प्राइमरी का मास्टर ● इन - 🌐

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Tuesday, April 26, 2022

प्राइमरी का मास्टर ● इन

प्राइमरी का मास्टर ● इन


जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा- 2021 के मामले में परीक्षा नियामक से जवाब-तलब

Posted: 26 Apr 2022 05:30 PM PDT

जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा- 2021 के मामले में परीक्षा नियामक से जवाब-तलब


प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा-2021 के परिणाम के मामले में दाखिल याचिका पर परीक्षा नियामक प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण मामले में दो हफ्ते में जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर प्रतिवादी जवाब नहीं दाखिल कर पाते हैं तो उन्हें पेश होना होगा।


 मामले की सुनवाई के लिए 11 मई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मुकुल गोस्वामी पांच अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट में याचीयों की ओर से कहा गया है कि परीक्षा केदौरान अभ्यर्थियों को विषय कोड से संबंधित दिए गए दो कॉलम में एक ही को भरना था लेकिन बहुत से अभ्यर्थियों ने दोनों कॉलम भर दिए। इस वजह उनका परिणाम अवैध घोषित कर दिया गया।

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

Posted: 26 Apr 2022 05:16 PM PDT

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट



नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा वे सरकार की विस्तारित इकाई बन गए हैं। पीठ ने कहा कि 1972 (ग्रेच्युटी का भुगतान) कानून आंगनवाड़ी केंद्रों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों पर लागू होगा।


पीठ ने कहा कि इन अपीलों में शामिल विषय यह है कि क्या एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत स्थापित आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


पीठ ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस निष्कर्ष की पुष्टि की लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जिला विकास अधिकारी द्वारा दायर अपीलों पर एकल पीठ के फैसले को खारिज करते हुए निर्णय दिया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 1972 के कानून की धारा 2(ई) के अनुसार कर्मचारी नहीं कहा जा सकता तथा आईसीडीएस परियोजना को उद्योग नहीं कहा जा सकता है।


उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के प्रावधानों और शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 11 के कारण आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं।
न्यायमूर्ति ओका ने एक अलग फैसले में कहा कि इस प्रकार, आंगनवाड़ी केंद्र राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के मद्देनजर सरकार की एक विस्तारित शाखा बन गए हैं।


 उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत परिभाषित राज्य के दायित्वों को प्रभावी बनाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई है और ऐसे में कहा जा सकता है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायक के पद वैधानिक हैं।

केंद्रीय विद्यालयों में कोटे से प्रवेश बंद, केंद्र सरकार ने लिया प्रवेश से जुड़ा बड़ा फैसला

Posted: 26 Apr 2022 04:53 PM PDT

केंद्रीय विद्यालयों में कोटे से प्रवेश बंद, केंद्र सरकार ने लिया प्रवेश से जुड़ा बड़ा फैसला


प्रधानमंत्री की पहल पर केंद्र सरकार ने लिया प्रवेश से जुड़ा बड़ा फैसला

हर साल विशेष कोटे से करीब 40 हजार छात्रों का होता था दाखिला

सांसद, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारी सहित लगभग सभी कोटा खत्म


नई दिल्ली : केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इनमें लागू कोटा प्रथा को लगभग समाप्त कर दिया है। इस फैसले के तहत जो कोटे खत्म किए गए हैं, उनमें सांसदों, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारियों, केंद्रीय विद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सहित प्रवेश से जुड़े करीब दर्जन भर कोटे शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालयों में कोटे से हर साल 40 हजार सीटें भरी जाती थीं। इनमें अकेले करीब आठ हजार सीटें सांसदों की सिफारिश से भरी जाती थीं। प्रत्येक सांसद को 10 सीटों का कोटा दिया गया था।


विशेष कोटे से भरी जाने वाली ये सीटें स्कूलों में निर्धारित क्षमता के अतिरिक्त होती थीं। ऐसे में इस प्रवेश से केंद्रीय विद्यालयों की गुणवत्ता सहित छात्र-शिक्षक अनुपात और कई अन्य मानक प्रभावित हो रहे थे। प्रधानमंत्री ने इसमें हस्तक्षेप किया और कोटे की इस प्रथा को खत्म करने के लिए कहा। 


सबसे पहले शिक्षा मंत्री ने खुद अपना कोटा खत्म किया। साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को प्रवेश से जुड़े विशेष कोटे की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए। पीएम की पहल और शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद केवीएस ने पिछले दिनों कोटे पर रोक लगा थी। साथ ही पूरे मामले की समीक्षा करने का फैसला लिया था।


केवीएस ने मंगलवार को प्रवेश से जुड़े करीब दर्जन भर विशेष कोटे को खत्म करने के साथ प्रवेश को लेकर एक संशोधित गाइडलाइन भी जारी की है। इसके तहत केवीएस ने सांसदों, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारियों, केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारियों, प्रायोजित एजेंसियों, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष (जिला कलेक्टरों या ऐसी एजेंसियों के प्रमुख जो स्कूल निर्माण के लिए भूमि मुहैया कराते हैं) के अतिरिक्त राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों आदि के कोटे को खत्म किया है।


सांसद अब अपने बच्चों को भी नहीं दिला पाएंगे प्रवेश

केंद्रीय विद्यालय में अपने विशेष कोटे से दूसरों को प्रवेश दिलाने वाले सांसद अब अपने बच्चों और नाती-पोतों को भी प्रवेश नहीं दिला सकेंगे।


प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और कोविड में अनाथ बच्चों को कोटा

केवीएस ने खेल, स्काउट गाइड और फाइन आर्ट्स जैसी विधाओं से जुड़े प्रतिभाशाली बच्चों, एक बालिका और वीरता व बालश्री पुरस्कार प्राप्त बच्चों के कोटे को बरकरार रखा है। कोविड के चलते अनाथ हुए बच्चों और कश्मीरी विस्थापितों के बच्चों के लिए विशेष रियायत जारी रखने का भी फैसला लिया गया है। 

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को दाखिला पीएम केयर स्कीम के तहत दिया जाएगा। इसके तहत जिला कलेक्टर की सिफारिश पर किसी भी स्कूल में ऐसे 10 बच्चों को और एक कक्षा दो बच्चों को दाखिला देने का प्रविधान किया गया है। इनकी फीस भी माफ की गई है।

मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले प्रदेश के 7442 मदरसों की जांच के आदेश

Posted: 26 Apr 2022 04:48 PM PDT

मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले प्रदेश के 7442 मदरसों की जांच के आदेश


लखनऊ : मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले सभी 7442 मदरसों की जांच होगी। शासन ने जिलाधिकारियों के माध्यम से भौतिक अवस्थापना सुविधाओं की जांच के आदेश दिए हैं, 15 मई तक जांच रिपोर्ट तय प्रारूप पर शासन को भेजी जानी है। जांच के लिए नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग तीन-तीन अफसरों की कमेटी बनाई गई है।


अमरोहा, कुशीनगर व गोंडा जिलों में चल रहे फर्जी मदरसों की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। केंद्र की ओर से मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मुस्लिम बच्चों को गुणवत्ता व आधुनिक शिक्षा के लिए अनुदान दिया जाता है। 


पारंपरिक शिक्षा के अलावा विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, हंिदूी व सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाने के लिए हर मदरसे में तीन-तीन शिक्षक रखे जाते हैं। स्नातक शिक्षकों को छह हजार व परास्नातक शिक्षकों को 12 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रदेश सरकार भी स्नातक शिक्षकों को दो हजार व परास्नातक शिक्षकों को तीन हजार रुपये मानदेय देती है। इस योजना में प्रदेश के 7442 मदरसों के 21126 शिक्षक शामिल हैं।


पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की बोर्ड बैठक में सदस्य तनवीर रिजवी की ओर से योजना में शामिल अमरोहा के कई मदरसों के अस्तित्व में न होने संबंधी शिकायत पर बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रदेश के सभी संबंधित मदरसों की जांच कराने का निर्णय लिया।


 बताया गया कि एक ही सोसायटी कई मदरसों का संचालन कर रही है। अब उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले मदरसों का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को दिया है। परिषद ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है। इसमें भवन, भूमि, किराया नामा, शिक्षक व छात्रों आदि की जांच की जाएगी।


जांच समिति ग्रामीण क्षेत्र

उप जिलाधिकारी>>अध्यक्ष
खंड शिक्षा अधिकारी>>सदस्य
खंड विकास अधिकारी की ओर से नामित अवर अभियंता >> सदस्य


जांच समिति नगर क्षेत्र

उप जिलाधिकारी>>अध्यक्ष
नगर शिक्षा अधिकारी>>सदस्य
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, नगर पंचायत, नगर आयुक्त की ओर से नामित अभियंता>>सदस्य

माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटाए गए विनय कुमार पाण्डेय को अब किया गया निलंबित

Posted: 26 Apr 2022 08:24 AM PDT

माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटाए गए विनय कुमार पाण्डेय को अब किया गया निलंबित

बड़ी कार्रवाई : सीएम योगी ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय को किया निलंबित


मुख्यमंत्री योगी ने तत्कालीन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) विनय पांडये को निलंबित करने का आदेश दिया है, जो आधिकारिक कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन नहीं करने, सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता और सरकारी स्तर के निर्देशों का पालन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी मिले हैं।




विनय पांडे को 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटा दिया गया था और उन्हें साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू और प्राच्य भाषाओं के निदेशक के रूप में तैनात किया गया था। पिछले महीने बलिया में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद 24 जिलों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक विद्यालय बोर्ड की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मामले में कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करने का आदेश दिया था। रद्द की गई परीक्षा 13 अप्रैल को फिर से आयोजित की गई थी।



मुख्यमंत्री कार्यालय के एक ट्वीट में कहा गया, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही पर एक और सख्त कार्रवाई। तत्कालीन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को निलंबित कर दिया गया।"

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की डेटशीट जारी

Posted: 26 Apr 2022 07:54 AM PDT

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की डेटशीट जारी

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं आगामी 14 मई से शुरू होंगी। परिषद की सेकेण्ड्री, सीनियर सेकेण्ड्री, कामिल व फाजिल पाठ्यक्रमों की यह परीक्षाएं 23 मई तक चलेंगी। परिषद के रजिस्ट्रार एस.एन.पाण्डेय ने परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके अनुसार सेकेण्ड्री कक्षाओं की परीक्षा पहली पाली में सुबह आठ बजे से पूर्वान्ह 11 बजे के बीच और सीनियर सेकेण्ड्री, कामिल व फाजिल की परीक्षाएं दूसरी पाली में दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे के बीच होंगी। परीक्षा का कार्यक्रम परिषद के पोर्टल पर भी उपलब्ध करवा दिया गया है।


- वर्ष 2021 में 1,23,046 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे थे 
- 1,22,132 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे थे।  
- वर्ष 2020 में 1,82, 259 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे 
- 1,41,052 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। 

परिषद से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार की वार्षिक परीक्षा के लिए कुल 1,62, 631 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे हैं। इनमें सर्वाधिक सेकेण्ड्री कक्षाओं के लिए 91,467, सीनियर सेकेण्ड्री के लिए 25,921, कामिल प्रथम वर्ष के लिए 13,161 ने पंजीकरण करवाया है। कामिल द्वितीय वर्ष के लिए 10,888, कामिल तृतीय वर्ष के लिए 9796, फाजिल प्रथम वर्ष के लिए 5,197 और फाजिल द्वितीय वर्ष के लिए 6,201 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे हैं।

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का मिलेगा पैसा

Posted: 26 Apr 2022 04:56 PM PDT

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का  मिलेगा पैसा


लखनऊ : योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 27,555 अंशकालिक अनुदेशकों और सरकारी, परिषदीय व सहायताप्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील पकाने वाले 3,77,520 रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का फैसला कर उनसे किया गया वादा निभाया है। 


अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में 2000 रुपये और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक शैक्षिक सत्र में महिला रसोइयों को ड्रेस के तौर पर साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट के लिए उनके बैंक खातों में 500 रुपये की रकम भेजने का भी निर्णय हुआ है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन में हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में नौ प्रस्ताव मंजूर हुए जबकि एक स्थगित कर दिया गया। बैठक के बाद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को अभी तक 7000 रुपये मानदेय मिलता था जिसे बढ़ाकर 9000 प्रतिमाह करने का फैसला किया गया है।


 वहीं रसोइयों का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का निर्णय हुआ है। सरकार ने रसोइयों की ओर से ड्रेस की मांग को स्वीकार करते हुए महिला रसोइयों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट उपलब्ध कराने के लिए 500 रुपये देने का भी निर्णय किया है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर 268.26 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आएगा।


गौरतलब है कि पिछले वर्ष 16 दिसंबर को विधान सभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए पेश किये गए दूसरे अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।



यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : अंशकालिक अनुदेशको के मानदेय में 2000 और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोत्तरी



यूपी कैबिनेट में सोमवार को कुल 10 प्रस्ताव आए, जिसमें से नौ प्रस्ताव पास हुए।


🔴  27505 अंशकालिक अनुदेशक का मानदेय 2000 रुपये बढ़ा। 7000 की जगह 9000 रुपये मिलेगा।


🔵  377520 रसाेईये का अनुदान बढ़ाकर 1500 की जगह 2000 रुपये किया गया है। साल में एक बार 500 रुपये साड़ी, या पैंट शर्ट के लिये दिए जाएंगे।




अभी तक चीन से एचपीसीएल आयात करते थे। यह एक प्रकार का एथनॉल है। अब 10 लाख लीटर खुद यूपी बनाएगा। यह लैब से जुड़े कार्य मे उपयोग होता है। 

विधानसभा सत्र में असरकारी प्रस्ताव पर समिति बनेगी। बेबीरानी, जयवीर और धर्मपाल सदस्य होंगे। सुरेश खन्ना अध्यक्ष होंगे। योगेंद्र उपाध्याय भी असरकारी समिति में शामिल हैं।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए टोल प्लाजा, एम्बुलेंस आदि के लिए 222 करोड़ रुपये की निविदा हुई। छह एम्बुलेंस, 12 पेट्रोलिंग वाहन सहित अन्य सुविधाएं देंगे।

पीजीआई के सामने तीमारदारों के लिये भवन बनेगा। 5393 वर्गमीटर जमीन दी गई है। सिंचाई विभाग की जमीन थी।

एक मई से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर टोल लगेगा। 

69000 शिक्षक भर्ती में गृह जनपद आवंटित न करने पर जवाब तलब

Posted: 25 Apr 2022 06:21 PM PDT

69000 शिक्षक भर्ती में गृह जनपद आवंटित न करने पर जवाब तलब


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बिजनौर जिला निवासी अनुसूचित जाति के याची को गृह जनपद आवंटित करने के लिए दाखिल याचिका पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य विपक्षियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। 



यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने अमित कुमार चौधरी की याचिका पर दिया है। याचिका में सचिव उप्र बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को क्वालिटी प्वाइंट अंक व जिला वरीयता के आधार पर पुनरीक्षित आवंटन सूची जारी करने संबंधी समादेश जारी करने की मांग की गई है।


 याची की तरफ से अधिवक्ता एमए सिद्दीकी ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद शाहजहांपुर जिला आवंटित किया गया है। नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया है। याची को 62.5 क्वालिटी प्वाइंट अंक मिले हैं, जबकि विपक्षी संख्या चार से 14 तक ने उससे कम अंक प्राप्त किए हैं और उन्हें गृह जनपद आवंटित किया गया है। कोर्ट ने विपक्षियों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची का कहना है कि 1133 सीटें अभी भी खाली हैं, इसलिए उसे गृह जनपद िदया जाए।

राजनीतिक लाभ के लिए घोषणाओं पर कोर्ट के तीखे सवाल, कहा- व्यापक विमर्श और वित्तीय आकलन के बाद बननी चाहिए योजनाएं

Posted: 25 Apr 2022 06:16 PM PDT

राजनीतिक लाभ के लिए घोषणाओं पर कोर्ट के तीखे सवाल, कहा- व्यापक विमर्श और वित्तीय आकलन के बाद बननी चाहिए योजनाएं



पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं। केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी घोषणाओं को लेकर कोर्ट ने तीखे सवाल किए हैं। योजनाएं और कानून बनाने से पहले व्यापक जन बहस और उसके वित्तीय परिणाम पर भी चर्चा जरूरी है।


पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं।


नई दिल्ली। पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं। केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी घोषणाओं को लेकर कोर्ट ने तीखे सवाल किए हैं। वहीं यह बहस भी छिड़ गई है कि योजनाएं और कानून बनाने से पहले व्यापक जन बहस और उसके वित्तीय परिणाम पर भी चर्चा जरूरी है। अदालत ने पिछले दिनों ऐसी कई योजनाओं पर गंभीर आपत्ति जताई है जो या तो जल्दबाजी में बने हैं या फिर वित्तीय कारणों से जमीन पर नहीं उतर पा रहे हैं।


शीर्ष अदालत ने हाल में शिक्षा के अधिकार मामले पर एक सुनवाई के दौरान कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अगर हर स्तर पर स्कूलों में शिक्षकों का नियुक्ति नहीं की जा रही है तो कानून ही क्यों लाया गया। 

पांच पाच हजार वेतन के शिक्षक रखकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कानून बनाने से पहले वित्तीय आकलन जरूर किया जाना चाहिए और यह व्यापक विमर्श के बाद ही होना चाहिए। 


इसी तरह बिहार के शराब बंदी कानून के मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के ज्यादातर न्यायाधीशों के इस कानून में आरोपितों की जमानत सुनने में व्यस्त होने पर कानून को लेकर सवाल उठाया था। जिसके बाद बिहार सरकार कानून में संशोधन लाई है।


किसानों के देशव्यापी विरोध को देखते हुए पिछले दिनों सरकार ने नये कृषि कानून वापस ले लिए थे। इससे पहले इसी तरह के विरोध को देखते हुए भूमि अधिग्रहण संसोधन कानून वापस ले लिया गया था। कृषि कानून, सीएए, तीन तलाक कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनका संसद से लेकर सड़क तक बड़े स्तर पर विरोध हुआ हालांकि कृषि कानून के अलावा बाकी दोनों कानून कायम हैं। ऐसा नही है कि वापस लिए गए कानून ठीक नहीं थे कृषि कानून देश की कृषि नीति तय करने वाले और किसानों को बिचौलियों के चुंगल से मुक्त करने वाले थे।


पूर्व विधि सचिव पीके मल्होत्रा भी कहते हैं कि कई कानूनों को लाने के पीछे का उद्देश्य अच्छे हो सकते हैं लेकिन अगर निर्विवाद रूप से क्रियान्वयन न हो तो सवाल खडे होते हैं। सीएए और कृषि कानून के बारे में भी ऐसा ही हुआ। ध्यान रहे कि कुछ कानूनों को लेकर राजनीतिक रूप से भी माहौल गर्म रहा है। यही हाल मे राज्य सरकारों की कुछ घोषणाओं को लेकर भी रहा है।


खासकर मुफ्त बिजली अर्थशास्‍त्रियों से लेकर बिजली कंपनियों तक को नागवार गुजर रहा है। हाल में एसबीआइ की इकोरैप ने तो राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों को नाम लेते हुए कहा था कि यहां राज्य की जितनी आय है कि उससे 20-35 फीसद तक अधिक खर्च हो रहे हैं जिसके कारण इनकी वित्तीय स्थिति खराब है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: बेसहारा बच्चों की सुरक्षा के लिए SOP लागू करे राज्य सरकारें, जानिए पूरा मामला

Posted: 25 Apr 2022 06:09 PM PDT

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: बेसहारा बच्चों की सुरक्षा के लिए SOP लागू करे राज्य सरकारें, जानिए पूरा मामला


सड़क पर रहने वाले बच्चों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि राज्य सरकारें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा तैयार एसओपी को लागू करें। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने ये निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा इस दिशा में अब तक उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं हैं। पीठ ने कहा कि बच्चों को बचाने का काम अस्थायी नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों का पुनर्वास किया जाए।


इसके साथ ही पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि आज से दो सप्ताह की अवधि के भीतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इस पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई मई के दूसरे सप्ताह में करने का निर्देश दिया है। 


सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत को बताया गया कि तमिलनाडु और दिल्ली सरकार ने पहले ही बेसहारा बच्चों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए योजना तैयार कर ली है। इस पर न्यायालय ने तमिलनाडु और दिल्ली राज्यों को एनसीपीसीआर को इसकी एक प्रति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु और दिल्ली राज्यों को इस योजना को लागू करने का निर्देश देते हुए कहा है कि सरकार बेसहारा बच्चों की पहचान करने और उनके पुनर्वास के लिए तत्काल कदम उठाए।


इससे पहले शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को बेसहारा बच्चों के लिए पुनर्वास नीति तैयार करने के सुझावों को लागू करने का निर्देश दिया था। इस दौरान अदालत ने कहा था कि  यह केवल कागजों पर नहीं रहना चाहिए।


तब अदालत ने कहा था कि अब तक केवल 17,914 स्ट्रीट चिल्ड्रन के बारे में जानकारी प्रदान की गई है, जबकि उनकी अनुमानित संख्या 15-20 लाख है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के वेब पोर्टल पर आवश्यक सामग्री को बिना किसी चूक के अपडेट करना होगा।

चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के लिए अभी और इन्तजार, कोर्स को कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट पहुंचा

Posted: 25 Apr 2022 05:16 PM PDT

चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के लिए अभी और इन्तजार, कोर्स को कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट पहुंचा



नई दिल्ली: शैक्षणिक सत्र 2022-23 से शुरू होने वाले चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को लेकर छात्रों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। वजह इस कोर्स को सिर्फ देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट में पहुंच गया है। ऐसे में इसे शुरू करने में कुछ देरी हो सकती है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई कोर्ट में इसी हफ्ते होनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसके बाद स्थिति साफ हो सकती है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिश के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव किया था। इसे देश के करीब पचास संस्थानों से शुरू किया जाएगा। बाद में इसे और संस्थानों में विस्तार दिया जाएगा। नीति में सिफारिश की गई है कि 2030 के बाद स्कूलों में चार वर्षीय बीएड करने वाले छात्रों को ही बतौर शिक्षक नियुक्ति दी जाए।

Post Bottom Ad

Pages