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Wednesday, April 13, 2022

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हरियाणा में फ्रूटी में पिलाया नशीला पदार्थ

Posted: 13 Apr 2022 09:48 AM PDT

हरियाणा में फ्रूटी में पिलाया नशीला पदार्थ

ऽ10 बच्चों समेत 28 की तबियत बिगड़ी

ऽअज्ञात व्यक्ति ने प्रसाद के रूप में बांटी थीं फ्रूटी

गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम जिले में लोगों को फ्रूटी में नशीला पदार्थ मिला दिया गया। जिससे मेले में आए 28 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इन सभी को गुरुग्राम के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इन 28 लोगों में 10 बच्चे भी शामिल हैं। फरुखनगर के मुबारिकपुर में माता का मेला लगा था। बीमार लोगों को कल देर रात सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां शुरुवाती इलाज के बाद सभी की हालात पहले से बेहतर हैं। वहीं गुरुग्राम पुलिस ने की मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।

नवरात्रों के बाद मुबारकपुर में माता का मेला लगता है। इस मेले में राज्य के अलग-अलग जिले से लोग यहां पहुंचते हैं। बेहोश हुए लोगों में अधिकांश हरियाणा के जींद जिले से आए थे। देर रात जब यह लोग माता के दर्शन कर मंदिर के पास ही सो रहे थे तो उसी दौरान एक व्यक्ति ने इन लोगों को प्रसाद के रूप में फ्रूटी दे दी। लोगों ने जैसे ही फ्रूटी को पिया वह कुछ ही देर में सुध-बुध खो बैठे। सके बाद एक के बाद एक सभी बेहोश होते चले गए। इसके बाद वहां मौजूद अन्य लोगों ने बिगड़ते हालातों के बीच सभी लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल सभी मरीज खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। कुछ चश्मदीदों ने बताया कि जैसे ही लोगों ने प्रसाद पिया तो कई लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। कई को तो उल्टियां होने लगीं और वह बेसुध होते चले गए। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस उस अज्ञात व्यक्ति के बारे में पता लगाने में जुटी है जिसने इस घटना को अंजाम दिया है। हालांकि अभी तक ना तो किसी का नाम सामने आया है और ना हीं भक्तों को नशीला पदार्थ की पिलाने की वजह सामने आ पाई है।
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बिहार में ग्रामीण बैंक की शाखा से 26 लाख की लूट

Posted: 13 Apr 2022 09:46 AM PDT

बिहार में ग्रामीण बैंक की शाखा से 26 लाख की लूट

सीवान। बिहार में बेखौफ अपराधियों ने एक बार फिर से बैंक को निशाना बनाया है। मामला सीवान से जुड़ा है जहां बुधवार की दिनदहाड़े अपराधियों ने बैंक लूट की बड़ी घटना को अंजाम दिया। जानकारी के मुताबिक अपराधियों ने दिनदहाड़े उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की शाखा से करीब 26 लाख रुपए लूट लिए और आसानी से फरार हो गए। बैंक लूट की घटना सीवान शहर के स्टेशन रोड रामराज मोड़ इलाके की है। जानकारी के मुताबिक बाइक पर सवार अपराधी हथियारों से लैस होकर पहुंचे थे। मामले की जानकारी मिलते ही पूरे शहर में हड़कंप मच गया। बैंक लूट की घटना के बाद सीवान के एसपी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है और फिलहाल घटना की जांच कर रही है। इस मामले में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है।
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हमीरपुर में पान मसाला व्यापारी के घर से बड़ी संख्या में मिले नोट

Posted: 13 Apr 2022 09:44 AM PDT

हमीरपुर में पान मसाला व्यापारी के घर से बड़ी संख्या में मिले नोट


हमीरपुर। यूपी के हमीरपुर जिले में सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) की कानपुर टीम ने सुमेरपुर के दयाल पान मसाला के निर्माता जगत गुप्ता के आवास पर छापा मारा। करीब 15 घंटे तक चली छापेमारी में दस्तावेज में कई खामियां मिलने के साथ ही पान मसाला व्यवसायी के आवास से टीम को भारी मात्रा में नगदी मिली है, जिसे तीन बक्सों में भरकर टीम अपने साथ ले गई।

चर्चा है कि छापेमारी में टीम को करीब छह करोड़ रुपये की नगदी मिली है। जिसके बाद स्टेट बैंक आफ इंडिया से नोट गिनने की तीन मशीनें मंगाई गई थी। मंगलवार रात मेंही तीन बड़े बक्से भी मंगाए गए थे। टीम में शामिल अधिकारियों ने काफी कैश मिलने की बात कहते हुए इससे ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया। एक अधिकारी ने कहा कि आयुक्त की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर सारी जानकारी दी जाएगी। सीजीएसटी की टीम मंगलवार सुबह करीब छह बजे पांच गाड़ियों में सवार होकर पान मसाला व्यवसायी के आवास पर छापा मारने पहुंची। इस दौरान एक मिनी ट्रक माल लेकर घर से बाहर निकला तो टीम ने उसे रोक लिया। बाहर टीम देखकर मुख्य द्वार बंद कर दिया गया, जो काफी देर तक नहीं खोला गया। घर का मुख्य द्वार इलेक्ट्रानिक है, इसे कोड के माध्यम से खोला जा सकता है। टीम के दबाव बनाने पर व्यवसायी ने गेट को खोला। टीम में शामिल एक दर्जन अधिकारियों ने पूरे आवास की सघन तलाशी ली। घर के किसी भी सदस्य को बाहर नहीं जाने दिया गया। दूधिये को भी गेट से ही लौटा दिया गया। टीम ने घर की छत पर पानी की टंकी का ढक्कन खोलकर उसे डंडे से चलाकर जांच की। इलेक्ट्रिक जेनरेटर का बाक्स खोलकर देखा। तलाशी के दौरान बैंक खातों, कारोबार से जुड़े दस्तावेज, लैपटाप कब्जे में लिए गए हैं। चर्चा है कि लेखा-जोखा के मिलान के दौरान टीम को काफी गड़बड़ियां मिली है। रात में टीम ने नोट गिनती करने के लिए बैंक से तीन मशीनें मंगवाई। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वहां पर भारी मात्रा में नगदी बरामद हुई है। टीम अपने साथ 3 भरे बाक्स ले गई है।
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जालियांवाला बाग के शहीदों को मोदी व योगी का नमन

Posted: 13 Apr 2022 09:42 AM PDT

जालियांवाला बाग के शहीदों को मोदी व योगी का नमन

लखनऊ। जलियांवाला बाग की 103वीं बरसी पर आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोदी आदित्यनाथ ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने ट्वीट पर लिखा 1919 में आज ही के दिन जलियांवाले बाग में शहीद होने वाले लोगों को श्रद्धांजलि। उनका अद्वितीय साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। इसी प्रकार यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया- देश की स्वतंत्रता हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले जलियांवाले बाग के अमर बलिदानियों को नमन। माँ भारती के वीर सपूतों का बलिदान स्थल जलियांवाला बाग चिरकाल तक हर भारतवासी के हृदय राष्ट्र सेवा की ज्योति जागृत करता रहेगा। इस घटना को देशवासियों ने स्मरण कर बलिदानियों को नमन किया है।
जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश क्रूरता का प्रतीक है। हजारों की तादाद में लोग बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में जमा हुए थे। वे लोग शांति के साथ प्रदर्शन कर रहे थे और सभी निहत्थे थे लेकिन दमनकारी सत्ता को हथियारबंद आंदोलन से ज्यादा निहत्थे लोगों का प्रदर्शन चुभता है। ऐसा ही जलियांवाला बाग हत्याकांड मामले में भी हुआ। निहत्थे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को गोलियों से भून दिया गया। जलियांवाला बाग बेकसूरों के खून से भर गया लेकिन जलियांवाला बाग में भारतीयों की कुर्बानी बेकार नहीं गई। यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बड़े बदलाव का कारण बनी। पहले विश्वयुद्ध में भारतीयों ने ब्रिटिश सेना की भरपूर मदद की थी। अकेले अविभाजित पंजाब से करीब 4 सालों तक चले युद्ध में 3,55,000 सैनिकों ने हिस्सा लिया था। भारत के लोगों को उम्मीद थी कि युद्ध में मदद का बदला ब्रिटिश सरकार देगी, सख्त कानूनों को आसान बनाएगी, भारत को अधिक राजनीतिक स्वायत्तता देगी और युद्ध से लौटने वाले सैनिकों को रोजगार मुहैया कराएगी। लेकिन हुआ इसके विपरीत। ब्रिटिश सरकार ने रॉलट ऐक्ट जैसा काला कानून पास किया। वहीं पंजाब में फसलें तबाह होने से खाने की चीजों की कमी हो गई और कीमतें आसमान छूने लगीं। इससे पूरे भारत और खासतौर पर पंजाब के लोगों में काफी आक्रोश फैल गया।रॉलट ऐक्ट का भारत में जबर्दस्त विरोध हुआ। गांधीजी ने अप्रैल की शुरुआत में पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया। इसी बीच खबर फैल गई कि भारतीय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनको शहर से गायब कर दिया गया है। इस खबर का असर यह हुआ कि 10 अप्रैल को अमृतसर में हिंसा भड़क गई। ब्रिटिश सैनिकों ने हिंसा का जवाब गोली से दिया। आम नागरिकों पर गोलियां चला दीं। इस पर भीड़ और भड़क गई। बिल्डिंगों में लूटपाट की गई और आग लगा दी गयी। आक्रोशित भीड़ ने कई विदेशी नागरिकों को भी पीटा। स्थिति से निपटने का काम ब्रिगेडियर जनरल रेगिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर यानी जनरल डायर को सौंपा गया। इसके बाद लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई।
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सबका साथ, सबका विकास डा. आम्बेडकर का ही विचार

Posted: 13 Apr 2022 09:40 AM PDT

सबका साथ, सबका विकास डा. आम्बेडकर का ही विचार

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
डॉ. भीमराव राम जी आंबेडकर समरस समाज व शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण चाहते थे। इसके प्रति आजीवन समर्पित रहे। उनके नाम पर राजनीति खूब होती रही है। अनेक राजनीतिक दलों व नेताओं ने उनके नाम का खूब लाभ उठाया। किंतु अंततःऐसे लोग एक सीमित दायरे से बाहर नहीं निकल सके। इसलिए राजनीति में इनकी यात्रा लंबी नहीं रही। सामाजिक समरसता के नाम से शुरू हुई इनकी यात्रा परिवार व जातिवाद पर आकर रुक गई। ऐसे नेता व राजनीतिक दल ज्यादा समय तक अपना प्रभाव कायम नहीं रख सके। ये जन अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे। सबको साथ लेकर चलने की क्षमता इनमें नहीं थी। पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार ने इस तथ्य को समझा। उन्होंने सबका साथ व सबका विकास का नारा दिया। इसको सरकार की नीति में प्रमुख स्थान दिया। इसके अनुरूप कार्य योजना बनाई गई। विगत सात वर्षों में इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पिछले पांच वर्षों से इस नीति पर अमल कर रही है। दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अधिक तेजी से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का संकल्प व्यक्त किया है। सबका साथ सबका विकास वस्तुतः डॉ आंबेडकर के विचारों की ही अभिव्यक्ति है। इस पर हुए अमल ने एक नया आयाम जोड़ा है। अब सबका साथ सबका विकास के साथ सबका विश्वास भी जुड़ गया है।

डॉ आंबेडकर की प्रतिष्ठा में सर्वाधिक कार्य वर्तमान केंद्र व प्रदेश सरकार ने किए है। इसमें उनके जीवन से संबंधित स्थलों का भव्य निर्माण भी शामिल है। इसके साथ ही दलित वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ वंचित वर्ग को तक पहुंच रहा है। नरेंद्र मोदी ने डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच स्थानों को भव्य स्मारक का रूप प्रदान किया। इसमे लंदन स्थित आवास, उनके जनस्थान,दीक्षा स्थल,इंदुमिल मुम्बई और नई दिल्ली का अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान शामिल हैं। यह अपने ढंग का अद्भुत संस्थान है, जिसमें एक ही छत के नीचे डॉ आंबेडकर के जीवन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से देखा-समझा जा सकता है। पिछले दिनों मोदी ने यह संस्थान राष्ट्र को समर्पित किया था। संयोग देखिये, इसकी कल्पना अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी और इसे पूरा नरेंद्र मोदी ने किया। बसपा के समर्थन से दस वर्ष चली यूपीए सरकार ने एक ईंट भी नहीं लगाई। मोदी ने निर्धारित सीमा में इसका निर्माण कार्य पूरा कर दिया। यह भी उल्लेखनीय है कि इन स्मारकों के निर्माण में भ्र्ष्टाचार आदि का कोई आरोप नहीं लगा,न मोदी ने कहीं भी अपना नाम या मूर्ति लगवाने का प्रयास किया। वे चाहते हैं कि भावी पीढ़ी महापुरुषों और सन्तो से प्रेरणा ले,जिन्होंने पूरा जीवन समाज के कल्याण में लगा दिया। नरेन्द्र मोदी ने बाबा साहब डाॅ भीमराव आंबेडकर की भावनाओं के अनुरूप भारत के निर्माण के लिए बिना भेदभाव के समाज के प्रत्येक वर्ग को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया है।

अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। लखनऊ में डाॅ भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र का निर्मांण चल रहा है। यह स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र डाॅ भीमराव आंबेडकर के आदर्शों के अनुरूप स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य करेगा। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े हुए विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति समय पर भेजी जा रही है। वर्तमान सरकार ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद तय किया कि ग्राम पंचायत में जहां पर जिसका मकान बना है,उसको वहां पर उस जमीन का कब्जा दिलाएंगे। स्वामित्व योजना के तहत घरौनी के माध्यम से ग्राम पंचायत में हर व्यक्ति को उसके मकान अथवा झोपड़ी का अधिकार प्राप्त हो रहा है। इसके लिए ड्रोन सर्वे किया जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत सभी गांवों में अभियान चलाकर कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अब तक बाइस लाख परिवारों को ऐसे कब्जे दिये जा चुके हैं।

वोटबैंक की राजनीति ने चिंतन के दायरे को बहुत सीमित कर दिया है। केवल चुनावी चिंता से समाज का भला नही हो सकता। नरेंद्र मोदी भी चुनावी राजनीति में है। वह भी अपनी पार्टी को विजयी बनाने का प्रयास करते है लेकिन इसी को सामाजिक जीवन की सिद्धि नही मानते। वह इससे आगे तक की सोचते है। भावी पीढ़ियों और समाज के भविष्य के बारे में सोचते है। पंचतीर्थ से लेकर कबीर स्मारक तक उनके सभी प्रयास सामाजिक समरसता की प्रेरणा देने वाले है। महान लोगों के प्रत्येक कबीर में प्रबल आत्मबल था। इसीलिए उन्होंने मगहर के मिथक को स्वीकार नहीं किया। यहां आकर उन्होंने कर्मफल के सिद्धांत को महत्व दिया। ऐसा नहीं हो सकता कि अच्छे कर्म करने वाले को मगहर में रहने के कारण नर्क और काशी में खराब कर्म करने वाले को स्वर्ग मिले। प्राचीन भारतीय चिंतन में भी कर्मफल सिद्धान्त को बहुत महत्व दिया गया। मोदी ने कबीर के छह सौ बीसवें प्राकट्य दिवस पर यहां आने का निर्णय लिया था। इस अवसर को भी उन्होंने विकास से जोड़ दिया। मगहर में विकास की अनेक योजनाएं चलाई जाएगी। साथ ही मोदी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के समग्र विकास के प्रति कटिबद्धता व्यक्त की। कहा कि आजादी के इतने वर्षों तक देश के कुछ ही हिस्से में विकास की रोशनी पहुंच सकी थी। हमारी सरकार का प्रयास है कि भारत भूमि की एक-एक इंच की जमीन को विकास की धारा के साथ जोड़ा जाए। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने इस जगह के लिए एक सपना देखा था। इसी के अनुरूप मगहर को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में सद्भाव और समरसता केंद्र के तौर पर विकसित करने का काम अब किया जा रहा है। देश में मुस्लिम बहनें तीन तलाक से मुक्ति की मांग कर रही हैं, लेकिन तीन तलाक के रास्ते में रोड़े अटकाए जा रहे थे। सत्ता का लालच ऐसा है कि आपातकाल लगाने वाले और उस समय आपातकाल का विरोध करने वाले एक साथ आ गए हैं। नरेंद्र मोदी ने कार्ल मार्क्स के इस विचार में सुधार किया। उन्होंने वर्ग संघर्ष की जगह वर्ग सहयोग का सिद्धांत प्रतिपादित किया। मार्क्स ने केवल विचार प्रस्तुत किये थे। उन पर अमल नहीं किया था, स्वयं उनका क्रियान्वयन नहीं किया था। जबकि नरेंद्र मोदी ने वर्ग सहयोग का विचार बाद में प्रस्तुत किया, उसका क्रियान्वयन वह पिछले कई वर्षों से कर रहे है। मोदी कहते है कि दूसरा अर्थात सक्षम वर्ग की जिम्मेदारी यह है कि वह वंचित वर्ग को गरीबी से ऊपर लाने में सहयोगी बने। इस तरह मोदी शासन, राजनीतिक पार्टियों और धनी वर्ग सभी की जिम्मेदारी तय करते है। नरेंद्र मोदी के शासन का यही आधार भी रहा है। सबका साथ सबका विकास की नीति को कथित धर्मनिरपेक्षता का विकल्प बनाया। यह बता दिया कि देश के मुसलमान वोटबैंक नहीं है। वह भी इंसान है। उनके जीवन की भी मूलभूत आवश्यकताएं है। सरकार का दायित्व है कि वह सभी का जीवन स्तर उठाने का प्रयास करे। यही सेक्युलरिज्म है। मोदी की यह नीति प्रभावी और लोकप्रिय रही।
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बहादुरी से मौत का संदेश देती बैसाखी

Posted: 13 Apr 2022 09:35 AM PDT

बहादुरी से मौत का संदेश देती बैसाखी

(पं. आर.एस. द्विवेदी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • गुरु गोविन्द सिंह ने देश को गुलामी से आजाद करने के लिए मांगा था शीश
  • पांच वीर शीश देने को हुए थे तैयार जो कहलाते हैं पंच प्यारे
  • इस तरह हुई थी खालसा पंथ की स्थापना


भारत में पर्व और त्योहार ज्यादातर फसलों के तैयार होने पर मनाए जाते हैं। सिख धर्म का पर्व बैसाखी भी रबी की फसलें तैयार होने पर ही मनाया जाता है लेकिन इन पर्वों के साथ ऐतिहासिकता भी जुड़ी है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भारत में जिस समय मुगलिया सल्तनत धर्म परिवर्तन और अत्याचार की खूनी दास्तान लिख रही थी, उसी समय हिन्दू समाज के अंदर यह जज्बा पैदा हुआ कि कायरों की तरह मरने की अपेक्षा लड़ते हुए जान देना कहीं बेहतर है। यह संदेश बैसाखी देती है। धार्मिक कट्टर बादशाह औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए प्रताड़ित किया लेकिन गुरु तेग बहादुर ने अपना शीश कटवा दिया, औरंगजेब की बात नहीं मानी। सिख पंथ के नौवें गुरु तेग बहादुर की शहादत का यह पर्व है। इसी के बाद सिख पंथ के 10वें अर्थात् अंतिम गुरु गोविन्द सिंह ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को बताया कि भेड़-बकरियों की तरह जान नहीं देनी है, बल्कि हमें लड़ते हुए वीरगति प्राप्त करनी चाहिए। इस वर्ष 14 अप्रैल को बैसाखी मनायी जाएगी।

बैसाखी पंजाब राज्य में सिख समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। देश-विदेश में बैसाखी के अवसर पर, विशेषकर पंजाब में मेले लगते हैं। लोग सुबह-सुबह सरोवरों और नदियों में स्नान कर मंदिरों और गुरुद्वारों में जाते हैं। लंगर लगाए जाते हैं और चारों तरफ लोग प्रसन्न दिखलाई देते हैं। विशेषकर किसान, गेहूं की फसल को देखकर उनका मन नाचने लगता है। गेहूं को पंजाबी किसान 'कनक' यानी सोना मानते हैं। यह फसल किसान के लिए सोना ही होती है, उसकी मेहनत का रंग दिखाई देता है। बैसाखी पर गेहूं की कटाई शुरू हो जाती है। बैसाखी पर्व बंगाल में पैला नाम से, दक्षिण में बिशु नाम से और केरल, तमिलनाडु व असम में बिहू के नाम से मनाया जाता है।

गुरु गोबिंद सिंह जी बैसाखी दिवस को विशेष गौरव देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने 1699 ई. को बैसाखी पर श्री आनंदपुर साहिब में विशेष समागम किया। इसमें देशभर की संगत ने आकर इस ऐतिहासिक अवसर पर अपना सहयोग दिया। गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस मौके पर संगत को ललकार कर कहा, 'देश को गुलामी से आजाद करने के लिए मुझे एक शीश चाहिए।' गुरु साहिब की ललकार को सुनकर पांच वीरों दया सिंह खत्री, धर्म सिंह जट, मोहकम सिंह छीवां, साहिब सिंह और हिम्मत सिंह ने अपने-अपने शीश गुरु गोबिंद सिंह जी को भेंट किए। ये पांचों सिंह गुरु साहिब के पंच प्यारे कहलाए। गुरु साहिब ने सबसे पहले इन्हें अमृतपान करवाया और फिर उनसे खुद अमृत पान किया। इस प्रकार 1699 की बैसाखी को खालसा पंथ का जन्म हुआ जिसने संघर्ष करके उत्तर भारत में मुगल साम्राज्य को समाप्त कर दिया। हर साल बैसाखी के उत्सव पर खालसा पंथ का जन्म दिवस मनाया जाता है।

वक्त के साथ भांगड़ा और गिद्दा का स्वरूप बदलता रहा है। किंतु आज भी फसल की कटाई के साथ ही ढोल बजने लगता है, ढोल हमेशा से ही पंजाबियों का साथी रहा है। ढोल से धीमे ताल द्वारा मनमोहक संगीत निकलता है। पिछली सदियों में आक्रमणकारियों से होशियार करने के लिए ढोल बजाया जाता था। इसकी आवाज दूर तक जाती थी। ढोल की आवाज से लोग नींद से जाग जाते थे। संकट के समय ढोल की आवाज लोगों को सूचना देती थी और घरों से निकलकर वे दुश्मन पर टूट पड़ते थे।

देश की परतंत्रता की परिस्थितियों में लोग जूझने के लिए अपने आप को तैयार रखते थे। बैसाखी का त्योहार बलिदान का त्योहार है। 1699 ई. की बैसाखी से हर साल बैसाखी देश की सुरक्षा के लिए लोगों को जगाती आई है। मुगल शासक औरंगजेब ने जुल्म, अन्याय व अत्याचार करते हुए श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी को दिल्ली के चांदनी चैक पर शहीद कर दिया था, तभी गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने अनुयायियों को संगठित कर खालसा पंथ की स्थापना की थी। 1716 ई. में बंदा बहादुर की शहादत के बाद तो पंजाब सिखों की वीरता की मिसाल बन गया। मिसलदार प्रत्येक साल बैसाखी के अवसर पर श्री अमृतसर में हरमंदिर साहिब में वर्ष भर का हिसाब देते थे। 13 अप्रैल 1919 को सैकड़ों लोग जलियांवाला बाग में देश की आजादी के लिए जनरल डायर के सैनिकों की गोलियों के आगे निशस्त्र सीना तान कर खड़े रहे और शहीद हो गए। बैसाखी पर देशवासी इन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं।

रात्रि के समय आग जलाकर उसके चारों तरफ इकट्ठे होकर नई फसल की खुशियां मनाई जाती हैं, नए अन्न को अग्नि को समर्पित किया जाता है और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा तथा गिद्दा किया जाता है। गुरुद्वारों में अरदास के लिए श्रद्धालु जाते हैं। आनंदपुर साहिब में, जहां खालसा पंथ की नींव रखी गई थी, विशेष अरदास और पूजा होती है। गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब को समारोहपूर्वक बाहर लाकर दूध और जल से प्रतीक रूप से स्नान करवा कर तख्त पर प्रतिष्ठित किया जाता है। इसके बाद पंच प्यारे पंचबानी गायन करते हैं। अरदास के बाद गुरु जी को कड़ाह-प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पंच प्यारों के सम्मान में शबद-कीर्तन गाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह ने वैशाख माह की षष्ठी तिथि के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन मकर संक्रांति भी थी। इसी कारण से बैसाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा। सूर्य मेष राशि में प्रायः 13 या 14 अप्रैल को प्रवेश करता है, इसीलिए बैसाखी भी इसी दिन मनाई जाती है। प्रत्येक 36 साल बाद भारतीय चंद्र गणना के अनुसार बैसाखी 14 अप्रैल को पड़ती है। बैसाखी पर किसान का घर फसल से भर जाता है। इस खुशी में ढोल बजाए जाते हैं। भांगड़ा करते बूढ़े, बच्चे और जवान थिरकने लगते हैं। मेला बैसाखी विश्वभर में पंजाबियों का एक कौमी जश्न माना जाता है। पंजाबी लोगों का यह सबसे बड़ा मेला है। इस दिन लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर खुशियां मनाते हैं। बैसाखी के नाम से दिलों में उत्साह का संचार होता है। चाहे घर में हों या जंगल में, देश में या परदेश में, बैसाखी का नाम लेते ही दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं, तन थिरकने लगते हैं और भांगड़ा होने लगता है।
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योगी की लोकप्रियता बरकरार

Posted: 13 Apr 2022 09:32 AM PDT

योगी की लोकप्रियता बरकरार

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • विधानसभा के साथ विधान परिषद में भी भाजपा को मिला बहुमत
  • 40 साल पहले कांग्रेस को मिला था दोनों सदनों में बहुमत
  • 9 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध जीते

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर विपक्षी दलांे को धराशायी कर दिया है। इस बार तो सपा का पूरी तरह सफाया हो गया है। विधान परिषद सदस्यों के चुनाव में पार्षद, प्रधान, जिला पंचायत सदस्य जैसे विभिन्न स्तर के जनप्रतिनिधि मत देते हैं। इसलिए योगी आदित्यनाथ ने यह साबित कर दिया कि हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 254 विधायक यूं ही नहीं मिल गये। सरकार की लोकप्रियता के चलते ही योगी की लगातार दूसरी बार प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनी और अब विधान परिषद के सदस्य भी चुने गये हैं। इन चुनावों में 9 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध जीत हासिल कर चुके थे। इसके बाद 27 सीटों के लिए गत 9 अप्रैल को मतदान हुआ था। इसका परिणाम 12 अप्रैल को आया है। तीन सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव को आजमगढ़ में गहरी निराशा हुई है जहां से उन्हांेने संसदीय सीट खाली की है। इस सीट पर अब उपचुनाव होना है। यहां से विधान परिषद चुनाव में भाजपा से निष्कासित यशवंत सिंह के बेटे विक्रांत सिंह रिशु ने जीत हासिल की है। योगी को इस बात का भी श्रेय मिलेगा कि पहली बार भाजपा को विधानसभा के साथ विधान परिषद में भी बहुमत हासिल हुआ है। इससे पूर्व 1982 में कांग्रेस को दोनों सदनों में बहुमत मिला था।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 36 में से 27 सीटों के लिए 9 अप्रैल को हुए मतदान के लिए मंगलवार (12 अप्रैल) को मतगणना हुई। मतों की गिनती सभी 27 जिलों के कलेक्ट्रेट पर सुबह 8 बजे से शुरू हो गई थी। मुख्य मुकाबला बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। चुनाव 36 सीटों पर होने थे, लेकिन 9 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं। लिहाजा 27 पर वोटिंग हुई। 9 अप्रैल को आगरा-फिरोजाबाद, मुरादाबाद- बिजनौर, रामपुर-बरेली, गोरखपुर- महाराजगंज, पीलीभीत- शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ-उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, आजमगढ़-मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी-जालौन- ललितपुर, इटावा- फर्रुखाबाद, गोंडा, फैजाबाद, कानपुर-फतेहपुर, मेरठ-गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर- सहारनपुर, बलिया, बस्ती-सिद्धार्थनगर और देवरिया में वोटिंग हुई थी। इन सीटों पर 96 कैंडिडेट मैदान में थे। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र के इस चुनाव में सत्ता पक्ष की ही जीत होती है। 2004 में मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री थे तब सपा 36 में से 24 सीटों पर जीती थी। इसके बाद 2010 में मायावती के शासनकाल में बसपा ने 36 में से 34 सीटों पर कब्जा किया था। अखिलेश के समय भी कुछ नहीं बदला था, 2016 में अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने भी 36 में से 31 सीटें जीती थीं।

इसी वर्ष अर्थात् 2022 के विधानसभा चुनावों में 274 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत में आई भाजपा ने 9 सीटें तो बिना लड़े ही अपने पाले में कर ली थीं। मतगणना के समय सियासी जानकारों का मानना था कि दो सीटों को छोड़कर जहां कांटे की टक्कर मानी जा रही है, वहीं, इस चुनाव में 34 सीटें भाजपा के खाते में जाती हुई दिखाई दे रही हैं। सबसे चैंकाने वाला मामला आजगढ़ में रहा। विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली समाजवादी पार्टी को अपने ही गढ़ में बड़ा झटका लगा है। यूपी विधान परिषद चुनाव में आजमगढ़ सीट पर समाजवादी पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। मंगलवार को आए परिणाम में बीजेपी से 6 साल के लिए निष्कासित यशवंत सिंह के बेटे विक्रांत सिंह रिशु ने बीजेपी के अरुण कांत यादव को हराकर जीत दर्ज की। सपा के राकेश कुमार यादव उर्फ गुड्डू तीसरे नंबर पर रहे। विक्रांत सिंह रिशु को 4075 वोट प्राप्त हुए, जबकि सपा विधायक रमाकांत यादव के बेटे अरुण कांत यादव पर दांव खेलने वाली बीजेपी को 1262 मत प्राप्त हुए। तीसरे नंबर पर रहे सपा के राकेश उर्फ गुड्डू को 356 वोट प्राप्त हुए। निर्दलीय अम्ब्रीश कुमार विजयंता के 13 और सिकंदर कुशवाहा को तीन मत प्राप्त हुए। कुल 36 सीटों में से समाजवादी पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हुई है। बीजेपी की 33 सीटों पर जीत मिली। पूर्व में 9 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज करने वाली बीजेपी ने जिन 27 सीटों पर मतदान हुए थे उसमें से 24 सीटों पर जीत हासिल की। इस तरह उसे 36 में से 33 सीटों पर जीत हासिल हुई। लिहाजा विधानसभा के साथ ही अब विधान परिषद में बीजेपी को प्रचंड बहुमत हासिल हो गया। ऐसा 40 बाद हुआ है जब किसी पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत मिला हो। इससे सरकार को किसी भी बिल और विधेेयक को पारित करवाने में आसानी होगी। तीन सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई है। आजमगढ़ के अलावा वाराणसी में निर्दलीय प्रत्याशी अन्नपूर्णा सिंह तो प्रतापगढ़ सीट से जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक के अक्षय प्रताप सिंह की जीत हुई है। आजमगढ़ से निर्दलीय विक्रांत सिंह रिशु, गाजीपुर से विशाल सिंह चंचल, बस्ती से सुभाष यदुवंश, सहारनपुर से वंदना वर्मा मेरठ-गाजियाबाद से धर्मेंद्र भरद्वाज, सीतापुर से बीजेपी के पवन सिंह चैहान और अयोध्या से बीजेपी के हरिओम पांडेय की जीत हुई है। वाराणसी सीट से जेल में बंद बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की है। उन्होंने बीजेपी के डॉ सुदामा पटेल को हराया। आगरा-फिरोजाबाद सीट से बीजेपी के विजय शिवहरे और गोरखपुर से बीजेपी के सीपी चंद, बहराइच से बीजेपी की प्रज्ञा तिवारी, जौनपुर से बीजेपी के बृजेश सिंह प्रिंशु, रायबरेली से बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह, लखनऊ से बीजेपी के रामचंद्र प्रधान, बाराबंकी से बीजेपी के अंगद कुमार सिंह, फतेहपुर-कानपुर से बीजेपी केअविनाश सिंह चैहान, गोंडा से बीजेपी के अवधेश कुमार, सुल्तानपुर से बीजेपी के शैलेन्द्र सिंह, बलिया से बीजेपी के रविशंकर सिंह, फर्रुखाबाद से बीजेपी के प्रांशु दत्त द्विवेदी, झांसी-जालौन-ललितपुर सीट से बीजेपी के रमा निरंजन, प्रयागराज-कौशाम्बी सीट से बीजेपी के डॉ केपी श्रीवास्तव, पीलीभीत-शाहजहांपुर सीट से बीजेपी के सुधीर गुप्ता और देवरिया से बीजेपी के डॉ. रतन पाल सिंह की जीत हो चुकी है। प्रतापगढ़ सीट से जनसत्ता दल के प्रत्याशी अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल एमएलसी के चुनाव में विजयी हुए हैं। उन्होंने बीजेपी के हरिप्रताप सिंह को हराया। इस प्रकार विधानसभा के बाद विधान परिषद में भी योगी का डंका बजा है।
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भारतीय शिप यार्ड में अमेरिकी जहाजों की होगी मरम्मत

Posted: 13 Apr 2022 09:29 AM PDT

भारतीय शिप यार्ड में अमेरिकी जहाजों की होगी मरम्मत

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग व नौसैन्य क्षेत्र में संबंध बढ़ाने के लिए दोनों देश भविष्य की बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। इसके तहत आने वाले समय में भारतीय शिपयार्ड में अब अमेरिकी नौसेना के समुद्री जहाज और युद्धपोतों की मरम्मत और देखरेख का काम देखने को मिल सकता है। इससे भारत-अमेरिका के बीच रक्षा व्यापार बढ़ाने के साथ ही भारतीय शिपयार्ड का बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। ये फैसला सोमवार को अमेरिका के वॉशिंगटन में मंत्री स्तर की बैठक में लिया गया है।

बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ ही रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन शामिल थे। वहीं भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में हिस्सा लिया था। बैठक के बाद संयुक्त बयान में कहा गया है कि नौसेना क्षेत्र में रक्षा औद्योगिक सहयोग को और बढ़ाने के लिए दोनों पक्ष अमेरिकी नौसेना के जहाजों की बीच यात्रा में मरम्मत का समर्थन करने के लिए यूएस मैरीटाइम सीलिफ्ट कमांड के जहाजों की मरम्मत और रखरखाव के लिए भारतीय शिपयार्ड के इस्तेमाल की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमत हुए हैं। पिछले एक दशक में भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ा है। वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा था कि भारत-अमेरिका संबंध बीते दो दशकों में असल बदलाव के दौर से गुजरे हैं और इस साझेदारी का एक अहम कारक इसका मानवीय तत्व रहा है।
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इमरान की पार्टी के 8 सदस्य गिरफ्तार

Posted: 13 Apr 2022 09:27 AM PDT

इमरान की पार्टी के 8 सदस्य गिरफ्तार

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सत्ता हाथ से जाने के बाद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर एक और मुसीबत टूट पड़ी है। पीटीआई की सोशल मीडिया टीम के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीआई की सोशल मीडिया टीम ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ कथित रूप से बदनाम करने का अभियान चलाया था। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने पंजाब प्रांत के विभिन्न हिस्सों में सेना प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के जजों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने को लेकर गिरफ्तारियां कीं। 8 अप्रैल को इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से उनकी पार्टी और सोशल मीडिया टीम लगातार पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ ट्विटर पर कैंपेन चला रही थी। एफआईए के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों से सेना प्रमुख और शीर्ष अदालत के जजों के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान में शामिल 50 संदिग्धों की सूची मिली है। इनमें से अभी 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
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लाकडाउन का उल्लंघन करने पर पीएम पर जुर्माना

Posted: 13 Apr 2022 09:24 AM PDT

लाकडाउन का उल्लंघन करने पर पीएम पर जुर्माना


लंदन। भारत में बेशक लोग कोविड प्रोटोकॉल को लेकर उतने गंभीर नजर नजर नहीं आते जिन्हें इन नियमों का पालन करना चाहिए वो तो इन्हें नजरअंदाज करते ही हैं, लेकिन ब्रिटेन में स्थिति ऐसी नहीं है। यहां लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर जुर्माना लगा है। मामला पिछले साल के 19 जून का है। पीएम जॉनसन ने जुर्माना अदा करने के बाद इस गलती के लिए माफी भी मांगी है। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि बोरिस जॉनसन पर कितने रुपये का जुर्माना लगाया गया है, लेकिन इस पद पर रहते हुए नियम तोड़ने और जुर्माना झेलने वाले वह ब्रिटेन के पहले पीएम बन गए हैं।

जॉनसन ने बकिंघमशायर में बताया, ''मैंने जुर्माने का भुगतान कर दिया है और मैं एक बार फिर पूर्ण रूप से माफी मांगता हूं।" इससे पहले, ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यालय 'डाउनिंग स्ट्रीट' ने इस बात की पुष्टि की थी कि जॉनसन और वित्त मंत्री ऋषि सुनक को मेट्रोपॉलिटन पुलिस से सूचना मिली है कि उन्हें ''फिक्स्ड पेनल्टी नोटिस'' (एफपीएन) जारी किया जाएगा। पिछले साल जून में जब कोरोना की लहर चरम पर थी, तब 19 जून का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें जॉनसन पार्टी करते दिखे थे। इस मामले को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी। अब जुर्माना लगने के बाद फिर विपक्ष ने इसे उठाया और इस्तीफे की मांग की। उन्होंने जुर्माना अदा करते ही माफी मांगी है, लेकिन इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। पीएम के पार्टी करने की खबर सामने आई थी, तो उससे लोगों में काफी गुस्सा था। लोगों का कहना था कि पीएम खुद सेलिब्रेट कर रहे हैं और आम लोगों को घरों में कैद थे।
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न्यूयार्क में दो सिख युवकों पर हमला

Posted: 13 Apr 2022 09:22 AM PDT

न्यूयार्क में दो सिख युवकों पर हमला

न्यूयॉर्क। भारतवंशी और दक्षिण एशियाई लोग अमेरिका में सबसे प्रभावशाली प्रवासी समूह हैं। इसके बावजूद इस समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। न्यूयॉर्क में मेट्रो स्टेशन पर हाल ही में हुई फायरिंग की वारदात के बीच इसी शहर में मॉर्निंग वॉक पर निकले सिख युवकों पर हमला किया गया। ताजा मामले की बात करें तो न्यूयॉर्क के रिचमंड हिल्स इलाके में दो सिख युवकों को निशाना बनाया गया। जानकारी के मुताबिक दोनों सुबह की सैर पर निकले थे तभी अचानक उन पर हमला कर दिया गया। बीते 10 दिन पहले इसी इलाके में सिख समुदाय पर हमला हुआ था। ताजा मामला सामने आने के बाद बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन हमलों की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पिछले साल 2021 में आए आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में हेट क्राइम के करीब 4500 से ज्यादा मामले सामने आए थे जिसमें सबसे ज्यादा मामले मौखिक उत्पीड़न के थे।
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वक्फ़ बोर्ड को निरस्त किया जाना चाहिए:-अश्विनी उपाध्याय

Posted: 13 Apr 2022 09:12 AM PDT

वक्फ़ बोर्ड  को निरस्त किया जाना चाहिए:-अश्विनी उपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय (पी  आई एल मैन) से आज भारतीय जन महासभा का एक प्रतिनिधि मंडल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट परिसर नई दिल्ली में मिला । इस प्रतिनिधिमंडल में  श्री ए के जिंदल , श्री भरत सिंह  एवं श्री कमल राज जजवाडे जी सम्मिलित थे । 

आज सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने अपनी दलील रखी कि वक्फ़ एक्ट  पहले बनाया गया था व उसके बाद वक्फ़ बोर्ड की स्थापना की गई जिसमें एक एम पी , एक एमएलए , एक स्कॉलर  इस प्रकार से 7 लोगों को उस बोर्ड में रखा गया था । ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस बोर्ड में सारे ही लोग मुस्लिम थे ।
 
बताया कि किसी मुस्लिम के द्वारा किसी भी हिंदू संपत्ति या किसी मंदिर पर अगर कोई अंगुली भी रख देता है कि यह तो उनका है तो मंदिरों के लिए कोर्ट के दरवाजे बंद हैं । उनको बोर्ड के सामने ही पेश होकर के अपनी संपत्ति होने का प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ेगा । 
एडवोकेट श्री अश्विनी उपाध्याय जी का कहना है कि इस प्रकार के वक्फ़ बोर्ड  को निरस्त किया जाना चाहिए ।

बाद में इस बारे में आये हुए  विभिन्न मीडिया/चैनलों के लोगों  को एडवोकेट श्री अश्विनी उपाध्याय जी ने संबोधित किया । 

भारतीय जन महासभा ने उनसे आग्रह किया कि इस प्रकार के बोर्ड को तो भंग करवाना ही चाहिए और समस्त अन्य धर्म के जो गिरजाघर व मस्जिदें हैं उनकी तरह ही मंदिरों को भी स्वतंत्रता मिले । इनकी संपत्ति को कोई दूसरा उपभोग न कर सके ।
 
भारतीय महासभा के लोगों ने एडवोकेट श्री अश्विनी उपाध्याय जी से कहा कि भारतीय जन महासभा उनके साथ है और किसी भी प्रकार की कोई भी आवश्यकता लगे तो भारतीय जन महासभा के लोगों को सूचित किए जाने पर वह अवश्य उनकी हर संभव सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे ।

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