , प्रमोद कुमार खीरवाल एवं हरीश चंद्र आर्य उपस्थित थे । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 09 Mar 2022 01:26 AM PST
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| Posted: 09 Mar 2022 01:24 AM PST खूबसूरती का मतलबनहीं होती सुंदरता किसी के भी शरीर में। ये बस भ्रम है अपने अपने मन का। यदि होता शरीर सुंदर तो कृष्ण तो सवाले थे। पर फिर भी वो सभी की आंखों के तारे थे।। क्योंकि सुंदर होते है उसके कर्म और विचारो में। तभी तो लोग उसके प्रति आकर्षित होकर आते है। वह अपनी वाणी व्यवहार और चरित्र से जाना जाता है। तभी तो लोग उसे अपना आदर्श बना लेते है।। जो अर्जित किया उसने अपने गुरुओं से ज्ञान। वही ज्ञान को वो सुनता है दुनियां को। जिससे होता है एक सभ्य समाज का निर्माण। फिर हर शख्स को ये दुनियां, सुंदर लगाने लगती है। इसलिए संजय कहता है, जमाने के लोगों से। सुंदर शरीर नहीं होता सुंदर होते है उसके संस्कार।। जय जिनेन्द्र देव संजय जैन "बीना" मुम्बई हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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