Devotional | भक्ति |
- सीता राम, सीता राम, सीताराम कहिये - Bhajan: Sita Ram Sita Ram Sita Ram Kahiye
- मोहनी मुरति साँवरी सूरति, आइ बसौ इन नैनन में - Bhajan: Mohini Murat Sanwali Surat, Aai Basau In Nainan Me
- हेरी सखी मंगल गावो री - Mangal Bhajan Geet: Heri Sakhi Mangal Gavo Ri, Aaj Mere Piya Ghar Aavenge
| सीता राम, सीता राम, सीताराम कहिये - Bhajan: Sita Ram Sita Ram Sita Ram Kahiye Posted: 16 Mar 2022 05:21 AM PDT सीता राम सीता राम,सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये। मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में, तू अकेला नाहिं प्यारे, राम तेरे साथ में । विधि का विधान जान, हानि लाभ सहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ॥ सीता राम सीता राम, सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये । किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पायेगा, होगा प्यारे वही जो, श्री रामजी को भायेगा । फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ॥ सीता राम सीता राम, सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये । ज़िन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के, महलों मे राखे चाहे, झोंपड़ी मे वास दे । धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ॥ सीता राम सीता राम, सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये । आशा एक रामजी से, दूजी आशा छोड़ दे, नाता एक रामजी से, दूजे नाते तोड़ दे । साधु संग राम रंग, अंग अंग रंगिये, काम रस त्याग प्यारे, राम रस पगिये ॥ सीता राम सीता राम, सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये । |
| Posted: 16 Mar 2022 02:53 AM PDT मोहनी मुरति साँवरी सूरति, आइ बसौ इन नैनन में । अति सुन्दर रूप अनूप लिये, नित खेलत खात फिरौ वन में ॥ निशि वासर पान करूँ उसका, रसधार जो बाँसुरी की धुन में । बैकुन्ठ से धाम की चाह नहीं, बस बास करूँ वृन्दावन में ॥ पीठ से पीठ लगाइ खड़े, वह बाँसुरी मन्द बजा रहे हैं । अहोभाग्य कहूँ उस धेनु के क्या, खुद श्याम जिसे सहला रहे हैँ ॥ बछड़ा यदि कूद के दूर गयौ, पुचकार उसे बहला रहे हैं ॥ गोविंद वही, गोविंद वही, गोपाल वही कहला रहे हैं ॥ नाम पुकारि बुलाई गयी, तजि भूख और प्यास भजी चली आयी । कजरी, बजरी, धूमरि, धौरी, निज नामन से वो रहीं हैं जनायी ॥ धूप गयी और साँझ भयी तब, बाँसुरी मन्द दयी है बजायी । घनश्याम के पीछे ही पीछे चलें, वह धेनु रहीं हैं महा सुख पायी ॥ बैकुन्ठ नहीं, ब्रह्मलोक नहीं, नहीं चाह करूँ देवलोकन की । राज और पाठ की चाह नहीं, नहीं ऊँचे से कुन्ज झरोकन की ॥ चाह करूँ बस गोकुल की, यशोदा और नंद के दर्शन की । जिनके अँगना नित खेलत हैं, उन श्याम शलौने से मोहन की ॥ गोविंद हरे गोपाल हरे, जय जय प्रभु दीनदयाल हरे । इस मन्त्र का जो नित जाप करे, भव सिंन्धु से पार वो शीघ्र तरे ॥ वह भक्ती विकास करे नित ही, और पाप कटें उसके सगरे । घनश्याम के ध्यान में मस्त रहे, उर में सुख शाँति निवास करे ॥ |
| हेरी सखी मंगल गावो री - Mangal Bhajan Geet: Heri Sakhi Mangal Gavo Ri, Aaj Mere Piya Ghar Aavenge Posted: 16 Mar 2022 02:17 AM PDT चोख पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे पिया घर आवेंगे खबर सुनाऊ जो,खुशी ये बताऊँ जो, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ हेरी/ओरी सखी मंगल गावो री, धरती अम्बर सजाओ री, उतरेगी आज मेरे पिया की सवारी, हेरी कोई काजल लाओ री, मोहे काला टीका लगाओ री, उनकी छब से दिखूं में तो प्यारी, लक्ष्मी जी वारो , नजर उतारो, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ रंगो से रंग मिले, नए-नए ढंग खिले, खुशी आज द्वारे मेरे डाले है डेरा, पीहू पीहू पपीहा रटे, कुहू कुहू कोयल जपे, आँगन-आँगन है परियो ने घेरा, अनहद नाद. बजाओ रे सब-मिल, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ चोख पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे पिया घर आवेंगे खबर सुनाऊ जो, खुशी ये बताऊँ जो, आज मेरे पिया घर आवेंगे ॥ |
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