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Saturday, April 16, 2022

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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उच्च शिक्षा निदेशालय में सिटीजन चार्टर लागू, लापरवाह अधिकारी-कर्मचारी होंगे निशाने पर

Posted: 15 Apr 2022 07:11 PM PDT

उच्च शिक्षा निदेशालय में सिटीजन चार्टर लागू, लापरवाह अधिकारी-कर्मचारी होंगे निशाने पर


उच्च शिक्षा निदेशालय में फाइलें लंबित करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई



प्रयागराज : योगी आदित्यनाथ के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर हर विभाग की कार्यप्रणाली दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। निष्पक्ष व त्वरित कार्यप्रणाली लागू करने का निर्देश दिया गया है।


विशेष जोर इस पर है कि फाइलें तीन दिन से अधिक समय तक लंबित न रहने पाएं। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय में सिटीजन चार्टर लागू करके फाइलों को त्वरित निस्तारित करने का निर्देश जारी किया गया है। 


निदेशालय में विभागवार कार्यों की समीक्षा की जाएगी। हर विभाग में फाइलों को निस्तारित करने की रफ्तार की पड़ताल होगी। इसके जरिये अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा होगी। बेवजह फाइलें लंबित करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस देकर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।


 उच्च शिक्षा निदेशक डा. अमित भारद्वाज का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप भ्रष्टाचार मुक्त-त्वरित निष्पादन पर जोर दिया जा रहा है। जो लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

योगी सरकार ने मंजूरी दी थी 5 की स्कूलों ने फीस बढ़ा दी 15 फीसद तक

Posted: 15 Apr 2022 06:59 PM PDT

योगी सरकार ने मंजूरी दी थी 5 की स्कूलों ने फीस बढ़ा दी 15 फीसद तक

सिर्फ पांच फीसदी फीस बढ़ाने की है अनुमति, खुलेआम हो रहा शासनादेश का उल्लंघन



प्रयागराज : निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। शहर के दर्जनों स्कूलों ने 15 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है, जिससे अभिभावकों की परेशानी बढ़ गयी है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद शासन ने निजी स्कूलों को सिर्फ पांच फीसदी तक फीस बढ़ाने की अनुमति दी थी, लेकिन सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के स्कूल शासनादेश मानने को तैयार ही नहीं हैं।


कोरोना संक्रमण काल में शासन ने स्कूल-कॉलेजों को फीस वृद्धि न करने का आदेश जारी किया था। इसके चलते निजी स्कूल-कॉलेजों में फीस नहीं बढ़ी थी। अब संक्रमण कम होने के बाद स्कूल कॉलेज खुल गए हैं। विगत 10 अप्रैल को शासनादेश जारी किया गया, जिसमें निजी स्कूलों को सिर्फ पांच फीसदी तक ही फीस में बढ़ोतरी की इजाजत दी गयी थी। 


फीस बढ़ाने का फरमान जारी होते ही शहर के कई निजी स्कूलों ने आननफानन 15 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है, जबकि शेष स्कूल भी फीस बढ़ाने की तैयारी में हैं। निजी स्कूल अभिभावकों पर नए सत्र में बढ़ी फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। फीस न जमा करने पर बच्चों का स्कूल से नाम काटने की धमकी दी जा रही है। 



नामांकन शुल्क 10 से 15 हजार

तक बढ़ा दिया एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल ने प्राइमरी सेक्शन में दाखिले की फीस 15 हजार रुपये तक बढ़ा दी है। पिछले साल तक इस स्कूल में एलकेजी में दाखिले के लिए 50 हजार रुपये लिए गए थे। वहीं इस बार दाखिले के लिए लगभग 65 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। स्कूल प्रशासन फीस वृद्धि के बारे में पूछने पर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि नामांकन शुल्क अधिक है। बाकी न्यूनतम ही बढ़ाई गई है।

मदरसा छात्रों को भी मिलेगी काउंसलिंग, कॅरिअर की राह होगी आसान

Posted: 15 Apr 2022 06:56 PM PDT

मदरसा छात्रों को भी मिलेगी काउंसलिंग, कॅरिअर की राह होगी आसान




काउंसिलिंग का लाभ लखनऊ। मदरसों को मुख्य धारा में लाने के साथ ही आधुनिक और स्मार्ट बनाने की तैयारी है। अब मदरसा छात्रों को भी कॅरिअर काउंसिलिंग और स्मार्ट क्लास का लाभ मिलेगा। इसके लिए बोर्ड प्रस्ताव तैयार कर जल्द शासन को भेजेगा।


मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक, मदरसों में स्मार्ट क्लास के साथ एस्ट्रोनॉमी लैब, ई बुक बैंक, ई लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं होंगी। प्रदेश में 558 अनुदानित और 7442 आधुनिक मदरसे हैं। आधुनिकीकरण योजना में आच्छादित 25 और अनुदानित पांच मदरसों को डेवलप किया जाएगा। यदि प्रयोग सफल रहा तो सभी मदरसों में इसका क्रियान्वयन किया जाएगा। शासन से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।


प्रस्ताव जल्द शासन को भेजेगा मदरसा बोर्ड

कॅरिअर की राह होगी आसान

कॅरिअर काउंसिलिंग से मदरसा छात्रों के रोजगार की राह आसान होगी। सेकेंडरी (मुंशी / मौलवी) एवं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) के बच्चों के कॅरिअर पर जोर दिया जाएगा। 14 मई से मदरसा बोर्ड की  परीक्षाओं को देखते हुए अतिरिक्त क्लास दी जा सकती हैं। छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती से लेकर हाजिरी सिस्टम तक दुरुस्त किया जाएगा।

शिक्षा विभाग में वरीयता पर होंगे ऑनलाइन तबादले, सरकार के निर्देश पर योजना तैयार कर रहे बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग

Posted: 15 Apr 2022 06:39 PM PDT

शिक्षा विभाग में वरीयता पर होंगे ऑनलाइन तबादले, सरकार के निर्देश पर योजना तैयार कर रहे बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग


लखनऊ। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों और कर्मचारियों के वरीयता के आधार पर ऑनलाइन तबादले किए जाएंगे। प्रदेश सरकार के निर्देश पर तीनों विभागों ने ऑनलाइन तबादले की योजना तैयार करनी शुरू कर दी है।


प्रदेश सरकार ने तबादलों में पारदर्शिता के लिए बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों और कर्मचारियों के वरीयता आधारित ऑनलाइन तबादले के निर्देश दिए हैं। वरीयता निर्धारित करने के लिए तीनों विभागों की ओर से तबादला नीति तैयार की जाएगी। इस नीति में शैक्षिक कामकाज के साथ अलग-अलग श्रेणी के अंक निर्धारित किए जाएंगे। 


सभी शिक्षकों और कर्मचारियों से तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। विभाग की ओर से तैयार पोर्टल के जरिये आवेदन पत्रों के सत्यापन के साथ उनका मूल्यांकन भी किया जाएगा। सरकार की ओर से निर्धारित संख्या के अनुसार पोर्टल से ही ऑनलाइन तबादला आदेश जारी किए जाएंगे।

हाईकोर्ट के आदेश के 11 साल बाद अध्यापक को बर्खास्त करने पर लगी न्यायालय की रोक

Posted: 15 Apr 2022 04:33 PM PDT

हाईकोर्ट के आदेश के 11 साल बाद अध्यापक को बर्खास्त करने पर लगी न्यायालय की रोक



प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के 11 साल बाद शिक्षा निदेशक माध्यमिक उप्र लखनऊ द्वारा महाराजगंज के अध्यापक गोविंद प्रसाद द्विवेदी की सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने याची अध्यापक को कार्य करने देने तथा वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है। हटाए जाने में अनावश्यक देरी पर राज्य सरकार सहित विपक्षियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई जुलाई में होगी।


 यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने गोविंद प्रसाद द्विवेदी की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि उसे नियुक्ति से 22 साल बाद बर्खास्त कर दिया गया है। राष्ट्रीय पत्राचार संस्थान कानपुर की शिक्षा अलंकार डिग्री को हाईकोर्ट ने विनोद कुमार उपाध्याय केस में 2011 में अमान्य घोषित कर इस डिग्री के आधार पर नियुक्त सभी अध्यापकों को हटाने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के आधार पर 22 साल पहले नियुक्त याची की सेवा समाप्त कर दी गई। शिक्षा निदेशक ने वजह नहीं बताई कि सेवा समाप्त करने में 11 साल क्यों लगे। 


सेवा समाप्ति आदेश नौ फरवरी 22 की वैधता को चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि उसे नियमित कर दिया गया है। फिर भी इंटर मीडिएट एक्ट की धारा 16 ई (10) के तहत बर्खास्त किया गया है। आशा सक्सेना केस में पूर्णपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि उचित समयावधि में आदेश दिया जाना चाहिए। शिक्षा निदेशक ने नहीं बताया कि समय रहते आदेश क्यों नहीं दिया। दरअसल, शिक्षा अलंकार डिग्री को अमान्य घोषित करने के बाद बहुत से अध्यापक हटाए नहीं गए तो हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। तत्कालीन सचिव ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि इस डिग्री से नियुक्त सभी अध्यापकों को हटा दिया गया है। 


इसके बाद अलीगढ़ के अरुण कुमार ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि तीन अध्यापक अभी भी कार्यरत हैं। अब हाईकोर्ट के आदेश के 11 साल बाद शिक्षा अलंकार डिग्री से नियुक्त याची को हटाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने अनावश्यक देरी से पारित आदेश पर हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

विश्वविद्यालयों में अनुभव के आधार पर प्रोफेसरों की भर्ती, हुनर (स्किल) से जोड़ने की मुहिम में जुटा शिक्षा मंत्रालय नई स्कीम शुरू करने में जुटा

Posted: 15 Apr 2022 04:11 PM PDT

विश्वविद्यालयों में अनुभव के आधार पर प्रोफेसरों की भर्ती, हुनर (स्किल) से जोड़ने की मुहिम में जुटा शिक्षा मंत्रालय नई स्कीम शुरू करने में जुटा



नई दिल्ली: यदि आप किसी क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं तो आने वाले समय में विश्वविद्यालयों सहित दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में आपको प्रोफेसर बनने का मौका भी मिल सकता है। शिक्षा मंत्रलय नई स्कीम शुरू करने में जुटा है।



यदि आप किसी भी क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं तो आने वाले दिनों में विश्वविद्यालयों सहित दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में आपको प्रोफेसर बनने का मौका मिल सकता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को किसी न किसी हुनर (स्किल) से जोड़ने की मुहिम में जुटा शिक्षा मंत्रलय जल्द ही इसे लेकर एक नई स्कीम शुरू करने में जुटा है। इसमें उद्योगों व रोजगारपरक क्षेत्रों से जुड़े ऐसे विशेषज्ञों को मौका दिया जाएगा जो लंबे अनुभव के साथ ही पढ़ाने में रुचि रखते हैं। उन्हें सीधे प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति दी जाएगी। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए सृजित किए जा रहे इस पद को 'प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस' नाम दिया है।


प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में 'प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस' के पद पर कितने विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी, फिलहाल यह साफ नहीं है। लेकिन ऐसे क्षेत्रों को तलाशा जा रहा है, जिसमें ऐसे विशेषज्ञों को नियुक्ति दी जा सकती है। उच्च शिक्षण संस्थानों में सृजित होने वाले यह पद पहले से स्वीकृत पदों के अतिरिक्त होंगे। इनमें किसी तरह का कोई आरक्षण भी नहीं होगा। इसके लिए सिर्फ अनुभव ही एकमात्र मानक होगा। शिक्षा मंत्रलय से जुड़े अफसरों की मानें तो इनमें उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है, जिनमें किसी डिग्री या डिप्लोमा से ज्यादा अनुभव महत्व रखता है। मालूम हो कि सरकार ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी अनुभव के आधार पर अलग- अलग क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों को संयुक्त सचिव (जेएस) के पद पर सीधी नियुक्ति दी है। इनमें उद्योगों से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इस पहल को भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। मंत्रलय का मानना है कि लंबे अनुभव के आधार पर कोई भी विशेषज्ञ छात्रों को जो शिक्षा दे देगा, वह डिग्री लेकर आने वाले शिक्षक नहीं दे सकते।


'>>क्षेत्र विशेष में अनुभव के आधार पर प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस' का चयन


'>> शिक्षा मंत्रलय योजना को अंतिम रूप देने में जुटा, क्षेत्रों की तलाश जारी


एनईपी में शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की सिफारिश


उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुभव के आधार पर विशेषज्ञों को प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति देने की पहल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के बाद शुरू हुई है। जिसमें छात्रों को पढ़ाई के साथ हुनरमंद बनाने की मजबूत सिफारिश की गई है। साथ ही कहा है कि देश को नई छलांग लगानी है तो अपनी नई पीढ़ी को किसी स्किल से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए उद्योगों सहित अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को संस्थानों से जोड़ने की सिफारिश की है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वर्ष 2025 तक देश के 50 प्रतिशत छात्रों को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अभी देश में सिर्फ पांच प्रतिशत छात्र ही व्यवसायिक शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

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