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Tuesday, June 28, 2022

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महिला अधिकारों के मार्ग पर जहां पश्चिम के पिछड़ रहे कदम, वहीं भारत दिखा रहा आगे की राह:-स्मृति इरानी

Posted: 28 Jun 2022 04:48 AM PDT

महिला अधिकारों के मार्ग पर जहां पश्चिम के पिछड़ रहे कदम, वहीं भारत दिखा रहा आगे की राह:-स्मृति इरानी


पश्चिमी देशों में गर्भपात पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ सोशल मीडिया और सड़कों पर चिंतित करने वाले विरोध प्रदर्शनों व हंगामे के बीच, गर्भावस्था की समाप्ति पर भारत का उदार रुख बहुत सुकून देने वाले देश के रूप में है। व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक और शादी के लिए पुरुषों और महिलाओं की उम्र को बराबर करने के प्रस्ताव के साथ, भारत प्रजनन स्वायत्तता की रक्षा करने वाले अग्रणी देशों में शामिल है।

भारत की संवैधानिक लोकनीति, अनुच्छेद 21 के माध्यम से व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। गर्भपात या गर्भावस्था की समाप्ति एक महिला के आत्मनिर्णय का विशेषाधिकार है। विशुद्ध रूप से शारीरिक संरचना के कारण, महिलाओं के लिए बच्चे को जन्म देना उनकी नियति है- सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति भी महिलाओं को बच्चे के पालन-पोषण का लगभग सम्पूर्ण भाग, जो समानुपातिक नहीं है, की जिम्मेदारी देती हैं।

गर्भावस्था की चिकित्सीय समाप्ति (संशोधन) अधिनियम, 2021 सही दिशा में उठाया गया कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि निकट भविष्य में बच्चे को जन्म देने वाली महिलायें अपने घरों में नए जीवन का स्वागत करने के लिए आत्मनिर्णय करें। अधिनियम के तत्वावधान में, गर्भपात 24 गर्भावधि सप्ताह तक करवाया जा सकता है, यदि मां के जीवन के लिए जोखिम, मानसिक पीड़ा, दुष्कर्म, अनाचार, गर्भनिरोध विफलता या भ्रूण असामान्यताओं के निदान आदि कारण मौजूद हों। अधिनियम एमटीपी अधिनियम, 1971 द्वारा तय की गयी 20 सप्ताह की चुनौती से आगे जाता है और स्वास्थ्य व प्रजनन विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार करता है। यह उन देशों की तुलना में एक उदार उपलब्धि है, जहां यौन शोषण या अनाचार की सबसे अधिक पीड़ादायक परिस्थितियों के बावजूद गर्भधारण के बाद से गर्भपात की अनुमति नहीं है।

एमटीपी अधिनियम, 2021 इसे तैयार व अंतिम रूप देने वालों के अंतर्ज्ञान और दूरदर्शिता को प्रमाणित करता है। बच्चों के लिए तत्परता और उनकी वांछनीयता निर्णायक रूप से माताओं, परिवारों व बच्चों; तीनों के जीवन पथ को आकार देती हैं। अवांछित गर्भधारण अप्रत्याशित रूप से माता-पिता के जीवन से जुड़े विकल्पों को कम कर देता है- विशेष रूप से माताओं के परिप्रेक्ष्य में- और उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा, जन्म लिए अवांछित बच्चों को कम अवसरों का सामना करना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, डब्ल्यूएचओ बच्चों के 'वांछित' रूप में पैदा होने की संभावना को उनकी शिक्षा में माता-पिता के अधिक निवेश से जोड़ता है। इसलिए एमटीपी अधिनियम माताओं को अवांछित गर्भधारण के भावनात्मक और वित्तीय बोझ से मुक्त करता है।

मौजूदा कानून और नीति-निर्माताओं ने बड़ी कुशलता से प्रजनन विकल्प को जीवनचक्र से जोड़ दिया है। चूंकि प्रजनन क्षमता, बच्चे को जन्म देना और बच्चे का पालन-पोषण स्पष्ट रूप से विवाह से जुड़ा हुआ है, इसलिए महिलाओं के लिए कानूनी तौर पर विवाह योग्य आयु बढ़ाने का प्रस्ताव करके, नीति-निर्माता गर्भावस्था में देरी करने वाले स्वागत योग्य परिवर्तनों की शुरुआत कर रहे हैं।

बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रयास करता है। यह विधेयक, डब्ल्यूएचओ द्वारा उद्धृत विशेषज्ञता और साक्ष्यों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 10 से 19 वर्ष की आयु की किशोर माताओं को 20 से 24 वर्ष की आयु की महिलाओं की तुलना में एक्लम्पसिया, प्यूपरल एंडोमेट्रैटिस और प्रणालीगत संक्रमण के उच्च जोखिम का खतरा होता है। ऐसी माताओं से पैदा होने वाले बच्चों को जन्म के समय कम वजन, समय से पहले प्रसव और गंभीर नवजात स्थितियों के अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है।

यह ध्यान देने योग्य है कि एनएफएचएस-4 (2014-15) से एनएफएचएस-5 (2019-21) के बीच बच्चे पैदा करने की सीमा या अंतराल के संदर्भ में परिवार नियोजन की अधूरी आवश्यकता 12.9 फीसदी से घटकर 9.4 फीसदी रह गई। हालांकि, एकल मानक पर, एनएफएचएस-5 के समय 15-19 वर्ष की आयु की लगभग 7 प्रतिशत महिलाएं पहले से ही मां थीं या गर्भवती थीं, जो एनएफएचएस-4 के 7.8 प्रतिशत से मामूली गिरावट को दर्शाती है। ऐसी युवा माताओं को दूध पिलाने की प्रथाओं और बच्चों की देखभाल के बारे में बहुत कम जानकारी होती है, जिससे बच्चों के स्टंट या वेस्टेड होने की संभावना बढ़ जाती है। एमटीपी अधिनियम, 2021 और पीसीएमए विधेयक, 2021 को मिलाकर- यदि अधिनियमित किया जाता है – तो यह कम उम्र में विवाह, जिसके परिणामस्वरूप जल्दी गर्भधारण और खराब मातृ एवं बाल स्वास्थ्य परिणाम सामने आते हैं, के दुष्चक्र को समाप्त कर सकता है।

एक नीतिगत नवाचार, जिसका श्रेय सरकार को अपेक्षाकृत बहुत कम मिला है, वह है - सरोगेसी बाज़ारों को महत्वहीन बनाना, जिसमें 'किराए पर गर्भ लेने' की अनुमति दी गयी थी। वैश्विक असमानताओं को देखते हुए, भारत सरोगेट माताओं के लिए एक आकर्षक 'बायोमार्केट' बन गया था। गरीब भारतीय महिलाओं के शरीर ग्लोबल नॉर्थ के निवासियों के लिए 'जैविक रूप से उपलब्ध' हो गए थे, जिससे मातृत्व का व्यावसायीकरण हुआ, महिलाओं को विशिष्ट वस्तु के रूप में देखा गया और उनकी प्रजनन क्षमता में कमी आई। भारत को 'बेबी फैक्ट्री' कहा जाने लगा, कई मामलों में बच्चों को छोड़ दिया गया, सरोगेट का शोषण किया गया और मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। एक ऐसा देश, जहां माताओं को सम्मान देने की लम्बी सांस्कृतिक परम्परा रही है, लापरवाह व्यावसायिक सरोगेसी की पूरी व्यवस्था सांस्कृतिक लोकाचार के विपरीत प्रतीत होती है।

इस विसंगति का जवाब देते हुए, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 ने व्यावसायिक सरोगेसी के स्थान पर नैतिक, परोपकारी सरोगेसी को पेश किया। यह अधिनियम देश में सरोगेसी का लाभ उठाने को लेकर उन जोड़ों पर प्रतिबंध लगाता है, जो भारतीय मूल के नहीं हैं। यह अधिनियम केवल प्रमाणित, चिकित्सा कारणों से स्थानीय लोगों को ही इसका लाभ उठाने की अनुमति देता है, जिनके लिए गर्भकालीन सरोगेसी की आवश्यकता मौजूद है। एमटीपी अधिनियम, सरोगेसी अधिनियम और पीसीएम (संशोधन) विधेयक, 2021 सामूहिक रूप से नारी शक्ति को नया अर्थ देते हैं।

इस सक्षम राजनीतिक-कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत, सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई हैं, जो महिलाओं द्वारा तय किए गए विकल्पों और निर्णयों का सम्मान करने के लिए मौजूद हैं। आयुष्मान भारत-जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत, प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जाता है और इसमें प्रसूति व स्त्री रोग से संबंधित पैकेजों की एक विस्तृत श्रृंखला की पेशकश की जाती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) गर्भावस्था से पहले और बाद में मजदूरी के नुकसान की आंशिक रूप से क्षतिपूर्ति करती है, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) गर्भवती महिलाओं के वित्तीय बोझ को कम करते हुए, प्रत्येक महीने के 9वें दिन गर्भवती महिलाओं को मुफ्त प्रसवपूर्व देखभाल की सुविधा प्रदान करता है।

सरकार न केवल महिलाओं के लिए प्रजनन विकल्पों के खर्च को कम करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है, बल्कि जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, लक्ष्य जैसी योजनाओं के तहत प्रसव के दौरान गुणवत्तापूर्ण व सम्मानजनक देखभाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप संस्थागत प्रसव में कई गुना वृद्धि हुई है, जो एनएफएचएस-4 में 79 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचएस-5 में लगभग 89 प्रतिशत हो गई है। राष्ट्र के लिए अंतिम पुरस्कार माताओं की लंबी उम्र है, जो मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में गिरावट से परिलक्षित होती है। मातृ मृत्यु अनुपात 2011-13 में 167 प्रति लाख जीवित जन्मों से घटकर 2019 में 103 प्रति लाख जीवित जन्म रह गया है।

वर्तमान सरकार अपनी बहुरूपी बेटियों को सर्वोच्च सम्मान देती है, जो अपने जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में न केवल प्यार करने वाली माताओं के रूप में, बल्कि ईमानदार छात्राओं, मूल्यवान कर्मचारियों और साहसी उद्यमियों के रूप में भी कार्य करती हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का आह्वान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि लड़कियों का जन्म और पालन-पोषण प्रति 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाओं के बेहतर लिंगानुपात के रूप में हो। उज्ज्वला और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से घर की महिलाओं के समय की बचत हुई; इनसे ईंधन की लकड़ी या पानी इकट्ठा करने की कड़ी मेहनत से राहत मिली, ताकि वे अन्य लाभकारी गतिविधियों में भाग ले सकें। मुद्रा योजना ने इच्छुक महिला उद्यमियों को बिना गिरवी के ऋण की सुविधा दी है और एक अन्य योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने महिलाओं के लिए सब्सिडी की उच्च मात्रा पर जोर दिया है।

पश्चिमी देश गर्भपात के अधिकारों में कटौती कर रहे हैं, जबकि भारत गर्भपात की मान्य सीमा का विस्तार कर रहा है। जहां मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में दुनिया के बाकी हिस्सों में दबे स्वर में बातचीत की जाती है, प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से इस मुद्दे को अपने संबोधन में शामिल किया, जिसे 1.3 अरब भारतीय ध्यान से सुन रहे थे। तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित करके, सरकार ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा सामना की जा रही असुरक्षा की निरंतर स्थिति को ख़त्म किया है। सरकार ने विवाह योग्य आयु को संशोधित करने का प्रस्ताव देकर पुरुषों और महिलाओं को समान व निष्पक्ष मानकों पर रखा है। वर्तमान सरकार ने नीति-निर्माण में बहुत सावधानी से कर्तव्यनिष्ठा का संचार किया है- इस आशा के साथ कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की माताओं और बेटियों के जीवन को बेहतर बनाएगी। पश्चिमी देश हालांकि पीछे हट रहे हैं, भारत दुनिया को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए एक प्रगतिशील समाज का मार्ग दिखा रहा है।

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दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का सफल समापन

Posted: 28 Jun 2022 02:21 AM PDT

दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' का सफल समापन

दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' का सफल समापन हिन्दू राष्ट्र की मांग संवैधानिक अधिकार कुछ वर्ष पूर्व तक 'हिन्दू राष्ट्र' इस शब्द की ओर तुच्छ दृष्टि से देखा जाता था; परंतु आज केवल भारत में ही नहीं, अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 'हिन्दू राष्ट्र' का उद्घोष होने लगा है । हिन्दू राष्ट्र का नारा जनसामान्य तक पहुंचाने में अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' का महत्त्वपूर्ण योगदान है । इसी अधिवेशन के माध्यम से वर्ष 2012 में भारतभर के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का संगठन कर 'हिन्दू राष्ट्र' का उद्घोष किया गया था । दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' एक प्रकार से हिन्दू राष्ट्र की विजयादशमी ही है । हिन्दुओं के दमन का वनवास समाप्त होकर आनेवाले 3 वर्षो में रामराज्यरूपी हिन्दू राष्ट्र का सूर्याेदय होगा । 12 से 18 जून 2022 की अवधि में श्रीरामनाथ देवस्थान, रामनाथी, फोंडा, गोवा में संपन्न हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन इसकी प्रतीति सिद्ध होगा । अमेरिका, हांगकांग, नेपाल, फिजी और इंग्लैंड सहित भारत के 26 राज्यों के 177 से अधिक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के 400 से अधिक प्रतिनिधि इस अधिवेशन में उपस्थित थे । अमेरिका, नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों के धर्मप्रेमी हिन्दुओं ने 'हम हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का समर्थन करते हैं', इस प्रकार के फलक हाथ में लेकर हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का समर्थन किया है । समिति के 'यू-ट्यूब' चैनल *HinduJagruti*, तथा समिति के जालस्थल www.hindujagruti.org <http://www.hindujagruti.org>* से अधिवेशन का सीधा प्रसारण किया गया । 3 लाख 91 हजार से अधिक हिन्दुओं तक 'ऑनलाइन' माध्यम से यह अधिवेशन पहुंचा ।
विशेष परिसंवादों से विविध समस्याओं पर विचारमंथन और उपाय
अधिवेशन में हिन्दू राष्ट्र के संबंध में ली जानेवाली आपत्तियों का वैचारिक स्तर पर खंडन किया गया । 'हिन्दू राष्ट्र की मांग हिन्दुओं का प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकार है । वर्ष 2025 में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने के लिए सब गठित हों', ऐसा आवाहन बीजवक्तव्य में किया गया । वर्तमान लोकतंत्र में हिन्दूहित साध्य नहीं किया जाता, अपितु हिन्दुओं का दमन और अल्पसंख्यकों की चापलूसी की जा रही है । जिहादी, वामपंथी, सेक्युलरवादी, स्तिकतावादी और मिशनरियों का हिन्दूविरोधी गठबंधन सनातन हिन्दू धर्म का दमन करने का प्रयत्न कर रहा है । इन हिन्दू विरोधियों को पराजित कर हिन्दू राष्ट्र की आवाज बुलंद करने का निश्चय इस अधिवेशन में किया गया । विध्वंसित मंदिरों का पुनर्निर्माण* : इसके साथ ही मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त कर उन्हें भक्तों को सौंपने के लिए किए जा रहे देशव्यापी अभियान को गति देने का निश्चय भी इस अधिवेशन में किया गया । अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा स्थित श्रीकृष्णजन्मभूमि पर भव्य श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की मांग भी देशभर में हो रही है । देश के अनेक मंदिर आज इस्लामी अतिक्रमण के कारण दब गए हैं । विध्वंसित मंदिरों
के पुनर्निर्माण के लिए जनमत तैयार करने सहित कानूनी स्तर पर भी संघर्ष करने का निश्चय इस अधिवेशन में किया गया । काशी विश्वनाथ मंदिर की मुक्ति के लिए कानूनी संघर्ष करनेवाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अधिवक्ता हरि शंकर जैन भी इस अधिवेशन में सम्मिलित हुए थे । अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दृढ विश्वास व्यक्त किया कि 'अब वह दिन दूर नहीं है, जब हिन्दू एकत्रित आकर काशी विश्वनाथ मंदिर में श्री विश्वनाथ की पूजा करेंगे ।'
कश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वसन
जिहादी आतंकवाद के कारण भारत में विस्थापित होकर 32 वर्ष हो चुके हैं; परंतु आज भी कश्मीरी हिन्दुओं को लक्ष्य कर उनका भीषण हत्यासत्र चल ही रहा है । आखिर कश्मीरी हिन्दुओं को न्याय कब मिलेगा ? ऐसा प्रश्न कश्मीरी हिन्दुओं की ओर से अधिवेशन में उपस्थित किया गया । 'पनून काश्मीर' नामक स्वतंत्र प्रदेश में कश्मीरी हिन्दुओं का सम्मानपूर्वक पुनर्वसन करने की मांग का अधिवेशन में सम्मिलित हिन्दुत्वनिष्ठों ने पूर्ण समर्थन किया । धर्मांतरण पर प्रतिबंध
धर्मांतरण की भीषण समस्या के संबंध में भी अधिवेशन में चर्चा की गई । धर्मांतरण की समस्या देशव्यापी होने के कारण संविधान के अनुच्छेद 25 में सुधार कर उसमें से धर्म का 'प्रचार करना' (Propagate) यह शब्द हटाने की मांग भी अधिवेशन में की गई । यह शब्द हटाने के उपरांत धर्मांतरण रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कठोर कानून बनाया जाय ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया । धर्मांधों द्वारा किए जानेवाले दंगों, आक्रमणों में देशभर के हिन्दुओं को लक्ष्य किया जा रहा है । इस पृष्ठभूमि पर अधिवेशन में उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को आत्मरक्षा के लिए तैयार रहने का आवाहन किया गया ।
हिन्दू राष्ट्र संसद :
हिन्दू राष्ट्र संसद' इस अधिवेशन की विशेषता सिद्ध हुई । जिस प्रकार जनप्रतिनिधियों की संसद है, वैसी ही धर्महित के विषय पर चर्चा करने के लिए अधिवेशन में 3 दिन धर्मप्रतिनिधियों की प्रतीकात्मक 'हिन्दू राष्ट्र संसद' आयोजित की गई थी । 'मंदिरों का सुप्रबंधन', 'हिन्दू शिक्षा प्रणाली' और 'हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का संवैधानिक मार्ग' आदि विषयों पर इन स्वतंत्र संसदों का आयोजन किया गया था । आपातकाल की अवधि में संविधान में 42 वां संशोधन कर जोडे गए 'सेक्युलर' और 'सोशलिस्ट' शब्द हटाए जाएं, कानून की प्रस्तुति भारतीय संस्कृति के अनुसार हो, भारत के उज्ज्वल भविष्य और भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए धर्माधारित गुरुकुल शिक्षा दी जाए, हिन्दुओं के मंदिर सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर भक्तों के नियंत्रण में दिए जाएं आदि प्रस्ताव इस संसद में 'जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम्' के जयघोष में पारित किए गए ।
हलाल जिहाद ग्रंथ का लोकार्पण* : अधिवेशन में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे द्वारा लिखित मराठी और हिन्दी भाषा की पुस्तक 'भारतीय अर्थव्यवस्था पर नया आक्रमण : हलाल जिहाद ?' का लोकार्पण किया गया । 'हलाल अर्थव्यवस्था' का विरोध करने के लिए आंदोलन करना निश्चित किया गया ।
* दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' में पारित हुए प्रस्ताव* : भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए, हिन्दुओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करनेवाला कानून 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' तत्काल निरस्त किया जाए तथा काशी, मथुरा, ताजमहल, भोजशाला आदि मुगल आक्रमणकारियों द्वारा हडपे गए हजारों मंदिर और भूमि हिन्दुओं को सौंपे जाएं, गोवा में 'इन्क्विजिशन' के नाम पर 250 वर्षाें तक गोवा निवासियों पर किए गए अमानवीय और क्रूर अत्याचारों के लिए ईसाइयों के धर्मगुरु पोप गोवा की जनता की सार्वजनिक क्षमा मांगें, भारत में 'एफ.एस.एस.ए.आई.'(FSSAI) और 'एफ.डी.ए.'(FDA) जैसी सरकारी संस्थाएं होते हुए धार्मिक आधार पर 'समानांतर अर्थव्यवस्था' निर्माण करनेवाले 'हलाल सर्टिफिकेशन' पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए, राष्ट्रीय स्तरपर गोहत्या प्रतिबंधक कानून बनाया जाए, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों का अन्वेषण अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और भारत शासन द्वारा किया जाए तथा वहां के अल्पसंख्यक हिन्दुओं को सुरक्षा प्रदान की जाए, नागरिकता सुधार कानून कार्यान्वित किया जाए आदि प्रस्ताव इस अधिवेशन में पारित किए गए । 
* हिन्दू राष्ट्र के लिए वर्षभर कृति कार्यक्रम* : राष्ट्र और धर्म रक्षा के विषयों पर कृति कार्यक्रम निश्चित करने के लिए इस अधिवेशन में गुटचर्चा भी की गई । इसमें सैकडों हिन्दुत्वनिष्ठ सम्मिलित हुए । आनेवाले वर्ष में हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के संबंध में समाज में जागृति लाने के लिए समानसूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में बडी मात्रा में 'हिन्दू राष्ट्र जागृति सभा', 'हिन्दू राष्ट्र जागृति आंदोलन', 'हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन', 'हिन्दू राष्ट्र कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला', 'कश्मीरी हिन्दुओं की समस्याओं पर सार्वजनिक सभा', 'हलाल जिहाद से संबंधित जनजागृति बैठक' आदि विविध उपक्रम कार्यान्वित करने का निश्चय इस अधिवेशन में किया गया ।
संक्षेप में, हिन्दुत्वनिष्ठों के अपूर्व उत्साह में संपन्न हुए दशम 'अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन' में हिन्दू राष्ट्र के लिए क्रियान्वित किए जानेवाले अभियानों को गति देने तथा विस्तार करने का निश्चय किया गया । हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना केवल राजनीतिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक है, वह रामराज्य पर आधारित है । वह साध्य करने के लिए अथक प्रयत्न करने का हिन्दुत्वनिष्ठों ने किया हुआ निश्चय, अधिवेशन के माध्यम से मिला हुआ धर्मतेज, देशभर के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का संगठन, उनमें उत्पन्न हुई धर्मबंधुत्व की भावना को इस अधिवेशन की फलश्रुति कहनी पडेगी । कालमहिमा के अनुसार हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होनेवाली ही है । इस कार्य में तन-मन-धन समर्पित करने की प्रेरणा सबको मिले, ऐसी ईश्वर के चरणों में प्रार्थना है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

सिक्किम: गंगटोक में बस दुर्घटना में रांची के 22 से अधिक छात्र घायल

Posted: 28 Jun 2022 02:06 AM PDT

सिक्किम: गंगटोक में बस दुर्घटना में रांची के 22 से अधिक छात्र घायल

गंगटोक से दीपक शर्मा की खबर 
गंगटोक : झारखंड के रांची स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज के 22 छात्र मंगलवार की सुबह गंगटोक में हुए भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए.
यह सड़क हादसा उस समय हुआ जब भ्रमण के लिए सिक्किम आए छात्र सिक्किम से रांची लौट रहे थे। छात्र तीन बसों में बंधे थे, ऐसी ही एक बस में 22-24 सवार थे और दुर्घटना का शिकार हो गए।
छात्र पश्चिम बंगाल पंजीकृत बस में यात्रा कर रहे थे, जब वे राष्ट्रीय राजमार्ग 10 के साथ गंगटोक की तलहटी में 7 मील की दूरी पर एक दुर्घटना का शिकार हो गए।
घायलों में से कई को ताडोंग के नजदीकी केंद्रीय रेफरल अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि अस्पताल पहुंचे सभी लोग घायल हैं, कुछ की हालत गंभीर है, लेकिन अधिकांश की हालत स्थिर बताई जा रही है।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

शहीदो की शहादत कभी भुलाया नहीं जा सकता :राजीव रंजन प्रसाद

Posted: 28 Jun 2022 02:00 AM PDT

शहीदो की शहादत कभी भुलाया नहीं जा सकता :राजीव रंजन प्रसाद

पटना, जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई के क्रम में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहार विधानसभा के सामने अपने छह अन्य साथियों के साथ झंडा फहराने जाते हुए जगतपति कुमार अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हो गए थे।शहीद जगतपति कुमार समेत सभी सात शहीदों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी शहादत को पूरा देश सलाम करता है।


ग्लोबल अध्यक्ष ने जीकेसी की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव पर कायस्थ रत्न रणबांकुरों और अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद करने के सिलसिले में शनिवार को आयोजित व्याख्यानमाला में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सन् 1942 में पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के दौरान भारत माता के सात सपूतों ने अपने सीने में अंग्रेजों की गोली खाकर हंसते-हंसते प्राणों की आहुति दी थी। इन्हीं सात सपूतों में से एक हैं औरंगाबाद जिले के गांव खरांटी के जगतपति कुमार।

उक्त अवसर पर प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि बिहार के वीर सपूत जगपति कुमार ने हमारे तिरंगे के सम्मान के लिये अपने प्राणों की आहुति दी। जगपति कुमार की शहादत को याद करना हम सभी का कर्तव्य है।


मुख्य अतिथि जीकेसी के ग्लोबल वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पटना में बिहार विधानसभा के सामने शहीद स्मारक आज भी जगपति कुमार की बहादुरी, वीरता तथा आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को बयां कर रहा है।


राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह बिहार- झारखंड के प्रभारी दीपक कुमार अभिषेक ने कहा कि शहीद जगपति कुमार ने हमारे देश के लिए अपना खून बहाया है। हर भारतीय उनका कर्जदार है। देश के लिए प्राण न्यौछावर करने से बढ़ कर कुछ नहीं है।


प्रदेश अध्यक्ष डा. नम्रता आनंद ने कहा कि शहीद जगतपति बचपन से ही क्रांतिकारी थे। हमेशा करो या मरो की बात करते थे।आजादी के लिए महान स्वतंत्रता सेनानियों, अमर शहीदों और देशभक्तों ने अंग्रेजी हुकूमत की अमानवीय यातनाएं सही और बलिदान दिए। जगपति कुमार की कुर्बानी को कभी नहीं भुलाना चाहिए।


व्याख्यानमाला में शहीद जगतपति कुमार के प्रपौत्र अशोक कुमार, प्रवीण आनंद और गौरव आनंद ने बताया कि खरांटी स्थित इनका पैतृक घर भी खंडहर में तब्दील हो चुका है। सरकारी लापरवाही की वजह से आज परिवार के सभी घर छोड़कर बाहर चले गए हैं। कोई सरकारी सहायता नही मिली। यहां तक कि शहीद जगतपति की सारी जमीन सरकार ने अपने कब्जे में ले रखी है, लेकिन उनके घर के उद्धार के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहा है। घर के चारों ओर घास-फूंस उगे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा यह स्थल उपेक्षित और वीरान है। राजकीय सम्मान की दृष्टि से उनकी याद में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशील श्रीवास्तव, धन्यवाद ज्ञापन धनंजय प्रसाद, संचालन शिवानी गौड़ और रश्मि सिन्हा ने किया।


अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीलेश रंजन, महिला संभाग की प्रदेश संयोजक नंदा कुमारी ने की।
कार्यक्रम में प्रेम कुमार, दीप श्रेष्ठ, अनुराग समरूप, राजेश सिन्हा, संजय सिन्हा, राजेश कुमार, नीलेश रंजन, मुकेश महान, दिवाकर कुमार वर्मा, आशुतोष बज्रेश, अशोक कुमार, प्रवीण कुमार, गौरव आनंद, मीना श्रीवास्तव, नंदा कुमारी, शिवानी गौड़, रश्मि सिन्हा, ज्योति दास, बलिराम, शिखा स्वरूप, सुशांत सिन्हा, पीयूष श्रीवास्तव, रवि सिन्हा, आराधना, रंजन, रंजना कुमारी, निशा पराशर, प्रसून श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

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मौसम और मोहब्बत

Posted: 27 Jun 2022 11:37 PM PDT

मौसम और मोहब्बत

हल्की हल्की बारिस में 
मज़ा बहुत आता है। 
जैसे जैसे गिरती है 
बदन पर पानी की बूंदे। 
अजब सी गुद गुदी 
मेहसूस होने लगती है। 
और कमल से फूल खिल 
उठते है अंदर ही अंदर।। 

मुझे ज्यादा पसंद है
चांदनी रात में निकलना। 
और इंतजार रहता है 
अपनी मेहबूब का। 
अगर साथ आ जाये 
बाग में मेहबूब जो। 
तो लगता है चाँद 
स्वयं आज साथ है।। 

हो अगर प्यार सच्चा तो
इंद्र चांदनी बिखेर देते है। 
घरा भी अपने आपको 
हरा भरा कर लेती है। 
बसुन्धरा भी फूलो की
खुशबू बिखेर देती है। 
और मोहब्बत का मसीहा 
मोहब्बत करना सिखाता है।। 

जैसे जैसे चाँद की
चाँदनी बिखरती है। 
वैसे वैसे मोहब्बत का
रंग चढ़ने लगता है। 
फिर पूनम की रात को
दोनों का मिलन होता है। 
और दो आत्माओं का 
एक ही चेहरा दिखता है।
सच में मोहब्बत का 
सही रूप ये ही होता है।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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