प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- UGC Guidelines : 4 साल के ग्रेजुएशन में इंटर्नशिप करना होगा अनिवार्य, यूजीसी ने जारी कीं नई गाइडलाइंस
- सख्ती का असर : पहले दिन एक तिहाई छात्रों ने छोड़ी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं
- अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने के मामले में 16 मई को सुनवाई
- 68500 भर्ती नियुक्त शिक्षकों ने प्रत्यावेदन देकर तीन में से मांगा एक जिला
- बिना जांच प्रधानाध्यापक को पदावनत करने पर हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार ₹ हर्जाना
- 4500 विद्यालयों में होगी कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य, माध्यमिक शिक्षा विभाग से शासन ने मांगा प्रस्ताव, शिक्षकों की नियुक्ति की भी कवायद
| Posted: 14 May 2022 07:12 PM PDT UGC Guidelines : 4 साल के ग्रेजुएशन में इंटर्नशिप करना होगा अनिवार्य, यूजीसी ने जारी कीं नई गाइडलाइंस यूजीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक रिसर्च इंटर्नशिप दो तरह की होगी। पहली इंटर्नशिप छात्र की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए और दूसरी इंटर्नशिप छात्र की व्यक्तिगत शोध योग्यता विकसित करने के लिए होगी। UGC Internship Guidelines : नई शिक्षा नीति और स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के मकसद से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अहम फैसला किया है। यूजीसी की नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब चार वर्षीय डिग्री कोर्सेज के दौरान रिसर्च इंटर्नशिप को अनिवार्य कर दिया गया है। यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थान के शिक्षकों व शोध संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत रिसर्च इंटर्नशिप गाइडलाइंस का मसौदा तैयार किया है। आयोग ने तय किया है कि रिसर्च इंटर्नशिप दो तरह की होगी। पहली इंटर्नशिप छात्र की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी जबकि दूसरी इंटर्नशिप छात्र की व्यक्तिगत रिसर्च योग्यता विकसित करने के लिए होगी। मसौदे के मुताबिक, एनईपी 2020 के तहत तैयार किए गए नए कोर्स में डिग्री कोर्सेज में रिसर्च वाला भाग डालने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर चार वर्षीय बैचलर कोर्स के चौथे साल में स्टूडेंट्स की रिसर्च संबंधी योग्यता बढ़ाने पर फोकस रहेगा। इसके मुताबिक, 'प्रत्येक यूजी छात्र फर्स्ट ईयर के बाद 10 सप्ताह की अवधि की पहली रिसर्च इंटर्नशिप और यूजी डिग्री कार्यक्रम के सेकेंड ईयर के बाद 10 सप्ताह की अवधि की दूसरी रिसर्च इंटर्नशिप पूरा कर सकता है। जिस छात्र को रिसर्च के साथ चार साल की यूजी डिग्री कोर्स करना होगा, उसे 7वें सेमेस्टर के दौरान रिसर्च एबिलिटी एनहेंसमेंट कोर्स (आरईएसी) और 7वें और 8वें सेमेस्टर के दौरान रिसर्च प्रोजेक्ट वर्क को पूरा करना होगा। चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के पूरा होने तक 40 क्रेडिट अंक होने चाहिए। इतनी इंटर्नशिप होगी जरूरी गाइडलाइंस में कहा गया है कि 8-10 सप्ताह की इंटर्नशिप जिनके 10 क्रेडिट्स होंगे, उन छात्रों के लिए अनिवार्य होगी जो क्रमश: सर्टिफिकेट या डिप्लोमा के साथ कोर्स छोड़ना चाहते हैं। जो छात्र रिसर्च के साथ चार वर्ष का डिग्री कोर्स करना चाहते हैं, उन्हें एक वर्ष के रिसर्च वर्क के साथ 10 सप्ताह की इंटर्नशिप करनी होगी। जो छात्र चार वर्ष का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (बिना रिसर्च) करना चाहते हैं, उन्हें भी कम से कम 8-10 सप्ताह की इंटर्नशिप करनी होगी। चार वर्षीय डिग्री कोर्स में रिसर्च के छात्र इंडस्ट्री के अलावा रिसर्च इंस्टीट्यूट, रिसर्च लैब, रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इंस्टीट्यूट, किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज के रिसर्च प्रोफेसर के अधीनस्थ अपनी इंटर्नशिप कर सकेंगे। |
| सख्ती का असर : पहले दिन एक तिहाई छात्रों ने छोड़ी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं Posted: 14 May 2022 06:32 PM PDT सख्ती का असर : पहले दिन एक तिहाई छात्रों ने छोड़ी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं लखनऊ : मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में सख्ती के कारण पहले ही दिन करीब एक तिहाई छात्र-छात्रएं परीक्षा देने ही नहीं आए। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए मदरसा बोर्ड ने इस बार कड़े इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी की निगरानी में हो रही परीक्षाओं के अलावा 150 परीक्षा केंद्रों पर वेबका¨स्टग कराई जा रही है। लखनऊ में बने कंट्रोल रूम से सीधे परीक्षा केंद्रों पर आनलाइन निगरानी की जा रही है। मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं शनिवार 14 मई से शुरू हो गईं। परीक्षा के लिए बोर्ड ने 523 केंद्र बनाए हुए थे। पहली पाली में 93751 परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी थी, किंतु 30717 परीक्षार्थी परीक्षा देने ही नहीं आए। यानी 32.76 प्रतिशत छात्र-छात्रएं अनुपस्थित रहे। 63034 छात्र-छात्रओं ने परीक्षा दी। पहले दिन एक नकलची मुजफ्फरनगर जिले से पकड़ा गया। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद एवं रजिस्ट्रार एसएन पाण्डेय ने लखनऊ के परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। दोनों को ही किसी भी जगह कोई गड़बड़ी नहीं मिली। वहीं, शाम की पाली में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव जेपी सिंह ने लखनऊ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार के साथ कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। सभी जगह शांतिपूर्ण परीक्षा होती मिली। |
| अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने के मामले में 16 मई को सुनवाई Posted: 14 May 2022 02:10 AM PDT अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने के मामले में 16 मई को सुनवाई प्रयागराज :। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय दिए जाने को लेकर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को राज्य सरकार ने विशेष अपील में चुनौती दी है। सरकार की विशेष अपील पर गुरुवार को चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। याचियों की ओर से अधिवक्ता दुर्गा तिवारी और सुप्रीम कोर्ट से आये अधिवक्ता एपी सिंह ने अनुदेशकों का पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलील पेश कि अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने भी 2017 में 17000 मानदेय देने का आदेश दिया था। यूपी सरकार ने इस ने आदेश का भी पालन नहीं किया। वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से पूरा फंड नहीं दिया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र ने बजट नहीं दिया तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गई। कोर्ट ने लगभग एक घंटे तक दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 16 मई को दोबारा मामले की सुनवाई का आदेश दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश के लगभग 27 हजार अनुदेशकों का मानदेय 2017 में केंद्र सरकार ने बढ़ाकर 17000 रुपये कर दिया था। जिसको यूपी सरकार ने लागू नहीं किया है। मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर अनुदेशकों ने हाई कोर्ट में रिट दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए 3 जुलाई 2019 को जस्टिस राजेश चौहान की सिंगल बेंच ने अनुदेशकों को 2017 से 17000 मानदेय 9% ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने विशेष अपील दाखिल की है। विवेक सिंह और आशुतोष शुक्ला की ओर से याचिका दाखिल की थी। जिस पर सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने विशेष अपील दायर की है। |
| 68500 भर्ती नियुक्त शिक्षकों ने प्रत्यावेदन देकर तीन में से मांगा एक जिला Posted: 13 May 2022 05:55 PM PDT भीषण गर्मी में तबादले के लिए लगी लाइन, 68500 शिक्षक भर्ती शिक्षकों जमा कर रहे प्रत्यावेदन शिक्षकों ने प्रत्यावेदन देकर तीन में से मांगा एक जिला • 68500 पदों पर शिक्षक भर्ती में दूसरी सूची से खड़ी हुई विसंगति • अधिक मेरिट के बावजूद दूर के जिलों में है तैनाती, दिया प्रत्यावेदन प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के लिए 68500 शिक्षक भर्ती चार साल में भी उलझी हुई है। नियुक्ति पत्र के साथ सीट आवंटन की पहली सूची में हाई मेरिट होने के बावजूद शिक्षकों को दूर का जिला आवंटित हो गया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर विभाग ने कम मेरिट वालों की जो दूसरी सूची जारी की, उसमें सभी को गृह जिला या आसपास का जिला मिल गया। दूर जिला पाए शिक्षक अधिक मेरिट होने के कारण गृह या नजदीक के जिले में तैनाती की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को विकल्प भरने के साथ बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर प्रत्यावेदन दिया। इसके पहले कोर्ट के आदेश पर तीन जिलों का विकल्प भराते हुए जब प्रत्यावेदन लिया गया था, तब यह विज्ञापित नहीं किया गया था कि किस जिले में कितने पद हैं। ऐसे में शिक्षकों ने गृह जनपद सहित आसपास के दो और जिलों का विकल्प दिया। तीन दिन पहले बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने जिला आवंटन सूची जारी की तो कई शिक्षक जहां थे वहीं रह गए। पता चला कि प्रदेश के तीस जिलों में सामान्य श्रेणी में पद रिक्त नहीं हैं। प्रत्यावेदन देने पहुंचे शिक्षकों का कहना है कि प्रत्यावेदन लेते समय स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि तीस जिलों में पद रिक्त नहीं है। ऐसी स्थिति में रिक्त पदों वाले नजदीकी जिले का विकल्प दिया जाता। शुक्रवार को कई शिक्षकों ने नए सिरे से तीन जिलों के विकल्प में कोई एक जिला आवंटित किए जाने के लिए प्रत्यावेदन दिया। आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों ने भी प्रत्यावेदन दिया है। प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षक भर्ती के तहत चयनित सहायक अध्यापकों की शुक्रवार बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय में लंबी लाइन लगी रही। पसीने से तरबतर शिक्षक अपने प्रत्यावेदन जमा करने के लिए दिनभर लाइन में खड़े रहे। बृहस्पतिवार और शुक्रवार को 610 शिक्षकों ने तबादले के लिए प्रत्यावेदन दिए हैं तबादला न होने से नाराज शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में हंगामा किया था। |
| बिना जांच प्रधानाध्यापक को पदावनत करने पर हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार ₹ हर्जाना Posted: 13 May 2022 05:26 PM PDT बिना जांच प्रधानाध्यापक को पदावनत करने पर हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार ₹ हर्जाना इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नियमानुसार जांच किए बगैर प्रभारी प्रधानाध्यापक को पदावनत कर मूल वेतन पर भेजने के आदेश को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही अध्यापक को उसका सभी बकाया वेतन व एरियर का भुगतान छह सप्ताह में करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार पर 50 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है जो याची को मुकदमा खर्च के तौर पर देना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि छह सप्ताह में भुगतान नहीं किया जाता तो साढ़े सात प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करना होगा और सरकार चाहे तो ब्याज की रकम की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने हाथरस के प्रदीप कुमार पुंडीर की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता जेएन यादव और प्रणवेश का कहना था कि बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस ने याची के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसे दीर्घ दंड से दंडित किया। उसे पदावनत करते हुए मूल पद और मूल वेतन पर भेज दिया गया। याची ने इसके खिलाफ सचिव बेसिक शिक्षा प्रयागराज के समक्ष अपील दाखिल की। सचिव ने भी बीएसए के आदेश को सही ठहराते हुए याची की अपील खारिज कर दी। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से याची के खिलाफ की गई जांच की रिपोर्ट तलब की तो बताया गया कि कोई जांच नहीं की गई है और न ही कोई रिपोर्ट उपलब्ध है। कोर्ट का कहना था कि याची को दीर्घ दंड दिए गए हैं इसलिए उसके खिलाफ कार्यवाही यूपी बेसिक एजुकेशन टीचर सर्विस रूल 1973 और यूपी गवर्नमेंट सर्विस (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स 1999 के नियमों के तहत की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया इसलिए दोनों आदेश अवैधानिक हैं। कोर्ट ने बीएसए हाथरस और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के आदेश को रद्द करते हुए याची को उसके पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि याची को जो भी वेतन मिल रहा था, वही वेतन और बकाया का भुगतान छह सप्ताह में किया जाए। याची को हर माह का वेतन नियमित रूप से दिया जाए। छह सप्ताह में उसे वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है तो साढ़े सात प्रतिशत ब्याज की दर से वेतन का भुगतान करना होगा और सरकार ब्याज की यह रकम जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल सकती है। |
| Posted: 13 May 2022 05:21 PM PDT 4500 विद्यालयों में होगी कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य, माध्यमिक शिक्षा विभाग से शासन ने मांगा प्रस्ताव, शिक्षकों की नियुक्ति की भी कवायद प्रयागराज : राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रदेशभर के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य की जाएगी। इसके लिए शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों से प्रस्ताव मांगा है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को 11 मई को पत्र लिखकर तय प्रारूप पर एक सप्ताह में सूचना मांगी है। जिले में एडेड कॉलेजों का नाम, प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के सृजित पद, अनुपयोगी पदों का विषयवार विवरण, कम्प्यूटर विषय की मान्यता की स्थिति (हाईस्कूल या इंटर) और कॉलेज में कम्प्यूटर लैब स्थापित है या नहीं बिन्दुओं पर सूचना देनी है। इससे पहले सरकार ने एक दशक पहले सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी योजना के तहत कम्प्यूटर शिक्षा शुरू की थी। प्रत्येक स्कूल को 10-10 कम्प्यूटर देने के साथ निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स पर प्रतिमाह 15 हजार रुपये मानदेय पर कम्प्यूटर शिक्षक रखे गए थे। लेकिन पांच साल बाद पूरी योजना बंद हो गई। अधिकांश स्कूलों में कम्प्यूटर लैब पर चार-पांच साल से ताला पड़ा है। कुछ स्कूलों में प्राइवेट शिक्षक पढ़ा रहे हैं जिनको मानदेय बच्चों से लेकर दिया जाता है। शिक्षकों की नियुक्ति की भी कवायद कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने के लिए सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में नियमित कम्प्यूटर शिक्षकों की भी नियुक्ति करने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने कम्प्यूटर शिक्षकों के पदसृजन के लिए भी माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा है। जिन स्कूलों में कम्प्यूटर विषय/शिक्षा की मान्यता (हाईस्कूल व इंटर की अलग-अलग) है और पढ़ाई हो रही है, उनकी सूची शासन को भेजी जा रही है। |
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