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Thursday, June 23, 2022

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CUET UG Exam: 15 जुलाई से 10 अगस्त तक होगी संयुक्त प्रवेश परीक्षा, शेड्यूल जारी, 24 तक दोबारा आवेदन का मौका

Posted: 22 Jun 2022 06:01 PM PDT

CUET UG Exam: 15 जुलाई से 10 अगस्त तक होगी संयुक्त प्रवेश परीक्षा, शेड्यूल जारी, 24 तक दोबारा आवेदन का मौका



एनईपी 2020 के तहत स्नातक प्रोग्राम में दाखिले की पहली संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन 15 जुलाई से 10 अगस्त तक किया जाएगा। एनटीए ने परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत स्नातक प्रोग्राम में दाखिले की पहली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी यूजी) 2022 का आयोजन 15 जुलाई से 10 अगस्त तक किया जाएगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(एनटीए) ने कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। सीयूईटी यूजी 2022 में 86 विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए 9,50,804 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया है। इसके लिए एनटीए देश में 554 परीक्षा केंद्र बना रहा है। जबकि भारत से बाहर 13 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। 


एनटीए की सीनियर डायरेक्टर एग्जाम डॉ. साधना पराशर की ओर से बुधवार देर शाम सीयूईटी यूजी 2022 को लेकर अधिसूचना जारी की गई है। इसमें लिखा है कि सीयूईटी यूजी 2022 का आयोजन भारत और विदेशों में भी किया जाएगा। कुल 86 विश्वविद्यालय इसमें शामिल हो रहे हैं। इसमें से 43 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 13 स्टेट यूनिवर्सिटी, 12 डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी और 18 निजी विश्वविद्यालय हैं। सीयूईटी यूजी 2022 की यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा 15 जुलाई, 16 जुलाई, 19 जुलाई, 20 जुलाई, 4 अगस्त, 5 अगस्त, 6 अगस्त, 7 अगस्त, 8 अगस्त और 10 अगस्त को आयोजित की जाएगी। सीयूईटी यूजी 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित होगी। 



24 तक दोबारा आवेदन का मौका

छात्रों की मांग पर एनटीए ने सीयूईटी यूजी 2022 की ऑनलाइन आवेदन विंडो दोबारा खोल दी है। इच्छुक उम्मीदवार नए ऑनलाइन आवेदन पत्र  भर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन पत्र की त्रुटियों में भी सुधार किया जा सकता है। नए उम्मीदवार और त्रुटियों में सुधार का मौका 24 जून रात 11.50 मिनट तक उपलब्ध रहेगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने और त्रुटियों में सुधार के लिए विंडो 23 जून से खुलेगी। आवेदन पत्र में सुधार के दौरान छात्र अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, अपना एड्रेस में कोई सुधार नहीं कर सकेंगे। हालांकि, यदि कोई उम्मीदवार सुधार करता है तो उसकी उसे फीस देनी होगी।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षाएं जुलाई के दूसरे सप्ताह से

Posted: 22 Jun 2022 05:53 PM PDT

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षाएं जुलाई के दूसरे सप्ताह से

परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए अध्ययन केंद्रों से विवि ने मांगे आवेदन



प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षाएं जुलाई के दूसरे सप्ताह में शुरू हो जाएंगी। विश्वविद्यालय की जून 2022 सेमेस्टर की परीक्षा में पांच हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे। कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।


मुक्त विश्वविद्यालय ने इस बार परीक्षा केंद्र निर्धारण के नियमों में बदलाव किया है। इस बार तीन साल से लगातार संचालित हो रहे अध्ययन केंद्रों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए आवेदन करने का अवसर दिया गया है। 60 छात्रों वाले अध्ययन केंद्रों को भी विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र बनाएगा। हालांकि विश्वविद्यालय ने परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय और अनुदानित कॉलेजों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है।


 अध्ययन केंद्र 30 जून तक परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा नियंत्रक पीपी दुबे ने बताया कि दूरस्थ शिक्षा पद्धति पर आधारित विश्वविद्यालय शुरू से ही कोविड- 19 प्रोटोकॉल का अनुपालन कर रहा है। इसलिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू हो रही परीक्षा में भी कोविड नियमों को ध्यान में रखा जाएगा। परीक्षा से पूर्व सभी छात्र-छात्राओं को असाइनमेंट जमा करने के लिए भी अंतिम मौका दिया गया है।

UG व PG छात्राओं को इसी सत्र से मिलेगा मातृत्व अवकाश

Posted: 22 Jun 2022 05:38 PM PDT

UG व PG छात्राओं को इसी सत्र से मिलेगा मातृत्व अवकाश

यूजीसी के पत्र पर राज्य विवि ने लिया निर्णय



प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जु भैया विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में अभी तक मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) केवल शिक्षिकाओं को ही मिलती थी। अब स्नातक (यूजी) और परास्नातक (पीजी) की छात्राओं को भी यह अवकाश मिल सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसके लिए विश्वविद्यालय को पत्र लिखा है। यह सुविधा इसी सत्र से दी जाएगी।


अभी तक पीएचडी और एमफिल जैसे कोर्स में छात्राओं को मातृत्व अवकाश दिया जाता था। नई गाइड लाइन के अनुसार अगर यूजी और पीजी में कोई शादीशुदा छात्रा गर्भवती है तो उसे भी पीएचडी और एमफिल की तरह मैटरनिटी लीव या चाइल्ड केयर लीव दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में 240 दिन की छुट्टी मिल सकेगी।


मातृत्व अवकाश में छात्राओं को हाजिरी, परीक्षा सहित सभी शैक्षणिक कार्यों से छूट रहेगी। राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में यूजी और पीजी में शादी के बाद कई महिलाएं अपनी पढ़ाई पूरी करती हैं। पढ़ाई और परीक्षा के दौरान मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव की सुविधा नहीं मिलती थी। इसकी वजह से उनके सामने पढ़ाई बीच में छोड़ने की मजबूरी रहती थी। विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देश से वे मातृत्व अवकाश के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी कर सकेंगी।


स्नातक और परास्नातक में शादीशुदा छात्राएं भी अध्ययन करती हैं। कॉलेजों में ग्रामीण क्षेत्र से अधिक छात्राएं होती हैं। इनके सामने शादी के बाद पढ़ाई पूरी करने की चुनौती रहती है। विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देश से वे मातृत्व अवकाश के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी।
-दीप्ति मिश्रा, उपकुलसचिव, राज्य विवि

बेसिक शिक्षा : निरक्षरों को पढ़ाने-लिखाने में प्रयागराज अव्वल

Posted: 22 Jun 2022 05:08 PM PDT

बेसिक शिक्षा : निरक्षरों को पढ़ाने-लिखाने में प्रयागराज अव्वल


शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को पढ़ाने-लिखाने के लिए चलाई जा रही मुहिम में प्रयागराज ने महत्वपूर्ण काम किया है। पूरे प्रदेश में प्रयागराज के बेसिक शिक्षा विभाग ने सर्वाधिक 20255 निरक्षरों को साक्षर बनाने की उपलब्धि हासिल की है। 2011 की जनगणना के अनुसार यूपी में 15 से अधिक आयु के 4.82 करोड़ लोग निरक्षर हैं।



प्रदेश के 75 जिलों में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों में सर्वाधिक निरक्षर मुरादाबाद, सीतापुर और प्रयागराज में हैं। मुरादाबाद में 14.55 लाख, सीतापुर 12.74 व प्रयागराज में 12.62 लाख निरक्षर हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 से ही पढ़ना-लिखना अभियान शुरू करने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के कारण गति नहीं मिल सकी।


2021-22 में हालात ठीक होने पर इस अभियान की ओर ध्यान दिया गया। चिह्नित निरक्षरों को शिक्षकों, शिक्षामित्रों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, एनसीसी व एनएसएस के स्वयंसेवकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों आदि की सहायता से साक्षर बनाया जा रहा है। एनसीईआरटी ने निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 120 घंटे का कोर्स तैयार किया है जो चार महीने में पूरा होता है। पढ़ाई के बाद मूल्यांकन भी होता है और तब साक्षर का प्रमाणपत्र मिलता है।


शाहजहांपुर में 8190, हापुड़ में 4560 ने पकड़ी कलम


अभियान के तहत प्रयागराज के बाद शाहजहांपुर के सर्वाधिक 8190 तो हापुड़ के 4560 निरक्षरों ने साक्षर होने की उपलब्धि हासिल की है। रायबरेली में 4410, बस्ती 3492, कानपुर देहात 2347 व मिर्जापुर में 2134 व्यक्ति साक्षर हुए।

Online Transfer Madhyamik Shiksha : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों हेतु वार्षिक स्थानांतरण नीति के अंतर्गत सत्र 2022-23 में ऑनलाइन स्थानांतरण किए जाने के संबंध में आदेश जारी।

Posted: 22 Jun 2022 05:48 AM PDT

Online Transfer Madhyamik Shiksha : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों हेतु वार्षिक स्थानांतरण नीति के अंतर्गत सत्र 2022-23 में ऑनलाइन स्थानांतरण किए जाने के संबंध में आदेश जारी।



शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

Posted: 21 Jun 2022 05:43 PM PDT

शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल



सीतापुर। प्राइमरी शिक्षा को पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिश हो रही है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी रोड़ा बनी हुई है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार जिले में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुसार करीब 9107 शिक्षकों की कमी है। इससे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों विद्यालयों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।


निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में 30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तय किया गया है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। अगर इस मानक के अनुसार शिक्षकों की विद्यालय में पोस्टिंग देखी जाए तो काफी कम है। 30 अप्रैल 2022 की छात्र संख्या के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक विद्यालयों में चार लाख 10 हजार 839 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 797 प्रधानाध्यापक व 12867 शिक्षकों की जरूरत है।


इस समय 496 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 5753 शिक्षक पढ़ाई करा रहे है। इस तरह 298 प्रधानाध्यापक व 7114 सहायक अध्यापकों की कमी है। कक्षा छह से आठ तक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो एक लाख 53 हजार 765 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 800 प्रधानाध्यापक व 4767 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। इस समय 184 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 2774 सहायक अध्यापक नौनिहालों का भविष्य संवार रहे है।इस तरह 653 प्रधानाध्यापकों की कमी बनी हुई है। 1993 शिक्षकों की अतिरिक्त रूप से जरूरत पड़ रही है। 



मानक के अनुसार विद्यालयों में शिक्षक न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग मौजूद शिक्षकों से ही काम चला रहा है। इससे विद्यालय तो खुल रहे है, लेकिन जरूरत के मुताबिक शिक्षक न होने से उनको गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।नगर क्षेत्र में शिक्षकों की बड़ी कमीबेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पोस्टिंग ग्रामीण व नगर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से की जाती है। सीतापुर में 19 विकासखंड व चार नगर क्षेत्र (सीतापुर, बिसवां, मिश्रिख व खैराबाद) शामिल है। प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक के आठ व सहायक अध्यापक के 194 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। जिसमें इस समय 18 प्रधानाध्यापक व 21 सहायक अध्यापक ही कार्यरत है। इस तरह 10 प्रधानाध्यापक व 173 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।


उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो प्रधानाध्यापक के छह व सहायक अध्यापक के 37 पदों की जरूरत है। मौजूदा समय में यहां पर एक भी प्रधानाध्यापक नहीं है। महज आठ सहायक अध्यापकों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। इस तरह छह प्रधानाध्यापक व 29 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।एक शिक्षक के पास कई विद्यालयों की जिम्मेदारीग्रामीण से लेकर नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक पद पर कई वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई है। इसकी वजह से अधिकांश विद्यालयों में इंचार्ज के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।


 नगर क्षेत्र में तो एक शिक्षक के पास दो से तीन विद्यालयों का प्रभार है। विभाग की मजबूरी है कि वह ग्रामीण इलाके के शिक्षकों को नगर क्षेत्र में तैनाती नहीं दे सकते है। इससे दिन प्रतिदिन नगर क्षेत्र की स्थिति खराब ही होती जा रही है।



शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसकी सूचना शासन को भेजी गई है। मौजूदा शिक्षकों से बेहतर तरीके से पढ़ाई करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
अजीत कुमार, बीएसए

आपदा में खेल... कोरोना काल में मदरसों में कर डालीं नियुक्तियां, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने भी गुपचुप तरीके से दी स्वीकृति

Posted: 20 Jun 2022 05:14 PM PDT

आपदा में खेल... कोरोना काल में मदरसों में कर डालीं नियुक्तियां, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने भी गुपचुप तरीके से दी स्वीकृति

जांच पूरी, सरकार को सौंपी रिपोर्ट, अध्यापकों-कर्मचारियों की हुई थीं नियुक्तियां

नियुक्तियों का ब्यौरा मांगा तो करते रहे टालमटोल, विशेष सचिवों से जांच में भर्ती का यह खेल आया सामने

बड़ा सवाल : छात्र लगातार कम हो रहे तो नियुक्तियों में जल्दबाजी क्यों


लखनऊ। कोरोना महामारी के दौरान मदरसों में की गई नियुक्तियों को लेकर खेल सामने आ रहा है। उस वक्त जब सभी स्कूल-कॉलेज बंद चल रहे थे, लॉकडाउन लगा हुआ था, मौका देखकर मदरसों में अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों की गलत तरीके से नियुक्तियां कर दी गईं। यही नहीं, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने भी गुपचुप तरीके से इन्हें स्वीकृति दे दी।


पूरे प्रकरण की अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिवों से जांच कराई गई तो भर्ती का यह खेल सामने आया। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। इसमें नियुक्तियों में खेल की बात कहकर संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई एवं उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की सिफारिश की गई है।


उप्र में 558 मदरसे ऐसे हैं जो अनुदानित हैं। इनमें शिक्षक तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों का अधिकार प्रबंधक कमेटियों को है। नियम यह है कि यहां नियुक्तियों के लिए उप्र मदरसा शिक्षा परिषद का अनुमोदन लेना पड़ता है। कोरोना के दौरान विभिन्न जिलों में मदरसों में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की गईं। वह भी तब जबकि मदरसे, स्कूल कॉलेज सब बंद चल रहे थे।


नियुक्तियां गलत :  कोरोना काल में नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए थीं। बताया गया है कि नियुक्तियां विधि विरुद्ध की गई हैं। पत्रावली का पूरा अध्ययन कर कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता हुई तो उच्च स्तरीय कमेटी से विस्तृत जांच भी कराएंगे। धर्मपाल सिंह, कैबिनेट मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग



नियुक्तियों का ब्यौरा मांगा तो करते रहे टालमटोल

लखनऊ। कोरोना महामारी के दौरान मदरसों में की गई नियुक्तियों की बाबत प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एक अप्रैल 2020 से की गई नियुक्तियों का पूरा ब्यौरा रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद से मदरसा मांगा था। पहले तो इसमें टाल मटोल की गई, पर रिमाइंडर भेजने पर सूचनाएं प्रेषित कर दी गईं। इन सभी की जांच के निर्देश दिए गए थे।


जांच में सामने आया कि आजमगढ़ मंडल में ही लगभग सौ नियुक्तियां, प्रयागराज में तीस से ज्यादा, कानपुर में 20 से ज्यादा नियुक्तियां दी गई हैं। बताया जा रहा है कि कुल तीन सौ से ज्यादा नियुक्तियां इस अवधि में की गईं। विशेष सचिवों ने अपनी रिपोर्ट में मामले की विस्तृत जांच की सिफारिश की है ।


बड़ा सवाल : छात्र लगातार कम हो रहे तो नियुक्तियों में जल्दबाजी क्यों

अहम सवाल यह भी है कि मदरसों में छात्र लगातार कम हो रहे हैं। फिर ऐसी जल्दी में नियुक्तियों की क्या आवश्यकता थी? वर्ष 2016 में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में कुल 4 लाख 22 हजार 667 विद्यार्थी रजिस्टर्ड थे। वर्ष 2017 में यह संख्या प्रकरण घटकर तीन लाख 71 हजार 52 रह गई। वर्ष 2018 में दो लाख 70 हजार 755, वर्ष 2019 में दो लाख छह हजार 337, वर्ष 2020 में एक लाख 82 हजार 259, वर्ष 2021 में एक लाख 82 हजार थे। इस वर्ष 2022 में एक लाख 63 हजार 999 छात्र ही रह गए हैं।

बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार भी होगी निगेटिव मार्किंग

Posted: 20 Jun 2022 04:43 PM PDT

बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार भी होगी निगेटिव मार्किंग



बरेली। बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार भी निगेटिव मार्किंग होगी। चार सौ अंकों की परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के दो प्रश्नपत्र होंगे। दोनों प्रश्नपज्ञों में दो सौ प्रश्न पूछे जाएंगे। हर प्रश्न दो अंक का होगा।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने यह जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है। इसके मुताबिक पहले प्रश्नपत्र में सामान्य ज्ञान भाषा से संबंधित 50-50 प्रश्न होंगे। इसी तरह दूसरे प्रश्नपत्र में सामान्य अभिरुचि परीक्षण और विषय योग्यता के 50-50 प्रश्न पूछे जाएंगे। एक प्रश्न गलत होने पर एक तिहाई अंक काटे जाएंगे। दोनों पेपर का समय रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रवेश पत्र में अंकित करेगा।



विश्वविद्यालय आवेदनों में दर्ज किए गए प्रमाण पत्र व भारांक की जांच लगभग पूरी कर चुका है। परीक्षा केंद्र भी निर्धारित हो गए हैं। अब प्रवेश पत्र जारी करने की तैयारी चल रही है। बताते हैं कि विश्वविद्यालय 25 जून को प्रवेश पत्र जारी कर देगा। ब्यूरो

रिजल्ट जारी करने के बाद हाईस्कूल और इंटर के अंकपत्र भेजने की तैयारी में जुटा UP Board

Posted: 20 Jun 2022 04:07 PM PDT

रिजल्ट जारी करने के बाद हाईस्कूल और इंटर के अंकपत्र भेजने की तैयारी में जुटा UP Board 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 हाईस्कूल और इंटर का परिणाम जारी कर दिया है। अब यूपी बोर्ड के अफसर परीक्षार्थियों के अंकपत्र उनके विद्यालय भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। एक सप्ताह के भीतर अंकपत्र कॉलेजों में क्षेत्रीय कार्यालय के जरिए पहुंच जाएंगे। इसके बाद विद्यार्थी कॉलेज से अपने अंक पत्र ले सकेंगे। 




यूपी बोर्ड की परीक्षा में इस बार कुल 47 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए। इसमें हाईस्कूल में कुल 27 लाख 81 हजार, 645 और इंटरमीडिएट में कुल 24 लाख 10 हजार 971 परीक्षार्थी शामिल हुए। इसमें हाईस्कूल में कुल 22 लाख 22 हजार 745 परीक्षार्थी और इंटर में 19 लाख 09 हजार 249 परीक्षार्थी सफल हुए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा 24 मार्च से 12 अप्रैल के बीच सूबे के 8373 परीक्षों केंद्रों पर संपन्न हुई।


इस बार विधानसभा चुनाव और कोरोना संक्रमण के चलते प्रयोगात्मक परीक्षा से पहले लिखित परीक्षा संपन्न कराई गई। इसके बाद प्रयोगात्मक परीक्षाएं दो चरणों में 23 अप्रैल से सात मई के बीच संपनन हुई। उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 अप्रैल से सात मई के बीच 131 मूल्यांकन केंद्रों पर हुआ। मूल्यांकन कार्य पूरा होने के लगभग सवा महीने बाद बोर्ड ने परिणाम जारी किया है। अब परिणाम जारी करने के बाद बोर्ड अंकपत्र को कॉलेजों को भेजने की तैयारी में जुटा है। ताकि उत्तीर्ण विद्यार्थी आगे कक्षाओं में अपना पंजीकरण करवा सकें।

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