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Monday, April 11, 2022

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्रों की कॉपी CBSE वेबसाइट पर करेगा अपलोड

Posted: 10 Apr 2022 11:59 PM PDT

बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्रों की कॉपी CBSE वेबसाइट पर करेगा अपलोड

वहीं अब CBSE के एक अधिकारी (नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा है कि बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्र की कॉपी सार्वजनिक की जाएगी। 10वीं और 12वीं टॉपर्स और विषयवार छात्र की कॉपी वेबसाइट पर डाली जाएगी।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं- 12वीं टर्म 1 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। सीबीएसई ने परिणाम अपनी वेबसाइट cbse.gov.in या cbseresults.nic.in पर अपलोड नहीं किया है। परीक्षार्थी स्कूल के माध्यम से अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं।

वहीं अब CBSE के एक अधिकारी  (नाम न बताने की शर्त पर) ने कहा है कि बेहतर रिजल्ट देने वाले स्कूल और छात्र की कॉपी सार्वजनिक की जाएगी। 10वीं और 12वीं टॉपर्स और विषयवार छात्र की कॉपी आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर डाली जाएगी। वहीं अन्य छात्रों के फायदे के लिए  बोर्ड स्कूलो को भी कॉपी भेजेगा। आपको बता दें, टर्म-2 के साथ टर्म-1 का ओएमआर भी स्कूल भेजा जाएगा। इसी के साथ ओएमआर भरने की जानकारी भी दी जाएगी।

सीबीएसई टर्म 1 कक्षा 10 की परीक्षाएं 30 नवंबर से 11 दिसंबर 2021 तक आयोजित की गई थीं। वहीं कक्षा 12 के लिए टर्म 1 की परीक्षाएं 1 दिसंबर से 22 दिसंबर तक आयोजित की  गईं थी। सीबीएसई 10वीं और 12वीं की टर्म 1 परीक्षा में करीब 36 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।

CBSE Term 2 2022 : इस दिन होगी परीक्षा

सीबीएसई ने 10वीं 12वीं कक्षा की टर्म-2  परीक्षाएं 26 अप्रैल से शुरू होंगी। 10वीं की परीक्षा 24 मई को और 12वीं की परीक्षा 15 जून को खत्म होंगी। परीक्षाओं का समय सुबह 10:30 बजे से होगा। इस बार परीक्षा ( CBSE 10th 12th Term 2 Exam Date Sheet 2022 )  दो शिफ्टों में आयोजित नहीं की जाएगी। परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। छात्र cbse.gov.in व cbseacademic.nic.in पर जाकर अपनी कक्षा की डेटशीट डाउनलोड कर सकते हैं। स्टूडेंट्स को उनके एडमिट कार्ड उनके स्कूलों द्वारा ही दिए जाएंगे।

जूनियर एडेड हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती फंसी, अभ्यर्थी कर रहे परिणाम का इन्तजार

Posted: 10 Apr 2022 05:43 PM PDT

जूनियर एडेड हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती फंसी, अभ्यर्थी कर रहे परिणाम का इन्तजार


अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में भी शिक्षक भर्ती फंसी हुई है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापक के 1500 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम भी घोषित हो चुका है।


 अब परीक्षा के अंक और एकेडमिक रिकार्ड के आधार पर मेरिट बननी है और इसके बाद अंतिम चयन परिणाम घोषित किया जाएगा। इसका अभी तक कोई अतापता नहीं। अभ्यर्थी परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

गोरखपुर के 18 BEO पर भारी पड़ी स्कूलों के निरीक्षण में अनदेखी, जिलाधिकारी ने मांगा लिखित स्पष्टीकरण

Posted: 10 Apr 2022 05:29 PM PDT

गोरखपुर के 18 BEO पर भारी पड़ी स्कूलों के निरीक्षण में अनदेखी, जिलाधिकारी ने मांगा लिखित स्पष्टीकरण




गोरखपुर: परिषदीय विद्यालयों के निरीक्षण में खंड शिक्षाधिकारियों (बीईओ) की शिथिलता सामने आई है। राज्य परियोजना कार्यालय ने मिशन प्रेरणा के तहत संचालित महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं क्रियाकलाप क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय व सतत अनुश्रवण के लिए की परफारमेंस इंडीकेटर निर्धारित किया है। जिसके तहत खंड शिक्षाधिकारियों को प्रत्येक माह 40 अलग-अलग स्कूलों का निरीक्षण करना है। लेकिन मार्च माह में निरीक्षण को लेकर खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा घोर लापरवाही बरती गई। किसी ने सिर्फ चार स्कूलों का निरीक्षण किया तो किसी का खाता तक नहीं खुला।


डीएम विजय किरन आनंद ने खंड शिक्षाधिकारियों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जिले के 18 खंड शिक्षाधिकारियों को नोटिस देकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही स्पष्टीकरण न देने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। डीएम ने कहा है कि मासिक समीक्षा बैठक में निर्देश देने के बाद भी खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा निरीक्षण पूर्ण नहीं किया जा रहा है। जिसका सीधा असर विद्यालयों शिक्षकों की उपस्थिति, नामांकन तथा पठन-पाठन पर पड़ रहा है।


तीन बीईओ ने एक भी स्कूल का नहीं किया निरीक्षण: डीएम ने जिन 18 बीईओ को स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाही बरतने पर नोटिस दी है उनमें से ब्रह्मपुर, गोला व पिपराइच के बीईओ ने मार्च में एक भी स्कूल का निरीक्षण नहीं किया है। भरोहिया के बीईओ ने 32, सरदानगर के 26, जंगल कौड़ियां के 25, बांसगांव व खोराबार के 20-20, गगहा के 18, पिपरौली के 19, बड़हलगंज के 12, कौड़ीराम के नौ, पाली के 10, चरगांवा के सात, खजनी के पांच, बेलघाट व भटहट के चार चार तथा सहजनवां के बीईओ द्वारा एक स्कूल का निरीक्षण शामिल है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में 31 अगस्त तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद

Posted: 10 Apr 2022 05:23 PM PDT

उच्च शिक्षण संस्थानों में 31 अगस्त तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद



 नई दिल्ली: देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों का पद अब लंबे समय तक खाली नहीं रहेगा। खाली होने से पहले ही उन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। शिक्षकों के खाली पदों को भरने में देरी को लेकर कोई बहाना भी नहीं चलेगा। शिक्षा मंत्रलय ने इसको लेकर एक विस्तृत योजना बनाने का काम शुरू कर दिया है। 


हालांकि, इससे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को मिशन मोड में भरने का निर्देश दिया है। इस काम को पूरा करने के लिए 31 अगस्त, 2022 तक की समय सीमा भी निर्धारित की है। ध्यान रहे कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सचिवों के साथ बैठक में सभी मंत्रलयों और विभागों में खाली पदों को भरने का निर्देश दिया था।


उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में एक बड़ी बाधा बन रही है। मंत्रलय ने इसको भांप कर पिछले साल ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने की मुहिम छेड़ी थी। 


खुद शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने देशभर के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सीधी चर्चा की थी। हालांकि, उन्होंने सभी से तीन महीने के भीतर ही खाली पदों के विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पूर्णकालिक कुलपति न होने से यह मामला लटका रहा। अब इसमें नए सिरे से तेजी आई है। मंत्रलय के मुताबिक, शिक्षकों के करीब साढ़े आठ हजार पदों के लिए अब तक विज्ञापन जारी किए गए हैं।


शिक्षा मंत्रलय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के 11 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। इनमें साढ़े छह हजार पद अकेले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली हैं। आइआइटी में शिक्षकों के करीब 4,300 और आइआइएम में 422 पद खाली हैं। यह स्थिति तब है, जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या करीब 19 हजार है। आइआइटी में 11 हजार और आइआइएम में करीब 1,500 स्वीकृत पद हैं।


मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, देश के इन शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शिक्षकों की संख्या भी बढ़नी चाहिए।

लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

Posted: 10 Apr 2022 05:34 PM PDT

लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

यूनेस्को की रिपोर्ट का दावा, 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल से दूर

लड़कियों के मुकाबले लड़कों के एक ही कक्षा में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक: यूनेस्को



उच्च माध्यमिक कक्षाओं में भी लड़कों की संख्या कम

● 57 देशों में पढ़ पाने के कौशल में 10 वर्ष की उम्र के लड़के लड़कियों की तुलना में पीछे।

● 73 देशों में उच्च माध्यमिक कक्षाओं में लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या कम।

● 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षां में फिर अधिक पढ़ने की संभावना।


नई दिल्ली : लड़कियों की तुलना में लड़कों के एक ही कक्षा दोहराने की संभावना ज्यादा होती है। शारीरिक रूप से दंडित किए जाने का खतरा भी लड़कों को ही अधिक होता है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की एक वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 142 में से 130 देशों में ये हालात पाए गए हैं।


'लीव नो चाइल्ड बिहाइंड : ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेज्मेन्ट फ्रॉम एजुकेशन' शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। रिपोर्ट में शिक्षा से लड़कों के इस तरह के अलगाव के पीछे कड़े अनुशासन, शारीरिक दंड, गरीबी और काम करने की आवश्यकता को कारण बताया गया है।


गरीबी भी वजह: गरीबी और घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत लड़कों को स्कूल से दूर करती है। इन वजहों से लड़कियों के कभी स्कूल नहीं जा पाने की अधिक आशंका होती है, लेकिन लड़कों के आगे की कक्षाओं में नहीं पढ़ पाने और अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाने का खतरा अधिक है।



नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की नई 'वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक है। 'लीव नो चाइल्ड बिहाइंड: ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेजमेंट फ्रॉम एजुकेशन' शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक तौर पर लड़कियों के मुकाबले लड़कों को परेशान किए जाने का खतरा अधिक होता है। इसमें कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में फिर से पढ़ने की अधिक संभावना है और ये आंकड़े स्कूल में आगे की कक्षाओं में जाने की उनकी खराब गति की ओर इशारा करती है।


लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार अब भी दूर
लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार का ध्येय अब तक पूरा नहीं हुआ है। काफी बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूल से बाहर हैं। कोरोना महामारी ने पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या और तेजी से बढ़ाई है। 2020 में महामारी के पहले स्कूल में 25 करोड़ 90 लाख बच्चे थे, जिनमें से 13 करोड़ 20 लाख लड़के थे।

अपने परिवारों से दूर प्राइमरी शिक्षकों को नई तबादला नीति का बेसब्री से इंतजार, स्थायी नीति न होने के कारण बीते 10 सालों में केवल पांच बार ही तबादले हो सके।

Posted: 10 Apr 2022 05:10 PM PDT

अपने परिवारों से दूर प्राइमरी शिक्षकों को नई तबादला नीति का बेसब्री से इंतजार, स्थायी नीति न होने के कारण बीते 10 सालों में केवल पांच बार ही तबादले हो सके।



लखनऊ। मेरठ की मृदुला पालीवाल बलरामपुर में शिक्षिका हैं। वर्ष 2015 में नियुक्ति हुईं। पति प्राइवेट नौकरी में हैं और छोटे बच्चे मेरठ में उनके साथ ही हैं। बच्चों को संभालने और परवरिश में खासी दिक्कतें आती हैं। गाजियाबाद की रुचि श्रावस्ती में शिक्षिका हैं और लम्बे समय से अंतरजनपदीय तबादले की राह ताक रही हैं।


नई सरकार से उम्मीदें: ये सिर्फ बानगी भर हैं, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां शिक्षिका पत्नी अपने परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। अब नई सरकार के कामकाज शुरू करने के साथ ही नया सत्र शुरू हो चुका है और तबादले की राह देख रहे शिक्षकों को नई सरकार से उम्मीद बंधी है। तबादले की कोई स्थायी नीति न होने के कारण बीते 10 सालों में केवल पांच बार ही तबादले हुए हैं।


पिछली बार तबादले वर्ष 2019- 2020 में हुए थे। इसके लिए आदेश 2019 में जारी हुआ, सरकार ने तबादले के लाभार्थियों की संख्या अगस्त 2020 में जारी की और तबादले की सूची दिसम्बर 2020 में जारी हो पाई।


स्थायी नीति नहीं फिर भी सरकार करती है सहानुभूति पूर्ण फैसला: अंतरजनपदीय तबादलों की कोई स्थायी नीति नहीं है। जब भी अंतजरनपदीय तबादले करने होते हैं, सरकार नए सिरे से नीति बनाती है। 10 से लेकर पांच व तीन साल तक अनिवार्य सेवा का नियम समेत अब मेरिट सूची बनाने के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं। पिछली बार सरकार ने महिला शिक्षकों के लिए एक वर्ष की सेवा और पुरुष शिक्षकों के लिए तीन वर्ष की सेवा का अनिवार्य नियम बनाया था लेकिन हाईकोर्ट ने इस नियम को खारिज कर महिलाओं के लिए तीन वर्ष व पुरुष शिक्षकों के लिए पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य की। इस फैसले के चलते 2020 में 50 फीसदी से ज्यादा शिक्षक अपात्र हो गए।


कम कटआफ होने से मिलती है दूर के जिले में तैनाती: बड़े शहरों में रिक्त पद कम होने के कारण कटऑफ बहुत ऊंचा ज्यादा है जबकि पिछड़े आठ जिलों समेत पूर्वांचल के कई जिलों की मेरिट काफी नीचे होती है। यही कारण है कि बड़े शहरों के अभ्यर्थी कम कटऑफ होने के कारण छोटे जिलों में नियुक्ति पाते हैं। इसके बाद शादी या अन्य कारणों से शिक्षक अपने परिवार के पास तबादला करवाना चाहते हैं।


सरकार को उन महिला शिक्षकों के बारे में सोचना चाहिए जो परिवार को छोड़ कर अलग रह रही हैं। इसके लिए एक स्थायी नीति बनानी चाहिए। - संतोष तिवारी-प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन


मैं कन्नौज की हूं। मैं पिछड़े जिले बलरामपुर में नियुक्त हूं। पति गाजियाबाद में प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। हर वर्ष सोचती हूं कि शायद इस बार तबादला हो जाए। - अर्चना दीक्षित, शिक्षिका, बलरामपुर




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