क्रांतिदूत |
- ऋग्वेद वर्णित दारिद्रय नाशक श्री सूक्त हिंदी अर्थ सहित
- वर्तमान युग के मनीषी - महायोगी पायलट बाबा
- राजनीति की अंधियारी गलियों में जगमगाते दीप - वाह बिहार
- शिवपुरी नगर पालिका चुनाव में किस करबट बैठेगा ऊँट ? कौन होगा हराभरा कौन बनेगा ठूंठ ?
| ऋग्वेद वर्णित दारिद्रय नाशक श्री सूक्त हिंदी अर्थ सहित Posted: 16 Jul 2022 06:30 AM PDT
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| वर्तमान युग के मनीषी - महायोगी पायलट बाबा Posted: 15 Jul 2022 08:34 PM PDT
लेकिन उस घटना के बाद उन्होंने तय किया कि अब वह सेना की लड़ाई से दूर शांति और आध्यात्म का जीवन बिताएंगे । सेना की नौकरी छोड़ने के बाद अपने गुरु के निर्देश पर हिमालय की नंदा देवी घाटी में 16 साल तक तपस्या, ध्यान व योग किया। जब वापस लौटे तो पूरी तरह रूपांतरित हो चुके थे। लोगों ने उन्हें नाम दिया पायलट बाबा। आईये उनके जीवन पर एक विहंगम दृष्टि डालें -15 जुलाई 1936 को रोहतास जिला सासाराम में कपिल सिंह का जन्म हुआ। घर वालों ने प्यार से 'ललन' कह कर पुकारा। दार्जलिंग से स्कूली शिक्षा पूर्ण कर सन 1957 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जैविक रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की। और उसके बाद देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत कपिल सिंह ने भारतीय वायु सेना में प्रवेश किया और जैसा कि पूर्व में ही वर्णन किया अपने शौर्य व राष्ट्र प्रेम का परिचय दिया।विंग कमांडर से पायलट बाबा बनने के बाद उन्होंने आम जन के कल्याण व उन्हें सत्य के मार्ग पर ले जाने हेतु 'विश्व शांति अभियान' के तहत विभिन्न राष्ट्रों की आध्यात्मिक यात्रा की जिनमें –जापान ,अमेरिका,रूस ,युक्रेन ,ब्रिटेन ,फ्रांस व जर्मनी और अन्य यूरोपियन राष्ट्र प्रमुख है | इन देशों की यात्रा द्वारा 'योग' ,'ध्यान' और 'क्रिया योग' को माध्यम बना समूचे विश्व को भारतीय संस्कृति से एक बार पुनः परिचय कराने में पायलट बाबा की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं |भारत में भी 'दस महाविद्या' और 'महामृत्युंजय यज्ञ 'यज्ञ सहित १०८ से अधिक यज्ञ कराये। वह अब तक 100 से भी अधिक बार समाधि ले चुके हैं। इसमें सबसे लम्बी समाधि 30 दिनों की थी। जबकि 9 दिन तक जल समाधि और एक दिन तक बिना ऑक्सीजन वाले कमरे में रहे हैं। कहा जा सकता है कि यज्ञ व समाधि के माध्यम से पूरे देश को उन्होंने आध्यात्मिक उर्जा व शक्ति से मथ डाला | आज भी जब वे आयु के छियासी वर्ष पूर्ण कर चुके हैं, अस्वस्थ भी हैं, अहर्निश चिंतन व मनन के साथ मानव कल्याण और विश्व शांति हेतु निरंतर प्रयास रत हैं। प्रेम और भक्ति ही उनके अंदर वास करती है और वह अधिक से अधिक जन कल्याण के लिए संकल्प बद्ध हैं। |
| राजनीति की अंधियारी गलियों में जगमगाते दीप - वाह बिहार Posted: 14 Jul 2022 06:21 AM PDT
चुनाव अभियान के दौरान मेरी भेंट एक अनोखी शख्सियत से हुई, जिन्हें मैं शायद ही कभी भूल पाऊँ | राम पदार्थ सिंह, पूर्वी चंपारण के छोटे से ग्राम बारां जयराम के पूर्व सरपंच, शिक्षा मात्र मेट्रिक तक लेकिन हरफनमौला व्यक्तित्व | संगीत पर गहरी पकड़ सुमधुर बांसुरी बादक, योगासनों के जानकार, भोजपुरी के स्वान्तः सुखाय कवि, जहाँ भी बैठते हैं हास्य कि फुलझडीयाँ छूटती रहती हैं | मैंने बिहार के संस्मरण के रूप में उनकी एक कविता आग्रह पूर्वक नोट की -लिखनी पढ़नी एकै साथै, खिलनी सांझ विहान,तू सत्ता की कुर्सी पैग्यो हम रह गए किसान |पांच बरस मैं जे तू पहला, हम आज तलक ना पहनी,तू मैट्रिक में फ़ैल, हम बी ए करके अब का कहनी |तोहरा पीछे दस बीस डोले, हमारा के के पूछे,टाट से बन गी महल अटारी, हमरा फूस का फूसे |तोहर कार कतार में घूमे, हमर साइकिल पंचर वा,कितना भारी अंतर वा, ई कोइ जादू मंतर वा ?टी वी पर दिख्वैला बिटुआ, तोहर राम कहानी,होत सबेरे हमर लड़कुला भरे नांद मैं पानी |चूना से पोतल घर तोहर बिजली सन चम् चम् चमकेला,हमरा दवरा डिबिया टिम टिम, सांझे दम टोएला |जेठ के तांतड दोपहरिया करी हम हरवाई,तोरा ऊपर तांगड़ बिजली के फायर पंतरवा |कितना भारी अंतर वा, ई कोइ जादू मंतर वा ?बन्गलौडी साड़ी के ऊपर काश्मीर के शौल,हमरा महरी के चुनरी मैं, पिउन भई मुहाल |देश विदेश तोहरे महरी घूमे,रहके एकै साथे,हमर महरी घान्म में जरके रोज गुराहा पाते |डालडा हमरा मुहाल भई वा, तोरा भइल घी के कन्टरवा |कितना भारी अंतर वा, ई कोइ जादू मंतर वा ?सुनत रही आजादी मिली, सबहू एक समान,हर खेत का पानी मिली, हर हाथ का काम |उल्टा भइल काम सब गड़बड़, बात समझ नहीं आवे,देश के रक्षक देश के लूटे, उलटे आँख दिखावे |झूठल तोहरवा मंच बनलवा,सांचला हमरा हंटल वा |कितना भारी अंतर वा, ई कोइ जादू मंतर वा ?मुझे लगता है यह कविता गागर में सागर है। मंत्रियों के प्रति केवल ईर्ष्या ही नहीं बल्कि उनकी अपनी करतूतें भी पराजय का कारण बनती हैं। खैर मैं तो बात बिहार की कर रहा हूँ। यूं तो २९ सितम्बर २०१० से २२ अक्टोबर २०१० तक के मेरे बिहार प्रवास के दौरान बहुत से नए मित्र बने किन्तु मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया श्री सत्य नारायण बैठा ने | जनता दल यू के महादलित प्रकोष्ठ के चिरैया प्रखंड अध्यक्ष श्री बैठा इंटर तक शिक्षित हैं | लेकिन मुझे प्रभावित किया उनके आचार व्यवहार ने, उनके पठन पाठन ने | महादलित समाज के व्यक्ति किन्तु शुद्ध शाकाहारी और निर्व्यसनी | शराब तो दूर खैनी तम्बाकू से भी कोई वास्ता नहीं | जिस क्षेत्र में मैं था वहां ब्राह्मण भी मांसाहार वा मछली का प्रयोग बहुतायत से करते मुझे मिले, किन्तु श्री बैठा तो अलग ही दुनिया के जीव है | उनकी पत्नी और बच्चे भी शुद्ध शाकाहारी | ना केवल रामायण एवं गीता उनके पूजा के स्थान पर सादर स्थित है वरन स्वामी दयानंद जी का सत्यार्थ प्रकाश भी वहां है | ये केवल दिखावा नहीं था | बैठा नियमित उनका स्वाध्याय भी करते हैं और अन्य लोगों के साथ अपनी भोजपुरी भाषा में उसे शेअर भी करते हैं | संघर्ष शील और जुझारू भी है बैठा जी | मेरे सामने ही वे प्रयत्न शील थे एक यादव दबंग से एक गरीब ब्राह्मण को बचाने के लिए , जो उसकी फसल काटने के फेर में था | मैं तो उनकी सात्विकता और धार्मिक आचरण का लोहा मान गया |पता नहीं आपको ये संस्मरण रुचिकर लग रहे होंगे या नहीं, लेकिन शीर्षक में जो दीपक का वर्णन है वह तो हो गया किन्तु राजनीति की अंधेरी गली का जिक्र अभी अधूरा है। बिहार का मेरा पूरा संस्मरण सुनकर आपको समझ आ जाएगा।२९ सितम्बर २०१०, पूरे देश मैं तनाव और आंशिक दहसत | आखिर राम जन्म भूमि प्रकरण में न्यायालय का फैसला जो आने वाला था | पटना बस स्टेंड पर मोतीहारी जाने वाली बस का समय था दोपहर एक बजे , लेकिन बस में एकमात्र सवारी मैं स्वयं | वेचारे कंडक्टर इस इंतज़ार में कि सवारी कुछ और आ जाएँ तो वह आगे बढे | आखिर २ बजे तक मुजफ्फरपुर की चार सवारी और आईं और बस आगे बढी | मुजफ्फरपुर के बाद तो मैं अकेला ही यात्री रह गया मोतिहारी जाने को | आखिर रात साढ़े नौ बजे मोतिहारी पहुंचा |रात भाजपा कार्यालय में गुजारी | राधामोहनसिंह जी ने अपना आवास ही कार्यालय को दिया हुआ था | तो आज मैं सगर्व कह सकता हूँ कि मैंने एक दिन भारत सरकार के एक मंत्री जी के घर वतौर अतिथि रहने का सौभाग्य प्राप्त किया था | मध्यप्रदेश से चुनाव सहयोगी के रूप में गए कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश देने का कार्य तत्कालीन संगठन मंत्री श्री अरविन्द मेनन सम्हाल रहे थे | उन्होंने ही अगले दिन मुझे बताया कि मुझे चुनाव तक चिरैया विधानसभा क्षेत्र में रहना है | राधामोहन जी भी उस समय वहीं बैठे हुए थे | चिरैया का नाम सुनते ही वे मुस्कुरा कर बोले, ये बेचारे चुनाव तक कहाँ टिक पायेंगे, दो चार दिन रहकर वापस आ जायेंगे | जिसे संगठन ने प्रत्यासी बनाया है, वह तो हमें भी कुछ नहीं गिनता |खैर मैं इस चुनौती को स्वीकार कर 30 सितम्बर को शाम तक चिरैया पहुँच ही गया | मेरा पहला पड़ाव श्री लालबाबू प्रसाद गुप्ता के यहाँ हुआ | रात को तो दाल रोटी गृहण कर गुप्ता जी के दालान में विश्राम के नाम पर करवटें बदलीं | किन्तु सुबह का दिलकश नजारा देखकर मन प्रसन्न हो गया | जहाँ तक नजरें जाती थीं, कुहरे की चादर में लिपटे हरे भरे खेत |दूसरे दिन मेरी भेंट पहली बार भाजपा प्रत्यासी अवनीश सिंह जी से हुई | दसों उँगलियों में मोटी मोटी रत्न जटित अंगूठियाँ, एक हाथ में सोने का कड़ा, गले में भी स्वर्ण की मोटी चैन | मुझे लगा कि कम से कम आधा किलो सोने का बजन तो उनका शरीर अवश्य ही झेल रहा होगा | उनके सामने अनेक कार्यकर्ता खड़े हुए थे, मैंने स्वयं को सौभाग्यशाली माना, जब उन्होंने मुझे बैठने को कहा |दयानतदारी दिखाते हुए उन्होंने कहा कि शर्मा जी यह इलाका रणवीर सेना का है, इसलिए बेहतर होगा, कि आप अकेले कहीं न जाएँ | एक बुजुर्ग कार्यकर्ता तिवारी जी की उन्होंने ड्यूटी लगा दी कि वे मेरे साथ साए की तरह रहें | सवाल उठा कि मैं रहूँगा कहाँ ? अवनीश जी ने कहा, शर्माजी यहाँ की गुटबाजी को देखते हुए, किसी कार्यकर्ता के यहाँ रहने की राय तो मैं नहीं दूंगा | विधानसभा भले ही चिरैया है, लेकिन आप ढाका में रहकर ही चुनाव का काम सम्हालें | वहां से सम्पूर्ण विधानसभा तक आपकी पहुँच रहेगी |मुझे तो उनकी व्यवस्था माननी ही थी | तिवारी जी के साथ ढाका पहुंचा | कुछ कार्यकर्ताओं से भेंट हुई | उनकी तरफ से घरों में ही रुकने का आग्रह भी हुआ, किन्तु मैंने सविनय मना ही किया | अंततः मुझे एक पुरानी धर्मशाला में ठहरा दिया गया | धर्मशाला कुछ वर्ष पूर्व अग्निकांड का शिकार होकर उजाड़ पड़ी थी | ऊपर की मंजिल का एक कमरा मेरे लिए खोल दिया गया | दिन तो सबसे मिलते जुलते बीत गया, पर रात को जब धर्मशाला के कमरे में पहुंचा तो मालूम हुआ जैसे मैं अतिक्रामक हूँ | कमरे के मूल निवासी तो छिपकली और काक्रोच थे | किसी एक कमरे में इतने ये प्राणी, इसके पूर्व मैंने कभी नहीं देखे थे | सामाजिक जीवन का यही तो आनंद है, मानकर उसी कमरे में पूरे एक माह रहा | बिहार का वह क्षेत्र अमूमन मांसाहारी है, अतः मुझे अधिकांशतः बिस्कुट और चनों पर ही पूरा महीना गुजारना पड़ा | जब कभी कोई कार्यकर्ता भोजन हेतु बुलाता भी था, तो उस बेचारे को मेरे चक्कर में उस दिन बेस्वाद घान्सफूस खाने पड़ते थे, तो एक बार के बाद दुबारा किसी ने कभी बुलाया भी नहीं |मेरे परिश्रम से अभिभूत अवनीश सिंह जी के परिवार ने विदा देते समय पांच कपडे भेंट किये, स्वयं गृहस्वामिनी ने अपने करकमलों से परोस कर मुझे भोजन कराया | मोतीहारी तक जीप से छोड़ने गए तिवारी जी ने भी अश्रुपूरित नयनों से मुझे विदाई दी | मोतीहारी में एक बार फिर राधामोहन जी से भेंट हुई | उन्हें मेरे अनुभव सुनकर आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता हुई |मैं तो शिवपुरी लौट आया, बाद में ज्ञात हुआ कि अवनीश सिंह लगभग 15 हजार वोटों से विजई हुए | उनका धन्यवाद का फोन भी आया | हालांकि वे बाद में भाजपा छोड़कर जनता दल यू में शामिल हो गए और लोकसभा चुनाव लड़कर परास्त हुए | |
| शिवपुरी नगर पालिका चुनाव में किस करबट बैठेगा ऊँट ? कौन होगा हराभरा कौन बनेगा ठूंठ ? Posted: 13 Jul 2022 10:18 PM PDT
लगभग आठ वर्ष बाद चुनाव हुए, किन्तु इसके बाद भी आमजनता में चुनाव को लेकर कोई उत्साह नजर नहीं आया। जिले में सबसे कम मतदान शिवपुरी नगर पालिका के लिए ही हुआ। इसका कारण भी साफ़ है। शिवपुरी की जनता कांग्रेस को तो पसंद ही नहीं करती, यह पिछले लोकसभा चुनाव में स्पष्ट हो चुका है। रहा सवाल भाजपा का, तो भाजपा में टिकिट बांटने वाले वरिष्ठ राजनेताओं की पुरजोर कोशिश यह रही कि पार्षद उनके पट्ठे बनें। कोई ऐसा व्यक्ति चुनकर न आ पाए जो भविष्य में उनसे आगे निकल जाए। अतः जन प्रतिनिधि बनने योग्य कार्यकर्ताओं को टिकिट ही नहीं दिए गए। संगठन के पदाधिकारी बनकर तो पहले ही बड़े नेताओं के पट्ठे विराजमान हैं। जनता सब समझती है। उसने भी ठेंगा दिखा दिया। कोई उत्साह नहीं। खुदी हुई सडकों से बेजार और गंदगी से लबालब भरी हुई नालियों की गंध सहती जनता में कोई उत्साह जगे भी तो कैसे ? कोई अचम्भा नहीं कि दोनों ही राजनैतिक दलों की तुलना में निर्दलीय प्रत्यासी ज्यादा संख्या में चुनकर आते दिखाई दें। क्रांतिदूत के सर्वे अनुसार ३९ में से १६ वार्डों में निर्दलीय या तो जीतने की स्थिति में हैं या हारजीत के परिणाम को प्रभावित कर रहे हैं। प्रस्तुत तालिका में प्रत्येक वार्ड की तस्वीर स्पष्ट करने का प्रयास है – कांग्रेस भाजपा निर्दलीय १ राजकुमार पाल अमरदीप शर्मा गोपाल गौड़ २ श्रीमती निर्मला सेन श्रीमती अरुणा धाकड़ रेखा परिहार ३ श्रीमती विद्यारानी कुशवाह श्रीमती नीतू दुबे ४ संजय कुमार गुप्ता सुरेंद्र कुमार गोयल नीरज गुप्ता ५ नवीन शर्मा ओमप्रकाश जैन दिनेश गर्ग व आप प्रत्याशी मयंक सेन ६ श्रीमती मोनिका बिरथरे श्रीमती सोनम मित्तल श्वेता अग्रवाल ७ सुश्री इंदु जैन सुरेश कुशवाह अरविंद ठाकुर ८ मुकेश दीक्षित प्रदीप शर्मा भारतेन्दु गौतम, अनिल कुशवाह ९ श्रीमती पीताम्बरा चौहान श्रीमती ऋतू जैन १० श्रीमती बबिता शर्मा श्रीमती प्रतिभा शर्मा ११ भूपेंद्र सिंह सिकरवार श्रीमती नीलम बघेल हरेंद्र रानू रघुवंशी १२ हरभजन धाकड़ श्रीमती सरोज धाकड़ मनोज शर्मा १३ श्रीमती रानी जाटव श्रीमती मीना शाक्य १४ राजेंद्र जाटव सुधीर आर्य १५ श्रीमती ममता धाकड़ अरुण पंडित १६ मक्खन आदिवासी लालजीत आदिवासी १७ रामा यादव राजा यादव १८ श्रीमती लक्ष्मी राठौर श्रीमती रीना १९ रामसिंह यादव २० राजकुमार शाक्य विजय बिंदास रेखा परिहार २१ मोहसिन खान पदम चौकसे राजू गुर्जर २२ श्रीमती कल्याणी शर्मा श्रीमती मोनिका राठौर २३ जुबैर खान श्रीमती राजकुमारी परिहार २४ श्रीमती निशात सुल्ताना श्रीमती कुसुम यादव २५ श्रीमती ममता शर्मा सुश्री गायत्री शर्मा २६ श्रीमती तुलसी कुशवाह श्रीमती सरोज व्यास २७ श्रीमती पूनम जैन श्रीमती अनीता भार्गव श्रीमती सुमन बाथम २८ कृष्णकांत खंडेलवाल ताराचंद राठौर दीपेश फड़नीस २९ श्रीमती लता बाथम श्रीमती मीना मुकेश बाथम ३० कमलकिशन शाक्य श्रीमती वैजयंती ३१ श्रीमती संगीता चतुर्वेदी श्रीमती मीना पंकज शर्मा ३२ श्रीमती गोमती जाटव श्रीमती पूजा खटीक ३३ श्रीमती शबनम खान श्रीमती रबीना इस्माईल खान ३४ श्रीमती शशि शर्मा श्रीमती बन्दना अशोक अग्रवाल ३५ महेंद्र चन्दौरिया कमल किशोर वासू खटीक ३६ महेश सिंह गुर्जर श्रीमती पारुल प्रदीप शर्मा श्याम परिहार व अतुल शुक्ला ३७ आकाश यादव विवेक अग्रवाल गौरव सिंघल ३८ बलवीर सिंह राजपूत वेदांत सविता भोपाल सिंह दांगी ३९ श्रीमती राजकुमारी जाटव श्रीमती गीता सोलंकी |
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