दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- 23 जून 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- व्याधि मुक्त व समाधि युक्त है योग:-सत्येन्द्र कुमार पाठक
- टीवी सीरियल "बाल शिव" में दिखेगी बिहार की आन तिवारी और साची तिवारी
- शिव सेना का यह हाल बेहाल देखकर
- रिश्ते
- चुगली रस
- मेरी ढाल
- कहीं किसी मोड़ पर
- मुर्मू को बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन के संकेत
- मोदी 26-28 जून तक जर्मनी, यूएई की यात्रा पर रहेंगे
- धामी के सौ दिन का रिकार्ड कार्ड
- विश्व शांति का भारतीय चिंतन
- मुर्मू से बढ़ेगी लोकतंत्र की गरिमा
- ब्रिटिश पत्रकार की मौत पर ब्राजील के उपराष्ट्रपति का बयान
- पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज को स्वदेश आने पर किया जा सकता गिरफ्तार
- कोविड-19 से बच्चों की मौत का खतरा कम
- अफगानिस्तान में भूकम्प से जान-माल को भारी नुकसान
- भारत और बांग्लादेश में हुई अत्यधिक वर्षा और बाढ़ सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण
- सभी के लिए न्याय तक पहुंच
- शिव सेना शव सेना बनी
- जन्म से जो भी हैं हम
| Posted: 22 Jun 2022 08:59 AM PDT
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| व्याधि मुक्त व समाधि युक्त है योग:-सत्येन्द्र कुमार पाठक Posted: 22 Jun 2022 07:48 AM PDT
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| टीवी सीरियल "बाल शिव" में दिखेगी बिहार की आन तिवारी और साची तिवारी Posted: 22 Jun 2022 06:50 AM PDT टीवी सीरियल "बाल शिव" में दिखेगी बिहार की आन तिवारी और साची तिवारीजितेन्द्र कुमार सिन्हा, टीवी सीरियल "बाल शिव" में शिव की भूमिका आन तिवारी निभा रही है, वहीं आन तिवारी की बहन साची तिवारी भी निभायेगी सुमति की भूमिका। सूत्रों की माने तो आन तिवारी और साची तिवारी दोनों सगी भाई और बहन है। बिहार राज्य के रोहतास (सासाराम) जिला स्थित कशीगवा की रहने वाली है। कला के क्षत्र में दोनों के योगदान को देखते हुए उनके पिता राकेश तिवारी जो मुंबई में रहते हैं और वहीं मां प्रिया तिवारी एक गृहणी है, उनका कहना है कि उनके बच्चे प्रतिभा के मोहताज नहीं हैं। यह कहावत सत्य है कि "कला किसी उम्र की मोहताज नहीं होती है" जो इन दोनो बच्चों पर सही बैठती है। "बाल शिव" सीरियल में कलाकार आन तिवारी "शिव" की भूमिका में हैं, वहीं, साची तिवारी "सुमति" का किरदार निभाएंगी। वास्तविक जीवन में भाई-बहन की जोड़ी अब "रील लाइफ" में एक साथ दिखेगी। बिहार के रोहतास (सासाराम) जिले के रहने वाली साची तिवारी महज 3 वर्ष की उम्र से अभिनय कर रही है। साची तिवारी बहुत से सीरियल, मूवी ऐड में काम कर चुकी है और कर रही है। सांची तिवारी ने फिल्मी दुनिया के हस्ती महानायक अमिताभ बच्चन, नायक शाहरुख खान और बहुत सारे अन्य कलाकारों (एक्टरों) के साथ काम कर चुकी है और कर रही है। इसी कड़ी में साची तिवारी को एंड टीवी के सिरियल "बाल शिव" मैं काम करने का मौका मिला है। यह सीरियल प्रतिदिन सोमवार से शुक्रवार रात 8:00 बजे प्रदर्शित होता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| शिव सेना का यह हाल बेहाल देखकर Posted: 22 Jun 2022 06:47 AM PDT
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| Posted: 22 Jun 2022 06:28 AM PDT
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| Posted: 22 Jun 2022 06:26 AM PDT
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| Posted: 22 Jun 2022 06:23 AM PDT
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| Posted: 22 Jun 2022 06:20 AM PDT
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| मुर्मू को बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन के संकेत Posted: 22 Jun 2022 06:17 AM PDT मुर्मू को बीजद, वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन के संकेतनयी दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से इतर आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) ने राष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के स्पष्ट संकेत दे दिये हैं। वाईएसआर कांग्रेस के संसदीय दल के नेता श्री वी. विजयसाई रेड्डी ने ट्वीटर पर अपने संदेश में श्रीमती मुर्मू को बधाई देते कहा है कि श्रीमती मुर्मू को राजग द्वारा राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी घोषित किये जाने पर हार्दिक बधाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बात बिल्कुल सही है कि श्रीमती मुर्मू हमारे देश की एक महान राष्ट्रपति साबित होंगी। श्री रेेड्डी ने ट्वीटर पर श्रीमती मुर्मू से मुलाकात करते हुए अपनी एक फाइल फोटो भी साझा की है। आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यीय विधानसभा में वाईएसआर कांग्रेस के 150 और विधान परिषद में 33 सदस्य हैं। लोकसभा में 25 में से 22 सदस्य और राज्यसभा में 11 में से 6 सदस्य हैं। भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ राजग के पास कुल 10.79 लाख वोटों के आधे से थोड़ा कम यानी 5,26,420 है। उसे वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे दलों एवं निर्दलीयों के सहयोग की जरूरत होगी। राष्ट्रपति पद के लिए आदिवासी एवं महिला श्रेणी में आने वाली श्रीमती मुर्मू के ओडिशा से होने का भी फायदा मिलेगा। बीजू जनता दल (बीजद) के नेता एवं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी यह साफ कर दिया है। उन्होंने ट्वीटर पर श्रीमती मुर्मू को बधाई देते हुए लिखा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे इस बात की चर्चा की तो उन्हें बहुत खुशी हुई। यह ओडिशा के लोगों के लिए एक गौरवशाली क्षण है। मुझे भरोसा है कि श्रीमती मुर्मू देश में महिला सशक्तीकरण की एक चमकती हुई मिसाल बनेंगी। राज्यसभा में ओडिशा से 10 में नौ सदस्य, लोकसभा में सभी 12 सदस्य बीजद के हैं। विधानसभा में बीजद के 114 विधायक हैं जबकि एक निर्दलीय एवं भाजपा के 22 सदस्य हैं। इस प्रकार से ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में श्रीमती मुर्मू को 137 सदस्यों का समर्थन मिलने की संभावना है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मोदी 26-28 जून तक जर्मनी, यूएई की यात्रा पर रहेंगे Posted: 22 Jun 2022 06:14 AM PDT मोदी 26-28 जून तक जर्मनी, यूएई की यात्रा पर रहेंगेनयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 26 से 28 जून के दौरान जर्मनी एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने आज यहां बताया कि श्री मोदी जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज के निमंत्रण पर श्लोज एल्माउ में होने वाली जी-7 शिखर बैठक में भाग लेने के लिए 26 एवं 27 जून को जर्मनी की यात्रा पर रहेंगे। शिखर बैठक में प्रधानमंत्री के पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और लोकतंत्र पर दो सत्रों को संबोधित करने की संभावना है। इन महत्वपूर्ण विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य लोकतांत्रिक देशों को भी आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री कुछ देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संवाद भी करेंगे। इससे पहले श्री मोदी अभी दो मई को जर्मनी गये थे जहां उन्होंने भारत जर्मनी अंतरसरकारी परामर्श की बैठक में भाग लिया था। जी-7 शिखर बैठक में भाग लेने के बाद श्री मोदी 28 जून को संक्षिप्त यात्रा पर यूएई पहुंचेंगे और यूएई के पूर्व राष्ट्रपति एवं आबूधाबी के पूर्व शासक शेख खलीफा बिन जायेद अल नाह्यान के निधन पर व्यक्तिगत रूप से शोक संवेदना प्रकट करेंगे। वह शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाह्यान के देश के नये राष्ट्रपति एवं आबूधाबी के नये शासक बनने पर उन्हें बधाई भी देंगे। श्री मोदी उसी दिन स्वदेश लौट आएंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| धामी के सौ दिन का रिकार्ड कार्ड Posted: 22 Jun 2022 06:11 AM PDT धामी के सौ दिन का रिकार्ड कार्ड(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत से उपचुनाव में मुख्य प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस को जबर्दस्त पराजय देकर अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल को मजबूत आधार दिया है। आगामी 30 जून को अर्थात् इस महीने के खत्म होने तक पुष्कर सिंह धामी सरकार के सौ दिन पूरे हो जाएंगे। इन सौ दिनों का बेहतर रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने के साथ ही धामी सरकार अगले महीने जुलाई में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को भी सर्व सुविधा सम्पन्न बनाने का प्रयास कर रही है। मेरठ से ज्यादातर कांवड़िए हरिद्वार से ही गंगा जल लेने पहुंचते हैं। इसी तरह बदरीनाथ और केदारनाथ में रोपवे बनाने के लिए पर्यावरण विभाग से हरी झंडी मिल गयी है। रोपवे बनने से बाबा केदारनाथ के दर्शन करने वालो ंको सुविधा मिलेगी। धामी के मंत्रिमंडल के सदस्य सौ दिन की उपलब्धियों के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। आगामी 30 जून को पुष्कर सिंह धामी की सरकार दूसरी का सौ दिन का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। गत 23 मार्च को जब मुख्यमंत्री धामी ने शपथ ली थी, तब शपथ के साथ ही बीजेपी संगठन और सरकार द्वारा सौ दिन का टारगेट भी तय कर दिया गया था। लिहाजा अब सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी चेक किए जाने का समय पास आ रहा है। कैबिनेट मंत्री पूरी शिद्दत से यह रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हुए हैं। धामी कैबिनेट के सभी मंत्रियों का दावा है कि उन्होंने तय टारगेट के मुताबिक सफलता हासिल कर ली है। बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य का कहना है कि ये सौ दिन सफलता के सौ दिन हैं। इन सौ दिनों में हमने कई योजनाओं को विस्तार दिया है। हमने अपने विजन डॉक्यूमेंट में कहा था कि सत्ता में आते ही हम गरीब परिवारों को साल में तीन गैस सिलेंडर फ्री देंगे। वह स्कीम शुरू कर चुके हैं। हम नयी खेल नीति लाने जा रहे हैं। इसके अलावा और भी कई योजनाएं हैं। ग्राम्य विकास, कृषि के साथ ही सैनिक कल्याण जैसे अपने मंत्रालयों का पूरा डेटा तैयार कर चुके मंत्री गणेश जोशी सीएम के सामने प्रेजेंटेशन के लिए तैयार हैं। जोशी इन दिनों बैक टू बैक मीटिंग कर रहे हैं। सिर्फ सौ दिन का रिपोर्ट कार्ड ही नहीं मंत्री अपने विभागों का अगले पांच साल का रोडमैप भी तैयार कर रहे हैं। जोशी का कहना है, हम आने वाले दिनों में चंपावत के टनकपुर और चमोली में बड़े सैनिक विश्राम गृह बनाने जा रहे हैं। सौ दिन पूरे होने पर मुख्यमंत्री इसका शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा, प्रदेश भर में कार्यरत महिला उद्यमियों के उत्पाद को राज्य स्तर पर मार्केट दिलाने के लिए एक राज्य स्तरीय आउटलेट खोलने की योजना पर भी जोशी ने बात की। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत बनाए गए पांच हजार घर सौ दिन पूरे होने पर मुख्यमंत्री के हाथों सौंपे जाएंगे। सत्ता के सौ दिन का ये परफॉर्मेंस मंत्री, मुख्यमंत्री के सामने और मुख्यमंत्री जनता के सामने पेश करेंगे लेकिन, इन सबके बीच मंत्रियों पर जो दबाव है, वो है पार्टी हाईकमान का क्योंकि परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर अंतिम मुहर तो हाईकमान से ही लगनी है। बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बी एल संतोष अपने पिछले दौरे में मंत्रियों को ताकीद भी कर चुके थे कि मंत्रियों की परफॉर्मेंस चेक की जाएगी। इस टारगेट के साथ अन्य जरूरी कार्य भी धामी सरकार को करने हैं। इस बार उत्तराखण्ड में भी कांवड़ियों का जोरदार स्वागत करने की तैयारी हो रही है। उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बीते दिनों कहा था कि कोविड महामारी के कारण दो साल से कांवड़ यात्रा बाधित रही। इस बार कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा था कि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। इसके लिए सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। देवभूमि आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी खबर है कि केदारनाथ और सिखों के तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के लिए दो महत्वपूर्ण रोपवे प्रोजेक्टों को हरी झंडी मिल गई है। उत्तराखंड वाइल्डलाइफ बोर्ड की एक बैठक बोर्ड के चेयरमैन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई, जिसमें 21 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। कहा जा रहा है कि हाई अल्टिट्यूड वाले इन तीर्थस्थलों पर हेलीकॉप्टर सेवा के बाद रोपवे सेवा मिलने से श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी। तीर्थयात्राओं को पर्यटन कारोबार से जोड़ने के मकसद से यह फैसला लिया गया है। बैठक में जो 21 प्रस्ताव रखे गए, उनमें से तीन तीर्थयात्रियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने के सिलसिले में थे। इनमें से हरिद्वार में 49 किलोमीटर की रिंग रोड के प्रस्ताव पर भी बोर्ड ने चर्चा की। यह रिंग रोड राजाजी टाइगर रिजर्व को छूते हुए बनाए जाने पर अधिकारियों का मानना है कि तीर्थ नगरी में वाहनों के लोड को कम किया जा सकेगा और लोगों को भारी ट्रैफिक जामों से निजात मिल सकेगी। बोर्ड ने रुद्रप्रयाग जिले में सोनप्रयाग से केदारनाथ को जोड़ने वाले 13 किलोमीटर लंबे रोपवे पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दे दी। यहां फिलहाल श्रद्धालुओं के पास दो विकल्प होते हैं। या तो वो गौरीकुंड से केदारनाथ तक 18 किमी के पैदल ट्रेक से तीर्थ तक पहुंच सकते हैं या फिर हेलीकॉप्टर सेवा के जरिये। अब यहां एक और विकल्प उपलब्ध हो सकेगा। केदारनाथ पहुंचने के लिए रामबाड़ा और गरुड़चट्टी के बीच 6 किलोमीटर के नये ट्रेक को भी वाइल्डलाइफ बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इसी के साथ लंबे समय से हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे की मांग की जा रही थी, जिसे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी। चमोली जिले में समुद्र तल से 11,750 वर्गफीट की ऊंचाई पर बसे इस तीर्थस्थल तक गोविंदघाट से 12.5 किलोमीटर लंबा रोपवे बनने का रास्ता साफ हो गया है। इसी तरह हरिद्वार में हर की पौड़ी से चंडी देवी मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे निर्माण को हरी झंडी मिली है। जमरानी बांध परियोजना के लिए 400 हेक्टेयर वन भूमि सिंचाई विभाग को ट्रांसफर करने को मंजूरी प्राप्तु हुई। हल्द्वानी के गौला पार में मैन एनिमल कॉन्फिलिक्ट कम करने के लिए एक एक्सीलेंस सेंटर बनेगा। वन्य जीवों के स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े तीन सेंटरों के निर्माण को मंजूरी मिल गयी है। इसी प्रकार मैन एनिमल कॉन्फिलिक्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में गैंडा लाने का प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना निर्माण में कुछ शर्तों के साथ रात में भी निर्माण कार्य जारी रखने को अनुमति दी गयी है। मुख्य वाइल्डलाइफ वॉर्डन पराग मधुकर धकाते ने कहा, 'बोर्ड ने जिन प्रस्तावों को मंजूरी दी है, अब उन्हें राष्ट्रीय वाइल्डलाइफ बोर्ड के सामने रखा जाएगा। केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और हरिद्वार के प्रोजेक्टों से बड़े पैमाने पर तीर्थ यात्रियों को फायदा हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 22 Jun 2022 06:08 AM PDT विश्व शांति का भारतीय चिंतन(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) आतंकी हमलों के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देशों में मुसलमानों के प्रति भेदभाव बहुत बढ़ गया था। नाइन इलेवन से इसकी शुरुआत हुई थी, करीब दो दशक बाद भी इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। यह भेदभाव और अपमान का सिलसिला केवल सामाजिक स्तर पर ही नहीं है। बल्कि इसमें सरकारी मशीनरी भी शामिल है। इस्राइल के शासन का अंदाज जग जाहिर है। इसमें मुस्लिम मुल्कों के प्रति कोई लचक कभी नही रही।चीन ने तो अपने यहां मुसलमानों को अधिकार विहीन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दूसरी तरफ इस्लामिक मुल्कों में सभी गैर मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जाता है। इनको दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। जबकि इनमें से किसी भी देश में भारत जैसी विविधता नहीं है। फिर भी इनके लिए सबको साथ लेकर चलना बेहद मुश्किल है। सभ्यताओं के संघर्ष का विचार आज भी इनकी नीतियों में दिखाई देता है। दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति में मजहबी आधार पर वैमनस्य का विचार कभी नहीं रहा। यह दुनिया की एकमात्र संस्कृति है जिसमें सबके कल्याण की कामना की गई है- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् अर्थात सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बनें। इतना ही नहीं भारतीय संस्कृति में वसुधा को कुटुंब माना गया- अयं बन्धुरयं नेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात यह अपना बंधु है और यह नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो सम्पूर्ण धरती ही परिवार है। वर्तमान भारत सरकार इसी साँस्कृतिक चेतना के साथ कार्य कर रही है। उसकी सभी नीतियों में मुसलमान समान रूप से सहभागी है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है। ऐसी सरकार को कट्टरपंथी मुल्क और लोग नसीहत दे रहे है। नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमन्त्री बनने के बाद सबका साथ सबका विकास का नारा दिया था। आठ वर्षो से उनकी सरकार इस पर अमल कर रहीं है। सबका साथ व सबका विकास को सरकार की नीति में प्रमुख स्थान दिया। इसके अनुरूप कार्य योजना बनाई गई। इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पिछले पांच वर्षों से इस नीति पर अमल कर रही है। दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अधिक तेजी से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का संकल्प व्यक्त किया है। सबका साथ सबका विकास पर हुए अमल ने एक नया आयाम जोड़ा है। अब सबका साथ सबका विकास के साथ सबका विश्वास भी जुड़ गया है। वोटबैंक की राजनीति ने चिंतन के दायरे को बहुत सीमित कर दिया है। केवल चुनावी चिंता से समाज का भला नही हो सकता। नरेंद्र मोदी भी चुनावी राजनीति में है। वह भी अपनी पार्टी को विजयी बनाने का प्रयास करते है लेकिन इसी को सामाजिक जीवन की सिद्धि नही मानते। वह इससे आगे तक की सोचते है। भावी पीढ़ियों और समाज के भविष्य के बारे में सोचते है। सामाजिक समरसता की प्रेरणा देते है। आजादी के इतने वर्षों तक देश के कुछ ही हिस्से में विकास की रोशनी पहुंच सकी थी। मोदी सरकार का प्रयास है कि भारत भूमि की एक-एक इंच की जमीन को विकास की धारा के साथ जोड़ा जाए। माक्र्स ने केवल विचार प्रस्तुत किये थे। उन पर अमल नहीं किया था, स्वयं उनका क्रियान्वयन नहीं किया था। जबकि नरेंद्र मोदी ने वर्ग सहयोग का विचार बाद में प्रस्तुत किया, उसका क्रियान्वयन वह पिछले कई वर्षों से कर रहे है। मोदी कहते है कि दूसरा अर्थात सक्षम वर्ग की जिम्मेदारी यह है कि वह वंचित वर्ग को गरीबी से ऊपर लाने में सहयोगी बने। इस तरह मोदी शासन, राजनीतिक पार्टियों और धनी वर्ग सभी की जिम्मेदारी तय करते है। नरेंद्र मोदी के शासन का यही आधार भी रहा है। सबका साथ सबका विकास की नीति को कथित धर्मनिरपेक्षता का विकल्प बनाया। यह बता दिया कि देश के मुसलमान वोटबैंक नहीं है। वह भी इंसान है। उनके जीवन की भी मूलभूत आवश्यकताएं है। सरकार का दायित्व है कि वह सभी का जीवन स्तर उठाने का प्रयास करे। यही सेक्युलरिज्म है। मोदी की यह नीति प्रभावी और लोकप्रिय रही है। नरेंद्र मोदी को यूएई संयुक्त अरब अमीरात के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ऑर्डर ऑफ जायद से सम्मानित किया गया था। बहरीन, सऊदी अरब, फलस्तीन, अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात यूएई जैसे देशों द्वारा पुरस्कार दिए गए हैं। आरएसएस के सर संघ चालक मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता का सन्देश दिया है। उनका कहना है कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है। इसलिए सामाजिक समरसता का भाव रहना चाहिए। उपासना पद्धति में अंतर होने से भी इस विचार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। भारत में तो प्राचीन काल से सभी मत पंथ व उपासना पद्धति को सम्मान दिया गया। यह भारत की विचार दृष्टि है। निःस्वार्थ सेवा और सामाजिक समरसता भारत की विशेषता रही है। सेवा कार्य में कोई भेदभाव नहीं होता। संविधान की प्रस्तावना में ही बंधुत्व की भावना का उल्लेख किया गया है। यह शब्द हिंदुत्व की भावना के अनुरूप है। इस दर्शन में किसी सम्प्रदाय से अलगाव को मान्यता नहीं दी गई। विविधता के बाद भी समाज एक है। भाषा, जाति, धर्म खानपान में विविधता है। उनका उत्सव मनाने की आवश्यकता है। कुछ लोग विविधता की आड़ में समाज और देश को बांटने की कोशिश में जुटे रहते हैं। लेकिन भारतीय चिंतन विविधता में भी एकत्व सन्देश देता है। हमारी संस्कृति का आचरण सद्भाव पर आधारित है। यह हिंदुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में रहने वाले ईसाई और मुस्लिम परिवारों के भीतर भी यह भाव साफ देखा जा सकता है। एक सौ तीस करोड़ का समाज भारत माता का पुत्र है। हमारा बंधु है। क्रोध और अविवेक के कारण इसका लाभ लेने वाली अतिवादी ताकतों से सावधान रहना है। सेवा समरसता आज की आवश्यकता है। इस पर अमल होना चाहिए। इसी से श्रेष्ठ भारत की राह निर्मित होगी। वर्तमान परिस्थिति में आत्मसंयम और नियमों के पालन का भी महत्व है। समाज में सहयोग सद्भाव और समरसता का माहौल बनाना आवश्यक है। भारत ने दूसरे देशों की सहायता करता रहा है क्योंकि यहीं हमारा विचार है। समस्त समाज की सर्वांगीण उन्नति ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है। जब हिंदुत्व की बात आती है तो किसी अन्य पंथ के प्रति नफरत, कट्टरता या आतंक का विचार स्वतः समाप्त हो जाता है तब वसुधैव कुटुंबकम व सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव ही जागृत होता है। भारत जब विश्व गुरु था,तब भी उसने किसी अन्य देश पर अपने विचार थोपने के प्रयास नहीं किये। भारत शक्तिशाली था, तब भी तलवार के बल पर किसी को अपना मत त्यागने को विवश नहीं किया। दुनिया की अन्य सभ्यताओं से तुलना करें तो भारत बिल्कुल अलग दिखाई देता है जिसने सभी पंथों को सम्मान दिया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मुर्मू से बढ़ेगी लोकतंत्र की गरिमा Posted: 22 Jun 2022 06:06 AM PDT मुर्मू से बढ़ेगी लोकतंत्र की गरिमा(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भारत में सचमुच का लोकतंत्र है और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। पिछले दिनों मुस्लिम राष्ट्रों के संगठन ने भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक वर्ग को लेकर व्यर्थ की और अनावश्यक चिंता जताई थी। यहां मुस्लिम सम्प्रदाय से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की कुर्सी सुशोभित कर चुके हैं। दलितों के बीच से रामनाथ कोविंद मौजूदा समय में देश के राष्ट्रपति हैं और अब आदिवासी वर्ग से द्रौपदी मुर्मू को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की तरफ से प्रत्याशी घोषित किया गया है। विपक्ष की तरफ से भी हालांकि यशवंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाया गया है लेकिन द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना लगभग तय है। इससे हमारे लोकतंत्र की गरिमा और बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजग उम्मीदवार फाइनल कर लिया है। बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर मुहर भी लग गई है। द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया गया। द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पूर्व राज्यपाल हैं और वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली आदिवासी नेत्री होंगी। देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल होने का कीर्तिमान उनके नाम पर पहले ही दर्ज है। झारखंड में राज्यपाल के तौर पर कुल 6 साल एक माह 18 दिन का उनका कार्यकाल निर्विवाद तो रहा ही, राज्य के प्रथम नागरिक और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति के रूप में उनकी पारी यादगार रही है। कार्यकाल पूरा होने के बाद वह 12 जुलाई 2021 को झारखंड के राजभवन से उड़ीसा के रायरंगपुर स्थित अपने गांव के लिए रवाना हुई थीं और इन दिनों वहीं प्रवास कर रही हैं। वर्ष 2017 में भी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए द्रौपदी मुर्मू के नाम की चर्चा हुई थी। दरअसल एनडीए के नेता नरेंद्र मोदी चैंकाने वाले सियासी निर्णयों के लिए जाने जाते हैं और ऐसे में निर्विवाद राजनीतिक करियर वाली आदिवासी नेत्री द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे आना कतई अप्रत्याशित नहीं माना जाना चाहिए। द्रौपदी मुर्मू के पास राज्यपाल के तौर पर 6 साल से भी ज्यादा के कार्यकाल का बेहतरीन अनुभव है। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी से एनडीए पूरे देश को कई मायनों में प्रतीकात्मक संदेश देने की कोशिश कर सकती है। द्रौपदी मुर्मू का नाम देश में जनजातीय समाज के बीच पैठ बनाने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। इससे गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर जनजातीय समाज के बीच एक संदेश तो दिया ही जा सकता है। 18 मई 2015 को झारखंड की राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के पहले द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा में दो बार विधायक और एक बार राज्यमंत्री के रूप में काम कर चुकी थीं। राज्यपाल के तौर पर पांच वर्ष का उनका कार्यकाल 18 मई 2020 को पूरा हो गया था, लेकिन कोरोना के कारण राष्ट्रपति द्वारा नई नियुक्ति नहीं किए जाने के कारण उनके कार्यकाल का स्वतः विस्तार हो गया था। अपने पूरे कार्यकाल में वह कभी विवादों में नहीं रहीं। झारखंड के जनजातीय मामलों, शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वह हमेशा सजग रहीं। कई मौकों पर उन्होंने राज्य सरकारों के निर्णयों में संवैधानिक गरिमा और शालीनता के साथ हस्तक्षेप किया। विश्वविद्यालयों की पदेन कुलाधिपति के रूप में उनके कार्यकाल में राज्य के कई विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के रिक्त पदों पर नियुक्ति हुई। द्रौपदी मुर्मू नेराज्य में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुद लोक अदालत लगायी थी, जिसमें विवि शिक्षकों और कर्मचारियों के लगभग पांच हजार मामलों का निबटारा हुआ था। राज्य के विश्वविद्यालयों में और कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया केंद्रीयकृत कराने के लिए उन्होंने चांसलर पोर्टल का निर्माण कराया। ओडिशा में एक साधारण संथाल आदिवासी परिवार में 20 जून 1958 को जन्मीं द्रौपदी मुर्मू ने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वह 1997 में ओडिशा के रायरंगपुर में जिला बोर्ड की पार्षद चुनी गई थीं। राजनीति में आने के पहले वह श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम कर चुकी थीं। वह उड़ीसा में दो बार विधायक रह चुकी हैं और उन्हें नवीन पटनायक सरकार में मंत्री पद पर भी काम करने का मौका मिला था। उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार थी। ओडिशा विधानसभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से भी नवाजा था। उधर, विपक्षी दलों के बीच राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के तौर पर झारखंड के हजारीबाग निवासी कद्दावर नेता यशवंत सिन्हा के नाम पर सहमति बन गई है। अब सत्ताधारी एनडीए की ओर से झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू उम्मीदवार बनायी गई हैं तो यह भी एक अनूठा संयोग ही माना जायेगा। यशवंत सिन्हा के बाद चर्चाओं में द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आने से झारखंड के सियासी हलकों में भी कौतूहल और उत्साह का माहौल है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता यशवंत सिन्हा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वह वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए काम करेंगे। कई दिनों से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनका नाम आगामी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में पेश करेंगी। गौरतलब है कि पूर्व नौकरशाह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रह चुके यशवंत सिन्हा ने इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। यशवंत सिन्हा ने ट्वीट किया, ''ममता जी ने जो सम्मान मुझे तृणमूल कांग्रेस में दिया, मैं उसके लिए उनका आभारी हूं। अब समय आ गया है जब वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए मुझे पार्टी से अलग होना होगा। मुझे यकीन है कि वह (ममता) इसकी अनुमति देंगी।'' उनसे जब राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह अपने ट्वीट से अधिक कुछ नहीं बोल सकते हैं। यशवंत सिन्ह के मैदान में उतरने से चुनाव तो होगा लेकिन महाराष्ट्र में जिस तरह राजनीतिक हालात हैं उससे मुर्मू की जीत तय है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ब्रिटिश पत्रकार की मौत पर ब्राजील के उपराष्ट्रपति का बयान Posted: 22 Jun 2022 06:03 AM PDT ब्रिटिश पत्रकार की मौत पर ब्राजील के उपराष्ट्रपति का बयानब्रासीलिया। ब्राजील के उपराष्ट्रपति हैमिल्टन मौराओ ने कहा कि ब्रिटिश पत्रकार डोम फिलिप्स की उनके साथी स्वदेशी कार्यकर्ता ब्रूनो परेरा पर हमले के दौरान हुई मौत 'संपार्शि्वक क्षति' है। द गार्जियन ने श्री मौराओ के हवाले से कहा कि उनका मानना है कि फिलिप्स की मृत्यु इसलिए हो गयी क्योंकि वह हत्यारों के मुख्य लक्ष्य परेरा के साथ था। उन्होंने कहा,"अगर किसी ने इस अपराध का आदेश दिया है, तो वह इस क्षेत्र का एक व्यवसायी है जो मुख्य रूप से ब्रूनो की कार्रवाई से दुख्री था और डोम बेवजह इस लपेटे में मारा गया और यह एक संपार्शि्वक क्षति है।" उन्होंने कहा कि यह एक अपराध है, यह कुछ ऐसा था जो एक क्षण में हो गया, साथ ही यह घात लगाकर किये गये हमले की तरह है। कुछ ऐसा है जो कुछ समय से पक रहा था। उन्होंने कहा कि मेरे अनुमान के अनुसार यह रविवार को हुआ होगा। बड़े शहरों के बाहर गरीब इलाकों में इसी रविवार और शनिवार को ज्यादातर लोग शराब पीते हैं और नशे में धुत हो जाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ब्राजील के बड़े शहरों में भी, हर सप्ताहांत लोगों को चाकुओं से मारा जाता है, गोलियों से मारा जाता है और आमतौर पर यह किसका परिणाम होता है? और यहां भी यहीं हुआ होगा। स्वदेशी लोगों के यूनिवाजा समूह ने मौराव की आलोचना की है क्योंकि उनकी टिप्पणी फिलिप्स और स्थानीय समुदायों के प्रति अपमानजनक थी। द गार्जियन के अनुसार, हालांकि पुलिस ने कहा है कि हत्यारों ने अकेले काम किया। यूनिवाजा का मानना है कि अपराध के पीछे कई लोगों के हित जुड़े हुये हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज को स्वदेश आने पर किया जा सकता गिरफ्तार Posted: 22 Jun 2022 06:00 AM PDT पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज को स्वदेश आने पर किया जा सकता गिरफ्तारइस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुल्क लौटने की इच्छा जताई है। उनके छोटे भाई और मौजूदा पीएम शहबाज शरीफ की सरकार ने इसके लिए मंजूरी भी दे दी है। पाकिस्तान की आर्मी को भी इससे दिक्कत नहीं है। इस बीच उनके पाकिस्तान लौटने को लेकर कानूनी पेच फंसा है। संघीय कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने 21 जून को कहा कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान वापस आने के दौरान ट्रांजिट जमानत नहीं मिली, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। 2020 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ की जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद पाकिस्तान नहीं लौटने पर गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, लाहौर हाईकोर्ट (स्भ्ब्) ने नवंबर 2019 में नवाज शरीफ को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी। उसी महीने शरीफ लंदन के लिए रवाना हो गए। तब से वहीं रह रहे हैं। उनकी पार्टी पीएमएल-एन ने दोहराया है कि नवाज शरीफ की वापसी डॉक्टर की मंजूरी पर सशर्त है। पूर्व प्रधानमंत्री के पाकिस्तान लौटने की अफवाहें बार-बार आती रही हैं, लेकिन अप्रैल में गठबंधन सरकार बनने के बाद अटकलें तेज हो गईं, क्योंकि पीएमएल-एन गठबंधन में नवाज शरीफ प्रमुख है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| कोविड-19 से बच्चों की मौत का खतरा कम Posted: 22 Jun 2022 05:58 AM PDT कोविड-19 से बच्चों की मौत का खतरा कमलंदन। बच्चों में कोविड-19 से मौत होने का खतरा बहुत कम होता है। ब्रिटेन में पिछले 22 महीने के दौरान किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। हालांकि, अध्ययन करने वाली टीम ने पाया कि कोरोना वायरस संक्रमण होने से उन बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने या मौत की आशंका ज्यादा है जो पहले से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह अध्ययन मार्च 2020 से दिसंबर 2021 तक कोविड-पॉजिटिव की वजह से बच्चों की हुई सभी मौतों का विश्लेषण कर किया गया था। हालांकि, इन आंकड़ों का अभी पीर रिव्यु किया जाना बाकी है। लेखक यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी- सरकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी दृ लंदन यूनिवर्सिटी, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट से जुड़े हैं। शोधकर्ताओं ने मार्च 2020 से दिसंबर 2021 तक इंग्लैंड के एक्टिव नेशनल सर्विलांस डेटा का विश्लेषण किया। एक्टिव नेशनल सर्विलांस किसी भी मामले की बारीकी से निगरानी करने के लिए जानी जाती है। कोविड के मामले में संक्रमण को ध्यान में रखकर आंकड़े तैयार किए गए थे। इस दौरान 20 साल से कम उम्र के 185 बच्चों और युवाओं की मौतें हुईं। ये सभी कोविड पॉजिटिव थे। अध्ययन में कहा गया है कि इनमें से सिर्फ 81 मौतें (43.8 फीसदी) कोविड के कारण हुई थी।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अफगानिस्तान में भूकम्प से जान-माल को भारी नुकसान Posted: 22 Jun 2022 05:51 AM PDT अफगानिस्तान में भूकम्प से जान-माल को भारी नुकसानकाबुल। अफगानिस्तान में आज सुबह आए भूकंप से जान माल का भारी नुकसान हुआ है। काबुल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, 6.1 की तीव्रता वाले इस भूकंप से कम से कम 280 लोगों की जान गई है और 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (न्ैळै) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के खोस्त शहर से 40 किलोमीटर दूर था। यूरोपियन मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि इस भूकंप का असर 500 किलोमीटर तक के दायरे में था। इस वजह से अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान और भारत में भूकंप का झटके महसूस किए गए। सरकार के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने ट्वीट किया- दुर्भाग्य से, कल रात (स्थानीय समायानुसार) पक्तिका प्रांत के चार जिलों में भीषण भूकंप आया। जिसमें हमारे सैकड़ों देशवासी मारे गए और घायल हो गए और दर्जनों घर तबाह हो गए। हम सभी इमरजेंसी एजेंसियों से अपील करते हैं कि आगे की तबाही को रोकने के लिए इस इलाके में टीमें भेजें। अफगानिस्तान की सरकारी न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर अब्दुल वाहिद रायन ने ट्वीट कर बताया कि पक्तिका प्रांत के बरमल, जिरुक, नाका और ज्ञान जिलों में लोगों को मलबे से बाहर निकालने के लिए सुरक्षा बलों के हेलिकॉप्टर इलाके में पहुंच गए हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भारत और बांग्लादेश में हुई अत्यधिक वर्षा और बाढ़ सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण Posted: 22 Jun 2022 05:40 AM PDT भारत और बांग्लादेश में हुई अत्यधिक वर्षा और बाढ़ सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारणभारत के उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में हुई भारी मॉनसून की बारिश और नदियों में उसके बाद बढ़े जलस्तर के कारण हाल ही में भारत और बांग्लादेश में सीमा से सटे कुछ प्रमुख क्षेत्रों में बाढ़ आई। इसके चलते लाखों लोग फंसे हुए हैं और एक मानवीय संकट पैदा हो रहा है। देश और विदेश में जलवायु वैज्ञानिक और जल प्रबंधन विशेषज्ञ वर्षा के इस अनिश्चित व्यवहार पर जलवायु परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण प्रभाव देखते हैं और इस क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर की बाढ़ का कारण बनते हैं। हाल की बाढ़ को जलवायु परिवर्तन ने किया प्रभावित मानसून का जल्दी आना और बारिश के पैटर्न में बदलाव, इस वर्ष बार-बार आने वाली अचानक बाढ़ की वजह समझने में मदद कर सकता है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में तो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही बाढ़ आ गयी जो की मार्च में हुई भारी बारिश का नतीजा थी। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की जल्दी आमद के बीच एक मजबूत संबंध है जिसके कारण अचानक बाढ़ आई है। आईपीसीसी असेस्मेंट रिपोर्ट 5 और आईपीसीसी महासागरों और क्रायोस्फीयर पर प्रमुख लेखक और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के अनुसन्धान निदेशक, सहायक प्रोफेसर, डॉ अंजल प्रकाश कहते हैं, "एक गर्म जलवायु ने मौसम के पैटर्न और उसकी परिवर्तनशीलता को प्रभावित किया है। इससे वर्षा में वृद्धि हुई है, जिसके कारण हिमालयी क्षेत्रों के मध्य में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई, बांग्लादेश के सिलहट में मौजूदा बाढ़ में योगदान दिया।" डॉ प्रकाश की बात को बल देते हुए बांग्लादेश इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (बीयूईटी) के जल और बाढ़ प्रबंधन (आईडब्ल्यूएफएम) संस्थान के प्रोफेसर एकेएम सैफुल इस्लाम कहते हैं कि एक दशक में पूरे दक्षिण एशिया में चरम मौसम की घटनाओं को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन और मानसून के जल्दी आने और अत्यधिक फ्लैश फ़्लड आने के बीच एक मजबूत संबंध है। इसके अलावा, डॉ प्रकाश ने कहा, "अध्ययनों से पता चला है कि हिमालयी क्षेत्र के वर्षा पैटर्न बदल रहे हैं, जिससे अप्रत्याशित मौसम हो रहा है।" उदाहरण के लिए, भारत ने अचानक बाढ़ की दो लहरें देखीं, जिनमें दर्जनों लोग अत्यधिक वर्षा-प्रेरित भूस्खलन और बाढ़ में मारे गए। उन्होंने यह भी कहा कि, "जहां एक ओर जलवायु परिवर्तन के कारण, इस क्षेत्र के लिए एक आर्द्र जलवायु की भविष्यवाणी की गई है। वहीं वर्षा परिवर्तनशीलता का मतलब होता है कि सीज़न में 2-3 उच्च वर्षा की घटनाओं हो सकती है जबकि बाकी दिन शुष्क होंगे। यह एक विरोधाभास है।" फिलहाल बांग्लादेश में सूरमा और कुशियारा जैसी प्रमुख नदियाँ अपने खतरे के निशान से 18 बिंदु ऊपर बह रही हैं। इधर भारत में 17 जून को, सुबह 8:30 बजे तक बीते 24 घंटों में, मेघालय के चेरापूंजी में 972 मिमी वर्षा हुई। ध्यान रहे कि जब से आईएमडी ने बारिश का रिकॉर्ड रखना शुरू किया है, तब से जून के एक दिन में 800 मिमी से अधिक बारिश नौ बार दर्ज की गई है। इनमें से चार बार जून 1995 के बाद से दर्ज की गई हैं। बीती 15 जून को भारत में सबसे अधिक बारिश वाले स्थान मौसिनराम में 24 घंटे में 710.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। जून 1966 के बाद यह वहाँ एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश का रिकर्ड है। साथ ही, पश्चिम बंगाल, उत्तर पूर्वी राज्य, बिहार, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल में भरी बारिश कि चेतावनी के चलते इन क्षेत्रों की नदियाँ, जो अभी अपने ऐतिहासिक जल स्तर के बहुत करीब बह रही हैं, आने वाले कुछ दिनों में नए रिकार्ड स्थापित कर सकती हैं। आईपीसीसी की महासागरों और क्रायोस्फीयर की रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल कहते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की प्रतिक्रिया के चलते बंगाल की खाड़ी में ये तेज मानसूनी हवाएं पहले से कहीं अधिक नमी ले जा सकती हैं। इससे मॉनसून की भरी बारिश का जलवायु परिवर्तन से जुड़े होने का सीधा संकेत मिलता है। डॉ कोल ने इस जलवायु आकलन रिपोर्ट में हिंद महासागर के गर्म होने पर अध्याय लिखा था। बाढ़ की बदलती प्रकृति रॉक्सी कहते हैं, 1950 के दशक के बाद से दक्षिण एशिया में मानसून के पैटर्न में बदलाव आया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब मानसून के मौसम में एक लंबे सूखे समय के बाद अचानक भारी बारिश का दौर होता है। तापमान में प्रत्येक 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के लिए वर्षा की कुल मात्रा में 7% की वृद्धि होगी। मानसून में यह 10% तक जाएगी। डॉ कोल कहते हैं कि दक्षिण एशिया में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं के आनुपातिक रूप से बढ़ने का अनुमान है। आमतौर पर जब अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी असम में भारी बारिश होती है, तो बाढ़ मुख्य रूप से केवल असम में सीमित रहती थी। मगर इस बार भारी बारिश पश्चिम असम, मेघालय और त्रिपुरा में केंद्रित है। मेघालय और असम में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाओं के अलावा यह पानी अंततः बांग्लादेश में बह जाता है, जिससे वहाँ बाढ़ आ जाती है। प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक विकास को संभावित नुकसान विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौसमी विशेषताओं में यह बदलाव लोगों के जीवन, आजीविका, सिंचाई, खाद्य और जल सुरक्षा, और उद्योग को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा। बाढ़ में घरों, पुलों, पुलों के बह जाने से सैकड़ों हजारों लोग बेघर हो गए हैं। अकेले सुनामगंज और सिलहट में एक लाख से अधिक लोगों को बाढ़ आश्रयों में भेज रहे हैं। ध्यान रहे कि कम से कम 40 ट्रांसबाउंडरी नदियाँ अत्यधिक बारिश से अपवाह को ऊपर की ओर बांग्लादेश ले जाती हैं, जहां से दुनिया की कुछ प्रमुख नदियों में बाढ़ कि स्थिति बनती है और भारत, नेपाल, भूटान, चीन, और बांग्लादेश में फैले 1.72 मिलियन वर्ग किलोमीटर के विशाल जलग्रहण क्षेत्र को बहा देती हैं एक वर्ष में एक अरब टन से अधिक गाद या सिल्ट ले जाती हैं। यह गाद नदियों पर बने बुनियादी ढांचे में अक्सर फंस जाती है, जिससे इसकी तलहटी ऊपर उठ जाती है और नदियाँ अपने स्तर से ऊपर बह कर बाढ़ लाती हैं। बांग्लादेश ने इस साल अप्रैल के पहले सप्ताह में ही पहली बार बाढ़ देखी और तब वहाँ की मुख्य फसल, बोरो, आधी पकी ही थी। हजारों हेक्टेयर बोरो खेत क्षतिग्रस्त हो गए। सरकार से नदी घाटियों से बुनियादी ढांचे को हटाने और प्रकृति आधारित समाधानों को बढ़ावा देने का आग्रह करते हुए, विशेषज्ञों ने किसानों के लिए मौसम बीमा शुरू करने और उनकी वित्त तक पहुंच को आसान बनाने का आह्वान किया। इस सब के चलते भारत और बांग्लादेश दोनों पर गंभीर प्रभाव होंगे जो देश की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण नुकसान पहुंचाएंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 22 Jun 2022 05:36 AM PDT सभी के लिए न्याय तक पहुंचलेखक-श्री किरेन रिजिजू, विधि और न्याय मंत्री, भारत सरकार 16 मई, 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था। भारत के मतदाताओं ने श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सरकार के पक्ष में बहुत उम्मीदों के साथ वोट दिया। हालांकि, अलग-अलग विचार और मतभेद भारत के अविभाज्य अंग हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों में सच्ची आस्था रखनेवाले व्यक्ति के रूप में, मैं आलोचनाओं को खारिज भी नहीं करूंगा। लेकिन आलोचना रचनात्मक और तथ्यात्मक होनी चाहिए। इस लेख में, मैं, किरेन रिजिजू, विधि और न्याय मंत्री, दुनिया के सामने विधि और न्याय मंत्रालय की शानदार प्रगति का विवरण पेश करूंगा तथा ये सभी बातें तथ्यात्मक रूप से सही होंगी । क्या हमने पर्याप्त कार्य पूरे कर लिए हैं? बिल्कु्ल नहीं। क्या हम सही रास्ते पर हैं? बिल्कुल। 2019 में, श्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक आह्वान किया। भारतीय न्यायालयों में 3.30 करोड़ से अधिक मामलों के लंबित होने को ध्यान में रखते हुए मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय को देश की न्याय प्रणाली में "देरी और लंबित मामलों की संख्या को कम करने का एक तरीका ढूंढने' का निर्देश दिया। मैं विश्वास के साथ यह कह सकता हूं कि हमने न केवल इनका समाधान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास किये हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए सफलता की आधारशिला भी रखी है। शुरुआत विधायी विभाग की उपलब्धियों से- प्रणालीगत कानूनी सुधार के लिए पिछले आठ वर्षों के दौरान सरकार द्वारा कुल 1,486 पुराने और निरर्थक कानूनों को निरस्त किया गया है। निर्वाचक पंजीकरण नियम और चुनाव संचालन नियम, 1961 में संशोधन के द्वारा विभिन्न फॉर्म को सरल बनाया गया है, ताकि ये उपयोगकर्ता-अनुकूल हो सकें। एक मतदाता के रूप में पंजीकरण की सुविधाजनक प्रक्रिया के लिए, हमने चुनाव संचालन नियम, 1961 में भी संशोधन किया है, ताकि 80 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और सशस्त्र बलों के मतदाताओं को डाक मतपत्र की सुविधा प्रदान की जा सके। तलाक-ए-बिद्दत के माध्यम से तलाक की रोकथाम के लिए मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन के दूरगामी प्रभाव होंगे और यह फिर से इस बात को रेखांकित करता है कि जब हमारी सरकार "सबका साथ, सबका विकास" कहती है, तो हम इसके लिए वास्तव में प्रतिबद्ध होते हैं। न्याय विभाग (डीओजे) ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ दो चरणों में 'हाशिए के लोगों के लिए न्याय तक पहुंच' नामक एक परियोजना में भागीदारी की। दोनों चरणों के तहत, कार्यक्रम ने प्रमुख न्याय सेवा प्रदाताओं की संस्थागत क्षमताओं में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया, जिनसे वे गरीबों और वंचितों की प्रभावी रूप से सेवा कर सकें। डीओजे ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, सरकारी विभागों, सीएसओ, शैक्षणिक संस्थानों आदि के साथ साझेदारी सहित अभिनव मॉडल और प्रथाओं के माध्यम से 38 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया। 2020 में, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के एक मूल्यांकन के द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर इन कार्यक्रमों का विस्तार करने की सिफारिश की गयी। इसके परिणामस्वरूप "भारत में न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान का डिजाइन तैयार करना" (दिशा) नामक न्याय योजना तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए एक व्यापक और व्यवस्थित समाधान सामने आया। यह योजना 'सभी के लिए न्याय तक पहुंच' सुनिश्चित करने के माध्यम से एसडीजी-16 के कार्यान्वयन को गति प्रदान करती है। "दिशा" के महत्वपूर्ण उद्देश्य थे-टेली-लॉ के माध्यम से मुकदमा-पूर्व तंत्र को मजबूत करना, न्याय बंधु कार्यक्रम के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सेवाओं की प्रभावी व्यवस्था विकसित करना और 'न्याय मित्र' कहे जाने वाले सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कैडर के माध्यम से अदालतों में लंबित मामलों को निपटाने की सुविधा प्रदान करना। टेली-लॉ सबसे महत्वाकांक्षी प्लेटफार्मों में से एक है, जिनके सुखद परिणाम सामने आये हैं। 2017 में लॉन्च किया गया, टेली-लॉ एक ई-इंटरफ़ेस प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य मुकदमा-पूर्व सलाह के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है। इसके लिए पैनल वकीलों की एक समर्पित टीम, साझा सेवा केंद्र (सीएससी) पर उपलब्ध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/टेलीफोन सुविधाओं के जरिये उन्हें सलाह देती है। कानूनी सेवा प्राधिकरणों ने न्याय देने के पारंपरिक तरीकों में डिजिटल तकनीक को सरलता से एकीकृत किया है और लोक अदालत को वर्चुअल प्लेटफार्म पर आयोजित किया जा रहा है। यह न्याय तक लोगों की पहुंच में वृद्धि और सुधार करता है तथा मुकदमा-पूर्व तथा लंबित मामलों का निपटारा करके अदालतों पर बोझ कम करता है। 2016 से अब तक, राज्य लोक अदालतों के माध्यम से 65.22 लाख मामलों, राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से 502.11 लाख मामलों और स्थायी लोक अदालतों के माध्यम से 5.89 लाख मामलों को निपटाया गया है। कोविड-19 के दौरान, जिला और उच्च न्यायालयों ने लगभग 1.90 करोड़ मामलों (31 मार्च 2022 तक) की सुनवाई की और सर्वोच्च न्यायालय ने 2,18,891 से अधिक वर्चुअल सुनवाई (14 मार्च 2022 तक) की, जिनसे यह वर्चुअल सुनवाई के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बन गया। 2019 में यौन अपराधों से सम्बंधित मामलों के समयबद्ध अंतिम फैसले के लिए देश भर में 389 विशेष पॉक्सो कोर्ट समेत 1,023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) की स्थापना की गई। 406 विशेष पोक्सो न्यायालयों सहित 722 एफटीएससी पहले से ही परिचालन में हैं। नवंबर 2021 में, मैंने संविधान दिवस के अवसर पर "भारत के संविधान पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम" का उद्घाटन किया था, जिसे नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (एनएएलएसएआर), यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के सहयोग से कानूनी मामलों के विभाग द्वारा शुरू किया गया था। पाठ्यक्रम संविधान से परिचित कराता है और 15 संकल्पना आधारित वीडियो की एक श्रृंखला के माध्यम से ऐतिहासिक विकास का परीक्षण करता है। मुझे खुशी है कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में कानून और न्याय मंत्रालय ने इस लक्ष्य की दिशा में काफी प्रगति की है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि मैं इस प्रक्रिया का हिस्सा रहा हूं। जय हिन्द। *** हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 22 Jun 2022 05:30 AM PDT
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| Posted: 22 Jun 2022 05:27 AM PDT
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