प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- अलीगढ़ : जुवेनाइल अपराध की स्थिति में जन्मतिथि निर्धारण हेतु विद्यालय अभिलेख की मांग के चलते विद्यालयों में कोई भी प्रवेश बिना आवश्यक अभिलेख के न किए जाने के संबंध में
- बांदा : शासकीय कार्य हेतु प्रoअo / इंचार्ज को ग्रीष्मावकाश में उपस्थित हेतु निर्देशित करने पर उपार्जित अवकाश लेखे में दर्ज किए जाने के संबंध में आदेश
- हाईकोर्ट : मदरसों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किए जाने की जनहित याचिका खारिज
- शिक्षक शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता अहम, खराब और निम्न गुणवत्ता वाले संस्थान होंगे बंद, तैयारी तेज
- फतेहपुर : स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों के चयन पर खड़े हुए सवाल!
- फतेहपुर : हेडमास्टरों और इंचार्ज का वेतन बहाल, मई माह का वेतन जारी करने का हुआ आदेश
- उच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक छात्रवृत्ति बढ़ेगीउच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक बढ़ेगी छात्रवृत्ति
| Posted: 31 May 2022 05:20 AM PDT |
| Posted: 31 May 2022 05:11 AM PDT |
| हाईकोर्ट : मदरसों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किए जाने की जनहित याचिका खारिज Posted: 30 May 2022 06:27 PM PDT हाईकोर्ट : मदरसों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किए जाने की जनहित याचिका खारिज याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई अनुतोष स्पष्ट नहीं है और कोर्ट इस प्रकार का अनुतोष नहीं दे सकती। कोर्ट ने याची से कहा कि वह स्पष्टता के साथ अपनी मांग को लेकर याचिका दाखिल कर सकती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में स्थित मदरसों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध किए जाने को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका खारिज कर दी। याचिका हाईकोर्ट की एक अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता सहर नकवी ने दाखिल की थी। याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई अनुतोष स्पष्ट नहीं है और कोर्ट इस प्रकार का अनुतोष नहीं दे सकती। कोर्ट ने याची से कहा कि वह स्पष्टता के साथ अपनी मांग को लेकर याचिका दाखिल कर सकती हैं। परंतु कोर्ट ने इसी याचिका में संशोधन कर पूरक शपथ पत्र दाखिल करने की याची की मांग को अस्वीकार कर दिया। पेशे से अधिवक्ता व याचिकाकर्ता सहर नकवी ने कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि कई प्रकार के मदरसे उत्तर प्रदेश में संचालित हैं। कहा गया कि कुछ मदरसे बरेलवी तो कुछ देवबंदी व अन्य सेक्टर की तरफ से संचालित हो रहे हैं। कहा गया कि इस प्रकार के मदरसे बंद कर इनको यूपी बोर्ड में शामिल किया जाए, ताकि शिक्षा में एकरूपता व समानता बनी रहे। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची द्वारा याचिका के मार्फत मांगी गई अनुतोष में स्पष्टता नहीं है और कोर्ट इस कारण याची को इस प्रकार की राहत मंजूर नहीं कर सकती। |
| शिक्षक शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता अहम, खराब और निम्न गुणवत्ता वाले संस्थान होंगे बंद, तैयारी तेज Posted: 30 May 2022 05:29 PM PDT शिक्षक शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता अहम ◆ खराब और निम्न गुणवत्ता वाले संस्थान होंगे बंद, तैयारी तेज ◆ फिलहाल ऐसे संस्थानों की जुटाई जा रही है जानकारी नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को दुरुस्त करने की मुहिम सिर्फ स्कूलों तक नहीं रहेगी। इसके दायरे में शिक्षक तैयार करने वाले देशभर के शैक्षणिक संस्थान भी शामिल होंगे। फिलहाल इन संस्थानों की गुणवत्ता को दुरुस्त करने को लेकर सरकार बड़ी तैयारी में जुटी है। खराब या निम्न गुणवत्ता वाले शिक्षक शिक्षा संस्थानों पर ताला लगना तय है। इससे पहले शिक्षक शिक्षा देने वाले देशभर के संस्थानों की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। सरकार ने यह कवायद उस समय शुरू की है, जब स्कूली शिक्षा के स्तर पर काफी कोशिशों के बाद भी गुणवत्ता में अपेक्षा के अनुरूप सुधार होता नहीं दिख रहा है। इसकी एक बड़ी वजह शिक्षक भी माने जा रहे हैं। मौजूदा समय में ज्यादातर शिक्षक ऐसे हैं, जो गणित व विज्ञान सहित उन विषयों में दक्ष नहीं हैं, जिनके आधार पर स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को परखा जाता है। हाल ही में देशभर के स्कूलों में कराए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 में छात्रों की सीखने - की क्षमता का आकलन गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को लेकर किया गया था। यह सर्वे तीसरी पांचवीं, आठवीं और दसवीं के छात्रों के बीच कराया गया। इनमें सरकारी और निजी स्कूल दोनों शामिल थे। सरकार का मानना है कि जब तक स्कूलों में बेहतर शिक्षक नहीं आएंगे, तब तक गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बेहतर शिक्षक तैयार करने की दिशा ही चार साल का एकीकृत बीएड कोर्स शुरू करने की पहल की गई है। बीएससी-बीएड, बीए-बीएड और बीकाम - बीएड जैसे कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे न सिर्फ पढ़ाने के लिए समर्पित शिक्षक तैयार होंगे, बल्कि विज्ञान व गणित, कामर्स जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी बनेंगे। इसके साथ ही देशभर में शिक्षक शिक्षा दे रहे मौजूदा संस्थानों की गुणवत्ता को भी परखा जाएगा। इनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ पर्याप्त फैकल्टी के भी स्तर को जांचा जाएगा। मौजूदा समय में बड़ी संख्या में शिक्षक शिक्षा संस्थान जैसे-तैसे चल रहे हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद जैसे-तैसे वाली स्थिति में चल रहे सभी संस्थान बंद होंगे। मंत्रालय समयबद्ध तरीके से इन सभी संस्थानों को बंद करने की तैयारी में जुटा है। |
| फतेहपुर : स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों के चयन पर खड़े हुए सवाल! Posted: 29 May 2022 05:08 PM PDT फतेहपुर : स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों के चयन पर खड़े हुए सवाल! फतेहपुर : जिले के 220 परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधाओं की अवस्थापना के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने टेण्डर आमंत्रित कर दिए। स्कूलों की सूची सामने आते ही अनेक स्कूलों के चयन पर सवाल खड़े हो गए। चयनित स्कूलों में शिक्षक नेता और उनके चहेतों की भरमार हैं। आरईएस ने ई टेण्डरिंग के माध्यम से पंजीकृत निविदाताओं से निविदा मांगी है। चयनित किए गए 220 विद्यालयों में प्रति विद्यालय पचास हजार रूपए की लागत से स्मार्ट क्लास की सुविधाओं की अवस्थापना का कार्य होना है। माना जा रहा था कि बेसिक शिक्षा विभाग निष्पक्ष तरीके से अपने उन स्कूलों को चयनित करेगा जिनका पिछले कई सत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन रहा है। छात्र नामांकन से लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों के निरीक्षण में अव्वल रहने वाले एवं बेहतर सामाजिक छवि वाले विद्यालयों का चयन किया जाएगा लेकिन सूत्र बताते हैं कि सूची पूरी तरह से 'ईमानदार एवं निष्पक्ष' नहीं है। सबसे अधिक सवाल ऐरायां ब्लॉक को लेकर है। इस ब्लॉक के तमाम बेहतर छवि वाले स्कूलों को छोड़ दिया गया है। कई स्कूल ऐसे भी हैं जो अब तक किसी स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए नहीं जाने गए हैं। बताया जा रहा है कि चयनित स्कूलों में से कई का सम्बन्ध शिक्षक संघ के पदाधिकारियों एवं उनसे जुड़े लोगों से भी है। इन स्कूलों का चयन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व किया गया था। इनके लिए कुछ मानक बनाए गए थे। इन्हीं मानकों के आधार पर स्कूलों का चयन हुआ था। -संजय कुशवाहा, बीएसए स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों का चयन एक साल पहले हुआ था, उस वक्त तय गाइड के मुताबिक स्कूल चिंहित किए गए होंगे। जल्द ही अन्य विद्यालयों को स्मार्ट क्लास के लिए चिंहित किया जाना है, जिसमें पूरी पारिदर्शिता बरती जाएगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी |
| फतेहपुर : हेडमास्टरों और इंचार्ज का वेतन बहाल, मई माह का वेतन जारी करने का हुआ आदेश Posted: 29 May 2022 05:03 PM PDT फतेहपुर : हेडमास्टरों और इंचार्ज का वेतन बहाल, मई माह का वेतन जारी करने का हुआ आदेश फतेहपुर : बीएसए ने गत दो मई को नामांकन लक्ष्य पूरा न करने वाले जिले के सैकड़ों परिषदीय स्कूलों के हेडमास्टर एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों के अवरुद्ध वेतन को सशर्त बहाल कर दिया है। बीएसए ने अगली डेडलाइन 20 जून मुकर्रर की है। यदि इस तिथि तक नामांकन लक्ष्य पूरा नहीं किया जाता है तो जून माह का वेतन रोक दिया जाएगा। बीते अप्रैल में स्कूल चलो अभियान के दौरान पिछले सत्र के मुकाबले नामांकन करने में विफल रहने वाले सभी 13 ब्लॉकों एवं नगर क्षेत्र के सैकड़ों हेड व इंचार्ज हेड का वेतन बीएसए ने अवरूद्ध कर दिया था। ब्लॉक की नामांकन समीक्षा के दौरान बीएसए ने जिन विद्यालयों में 30 सितंबर 2021 की तुलना में नामांकन कम पाया गया, उन विद्यालयों के हेडमास्टरों व इंचार्ज का वेतन रोका गया था। 30 अप्रैल को बीईओ द्वारा दी गई रिपोर्ट की समीक्षा के बाद निकले आंकड़ों को आधार बनाकर बीएसए संजय कुशवाहा ने यह कार्रवाई की थी। एक की कमी पर भी रुका हुआ था वेतन ब्लॉकों की समीक्षा के दौरान बीएसए ने उन हेड व इंचार्ज का भी वेतन रोक दिया है जिनके नामांकन में पिछले सत्र के मुकाबले एक, दो, तीन या चार बच्चों की कमी थी। तो पूरे स्टाफ का रुकेगा वेतन यदि आगामी बीस जून तक नामांकन लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा विद्यालयों के सभी शिक्षकों का वेतन अवरूद्ध कर दिया जाएगा। शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों ने वेतन बहाली को लेकर बीएसए से मुलाकात की थी। |
| Posted: 29 May 2022 04:51 PM PDT उच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक बढ़ेगी छात्रवृत्ति नई दिल्ली : शिक्षा से जुड़ी संसदीय समिति ने छात्रों को उच्च शिक्षा में विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति व वित्तीय सहायता को बढ़ाकर तर्कसंगत करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि निम्न आय वर्ग या वंचित तबके के जिन लाभार्थियों को मदद दी जाती है, वह उनकी जरूरतों को पूरा नही कर पाती। सबसे ज्यादा खर्च कोर्स की फीस पर होता है और उच्च शिक्षा में छात्रों की मेंटेनेंस लागत को पूरा करने के लिए राशि पर्याप्त नहीं होती। समिति ने यह भी कहा है कि इस संबंध में उचित विश्लेषण और अध्ययन के जरिए सरकार योजनाओं की राशि और कवरेज को संशोधित करे। विभिन्न श्रेणियों में वंचित तबके को मिलने वाले लाभ का प्रामाणिक आंकड़ों की जनकारी के लिए भी अध्ययन की जरूरत बताई गई है। इससे कमियों को पहचानने और योजनाओं में सुधार करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कवायद हो रही है। इस संबंध में अलग-अलग सुझाव और प्रस्ताव विचार- विमर्श के दौरान सामने आए हैं। सरकार कई तरह के सुधारों पर गौर कर रही है, जिससे लाभार्थी योजनाओं को तर्कसंगत बनाकर कवरेज का दायरा सही लोगों तक सुनिश्चित किया जाए। वंचित, दलित, आदिवासी और लड़कियों की शिक्षा पर काफी फोकस किया जा रहा है। उच्च शिक्षा में नामांकन के साथ छात्रों को ज्यादा विकल्प के साथ उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने की कवायद भी साथ-साथ चल रही है। जिन वित्तीय सहायता योजनाओं में उपयोग की दर कम है या तय आवंटन की तुलना में खर्च नही हुआ है, उनकी नए सिरे से पड़ताल की जा रही है। वास्तविक आकलन के आधार पर योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। |
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