प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- सीयूईटी यूजी 2022 में 98% छात्रों को उनके चुने हुए शहर में मिलेंगे परीक्षा केंद्र : यूजीसी अध्यक्ष
- हेडमास्टर से बुरा बर्ताव कर बुरी तरह घिरे DM, आम आदमी से लेकर IAS-IPS और नेता भी भड़के, बुरे बर्ताव के लिए डीएम को तत्काल सस्पेंड करने की मांग
- यूपी बोर्ड : विषय के चयन की मिलेगी आजादी, बोर्ड से दो बार शासन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव
- सीएम योगी के निर्देश के बाद एडेड माध्यमिक कालेजों के शिक्षकों का होगा समायोजन
| सीयूईटी यूजी 2022 में 98% छात्रों को उनके चुने हुए शहर में मिलेंगे परीक्षा केंद्र : यूजीसी अध्यक्ष Posted: 12 Jul 2022 10:19 AM PDT सीयूईटी यूजी 2022 में 98% छात्रों को उनके चुने हुए शहर में मिलेंगे परीक्षा केंद्र : यूजीसी अध्यक्ष CUET UG 2022: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) देने वाले कम से कम 98 प्रतिशत उम्मीदवारों को उनकी पसंद के शहर में परीक्षा केंद्र आवंटित किये जायेंगे। यूजीसी प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब छात्रों ने परीक्षा के लिये देर से प्रवेश कार्ड जारी किये जाने को लेकर शिकायत की है। जगदीश कुमार ने 'पीटीआई भाषा' से कहा, '' सुरक्षा कारणों एवं परीक्षा में कदाचार से बचने के लिये प्रवेश कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले जारी किए गए। छात्रों को परेशान नहीं होना चाहिए '' उनहोंने कहा, '' कम से कम 98 प्रतिशत उम्मीदवारों को उनकी पसंद के शहर में परीक्षा केंद्र मिलेंगे और जिन्हें आवंटित केंद्र उपयुक्त नहीं लगता है, वे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से सम्पर्क कर सकते हैं, जो उनके आग्रह को देखेगी।'' गौरतलब है कि साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) या सीयूईटी-यूजी का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) 15 जुलाई से 10 अगस्त तक करेगी। सीयूईटी के प्रथम संस्करण के लिये 11 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है। परीक्षा को लेकर प्रवेश कार्ड एनटीए ने सोमवार को जारी किया। कुमार ने कहा कि देश के 500 शहरों में आयोजित होने वाली परीक्षा के लिये बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया। यह एक वृहद कार्य है तथा एनटीए परीक्षा आयोजित करने वाली एक पेशेवर संस्था है, ऐसे में छात्रों को परेशान नहीं होना चाहिए। ज्ञात हो कि कुमार ने मार्च में घोषणा की थी कि 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिये सीयूईटी के अंक जरूरी होंगे, 12वीं कक्षा के अंक नहीं। केंद्रीय विश्वविद्यालय न्यूनतम पात्रता अर्हता तय कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य बोर्ड के छात्रों को नई व्यवस्था से कोई नुकसान नहीं होगा। |
| Posted: 12 Jul 2022 07:16 AM PDT हेडमास्टर से बुरा बर्ताव कर बुरी तरह घिरे DM, आम आदमी से लेकर IAS-IPS और नेता भी भड़के, बुरे बर्ताव के लिए डीएम को तत्काल सस्पेंड करने की मांग हेडमास्टर का कुर्ता पजामा पहनना DM को इतना बुरा लगा गया कि वह छात्रों के सामने ही हेडमास्टर से आपत्तिजनक भाषा में बात करने लगे. छात्रों और कैमरे के सामने ही डीएम, हेडमास्टर पर चिल्लाने भी लगे. उनकी सैलरी रोकने से लेकर सस्पेंड करने तक की बात कर दी. इसका वीडियो वायरल होने के बाद कई IAS और IPS अधिकारियों ने भी ट्वीट कर DM पर कार्रवाई की मांग की है. DM संजय कुमार सिंह ने दोहराया कि उन्होंने कुर्ते और गमछे की वजह से हेडमास्टर को डांटा. उन्होंने कहा कि उनके कुर्ते के कुछ बटन भी खुले थे. IAS ने कहा कि उन्होंने हेडमास्टर के कंधे से गमछा हटवाया भी. लेकिन उन्होंने कहा कि उनका इरादा गलत नहीं था. स्कूल में काफी खराब व्यवस्था थी. क्लासरूम में लाइट्स और फैन नहीं थे, जबकि हेडमास्टर के कमरे में लाइट और फैन लगे थे. हेडमास्टर खुद पढ़ा भी नहीं रहे थे, इन्हीं वजहों से उन्हें गुस्सा आ गया था. दरअसल, बिहार के लखीसराय जिले के डीएम संजय कुमार सिंह, कन्या प्राथमिक विद्यालय बालगुदर का निरीक्षण करने पहुंचे थे. इसी दौरान स्कूल के प्रिंसिपल निर्भय कुमार सिंह के पहनावे को देख वह भड़क गए. यहां तक कि उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को फोन मिला दिया. उन्होंने प्रिंसिपल के पहनावे को 'नेता टाइप' बताया. अब इस वीडियो को लगातार शेयर किया जा रहा है. मामले को लेकर 1985 बैच के IAS अधिकारी संजीव गुप्ता ने कहा- कोलोनियल मानसिकता के साथ ऐसा असभ्य व्यवहार करना एक सिविल सर्वेंट के लिए निंदनीय और अशोभनीय है. भारतीय पहनावे (ना कि काम) के लिए एक शिक्षक की आलोचना की जा रही है. आईआईटी कानपुर में कुछ शिक्षक और हम लोग पजामा/कुर्ता पहना करते थे. इस मामले को मैंने चीफ सेक्रेटरी तक पहुंचा दिया है. IRTS संजय कुमार ने भी मामले पर ट्वीट कर डीएम के व्यवहार की निंदा की. उन्होंने लिखा- यह ऑफिसर जैसा व्यवहार नहीं है. एक लीडर कभी भी पब्लिकली अपने टीम मेंबर को नीचा नहीं दिखाता है. उनके साथ गरिमा और सम्मान के साथ पेश आएं. निंदनीय व्यवहार. इस तरह के दुर्व्यवहार कई लोगों को अच्छा लगता है, इसलिए वे लोग अपने साथ लाइव कवरेज के लिए रिपोर्ट्स को साथ ले जाते हैं. ताकि वे लोग खुद को सख्त और समझदार दिखा सकें. IPS अरुण बोथरा ने लिखा था- क्या भारत में शिक्षकों के कुर्ता-पायजामा पहनने पर रोक है? क्या कुर्ता-पायजामा पहनने के जुर्म में शो कॉज और वेतन बंद करना उचित है? इस पर IPS अरुण ने भी अपनी तरफ से दो सवाल जोड़ दिए. उन्होंने लिखा- एक बच्चे के तौर पर आप अपने सामने शिक्षक को अपमान होते देख कैसा महसूस करेंगे? सीनियर सरकारी ऑफिसरों के बीच टीवी क्रू के साथ ऑफिशियल निरीक्षण के लिए जाने का यह कैसा ट्रेंड है? बिहार के संघर्षशील शिक्षक संघ ने वीडियो ट्वीट कर लिखा- अपमान करने की भी एक सीमा होती है. शिक्षक के जीवन को नर्क बना कर रख दिया है बिहार सरकार ने. अगर सरकार शिक्षकों का सम्मान वाकई में करती है तो इस DM पर कार्रवाई करने की जरूरत है, अन्यथा शिक्षा व्यवस्था सही होना मुश्किल है. वीडियो को दिल्ली के बीजेपी के प्रवक्ता अजय सहरावत ने भी शेयर किया है. उन्होंने लिखा- कौन हैं ये घमंडी और बदतमीज DM, जिसे हिंदुस्तानी वेशभूषा से दिक्कत हैं और नेताओं से भी. वीडियो बनाकर इस तरह से टीचर को बेइज्जत करना क्या सही है? कांग्रेस पार्टी के बिहार इकाई के अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने लिखा- उम्र में बड़े और औदे से शिक्षक को अगर एक सरकारी अधिकारी को सम्मान देने नहीं आता तो यह शर्म की बात है. और इस जनाब को यह किसने कह दिया कि "कुर्ता पजामा" सिर्फ़ जनप्रतिनिधियों का पहनावा है. पद से बड़े और व्यवहार में छोटे प्रतीत होते है डीएम साहब. उम्र में बड़े और ओहदे से छोटे ऐसे डीएम को शिक्षक को अगर एक सरकारी अधिकारी को सम्मान देने नहीं आता तो यह शर्म की बात है । और इस जनाब को यह किसने कर दिए की "कुर्ता पजामा" सिर्फ़ जनप्रतिनिधियों का पहनावा है । डीएम का एक और वीडियो भी सामने आया है. इसमें वह स्कूल के एक स्टाफ पर भड़कते दिखते हैं. वीडियो को शेयर करते हुए Educators of Bihar नाम के ट्विटर हैंडल से लिखा गया- कुर्ता पायजामा पहनने के जुर्म में वेतन बंद करने वाले डीएम साहेब पर ऑन ड्यूटी सरकारी कर्मी के साथ बेअदबी से बात करने के लिए भी करवाई होनी चाहिए.. वहीं बिहार एजुकेशन डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह ने ट्वीट कर बताया है कि काम के बदले शिक्षकों को हर हाल में सैलरी मिलनी चाहिए. उन्होंने पटना हाई कोर्ट के आदेश के तहत सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया है. उन्होंने लेटर की कॉपी ट्वीट की और लिखा- काम के बदले शिक्षकों की सैलरी ना रोकने के दिशानिर्देश. अगर कोई शिक्षक गड़बड़ी करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करें. भट्ट... चुप्प... ! हेडमास्टर को कुर्ता पैजामा में देख आगबबूला हुए DM, वायरल वीडियो देख लोग कर रहे डीएम के आपत्तिजनक व्यवहार पर कार्यवाही की मांग, देखें वीडियो और जाने पूरा मामला हेडमास्टर को कुर्ता पजामा पहने देख डीएम को गुस्सा आ गया. डीएम ने इसे जनप्रतिनिधि का पहनावा बताया. डीएम ने प्रिंसिपल की सैलरी काटने और उन्हें सस्पेंड तक करने की मांग कर दी. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग वीडियो को शेयर करते हुए डीएम हो निशाने पर ले रहे हैं. • प्रिंसिपल के पहनावे पर भड़के डीएम संजय कुमार सिंह • बिहार के लखीसराय का है वीडियो • सोशल मीडिया पर प्रिंसिपल के पक्ष में खड़े दिखे लोग नई दिल्ली : DM और हेडमास्टर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें प्रिंसिपल के पहनावे को देखकर डीएम गुस्से से भर गए. प्रिंसिपल को कुर्ता पजामा पहने देख डीएम कहते हैं- यह जनप्रतिनिधि का पहनावा है. इसके बाद डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को वहीं से फोन मिला दिया और प्रिंसिपल को सस्पेंड करने की बात करने लगे. हेडमास्टर की सैलरी भी रोकने की बात कही. डीएम कैमरे के सामने ही हेडमास्टर पर चिल्लाते हुए भट्ट... और चुप्प कहते भी दिखाई देते हैं. इतना ही नहीं, डीएम कहते हैं कि हेडमास्टर को अपनी सैलरी से ही स्कूल में लाइट्स लगवाने चाहिए. लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग डीएम के व्यवहार पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं. असल में वीडियो में डीएम छात्रों के सामने ही हेडमास्टर से आपत्तिजनक भाषा में बात करते दिखते हैं. मामला बिहार के लखीसराय जिले का है. यहां बालगुदर पंचायत के कन्या प्राथमिक विद्यालय बालगुदर का निरीक्षण करने डीएम संजय कुमार सिंह पहुंचे थे. उनके साथ स्थानीय मुखिया भी मौजूद थे. इसी दौरान स्कूल के प्रिंसिपल निर्भय कुमार सिंह पर डीएम भड़क गए. अब लोग घटना का वीडियो शेयर कर डीएम को निशाने पर ले रहे हैं. फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भी इसका वीडियो शेयर किया और लिखा- इस तथाकथित डीएम को टीचर से उनका अपमान करने के लिए माफी मंगवानी चाहिए और तुरंत उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए. सौरव पाठक नाम के एक यूजर ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया. लिखा- भारत में एक टीचर का कुर्ता पजामा पहनना भी अपराध है क्या? कुर्ता पजामा पहनने के लिए यह टीचर ' शो काज' और 'सैलेरी कट' का ऑर्डर दे रहे हैं. इंग्लिश बाबू डीएम का इस तरह से व्यवहार करना उचित है क्या? एक यूजर ने बिहार के मुख्यमंत्री को टैग करते हुए लिखा- अंग्रेजी गुलामी वाली मानसिकता भरा पड़ा है ऐसे IAS ही देश को बर्बाद कर रहे हैं. नीतीश कुमार जी आपकी जिम्मेदारी है, आप भाग नहीं सकते है. ऐसे लोग देश को समाज को नर्क बना रहे हैं. जानते हैं नौकरी तो जाएगी नहीं और इसकी ही गर्मी है. इसके अलावा भी कई और लोगों ने डीएम का वीडियो ट्वीट कर उन्हें नौकरी से निकालने की मांग की. |
| यूपी बोर्ड : विषय के चयन की मिलेगी आजादी, बोर्ड से दो बार शासन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव Posted: 12 Jul 2022 10:26 AM PDT यूपी बोर्ड : विषय के चयन की मिलेगी आजादी, बोर्ड से दो बार शासन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव ■ विषयवस्तु के चिह्नांकन को कार्यशाला संपन्न ■ बोर्ड से दो बार शासन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव प्रयागराज : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अमलीजामा पहनाने में यूपी बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं। नई नीति लागू होने के बाद माध्यमिक स्तर पर छात्र-छात्राओं को विषय चयन की आजादी मिलेगी। विज्ञान, गणित और मानविकी विषयों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को शारीरिक शिक्षा, आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स और व्यावसायिक कौशल को भी पढ़ने का मौका मिलेगा। यूपी बोर्ड ने इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इन विषयों को इस प्रकार समेकित किया जाएगा ताकि बच्चों के लिए रोचक और लाभप्रद हो। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि छात्र अपनी शिक्षा की राह और भविष्य के बारे में स्वयं निर्णय ले सकें। छात्र-छात्राओं का चतुर्दिक विकास और साल दर साल विषय और पाठ्यक्रम का विकल्प नई नीति की खासियत बताई जा रही है। यूपी बोर्ड ने स्वास्थ्य, पोषण, फिटनेस, पर्यावरण जागरूकता, कोडिंग, मशीन लर्निंग आदि से संबंधित विषयवस्तु के चिह्नांकन के लिए कार्यशाला पूरी कर ली है। अब संकलित विषयवस्तु को पाठ्यक्रम में एकीकृत करने की कार्यवाही की जाएगी। विषय चयन की सुविधा बच्चों को देने के लिए बोर्ड की ओर से 2021 और 2022 में दो बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। UPMSP UP board exam 2023 : नई शिक्षा नीति को लेकर यूपी बोर्ड की तैयारियां तेज, विषय के चयन की मिलेगी आजादी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अमलीजामा पहनाने में यूपी बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं। नई नीति लागू होने के बाद माध्यमिक स्तर पर छात्र-छात्राओं को विषय चयन की आजादी मिलेगी। विज्ञान, गणित और मानविकी विषयों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को शारीरिक शिक्षा, आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स और व्यावसायिक कौशल को भी पढ़ने का मौका मिलेगा। यूपी बोर्ड ने इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इन विषयों को इस प्रकार समेकित किया जाएगा ताकि बच्चों के लिए रोचक और लाभप्रद हो। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि छात्र अपनी शिक्षा की राह और भविष्य के बारे में स्वयं निर्णय ले सकें। छात्र-छात्राओं का चतुर्दिक विकास और साल दर साल विषय और पाठ्यक्रम का विकल्प नई नीति की खासियत बताई जा रही है। यूपी बोर्ड ने स्वास्थ्य, पोषण, फिटनेस, पर्यावरण जागरूकता, कोडिंग, मशीन लर्निंग आदि से संबंधित विषयवस्तु के चिह्नांकन के लिए कार्यशाला पूरी कर ली है। अब संकलित विषयवस्तु को पाठ्यक्रम में एकीकृत करने की कार्यवाही की जाएगी। विषय चयन की सुविधा बच्चों को देने के लिए बोर्ड की ओर से 2021 और 2022 में दो बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। |
| सीएम योगी के निर्देश के बाद एडेड माध्यमिक कालेजों के शिक्षकों का होगा समायोजन Posted: 11 Jul 2022 05:17 PM PDT सीएम योगी के निर्देश के बाद एडेड माध्यमिक कालेजों के शिक्षकों का होगा समायोजन लखनऊ : साढ़े चार हजार से अधिक अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेज में कार्यरत शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। यानी विद्यालयों की छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षक इधर से उधर होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस संबंध में निर्देश हो चुका है। विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा से तबादलों के लिए प्रस्ताव मांगा जा रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने विशेष सचिव वेदपति मिश्रा को भेजे पत्र में लिखा है कि एडेड माध्यमिक कालेजों के शिक्षकों का समायोजन करने के लिए पांच जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्देश मिले थे। उन निर्देशों को उसी दिन भेजा जा चुका है। सात जुलाई को इस संबंध में विस्तृत बैठक की जा चुकी है। |
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