प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- तीन माह से फंसा आठ हजार शिक्षकों का वेतन, माध्यमिक के समग्र शिक्षा अभियान का अलग वेतन मद होने से संकट
- उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय : छह अगस्त को कराई जाएगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, 29 जून ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि
- बिना मान्यता वाले मदरसों की सूची बना रहा आयोग
| Posted: 01 Jun 2022 05:39 PM PDT तीन माह से फंसा आठ हजार शिक्षकों का वेतन ● माध्यमिक के समग्र शिक्षा अभियान का अलग वेतन मद होने से संकट ● जीआइसी की तरह एक वेतन मद मांग की पत्रावली वित्त विभाग में अटकी प्रयागराज : प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित 1472 विद्यालयों के करीब आठ हजार शिक्षक तीन माह से वेतन से वंचित हैं। अभी तक ये विद्यालय राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के नाम से संचालित थे। जीआइसी के शिक्षकों की तरह इन • शिक्षकों का वेतन मद एक किए जाने की मांग राजकीय शिक्षक संघ कई बार उठा चुका है। इस संबंध में पत्रावली वित्त विभाग में अटकी है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित विद्यालयों में शिक्षकों के नौ हजार पद सृजित हैं, जिसमें से करीब आठ हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनको मार्च, अप्रैल और मई का वेतन नहीं मिला है। इस स्थिति पर राजकीय शिक्षक संघ ने गहरी आपत्ति जताई है। संघ के महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि इन शिक्षकों के वेतन में 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार से मिलता है। शेष 40 प्रतिशत राज्य सरकार देती है। ऐसे में कभी केंद्र सरकार का तो कभी राज्य सरकार का हिस्सा अटक जाता है, जिससे अक्सर समय पर वेतन नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक रमसा के नाम पर चयनित नहीं हैं, बल्कि उन्हें विद्यालय संचालन के लिए भेजा गया है। ऐसे में उनका वेतन मद भी जीआइसी शिक्षकों की तरह किया जाना चाहिए, ताकि वित्तीय वर्ष लागू होते ही बजट निर्धारित हो सके। इस मामले को राजकीय शिक्षक संघ की अध्यक्ष छाया शुक्ला लखनऊ में भी उठा चुकी हैं। शिक्षक संघ और शिक्षकों के दबाव में समग्र शिक्षा अभियान को और से मार्च के अंत में वेतन मद परिवर्तन के लिए पत्रावली वित्त विभाग को भेजी गई, जो कि वहीं पड़ी है। महामंत्री के मुताबिक, वित्त विभाग कहता है कि वेतन मद बदलने से केंद्र का मद रुक जाएगा। इस तर्क का उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि बेसिक में स्कूल चलो अभियान के शिक्षकों का मद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की तरह एक है, लेकिन अड़चन नहीं आती, तो इसमें कैसे आएगी। उन्होंने वेतन मद बदलने की मांग उठाई है, ताकि वेतन की समस्या से छुटकारा मिल सके। तदर्थ शिक्षकों को राहत, वेतन रोकने का आदेश वापस प्रयागराज जिले में तैनात 36 तदर्थ शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। उनका वेतन रोकने का आदेश जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने वापस ले लिया है। डीआइओएस ने बताया कि पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिए गए निर्देश के अनुपालन में वेतन रोका गया था। वहां से कोई लिखित आदेश नहीं आया इसलिए अब वेतन रोकने संबंधी निर्देश वापस ले लिया गया है। उन्होंने समीक्षा बैठक में उस समय कहा था कि एक जनवरी सन 2000 के बाद तैनात तदर्थ शिक्षकों का वेतन नहीं जारी होना चाहिए। |
| Posted: 01 Jun 2022 05:20 PM PDT उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय : छह अगस्त को कराई जाएगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, 29 जून ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय शैक्षिक सत्र 2022-23 बीएड सामान्य व बीएड स्पेशल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा छह अगस्त को प्रस्तावित की है। आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों को वेबसाइट www.uprtou.ac.in के माध्यम से 29 जून तक आवेदन का मौका दिया गया है। उसके बाद विलंब शुल्क के साथ नौ जुलाई तक फार्म भर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने इसका विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ निदेशक नीरांजली सिन्हा ने बताया कि बीएड प्रवेश परीक्षा शुल्क सामान्य व पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1200 रुपये है। विलंब शुल्क के साथ 1500 रुपये जमा होंगे। इसी तरह अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 900 रुपये और विलंब शुल्क के साथ 1200 रुपये आनलाइन जमा करने होंगे। इन तिथियों का रखें ध्यान 29 जून: आनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि नौ जुलाई : विलंब शुल्क के साथ आनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 से 14 जुलाई : आनलाइन आवेदन विवरण में त्रुटि संशोधन की अवधि 21 जुलाई : विश्वविद्यालय वेबसाइट से प्रवेश परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र डाउनलोड करना छह अगस्त: प्रवेश परीक्षा की तिथि (संभावित) अगस्त के तीसरे सप्ताह: वेबसाइट पर प्रवेश परीक्षा परिणाम जारी होना सितंबर के प्रथम सप्ताह से प्रवेश परामर्श का प्रारंभ |
| बिना मान्यता वाले मदरसों की सूची बना रहा आयोग Posted: 01 Jun 2022 03:31 PM PDT बिना मान्यता वाले मदरसों की सूची बना रहा आयोग लखनऊ : गोसाईगंज के शिवलर स्थित सुफ्फामदीनतुल उलमा मदरसे में छात्रों के पैरों को जंजीर से बांधने का मामला उजागर होने के बाद बाल संरक्षण आयोग ने सख्ती शुरू कर दी है। आयोग ने प्रदेश भर में बिना मान्यता के चल रहे मदरसों की रिपोर्ट तैयार कराना शुरू कर दी है। ऐसे मदरसों को आयोग अब बंद कराने की कार्रवाई करेगा। छात्रों को प्रताड़ित करने के मामले में आयोग पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आयोग ने इस प्रकरण के सामने आने के बाद सोमवार को मदरसे में मौलवी व दोनों छात्रों के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये थे। इस मामले में पुलिस कमिश्नर से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी थी। मंगलवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने निरीक्षण में बच्चों की भावनाओं को भड़काने वाले पम्फलेट मिले थे। बच्चों की खान पान और कपड़ों की स्थिति भी निरीक्षण में अच्छी नहीं मिली थी। जो मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं, वह मान्यता के लिए जल्दी ही आवेदन कर दें। बिना मान्यता के मदरसों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। सुचिता, सदस्य, बाल संरक्षण आयोग |
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