प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैरशैक्षणिक कार्मिकों की उपस्थिति बायोमीट्रिक प्रणाली से अनिवार्य रूप से दर्ज कराये जाने व तदनुरूप वेतन आहरण व्यवस्था लागू करने विषयक
- UP board result : यूपी बोर्ड की फीस बढ़ी, लेकिन पारिश्रमिक नहीं, शिक्षकों ने की यूपी बोर्ड में मेहनताना बढ़ाने की मांग
- घोर लापरवाही : 1.65 लाख छात्रों का डाटा फॉरवर्ड करना भूल गए अफसर और संस्थान
- कम हो जाएंगे प्रधानाध्यापक के हजारों पद, कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक स्कूलों में नहीं होगा प्रधानाध्यापक का पद
- निजी स्कूलों में पढ़ रहीं दो बहनों में से एक की फीस माफ करने की मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन में अफसर जुटे
- 97 हजार शिक्षक भर्ती के लिए बेरोजगार RTI को बनाएंगे हथियार
- DIOS बताएं - 4.16 लाख बच्चों ने क्यों छोड़ दी यूपी बोर्ड परीक्षा?
| Posted: 18 Apr 2022 10:16 AM PDT |
| Posted: 17 Apr 2022 10:58 PM PDT UP board result : यूपी बोर्ड की फीस बढ़ी, लेकिन पारिश्रमिक नहीं, शिक्षकों ने की यूपी बोर्ड में मेहनताना बढ़ाने की मांग पेट्रोल के दाम बढ़े, महंगाई बढ़ी लेकिन शिक्षकों का पारिश्रमिक नहीं बढ़ा। शिक्षकों का दावा है कि यूपी बोर्ड में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करने से लेकर कॉपियां जांचने तक में पारिश्रमिक कम है। लिहाजा उन्होंने पारिश्रमिक बढ़ाने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को मांग पत्र सौंप दिया है। शिक्षकों की मांग है कि यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का पारिश्रमिक बहुत कम है। इसे सीबीएसई के समकक्ष किया जाए। इससे पहले राज्य सरकार ने 2019 में पारिश्रमिक बढ़ाया था। वर्ष 2019 से पहले 2015 में और इससे पहले 2013 में पारिश्रमिक बढ़ाया गया। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2013 में 20 वर्षों बाद दरें बढ़ाई गईं। लिहाजा अब भी दरें बहुत कम हैं। वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने कॉपियां जांचने के लिए हाईस्कूल में प्रति कॉपी 8 से बढ़ाकर 11 रुपये और इण्टरमीडिएट में 11 से बढ़ाकर 13 रुपये किया। सीबीएसई 25 रुपये प्रति कॉपी देता है। वर्ष 2019 में यूपी बोर्ड ने पहली बार मूल्यांकन केन्द्रों पर 20 रुपये की दर से जलपान व्यय तय किया गया। शिक्षक नेता अजय सिंह कहते हैं कि अब जबकि एक चाय के दाम भी सात से 10 रुपये हो चुके हैं तब ये दरें बहुत कम है। इसी तरह वाहन भत्ता 27 रुपये है इसमें रिक्शा तक नहीं मिलता जबकि सीबीएसई 250 रुपये देता है। हमने पिछले महीने शैक्षिक सत्र 2019-20 के बचे हुए पारिश्रमिक के बकाए के भुगतान के लिए धरना दिया था। हमने सीबीएसई के बराबर मानदेय की मांग भी रखी है। डा. आरपी मिश्र, प्रदेश मंत्री, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) हमने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को अपना मांग पत्र सौंप दिया है। हम सरकार की प्रतिक्रया का इंतजार कर रहे हैं। डा. महेन्द्र नाथ राय, प्रदेश मंत्री, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चेत नारायण गुट) ऑनलाइन मिलेगा पारिश्रमिक इस वर्ष राज्य सरकार ने बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों समेत मूल्यांकन के लिए भी सॉफ्टवेयर के माध्यम से ड्यूटी लगाई है। सरकार के फैसले के मुताबिक, परीक्षा के बाद इनके खाते में सीधे पारिश्रमिक पहुंच जाएगा। पहली बार सरकार इस तरीके से भुगतान करेगी, इससे बकाया खत्म होगा। |
| घोर लापरवाही : 1.65 लाख छात्रों का डाटा फॉरवर्ड करना भूल गए अफसर और संस्थान Posted: 17 Apr 2022 10:51 PM PDT घोर लापरवाही : 1.65 लाख छात्रों का डाटा फॉरवर्ड करना भूल गए अफसर और संस्थान समाज कल्याण विभाग के अफसरों की अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ बड़ी लापरवाही सामने आई है। अफसर डाटा अग्रसारित करना ही भूल गए। अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। समाज कल्याण विभाग के जिलास्तरीय अधिकारी और शिक्षण संस्थान 1.65 लाख छात्रों का डाटा ही अग्रसारित करना भूल गए। मामला सामने आने पर शासन ने संज्ञान लिया। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से अनुमति लेकर इनका डाटा अग्रसारित करने के लिए पोर्टल पर विकल्प दे दिया गया है। अब इन छात्रों को चालू वित्त वर्ष के बजट में प्रावधान करके भुगतान किया जाएगा। केंद्र व राज्य सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना पारिवारिक आय वाले अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की सुविधा देती है। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र व 40 प्रतिशत राज्य सरकार की होती है। 2021-22 में एससी वर्ग के कुल 11.7 लाख छात्रों को भुगतान किया गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों के खातों में राशि नहीं पहुंची तो उन्होंने शिकायतें कीं। संस्थानों और जिलास्तरीय अधिकारियों से संतोषजनक जवाब न मिलने पर मामला शासन तक पहुंच गया। इस योजना में छात्रों से 10 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। पता चला कि इनमें से 1.65 लाख छात्रों के आवेदन संस्थान या जिलास्तर पर पेंडिंग पड़े हैं। छात्रवृत्ति में केंद्र सरकार का भी शेयर होता है। इसलिए उच्चस्तरीय वार्ता के बाद इन छात्रों का डाटा जिलास्तर से फॉरवर्ड करने का फैसला किया गया। इसके लिए 27 अप्रैल तक की तिथि दी गई है। 28 व 29 अप्रैल को भुगतान का बिल जेनरेट होगा। इसके बाद छात्रवृत्ति के केंद्र सरकार के पोर्टल पर संबंधित डाटा को साझा किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि भुगतान के लिए जरूरी प्रक्रिया अप्रैल में ही पूरी कर ली जाएगी। खातों में राशि तभी भेजी जा सकेगी, जब इसके लिए चालू वित्त वर्ष के बजट में इसका प्रावधान हो जाएगा। हालांकि, उच्चस्तरीय सहमति मिलने के कारण इसमें दिक्कत नहीं आएगी। |
| Posted: 17 Apr 2022 11:05 PM PDT कम हो जाएंगे प्रधानाध्यापक के हजारों पद, कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक स्कूलों में नहीं होगा प्रधानाध्यापक का पद संविलयन के बाद प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक का पदनाम देने का निर्देश लखनऊ। एक ही परिसर में संचालित बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संविलियन के बाद परिषदीय स्कूलों में प्रधानाध्यापक के हजारों पद कम हो जाएंगे। शासन ने संविलयन के बाद प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को जूनियर हाई स्कूल में सहायक अध्यापक का पद देने निर्देश दिए हैं। शासन के निर्देश पर एक ही परिसर संचालित प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल का संविलियन किया गया है। हालांकि कुछ विद्यालय ऐसे हैं जहां संविलियन ठीक से नहीं हुआ है। इससे पदों के निर्धारण में गड़बड़ी हो रही है। परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने निर्देश दिए हैं कि संविलियन ठीक ढंग से किया जाए और संविलित विद्यालयों का यूडाइस कोड सही अंकित किया जाए। उधर, संविलियन के बाद बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त हो रहे हैं। परिषद के सचिव ने इसका भी आदेश जारी कर दिया है। शिक्षक संघ ने जताई आपत्तिः उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने परिषदीय स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पदों में कमी पर आपत्ति की है। उन्होंने बताया कि सरकार सौ से कम छात्र संख्या वाले जूनियर हाई स्कूल और 150 से कम संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद नहीं दे रही है। प्रदेश में हजारों की संख्या में ऐसे स्कूल हैं जहां छात्र संख्या कम है इसके चलते प्रधानाध्यापक पद समाप्त हो रहे । वहीं संविलियन से भी प्रधानाध्यापक के पद समाप्त हो रहे है। इससे 30-35 वर्ष की सेवा के बाद भी शिक्षक सहायक अध्यापक पद से ही सेवानिवृत्त हो रहे है। उन्होंने सरकार से प्रत्येक जूनियर हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक का पद सृजित करने की मांग की है। |
| Posted: 17 Apr 2022 05:51 PM PDT निजी स्कूलों में पढ़ रहीं दो बहनों में से एक की फीस माफ करने की मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन में अफसर जुटे प्रयागराज । निजी स्कूलों में पढ़ रहीं दो बहनों में से एक की फीस माफ करने की मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रियान्वयन में अफसर जुट गए हैं। अपर शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने 13 अप्रैल को पत्र जारी कर सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों से प्रस्ताव मांगा है। यह भी पूछा कि इसके लिए पड़ने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति किस मद से की जाएगी। इससे सालाना ढाई लाख रुपये तक आमदनी वाले अभिभावकों को राहत मिलेगी। तय प्रोफॉर्मा पर जिला, छात्रा, अध्ययनरत विद्यालय, पिता का नाम और छात्रा से कितनी ट्यूशन फीस ली जा रही है, की जानकारी देनी है। मुख्यमंत्री ने पिछले साल गांधी जयंती पर निजी स्कूलों से अपील की थी कि दो बहनें एक साथ पढ़ रही हों तो एक की फीस माफ हो। अगर निजी स्कूल ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित विभाग एक छात्रा की फीस का प्रबंध करें। इसके बाद मुख्यमंत्री घोषणा प्रकोष्ठ के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने इस संबंध में आदेश दिए थे। |
| 97 हजार शिक्षक भर्ती के लिए बेरोजगार RTI को बनाएंगे हथियार Posted: 18 Apr 2022 06:35 AM PDT परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 97 हजार पदों पर भर्ती का दबाव बनाने को RTI अभियान 97 हजार शिक्षक भर्ती के लिए बेरोजगार RTI को बनाएंगे हथियार प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 97 हजार पदों पर भर्ती के लिए बेरोजगारों ने सोमवार से आरटीआई अभियान चलाने का निर्णय लिया है। डीएलएड (पूर्व में बीटीसी)/बीएड और टीईटी/सीटीईटी पास युवा बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों से जन सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन भेजकर रिक्त पदों के संबंध में जानकारी मांगेंगे। पूछेंगे कि 2017 से 2021 तक परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों से कितने सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त हुए। 31 मार्च 2022 तक कुद रिक्त पदों की अलग-अलग संख्या, 31 मार्च 2022 तक इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं की संख्या, प्रदेश में कुल कितने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं जहां केवल एक शिक्षक अध्यापन कर रहा है। कितने स्कूल हैं जहां शिक्षक-छात्र अनुपात मानक के अनुसार नहीं है, कितने स्कूल बंद हुए और कितनों को मर्ज किया गया, प्रदेश में कुल कितने ऐसे शिक्षक हैं जिनकी पिछले पांच सालों में पदोन्नति नहीं की गई और उसका क्या कारण था। पंकज मिश्रा, अभिषेक तिवारी, पवन पांडेय, मनोज यादव, रवि शुक्ला आदि का कहना है कि टीईटी का परिणाम घोषित हो चुका है। अब सरकार को नई भर्ती जल्द से जल्द शुरू करनी चाहिए। |
| DIOS बताएं - 4.16 लाख बच्चों ने क्यों छोड़ दी यूपी बोर्ड परीक्षा? Posted: 18 Apr 2022 06:33 AM PDT यूपी बोर्ड ने जनपदों से 4.16 लाख बच्चों का परीक्षा छोड़ने का पूछा कारण DIOS बताएं - 4.16 लाख बच्चों ने क्यों छोड़ दी यूपी बोर्ड परीक्षा? प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 4.16 लाख छात्र-छात्राओं के शामिल न होने का कारण पूछा गया है। सचिव यूपी बोर्ड दिब्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को 13 अप्रैल को पत्र लिखकर 18 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। पूछा है कि 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा के कितने प्राइवेट व रेगुलर अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था और उनमें से कितनों ने परीक्षा छोड़ दी। परीक्षा में प्रतिभाग न करने का क्या कारण रहा। 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत 5192689 परीक्षार्थियों में से 416940 अनुपस्थित रहे थे। इनमें के 256647 और इंटरमीडिएट के 160293 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। |
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