प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- 69000 शिक्षक भर्ती मामला : एक अंक पर अटका है सात सौ से ज्यादा शिक्षकों का चयन, बेसिक शिक्षा मंत्री से की समाधान की उम्मीद
- भीषण गर्मी के दृष्टिगत विद्यालय संचालन के समय परिवर्तन सम्बन्धी आदेश जारी
- मदरसों से खत्म होंगे दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद, शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर
- बांदा : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ के फर्नीचर घोटाले में जांच समिति गठित
- संसाधन के साथ बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री
- KVS Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- केंद्रीय विद्यालय संगठन बताए, इस साल दाखिले की उम्र 5 साल की जा सकती है या नहीं?
| Posted: 06 Apr 2022 07:57 AM PDT 69000 शिक्षक भर्ती मामला : एक अंक पर अटका है सात सौ से ज्यादा शिक्षकों का चयन, बेसिक शिक्षा मंत्री से की समाधान की उम्मीद प्रयागराज : बेसिक शिक्षा में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती उत्तरकुंजी मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन न किए जाने से एक अंक से चयन से वंचित अभ्यर्थियों में निराशा है। प्रदेश में नए बेसिक शिक्षा मंत्री के कार्यभार ग्रहण करने के बाद राहत पाने की उम्मीद में अभ्यर्थियों ने लखनऊ में उनसे मुलाकात की। बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी किस तरह इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच के 25 अगस्त, 2021 के आदेश का अनुपालन नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से मिले दुर्गेश शुक्ला ने बताया कि हाई कोर्ट ने प्रश्न नंबर 60 के तीसरे विकल्प को परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की उत्तरकुंजी में सही मानने को अमान्य कर दिया। प्रश्न था - 'शैक्षिक प्रशासन उपयुक्त विद्यार्थियों को उपयुक्त शिक्षकों द्वारा समुचित शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाता है जिससे वे उपलब्ध अधिक साधनों का उपयोग करके अपने प्रशिक्षण से सर्वोत्तम को प्राप्त करने में समर्थ हो सकें।' यह परिभाषा दी गई है:-। उत्तर के विकल्प हैं- (1) एसएन मुखर्जी द्वारा, (2) कैम्बेल द्वारा, (3) वेलफेयर ग्राम द्वारा, (4) डा. आत्मानंद द्वारा। पीएनपी ने उत्तरकुंजी में विकल्प तीन को सही माना। इसे अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी विकल्पों को गलत माना और एक अंक से चयन से वंचित याचियों व अपीलकर्ताओं को एक अंक देकर चयन करने का आदेश 25 अगस्त, 2021 को दिया। दुर्गेश शुक्ला, राम मिश्रा, रोहित शुक्ला, प्रसून दीक्षित आदि का कहना है कि एक अंक दिए जाने पर सात सौ से ज्यादा अभ्यर्थियों को चयन हो जाएगा। सामान्य वर्ग में कटआफ अंक 97 गया है, जबकि उन्हें 96 अंक मिले हैं। एससी-एसटी का कटआफ अंक 90 है और कई को 89 अंक मिले हैं। अभ्यर्थियों ने मंत्री को बताया कि सात माह बाद भी अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन न कर उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। मंत्री ने जल्द ही विभागीय अफसरों के साथ मीटिंग कर समाधान निकालने का भरोसा दिया है। |
| भीषण गर्मी के दृष्टिगत विद्यालय संचालन के समय परिवर्तन सम्बन्धी आदेश जारी Posted: 06 Apr 2022 09:44 AM PDT |
| मदरसों से खत्म होंगे दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद, शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर Posted: 05 Apr 2022 03:57 PM PDT मदरसों से खत्म होंगे दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद, शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में मदरसा शिक्षा में कई बड़े बदलाव करने जा रही है। मदरसों में अब दीनी तालीम कम कर हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों पर अधिक फोकस किया जाएगा। मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम को सरकार ऐसा बनाने जा रही है जिससे यहां के छात्र भी दूसरे बोर्ड के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। सरकार के इस फैसले से मदरसों से दीनी तालीम देने वाले 5339 शिक्षकों के पद चरणवार तरीके से खत्म हो जाएंगे। अब मदरसों में कुल 8129 शिक्षकों के पदों में से 6455 पद आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के रहेंगे। प्रदेश में वित्त पोषित 558 मदरसे हैं, जिनमें 8129 शिक्षकों व 558 प्रधानाचार्य के पद हैं। इन पर सरकार हर साल 866 करोड़ रुपये खर्च करती है। इतनी बड़े खर्च के बावजूद मदरसों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। इसका मुख्य कारण यहां ऐसे विषयों को पढ़ाया जाना जिसके कारण यहां के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते हैं। इसलिए सरकार मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम में अहम बदलाव करने जा रही है। अभी तक कक्षा एक से पांच तक के मदरसों में सभी पांचों शिक्षक दीनी तालीम देने वाले होते हैं। कक्षा छह से आठ तक के मदरसों में तीन शिक्षकों में दो दीनी तालीम वाले होते हैं। इसी प्रकार आलिया (कक्षा 9 व 10) स्तर के मदरसों में चार में से तीन शिक्षक दीनी तालीम देने के लिए होते हैं। यानी कक्षा छह से आठ व आलिया स्तर के मदरसों में अभी केवल एक-एक शिक्षक ही वैकल्पिक विषय पढ़ाने वाले होते हैं। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 में जरूरी संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजने का प्रस्ताव पास हुआ। इसमें तय हुआ कि प्रत्येक कक्षा के स्तर पर केवल एक शिक्षक ही दीनी तालीम देने के लिए रहेंगे। ऐसे में कक्षा एक से पांच तक के मदरसों में पांच शिक्षकों में एक शिक्षक दीनी तालीम व चार शिक्षक आधुनिक विषय पढ़ाने वाले रहेंगे। कक्षा छह से आठ तक के मदरसों में तीन शिक्षकों में एक दीनी तालीम व दो आधुनिक विषय पढ़ाने वाले रहेंगे। इसी प्रकार आलिया स्तर के मदरसों में चार शिक्षकों में एक दीनी तालीम व तीन आधुनिक शिक्षा से जुड़े शिक्षक रहेंगे। वर्तमान में अब 8129 शिक्षकों के पदों में 7013 पद दीनी तालीम देने वाले व 1116 पद वैकल्पिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के हैं। नई व्यवस्था में अब 558 मदरसों में 1674 पद दीनी तालीम वाले शिक्षकों के रह जाएंगे। दीनी तालीम देने वाले पुराने शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा असर मदरसा बोर्ड के इस फैसले का दीनी तालीम देने वाले पुराने शिक्षकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जितने शिक्षक रिटायर होते जाएंगे उनके स्थान पर आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती होते जाएंगे। पहले चरण में जितने भी रिक्त पद हैं, उनमें आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। जहां दीनी तालीम देने वाले शिक्षक अधिक हैं उन्हें दूसरे मदरसों में तबादला किया जाएगा। अब 8129 पदों में 6455 शिक्षक रहेंगे हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान व गणित पढ़ाने वाले, मदरसा शिक्षा में कई बड़े बदलाव करने जा रही योगी सरकार मदरसा बोर्ड ने सर्वसम्मति से केवल एक प्रश्नपत्र दीनियात विषय का रखा है। बाकी पांच विषय हंिदूी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के रहेंगे। इसलिए अब तहतानिया, फौकानिया व आलिया स्तर के मदरसों में केवल एक-एक शिक्षक ही दीनियात विषयों के रहेंगे, अन्य सभी शिक्षक हंिदूी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के रहेंगे। इसके लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है। -डा. इफ्तिखार अहमद जावेद, अध्यक्ष, मदरसा बोर्ड महापुरुषों व स्वतंत्रता सेनानियों की पढ़ाई जाएगी जीवनी मदरसों के छात्रों को अब भारत के महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जीवनी पढ़ाई जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यहां के बच्चों में देश प्रेम व भक्ति का भाव जागृत हो सके और वे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा ले सकें। |
| बांदा : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ के फर्नीचर घोटाले में जांच समिति गठित Posted: 05 Apr 2022 12:10 PM PDT बांदा : उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ के फर्नीचर घोटाले में जांच समिति गठित बांदा जनपद के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति किए गए 7 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के घटिया फर्नीचर घोटाले में जांच के लिए डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आपूर्तिकर्ता फर्म को 15 दिन के अंदर घटिया फर्नीचर न बदलने पर काली सूची में डालने और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है। जनपद के 494 उच्च प्राथ स्कूलों में 14.957 डेस्क बेच / फर्नीचर की आपूर्ति की गई है। इसके लिए शासन ने 7 करोड़ 11 लाख 95 हजार 530 रुपये जारी किए हैं। प्रत्येक डेस्क की कीमत 4760 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है। फर्नीचर की आपूर्ति सीतापुर की एक फर्म को सौंपी गई है। फर्म जो फर्नीचर स्कूलों को आपूर्ति किया है यह इतना घटिया है कि उठाने धरने में ही टूट रहा है। 30 मार्च (बुधवार) को प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला यूनिट ने जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी के नेतृत्व में बीएसए व अन्य अधिकारियों की शिकायती पत्र देकर घटिया फर्नीचर आपूर्ति की गैर विभागीय अधिकारियों से जांच कराने की मांग की थी। डीएम अनुराग पटेल ने घटिया फर्नीचर संबंधी अमर उजाला में छपी खबर का हवाला देकर जारी आदेश में इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति के सदस्यों में डिप्टी कलेक्टर लाल सिंह सहित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आईटीआई अनुदेशक (काष्ठ) नरेंद्र प्रजापति शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के अंदर जांच करके अपनी विस्तृत संयुक्त जांच रिपोर्ट उन्हें पेश करें। उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपाल सिंह ने फर्नीचर आपूर्ति करने वाली सीतापुर की फर्म को जारी आदेश में कहा है कि 15 अप्रैल तक सभी अति/खराब फर्नीचर बदलना सुनिश्चित करें वरना उच्चाधिकारियों को सूचित करके फर्म को काली सूची में डालकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। बीएसए ने फर्म को इस बात के लिए भी लताड़ा है कि फर्नीचर बदलने के बारे में पहले भी आदेश दिए गए थे लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। बीएसए ने सभी खंड शिक्ष कारियों को निर्देश दिए हैं. कि अपने क्षेत्र के स्कूलों में क्षतिग्रस्त या खराबडेस्क मैच की सूची दो दिन में उपलब्ध कराएं। |
| संसाधन के साथ बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री Posted: 05 Apr 2022 04:04 PM PDT आगामी शैक्षिक वर्ष की कार्ययोजना तय करने हेतु बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने ली जिम्मेदारों संग बैठक। संसाधन के साथ बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री लखनऊ : बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा है कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से किया जाए, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं हो। बच्चों को संसाधन के साथ बेहतर शिक्षा दी जाए इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। बेसिक शिक्षा निदेशालय में मंगलवार को विभागीय अधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त बातें कहीं।( माननीय मुख्यमंत्री श्री MYogiAdityanathth जी के निर्देशानुसार आगामी शैक्षिक वर्ष की कार्ययोजना तय करने के लिए आज लखनऊ बेसिक शिक्षा निदेशालय सभागार में महानिदेशक बेसिक शिक्षा श्रीमती अनामिका सिंह, विशेष सचिव श्री अवधेश तिवारी समेत विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा और आगामी कार्य योजना पर चर्चा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। |
| Posted: 05 Apr 2022 11:45 AM PDT KVS Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- केंद्रीय विद्यालय संगठन बताए, इस साल दाखिले की उम्र 5 साल की जा सकती है या नहीं? KVS Admission 2022 : दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) से यह बताने के लिए कहा है कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह 5 साल की जा सकती है या नहीं। हाईकोर्ट ने केवीएस के वकील से इस बारे में दिशा निर्देश लेने और अवगत करने का निर्देश दिया है। जस्टिस रेखा पल्ली ने केंद्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र पांच वर्ष से बढ़ाकर छह साल किए जाने के केवीएस के फैसले के चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को निर्देश दिया। इससे पहले याचिकाकर्त बच्ची की ओर से वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि वह न तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को चुनौती दे रहे हैं और ना ही केवीएस के अधिकार को। अग्रवाल ने कहा कि वह सिर्फ आनन-फानन में दाखिले की न्यूनतम उम्र में बढ़ोतरी किए जाने और इसके लिए अपनाए गए तरीके के खिलाफ हैं। इसके बाद जस्टिस पल्ली ने केवीएस के वकील से यह बताने के लिए कहा है कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह 5 साल किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि केवीएस किसी तरह का इस बारे में निर्णय नहीं लेता है तो वह अगली सुनवाई पर समुचित आदेश पारित करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल यानी गुरुवार को होगी। केवीएस ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह साल किए जाने को सही ठहराया था। केवीएस ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम उम्र छह साल करने का फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। केवीएस ने यह भी कहा है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत छह से 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार ने इस मसले पर गहन विचार-विमर्श के बाद एनईपी 2020 को अधिसूचित किया है, जिसमें शैक्षणिक और पाठ्यचर्या पुनर्गठन की एक नई योजना लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा केवीएस ने केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2021 में सभी राज्यों को लिखे गए पत्र का हवाला दिया है, जिसमें अगले दो से तीन साल में एनईपी को लागू करने का रोडमैप तैयार करने को कहा गया है। साथ ही सरकार द्वारा केवीएस को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया गया है। केवीएस ने एक बच्ची की ओर से उम्रसीमा बढ़ाने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करने की मांग की है। केंद्रीय विद्यालय में पहली कक्षा में दाखिले का इंतजार कर रही बच्ची आरिन की ओर से वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष ने केवीएस के निर्णय को मनमाना, अतार्किक और अनुचित बताते हुए रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा है कि याचिकाकर्ता की उम्र 5 साल नौ महीने 28 दिन है और वह अभी यूकेजी में पढ़ रही है और इस साल पहली कक्षा में दाखिला लेने का इंतजार कर रही है। |
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