प्राइमरी का मास्टर ● इन - 🌐

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Sunday, April 3, 2022

प्राइमरी का मास्टर ● इन

प्राइमरी का मास्टर ● इन


CUET 2022 : अब 6 अप्रैल से शुरू होंगे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन, यहां जानें अहम डिटेल्स

Posted: 03 Apr 2022 05:52 PM PDT

CUET 2022 : अब 6 अप्रैल से शुरू होंगे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन, यहां जानें अहम डिटेल्स

एनटीए ने CUET 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी है। प्रवेश परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली में एक लैंग्वेज टेस्ट दो विषय-विशिष्ट प्रश्नपत्र और एक जनरल टेस्ट होगा। वहीं सेकेंड शिफ्ट में चार डोमेन-विशिष्ट विषय और विकल्प भाषा विषय शामिल हैं।


नई दिल्ली : CUET 2022: कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (Common Universities Entrance Test, CUET 2022) के लिए रजिस्ट्रेशन की शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। एग्जाम आयोजित कराने वाली एजेंसी यानी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency, NTA) द्वारा 02 अप्रैल को जारी अपडेट के अनुसार cuet.samarth.ac.in पर 6 अप्रैल से आवेदन पत्र जारी होंगे। इस आवेदन फॉर्म को 6 मई तक जमा करना होगा। ऐसे में स्टूडेंट्स ध्यान दें कि, जो भी स्टूडेंट्स यूजी प्रोगाम में प्रवेश लेना चाहते हैं, उन्हें इस दौरान तक फॉर्म भरकर सबमिट करना होगा, क्योंकि इसके बाद उन्हें दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा। वहीं इस परीक्षा के माध्यम से देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में शुमार, DU, Jamia, JNU सहित अन्य सेंट्रल यूनिवर्सिटी दाखिले दिया जाएगा। 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) यह परीक्षा सीबीटी मोड में आयोजित कराएगी। यह परीक्षा छात्रों को देश भर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के यूजी प्रोगाम में एडमिशन लेने के लिए एक एग्जाम होगा। इससे स्टूडेंट्स को 12वीं में कम अंक आने के चलते मनचाही यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं ले पाने की दिक्कत से छुटकारा मिल सकेगा।

CUET 2022 के लिए जारी लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, प्रवेश परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली में एक लैंग्वेज टेस्ट, दो विषय-विशिष्ट प्रश्नपत्र और एक जनरल टेस्ट होगा। वहीं सेकेंड शिफ्ट में चार डोमेन-विशिष्ट विषय और विकल्प भाषा विषय शामिल हैं।

कौन कर सकता है अप्लाई

CUET 2022 के लिए स्टूडेंट्स को को किसी मान्यता प्राप्त राज्य या नेशनल स्कूल बोर्ड से न्यूनतम 50% कुल अंकों के साथ कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

13 भाषाओं में होगी परीक्षा

CUET 2022 का आयोजन 13 भाषाओं में होगा। इनमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, उड़िया, बंगाली, असमिया, पंजाबी, अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू सहित 13 भाषाओं में आयोजित किया जाएगा। 

स्टूडेंट्स ध्यान दें कि CUET परीक्षा में सभी प्रश्न 12वीं कक्षा के सेलेबस से पूछे जाएंगे। इसके अलावा, सीयूईटी सिलेबस 12वीं के NCERT बुक्स पर आधारित होता है। वहीं परीक्षा की तारीख जल्द ही NTA की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के लिए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स को 10वीं की मार्कशीट 12वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट साइज फोटो, स्टूडेंटस सिग्नेचर, फोटो आईडी प्रूफ, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित डॉक्यूमेंट्स होना चाहिए। इसके साथ ही कैटेगिरी सार्टिफिकेट होना चाहिए।

वहीं  कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

68500 शिक्षक भर्ती : जिला आवंटन के लिए शिक्षकों के आवेदन फंसे, नहीं खुल रही वेबसाइट

Posted: 03 Apr 2022 05:55 PM PDT

68500 शिक्षक भर्ती : जिला आवंटन के लिए शिक्षकों के आवेदन फंसे, नहीं खुल रही वेबसाइट




68,500 शिक्षक भर्ती के चयनितों को पसंदीदी जिला न मिलने का मामला तूल पकड़ चुका है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद ने चयनित अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए वाट्सएप नंबर 8005379280 जारी किया है।

जिन अभ्यर्थियों का आवेदन फार्म भरने में डाटा नाटफाउंड प्रदर्शित हो रहा है, वो उक्त नंबर पर चार अप्रैल को दोपहर 12 बजे तक प्रत्यावेदन भेज दें। ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन फार्म पांच अप्रैल को भरे जाएंगे।


हाल ही में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने गाइड लाइन जारी की, जिसके तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले शिक्षकों को जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन का मौका दिया गया।


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षक भर्ती के तहत चयनित मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (एमआरसी) के अभ्यर्थी मनपसंद जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। जनपद आवंटन के लिए अधिकतर शिक्षकों के फॉर्म नहीं खुल पा रहे हैं, जबकि फॉर्म भरने के लिए दो दिन शेष रह गए हैं। इस मसले पर चयनित सहायक अध्यापकों ने रविवार को शिक्षा निदेशालय में बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में विभिन्न जनपदों से शामिल सहायक अध्यापक शनी कुमार सिंह, आलोक शुक्ला, नवीन सिंह, सचिन गौतम, श्यामू वर्मा, सुनील प्रजापति, अश्विनी गुप्ता, अखिलेश यादव, शैलेंद्र मणि, अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन में विसंगति के कारण जिला आवंटन की प्रक्रिया फंस गई है। 68500 शिक्षक भर्ती में शिक्षकों का जनपद आवंटन गलत तरीके से किया गया था।


मनपसंद जिले का किया जाना है चयन
हाल ही में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने गाइड लाइन जारी की, जिसके तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले शिक्षकों को जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन आवेदन का मौका दिया गया, लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर शिक्षकों का जनपद आवंटन के लिए फॉर्म नहीं खुल पा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि सचिव कार्यालय से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। उनकी मांग है कि व्हाट्सएप में प्रत्यावेदन और याचिकाओं से संबंधित विवरण न लेकर सभी याचिकाकर्ताओं के ऑनलाइन आवेदन के लिए फॉर्म खोल दिया जाए, जिससे सभी शिक्षक जल्द से जल्द आवेदन कर अपने पसंदीदा जनपद का चुनाव कर सकें।

अगर तकनीकी दिक्कत है तो सभी शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प खोल देना चाहिए। इसके बाद जिलों में काउंसलिंग के माध्यम से उनका सत्यापन करा लिया जाए। अगर कोई शिक्षक याची नहीं है और गलत तरीके से लाभ लेने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ  कार्रवाई की जाए। 



एक दिन बढ़ाई आवेदन की तिथि
बेसिक शिक्षा परिषद ने एमआरसी अभ्यर्थियों के जिला आवंटन के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि पांच अप्रैल तक बढ़ा दी है। पहले चार अप्रैल तक आवेदन मांगे गए थे।

UPTET : उ0प्र0 शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 का परिणाम इसी सप्ताह

Posted: 03 Apr 2022 05:21 PM PDT

UPTET : उ0प्र0 शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 का परिणाम इसी सप्ताह


 
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) का परिणाम इसी सप्ताह घोषित होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। संशोधित उत्तरकुंजी और परिणाम इसी हफ्ते आने की उम्मीद है। 22 दिसंबर के शासनादेश के अनुसार 23 फरवरी को संशोधित उत्तरकुंजी और 25 फरवरी को परिणाम घोषित होना था।


विधानसभा चुनाव के कारण परिणाम जारी नहीं हो सके थे। चुनाव के बाद शपथग्रहण और मंत्रिमंडल गठन में समय लग गया। सूत्रों के अनुसार परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने तैयारी पूरी कर ली है। शासन की अनुमति मिलने के बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा।

"स्कूल चलो अभियान-2022" शुभारम्भ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखने वालों की संख्या का विवरण उपलब्ध कराये जाने हेतु लगाई गई ड्यूटी, देखें आदेश

Posted: 03 Apr 2022 07:36 AM PDT

"स्कूल चलो अभियान-2022" शुभारम्भ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखने वालों की संख्या का विवरण उपलब्ध कराये जाने हेतु लगाई गई ड्यूटी, देखें आदेश


देखें Live : स्कूल चलो कार्यक्रम का सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा शुभारंभ School Chalo Abhiyan 2022 Yogi Adityanath

Posted: 03 Apr 2022 06:12 PM PDT

देखें Live : स्कूल चलो कार्यक्रम का सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा शुभारंभ  School Chalo Abhiyan 2022 Yogi Adityanath 

दिनांक: 04/04/2022 को माननीय मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से जनपद श्रावस्ती में "स्कूल चलो अभियान" का शुभारम्भ किय जाएगा। उक्त कार्यक्रम का दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्राइमरी चैनल पर प्रातः 10:00 बजे से लाईव प्रसारण किया जाएगा तथा यू-ट्यूब पर  https://youtu.be/lYa9P5gJmns लिंक के माध्यम से देखा जा सकेगा।


🔴 नीचे क्लिक करके देखें Live कार्यक्रम 👇




दो करोड़ नामांकन लक्ष्य के साथ स्कूल चलो अभियान आज से

लखनऊ : स्कूल की पढ़ाई से छूटे हुए बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रदेश में सोमवार से स्कूल चलो अभियान संचालित किया जाएगा। इसके तहत वर्ष पांच साल से अधिक उम्र से लेकर 14 वर्ष तक के ऐसे बच्चे, जो कभी स्कूल नहीं गए या ड्रापआउट हैं, उन्हें चिह्न्ति कर उनका परिषदीय स्कूलों में नामांकन कराया जाएगा।

ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करने के लिए घर-घर सर्वेक्षण अभियान 30 अप्रैल तक चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को श्रवस्ती में स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ करेंगे। कोरोना काल के दौरान पिछले दो शैक्षिक सत्रों के दौरान स्कूल चलो अभियान नहीं संचालित किया जा सका था।

परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही थी, लेकिन शैक्षिक सत्र 2017-18 से यह ढर्रा बदला। बच्चों की संख्या में आ रही गिरावट न सिर्फ उस वर्ष थमी बल्कि उसके बाद से साल दर साल छात्र नामांकन का ग्राफ बढ़ता गया। शैक्षिक सत्र 2021-22 परिषदीय स्कूलों में 1.73 करोड़ बच्चे नामांकित थे। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को स्कूल चलो अभियान के दौरान परिषदीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाकर दो करोड़ करने का लक्ष्य दिया है।

 वहीं, विद्यालय स्तर पर बच्चों का अधिक से अधिक नामांकन कराने के लिए परिषदीय स्कूलों में विद्यालयों के शिक्षक स्थानीय समुदाय, विद्यालय प्रबंध समिति व मां समिति के सदस्यों के सहयोग से घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्न्ति करेंगे और अभिभावकों को बच्चे का स्कूल में नामांकन कराने के लिए प्रेरित करेंगे।

 इस दौरान आउट आफ स्कूल बच्चों के चिन्हांकन, छात्र नामांकन, बच्चों की उपस्थिति आदि का विश्लेषण करते हुए जिला व ब्लाक स्तर पर भी गोष्ठियां व कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। साथ ही मंडल, जिला और ब्लाक स्तरीय सभी शिक्षा अधिकारी भी गांवो में पहुंचकर अभिभावकों को बच्चों के नामांकन के लिए प्रेरित करेंगे।


School Chalo Abhiyan : सौ फीसदी नामांकन लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश में आज से शुरू होगा स्कूल चलो अभियान, सीएम योगी करेंगे आगाज


स्कूल चलो अभियान का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करना है।  

आबादी के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके तहत राज्य में सोमवार, 04 अप्रैल, 2022 से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विधायकों को एक-एक स्कूल गोद लेने के निर्देश भी दिए हैं। अभियान के तहत स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही छात्रों को यूनिफॉर्म और जूते-मोजे भी उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, शौचालय, पेयजल, पर्याप्त फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्ध सुनिश्चित की जाएगी।

100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री की योजना के अनुसार, स्कूल चलो अभियान का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि परिषद के स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में बच्चों के नामांकन के लिए स्कूल चलो अभियान चार अप्रैल से शुरू होगा। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा श्रावस्ती में सोमवार सुबह 10 बजे करेंगे। समारोह का सभी विद्यालयों में सीधा प्रसारण किया जाएगा।
 
30 अप्रैल तक चलेगा अभियान
बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि 30 अप्रैल तक चलने वाले अभियान में सर्वाधिक बच्चों का नामांकन करने वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने और प्रतिदिन स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे और मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे। समारोह में सीएम के साथ बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी शामिल होंगे। जिलों में स्थानीय मंत्री, सांसद और विधायक अभियान के शुभारंभ समारोह में शामिल होंगे।

श्रावस्ती जिले में राज्य में सबसे कम साक्षरता दर
यह अभियान राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा के भविष्य को आकार देने और प्राथमिक विद्यालयों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कम साक्षरता दर वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाए और राज्य के प्राथमिक स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाए। श्रावस्ती जिले में राज्य में सबसे कम साक्षरता दर है, इसके बाद बहराइच, बलरामपुर, बदायूं और रामपुर आते हैं। सीएम योगी ने कहा कि सरकारी स्कूलों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत नया रूप दिया जाएगा।  


विधायकों को भी गोद लेना होगा स्कूल

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और विधायकों को स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी की योजनानुसार जनप्रतिनिधि न केवल अभियान से जुड़ेंगे, बल्कि विधायकों को एक-एक स्कूल गोद लेना होगा। इसके अलावा, अधिकारियों को भी एक-एक स्कूल के समग्र विकास पर ध्यान देना होगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग को सभी सरकारी स्कूलों को छात्रों को शौचालय, पीने का पानी, फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।


साथ ही कार्यक्रम का सीधा प्रसारण CM हैंडल पर निम्न लिंक्स के माध्यम से भी देखा जा सकेगा:-

१) Youtube (यू-ट्यूब पर)

२) Twitter

३)Facebook

अतः अपेक्षित है कि इस कार्यक्रम की जानकारी समस्त अभिभावकों, शिक्षकों, एस०आर०जी०, ए०आर०पी०  में प्रसारित करें, जिससे अधिक से अधिक जन समुदाय उक्त कार्यक्रम को देखकर लाभान्वित हो सके।

महानिदेशक
स्कूल शिक्षा, उ०प्र०

सुधार का प्रयास : स्कूली भोजन की गुणवत्ता परखेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र

Posted: 02 Apr 2022 06:33 PM PDT

सुधार का प्रयास : स्कूली भोजन की गुणवत्ता परखेंगे उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र

नई दिल्ली: कोरोना काल के बाद देश भर के स्कूल अब पूरी तरह से खुल गए हैं। सरकार का फोकस स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने को लेकर है। इस लिहाज से जो अहम कदम उठाए गए हैं, उनमें स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को परखने का जिम्मा अब उच्च शिक्षण संस्थानों को दिया गया है। उन्हें स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन को जांचना होगा औक खुद भी उसे चखकर उसकी रेटिंग करनी होगी।


पीएम पोषण के नाम से (पहले मिड डे मील) स्कूली बच्चों को गर्मागर्म भोजन मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही इस स्कीम में शिक्षा मंत्रालय का सबसे ज्यादा फोकस गुणवत्ता को बेहतर बनाने को लेकर है। नई पहल के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के फूड एंड न्यूट्रिशन विभाग में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अनिवार्य रूप से एक स्कूल का दौरा करना होगा। जो उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होगा। इस दौरान छात्रों को मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया एक फार्मेट भी भरना होगा, जिसमें भोजन से जुड़ी करीब 25 जानकारियां देनी होंगी। इतना ही नहीं, छात्रों को रिपोर्ट सीधे शिक्षा मंत्रालय को मेल पर भेजनी होगी। उन्हें बताना होगा कि खाना अच्छा, सामान्य या फिर खराब है।

यूपी में अजब गजब : मैनपुरी में मास्टर जी पकड़ेंगे गोवंश और आगरा में करेंगे बीएसए कार्यालय की चौकीदारी।

Posted: 02 Apr 2022 06:10 PM PDT

यूपी में अजब गजब : मैनपुरी में मास्टर जी पकड़ेंगे गोवंश और आगरा में करेंगे बीएसए कार्यालय की चौकीदारी।



● हर माह की 5, 15 और 25 तारीख को निराश्रित गोवंश पकड़ेंगे मास्टर जी

● आगरा बीएसए कार्यालय की सुरक्षा में रोस्टर से 20 शिक्षक करेंगे चौकीदारी


जनगणना, चुनाव ड्यूटी समेत तमाम काम 'ढो' रहे मास्टर जी अब निराश्रित गोवंश पकड़ेंगे और चौकीदारी भी करेंगे। आगरा में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की सुरक्षा के लिए बाकायदा रोस्टर जारी करके शिक्षकों की चौकीदारी करने के लिए ड्यूटी लगाई गई है तो मैनपुरी में मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र में शिक्षकों को निराश्रित गोवंश पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक संगठनों ने इन अजब-गजब 'ड्यूटियों' को लेकर आक्रोश जताया है। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट कर इस पर सवाल उठाए हैं।



मैनपुरी में सीडीओ विनोद कुमार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं कि जनपद के शिक्षक आवारा गोवंश को पकड़ने में प्रशासन की मदद करेंगे। इसके लिए बीएसए, एबीएसए और परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली जाएगी। प्रत्येक माह की 5, 15 और 25 तारीख को अभियान चलाकर निराश्रित गोवंश पकड़े जाएंगे। इस काम में सभी खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए सहयोग करेंगे। सीडीओ ने साप्ताहिक समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किए हैं।


इधर, आगरा में शिक्षकों को चौकीदारी का काम सौंप दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी रोस्टर में 20 शिक्षकों की कार्यालय की सुरक्षा में ड्यूटी लगाई गई हैं। यह क्रम बीते माह से चल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक ड्यूटी करने से मना करते हैं उनके खिलाफ कार्यवाही की जाती है। असल में बीएसए में तैनात चौकीदार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद चौकीदार गायब हो गया। अब विभाग चौकीदारी का काम कर्मचारियों और शिक्षकों से ले रहा है। शिक्षकों-कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष है।


🔴 शिक्षकों के काम की लिस्ट

● मिड डे मील
● जनगणना करना
● वोटर लिस्ट
● आम चुनाव
● बच्चों का हेल्थ चेकअप
● स्कूल की बिल्डिंग बनानी
● बैंक में बच्चों के खाते खुलवाने
● एफिडेविड बनवाने
● आर्थिक गणना
● पल्स पोलियो
● बच्चों का वजीफा आवेदन
● जन्म प्रमाणपत्र
● जाति प्रमाणपत्र
नोट-इसके अलावा भी गाहे-बगाहे आने वाले काम


ट्वीट : रालोद अध्यक्ष ने उठाए सवाल

मैनपुरी के मुख्य विकास अधिकारी का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने सवाल उठा दिए। जयंत ने पत्र को आधार बनाकर आवारा गोवंश को लेकर ट्वीट किया और इस ट्वीट में केंद्र और राज्य सरकारों पर पर भी टिप्पणी की। हालांकि इसके बाद विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि सिर्फ गोवंश को चिन्हित कर विभाग को शिक्षक बता दें।


रिकार्ड रूम में कई तरह के दस्तावेज होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा को लेकर रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी लगायी जा रही है। शिक्षक जो आफिस में अटैच हैं, हो सकता है उनके नाम आए हों। -सतीश कुमार, बीएसए, आगरा


आक्रोश : मजबूरी में कर रहे नौकरी
शिक्षकों और कर्मचारियों में इस बात को लेकर रोष है। लेकिन सवाल नौकरी का है तो ऐसे में कर्मचारी और शिक्षक रात और दिन में चौकीदारी की ड्यूटी करने को मजबूर हैं। रोस्टर के आधार पर उनकी ड्यूटी लगती है। जो ड्यूटी करने से मना करते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है। बेसिक शिक्षा अधिकारी दिन और तारीख के हिसाब से निर्देश जारी करते हैं।


निराश्रित गोवंश को पकड़कर गोशाला ले जाने का काम चल रहा है। शिक्षक ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। वे गोवंश को चिह्नित कर विभाग को बता दें ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। उनके पत्र का यही सार है। -विनोद कुमार सीडीओ, मैनपुरी




प्रदेश के 7,442 मदरसों की बोर्ड करेगा जांच, कई जिलों में फर्जी मदरसों की शिकायत के बाद लिया निर्णय

Posted: 02 Apr 2022 04:38 PM PDT

प्रदेश के 7,442 मदरसों की बोर्ड करेगा जांच


कई जिलों में फर्जी मदरसों की शिकायत के बाद लिया निर्णय
◆ आधुनिकीकरण योजना का लाभ लिया है इन मदरसों ने

लखनऊ : प्रदेश मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले सभी 7, 442 मदरसों की जांच कराने जा रही है। अमरोहा, कुशीनगर और गोंडा में कागजों में चल रहे फर्जी मदरसों की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। योजना के संचालन के बाद से मदरसों के शैक्षिक स्तर में कितना सुधार आया, इसके लिए शैक्षिक गुणवत्ता का मूल्यांकन भी होगा।


दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मुस्लिम बच्चों को गुणवत्ता और आधुनिक शिक्षा के लिए अनुदान दिया जाता है। पारंपरिक शिक्षा के अलावा विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, हिंदी और सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाने के लिए प्रत्येक मदरसे में तीन-तीन शिक्षक रखे जाते हैं। स्नातक शिक्षकों को छह हजार व परास्नातक शिक्षकों को 12 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रदेश सरकार भी स्नातक शिक्षकों को दो हजार व परास्नातक शिक्षकों को तीन हजार रुपये अतिरिक्त मानदेय देती है। इस योजना में प्रदेश के 7,442 मदरसों के 21,126 शिक्षक शामिल हैं।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की बोर्ड में सदस्य तनवीर रिजवी द्वारा योजना में शामिल अमरोहा के कई मदरसों के अस्तित्व में न होने संबंधी शिकायत पर बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रदेश के सभी संबंधित मदरसों की जांच कराने का निर्णय लिया।

शिकंजा मदरसा बोर्ड को अमरोहा सहित कई जिलों में ऐसे मदरसों की सूचना मिली है जिनका अस्तित्व नहीं है। यह मदरसे आधुनिकीकरण योजना का लाभ ले रहे हैं। इसलिए मदरसा बोर्ड इस योजना में शामिल प्रदेश के सभी मदरसों की जांच कराने जा रहा है। शेषनाथ पाण्डेय, रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद

यूपी : 12 लाख विद्यार्थियों को ही मिल पाएंगे टैबलेट और स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर सकी कंपनियां

Posted: 02 Apr 2022 03:01 AM PDT

यूपी : 12 लाख विद्यार्थियों को ही मिल पाएंगे टैबलेट और स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर सकी कंपनियां

प्रदेश सरकार ने 2021 में स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरा मेडिकल और नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययरत 68 लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का निर्णय किया था।


प्रदेश में उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के सभी विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन के लिए लंबा इंतजार करना होगा। टैबलेट और स्मार्टफोन आपूर्ति का ठेका लेने वाली आईटी कंपनियां 18 लाख में से 12 लाख आपूर्ति नहीं कर सकी है। प्रदेश सरकार ने कंपनियों के खिलाफ जुर्माना लगाने की कवायद शुरू की है।

प्रदेश सरकार ने 2021 में स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी, डिप्लोमा, कौशल विकास, पैरा मेडिकल और नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययरत 68 लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट देने का निर्णय किया था। शिक्षण संस्थानों की ओर से 50 लाख विद्यार्थियों का डाटा अपलोड किया गया। प्रदेश सरकार ने टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण के लिए यूपीडेस्को को नोडल संस्था नामित किया था। यूपीडेस्को की ओर से किए गए टेंडर में देश की प्रमुख आईटी कंपनी लावा, सैमसंग और एसर ने 12,700 रुपये प्रति टैबलेट की दर से आपूर्ति करने पर सहमति दी है।

जबकि लावा और सैसमंग ने 10,800 रुपये की दर से स्मार्टफोन की आपूर्ति करने पर सहमति दी है। कंपनियों को तीन महीने में कुल 18 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित करने का आर्डर दिया गया था। कंपनियां तीन महीने में केवल 12 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित कर सकी है।

औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि अब तक जिलों में साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए गए है। कंपनियां अब तक केवल 12 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित कर सकी है। उन्होंने बताया कि कंपनियों पर टैबलेट और स्मार्टफोन की आपूर्ति नहीं कर पाने के कारण जुर्माना भी लगाया गया है इसकी वसूली उनकी जमानत राशि से की जाएगी।  

दो करोड़ टैबलेट स्मार्टफोन के लिए दोबारा होगा टेंडर 
अरविंद कुमार ने बताया कि योजना वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए ही थी। सरकार के संकल्प पत्र में दो करोड़ विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की घोषणा है उसके लिए सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। 

100 दिन में बंट जाएंगे टैबलेट स्मार्टफोन
अरविंद कुमार ने बताया कि 12 लाख में से साढ़े तीन लाख विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और टैबलेट बंट चुके है। और शेष जिलों में पहुंच गए है। विभाग की सौ दिन की कार्ययोजना में सभी जिलों में शेष साढ़े आठ लाख टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित करने का लक्ष्य रखा है।

इसलिए नहीं हो सकी आपूर्ति
अरविंद कुमार का कहना है स्मार्टफोन और टैबलेट में उपयोग होने वाले तकनीकी उपकरणों का उत्पादन कम हो रहा है इसलिए कंपनियां समय पर उत्पादन नहीं कर सकी। रुस और यूक्रेन युद्ध के चलते भी तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार

Posted: 01 Apr 2022 05:48 PM PDT

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में लगती होड़, परीक्षा कराने की जिद में कोर्ट तक लड़ते हैं केस, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से पनपता है नकल का बाजार


■ केंद्र निर्धारण के साथ में शुरू हो जाता है नकल माफियाओं का खेल 
■ हर साल हाईकोर्ट में वित्तविहीन स्कूलों की ओर से होती हैं याचिकाएं
● ऑनलाइन केंद्र निर्धारण के बावजूद नहीं बंद हुआ नकल का खेल


यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए हर साल केंद्र बनने को लेकर वित्तविहीन स्कूलों में होड़ लगती है। यही कारण है कि हर साल केंद्र बनने के लिए वित्तविहीन स्कूलों की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं होती हैं। 


ऐसे में सवाल है कि वित्तविहीन स्कूलों में बोर्ड परीक्षा कराने की आखिरकार ऐसी भी क्या जिद है। एक बार मुकदमा करने में कम से कम 25 हजार रुपये खर्च होता है। साफ है कि शुचितापूर्वक और नकलविहीन परीक्षा की बजाय आर्थिक लाभ के उद्देश्य से वित्तविहीन स्कूल के प्रबंधक इतने रुपये फूंकते हैं।


इसी लालच का परिणाम बलिया जिले में देखने को मिला कि परीक्षा के एक दिन पहले ही पेपर आउट हो गया। बलिया में ये पहली बार नहीं हुआ है। 2019 और 2020 की परीक्षा में भी प्रश्नपत्र आउट हुए थे। हकीकत में 2019 से ऑनलाइन केंद्र निर्धारण की व्यवस्था लागू होने के बावजूद जिला स्तर पर हस्तक्षेप पूरी तरह से बंद नहीं। है। हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन स्कूल तक ऑफलाइन बनाए जाते हैं। इनमें प्रभावशाली लोगों के स्कूलों के केंद्र बनने से लेकर रुपयों के लेनदेन के आरोप भी लगते रहे हैं।


 
 बलिया के निलंबित जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजेश मिश्रा के खिलाफ कई विभागीय जांचें चल रही हैं। जौनपुर में बतौर डीआईओएस 123 शिक्षकों की अवैध नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट तक गया था जिसकी जांच चल रही है। इसके अलावा ब्रजेश मिश्र के खिलाफ चल रही कई प्रतापगढ़ में भी अवैध नियुक्तियों के मामलों की जांच लंबित है। हरदोई में जब वह बीएसए थे जब एक रसोईया ने उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई थी। बलिया में भी उनके खिलाफ कई शिकायतें प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक की गई हैं।


मेरी याचिका पर ही हाईकोर्ट ने ऑनलाइन केंद्र निर्धारण का आदेश दिया था। कहने को 2019 से ऑनलाइन केंद्र बन रहे हैं लेकिन हकीकत में हर साल हर जिले में एक से दो दर्जन तक ऑफलाइन केंद्र बनाए जाते हैं। ऐसे स्कूल सेंटर बनते हैं जो मानक में फिट नहीं बैठते और कम्प्यूटर भी उन्हें केंद्र नहीं बनाता। नकल का खेल रोकना है तो पूरी तरह से केंद्र निर्धारण ऑनलाइन करना होगा। - जियारत हुसैन, प्रधान महासचिव वित्तविहीन शिक्षक महासभा


केंद्र बनने के लिए जो वित्तविहीन स्कूल याचिकाएं करते हैं निश्चित रूप से उनके अपने हित होते हैं। उनका उद्देश्य केवल केंद्र बनना होता है। - अमरनाथ वर्मा, पूर्व सचिव यूपी बोर्ड व पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक

अब छात्रवृत्ति का बजट नहीं होगा वापस, इस बार ज्यादा छात्र-छात्राओं को मिली छात्रवृत्ति

Posted: 01 Apr 2022 04:43 PM PDT

अब छात्रवृत्ति का बजट वापस नहीं होगा, इस बार ज्यादा छात्र-छात्राओं को मिली छात्रवृत्ति

लखनऊ : प्रदेश के समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण विभागों की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का बजट अब वित्तीय वर्ष खत्म होने पर न वापस (लैप्स ) होगा और न ही सरेण्डर होगा।


केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं से सम्बंधित सभी विभागों को इसी वित्तीय वर्ष में सिंगिल नोडल एकाउंट खोलने के आदेश दिये थे और इसका सख्ती से अनुपालन करवाया। समाज कल्याण विभाग ने भी भारतीय स्टेट बैंक में सिंगिल नोडल एकाउंट खुलवाया है।

जिसमें छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का पूरा आवंटित बजट डाला गया है और गुरुवार 31 मार्च को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बावजूद अप्रैल में भी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि लाभार्थी छात्र-छात्राओं के खाते में भेजी जाती रहेगी। समाज कल्याण निदेशालय के अफसरों के अनुसार छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि लाभार्थी छात्र-छात्राओं के खाते में भेजे जाने पर अगर ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है और लाभार्थी के खाते में धनराशि नहीं पहुंचती है तो लाभार्थी इससे वंचित नहीं होगा। इसके लिए एक नियम बनाया जा रहा है जिसके बारे में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।


आडिट आपत्तियों पर रिपोर्ट न देने पर निदेशक नाराज

लखनऊ : लखनऊ में 2019-20 के शैक्षिक सत्र में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई वितरण के ब्यौरे के आंतरिक आडिट में गम्भीर अनियमितताएं पाई गई हैं। समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने इस बारे में लखनऊ की जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनीता सिंह को सख्त पत्र लिखकर तत्काल रिपोर्ट तलब की है। पत्र में चेतावनी दी गयी है कि अगर समय से इन आडिट आपत्तियों पर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई तो जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टी दी जाएगी।

कोर्स सत्र 2021-22 सत्र 2020-21

लाभार्थी संख्या लाभार्थी संख्या

एस.सी. पोस्ट मैट्रिक 1168482 802648

सामान्य पोस्ट मैट्रिक 536938 500204

एस.सी.प्री मैट्रिक 320390 362511

सामान्य प्री.मैट्रिक 1247933 118153

शिक्षा विभाग के दो बड़े पूर्व अफसरों पर चल रही विजिलेंस जांच, आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप

Posted: 01 Apr 2022 04:30 PM PDT

शिक्षा विभाग के दो बड़े पूर्व अफसरों पर चल रही विजिलेंस जांच, आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप



इंटरमीडिएट का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में जेल भेजे गए बलिया के निलंबित जिला विद्यालय निरीक्षक ब्रजेश मिश्र पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उनके पास आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों की भी जांच कराई जा सकती है। शिक्षा विभाग के दो पूर्व अफसरों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच पहले से चल रही है। इन दोनों पर भी आय से अधिक संपत्ति के आरोप हैं।


शासन ने निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं के पद पर रहे संजय सिन्हा को पांच मार्च 2021 को निलंबित करते हुए विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। फिर 31 अगस्त 2021 को वह सेवानिवृत्त हो गए। जांच में शिकायतों को गंभीर और प्रथमदृष्ट्या सही पाए जाने पर सितंबर 2021 को विजिलेंस को खुली जांच की अनुमति दे दी गई।


 संजय सिन्हा अपने सेवाकाल में नौ वर्षों तक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव रहे। सचिव के रूप में उनके इस कार्यकाल के दौरान विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों पर तत्कालीन महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने जांच की थी। लगभग एक वर्ष तक चली इस जांच में संजय सिन्हा पर अनियमित रूप से लगभग एक हजार शिक्षकों के तबादलों का अनुमोदन करने तथा नौ से 10 जिलों में मृतक आश्रित के रूप में अनियमित नियुक्तियां किए जाने की शिकायतें सही पाई गईं। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें निलंबित कर विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए। यह जांच अभी चल रही है।


इससे पहले 12 सितंबर 2017 को शासन ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा के पद से सेवानिवृत्त वासुदेव यादव की संपत्तियों की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। वर्ष 2014 में शिक्षा निदेशक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वासुदेव यादव ने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी और फिर विधान परिषद के सदस्य चुन लिए गए थे। अप्रैल 2021 में सामने आई विजिलेंस की जांच रिपोर्ट में वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाए गए। जांच में विजिलेंस को उनकी संपत्तियां आय से 109 फीसदी अधिक मिली थीं। इसके बाद विजिलेंस ने उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया।

Post Bottom Ad

Pages