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Monday, June 6, 2022

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल

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जब-जब आती हाथों में" दिव्य रश्मि"

Posted: 03 Jun 2022 07:44 AM PDT

जब-जब आती हाथों में" दिव्य रश्मि" 

अरविन्द अकेला
जब जब आती हाथों में "दिव्य रश्मि",
खिल जाता मेरा घर,आँगन,द्वार,
तन-मन मेरा पुलकित हो जाता,
हर्षित होता मेरा संसार। 
      जब-जब आता...।

"दिव्य रश्मि पत्रिका" बहुत है पुरानी,
पाठकों के लिए यह नहीं अंजानी,
रंग-रूप,शानदार हैं इसके,
जिससे लगता यह जानदार। 
     जब-जब आता...।

देश-दुनियाँ की छपती इसमें खबरें ,
साहित्य,अध्यात्म पर इसकी नजरें ,
लिखते लेखक आलेख, विचार इसमें,
जो हैं राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार।
     जब-जब आता...।

संपादक इसके राकेश दत्त मिश्र हैं,
जिनकी लेखनी है शानदार,
संपादकीय ये धारदार लिखते हैं ,
मिलता इन्हेँ पाठकों का प्यार। 
     जब-जब आता ...।
        
मैं कवि "अकेला" इसका पाठक,
रखते हम इस पत्र से  सरोकार,
इसमें मेरे लेख,विचार छपते,
जिससे मिलती हमें यश-कीर्ति अपार।
      जब-जब आता...।
        ----0---
    अरविन्द अकेला,पूर्वी रामकृष्ण नगर,पटना-27
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‘ज्ञानव्यापी’ अतिक्रमणमुक्त नहीं होती, तब तक हमारा संघर्ष चलता ही रहेगा - हिन्दू जनजागृति समिति

Posted: 03 Jun 2022 07:37 AM PDT

'ज्ञानव्यापी' अतिक्रमणमुक्त नहीं होती, तब तक हमारा संघर्ष चलता ही रहेगा  -
 हिन्दू जनजागृति समिति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मा. मोहनजी भागवत ने काशी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के संबंध में हाल ही वक्तव्य दिया है । हम मा. मोहनजी का आदर करते हैं; परंतु यह उनका व्यक्तिगत मत है । प्राचीनकाल से काशी मोक्षनगरी है, ऐसा हिन्दू धर्मशास्त्र में उसका वर्णन है । हिन्दू जीवनदर्शन उसके बिना अपूर्ण है । इसलिए इस पवित्र भूमि पर औरंगजेब जैसे क्रूर शासक द्वारा किए अत्याचार से अब हिन्दू मंदिरों को मुक्त करना आवश्यक है । उस दृष्टि से ज्ञानव्यापी में विराजमान अविमुक्तेश्वर को मुक्त करना प्रथम कर्तव्य है, ऐसी हिन्दू समाज की धारणा है । यही हिन्दू जनजागृति समिति का भी मत है । हिन्दू समाज ने अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि का संघर्ष भी संयमपूर्वक किया और विजय प्राप्त की है । 'ज्ञानव्यापी' के संबंध में भी न्यायालयीन मार्ग से प्रयास हो रहे हैं । इसलिए जब तक ज्ञानव्यापी अतिक्रमणमुक्त नहीं होती, तब तक हमारा संघर्ष चलता ही रहेगा, ऐसा स्पष्ट प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने किया है ।
श्री. रमेश शिंदे ने आगे कहा कि, अनेक विषयों पर संगठन अथवा नेताओं के मत अलग हो सकते हैं । विविध मतों का आदर करना ही तो हमारी संस्कृति है । मतभिन्नता का अर्थ विवाद नहीं है । इसलिए इस संबंध में 100 करोड हिन्दू समाज का ही नहीं, अपितु कुछ कार्यकर्ताओं का मत भी भिन्न हो सकता है । ज्ञानव्यापी मस्जिद की सर्व वास्तविकता न्यायालय के सामने है । जिसके द्वारा वह हिन्दू मंदिर है, यह सिद्ध होगा, ऐसी हिन्दू समाज की श्रद्धा है । केवल प्राचीन काल में ही नहीं, अपितु आज भी बामियान की बुद्धमूर्ति हो अथवा तुर्किस्तान का 'हागिया सोफिया चर्च' हो, मुसलमानों की आक्रामक मानसिकता सर्वत्र दिखाई देती है । ऐसी स्थिति में मानवता और बंधुत्व के दृष्टिकोण से मुसलमान उनके पास हिन्दू मंदिरों का जो स्थान है, वह हिन्दुओं के नियंत्रण में नहीं देंगे । इसलिए हिन्दुओं को आंदोलन द्वारा और न्यायालयीन प्रक्रिया द्वारा यह संघर्ष करना ही पडेगा । इसकी तैयारी हिन्दू समाज ने प्रारंभ कर दी है ।
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तीन दिवसीय अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी का रंगारंग और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ समापन

Posted: 03 Jun 2022 06:40 AM PDT

तीन दिवसीय अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी का रंगारंग और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ समापन

बीते तीन दिनों से गोपालगंज जिले के अंबेडकर भवन में चल रहे तीन दिवसीय आजादी का अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी का 3 जून को रंगारंग और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा आयोजित समापन समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रोफेसर फारूक अली तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर गोपालगंज जिले के पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार, जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा के कुलसचिव डॉ रवि प्रकाश बबलू, पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी, डॉ जाकिर हुसैन संस्थान के निदेशक राकेश कुमार दुबे शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पटना स्थित रीजनल आउटरीच ब्यूरो के कार्यक्रम प्रमुख सह क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा कि गोपालगंज में आयोजित यह अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहा है। इन तीन दिनों तक जिस प्रकार यहां के छात्र-छात्राओं, नवयुवकों ने बढ़-चढ़कर फोटो प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, वह सराहनीय रहा। उन्होंने कहा कि रीजनल आउटरीच ब्यूरो अपने क्षेत्रीय इकाइयों के माध्यम से इस वित्त वर्ष में पूरे बिहार भर के जिलों में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों एवं नीतियों के बारे में जन-जन को जागरूक करने का का कार्य करेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति प्रोफेसर फारूक अली ने कहा कि चाहे वह आजादी का दौर रहा हो या फिर कोई भी अन्य क्षेत्र, बिहार हर दौर में आगे रहा है, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से हम वास्तव में स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के मूल्यों, कार्यों से बहुत कुछ सीखने और अपनी आने वाली पीढ़ी को सिखाने की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल गोपालगंज जिले के पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार ने कहा कि सारण, सिवान और गोपालगंज आजादी के दौर में महत्वपूर्ण स्थलों में से एक रहा है, जहां कई वीर क्रांतिकारी और सपूतों ने जन्म लिया है। उन्होंने जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति से आग्रह करते हुए कहा कि इन जिलों के स्वतंत्रता सेनानियों की पृष्ठभूमि, उनके कार्यकलाप, वे किस प्रकार की विचारधारा से प्रेरित होते थे, वे किस तरीके का समाज चाहते थे, इन सब बातों पर शोध किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के स्वतंत्रता सेनानियों का जितना प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए था उतना नहीं हुआ है। इस दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।
जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ रवि प्रकाश बबलू ने कहा कि हमें अपने राष्ट्र के निर्माताओं, आजादी में अपनी महती भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से सीख लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास समृद्ध शाली है जो हमें समृद्ध बनाता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इतिहास का लेखन किया गया है, उनमें कई हमारे स्वतंत्रता सेनानी खासकर बिहार के वे गुमनाम नायक जिन्होंने आजादी में अपनी महती भूमिका निभाई है, वे छूट गए हैं। यह आजादी का अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी उन्हीं क्रांतिकारियों की याद हमें दिलाता है। वे चेहरे जो चर्चित नहीं रहे हैं, उन्हें इस फोटो प्रदर्शन में शामिल किया गया है और यही इस फोटो प्रदर्शनी की सबसे खास बात है।
गोपालगंज के पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी ने सांस्कृतिक दल के कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत की गई लघु नाटिका की सराहना करते हुए कहा कि इस नाटक को देखते हुए ऐसा लग रहा था, जैसे हम इतिहास को देख रहे हों। उन्होंने कहा कि अगर हमारा सुनहरा इतिहास ना हुआ होता तो आज हम सुनहरे भविष्य में नहीं जी रहे होते।
फोटो प्रदर्शनी के समापन के दिन भी सांस्कृतिक कलाकारों ने अपने रंगारंग कार्यक्रमों से सबका दिल जीत लिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभागीय कलाकारों ने 'बिहार बिहार' नृत्य के माध्यम से बिहार की संस्कृति, परंपरा, पर्व आदि का शानदार प्रस्तुति की। सभी लोगों ने खूब आनंद उठाया। आपसदारी कला मंच के कलाकारों ने गांधीजी की जीवनी पर लघु नाटिका का मंचन किया। सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के विभागीय कलाकारों में राकेश चंद्र आर्य, अंजना झा, आरती झा, दीपक शर्मा, मनीष खंडेलवाल, डॉ शिप्रा, अभय, उषा, संजीत राम, साधना श्रीवास्तव, विकास शामिल थे।
बच्चों के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सफल प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में स्मृति सिंह, प्रतिक्षा मिश्रा, कोमल राज, पंकज मिश्रा, अंजली कुमारी, विनीत कुमार, नदीम सहित अन्य सफल प्रतिभागियों को आजादी का अमृत महोत्सव कब देकर पुरस्कृत किया गया।
बीते तीन दिनों तक फोटो प्रदर्शनी में स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस गोपालगंज तथा जीविका की ओर से लगाए गए स्टॉल के प्रभारी एवं उनमें शामिल सभी लोगों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। गोपालगंज जिले के दूरदर्शन के संवादाता मधेश तिवारी को उनके उल्लेखनीय सहयोग हेतु प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही डॉ जाकिर हुसैन संस्थान के छात्र-छात्राओं को भी उनके सहभागिता हेतु प्रशस्ति पत्र दिया गया।
समापन समारोह का धन्यवाद ज्ञापन जावेद अख्तर अंसारी, क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, सीतामढ़ी ने किया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी अमरेंद्र मोहन ने किया। मौके पर सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी सर्वजीत सिंह, ग्यास अख्तर अंसारी सहित विभाग के निशांत कुमार, अशोक कुमार, सुरेंद्र कुमार, राकेश कुमार, रोशन कुमार आदि मौजूद थे।
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सब कुछ बरबाद हो गेल।

Posted: 03 Jun 2022 06:36 AM PDT

सब कुछ बरबाद हो गेल।
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मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
रोज के तरह आज भी सबेरे टहले निकलली।गाँधी मैदान के चक्कर लगावित अचानके ध्यान में आयेल एने बड़ी दिन से गजोधर भाई देखाई न पड़लन हे।पहिले आउ कबो न त भोरौकी टहलते घड़ी जरूर मिल जा हलन।फिर हमनी दुनु गप करित घरे लौट हली।एगो ओही तो हथ जिनका से कुछ सुख दुख बतिया हली।बकि एने कै दिन से नजर न आवित हथ ।पता न बिमार हथ कि आउ कुछ परेशानी में हथ।सोंचते सोंचते हमर एक चक्कर हो गेल।मन में आयल अब चले के चही।आज गजोधर भाई से चलके हाल चाल ले लेही।रस्ते में तो उनकर घर पड़ हे।का जनि बेचारे कौन हाल में हथ।अब तो करोना भी खतम हो गेल हे।सबकोई फिर पहिलहीं नियन अपन काम धाम करे लगलन हे।आखिर कुछ तो कारन जरूर हे कि गजोधर भाई देखाई न पड़ित हथ।एही सब सोंचित पहुंच गेली गजोधर भाई के दरवाजा पर।दुआरी भितरे से बंद हल।सबेरे के लगभग सात साढ़े सात बज रहल हे।अभी तक दरवाजा बंद हे एकर माने कुछ गंभीर मामला हे न तो इनकर दुआरी तो भोरे पाँचे बजे से खुल जा हल।दुआरी पर कुछ देर खड़ा खड़ा सोंचे लगली ढुकढुकाउं कि न ।का जनि गजोधर भाई कौन हाल में हथ।एक मन कैलक कि लौट चले के चही।बकि मन न मानलक।दुआरी पर लगल कु़ंडी खटखटावे लगली।भितरे से चिरपरिचित आवाज सुनायेल केह भाई आवित ही ।तनि ठहर।अब जिउ मे जिउ आयेल ।ई आवाज तो गजोधरे भाई के हे।बकि मन में संका लगल कि पहिले तो कबो गजोधर भाई अपने दुआरी न खोल हलन कभी।उनकर मलकीनिये आके दूआरी खोल हलन।आज ई अपने आवित हथ एकर मतलब जरूर कुछ बात हे।हो न हो लग हे दुनु में कुछ टनटुन होयेल हे।खैर दुआरी खुलल।सामने गजोधर भाई के देख करेजा ठंढायल।मन के संका दूर होयेल।गोड़ लागी जीअ के बाद गजोधर भाई घर दने भितरे बढ़ित कहलन आउँ बाबा बड़ी दिन पर भेंट होयेल हे हमनी के।आउं एनहीं बैठल जाये।अकेलहीं ही आजकल।ई सुनके हम अचकचैली।काहे कि जब भी आव हली पहिले तो उनकर मलकीनिये बहरी वाला रूम में बैठाव हलन।बाद में गजोधर भाई खबर सुनके पीछे से आके बैठ हलन।फिर हमनी के गप सप शुरु है जा हल ।कुछ देर बाद उनकर मलकीनी दू गो कप में चाह दे जा हलन।हमनी दुनु चाह पिअईत अपन दुख सुख बतियाईत रह हली।कखनी दस बज जा हल पतो न चल हल।बकि आज तो घर के हालत देख के गजबे लगल।अकेले गजोधर भाई।न कोई लैकन न मलकीनी।मन न मनायेल त पूछ देली।का भाई जी ई घर ऐसन काहे लगित हे।न कोई लैकन न मलकीनी सब कहाँ चल गेलन?अब तोरो उमर लगभग साठ होईत हे।ई उमर में अकेले ऐसे रहे के हे?मान ल कभी तबियेते बिगड़ गेल त कोई एक गिलास पानियो देवे वाला न हे।ऐसन में भगवान न करे कहीं कुछ हो गेल त कोई केकरो खबर भी न कर सक हे।अरे मानित ही आजकल लैकन पढ़े लिखे ला चहे नोकरी के फेर में बाहर रह हथ।बकि मलकीनी के तो रहे के चही साथे।कम से कम दुगो रोटी तो समय पर मिल जायेत।पड़ला हरला में कोई परिवार चहे दोस्त इयार के खबर तो मिलत।ई ऐसन में बड़ी कष्ट हे।एतना बात सुनैत सुनैत गजोधर भाई के सब्र के बाँध टूट गेल।बड़ी लंबा साँस लेईत कहे लगलन।का कहुँ बाबा।आजकल जमाना बड़ी विचित्र हो गेल हे।सबके अपन मनमाना चही।कोई केकरो सुने वाला न हे।का लैकन का मेहरारू।सबके अपने आप से मतलब रह हे।बाप चहे मरदाना से रिश्ता तबे तक जबतक इनकर मन के हिसाब से अपने चलित ही।जहाँ तनिमनि अपने मुह मोड़ली चहे कुछ बोलली इनकर त्योरी चढ़ जायेत।तुरत भर में बात के बत़ंगड़ करके महाभारत के व्यूह रचना होवे लगत।अरे तनिमनि उनईस बीस सब घर में होव हे।एकर मतलब ई थोड़े हे कि आदमी घर छोड़ के भाग जायेत।एक दूसरा से बोलचाल बंद कर देत।हालो चाल न पूछत।आदमी जीअईत हे कि मर गेल एहु पुछना गुनाह हो गेल।खैर अब हम का कहुँ अपनहुँ कहब कि आज भोरे भोरे कन्ने फँस गेली।बकि का कहुँ अब पानी सर से ऊपर बहे लगल हे।सब कुछ बरबाद हो गेल बाबा।पूरा जिंदगी लगा देली समेट के सबके रखे के फेर में।अपने से कुछो छिपल न हे।तीन गो बहीन एगो भाई तीन चार गो लैकन सबके पढ़ा लिखा के शादी बिआह सब कर देली।दु गो लैकन अभी बचल हथ बिआह लगी।बकि भगवान के किरपा से सब अपन अपन जगह सुखी हथ।भाई जहाँ नौकरी कर हथ उहैं घर बना के अपन परिवार के साथ रहित हथ।बेटी के बिआह देली ऊ भी अपना घर में सुखी हे।भगवत किरपा से एगो नाती भी हे।चारो बहिन भी सब अपन अपन घर में बाल बच्चा के साथे सुख से रहैत हथ।बड़का बेटा भी नौकरी करित अपन परिवार के साथ परसन्न हे।एगो पोता भी हे।लगभग छौ बरस ओकर उमर होयेत अब।अब तो ओहू इस्कूल जाय लगल हे।सबकुछ देख के मन बड़ी खुश रह हल।अपन दुख भुला जा हली।पढ़ लिख के भी नौकरी न लगल।कोई तरह से पराइवेट कालेज में नोकरी करित आउ कुछ अप्पन धंधा पानी से घर बढ़िया चलित हल।बकि पता न केकर नजर लगल।अचानके सबकुछ बरबाद हो गेल।आज देखते ही अब हम कहीं आवे जाये लायेक भी न रह गेली।जबकि अपने के तो पते हे।हम कभी घरे बैठे वाला आदमी न हली।समाज के साथ सबके सुख दुख में बराबर खड़ा रहली।बकि आज दुगो रोटी आउ एक गिलास पानी तो दूर कोई मरे जीये के हाल भी पूछे वाला न हे।कभी कभी लग हे हमहीं गलती कैली।परिवार आउ समाज के चक्कर में पड़के अप्पन जिंदगी बरबाद कर लेली।हमहुँ चहती हल त कहीं बहरी जा के कोई बढ़िया पराईवेट काम करके अच्छा पैसा कमा सक हली।आज के लोग जैसन ऐश के जिनगी जी सक हली।समाजिकता के घूटी पिआवे वाला माय बाबूजी तो अब हथ न बकि उनकर घूटी आज हमरा ला जहर के काम करित हे।परिवार आउ समाज सब खाली अपन अपन फायेदा उठौलन हमरा से।अब ई उमर में कोई झाँकहुँ वाला न हे।अरे दुसरा के हम का कहूँ जब अपन मेहरारु समझे ला तैयार न हे,अपन बाल बच्चा कोई सुने देखे वाला न हे त बाहर वाला के केतना दिन करत।अब तो बस भगवाने भरोसे समय कटित हे।जे होये ला होवत से होयेत।हम का कर सक ही।खैर छैड़ूँ ई सब बात।आउ सुनाऊँ कने चलली ।बड़ी दिन पर भेंट होईत हे हमनी के।एने कैयेक महीना से एही सब टेंसन में हम कहीं जाईत आवैत न ही।का करूँ मने न करे कहीं जाय के।सौंसे लगन बीत गेल।दुनिया भर के शादी बिआह,जनेऊ,मूड़ना के काड कुछ सराध के काड रखल रह गेल कहीं न गेली।बड़ी मोशकिलन एकाध जगह जा पैली।धीरे धीरे सबसे संबंध खतम होल जाईत हे।बकि हम करी तो का करी।केकरा केकरा अपन दुखड़ा सुनावित रही।ई सब तो अब हमर लग हे जिनगी के साथी हो गेल हे।आउ सुनाउँ अप्पन हाल चाल ।सब ठीक ठाक हे न।अच्छा छोड़ूँ ई सब पहिले एक गिलास सत्तू बनावित ही एकरा पीऊँ फिर हमनी के बतकही होईत रहत।हमर दिन तो आजकल एकरे पर कटित हे।दाल भात तरकारी आउ रोटी तरकारी खैला तो महीनों बीत गेल।पता न अब मिलबो करत कि एही पीते परान छुटत।लेउँ पहिले एक गिलास अपने भी पी लेऊँ।नौ बज गेल हे।गरमी भी ओईसने हे।अपनहुँ के तबियत ठीक न रहे।हाई बी पी के मरीज ही जादे देर उपास न रहे के चही।अरे हमरा का हे जे होवेला होयेत से होयेबे करत।बकि अपनन्हीं के देख के कुछ तो मन शांत रह हे।
गजोधर भाई के हाँथ से सत्तु के गिलास अप्पन हाँथ में लेके सत्तु पिअईत इनकर तीन महीना पहिले के जिनगी पर ध्यान चल गेल।दुनु मरद मेहरारु केतना परसनचित देखा हलन।आज तक केकरो पता न चले देलन कि ई दुनु के जिनगी एतना तनाव से भरल हे।आज तक गजोधर भाई के उदास निराश चेहरा हम कहियो न देखली।बड़ी सोंच में पड़ गेली हम तो आज इनकर कहानी सुनके।सपनो मे न सोंचली हल ऊपर से एतना हँसमुख,सबके समस्या के समाधान तत्काल निकाले वाला गजोधर भाई के जीवन एतना जाने तनाव में चल रहल हे।गजब लीला हे भगवान के।सत्तू पी के हम उठ के चले लगली ।गजोधर भाई से एतने कह पैली भाई जी भगवान पर विशवास रख।ऊ फिर से पहिलका दिन लौटैतन।तब तक हमरा लायेक जे भी उचित समझिह कहे में तनिको मत सकुचैह।हम तोरा से अलगे न ही।अब चल हिओ।फिर जलदिये मिलबो।धूप कड़ा हो रहलो हे।हमरो घरे पहुंचे के चही।गजोधर दुआरी तक छोड़ैत एतने भर कहैत रुआँसा हो गेलन अच्छा बाबा आवैत रहब ।अपनन्हीं आ जाही त लग हे अभी हम जिंदा ही।हमरो कोई हे।बाकी तो सब बरबादे हो गेल।.....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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